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उत्तराखंड : इस ‘घोटाला विभाग’ में फिर करोड़ों का घोटाला उजागर

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नवीन समाचार, देहरादून, 12 मई 2019। तमाम घोटालों के कारण ‘घोटाला विभाग’ के रूप में कुख्यात समाज कल्याण विभाग की योजनाओं में फिर करोड़ों की गड़बड़ी पकड़ में आई है। वित्त विभाग के स्वीकृत धनराशि के इस्तेमाल के ऑडिट में पता चला कि हरिद्वार, देहरादून और ऊधमसिंह नगर जिलों में कहीं बगैर टेंडर के लाखों की खरीद की गई तो कहीं भवन निर्माण के लिए लाखों रुपये सालों तक विभाग दबाए रहा और बाद में वो धनराशि शासन को लौटा दी गई। जनजातीय छात्रों के अध्ययन के लिए बनाए गए आश्रम पद्धति के स्कूलों में अनुसूचित जाति के छात्रों को दाखिला दे दिया गया। इसके लिए शासन से अनुमति लेने की भी जरूरत महसूस नहीं की गई। ऑडिट ने इन सब को घोर वित्तीय अनियमितता माना है। सचिव वित्त अमित सिंह नेगी ने समाज कल्याण विभाग को ऑडिट रिपोर्ट भेजकर इस पर कार्रवाई का ब्योरा मांगा है।

बगैर टेंडर खरीदे कृत्रिम अंग

ऊधमसिंह नगर के जिला समाज कल्याण अधिकारी कार्यालय ने वर्ष 2017-18 के दौरान दिव्यांग कल्याण योजना के तहत 5.35 लाख रुपये के कृत्रिम अंग बिना टेंडर के खरीद लिए। कोटेशन के आधार पर मैसर्स हरिओम साइकिल मार्ट आगरा से ये खरीद कर अधिप्राप्ति नियमावली का उल्लंघन किया गया।

छह साल दबाए रखे 76.92 लाख
ऊधमसिंह नगर में विभाग ने डॉ. भीमराव आंबेडकर बहुउद्देश्यीय भवन निर्माण योजना की 76.92 लाख रुपये की धनराशि को छह साल तक दबाए रखा और बगैर इस्तेमाल किए उसे शासन को लौटा दिया। ऑडिट ने इसे घोर वित्तीय अनियमितता माना है।

खाते में अवरुद्ध रखे लाखों रुपये
ऑडिट में यह तथ्य भी पकड़ में आया कि एक योजना को शुरू नहीं किया जा सका और उसका 33.20 लाख रुपये चालू खाते में अवरुद्ध पड़ा था। अटल आवास योजना के तहत 3.52 लाख रुपये की धनराशि पात्र लाभार्थियों के खाते में भेजने के बजाय उसे बैंक खातों में रखा गया। विभिन्न योजनाओं का 78.01 लाख रुपये भी अनावश्यक कार्यालय स्तर पर बैंक खातों में अवरुद्ध रखा गया था।

मृतकों को भी बांट दी पेंशन
ऑडिट में यह अनियमितता भी उजागर हुई कि ऊधमसिंह जिला समाज कल्याण अधिकारी कार्यालय में ऐसे लाभार्थियों को भी वृद्धावस्था पेंशन का भुगतान कर दिया गया, जो जीवित नहीं थे।

एसटी छात्रों के विद्यालय में एसी के छात्र
ऑडिट के दौरान जिला समाज कल्याण अधिकारी के कार्यालय में यह गड़बड़ी भी पकड़ में आई कि सरकार ने अनुसूचित जनजाति के छात्रों के चकराता के पोखरी में जो आश्रम पद्धति के उच्च माध्यमिक बालिका विद्यालय बनाया था, उसमें अनुसूचित जाति के छात्रों को दाखिला दे दिया। इसके लिए शासन से अनुमति नहीं ली गई। ऑडिट ने माना कि उन पर 26.21 लाख रुपये का अनुचित व्यय किया गया है। ठीक ऐसा ही मामला कालसी और त्यूनी स्थित राजकीय आश्रम पद्धति के उच्च माध्यमिक स्कूलों का भी है, जहां क्रमश: 22.80 लाख और 27.79 लाख रुपये की धनराशि एससी छात्रों पर व्यय की गई, जबकि ये विद्यालय एसटी छात्रों के लिए बना है।

बगैर टेंडर के दिया भोजन का ठेका, बिजली पानी की कटौती भी नहीं 
ऑडिट ने पाया कि ऊधम सिंह नगर में वर्ष 2017-18 के दौरान राजकीय आश्रम पद्धति विद्यालय विडौरा में मैसर्स मैट्रिक्स एनवायरमेंटल श्यामपुर को भोजन का ठेका बिना टेंडर प्रक्रिया के दे दिया गया। इसके एवज में उसे 49.34 लाख रुपये का भुगतान भी कर दिया गया। लेकिन भोजन बनाने के लिए उसने स्कूल की बिजली और पानी का इस्तेमाल तोे किया, लेकिन भुगतान करते हुए इसकी कटौती नहीं की गई।

बिना स्वीकृति शिक्षकों की तैनाती, 92 लाख भुगतान
कालसी स्थित राजकीय आश्रम पद्धति के विद्यालय में वर्ष 2017-18 के ऑडिट में यह भी पकड़ में आया कि वहां बिना स्वीकृत पद के छह शिक्षक तैनात कर दिए गए, जिनके वेतन व अन्य मदों पर 92 लाख रुपये का अनियमित भुगतान हुआ। बिना निविदा के आरसी कंस्ट्रक्शन को भोजन आपूर्ति का ठेका दे दिया गया और उसको 33.68 लाख का अनियमित भुगतान हुआ।

ये अनियमितता भी पकड़ी
– रुद्रपुर आश्रम पद्धति के स्कूल के अनुसेवक को सातवें वेतन आयोग के तहत हुआ अधिक भुगतान।
– रुद्रपुर जनपद में 2008-09 से 2017-18 तक दिव्यांग लाभार्थियों को दुकान बनाने के लिए जो ऋण बांटा गया, उसकी 4.28 लाख की वसूली नहीं हुई।
– वृद्धजनों की योजनाओं का प्रचार प्रसार करने के लिए चार लाख की राशि खर्च नहीं की गई।
– आश्रम पद्धति के स्कूल लांगा पोखरी में पेयजल लाइन की मरस्मत पर 6.32 लाख खर्च किए, लेकिन कार्य पूरा नहीं हुआ।

यह भी पढ़ें : समाज कल्याण विभाग द्वारा 271 मृतकों को 40 लाख से अधिक की पेंशन बांटने का मामला उजागर…

नवीन समाचार, रुद्रपुर, 5 अप्रैल 2019। उत्तराखंड के ऊधमसिंह नगर जिले में समाज कल्याण विभाग द्वारा मृत्यु उपरांत भी 271 पेंशनरों को पेंशन बांटने का सनसनीखेज मामला प्रकाश में आया है। शासन स्तर पर कराये गये सोशल ऑडिट सर्वे में इस अंधेरगर्दी का खुलासा हुआ। इसके बाद ऐसे 271 खातों से अब तक 40 लाख 21 हजार 754 रुपये वापस लिये जा चुके हैं।
उल्लेखनीय है की जिले के सभी ब्लॉकों में पेंशनधारकों के सत्यापन का दायित्व सहायक समाज कल्याण अधिकारियों पर होता है। विभागीय सूत्रों के अनुसार किसी पेंशन योजना में लाभार्थी के सत्यापन और मौत होने पर जानकारी देने का दायित्व इन्हीं पर था। किन्तु विभागीय अधिकारी कह रहे हैं कि सत्यापन के लिये राजस्व विभाग को पत्र लिखे गये थे। जब तक पेंशनर का मृत्यु प्रमाणपत्र प्रस्तुत नहीं किया जा सकता, पेंशन नहीं रोकी जाती। सर्वे में कुछ पेंशन लाभार्थियों के खातों में मौत के बाद भी 24 हजार से 50 हजार तक की रकम आती रही, गनीमत रही कि खातों से उनके परिजनों ने नहीं निकाली। सर्वे रिपोर्ट में सवाल उठाया गया है कि संबंधित को वास्तव में पेंशन की जरूरत थी भी या नहीं? संभव है कि गलत तरीके से पेंशन का लाभ लेने के लिये इन लोगों ने गलत आय प्रमाणपत्र बनवाये थे। उल्लेखनीय है प्रमाणपत्र राजस्व या संबंधित ग्रामसभा से जारी होते हैं। ऐसे में गलत प्रमाण पत्र देने वाले भी जांच के दायरे में आ गए हैं। वृद्धावस्था पेंशन बैंक खातों के सत्यापन को लेकर भी प्रशासन, समाज कल्याण और बैंक अफसरों के बीच बैठकें होती रहती हैं। सर्वे रिपोर्ट में साफ हुआ है कि जिले में कई पेंशनरों के खाते कई साल से संचालित नहीं हो रहे थे। इसके बावजूद बैंकों की ओर से ऐसी कोई जानकारी विभाग को क्यों नहीं दी गयी ? इस सम्बन्ध में जिला समाज कल्याण अधिकारी नवीन भारती ने कहा कि उन्होंने कुछ समय पहले ही पद संभाला है। इसलिये पहले क्या हुआ, इसकी उन्हें जानकारी नहीं है। मृत पेंशनरों के संबंध में सूचना ग्रामसभा या सहायक समाज कल्याण अधिकारियों के स्तर पर दी जाती है। पेंशनधारकों का सत्यापन किया जा रहा है। (साभार : हिंदुस्तान)

यह भी पढ़ें : 500 करोड़ के इस घोटाले में हाई कोर्ट ने कहा, क्यों न सीबीआई से जांच कराई जाये

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p style=”text-align: justify;”>नवीन समाचार, नैनीताल, 5 अप्रैल 2019। उत्तराखंड उच्च न्यायालय की मुख्य न्यायधीश रमेश रंगनाथन व न्यायमूर्ति आरसी खुल्बे की खंडपीठ ने समाज कल्याण विभाग में करीब 500 करोड़ रूपये के छात्रवृत्ति घोटला मामले की सुनवाई करते हुए शुक्रवार को कहा कि क्यों न इस मामले की जांच सीबीआई से कराई जाये, क्योंकि इस मामले के तार उत्तराखंड सहित कई अन्य राज्यो से जुड़े होने की आशंका है। इसके साथ ही खंडपीठ ने मामले की अगली सुनवाई के लिए 22 अप्रैल की तिथि नियत कर दी है। सुनवाई के दौरान खंडपीठ को बताया गया कि एसआईटी की जांच में स्पष्ट रूप से प्राइवेट स्कूलों के छात्रों और कई स्कूलों में ऐसे छात्रांे को भी छात्रवृत्ति देने की बात प्रकाश में आई है, जिनकी स्कूल में उपस्थिति 50 फीसद से कम रही।
मामले के अनुसार देहरादून निवासी राज्य आंदोलनकारी रविंद्र जुगरान व अन्य ने कोर्ट में जनहित याचिका दायर कर कहा है कि समाज कल्याण विभाग द्वारा 2003 से अब तक अनुसूचित जाति व जनजाति के छात्रों का छात्रवृत्ति का पैसा नहीं दिया गया, जिससे स्पष्ट होता है कि 2003 से अब तक विभाग द्वारा करोड़ों रूपये का घोटाला किया गया है। जबकि 2017 में इसकी जांच के लिए पूर्व मुख्यमंत्री द्वारा गठित एसआईटी को 3 माह के भीतर जांच पूरी करने को भी कहा गया था, परंतु इस पर आगे की कोई कार्यवाही नही हो सकी। इसके साथ ही याचिकाकर्ता का यह भी कहना है कि इस मामले में सीबीआई जांच की जानी चाहिए। पूर्व में खंडपीठ ने पुरानी एसआईटी टीम के अध्यक्ष टीसी मंजुनाथ से ही मामले की जांच कराने के आदेश दिए थे। जांच के दौरान सरकार ने उनका ट्रांसफर कर दिया था जिस पर कोर्ट ने रोक लगा दी थी। इस मामले में रुड़की के प्रतिष्ठित स्कूलों के एमडी आदि भी गिरफ्तार हो चुके हैं।

यह भी पढ़ें : बहुचर्चित छात्रवृत्ति घोटाले में पहली बड़ी कार्रवाई, सवा 6 करोड़ से अधिक का घोटालेबाज एमडी गिरफ्तार

नवीन समाचार, रूडकी, 12 फरवरी 2019।  छात्रवृत्ति घोटाले की जांच में जुटी एसआईटी ने रुड़की स्थित इंस्टीट्यूट ऑफ प्रोफेशनल स्टडीज (आईपीएस) के एमडी व एसोसिएट डायरेक्टर अंकुर शर्मा पुत्र दीन दयाल शर्मा निवासी ईदगाह, प्रकाशनगर कैंट देहरादून को गिरफ्तार कर लिया है। आरोपी के खिलाफ सिडकुल थाने में गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज करते हुए करोड़ों की छात्रवृत्ति हड़पने का आरोप लगाया गया है। उल्लेखनीय है कि इस मामले में एक दिन पूर्व ही उच्च न्यायालय सीबीआई जाँच कराने का इशारा कर चुका है।  

मालूम हो कि प्रदेश के बहुचर्चित समाज कल्याण विभाग से करोड़ों रुपये की धनराशि का गबन किए जाने से संबंधित प्रकरण की जांच मंजूनाथ टीसी पुलिस अधीक्षक अपराध हरिद्वार की अध्यक्षता में गठित एसआईटी कर रही है। एसआईटी की जांच में 1 दिसंबर 2018 को सिडकुल में मुकदमा दर्ज कराया गया था। जिसकी विवेचना कमल कुमार लुण्ठी कर रहे हैं। विवेचना के दौरान यह बात सामने आई कि जिला समाज कल्याण अधिकारी हरिद्वार ने रुड़की स्थित इंस्टीट्यूट ऑफ प्रोफेशनल स्टडीज को वर्ष 2014-15 व वर्ष 2015-16 में अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति के 2032 छात्र छात्राओं को 6,28,94,750 करोड़ की छात्रवृत्ति दी गई थी। जांच में यह बात सामने आई कि अधिकांश छात्र छात्राओं ने उक्त शैक्षणिक संस्थान में शिक्षा ही ग्रहण नहीं की। इतना ही नहीं छात्र छात्राओं का पंजीकरण भी संबंधित परिषद-विश्वविद्यालय में नहीं था। ऑन लाइन बैंक खातों में भेजी गई धनराशि अधिकांश एक ही बैंक शाखा में भेजी गई और अधिकांश कथित छात्र छात्राओं को संस्थान के मोबाइल नंबर भी एक पाए गए। बैंक खातों में छात्रवृत्ति की धनराशि पहुंचते ही धनराशि को संस्थान के बैंक खाते में स्थानांतरित करा दिया गया। इस मामले में संस्थान के एमडी व एसोसिएट डायरेक्टर संस्थान का अभिलेख उपलब्ध कराने को कहा गया, जो उन्होंने उपलब्ध नहीं कराए। उक्त संस्थान ने पूरी योजना के तहत छात्रवृत्ति की रकम हड़प ली। जिसके बाद अंकुर शर्मा को गिरफ्तार कर उनके खिलाफ मुकदमा दर्ज कर आरोपी को गिरफ्तार कर कोर्ट मे पेश रिमांड पर लिया है। जबकि विवेक शर्मा नाम का एक आरोपी फरार चल रहा है।

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p style=”text-align: justify;”>छात्रवृत्ति घोटाले में मयंक नौटियाल का मामला, पिता की आय चार लाख से ज्यादा होने के बावजूद कुछ हजारों में दिखाई थी आय, कोर्ट ने सरकार से एक हफ्ते में जवाब मांगा
नवीन समाचार, नैनीताल, 15 जनवरी 2019। उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने समाज कल्याण विभाग में हुए 100 करोड़ के बताये जा रहे छात्रवृत्ति घोटाले के एक आरोपी मयंक नौटियाल की गिरफ्तारी पर रोक लगा दी है। इसके साथ ही उच्च न्यायालय ने शिकायतकर्ता और सरकार को एक हफ्ते के भीतर जवाब दाखिल करने का आदेश दिया है।
उल्लेखनीय है कि मयंक नौटियाल ने उत्तराखंड उच्च न्यायालय में याचिका दाखिल कर एसआईटी की 11 जनवरी की दर्ज एफआईआर निरस्त करने और गिरफ्तारी पर रोक लगाने को लेकर याचिका दायर की थी। मालूम हो कि राज्य में छात्रवृत्ति में लाखों के घोटाले में एसआईटी ने मयंक नौटियाल के खिलाफ डोईवाला थाने में एफआईआर दर्ज की है। मयंक पर आरोप है कि उसने 2013-14 में गलत प्रमाण पत्र लगाकर छात्रवृत्ति के लिए आवेदन किया था। इन प्रमाण पत्रों में मयंक ने अपने पिता की आय 3500, 5000 और 6500 रुपए दर्शायी थी जबकि उसके पिता ने उसी वित्त वर्ष में चार लाख से ज्यादा का आयकर जमा किया था और उसके घर में कई गाड़ियां भी खरीदी गई थीं।

यह भी पढ़ें : हाई कोर्ट ने एससी-एसटी छात्रवृत्ति घोटाले पर सरकार से मांगा जवाब

नवीन समाचार, नैनीताल, 6 दिसंबर  2018। उत्तराखंड उच्च न्यायालय  ने अनुसूचित जाति व जनजाति छात्रों की छात्रवृत्ति में घोटाले के आरोपों को गंभीरता से लिया है। मुख्य न्यायधीश रमेश रंगनाथन व न्यायमूर्ति आरसी खुल्बे की खण्डपीठ ने इस मामले में सुनवाई करते हुए सरकार से अगले बुधवार तक रिपोर्ट कोर्ट में पेश कर स्थिति साफ करने के निर्देश दिये हैं। उल्लेखनीय राज्य आंदोलनकारी रविन्द्र जुगरान ने जनहित याचिका दायर कर कहा है कि समाज कल्याण विभाग द्वारा 2003 से अब तक अनुसूचित जाति व जनजाति के छात्रों का छात्रवृत्ति का पैसा नहीं दिया गया, जिससे स्पष्ट होता है कि 2003 से अब तक विभाग द्वारा करोड़ों रूपये का घोटाला किया गया है । 2017 में इसकी जांच के लिए मुख्यमन्त्री द्वारा एसआईटी गठित की गयी थी और तीन माह के भीतर जांच पूरी करने को भी कहा था परन्तु इस पर आगे की कोई कार्यवाही नही हो सकी । याचिकाकर्ता का यह भी कहना है कि इस मामले में सीबीआई जांच की जानी चाहिए । मामले को सुनने के बाद खण्डपीठ ने सरकार से बुधवार तक स्थिति साफ करते हुए रिपोर्ट पेश करने को कहा है।

पिछली कांग्रेस सरकार के एक घोटाले में 10 अधिकारियों से करीब डेढ़ करोड़ की वसूली के आदेश

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p style=”text-align: justify;”>नवीन समाचार, देहरादून, 21 दिसंबर 2018। पिछली कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में वर्ष 2008 से 2013 के बीच स्वास्थ्य विभाग में हुए टैक्सी बिल घोटाले में दोषी 10 अधिकारियों से करीब डेढ़ करोड़ रुपये की वसूली की जाएगी। इस हेतु उत्तराखंड राजभवन ने अनुमति दे दी है। शुक्रवार (आज) स्वास्थ्य विभाग की ओर से भी दोषी अधिकारियों से वसूली करने के आदेश जारी हो सकते हैं। उल्लेखनीय है कि इस मामले में राज्य के 13 जिलों के 13 में से 12 सीएमओ एवं सीएमएस स्तर के डा. आरएस असवाल, डॉ.जीसी नौटियाल, डॉ.एमपी अग्रवाल, डा. वीके गैरोला, डॉ.आरके पंत, डॉ.दीपा शर्मा, डॉ.मीनू, एसडी सकलानी, राकेश सिन्हा और वाईएस राणा को दोषी पाया गया है। साथ ही दो पूर्व मुख्यमंत्रियों डा. रमेश पोखरियाल ‘निशंक’ एवं विजय बहुगुणा के पांच निजी सचिव दोषी पाए गए थे। अलबत्ता अभी निजी सचिव सजा से बचे हुए हैं।
उल्लेखनीय है कि इस घोटाले में पहले ही राज्य लोक सेवा आयोग ने दोषी अधिकारियों के खिलाफ वसूली की मंजूरी दे दी थी। जबकि इधर राजभवन ने भी इस कार्रवाई की अनुमति दे दी है। प्रदेश के स्वास्थ्य सचिव नितेश झा का कहना है कि टैक्सी बिल घोटाले में दोषी अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई करने के संबंध में विभाग की ओर से भी आदेश जारी किए जाएंगे।

यह भी पढ़ें : पिछली कांग्रेस सरकार के मंत्री-विधायकों की दक्षिण अफ्रीका की तफरी के मामले में खुला एक और बड़ा राज

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p style=”text-align: justify;”>-स्वतंत्रता दिवस यानी राष्ट्रीय पर्व के छुट्टी के दिन किया गया था 20 लाख का भुगतान, उच्च न्यायालय ने सरकार ने मांगा जवाब
नवीन समाचार, नैनीताल, 19 दिसंबर 2018। पिछली कांग्रेस सरकार के कार्यकाल के घोटालों की परतों के खुलने का सिलसिला जारी है। उत्तराखंड उच्च न्यायालय की मुख्य न्यायधीश रमेश रंगनाथन व न्यायमूर्ति आरसी खुल्बे की खंडपीठ ने पिछली कांग्रेस सरकार के कायर्काल में ईको टूरिज्म को बढ़ावा देने के नाम पर दक्षिण अफ्रीका का दौरा कर लाखों रुपये के घोटाले के मामले में एक और बड़ा खुलासा हुआ है। बुधवार को उच्च न्यायालय में मामले की सुनवाई के दौरान सरकार ने न्यायालय के आदेश पर जवाब पेश करते हुए खंडपीठ को बताया कि 15 अगस्त 2008 के राष्ट्रीय पर्व-अवकाश के दिन 20 लाख रुपये का भुगतान किया गया था। खंडपीठी ने मामले की सुनवाई की अगली तिथि 8 जनवरी की नियत कर दी है।
सरकार के इस जवाब पर खंडपीठ ने टूर के नाम पर 20 लाख रुपये का भुगतान 15 अगस्त 2008 को छुट्टी के दिन करने पर स्थिति स्पष्ट करने को कहा है। उधर कोर्ट ने कालागढ़ रेंज के प्रभारी आरके तिवारी को इस जनहित याचिका में स्वतः सज्ञान लेकर पक्षकार बनाया है और उनको दस्ती नोटिस जारी कर 8 जनवरी तक जवाब पेश करने को कहा है। उल्लेखनीय है कि आरके तिवारी ने 2012 के एक पत्र में कहा है कि उनके पास 20 लाख रुपये टूर के लिए आये थे। पर यह रुपये कहां खर्च हुए उसके बारे में वे नही जानते हैं।
उल्लेखनीय है कि याची व अधिवक्ता जय प्रकाश डबराल ने अपनी जनहित याचिका में कहा है कि 2006 में कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में कैबिनेट मंत्री नवप्रभात व तत्कालीन विधायक शैलेंद्र मोहन सिंघल सहित 3 वन अधिकारी और कई अन्य लोग ईको टूरिज्म को बढ़ावा देने के लिए दक्षिण अफ्रीका गए थे। उस दौरे में उन्होंने सरकारी धन का दुरुपयोग किया था, लिहाजा मामले की उच्च न्यायालय की सीधी निगरानी में जांच कराई जाए।

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p style=”text-align: justify;”>-हल्दूचौड़ आर्युवेदिक अस्पताल की मिट्टी को बेचे जाने की विजीलेंस जांच की मांग
नवीन समाचार, नैनीताल, 14 दिसंबर 2018। पिछले दिनों एक उत्तराखंडी गीत आया था-कथगा खैल्यो, यानी कितना खाओगा। इधर राज्य के घोटालेबाज अधिकारियों को शायद कुछ खाने को नहीं मिल रहा है, या कि पेट व भूख इतनी बढ़ गयी है कि जो मिले-वही खा जाओ की तर्ज पर वे मिट्टी भी खा गये हैं। मामला हल्दूचौड़ के आर्युवेदिक अस्पताल के निर्माण के दौरान बेसमेंट की मिट्टी का है। सूचना अधिकार कार्यकर्ता हेमंत गौनिया के द्वारा मुख्यमंत्री के सचिव कुमाऊं मंडलायुक्त राजीव रौतेला से इस लाखों की मिट्टी को खुर्दबुर्द किये जाने की शिकायत करते हुए मामले की विजीलेंस जांच की मांग की गयी है। बताया गया है कि इस शिकायत पर सचिव श्री रौतेला ने जांच के आदेश भी दे दिये हैं।
गौनिया ने सचिव श्री रौतेला से शिकायत की है कि लाखों रुपये की मिट्टी को खुर्दबुर्द करने की शिकायत वे पूर्व में एसडीएम हल्द्वानी के साथ ही डीएम, मंडलायुक्त एवं मुख्य सचिव व मुख्यमंत्री उत्तराखंड तथा प्रधानमंत्री से भी कर चुके हैं। मामले में पूर्व में मुख्य सचिव, मुख्यमंत्री व प्रधानमंत्री ने जांच के आदेश भी दिये थे, जिसकी जांच रिपोर्ट फर्जी बनाकर आगे भेज दी गयी। लिहाजा मामले की विजीलेंस जांच की जाए। उल्लेखनीय है कि इससे पूर्व गौनिया हल्द्वानी के कालाढुंगी रोड स्थित कपिलाज रेस्टोरेंट के पास निर्माणाधीन नाले हेतु किये गये खुदान से निकली मिट्टी को खुर्द-बुर्द करने के मामले में भी सूचना के अधिकार के तहत जानकारियां हासिक कर जांच की मांग कर चुके हैं। उनका कहना है कि विभाग मिट्टी को बेचने से प्राप्त लाखों रुपये की धनराशि को स्वयं ही हड़प जाते हैं। इसकी रॉयल्टी भी जमा नहीं करायी जाती है।

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इंटरनेट पर वायरल प्रधानमंत्री व मुख्यमंत्री को भेजे गए पत्र के मुख्य बिंदु : (नोट: हम इन आरोपों की पुष्टि नहीं करते, केवल अपना नाम भी न लिखकर आवाज उठा रहे लोगों के स्वर बनने  की कोशिश भर है)

  1. ऊधमसिंह नगर के मुख्य विकास अधिकारी पर लगाया गया है कोई भी कार्य बिना कमीशन के न करने का आरोप
  2. 14वें वित्त आयोग की धनराशि प्रधानों को जारी करने में 15 फीसद तक कमीशन लेने, डीपीआरओ का भी हिस्सा होने का आरोप
  3. एक भी शौचालय व प्रधानमंत्री आवास बिना कमीशन लिए न बनवाने का आरोप
  4. शिकायत करने वालों की जांच कराने का आरोप
  5. मंत्री के नाम पर भी कमीशन लेने का आरोप
  6. परियोजना निदेशक को इस भ्रष्टाचार की दूसरी सबसे महत्वपूर्ण कड़ी बताया गया है 
  7. पूर्व परियोजना निदेशक 400-500 लेकर करती थी शौचालय का भुगतान, भ्रष्टाचार के आरोप में हटाया गया 
  8. अब 1500-2000 तक लिए जा रहे हैं प्रत्येक शौचालय के भुगतान के एवज में 
  9. खंड विकास अधिकारी को भी कमीशन जाने का आरोप 
  10. जिला पंचायत राज अधिकारी व उपरोक्त अधिकारीयों पर पंचायती राज मंत्री के नाम पर करोड़ों रुपये एकत्र करने का आरोप 
  11. मंत्री पुत्र की शादी में प्रति ग्राम पंचायत अधिकारी 20000 रुपये लेने का आरोप 
  12. जिला पंचायत राज अधिकारी पर पंचायत विकास अधिकारियों व ग्राम प्रधानों से टीएम, पंचायती राज मंत्री व सीडीओ के नाम पर 1-1 व अपना 3 मिलाकर 6 प्रतिशत कमीशन लेने का आरोप 
  13. इधर नगर निगमों में शामिल हुई पंचायतों के लिए 8 से 15 प्रतिशत तक नगद कमीशन तय करने का आरोप 
  14. ग्राम प्रधानों द्वारा प्रधानमंत्री आवासों के लिए 10 से 40 हजार व शौचालयों के लिए 2 से 3 हजार तक कमीशन दिया गया 
  15. अनाम पत्र को जनहित याचिका की तरह मानने की मांग 

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मेरा जन्म 26 नवंबर 1972 को हुआ था। मैं नैनीताल, भारत में मूलतः एक पत्रकार हूँ। वर्तमान में मार्च 2010 से राष्ट्रीय हिन्दी दैनिक समाचार पत्र-राष्ट्रीय सहारा में ब्यूरो चीफ के रूप में कार्य कर रहा हूँ। इससे पहले मैं पांच साल के लिए दैनिक जागरण के लिए काम कर चुका हूँ। कुमाऊँ विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग से ‘नए मीडिया’ विषय पर शोधरत हूँ। फोटोग्राफ़ी मेरा शौक है। मैं NIKON COOLPIX P530 और अडोब फोटोशॉप 7.0 के साथ फोटोग्राफी कर रहा हूँ। फोटोग्राफी मेरे लिए दुनियां की खूबसूरती को अपनी ओर से चिरस्थाई बनाने का बहुत छोटा सा प्रयास है। एक फोटो पत्रकार के रूप में मेरी तस्वीरों को नैनीताल राजभवन सहित विभिन्न प्रदर्शनियों में प्रस्तुत किया गया, तथा उत्तराखंड की राज्यपाल श्रीमती मार्गरेट अलवा द्वारा सम्मानित किया गया है। कुछ चित्रों को राष्ट्रीय-अंतर्राष्ट्रीय पुरस्कार भी प्राप्त हो चुके हैं। गूगल अर्थ पर चित्र उपलब्ध कराने वाली पैनोरामियो साइट पर मेरी प्रोफाइल को 18.85 Lacs से भी अधिक हिट्स प्राप्त हैं।पत्रकारिता और फोटोग्राफी के अलावा मुझे कवितायेँ लिखना पसंद है। काव्य क्षेत्र में मैंने नवीन जोशी “नवेन्दु” के रूप में अपनी पहचान बनाई है। मैंने बहुत सी कुमाउनी कवितायेँ लिखी हैं, कुमाउनी भाषा में मेरा काव्य संकलन उघड़ी आंखोंक स्वींड़ प्रकाशित हो चुका है, जो कि पुस्तक के के साथ ही डिजिटल (PDF) फार्मेट पर भी उपलब्ध होने वाली कुमाउनी की पहली पुस्तक है। मेरी यह पुस्तक गूगल एप्स पर भी उपलब्ध है। ’ यहां है एक पत्रकार, लेखक, कवि एवं छाया चित्रकार के रूप में मेरी रचनात्मकता, लेख, आलेख, छायाचित्र, कविताएं, हिंदी-कुमाउनी के ब्लॉग आदि कार्यों का पूरा समग्र। मेरी कोशिश है कि यहां नैनीताल, कुमाऊं, उत्तराखंड और वृहद संदर्भ में देश की विरासत, संस्कृति, इतिहास और वर्तमान को समग्र रूप में संग्रहीत करने की….।मेरे दिल में बसता है, मेरा नैनीताल, मेरा कुमाऊं और मेरा उत्तराखंड

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