बड़ा समाचार: उत्तराखंड की लोक भाषाओं पर अध्ययन करेंगे पोलेंड के छात्र और कुमाऊं विश्वविद्यालय के छात्र भी….

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-कुमाऊं विश्वविद्यालय एवं पोलेंड की यूनिवर्सिटी के छात्रों-शोधार्थियों एवं प्राध्यापकों के अकादमिक विनिमय को हुआ अनुबंध
-पोलेंड की पोजनान यूनिवर्सिटी के छात्र-शोधार्थी एवं प्राध्यापक उत्तराखंड की भाषाओं एवं लोक संस्कृति का अध्ययन करने के इच्छुक
नवीन समाचार, नैनीताल, 18 जनवरी 2020। कुमाऊं विवि के छात्र अब यूरोपीय देश पोलेंड के ऐडम मिक्कीविज यूनिवर्सिटी पोजनान के साथ शिक्षा एवं विचार विनिमय कर पाएंगे। कुलपति प्रो. केएस राणा के प्रयासों से कुमाऊं विवि में गुणवत्तापरक शिक्षा एवं अकादमिक, सांस्कृतिक एवं शोध के क्षेत्र में पारस्परिक विनिमय स्थापित करने के उद्देश्य से यूरोपियन यूनियर द्वारा प्रायोजित अंतर्राष्ट्रीय अकादमिक एक्सचेंज प्रोग्राम के तहत कुमाऊं विवि नैनीताल तथा ऐडम मिक्कीविज यूनिवर्सिटी पोजनान, पोलेंड के बीच गतिविधियां बढ़ाने के लिए पांच वर्ष का अनुबंध स्थापित किया जा रहा है। विवि के जनसंपर्क अधिकारी डा. महेंद्र राणा ने बताया कि इस अनुबंध के तहत दोनों विवि में शैक्षणिक गतिविधियों को बढ़ावा देने हेतु छात्रों-शोधार्थियों एवं प्राध्यापकों के अकादमिक विनिमय को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाएगी।

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इस कार्यक्रम में प्रतिभाग करने वाले दोनों ही विवि के छात्रों-शोधार्थियों एवं प्राध्यापकों को यात्रा भत्ते इत्यादि का खर्च प्रायोजित कार्यक्रम के तहत वहन किया जाएगा। उन्होंने बताया कि पोजनान यूनिवर्सिटी ने यह भी प्रस्तावित किया है कि उनके छात्र-शोधार्थी एवं प्राध्यापक उत्तराखंड की भाषाओं एवं लोक संस्कृति के संदर्भ में अध्ययन करना चाहते हैं। बताया कि अनुबंध अल्मोड़ा परिसर के इतिहास विभाग के सेवानिवृत्त विभागाध्यक्ष प्रो. एमपी जोशी व कुविवि के आईक्यूसी के निदेशक प्रो. राजीव उपाध्याय ने इस प्रस्ताव के क्रियान्वयन हेतु प्रस्ताव तैयार किया। आगे कुलपति प्रो. राणा ने अपेक्षा की है कि विवि के अनय विभाग भी वैश्विक स्तर पर इस तरह के अनुबंध स्थापित कर शोध एवं अकादमिक गतिविधियों को परिस्कृत करने के प्रयास करें।

यह भी पढ़ें : एक्सक्लूसिव: सीएम के सामने उठी एक महाविद्यालय को कुमाऊं विवि का परिसर बनाने की मांग

खटीमा महाविद्यालय के लिए इमेज परिणामनवीन समाचार, नैनीताल, 3 जनवरी 2019। ऊधमसिंह नगर जनपद के खटीमा स्थित महाविद्यालय को कुमाऊं विवि का महाविद्यालय बनाए जाने की मांग उठी है। खटीमा महाविद्यालय के वर्तमान छात्र संघ अध्यक्ष सुमित बहादुर पाल एवं पूर्व छात्र संघ अध्यक्ष सिद्धांत सिंह ने इस संबंध में क्षेत्रीय विधायक पुष्कर धामी के माध्यम से प्रदेश के मुख्यमंत्री को एक पत्र लिखा है। पत्र में कहा गया है कि कुमाऊं विवि से पृथक कर अल्मोड़ा विवि का निर्माण किया जा रहा है और इसके लिए पिथौरागढ़ व बागेश्वर महाविद्यालयों को परिसर बनाया जा रहा है। इसी तरह नैनीताल व ऊधमसिंह नगर जनपदों में कुमाऊं विवि के परिसरों का दर्जा दिया जाना प्रस्तावित है। इसी कड़ी में खटीमा महाविद्यालय को कुमाऊं विवि का परिसर बनाया जाए।

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पत्र में कहा गया है कि खटीमा क्षेत्र पड़ोसी देश नेपाल एवं उत्तर प्रदेश की सीमा से लगा सीमांत व आर्थिक रूप से पिछड़ा होने के साथ उत्तराखंड राज्य के निर्माण में विशेष भूमिका निभा चुका है। राज्य आंदोलन का पहला गोलीकांड खटीमा में ही हुआ था। इसमें कई लोगों ने अपनी शहादत दी थी। लेकिन राज्य गठन के बाद खटीमा को कोई विशेष उपलब्धि नहीं मिली। विवि का परिसर स्थापित होने से यह क्षेत्र शिक्षा का हब बनेगा, साथ ही यहां रोजगारपरक पाठ्यक्रम भी संचालित होंगे। सीमांत क्षेत्र होने के कारण यहां पड़ोसी देश नेपाल एवं पड़ोसी राज्य यूपी के छात्र-छात्राओं की समस्याओं का समाधान क्षेत्रीय स्तर पर हो सकेगा। पत्र में विवि प्रतिनिधि गौरव कोटिया, अभाविप के कॉलेज इकाई अध्यक्ष नीरज धामी व कॉलेज मंत्री प्रमोद गड़कोटी के भी हस्ताक्षर हैं।

यह भी पढ़ें : पीएचडी प्रवेश परीक्षा के लिए अब साक्षात्कार भी होंगे, आरएसी की बैठक में लिये गए और भी कई निर्णय

-असंपन्न-निशक्त वर्ग के अभ्यर्थियों को मिलेगी 5 फीसद की छूट
नवीन समाचार, नैनीताल, 28 नवंबर 2019। कुमाऊं विवि में अब पीएचडी प्रवेश परीक्षा के साथ साक्षात्कार की प्रक्रिया भी होगी, जिसमें प्रवेश परीक्षा में उत्तीर्ण शोधार्थी विभागीय शोध समिति के समक्ष अपने इच्छित अनुसंधान क्षेत्र व रुझान के बारे में अपना प्रस्तुतीकरण देंगे। इसके बाद ही समग्र वरीयता के आधार पर उन्हें शोध निर्देशक आवंटित किये जाएंगे। इसके साथ ही कुविवि में अब यूजीसी यानी विवि अनुदान आयोग द्वारा गत 27 अगस्त 2018 को जारी अधिसूचना के अनुरूप प्रवेश परीक्षा में असंपन्न वर्ग यानी नॉन क्रीमी लेयर के निशक्त श्रेणी तथा अनुसूचित जाति, जनजाति व अन्य पिछड़ा वर्ग के उम्मीदवारों को प्रवेश परीक्षा में प्राप्त अंकों में 5 फीसद की छूट दी जाएगी। यानी वे 50 की जग 45 फीसद पर प्रवेश दिया जाएगा। साथ ही यह प्राविधान भी होगा कि यदि इस छूट के बावजूद इस वर्ग की सीट खाली रह जाती है तो सामान्य वर्ग की प्रवेश प्रक्रिया की समाप्ति के बाद एक माह के भीतर इस श्रेणी के लिए विशेष प्रवेश अभियान चलाया जाएगा।
बृहस्पतिवार को कुविवि के प्रशासनिक भवन में कुलपति प्रो. केएस राना की अध्यक्षता में हुई आरएसी यानी शोध सलाहकारी समिति की बैठक में यह बाद उभर कर आई। बैठक में कुलपति ने शोध की गुणवत्ता एवं शोध उपाधि प्रदान किये जाने में समयबद्धता के प्राविधान किये जाने के निर्देश दिये। उन्होंने शोधग्रंथों के कुछ प्रकरणों में वर्षों तक मूल्यांकन पूर्ण न होने पर गहरी चिंता जताई तथा समिति से मूल्यांकन के लिए अधिकतम समयसीमा निश्चित करने को कहा। कहा कि 6 माह से अधिक अवधि तक शोध प्रबंध पर कोई कार्रवाई न करने वाले परीक्षकों को काली सूची में डाल दिया जाएगा। साथ ही पीएचडी में दो तथा डी लिट व डीएससी में तीन सकारात्मक रिपोर्ट विवि को प्राप्त होन के बाद तीन माह के भीतर मौखिक परीक्षा करनी होगी। यह भी तय हुआ कि एक शोधार्थी को एक विषय में एक बार ही पीएचडी, डी लिट या डीएससी की उपाधि दी जाएगी। आरडीसी में अनुपस्थित शोधार्थियों को एक बार पुनः आरडीसी में शोध प्रस्ताव प्रस्तुत करने का मौका दिया जाएगा। बैठक में कुलसचिव डा. महेश कुमार, वित्त नियंत्रक दिनेश राणा, विज्ञान संकायाध्यक्ष प्रो. एसपीएस मेहता, कार्यपरिषद सदस्य केवल सती व अरविंद पडियार, प्रो. अजय अरोड़ा, प्रो. एमसी जोशी, प्रो. राजीव उपाध्याय, डा. अर्चना नेगी, प्रो. जेएस बिष्ट, प्रो. अमित जोशी, प्रो. संजय टम्टा व डा. आशीष तिवारी आदि ने सहभागिता की।

भूपेश ने कम्प्यूटर साइंस में की पीएचडी

डा. भूपेश रावत

नैनीताल। ग्राफिक ऐरा विवि भीमताल परिसर के कम्प्यूटर साइंस विभाग में असिस्टेंट प्रोफेसर के पद पर कार्यरत डा. भूपेश रावत ने कम्प्यूटर साइंस से पीएचडी की डिग्री प्राप्त कर ली है। उन्होंने अपना शोध कार्य बाबा साहेब भीमराव अंबेडकर केंद्रीय विवि लखनऊ के विज्ञान प्रोफेसर संजय कुमार द्विवेदी के निर्देशन में ‘सिफारिश प्रणाली की सटीकता में सुधार करने के लिए फर्जी तकनीक के साथ एकीकृत सिमेंटिक वेब उपयोग खनन’ विषय पर किया है। बताया गया है कि इस विषय पर शोध करने वाले भूपेश उत्तराखंड के पहले शोधार्थी हैं। उन्होंने उम्मीद जताई कि उनके शोध का लाभ उत्तराखंड के छात्रों को मिलेगा। उन्होंने प्रदेश के नौजवानों को शिक्षा के क्षेत्र में आने वाली समस्याओं के समाधान में मदद करने की पेशकश भी की है।

कुमाऊं विवि की व्यवसायिक पाठ्यकमों की विषम सेमेस्टर की परीक्षाएं 10 से

नैनीताल। कुमाऊं विवि की विभिन्न व्यवसायिक पाठ्यकमों की विषम सेमेस्टर की परीक्षाएं 10 दिसंबर से प्रारंभ होंगी। विवि के परीक्षा नियंत्रक प्रो. संजय पंत ने बताया कि परीक्षाओं का विस्तृत कार्यक्रम विवि की आधिकारिक वेबसाइट पर बृहस्पतिवार को अपलोड कर दिया गया है।

यह भी पढ़ें : कैसे स्थापित होगा अल्मोड़ा विवि ? शिक्षकों ने जताई कुमाऊं विवि में ही रहने की इच्छा

नवीन समाचार, नैनीताल, 24 नवंबर 2019। यह कुमाऊं विवि की प्रसिद्धि एवं विश्व विख्यात छवि का ही प्रभाव है कि एसएसजे परिसर अल्मोड़ा के करीब दो दर्जन शिक्षकों ने एसएसजे परिसर के एकता शिक्षक संगठन के बैनर तले कुलाधिपति-प्रदेश की राज्यपाल बेबी रानी मौर्य को पत्र लिखकर कुमाऊं विवि में ही अपनी सेवाएं देने की इच्छा जताई है। उनकी यह इच्छा इस संदर्भ में है कि गत 23 अक्टूबर को अल्मोड़ा में आयोजित हुई राज्य मंत्रिमंडल की बैठक में कुमाऊं विवि के एसएसजे परिसर एवं आवासीय विवि अल्मोड़ा का विलय कर एक नये शोबन सिंह जीना विवि अल्मोड़ा की स्थापना का प्रस्ताव पारित किया गया है। एकता शिक्षक संगठन के सचिव की ओर से कुलाधिपति को भेजे गए पत्र में कहा गया है कि उनकी नियुक्ति कुमाऊं विवि में हुई है तथा उनकी सेवा संविदा यानी कांटेªक्ट ऑफ इम्प्लॉयमेंट कुमाऊं विवि के साथ है। लिहाजा वे कुमाऊं विवि में ही अपनी सेवाएं देना चाहते हैं। उन्हें प्रस्तावित नये विवि में उनकी इच्छा व भावनाओं के विपरीत बनाये रखना न्यायसंगत नहीं होगा। पूर्व में भी ऐसी परिस्थितियों में विकल्प प्रदान करने का न्यायोचित प्राविधान रहा है। इसलिए उन्हें कुमाऊं विवि में ही रहने का विकल्प उपलब्ध कराया जाए। इस पर कुमाऊं विवि के कुलपति प्रो. केएस राणा ने शिक्षकों की इच्छा का सम्मान करने की बात कही है।

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बताया गया है कि इससे पूर्व भी विधि, शिक्षा एवं योग विभाग के शिक्षकों ने पूर्व में ही ऐसी इच्छा ताते हुए विवि की कार्य परिषद से इस बाबत प्रस्ताव पारित करने को कहा था। इस पर विवि कार्य परिषद उनके लिए प्रस्ताव पारित कर चुकी है।

यह भी पढ़ें : सुखद समाचार : उत्तर भारत में पहली बार, देश के अन्वेषण संस्थानों को अपराधों की तहकीकात करने हेतु सुप्रशिक्षित मानव शक्ति उपलब्ध कराएगा कुमाऊं विवि

-विवि में 15 फैकल्टी सहित तीन नये विभागों के सृजन के लिए शासनादेश हुआ जारी
नवीन समाचार, नैनीताल, 5 नवंबर 2019। कुमाऊं विश्वविद्यालय में क्रिमिनोलॉजी, फोरेंसिक साइंस एवं साइबर सेक्यूरिटी के तीन नए विभागों के सृजन तथा इनके लिए 15 पदों के सृजन का शासनादेश जारी हो गया है। कुलपति प्रो. केएस राना ने बताया कि बीती एक नवंबर को जारी यह शासनादेश मंगलवार को विश्वविद्यालय को प्राप्त हो गया है। इसके लिए विवि के द्वारा बीते 15 माह से प्रयास किये जा रहे थे। इन विभागों को संचालित करने वाला कुमाऊं विवि पूरे उत्तर भारत का पहला विवि होगा।
कुलपति ने कहा कि इन पाठ्यक्रमों की मदद से कुमाऊं विवि देश के अन्वेषण संस्थानों को अपराधों की तहकीकात करने हेतु सुप्रशिक्षित मानव शक्ति उपलब्ध कराएगा, तथा यहां के विद्यार्थियों को भविष्य की बेहतर संभावनाओं वाले कॅरियर के अवसर उपलब्ध होंगे। आगे इन विभागों के ढांचे पर विवि स्तर पर विस्तार से चर्चा कर निर्णय लिया जाएगा। बताया कि विवि में बायो मेडिकल साइंस फैकेल्टी के गठन की पहल भी की गई है, जिसके जरिये विवि बायो फॉरेंसिक साइंसेज के विशेषज्ञ तैयार करने में सक्षम है। रूसा परियोजना के अंतर्गत कुमाऊं विश्वविद्यालय द्वारा विगत 2 वर्षों में अन्वेषण हेतु प्रयोगशाला तैयार कर ली गई है। उम्मीद जताई कि इन पाठ्यक्रमों को बायोमेडिकल साइंस फैकेल्टी के अंतर्गत संचालित किये जाने से विश्वविद्यालय में नवसृजित बायो मेडिकल फैकेल्टी का विस्तार होगा।

यह भी पढ़ें : कुमाऊं विवि को विभिन्न एजेंसियों से मिली उत्कृष्ट रैंकिंग

नवीन समाचार, नैनीताल, 24 अक्तूबर 2019। विश्वविद्यालयों को रैंकिंग देने वाली अंतर्राष्ट्रीय संस्था क्यूएस इंडिया युनिवर्सिटी रैंकिंग 2020 संस्था ने कुमाऊं विवि को 81 से 85 रैंक की श्रेणी में रखा है। कुविवि को खासकर अकादमिक ध्याति हेतु सर्वाधिक 30 फीसद एवं उत्कृष्ट पेशेवर बनाने हेतु प्राप्त विभिन्न मतों के आधार पर 20 फीसद अंक प्राप्त हुए हैं। इसके अतिरिक्त विवि को इंडिया टुडे की एमडीआरए से 2019-20 हेतु 25वीं रैंक तथा द वीक मैगजीत से 15वां स्थान प्राप्त हुआ है।
कुलपति प्रो. केएस राना ने बताया कि अंतर्राष्ट्रीय संस्थानों को रैंकिग प्रदान करने वाली इंग्लेंड की क्यूएस रैंकिंग द्वारा कराये गये सर्वेक्षण के आधार पर भारतीय विवि की रैंकिंग गत 22 अक्तूबर को जारी की गई है। इसके देश के शीर्ष 100 विवि की रैंकिंग सूची जारी की गई है। उन्होंने बताया कि इसके अलावा विवि को चिया यानी सेंट्रल हिमालयन इंवायरनमेंट एसोसिएशन संस्था के निदेशक डा. पीपी ध्यानी से अकादमिक एवं शोध गतिविधियों को समृद्ध करने के लिए भारत सरकार के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय को डीआरएसी यानी देहरादून रिसर्च एंड एकेडमिक कंसोर्सिया के गठन में सहभागिता हेतु अनुरोध पत्र मिला है। इस पर विवि ने करार हेतु सहमति पत्र भेज दिया है। उन्होंने उम्मीद जताई कि विवि की रैंकिंग में हो रहे सुधार से विवि में शोधार्थियों, शिक्षकों व अन्वेषकों को लाभ मिलेगा।

यह भी पढ़ें : कुलपति राणा के प्रयासों से 12 वर्ष बाद मिली कुमाऊं विवि में एक नये संकाय को स्वीकृति

नवीन समाचार, नैनीताल, 18 सितंबर। राज्यपाल बेबी रानी मौर्य ने कुमाऊं विवि में ‘प्रबंध अध्ययन संकाय’ को स्वीकृति दे दी है। 16 सितंबर को राज्यपाल के सचिव रमेश कुमार सुधांशु की ओर से इस बारे में स्वीकृति आदेश बुधवार को विवि को प्राप्त हो गया है। इसके अनुसार कुमाऊं विवि की परिनियमावली में परिनियम 7.01 के अंतर्गत प्रबंध अध्ययन संकाय को समाहित करने की राज्यपाल ने स्वीकृति प्रदान कर दी है।
अब तक वाणिज्य एवं प्रबंध अध्ययन एक ही संकाय था। इसके अंतर्गत वाणिज्य एवं प्रबंध अध्ययन विभाग कार्यरत थे। वर्ष 2007-08 से प्रबंधन अध्ययन संकाय की स्थापना का मामला शासन में लंबित था, जिसे अब कुलपति प्रो. केएस राणा के प्रयासों से करीब 12 वर्ष बाद स्वीकृति मिल पाई है। इसके बाद प्रबंध अध्ययन विभाग अलग संकाय के रूप में कार्य करेगा। इस हेतु नये संकायाध्यक्ष की नियुक्ति भी होगी। इसके अंतर्गत अलग-अलग विभाग भी स्थापित किये जाएंगे, तथा प्रबंधन संबंधी समस्त विभाग इसके अंतर्गत कार्य करेंगे।

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