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हाईकोर्ट में पेश सरकारी रिपोर्ट से हुई एमकेपी में 45 लाख के गबन की पुष्टि

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नवीन समाचार, नैनीताल, 20 मार्च 2020। उत्तराखंड हाईकोर्ट की मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति रमेश रंगनाथन व न्यायमूर्ति न्यायाधीश आरसी खुल्बे की खंडपीठ के समक्ष शुक्रवार को देहरादून के एमकेपी कॉलेज यानी महादेवी कन्या पाठशाला में किए गए 45 लाख के गबन मामले में राज्य सरकार की ओर से रिपोर्ट प्रस्‍तुत की, जिसमें पुष्टि हुई है कि एमकेपी के प्रधानाचार्य और तत्कालीन सचिव द्वारा घोटाला किया गया है। कोर्ट ने सरकार से 25 मार्च तक इस मामले में की गई कार्यवाही की विस्तृत रिपोर्ट पेश करने को कहा है

उल्लेखनीय है कि एमकेपी की पूर्व छात्रा सोनिया बेनीवाल की हाईकोर्ट में दायर जनहित याचिका में कहा गया है कि एमकेपी में विश्विद्यालय अनुदान आयोग द्वारा छात्राओं की शिक्षा में सहूलियत के लिए जारी की गई 45 लाख रुपए की राशि का गबन किया गया है। 2012-2013 के सत्र में इस पैसे का इस्तेमाल एप्पल के महंगे उपकरण खरीदने में किया गया और ऐसे कई उपकरण 2019 में किये गये परीक्षण में पाए ही नहीं गए। खरीद कानून के अनुसार टेंडर न करते हुए केवल कोटेशन के आधार पर की गई। एक जगह आर्डर की तिथि के बाद का कोटेशन लगाया गया। किसी जगह बिल से अधिक का भुगतान किया गया और किसी जगह बिल से कम भुगतान किया गया। इतना ही नहीं ज़्यादा वालों से पैसे वापिस लेने के कोई प्रयास नहीं किया गया और न कम पैसे वाले ने कभी पूर्ण बिल की मांग की। राज्य सरकार द्वारा कराए ऑडिट में सरासर गलत पाया गया और एमकेपी के डॉ सूद और जितेंद्र नेगी से वसूली की बात की गई। सीएजी से भी इस प्रकरण की जांच कराई गई जिसमें कहा गया कि सभी खरीददारी शक के घेरे में हैं। इस विषय में 2016-2017 में एफआईआर भी दर्ज हुई लेकिन मामले को दबाया रखा गया। 2019 जनवरी में शासन के स्थलीय निरक्षण के दौरान भी 768000 की सामग्री पाई ही नहीं गई। इस वजह से यूजीसी ने एमकेपी को अपने अगले पंचवर्षीय योजना में शून्‍य रुपए दिए, जिससे छात्राओं की शिक्षा की स्थिति बद से बदतर होती जा रही है।

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-मृतक के नाम पर भी शौचालय बनाये बिना भुगतान ले लिया गया
नवीन समाचार, नैनीताल, 17 मार्च 2020। उत्तराखंड  हाईकोर्ट की खंडपीठ ने हरिद्वार जिले के इमरती ग्राम सभा में ग्रामप्रधान द्वारा किए गए घोटाले के मामले में दायर जनहित याचिका पर दोनों पक्षों को सुनने के बाद कोर्ट ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है। मामले की सुनवाई मुख्य न्यायधीश रमेश रंगनाथन व न्यायमूर्ति आरसी खुल्बे की खंडपीठ में हुई।
मामले के अनुसार हरिद्वार निवासी मो. नावेद ने जनहित याचिका दायर कर कहा है कि हरिद्वार के इमरती नारशन ग्राम में ग्रामप्रधान द्वारा शौचालय निर्माण सहित पंचायत के विकास कार्यों में करीब 15 लाख का घोटाला किया गया है और अपात्र लोगों को सरकारी योजनाओं का लाभ पहुचाया है। यहाँ तक कि एक मृतक के नाम पर भी शौचालय बनाये बिना भुगतान ले लिया गया। इसकी पूर्व में जिलाधिकारी द्वारा जांच की गई जिसमे ग्रामप्रधान दोषी पाते हुए प्रधान को नोटिस जारी किया गया था लेकिन उसपर कोई कार्यवाही नही की गई। याचिकाकर्ता ने मांग की थी उक्त घोटाले की एसआईटी जांच कराई जाए और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्यवाही की जाए।

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नवीन  समाचार, नैनीताल, 11 मार्च 2020। उत्तराखंड हाईकोर्ट ने रुद्रपुर धान मिल से कोटद्वार स्टेट पूल डिपो में भेजे गए धान मामले में हुए घोटाले के खिलाफ दायर जनहित याचिका पर बुधवार को सुनवाई की। कोर्ट ने सरकार से तीन सप्ताह में जवाब दाखिल करने को कहा है।

वरिष्ठ न्यायाधीश न्यायमूर्ति रवि मलिमथ व न्यायमूर्ति सुधांशु धूलिया की खंडपीठ में सहारनपुर निवासी अवनीश जैन की जनहित याचिका पर सुनवाई हुई। याचिका में कहा गया है कि ऊधमसिंह नगर की राइस मिल से कोटद्वार स्टेट पूल डिपो में धान भेजने के बहाने लाखों का घोटाला किया गया है। पूर्व में अपर सचिव द्वारा करायी गई जांच में प्रथम दृष्टया प्रकरण में गम्भीर अनियमितता पाई गई थी, लेकिन अभी तक कोई कार्यवाही नही की गई। याचिकाकर्ता का यह भी कहना है उनके द्वारा सूचना का अधिकार अधिनियम के तहत मांगी गई आरटीआई से यह भी खुलासा हुआ है, जिन वाहनों से धान भेजा गया वो वाहन नम्बर दुपहिया वाहनों के है। याचिकाकर्ता ने धान घोटाले की उच्च स्तरीय जांच कराने की मांग की है।

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पुलिस की गिरफ्त में आरोपित।

नवीन समाचार, रुद्रपुर, 9 मार्च 2020। ऊधमसिंह नगर पुलिस ने वर्ष 2018 में प्रदेश में एलटी के सहायक अध्यापक पद की लिखित परीक्षा के दौरान हुये भर्ती घोटाले का खुलासा करने का दावा करते हुये नौ आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है। जबकि चार पुलिस के हाथों से बच निकलने में कामयाब हो गए हैं।
एसपी सिटी देवेन्द्र पींचा ने बताया कि 19 जुलाई 2019 में उत्तराखंड अधीनस्थ चयन सेवा आयोग के अनुसचिव राजन मैठाणी द्वारा थाना रायपुर देहरादून में रिपोर्ट दर्ज कराई थी कि सहायक अध्यापक एलटी की लिखित परीक्षा की ओएमआर शीट की स्कैंनिंग के दौरान जिला ऊधमसिंह नगर में 21 अभ्यर्थियों के द्वारा सुनियोजित षडयंत के तहत छद्म अभ्यर्थी के माध्यम से परीक्षा दिये जाने और उक्त अभ्यर्थियों द्वारा आवेदन पत्र भरते समय ई मेल के कालम में एक ही ईमेल का प्रयोग किया गया। विवेचना के लिये एसआईटी का गठन किया गया था। जांच रायपुर से जिला ऊधम सिंह नगर को स्थानातंरण की गई। इस मामले में शामिल आरोपियों में 9 को उनके घरों से गिरफ्तार कर लिया। जबकि चार-विजयवीर सिंह, मीना राम, मोहम्मद जावेदुल्लाह और रिंकू कुमार भागने में सफल रहे। पकड़े गये आरोपियों में यूपी के जिला मुरादाबाद व अमरोहा के निवासी तथा कई सरकारी अध्यापक व एक पुलिस का फायरमैन भी है। उन्हें जेल भेजने की कार्रवाई की जा रही है। टीम में देहरादून के सीओ शेखर सुयाल, निरीक्षक राकेश गुंसाई, एसआई जितेन्द्र कुमार, मनमोहन सिंह, राहुल कापड़ी समेत एसओजी टीम शामिल रहे।

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-उत्तराखंड हाईकोर्ट ने पूर्व विधानसभा अध्यक्ष हरबंस कपूर के बेटे अमित कपूर की गिरफ्तारी पर रोक लगाने से किया इनकार
पूर्व विधानसभा अध्यक्ष हरबंस कपूर के बेटे अमित कपूर के लिए इमेज नतीजे"नवीन समाचार, नैनीताल, 21 जनवरी 2020। उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने प्रदेश के बहुचर्चित छात्रवृत्ति घोटाले के मामले में पूर्व विधानसभा अध्यक्ष हरबंस कपूर के बेटे अमित कपूर की गिरफ्तारी पर रोक लगाने से इनकार कर दिया है। न्यायमूर्ति आरसी खुल्बे की एकलपीठ ने इस मामले में सरकार को 11 फरवरी तक जवाब दाखिल करने के निर्देश दिए हैं।

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मामले के अनुसार पूर्व विधानसभा अध्यक्ष हरबंस कपूर के बेटे अमित कपूर ने हाईकोर्ट में अपनी गिरफ्तारी पर रोक लगाने के लिए याचिका दायर की थी। याचिका में कहा था कि एसआईटी ने छात्रवृत्ति घोटाले में बतौर आरोपी उनके खिलाफ देहरादून के सहसपुर थाने में मामला दर्ज किया है। एसआईटी ने अमित कपूर पर आरोप लगाया है कि उन्होंने छात्रों के फर्जी प्रवेश दिखाकर छात्रवृत्ति की धनराशि को अपने संस्थान के खाते में डलवाया है।

यह भी पढ़ें : सात साल से डाला जा रहा था कुपोषित बच्चों, गर्भवती महिलाओं व किशोरियों की थाली में डाला, एक की सेवा समाप्त..

नवीन समाचार, रुद्रपुर, 24 दिसंबर 2019। कुपोषित बच्चों, गर्भवती महिलाओं व किशोरियों को सही पोषण देने के लिए दिए जाने वाले टेक होम राशन (टीएचआर) की रकम हड़पने का मामला प्रकाश मंे आया है। मामले में जिला मुख्यालय में ट्रांजिट कैंप में आंगनबाड़ी केंद्र संचालित करने वाली महिला अल्पना रस्तोगी के खिलाफ धोखाधड़ी और गबन का मामला दर्ज कराया गया है, और महिला एवं बाल विकास विभाग ने आंगनबाड़ी कार्यकत्री की सेवा समाप्त कर जांच बैठा दी है। महिला पर आरोप है कि उसने टीएचआर खरीद के लिए मिली रकम का भुगतान निजी खातों में कराकर हड़प लिया। बताया गया है कि वार्ड नंबर दो के आंगनबाड़ी केंद्र संख्या 12 में बीते सात साल से मासूमों के हिस्से की रकम का गबन हो रहा था। शिकायत विभाग में पहुंचने के बाद सुपरवाइजर गायत्री आर्या ने जांच शुरू की तो मामला सही पाया गया। जांच रिपोर्ट पर सीडीपीओ रमा रावत ने कार्रवाई करते हुए आंगनबाड़ी कार्यकर्ता की सेवा समाप्त कर दी।

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यह भी पढ़ें : उत्तराखंड में मृतकों की उम्र 130 साल बनाकर उनका ‘कल्याण’ भी कर रहा प्रदेश का ‘घोटाला’ विभाग

-समाज कल्याण विभाग के रिकॉर्ड में प्रदेश में 100 से 130 साल के हजारों पेंशनर
-पेंशन पोर्टल पर सामने आई समाज कल्याण के पेंशनरों की चौंकाने वाली जानकारी,
-100 से 130 आयुवर्ग में इतनी बड़ी संख्या संदेह के घेरे में, पिथौरागढ़ में 1957 तो बागेश्वर में शून्य है ऐसे पेंशनरों की संख्या
-पेंशन पोर्टल पर सामने आई समाज कल्याण के पेंशनरों की चौंकाने वाली जानकारी
नवीन समाचार, देहरादून, 20 दिसंबर 2019। जापान के ओसाका निवासी 115 वर्षीय महिला मिसाको ओकावा को दुनिया की सबसे उम्रदराज जीवित व्यक्ति माना जाता है, लेकिन उत्तराखंड के घोटाला विभाग ने प्रदेश के दशकों पूर्व मर चुके सैकड़ों लोगों को कागजों में जिंदा रखकर उनकी उम्र 100 से 130 वर्ष कर विश्व रिकॉर्ड से भी कहीं आगे बढ़ा दी है, ताकि उनकी पेंशन खुद खाई जा सके। समाज कल्याण विभाग 6444 ऐसे लोगों को पेंशन का भुगतान कर रहा है, जिनकी आयु 100 से लेकर 130 साल के बीच है। समाज कल्याण विभाग की आईटी सेल की नोडल अधिकारी ने सभी जिला समाज कल्याण अधिकारियों को एक पत्र लिखा है। इसमें यह जानकारी मिल रही है। राज्य स्तरीय पेंशन पोर्टल पर लाभार्थियों की जन्मतिथि के आधार पर गणना की गई तो यह जानकारी सामने आयी कि प्रदेश में समाज कल्याण विभाग ऐसे 6444 लोगों को पेंशन दे रहा है। नोडल अधिकारी हेमलता पांडेय ने लिखा है कि इस प्रकार के पेंशनरों की जनपदवार आख्या में देखा गया तो भिन्नता पायी गयी। स्थिति यह है कि समाज कल्याण विभाग के रिकार्ड के अनुसार जहां पिथौरागढ़ में 100 से 130 वर्ष आयु के 1957 पेंशनर दिखाए जा रहे हैं वहीं पड़ोसी बागेश्वर जनपद में इतनी उम्र का एक भी व्यक्ति नहीं है। इसी तरह चंपावत जनपद में ऐसे लोगों की संख्या 603 है। दिलचस्प बात यह है कि टिहरी गढ़वाल में इस आयु वर्ग के लोगों की संख्या 106 है उससे सटे उत्तरकाशी में सिर्फ दो लोग हैं। संख्या में इतना अंतर ही इन आंकड़ों पर संदेह कर रहा है। वहीं सौ से अधिक आयुवर्ग के लोगों की इतनी बड़ी संख्या भी सवालों के घेरे में है। हेमलता पांडेय ने लिखा है कि इस तरह की भिन्नताओं को देखते हुए जांच की जानी चाहिए। जिला समाज कल्याण अधिकारियों को निर्देश दिये गये हैं कि रैंडम सैम्पलिंग के आधार पर इसकी जांच की जाए। उल्लेखनीय है कि कैग रिपोर्ट में इस बात का खुलासा हुआ है कि समाज कल्याण विभाग मृतकों को भी पेंशन देता रहा है। 100 से 130 आयुवर्ग के पेंशनरों की संख्या इतनी अधिक होने से समाज कल्याण विभाग एक बार फिर से संदेह के घेरे में आ गया है।

यह भी पढ़ें : कैग की रिपोर्ट में बेपर्दा हुआ उत्तराखंड का ‘घोटाला विभाग’ ! साढ़े 6 साल तक मुर्दों को पेंशन बांटी, खजाने को लगाया 87 करोड़ का चूना, 901 साल के भी बुजुर्ग बताए

नवीन समाचार, देहरादून, 12 दिसंबर 2019। भारत के नियंत्रक एवं महालेखापरीक्षक (कैग) ने उत्तराखंड के इन दिनों बहुचर्चित 500 करोड़ के छात्रवृत्ति घोटाले के बाद ‘घोटाला विभाग’ भी कहे जाने लगे समाज कल्याण विभाग की वृद्धावस्था पेंशन योजना में करोड़ों रुपये की वित्तीय गड़बड़ी उजागर की है। कैग ने पाया कि योजना की चयन प्रक्रिया खामियों के चलते विभाग ने पिथौरागढ़, चंपावत और ऊधमसिंह नगर में 74 मृतकों को एक माह से लेकर साढ़े छह साल तक भेजी जाती रही। इससे विभाग को 10.35 लाख रुपये की वित्तीय हानि हुई। अल्मोड़ा, देहरादून, हरिद्वार, पिथौरागढ़ व यूएसनगर में 1147 मामलों में पति और पत्नी को 4.18 करोड़ रुपये की पेंशन बांट दी गई। गलत रिपोर्ट पेश करने पर सरकारी खजाने को 87 करोड़ का चूना लग गया।

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वहीं राष्ट्रीय सामाजिक सहायता कार्यक्रम (एनएसएपी) के तहत 2015 से 2018 के बीच 11हजार से ज्यादा पेंशन धारकों को तय सीमा से ज्यादा पेंशन भी डाली गई. कई पेंशन धारकों को दोहरी पेंशन दी गई। वहीं, उन्हें भी पेंशन दी गई जो पात्र ही नहीं थे, जबकि कई लोग ऐसे रहे जिनकी मासिक आय पहले से ही अच्छी है उन पर भी समाज कल्याण विभाग मेहरबान रहा। 6184 ऐसे लोगों को पेंशन बांट दी गई, जो बीपीएल की श्रेणी में नहीं थे। इससे विभाग को 7.25 करोड़ की चपत लगी। 614 प्रकरणों में विभाग ने 17 लाख रुपये अधिक भुगतान किया, जबकि 85 लाभार्थियों को डबल पेंशन देकर 21 लाख रुपये की वित्तीय हानि की। इसके अलावा वर्ष 2015-16 से 2017-18 के दौरान सरकार ने 7,65,599 लाभार्थियों के लिए 235.08 करोड रुपए की मांग की। इसके सापेक्ष उसे 180.48 करोड़ रुपये मिले। लेकिन विभाग ने 6,46,687 लाभार्थियों को 268.37 करोड़ वितरित किए। इस प्रकार गलत आंकलन के चलते राज्य सरकार पर 87.89 करोड़ रुपये का अतिरिक्त बोझ पड़ा। ऐसा 33.29 करोड़ रुपये केंद्र से कम मांग के कारण हुआ। इसके अलावा विभाग में पेंशन भुगतान के लिए 12.36 करोड़ रुपये की धनराशि दी गई थी। ये धनराशि न तो बांटी गई न सरकार को समर्पित की गई। इसमें राज्यांश 11.08 करोड़ रुपये और केंद्राश 1.28 रुपये था। कैग को विभाग ने जवाब नहीं दिया कि पांच जिला कोषागारों में यह धनराशि क्यों पड़ी रही।
इसके अलावा कैग ने विभाग के राष्ट्रीय सूचना केंद्र के सहयोग से बनाए गए ईएसपीएएन सॉफ्टवेयर में डेटाबेस की गंभीर खामियां उजागर की। कैग ने पाया कि आयु कालम में 901 वर्ष तक की आयु को देखा गया। 4000 रुपये से अधिक की राशि के इनपुट को रोकने के लिए इनपुट कंट्रोल की कमी थी। मोबाइल नंबर बीपीएल डेटाबेस से लिंक, प्रणाली में एक हजार तक प्रति व्यक्ति पेंशन सीमित करने का कोई प्रावधान नहीं था। पुत्र की मासिक आय व पुत्र व्यवसाय कालम में शून्य है, जबकि यह पेंशन की पात्रता का अहम मानक है।

सरकार की सफाई, दोषियों पर होगी कार्रवाई

मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिहं रावत ने कैग की इस रिपोर्ट के आने के बाद अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि अगर इसमें कोई वित्तीय अनिमियता जानबूझकर की गई है, तो उन पर कार्रवाई की जाएगी. मुख्यमंत्री ने कहा कि वे खुद इसको देखेंगे और दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी। वहीं यदि यह रिपोर्ट तैयार करने में जानबूझकर गलती की होगी तो भी बड़े से बड़े अधिकारी को नहीं बख्शा जाएगा।

यह भी पढ़ें : 16 करोड़ के समाज कल्याण छात्रवृत्ति घोटाले के संयुक्त निदेशक को भी हाईकोर्ट से मिली जमानत

नवीन समाचार, नैनीताल, 10 दिसंबर 2019। उत्तराखंड उच्च न्यायालय की न्यायमूर्ति रमेश चंद खुल्बे की एकलपीठ ने छात्रवृति घोटाले में 16 करोड़ रुपये के घोटाले के आरोप में एक नवम्बर 2019 से जेल में बंद मुख्य आरोपी तत्कालीन समाज कल्याण अधिकारी व वर्तमान समाज कल्याण विभाग के संयुक्त निदेशक गीतराम नौटियाल की जमानत मंजूर कर ली है। याची के अधिवक्ता का कहना था कि सरकार ने 2006 व 2009 शासनादेश के आधार पर उनको 2012 में छात्रवृत्ति देने को कहा था। उसी के आधार पर उन्होंने छात्रवृत्ति आवंटित की और कभी भी सरकारी धन का उपयोग अपने व्यग्तिगत हित के लिए नही किया। छात्रवृत्ति का जो रुपया आया था उनके द्वारा सम्बन्धित संस्थानों को भुगतान किया गया। कोर्ट ने पूर्व में ही सह अभियुक्त अनुराग शंखधर सहित कई अन्य की जमानत दी गयी थी इसी को आधार मानकर कोर्ट ने गीतराम नौटियाल की जमानत मंजूर कर ली।

यह भी पढ़ें : घोटाले के पूरे 20 लाख जमा कराने के बाद हाईकोर्ट ने दी घोटाले के आरोपितों को जमानत

-छात्रवृत्ति घोटाले में पूरी राशि जमा कराने के बाद मोनाड यूनिवर्सिटी के प्रबंधक सहित चार को मिली जमानत
-आरोपितों ने जमा कराया 20 लाख 63 हजार 9 सौ रुपये का बैंक ड्राफ्ट
नवीन समाचार, नैनीताल, 6 दिसंबर 2019। उत्तराखंड उच्च न्यायालय की न्यायमूर्ति आरसी खुल्बे की एकलपीठ ने प्रदेश के बहुचर्चित छात्रवृत्ति घोटाले में लिप्त मोनाड यूनिवर्सिटी हापुड़ के प्रबंधक सहित तीन अन्य लोगो को सशर्त जमानत मंजूर कर ली है। पीठ ने जमानत के लिए पहले छात्रवृत्ति के 20 लाख 63 हजार 9 सौ रुपये का बैंक ड्राफ्ट समाज कल्याण विभाग नैनीताल के नाम पर जमा कराने की शर्त रखी और धनराशि जमा करने के बाद चारों आरोपितों की जमानत मंजूर कर ली।
मामले के अनुसार 26 सितम्बर 2019 को भीमताल थाने में मोनाड यूनिवर्सिटी हापुड़ के प्रंबधक व तीन अन्य लोगो के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया था। जांच में पाया गया कि इनके द्वारा यूनिवर्सिटी में 28 स्थानीय छात्रों को प्रवेश देने के नाम पर उनके प्रमाण पत्र लेकर उनके नाम पर छात्रवृत्ति के लिए आवेदन किया गया। प्रंबधक सहित तीन अन्य लोगो ने कुल 20 लाख 63 हजार 9 सौ रुपये का घोटाला किया। पीठ ने मामले को सुनने के बाद पिछली तिथि को आरोपितो से पूरा पैसा जमा करने को कहा था। आज आरोपियो की ओर से गबन किया हुआ 20 लाख 63 हजार 9 सौ रुपया समाज कल्याण विभाग के नाम जमा किया गया। इस आधार पर पीठ ने चारो आरोपितो की जमानत मंजूर कर ली।

यह भी पढ़ें : छात्रवृत्ति घोटाले में 20 लाख हड़पने वाले चार विश्वविद्यालय संस्थापकों की जमानत अर्जी खारिज..

-मोनार्ड विवि के चार संस्थापकों पर 20 लाख रुपए से अधिक हड़पकर गलत तरीके से इस्तेमाल करने का आरोप
नवीन समाचार, नैनीताल, 23 नवंबर 2019। प्रभारी जिला जज-प्रथम अपर सत्र न्यायधीश विनोद कुमार की अदालत ने प्रदेश के बहुचर्चित छात्रवृत्ति घोटाले के मामले में 20 लाख रुपए से अधिक धनराशि को गलत तरीके से हड़पने के आरोप में मोनार्ड विवि के चार आरोपित संस्थापक सदस्यो की जमानत अर्जी खारिज कर दी है।

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मामले में अभियोजन पक्ष की ओर से पैरवी करते हुए जिला शासकीय अधिवक्ता फौजदारी सुशील कुमार शर्मा ने न्यायालय को बताया कि मोनार्ड विवि के खाता संख्या 33110100002014 को संचालित करने के लिए रजिस्ट्रार कर्नल डीपी सिंह, शशांक जैन एवं रमेश अग्रवाल को मोनार्ड एजुकेशन सोसायटी ने नियुक्त किया था। इन तीनों के हस्ताक्षर से ही मोनार्ड विवि के खाते से समाज कल्याण विभाग नैनीताल से अनुसूचित जाति के छात्रों की पढ़ाई के लिए मिले 20 लाख 63 हजार 900 रुपए पंजाब नेशनल बैंक के दूसरे खाते में डालकर मोनार्ड विवि द्वारा लिये गए लोन को चुकाने के लिए नियमविरुद्ध इस्तेमाल किये गये। मामले में गिरफ्तार मोनार्ड विवि के चार संस्थापक सदस्य-आनंद प्रकाश गर्ग, अनिल कपूर, शशांक जैन एवं रमेश अग्रवाल का हित लाभ है। इसलिए न्यायालय ने चारों की जमानत अर्जी खारिज कर दी।

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-छात्रवृत्ति घोटाला के मुख्य आरोपित नौटियाल को सर्वोच्च न्यायालय से नहीं मिली कोई राहत
-सात दिन के भीतर करना होगा आत्म समर्पण, कानून के अनुसार ही होगी जमानत पर कार्रवाई
नवीन समाचार, नैनीताल, 25 अक्तूबर 2019। छात्रवृत्ति घोटाले के मुख्य आरोपित गीता राम नौटियाल को सर्वोच्च न्यायालय से कोई राहत नहीं मिली है। सर्वोच्च न्यायालय ने नौटियाल की विशेष अनुमति याचिका को खारिज कर दिया है। साथ ही यह भी साफ कर दिया है कि उच्च न्यायालय द्वारा उसके विरुद्ध पारित आदेश पर सर्वोच्च न्यायालय में डाली गयी उसकी याचिका से कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा। नौटियाल को सात दिन के भीतर आत्म समर्पण करना होगा, और यदि वह जमानत के लिए कोई आवेदन करता है तो उस पर भी कानून के अनुसार ही कार्रवाई होगी। मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति इंदिरा बनर्जी एवं न्यायमूर्ति एमआर शाह की अदालत में हुई।
उल्लेखनीय है कि गत 18 अक्तूबर को उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने समाज कल्याण विभाग के 500 करोड़ से अधिक के छात्रवृत्ति घोटाले के मामले में मुख्य आरोपी गीता राम नौटियाल की गिरफ्तारी पर रोक लगाने के लिए दायर याचिका को खारिज कर दिया था। सर्वोच्च न्यायालय के आदेश के बाद अब एसआईटी कभी भी नौटियाल को गिरफ्तार कर सकती है, अथवा उसे आत्मसमर्पण करना होगा। ज्ञातव्य है कि इस मामले में गठित एसआईटी गीताराम नौटियाल के खिलाफ जांच कर रही है। एसआईटी ने कोर्ट में मामले की गोपनीय रिपोर्ट भी पेश की थी। इसमें नौटियाल के खिलाफ पर्याप्त सबूत थे। एसआईटी की ओर से कहा गया था कि नौटियाल जांच में सहयोग नहीं कर रहे हैं और गिरफ्तारी से बचने के लिए लगातार लोकेशन बदल रहे हैं। यह भी उल्लेखनीय है कि नौटियाल ने गिरफ्तारी से बचने के लिए हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में पहले भी याचिकाएं दायर की थीं और दोनों अदालतों ने उसकी याचिकाएं खारिज कर दी थी। इस बीच एसआईटी ने गीताराम नौटियाल पर मुकदमा दर्ज किया। गीताराम नौटियाल इसे उत्पीड़न बताते हुए एससी-एसटी आयोग भी गए। आयोग ने नौटियाल पर कार्रवाई नहीं करने के आदेश दिए। आयोग के इस आदेश को भी हाईकोर्ट में चुनौती दी गई थी। हाईकोर्ट ने सुनवाई के बाद आयोग की ओर से गिरफ्तारी पर रोक के आदेश को निरस्त कर दिया था और नौटियाल पर जुर्माना भी लगाया था।

यह भी पढ़ें : समाज कल्याण विभाग द्वारा 271 मृतकों को 40 लाख से अधिक की पेंशन बांटने का मामला उजागर…

नवीन समाचार, रुद्रपुर, 5 अप्रैल 2019। उत्तराखंड के ऊधमसिंह नगर जिले में समाज कल्याण विभाग द्वारा मृत्यु उपरांत भी 271 पेंशनरों को पेंशन बांटने का सनसनीखेज मामला प्रकाश में आया है। शासन स्तर पर कराये गये सोशल ऑडिट सर्वे में इस अंधेरगर्दी का खुलासा हुआ। इसके बाद ऐसे 271 खातों से अब तक 40 लाख 21 हजार 754 रुपये वापस लिये जा चुके हैं।
उल्लेखनीय है की जिले के सभी ब्लॉकों में पेंशनधारकों के सत्यापन का दायित्व सहायक समाज कल्याण अधिकारियों पर होता है। विभागीय सूत्रों के अनुसार किसी पेंशन योजना में लाभार्थी के सत्यापन और मौत होने पर जानकारी देने का दायित्व इन्हीं पर था। किन्तु विभागीय अधिकारी कह रहे हैं कि सत्यापन के लिये राजस्व विभाग को पत्र लिखे गये थे। जब तक पेंशनर का मृत्यु प्रमाणपत्र प्रस्तुत नहीं किया जा सकता, पेंशन नहीं रोकी जाती। सर्वे में कुछ पेंशन लाभार्थियों के खातों में मौत के बाद भी 24 हजार से 50 हजार तक की रकम आती रही, गनीमत रही कि खातों से उनके परिजनों ने नहीं निकाली। सर्वे रिपोर्ट में सवाल उठाया गया है कि संबंधित को वास्तव में पेंशन की जरूरत थी भी या नहीं? संभव है कि गलत तरीके से पेंशन का लाभ लेने के लिये इन लोगों ने गलत आय प्रमाणपत्र बनवाये थे। उल्लेखनीय है प्रमाणपत्र राजस्व या संबंधित ग्रामसभा से जारी होते हैं। ऐसे में गलत प्रमाण पत्र देने वाले भी जांच के दायरे में आ गए हैं। वृद्धावस्था पेंशन बैंक खातों के सत्यापन को लेकर भी प्रशासन, समाज कल्याण और बैंक अफसरों के बीच बैठकें होती रहती हैं। सर्वे रिपोर्ट में साफ हुआ है कि जिले में कई पेंशनरों के खाते कई साल से संचालित नहीं हो रहे थे। इसके बावजूद बैंकों की ओर से ऐसी कोई जानकारी विभाग को क्यों नहीं दी गयी ? इस सम्बन्ध में जिला समाज कल्याण अधिकारी नवीन भारती ने कहा कि उन्होंने कुछ समय पहले ही पद संभाला है। इसलिये पहले क्या हुआ, इसकी उन्हें जानकारी नहीं है। मृत पेंशनरों के संबंध में सूचना ग्रामसभा या सहायक समाज कल्याण अधिकारियों के स्तर पर दी जाती है। पेंशनधारकों का सत्यापन किया जा रहा है। (साभार : हिंदुस्तान)

यह भी पढ़ें : 500 करोड़ के इस घोटाले में हाई कोर्ट ने कहा, क्यों न सीबीआई से जांच कराई जाये

नवीन समाचार, नैनीताल, 5 अप्रैल 2019। उत्तराखंड उच्च न्यायालय की मुख्य न्यायधीश रमेश रंगनाथन व न्यायमूर्ति आरसी खुल्बे की खंडपीठ ने समाज कल्याण विभाग में करीब 500 करोड़ रूपये के छात्रवृत्ति घोटला मामले की सुनवाई करते हुए शुक्रवार को कहा कि क्यों न इस मामले की जांच सीबीआई से कराई जाये, क्योंकि इस मामले के तार उत्तराखंड सहित कई अन्य राज्यो से जुड़े होने की आशंका है। इसके साथ ही खंडपीठ ने मामले की अगली सुनवाई के लिए 22 अप्रैल की तिथि नियत कर दी है। सुनवाई के दौरान खंडपीठ को बताया गया कि एसआईटी की जांच में स्पष्ट रूप से प्राइवेट स्कूलों के छात्रों और कई स्कूलों में ऐसे छात्रांे को भी छात्रवृत्ति देने की बात प्रकाश में आई है, जिनकी स्कूल में उपस्थिति 50 फीसद से कम रही।
मामले के अनुसार देहरादून निवासी राज्य आंदोलनकारी रविंद्र जुगरान व अन्य ने कोर्ट में जनहित याचिका दायर कर कहा है कि समाज कल्याण विभाग द्वारा 2003 से अब तक अनुसूचित जाति व जनजाति के छात्रों का छात्रवृत्ति का पैसा नहीं दिया गया, जिससे स्पष्ट होता है कि 2003 से अब तक विभाग द्वारा करोड़ों रूपये का घोटाला किया गया है। जबकि 2017 में इसकी जांच के लिए पूर्व मुख्यमंत्री द्वारा गठित एसआईटी को 3 माह के भीतर जांच पूरी करने को भी कहा गया था, परंतु इस पर आगे की कोई कार्यवाही नही हो सकी। इसके साथ ही याचिकाकर्ता का यह भी कहना है कि इस मामले में सीबीआई जांच की जानी चाहिए। पूर्व में खंडपीठ ने पुरानी एसआईटी टीम के अध्यक्ष टीसी मंजुनाथ से ही मामले की जांच कराने के आदेश दिए थे। जांच के दौरान सरकार ने उनका ट्रांसफर कर दिया था जिस पर कोर्ट ने रोक लगा दी थी। इस मामले में रुड़की के प्रतिष्ठित स्कूलों के एमडी आदि भी गिरफ्तार हो चुके हैं।

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नवीन समाचार, रूडकी, 12 फरवरी 2019।  छात्रवृत्ति घोटाले की जांच में जुटी एसआईटी ने रुड़की स्थित इंस्टीट्यूट ऑफ प्रोफेशनल स्टडीज (आईपीएस) के एमडी व एसोसिएट डायरेक्टर अंकुर शर्मा पुत्र दीन दयाल शर्मा निवासी ईदगाह, प्रकाशनगर कैंट देहरादून को गिरफ्तार कर लिया है। आरोपी के खिलाफ सिडकुल थाने में गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज करते हुए करोड़ों की छात्रवृत्ति हड़पने का आरोप लगाया गया है। उल्लेखनीय है कि इस मामले में एक दिन पूर्व ही उच्च न्यायालय सीबीआई जाँच कराने का इशारा कर चुका है।  

मालूम हो कि प्रदेश के बहुचर्चित समाज कल्याण विभाग से करोड़ों रुपये की धनराशि का गबन किए जाने से संबंधित प्रकरण की जांच मंजूनाथ टीसी पुलिस अधीक्षक अपराध हरिद्वार की अध्यक्षता में गठित एसआईटी कर रही है। एसआईटी की जांच में 1 दिसंबर 2018 को सिडकुल में मुकदमा दर्ज कराया गया था। जिसकी विवेचना कमल कुमार लुण्ठी कर रहे हैं। विवेचना के दौरान यह बात सामने आई कि जिला समाज कल्याण अधिकारी हरिद्वार ने रुड़की स्थित इंस्टीट्यूट ऑफ प्रोफेशनल स्टडीज को वर्ष 2014-15 व वर्ष 2015-16 में अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति के 2032 छात्र छात्राओं को 6,28,94,750 करोड़ की छात्रवृत्ति दी गई थी। जांच में यह बात सामने आई कि अधिकांश छात्र छात्राओं ने उक्त शैक्षणिक संस्थान में शिक्षा ही ग्रहण नहीं की। इतना ही नहीं छात्र छात्राओं का पंजीकरण भी संबंधित परिषद-विश्वविद्यालय में नहीं था। ऑन लाइन बैंक खातों में भेजी गई धनराशि अधिकांश एक ही बैंक शाखा में भेजी गई और अधिकांश कथित छात्र छात्राओं को संस्थान के मोबाइल नंबर भी एक पाए गए। बैंक खातों में छात्रवृत्ति की धनराशि पहुंचते ही धनराशि को संस्थान के बैंक खाते में स्थानांतरित करा दिया गया। इस मामले में संस्थान के एमडी व एसोसिएट डायरेक्टर संस्थान का अभिलेख उपलब्ध कराने को कहा गया, जो उन्होंने उपलब्ध नहीं कराए। उक्त संस्थान ने पूरी योजना के तहत छात्रवृत्ति की रकम हड़प ली। जिसके बाद अंकुर शर्मा को गिरफ्तार कर उनके खिलाफ मुकदमा दर्ज कर आरोपी को गिरफ्तार कर कोर्ट मे पेश रिमांड पर लिया है। जबकि विवेक शर्मा नाम का एक आरोपी फरार चल रहा है।

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छात्रवृत्ति घोटाले में मयंक नौटियाल का मामला, पिता की आय चार लाख से ज्यादा होने के बावजूद कुछ हजारों में दिखाई थी आय, कोर्ट ने सरकार से एक हफ्ते में जवाब मांगा
नवीन समाचार, नैनीताल, 15 जनवरी 2019। उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने समाज कल्याण विभाग में हुए 100 करोड़ के बताये जा रहे छात्रवृत्ति घोटाले के एक आरोपी मयंक नौटियाल की गिरफ्तारी पर रोक लगा दी है। इसके साथ ही उच्च न्यायालय ने शिकायतकर्ता और सरकार को एक हफ्ते के भीतर जवाब दाखिल करने का आदेश दिया है।
उल्लेखनीय है कि मयंक नौटियाल ने उत्तराखंड उच्च न्यायालय में याचिका दाखिल कर एसआईटी की 11 जनवरी की दर्ज एफआईआर निरस्त करने और गिरफ्तारी पर रोक लगाने को लेकर याचिका दायर की थी। मालूम हो कि राज्य में छात्रवृत्ति में लाखों के घोटाले में एसआईटी ने मयंक नौटियाल के खिलाफ डोईवाला थाने में एफआईआर दर्ज की है। मयंक पर आरोप है कि उसने 2013-14 में गलत प्रमाण पत्र लगाकर छात्रवृत्ति के लिए आवेदन किया था। इन प्रमाण पत्रों में मयंक ने अपने पिता की आय 3500, 5000 और 6500 रुपए दर्शायी थी जबकि उसके पिता ने उसी वित्त वर्ष में चार लाख से ज्यादा का आयकर जमा किया था और उसके घर में कई गाड़ियां भी खरीदी गई थीं।

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नवीन समाचार, नैनीताल, 6 दिसंबर  2018। उत्तराखंड उच्च न्यायालय  ने अनुसूचित जाति व जनजाति छात्रों की छात्रवृत्ति में घोटाले के आरोपों को गंभीरता से लिया है। मुख्य न्यायधीश रमेश रंगनाथन व न्यायमूर्ति आरसी खुल्बे की खण्डपीठ ने इस मामले में सुनवाई करते हुए सरकार से अगले बुधवार तक रिपोर्ट कोर्ट में पेश कर स्थिति साफ करने के निर्देश दिये हैं। उल्लेखनीय राज्य आंदोलनकारी रविन्द्र जुगरान ने जनहित याचिका दायर कर कहा है कि समाज कल्याण विभाग द्वारा 2003 से अब तक अनुसूचित जाति व जनजाति के छात्रों का छात्रवृत्ति का पैसा नहीं दिया गया, जिससे स्पष्ट होता है कि 2003 से अब तक विभाग द्वारा करोड़ों रूपये का घोटाला किया गया है । 2017 में इसकी जांच के लिए मुख्यमन्त्री द्वारा एसआईटी गठित की गयी थी और तीन माह के भीतर जांच पूरी करने को भी कहा था परन्तु इस पर आगे की कोई कार्यवाही नही हो सकी । याचिकाकर्ता का यह भी कहना है कि इस मामले में सीबीआई जांच की जानी चाहिए । मामले को सुनने के बाद खण्डपीठ ने सरकार से बुधवार तक स्थिति साफ करते हुए रिपोर्ट पेश करने को कहा है।

यह भी पढ़ें : पता है, उत्तराखंड के एक थाने में एक सप्ताह में लिखी गई देश की सबसे लंबी FIR….

नवीन समाचार, काशीपुर, 21 सितंबर 2019। उत्तराखंड के ऊधमसिंहनगर जिले की काशीपुर कोतवाली की कटोराताल पुलिस चौकी में देश की सबसे बड़ी एफआईआर लिखी गई है। पुलिस सूत्रों के अनुसार इस 58 पेज की इस एक एफआईआर को लिखने में सात दिन का समय लगा हैं। इसे 14 सितंबर से लिखना प्रारंभ किया गया था और इसे लिखने का कार्य 21 सितंबर की रात्रि को पूरा किया गया।यह एफआईआर राज्य में चल रहे अटल आयुष्मान स्वास्थ्य योजना में किए गए घोटाले की है। इस एफआईआर के जरिये काशीपुर के एमपी मेमोरियल हॉस्पिटल के संचालक डा. संतोष श्रीवास्तव व हॉस्पिटल कर्मचारियों के खिलाफ धोखाधड़ी का मुकदमा दर्ज किया गया है।
उल्लेखनीय है कि उत्तराखंड अटल आयुष्मान स्वास्थ्य योजना के राज्य स्वास्थ्य अधिकरण के अधिशासी अधिकारी
 धनेश चंद्र की ओर से काशीपुर के दो निजी अस्पताल संचालकों के खिलाफ एसएसपी को पुलिस को दो तहरीरें सौंपी गई थीं, जो करीब एक हफ्ते पहले कोतवाली पहुंचीं। इसमें से एक तहरीर 64 पृष्ठ की और दूसरी तहरीर करीब 24 पृष्ठों की है। कोतवाली में एफआईआर दर्ज करने वाले सॉफ्टवेयर की क्षमता दस हजार शब्दों से अधिक नहीं है। इसलिए तहरीरों में अधिक विवरण होने के कारण ऑनलाइन एफआईआर दर्ज नहीं हो सकती थी, इसलिए इन्हें लिखकर दर्ज किया जा रहा है। हिंदी और अंग्रेजी भाषा में भेजी गई इन दोनों एफआईआर लिखने में थाने के मुहर्रिरों के पसीने छूट रहे हैं।
मालूम हो कि स्वास्थ्य विभाग की टीम ने अटल आयुष्मान योजना के तहत योजना के लिए प्रयोग में लाये जाने वाले भारत सरकार के सॉफ्टवेयर के द्वारा काशीपुर के रामनगर रोड स्थित एमपी अस्पताल और तहसील रोड स्थित देवकीनंदन अस्पताल में भारी अनियमितताएं पकड़ी थीं। इसके बाद हुई जांच में दोनों अस्पतालों के संचालकों की तरफ से नियम विरुद्ध रोगियों के फर्जी उपचार बिलों का क्लेम वसूलने का मामला पकड़ में आया था। एमपी अस्पताल में रोगियों के डिस्चार्ज होने के बाद भी मरीज कई-कई दिनों तक अस्पताल में भर्ती दिखाए गए। आईसीयू में भी क्षमता से अधिक रोगियों का उपचार दर्शाया गया। डायलिसिस केस एमबीबीएस डॉक्टर की ओर से किया जाना बताया गया और वो भी अस्पताल की क्षमता से कई गुना ज्यादा। जांच के तथ्यों के अनुसार कई प्रकरणों में बिना इलाज किए ही क्लेम प्राप्त कर लिया गया, जिसकी मरीज को भनक तक नहीं है।

यह भी पढ़ें : 191 परिवारों के 607 लोगों का 11 वर्षों से राशन अकेले निगल रहा है ऊधमसिंह नगर का मुन्ना, अब पड़ेगा उगलना….

नवीन समाचार, नैनीताल, 1 अगस्त 2019। उत्तराखंड के जसपुर के मनोरथपुर व भोगपुर में सरकारी सस्ते गल्ले की दुकान का स्वामी मुन्ने खां वर्ष 2008 से यानी पिछले 11 वर्षों से ग्रामीणों के 191 फर्जी राशन कार्ड बनाकर उनमें दर्ज में 607 यूनिटों के हिस्से के सरकारी सस्ते गल्ले के राशन को खुद खा जा रहा था। इस घोटाले की शिकायत उत्तराखंड उच्च न्यायालय में जनहित याचिका के जरिये की गयी है। इस पर सुनवाई करते हुए मुख्य न्यायधीश रमेश रंगनाथन व न्यायमूर्ति आलोक कुमार वर्मा की खंडपीठ ने सरकार से एक सप्ताह में जवाब पेश करने को कहा है।
याचिका में बताया गया है कि 191 में से 45 मुस्लिम राशन कार्ड धारकांे का निवास स्थान ग्राम भोगपुर में दर्शाया गया है जबकि भोगपुर में एक भी मुस्लिम परिवार निवास नही करता है। याची ने इस बाबत जिला अधिकारी ऊधम सिंह नगर को भी प्रार्थना पत्र दिया था। जिला अधिकारी द्वारा बीडीओ से कराई गयी जाँच में 191 राशन कार्ड फर्जी पाये गए।

यह भी पढ़ें : उत्तराखंड : इस ‘घोटाला विभाग’ में फिर करोड़ों का घोटाला उजागर

नवीन समाचार, देहरादून, 12 मई 2019। तमाम घोटालों के कारण ‘घोटाला विभाग’ के रूप में कुख्यात समाज कल्याण विभाग की योजनाओं में फिर करोड़ों की गड़बड़ी पकड़ में आई है। वित्त विभाग के स्वीकृत धनराशि के इस्तेमाल के ऑडिट में पता चला कि हरिद्वार, देहरादून और ऊधमसिंह नगर जिलों में कहीं बगैर टेंडर के लाखों की खरीद की गई तो कहीं भवन निर्माण के लिए लाखों रुपये सालों तक विभाग दबाए रहा और बाद में वो धनराशि शासन को लौटा दी गई। जनजातीय छात्रों के अध्ययन के लिए बनाए गए आश्रम पद्धति के स्कूलों में अनुसूचित जाति के छात्रों को दाखिला दे दिया गया। इसके लिए शासन से अनुमति लेने की भी जरूरत महसूस नहीं की गई। ऑडिट ने इन सब को घोर वित्तीय अनियमितता माना है। सचिव वित्त अमित सिंह नेगी ने समाज कल्याण विभाग को ऑडिट रिपोर्ट भेजकर इस पर कार्रवाई का ब्योरा मांगा है।

बगैर टेंडर खरीदे कृत्रिम अंग

ऊधमसिंह नगर के जिला समाज कल्याण अधिकारी कार्यालय ने वर्ष 2017-18 के दौरान दिव्यांग कल्याण योजना के तहत 5.35 लाख रुपये के कृत्रिम अंग बिना टेंडर के खरीद लिए। कोटेशन के आधार पर मैसर्स हरिओम साइकिल मार्ट आगरा से ये खरीद कर अधिप्राप्ति नियमावली का उल्लंघन किया गया।

छह साल दबाए रखे 76.92 लाख
ऊधमसिंह नगर में विभाग ने डॉ. भीमराव आंबेडकर बहुउद्देश्यीय भवन निर्माण योजना की 76.92 लाख रुपये की धनराशि को छह साल तक दबाए रखा और बगैर इस्तेमाल किए उसे शासन को लौटा दिया। ऑडिट ने इसे घोर वित्तीय अनियमितता माना है।

खाते में अवरुद्ध रखे लाखों रुपये
ऑडिट में यह तथ्य भी पकड़ में आया कि एक योजना को शुरू नहीं किया जा सका और उसका 33.20 लाख रुपये चालू खाते में अवरुद्ध पड़ा था। अटल आवास योजना के तहत 3.52 लाख रुपये की धनराशि पात्र लाभार्थियों के खाते में भेजने के बजाय उसे बैंक खातों में रखा गया। विभिन्न योजनाओं का 78.01 लाख रुपये भी अनावश्यक कार्यालय स्तर पर बैंक खातों में अवरुद्ध रखा गया था।

मृतकों को भी बांट दी पेंशन
ऑडिट में यह अनियमितता भी उजागर हुई कि ऊधमसिंह जिला समाज कल्याण अधिकारी कार्यालय में ऐसे लाभार्थियों को भी वृद्धावस्था पेंशन का भुगतान कर दिया गया, जो जीवित नहीं थे।

एसटी छात्रों के विद्यालय में एसी के छात्र
ऑडिट के दौरान जिला समाज कल्याण अधिकारी के कार्यालय में यह गड़बड़ी भी पकड़ में आई कि सरकार ने अनुसूचित जनजाति के छात्रों के चकराता के पोखरी में जो आश्रम पद्धति के उच्च माध्यमिक बालिका विद्यालय बनाया था, उसमें अनुसूचित जाति के छात्रों को दाखिला दे दिया। इसके लिए शासन से अनुमति नहीं ली गई। ऑडिट ने माना कि उन पर 26.21 लाख रुपये का अनुचित व्यय किया गया है। ठीक ऐसा ही मामला कालसी और त्यूनी स्थित राजकीय आश्रम पद्धति के उच्च माध्यमिक स्कूलों का भी है, जहां क्रमश: 22.80 लाख और 27.79 लाख रुपये की धनराशि एससी छात्रों पर व्यय की गई, जबकि ये विद्यालय एसटी छात्रों के लिए बना है।

बगैर टेंडर के दिया भोजन का ठेका, बिजली पानी की कटौती भी नहीं 
ऑडिट ने पाया कि ऊधम सिंह नगर में वर्ष 2017-18 के दौरान राजकीय आश्रम पद्धति विद्यालय विडौरा में मैसर्स मैट्रिक्स एनवायरमेंटल श्यामपुर को भोजन का ठेका बिना टेंडर प्रक्रिया के दे दिया गया। इसके एवज में उसे 49.34 लाख रुपये का भुगतान भी कर दिया गया। लेकिन भोजन बनाने के लिए उसने स्कूल की बिजली और पानी का इस्तेमाल तोे किया, लेकिन भुगतान करते हुए इसकी कटौती नहीं की गई।

बिना स्वीकृति शिक्षकों की तैनाती, 92 लाख भुगतान
कालसी स्थित राजकीय आश्रम पद्धति के विद्यालय में वर्ष 2017-18 के ऑडिट में यह भी पकड़ में आया कि वहां बिना स्वीकृत पद के छह शिक्षक तैनात कर दिए गए, जिनके वेतन व अन्य मदों पर 92 लाख रुपये का अनियमित भुगतान हुआ। बिना निविदा के आरसी कंस्ट्रक्शन को भोजन आपूर्ति का ठेका दे दिया गया और उसको 33.68 लाख का अनियमित भुगतान हुआ।

ये अनियमितता भी पकड़ी
– रुद्रपुर आश्रम पद्धति के स्कूल के अनुसेवक को सातवें वेतन आयोग के तहत हुआ अधिक भुगतान।
– रुद्रपुर जनपद में 2008-09 से 2017-18 तक दिव्यांग लाभार्थियों को दुकान बनाने के लिए जो ऋण बांटा गया, उसकी 4.28 लाख की वसूली नहीं हुई।
– वृद्धजनों की योजनाओं का प्रचार प्रसार करने के लिए चार लाख की राशि खर्च नहीं की गई।
– आश्रम पद्धति के स्कूल लांगा पोखरी में पेयजल लाइन की मरस्मत पर 6.32 लाख खर्च किए, लेकिन कार्य पूरा नहीं हुआ।

पिछली कांग्रेस सरकार के एक घोटाले में 10 अधिकारियों से करीब डेढ़ करोड़ की वसूली के आदेश

नवीन समाचार, देहरादून, 21 दिसंबर 2018। पिछली कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में वर्ष 2008 से 2013 के बीच स्वास्थ्य विभाग में हुए टैक्सी बिल घोटाले में दोषी 10 अधिकारियों से करीब डेढ़ करोड़ रुपये की वसूली की जाएगी। इस हेतु उत्तराखंड राजभवन ने अनुमति दे दी है। शुक्रवार (आज) स्वास्थ्य विभाग की ओर से भी दोषी अधिकारियों से वसूली करने के आदेश जारी हो सकते हैं। उल्लेखनीय है कि इस मामले में राज्य के 13 जिलों के 13 में से 12 सीएमओ एवं सीएमएस स्तर के डा. आरएस असवाल, डॉ.जीसी नौटियाल, डॉ.एमपी अग्रवाल, डा. वीके गैरोला, डॉ.आरके पंत, डॉ.दीपा शर्मा, डॉ.मीनू, एसडी सकलानी, राकेश सिन्हा और वाईएस राणा को दोषी पाया गया है। साथ ही दो पूर्व मुख्यमंत्रियों डा. रमेश पोखरियाल ‘निशंक’ एवं विजय बहुगुणा के पांच निजी सचिव दोषी पाए गए थे। अलबत्ता अभी निजी सचिव सजा से बचे हुए हैं।
उल्लेखनीय है कि इस घोटाले में पहले ही राज्य लोक सेवा आयोग ने दोषी अधिकारियों के खिलाफ वसूली की मंजूरी दे दी थी। जबकि इधर राजभवन ने भी इस कार्रवाई की अनुमति दे दी है। प्रदेश के स्वास्थ्य सचिव नितेश झा का कहना है कि टैक्सी बिल घोटाले में दोषी अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई करने के संबंध में विभाग की ओर से भी आदेश जारी किए जाएंगे।

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-स्वतंत्रता दिवस यानी राष्ट्रीय पर्व के छुट्टी के दिन किया गया था 20 लाख का भुगतान, उच्च न्यायालय ने सरकार ने मांगा जवाब
नवीन समाचार, नैनीताल, 19 दिसंबर 2018। पिछली कांग्रेस सरकार के कार्यकाल के घोटालों की परतों के खुलने का सिलसिला जारी है। उत्तराखंड उच्च न्यायालय की मुख्य न्यायधीश रमेश रंगनाथन व न्यायमूर्ति आरसी खुल्बे की खंडपीठ ने पिछली कांग्रेस सरकार के कायर्काल में ईको टूरिज्म को बढ़ावा देने के नाम पर दक्षिण अफ्रीका का दौरा कर लाखों रुपये के घोटाले के मामले में एक और बड़ा खुलासा हुआ है। बुधवार को उच्च न्यायालय में मामले की सुनवाई के दौरान सरकार ने न्यायालय के आदेश पर जवाब पेश करते हुए खंडपीठ को बताया कि 15 अगस्त 2008 के राष्ट्रीय पर्व-अवकाश के दिन 20 लाख रुपये का भुगतान किया गया था। खंडपीठी ने मामले की सुनवाई की अगली तिथि 8 जनवरी की नियत कर दी है।
सरकार के इस जवाब पर खंडपीठ ने टूर के नाम पर 20 लाख रुपये का भुगतान 15 अगस्त 2008 को छुट्टी के दिन करने पर स्थिति स्पष्ट करने को कहा है। उधर कोर्ट ने कालागढ़ रेंज के प्रभारी आरके तिवारी को इस जनहित याचिका में स्वतः सज्ञान लेकर पक्षकार बनाया है और उनको दस्ती नोटिस जारी कर 8 जनवरी तक जवाब पेश करने को कहा है। उल्लेखनीय है कि आरके तिवारी ने 2012 के एक पत्र में कहा है कि उनके पास 20 लाख रुपये टूर के लिए आये थे। पर यह रुपये कहां खर्च हुए उसके बारे में वे नही जानते हैं।
उल्लेखनीय है कि याची व अधिवक्ता जय प्रकाश डबराल ने अपनी जनहित याचिका में कहा है कि 2006 में कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में कैबिनेट मंत्री नवप्रभात व तत्कालीन विधायक शैलेंद्र मोहन सिंघल सहित 3 वन अधिकारी और कई अन्य लोग ईको टूरिज्म को बढ़ावा देने के लिए दक्षिण अफ्रीका गए थे। उस दौरे में उन्होंने सरकारी धन का दुरुपयोग किया था, लिहाजा मामले की उच्च न्यायालय की सीधी निगरानी में जांच कराई जाए।

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-हल्दूचौड़ आर्युवेदिक अस्पताल की मिट्टी को बेचे जाने की विजीलेंस जांच की मांग
नवीन समाचार, नैनीताल, 14 दिसंबर 2018। पिछले दिनों एक उत्तराखंडी गीत आया था-कथगा खैल्यो, यानी कितना खाओगा। इधर राज्य के घोटालेबाज अधिकारियों को शायद कुछ खाने को नहीं मिल रहा है, या कि पेट व भूख इतनी बढ़ गयी है कि जो मिले-वही खा जाओ की तर्ज पर वे मिट्टी भी खा गये हैं। मामला हल्दूचौड़ के आर्युवेदिक अस्पताल के निर्माण के दौरान बेसमेंट की मिट्टी का है। सूचना अधिकार कार्यकर्ता हेमंत गौनिया के द्वारा मुख्यमंत्री के सचिव कुमाऊं मंडलायुक्त राजीव रौतेला से इस लाखों की मिट्टी को खुर्दबुर्द किये जाने की शिकायत करते हुए मामले की विजीलेंस जांच की मांग की गयी है। बताया गया है कि इस शिकायत पर सचिव श्री रौतेला ने जांच के आदेश भी दे दिये हैं।
गौनिया ने सचिव श्री रौतेला से शिकायत की है कि लाखों रुपये की मिट्टी को खुर्दबुर्द करने की शिकायत वे पूर्व में एसडीएम हल्द्वानी के साथ ही डीएम, मंडलायुक्त एवं मुख्य सचिव व मुख्यमंत्री उत्तराखंड तथा प्रधानमंत्री से भी कर चुके हैं। मामले में पूर्व में मुख्य सचिव, मुख्यमंत्री व प्रधानमंत्री ने जांच के आदेश भी दिये थे, जिसकी जांच रिपोर्ट फर्जी बनाकर आगे भेज दी गयी। लिहाजा मामले की विजीलेंस जांच की जाए। उल्लेखनीय है कि इससे पूर्व गौनिया हल्द्वानी के कालाढुंगी रोड स्थित कपिलाज रेस्टोरेंट के पास निर्माणाधीन नाले हेतु किये गये खुदान से निकली मिट्टी को खुर्द-बुर्द करने के मामले में भी सूचना के अधिकार के तहत जानकारियां हासिक कर जांच की मांग कर चुके हैं। उनका कहना है कि विभाग मिट्टी को बेचने से प्राप्त लाखों रुपये की धनराशि को स्वयं ही हड़प जाते हैं। इसकी रॉयल्टी भी जमा नहीं करायी जाती है।

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इंटरनेट पर वायरल प्रधानमंत्री व मुख्यमंत्री को भेजे गए पत्र के मुख्य बिंदु : (नोट: हम इन आरोपों की पुष्टि नहीं करते, केवल अपना नाम भी न लिखकर आवाज उठा रहे लोगों के स्वर बनने  की कोशिश भर है)

  1. ऊधमसिंह नगर के मुख्य विकास अधिकारी पर लगाया गया है कोई भी कार्य बिना कमीशन के न करने का आरोप
  2. 14वें वित्त आयोग की धनराशि प्रधानों को जारी करने में 15 फीसद तक कमीशन लेने, डीपीआरओ का भी हिस्सा होने का आरोप
  3. एक भी शौचालय व प्रधानमंत्री आवास बिना कमीशन लिए न बनवाने का आरोप
  4. शिकायत करने वालों की जांच कराने का आरोप
  5. मंत्री के नाम पर भी कमीशन लेने का आरोप
  6. परियोजना निदेशक को इस भ्रष्टाचार की दूसरी सबसे महत्वपूर्ण कड़ी बताया गया है 
  7. पूर्व परियोजना निदेशक 400-500 लेकर करती थी शौचालय का भुगतान, भ्रष्टाचार के आरोप में हटाया गया 
  8. अब 1500-2000 तक लिए जा रहे हैं प्रत्येक शौचालय के भुगतान के एवज में 
  9. खंड विकास अधिकारी को भी कमीशन जाने का आरोप 
  10. जिला पंचायत राज अधिकारी व उपरोक्त अधिकारीयों पर पंचायती राज मंत्री के नाम पर करोड़ों रुपये एकत्र करने का आरोप 
  11. मंत्री पुत्र की शादी में प्रति ग्राम पंचायत अधिकारी 20000 रुपये लेने का आरोप 
  12. जिला पंचायत राज अधिकारी पर पंचायत विकास अधिकारियों व ग्राम प्रधानों से टीएम, पंचायती राज मंत्री व सीडीओ के नाम पर 1-1 व अपना 3 मिलाकर 6 प्रतिशत कमीशन लेने का आरोप 
  13. इधर नगर निगमों में शामिल हुई पंचायतों के लिए 8 से 15 प्रतिशत तक नगद कमीशन तय करने का आरोप 
  14. ग्राम प्रधानों द्वारा प्रधानमंत्री आवासों के लिए 10 से 40 हजार व शौचालयों के लिए 2 से 3 हजार तक कमीशन दिया गया 
  15. अनाम पत्र को जनहित याचिका की तरह मानने की मांग 

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