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March 5, 2024

Kailash Aadi Kailah Om Parvat Yatra : प्रधानमंत्री मोदी ने कहा था उत्तराखंड के जागेश्वर व आदि कैलाश-ॐ पर्वत जरूर जायें, जानें यात्रा की पूरी 1-1 जानकारी….

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Kailash Aadi Kailah Om Parvat Yatra

PM Narendra Modi Adi Kailash, Sadak Sangharsh

नवीन समाचार, नैनीताल, 14 दिसंबर 2023 (Kailash Aadi Kailah Om Parvat Yatra)। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के गत 12 अक्टूबर को उत्तराखंड की हालिया यात्रा के बाद देश भर के श्रद्धालुओं में उनके गंतव्यों जागेश्वर व आदि कैलाश के प्रति खासा जोश है। आज हम आपको इस लेख के जरिये स्वयं प्रधानमंत्री के बाद यह यात्रा करने के बाद इस यात्रा की पूरी जानकारी देने जा रहे हैं। श्रद्धालु कुमाऊं मंडल विकास निगम के माध्यम से इस यात्रा को सर्वाधिक सहजता से उपलब्धता के आधार पर कर सकते हैं।

इस धार्मिक यात्रा की शुरुआत काठगोदाम से होती है। काठगोदाम उत्तराखंड के कुमाऊं मंडल का प्रवेश द्वार है। पंतनगर, बरेली, देहरादून या दिल्ली तक हवाई मार्ग से आकर भी काठगोदाम रेल, बस, टैक्सी आदि हर तरह से पहुंचा जा सकता है। काठगोदाम से श्रद्धालु कुमाऊं मंडल विकास निगम के माध्यम से यात्रा शुरू होती है।

काठगोदाम से सुबह चलकर यात्री महाबली भीम के नाम एवं झीलों के जनपद नैनीताल की एक सुंदर झील के लिये के लिये विख्यात भीमताल व स्थानीय पहाड़ी फलों के लिये प्रसिद्ध भवाली से होते हुये करीब 37 किलोमीटर चलकर हनुमान जी के अवतार कहे जाने वाले बाबा नीब करौरी के कैंची धाम पहुंचकर बाबा की सजीव सी मूर्ति व आश्रम के दर्शन करते हैं।

यहां से अगला पड़ाव कुमाऊं मंडल की सांस्कृतिक नगरी एवं अंग्रेजी दौर से पहले कुमाऊं मंडल में सत्तासीन रहे चंदवंशीय राजाओं की राजधानी रहे जिला मुख्यालय अल्मोड़ा होते हुये करीब 52 किलोमीटर की यात्रा कर चितई पहुंचा जाता है। चितई में कुमाऊं के प्रसिद्ध न्याय देवता कहे जाने वाले ग्वेल देवता का हर ओर छोटी-बड़ी घंटियों से पटा हुआ मंदिर है। यहां लोग स्टांप पेपर अथवा सादे कागज पर ईश्वर से अपनी प्रार्थना करते हैं और प्रार्थना पूरी होने पर घंटी चढ़ाते हैं।

चितई से यात्रा आगे बढ़कर बाड़ेछीना व पांडवों के नौला यानी पारंपरिक जल स्रोत के कुंवे जैसे नौले के स्थान माने जाने वाले पनुवानौला व आरतोला से होते हुये करीब 27.4 किमी चलकर जागेश्वर धाम पहुंचते हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी 12 अक्टूबर 2023 को यहां पहुंचते थे और लौटने पर उन्होंने कहा था कि यदि उन्हें कहना होगा कि उत्तराखंड में एक स्थान जरूर जायें तो वह स्थान आदि कैलाश के साथ जागेश्वर होगा। जागेश्वर के बारे में विस्तृत जानकारी यहां क्लिक कर प्राप्त की जा सकती है। जागेश्वर में 125 मंदिरों के समूह के दर्शन एवं दिन के भोजन का प्रबंध होता है।

जागेश्वर से चलकर यात्री इसी दिन शाम तक धौलादेवी, दन्या व पनार होते हुये 86 किमी की यात्रा कर कुमाऊं के कश्मीर कहे जाने वाली सोर घाटी पिथौरागढ़ पहुंच जाते हैं। पनार के पास रामेश्व रनाम का एक स्थान भी है, जिसे भगवान राम द्वारा दक्षिण भारत के सेतुबंध रामेश्वरम की तरह लोकहित के लिये स्थापित शिव लिंग एवं भगवान राम के कुलगुरु वशिष्ठ के आश्रम से जोड़ा जाता है। हालांकि यह इस यात्रा का पड़ाव समय की कमी के कारण नहीं हो पाता है।

पिथौरागढ़ में रात्रि विश्राम कुमाऊं मंडल विकास निगम के प्राकृतिक सुंदरता के साथ पेड़-पौधों की नर्सरी जैसे पर्यटक आवास गृह में करना काफी शांति, सुकून एवं आनंद देने वाला होता है। यहां आगे की यात्रा में संबोधनों के लिये केवल ‘ऊं नमः शिवाय’ का प्रयोग करते, उच्च हिमालयी क्षेत्र में स्थित भगवान शिव के धाम के यात्रा मार्ग पर खासकर प्लास्टिक की गंदगी न करने एवं गंदगी मिलने पर उसे वापस लाने तथा ठंड आदि से बचने आदि हिदायतें दी जाती हैं।

अगली सुबह यहां से यात्रा पिथौरागढ़ से करीब 23 किमी दूर कनालीछीना, करीब 54 किमी दूर पाल राजाओं की राजधानी रहे अस्कोट, करीब 64 किमी दूर काली व गोरी नदी के संगम पर स्थित पूर्व में भारत, नेपाल व चीन तथा वर्तमान में भारत-नेपाल के हर वर्ष 14 नवंबर को लगने वाले प्रसिद्ध अंतर्राष्ट्रीय मेले के लिये प्रसिद्ध जौलजीबी पहुंचती है।

यहां मंदिर के दर्शनों के बाद यात्रा यहां से लगातार साथ चलने वाली सुंदर पर्वतीय गहरे नीले रंग के पानी से साफ-स्वच्छ पानी से छलछलाती काली नदी के किनारे-किनारे करीब 28 किमी और आगे चलते हुये बलुवाकोट होते हुये धारचूला के काली नदी के किनारे ही बने सुंदर मानस पर्यटक आवास गृह पहुंचती है।

यहां इसी दिन उच्च हिमालयी क्षेत्र में जाने के लिए एसडीएम धारचूला से ‘इनर लाइन परमिट’ बनाने की प्रक्रिया पूरी की जाती है। इसके लिये स्वस्थता प्रमाण पत्र के साथ मेडिकल कराने एवं आधार कार्ड व पासपोर्ट साइज की फोटो आदि की आवश्यकता पड़ती है। यहां से यात्री पास ही स्थित झूला पुल को पार करके पैदल ही पड़ोसी देश नेपाल जाकर वहां का अनुभव भी ले सकते हैं। नदी के किनारे बैठना एवं इसकी आवाज सुनना भी बेहद आनंद व शांति देने वाला होता है।

धारचूला से अगली सुबह यात्रा छोटी 4 बाई 4 की स्थानीय जीपों के माध्यम से अगले पड़ाव गुंजी के लिये निकलती है। यहां से आगे मोबाइल व इंटरनेट की सुविधा बेहद सीमित है। धारचूला से करीब 10 किमी आगे मुख्य यात्रा मार्ग से हटकर रांथी नाम के स्थान पर एक बड़ा सुंदर झरना प्रसिद्ध है। यहां यात्रा से इतर हटकर कभी जाया जा सकता है।

https://www.youtube.com/shorts/7s91W2loXX4जबकि करीब 29 किमी की दूरी पर स्थित पांगला में चाय आदि पी जा सकती है। जबकि इससे करीब 15 किमी आगे मालपा व करीब 24.5 किमी की दूरी पर बुदी (2740 मीटर) में निगम के पर्यटक आवास गृह में दिन के भोजन का प्रबंध होता है। यहां से सामने नेपाल की हिमाच्छादित हिमालय की चोटियों को बेहद करीब से देखने का अनुभव अनूठा होता है।

बुदी से करीब 35 हेयर पिन सरीखे रोमांचक मोड़ छियालेख ले जाते हैं, जहां भारतीय सेना एवं आईटीबीपी की चौकियां हैं। यहां पर पहली बार ‘इनर लाइन परमिट’ की जांच होती है। यहां तक सड़क संकरी तथा कई जगह पक्की व कई जगह कच्ची ‘ऑफ रोड’ सरीखी है। इसलिये यहां तक भी अपने वाहन से आने की सलाह नहीं दी जाती है। जबकि छियालेख से आगे की सड़क अभी कच्ची ही है, इसलिये बुदी से गुंजी की दूरी 15 किमी ही है, लेकिन गर्ब्यांग व नपलच्यू होते हुये गुंजी पहुंचने में समय अपेक्षाकृत अधिक लगता है।

गुंजी आदि कैलाश व ॐ पर्वत की यात्रा का बेस कैंप है। यहां कुमाऊं मंडल विकास निगम की टेंट एवं अन्य आवासीय सुविधा उपलब्ध है। 11 हजार फिट से अधिक ऊंचाई के इस स्थान पर पूर्व में भारत एवं तिब्बत के व्यापार की मंडी लगती थी। बेहद सीमित सुविधाओं वाले इस स्थान पर भारतीय स्टेट बैंक की शाखा है। सामने नेपाल की हिमाच्छादित चोटियां शाम के समय मनमोहक, सोने की दमकती नजर आती हैं। प्रधानमंत्री मोदी की पहल पर अब यहां ‘कैलाश धाम’ बनने जा रहा है। यहां आपात स्थिति के लिये भारतीय सेना का हेलीपोर्ट भी मौजूद है।

अगली सुबह तड़के यहां से यात्रा आदि कैलाश के पड़ाव करीब 24 किमी दूर जॉलिंगकांग के लिये निकलती है। यात्रा में गर्म वस्त्र पहनने की सलाह दी जाती है। बीच में नाबी व कुटी नाम के गांवों में होमस्टे की सुविधा भी उपलब्ध हैं। कुटी गांव को पांडवों की माता कुंती से जोड़ा जाता है। यहां पांडवों का किला तथा ऊंचे पहाड़ पर प्रतीक स्वरूप पर माता कुंती एवं पांच पांडवों के दर्शन भी होते हैं। इन गांवों से उच्च हिमालयी क्षेत्र में मिलने वाली जम्बू, गंधरैंणी आदि जड़ी-बूटियां ली जा सकती हैं।

जॉलिंगकांग से करीब 3 किमी पहले गणेश नाला और इसके ऊपर विशाल हिमाच्छादित गणेश पर्वत दर्शनीय है। इसे ब्रह्मा पर्वत भी कहा जाता है। जॉलिंगकांग इस यात्रा का वाहन से अंतिम पड़ाव है। यहां तथा बीच में कई जगह भारतीय सेना के द्वारा प्रपत्रों की जांच की जाती है। यूं जॉलिंगकांग (4930 मीटर) से ही महादेव शिव के चीन में स्थित धाम कैलाश पर्वत की प्रतिकृति आदि कैलाश पर्वत के दर्शन हो जाते हैं, लेकिन यात्री यहां से पैदल करीब डेढ़ किमी का पैदल ट्रेक कर पार्वती सरोवर के पास मंदिर में जरूर जाना चाहते हैं।

यहां स्थित मंदिर में प्रधानमंत्री मोदी ने 12 अक्टूबर 2023 को पहुंचकर पूजा की थी। यहां से पार्वती सरोवर में आदि कैलाश पर्वत की छवि एवं कैलाश पर्वत के सीधे दर्शनों का अनूठा आनंद एवं दिव्य अनुभव मिलता है।

कई श्रद्धालुओं को यहां सीधे भगवान शिव के तो कई को भगवान गणेश, हनुमान एवं भगवान शिव के वाहन नंदी के साथ पांच चोटियों वाले पांडव पर्वत एवं दूसरी ओर माता पार्वती के मुकुट के साक्षात दर्शनों का अनुभव प्राप्त होता है। यहां पर सांस लेने में ऑक्सीजन की कमी का अनुभव हो सकता है। जॉलिंगकांग के पास कुछ दूर अच्छी सड़क बनी है। इतने उच्च हिमालयी क्षेत्र में हेलीपोर्ट का भी मौजूद होना रोमांचित करता है।

कुछ युवा श्रद्धालु बर्फ की तरह जमे पार्वती सरोवर के जल में स्नान करने की हिम्मत भी कर सकते हैं। श्रद्धालु यहां से हिम्मत बनने पर करीब ढाई-तीन किमी की और भी कठिन पैदल ट्रेकिंग कर आदि कैलाश के ठीक नीचे स्थित गौरी कुंड भी जाते हैं। 12 हजार फिट से अधिक की ऊंचाई पर स्थित गौरीकुंड पूरी तरह से बर्फ से जमा रहता है।

यहां श्रद्धालुओं के बनाये पत्थरों के छोटे-छोटे मंदिर नजर आते हैं और आदि कैलाश के बिल्कुल नीचे भगवान शिव के चरण स्पर्श करने का दिव्य अनुभव भी लिया जा सकता है। यहां से वापस जॉलिंगकांग लौटकर यहां कुमाऊं मंडल विकास निगम की सुविधा में दिन का भोजन लेकर श्रद्धालु वापस गुंजी लौट आते हैं।

Know the miracles related with om parvat | ईश्वर का एक चमत्कार कहलाता हैं ॐ  पर्वत, जानें भोलेनाथ से जुड़े इस पर्वत का रहस्य | Patrika Newsगुंजी में रात्रि विश्राम के उपरांत अगली सुबह तड़के यात्री ॐ पर्वत के दर्शनों के लिये निकलते हैं। सुबह तड़के-यथाशीघ्र निकलने का कारण यह है कि अधिक देर में हिमालय के पहाड़ों पर बादल छा जाते हैं और सामने होने के बावजूद आदि कैलाश या ॐपर्वत के ठीक से दर्शन नहीं हो पाते हैं।

बहरहाल, करीब 14 किमी दूर ॐ पर्वत के पड़ाव नाबीढांग पहुंचने से पहले कालापानी एक महत्वपूर्ण पड़ाव है। इस स्थान पर स्थित माता काली के मंदिर से काली नदी निकलती है। मंदिर के ठीक सामने दूर स्थित ऊंचे पहाड़ की चट्टान पर रामायण के रचयिता वेद व्यास जी की गुफा बताई जाती है। इस स्थान तक एक ओर भारत व दूसरी ओर नेपाल है। लेकिन यहां से आगे पूरा क्षेत्र भारतीय है। भारतीय सेना हमेशा यहां सतर्क रहती है।

नाबीढांग से प्राकृतिक तौर पर बने ॐ पर्वत के दर्शन भारतीय संस्कृति में ॐ की महत्ता को रेखांकित करते हुये श्रद्धा से भर देते हैं। यहां से कालापानी की ओर नाग पर्वत के दर्शन भी होते हैं। श्रद्धालु ॐ पर्वत में तीन ॐ के दर्शन भी करते हैं। यहां से आगे करीब 10 किमी की दूरी पर लिपुलेख पास दर्रे के पार चीन की सीमा लग जाती है। लिपुलेख पास के पास से चीन में स्थित कैलाश पर्वत के भी दर्शन होते हैं, लेकिन यहां से आगे जाना अभी प्रतिबंधित है।

नाबीढांग में सुबह का नास्ता करके यात्री वापस गुंजी होते हुये बुदी में दिन का भोजन कर सीधे उसी दिन धारचूला तथा अगले दिन डीडीहाट में दिन का भोजन कर शाम तक चौकोड़ी लौट आते हैं।

अगले दिन पाताल भुवनेश्वर के दर्शन एवं वहीं दिन का भोजन कराने के बाद शाम तक यात्री भीमताल पहुंचते हैं और भीमताल में रात्रि विश्राम के बाद सातवें दिन यात्रियों को काठगोदाम में छोड़ दिया जाता है। कुल मिलाकर पूरी यात्रा अत्यधिक दिव्य व अलौकिक अनुभवों वाली एवं जीवन को एक नई अच्छी दिशा देने वाली साबित होती है।

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(Kailash Aadi Kailah Om Parvat Yatra) रोमांच के साथ धार्मिक महत्व की है यात्रा
नैनीताल। स्कंद पुराण के मानस खंड में आदि कैलाश एवं ॐ पर्वत की यात्रा को कैलाश मानसरोवर यात्रा जितनी ही प्रमुखता दी गई है। पिथौरागढ़ जिले में भारत तिब्बत सीमा के पास स्थित आदि कैलास जो कैलास पर्वत की प्रतिकृति है।

(Kailash Aadi Kailah Om Parvat Yatra) मान्यता है कि आदि कैलास पर भी समय-समय पर भोले बाबा का निवास रहा है, और पास ही स्थित पार्वती सरोवर में माता पार्वती का स्नान स्थल हुआ करता था। ॐ पर्वत तीन देशों की सीमाओं से लगा है। इस स्थान के धार्मिक एवं पौराणिक महत्व का वर्णन महाभारत, रामायण एवं वृहत पुराण जैसे ग्रंथों में मिलता है।

(Kailash Aadi Kailah Om Parvat Yatra) यात्रा में इन धार्मिक पड़ावों से गुजरेंगे श्रद्धालु
नैनीताल। आदि कैलास एवं ॐ पर्वत यात्रा सिर्फ दो स्थानों की नहीं बल्कि अनेक धार्मिक तीर्थों को समेटे हैं। काठगोदाम, भीमताल से काठगोदाम तक आठ दिनों में होने वाली यह यात्रा नीब करौरी बाबा आश्रम कैंची धाम, चितई गोलू मंदिर, जागेश्वर धाम, पाताल भुवनेश्वर, पार्वती मुकुट, ब्रह्मा पर्वत, शेषनाग पर्वत, शिव मंदिर, पार्वती सरोवर, गौरीकुंड, महाभारत काल के बहुत से स्थानों जैसे पांडव किला, कुंती पर्वत, पांडव पर्वत एवं वेदव्यास गुफा से होकर गुजरेगी।

(Kailash Aadi Kailah Om Parvat Yatra) खूबसूरत पहाड़ियों से घिरे, नैसर्गिक दृश्यों से परिपूर्ण, मन को रोमांचित करने वाली इस यात्रा को बेहतर व सुविधाजनक बनाने के लिए कुमाऊं मंडल विकास निगम और संस्था की ओर से यात्रा में हवन पूजा एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम के आयोजन का भी प्रबंध किया गया है। आज के अन्य ताजा ‘नवीन समाचार’ पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें।

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(Kailash Aadi Kailah Om Parvat Yatra) आदि कैलाश ओम पर्वत यात्रा 2023 की संपूर्ण जानकारी | श्राइन यात्रानवीन समाचार, नैनीताल, 6 मार्च 2023 (Kailash Aadi Kailah Om Parvat Yatra। देवाधिदेव महादेव के चीन में स्थित घर कैलाश की प्रति भारत वर्ष में ही उत्तराखंड के पिथौरागढ़ जनपद में पड़ने वाले कैलाश की प्रतिकृति आदि कैलाश, ऊं पर्वत व पार्वती सरोवर के दर्शन कराने वाली यात्रा की तैयारियां शुरू हो गई हैं। कुमाऊँ मंडल विकास निगम द्वारा वर्ष 1991 से निरन्तर आयोजित की जा रही यह यात्रा इस वर्ष 4 मई से नवम्बर माह के अंत तक आयोजित की जाएगी। यह भी पढ़ें : नैनीताल से हल्द्वानी के लिए निकली युवती तीन दिन से गुमशुदा…

(Kailash Aadi Kailah Om Parvat Yatra) निगम के प्रबंध निदेशक विनीत तोमर के हवाले से महाप्रबंधक एपी बाजपेयी ने बताया कि वर्ष 2023 की यात्रा के संचालन हेतु सभी आवश्यक कार्यवाहियां पूर्ण कर ली गई है। पर्यटकों की सामान्य जानकारी हेतु प्रतिदिन के दलवार कार्यक्रमों के लिए व्यवस्थागत सुविधाएं आवेदन प्रपत्र एवं दरों का निर्धारण कर लिया गया है ओर इसे निगम की वेबसाईट पर प्रदर्शित करने हेतु अपलोड कर लिया गया है। यह भी पढ़ें : दूसरे धर्म के पड़ोसी के साथ गायब हुई 20 वर्षीय युवती, ग्रामीण कोतवाली में धरने पर बैठे…

(Kailash Aadi Kailah Om Parvat Yatra) उन्होंने बताया कि धार्मिक महत्व के साथ ही साहसिक एवं प्राकृतिक पर्यटन की त्रिवेणी मानी जाने वाली इस यात्रा में प्रतिभाग करने हेतु यात्री निगम के जनसंपर्क कार्यालयों अथवा केन्द्रीय आरक्षण केन्द्र, नैनीताल के माध्यम से बुकिंग करा सकते हैं। यह यात्रा काठगोदाम से चलकर और काठगोदाम में वापस लौटने तक कुल 7 रात्रि एवं 8 दिवसों की तथा धारचूला से शुरू होकर धारचूला लौटने तक कुल 4 रात्रि एवं 6 दिवसों की निर्धारित की गई है। यह भी पढ़ें : महिला पुलिस कर्मी के पति व पिता की दबंगई, पुलिस लाइन में की एएसआई की पिटाई…

(Kailash Aadi Kailah Om Parvat Yatra) उन्होंने बताया कि इस वर्ष 2023 की यात्रा हेतु पैकेज की दरें काठगोदाम से 45 हजार रुपए एवं धारचूला से 35 हजार रुपए प्रति यात्री निर्धारित की गई हैं। इसमें आवास, भोजन, परिवहन, गाईड इत्यादि की सुविधायें भी सम्मिलित हैं। मई एवं जून माह में अधिकतम 40 यात्रियों के 20 दलों के लिए यात्रा का निर्धारण किया गया है। यह भी पढ़ें : युवती से यौन उत्पीड़न की हद, तन तो लूटा ही अब धन लूटने की ओर…

(Kailash Aadi Kailah Om Parvat Yatra) यात्रा के दौरान यात्री काठगोदाम से भीमताल, कैंची, अल्मोड़ा, चितई, जागेश्वर, पिथौरागढ़, जौलजीबी, धारचूला, बूंदी, छियालेख, गर्ब्यांग, नपलच्यू, कालापानी, नाभीढांग से ॐ पर्वत के दर्शन करते हुए वापस गुंजी, नाबी, कुट्टी एवं ज्योलिंगकांग से आदि कैलाश एवं पार्वती सरोवर के दर्शन करते हुए वापसी में गुंजी, बूंदी, धारचूला, डीडीहाट, चौकोड़ी, पाताल भुवनेश्वर, शेराघाट, अल्मोड़ा, भीमताल होते हुए काठगोदाम लौटेंगे और इस दौरान पिथौरागढ़, धारचूला गुंजी, बूंदी, चौकोड़ी व भीमताल में रात्रि विश्राम करेंगे। (डॉ. नवीन जोशी) आज के अन्य ताजा ‘नवीन समाचार’ पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें

यह भी पढ़ें (Kailash Aadi Kailah Om Parvat Yatra) : महाशिवरात्रि पर विशेष : यहाँ भी है एक कैलास, यहाँ भी कैलास की तरह खुले में पार्थिव लिंग स्वरूप में विराजते हैं महादेव

-देखने में कैलास पर्वत की तरह ही  है ‘छोटा कैलास’ पर्वत
-बड़ी मान्यता है भीमताल विकास खंड की ग्राम सभा पिनरौ में स्थित शिव के इस धाम की
-पर्वतीय क्षेत्रों से अधिक यूपी के मैदानी क्षेत्रों से पहुंचते हैं श्रद्धालु, महाशिवरात्रि पर लगता है बड़ा मेला

डॉ. नवीन जोशी @ नवीन समाचार, नैनीताल (Kailash Aadi Kailah Om Parvat Yatra) देवों के देव कहे जाने वाले महादेव शिव का सबसे बड़ा धाम है कैलास पर्वत, जहां से विराजते हैं। लेकिन बहुत लोग जानते हैं कि नैनीताल जनपद में भी शिव के कैलास की प्रतिकृति छोटा कैलास के रूप में मौजूद है। अपनी दुर्गमता के कारण मीडिया की पहुंच से दूर भीमताल ब्लॉक के पिनरौ ग्राम सभा स्थित छोटा कैलास की प्रसिद्धि निकटवर्ती पर्वतीय क्षेत्रों में ही नहीं यूपी के सुदूर मैदानी क्षेत्रों तक फैली हुई है,

(Kailash Aadi Kailah Om Parvat Yatra) और संभवतया इसीलिये यहां कमोबेश स्थानीय पर्वतीय लोगों से अधिक यूपी के सैलानी, नुकीली-पथरीली चट्टानों पर और कई हरिद्वार से मीलों नंगे पैर चलते हुए कांवड़ लेकर यानी कठोर तपस्या करते हुए पहुंचते हैं, और पुण्य लाभ अर्जित करते हैं। खास बात यह भी है कि पहाड़ की चोटी पर यहां कोई बड़ा मंदिर नहीं है, और शिव पार्थिव लिंग स्वरूप में खुले में विराजते हैं। इधर हाल में कुछ दूरी पर एक मंदिर बनाया गया है। देखें वीडिओ:

(Kailash Aadi Kailah Om Parvat Yatra) नैनीताल का छोटा कैलास पर्वत दिखने में करीब-करीब चीन में स्थित कैलास पर्वत जैसा ही है। संभवतया इसी कारण इस स्थान का नाम छोटा कैलास पड़ा हो। पौराणिक मान्यता की बात करें तो पौराणिक इतिहासकारों के अनुसार मानसखंड के अध्याय 40 से 51 तक नैनीताल से लेकर कैलास तक के क्षेत्र के पुण्य स्थलों, नदी, नालों और पर्वत श्रृंखलाओं का 219 श्लोकों में वर्णन मिलता है।देखें वीडिओ:

(Kailash Aadi Kailah Om Parvat Yatra) मानसखंड में नैनीताल को कैलास मानसरोवर की ओर जाते समय चढ़ाई चढ़ने में थके अत्रि, पुलह व पुलस्त्य नाम के तीन ऋषियों ने मानसरोवर का ध्यान कर उत्पन्न किया गया त्रिऋषि सरोवर, भीमताल को महाबली भीम के गदा के प्रहार तथा उनके द्वारा अंजलि से भरे गंगा जल से उत्पन्न किया गया भीम सरोवर, नौकुचियाताल को नवकोण सरोवर, गरुड़ताल को सिद्ध सरोवर व नल-दमयंती ताल को नल सरोवर कहा गया है।

(Kailash Aadi Kailah Om Parvat Yatra) नैनीताल के पास का नाला भद्रवट, भीमताल के बगल का सुभद्रा नाला, दोनों के गार्गी यानी गौला नदी में मिलन का स्थल भद्रवट यानी चित्रशिला घाट-रानीबाग कहा गया है। इसी गार्गी नदी के शीर्ष पर नौकुचियाताल से आगे करीब 1900 मीटर की ऊंचाई का पर्वत छोटा कैलास कहा जाता है।

(Kailash Aadi Kailah Om Parvat Yatra) पास में ही देवस्थल नाम का स्थान है, जहां पिछले वर्ष एशिया की सबसे बड़ी 3.6 मीटर व्यास की दूरबीन को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बेल्जियम से देश को समर्पित किया था। नीचे गौला नदी के छोर पर युगदृष्टा हैड़ाखान बाबा का धाम स्थित है। छोटा कैलास पहुंचने के लिये हल्द्वानी से रानीबाग, अमृतपुर होते हुए करीब 30 किमी और भीमताल से जंगलियागांव होते हुए करीब 20 किमी सड़क के रास्ते छोटे वाहनों से ग्राम सत्यूड़ा पहुंचा जाता है।

(Kailash Aadi Kailah Om Parvat Yatra) यहां से करीब तीन किमी की खड़ी चढ़ाई शिव के इस धाम पर पहुंचाती है। महाशिवरात्रि के दिन यहां हर वर्ष बड़ा मेला लगता है, जिसमें पहली शाम से ही श्रद्धालुओं के पहुंचने का सिलसिला शुरू हो जाता है। रात भर भजन-कीर्तन व जागरण किया जाता है। प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार हर वर्ष एक लाख से अधिक सैलानी यहां एक दिन में पहुंचते हैं। अन्य ‘नवीन समाचार’ पढ़ने के लिये यहाँ क्लिक करें।

यह भी पढ़ें (Kailash Aadi Kailah Om Parvat Yatra) : कैलाश मानसरोवर यात्रा के होने-न होने पर छाया असमंजस समाप्त !

नवीन समाचार, नई दिल्ली, 9 फरवरी 2023। वर्ष 2020, 2021 और 2022 की तरह इस वर्ष भी यानी 2023 में भी लगातार चौथे वर्ष कैलाश मानसरोवर यात्रा नहीं होगी। यात्रा पर छाया असमंजस का कुहासा गुरुवार को कमोबेश पूरी तरह छंट गया है। यह भी पढ़ें : नैनीताल में गृहस्वामी गए बेटी का निकाह कराने, चोरों ने खंगाल दिया बंद घर…

(Kailash Aadi Kailah Om Parvat Yatra) राज्यसभा में कैलाश मानसरोवर यात्रा को लेकर कर्नाटक से बीजेपी सांसद नारायण कोरगप्पा के सवाल पर विदेश मंत्रालय की ओर से केंद्रीय विदेश राज्य मंत्री वी मुरलीधरन ने स्थिति स्पष्ट करते हुए कह दिया है कि इस वर्ष भी यात्रा नहीं होगी, क्योंकि स्थितियां यथावत हैं। यह भी पढ़ें : नैनीताल: हल्द्वानी हाईवे के पास पेड़ पर लटकता मिला गुलदार का शव….

(Kailash Aadi Kailah Om Parvat Yatra) गौरतलब है कि श्री कोरगप्पा ने सवाल पूछा था कि साल 2023 में कैलाश मानसरोवर यात्रा की क्या स्थिति है ? इसके जबाव में विदेश मंत्रालय ने बताया कि यात्रियों के स्वास्थ्य और सुरक्षा को देखते हुए साल 2020, 2021 और 2022 में कोरोना के कारण कैलाश मानसरोवर यात्रा रोकने का फैसला लिया गया था। यात्रा की बहाली के लिए यात्रियों की सुरक्षा जरूरी है. फिलहाल स्थिति वैसी ही है। यह भी पढ़ें : अवैध संबंधों की परिणति: पत्नी रात्रि में चुपके से पड़ोसी के पास चली गई, पीछे से आई पति ने पड़ोसी को कुल्हाड़ी से काट डाला…

(Kailash Aadi Kailah Om Parvat Yatra) वहीं दूसरे सवाल में सांसद नारायण कोरगप्पा ने कैलाश मानसरोवर यात्रियों की संख्या को लेकर जानकारी मांगी थी, जिसके जवाब में विदेश मंत्रालय ने बताया है कि साल 2015 में 999, 2016 में 983, 2017 में 919, 2018 में 1328 और 2019 में 1346 यात्री मानसरोवर यात्रा पर गए थे। (डॉ.नवीन जोशी) आज के अन्य ताजा ‘नवीन समाचार’ पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें।

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डॉ. नवीन जोशी @ नवीन समाचार, नैनीताल, 31 मई 2022। आखिर दो वर्षों के अंतराल के बाद देवाधिदेव महादेव के भक्त अपने भगवान भोले के उनके छोटे घर में दर्शन कर पाएंगे। मंगलवार को आदि कैलाश यात्रा का प्रथम दल सुबह 8 बजे भीमताल स्थित कुमाऊं मंडल विकास निगम के पर्यटक आवास गृह पहुँचा।

(Kailash Aadi Kailah Om Parvat Yatra) यहां दल में शामिल 15 महिलाओ सहित कुल 30 यात्रियों का निगम की पारंपरिक कुमाउनी परिधानों-रंग्वाली पिछौड़े में सजी महिला कर्मियों ने तिलक लगाकर स्वागत किया। छोलिया नर्तकों ने भी स्वागत में नृत्य प्रस्तुत कर यात्रा में लोक संस्कृति के रंग भरे और इसके बाद दल के यात्री नाश्ता कर सुबह साढ़े 10 बजे आग के लिए रवाना हुए।

(Kailash Aadi Kailah Om Parvat Yatra) बताया गया है कि आगे यात्रा दल आज बाबा नीब करौरी के कैंची धाम व चितई गोलू मंदिर के दर्शन करते हुए दोपहर का भोज जागेश्वर धाम में करेगा, और शाम पर पिथौरागढ़ पहुंचकर वहीं पर्यटक आवास गृह में रात्रि विश्राम करेगा। प्रथम दल को रवाना करने के लिये निगम के प्रबंध निदेशक विनीत तोमर एवं महाप्रबंधक एपी वाजपेई स्वयं मौजूद रहे, और यात्रियों का उत्साहवर्धन किया। आज के अन्य ताजा ‘नवीन समाचार’ पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें।

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-अभी से जून तक के लिए 700 यात्री कर चुके हैं इस यात्रा के लिए पंजीकरण
डॉ. नवीन जोशी @ नवीन समाचार, नैनीताल, 30 मई 2022 (Kailash Aadi Kailah Om Parvat Yatra)। कोविड महामारी के दो साल बाद कुमाऊं मंडल विकास निगम की ओर से संचालित आदि कैलास यात्रा मंगलवार से शुरू रही है। यात्रा को लेकर भोले के भक्तों में गजब का उत्साह है। बताया गया है कि अभी से जून माह तक के पंजीकरण पूरे हो चुके हैं। अब तक 700 से अधिक पंजीकरण हो चुके हैं। यात्रा पर 15 महिलाओं सहित 30 यात्रियों का पहला दल 31 मई को भीमताल टीआरसी से धारचूला के लिए रवाना होगा।

(Kailash Aadi Kailah Om Parvat Yatra) उल्लेखनीय है कि कुमाऊं मंडल विकास निगम ने इस बार नोएडा की संस्था ‘डिवाइन मंत्रा प्राइवेट लिमिटेड-ट्रिप टु टेंपल्स’ के साथ अनुबंध किया है। संस्था को परिवहन, यात्री पंजीकरण की जिम्मेदारी दी गई है। निगम 1990 से आदि कैलास यात्रा आयोजित करा रहा है। पहले इस यात्रा के लिए सड़क ना होने के कारण आवागमन में करीब 200 किलोमीटर पैदल चलना होता था।

(Kailash Aadi Kailah Om Parvat Yatra) अब भारत सरकार और उत्तराखंड सरकार के प्रयासों और सीमा सड़क निर्माण विभाग के प्रयासों से नावीढांग एवं जोलीकांग तक राष्ट्रीय राजमार्ग का निर्माण कार्य चल रहा है। इससे यात्रियों को करीब 100 किमी से अधिक पैदल नहीं चलना होगा। केएमवीएन के महाप्रबंधक एपी वाजपेयी ने बताया कि यात्रा की तैयारियां पूरी हो चुकी हैं।

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-अब तक करीब 200 किलोमीटर पैदल चलना पड़ता था, अब आठ दिन की यात्रा में केवल 5 किलोमीटर ही पैदल चलना होगा

डॉ. नवीन जोशी @ नवीन समाचार, नैनीताल, 24 मार्च 2022 (Kailash Aadi Kailah Om Parvat Yatra) । भारत-तिब्बत सीमा के निकट तक राष्ट्रीय राजमार्ग का निर्माण होने के साथ कुमाऊं मंडल विकास निगम इस वर्ष जून से अक्टूबर माह तक वाहन से आदि कैलाश यात्रा कराएगा। इस हेतु निगम ने नोएडा की संस्था डिवाइन मंत्रा प्राइवेट लिमिटेज (ट्रिप टु टैम्पल्स) के साथ हाथ मिला लिए हैं। दो वर्ष से कोरोना की वजह से नहीं हो पा रही आदि कैलाश व कैलाश यात्रा के बाद यह भगवान भोले नाथ के भक्तों के लिए बड़ा शुभ समाचार हो सकता है।

(Kailash Aadi Kailah Om Parvat Yatra) उल्लेखनीय है कि पिथौरागढ़ जनपद में पड़ने वाला आदि कैलाश हूबहू शिव के धाम कहे जाने वाले चीन स्थित कैलाश पर्वत की प्रतिकृति है। निगम 1990 से यहां के लिए करीब 200 किलोमीटर की पैदल यात्रा आयोजित करता रहा है। अब नाभिढांग व जोलिंगकौंग तक राष्ट्रीय राजमार्ग का निर्माण होने के बाद अब यात्रियों को केवल आदि कैलाश एवं पार्वती सरोवर के दर्शन हेतु पांच किलोमीटर की ही पैदल यात्रा करनी होगी।

(Kailash Aadi Kailah Om Parvat Yatra) 8 दिवसीय इस यात्रा के दौरान यात्रा काठगोदाम से भीमताल, नीब करौरी बाबा आश्रम, चितई गोलू मंदिर, जागेश्वर मंदिर समूह, पार्वती मुकुट, ब्रह्मा पर्वत, शेषनाग पर्वत, शिव मंदिर, पार्वती सरोवर, गौरीकुंड, महाभारतकालीन पाताल भुवनेश्वर, पांडव किला, कुंती पर्वत, पांडव पर्वत व वेद व्यास गुफा के दर्शन कराते हुए गुजरेगी।

(Kailash Aadi Kailah Om Parvat Yatra) निगम के प्रबंध निदेशक नरेंद्र सिंह भंडारी ने कहा कि इस यात्रा के माध्यम से स्थानीय लोगों को होम स्टे एवं अन्य माध्यमों से रोजगार देने एवं यात्रियों को स्थानीय संस्कृति के दर्शन कराने का प्रयास किया जाएगा। इस तरह यह यात्रा धर्म एवं संस्कृति का अद्भुत समन्वय होगी। वहीं महाप्रबंधक एपी बाजपेई ने कहा कि अब तक पैदल मार्ग होने की वजह से आदि कैलाश न जा पाने वाले शिवभक्तों को इस यात्रा का लाभ मिलेगा। आज के अन्य ताजा ‘नवीन समाचार’ पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें।

यह भी पढ़ें : कैलाश मानसरोवर यात्रा के लिए ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया हो रही है, इतना देना होगा शुल्क

नवीन समाचार, नैनीताल, 22 मार्च 2019। पड़ोसी देश चीन में स्थित हिंदू, बौद्ध सहित कई धर्मों की आस्था के प्रमुख केंद्र कैलाश मानसरोवर की यात्रा की ऑनलाइन आवेदन की प्रक्रिया आगामी 29 मार्च से शुरू होने जा रही है। यात्रा के लिए केएमवाई डॉट जीओवी डॉट इन वेबसाइट के जरिये ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। एक यूजर आईडी से यानी एक बैच में साथ जाने के लिए अधिकतम दो आवेदन किये जा सकते हैं।

उत्तराखंड के परंपरागत मार्ग से लिपुलेख मार्ग से प्रस्तावित यात्रा के लिए यात्रियों को 5000 रुपये पुष्टि राशि, यात्रा की आयोजक कुमाऊं मंडल विकास निगम को 30 हजार रुपये, चिकित्सा जांच के लिए 3,100 तथा स्ट्रेस ईको जांच के लिए 2,500 रुपये, चीन का वीजा शुल्क 2400, कुलियों के लिए 12,189 रुपये, टट्टुओं के लिए 16081 व सामूहिक क्रियाकलापों के लिए 4000 रुपये यानी कुल 75 हजार 270 रुपये का शुल्क भारतीय मुद्रा में एवं 901 अमेरिकी डॉलर तिब्बत स्वायत्त क्षेत्र के लिए तथा चीन की सीमा में कुलियों एवं ट्टुओं आदि के लिए 2340 चीनी मुद्रा देनी होगी।

इस तरह कुल मिलाकर करीब 1.6 लाख रुपये प्रति यात्री खर्च होने का अनुमान बताया गया है। यात्रा पर 18 दलों के जाने एवं 24 दिन लगने का अनुमान बताया गया है। वहीं सिक्किम के नाथुला दर्रे से जाने के लिए अतिरिक्त 4000 रुपये भारतीय मुद्रा एवं 1100 अमेरिकी डॉलर अतिरिक्त देने होंगे। विस्तृत विवरण देखें यहां

यह है समस्या का मूल कारण

नैनीताल। कैलाश मानसरोवर यात्रा के सुचारू न हो पाने के पीछे समस्या यह है कि उच्च हिमालयी क्षेत्र में स्थित गुंजी में अधिकांश समय बादल घिरे रहते हैं। इसलिए वहां अक्सर हेलीकॉप्टरों का उतरना कठिन होता है, जबकि अपेक्षाकृत कम ऊंचाई पर स्थित गुंजी में यह समस्या नहीं होती है। लेकिन गुंजी में छोटे हेलीकॉप्टर ही उतर सकते हैं।

इधर यात्रियों को पिथौरागढ़ से गुंजी व गुंजी से पिथौरागढ़ लाने के लिए तैनात सेना के बड़े हेलीकॉप्टरों को 11 से 12 बजे के बीच उड़ान की अनुमति नहीं है, जबकि इसी समय के दौरान मौसम खुल रहा है। लेकिन अनुमति न होने के कारण वे उड़ नहीं पा रहे हैं, और नैनी सैनी हवाई अड्डे तक जाने के बाद यात्रियों को लौटना पड़ रहा है।

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  • तय समय पर नहीं आयेंगे 15वें से 18वें दल 

नैनीताल, 2 अगस्त 2018। भारतीय विदेश मंत्रालय ने कुमाऊं मंडल विकास निगम के द्वारा कुमाऊं-उत्तराखंड के पौराणिक लिपुलेख दर्र के मार्ग से आयोजित की जाने वाली कैलाश मानसरोवर यात्रा के आखिरी चार बैचों को ‘विलंबित’ कर दिया है। ऐसा यात्रा मार्ग पर मौसम की खराबी की वजह एवं निगम के अनुरोध पर किया गया है।

आगे निगम के एमडी धीराज गर्ब्याल ने साफ़ किया कि यात्रा को रोका नहीं वरन विलंबित (Delayed) किया गया है।  बताया कि जैसे-जैसे यात्री दल आगे बढ़ेंगे, वैसे-वैसे विलंबित दलों के यात्रियों को यात्रा में लाया जाएगा। उल्लेखनीय है कि यात्रा पर आ चुके कई दल पहले ही मौसमी दुश्वारियों के कारण पहले ही काफी विलंब से चल रहे हैं, व जगह-जगह फंसे हुए हैं।

आदि कैलाश यात्रा रोकी, 1 करोड़ का नुकसान
नैनीताल। कुमाऊं मंडल विकास निगम ने अपने स्तर से आयोजित की जाने वाली आदि कैलाश यात्रा को निरस्त कर दिया है। उल्लेखनीय है कि गत वर्ष इस यात्रा में 424 यात्री गये थे, और इस वर्ष मार्च माह में ही 300 लोगों ने इस यात्रा के लिए बुकिंग करा दी थी। किंतु 1 व 2 जुलाई को यात्रा मार्ग पर नज्यंग व मालपा में हुए भूस्खलन के कारण यात्रा में व्यवधान आया और चार दलों में केवल 179 यात्री ही यात्रा कर पाये। इससे निगम को करीब 1 करोड़ का नुकसान हुआ है। निगम के एमडी धीराज गर्ब्याल ने कहा कि यात्रा मार्ग के दुरुस्त न होने और हेलीकॉप्टर न मिल पाने के कारण यात्रा को रोक दिया गया है।

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-कैलाश मानसरोवर यात्रा में यात्रियों को 9 दिन तक अतिरिक्त रुकाना पड़ गया
-आदि कैलाश यात्रा में यात्रियों के न जा पाने से हुआ करीब एक करोड़ रुपए का नुकसान
-आदि कैलाश यात्रियों के लिए छोटे हेलीकॉप्टर का प्रबंध करने जा रहा है केएमवीएन
नवीन जोशी, नैनीताल। खराब हुए मौसम ने कैलाश एवं आदि कैलाश यात्राओं की आयोजक केएमवीएन यानी कुमाऊं मंडल विकास निगम को करीब सवा करोड़ रुपए का नुकसान करा दिया है। इसमें से करीब एक करोड़ रुपए का नुकसान आदि कैलाश यात्रा के नज्यंग व मालपा में हुए भूस्खलन के कारण सुचारू न हो पाने के कारण हुआ है, जिससे प्राप्त आय से निगम को काफी हद तक कैलाश यात्रा में आने वाले अतिरिक्त खर्चों को वहन करने में मदद मिलती है। वहीं कैलाश यात्रा के यात्रियों को निगम को 8-9 दिनों तक भी बिना कोई अतिरिक्त किराया लिये टिकाना पड़ा है। इससे भी निगम को करीब 22 लाख रुपए का नुकसान उठाना पड़ा है। ऐसे में आदि कैलाश यात्रा को सुचारू करने के लिए निगम छोटे हेलीकॉप्टर का प्रबंध करने जा रहा है।

पहले आदि कैलाश यात्रा की करें। 2016 में 222 ओर पिछले वर्ष यानी 2017 में आदि कैलाश यात्रा पर 424 यात्री गये थे, और इस वर्ष की यात्रा के लिए भी मार्च माह में ही 300 यात्रियों ने बुकिंग करा ली थी। इससे इस वर्ष पिछले वर्ष से भी अधिक यात्रियों के यात्रा पर जाने की पूरी संभावना थी। किंतु इस वर्ष 1-2 जुलाई को नज्यंग व मालपा में हुए भूस्खलन के बाद पै

पूर्व समाचार : कैलाश मानसरोवर यात्रा हुई बिचौलिया मुक्त, हजारों स्थानीय लोग कमाएंगे करोड़ों, पलायन भी रुकेगा, जानें कैसे..

-पोनी-पोर्टरों का पहली बार निगम ने किया पंजीकरण व किया आपदा-बचाव को प्रशिक्षित
-यात्रियों को भी पोनी-पोर्टरों के बिचौलिये ठेकेदारों को दिया-जाने वाला 2-3 हजार का खर्च बचेगा
-नाबी गांव के 20 परिवारों के पास अनुकूलन के लिए एक रात्रि ‘होम स्टे’ भी करेंगे यात्री, सीमांत क्षेत्रों से व्यापक पैमाने पर पलायन पर भी लगेगी लगाम
-पहले दल के साथ मुख्यमंत्री रावत भी शामिल हो सकते हैं नाबी में होम स्टे में

नवीन जोशी, नैनीताल। यात्रा मार्ग को लेकर रहे तमाम संशयों के बाद अपने परंपरागत मार्ग से ही मंगलवार से शुरू होने जा रही आदि कैलाश यात्रा में इस बार काफी कुछ नया होने जा रहा है। यात्रा जहां पहली बार धारचूला से 42 किमी आगे गर्बाधार तक छोटे वाहनों से जाएगी, और इस प्रकार यात्रियों को आने-जाने में कुल 84 किमी कम पैदल चलना पड़ेगा, वहीं दो पड़ाव सिरखा व गाला यात्रा से हट जाएंगे, तथा नाबी और कालापानी जुड़ जाएंगे।

नाबी में यात्री पहली बार आगे की उच्च हिमालयी यात्रा के लिए ‘होम स्टे’ करेंगे। इस मौके पर मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत भी पहले दल के यात्रियों के साथ नाबी में हो सकते हैं। यात्रा में जाने वाले सभी यात्रियों का 5-5 लाख रुपए का बीमा होगा, और यात्रियों के साथ जाने वाले सभी 600 पोनी-पोर्टर आपदा की स्थितियों के लिए प्रशिक्षित होंगे। वहीं सबसे बड़ी बात, पहली बार यात्रा बिचौलियों से मुक्त होगी, तथा यात्रा के जरिये हजारों स्थानीय लोग 2 करोड से अधिक रुपए की सीधे एवं करीब एक करोड़ अपरोक्ष तौर पर अतिरिक्त आय भी प्राप्त करेंगे।

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यात्रा के भारतीय क्षेत्र में आयोजक कुमाऊं मंडल विकास निगम के प्रबंध निदेशक धीराज गर्ब्याल ने बताया कि पहली बार यात्रा से बिचौलियों को दूर कर दिया गया है, तथा यात्रा मार्ग के स्थानीय लोगों को सीधे लाभ दिया जा रहा है। पहली बार यात्रा में नाबी गांव का पड़ा जोड़ा गया है, जहां कैलाश के साथ ही आदि कैलाश यात्रा के यात्री स्थानीय मौसम व परिस्थितियों से साम्य-अनुकूलन बनाने के लिए एक रात्रि ‘होम स्टे’ करेंगे।

इससे नाबी गांव के 20 होम स्टे के लिए प्रशिक्षित पूरी तरह आवश्यक सुविधाओं से युक्त किये गये परिवार सीधे तौर पर यात्रा में आने वाले यात्रियों से प्रति यात्री 800 रुपए की दर से प्राप्त करेंगे। इसके साथ ही सांस्कृतिक कार्यक्रमों एवं अन्य गतिविधियों के जरिये भी स्थानीय लोगों को आय मिलेगी। इसके अलावा निगम ने पहली बार यात्रियों के साथ जाने वाले पोनी-पोर्टरों (घोड़े वाले व कुली) की व्यस्था अपने हाथ में लेते हुए 600 लोगों का पंजीकरण कराने के साथ उन्हें आपदा राहत का प्रशिक्षण दिलाया है।

इससे हर यात्री से पोर्टरों को 15-16 हजार रुपए की आय प्राप्त हो सकती है। उल्लेखनीय है कि यात्रा पर अधिकतम 1080 यात्री जा सकते हैं, तथा अधिकांश यात्री इनकी सेवा लेते ही हैं। इस प्रकार केवल पोनी-पोर्टरों व होम-स्टे से ही स्थानीय लोगों को करीब पौने दो करोड़ रुपए की अतिरिक्त आय हो सकती है।

उल्लेखनीय है कि पहले पोनी-पोर्टरों की व्यवस्था सीधे निगम के बजाय बिचौलियों के माध्यम से यात्रियों को करनी पड़ती थी, जबकि इस बार बिचौलियों की भूमिका हटा दी गयी है। एमडी श्री गर्ब्याल ने बताया कि अब पोनी-पोर्टरों को उनके पंजीकरण के आधार पर नंबर से यात्रियों से सेवाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। इस प्रकार यात्रियों को भी बिचौलियों को दिया जाने वाले प्रति पोनी-पोर्टर करीब 2-3 हजार रुपए का अतिरिक्त हिस्सा बचेगा।

इसके अलावा आदि कैलाश यात्रा के यात्रियों से भी स्थानीय लोगों को इसी तरह की करोड़ों रुपए की आय घर पर होने जा रही है। निगम की इस पहल से सीमांत क्षेत्रों से होने वाले पलायन पर भी लगाम लगने की उम्मीद की जा रही है।

उल्लेखनीय है कि 1981 से चल रही कैलाश मानसरोवर यात्रा के तहत 2017 तक 442 दलों में कुल मिलाकर 15,952 यात्री यात्रा पर गये हैं। इनमें सर्वाधिक 921 यात्री वर्ष 2017 एवं 910 यात्री 2014 में 18-18 दलों में यात्रा में गये हैं।

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-हर दल में यात्रियों की संख्या से दो गुनी संख्या में जाने वाले पोनी-पोर्टर आपदा राहत कार्यों के लिए किये गए प्रशिक्षित
नवीन जोशी, नैनीताल। कुमाऊं मंडल के अंतर्गत कुमाऊं मंडल विकास निगम यानी केएमवीएन के द्वारा संचालित की जाने वाली प्रतिष्ठित कैलाश मानसरोवर यात्रा के साथा ही आदि कैलाश, पिंडारी, सुंदरढूंगा, मिलम व पंचाचूली आदि की सभी पैदल यात्राओं पर जाने वाले यात्रियों का अब 5 लाख रुपए का ग्रुप दुर्घटना बीमा कराया जाएगा।

साथ ही सभी यात्रा मार्ग पर यात्रियों के साथ करीब दोगुनी संख्या में जाने वाले सभी पोनी-पोर्टर यानी कुली व घोड़े-खच्चर वाले आपदा राहत कार्यों के लिए प्रशिक्षित किये जा रहे हैं। इस प्रकार अब कुमाऊं मंडल के अंतर्गत होने वाली सभी पैदल-ट्रेकिंग यात्राएं पूरी तरह सुरक्षित कही जा सकती है।

उल्लेखनीय है कि अब तक अत्यधिक महत्वपूर्ण व प्रतिष्ठित होने के साथ ही लिपुपास दर्रे के बेहद दुर्गम व कठिन तथा खतरनाक मार्ग से होने वाली कैलाश मानसरोवर की यात्रा में ही हर दल के साथ इधर कुछ वर्षो से करीब 5-6 एसडीआरएफ यानी राज्य आपदा मोचन दल के सदस्य शामिल होते हैं,

जबकि इधर केएमवीएन ने यात्रा में यात्रियों के सामान लेकर चलने वाले करीब 350 पोनी-पोर्टरों को आपदा राहत का प्रशिक्षण दिला दिया है। ऐसे में हर यात्रा दल में करीब 50-50 पोनी व पोर्टर यानी कुल 100 अतिरिक्त लोग किसी तरह की आपदा आने की स्थिति में एसडीआरएफ के जवानों के सहायक के रूप में कैलाश यात्रियों को बचाने में अपना योगदान दे पाएंगे।

आदि कैलाश के सभी यात्रियों का भी होगा 5 लाख का बीमा

नैनीताल। कैलाश मानसरोवर यात्रियों का बीते कुछ वर्षों से 5 लाख रुपए का ग्रुप दुर्घटना बीमा कराया जाता है, वहीं इसी तर्ज पर आदि कैलाश के यात्रियों का भी बीते वर्ष से 5 लाख का बीमा कराना प्रारंभ हुआ है। केएमवीएन के एमडी धीराज गर्ब्याल ने बताया कि अब इसी तर्ज पर इस वर्ष से पिंडारी, सुंदरढूंगा, मिलम व पंचाचूली आदि सभी पैदल यात्राओं के ट्रेकिंग रूट्स पर जाने वाले यात्रियों का भी 5-5 लाख रुपए का ग्रुप दुर्घटना बीमा कराया जाएगा।

कैलाश यात्रा के लिए 2290 ने कुमाऊं के रास्ते के लिए किया आवेदन
नैनीताल। कैलाश मानसरोवर यात्रा के लिए ऑनलाइन आवेदन करने की समय सीमा बीतने तक कुल करीब 3800 आवेदन किये गए हैं। इनमें से 2290 आवेदन कुमाऊं के लिपुपास दर्रे के परंपरागत दुर्गम पैदल रास्ते से यात्रा करने के लिए और 1510 सिक्किम के नाथुला दर्रे के सुविधाजनक रास्ते के लिए किये गये हैं। उल्लेखनीय है कि लिपुपास दर्रे से 18 दलों में अधिक से अधिक 60 यानी कुल 1080 और नाथुला से अधिकतम 50-50 के आठ दलों में अधिकतम 400 यात्री ही लॉटरी की पद्धति से चयनित होकर कैलाश जा पाएंगे।

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पूर्व आलेख : कैलाश मानसरोवर यात्रा पर संशय खत्म, सेना के हेलीकॉप्टरों से पिथौरागढ़ से सीधे गुंजी जाएंगे यात्री

-करीब छह दिन छोटी हो जाएगी यात्रा, गुंजी में दो की जगह तीन दिन रहकर कराया जाएगा उच्च हिमालयी क्षेत्र में यात्रा के लिए अभ्यस्त
नवीन जोशी, नैनीताल, 8 मार्च, 2018। लखनपुर व नजंग के बीच पिछले पखवाड़े हुए भारी भूस्खलन के बाद कैलाश मानसरोवर पर छाये संशय के बादल छंट गये लगते हैं। हमने गत 28 फरवरी को इस बारे में ‘इतिहास में पहली बार कैलाश मानसरोवर यात्रा के पारंपरिक मार्ग पर संशय’ शीर्षक से प्रमुखता से आलेख प्रकाशित किया था, जिसके बाद भारत सरकार के विदेश मंत्रालय ने इस विषय को बेहद गंभीरता से लेते हुए बेहद सक्रियता दिखाते हुए यात्रा के होने पर छाये संशय को पूरी तरह खत्म कर दिया है।

साथ ही इतिहास में पहली बार यात्रा शुरू होने से पूर्व ही यात्रा के लिए भारतीय सेना के हेलीकॉप्टरों के माध्यम से पिथौरागढ़ से यात्रियों को सीधे गुंजी ले जाने का कार्यक्रम तय कर दिया है। इस हेतु भारतीय सेना के दो एमआई-17 हेलीकॉप्टर पिथौरागढ़ में तैनात होंगे। इसके साथ ही यह भी तय हो गया है कि इस बार अपने पारंपरिक मार्ग से कैलाश यात्रा सर्वाधिक सुगम तथा करीब छह दिन की कम अवधि में पूरी हो जाएगी।

यह भी पढ़ें : इतिहास में पहली बार पारंपरिक-पौराणिक मार्ग से कैलाश मानसरोवर यात्रा पर संशय

  • हिंदुओं के साथ ही जैन, बौद्ध, सिक्ख और बोनपा धर्म के एवं तीन देशों (भारत, नेपाल और चीन) के श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़ी है कैलाश मानसरोवर यात्रा 
  • उत्तराखंड से शिव के धाम कैलाश मानसरोवर का मार्ग पौराणिक है, पांडवों के द्वारा भी इसी मार्ग से कैलाश जाने के पौराणिक संदर्भ मिलते हैं
  • विश्व की सबसे कठिनतम और प्राचीनतम पैदल यात्राओं में शुमार 1,700 किमी लंबी (230 किमी की पैदल दूरी) है कैलाश मानसरोवर की यात्रा 

नवीन जोशी, नैनीताल, 28 फरवरी 2018। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के चीन को साधते हुए नाथुला के रास्ते फिर से कैलाश मानसरोवर की यात्रा शुरू कराने की उत्साहजनक खबर के बीच उत्तराखंड के लिपुपास दर्रे से 1981 से लगातार हो रही परंपरागत यात्रा के पारंपरिक व पौराणिक मार्ग पर इतिहास में पहली बार संशयपूर्ण स्थिति उत्पन्न हो गयी है।

इस कारण पहली बार जून माह में शुरू होने वाली इस यात्रा के लिए फरवरी माह के बीतते भी कार्यक्रम तय नहीं किया जा सका है। इसका कारण चीन सीमा तक बन रहे लिपुपास राष्ट्रीय राजमार्ग पर लखनपुर से नजंग के बीच पैदल मार्ग के समानांतर ही बेहद कड़ी चट्टानों पर सीमा सड़क संगठन द्वारा किया जा रहा निर्माण है, जिस कारण चट्टानों के मलबे के बीच यात्रा के लिए पैदल मार्ग भी नहीं रह गया है।

वहीं इसी पखवाड़े हुए भूस्थलन से लखनपुर से खांडेरा के बीच कार्यदायी संस्था की सड़क निर्माण में लगी मशीनें दब जाने के बाद कार्य रुक गया है।

आईटीबीपी ने दिया 19000 फिट ऊंचे सिनला पास के मार्ग का विकल्प
नैनीताल। भारतीय तिब्बत सीमा पुलिस के उपमहानिरीक्षक बरेली ने इसी सप्ताह 22 फरवरी को पिथौरागढ़ के डीएम को पत्र लिखकर कैलाश मानसरोवर यात्रा के लिए धारचूला से दारमा घाटी के तिदांग, बेदांग से 19000 फीट ऊंचाई पर स्थित सिनला पास के रास्ते जौलिंगकांग यानी आदि कैलाश-ऊं पर्वत होते हुए वापस नीचे कुट्टी आकर गुंजी से होते हुए 17000 फिट ऊंचाई के लिपुपास दर्रे से होते यात्रा पर जाने का विकल्प सुझाया है।

हालांकि अत्यधिक दुरूह मार्ग से इतनी अधिक ऊंचाई से होकर गुजरने वाले इस मार्ग का विकल्प व्यवहारिक नहीं माना जा रहा है। इस मार्ग पर कुट्टी से गूंजी के 19 किमी के मार्ग में 9 किमी गाड़ी के मार्ग में बरसात के दिनों में सड़क खराब होने की स्थिति भी आ सकती है।

नाथुला जैसी ही आसान होगी उत्तराखंड के रास्ते भी कैलाश मानसरोवर यात्रा

अब यात्रियों को 43 किमी ही चलना होगा पैदल, पैदल यात्रा पथ पर भी गब्र्याग से गुंजी और गुंजी से कालापानी के बीच जीपों से होगी यात्रा

नवीन जोशी नैनीताल। केंद्र सरकार के अरुणांचल प्रदेश नाथुला दर्रे से कैलाश मानसरोवर यात्रा के लिए नया सुगम, वाहनों का यात्रा पथ खोल दिए जाने को उत्तराखंड ने चुनौती की तरह लिया है। राज्य के मौजूदा पौराणिक एवं परंपरागत मार्ग की प्रतिस्पर्धा में दुर्गम पैदल पथ के कारण की दुश्वारियों को दूर करने के बाबत उत्तराखंड ने प्रयत्न शुरू कर दिए हैं।

अब इस यात्रा में यात्रियों को भारतीय भूभाग में 43 किमी ही पैदल चलना पड़ेगा, जबकि इस मार्ग पर 85 किमी की पैदल दूरी तय करनी पड़ती है। मुख्यमंत्री हरीश रावत की घोषणा के बाद कुमाऊं मंडल विकास निगम इस यात्रा की पैदल दूरी कम करने में जुट गया है।

उल्लेखनीय है कि यात्रा के पैदल मार्ग पर बन चुकी सड़क के हिस्सों पर जीप चलाने की भी योजना है। इस पर शासन व निगम स्तर पर पहल भी शुरू हो गई है। निगम ने बीच की सड़क के हिस्सों में हेलीकॉप्टर से जीपें उतारने के प्रयास भी शुरू कर दिये हैं।

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नये वर्ष के स्वागत के लिये सर्वश्रेष्ठ हैं यह 13 डेस्टिनेशन आपके सबसे करीब, सबसे अच्छे, सबसे खूबसूरत एवं सबसे रोमांटिक 10 हनीमून डेस्टिनेशन सर्दियों के इस मौसम में जरूर जायें इन 10 स्थानों की सैर पर… इस मौसम में घूमने निकलने की सोच रहे हों तो यहां जाएं, यहां बरसात भी होती है लाजवाब नैनीताल में सिर्फ नैनी ताल नहीं, इतनी झीलें हैं, 8वीं, 9वीं, 10वीं आपने शायद ही देखी हो… नैनीताल आयें तो जरूर देखें उत्तराखंड की एक बेटी बनेंगी सुपरस्टार की दुल्हन उत्तराखंड के आज 9 जून 2023 के ‘नवीन समाचार’ बाबा नीब करौरी के बारे में यह जान लें, निश्चित ही बरसेगी कृपा नैनीताल के चुनिंदा होटल्स, जहां आप जरूर ठहरना चाहेंगे… नैनीताल आयें तो इन 10 स्वादों को लेना न भूलें बालासोर का दु:खद ट्रेन हादसा तस्वीरों में नैनीताल आयें तो क्या जरूर खरीदें.. उत्तराखंड की बेटी उर्वशी रौतेला ने मुंबई में खरीदा 190 करोड़ का लक्जरी बंगला नैनीताल : दिल के सबसे करीब, सचमुच धरती पर प्रकृति का स्वर्ग