-राजनीतिक दलों से समर्थित प्रत्याशियों को अधिक मिली जीत

सबसे पहले और भाजपा से जीते एकमात्र (व मौजूदा भी) सदस्य अरविन्द पडियार

नैनीताल, 20 जुलाई 2018। कुमाऊं विश्वविद्यालय के प्रतिष्ठित विश्वविद्यालय सभा के 15 सदस्य पदों के लिए शुक्रवार को हुए चुनावों में राजनीतिक दलों से सीधे या परोक्ष तौर पर जुड़े प्रत्याशियों को जीत हासिल हुई है, जबकि गैर राजनीतिक प्रत्याशियों को मुंह की खानी पड़ी। परिणाम तीन राउंड तक चली मतगणना के बाद साफ हो गए। चुनाव में कुल 20 प्रत्याशी मैदान में थे।
पहले राउंड की यानी पहली प्राथमिकता के मतों से ही मतगणना में ही भाजपा से जुड़े अरविंद पडियार, बहादुर पाल, उत्तराखंड क्रांति दल से जुड़े प्रकाश पांडे, कम्युनिस्ट पार्टी से जुड़े कैलाश जोशी व कांग्रेस से जुड़े केवलानंद सती की जीत घोषित हो गयी। वहीं दूसरे राउंड में उक्रांद से जुड़े डा. सुरेश डालाकोटी, अंजू मेहता, गीता बिष्ट, अर्जुन सिंह व शैलेंद्र पंत को जीत हासिल हुई। इसके बाद तीसरे एलीमिनेशन राउंड में सबसे कम वोट प्राप्त करने वाले पांच सदस्यों के एक-एक कर बाहर होने के साथ वर्षों से विवि सभा में बने रहे अचिंत्यवीर सिंह, वीके सांगुड़ी, कांग्रेस के हुकुम सिंह कुंवर, जीतेंद्र भट्ट व मोहन बिष्ट की जीत की घोषणा हुई, जबकि अनिल कुमार, कीमती लाल राणा, पान सिंह रौतेला, रवि रौतेला व नीमा पुजारी को हार का मुंह देखना पड़ा।
उल्लेखनीय है कि इससे पूर्व कुल 24 नामांकन किये गये थे, जिनमें से नरेंद्र रजवार, राजेंद्र खनवाल व पृथ्वीपाल सिंह रावत ने नामांकन वापस ले लिये थे, जबकि पवन सिंह खरियाल का नामांकन यूपी विवि अधिनियम 1974 के संबंधित परिनियमों के अनुसार निरस्त किया गया था। इसके बाद 7 जून से मत पत्र विवि के 662 पंजीकृत स्नातक मतदाताओं को उनके घर भेजे गए थे, जिन्होंने घर से ही वरीयता के आधार पर सभी उम्मीदवारों को वरीयता के मत दिये। इसके बाद मतदाताओं से प्राप्त मतपत्रों की आज गढ़वाल विवि के प्रो. अरुण सेनन के नेतृत्व में हुई। आगे अगले वर्ष 2019 में इन्हीं 15 सदस्यों में से 4 सदस्यों का विवि की सर्वोच्च अकादमिक सभा के लिए चुनाव होगा, जिसमें विवि सभा के सदस्यों के साथ ही विवि के परिसरों के संकायाध्यक्ष व विभागाध्यक्ष तथा संबद्ध महाविद्यालयों के 4-4 प्रतिनिधि भी मतदान करेंगे। इधर अरविंद पडियार सहित भाजपा से जुड़े सदस्यों की जीत पर विधायक संजीव आर्य, जिलाध्यक्ष प्रदीप बिष्ट व नगर अध्यक्ष मनोज जोशी सहित पार्टी जनों से हर्ष जताया है।

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देश के शीर्ष विश्वविद्यालयों की सूची, क्लिक करके बड़ा करके देखें.

नैनीताल। केंद्रीय नीति आयोग ने कुमाऊं विश्वविद्यालय को देश के सर्वश्रेष्ठ विश्वविद्यालयों में 32वां स्थान दिया है। इस उपलब्धि पर कुविवि शिक्षक संघ-कूटा ने खुशी व्यक्त करते हुए विवि के कुलपति प्रो. डीके नौड़ियाल तथा नीति आयोग को कुविवि की रिपोर्ट भेजने वाले विवि के शोध निदेशक प्रो. राजीव उपाध्याय सहित विवि परिवार को बधाई दी है। बताया गया है कि नीति आयोग के मुख्य कार्यकारी अधिकारी डा. अमिताभ कांत ने देश के 800 से अधिक विश्वविद्यालयों से उनके आंकड़े मांगे थे। इनमें से करीब 700 केंद्रीय व राज्य तथा डीम्ड विश्वविद्यालयों ने अपने आंकड़े नीति आयोग को भेजे। इनमें से ही उनके कामकाज के आधार पर सभी विवि को रैंकिंग दी गयी है। नीति आयोग की सूची में जेएनयू दिल्ली को पहला, दिल्ली यूनिवर्सिटी को दूसरा और यूनिवर्सिटी ऑफ हैदराबाद को तीसरा स्थान मिला है। 38 स्थानों की पहली सूची में उत्तराखंड के अन्य किसी विवि का स्थान नहीं है।
उल्लेखनीय है कि इससे पूर्व कुविवि को नैक से ए-ग्रेड मिल चुका है। कूटा के अध्यक्ष प्रो. ललित तिवाड़ी, सुचेतन साह, डा. विजय कुमार, डा. दीपक कुमार, डा. शिवांगी, डा. सुहेल जावेद, डा. एचएन पनेरू, डा. मनोज धुनी, डा. गगन होती, डा. ललित मोहन व डा. दीपिका पंत ने इसे बड़ी उपलब्धि करार दिया है।

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ग्रामीण प्रबंधन एवं स्वरोजगार पर एमबीए पाठ्यक्रम शुरू कर कुमाऊं विवि ने रचा इतिहास

प्रधानमंत्री मोदी के आह्वान पर एनसीआरआई ने देश के सभी राज्यों के एक-एक विवि से ऐसे पाठय़क्रम शुरू करने को कहा था, कुमाऊं विवि से सबसे पहले पाठय़क्रम तैयार कर ऑनलाइन प्रवेश की प्रक्रिया शुरू की, 30 तक हो सकेंगे प्रवेश, एनसीआरआई सभी को रोजगार भी उपलब्ध कराएगा

राष्ट्रीय सहारा, 20 जून 2018, पेज 2 पर सभी संस्करणों में

नवीन जोशी, नैनीताल, 19 जून 2018। इतिहास केवल चोटियां छू कर ही नहीं रचे जाते, वरन देश-काल की जरूरतों के अनुरूप ठोस पहल शुरू करके भी ऐसा किया जा सकता है। कुमाऊं विश्वविद्यालय ने भी ऐसे ही एक नया इतिहास रच डाला है। दरअसल पलायन रोकने, गांवों की ओर लौटने की जुबानी बातें तो बहुत की जाती हैं, परंतु धरातल पर होता कुछ नहीं है। वास्तव में यह तभी संभव है जब देश की युवा पीढ़ी को जमीनी हकीकतों से रूबरू कराने के साथ लाभप्रद कॅरियर के अवसर भी दिये जाएं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ऐसा ही आह्वान एनसीआरआई यानी नेशनल काउंसिल ऑफ रूरल इंस्टीट्यूट्स हैदराबाद के माध्यम से देश के सभी राज्यों से किया था कि वे अपने एक-एक विवि में ग्रामीण प्रबंधन एवं स्वरोजगार पर पाठ्यक्रम शुरू करें, ताकि युवा गांवों की समस्याओं को जानते हुए जुड़ें और उन्हें स्वरोजगार भी प्राप्त हो।

इस आह्वान पर कुमाऊं विवि ने लीड लेते हुए इसी सत्र से दो वर्षीय पाठ्यक्रम तैयार कर इसके लिए ऑनलाइन प्रवेश की प्रक्रिया प्रारंभ कर दी है। इस पाठ्यक्रम हेतु आगामी 30 जून तक न्यूनतम 20 व अधिकतम 40 विद्यार्थियों को प्रवेश दिया जाएगा। खास बात यह भी है यह पाठ्यक्रम पूरा करने वाले सभी प्रतिभागियों को एनसीआरआई के द्वारा रोजगार-स्वरोजगार के अवसर-प्लेसमेंट भी उपलब्ध कराया जाएगा।

मंगलवार को यह पाठ्यक्रम शुरू कर रहे कुमाऊं विवि के आईपीएसडीआर यानी रोजगारपरक अध्ययन एवं विकासोन्मुख शोध संस्थान में विवि के कुलपति प्रो. डीके नौड़ियाल एवं संस्थान के निदेशक प्रो. अतुल जोशी ने पत्रकार वार्ता में यह खुलासा करते हुए बताया कि दो वर्ष का यह पाठ्यक्रम केवल 30 हजार रपए प्रति सेमेस्टर के शुल्क पर कराया जाएगा। एनसीआरआई के निर्देशन में तैयार पाठ्यक्रम में खास तौर पर उत्तराखंड एवं इसके कुमाऊं मंडल के गांवों के परिवेश व यहां की समस्याओं एवं यहां संभव फल-सब्जी की बागवानी व मोटे अनाजों के उत्पादन, जैविक खेती बकरी व मत्स्य पालन एवं इनके संरक्षण, साहसिक पर्यटन, ट्रेकिंग, होम स्टे, स्थानीय हस्तकला जैसे स्वरोजगार के क्षेत्रों को शामिल किया गया है। कुलपति प्रो. नौड़ियाल ने इस ऐतिहासिक पहल के लिए प्रो. जोशी की जमकर प्रशंसा की। इस मौके पर कुलपति के वैयक्तिक अधिकारी विधान चौधरी भी मौजूद रहे।

स्नातकोत्तर के सभी छात्रों को भी आवश्यक रूप से जाना होगा गांवों में

नैनीताल। कुविवि के कुलपति प्रो. डीके नौड़ियाल ने इस अवसर पर एक और बड़ा खुलासा करते हुए बताया कि विवि के सभी स्नातकोत्तर स्तर के छात्रों को भी गांवों से जोड़े जाने व ग्रामीण प्रबंधन को पाठ्यक्रम का हिस्सा बनाये जाने की योजना है। शीघ्र ही इस बाबत विवि की सर्वोच्च संस्था कार्य परिषद के समक्ष प्रस्ताव लाया जाएगा। प्रस्ताव के तहत सभी विद्यार्थियों को कम से कम 15 दिन के लिए अलग-अलग गांवों में जाना होगा, और वहां की समस्याओं व समाधान पर रिपोर्ट तैयार करनी होगी। इसके अलावा भूगोल विभाग के माध्यम से अल्मोड़ा व रानीखेत तथा गढ़वाल मंडल के बिन्सर नामक स्थानों तथा कसारदेवी व जागेश्वर आदि स्थानों को जोड़कर बिन्सर सर्किट तैयार किया जा रहा है, जिसे राज्य सरकार को सौंपा जाएगा। साथ ही जैव प्रौद्योगिकी, वनस्पति विज्ञान व वन विज्ञान विभागों के सहयोग से वनों में पौधों के बजाय बांज व देवदार जैसी उपयोगी प्रजातियों के बीजों को जंगलों में बरसात से पूर्व छिड़कने का भी एक प्रस्ताव तैयार किया जा रहा है। इसके अलावा उन्होंने आईपीएसडीआर में पहले से चल रहे तीन वर्षीय पार्टटाइम एमबीए-एक्जीक्यूटिव पाठ्यक्रम को दो वर्ष का किये जाने की भी जानकारी दी। इसके बाद यह पाठ्यक्रम अन्य कार्य करते हुए भी पहले के डेढ़ लाख की जगह केवल 1 लाख रपए में ही किया जा सकेगा।

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  • विवि में प्रवेश के लिये करना होगा ऑनलाइन पंजीकरण, देने होंगे तीन कॉलेजों के विकल्प
  • पूरी तरह ऑनलाइन होगी प्रवेश की प्रक्रिया, ऑनलाइन प्रवेश के बाद नहीं भरने पड़ेंगे विभिन्न कक्षाओं में परीक्षाओं के फार्म
  • 23 जुलाई से शुरू हो जाएगी पहले सेमेस्टर की पढ़ाई, सेमेस्टर में 90 दिन पढ़ाई होगी अनिवार्य और 15 नवंबर से परीक्षाएं हो जाएंगी शुरू
नैनीताल। कुमाऊं विवि में शैक्षणिक सत्र 2018-19 के लिए स्नातक एवं स्नातकोत्तर दोनों स्तरों पर नये यानी प्रथम सेमेस्टर में होने वाले प्रवेश पूरी तरह से ऑनलाइन होंगे। इसके लिए प्रवेशार्थियों को 50 रुपए का पंजीकरण शुल्क भारतीय स्टेट बैंक में जमा करके कम से कम तीन परिसरों-कॉलेजों के विकल्प देते हुए ऑनलाइन पंजीकरण कराना होगा। पंजीकरण की प्रक्रिया 4 जून से 30 जून तक चलेगी, जिसके बाद विवि मैरिट के आधार पर प्रवेशार्थियों को उनकी प्राथमिकता एवं सीटों की उपलब्धता के आधार पर कॉलेज आवंटित करेगा। विवि के कुलपति प्रो. डीके नौड़ियाल एवं परीक्षा नियंत्रक प्रो. संजय पंत ने बृहस्पतिवार को प्रवेश प्रक्रिया की पूरी जानकारी देने के साथ उम्मीद जताई कि इस प्रक्रिया के बाद विवि में प्रवेश लेने वाले छात्र-छात्राओं को आगे परीक्षा फार्म भरने की जरूरत नहीं पड़ेगी।
विवि प्रशासनिक भवन में बृहस्पतिवार अपराह्न आयोजित पत्रकार वार्ता में कुलपति व परीक्षा नियंत्रक ने बताया कि विवि ने प्रवेश और पढ़ाई के साथ परीक्षाओं का भी पूरा खाका पहले ही खींच लिया है। 11 से 18 जुलाई तक प्रवेश दे दिये जाएंगे, जिसके बाद अगले 4 दिन यानी 23 तक वेटिंग लिस्ट में रहे विद्यार्थियों पर विचार किया जाएगा, और 23 जुलाई से पहले सेमेस्टर की पढ़ाई प्रारंभ कर दी जाएगी। इसके बाद सेमेस्टर में कम से कम 90 दिन की पढ़ाई अनिवार्य रूप से कराई जाएगी और 15 नवंबर से पहले सेमेस्टर की परीक्षाएं भी करा ली जाएंगी।

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1973 में स्थापित उत्तराखंड का कुमाऊं विश्वविद्यालय नैनीताल आईआईटी रुड़की से आए कुलपति प्रो. दिनेश कुमार नौड़ियाल के नेतृत्व में निरंतर प्रगति के पथ पर अग्रसर है। इधर यूजीसी के ‘नैक’ यानी राष्ट्रीय मूल्यांकन एवं प्रत्यानन परिषद से वर्ष 2016 में वर्ष 2021 तक के लिए ‘ए’ ग्रेड प्राप्त विश्वविद्यालय की उपलब्धियों, प्रगति व भावी योजनाओं पर प्रस्तुत है प्रो. नौड़ियाल के साथ हुई बातचीत के प्रमुख अंश:

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प्रश्न: कुमाऊं विश्वविद्यालय की उपलब्धियों के बारे में कुछ बताएं।
प्रो. नौड़ियाल: कुमाऊं विश्वविद्यालय की जैव प्रौद्योगिकी विभाग की अध्यक्ष प्रो. बीना पांडे ने इसी माह उत्तराखंड की एक जड़ी-बूटी किल्मोड़ा (दारुहरिद्रा) से मधुमेह के उपचार के लिए प्राकृतिक व रसायन रहित आर्युवेदिक औषधि बनाने का फॉर्मूला अमेरिकी संस्था ‘इंटरनेशनल पेटेंट सेंटर’ से पेटेंट प्रमाण पत्र प्राप्त किया है, जबकि विश्वविद्यालय के नैनो साइंस एवं नैनो तकनीकी केंद्र नैनीताल ने प्लास्टिक के कूड़े व खाली बोतलों से बहुमूल्य नैनो कार्बन पदार्थ ‘ग्रेफीन’ के साथ ही पेट्रोलियम ईधन और सीमेंट-कंक्रीट के साथ उपयोग होने वाले पदार्थ बनाने की मशीन ‘स्वयंभू’ तथा कालीतीत यानी ‘एक्सपायर’ हो चुकी दवाइयों को फिर से उपयोग करने की ‘बायो मेडिकल ड्रग डिलीवरी सिस्टम’ के दो पेटेंट फाइल करवा कर साढ़े चार दशक की उम्र में इतिहास रच डाला है। इधर विश्वविद्यालय के अल्मोड़ा परिसर के भूगोल विभागाध्यक्ष प्रो. जेएस रावत को बीते 5 वर्षों में वैश्विक रूप से उभरती हुई ‘हाई-टेक जियोस्पेशियल टेक्नोलॉजी’-जीआईएस का शासन में नियोजन और प्रशासनिक कार्यों में त्वरित, पारदर्शी संपादन और प्राकृतिक संसाधनों के विकास व प्रबंधन में प्रयोग के लिए किये गए उत्कृष्ट कार्यो के लिए भारत सरकार द्वारा प्रतिष्ठित ‘नेशनल जियोस्पेशियल चेयर प्रोफेसरशिप अवार्ड’ से नवाजा गया है। इस अवार्ड के तहत प्रो. रावत को सेवानिवृत्त होने तक प्रति माह 25 हजार रुपए एवं सेवानिवृत्ति के उपरांत 3 वर्ष तक प्रति माह एक लाख रुपए प्राप्त होंगे। प्रो. रावत के प्रयासों से अभी हाल ही में अल्मोड़ा जिले में कोसी नदी के पुर्नजीवीकरण के कार्य भी प्रशासनिक स्तर से प्रारंभ हुए हैं।

प्रश्न: कुमाऊं विश्वविद्यालय में आपदा विजन क्या है ?
प्रो. नौड़ियाल: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी की तरह ही हमारा मानना है कि ‘ऑटोमेशन’ यानी स्वचालन के जरिये विश्वविद्यालय की अनेकों समस्याओं का हल किया जा सकता है। स्वचालन में हमने ‘ग्रीन इनीशिएटिव्स’ यानी हरित पहलों को भी जोड़ा गया है। इसके तहत विश्वविद्यालय में करीब सवा लाख से अधिक विद्यार्थियों के प्रवेश ऑनलाइन कराये गए हैं, और परीक्षा की प्रक्रिया को भी ऑनलाइन किया गया है। इस तरह हम अपनी ओर से लाखों कागज और हजारों पेड़ों को बचाने में योगदान दे रहे हैं। इसी कड़ी में हम आगे ‘एनएसडीएल’ यानी ‘नेशनल सिक्योरिटीज डिपोजिटरी लिमिटेड’ व ‘एनएडी’ यानी ‘नेशनल एकेडमिक डिपोजिटरी’ के माध्यम से विश्वविद्यालय की सभी पीएच.डी. डिग्रियों और अंकपत्रों को इंटरनेट पर अपलोड करने की पहल करने जा रहे हैं, जिसके बाद इन डिग्रियों को कहीं से भी ऑनलाइन डाउनलोड करने के साथ ऑनलाइन ही सत्यापन भी किया जा सकेगा। इसके अलावा हम विश्वविद्यालय के प्रशासनिक भवन तथा नैनीताल और अल्मोड़ा परिसरों को एक बड़ी कंपनी के माध्यम में बिना किसी खर्च के सौर ऊर्जा से जगमगाने और तीनों को गर्म रखने के लिए ‘सेंट्रल हीटिंग सिस्टम’ लगाने जा रहे हैं। यह कंपनी अपने खर्च पर सौर ऊर्जा के उपकरण लगाकर विवि को केवल 2 रुपए प्रति यूनिट की दर से सस्ती बिजली उपलब्ध कराएगी। इसके अलावा विवि के नैनीताल व अल्मोड़ा परिसरों में 1-1 ‘स्मार्ट क्लास रूम’ तथा प्रशासनिक भवन को ‘हाई-टेक मॉडर्नाइज्ड स्मार्ट ऑफिस’ में तब्दील करने तथा विश्वविद्यालय के लेखा विभाग का भी स्वचालन करने की योजना है। विश्वविद्यालय के नैनीताल व अल्मोड़ा परिसरों में इंटरनेट कनेक्टिविटी व फ्री वाई-फाई देने की शुरुआत भी जल्द होने जा रही है।

प्रश्न: शोध कार्य किसी भी विश्वविद्यालय की प्रगति के मुख्य मानक होते हैं। इस दिशा में क्या कर रहे हैं ?
प्रो. नौड़ियाल: इस हेतु विश्वविद्यालय में पहली बार ‘स्पॉसर्ड रिसर्च एंउ इंडस्ट्रियल सेल’ यानी प्रायोजित शोध एवं औद्योगिक परामर्श केंद्र की स्थापना की गयी है। इस केंद्र के जरिये विश्वविद्यालय के शोध विद्यार्थी देश के शीर्ष संस्थानों से शोध परियोजनाएं प्राप्त कर सकते हैं, तथा विश्वविद्यालय के प्राध्यापक देश के अन्य संस्थानों में सलाहकार के रूप में सेवाएं दे सकते हैं। पीएच.डी. विद्याथियों की थीसिस के मूल्यांकन की प्रक्रिया को तेज करने, अधिकतम 5-6 माह में यह प्रक्रिया पूरी करने की प्रक्रिया भी बनायी गयी है। इसके अलावा अन्य छात्रों की सुविधा के लिए विश्वविद्यालय के परीक्षा प्रभाग का भी स्वचालन किया जा रहा है, जिसके बाद विवि में किसी भी छात्र को अपने छात्र जीवन में केवल प्रवेश के समय एक बार फॉर्म भरने की जरूरत होगी। इस दौरान उसे एक ‘यूनीक आईडी’ दी जाएगी। इसके बाद उसे अगली कक्षाओं में कोई फार्म नहीं भरने पड़ेंगे। (नवीन जोशी)

प्रो. सतपाल सिंह बिष्ट

प्रो. सतपाल बिष्ट को मिला ‘उत्तराखंड रत्न’ सम्मान

कुमाऊं विवि के डीएसबी परिसर के प्रो. सतपाल सिंह बिष्ट को रविवार को देहरादून स्थित श्री देव सुमन सुभारती मेडिकल कॉलेज मे ‘उत्तराखंड रत्न’ सम्मान से सम्मानित किया गया। तीन दशक पुरानी ‘ऑल इंडिया कांफ्रेंस ऑफ इंटलेक्चुअल्स’ के द्वारा उनके कार्योें को देखते हुए उन्हें यह पुरस्कार प्रदेश के वित्त एवं संसदीय कार्य मंत्री प्रकाश पंत के हाथों प्रदान किया गया। प्रोफेसर सतपाल बिष्ट कुविवि के अलावा मिजोरम की आइजॉल यूनिवर्सिटी, उड़ीसा की बरहामपुर यूनिवर्सिटी में भी सेवाएं दे चुके हैं, तथा फिलीपींस के सेंट लुकास मेडिकल सेंटर व बरहामपुर यूनिवर्सिटी के जैव प्रौद्योगिकी विभाग के विजिटिंग प्रोफेसर भी हैं।

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मेरा जन्म 26 नवंबर 1972 को हुआ था। मैं नैनीताल, भारत में मूलतः एक पत्रकार हूँ। वर्तमान में मार्च 2010 से राष्ट्रीय हिन्दी दैनिक समाचार पत्र-राष्ट्रीय सहारा में ब्यूरो चीफ के रूप में कार्य कर रहा हूँ। इससे पहले मैं पांच साल के लिए दैनिक जागरण के लिए काम कर चुका हूँ। कुमाऊँ विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग से ‘नए मीडिया’ विषय पर शोधरत हूँ। फोटोग्राफ़ी मेरा शौक है। मैं NIKON COOLPIX P530 और अडोब फोटोशॉप 7.0 के साथ फोटोग्राफी कर रहा हूँ। फोटोग्राफी मेरे लिए दुनियां की खूबसूरती को अपनी ओर से चिरस्थाई बनाने का बहुत छोटा सा प्रयास है। एक फोटो पत्रकार के रूप में मेरी तस्वीरों को नैनीताल राजभवन सहित विभिन्न प्रदर्शनियों में प्रस्तुत किया गया, तथा उत्तराखंड की राज्यपाल श्रीमती मार्गरेट अलवा द्वारा सम्मानित किया गया है। कुछ चित्रों को राष्ट्रीय-अंतर्राष्ट्रीय पुरस्कार भी प्राप्त हो चुके हैं। गूगल अर्थ पर चित्र उपलब्ध कराने वाली पैनोरामियो साइट पर मेरी प्रोफाइल को 18.85 Lacs से भी अधिक हिट्स प्राप्त हैं।पत्रकारिता और फोटोग्राफी के अलावा मुझे कवितायेँ लिखना पसंद है। काव्य क्षेत्र में मैंने नवीन जोशी “नवेन्दु” के रूप में अपनी पहचान बनाई है। मैंने बहुत सी कुमाउनी कवितायेँ लिखी हैं, कुमाउनी भाषा में मेरा काव्य संकलन उघड़ी आंखोंक स्वींड़ प्रकाशित हो चुका है, जो कि पुस्तक के के साथ ही डिजिटल (PDF) फार्मेट पर भी उपलब्ध होने वाली कुमाउनी की पहली पुस्तक है। मेरी यह पुस्तक गूगल एप्स पर भी उपलब्ध है।

यहां है एक पत्रकार, लेखक, कवि एवं छाया चित्रकार के रूप में मेरी रचनात्मकता, लेख, आलेख, छायाचित्र, कविताएं, हिंदी-कुमाउनी के ब्लॉग आदि कार्यों का पूरा समग्र। मेरी कोशिश है कि यहां नैनीताल, कुमाऊं, उत्तराखंड और वृहद संदर्भ में देश की विरासत, संस्कृति, इतिहास और वर्तमान को समग्र रूप में संग्रहीत करने की….।

मेरे दिल में बसता है, मेरा नैनीताल, मेरा कुमाऊं और मेरा उत्तराखंड

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