हाईकोर्ट ने प्रधानाचार्य से पूछा-फीस वृद्धि पर क्यों न अवमानना की कार्रवाई की जाए

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नवीन समाचार, नैनीताल, 20 फरवरी 2020। उत्तराखंड उच्च न्यायालय की न्यायमूर्ति शरद कुमार शर्मा की एकलपीठ हिमालया आयुर्वेदिक मेडिकल कालेज देहरादून के प्रधानाचार्य अनिल कुमार झा को 2 मार्च को कोर्ट में पेश होने के आदेश दिए हैं। साथ ही कोर्ट ने कहा है कि क्यों न प्रधानाचार्य के खिलाफ अवमानना की कार्यवाही की जाय।
मामले के अनुसार उत्तराखंड सरकार ने 14 अक्टूबर 2015 को शासनादेश जारी कर आयुर्वेदिक मेडिकल कॉलेजों की फीस 80 हजार से बढ़ाकर 2.15 लाख कर दी थी। जिसे आयुर्वेदिक कॉलेजों से बीएएमएस कर रहे छात्रों ने हाईकोर्ट में चुनौती दी। हाईकोर्ट की एकलपीठ ने 9 जुलाई 2018 को इस शासनादेश को सुप्रीम कोर्ट के आदेशों के खिलाफ बताते हुए उसे निरस्त कर दिया और मेडिकल कॉलेजों से छात्रों से ली गई बढ़ी हुई फीस वापस करने के आदेश दिए थे। एकलपीठ के इस आदेश को आयुर्वेदिक मेडिकल कॉलेजों की एसोसिएशन ने खंडपीठ में चुनौती दी, जिसे खंडपीठ ने खारिज करते हुए एकलपीठ के आदेश को सही ठहराया। किंतु लंबे समय बाद भी आयुर्वेदिक कॉलेजों ने यह फीस वापस नहीं की। इसके खिलाफ कॉलेज के छात्र मनीष कुमार व अन्य ने अवमानना याचिका दायर की।

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कहा-कॉलेज संबंधित धनराशि को सरकार के वित्त विभाग में जमा कराएं

नवीन समाचार, नैनीताल, 19 फरवरी 2020। उत्तराखंड हाईकोर्ट ने प्रदेश के बहुचर्चित छात्रवृत्ति घोटाला मामले में सम्बंधित कॉलेजों के प्रबंधकों को आदेश दिए कि वे कॉलेज से संबंधित धनराशि को सरकार के वित्त विभाग में जमा कराएं। कोर्ट ने वित्त विभाग को निर्देश दिए हैं कि वह इसके लिए अलग से खाता खोलें। कोर्ट ने कहा कि जमा की गई धनराशि का निस्तारण संबंधित वाद के भविष्य में होने वाले आदेशों पर निर्भर होगा। न्यायमूर्ति लोकपाल सिंह की एकलपीठ के समक्ष मामले की सुनवाई हुई। 

मामले के अनुसार प्रदेश के 500 करोड़ रुपये से अधिक के छात्रवृत्ति घोटाले में एसआईटी की ओर से जांच की जा रही है। इसमें एसआईटी ने विभिन्न कॉलेज-संस्थान प्रबंधन के खिलाफ संबंधित साक्ष्य जुटाते हुए एफआईआर दर्ज की है। कॉलेज-संस्थानों के प्रबंधकों ने गिरफ्तारी से बचने के लिए हाईकोर्ट में याचिका दायर करते हुए अपनी गिरफतारी पर रोक लगाने की मांग की थी। सुनवाई के दौरान एसआईटी के अध्यक्ष मंजूनाथ टीसी सहित कई पुलिस अधिकारी न्यायालय में उपस्थित हुए। मंजूनाथ टीसी ने कोर्ट में अब तक की गई जांच, एफआईआर व अन्य प्रगति रिपोर्ट पेश की। उन्होंने कोर्ट को बताया कि कई कॉलेज प्रबंधक घोटाले की धनराशि सरकार को वापस करने को तैयार है। पक्षों की सुनवाई के बाद हाईकोर्ट की एकलपीठ ने कॉलेज प्रबंधन को आदेश दिए कि वे एसआईटी द्वारा आरोपित की गई धनराशि सरकार के वित्त विभाग में जमा कराएं। कोर्ट ने कहा कि इसका निस्तारण संबंधित वाद के निर्णय के अधीन रहेगा।

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-हाईकोर्ट ने बिजली विभाग के अधिकारियों-कर्मचारियों को मुफ्त बिजली देने पर सरकार को भेजा नोटिस
नवीन समाचार, नैनीताल, 7 नवंबर 2019। उत्तराखंड उच्च न्यायाल की मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति रमेश रंगनाथन व न्यायमूर्ति आलोक कुमार वर्मा की खंडपीठ ने ऊर्जा निगम के अधिकारियों व कर्मचारियों को सस्ती बिजली देने व आम आदमी के लिए बिजली की दरें बढ़ाने के खिलाफ दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए स्वतः संज्ञान लेकर सरकार को नोटिस जारी किया है। तथा इस प्रवृत्ति पर सख्त नाराजगी जताते हुए ऊर्जा निगम को विस्तृत हलफनामा प्रस्तुत करने के निर्देश भी दिए हैं।
उल्लेखनीय है कि आरटीआइ क्लब देहरादून ने उच्च न्यायालय में जनहित याचिका दायर कर कहा है कि ऊर्जा निगमों के अधिकारियों से एक माह का बिजली बिल मात्र 4-5 सौ व कर्मचारियों का मात्र सौ रुपये लिया जा रहा है। वर्तमान कर्मचारियों के अलावा अनेक सेवानिवृत्त कर्मचारियों व उनके आश्रितों को भी मुफ्त बिजली दी गई है। वहीं ऊर्जा निगमों के अनेक अधिकारियों के आवासों में मीटर ही नहीं लगे हैं, और अन्य के मीटर खराब स्थिति में हैं। उदाहरण के लिए जीएम सीके टम्टा का 25 माह का बिल चार लाख 20 हजार आया था, लेकिन उनसे करीब 400 रुपए का बिल लिया गया। उनके बिजली के मीटर की रीडिंग 2005 से 2016 तक नहीं ली गई थी। लिहाजा उनके द्वारा प्रयोग की गई बिजली का सीधा भार जनता की जेब पर पड़ रहा है। याचिकाकर्ता ने यह भी कहा है कि उत्तराखंड ऊर्जा प्रदेश घोषित है लेकिन यहां हिमाचल प्रदेश से महंगी बिजली है। जबकि हिमाचल में बिजली उत्पादन कम होता है।

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