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फिर नए प्रशासनिक फरमान से नैनीताल के हरिनगर वासियों में हड़कंप

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नवीन समाचार, नैनीताल, 19 अक्टूबर 2019। नगर के हरिनगर क्षेत्रवासी 26 परिवारों को गत 17 अक्तूबर को तीन दिन के भीतर घर खाली करने के नोटिस जारी हुए हैं। इससे क्षेत्रवासियों में हड़कंप मच गया है। इस पर क्षेत्रवासियों ने पहले डीएम सविन बंसल से और फिर उनके कहने पर एडीएम प्रशासन कैलाश टोलिया से मिलकर गुहार लगाई। उनका कहना था कि दीपावली को एक सप्ताह का समय भी नहीं बचा है और 4 नवंबर से वार्षिक परीक्षाएं होनी हैं। लिहाजा कार्रवाई को 7 दिसंबर को परीक्षाएं निपटने तक टाला जाए।
क्षेत्रवासियों की हरिनगर-बलियानाला संघर्ष समिति के संयोजक मुख्तयार अली ने बताया कि पूर्व में 2018 के सर्वे में 66 घर खतरे में डाले गए थे। इनमें से 38 घर कब्जेधारकों के, टिन शेड व गिरताऊ जगह में थे, लिहाजा इन्हें दुर्गापुर में पालिका द्वारा बनाये गये घरों में विस्थापित कर दिया गया था। वहीं 28 परिवारों को वर्षाकाल में खतरा बताते हुए तीन महीने के लिए किराये के घरों में रहने को भेज दिया गया था। इन्हें अब वापस अपने घरों में आना था। लेकिन इस बीच प्रशासन ने गलत तरीके से क्षेत्रवासियों की मांग बताकर 5 जुलाई 2019 को जीएसआई से एक अन्य सर्वे कराकर हरिनगर के 26 घरों को और खतरे की जद में बता दिया है। जबकि इस क्षेत्र के घरों में कोई दरार, या खतरा नहीं है। यहां दो वर्षों में कोई भूस्खलन भी नहीं हो रहा है। घरों और भूस्खलन के बीच 150-200 फिट चौड़ा जीआईसी का मैदान भी है। अब बरसात का मौसम भी नहीं है। जिन्हें नोटिस जारी हुए हैं, वह परिवार चार पीढ़ी से यहां पक्के घरों में रहते हैं। बेहतर यह होगा कि क्षेत्र में तुरंत भूस्खलन के संरक्षण के कार्य प्रारंभ किये जाएं, और दिसंबर माह तक विस्थापन की कोई कार्रवाई न की जाए। यदि इसके बावजूद कोई खतरा महसूस होता है, तो लोग स्वयं हट जाएंगे। उन्होंने जीएसआई के सर्वेक्षण में भी कमी बताते हुए कहा कि एक ही घर के कमरे भी अलग-अलग जोन में आ रहे हैं। वहीं प्रशासन का कहना है कि उन्हें चरणबद्ध तरीके से लोगों को भूस्खलन की जद में आ रहे घरों को खाली करवाना है। आगे सोमवार को डीएम एवं क्षेत्रवासियों के बीच वार्ता होने की संभावना है।

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नवीन समाचार, नैनीताल, 29 सितंबर 2019। नगर में पिछले कुछ दिनों से हो रही बारिश से बीती रात्रि मंगावली स्थित नगर पालिका के आवासों के पास भूस्खलन हो गया। यहां पहाड़ का एक हिस्सा एक गौशाला पर आ गया, इससे गौशाला ध्वस्त हो गयी। घटना रात्रि करीब सवा आठ बजे की है। गनीमत रही कि इस दौरान तक इस गौशाला में रहने वाली दो गायें जंगल से नहीं लौटी थीं, अन्यथा वे भूस्खलन में दब सकती थीं। गौशाला जिला कलक्ट्रेट में कार्यरत नवीन बिष्ट की थीं। नवीन यहां नगर पालिका में कार्यरत रहे अपने पिता को आवंटित आवास में रहते हैं। उनके पड़ोस में रहने वाले नगर पालिका कर्मी गोपाल नेगी ने बताया कि नगर पालिका के अन्य आवासों को भी खतरा उत्पन्न हो गया है।

बड़ा समाचार : भूस्खलन प्रभावित बलियानाला क्षेत्र से और खाली किये जाएंगे 27 भवन, जनदबाव से क्षेत्रवासियों को मिलेंगे चार नये मार्ग..

सोमवार को कार्यालय में डीएम सविन बंसल को कृष्णापुर वासियों का ज्ञापन सोंपते विधायक संजीव आर्या।

नवीन समाचार, नैनीताल, 26 अगस्त 2019। नगर के भूस्खलन प्रभावित आधार बलियानाला क्षेत्र के हरीनगर क्षेत्र से और 27 भवनों को खाली कराया जाएगा। डीएम सविन बंसल ने इस बारे में पूछे जाने पर सोमवार को बताया कि इस क्षेत्र में आईआरएस के द्वारा गत दिनों जीएसआई द्वारा ड्रोन के जरिये किये गये सर्वेक्षण के परिणाम आ गये हैं। ड्रोन सर्वे से उपग्रह आधारित एरियल नक्शा उपलब्ध हो गया है कि कितना क्षेत्र खाली कराना जरूरी है। बताया कि जीआईएस के पूर्व के सर्वेक्षण में 66 परिवार विस्थापित किये जाने के लिए चिन्हित हुए थे, अब दूसरे चरण के इस सर्वे में पहाड़ के लगातार अस्थिर झुकाव क्षेत्र में रह रहे 27 भवनों को पुनः हटाया जाना जरूरी है। इन परिवारों को नोटिस भी दे दिये गये हैं। आगे शीघ्र ही इन्हें दुर्गापुर के आवासों में विस्थापित किया जाएगा। इस हेतु आवंटन की प्रकिया चल रही है।

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जनदबाव के बाद डीएम ने खुलवाया जीआईसी से पैदल मार्ग

-भूस्खलन के कारण पैदल मार्ग बंद होने से कृष्णापुरवासी विधायक की अगुवाई में पहुंचे थे जिला कलक्ट्रेट
-कूड़ा खड्ड के पास से वन विभाग के माध्यम से हल्का वाहन या पैदल मार्ग बनाने और एरीज-मनोरा के पास से सड़क मार्ग के प्रस्ताव में भी तेजी लाने का दिया आश्वासन
नैनीताल। बीते कुछ दिनों से पैदल मार्ग के लिए आंदोलित नगर के कृष्णापुर वार्ड वासियों की समस्या का सोमवार को क्षेत्रीय विधायक संजीव आर्य के हस्तक्षेप के बाद काफी हद तक समाधान हो गया है। डीएम सविन बंसल ने उनके लिए तत्काल ही जीआईसी परिसर के भीतर से अभिभावक संघ व मुख्य शिक्षा अधिकारी से अनापत्ति प्राप्त कर वैकल्पिक पैदल मार्ग खोलने, सिपाहीधारा की ओर से पैदल मार्ग पर चढ़ाई को सीढ़ी बनाकर कुछ कम करने व चौड़ाई बढ़ाने, मार्ग पर अधिक स्ट्रीट लाइट लगवाने व झाड़ियां कटवाने तथा मार्ग पर रहने वाले नशेड़ियों व असामाजिक तत्वों पर लगाम लगाने के लिए पुलिस की नियमित गस्त करवाने और क्षेत्र के लिए वन विभाग के माध्यम से कूड़ा खड्ड के पास से हल्का दोपहिया मोटर मार्ग या पैदल मार्ग बनाने के लिए फिर से जियोलॉजिकल सर्वे कराने एवं एरीज-मनोरा की ओर से सड़क मार्ग बनाने के लिए प्रयास तेज करने के आश्वासन दिये। साथ ही कृष्णापुर क्षेत्र में आंगनबाड़ी केंद्र में स्वास्थ्य शिविर लगवाने का भी आश्वासन दिया, और इस हेतु संबंधित अधिकारियों को भी निर्देश दिये। क्षेत्रवासियों ने क्षेत्र की दुर्गमता को देखते हुए यहां दवाइयों की डिस्पेंसरी खोलने की भी मांग रखी।
इससे पूर्व क्षेत्र के दर्जनों लोग सोमवार को विधायक संजीव आर्य की अगुवाई में डीएम से उनके कार्यालय में मिले और विधायक के माध्यम से अपनी समस्या रखीं। उनका कहना था कि पैदल मार्ग बंद कर दिये जाने से उन्हें अत्यधिक समस्याएं आ रही हैं। इस मौके पर नगर पालिका अध्यक्ष सचिन नेगी, क्षेत्रीय सभासद कैलाश रौतेला, पूर्व सभासद डीएन भट्ट व सरवर खान, भाजपा के नगर अध्यक्ष मनोज जोशी के साथ ही भाजपा नेता दया किशन पोखरिया, गोपाल रावत, शांति मेहरा, बिमला अधिकारी, अरविंद पडियार, भूपेंद्र सिंह व किशन पांडे के साथ ही बड़ी संख्या में क्षेत्रवासी मौजूद रहे।

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-धीमे इंटरनेट व कोहरे की वजह से सर्वेक्षण कार्य हुआ प्रभावित

ड्रोन के उड़ने के इंतजार में खड़े डीएम सविन बंसल एवं अन्य अधिकारी।

नवीन समाचार, नैनीताल, 15 जुलाई 2019। नगर के भूस्खलन प्रभावित संवेदनशील बलिया नाला क्षेत्र का सोमवार को इसरो यानी भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन की टीम के द्वारा ड्रोन कैमरे की मदद से ‘हाई रेजुलेशन’ के वीडियो चित्रण के लिए पहुंची, किंतु यहां बलियानाला की समस्या को जांचने से पहले दूसरी ही समस्या जांच बैठी, या कहें कि एक ऐसी समस्या में खुद घिरी कि स्थिति हास्यास्पद हो गयी। डीएम सविन बंसल को थक-हार कर उनका कार्य प्रारंभ होने से पहले ही जाना पड़ा। अलबत्ता जो समस्या जाहिर हुई, श्री बंसल ने कहा कि आगे आपदा-प्रबंधन की बैठक में उस समस्या का समाधान करने का प्रयास करेंगे। समस्या वह थी जिस पर देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सपनों के ‘न्यू इंडिया’ की ताबीर का पूरा दारोमदार है। यानी इंटरनेट की धीमी गति। उल्लेखनीय है कि नगर के कमोबेश सभी क्षेत्रों में इंटरनेट व मोबाइल के सिग्नलों की स्थिति दयनीय है। गत दिनों यह मामला स्थायी लोक अदालत में भी गया था। बावजूद कोई समाधान नहीं हुआ।
हुआ यह कि देहरादून से पहुंची इसरो की टीम ने डीएम सविन बंसल की उपस्थिति में नगर के शहीद मेजर राजेश अधिकारी राजकीय इंटर कॉलेज के मैदान से बलियानाला व आसपास की पहाड़ियों का हाई रेजुलेशन ड्रोन मैपिंग सर्वे का कार्य करने पहुंची। इस दौरान टीम के सदस्यों ने ड्रोन कैमरे की मदद से बलियानाला से लगे रईस होटल, हरीनगर आदि आवासीय भूस्खलन प्रभावित क्षेत्रों का हवाई निरीक्षण करने के लिए ड्रोन को उड़ाने का खूब प्रयास किया किंतु डीएम के करीब एक घंटे खड़े रहकर इंतजार करते सफल नहीं हो पाऐ। इस मौके पर इसरो की टीम के नेतृत्वकर्ता डॉ. सोबन जयराज, राघवेंद्र एस जनार्दन विश्वकर्मा, चंदन ग्रोवर, जिला विकास प्राधिकरण के सचिव हरबीर सिंह, एसडीएम विनोद कुमार तथा आपदा प्रबंधन अधिकारी शैलेश कुमार, राजस्व उप निरीक्षक अमित कुमार सहित अन्य अधिकारी मौजूद रहे।

धीमे इंटरनेट की वजह से डेढ़ घंटे तक नहीं उड़ पाया ड्रोन

नैनीताल। इसरो की टीम के द्वारा ड्रोन को उड़ाने के लिए नगर के राइंका में सुबह 10 बजे से डीएम सविन बंसल की उपस्थिति में प्रयास शुरू किये गये, किंतु ड्रोन डेढ़ घंटे बाद करीब साढ़े 11 बजे पहली उड़ान ले पाया। ड्रोन के उड़ने के इंतजार में करीब पौने घंटे डीएम को भी खड़े रहकर इंतजार करना पड़ा, और आखिर वे पहले राइंका के बच्चों से संवाद करने और इसके बाद भी ड्रोन के न उड़ने पर गत दिवस तूफान से नगर की बिजली लाइनों को पहुंचे नुकसान का जायजा लेने चले गये। बताया गया कि धीमी इंटरनेट की गति के कारण ड्रोन इसरो के ऐप से संपर्क नहीं कर पा रहा था। इस दौरान बीएसएनएल सहित सभी दूरसंचार प्रदाता कंपनियों के नेटवर्क, यहां तक कि डोंगल को लगाकर भी इंटरनेट प्राप्त करने का प्रयास किया गया, किंतु सभी प्रयास विफल रहे। बाद में केबल के जरिये सेवाएं देने वाली एक निजी कंपनी का नया संयोजन लेने के प्रयास शुरू किये गये। पूछे जाने पर डीएम श्री बंसल ने कहा कि वे नगर में विभिन्न दूरसंचार कंपनियों की सेवाओं की पड़ताल करेंगे ओर आगे आपदा प्रबंधन की बैठक में सभी दूरसंचार कंपनियों के प्रतिनिधियों को बुलाकर उनकी खबर लेंगे। उन्होंने निहाल नाले में भूस्खलन के साथ जारी अवैध खनन एवं माल रोड पर भी हो रहे भूस्खलन का संज्ञान लेने की बात भी कही।

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-इसरो की टीम करेगी नैनीताल के भूस्खलन प्रभावित बलियानाला क्षेत्र की जांच
-किया जाएगा हाई रेजुलेशन ड्रोन मैपिंग व डिफ्रेंशियल ग्लोबल पोजिशनिंग सिस्टम (डीजीपीएस) सर्वे

2 अक्टूबर 2018 को बलियानाले के मुहाने पर स्थित नैनीताल के रईस होटल व रईस होटल क्षेत्र का नज़ारा।

नवीन समाचार, नैनीताल, 10 जुलाई 2019। डीएम सविन बंसल के विशेष प्रयासों से नैनीताल का आधार बलियानाला क्षेत्र देश की चिंता में शामिल हो गया है। इसके बाद देश की शीर्ष संस्था इसरो यानी भारतीय सुदूर संवेदन संस्थान के द्वारा नगर के आधार बलियानाले के भू-स्खलन क्षेत्र का जांच की जाएगी। इस हेतु इसरो की टीम सर्वे के लिए आगामी 14 जुलाई को नैनीताल पहुंच रही है। जानकारी देते हुए डीएम सविन बंसल ने बताया कि बलियानाले में लगातार हो रहे कटाव एवं भू-धंसाव के कारण रईस होटल हरिनगर क्षेत्र की संवेदनशीलता में दिन प्रतिदिन बढ़ोत्तरी हो रही है। जिसके दृष्टिगत क्षेत्र की अति संवेदनशीलता को देखते हुए भारतीय भू-वैज्ञानिक सर्वेक्षण (जीएसआई) द्वारा किए गए सर्वेक्षण के उपरान्त निवासरत परिवारों की जान-माल की सुरक्षा को दृष्टिगत अन्यत्र विस्थापित करने का कार्य किया गया है तथा अन्य प्रक्रियाएं गतिमान है।
इसी कड़ी में बलियानाला की पहाड़ियों की संवेदनशील हो चुके ढाल की इसरो से हाई रेजुलेशन ड्रोन मैपिंग व डिफ्रेंशियल ग्लोबल पोजिशनिंग सिस्टम (डीजीपीएस) सर्वे कराना आवश्यक है, जिससे क्षेत्र की ‘वल्नरेबिलिटी मैपिंग’ करते हुए संभावित खतरे का विश्लेषण किया जा सके। साथ ही इससे क्षेत्र के पूर्व में चिन्हित भवनों के अतिरिक्त अन्य संवेदनशील भवनों को भी चिन्हित किया जा सकेगा, और संभावित जन-हानि को भी कम करने में सहायता मिलेगी। उन्होंने बलियानाला पहाड़ियों एवं आसपास के क्षेत्रों की ड्रोन मैपिंग व डिफ्रेंशियल ग्लोबल पोजिशनिंग सिस्टम (डीजीपीएस) सर्वे कराने के लिए निदेशक भारतीय सुदूर संवेदन संस्थान से सर्वेक्षण हेतु वार्ता की गई थी। जिसके स्वीकृति के उपरान्त आगामी 14 जुलाई को इसरो की टीम हाई रेजुलेशन ड्रोन मैपिंग व डिफ्रेंशियल ग्लोबल पोजिशनिंग सिस्टम (डीजीपीएस) सर्वे के लिए नैनीताल आ रही है

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-जीआईसी को दो हिस्सों में अलग-अलग विस्थापित करने से अभिभावक व शिक्षक सशंकित

शहीद राजेश अधिकारी

नवीन समाचार, नैनीताल, 6 जुलाई 2019। नगर के शहीद मेजर राजेश अधिकारी राइंका का भविष्य खतरे में है। प्रशासन द्वारा विद्यालय को भूस्खलन प्रभावित बताते हुए इसे अन्यत्र स्थापित करने की तैयारी की जा रही है। डीएम सविन बंसल ने कहा कि इसके प्राथमिक व उच्च प्राथमिक हिस्से को एक जगह तथा इंटर के हिस्से को दूसरी जगह स्थानांतरित किया जा सकता है। बताया जा रहा है कि इसके इंटर वाले हिस्से को मल्लीताल स्थित सीआरएसटी इंटर कॉलेज में जबकि निचली जूनियर हाईस्कूल की कक्षाओं को तल्लीताल के सीआरसी व जूनियर हाईस्कूल में चलाया जा सकता है। इसके बाद पहले शुक्रवार को नगर भाजपा कार्यकर्ताओं ने मंडलायुक्त राजीव रौतेला को ज्ञापन दिया था। वहीं शनिवार को विद्यालय के अभिभावकों ने डीएम को ज्ञापन दिया। ज्ञापन में विद्यालय की इंटर की कक्षाओं को जीजीआईसी में तथा हाईस्कूल व जूनियर हाईस्कूल की कक्षाओं को तल्लीताल के जूनियर हाईस्कूल व सीआरसी आदि में संचालित किये जाने की मांग की गई है। वहीं शिक्षक भी विद्यालय का अस्तित्व समाप्त होने के साथ नगर से स्थानांतरित किये जाने को लेकर सशंकित हैं।
उधर, डीएम सविन बंसल के निर्देशों पर शनिवार को 8 परिवारों को दुर्गापुर स्थित नवनिर्मित आवासों में विस्थापित किया गया। जबकि 28 परिवारो को पूर्व में ही दुर्गापुर में विस्थापित कर दिया गया था। आगे मौसम अनुकूल रहा तो आने वाले दो दिनों में सभी परिवारों को दुर्गापुर में विस्थापित करने की कोशिश है। डीएम ने बताया कि क्षेत्र में विद्युत विभाग द्वारा ट्रांसफार्मर स्थापित कर दिया गया है, दो एलटी पोल की स्थापना का कार्य गतिमान है, केवल 11 केवी की लाईन स्थापना का कार्य शेष है जोकि रविवार तक पूरा कर लिया जाएगा। शनिवार को दुर्गापुर क्षेत्र में विद्युत संयोजन के लिए आवेदन प्राप्त करने के लिए शिविर लगाया गया। जिन आवेदकों के फार्म समस्त अभिलेखों सहित प्राप्त हो जायेंगे उनके विद्युत कनैक्शन एवं मीटर भी तत्काल लगा दिए जायेंगे। नवनिर्मित आवासों के ब्लॉक ए के सभी 32, ब्लॉक बी के 40 आवासों में से 32 तथा ब्लॉक सी के 48 में से 6 आवासों में पेयजल संयोजन देने का कार्य पूर्ण हो गया है। शेष करीब 80 आवासों में 9 जुलाई तक पेयजल संयोजन करने के आदेश जल संस्थान को दिए गए हैं। वहीं शनिवार को यहां लगे स्वास्थ्य विभाग के विशेष शिविर में लोगों को जन स्वास्थ्य तथा मलेरिया तथा डेंगू आदि संक्रामक बीमारियों के बारे में जानकारी दी गयी व उनका मेडिकल चेक-अप कर उन्हे औषधियॉ भी उपलब्ध करायी गईं। वहीं प्रभावित बलियानाला क्षेत्र में चेतावनी विषयक सूचना बोर्ड लगा दिए गए हैं तथा अतिप्रभावित एवं चिन्हित क्षेत्रों में बाउंड्री वॉल तथा तार-बाड़ आवागम को बन्द करने के उद्देश्य से लगा दी गई है। एसडीएम आदि अधिकारियों ने आज क्षेत्र में डीएम के आदेशों पर गश्त भी लगाई।

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-डीएम सविन बंसल ने कहा-भूस्खलन प्रभावित बलियानाला का फिर से सर्वेक्षण करेगी 4 सदस्यीय टीम, अधिकारियों को यह सुनिश्चित करने को कहा कि क्षेत्र में कोई जनहानि न हो
-जनपद के भूस्खलन प्रभावित क्षेत्रों का उपग्रह आधारित सुदूर संवेदी मानचित्र भी बनेगा

अधिकारियों के साथ नगर के भूस्खलन प्रभावित आधार बलियानाला क्षेत्र का निरीक्षण करते डीएम।

नवीन समाचार, नैनीताल, 3 जुलाई 2019। जनपद के नवनियुक्त डीएम सविन बंसल ने बुधवार को अधिकारियों के साथ भूस्खलन प्रभावित नगर के आधार बलियानाला क्षेत्र का मौका मुआयना किया। इस दौरान उन्होंने अधिकारियों से इस बात का विशेष ध्यान रखने को कहा कि बलियानाला क्रोनिकल जोन के कारण कोई जन-हानि न हो। एडीएम व एसडीएम क्षेत्र में सभी सुरक्षात्मक मापदंड सुनिश्चित कराएं। कहा कि शीघ्र ही भू-स्खलन क्षेत्र का 4 सदस्यीय संयुक्त टीम के द्वारा पुनः सर्वे कराया जाएगा, जिसमें जीआईएस के प्रतिनिधि, एसडीएम, जिला विकास प्राधिकरण व सिचाई विभाग के अधिशासी अभियंता शामिल होंगे। साथ ही बताया कि भू-स्खलन क्षेत्रों पर पैनी नजर रखने हेतु सैटेलाईट रिमोट सेंसिंग मैप भी बनवाया जा रहा है।
श्री बंसल ने भू-स्खलन क्षेत्र की संवेदनशीलता को देखते हुए कृष्णापुर को जाने वाले मार्ग पर पूर्णतः आवागमन बन्द करने हेतु दीवार निर्माण करने के निर्देश भी दिए, साथ ही मार्ग एवं संवेदनशील क्षेत्र में चेतावनी बोर्ड लगाने, मार्किंग करने, पूर्व चिन्हित भवनों पर नंबरिंग करने के निर्देश प्रशासनिक अधिकारियों व अधिशासी अभियंता लोनिवि को दिए। तहसीलदार तथा पुलिस इंस्पेक्टर को नियमित रूप से क्षेत्र में गश्त लगाने तथा गश्त की सूचना रिपोर्ट आपदा कंट्रोल रूप को उपलब्ध कराने को भी कहा। सिचाई विभाग के अधिशासी अभियंता डीएस कुटियाल ने बताया कि इस क्षेत्र में वर्ष 2016 में 1.94 करोड़ की लागत से पहाड़ की रॉक ड्रिलिंग, एंकरिंग के साथ ही सीमेंट ग्राउटिंग, वायरमेस, सॉयल नैलिंग आदि सुरक्षात्मक कार्य किए गए। आगे द्वितीय चरण के सुरक्षात्मक कार्यो की डीपीआर शासन को भेजी गई है। निरीक्षण के दौरान अध्यक्ष नगर पालिका सचिन नेगी, एडीएम एसएस जंगपांगी, प्राधिकरण सचिव हरबीर सिंह, एसडीएम विनोद कुमार, ईई सिंचाई एचएस भारती, एसके उपाध्याय, सैयद उस्मान, सीओ विजय थापा सहित सम्बन्धित अधिकारी मौजूद रहे।

जीआईसी के लिए भी अन्यत्र स्थान ढूंढें: डीएम

नैनीताल। डीएम ने बलियानाला क्षेत्र में हो रहे भू-स्खलन को देखते हुए शहीद मेजर राजेश अधिकारी राइंका नैनीताल को भी अन्यत्र विस्थापित करने लिए उपयुक्त स्थल का चयन करने के निर्देश मुख्य शिक्षा अधिकारी, जिला शिक्षा अधिकारी माध्यमिक को दिए। साथ ही क्षेत्र के भू-स्खलन की जद में रह रहे चिन्हित परिवारों के संबंध में उच्च न्यायालय के निर्देशानुसार आगे की कार्यवाही करने की बात कही। वहीं दुर्गापुर में रह रहे विस्थापित परिवारों के लिए सुचारू पेयजल व विद्युत की व्यवस्था तीन दिन के भीतर करने के निर्देश सम्बन्धित अधिशासी अभियंताओं को दिए।

यह भी पढ़ें : नैनीताल के बलियानाला क्षेत्रवासियों को विस्थापित करने पर रोक लगाई….

नवीन समाचार, नैनीताल, 27 जून 2019। उत्तराखंड उच्च न्यायालय की वरिष्ठ न्यायमूर्ति सुधांशु धुलिया की एकलपीठ ने नैनीताल के बूचड़खाना उत्तराखंड हाई कोर्ट ने नैनीताल के बूचड़खाना, रईस होटल और हरिनगर क्षेत्र से प्रभावितों को सिफ्ट करने के मामले में सुनवाई करते हुए विस्थापित करने पर रोक लगा दी है।

हरिनगर क्षेत्र के मोहम्मद तय्यब व अनीता देवी सहित कई अन्य लोगों ने हाईकोर्ट में याचिका दायर क्र कहा है कि वे भूस्खलन क्षेत्र में नहीं आते हैं। प्रशासन बेवजह उन्हें उनके पैतृक आवासों से हटा रहा है। याचिकर्ताओं का कहना है कि वे मकानों के रजिस्टर्ड और रिकॉर्डेड स्वामी हैं। पूर्व में प्रशाशन ने एक हाई पावर कमेटी गठित की गयी थी। इसमें कहा गया था कि भूस्खलन क्षेत्र से पांच मीटर दूर पर रहने वाले लोगों को चेतावनी दी जाएगी, उनको हटाया नहीं जाएगा। परन्तु प्रशासन जबरन उन्हें हटा रहा है। याचिकर्ताओं का यह भी कहना है कि यदि प्रशासन पांच सौ मीटर दूर तक के लोगों को हटाता है तो रोडवेज बस स्टेशन तक का क्षेत्र इस परिधि में आ रहा है। इतने बड़े क्षेत्र को विस्थापित करना नामुमकिन है। सरकार बलियानाले का ट्रीटमेंट तो नहीं कर रही है तथा यहां रहने वाले लोगों को परेशान कर रही है। इस क्षेत्र में लगभग पाँच सौ परिवार निवास कर रहे है । याचिकर्ताओ द्वारा केंद्र व राज्य के आपदा प्रबन्धन को भी आज पक्षकार बनाया गया।

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-दुर्गापुर भेज दिए भूस्खलन प्रभावित, विस्थापितों ने बिना नोटिस अचानक हटाये जाने पर कड़ी नाराजगी भी जताई
नवीन समाचार, नैनीताल, 17 जून 2019। सोमवार को नगर पालिका ने अचानक नगर के आधार बलियानाला क्षेत्र से लगे रईश होटल के भूस्खलन प्रभावित क्षेत्र से करीब 15 परिवारों को बिना नोटिस दिये, और बिना उनके प्रपत्रों की जांच तथा नये भवन आवंटित किये जाने की औपचारिकताएं पूर्ण किये विस्थापित कर दिया। लोगों ने विस्थापन के लिए दो दिन की मोहलत दिये जाने की मांग करते हुए प्रशासन की अचानक आनन-फानन में हुई कार्रवाई पर कड़ी नाराजगी भी जताई। विस्थापित किये जा रहे लोगों का आरोप था कि उनके मौजूदा आवास ध्वस्त कर दिये गये और उन्हें दुर्गापुर स्थित जेएलएनयूआरएम द्वारा बरसों पूर्व बनाये गये आवासों में भेज दिया। अचानक हुई इस कार्रवाई पर विस्थापित किये जा रहे परिवारों के सदस्यों ने कड़ी नाराजगी व्यक्त की। उनका कहना था कि प्रशासन ने उन्हें नोटिस नहीं दिये। अचानक हुई कार्रवाई से उनके सामने सामान को ध्वस्त किये जा रहे घरों से हटाने व नये स्थान पर ले जाने की समस्या है। वहीं नगर पालिका की ओर से दावा किया गया कि 15 दिन पूर्व नोटिस दिये गये थे। अलबत्ता, पालिका के अधिकारियों के पास इस प्रश्न का कोई उत्तर नहीं था कि क्यों विस्थापन के लिए आवास आवंटन की प्रक्रिया पूरी किये, विस्थापितों से तय 25 हजार रुपए का अंशदान लिये बिना ही उनके पुराने आवास ध्वस्त एवं नये आवास आवंटित किये गये। आखिर नगर पालिका की कर अधीक्षक लता आर्या ने माना कि आसन्न बरसात के मौसम में भूस्खलन की संभावना को देखते हुए शासन की ओर से आये निर्देशों पर कार्रवाई की गयी। कहा कि जिन लोगों के डीपीआर में नाम हैं, उन्हें ही विस्थापित किया जा रहा है। यदि किसी के प्रपत्रों में कोई दिक्कत आती है तो उसका आवंटन निरस्त कर दिया जाएगा।
बताया गया है कि सितंबर 2018 में बलियानाला क्षेत्र में हुए भूस्खलन से क्षेत्र के 67 परिवार खतरे की जद में आ गये थे। वहीं आगे राजस्व विभाग ने 23 एवं जीएसआई ने 5 सहित कुल 28 परिवारों को विस्थापित किया गया है, जबकि पूर्व में 53 परिवारों को दुर्गापुर के आवासों में विस्थापित किया जा चुका है। विस्थापन की प्रक्रिया में जिला विकास प्राधिकरण के सचिव हरबीर सिंह, एसडीएम विनोद कुमार व पालिका ईओ रोहिताश शर्मा, पालिका सभासद रेखा आर्य, कैलाश रौतेला व प्रेमा अधिकारी आदि भी शामिल रहे। आज जिन्हें विस्थापित किया गया है उनमें श्याम कुमार, अभिनव आर्य, बाबू लाल, करन कश्यप, शिव चरण, बंटी कुमार, किशोर कुमार, सुमित व राजेश आर्य शामिल हैं।

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-भारत सरकार के स्तर पर हुआ निर्णय, राज्य शासन ने पालिका के ईओ को पात्रों को आवास आवंटन करने के दिये निर्देश
नवीन समाचार, नैनीताल, 31 मई 2019। नगर के आधार बलियानाला में हुए बीते वर्ष हुए भूस्खलन से प्रभावित पात्र परिवारों को दुर्गापुर में जेएनएनयूआरएम यानी ‘जवाहरलाल नेहरू नेशनल अर्बन रूरल मिशन’ की उप योजना बीएसयूपी यानी ‘बेसिक सर्विसेज फॉर अर्बन पुअर’ के तहत बने व खाली पड़े आवास आवंटित किये जा सकेंगे। अपना घर छोड़कर करीब आठ माह से कभी जीआईसी-जीजीआईसी के कक्षा कक्षों और यहां से परेशान होकर किराये के कमरों में रह रहे क्षेत्रवासियों के लिए यह बड़ी राहत की खबर है। इस पर नगर भाजपा अध्यक्ष मनोज जोशी ने भाजपा के विधायक संजीव आर्य के साथ ही इस बाबत प्रस्ताव पारित करने वाले नगर पालिका बोर्ड का भी आभार जताया है।
उल्लेखनीय है कि बीते वर्ष 10 सितंबर 2018 से नगर के बलियानाला क्षेत्र के रईश होटल व हरीनगर मोहल्लों में जबर्दस्त भूस्खलन हुआ था, जिसके कारण 25 परिवारों के करीब 90 सदस्यों को जीआईसी, जीजीआईसी व जूनियर हाईस्कूल में अस्थाई तौर पर विस्थापित किया गया था। बाद में इनमें से कई अपने रिश्तेदारों के पास व अन्यत्र किराये पर चले गये। इनमें से अब भी कई परिवार जीआईसी व जीजीआईसी के कक्षा कक्षों में रहने को मजबूर हैं। भूस्खलन के दौरान ही विस्थापितों को दुर्गापुर के खाली आवासों रहने को भेजने की मांग पर विधायक संजीव आर्य धरने पर भी बैठ गये थे, और उनकी डीएम विनोद कुमार सुमन के साथ अनबन भी हो गयी थी। बावजूद दुर्गापुर के आवासों के पूर्व मंे हुए आवंटन पर उपजे विवाद एवं मामले के उच्च न्यायालय में लंबित होने के कारण इन आवासों को विस्थापितों को आवंटित नहीं किया जा सका था। लेकिन इधर उच्च न्यायालय से मामला निपटने के बाद नगर पालिका बोर्ड ने इन आवासों को पात्र विस्थापितों को आवंटित करने का प्रस्ताव पारित कर शासन से अनुमति मांगी थी। इधर शनिवार को शहरी विकास निदेशालय से अपर निदेशक उदय सिंह राणा पालिका के ईओ को आये पत्र में भारत सरकार की बीएसयूपी व आईएसएसडीपी की गत एक मई को हुई बैठक में दिये गये निर्देशों के क्रम में इन आवास आवंटित करने के निर्देश दे दिये गये हैं।

लोक सभा चुनाव के असल मुद्दे-4: नैनीताल का आधार बलियानाला में बिन वर्षा भी हो रहा भूस्खलन, मरम्मत को नहीं मिला ढेला भी

2 अक्टूबर 2018 को बलियानाले के मुहाने पर स्थित नैनीताल के रईस होटल व रईस होटल क्षेत्र का नज़ारा।

नवीन जोशी @ नवीन समाचार, नैनीताल, 29 मार्च 2019। नैनीताल की सरोवरनगरी के तौर पर वैश्विक पहचान है। नैनी सरोवर इस नगरी की प्रसिद्धि का मुख्य आधार, माल रोड इस नगर की शान और बलियानाला इस नगर का आधार है, यानी इसी पर यह नगर टिका है। लेकिन नगर का यह आधार खतरे में हैं। बीते वर्ष सितंबर माह में यहां जबर्दस्त भूस्खलन हुआ। करीब 100 फिट से अधिक लंबा और करीब 50 फिट चौड़ा इलाका भूस्खलन की जद में आकर बलियानाले में समा चुका है। इस वजह से विस्थापित किये गये करीब 15 परिवार बीते छह माह से नगर के जीआईसी और जीजीआईसी के कक्षा कक्षों में रहने को मजबूर हैं। इससे वहां पठन-पाठन के साथ ही इधर हाल में हुई बोर्ड परीक्षाओं में भी दिक्कत आई है। बलियानाला के सुधार कार्यों के लिए उत्तराखंड उच्च न्यायालय भी सख्त रुख अपनाये हुए है, और उच्च न्यायाल की मुख्य न्यायधीश रमेश रंगनाथन एवं न्यायमूर्ति आलोक सिंह की खंडपीठ द्वारा 30 नवंबर 2018 को दिये गये कड़े निर्देशों को भी महीनों बीत गये हैं, बावजूद बलियानाले के मरम्मत कार्यों के लिए न ही एक भी रुपया स्वीकृत हुआ है, ना ही धरातल पर कोई सुधार कार्य हुए हैं, और ना ही विस्थापितों के स्थायी पुर्नवास के लिए ही कोई कार्य हुआ है।
उल्लेखनीय है कि बीते वर्ष 10 सितंबर 2018 से नगर के बलियानाला क्षेत्र के रईश होटल व हरीनगर मोहल्लों में जबर्दस्त भूस्खलन हुआ, जिसके कारण 25 परिवारों के करीब 90 सदस्यों को जीआईसी, जीजीआईसी व जूनियर हाईस्कूल में अस्थाई तौरपर विस्थापित किया गया था। बाद में इनमें से कई अपने रिश्तेदारों के पास व अन्यत्र किराये पर चले गये। इनमें से 7 परिवार जीजीआईसी के तीन बड़े कक्षा कक्षों में और 8 परिवारों जीआईसी केएक बड़े हॉल एवं दो कक्षा कक्षों में रह रहे हैं। इधर नगर की शान लोवर माल रोड का करीब 25 मीटर हिस्सा भी नैनी झील में समा गया था, जबकि माल रोड के करीब 125 मीटर हिस्से में भी दरारें उभरीं। माल रोड क्षेत्र में स्थायी कार्यों के लिये शासन को 42 करोड़ रुपये का प्रस्ताव भेजा गया। वहीं बलियानाला की मरम्मत के लिए जापान की जायका सहित उत्तराखंड के वाडिया संस्थान, आईआईटी रुड़की व आपदा न्यूनीकरण एवं प्रबंधन केंद्र आदि के भूवैज्ञानिक कई दौर में जायजा लेकर जा चुके हैं। सिंचाई व लोक निर्माण विभाग तथा वाडिया भू विज्ञान संस्थान को मिलाकर बनाई गयी एक विशेष समिति भी भूस्खलन प्रभावित क्षेत्र का दौरा करने के बाद अपनी रिपोर्ट शासन को सौंप चुकी है।

1898 से बलियानाला में भूस्खलनों का इतिहास

नैनीताल। भूगर्भीय संवेदनशीलता के दृष्टिकोण से जोन-4 के शहर नैनीताल के आधार बलियानाला में भूस्खलनों का इतिहास करीब सवा सौ वर्षों का है। यहां 17 अगस्त 1898 को पहला भूस्खलन हुआ था, जिसमें 27 भारतीयों व एक अंग्रेज सहित कुल 28 लोग मारे गए थे। इसके बाद भी यहां लगातार भूस्खलन होते रहे हैं, अलबत्ता इस वर्ष पहली बार यहां सर्दियों में बिन वर्षा के भी भूस्खलन की घटनाएं हुई हैं। भूस्खलनों का कारण बलियानाला के करीब तीन किमी क्षेत्र में 1973 से यानी करीब चार दशकों से यहां से गुजर रही मेन बाउंड्री थ्रस्ट व नैनीताल थ्रस्ट का सक्रिय होना बताया जाता है, जिससे नैनीताल के अस्तित्व पर भी खतरा मंडरा रहा है।

पूर्व में हो चुके हैं 44 करोड़ रुपये के कार्य, हो रही है सीबीआई जांच की मांग

नैनीताल। नैनीताल नगर के आधार बलियानाला के भारी भूस्खलन प्रभावित क्षेत्र में पूर्व में 44 करोड़ रुपये से मरम्मत के कार्य किये जा चुके हैं, लेकिन यह कार्य भी स्वयं भूस्खलन की भेंट चढ़ चुके हैं। ऐसे में नगर की गैर राजनीतिक सामाजिक संस्था ग्वल सेना इन कार्यों की सीबीआई जांच करने की मांग उठा चुकी है। संस्था के संस्थापक पूरन मेहरा का कहना है कि बलियानाला में सुधार कार्यों से बलियानाला को मजबूत करने की जगह इसके आधार में बड़ी मशीनें चलाकर आधार को और भी कमजोर कर दिया गया है। यही नहीं निर्माण एजेंसी ने दीवारों को बिना बुनियाद के बनाया है, और निर्माण में बाहर से लाने की जगह वहीं की सामग्री लगाई गयी है। इस कारण ही यहां पिछली बरसात में सर्वाधिक भूस्खलन हुआ है और इतिहास में पहली बार सर्दियों में बिना बारिश के भी बलियानाला में भूस्खलन हुआ है।

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जीआईसी में इस तरह कक्षा कक्षों में रह रहे हैं बलियानाला के विस्थापित परिवार।
जीआईसी में इस तरह कक्षा कक्षों में रह रहे हैं बलियानाला के विस्थापित परिवार।

नवीन समाचार, नैनीताल, 7 फरवरी 2019। एक ओर आगामी मार्च माह से होने जा रही बोर्ड परीक्षाएं सिर पर आ पहुंची हैं, वहीं मुख्यालय स्थित आदर्श राजकीय बालिका इंटर यानी जीजीआईसी और शहीद मेजर राजेश अधिकारी राजकीय इंटर कॉलेज यानी जीआईसी में पिछले पांच वर्षों से 15 विस्थापित परिवारों के दर्जनों सदस्यों का कब्जा है। इससे इन विद्यालयों के करीब आधा दर्जन कक्षा कक्षों में बच्चे बैठ नहीं पा रहे हैं, वहीं बगल के कक्षों में भी बच्चों का पठन-पाठन प्रभावित हो रहा है। यही नहीं परिवारों द्वारा खर्च की जाने वाली बिजली व पानी के बिलों का वहन भी विद्यालयों को करना पड़ रहा है, और शौचालयों व परिसर में गंदगी तथा शोर अलग से है। इन स्थितियों के बावजूद जिला प्रशासन के पास विस्थापितों को अन्यत्र भेजने अथवा उनके लिऐ कोई स्थायी व्यवस्था करने की कोई योजना नहीं है, उल्टे प्रशासन भूवैज्ञानिकों की रिपोर्ट पर कुछ नये परिवारों को भी इन स्कूलों में विस्थापित करने की सोच रहा है।
उल्लेखनीय है कि 10 सितंबर 2018 से नगर के बलियानाला क्षेत्र में हो रहे भूस्खलन के कारण 25 परिवारों के करीब 90 सदस्यों को जीआईसी, जीजीआईसी व जूनियर हाईस्कूल में अस्थाई तौर पर विस्थापित किया गया था। बताया गया है कि इनमें से जीजीआईसी में
7 परिवार विद्यालय के तीन बड़े कक्षा कक्षों में रह रहे हैं। विद्यालय की प्रधानाचार्या सावित्री दुग्ताल ने बताया कि इन में से दो कक्षों का फर्नीचर कई महीने बाहर रखना पड़ा, जिसके कारण वह खराब हो गया, तथा बच्चों को भी बाहर बैठना पड़ा। अब ठंड बढ़ने पर बच्चियों को बमुश्किल अन्य कक्षों में बैठाकर पढ़ाया जा रहा है। वहीं एक कक्ष में बच्चियों को डायनिंग टेबल पर मध्याह्न भोजन खिलाने की व्यवस्था की गयी थी, वह व्यवस्था भी समाप्त हो गयी है। स्कूल में रह रहे विस्थापितों ने कुत्ता भी पाला है, इससे काफी गंदगी एवं शोर होने से पठन-पाठन भी प्रभावित हो रहा है। यही स्थिति जीआईसी की भी है। यहां 8 परिवारों को एक बड़े हॉल एवं दो कक्षा कक्षों में रखा गया है। प्रभारी प्रधानाचार्य संजय पांडे ने बताया कि आगे 1 मार्च से बोर्ड परीक्षाएं होनी हैं, जिसके तहत धारा 144 लागू होती है। विस्थापितों के रहते कैसे परीक्षा होगी, कहना मुश्किल है। आरोप है कि विस्थापित परिवार बिजली-पानी का भी दुरुपयोग कर रहे हैं, एवं गंदगी भी फैला रहे हैं। इस संबंध में तहसीलदार व एसडीएम के साथ ही मुख्य शिक्षा अधिकारी एवं खंड शिक्षा अधिकारी को पत्र से सूचना देकर विस्थापितों की अन्यत्र विस्थापित करने की मांग की गयी है। वहीं विस्थापित परिवारों के सदस्य भी अपने घर छिनने की वजह से परेशान हैं और विद्यालय में भी असुविधा महसूस कर रहे हैं। वहीं पूछे जाने पर एडीएम हरबीर सिंह ने जल्द इस समस्या का समाधान करने की बात कहते हुए बताया कि गत दिनों हुए भूवैज्ञानिकों की सर्वेक्षण रिपोर्ट के आधार पर कुछ और परिवारों को भी बलियानाला क्षेत्र से विस्थापित किया जाना है।

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वार्ता करते ग्वल सेना के संस्थापक पूरन मेहरा।

नवीन समाचार, नैनीताल, 30 जनवरी 2019। नगर की गैर राजनीतिक सामाजिक संस्था ग्वल सेना ने नैनीताल नगर के आधार बलियानाला के भारी भूस्खलन प्रभावित क्षेत्र में 44 करोड़ रुपये से किये गये कार्यों की सीबीआई जांच करने की मांग की है। इस मांग के उठने से सिचाई विभाग के साथ ही कुछ राजनेताओं में भी हड़कंप की स्थिति तय मानी जा रही है। सेना के सस्थापक पूरन मेहरा ने पत्रकारों से बात करते हुए कहा कि बलियानाला अधिकारियों के लिये भ्रष्टाचार को अड्डा बन गया है। यहां धन की जमकर बंदबांट हुई है। इन कार्यों में पैंसा पानी की तरह बहाया गया है, जबकि कार्यों में भारी भ्रष्टाचार हुआ है। यदि इन कार्यों की उच्च स्तरीय जांच होती है तो बड़े भ्रष्टाचार की पोल खुल सकती है। बलियानाला में सुधार कार्यों से बलियानाला को मजबूत करने की जगह इसके आधार में बड़ी मशीनें चलाकर आधार को और भी कमजोर कर दिया गया है। यही नहीं निर्माण एजेंसी ने दीवारों को बिना बुनियाद के बनाया है, और निर्माण में बाहर से लाने की जगह वहीं की सामग्री लगाई गयी है। इस तरह अधिकारियों ने बलियानाला को अपनी प्रयोगशाला बना दिया है। जिसके कारण ही यहां पिछली बरसात में सर्वाधिक भूस्खलन हुआ है और इतिहास में पहली बार सर्दियों में बिना बारिश के भी बलियानाला में भूस्खलन हो रहा है।

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-बलियानाला क्षेत्र में सर्दियों की बारिश से भी होने लगा भूस्खलन, माल रोड पर भी बढ़ रही दरारें
-बरसात के मौसम में बड़े स्तर पर भूस्खलन होने के बाद करीब डेढ़ दर्जन परिवारों को किया गया था विस्थापित, लेकिन नहीं हुए सुधार के कार्य

बलियानाला क्षेत्र में हुआ भूस्खलन।

नवीन समाचार, नैनीताल, 29 जनवरी 2019। सरोवरनगरी के बलियानाला और माल रोड में इस वर्ष बरसात के मौसम में बड़े स्तर पर भूस्खलन हुए थे। इस कारण बलियानाला क्षेत्र के रईश होटल व हरीनगर मोहल्लों से करीब डेढ़ दर्जन परिवारों को विस्थापित करना पड़ा था, जबकि लोवर माल रोड का करीब 25 मीटर हिस्सा नैनी झील में समा गया था, और इसके कामचलाऊ स्तर के ही मरम्मत के कार्य हुए हैं। वहीं बलियानाला में कई दौर में जीएसआई, जापान की एजेंसी जायका व अन्य के द्वारा सर्वेक्षण के कार्य ही किये जा रहे हैं। इन स्थितियों में बलियानाला क्षेत्र में संभवतया इतिहास में पहली बार सर्दियों के मौसम में बिन बारिश भी भूस्खलन होने लगा है, जबकि माल रोड के करीब 125 मीटर हिस्से में फिर दरारें दिखाई देने लगी हैं। इस संबंध में लोनिवि के अधिशासी अभियंता सीएस नेगी का कहना है कि माल रोड क्षेत्र में स्थायी कार्यों के लिये शासन को 42 करोड़ रुपये का प्रस्ताव भेजा गया है, लेकिन अब तक अनुमति नहीं मिली है। कमोबेश यही बात बलियानाला क्षेत्र के लिये भी कही जा रही है। बलियानाला क्षेत्र में करीब तीन किमी क्षेत्र में करीब चार दशकों से यहां से गुजर रही मेन बाउंड्री थ्रस्ट व नैनीताल थ्रस्ट के प्रभाव से भूस्खलन हो रहा है। यहां पूर्व में सिचाई विभाग के द्वारा करीब 44 करोड़ रुपये के कार्य किये गये हैं, लेकिन यह कार्य भी भूस्खलन की भेंट चढ़ गये हैं।

पूर्व समाचार : बलियानाला के भूस्खलन पर मुख्य सचिव को विस्तृत शपथ पत्र पेश करने के आदेश

नैनीताल, 30 नवंबर 2018। उत्तराखंड उच्च न्यायालय की मुख्य न्यायधीश रमेश रंगनाथन एवं न्यायमूर्ति आलोक सिंह की खंडपीठ ने नैनीताल के आधार बलिया नाले में लंबे समय से हो रहे भू-स्खलन के मामले में शुक्रवार को सुनवाई करते हुए मुख्य सचिव को एफआरआई द्वारा दाखिल शपथपत्र का गहनता से अध्ययन कर दो सप्ताह के भीतर विस्तृत शपथपत्र कोर्ट में पेश करने के निर्देश दिये हैं। इधर शुक्रवार को मामले में एफआरआई द्वारा बलिया नाले का स्थलीय निरीक्षण कर वहां हो रहे भूस्खलन तथा उसकी रोकथाम के उपायों से सम्बंधित शपथ पत्र पेश किया। उल्लेखनीय है कि पूर्व में खंडपीठ ने इस मामले में एक उच्च स्तरीय कमेटी बनाने और हो रहे भूस्खलन को रोकने के लिए स्थायी समाधान निकालने के आदेश दिए थे।
मामले के अनुसार नैनीताल उच्च न्यायालय के अधिवक्ता सैयद नदीम मून खुर्शीद ने जनहित याचिका दायर कर कहा था कि 1973 से नैनीताल के बलिया नाला क्षेत्र में लगातार भूस्खलन हो रहा है, जिससे नैनीताल के अस्तित्व पर भी खतरा मंडरा रहा है। सरकार के द्वारा विगत कई वर्षो से करोडो रुपये इसके निर्माण में दिये जा चुके हैं, परंतु लगातार हो रहे भूस्खलन से विभागीय लापरवाही से किये गये कार्यो की पोल खुल गई है।

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देहरादून, 27 नवंबर 2018। ढाई महीने बाद भी नैनीताल के भूस्खलन से प्रभावित बलियानाला का ट्रीटमेंट अब तक शुरू नहीं हो पाया है। इस दौरान केवल बैठकें ही हुई हैं और अलग-अलग कमेटियां बनी हैं। अब कहा जा रहा है कि माल रोड की तरह बलियानाला का भी पहले अस्थाई ट्रीटमेंट किया जाएगा। स्थाई ट्रीटमेंट बाद में होगा। बलियानाला में कई बार भूस्खलन हो चुका है। बिना बरसात भी वहां भूस्खलन होता रहता है। विगत दिनों उच्च न्यायालय के आदेश पर वन अनुसंधान संस्थान के निदेशक की अध्यक्षता में पांच सदस्यीय कमेटी बनी थी। कमेटी में सिंचाई व लोक निर्माण विभाग तथा वाडिया भू विज्ञान संस्थान को शामिल किया गया है। क्षेत्र का दौरा करने के बाद कमेटी ने अपनी रिपोर्ट शासन को सौंप दी है। जिसमें कहा गया है कि स्थाई ट्रीटमेंट में समय लगेगा। इसलिए पहले अस्थाई ट्रीटमेंट शुरू किया जाए। पीडब्ल्यूडी के वरिष्ठ अभियंता शिव कुमार का कहना है कि थोड़ी भी बरसात शुरू होने पर बलियानाला में भूस्खलन शुरू हो सकता है। वहीं आपदा न्यूनीकरण एवं प्रबंधन केंद्र के भू वैज्ञानिक सुशील खंडूड़ी ने माना कि ट्रीटमेंट में देर हो रही है। केवल बैठकों से ट्रीटमेंट संभव नहीं है। बलियानाला का ट्रीटमेंट शुरू करने के पहले आसपास लोगों को वहां से कहीं अन्यत्र बसाना होगा। यह बड़ी समस्या है। आपदा न्यूनीकरण एवं प्रबंधन केंद्र के अधिशासी निदेशक डा.पीयूष रौतेला के मुताबिक सिंचाई विभाग जल्द ही काम शुरू करेगा। अब वन अनुसंधान इस काम को देख रहा है। फंडिंड का काम राज्य सरकार करेगी। 

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-आपदा प्रबंधन व वित्त सचिव के बाद अब एफआरआई के सचिव हाईकोर्ट में तलब
नैनीताल, 1 नवंबर 2018। नैनीताल के बलियानाला में हुए भूस्खलन पर हाई पावर कमेटी गठित करने के अपने आदेश का पालन न करने पर उत्तराखंड हाई कोर्ट ने वित्त एवं आपदा प्रबन्धन सचिव के बाद अब एफआरआई यानी फोरेस्ट रिसर्च इंस्टिट्यूट देहरादून के सचिव को शुक्रवार 2 नवम्बर को सकेट्री को पेश होने के आदेश दिए हैं। इससे पहले आज प्रदेश के वित्त एवं आपदा प्रबंधन सचिव वित्त अमित नेगी कार्यवाहक मुख्य न्यायधीश राजीव शर्मा व न्यायाधीश शरद कुमार शर्मा की खंडपीठ में पेश हुए।
उल्लेखनीय है कि इससे पूर्व खंडपीठ ने हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष सैयद नदीम मून की जनहित याचिका पर कमेटी हाईपावर कमेटी से 10 अक्टूबर तक भूस्खलन क्षेत्र का स्थलीय निरीक्षण कर भूस्खलन का स्थायी समाधान खोजने के आदेश दिये थे। तथा वाडिया हिमालयन इंस्ट्टीयूट आफ टेक्नालॉजी, फॉरेस्ट रिसर्च इंस्टीट्îूट के साथ ही लोनिवि, सिंचाई विभाग व आईआईटी रूडकी के मुख्य अभियंता को पक्षकार बनाने को कहा था। लेकिन अब तक किसी तरह का समाधान खोजे जाने की बात सरकार की ओर से नहीं आयी है। बल्कि लग रहा है बरसात निपटने के साथ ही शासन-प्रशासन इस मामले को भूल बैठा है। उधर हरिनगर व रईश होटल क्षेत्र के कुल 25 परिवारों के 90 सदस्य बीते 10 सितंबर यानी करीब दो माह से सरकारी स्कूलों में विस्थापित होकर रह रहे हैं।

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-शासन से आये विशेष जांच दल ने परखी

बलियानाला के भूस्खलन का निरीक्षण करती शासन से आई विशेषज्ञों की टीम के सदस्य।

बलियानाला के संरक्षण की संभावनाएं
नैनीताल, 3 सितंबर 2018। डीएम विनोद कुमार सुमन के अनुरोध पर बुधवार को शासन से विशेष जांच दल बुधवार को मुख्यालय पहुंचा और जांच दल ने बलियानाला क्षेत्र में हो रहे भूस्खलन का भवाली रोड की ओर से तथा हरिनगर-रईश होटल की ओर से मौके पर जाकर संरक्षण की संभावनाएं परखीं। आगे टीम बृहस्पतिवार को भी अपना कार्य जारी रखेगी। पहले दिन टीम के द्वारा भूस्खलन क्षेत्र में हरिनगर व रईश होटल के दोनों पाटों में उभरे बड़े जल स्रोतों पर आपस में चर्चा व मंथन किया, तथा इसके ठीक तरह से निस्तारण किये जाने पर चर्चा प्रमुख रूप से कंेद्रित रही। कहा गया कि इन जल स्रोतों के पानी का ठीक से निस्तारण किये जाने के बाद ही संरक्षण के कोई कार्य किये जा सकते हैं। इस बात पर भी चर्चा हुई कि आईआईटी रुड़की एवं एनआईएच के अध्ययनों के अनुसार यह पानी नैनी झील का नहीं है। जांच दल में जीएसआई की नीतू चौहान, वाडिया इंस्टीट्यूट के सुरेंद्र भाकुनी, आईआईआरएस के डा. सोहन लाल चटोराज, लोनिवि के एसके राय, आईआईटी रुड़की के प्रो. संदीप सिंह, सिचाई विभाग हल्द्वानी से नरेंद्र पतियाल, महानिदेशक वन डा. बाला, एफआरआई के परमानंद, डीएमएमसी के डा. पीयूष रौतेला व डा. कृष्णा सजवान के साथ सीबीआरआई के प्रतिनिधि एवं आपदा प्रबंधन आदि शामिल रहे।

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नैनीताल, 2 अक्टूबर 2018। बलियालनाला क्षेत्र में बीते करीब एक माह से हो रहा भूस्खलन 2 अक्टूबर को भी जारी रहा। इससे पूर्व यहां 30 सितंबर को भी भूस्खलन हुआ था। इससे भूस्खलन शहीद मेजर राजेश अधिकारी राजकीय इंटर कालेज के खेल मैदान तक पहुंच गया है। सुबह तड़के करीब 11  बजे के आसपास हुए ताजा भूस्खलन में कॉलेज का खेल मैदान का एक  हिस्सा भी भूस्खलन की भेंट चढ़कर बलियानाला में समा गया। इससे क्षेत्र में लगातार बढ़ते जा रही खतरे का बेहद गंभीर इशारा मिल रहा है। उल्लेखनीय है कि बीते एक सप्ताह से क्षेत्र में बारिश भी नहीं हो रही है। ऐसे में यह बेहद खतरनाक बात व संकेत है कि क्षेत्र में हो रहे भारी मात्रा में जल रिसाव के कारण क्षेत्र में बिना वर्षा के भी भूस्खलन जारी है। इसके बाद मंगलवार को राज्य सरकार की ओर से गठित विशेष जाँच दल भी क्षेत्र के परीक्षण के लिए आ सकता है। 

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-सरकार को हाईपावर कमेटी बनाने और 10 अक्टूबर तक भूस्खलन का स्थलीय निरीक्षण कर स्थाई समाधान सुझाने को कहा
वाडिया हिमालयन इंस्टिट्यूट आफ टेक्नालॉजी, फॉरेस्ट रिसर्च इंस्टिट्यूट, मुख्य अभियंता लोनिवि व  सिंचाई विभाग तथा आईआईटी रूडकी को बनाया पक्षकार 
नैनीताल, 26 सितंबर 2018। उत्तराखंड उच्च न्यायालय  की कार्यवाहक मुख्य न्यायधीश राजीव शर्मा एवं न्यायमूर्ति मनोज कुमार तिवारी की खंडपीठ ने नैनीताल स्थित बलियानाला में हो रहे भूसंख्लन को गंभीरता से लेते हुए सरकार को हाईपावर कमेटी बनाने के निर्देश दिए हैं। न्यायालय ने 10 अक्टूबर तक भूस्खलन क्षेत्र का स्थलीय निरीक्षण कर स्थाई समाधान सुझाने को भी कहा है, और मामले में चार पक्षकारों  के रूप में वाडिया हिमालयन इंस्टिट्यूट आफ टेक्नालॉजी, फॉरेस्ट रिसर्च इंस्टिट्यूट, मुख्य अभियंता लोनिवि व सिंचाई विभाग तथा  आईआईटी रूडकी को भी जोड़ दिया है । मामले की अगली सुनवाई के‌ लिए 27 अक्टूबर को होगी। 
मामले के अनुसार उच्च न्यायालय के अधिवक्ता व पूर्व बार अध्यक्ष सैय्यद नदीम खुर्शीद ने उच्च न्यायालय में जनहित याचिका दायर कर कहा था कि बलियानाला में वर्ष 1973 से और इधर विगत सप्ताह से भूस्खलन हो रहा है। इसके लिए सरकार से समय-समय पर वित्तीय सहायता भी मिलती रही है। लेकिन प्रशासन की ओर से विशेषज्ञों के सुझाव के आधार पर कार्य नहीं किया गया है। जिस कारण से नैनीताल नगर को खतरा उत्पन्न हो रहा है। 

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-की पहले एसआईटी और आगे सीबीआई जांच की मांग -कार्यदायी संस्था सिंचाई विभाग को सुधार कार्यों में पूरी तरह फेल बताकर हटाने और विशेषज्ञ संस्था के कार्य कराने की भी उठायी मांग -कहा बलियानाला नैनीताल का आधार, जनता को साथ लेकर इस मामले को जनांदोलन बनाएंगे

बैठक-पत्रकार वार्ता में मौजूद आम आदमी पार्टी के पदाधिकारी एवं कार्यकर्ता।

नैनीताल, 25 सितंबर 2018। आम आदमी पार्टी ने नगर के बलियानाला क्षेत्र में हो रहे भूस्खलन पर कड़ी चिंता जताते हुए इसके निर्माण कार्यों को तत्काल विशेषज्ञ संस्था से कराने की मांग की है। साथ ही अब तक सुधार कर रहे सिंचाई विभाग को इस बड़े कार्य के लिए पूरी तरह अनुपयुक्त बताते हुए उसे हटाने और यहां अब तक हुए करोड़ों रुपए के सुधार कार्यों की पहले एसआईटी से जांच कराने एवं जांच में गड़बड़ी पाये जाने पर सीबीआई जांच कराने की मांग की है। साथ ही बलियानाला का नगर का आधार बताते हुए इस मामले में जनता को साथ लेकर जनांदोलन चलाने का इरादा भी जाहिर किया है। मंगलवार को नगर के माल रोड स्थित पैलेस होटल में आयोजित पार्टी कार्यकर्ताओं की बैठक एवं इसके उपरांत पत्रकार वार्ता में पार्टी जिलाध्यक्ष प्रदीप दुम्का ने कहा कि पार्टी जनों ने क्षेत्र का दौरा किया है। बलियानाला में स्थिति बेहद भयावह है। इससे नगर के हरिनगर वार्ड की करीब 3-4 हजार की आबादी एवं आगे हल्द्वानी एनएच पर खतरा उत्पन्न हो गया है। इसलिये युद्ध स्तर पर तत्काल ही इस क्षेत्र में सुधार के कार्य विशेषज्ञ संस्था से कराये जाने की जरूरत है। नगर अध्यक्ष देवेंद्र लाल ने कहा कि छोटी गूलों एवं नहरों के निर्माण की विशेषज्ञता रखने वाला सिंचाई विभाग करोड़ों रुपए खर्च कर यहां भूस्खलन रोकने में जिस तरह पूरी तरह फेल रहा है, इससे साबित हो गया है कि वह इस कार्य हेतु योग्य ही नहीं है। इसके साथ ही उन्होंने प्रशासन से प्रभावित परिवारों के लिए जीआईसी-जीजीआईसी आदि में जीवन योग्य बिजली, पानी व शौचालय के साथ ही भोजन की व्यवस्था करने की भी मांग की। पार्टी नेता डीएस बिष्ट व राजनारायण आदि ने भी विचार रखे एवं इस मामले में जनांदोलन चलाने की बात कही। इस मौके पर पार्टी के शाकिर अली, महेश आर्य सहित अनेक अन्य कार्यकर्ता भी मौजूद रहे।

क्या डीएम ने हाईकोर्ट से त्वरित सुनवाई की मांग की ? नैनीताल। आप जिलाध्यक्ष प्रदीप दुम्का ने कहा कि डीएम ऐसी स्थितियों में भी हाईकोर्ट के आदेशों का हवाला देते हुए लोगों को दुर्गापुर में बने आवासों में पुर्नवासित नहीं कर रहे हैं। इस संबंध में उनका क्षेत्रीय विधायक से भी विवाद हुआ। इस पर उन्होंने पूछा कि क्या डीएम ऐसी आपात स्थितियां आने का हवाला देते हुए इस विषय में उच्च न्यायालय से जल्दी सुनवाई करने का अनुरोध किया।

हरिनगर क्षेत्र में भूस्खलन की जद में आये परिवारों के सदस्य।

बलियानाला में फिर दो बड़े भूस्खलन, हरिनगर इलाके से सात परिवार विस्थापित

हरिनगर क्षेत्र में बड़े नाले के पास करीब 40 फिट की विशाल चट्टान बलियानाला में ढही

नैनीताल, 24 सितंबर 2018। बीते तीन दिनों से लगातार हो रही बारिश से नैनीताल के आधार बलियानाला क्षेत्र में सोमवार को फिर दो बड़े भूस्खलन हुआ है। सोमवार सुबह करीब साढ़े आठ बजे बलियानाला से लगे हरिनगर इलाके में नाले के पास करीब 40 फिट के आकार की बड़ी चट्टान ढह गयी, वहीं रईस होटल क्षेत्र में कृष्णापुर जाने वाले मार्ग पर बची पटाल के नीचे का हिस्सा भी बलियानाला में समा गया है। इससे यह पैदल मार्ग पूरी तरह से अवरुद्ध हो गया है। वहीं हरिनगर में 17 बेहद गरीब परिवार भी खतरे की जद में आ गए हैं। इनमें से जिला प्रशासन के द्वारा सात परिवारों को जीजीआईसी में विस्थापित किये जाने की बात कही गयी है। विस्थापित किये गये लोगों में पेंटिंग का काम कर गुजारा करने वाले ललित प्रसाद ने घर में बड़ी दरारें आने के बाद सामान हटाना शुरू कर दिया है, लेकिन उसे कहीं कमरा नहीं मिल रहा है। उसका कहना है कि वह दुर्गापुर में बने आवासों के लिये भी चयनित है, बावजूद उसे आवास नहीं मिला है। साथ ही उसके भाई अमित प्रसाद, पूरन राम, सुरेश लाल, प्रताप राम, छोटे लाल, बच्ची राम आर्य व बाबू लाल सहित 17 परिवार भी स्वयं को भूस्खलन की जद में बता रहे हैं। राजस्व उप निरीक्षक अमित साह ने बताया कि सात परिवारों को जीजीआईसी में विस्थापित कर दिया गया है।

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-राज्य के वन विभाग के साथ कार्य कर रहे जायका से संबंधित हैं दोनों जापानी विशेषज्ञ, डीएम के अनुरोध पर पहुंचे

जिले के अधिकारियों के साथ बलियानाला के भूस्खलन प्रभावित क्षेत्र का निरीक्षण करते जापानी विशेषज्ञ।
बलियानाला के भूस्खलन प्रभावित क्षेत्र का निरीक्षण करते जापानी विशेषज्ञ।

नैनीताल, 13 सितंबर 2018। जी हां, विश्व प्रसिद्ध सरोवर नगरी नैनीताल के आधार बलियानाला में हुए अब तक के सबसे बड़े भूस्खलन का ट्रीटमेंट जापानी तकनीक से किया जा सकता है। डीएम विनोद कुमार सुमन के आमंत्रण पर क्षेत्र में हुए भूस्खलन के अध्ययन के लिए जापानी विशेषज्ञ हारा व मात्सुनामी बृहस्पतिवार को क्षेत्र में पहुंचे, और और अधिकारियों के साथ मौका मुआयना कर फोटो लेकर एवं अवलोकन करके अध्ययन किया। उन्हें लेकर पहुंचे वन विभाग के यूएफआरएमपी यानी उत्तराखंड फॉरेस्ट मैनेजमेंट प्रोजेक्ट की टीसीपी यानी टेक्निकल को-ऑपरेशन प्रोजेक्ट के मुख्य अभियंता जय कुमार शर्मा ने बताया कि जापानी विशेषज्ञ जायका यानी जापान इंटरनेशनल को-ऑपरेशन एजेंसी के जरिये यहां आये हैं। जायका वन विभाग के साथ मिलकर उत्तराखंड में ऋषिकेश के पास रामझूला से आगे निरगाड़ एवं नैनीताल जिले में अल्मोड़ा राष्ट्रीय राजमार्ग पर पाडली के पास हो रहे भूस्खलन को रोकने का कार्य पहले से कर रही है। बलियानाला में करीब 70 अंश के ढाल पर भूस्खलन हो रहा है, साथ ही इसका विस्तार बहुत अधिक है। जापानी विशेषज्ञ शुक्रवार तक डीएम को अपनी प्रारंभिक सुझावात्मक रिपोर्ट दे सकते है। इस मौके पर एडीएम हरबीर सिंह व बीएल फिरमाल, सिचाई विभाग के ईई हरीश चंद्र सिंह, जगराज सिंह सहित अन्य अभियंता साथ रहे।

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-अपनी ही सरकार के खिलाफ धरने पर बैठे विधायक, विस्थापित किये गये 17 परिवार -5 परिवार जूनियर हाईस्कूल व 6 राइंका में विस्थापित किये, 6 अपने रिश्तेदारों के पास चले गये

नैनीताल, 10 सितंबर 2018। विश्व प्रसिद्ध सरोवरनगरी नैनीताल के आधार बलियानाला में बीते काफी दिनों से बरसात के मौसम में चल रहे भूस्खलन की परिणति सोमवार को अब तक के सबसे बड़े भूस्खलन के रूप में हो गयी। शहीद मेजर राजेश अधिकारी राजकीय इंटर कॉलेज के मैदान के पास रईश होटल क्षेत्र में पूर्व में देवी मंदिर वाला पहाड़ का विशाल टीला सुबह करीब सात बजे बलियानाला में ढह कर चला गया। इससे क्षेत्र में हड़कंप मच गया। भूस्खलन की जद में आये 17 परिवारों ने खुद ही अपने घरों का सामान बाहर सड़क पर निकाल दिया। और पुर्नवास की मांग करने लगे।

प्रभावितों के दुर्गापुर में विस्थापन की मांग पर अपनी ही सरकार के खिलाफ धरने पर बैठे विधायक एवं भाजपायी।

इस पर स्थानीय विधायक संजीव आर्य भी भाजपा कार्यकर्ताओं के साथ करीब साढ़े आठ बजे मौके पर पहुंच गये और उन्होंने डीएम विनोद कुमार सुमन से बात करके प्रभावित परिवारों को अस्थायी तौर पर दुर्गापुर में जेएलएनयूआरएम से बने व खाली पड़े आवासों में विस्थापित करने को कहा, लेकिन डीएम ने इससे इंकार कर दिया। इस पर गुस्साये विधायक भाजपा कार्यकर्ताओं के साथ अपनी ही सरकार के खिलाफ मौके पर ही धरने पर बैठ गये। इसकी जानकारी लगने पर डीएम भी मौके पर पहुंचे, और विधायक व डीएम में वार्ता के कई दौर चले, लेकिन बात नहीं बनी। प्रदर्शन में भाजपा नगर अध्यक्ष मनोज जोशी, भाजयुमो जिलाध्यक्ष नितिन कार्की, अरविंद पडियार, बिमला अधिकारी, हरीश भट्ट, भानु पंत, कुंदन बिष्ट, राकेश कुमार, दयाकिशन पोखरिया, नीरज जोशी, पूर्व सभासद डीएन भट्ट, राजेंद्र परगाई व आनंद बिष्ट तथा प्रशासन की ओर से संयुक्त मजिस्ट्रेट अभिषेक रुहेला, एएसपी विजय थापा, तल्लीताल थाना प्रभारी राहुल राठी सहित अनेक लोग मौजूद रहे।

विधायक को समझाने पहुंचे डीएम विनोद कुमार सुमन।

डीएम हुए आक्रोश का शिकार, ईओ की अनुपस्थिति पर ही रहा गुस्सा

नैनीताल। मौके पर डीएम विनोद कुमार सुमन को भाजपा नगर अध्यक्ष मनोज जोशी सहित प्रभावित लोगों के आक्रोश का सामना भी करना पड़ा। लोगों ने मौके पर नगर पालिका के अधिशासी अधिकारी के मौजूद न रहने पर भी कड़ी नाराजगी व्यक्त की। वहीं सिचाई विभाग के अभियंता नाबार्ड के माध्यम से करीब 41 करोड़ से बलियानाला को चैनलाइज करने के कार्य में पूरा धन खर्च होने के बारे में गलत सूचना देते देखे गये। आखिर विधायक के बात करने पर उन्हें मानना पड़ा कि अभी करीब 20 करोड़ रुपए बचे हुए हैं। विधायक ने इस बात पर भी नाराजगी जतायी कि इतनी बची धनराशि से अब तक बचे क्षेत्र को बचाने के लिए पिछले 6 माह से कहने के बावजूद कोई कार्य नहीं किये गये।

विस्थापितों को रूसी बाइपास पर प्रस्तावित आवास योजना में जोड़ा जाएगा नैनीताल। आखिर अपराह्न करीब डेढ़ बजे एडीएम हरबीर सिंह ने विधायक से बात कर प्रभावितों को अगली किसी भी व्यवस्था तक के लिए फिलहाल राइंका व जूनियर हाईस्कूल में रखने तथा बाद में उन्हें पुर्नवास के लिए ‘उत्तराखंड हाउसिंग एंड अर्बन डेवलपमेंट एजेंसी’ के द्वारा नगर के सात नंबर व सूखाताल के 361 परिवारों के लिए सहित कुल 450 परिवारों के लिए रूसी बाईपास में 5.7 एकड़ भूमि पर बनने वाली आवासीय योजना में शामिल करने का आश्वासन दिया। इसके बाद तीन घंटे चला धरना समाप्त हुआ। इसके साथ ही स्थानीय लोगों के दुर्गापुर में कई अपात्रों को आवास मिलने एवं पात्रों के छूट जाने की शिकायत की जांच करने एवं विस्थापन पर बात करने के लिए आगामी 14 अक्टूबर की अपराह्न जिला विकास प्राधिकरण में क्षेत्रीय लोगों के प्रतिनिधिमंडल के साथ जिला प्रशासन व विधायक की बैठक करना भी तय हुआ।

11 परिवार राइंका व जूनियर हाईस्कूल में किये गये शिफ्ट

नैनीताल। शाम को क्षेत्रीय राजस्व उप निरीक्षक अमित साह ने बताया कि खतरे की जद में आये 6 परिवारों को शहीद मेजर राजेश अधिकारी राजकीय इंटर कॉलेज एवं 5 परिवारों को शहीद मेजर राजेश अधिकारी जूनियर हाईस्कूल में शिफ्ट कर दिया गया है, जबकि 6 परिवार स्वेच्छा से अपने रिश्तेदारों के पास चले गये हैं।

क्षेत्र में फूटा है पानी का विशाल जल स्रोत

नैनीताल। बलियानाला क्षेत्र में जहां आज बड़ा भूस्खलन हुआ वहां पानी का बड़ा जल स्रोत भी फूट गया है। यह जल स्रोत भूस्खलन का प्रमुख कारण भी माना जा रहा है। लोग इसे नैनी झील से हो रहे जल का रिसाव भी मान रहे हैं। इसके द्वारा आगे भी जमीन को अंदर से खोखला करते जाने की संभावना है। उल्लेखनीय है कि इसके अलावा भी इस क्षेत्र के सक्रिय एमबीटी यानी मेन बाउंड्री थ्रस्ट की जद में होने और पहाड़ का कोण 90 फीसद के करीब होने के कारण भी भूस्खलन लगातार जारी है।

कांग्रेस न नैनीताल बंद करा पाये, न अपने समर्थकों के समर्थन में ही आ पाये, भाजपा ने झटका मुद्दा

नैनीताल। कांग्रेस का भारत बंद मुख्यालय में पूरी तरह बेअसर रहा। ऐसे में कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने महिला कांग्रेस की प्रदेश अध्यक्ष सरिता आर्य की अगुवाई में तल्लीताल क्रांति चौक में दो दिन पूर्व के विरोध प्रदर्शन के लिये तैयार महंगाई विरोधी पोस्टरों को हाथों में लेकर विरोध की औपचारिकता निभाई। यहां तक कि कांग्रेस विरोध को समर्थन दे रहे सपा, बसपा व उक्रांद आदि दलों के कार्यकर्ताओं को भी साथ नहीं ले पायी। सपा कार्यकर्ताओं ने पृथक से केंद्र सरकार का पुतला फूंका, लेकिन वे कांग्रेस के बैनर तले नहीं आये। तल्लीताल, मल्लीताल व्यापार मंडल ने भी कांग्रेस के आह्वान पर बंद का समर्थन नहीं किया। यहां तक कि कांग्रेस से जुड़े पदाधिकारियों-कार्यकर्ताओं के प्रतिष्ठान भी पूरे दिन खुले रहे। यही नहीं, कांग्रेस ने इस दौरान रईश होटल-हरिनगर क्षेत्र में हुए बड़े भूस्खलन के मुद्दे पर अपने वोट बैंक माने जाने वाले लोगों के समर्थन में खड़े होने का अवसर भी खो दिया। उनकी जगह भाजपा विधायक व भाजपाई स्थानीय लोगों के समर्थन में बैठे। विरोध प्रदर्शन में कांग्रेस नगर अध्यक्ष मारुति नंदन साह, रईश भाई, मुकेश जोशी, कैलाश मिश्रा, कैलाश अधिकारी, पवन जाटव, महेश पवार, कृष्ण कौशल साह आदि प्रमुख रूप से मौजूद रहे।

बलियानाला क्षेत्र में हुआ भूस्खलन।

नैनीताल, 9 सितंबर 2018। विश्व प्रसिद्ध सरोवरनगरी नैनीताल के आधार बलियानाला में बीते काफी दिनों से बरसात के मौसम में भूस्खलन का सिलसिला जारी है। क्षेत्र में पानी के बड़े जल स्रोत भी फूट गये हैं। इससे रईश होटल व हरिनगर क्षेत्र में करीब 30-40 फिट तक भूमि नाले में समा गयी है, तथा क्षेत्र के घर झुक गये हैं। ऐसे में रईश होटल क्षेत्र के 12 व हरिनगर के 12 परिवार विस्थापन की जद में आ गये हैं। राजस्व उप निरीक्षक अमित साह ने बताया कि इन 24 परिवारों को दुर्गापुर में बने आवासों में नियमानुसार विस्थापित किये जाने की संस्तुति डीएम से कर दी गयी है। साथ ही लोगों से घरों को खाली करने को नोटिस दे दिये गये है। उल्लेखनीय है कि इस क्षेत्र में उत्तराखंड बनने के बाद ही 2005 में स्वीकृत 15.52 करोड़ रुपए के कार्य हुए हैं, जोकि भूस्खलन को रोकने में पूरी तरह से निष्प्र्रभावी तो साबित हुए ही हैं, इन कार्यों का कहीं नामोनिशान भी नहीं दिखाई देता है। विदित हो कि इस क्षेत्र में भूस्खलनों को 1898 से एक सदी से भी अधिक लंबा इतिहास रहा है, जब यहां 28 लोगों ने अपनी जान गंवाई थी। इसके अलावा भी यहां 1935 व 1972, 2004 व 2014 में भी बड़े भूस्खलन हुए थे, जबकि इधर बीते एक दशक में हर वर्ष भूस्खलन हो रहे हैं। भूस्खलन ने स्थानीय जीआईसी के मैदान को भी अपनी जद में ले लिया है। इसका कारण इस क्षेत्र का एमबीटी सहित कई भूगर्भीय भ्रंशों के प्रभाव में होना बताया जाता है।

टीएचडीसी से मांगे हैं सुझाव नैनीताल। सिचाई विभाग के अधिशासी अभियंता हरीश चंद्र सिंह ने बताया कि बलियानाला के कारण हो रहे भूस्खलन को रोकने के लिए टीएचडीसी से सुझाव मांगे गये हैं। इस हेतु टीएचडीसी को प्रस्ताव भेजा गया है। टीएचडीसी के सुझावों पर ही नैनीताल राजभवन के पीछे निहाल नाला की ओर से हो रहे भूस्खलन को रोकने के लिये कार्य किये गये हैं। इसके अलावा उन्होंने बताया कि 44.25 करोड़ रुपए की लागत ने बलियानाला को चैनलाइज करने के कार्य इसके आधार में किये जा रहे थे, जो कि वर्तमान बारिश के मौसम में बंद हैं।

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-1934-35, 1972 व 2004 में भी हुए बड़े भूस्खलन -अंग्रेजों के दौर के हुए बचाव कार्य अभी भी सुरक्षित, पर हालिया 2005 के कार्य पूरी तरह क्षतिग्रस्त

(17 अगस्त 1898 को बलियानाला क्षेत्र में हुए भूस्खलन की दुर्लभ तस्वीर)

नवीन जोशी, नैनीताल। बलियानाला भूगर्भीय संवेदनशीलता के दृष्टिकोण से जोन-4 के शहर नैनीताल का आधार है। जिस तरह नैनीताल का 1841 में बसासत के बाद से ही भूस्खलनों के साथ मानो चोली-दामन का साथ रहा है, तथा यहां 1866 व 1879 में आल्मा पहाड़ी में बड़े भूस्खलनों से इनकी आहट शुरू हुई और 18 सितंबर 1880 को वर्तमान रोपवे के पास आए महाविनाशकारी भूस्खलन ने उस दौर के केवल ढाई हजार की जनसंख्या वाले नगर में 108 भारतीयों व 41 ब्रितानी नागरिकों सहित 151 लोगों को जिंदा दफन कर दिया था। वहीं 17 अगस्त 1898 को बलियानाला क्षेत्र में आया भूस्खलन नगर के भूस्खलनों से संबंधित इतिहास की दूसरी सबसे बड़ी दुर्घटना है। इस दुर्घटना में 27 भारतीयों व एक अंग्रेज सहित कुल 28 लोग मारे गए थे। इधर बलियानाला में 12 सितंबर 2017 को हुए ताजा भूस्खलन के बाद यहां पूर्व में हुए और कमोबेश हर वर्ष होने वाले भूस्खलनों की कड़वी यादें फिर हरी हो गयी हैं।

तत्कालीन हिल साइड सेफ्टी कमेटी की रिपोर्ट के आधार पर इतिहासकार प्रो. अजय रावत ने बताया कि 1898 के भूस्खलन घटना की पृष्ठभूमि में नौ अगस्त से 17 अगस्त तक नगर में हुई 91 सेमी बारिश कारण बनी थी। बारिश का बड़ी मात्रा में पानी यहां की चट्टानों में फंस गया था। आज भी इस क्षेत्र में भारी बसासत और नैनी झील के पानी के किसी न किसी रूप में रिसकर यहां जलश्रोत फूटने के रूप् में जारी है, जिसकी पुष्टि यहां खुले अनेक बड़े जल श्रोतों से होती है। 1898 के अलावा भी बलियानाला क्षेत्र में 1935 तथा 1972 में बड़े भूस्खलन हुए, तथा इनके अलावा भी यह क्षेत्र लगातार बिना रुके धंसता ही जा रहा है। जीआईसी के मैदान और कमोबेश हल्द्वानी राष्ट्रीय राजमार्ग तक भी इसके संकेत देखे जा सकते हैं। आगे 1972 का भूस्खलन वर्तमान हरिनगर के बाल्मीकि मंदिर के पास आया था। स्थानीय सभासद डीएन भट्ट बताते हैं कि इस घटना के बाद यूपी के तत्कालीन वित्त मंत्री नारायण दत्त तिवारी ने सुधार कार्यों के लिए 95 लाख रुपए स्वीकृत किए थे, तथा पूरे क्षेत्र को ‘स्लिप जोन’ घोषित कर दिया था। इस घटना के बाद गठित हुई ‘हाई लेवल एक्सपर्ट कमेटी’ ने बलियानाला को चैनल नंबर एक से दुर्गापुर-बीरभट्टी तक आरसीसी का आधार बनाकर इसे चैनल के रूप में विकसित करने की संस्तुति की थी। किंतु काम न होने से पैंसा आकर लैप्स हो गया। बाद में उत्तराखंड बनने से पूर्व यूपी सरकार ने लागत बढ़ने के बाद 26-27 करोड़ के प्रस्ताव के सापेक्ष करीब 15 करोड़ रुपए स्वीकृत कर कार्य करवाए जो ध्वस्त हो चुके हैं। इधर 2004 में पुनः यहां बड़ा भूस्खलन हुआ तथा छोटे-बड़े अनेक भूस्खलन होते रहे। इसके बाद 2005 में बलियानाले में दो ‘बेड-बार’ व अन्य सुधारात्मक कार्यों के लिए 15 करोड़ रुपए अवमुक्त हुए। यह कार्य सिंचाई विभाग के द्वारा किए गए, और भ्रष्टाचार को लेकर इन कार्यों की अब तक ठंडे बस्ते में पड़ी उच्च स्तरीय जांच भी हुई। अब मौजूदा हालात यह हैं कि अंग्रेजी दौर के बने ‘बेड-बार’ आज भी सुरक्षित हैं, जबकि बाद में बने 8 ‘बेड-बार’ व अन्य सुधानात्मक कार्यों के कहीं निशान ढूंढना भी मुश्किल है।

एमबीटी सहित कई भूगर्भीय भ्रंश बनाते हैं नैनीताल को खतरनाक

नैनीताल। नैनीताल के भूगर्भीय दृष्टिकोण से बेहद कमजोर होने के पीछे हिमालयी क्षेत्र के सबसे बड़े मेन बाउंड्री थ्रस्ट यानी एमबीटी सहित कई भ्रंश भूमिका निभाते हैं। एमबीटी नैनीताल के पास ही बल्दियाखान, ज्योलीकोट के पास नैनीताल के आधार बलियानाले से होता हुआ अमृतपुर की ओर गुजरता है। वहीं नैनीताल लेक थ्रस्ट सत्यनारायण मंदिर, सूखाताल से होता हुआ और नैनी झील के बीचों-बीच से गुजरकर शहर को दो भागों में बांटते हुए गुजरने वाला नैनीताल लेक थ्रस्ट तल्लीताल डांठ से ठीक बलियानाले से गुजरता है। यूजीसी के वैज्ञानिक डा.बहादुर सिंह कोटलिया के अनुसार यह थ्रस्ट इतना अधिक सक्रिय है कि ज्योलीकोट के पास एमबीटी को काटते हुए उसे भी प्रभावित करता है। इसके अलावा एक छोटा मनोरा थ्रस्ट भी बलियानाला की संवेदनशीलता को बढ़ाता है।

तब पैदल चलने की भी थी मनाही, अब धड़धड़ाते हैं वाहन

नैनीताल। 10 सितंबर 2014 को हुए भूस्खलन से यहां जीआईसी से ब्रेवरी को जाने वाला सीसी पैदल मार्ग ध्वस्त हो गया था। इस कारण तब से चार पहिया वाहनों के लिये तो यह मार्ग बंद हो चुका है, किंतु अभी भी ज्योलीकोट-हल्द्वानी जाने के लिए दो पहिया वाहनों के लिए अवैधानिक तरीके से ‘बाई-पास’ के रूप में धड़ल्ले से इस्तेमाल हो रहा है। इतिहासकार प्रो. अजय रावत बताते हैं कि 1898 के भूस्खलन के बाद अंग्रेजों ने इस क्षेत्र में भूक्षरण रोकने वाली बड़ी मात्रा में घास और जंगल में पेड़ों की सघनता बढ़ाई गई थी। साथ ही लोगों की पैदल आवाजाही भी प्रतिबंधित कर दी थी। वर्ष 1900 के दौर में एक फारेस्ट गार्ड ने ज्योलीकोट से जल्दी पहुंचने पर शाबासी मिलने की चाह में अपने अधिकारी अंग्रेज डीएफओ को इस रास्ते से आने की जानकारी दी। इस पर डीएफओ ने उस पर उल्टे पांच रुपए का जुर्माना ठोंक दिया था।

नगर का शुरुआती होटल था रईश होटल

नैनीताल। रईश होटल क्षेत्र में वास्तव में नगर का शुरुआती दौर का वर्तमान जीआईसी मैदान के पास चार मंजिलों वाले तीन भवनों का रईश होटल स्थित था। बाद के दौर में यहां लोगों ने कब्जे कर लिए। क्षेत्र के विमल जोशी व जसोेदा बिष्ट ने बताया कि 1981 तक होटल बेहद जीर्ण-शीर्ण हो गया था। 81 में एक इसका एक भवन गिर पड़ा, जबकि 97 में शेष को जर्जर होने की वज से तोड़ डाला गया। भवन में 15-20 परिवार काबिज थे, जिनमें से कुछ ने बाद में पास की खाली जमीन पर कब्जा कर लिया, और कुछ अपने कब्जों को किराए पर लगाकर अन्यत्र चले गए। लेकिन बाद में इस बेहद खतरनाक व हर दम जान हथेली पर रखने जैसी जगह पर भी लगातार लोग आते और बसते चले गए। आरोप है कि यही लोग अब अपना यहां अपना हक जता रहे हैं, जबकि मूल वासिंदों का कोई सुधलेवा नहीं है।

बलियानाले को चैनलाइज करने के लिए 44.25 करोड़ का प्रस्ताव

नैनीताल। डीएम दीपक रावत ने मंगलवार (06.01.2015) को नगर के आधार बलियानाला से विगत वर्ष 10 सितम्बर को भीषण भूस्खलन से तबाह हुए रईश होटल व जेएनएनयूआरएम योजना के अन्तर्गत दुर्गापुर में बन रहे आवासों का निरीक्षण किया। इस दौरान सहायक अभियंता सिंचाई एनसी पंत ने बताया कि बलियानाले को चैनलाइज करने के लिए 44.25 करोड़ का प्रस्ताव शासन को भेजा गया है। डीएम रावत ने दुर्गापुर में बने आवासीय भवनों का निरीक्षण करते हुए वहां रह रहे लोगों से भी बात की। निर्माण संस्था लोनिवि के ईई जितेंद्र त्रिपाठी ने बताया कि योजना के अन्तर्गत 9.28 करोड़ की लागत से 200 आवास बनाये जाने थे जिसमें से 60 आवास पूर्ण कर 60 परिवारों को विस्थापित किया जा चुका है। अगले 60 आवास आगामी फरवरी तक तथा शेष 40 आवास जून तक पूर्ण कर लिए जाएंगे, जबकिक अंतिम 40 आवासों का कार्य अभी शुरू नहीं हो पाया है। डीएम ने 15 दिनों में इनका निर्माण शुरू कराने के निर्देश दिए।

भारी बारिश से नैनीताल में सनवाल स्कूल, भीमताल में थाने की दीवार ढही, वाहन दबे

सवाल स्कूल की टैक्सी सहित गिरी दिवार, ऊपर गिरने से बची यूटिलिटी।

नैनीताल, 29 अगस्त 2018। नैनीताल व निकटवर्ती पर्वतीय क्षेत्रों सहित पूरे जनपद में मंगलवार का दिन सूखा रहने के बाद रात्रि में भारी बारिश हुई। आपदा कंट्रोल रूम से प्राप्त जानकारी के अनुसार मुख्यालय में 80.4, जबकि हल्द्वानी में 89, कोश्यां कुटौली में 35, मुक्तेश्वर में 33, कालाढुंगी में 30, रामनगर में 27, बेतालघाट में 22 सहित जिले में औसतन 41.04 मिमी बारिश रिकार्ड की गयी है। बारिश की वजह से बुधवार सुबह तड़के मल्लीताल स्थित सनवाल स्कूल के पीछे के मैदान की दीवार वहां ‘नो पार्किंग’ में खड़ी पॉपुलर कंपाउंड निवासी अजमुद्दीन पुत्र कमरुद्दीन की मारुति अल्टो 800 टैक्सी संख्या यूके04टीए-7293 के साथ स्कूल भवन पर गिर गयी। हादसा सुबह चार बजे के बाद हुआ बताया गया है। इससे स्कूल के कक्षा कक्षों का भवन को नुकसान पहुंचा है। भवन की दीवारें क्षतिगस्त होने के साथ ही टिन की छत भी छतिग्रस्त हो गयी है। इस वाहन के करीब सटकर एक अन्य यूटिलिटी वाहन भी खड़ा था। गनीमत रही कि वह गिरने से बच गया। हादसा दिन के वक्त नहीं हुआ, अन्यथा कक्षाओं में बच्चों के साथ कोई हादसा हो सकता था। हादसे की सूचना मिलने के बाद स्कूल में छुट्टी घोषित कर दी गयी।

भीमताल थाने की हल्द्वानी रोड पर गिरी दिवार

उधर भीमताल में भीमताल थाने की सुरक्षा दीवार सुबह तड़के करीब साढ़े तीन बजे हल्द्वानी रोड पर गिर गयी, इससे थाने के बाहर सीजन कर खड़े किये कई दोपहिया वाहन भी क्षतिग्रस्त हो गये। वहीं लगातार हो रही बारिश से थाने का भवन भी भूस्खलन की चपेट में बताया जा रहा है। भवन का निचला हिस्सा कमजोर हो रहा है, और थाने में कार्यरत पुलिसकर्मी डर के साए में काम करने को मजबूर हो गये हैं। वहीं मलबा आने से कुछ देर के लिए हल्द्वानी रोड पर यातायात भी अवरुद्ध हो गया था। बाद में पुलिस कर्मियों ने ही जेसीबी मशीन बुलाकर सड़क को वाहनों के चलने के लिए खुलवाया, साथ ही पहाड़ से आने वाले वाहनों को भीमताल बाईपास के रास्ते भेजा जा रहा है। बारिश से जिले की 10 ग्रामीण सड़कें भी बंद हो गयी हैं।

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