जापानी तकनीक से होगा नैनीताल के आधार बलियानाला में हुए अब तक के सबसे बड़े भूस्खलन का ट्रीटमेंट

-राज्य के वन विभाग के साथ कार्य कर रहे जायका से संबंधित हैं दोनों जापानी विशेषज्ञ, डीएम के अनुरोध पर पहुंचे

जिले के अधिकारियों के साथ बलियानाला के भूस्खलन प्रभावित क्षेत्र का निरीक्षण करते जापानी विशेषज्ञ।
बलियानाला के भूस्खलन प्रभावित क्षेत्र का निरीक्षण करते जापानी विशेषज्ञ।

नैनीताल, 13 सितंबर 2018। जी हां, विश्व प्रसिद्ध सरोवर नगरी नैनीताल के आधार बलियानाला में हुए अब तक के सबसे बड़े भूस्खलन का ट्रीटमेंट जापानी तकनीक से किया जा सकता है। डीएम विनोद कुमार सुमन के आमंत्रण पर क्षेत्र में हुए भूस्खलन के अध्ययन के लिए जापानी विशेषज्ञ हारा व मात्सुनामी बृहस्पतिवार को क्षेत्र में पहुंचे, और और अधिकारियों के साथ मौका मुआयना कर फोटो लेकर एवं अवलोकन करके अध्ययन किया।
उन्हें लेकर पहुंचे वन विभाग के यूएफआरएमपी यानी उत्तराखंड फॉरेस्ट मैनेजमेंट प्रोजेक्ट की टीसीपी यानी टेक्निकल को-ऑपरेशन प्रोजेक्ट के मुख्य अभियंता जय कुमार शर्मा ने बताया कि जापानी विशेषज्ञ जायका यानी जापान इंटरनेशनल को-ऑपरेशन एजेंसी के जरिये यहां आये हैं। जायका वन विभाग के साथ मिलकर उत्तराखंड में ऋषिकेश के पास रामझूला से आगे निरगाड़ एवं नैनीताल जिले में अल्मोड़ा राष्ट्रीय राजमार्ग पर पाडली के पास हो रहे भूस्खलन को रोकने का कार्य पहले से कर रही है। बलियानाला में करीब 70 अंश के ढाल पर भूस्खलन हो रहा है, साथ ही इसका विस्तार बहुत अधिक है। जापानी विशेषज्ञ शुक्रवार तक डीएम को अपनी प्रारंभिक सुझावात्मक रिपोर्ट दे सकते है। इस मौके पर एडीएम हरबीर सिंह व बीएल फिरमाल, सिचाई विभाग के ईई हरीश चंद्र सिंह, जगराज सिंह सहित अन्य अभियंता साथ रहे।

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-अपनी ही सरकार के खिलाफ धरने पर बैठे विधायक, विस्थापित किये गये 17 परिवार
-5 परिवार जूनियर हाईस्कूल व 6 राइंका में विस्थापित किये, 6 अपने रिश्तेदारों के पास चले गये
नैनीताल, 10 सितंबर 2018। विश्व प्रसिद्ध सरोवरनगरी नैनीताल के आधार बलियानाला में बीते काफी दिनों से बरसात के मौसम में चल रहे भूस्खलन की परिणति सोमवार को अब तक के सबसे बड़े भूस्खलन के रूप में हो गयी। शहीद मेजर राजेश अधिकारी राजकीय इंटर कॉलेज के मैदान के पास रईश होटल क्षेत्र में पूर्व में देवी मंदिर वाला पहाड़ का विशाल टीला सुबह करीब सात बजे बलियानाला में ढह कर चला गया। इससे क्षेत्र में हड़कंप मच गया। भूस्खलन की जद में आये 17 परिवारों ने खुद ही अपने घरों का सामान बाहर सड़क पर निकाल दिया। और पुर्नवास की मांग करने लगे।

प्रभावितों के दुर्गापुर में विस्थापन की मांग पर अपनी ही सरकार के खिलाफ धरने पर बैठे विधायक एवं भाजपायी।

इस पर स्थानीय विधायक संजीव आर्य भी भाजपा कार्यकर्ताओं के साथ करीब साढ़े आठ बजे मौके पर पहुंच गये और उन्होंने डीएम विनोद कुमार सुमन से बात करके प्रभावित परिवारों को अस्थायी तौर पर दुर्गापुर में जेएलएनयूआरएम से बने व खाली पड़े आवासों में विस्थापित करने को कहा, लेकिन डीएम ने इससे इंकार कर दिया। इस पर गुस्साये विधायक भाजपा कार्यकर्ताओं के साथ अपनी ही सरकार के खिलाफ मौके पर ही धरने पर बैठ गये। इसकी जानकारी लगने पर डीएम भी मौके पर पहुंचे, और विधायक व डीएम में वार्ता के कई दौर चले, लेकिन बात नहीं बनी। प्रदर्शन में भाजपा नगर अध्यक्ष मनोज जोशी, भाजयुमो जिलाध्यक्ष नितिन कार्की, अरविंद पडियार, बिमला अधिकारी, हरीश भट्ट, भानु पंत, कुंदन बिष्ट, राकेश कुमार, दयाकिशन पोखरिया, नीरज जोशी, पूर्व सभासद डीएन भट्ट, राजेंद्र परगाई व आनंद बिष्ट तथा प्रशासन की ओर से संयुक्त मजिस्ट्रेट अभिषेक रुहेला, एएसपी विजय थापा, तल्लीताल थाना प्रभारी राहुल राठी सहित अनेक लोग मौजूद रहे।

विधायक को समझाने पहुंचे डीएम विनोद कुमार सुमन।

डीएम हुए आक्रोश का शिकार, ईओ की अनुपस्थिति पर ही रहा गुस्सा
नैनीताल। मौके पर डीएम विनोद कुमार सुमन को भाजपा नगर अध्यक्ष मनोज जोशी सहित प्रभावित लोगों के आक्रोश का सामना भी करना पड़ा। लोगों ने मौके पर नगर पालिका के अधिशासी अधिकारी के मौजूद न रहने पर भी कड़ी नाराजगी व्यक्त की। वहीं सिचाई विभाग के अभियंता नाबार्ड के माध्यम से करीब 41 करोड़ से बलियानाला को चैनलाइज करने के कार्य में पूरा धन खर्च होने के बारे में गलत सूचना देते देखे गये। आखिर विधायक के बात करने पर उन्हें मानना पड़ा कि अभी करीब 20 करोड़ रुपए बचे हुए हैं। विधायक ने इस बात पर भी नाराजगी जतायी कि इतनी बची धनराशि से अब तक बचे क्षेत्र को बचाने के लिए पिछले 6 माह से कहने के बावजूद कोई कार्य नहीं किये गये।

विस्थापितों को रूसी बाइपास पर प्रस्तावित आवास योजना में जोड़ा जाएगा
नैनीताल। आखिर अपराह्न करीब डेढ़ बजे एडीएम हरबीर सिंह ने विधायक से बात कर प्रभावितों को अगली किसी भी व्यवस्था तक के लिए फिलहाल राइंका व जूनियर हाईस्कूल में रखने तथा बाद में उन्हें पुर्नवास के लिए ‘उत्तराखंड हाउसिंग एंड अर्बन डेवलपमेंट एजेंसी’ के द्वारा नगर के सात नंबर व सूखाताल के 361 परिवारों के लिए सहित कुल 450 परिवारों के लिए रूसी बाईपास में 5.7 एकड़ भूमि पर बनने वाली आवासीय योजना में शामिल करने का आश्वासन दिया। इसके बाद तीन घंटे चला धरना समाप्त हुआ। इसके साथ ही स्थानीय लोगों के दुर्गापुर में कई अपात्रों को आवास मिलने एवं पात्रों के छूट जाने की शिकायत की जांच करने एवं विस्थापन पर बात करने के लिए आगामी 14 अक्टूबर की अपराह्न जिला विकास प्राधिकरण में क्षेत्रीय लोगों के प्रतिनिधिमंडल के साथ जिला प्रशासन व विधायक की बैठक करना भी तय हुआ।

11 परिवार राइंका व जूनियर हाईस्कूल में किये गये शिफ्ट
नैनीताल। शाम को क्षेत्रीय राजस्व उप निरीक्षक अमित साह ने बताया कि खतरे की जद में आये 6 परिवारों को शहीद मेजर राजेश अधिकारी राजकीय इंटर कॉलेज एवं 5 परिवारों को शहीद मेजर राजेश अधिकारी जूनियर हाईस्कूल में शिफ्ट कर दिया गया है, जबकि 6 परिवार स्वेच्छा से अपने रिश्तेदारों के पास चले गये हैं।

क्षेत्र में फूटा है पानी का विशाल जल स्रोत
नैनीताल। बलियानाला क्षेत्र में जहां आज बड़ा भूस्खलन हुआ वहां पानी का बड़ा जल स्रोत भी फूट गया है,। यह जल स्रोत भूस्खलन का प्रमुख कारण भी माना जा रहा है। लोग इसे नैनी झील से हो रहे जल का रिसाव भी मान रहे हैं। इसके द्वारा आगे भी जमीन को अंदर से खोखला करते जाने की संभावना है। उल्लेखनीय है कि इसके अलावा भी इस क्षेत्र के सक्रिय एमबीटी यानी मेन बाउंड्री थ्रस्ट की जद में होने और पहाड़ का कोण 90 फीसद के करीब होने के कारण भी भूस्खलन लगातार जारी है।

कांग्रेस न नैनीताल बंद करा पाये, न अपने समर्थकों के समर्थन में ही आ पाये, भाजपा ने झटका मुद्दा

नैनीताल। कांग्रेस का भारत बंद मुख्यालय में पूरी तरह बेअसर रहा। ऐसे में कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने महिला कांग्रेस की प्रदेश अध्यक्ष सरिता आर्य की अगुवाई में तल्लीताल क्रांति चौक में दो दिन पूर्व के विरोध प्रदर्शन के लिये तैयार महंगाई विरोधी पोस्टरों को हाथों में लेकर विरोध की औपचारिकता निभाई। यहां तक कि कांग्रेस विरोध को समर्थन दे रहे सपा, बसपा व उक्रांद आदि दलों के कार्यकर्ताओं को भी साथ नहीं ले पायी। सपा कार्यकर्ताओं ने पृथक से केंद्र सरकार का पुतला फूंका, लेकिन वे कांग्रेस के बैनर तले नहीं आये। तल्लीताल, मल्लीताल व्यापार मंडल ने भी कांग्रेस के आह्वान पर बंद का समर्थन नहीं किया। यहां तक कि कांग्रेस से जुड़े पदाधिकारियों-कार्यकर्ताओं के प्रतिष्ठान भी पूरे दिन खुले रहे। यही नहीं, कांग्रेस ने इस दौरान रईश होटल-हरिनगर क्षेत्र में हुए बड़े भूस्खलन के मुद्दे पर अपने वोट बैंक माने जाने वाले लोगों के समर्थन में खड़े होने का अवसर भी खो दिया। उनकी जगह भाजपा विधायक व भाजपाई स्थानीय लोगों के समर्थन में बैठे। विरोध प्रदर्शन में कांग्रेस नगर अध्यक्ष मारुति नंदन साह, रईश भाई, मुकेश जोशी, कैलाश मिश्रा, कैलाश अधिकारी, पवन जाटव, महेश पवार, कृष्ण कौशल साह आदि प्रमुख रूप से मौजूद रहे।

बलियानाला क्षेत्र में हुआ भूस्खलन।

नैनीताल, 9 सितंबर 2018। विश्व प्रसिद्ध सरोवरनगरी नैनीताल के आधार बलियानाला में बीते काफी दिनों से बरसात के मौसम में भूस्खलन का सिलसिला जारी है। क्षेत्र में पानी के बड़े जल स्रोत भी फूट गये हैं। इससे रईश होटल व हरिनगर क्षेत्र में करीब 30-40 फिट तक भूमि नाले में समा गयी है, तथा क्षेत्र के घर झुक गये हैं। ऐसे में रईश होटल क्षेत्र के 12 व हरिनगर के 12 परिवार विस्थापन की जद में आ गये हैं। राजस्व उप निरीक्षक अमित साह ने बताया कि इन 24 परिवारों को दुर्गापुर में बने आवासों में नियमानुसार विस्थापित किये जाने की संस्तुति डीएम से कर दी गयी है। साथ ही लोगों से घरों को खाली करने को नोटिस दे दिये गये है।
उल्लेखनीय है कि इस क्षेत्र में उत्तराखंड बनने के बाद ही 2005 में स्वीकृत 15.52 करोड़ रुपए के कार्य हुए हैं, जोकि भूस्खलन को रोकने में पूरी तरह से निष्प्र्रभावी तो साबित हुए ही हैं, इन कार्यों का कहीं नामोनिशान भी नहीं दिखाई देता है। विदित हो कि इस क्षेत्र में भूस्खलनों को 1898 से एक सदी से भी अधिक लंबा इतिहास रहा है, जब यहां 28 लोगों ने अपनी जान गंवाई थी। इसके अलावा भी यहां 1935 व 1972, 2004 व 2014 में भी बड़े भूस्खलन हुए थे, जबकि इधर बीते एक दशक में हर वर्ष भूस्खलन हो रहे हैं। भूस्खलन ने स्थानीय जीआईसी के मैदान को भी अपनी जद में ले लिया है। इसका कारण इस क्षेत्र का एमबीटी सहित कई भूगर्भीय भ्रंशों के प्रभाव में होना बताया जाता है।

टीएचडीसी से मांगे हैं सुझाव
नैनीताल। सिचाई विभाग के अधिशासी अभियंता हरीश चंद्र सिंह ने बताया कि बलियानाला के कारण हो रहे भूस्खलन को रोकने के लिए टीएचडीसी से सुझाव मांगे गये हैं। इस हेतु टीएचडीसी को प्रस्ताव भेजा गया है। टीएचडीसी के सुझावों पर ही नैनीताल राजभवन के पीछे निहाल नाला की ओर से हो रहे भूस्खलन को रोकने के लिये कार्य किये गये हैं। इसके अलावा उन्होंने बताया कि 44.25 करोड़ रुपए की लागत ने बलियानाला को चैनलाइज करने के कार्य इसके आधार में किये जा रहे थे, जो कि वर्तमान बारिश के मौसम में बंद हैं।

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-1934-35, 1972 व 2004 में भी हुए बड़े भूस्खलन
-अंग्रेजों के दौर के हुए बचाव कार्य अभी भी सुरक्षित, पर हालिया 2005 के कार्य पूरी तरह क्षतिग्रस्त

(17 अगस्त 1898 को बलियानाला क्षेत्र में हुए भूस्खलन की दुर्लभ तस्वीर)

नवीन जोशी, नैनीताल। बलियानाला भूगर्भीय संवेदनशीलता के दृष्टिकोण से जोन-4 के शहर नैनीताल का आधार है। जिस तरह नैनीताल का 1841 में बसासत के बाद से ही भूस्खलनों के साथ मानो चोली-दामन का साथ रहा है, तथा यहां 1866 व 1879 में आल्मा पहाड़ी में बड़े भूस्खलनों से इनकी आहट शुरू हुई और 18 सितंबर 1880 को वर्तमान रोपवे के पास आए महाविनाशकारी भूस्खलन ने उस दौर के केवल ढाई हजार की जनसंख्या वाले नगर में 108 भारतीयों व 41 ब्रितानी नागरिकों सहित 151 लोगों को जिंदा दफन कर दिया था। वहीं 17 अगस्त 1898 को बलियानाला क्षेत्र में आया भूस्खलन नगर के भूस्खलनों से संबंधित इतिहास की दूसरी सबसे बड़ी दुर्घटना है। इस दुर्घटना में 27 भारतीयों व एक अंग्रेज सहित कुल 28 लोग मारे गए थे। इधर बलियानाला में 12 सितंबर 2017 को हुए ताजा भूस्खलन के बाद यहां पूर्व में हुए और कमोबेश हर वर्ष होने वाले भूस्खलनों की कड़वी यादें फिर हरी हो गयी हैं।

तत्कालीन हिल साइड सेफ्टी कमेटी की रिपोर्ट के आधार पर इतिहासकार प्रो. अजय रावत ने बताया कि 1898 के भूस्खलन घटना की पृष्ठभूमि में नौ अगस्त से 17 अगस्त तक नगर में हुई 91 सेमी बारिश कारण बनी थी। बारिश का बड़ी मात्रा में पानी यहां की चट्टानों में फंस गया था। आज भी इस क्षेत्र में भारी बसासत और नैनी झील के पानी के किसी न किसी रूप में रिसकर यहां जलश्रोत फूटने के रूप् में जारी है, जिसकी पुष्टि यहां खुले अनेक बड़े जल श्रोतों से होती है। 1898 के अलावा भी बलियानाला क्षेत्र में 1935 तथा 1972 में बड़े भूस्खलन हुए, तथा इनके अलावा भी यह क्षेत्र लगातार बिना रुके धंसता ही जा रहा है। जीआईसी के मैदान और कमोबेश हल्द्वानी राष्ट्रीय राजमार्ग तक भी इसके संकेत देखे जा सकते हैं। आगे 1972 का भूस्खलन वर्तमान हरिनगर के बाल्मीकि मंदिर के पास आया था। स्थानीय सभासद डीएन भट्ट बताते हैं कि इस घटना के बाद यूपी के तत्कालीन वित्त मंत्री नारायण दत्त तिवारी ने सुधार कार्यों के लिए 95 लाख रुपए स्वीकृत किए थे, तथा पूरे क्षेत्र को ‘स्लिप जोन’ घोषित कर दिया था। इस घटना के बाद गठित हुई ‘हाई लेवल एक्सपर्ट कमेटी’ ने बलियानाला को चैनल नंबर एक से दुर्गापुर-बीरभट्टी तक आरसीसी का आधार बनाकर इसे चैनल के रूप में विकसित करने की संस्तुति की थी। किंतु काम न होने से पैंसा आकर लैप्स हो गया। बाद में उत्तराखंड बनने से पूर्व यूपी सरकार ने लागत बढ़ने के बाद 26-27 करोड़ के प्रस्ताव के सापेक्ष करीब 15 करोड़ रुपए स्वीकृत कर कार्य करवाए जो ध्वस्त हो चुके हैं। इधर 2004 में पुनः यहां बड़ा भूस्खलन हुआ तथा छोटे-बड़े अनेक भूस्खलन होते रहे। इसके बाद 2005 में बलियानाले में दो ‘बेड-बार’ व अन्य सुधारात्मक कार्यों के लिए 15 करोड़ रुपए अवमुक्त हुए। यह कार्य सिंचाई विभाग के द्वारा किए गए, और भ्रष्टाचार को लेकर इन कार्यों की अब तक ठंडे बस्ते में पड़ी उच्च स्तरीय जांच भी हुई। अब मौजूदा हालात यह हैं कि अंग्रेजी दौर के बने ‘बेड-बार’ आज भी सुरक्षित हैं, जबकि बाद में बने 8 ‘बेड-बार’ व अन्य सुधानात्मक कार्यों के कहीं निशान ढूंढना भी मुश्किल है।

एमबीटी सहित कई भूगर्भीय भ्रंश बनाते हैं नैनीताल को खतरनाक

नैनीताल। नैनीताल के भूगर्भीय दृष्टिकोण से बेहद कमजोर होने के पीछे हिमालयी क्षेत्र के सबसे बड़े मेन बाउंड्री थ्रस्ट यानी एमबीटी सहित कई भ्रंश भूमिका निभाते हैं। एमबीटी नैनीताल के पास ही बल्दियाखान, ज्योलीकोट के पास नैनीताल के आधार बलियानाले से होता हुआ अमृतपुर की ओर गुजरता है। वहीं नैनीताल लेक थ्रस्ट सत्यनारायण मंदिर, सूखाताल से होता हुआ और नैनी झील के बीचों-बीच से गुजरकर शहर को दो भागों में बांटते हुए गुजरने वाला नैनीताल लेक थ्रस्ट तल्लीताल डांठ से ठीक बलियानाले से गुजरता है। यूजीसी के वैज्ञानिक डा.बहादुर सिंह कोटलिया के अनुसार यह थ्रस्ट इतना अधिक सक्रिय है कि ज्योलीकोट के पास एमबीटी को काटते हुए उसे भी प्रभावित करता है। इसके अलावा एक छोटा मनोरा थ्रस्ट भी बलियानाला की संवेदनशीलता को बढ़ाता है।

तब पैदल चलने की भी थी मनाही, अब धड़धड़ाते हैं वाहन

नैनीताल। 10 सितंबर 2014 को हुए भूस्खलन से यहां जीआईसी से ब्रेवरी को जाने वाला सीसी पैदल मार्ग ध्वस्त हो गया था। इस कारण तब से चार पहिया वाहनों के लिये तो यह मार्ग बंद हो चुका है, किंतु अभी भी ज्योलीकोट-हल्द्वानी जाने के लिए दो पहिया वाहनों के लिए अवैधानिक तरीके से ‘बाई-पास’ के रूप में धड़ल्ले से इस्तेमाल हो रहा है। इतिहासकार प्रो. अजय रावत बताते हैं कि 1898 के भूस्खलन के बाद अंग्रेजों ने इस क्षेत्र में भूक्षरण रोकने वाली बड़ी मात्रा में घास और जंगल में पेड़ों की सघनता बढ़ाई गई थी। साथ ही लोगों की पैदल आवाजाही भी प्रतिबंधित कर दी थी। वर्ष 1900 के दौर में एक फारेस्ट गार्ड ने ज्योलीकोट से जल्दी पहुंचने पर शाबासी मिलने की चाह में अपने अधिकारी अंग्रेज डीएफओ को इस रास्ते से आने की जानकारी दी। इस पर डीएफओ ने उस पर उल्टे पांच रुपए का जुर्माना ठोंक दिया था।

नगर का शुरुआती होटल था रईश होटल

नैनीताल। रईश होटल क्षेत्र में वास्तव में नगर का शुरुआती दौर का वर्तमान जीआईसी मैदान के पास चार मंजिलों वाले तीन भवनों का रईश होटल स्थित था। बाद के दौर में यहां लोगों ने कब्जे कर लिए। क्षेत्र के विमल जोशी व जसोेदा बिष्ट ने बताया कि 1981 तक होटल बेहद जीर्ण-शीर्ण हो गया था। 81 में एक इसका एक भवन गिर पड़ा, जबकि 97 में शेष को जर्जर होने की वज से तोड़ डाला गया। भवन में 15-20 परिवार काबिज थे, जिनमें से कुछ ने बाद में पास की खाली जमीन पर कब्जा कर लिया, और कुछ अपने कब्जों को किराए पर लगाकर अन्यत्र चले गए। लेकिन बाद में इस बेहद खतरनाक व हर दम जान हथेली पर रखने जैसी जगह पर भी लगातार लोग आते और बसते चले गए। आरोप है कि यही लोग अब अपना यहां अपना हक जता रहे हैं, जबकि मूल वासिंदों का कोई सुधलेवा नहीं है।

बलियानाले को चैनलाइज करने के लिए 44.25 करोड़ का प्रस्ताव

नैनीताल। डीएम दीपक रावत ने मंगलवार (06.01.2015) को नगर के आधार बलियानाला से विगत वर्ष 10 सितम्बर को भीषण भूस्खलन से तबाह हुए रईश होटल व जेएनएनयूआरएम योजना के अन्तर्गत दुर्गापुर में बन रहे आवासों का निरीक्षण किया। इस दौरान सहायक अभियंता सिंचाई एनसी पंत ने बताया कि बलियानाले को चैनलाइज करने के लिए 44.25 करोड़ का प्रस्ताव शासन को भेजा गया है। डीएम रावत ने दुर्गापुर में बने आवासीय भवनों का निरीक्षण करते हुए वहां रह रहे लोगों से भी बात की। निर्माण संस्था लोनिवि के ईई जितेंद्र त्रिपाठी ने बताया कि योजना के अन्तर्गत 9.28 करोड़ की लागत से 200 आवास बनाये जाने थे जिसमें से 60 आवास पूर्ण कर 60 परिवारों को विस्थापित किया जा चुका है। अगले 60 आवास आगामी फरवरी तक तथा शेष 40 आवास जून तक पूर्ण कर लिए जाएंगे, जबकिक अंतिम 40 आवासों का कार्य अभी शुरू नहीं हो पाया है। डीएम ने 15 दिनों में इनका निर्माण शुरू कराने के निर्देश दिए।

भारी बारिश से नैनीताल में सनवाल स्कूल, भीमताल में थाने की दीवार ढही, वाहन दबे

सवाल स्कूल की टैक्सी सहित गिरी दिवार, ऊपर गिरने से बची यूटिलिटी।

नैनीताल, 29 अगस्त 2018। नैनीताल व निकटवर्ती पर्वतीय क्षेत्रों सहित पूरे जनपद में मंगलवार का दिन सूखा रहने के बाद रात्रि में भारी बारिश हुई। आपदा कंट्रोल रूम से प्राप्त जानकारी के अनुसार मुख्यालय में 80.4, जबकि हल्द्वानी में 89, कोश्यां कुटौली में 35, मुक्तेश्वर में 33, कालाढुंगी में 30, रामनगर में 27, बेतालघाट में 22 सहित जिले में औसतन 41.04 मिमी बारिश रिकार्ड की गयी है। बारिश की वजह से बुधवार सुबह तड़के मल्लीताल स्थित सनवाल स्कूल के पीछे के मैदान की दीवार वहां ‘नो पार्किंग’ में खड़ी पॉपुलर कंपाउंड निवासी अजमुद्दीन पुत्र कमरुद्दीन की मारुति अल्टो 800 टैक्सी संख्या यूके04टीए-7293 के साथ स्कूल भवन पर गिर गयी। हादसा सुबह चार बजे के बाद हुआ बताया गया है। इससे स्कूल के कक्षा कक्षों का भवन को नुकसान पहुंचा है। भवन की दीवारें क्षतिगस्त होने के साथ ही टिन की छत भी छतिग्रस्त हो गयी है। इस वाहन के करीब सटकर एक अन्य यूटिलिटी वाहन भी खड़ा था। गनीमत रही कि वह गिरने से बच गया। हादसा दिन के वक्त नहीं हुआ, अन्यथा कक्षाओं में बच्चों के साथ कोई हादसा हो सकता था। हादसे की सूचना मिलने के बाद स्कूल में छुट्टी घोषित कर दी गयी।

भीमताल थाने की हल्द्वानी रोड पर गिरी दिवार

उधर भीमताल में भीमताल थाने की सुरक्षा दीवार सुबह तड़के करीब साढ़े तीन बजे हल्द्वानी रोड पर गिर गयी, इससे थाने के बाहर सीजन कर खड़े किये कई दोपहिया वाहन भी क्षतिग्रस्त हो गये। वहीं लगातार हो रही बारिश से थाने का भवन भी भूस्खलन की चपेट में बताया जा रहा है। भवन का निचला हिस्सा कमजोर हो रहा है, और थाने में कार्यरत पुलिसकर्मी डर के साए में काम करने को मजबूर हो गये हैं। वहीं मलबा आने से कुछ देर के लिए हल्द्वानी रोड पर यातायात भी अवरुद्ध हो गया था। बाद में पुलिस कर्मियों ने ही जेसीबी मशीन बुलाकर सड़क को वाहनों के चलने के लिए खुलवाया, साथ ही पहाड़ से आने वाले वाहनों को भीमताल बाईपास के रास्ते भेजा जा रहा है। बारिश से जिले की 10 ग्रामीण सड़कें भी बंद हो गयी हैं।

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मेरा जन्म 26 नवंबर 1972 को हुआ था। मैं नैनीताल, भारत में मूलतः एक पत्रकार हूँ। वर्तमान में मार्च 2010 से राष्ट्रीय हिन्दी दैनिक समाचार पत्र-राष्ट्रीय सहारा में ब्यूरो चीफ के रूप में कार्य कर रहा हूँ। इससे पहले मैं पांच साल के लिए दैनिक जागरण के लिए काम कर चुका हूँ। कुमाऊँ विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग से ‘नए मीडिया’ विषय पर शोधरत हूँ। फोटोग्राफ़ी मेरा शौक है। मैं NIKON COOLPIX P530 और अडोब फोटोशॉप 7.0 के साथ फोटोग्राफी कर रहा हूँ। फोटोग्राफी मेरे लिए दुनियां की खूबसूरती को अपनी ओर से चिरस्थाई बनाने का बहुत छोटा सा प्रयास है। एक फोटो पत्रकार के रूप में मेरी तस्वीरों को नैनीताल राजभवन सहित विभिन्न प्रदर्शनियों में प्रस्तुत किया गया, तथा उत्तराखंड की राज्यपाल श्रीमती मार्गरेट अलवा द्वारा सम्मानित किया गया है। कुछ चित्रों को राष्ट्रीय-अंतर्राष्ट्रीय पुरस्कार भी प्राप्त हो चुके हैं। गूगल अर्थ पर चित्र उपलब्ध कराने वाली पैनोरामियो साइट पर मेरी प्रोफाइल को 18.85 Lacs से भी अधिक हिट्स प्राप्त हैं।पत्रकारिता और फोटोग्राफी के अलावा मुझे कवितायेँ लिखना पसंद है। काव्य क्षेत्र में मैंने नवीन जोशी “नवेन्दु” के रूप में अपनी पहचान बनाई है। मैंने बहुत सी कुमाउनी कवितायेँ लिखी हैं, कुमाउनी भाषा में मेरा काव्य संकलन उघड़ी आंखोंक स्वींड़ प्रकाशित हो चुका है, जो कि पुस्तक के के साथ ही डिजिटल (PDF) फार्मेट पर भी उपलब्ध होने वाली कुमाउनी की पहली पुस्तक है। मेरी यह पुस्तक गूगल एप्स पर भी उपलब्ध है। ’ यहां है एक पत्रकार, लेखक, कवि एवं छाया चित्रकार के रूप में मेरी रचनात्मकता, लेख, आलेख, छायाचित्र, कविताएं, हिंदी-कुमाउनी के ब्लॉग आदि कार्यों का पूरा समग्र। मेरी कोशिश है कि यहां नैनीताल, कुमाऊं, उत्तराखंड और वृहद संदर्भ में देश की विरासत, संस्कृति, इतिहास और वर्तमान को समग्र रूप में संग्रहीत करने की….। मेरे दिल में बसता है, मेरा नैनीताल, मेरा कुमाऊं और मेरा उत्तराखंड

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