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बड़ा समाचार : न्यायमूर्ति वर्मा बने स्थायी न्यायाधीश, मुख्य न्यायाधीश ने दिलाई शपथ

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डॉ.नवीन जोशी @ नवीन समाचार, नैनीताल, 25 मई 2021। उत्तराखंड उच्च न्यायालय के अतिरिक्त न्यायधीश न्यायमूर्ति आलोक वर्मा को स्थायी न्यायाधीश बनाये जाने के आदेश के बाद मंगलवार को उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायधीश न्यायमूर्ति राघवेंद्र सिंह चौहान ने पद एवं गोपनीयता की शपथ दिलाई। मुख्य न्यायधीश कोर्ट में आयोजित हुए शपथ ग्रहण में उच्च न्यायालय के रजिस्ट्रार जनरल धनंजय चतुर्वेदी ने राष्ट्रपति के हस्ताक्षरों से जारी वारंट व राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद केंद्रीय विधि एवं न्याय मंत्रालय अपर सचिव राजेंद्र कश्यप द्वारा जारी अधिसूचना पढ़ी। इसके बाद मुख्य न्यायधीश न्यायमूर्ति राघवेंद्र सिंह चौहान ने न्यायमूर्ति आलोक वर्मा को उत्तराखंड हाईकोर्ट के स्थायी जज के रूप में शपथ दिलाई। इस मौके पर वरिष्ठ न्यायधीश न्यायमूर्ति मनोज तिवारी व न्यायमूर्ति शरद कुमार शर्मा सहित अन्य न्यायाधीश मौजूद रहे। विदित हो कि न्यायमूर्ति आलोक वर्मा मई 2019 में उत्तराखंड उच्च न्यायालय के अतिरिक्त न्यायाधीश बनाये गए थे। वे इससे पूर्व उत्तराखंड के कई जिलों के जिला न्यायाधीश व प्रमुख सचिव विधि एवं न्याय उत्तराखंड भी रहे हैं। न्यायमूर्ति आलोक वर्मा के उत्तराखंड हाईकोर्ट का स्थायी न्यायधीश बनाये जाने पर हाईकोर्ट के अधिवक्ताओं ने बधाई दी है।

हाईकोर्ट के साथ अधीनस्थ न्यायालयों में वीडियो कांफ्रेंसिंग के नियम लागू
नैनीताल। उत्तराखंड उच्च न्यायालय द्वारा अप्रैल 2020 में बनाये गए गत वर्ष वीडियो कांफ्रेंसिंग के लिए बनाए गए नियम अब उच्च न्यायालय में पेश होने वाले सभी मुकदमों, अपील एवं प्रोसिडिंग एवं मामलों में भी लागू होंगे। इसके अलावा यह नियम उच्च न्यायालय के अधीनस्थ सिविल व क्रिमिनल कोर्ट, ट्रिब्यूनल, परिवार न्यायालय, विशेष न्यायालय, बाल न्याय बोर्ड आदि न्यायालयों में भी लागू होंगे। उच्च न्यायालय के रजिस्ट्रार जनरल धनंजय चतुर्वेदी की ओर से मंगलवार को जारी अधिसूचना सभी अधीनस्थ न्यायालयों को भेज दी गई है। ज्ञात हो कि पिछले वर्ष हाईकोर्ट ने वीडियो कांफ्रेंसिंग से न्यायिक कार्य किये जाने को लेकर कई नियम बनाये हैं। इनमें ‘गूगल मीट’ का वीडियो कांफ्रेंसिंग के लिए उपयोग करने एवं इसकी अनुपलब्धता होने पर ‘जित्सी मीट’ सॉफ्टवेयर का उपयोग करने की बात कही गई है।

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नवीन समाचार, नैनीताल, 22 मई 2021। उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने पूर्व में 22 दिसंबर 2020 को निलंबित न्यायाधीश-देहरादून के तत्कालीन जिला एवं सत्र न्यायाधीश प्रशांत जोशी का निलंबन वापस ले लिया है। साथ ही उन्हें हल्द्वानी स्थित फूूड सेफ्टी अपीलेट ट्रिब्यूनल में प्रसाइडिंग ऑफीसर के पद पर उन्हें नियुक्ति देने के लिए प्रदेश सरकार को अलग से संस्तुति की है। उल्लेखनीय है कि श्री जोशी वर्तमान में निलंबन अवधि में सिविल कोर्ट हल्द्वानी में संबद्ध हैं।
गौरतलब है कि श्री जोशी पर आरोप था कि वह 21 दिसंबर 2020 को मसूरी कैम्प कोर्ट को अपनी आधिकारिक कार की जगह केवल कृष्ण सोइन नाम के व्यक्ति की ऑडी कार पर जिला न्यायाधीश का बोर्ड लगाकर गए। बताया गया है कि ऑडी कार के मालिक के लिए देहरादून के राजपुर पुलिस स्टेशन में भारतीय दंड संहिता की धारा 420, 467, 471 व 120बी के तहत आरोपित है और मामले में दर्ज एफआईआर को निरस्त करने के लिए उच्च न्यायालय में याचिका दायर की गई। उच्च न्यायालय ने इस कृत्य को उत्तराखंड सरकारी जनसेवक रूल्स 2002 के नियम संख्या 3 1, 32 व 30 का उल्लंघन मानते हुए उन्हें निलंबित कर जिला न्यायाधीश रुद्रप्रयाग के मुख्यालय से संबद्ध कर दिया है। इस दौरान वह पूर्व अनुमति के बिना स्टेशन भी नहीं छोड़ सकेंगे।
हालांकि बाद में उन पर लगाए गए आरोप शडयंत्र के रूप में चर्चा में आए। इधर 7 जनवरी 2020 को उत्तराखंड बार काउंसिल के चेयरमैन सुरेंद्र पुंडीर की अध्यक्षता में हुई उत्तराखंड बार काउंसिल की बैठक में कहा गया कि जोशी को असंवैधानिक तरीके से उनका पक्ष जाने बिना निलंबित कर दिया गया। कहा गया कि श्री जोशी ईमानदार और बेदाग छवि के न्यायिक अधिकारी हैं। उन्हें षड्यंत्र के तहत फंसाया गया है। इसलिए बार काउंसिल ने तय किया कि इस मुद्दे पर काउंसिल का एक शिष्टमंडलने शीघ्र मुख्य न्यायाधीश से मिलकर उन्हें इस मामले में वस्तुस्थिति से अवगत कराएगा।

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-राज्य के न्यायिक जगत के लिए गर्व के पल
डॉ. नवीन जोशी @ नवीन समाचार, नैनीताल, 4 मई 2021। भारत के राष्ट्रपति, राम नाथ कोविंद ने एनएचआरसी यानी राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के सदस्य उत्तराखंड मूल के न्यायाधीश न्यायमूर्ति प्रफुल्ल चंद्र पंत को 25 अप्रैल 2021 से इसके अध्यक्ष के रूप में कार्य करने के लिए अधिकृत किया है। सदस्य के रूप में नियुक्ति से पहले, न्यायमूर्ति पंत 22 अप्रैल 2019 से एनएचआरसी के सदस्य एवं इससे पूर्व 13 अगस्त 2014 से 29 अगस्त 2017 तक भारत के सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश रहे हैं।
उल्लेखनीय है कि न्यायमूर्ति पंत का जन्म तब उत्तर प्रदेश राज्य का हिस्सा रहे उत्तराखंड राज्य के पिथौरागढ़ जनपद में 30 अगस्त 1952 को हुआ था। अपनी प्राथमिक और माध्यमिक शिक्षा के बाद, उन्होंने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से विज्ञान स्नातक की उपाधि प्राप्त की, और उसके बाद लखनऊ विश्वविद्यालय से एलएलबी की उपाधि प्राप्त की। न्यायमूर्ति पंत ने यूपी 1973 में बार काउंसिल इलाहाबाद में और इलाहाबाद में उच्च न्यायालय में कानून का अभ्यास किया। फरवरी 1976 से नवंबर 1976 तक उन्होंने सगौर में इंस्पेक्टर सेंट्रल एक्साइज एंड कस्टम्स, एमपी और उत्तर प्रदेश सिविल (न्यायिक) सेवा परीक्षा, 1973 के माध्यम से उत्तर प्रदेश न्यायिक सेवा में प्रवेश किया। 1990 में उन्हें उत्तर प्रदेश उच्चतर न्यायिक सेवा में पदोन्नत किया गया। उत्तराखंड के नए राज्य के निर्माण के बाद, उन्होंने राज्य के पहले सचिव, कानून और न्याय मंत्री के रूप में उत्तराखंड में कार्य किया। नैनीताल में उत्तराखंड उच्च न्यायालय के रजिस्ट्रार जनरल के रूप में नियुक्त होने से पहले उन्होंने नैनीताल में जिला और सत्र न्यायाधीश का पद भी संभाला था।
न्यायमूर्ति पंत ने 29 जून 2004 को उच्च न्यायालय उत्तराखंड के अतिरिक्त न्यायाधीश पद की शपथ ली, जिसके बाद 19 फरवरी 2008 को उन्हें उत्तराखंड उच्च न्यायालय के स्थायी न्यायाधीश के रूप में शपथ दिलाई गई। उन्होंने 20 सितंबर, 2013 को शिलांग में मेघालय के उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश के पद का कार्यभार संभाला और 12 अगस्त, 2014 तक जारी रखा। आगे बढ़ाए जाने पर उन्होंने 13 अगस्त, 2014 को सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश पद की शपथ ली और 29 अगस्त 2017 तक इस पद की शोभा बढ़ाई।
उत्तराखंड उच्च न्यायालय के न्यायाधीश के बाद मेघालय हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश और सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश के बाद अब राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के सदस्य के बाद अब आयोग के अध्यक्ष के रूप में कार्य करने के लिए अधिकृत किए गए हैं। इस तरह वह यह सभी उपलब्धियां हासिल करने वाले उत्तराखंड राज्य के पहले व्यक्ति भी बन गए हैं। न्यायमूर्ति पंत उत्तराखंड के पहले निवासी हैं जो किसी प्रदेश के मुख्य न्यायाधीश और अब सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश बनने के बाद देश के इस शीर्ष पर उनकी नियुक्ति हुई है। उनसे पूर्व न्यायमूर्ति बीसी कांडपाल को ही उत्तराखंड हाई कोर्ट के कार्यकारी मुख्य न्यायाधीश के रूप में कार्यरत रहने का गौरव प्राप्त हुआ था, जबकि उत्तराखंड उच्च न्यायालय के वर्तमान कार्यकारी न्यायाधीश न्यायमूर्ति बीके बिष्ट भी उत्तराखंड के ही हैं।
मेघालय का मुख्य न्यायाधीष बनने पर उन्होंने अपनी उपलब्धि का श्रेय बड़े भाई चंद्रशेखर पंत को दिया था। इस मौके पर बातचीत में न्यायमूर्ति पंत ने कहा कि वह ईमानदारी और निडरता से कार्य करने वाले न्यायाधीशों को ही सफल मानते हैं। पदोन्नति के बजाय मनुष्य के रूप में सफलता ही एक न्यायाधीश और उनकी सफलता है। आज भी वह 1976 में नैनीताल के एटीआई में न्यायिक सेवा शुरू करने के दौरान प्रशिक्षण में मिले उस पाठ को याद रखते हैं, जिसमें कहा गया था कि एक न्यायिक अधिकारी को ‘हिंदू विधवा स्त्री’ की तरह रहते हुए समाज से जुड़ाव नहीं रखना चाहिए। इससे न्याय प्रभावित हो सकता है।

मजिस्ट्रेट से शीर्ष अदालत तक का सफर तय किया जस्टिस पंत ने
न्यायमूर्ति प्रफुल्ल चंद्र पंत ने देश की सर्वाधिक कनिष्ठ अदालत से लेकर शीर्ष अदालत का सफर तय किया है। न्यायपालिका के इतिहास में यह मुकाम बहुत मुश्किल से हासिल होता है और अभी तक कुछेक न्यायाधीश ही ऐसा कर पाए हैं। न्यायमूर्ति पंत के इस तरह के एक के बाद एक शीर्ष न्यायिक पदों तक पहुंचने में किस्मत ने भी उनका साथ निभाया है। उत्तराखंड के पिथौरागढ़ में जन्मे जस्टिस पंत 24 साल की उम्र में ही उत्तर-प्रदेश न्यायिक सेवा के अफसर नियुक्त हो गए थे। अविभाजित उत्तर प्रदेश में वह गाजियाबाद, पीलीभीत, रानीखेत, बरेली और मेरठ में प्रथम श्रेणी के मजिस्ट्रेट रहे। 1990 में उच्चतर न्यायिक सेवा में पदोन्नत होकर अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश बने। जून 2004 में वह उत्तराखंड उच्च न्यायालय के न्यााधीश नियुक्त किए गए।

यह भी पढ़ें : तीन जिलों के जिला जज सहित हाईकोर्ट ने किए राज्य के 100 से अधिक न्यायाधीशों के तबादले

नवीन समाचार, नैनीताल, 08 अप्रैल 2021। उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने बृहस्पतिवार को 100 से अधिक न्यायाधीशों के तबादले कर दिए हैं। प्रमुख रूप से यूएस नगर के जिला जज नरेंद्र दत्त को हटाककर चमोली का जिला जज बनाया गया है, जबकि उनकी जगह प्रेम सिंह खिमाल यूएस नगर के नए जिला जज होंगे। वहीं चमोली के जिला जल राजेंद्र सिंह को शासन में प्रमुख सचिव न्याय बनाया गया है। इनके अलावा रुद्रप्रयाग के जिला जज हरीश कुमार गोयल को वाणिज्यिक कर ट्रिब्यूनल का अध्यक्ष, हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार विजीलेंस अनुज कुमार संेगल को हटाकर देहरादून जिले का परिवार न्यायालय का प्रमुख न्यायाधीश बनाया गया है।
देखें तबादलों की पूरी सूची : File-769

File-770

File-771

File-772

यह भी पढ़ें : बड़ी कार्रवाई : उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने समान आरोप में एक और न्यायाधीश को किया निलंबित

नवीन समाचार, नैनीताल, 23 फरवरी 2021। उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने निजी वाहन का उपयोग करने के आरोप में अल्मोड़ा में तैनात सिविल जज सीनियर डिवीजन, न्यायिक मजिस्ट्रेट अभिषेक कुमार श्रीवास्तव को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। साथ ही उन्हें निलंबित अवधि में देहरादून जिला कोर्ट से सम्बद्ध किया गया है। मंगलवार को रजिस्ट्रार जनरल धनंजय चतुर्वेदी की ओर से इस बारे में आदेश जारी कर दिया गया है। निलंबित जज पर श्रीवास्तव पर सेवा नियमावली के उल्लंघन का आरोप लगने के बाद यह कार्रवाई की गई है।
उच्च न्यायालय नैनीताल के रजिस्ट्रार द्वारा जारी आदेश में कहा गया है कि अल्मोड़ा में नियुक्त सिविल जज (सीनियर डिवीजन) अभिषेक कुमार श्रीवास्तव के खिलाफ शिकायत मिली थी कि उनके और उनके परिवार के सदस्यों द्वारा आरोपी चंद्र मोहन सेठी के निजी वाहनों का उपयोग दिल्ली, गाजियाबाद और नोएडा में अपने रिश्तेदारों की निजी यात्रा के लिए किया जा रहा है। बताया गया है कि आरोपी चंद्र मोहन सेठी का वर्ष 2013 का एक आपराधिक मामला सिविल जज (सीनियर डिवीजन) अल्मोड़ा की अदालत में विचाराधीन है। आदेश में कहा गया है कि उक्त आरोप से जज अभिषेक कुमार श्रीवास्तव की सत्यनिष्ठा पर गंभीर संदेह होता है। जो आचरण नियमों के तहत कदाचार की श्रेणी में आता है और उत्तराखंड सरकारी कर्मचारी आचरण नियमावली 2002 के नियम-30 के आचरण का उल्लंघन है। उल्लेखनीय है कि इससे पूर्व देहरादून के तत्कालीन न्यायाधीश को भी एक आरोपित के वाहन का उपयोग करने के आरोप में निलंबित किया जा चुका है।

यह भी पढ़ें : एक महीने पहले ही न्यायमूर्ति लोकपाल सिंह को दे दी गई विदाई, चार अधिवक्ताओं की खुल सकती है लॉटरी

नवीन समाचार, देहरादून, 15 जनवरी 2021। उत्तराखंड उच्च न्यायालय के न्यायाधीश लोकपाल सिंह को शुक्रवार को सेवानिवृत्त होने पर उच्च न्यायाल में मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति राघवेंद्र सिंह चौहान की अध्यक्षता में ‘फुल कोर्ट रिफ्रेंस’ आयोजित कर तथा बार सभागार में भावपूर्ण विदाई दी गई। इस मौके पर न्यायाधीश लोकपाल सिंह ने कहा उनके मन में टीस है कि न्यायपालिका में महिला अधिवक्ताओं का प्रतिनिधित्व नहीं हो पा रहा है, जबकि महिलाएं कहीं भी पुरुष अधिवक्ताओं से कमतर नहीं हैं। इस दौरान उनके न्यायाधीश के रूप में करीब तीन साल नौ माह के कार्यकाल की सराहना और उनकी दीर्घायु व खुशी जीवन की कामना की गई। उल्लेखनीय है कि न्यायमूर्ति लोकपाल सिंह वास्तव में 15 फरवरी को सेवानिवृत्त होने वाले हैं, लेकिन इस दौरान उच्च न्यायालय में शीतकालीन अवकाश होने की वजह से उन्हें आज ही विदाई दे दी गई। उनकी सेवानिवृत्ति के बाद उत्तराखंड उच्च न्यायालय के दो अधिवक्ताओं की न्यायाधीश बनने के रूप में लॉटरी खुल सकती है।
विदाई समारोह में न्यायमूर्ति मनोज कुमार तिवारी, न्यायमूर्ति शरद कुमार शर्मा, न्यायमूर्ति एनएस धानिक, न्यायमूर्ति आरसी खुल्बे, न्यायमूर्ति रविन्द्र मैठाणी, न्यायमूर्ति आलोक वर्मा, महाधिवक्ता एसएन बाबुलकर, हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के अध्यक्ष पूरन सिंह बिष्ट, सचिव जयवर्धन कांडपाल पूर्व सांसद डॉ. महेंद्र सिंह पाल, बीसी पांडे, एमएस त्यागी, राकेश थपलियाल, बीडी उपाध्याय, एसएस पवार, गौरा देवी देव, ममता जोशी, जगदीश कर्नाटक, बीएस नेगी सहित बड़ी संख्या में अधिवक्तागण व न्यायिक अधिकारी मौजूद रहे। विदाई समारोह का संचालन रजिस्ट्रार जनरल धनंजय चतुर्वेदी ने किया।
उल्लेखनीय है कि पहले न्यायमूर्ति बीके बिष्ट व न्यायमूर्ति सुधांशु धूलिया की गत दिनों पदोन्नति और अब न्यायमूर्ति लोकपाल सिंह की सेवानिवृत्ति के साथ ही उत्तराखंड उच्च न्यायालय से अधिवक्ताओं के कोटे से ही न्यायाधीश बने न्यायमूर्ति आलोक सिंह भी आगामी अप्रैल माह में सेवानिवृत्त होने जा रहे हैं। इस तरह अधिवक्ताओं के कोटे से न्यायाधीश बनने की फिलहाल तीन और अप्रैल माह तक चार सीटें खाली होने जा रही हैं। इधर इन सीटों के लिए उच्च न्यायालय के अरविंद वशिष्ठ, डीएस पाटनी, रामजी श्रीवास्तव, राकेश थपलियाल, जीएस विर्क, आरसी टम्टा व मनीषा भंडारी आदि अधिवक्ताओं के नामों को लेकर चर्चाएं चल रही हैं। इसके साथ ही यह बताना भी समीचीन होगा कि नई एसओपी के अनुसार अब न्यायाधीश के एक पद के लिए तीन नाम भेजे जाने हैं, उनमें अनुसूचित जाति, जनजाति, अन्य पिछड़ी जातियों व अल्पसंख्यक वर्गों के साथ ही महिला अधिवक्ताओं के नाम भी भेजे जाने हैं। मालूम हो कि उत्तराखंड उच्च न्यायालय में अब तक केवल निर्मल यादव ही न्यायाधीश के पद पर नियुक्त रही हैं, और वह भी उत्तराखंड से नहीं थीं। इस प्रकार यह भी माना जा रहा है कि इस बार किसी महिला अधिवक्ता के न्यायाधीश बनने की भी प्रबल संभावना है। लिहाजा इन पदों पर अधिवक्ता बनने के लिए अधिवक्ताओं के प्रयास तेज होने भी तय हैं। मालूम हो कि उत्तराखंड उच्च न्यायालय में मुख्य न्यायाधीशों सहित न्यायाधीशों के कुल 11 पद हैं। वर्तमान में यहां मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति राघवेंद्र सिंह चौहान, न्यायमूर्ति मनोज कुमार तिवारी, न्यायमूर्ति शरद कुमार शर्मा, न्यायमूर्ति एनएस धानिक, न्यायमूर्ति आरसी खुल्बे, न्यायमूर्ति रविन्द्र मैठाणी, न्यायमूर्ति आलोक वर्मा न्यायाधीश हैं।

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-बार काउंसिल ऑफ उत्तराखंड, बिन सुने एक तरफा कार्रवाई पर सीजे से मिलेंगे
नवीन समाचार, नैनीताल, 07 जनवरी 2020। उत्तराखंड बार काउंसिल देहरादून के निलंबित जिला जज प्रशांत जोशी के पक्ष में आने का फैसला लिया है। बार काउंसिल ने श्री जोशी के निलंबन को असंवैधानिक बताते हुए शीघ्र ही उत्तराखंड हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश से मिलने का फैसला किया है।
बार काउंसिल के चेयरमैन सुरेंद्र पुंडीर की अध्यक्षता में हुई उत्तराखंड बार काउंसिल की बैठक में सदस्य मनमोहन लांबा ने प्रस्ताव रखा कि देहरादून के जिला जज प्रशांत जोशी को उनका पक्ष जाने बिना निलंबित कर दिया गया, जो कि असंवैधानिक है। उन्होंने कहा कि श्री जोशी ईमानदार और बेदाग छवि के न्यायिक अधिकारी हैं। उन्हें षड्यंत्र के तहत फंसाया गया है। इसलिए बार काउंसिल इस पर संज्ञान ले। बार काउंसिल सदस्य मुन्फैत हुसैन व हरि सिंह ने भी मनमोहन लांबा के प्रस्ताव का समर्थन किया। इस पर काउंसिल के अध्यक्ष श्री पुंडीर ने सदन को अवगत कराया कि शीघ्र ही काउंसिल का एक शिष्टमंडलने शीघ्र मुख्य न्यायाधीश से मिलकर उन्हें इस मामले में वस्तुस्थिति से तथा कोविद-19 से अधिवक्ताओं को होने वाली परेशानियों से अवगत कराएगा।

यह भी पढ़ें : उत्तराखंड उच्च न्यायालय की बड़ी कार्रवाई: एक जिला जज को किया निलंबित…

नवीन समाचार, नैनीताल, 22 दिसम्बर 2020। उत्तराखंड उच्च न्यायालय से मंगलवार को बड़ी कार्रवाई करते हुए देहरादून जनपद के जिला एवं सत्र न्यायाधीश प्रशांत जोशी को निलंबित कर दिया है। उन पर आरोप है कि वह 21 दिसंबर 2020 को मसूरी कैम्प कोर्ट को अपनी आधिकारिक कार की जगह केवल कृष्ण सोइन नाम के व्यक्ति की ऑडी कार पर जिला न्यायाधीश का बोर्ड लगाकर गए। बताया गया है कि ऑडी कार के मालिक के लिए देहरादून के राजपुर पुलिस स्टेशन में भारतीय दंड संहिता की धारा 420, 467, 471 व 120बी के तहत आरोपित है और मामले में दर्ज एफआईआर को निरस्त करने के लिए उच्च न्यायालय में याचिका दायर की गई है। उच्च न्यायालय ने इस कृत्य को उत्तराखंड सरकारी जनसेवक रूल्स 2002 के नियम संख्या 3 1, 32 व 30 का उल्लंघन मानते हुए उन्हें निलंबित कर जिला न्यायाधीश रुद्रप्रयाग के मुख्यालय से संबद्ध कर दिया है। इस दौरान वह पूर्व अनुमति के बिना स्टेशन भी नहीं छोड़ सकेंगे।

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उत्तराखंड उच्च न्यायालय के नए मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति राघवेंद्र सिंह चौहान

नवीन समाचार, नैनीताल, 31 दिसम्बर 2020। तेलंगाना हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश (सीजे) राघवेंद्र सिंह चौहान का स्थानांतरण उत्तराखंड हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश के पद कर दिया गया है। उनका स्थानांतरण आदेश यहां पहुंच गया है। न्यायमूर्ति रमेश रंगनाथन की सेवानिवृत्ति के बाद हाईकोर्ट के वरिष्ठ न्यायमूर्ति रवि मलिमठ कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश का दायित्व संभाले हुए थे। उनका स्थानांतरण अब हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट कर दिया गया है।
उत्तराखंड हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश पद पर आ रहे राघवेंद्र चौहान का जन्म दिसंबर 1959 को राजस्थान में हुआ था। उन्होंने स्नातक की डिग्री 1980 में अमेरिका के आर्काडिया विश्वविद्यालय से और लॉ की डिग्री दिल्ली विश्वविद्यालय से 1983 में हासिल की। 2005 में वे राजस्थान हाईकोर्ट में न्यायाधीश नियुक्त हुए। 2015 में कर्नाटक हाईकोर्ट स्थानांतरण के बाद वे 2018 में हैदराबाद हाईकोर्ट में जज बने और तेलंगाना अलग राज्य बनने के बाद वहां कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश नियुक्त हुए। जून 2019 में तेलंगाना हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश बनने के बाद उन्होंने न्याय प्रणाली में सुधारों की शुरुआत की। इस दौरान उन्होंने कोविड -19 प्रबंधन, स्वास्थ्य के मामलों और झीलों प्रबंधन जैसे प्रमुख मुद्दों को सुव्यवस्थित करने को लेकर महत्वपूर्ण दिशा निर्देश भी जारी किए। लॉकडाउन के दौरान बड़ी संख्या में प्रवासी श्रमिकों के लिए एक सुरक्षित मार्ग सुनिश्चित कराने पर उनके प्रयास की सराहना की गई।

न्यायमूर्ति सुधांशु धूलिया।

इधर, हाईकोर्ट के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश रवि मलिमठ का स्थानांतरण हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट कर दिया गया है। राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद केंद्रीय विधि एवं न्याय मंत्रालय के संयुक्त सचिव राजेंद्र कश्यप के हस्ताक्षरों से जारी स्थानांतरण आदेश उत्तराखंड हाईकोर्ट पहुंच गया है। न्यायमूर्ति रवि मलिमठ के हिमाचल प्रदेश स्थानांतरण की संस्तुति सुप्रीम कोर्ट की कोलेजियम ने 16 दिसंबर को की थी। पांच मार्च 2020 को उन्होंने उत्तराखंड हाईकोर्ट के जज के रूप में शपथ ली थी और हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश रमेश रंगनाथन की सेवानिवृत्ति के बाद वे उत्तराखंड हाईकोर्ट के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश बने।

यह भी पढ़ें : उत्तराखंड उच्च न्यायालय के कार्यकारी मुख्य न्यायाधीश का हिमांचल प्रदेश को तबादला…

नवीन समाचार, नैनीताल, 18 दिसम्बर 2020। सुप्रीम कोर्ट की कॉलेजियम ने उत्तराखंड हाईकोर्ट के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश रवि मलिमठ का तबादला हिमाचल हाईकोर्ट में किए जाने की सिफारिश कर दी है।
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न्यायमूर्ति रवि विजयकुमार मलिमथ।

यमूर्ति मलिमठ ने कर्नाटक हाईकोर्ट से तबादला होने पर फरवरी 2020 में उत्तराखंड हाईकोर्ट में कार्यभार ग्रहण किया था। उत्तराखंड हाईकोर्ट के तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश रमेश रंगनाथन के सेवानिवृत्त होने पर जुलाई 2020 में उन्हें कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश नियुक्त किया गया था।
उल्लेखनीय है कि सुप्रीम कोर्ट की कॉलेजियम तेलंगाना हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस राघवेंद्र सिंह चौहान का तबादला उत्तराखंड हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश पद पर करने की सिफारिश कर चुकी है।

यह भी पढ़ें : उत्तराखंड उच्च न्यायालय को मिले नए मुख्य न्यायाधीश, उत्तराखंड उच्च न्यायालय से न्यायमूर्ति धूलिया भी बने मुख्य न्यायाधीश..

नवीन समाचार, नैनीताल, 16 दिसम्बर 2020। उत्तराखंड उच्च न्यायालय के वरिष्ठ न्यायाधीश सुधांशु धूलिया पदोन्नत होकर गुवाहाटी उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश होंगे। सर्वोच्च न्यायालय की कोलेजियम ने गत 14 दिसंबर को उनके नाम पर मुहर लगा दी है। उल्लेखनीय है कि सर्वोच्च न्यायालय की कोलेजियम ने 14 दिसंबर को ही तेलंगाना उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति आरएस चौहान को उत्तराखंड उच्च न्यायालय का मुख्य न्यायाधीश नियुक्त किया है।

न्यायमूर्ति सुधांशु धूलिया।

उल्लेखनीय है कि 10 अगस्त 1960 को जन्मे न्यायमूर्ति धूलिया मूल रूप से पौड़ी गढ़वाल जनपद के मदनपुर गांव के निवासी हैं। उनके पिता स्वर्गीय केशव चंद्र धूलिया भी इलाहाबाद उच्च न्यायालय में न्यायाधीश के पद पर रह चुके हैं। देहरादून, इलाहाबाद व लखनऊ में पढ़ाई करने के बाद उन्होंने 1981 में इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक, एवं 1983 में आधुनिक इतिहास से स्नातकोत्तर की डिग्री ली एवं 1986 में एलएलबी की। 1986 में ही उन्होंने इलाहाबाद उच्च न्यायालय में अधिवक्ता के रूप में अपने न्यायिक कॅरियर की शुरूआत की और उत्तराखंड राज्य बनने के बाद अपने मूल प्रदेश उत्तराखंड आकर नैनीताल उच्च न्यायालय में प्रैक्टिस करने लगे थे। उत्तराखंड उच्च न्यायालय के वह मुख्य स्थायी अधिवक्ता सहित विभिन्न पदों पर रहे, तथा एक नवम्बर, 2008 में वह उत्तराखंड उच्च न्यायालय के न्यायाधीश बने।

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नवीन समाचार, नई दिल्ली, 16 दिसंबर 2020। उत्तराखंड उच्च न्यायालय के लिए नए मुख्य न्यायाधीश की नियुक्ति हो गई हैं। सुप्रीम कोर्ट की कॉलेजियम ने तेलंगाना के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति राघवेंद्र सिंह चौहान का स्थानांतरण उत्तराखंड उच्च न्यायालय को कर दिया है। उल्लेखनीय है कि उत्तराखंउ उच्च न्यायालय में 27 जुलाई 2020 को तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश रमेश रंगनाथन के सेवानिवृत्त हो जाने के बाद न्यायमूर्ति रवि मलिमठ कार्यकारी मुख्य न्यायाधीश के रूप में इस पद की जिम्मेदारी देख रहे थे। इस प्रकार अब न्यायमूर्ति चौहान उत्तराखंड उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश होंगे। उनके शीघ्र की कार्यभार ग्रहण करने की संभावना है।

उत्तराखंड उच्च न्यायालय के नए मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति राघवेंद्र सिंह चौहान

प्राप्त जानकारी के अनुसार 24 दिसंबर 1959 को जन्मे जस्टिस चौहान ने 1980 में अमेरिका के आर्काडिया यूनिवर्सिटी से स्नातक की पढ़ाई पूरी की है 1983 में दिल्ली यूनिवर्सिटी से विधि की डिग्री हासिल करने के बाद 2005 में राजस्थान उच्च न्यायालय के न्यायाधीश नियुक्त हुए और 2015 में कर्नाटक उच्च न्यायालय के न्यायाधीश बनाए गए। 2018 में आंध्र प्रदेश और तेलंगाना के संयुक्त उच्च न्यायालय में उनकी नियुक्ति हुई थी और हाईकोर्ट के विभाजन के बाद से उन्हें पहले तेलंगाना उच्च न्यायालय का कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश और इधर 22 जून 2019 को मुख्य न्यायाधीश बनाया गया था। उत्तराखंड उच्च न्यायालय में अभी मुख्य न्यायाधीश सहित न्यायाधीशों के दो पद रिक्त हैं।

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-बागेश्वर के जिला जज के साथ हुए संबद्ध, आधा वेतन भी रोका
नवीन समाचार, नैनीताल, 05 नवंबर 2020। उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने अभद्रता और सरकारी संपत्ति का नुकसान पहुंचाने के मामले में उत्तरकाशी के सीजेएम यानी मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी नीरज कुमार को अगले आदेश तक निलंबित कर दिया है। कार्यकारी मुख्य न्यायाधीश की संस्तुति के बाद उच्च न्यायालय के रजिस्ट्रार जरनल हीरा सिंह बोनाल ने कार्यकारी मुख्य न्यायाधीश की संस्तुति पर अगले आदेशों तक सीजेएम कुमार का वेतन भी आधा करने के आदेश दिए हैं। उन्हें निलंबन के दौरान बागेश्वर के जिला न्यायालय में जिला न्यायाधीश के साथ संबद्ध करते हुए बिना न्यायालय की अनुमति के मुख्यालय न छोड़ने के आदेश भी दिए गए है। आदेश जारी करते हुए पत्र में कहा गया कि सीजेएम नीरज कुमार पर धारा 3(1), 3(2), 4-ए(डी) सहित उत्तराखंड कर्मचारी सेवा नियमावली 2002 के नियम 27 के तहत दुराचार का मामला प्रतीत होता है।
मामले के अनुसार उत्तरकाशी के जिला कलेक्ट्रेट केे स्टाफ और कलक्ट्रेट परिसर में रहने वाले लोगों ने बीती 30 अक्टूबर 2020 को शिकायत दर्ज कराई थी कि उत्तरकाशी के सीजेएम नीरज कुमार ने 29 अक्टूबर की रात आठ से बारह बजे तक अपने परिवार के सदस्यों सहित अन्य लोगों के साथ अभद्रता की थी, और अपनी सरकारी गाड़ी के अलावा कलक्ट्रेट में खड़ी एसडीएम डूंडा व तहसीलदार भटवाड़ी के वाहन को भी क्षतिग्रस्त कर दिया था। यही नहीं बीच-बचाव कर रहे लोगों के साथ भी गाली गलौच की थी। साथ ही अभद्रता करने, सरकारी वाहनों में तोड़फोड़ करने और बीच सड़क पर लगातार हूटर बजाने जैसे गंभीर आरोप भी लगाए गए थे। यह मामला हाईकोर्ट के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति रवि कुमार मलिमथ तक पहुंचा तो उन्होंने सख्त कारवाई के निर्देश दिए।

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-राज्य में किसी सरकारी अधिकारी की बर्खास्तगी का अपनी तरह का पहला मामला

नवीन समाचार, देहरादून, 28 अक्टूबर 2020। उत्तराखंड शासन ने उच्च न्यायालय नैनीताल की पूर्ण पीठ की सिफारिश पर हरिद्वार की तत्कालीन सिविल जज दीपाली शर्मा को बर्खाश्त कर दिया है। अपर मुख्य सचिव कार्मिक राधा रतूड़ी ने इस संबंध में आदेश जारी कर दिए हैं। नैनीताल हाईकोर्ट की वेबसाइट पर आदेश की प्रति अपलोड कर दी गई है। उत्तराखंड में किसी न्यायिक अधिकारी और किशोर न्याय अधिनियम के तहत किसी सरकारी अधिकारी की बर्खास्तगी का यह अपनी तरह का पहला मामला है।
उल्लेखनीय है कि दीपाली शर्मा पर आरोप था कि हरिद्वार की तत्कालीन सिविल जज रहते उन्होंने एक नाबालिग बालिका को अपने आवास पर रखा और उसका शारीरिक और मानसिक शोषण किया। इस पर एएसपी रचिता जुयाल की ओर से सिडकुल थाने में उनके खिलाफ मुकदमा दर्ज हुआ था। पुलिस के छापे में बालिका उनके घर पर बरामद हुई थी। जिला जज की मौजूदगी में जिला अस्पताल में किशोरी का मेडिकल परीक्षण हुआ था, जिसमें उसके शरीर पर चोटों के 20 निशान पाए गए थे।आरोपों की पुष्टि होने पर उन्हें निलंबित कर दिया गया था। बाद में हालांकि न्यायालय से उनके पक्ष में फैसला आया और सरकार ने भी उन पर दर्ज मुकदमा वापस लेने की सिफारिश भी कर दी थी, किंतु विभागीय जांच में वह दोषी पाई गईं। इसके बाद ही उच्च न्यायालय ने शासन से उन्हें बर्खास्त करने की सिफारिश की। इस पर ही अब प्रदेश की राज्यपाल की ओर से 21 अक्टूबर को उनकी बर्खास्तगी के आदेश जारी हो गए हैं।

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-हिमालय दिवस पर आयोजित वेबिनार में उत्तराखण्ड राज्य विधिक सेवा प्रधिकरण के सदस्य सचिव डा. ज्ञानेंद्र कुमार शर्मा ने दी जानकारी
नवीन समाचार, नैनीताल, 09 सितंबर 2020। उत्तराखण्ड राज्य विधिक सेवा प्रधिकरण के सदस्य सचिव डा. ज्ञानेंद्र कुमार शर्मा ने बुधवार को हिमालय दिवस पर आयोजित वेबिनार को संबोधित करते हुए पेड़-पौधों के संरक्षण हेतु सामाजिक चिंतन की आवश्यक जताई तथा वनाग्नि व पेड़-पौधों के कटाव को रोकने को सभी का सामाजिक दायित्व बताया। इस दौरान उन्होंने वेबिनार में उपस्थित लोगांे को हिमालय संरक्षण की शपथ भी दिलायी तथा उनसे वन विभाग के सहयोग से पहाड़ी क्षेत्रों के जंगलों को वनाग्नि से रोकने पर कार्य करने तथा अधिक से अधिक पौधरोपण करने को भी कहा। बताया कि उत्तराखण्ड राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण राज्य में वृहद् पौधारोपण करने की योजना पर कार्य कर रही है, जिसमें प्रत्येक न्यायिक अधिकारी प्रति सप्ताह एक पौधा लगाये एवं संवर्धन किये जाने पर विचार किया जा रहा है।
प्राधिकरण के कार्यपालक अध्यक्ष एवं उत्तराखंड उच्च न्यायालय के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति रवि कुमार मलिमथ के निर्देशों पर हिमालयन दिवस के अवसर पर इस वेबिनार का आयोजन किया गया। वेबिनार में जिला विधिक सेवा प्राधिकरण चमोली के सचिव सुधीर सिंह ने बताया कि उत्तराखण्ड की लगभग 65 प्रतिशत मैदानी क्षेत्र की जनता को हिमालयी नदियों से ही जल की आपूर्ति होती है। ग्लोबल वार्मिंग और मानवीय हस्तक्षेप बढ़ने के कारण हिमालय के पर्यावरण पर खतरा उत्पन्न हो गया है, जिसका समय से समाधान किया जाना आवश्यक है। जिला विधिक सेवा प्राधिकरण ऊधम सिंह नगर के सचिव अविनाश कुमार श्रीवास्तव ने भी विचार रखे। वेबिनार का संचालन उत्तराखण्ड राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के विशेष कार्याधिकारी सिविल जज (प्रवर खंड) मोहम्मद यूसुफ ने किया। वेबिनार में राज्य के सभी 13 जनपदों के सचिव-सिविल जज (प्रवर खंड), दो-दो नामित अधिवक्ताओं और पांच-पांच पैरा विधिक कार्यकर्ताओं शामिल रहे।

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-पूर्व मुख्यमंत्रियों से आवास भत्ता वसूलने, सरकार के देवस्थानम बोर्ड को वैध ठहराने व अधिवक्ताओं की हड़ताल को गैर कानूनी बताने जैसे महत्वपूर्ण निर्णय दिये
-आखिरी दिन भी एनआईटी का परिसर उत्तराखंड में स्थापित करने का महत्वपूर्ण निर्णय सुनाया

अपने विदाई समारोह में बोलते मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति रमेश रंगनाथन।

नवीन समाचार, नैनीताल, 27 जुलाई 2020। उत्तराखंड उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायधीश न्यायमूर्ति रमेश रंगनाथन को सोमवार को सेवानिवृत्ति होने पर ‘फुल कोर्ट रिफरेंस’ आयोजित कर भावपूर्ण विदाई दी गई। इस अवसर पर वक्ताओं ने न्यायमूर्ति रंगनाथन के उत्तराखंड हाईकोर्ट में मुख्य न्यायाधीश के रूप में 21 माह के कार्यकाल की सराहना करते हुए कहा कि उनके द्वारा दिये गए कई ऐतिहासिक निर्णयों से वे हमेशा प्रदेश की जनता की दिलों में रहेंगे। वहीं न्यायमूर्ति रंगनाथन ने न्यायिक कार्यों के निर्वहन में सहयोगी न्यायाधीशों एवं कर्मियों, रजिस्ट्री कार्यालय व चिकित्सकों द्वारा दिये गए सहयोग के प्रति आभार जताया। उन्होंने कहा कि उनका गृह क्षेत्र केरल कई मामलों में सुंदर प्रदेश है, किंतु उत्तराखंड की जैसी सुंदरता अन्यत्र दुर्लभ है। उन्होंने 21 माह के कार्यकाल की अवधि में उत्तराखंड के अधिकांश रमणीय स्थानों का भ्रमण भी किया। लेकिन लॉक डाउन के कारण वे कुछ स्थानों में नहीं जा पाए। उन्होंने कहा कि कोविड-19 के कारण न्यायपालिका सर्वाधिक प्रभावित हुई है। इसके बाद भी वीडियो कांफ्रेंसिंग से काफी वादों की सुनवाई हो रही है। उन्होंने इस दौर में वरिष्ठ अधिवक्ताओं से जूनियर व जरूरतमंद अधिवक्ताओं की मदद करने की अपील भी की। उन्होंने कहा कि उनकी हिंदी भाषा कमजोर थी, लेकिन अधिवक्ताओं ने हिंदी का अंग्रेजी अनुवाद कर उनकी मदद की।
इस अवसर पर वरिष्ठ न्यायधीश रवि मलिमथ ने मुख्य न्यायधीश द्वारा दिये गए पूर्व मुख्यमंत्रियों से आवास भत्ता वसूल करना, सरकार के देवस्थानम बोर्ड को वैध ठहराना, अधिवक्ताओं की हड़ताल को गैर कानूनी बताना आदि महत्वपूर्ण फैसलों का जिक्र करते हुए कहा कि उनके यह फैसले हमेशा याद रखे जाएंगे। उन्होंने अपनी सेवानिवृत्ति के अंतिम दिन भी उत्तराखंड के लिये महत्वपूर्ण निर्णय देते हुये एनआईटी का स्थायी कैम्पस एक साल के भीतर श्रीनगर में बनाने का महत्वपूर्ण आदेश पारित किया। विदाई समारोह को महाधिवक्ता एसएन बाबुलकर, हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के अध्यक्ष पूरन सिंह बिष्ट ने भी सम्बोधित किया। इस अवसर पर न्यायधीश सुधांशू धूलिया, न्यायधीश लोकपाल सिंह, न्यायमूर्ति आरसी खुल्बे, न्यायमूर्ति मनोज तिवारी, न्यायमूर्ति शरद शर्मा, न्यायमूर्ति एनएस धानिक, न्यायमूर्ति रविंद्र मैठाणी व न्यायमूर्ति आलोक वर्मा आदि उपस्थित रहे। समारोह का संचालन रजिस्ट्रार जनरल हीरा सिंह बोनाल ने किया।

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नवीन समाचार, नैनीताल, 16 जुलाई 2020। उत्तराखंड उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति रमेश रंगनाथन आगामी 28 जुलाई को सेवानिवृत्त हो रहे हैं। उनकी सेवानिवृत्ति के बाद उत्तराखंड उच्च न्यायालय के वरिष्ठतम न्यायाधीश न्यायूर्ति रवि विजयकुमार मलिमथ उत्तराखंड उच्च न्यायालय के कार्यकारी मुख्य न्यायाधीश होंगे। बृहस्पतिवार को भारत सरकार के न्याय एवं कानून मंत्रालय के संयुक्त सचिव राजिंदर कश्यप की ओर से इस आशय का नोटिफिकेशन जारी हो गया है।

न्यायमूर्ति रवि विजयकुमार मलिमथ।

उल्लेखनीय है कि न्यायमूर्ति मलिमथ 5 मार्च 2020 को कर्नाटक उच्च न्यायालय से स्थानांतरित होकर उत्तराखंड उच्च न्यायालय में न्यायाधीश बने थे। 25 मई 1962 को जन्मे न्यायमूर्ति मलिमथ कर्नाटक उच्च न्यायालय के पूर्व मुख्य न्यायाधीश स्वर्गीय वीएस मलिमथ के पुत्र हैं। उन्होंने 28 जनवरी 1987 से बंगलौर से अधिवक्ता के रूप में मुख्यतया संवैधानिक, सिविल, क्रिमिनल, लेबर, सर्विस के मामलों की प्रेक्टिस प्रारंभ की थी और 18 फरवरी 2008 को कर्नाटक उच्च न्यायालय के अतिरिक्त न्यायाधीश नियुक्त हुए और 17 फरवरी 2010 को स्थायी न्यायाधीश बने थे।

वरिष्ठ अधिवक्ता थपलियाल फिर बने असिस्टेंट सॉलीसिटर जनरल
नैनीताल। उत्तराखंड उच्च न्यायालय के वरिष्ठ अधिवक्ता वरिष्ठ अधिवक्ता राकेश थपलियाल को पुनः उत्तराखंड उच्च न्यायालय के भारत सरकार का असिस्टेंट सॉलीसिटर जनरल नियुक्त किया गया है। उनका कार्यकाल हाल ही में पूरा हो गया था। इसे भारत सरकार ने 17 जुलाई से तीन साल के लिए और बढ़ा दिया है। राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद बृहस्पतिवार को केंद्रीय विधि एवं न्याय मंत्रालय के अतिरिक्त सचिव एसआर मिश्रा की ओर से उनकी नियुक्ति संबंधित अधिसूचना जारी कर दी गई है।

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नवीन समाचार, नैनीताल, 11 जून 2020। उत्तराखंड में बड़े पैमाने पर न्यायाधीशों के तबादले किए गए हैं। उत्तराखंड उच्च न्यायालय के रजिस्ट्रार जनरल हीरा सिंह बोनाल ने बृहस्पतिवार को नोटिफिकेशन जारी कर न्यायाधीशों के तबादलों की सूची जारी कर दी है। आदेशों के अनुसार सिविल जज जूनियर डिविजन पौड़ी गढ़वाल शमा परवीन का तबादला ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट फर्स्ट हल्द्वानी किया गया है। फर्स्ट एडिशनल सिविल जज जूनियर डिविजन नैनीताल जयश्री राणा को सिविल जज जूनियर डिविजन नैनीताल, सिविल जज जूनियर डिविजन विकासनगर रमेश चंद्र को माह में तीन दिन कैंप कोर्ट चकराता का चार्ज दिया गया है।
फर्स्ट एडिशनल सिविल जज जूनियर डिविजन हरिद्वार मीनाक्षी शर्मा का तबादला सिविल जज जूनियर डिविजन खटीमा, ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट तृतीय हरिद्वार भारती मंगलानी का तबादला सिविल जज जूनियर डिविजन गैणसैंण किया गया है।
ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट रुद्रपुर ऐश्वर्य बोरा का तबादला सिविल जज जूनियर डिविजन रुड़की, एडिशनल सिविल जज जूनियर डिविजन खटीमा पारुल थपलियाल का तबादला ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट फर्स्ट हरिद्वार, सिविल जज जूनियर डिविजन गैणसैंण अमित भट्ट का तबादला सिविल जज जूनियर डिविजन लक्सर, ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट द्वितीय देहरादून चंद्रेश्वरी सिंह का तबादल सिविल जज जूनियर डिविजन श्रीनगर, ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट टनकपुर राजेंद्र कुमार का तबादला सिविल जज जूनियर डिविजन ऋषिकेश, फर्स्ट एडिशनल सिविल जज जूनियर डिविजन रुड़की कृष्तिका गुंज्याल का तबादला एडिशनल सिविल जज जूनियर डिविजन खटीमा, सिविल जज जूनियर डिविजन लक्सर रजनीश मोहन का तबादला सिविल जज जूनियर डिविजन टनकपुर, सिविल जज जूनियर डिविजन रुद्रपुर पुनीत कुमार का तबादला फर्स्ट एडिशनल सिविल जज जूनियर डिविजन रुड़की, सिविल जज जूनियर डिविजन जसपुर प्रकाश चंद्र का तबादला ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट द्वितीय देहरादन, ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट फर्स्ट हल्द्वानी भावना पांडे, सिविल जज जूनियर डिविजन हल्द्वानी, सिविल जज जूनियर डिविजन चकराता रिजवान अंसारी का तबादला सिविल जज जूनियर डिविजन देहरादून किया गया है।
ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट फर्स्ट हरिद्वार कंचन चौधरी को फर्स्ट एडिशनल सिविल जज जूनियर डिविजन हरिद्वार, सिविल जज जूनियर डिविजन ऊखीमठ लवल कुमार वर्मा का तबादला ज्यूडिशिल मजिस्ट्रेट फर्स्ट रुद्रपुर, ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट देहरादून पल्लवी गुप्ता का तबादला सिविल जज जूनियर डिविजन रुद्रपुर, फर्स्ट एडिशनल सिविल जज जूनियर डिविजन हल्द्वानी उर्वशी रावत को ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट ऋषिकेश, फर्स्ट एडिशनल सिविल जज जूनियर डिविजन रुद्रपुर चेयरब बत्रा का तबादला सिविल जज जूनियर डिविजन जसपुर किया गया है।
वहीं जिला एवं सत्र न्यायालय नैनीताल के जज राजीव कुमार खुल्बे को अतिरिक्त चार्ज देते हुए फूड सेफ्टी एपीलेट ट्रिब्यूनल हल्द्वानी बनाया गया है। इसी क्रम में फूड सेफ्टी एपीलेट ट्रिब्यूनल हल्द्वानी शाहनशाह मोहम्मद दिलबर दानिश का स्थानांतरण फर्स्ट एडिशनल डिस्ट्रिक एंड सेशन जज हरिद्वार, फर्स्ट एडिशनल डिस्ट्रिक एंड सेशन जज हरिद्वार के सहदेश सिंह को द्वितीय एडिशनल डिस्ट्रिक एंड सेशन जज हरिद्वार, एडिशनल डिस्ट्रिक एंड सेशन जज-स्पेशल जज पोस्को देहरादून रमा पांडे का स्थानांतरण एडिशनल डिस्ट्रिक एंड सेशन जज टिहरी किया गया है।
द्वितीय एडिशनल डिस्ट्रिक एंड सेशन जज हरिद्वार भरत भूषण पांडे को तृतीय एडिशनल डिस्ट्रिक एंड सेशन जज हरिद्वार नियुक्त किया है। एडिशनल डिस्ट्रिक जज -स्पेशल जज पाक्सो हरिद्वार अर्चना सागर का स्थानांतरण एडिशनल डिस्ट्रिक जज-स्पेशल पाक्सो हल्द्वानी किया है।
एडिशनल सेक्रेट्री लॉ कम एडिशनल एलआर रितेश कुमार श्रीवास्तव का स्थानांतरण फिफ्थ एडिशनल डिस्ट्रिक एंड सेशन जज हरिद्वार, एडिशनल डिस्ट्रिक जज-स्पेशल जज पाक्सो हल्द्वानी मनीष कुमार पांडे का स्थानांतरण एडिशनल डिस्ट्रिक जज अल्मोड़ा, सेवंथ एडिशनल डिस्ट्रिक एंड सेशन जज देहरादून मीना देऊपा को एडिशनल डिस्ट्रिक एंड सेशन जज-पोक्सो देहरादून, फिफ्थ एडिशनल डिस्ट्रिक एंड सेशन जज हरिद्वार अंजलि नोनियाल को एडिशनल डिस्ट्रिक एंड सेशन जज-स्पेशल जज पोक्सो हरिद्वार, ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट द्वितीय रुद्रपुर शालिनी दादर को ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट फर्स्ट रुद्रपुर बनाया गया है।
चीफ ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट पिथौरागढ़ सुधीर तोमर माह में तीन दिन डीडीहाट पिथौरागढ में कैंप कोर्ट करेंगे। चीफ ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट अल्मोड़ा मनमोहन सिंह का स्थानांतरण सिविल जज सीनियर डिविजन ऋषिकेश किया गया है। वहीं द्वितीय एडिशनल सिविल जज सीनियर डिविजन हरिद्वार ज्योति बाला को फर्स्ट एडिशनल सिविल जज सीनियर डिविजन हरिद्वार नियुक्त किया है।
साथ ही द्वितीय एडिशनल चीफ ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट देहरादून रिंकी सेहनी का तबादला चीफ ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट अल्मोड़ा, द्वितीय एडिशनल सिविल जज सीनियर डिविजन देहरादून शहजाद अहमद का तबादला चीफ ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट रुद्रप्रयाग, सेक्रेट्री डिस्ट्रिक लीगल सर्विस अथॉरिटी चंपावत मोहम्मद याकूब का तबादला द्वितीय एडिशनल चीफ ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट देहरादून, चीफ ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट रुद्रप्रयाग संजय सिंह का तबादला द्वितीय एडिशनल सिविल जज सीनियर डिविजन देहरादून, द्वितीय एडिशनल सिविल जज सीनियर डिविजन रुद्रपुर ललिता सिंह का तबादला फर्स्ट एडिशनल सिविल जज सीनियर डिविजन रुद्रपुर, सेक्रेट्री डिस्ट्रिक लीगल अथॉरिटी रुद्रप्रयाग आरती सरोहा का तबादला फिफ्थ एडिशनल सिविल जज सीनियर डिविजन देहरादून, तृतीय एडिशनल सिविल जज सीनियर डिविजन रुद्रपुर संजीव कुमार को द्वितीय एडिशनल सिविल जज सीनियर डिविजन रुद्रपुर, एडिशनल सिविल जज सीनियर डिविजन रुड़की सिमरनजीत कौर को एडिशनल चीफ ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट रुड़की, फोर्थ एडिशनल सिविल जज सीनियर डिविजन रुद्रपुर नेहा कय्यूम को तृतीय एडिशनल सिविल जज सीनियर डिविजन रुद्रपुर, फिफ्थ एडिशनल सिविल जज सीनियर डिविजन रुद्रपुर अकरम अली को फोर्थ एडिशनल सिविल जज सीनियर डिविजन रुद्रपुर, सिविल जज जूनियर डिविजन हल्द्वानी दयाराम को पदोन्नत कर सिविल जज सीनियर डिविजन कैडर और उनका स्थानांतरण कर 6 एडिशनल सिविल जज सीनियर डिविजन देहरादून भेजा गया है।
इनके अलावा सिविल जज जूनियर डिविजन चंपावत आफिया मतीन को पदोन्नत कर सिविल जज सीनियर डिविजन कैडर व स्थानांतरण सेवंथ एडिशनल सिविल जज सीनियर डिविजन देहरादून, सिविल जज जूनियर डिविजन श्रीनगर अमित कुमार को पदोन्नत कर सिविल जज सीनियर डिविजन कैडर व उनका स्थानांतरण द्वितीय एडिशनल सिविल जज सीनियर डिविजन हरिद्वार, ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट ऋषिकेश आलोक राम त्रिपाठी को पदोन्नत कर सिविल जज सीनियर डिविजन कैडर व उनका स्थानांतरण फिफ्थ एडिशनल सिविल जज सीनियर डिविजन रुद्रपुर, सिविल जज जूनियर डिविजन देहरादून मिथलेश पांडे को पदोन्नत कर सिविल जज सीनियर डिविजन कैडर व 8 एडिशनल सिविल जज सीनियर डिविजन देहरादून, सिविल जज जूनियर डिविजन डीडीहाट पिथौरागढ रविंद्र देव मिश्रा को पदोन्नत कर सिविल जज सीनियर डिविजन कैडर व 9 एडिशनल सिविल जज सीनियर डिविजन देहरादून, सिविल जज जूनियर डिविजन खटीमा रवि रंजन को पदोन्नत कर सिविल जज सीनियर डिविजन कैडर व उनका स्थानांतरण तृतीय एडिशनल सिविल जज सीनियर डिविजन हरिद्वार किया गया है। सिविल जज जूनियर डिविजन रुड़की कपिल कुमार त्यागी को पदोन्नत कर सिविल जज सीनियर डिविजन कैडर व एडिशनल सिविल जज सीनियर डिविजन रुड़की, सिविल जज जूनियर डिविजन नैनीताल अभय सिंह को पदोन्नत कर सिविल जज सीनियर डिविजन कैडर व सिविल जज सीनियर डिविजन नैनीताल, सिविल जज जूनियर डिविजन टनकपुर ममता पंत को पदोन्नत कर सिविल जज सीनियर डिविजन कैडर कर स्थानांतरण एडिशनल सिविल जज सीनियर डिविजन टिहरी और सिविल जज जूनियर डिविजन ऋषिकेश अनामिका को पदोन्नत कर सिविल जज सीनियर डिविजन बनाया गया है।

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-आलोक सिंह का यूपी हाईकोर्ट के लिए स्थानांतरण की सुप्रीम कोर्ट की कोलेजियम ने गत पांच मार्च को की थी सिफारिश
नवीन समाचार, नैनीताल, 27 मार्च 2020। उत्तराखंड उच्च न्यायालय के न्यायाधीश न्यायमूर्ति आलोक सिंह का उत्तर प्रदेश के इलाहाबाद उच्च न्यायालय को स्थानांतरण हो गया है। शुक्रवार को भारत सरकार के न्याय विभाग के सचिव राजिंदर कश्यप के हस्ताक्षरों से उनके स्थानांतरण का आदेश जारी हो गया है। सर्वोच्च न्यायालय की कोलोजियम ने गत पांच मार्च को उनके स्थानांतरण की सिफारिश की थी। न्यायमूर्ति सिंह के तबादले से उत्तराखंड उच्च न्यायालय में न्यायाधीशों की संख्या 11 पदों के सापेक्ष घटकर 10 हो जाएगी।
उल्लेखनीय है कि उत्तराखंड के रुड़की के मूल निवासी व यहीं 28 अप्रैल 1959 को पैदा हुए न्यायमूर्ति सिंह उत्तराखंड राज्य बनने के बाद से ही उत्तराखंड उच्च न्यायालय में वकालत करने लगे थे। वे 12 अक्टूबर 2009 में यहीं न्यायाधीश बने। 21 दिसंबर 2009 को उनका तबादला पंजाब व हरियाणा उच्च न्यायालय को हुआ। बाद में वे 13 जून 2012 को झारखंड उच्च न्यायालय भेजे गए और 26 फरवरी 2013 को वापस उत्तराखंड उच्च न्यायालय आ गए और तब से यहीं न्यायाधीश के रूप में कार्यरत हैं।

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कुमाऊं विवि के दीक्षांत समारोह में मानद उपाधि प्राप्त करते सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़

नवीन समाचार, नैनीताल, 7 मार्च 2020। देश के सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ ने शनिवार को कुमाऊं विवि के 16वें दीक्षांत समारोह में देश की मौजूदा व्यवस्था को इशारों-इशारों में एक बड़ा संदेश दिया। अपने संक्षिप्त किंतु सारगर्भित वक्तव्य में न्यायमूर्ति चंद्रचूड़ ने कहा विविधता हमारे देश की कमजोरी नहीं वरन ताकत है। हमें विरोधी विचारधारा के लोगों को भी सुनें व उनका आदर करें।
न्यायमूर्ति चंद्रचूड़ ने हिंदी में अपने उद्बोधन में स्वयं से बात शुरू करते हुए कहा, वे महाराष्ट्र से हैं, इसलिए घर पर मराठी में बात करते हैं। परंतु पत्नी उड़ीसा से हैं, इसलिए उनसे उड़िया में भी बात होती है। न्यायालय में अंग्रेजी में बात होती है, परंतु जब दिल की बात करनी होती है तो हिंदी में करते हैं। कहा, उनके परिवार जैसी विविधता पूरे देश में है। यहां अलग-अलग भाषा, जीवनशैली व विचारधाराओं के लोग हैं, और यह विविधता हमारे देश की कमजोरी नहीं वरन ताकत है। उन्होंने छात्र-छात्राओं से मुखातिब होते हुए कहा, वे हमेशा अपनी अतरात्मा का दीप प्रज्वलित करें, तभी मानवता आगे बढ़ सकती है। उन्होंने विद्यार्थियों से कहा कि वे सवाल करते रहें। सवाल करने से ही जवाब मिलते हैं। सवाल खुद से भी करें और जवाब तलाशें। सवाल करके ही समाज को बदला जा सकता है। अपने माता, पिता व गुरु को हमेशा याद रखें, जिन्होंने इस मुकाम तक पहुंचाया है। साथ ही हर दिन को अपना आखिरी दिन समझकर दिन के अंत में सोचंे कि उन्होंने पूरे दिन में अपने समाज, देश के लिए क्या बेहतर किया।

टॉप करने से अधिक जरूरी अच्छा छात्र होना: पद्मश्री रावत

कुमाऊं विवि के दीक्षांत समारोह में मानद उपाधि प्राप्त करते पद्मश्री डा. सौमित्र रावत।

नैनीताल। कुमाऊं विवि के दीक्षांत समारोह में डीएससी की मानद उपाधि प्राप्त करने वाले झांसी यूपी निवासी सर गंगाराम अस्पताल के लीवर प्रत्यारोपण यूनिट के प्रमुख पद्मश्री डा. सौमित्र रावत ने कहा कि टॉपर होने से बेहतर अच्छा छात्र होना है। उन्होंने कहा कि वे कुमाऊं विवि के पहले चिकित्सक हैं जिसे दीक्षांत समारोह में मानद उपाधि दी गई है। इसे वे देश के चिकित्सकों को समर्पित करते हैं। उन्होंने बताया कि 17 वर्ष इंग्लेंड में कार्य करते हुए उन्होंने कभी भारत लौटने की नहीं सोची थी, किंतु पिता का स्वास्थ्य खराब होने से वे वापस लौट आए।

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नवीन समाचार, नैनीताल, 5 मार्च 2020। कर्नाटक उच्च न्यायालय से स्थानांतरित होकर आए न्यायमूर्ति रवि विजयकुमार मलिमथ ने गुरुवार सुबह 9 बजे उत्तराखंड उच्च न्यायालय में न्यायाधीश पद की शपथ ले उन्हें मुख्य न्यायाधीश की कोर्ट में मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति ने शपथ दिलाई। इससे पूर्व रजिस्ट्रार जनरल हीरा सिंह बोनाल ने उनकी नियुक्ति का राष्ट्रपति का आदेश पढ़ा। उल्लेखनीय है कि सर्वोच्च न्यायालय की कॉलिजियम की सिफारिश पर उनका स्थानांतरण उत्तराखंड उच्च न्यायालय के लिए किया गया है। इस मौके पर उनके परिजन भी उच्च न्यायालय परिसर में मौजूद रहे। मुख्य न्यायाधीश सहित अन्य न्यायाधीशों एवं वरिष्ठ अधिवक्ताओं ने उन्हें नियुक्ति पर बधाई दी। उल्लेखनीय है कि न्यायमूर्ति मलिमथ की नियुक्ति के बाद उत्तराखंड उच्च न्यायालय में न्यायाधीशों की संख्या 11 पदों के सापेक्ष पूरी यानी 11 हो गई है।
उल्लेखनीय है कि 25 मई 1962 को जन्मे न्यायमूर्ति रवि विजयकुमार मलिमथ कर्नाटक उच्च न्यायालय के पूर्व मुख्य न्यायाधीश स्वर्गीय वीएस मलीमथ के पुत्र हैं। उन्हें 28 जनवरी 1987 से बंगलौर से अधिवक्ता के रूप में मुख्यतया संवैधानिक, सिविल, क्रिमिनल, लेबर, सर्विस के मामलों की प्रेक्टिस प्रारंभ की और 18 फरवरी 2008 को कर्नाटक उच्च न्यायालय के अतिरिक्त न्यायाधीश नियुक्त हुए और 17 फरवरी 2010 को स्थायी न्यायाधीश बने थे।

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न्यायमूर्ति रवि विजयकुमार मलिमथ।-न्यायमूर्ति मलिमथ संभालेंगे में कार्यभारनवीन समाचार, देहरादून, 3 मार्च 2020। कर्नाटक उच्च न्यायालय से स्थानांतरित होकर आए न्यायमूर्ति रवि विजयकुमार मलिमथ गुरुवार 5 मार्च  को उत्तराखंड उच्च न्यायालय में न्यायाधीश पद की शपथ लेंगे। सर्वोच्च न्यायालय की कॉलिजियम की सिफारिश पर उनका स्थानांतरण उत्तराखंड उच्च न्यायालय के लिए हुआ है। उत्तराखंड उच्च न्यायालय के रजिस्ट्रार जनरल हीरा सिंह बोनाल ने मंगलवार देर शाम जानकारी दी कि न्यायमूर्ति मलिमथ गुरुवार पांच मार्च को सुबह नौ बजे मुख्य न्यायाधीश की कोर्ट में उत्तराखंड उच्च न्यायालय के न्यायाधीश पद की शपथ लेंगे।

उल्लेखनीय है कि 25 मई 1962 को जन्मे न्यायमूर्ति रवि विजयकुमार मलिमथ कर्नाटक उच्च न्यायालय के पूर्व मुख्य न्यायाधीश स्वर्गीय वीएस मलीमथ के पुत्र हैं। उन्हें 28 जनवरी 1987 से बंगलौर से अधिवक्ता के रूप में मुख्यतया संवैधानिक, सिविल, क्रिमिनल, लेबर, सर्विस के मामलों की प्रेक्टिस प्रारंभ की और 18 फरवरी 2008 को कर्नाटक उच्च न्यायालय के अतिरिक्त न्यायाधीश नियुक्त हुए और 17 फरव 2010 को स्थायी न्यायाधीश बने। 

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-सर्वोच्च न्यायालय की कॉलिजियम ने किया है प्रस्ताव, कर्नाटक हाईकोर्ट से आ सकते हैं न्यायमूर्ति मलिमथनवीन समाचार, नैनीताल, 19 फरवरी 2020। कर्नाटक उच्च न्यायालय के न्यायाधीश न्यायमूर्ति रवि विजयकुमार मलिमथ उत्तराखंड उच्च न्यायालय आ सकते हैं। सर्वोच्च न्यायालय की कॉलिजियम ने न्यायमूर्ति मलिमथ सहित दिल्ली व महाराष्ट्र उच्च न्यायालय के न्यायाधीशों को हरियाणा व मेघालय में तबादले के लिए संस्तुति की है। कॉलिजियम ने 12 फरवरी को कर्नाटक के न्यायधीश रवि विजयकुमार मलिमथ को उत्तराखंड उच्च न्यायालय, दिल्ली के न्यायधीश डा. एस मुरलीधर को हरियाणा उच्च न्यायालय और महाराष्ट्र उच्च न्यायालय के न्यायाधीश रंजीत वी मोरे को मेघालय उच्च न्यायालय भेजने की संस्तुति की है।

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मुख्य न्यायाधीश रमेश रंगनाथन का पांव अचानक फिसल गयानवीन समाचार, नैनीताल, 29 फरवरी 2020। तीर्थनगरी के संगम स्थल पर गंगा पूजन के लिए पहुंचे उत्तराखंड हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश का पैर अचानक फिसल गया। साथ में चल रहे सीओ ने उन्हें तुरंत पकड़ लिया, जिससे बड़ा हादसा टल गया।शनिवार को मुख्य न्यायाधीश आर रंगनाथन अपनी पत्नी के साथ देवप्रयाग तीर्थ दर्शन को पहुंचे थे। दक्षिण भारत में भगवान रघुनाथ की विशेष महत्ता के चलते उन्होंने श्रीरघुनाथ मंदिर में पूजा-अर्चना करते हुए मुख्य पुजारी सोमनाथ भट्ट से आदिगुरु शंकराचार्य और मंदिर के बारे में जानकारी ली। उसके बाद उन्होंने संगम स्थल पर गंगा पूजन दर्शन की इच्छा जताई। संगम स्थल पर पूजा के लिए वह गंगा नदी की ओर बढ़े, तो अचानक उनका पैर फिसल गया। तभी साथ चल रहे सीओ नरेंद्रनगर प्रमोद शाह ने उन्हें आगे बढ़कर पकड़ लिया, जिससे वे गंगा की तेज धारा की चपेट में आने से बच गए और बड़ा हादसा टल गया। इस पर साथ चल रहे प्रशासन और पुलिस ने राहत की सांस ली। पूजा-अर्चना के बाद वे अपने गंतव्य को लौट गए हैं। पुजारी ने बताया कि दक्षिण भारत में देवप्रयाग को कंडवेंनुकडीनगरम के नाम से जाता है, जबकि भगवान रघुनाथ को नीलमपेरूमल पुण्डरीक वल्ली के रूप में पूजा जाता है। इसी मान्यता के आधार पर दक्षिण भारत निवासी मुख्य न्यायाधीश आर रंगनाथन पत्नी संग यहां पूजा अर्चना को पहुंचे थे। यहां पुरोहित विपुल सवासेरिया ने उनसे पूजा संपन्न करवाई। 

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नवीन समाचार, हरिद्वार, 21 नवंबर 2019। नैनीताल की किशोरी के उत्पीड़न के आरोप में फंसीं सिविल जज दीपाली शर्मा के खिलाफ चल रहे मुकदमे को ‘जन हित’ में वापस लेने की शासन की अपील को हरिद्वार के सीजेएम अरुण कुमार ने खारिज कर दिया है। सीजेएम की कोर्ट ने इसे जनहित से जुड़ा मामला न बताते हुए अपना आदेश सुनाया है। वहीं, कोर्ट ने जज दीपाली शर्मा को 21 दिसंबर को पेश होने के आदेश दिए हैं। बता दें कि सामाजिक कार्यकर्ता जेपी बडोनी ने उत्तराखंड शासन के ‘जन हित’ में मुकदमा वापस लेने के फैसले के खिलाफ सीजेएम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था।दीपाली शर्मा के लिए इमेज परिणाम
उल्लेखनीय है कि पिछले वर्ष जनवरी में हाईकोर्ट के आदेश पर रोशनाबाद की जज कॉलोनी में रहने वाली सिविल जज सीनियर डिवीजन दीपाली शर्मा के घर से नैनीताल की एक किशोरी को मुक्त कराया गया था।यह कार्रवाई हुई थी। उस वक्त के जिला जज राजेंद्र सिंह चौहान तत्कालीन एसएसपी किशन कुमार वीके, एडीजे अमरिंदर सिंह इस पूरी कार्रवाई के दौरान मौजूद थे। जिला जज की मौजूदगी में ही जिला अस्पताल में किशोरी का मेडिकल परीक्षण हुआ था, जिसमें उसके शरीर पर चोटों के 20 निशान पाए गए थे। उस वक्त एएसपी रचिता जुयाल की ओर से सिडकुल थाने में जज दीपाली शर्मा के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया गया था। अप्रैल में सीओ कनखल रहे मनोज कात्याल ने दीपाली शर्मा के खिलाफ चार्जशीट दायर की थी। मामले में हाईकोर्ट ने जज दीपाली शर्मा को निलंबित कर दिया था।
वहीं, बीते अगस्त माह में उत्तराखंड शासन ने जज के खिलाफ दर्ज मुकदमे को वापस लेने का फैसला लिया था। इस संबंध में अभियोजन पक्ष ने सीजेएम कोर्ट में प्रार्थनापत्र दायर किया था। जज के खिलाफ दर्ज मुकदमे को वापस लिए जाने के उत्तराखंड शासन के फैसले को चुनौती देते हुए सामाजिक कार्यकर्ता जेपी बडोनी ने बुधवार को सीजेएम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। इधर बृहस्पतिवार को सीजेएम कोर्ट में शासन के फैसले को लेकर हुई सुनवाई के बाद कोर्ट ने जज के खिलाफ दर्ज मुकदमा वापस लेने की उत्तराखंड शासन की अपील को निरस्त कर दिया।
नवीन समाचार
‘नवीन समाचार’ विश्व प्रसिद्ध पर्यटन नगरी नैनीताल से ‘मन कही’ के रूप में जनवरी 2010 से इंटरननेट-वेब मीडिया पर सक्रिय, उत्तराखंड का सबसे पुराना ऑनलाइन पत्रकारिता में सक्रिय समूह है। यह उत्तराखंड शासन से मान्यता प्राप्त, अलेक्सा रैंकिंग के अनुसार उत्तराखंड के समाचार पोर्टलों में अग्रणी, गूगल सर्च पर उत्तराखंड के सर्वश्रेष्ठ, भरोसेमंद समाचार पोर्टल के रूप में अग्रणी, समाचारों को नवीन दृष्टिकोण से प्रस्तुत करने वाला ऑनलाइन समाचार पोर्टल भी है।
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