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बड़ा निर्णय: उत्तराखंड के सभी न्यायिक अधिकारी हर सप्ताह एक पौधा लगाएंगे…

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-हिमालय दिवस पर आयोजित वेबिनार में उत्तराखण्ड राज्य विधिक सेवा प्रधिकरण के सदस्य सचिव डा. ज्ञानेंद्र कुमार शर्मा ने दी जानकारी
नवीन समाचार, नैनीताल, 09 सितंबर 2020। उत्तराखण्ड राज्य विधिक सेवा प्रधिकरण के सदस्य सचिव डा. ज्ञानेंद्र कुमार शर्मा ने बुधवार को हिमालय दिवस पर आयोजित वेबिनार को संबोधित करते हुए पेड़-पौधों के संरक्षण हेतु सामाजिक चिंतन की आवश्यक जताई तथा वनाग्नि व पेड़-पौधों के कटाव को रोकने को सभी का सामाजिक दायित्व बताया। इस दौरान उन्होंने वेबिनार में उपस्थित लोगांे को हिमालय संरक्षण की शपथ भी दिलायी तथा उनसे वन विभाग के सहयोग से पहाड़ी क्षेत्रों के जंगलों को वनाग्नि से रोकने पर कार्य करने तथा अधिक से अधिक पौधरोपण करने को भी कहा। बताया कि उत्तराखण्ड राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण राज्य में वृहद् पौधारोपण करने की योजना पर कार्य कर रही है, जिसमें प्रत्येक न्यायिक अधिकारी प्रति सप्ताह एक पौधा लगाये एवं संवर्धन किये जाने पर विचार किया जा रहा है।
प्राधिकरण के कार्यपालक अध्यक्ष एवं उत्तराखंड उच्च न्यायालय के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति रवि कुमार मलिमथ के निर्देशों पर हिमालयन दिवस के अवसर पर इस वेबिनार का आयोजन किया गया। वेबिनार में जिला विधिक सेवा प्राधिकरण चमोली के सचिव सुधीर सिंह ने बताया कि उत्तराखण्ड की लगभग 65 प्रतिशत मैदानी क्षेत्र की जनता को हिमालयी नदियों से ही जल की आपूर्ति होती है। ग्लोबल वार्मिंग और मानवीय हस्तक्षेप बढ़ने के कारण हिमालय के पर्यावरण पर खतरा उत्पन्न हो गया है, जिसका समय से समाधान किया जाना आवश्यक है। जिला विधिक सेवा प्राधिकरण ऊधम सिंह नगर के सचिव अविनाश कुमार श्रीवास्तव ने भी विचार रखे। वेबिनार का संचालन उत्तराखण्ड राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के विशेष कार्याधिकारी सिविल जज (प्रवर खंड) मोहम्मद यूसुफ ने किया। वेबिनार में राज्य के सभी 13 जनपदों के सचिव-सिविल जज (प्रवर खंड), दो-दो नामित अधिवक्ताओं और पांच-पांच पैरा विधिक कार्यकर्ताओं शामिल रहे।

यह भी पढ़ें : मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति रमेश रंगनाथन को दी गई विदाई

-पूर्व मुख्यमंत्रियों से आवास भत्ता वसूलने, सरकार के देवस्थानम बोर्ड को वैध ठहराने व अधिवक्ताओं की हड़ताल को गैर कानूनी बताने जैसे महत्वपूर्ण निर्णय दिये
-आखिरी दिन भी एनआईटी का परिसर उत्तराखंड में स्थापित करने का महत्वपूर्ण निर्णय सुनाया

अपने विदाई समारोह में बोलते मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति रमेश रंगनाथन।

नवीन समाचार, नैनीताल, 27 जुलाई 2020। उत्तराखंड उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायधीश न्यायमूर्ति रमेश रंगनाथन को सोमवार को सेवानिवृत्ति होने पर ‘फुल कोर्ट रिफरेंस’ आयोजित कर भावपूर्ण विदाई दी गई। इस अवसर पर वक्ताओं ने न्यायमूर्ति रंगनाथन के उत्तराखंड हाईकोर्ट में मुख्य न्यायाधीश के रूप में 21 माह के कार्यकाल की सराहना करते हुए कहा कि उनके द्वारा दिये गए कई ऐतिहासिक निर्णयों से वे हमेशा प्रदेश की जनता की दिलों में रहेंगे। वहीं न्यायमूर्ति रंगनाथन ने न्यायिक कार्यों के निर्वहन में सहयोगी न्यायाधीशों एवं कर्मियों, रजिस्ट्री कार्यालय व चिकित्सकों द्वारा दिये गए सहयोग के प्रति आभार जताया। उन्होंने कहा कि उनका गृह क्षेत्र केरल कई मामलों में सुंदर प्रदेश है, किंतु उत्तराखंड की जैसी सुंदरता अन्यत्र दुर्लभ है। उन्होंने 21 माह के कार्यकाल की अवधि में उत्तराखंड के अधिकांश रमणीय स्थानों का भ्रमण भी किया। लेकिन लॉक डाउन के कारण वे कुछ स्थानों में नहीं जा पाए। उन्होंने कहा कि कोविड-19 के कारण न्यायपालिका सर्वाधिक प्रभावित हुई है। इसके बाद भी वीडियो कांफ्रेंसिंग से काफी वादों की सुनवाई हो रही है। उन्होंने इस दौर में वरिष्ठ अधिवक्ताओं से जूनियर व जरूरतमंद अधिवक्ताओं की मदद करने की अपील भी की। उन्होंने कहा कि उनकी हिंदी भाषा कमजोर थी, लेकिन अधिवक्ताओं ने हिंदी का अंग्रेजी अनुवाद कर उनकी मदद की।
इस अवसर पर वरिष्ठ न्यायधीश रवि मलिमथ ने मुख्य न्यायधीश द्वारा दिये गए पूर्व मुख्यमंत्रियों से आवास भत्ता वसूल करना, सरकार के देवस्थानम बोर्ड को वैध ठहराना, अधिवक्ताओं की हड़ताल को गैर कानूनी बताना आदि महत्वपूर्ण फैसलों का जिक्र करते हुए कहा कि उनके यह फैसले हमेशा याद रखे जाएंगे। उन्होंने अपनी सेवानिवृत्ति के अंतिम दिन भी उत्तराखंड के लिये महत्वपूर्ण निर्णय देते हुये एनआईटी का स्थायी कैम्पस एक साल के भीतर श्रीनगर में बनाने का महत्वपूर्ण आदेश पारित किया। विदाई समारोह को महाधिवक्ता एसएन बाबुलकर, हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के अध्यक्ष पूरन सिंह बिष्ट ने भी सम्बोधित किया। इस अवसर पर न्यायधीश सुधांशू धूलिया, न्यायधीश लोकपाल सिंह, न्यायमूर्ति आरसी खुल्बे, न्यायमूर्ति मनोज तिवारी, न्यायमूर्ति शरद शर्मा, न्यायमूर्ति एनएस धानिक, न्यायमूर्ति रविंद्र मैठाणी व न्यायमूर्ति आलोक वर्मा आदि उपस्थित रहे। समारोह का संचालन रजिस्ट्रार जनरल हीरा सिंह बोनाल ने किया।

यह भी पढ़ें : न्यायमूर्ति रंगनाथन की सेवानिवृत्ति के बाद न्यायमूर्ति मलिमथ होंगे उत्तराखंड उच्च न्यायालय के कार्यकारी मुख्य न्यायाधीश

नवीन समाचार, नैनीताल, 16 जुलाई 2020। उत्तराखंड उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति रमेश रंगनाथन आगामी 28 जुलाई को सेवानिवृत्त हो रहे हैं। उनकी सेवानिवृत्ति के बाद उत्तराखंड उच्च न्यायालय के वरिष्ठतम न्यायाधीश न्यायूर्ति रवि विजयकुमार मलिमथ उत्तराखंड उच्च न्यायालय के कार्यकारी मुख्य न्यायाधीश होंगे। बृहस्पतिवार को भारत सरकार के न्याय एवं कानून मंत्रालय के संयुक्त सचिव राजिंदर कश्यप की ओर से इस आशय का नोटिफिकेशन जारी हो गया है।

न्यायमूर्ति रवि विजयकुमार मलिमथ।

उल्लेखनीय है कि न्यायमूर्ति मलिमथ 5 मार्च 2020 को कर्नाटक उच्च न्यायालय से स्थानांतरित होकर उत्तराखंड उच्च न्यायालय में न्यायाधीश बने थे। 25 मई 1962 को जन्मे न्यायमूर्ति मलिमथ कर्नाटक उच्च न्यायालय के पूर्व मुख्य न्यायाधीश स्वर्गीय वीएस मलिमथ के पुत्र हैं। उन्होंने 28 जनवरी 1987 से बंगलौर से अधिवक्ता के रूप में मुख्यतया संवैधानिक, सिविल, क्रिमिनल, लेबर, सर्विस के मामलों की प्रेक्टिस प्रारंभ की थी और 18 फरवरी 2008 को कर्नाटक उच्च न्यायालय के अतिरिक्त न्यायाधीश नियुक्त हुए और 17 फरवरी 2010 को स्थायी न्यायाधीश बने थे।

वरिष्ठ अधिवक्ता थपलियाल फिर बने असिस्टेंट सॉलीसिटर जनरल
नैनीताल। उत्तराखंड उच्च न्यायालय के वरिष्ठ अधिवक्ता वरिष्ठ अधिवक्ता राकेश थपलियाल को पुनः उत्तराखंड उच्च न्यायालय के भारत सरकार का असिस्टेंट सॉलीसिटर जनरल नियुक्त किया गया है। उनका कार्यकाल हाल ही में पूरा हो गया था। इसे भारत सरकार ने 17 जुलाई से तीन साल के लिए और बढ़ा दिया है। राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद बृहस्पतिवार को केंद्रीय विधि एवं न्याय मंत्रालय के अतिरिक्त सचिव एसआर मिश्रा की ओर से उनकी नियुक्ति संबंधित अधिसूचना जारी कर दी गई है।

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नवीन समाचार, नैनीताल, 11 जून 2020। उत्तराखंड में बड़े पैमाने पर न्यायाधीशों के तबादले किए गए हैं। उत्तराखंड उच्च न्यायालय के रजिस्ट्रार जनरल हीरा सिंह बोनाल ने बृहस्पतिवार को नोटिफिकेशन जारी कर न्यायाधीशों के तबादलों की सूची जारी कर दी है। आदेशों के अनुसार सिविल जज जूनियर डिविजन पौड़ी गढ़वाल शमा परवीन का तबादला ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट फर्स्ट हल्द्वानी किया गया है। फर्स्ट एडिशनल सिविल जज जूनियर डिविजन नैनीताल जयश्री राणा को सिविल जज जूनियर डिविजन नैनीताल, सिविल जज जूनियर डिविजन विकासनगर रमेश चंद्र को माह में तीन दिन कैंप कोर्ट चकराता का चार्ज दिया गया है।
फर्स्ट एडिशनल सिविल जज जूनियर डिविजन हरिद्वार मीनाक्षी शर्मा का तबादला सिविल जज जूनियर डिविजन खटीमा, ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट तृतीय हरिद्वार भारती मंगलानी का तबादला सिविल जज जूनियर डिविजन गैणसैंण किया गया है।
ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट रुद्रपुर ऐश्वर्य बोरा का तबादला सिविल जज जूनियर डिविजन रुड़की, एडिशनल सिविल जज जूनियर डिविजन खटीमा पारुल थपलियाल का तबादला ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट फर्स्ट हरिद्वार, सिविल जज जूनियर डिविजन गैणसैंण अमित भट्ट का तबादला सिविल जज जूनियर डिविजन लक्सर, ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट द्वितीय देहरादून चंद्रेश्वरी सिंह का तबादल सिविल जज जूनियर डिविजन श्रीनगर, ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट टनकपुर राजेंद्र कुमार का तबादला सिविल जज जूनियर डिविजन ऋषिकेश, फर्स्ट एडिशनल सिविल जज जूनियर डिविजन रुड़की कृष्तिका गुंज्याल का तबादला एडिशनल सिविल जज जूनियर डिविजन खटीमा, सिविल जज जूनियर डिविजन लक्सर रजनीश मोहन का तबादला सिविल जज जूनियर डिविजन टनकपुर, सिविल जज जूनियर डिविजन रुद्रपुर पुनीत कुमार का तबादला फर्स्ट एडिशनल सिविल जज जूनियर डिविजन रुड़की, सिविल जज जूनियर डिविजन जसपुर प्रकाश चंद्र का तबादला ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट द्वितीय देहरादन, ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट फर्स्ट हल्द्वानी भावना पांडे, सिविल जज जूनियर डिविजन हल्द्वानी, सिविल जज जूनियर डिविजन चकराता रिजवान अंसारी का तबादला सिविल जज जूनियर डिविजन देहरादून किया गया है।
ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट फर्स्ट हरिद्वार कंचन चौधरी को फर्स्ट एडिशनल सिविल जज जूनियर डिविजन हरिद्वार, सिविल जज जूनियर डिविजन ऊखीमठ लवल कुमार वर्मा का तबादला ज्यूडिशिल मजिस्ट्रेट फर्स्ट रुद्रपुर, ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट देहरादून पल्लवी गुप्ता का तबादला सिविल जज जूनियर डिविजन रुद्रपुर, फर्स्ट एडिशनल सिविल जज जूनियर डिविजन हल्द्वानी उर्वशी रावत को ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट ऋषिकेश, फर्स्ट एडिशनल सिविल जज जूनियर डिविजन रुद्रपुर चेयरब बत्रा का तबादला सिविल जज जूनियर डिविजन जसपुर किया गया है।
वहीं जिला एवं सत्र न्यायालय नैनीताल के जज राजीव कुमार खुल्बे को अतिरिक्त चार्ज देते हुए फूड सेफ्टी एपीलेट ट्रिब्यूनल हल्द्वानी बनाया गया है। इसी क्रम में फूड सेफ्टी एपीलेट ट्रिब्यूनल हल्द्वानी शाहनशाह मोहम्मद दिलबर दानिश का स्थानांतरण फर्स्ट एडिशनल डिस्ट्रिक एंड सेशन जज हरिद्वार, फर्स्ट एडिशनल डिस्ट्रिक एंड सेशन जज हरिद्वार के सहदेश सिंह को द्वितीय एडिशनल डिस्ट्रिक एंड सेशन जज हरिद्वार, एडिशनल डिस्ट्रिक एंड सेशन जज-स्पेशल जज पोस्को देहरादून रमा पांडे का स्थानांतरण एडिशनल डिस्ट्रिक एंड सेशन जज टिहरी किया गया है।
द्वितीय एडिशनल डिस्ट्रिक एंड सेशन जज हरिद्वार भरत भूषण पांडे को तृतीय एडिशनल डिस्ट्रिक एंड सेशन जज हरिद्वार नियुक्त किया है। एडिशनल डिस्ट्रिक जज -स्पेशल जज पाक्सो हरिद्वार अर्चना सागर का स्थानांतरण एडिशनल डिस्ट्रिक जज-स्पेशल पाक्सो हल्द्वानी किया है।
एडिशनल सेक्रेट्री लॉ कम एडिशनल एलआर रितेश कुमार श्रीवास्तव का स्थानांतरण फिफ्थ एडिशनल डिस्ट्रिक एंड सेशन जज हरिद्वार, एडिशनल डिस्ट्रिक जज-स्पेशल जज पाक्सो हल्द्वानी मनीष कुमार पांडे का स्थानांतरण एडिशनल डिस्ट्रिक जज अल्मोड़ा, सेवंथ एडिशनल डिस्ट्रिक एंड सेशन जज देहरादून मीना देऊपा को एडिशनल डिस्ट्रिक एंड सेशन जज-पोक्सो देहरादून, फिफ्थ एडिशनल डिस्ट्रिक एंड सेशन जज हरिद्वार अंजलि नोनियाल को एडिशनल डिस्ट्रिक एंड सेशन जज-स्पेशल जज पोक्सो हरिद्वार, ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट द्वितीय रुद्रपुर शालिनी दादर को ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट फर्स्ट रुद्रपुर बनाया गया है।
चीफ ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट पिथौरागढ़ सुधीर तोमर माह में तीन दिन डीडीहाट पिथौरागढ में कैंप कोर्ट करेंगे। चीफ ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट अल्मोड़ा मनमोहन सिंह का स्थानांतरण सिविल जज सीनियर डिविजन ऋषिकेश किया गया है। वहीं द्वितीय एडिशनल सिविल जज सीनियर डिविजन हरिद्वार ज्योति बाला को फर्स्ट एडिशनल सिविल जज सीनियर डिविजन हरिद्वार नियुक्त किया है।
साथ ही द्वितीय एडिशनल चीफ ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट देहरादून रिंकी सेहनी का तबादला चीफ ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट अल्मोड़ा, द्वितीय एडिशनल सिविल जज सीनियर डिविजन देहरादून शहजाद अहमद का तबादला चीफ ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट रुद्रप्रयाग, सेक्रेट्री डिस्ट्रिक लीगल सर्विस अथॉरिटी चंपावत मोहम्मद याकूब का तबादला द्वितीय एडिशनल चीफ ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट देहरादून, चीफ ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट रुद्रप्रयाग संजय सिंह का तबादला द्वितीय एडिशनल सिविल जज सीनियर डिविजन देहरादून, द्वितीय एडिशनल सिविल जज सीनियर डिविजन रुद्रपुर ललिता सिंह का तबादला फर्स्ट एडिशनल सिविल जज सीनियर डिविजन रुद्रपुर, सेक्रेट्री डिस्ट्रिक लीगल अथॉरिटी रुद्रप्रयाग आरती सरोहा का तबादला फिफ्थ एडिशनल सिविल जज सीनियर डिविजन देहरादून, तृतीय एडिशनल सिविल जज सीनियर डिविजन रुद्रपुर संजीव कुमार को द्वितीय एडिशनल सिविल जज सीनियर डिविजन रुद्रपुर, एडिशनल सिविल जज सीनियर डिविजन रुड़की सिमरनजीत कौर को एडिशनल चीफ ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट रुड़की, फोर्थ एडिशनल सिविल जज सीनियर डिविजन रुद्रपुर नेहा कय्यूम को तृतीय एडिशनल सिविल जज सीनियर डिविजन रुद्रपुर, फिफ्थ एडिशनल सिविल जज सीनियर डिविजन रुद्रपुर अकरम अली को फोर्थ एडिशनल सिविल जज सीनियर डिविजन रुद्रपुर, सिविल जज जूनियर डिविजन हल्द्वानी दयाराम को पदोन्नत कर सिविल जज सीनियर डिविजन कैडर और उनका स्थानांतरण कर 6 एडिशनल सिविल जज सीनियर डिविजन देहरादून भेजा गया है।
इनके अलावा सिविल जज जूनियर डिविजन चंपावत आफिया मतीन को पदोन्नत कर सिविल जज सीनियर डिविजन कैडर व स्थानांतरण सेवंथ एडिशनल सिविल जज सीनियर डिविजन देहरादून, सिविल जज जूनियर डिविजन श्रीनगर अमित कुमार को पदोन्नत कर सिविल जज सीनियर डिविजन कैडर व उनका स्थानांतरण द्वितीय एडिशनल सिविल जज सीनियर डिविजन हरिद्वार, ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट ऋषिकेश आलोक राम त्रिपाठी को पदोन्नत कर सिविल जज सीनियर डिविजन कैडर व उनका स्थानांतरण फिफ्थ एडिशनल सिविल जज सीनियर डिविजन रुद्रपुर, सिविल जज जूनियर डिविजन देहरादून मिथलेश पांडे को पदोन्नत कर सिविल जज सीनियर डिविजन कैडर व 8 एडिशनल सिविल जज सीनियर डिविजन देहरादून, सिविल जज जूनियर डिविजन डीडीहाट पिथौरागढ रविंद्र देव मिश्रा को पदोन्नत कर सिविल जज सीनियर डिविजन कैडर व 9 एडिशनल सिविल जज सीनियर डिविजन देहरादून, सिविल जज जूनियर डिविजन खटीमा रवि रंजन को पदोन्नत कर सिविल जज सीनियर डिविजन कैडर व उनका स्थानांतरण तृतीय एडिशनल सिविल जज सीनियर डिविजन हरिद्वार किया गया है। सिविल जज जूनियर डिविजन रुड़की कपिल कुमार त्यागी को पदोन्नत कर सिविल जज सीनियर डिविजन कैडर व एडिशनल सिविल जज सीनियर डिविजन रुड़की, सिविल जज जूनियर डिविजन नैनीताल अभय सिंह को पदोन्नत कर सिविल जज सीनियर डिविजन कैडर व सिविल जज सीनियर डिविजन नैनीताल, सिविल जज जूनियर डिविजन टनकपुर ममता पंत को पदोन्नत कर सिविल जज सीनियर डिविजन कैडर कर स्थानांतरण एडिशनल सिविल जज सीनियर डिविजन टिहरी और सिविल जज जूनियर डिविजन ऋषिकेश अनामिका को पदोन्नत कर सिविल जज सीनियर डिविजन बनाया गया है।

यह भी पढ़ें : उच्च न्यायालय के न्यायाधीश आलोक सिंह का यूपी के लिए स्थानांतरण

-आलोक सिंह का यूपी हाईकोर्ट के लिए स्थानांतरण की सुप्रीम कोर्ट की कोलेजियम ने गत पांच मार्च को की थी सिफारिश
नवीन समाचार, नैनीताल, 27 मार्च 2020। उत्तराखंड उच्च न्यायालय के न्यायाधीश न्यायमूर्ति आलोक सिंह का उत्तर प्रदेश के इलाहाबाद उच्च न्यायालय को स्थानांतरण हो गया है। शुक्रवार को भारत सरकार के न्याय विभाग के सचिव राजिंदर कश्यप के हस्ताक्षरों से उनके स्थानांतरण का आदेश जारी हो गया है। सर्वोच्च न्यायालय की कोलोजियम ने गत पांच मार्च को उनके स्थानांतरण की सिफारिश की थी। न्यायमूर्ति सिंह के तबादले से उत्तराखंड उच्च न्यायालय में न्यायाधीशों की संख्या 11 पदों के सापेक्ष घटकर 10 हो जाएगी।
उल्लेखनीय है कि उत्तराखंड के रुड़की के मूल निवासी व यहीं 28 अप्रैल 1959 को पैदा हुए न्यायमूर्ति सिंह उत्तराखंड राज्य बनने के बाद से ही उत्तराखंड उच्च न्यायालय में वकालत करने लगे थे। वे 12 अक्टूबर 2009 में यहीं न्यायाधीश बने। 21 दिसंबर 2009 को उनका तबादला पंजाब व हरियाणा उच्च न्यायालय को हुआ। बाद में वे 13 जून 2012 को झारखंड उच्च न्यायालय भेजे गए और 26 फरवरी 2013 को वापस उत्तराखंड उच्च न्यायालय आ गए और तब से यहीं न्यायाधीश के रूप में कार्यरत हैं।

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कुमाऊं विवि के दीक्षांत समारोह में मानद उपाधि प्राप्त करते सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़

नवीन समाचार, नैनीताल, 7 मार्च 2020। देश के सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ ने शनिवार को कुमाऊं विवि के 16वें दीक्षांत समारोह में देश की मौजूदा व्यवस्था को इशारों-इशारों में एक बड़ा संदेश दिया। अपने संक्षिप्त किंतु सारगर्भित वक्तव्य में न्यायमूर्ति चंद्रचूड़ ने कहा विविधता हमारे देश की कमजोरी नहीं वरन ताकत है। हमें विरोधी विचारधारा के लोगों को भी सुनें व उनका आदर करें।
न्यायमूर्ति चंद्रचूड़ ने हिंदी में अपने उद्बोधन में स्वयं से बात शुरू करते हुए कहा, वे महाराष्ट्र से हैं, इसलिए घर पर मराठी में बात करते हैं। परंतु पत्नी उड़ीसा से हैं, इसलिए उनसे उड़िया में भी बात होती है। न्यायालय में अंग्रेजी में बात होती है, परंतु जब दिल की बात करनी होती है तो हिंदी में करते हैं। कहा, उनके परिवार जैसी विविधता पूरे देश में है। यहां अलग-अलग भाषा, जीवनशैली व विचारधाराओं के लोग हैं, और यह विविधता हमारे देश की कमजोरी नहीं वरन ताकत है। उन्होंने छात्र-छात्राओं से मुखातिब होते हुए कहा, वे हमेशा अपनी अतरात्मा का दीप प्रज्वलित करें, तभी मानवता आगे बढ़ सकती है। उन्होंने विद्यार्थियों से कहा कि वे सवाल करते रहें। सवाल करने से ही जवाब मिलते हैं। सवाल खुद से भी करें और जवाब तलाशें। सवाल करके ही समाज को बदला जा सकता है। अपने माता, पिता व गुरु को हमेशा याद रखें, जिन्होंने इस मुकाम तक पहुंचाया है। साथ ही हर दिन को अपना आखिरी दिन समझकर दिन के अंत में सोचंे कि उन्होंने पूरे दिन में अपने समाज, देश के लिए क्या बेहतर किया।

टॉप करने से अधिक जरूरी अच्छा छात्र होना: पद्मश्री रावत

कुमाऊं विवि के दीक्षांत समारोह में मानद उपाधि प्राप्त करते पद्मश्री डा. सौमित्र रावत।

नैनीताल। कुमाऊं विवि के दीक्षांत समारोह में डीएससी की मानद उपाधि प्राप्त करने वाले झांसी यूपी निवासी सर गंगाराम अस्पताल के लीवर प्रत्यारोपण यूनिट के प्रमुख पद्मश्री डा. सौमित्र रावत ने कहा कि टॉपर होने से बेहतर अच्छा छात्र होना है। उन्होंने कहा कि वे कुमाऊं विवि के पहले चिकित्सक हैं जिसे दीक्षांत समारोह में मानद उपाधि दी गई है। इसे वे देश के चिकित्सकों को समर्पित करते हैं। उन्होंने बताया कि 17 वर्ष इंग्लेंड में कार्य करते हुए उन्होंने कभी भारत लौटने की नहीं सोची थी, किंतु पिता का स्वास्थ्य खराब होने से वे वापस लौट आए।

यह भी पढ़ें : न्यायमूर्ति मलिमथ बने उत्तराखंड उच्च न्यायालय के न्यायाधीश

नवीन समाचार, नैनीताल, 5 मार्च 2020। कर्नाटक उच्च न्यायालय से स्थानांतरित होकर आए न्यायमूर्ति रवि विजयकुमार मलिमथ ने गुरुवार सुबह 9 बजे उत्तराखंड उच्च न्यायालय में न्यायाधीश पद की शपथ ले उन्हें मुख्य न्यायाधीश की कोर्ट में मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति ने शपथ दिलाई। इससे पूर्व रजिस्ट्रार जनरल हीरा सिंह बोनाल ने उनकी नियुक्ति का राष्ट्रपति का आदेश पढ़ा। उल्लेखनीय है कि सर्वोच्च न्यायालय की कॉलिजियम की सिफारिश पर उनका स्थानांतरण उत्तराखंड उच्च न्यायालय के लिए किया गया है। इस मौके पर उनके परिजन भी उच्च न्यायालय परिसर में मौजूद रहे। मुख्य न्यायाधीश सहित अन्य न्यायाधीशों एवं वरिष्ठ अधिवक्ताओं ने उन्हें नियुक्ति पर बधाई दी। उल्लेखनीय है कि न्यायमूर्ति मलिमथ की नियुक्ति के बाद उत्तराखंड उच्च न्यायालय में न्यायाधीशों की संख्या 11 पदों के सापेक्ष पूरी यानी 11 हो गई है।
उल्लेखनीय है कि 25 मई 1962 को जन्मे न्यायमूर्ति रवि विजयकुमार मलिमथ कर्नाटक उच्च न्यायालय के पूर्व मुख्य न्यायाधीश स्वर्गीय वीएस मलीमथ के पुत्र हैं। उन्हें 28 जनवरी 1987 से बंगलौर से अधिवक्ता के रूप में मुख्यतया संवैधानिक, सिविल, क्रिमिनल, लेबर, सर्विस के मामलों की प्रेक्टिस प्रारंभ की और 18 फरवरी 2008 को कर्नाटक उच्च न्यायालय के अतिरिक्त न्यायाधीश नियुक्त हुए और 17 फरवरी 2010 को स्थायी न्यायाधीश बने थे।

यह भी पढ़ें : उत्तराखंड उच्च न्यायालय को गुरुवार को मिलेंगे एक नए न्यायाधीश

न्यायमूर्ति रवि विजयकुमार मलिमथ।-न्यायमूर्ति मलिमथ संभालेंगे में कार्यभारनवीन समाचार, देहरादून, 3 मार्च 2020। कर्नाटक उच्च न्यायालय से स्थानांतरित होकर आए न्यायमूर्ति रवि विजयकुमार मलिमथ गुरुवार 5 मार्च  को उत्तराखंड उच्च न्यायालय में न्यायाधीश पद की शपथ लेंगे। सर्वोच्च न्यायालय की कॉलिजियम की सिफारिश पर उनका स्थानांतरण उत्तराखंड उच्च न्यायालय के लिए हुआ है। उत्तराखंड उच्च न्यायालय के रजिस्ट्रार जनरल हीरा सिंह बोनाल ने मंगलवार देर शाम जानकारी दी कि न्यायमूर्ति मलिमथ गुरुवार पांच मार्च को सुबह नौ बजे मुख्य न्यायाधीश की कोर्ट में उत्तराखंड उच्च न्यायालय के न्यायाधीश पद की शपथ लेंगे।

उल्लेखनीय है कि 25 मई 1962 को जन्मे न्यायमूर्ति रवि विजयकुमार मलिमथ कर्नाटक उच्च न्यायालय के पूर्व मुख्य न्यायाधीश स्वर्गीय वीएस मलीमथ के पुत्र हैं। उन्हें 28 जनवरी 1987 से बंगलौर से अधिवक्ता के रूप में मुख्यतया संवैधानिक, सिविल, क्रिमिनल, लेबर, सर्विस के मामलों की प्रेक्टिस प्रारंभ की और 18 फरवरी 2008 को कर्नाटक उच्च न्यायालय के अतिरिक्त न्यायाधीश नियुक्त हुए और 17 फरव 2010 को स्थायी न्यायाधीश बने। 

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-सर्वोच्च न्यायालय की कॉलिजियम ने किया है प्रस्ताव, कर्नाटक हाईकोर्ट से आ सकते हैं न्यायमूर्ति मलिमथनवीन समाचार, नैनीताल, 19 फरवरी 2020। कर्नाटक उच्च न्यायालय के न्यायाधीश न्यायमूर्ति रवि विजयकुमार मलिमथ उत्तराखंड उच्च न्यायालय आ सकते हैं। सर्वोच्च न्यायालय की कॉलिजियम ने न्यायमूर्ति मलिमथ सहित दिल्ली व महाराष्ट्र उच्च न्यायालय के न्यायाधीशों को हरियाणा व मेघालय में तबादले के लिए संस्तुति की है। कॉलिजियम ने 12 फरवरी को कर्नाटक के न्यायधीश रवि विजयकुमार मलिमथ को उत्तराखंड उच्च न्यायालय, दिल्ली के न्यायधीश डा. एस मुरलीधर को हरियाणा उच्च न्यायालय और महाराष्ट्र उच्च न्यायालय के न्यायाधीश रंजीत वी मोरे को मेघालय उच्च न्यायालय भेजने की संस्तुति की है।

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मुख्य न्यायाधीश रमेश रंगनाथन का पांव अचानक फिसल गयानवीन समाचार, नैनीताल, 29 फरवरी 2020। तीर्थनगरी के संगम स्थल पर गंगा पूजन के लिए पहुंचे उत्तराखंड हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश का पैर अचानक फिसल गया। साथ में चल रहे सीओ ने उन्हें तुरंत पकड़ लिया, जिससे बड़ा हादसा टल गया।शनिवार को मुख्य न्यायाधीश आर रंगनाथन अपनी पत्नी के साथ देवप्रयाग तीर्थ दर्शन को पहुंचे थे। दक्षिण भारत में भगवान रघुनाथ की विशेष महत्ता के चलते उन्होंने श्रीरघुनाथ मंदिर में पूजा-अर्चना करते हुए मुख्य पुजारी सोमनाथ भट्ट से आदिगुरु शंकराचार्य और मंदिर के बारे में जानकारी ली। उसके बाद उन्होंने संगम स्थल पर गंगा पूजन दर्शन की इच्छा जताई। संगम स्थल पर पूजा के लिए वह गंगा नदी की ओर बढ़े, तो अचानक उनका पैर फिसल गया। तभी साथ चल रहे सीओ नरेंद्रनगर प्रमोद शाह ने उन्हें आगे बढ़कर पकड़ लिया, जिससे वे गंगा की तेज धारा की चपेट में आने से बच गए और बड़ा हादसा टल गया। इस पर साथ चल रहे प्रशासन और पुलिस ने राहत की सांस ली। पूजा-अर्चना के बाद वे अपने गंतव्य को लौट गए हैं। पुजारी ने बताया कि दक्षिण भारत में देवप्रयाग को कंडवेंनुकडीनगरम के नाम से जाता है, जबकि भगवान रघुनाथ को नीलमपेरूमल पुण्डरीक वल्ली के रूप में पूजा जाता है। इसी मान्यता के आधार पर दक्षिण भारत निवासी मुख्य न्यायाधीश आर रंगनाथन पत्नी संग यहां पूजा अर्चना को पहुंचे थे। यहां पुरोहित विपुल सवासेरिया ने उनसे पूजा संपन्न करवाई। 

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नवीन समाचार, हरिद्वार, 21 नवंबर 2019। नैनीताल की किशोरी के उत्पीड़न के आरोप में फंसीं सिविल जज दीपाली शर्मा के खिलाफ चल रहे मुकदमे को ‘जन हित’ में वापस लेने की शासन की अपील को हरिद्वार के सीजेएम अरुण कुमार ने खारिज कर दिया है। सीजेएम की कोर्ट ने इसे जनहित से जुड़ा मामला न बताते हुए अपना आदेश सुनाया है। वहीं, कोर्ट ने जज दीपाली शर्मा को 21 दिसंबर को पेश होने के आदेश दिए हैं। बता दें कि सामाजिक कार्यकर्ता जेपी बडोनी ने उत्तराखंड शासन के ‘जन हित’ में मुकदमा वापस लेने के फैसले के खिलाफ सीजेएम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था।दीपाली शर्मा के लिए इमेज परिणाम
उल्लेखनीय है कि पिछले वर्ष जनवरी में हाईकोर्ट के आदेश पर रोशनाबाद की जज कॉलोनी में रहने वाली सिविल जज सीनियर डिवीजन दीपाली शर्मा के घर से नैनीताल की एक किशोरी को मुक्त कराया गया था।यह कार्रवाई हुई थी। उस वक्त के जिला जज राजेंद्र सिंह चौहान तत्कालीन एसएसपी किशन कुमार वीके, एडीजे अमरिंदर सिंह इस पूरी कार्रवाई के दौरान मौजूद थे। जिला जज की मौजूदगी में ही जिला अस्पताल में किशोरी का मेडिकल परीक्षण हुआ था, जिसमें उसके शरीर पर चोटों के 20 निशान पाए गए थे। उस वक्त एएसपी रचिता जुयाल की ओर से सिडकुल थाने में जज दीपाली शर्मा के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया गया था। अप्रैल में सीओ कनखल रहे मनोज कात्याल ने दीपाली शर्मा के खिलाफ चार्जशीट दायर की थी। मामले में हाईकोर्ट ने जज दीपाली शर्मा को निलंबित कर दिया था।
वहीं, बीते अगस्त माह में उत्तराखंड शासन ने जज के खिलाफ दर्ज मुकदमे को वापस लेने का फैसला लिया था। इस संबंध में अभियोजन पक्ष ने सीजेएम कोर्ट में प्रार्थनापत्र दायर किया था। जज के खिलाफ दर्ज मुकदमे को वापस लिए जाने के उत्तराखंड शासन के फैसले को चुनौती देते हुए सामाजिक कार्यकर्ता जेपी बडोनी ने बुधवार को सीजेएम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। इधर बृहस्पतिवार को सीजेएम कोर्ट में शासन के फैसले को लेकर हुई सुनवाई के बाद कोर्ट ने जज के खिलाफ दर्ज मुकदमा वापस लेने की उत्तराखंड शासन की अपील को निरस्त कर दिया।
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‘नवीन समाचार’ विश्व प्रसिद्ध पर्यटन नगरी नैनीताल से ‘मन कही’ के रूप में जनवरी 2010 से इंटरननेट-वेब मीडिया पर सक्रिय, उत्तराखंड का सबसे पुराना ऑनलाइन पत्रकारिता में सक्रिय समूह है। यह उत्तराखंड शासन से मान्यता प्राप्त, अलेक्सा रैंकिंग के अनुसार उत्तराखंड के समाचार पोर्टलों में अग्रणी, गूगल सर्च पर उत्तराखंड के सर्वश्रेष्ठ, भरोसेमंद समाचार पोर्टल के रूप में अग्रणी, समाचारों को नवीन दृष्टिकोण से प्रस्तुत करने वाला ऑनलाइन समाचार पोर्टल भी है।
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