News

अल्मोड़ा पहुंचे मोदी ने कहा, विकास की राह में ब्रेक लगाने वालों को नहीं आने दें, कहा हमारे दिल में कमल व मांथे पर ब्रह्मकमल

Imageनवीन समाचार, अल्मोड़ा, 11 फरवरी 2022। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शुक्रवार को विधानसभा चुनाव के प्रचार के अंतिम दौर में अल्मोड़ा पहुंचे। यहां भारी जनसमूल को संबोधिक करते हुए मोदी ने कहा, कांग्रेस के नेताओं ने उत्तराखंड बनने की राह में ब्रेक लगाए। राज्य की मांग के दौर में वह दूसरी-दूसरी मांगें करते रहे। उन्होंने उत्तराखंड के विकास की राह में समय-समय पर लगातार ब्रेक लगाए। 2014, 2017 व 2019 के चुनाव में उत्तराखंड वासियों ने उनके ब्रेक हटाए। फिर यह ब्रेक न लगने दें। उन्होंने कहा, हम ब्रह्मकमल वाले लोग हैं, हमारे माथे पर कमल व दिल में कमल हैं, इस दौरान उन्होंने जय गोल्ज्यू, जय बागनाथ के जयकारे भी लगाए।

उन्होंने राहुल गांधी को उनके एक दिन पहले के बयान को निशाने पर लेते हुए बिना नाम लिए उन पर उत्तराखंड के लोगों को डरपोक कहकर उत्तराखंड के वीरों का अपमान करने का अपमान लगाया। उन्होंने कांग्रेस पर यूनिवर्सिटी, शिक्षा के नाम पर तुष्टीकरण का जहर घोलने का आरोप भी लगाया। उन्होंने कांग्रेस के देश भर के नेताओं के उत्तराखंड न आने को लेकर भी उत्तराखंड की उपेक्षा का आरोप लगाया। कहा कि कांग्रेस के नेता चुनाव में भी उत्तराखंड नहंी आ रहे है।

मोदी ने कहा, मैं देख रहा हूं कि मतदाता कभी अच्छे कामों को भूलते नहीं हैं, अच्छे इरादों को भूलते नहीं हैं और कभी भी नेक नियत वालों का साथ छोड़ते नहीं हैं। इस चुनाव को भाजपा से ज्यादा जनता-जर्नादन लड़ रही है। उत्तर प्रदेश में की पहले चरण के मतदान में भी भाजपा के लिए जबरदस्त उत्साह का वातावरण रहा। कल का मतदान, लोगों का उत्साह, लोगों की एकजुटता से पता लगता है कि भाजपा सारे पुराने रिकॉर्ड तोड़ने वाली है।

उत्तराखंड के लोग ये बात जानते हैं कि, भाजपा सरकार ही इस दशक को उत्तराखंड का उज्ज्वल दशक बना सकती है। इसलिए, एक बार फिर डबल इंजन की सरकार, उत्तराखंड में आना तय है। अब उत्तराखंड विकास के शिखर की तरफ बढ़ चला है, उत्तराखंड को एक नई पहचान मिल रही है।

भाजपा ने अपना जो संकल्प पत्र जारी किया है, वो भी विकास की नई ऊर्जा से भरा हुआ है। हमारी सरकार ‘सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास और सबका प्रयास’ का संकल्प लेकर काम कर रही है। लेकिन हमारा विरोध करने वालों का फॉर्मूला है-‘सबमें डालो फूट, मिलकर करो लूट’। पूरे देश में कांग्रेस की नीति रही है- सबमें डालो फूट, मिलकर करो लूट’।

विरोधियों ने हमेशा कुमाऊं और गढ़वाल की लड़ाई कराने की कोशिश की, ताकि ये दोनों जगह को लूट सकें। जबकि डबल इंडन की सरकार ने दोनों जगह के लिए डबल काम करने की कोशिश की है। हमारे लिए पूरा उत्तराखंड देवभूमि है। यही लोग कहते थे कि पहाड़ों पर सड़कें बनाना आसान नहीं, इसलिए यहाँ तो ऐसे ही चलना पड़ता है। लेकिन आज उत्तराखंड में चारों धामों को जोड़ने के लिए ‘आल वेदर’ रोड का काम चल रहा है। जहां ये सड़क को मुश्किल बताते थे, वहाँ आज पहाड़ों पर रेल भी पहुँच रही है।

ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल लाइन परियोजना का काम तो चल ही रहा है, टनकपुर-बागेश्वर रेलवे लाइन का सपना भी आने वाले समय में जरूर साकार होगा और हम ही पूरा करेंगे। हमने इस बार के बजट में उत्तराखंड का विशेष ध्यान रखते हुए एक योजना बनाई है, पवर्तमाला परियोजना।हिंदुस्तान में पहली बार पवर्तमाला परियोजना की कल्पना आई और किसी को और योजना बनकर आपके सामने आया है।

कुमाऊं को तो वैसे भी मंदिरों का स्थान कहते हैं। अल्मोड़ा के कटारमल सूर्य मंदिर पर अगर ध्यान दिया गया होता, तो ओडिशा के कोणार्क सूर्य मंदिर की तरह यहां भी देश-विदेश से पर्यटक आते। हमने कटारमल सूर्य मंदिर को उसकी पहचान देने का संकल्प लिया है।

एक तरफ उत्तराखंड में मोदी के युवा नेतृत्व वाली सरकार है, जो पर्यटन, प्रगति और रोजगार के लिए काम कर रही है। दूसरी ओर, वो पुरानी मानसिकता है जिसने दशकों तक उत्तराखंड में पलायन के हालात पैदा किए। मैं यहाँ आता था तो देखता था माताओं-बहनों को सर पर बँठों में कितनी कितनी दूर पानी लाने जाना होता था।साथ में छोटे बच्चे भी डब्बे या छोटे से कुप्पे में पानी ढोते थे। लेकिन कांग्रेस के लोगों को इसकी चिंता नहीं होती थी।

इस वर्ष केंद्र सरकार ने गरीबों के लिए देश भर में 80 लाख नए पक्के घर बनाने का तय किया है।उत्तराखंड में जिन गरीबों को पक्के घर मिलने रह गए हैं, उन्हें हमारी सरकार खोज-खोज कर पक्के घर देने का काम करेगी। (डॉ.नवीन जोशी) आज के अन्य ताजा ‘नवीन समाचार’ पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें।

Uttarakhand Election 2022 important points about PM Modi speech Uttarakhand  Vidhan Sabha Chunav 2022

यह भी पढ़ें : पीएम मोदी ने की मुस्लिम यूनिवर्सिटी के बरक्स की डिजिटल यूनिवर्सिटी की बात, हनुमानगढ़ी के लिए रोपवे बनाने की बात भी कही…

डॉ. नवीन जोशी @ नवीन समाचार, नैनीताल, 8 फरवरी 2022। प्रधानमंत्री मोदी ने मंगलवार को नैनीताल-ऊधमसिंहनगर लोकसभा क्षेत्र की 14 विधानसभा सीटों की जनता को वर्चुअल रैली के माध्यम से संबोधत किया। इस दौरान उन्होंने बिना किसी पार्टी का नाम लिए मुस्लिम यूनिवर्सिटी को लेकर विपक्ष को घेरा, और इसकी जगह डिजिटल यूनिसर्विटी बनाने की बात कही। अपने संबोधन में मोदी ने हालिया बजट में पर्वतमाला प्रोजेक्ट से पर्वतीय क्षेत्रों में होने वाले कार्यों का जिक्र करते हुए नैनीताल के निकट हनुमानगढ़ी के लिए रोपवे बनाने की बात भी कही। उन्होंने कांग्रेस के सात साल और भाजपा के सात साल के शासनकाल के कार्यों का अंतर भी प्रस्तुत करते हुए भाजपा को उत्तराखंड में काम करने वाला और कांग्रेस को बदनाम करने वाला बताया। कहा-दिल्ली में रहता हूं लेकिन दिल में उत्तराखंड है। यही सोचकर आगामी 14 फरवरी को ‘पहले मतदान-फिर जलपान’ करते हुए अपना वोट दें।

यहां देखें प्रधानमंत्री का आज का भाषण लाइव:

पीएम मोदी ने कांग्रेस व आप का नाम लिए बिना कहा कि एक ने उत्तराखंड की जनता को सालों तक लूटा तो दूसरे ने यहां जनता को कोराना काल के दौरान बसों में भरकर लौटा दिया। पीएम मोदी ने कहा कि यह चुनाव इस दशक को उत्तराखंड का दशक बनाएगा। अगले 25 साल की बुनियाद को और मजबूत करेगा। उन्होंने कहा कांग्रेस की नीयत व निष्ठा का अनुमान उनके कैंपेन व नारों से लगाया जा सकता है।

दिल्ली में ये दशकों तक सत्ता में रहे। इनके नेता सैरसपाटे के लिए आते थे। टूरिज्म, चारधाम की याद इन्हें नहीं आई। उप्र में भी सालों इनकी सरकार रही। तब भी केदार, बदरी, गंगोत्री यमुनोत्री की याद नहीं आई। इनकी डिक्शनरी में ये नाम ही नहीं थे। इन्हें कनेक्टिविटी का दर्द नहीं याद नहीं आया। पलायन को नहीं समझा। उत्तराखंड सरकार चार धाम को भव्य व दिव्य बना रही है। आलवेदर रोड से जोड़ा जा रहा है।

ये कह रहे हैं कि हम चार काम करेंगे। मैं बताता हूं इनके चार काम क्या होंगे। ये जो भी करेंगे एक ही परिवार के लिए करेंगे। भ्रष्टाचार करेंगे। तुष्टिकरण की राजनीति करेंगे और चौथा का योजनाओं को दशकों तक लटकाकर अपनी जेब भरेंगे। देश को वोट बैंक के हिसाब से बांटते रहे हैं और रहेंगे। मैं इनके इनके चारों कामों का पूरा चिट्ठा लाया हूं। उत्तराखंड से मेरा विशेष नाता रहा है। जब गुजरात का सीएम, संगठन में था तब भी और उससे पहले भी मेरी एक जिंदगी थी। मैं आज आपके लिए यहां बैठा हूं। आपके लिए करूंगा कि नहीं। अगर बीच में रोड़े अटकाने वाले आ गए तो मैं कैसे काम करूंगा। इस चुनाव में गलती मत करना भाइयों बहनों।

2007 से 2014 में उत्तराखंड के कांग्रेस के एक रसूखदार नेता यहां मंत्री थे। परिवार की सेवा में लगे थे। उस समय इन्होंने सड़क बनाने को 2800 करोड दिए सिर्फ। हमने सात साल में सड़कों के लिए 33 हजार करोड़ से अधिक दिए। आप बताइये हमने दस गुना से ज्यादा दिया। यूपीए की 10 साल में पीएम ग्राम योजना के तहत 7800 किमी सड़क बनी। मैं तो उत्तराखंड में रहा हूं। यहां सड़क की जरूरत समझता हूं। हमने सात साल में साढे़ तेरह हजार किमी सड़कें बनाईं। अब इन्हें चार धाम का नाम याद आ रहा है।

पीएम मोदी ने कहा कि पहाड़ में रेल बड़ा सपना होता है। सरकार कर्णप्रयाग तक रेल लाइन बना रही है। मैं आपके बीच से निकला हूं। जब हमारी सरकार आई थी उससे पहले इस रेल लाइन के लिए उन्होंने सिर्फ चार करोड़ रुपये खर्च किए थे। हिसाब बहुत लंबा है। मैंने सिर्फ उदाहरण दिया। क्या ऐसे लोगों को उत्तराखंड की बागडोर दे सकते हैं। वोट देने जाएंगे तो याद रखिएगा। नैनीताल के पर्यटन को गति मिलेगी। आधुनिक इंफ्रा को बजट में बल मिला है। पर्वत माला प्रोजेक्ट से हमारी सडकें और आधुनिक होने वाली हैं। रोपवे से जुड़ेंगे तो रोजगार भी मिलेगा। नैनीताल के हनुमान गढ़ी को रोपवे से जोड़ेंगे, रीठासाहिब भी जुड़ेगा। नकारात्मक सोच में डूबी कांग्रेस पूरी ताकत से पीछे धकेलने की कोशिश कर रही है। हम आगे जाना चाहते हैं।

ये देवभूमि में क्या कर रहे हैं। ये जिस यूनिवर्सिटी की बात सीना ठोक करके कर रहे हैं, इनकी हिम्मत तो देखिए। यह तुष्टिकरण की राजनीति है। कश्मीर को क्या बना दिया था इन्होंने। हमने हर संप्रदाय का ख्याल रखा है। डिजिटल यूनिवर्सिटी बना रहे हैं हम। उत्तराखंड को भी लाभ मिलेगा। बड़े शहरों में जाने की मजबूरी नहीं होगी।

यह नई सोच व अप्रोच है 21 वीं सदी की। टेक्निकल व मेडिकल की पढ़ाई को हिंदी में भी सुलभ कराने की पहल हमने की है। पहाड़ों के युवा अंग्रेजी के कारण प्रोफेशन में नहीं जा पा रहे थे वह भी डाक्टर, इंजीनियर बन सकते हैं। उनके सपनों को पूरा करने के लिए हम काम करेंगे। मेडिकल कालेज का विस्तार कर रहे हैं। एम्स का सेटेलाइट सेंटर शुरू होगा। पहले दिल्ली भागते थे फिर एम्स ऋत्रषिकश में बना, अब ऊधम सिंह नगर में ही एम्स जैसी सुविधा मिलेगी। 2014 में मेडिकल सीट उन्नीस सौ थी अब छब्बीस सौ हो गई है।

कांग्रेस की हर बहानेबाजी को दरकिनार करते हुए अटल जी ने उत्तराखंड को बहुत कुछ दिया। यूएसनगर में उद्योगों की स्थापना हुई। विकास की राह पर आपके विश्वास से ही आगे बढ़ रहे हैं। जल जीवन मिशन के माध्यम से हर घर तक पानी, पीएम आवास के तहत गरीबों के लिए घर, आयुष्मान के तहत गरीबों को मुफ्त इलाज मिल रहा है। एक तरफ हम दूसरी ओर राज्य को बदनाम करने वाले चेहरे जाने पहचाने हैं। हम सबका साथ सबका विकास वाले हैं।

किसानों को लाभ हो रहा है। पहले किसानों की बात राजनीतिक चश्मे से होती थी। आज सरकार पीएम किसान सम्मान निधि हर किसान के खाते में देती है। कृषि इंफ्रा का लाभ इस बजट में हमने नेचुरल खेती का प्रविधान, गंगा जी के दोनों किनारों में केमिकल मुक्त खेती की शुरुआत होगी। आर्गेनिक खेती की संभावनाओं को बल मिलने वाला है। जैविक खेती का दायरा 55 हजार से बढ़कर सवा दो लाख हेक्टेयर तक हो चुका है। रामगढ़ उद्यान विभाग की जमीन पर सरकार ने हाई डेंसिटी खेती शुरू कराई है। इससे रोजगार भी मिलेगा। तपोभूमि है यहां दुनिया से लोग सिद्धि के लिए आते हैं। कुछ छल वाली शक्तियां बाधा भी डालती हैं। इनकी बात में नहीं आना। आज के अन्य ताजा ‘नवीन समाचार’ पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें।

यह भी पढ़ें : आज से शुरू हो जाएगा ‘मोदी फैक्टर,’ मोदी करेंगे नैनीताल-ऊधमसिंह नगर की जनता को संबोधित, देखें यहां लाइव

प्रधानमंत्री ने उत्तराखंड की पहनी टोपी, मणिपुर का स्टोल

डॉ. नवीन जोशी @ नवीन समाचार, नैनीताल, 7 फरवरी 2022। भाजपा को उम्मीद है कि जिस तरह 2017 के उत्तराखंड विधानसभा चुनाव में पार्टी को ‘मोदी फैक्टर’ की वजह से बड़ी जीत मिली, उसी तरह यह ‘फैक्टर’ इस बार भी राज्य में फिर काम करेगा। पार्टी का मानना है कि 2017 में भाजपा की ऐतिहासिक जीत में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का प्रभाव महत्वपूर्ण था। तब उसने एकतरफा लड़ाई में राज्य की कुल 70 विधानसभा सीट में से 57 पर जीत हासिल की थी और प्रतिद्वंद्वी कांग्रेस को सिर्फ 11 सीट ही मिल पाई थीं। इसके प्रयास शुरू हो गए हैं। मंगलवार को इसी कड़ी में मोदी नैनीताल लोकसभा की जनता के लिए अपनी पहली वर्चुअल जनसभा करने जा रहे हैं।

बताया गया है कि भारतीय जनता पार्टी के नेता जहां ‘मोदी फैक्टर’ के पार्टी के पक्ष में काम करने को लेकर काफी आशावादी हैं। वहीं चुनाव पर करीब से नजर रखने वाले लोग भी मानते हैं कि पार्टी को जो भी सीट मिलेंगी, उसमें ‘मोदी फैक्टर’ की बड़ी भूमिका होगी। पार्टी के रणनीतिकारों का मानना है कि अब तक तो राज्य में जो प्रचार चल रहा है वह पार्टी प्रत्याशियों के अपने और पार्टी के अन्य नेताओं के आधार व प्रभाव पर चल रहा है, किंतु जैसे ही मोदी आभाषीय माध्यम से ही सही, पर मैदान में आएंगे, चुनाव की तस्वीर बदल जाएगी।

राज्य में 60 से अधिक सीट जीतने के अपने लक्ष्य को हासिल करने के लिए भाजपा मोदी के जादू पर काफी निर्भर है। वर्चुअल रैलियों के जरिए अलग-अलग निर्वाचन क्षेत्रों में अपने उम्मीदवारों के लिए प्रचार कर रहे भाजपा नेता मोदी के नाम पर वोट मांग रहे हैं। चुनावी रैलियों में उनके आधे भाषण बड़ी विकास परियोजनाओं को समर्पित हैं, जिन पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में राज्य में काम शुरू हुआ।

भाजपा उपाध्यक्ष देवेंद्र भसीन ने कहा, ‘मोदी हमारे सबसे बड़े प्रतीक हैं। यह एक ऐसा कारक है जिसने हमेशा पार्टी के लिए काम किया है और आने वाले चुनाव कोई अपवाद नहीं हैं।’ भसीन ने कहा कि लोग जानते हैं कि लंबे समय से प्रतीक्षित ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेललाइन, चारधाम ‘ऑल वेदर रोड’ या केदारनाथ-बद्रीनाथ पुनर्निर्माण जैसी बुनियादी ढांचा परियोजनाओं के पीछे मोदी ही ‘प्रेरक शक्ति’ हैं।

भाजपा नेता ने कहा, ‘मोदी इतनी बार राज्य का दौरा करने वाले पहले प्रधानमंत्री हैं और उनकी योजनाओं में उत्तराखंड को दी गई प्राथमिकता पूरी तरह स्पष्ट है। उनके नेतृत्व में उत्तराखंड के लिए 1.5 लाख करोड़ रुपये की परियोजनाओं को मंजूरी दी गई है।’ भाजपा प्रवक्ता शादाब शम्स ने कहा कि चुनावी रैलियों के लिए राज्य के दौरों के अलावा, केदारनाथ की मोदी की कई यात्राएं, जिनमें से एक के दौरान उन्होंने एक गुफा में ध्यान किया, राज्य में भारत-चीन सीमा क्षेत्र में सैनिकों के साथ त्योहार मनाने के लिए उनकी यात्रा और उत्तराखंड इस सबको देखते हुए विधानसभा चुनाव में प्रधानमंत्री की राज्य में लोकप्रियता को भुनाने के लिए भाजपा कोई कमीबेशी नहीं छोड़ना चाहती।

वर्ष 2017 में भाजपा ने प्रचंड बहुमत हासिल किया तो उसके पीछे भी मोदी फैक्टर सबसे बड़ा कारक था। इसे देखते हुए पार्टी चाहती थी कि राज्य में प्रधानमंत्री की अधिकाधिक सभाएं हों। इसकी रूपरेखा भी तय कर ली गई थी कि प्रत्येक संसदीय क्षेत्र में उनकी जनसभाएं होंगी, लेकिन कोरोना संक्रमण ने इस राह में मुश्किल खड़ी कर दी।

ऐसे में पार्टी ने प्रधानमंत्री की वर्चुअल सभाओं की रणनीति बनाई। साथ ही प्रधानमंत्री के उत्तराखंड से संबंधित भाषणों को भी चुनाव प्रचार का हिस्सा बनाया है। हाल में विधानसभा चुनाव के लिए भाजपा ने अपना जो थीम सांग लांच किया, वह प्रधानमंत्री मोदी की कविता पर केंद्रित है। नमो ने इस कविता के माध्यम से चार दिसंबर को देहरादून में हुई रैली के दौरान उत्तराखंड से अपने जुड़ाव को प्रदर्शित किया था।

इससे समझा जा सकता है कि मोदी फैक्टर भाजपा के लिए कितना मायने रखता है। सोमवार से प्रधानमंत्री की संसदीय क्षेत्रवार वर्चुअल सभाओं का क्रम शुरू होने से भाजपा को चुनाव प्रचार में एक प्रकार से बूस्टर डोज मिल गई है। 11 फरवरी तक प्रधानमंत्री की वर्चुअल सभाएं होनी हैं। प्रधानमंत्री की बात ज्यादा से ज्यादा व्यक्तियों तक पहुंचे, इसके लिए भाजपा ने सभी विधानसभा क्षेत्रों में अपना सेटअप पहले से ही तैयार किया हुआ है। संसदीय क्षेत्र के अंतर्गत आने वाली प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र में चार-चार स्थानों पर बड़ी स्क्रीन लगाकर प्रधानमंत्री का संबोधन सुनने की व्यवस्था की गई है। आज के अन्य ताजा ‘नवीन समाचार’ पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें।

यह भी पढ़ें : गणतंत्र दिवस पर उत्तराखंड की झांकी से अधिक उत्तराखंड की ब्रह्मकमल टोपी चर्चा में, पीएम मोदी ने बढ़ाया मान…

डॉ. नवीन जोशी @ नवीन समाचार, नैनीताल, 26 जनवरी 2022। 73वें गणतंत्र दिवस पर राजपथ पर उत्तराखंड की झांकी राज्य के आध्यात्मिक केंद्र होने के साथ विकास के पथ पर अग्रसर होने का भव्य प्रदर्शन करते हुए निकली। किंतु इससे अधिक उत्तराखंड की आज देश भर में चर्चा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की टोपी को लेकर हो रही है। इससे पहले पीएम मोदी रंगीन पगड़ी पहनते थे। इस बार प्रधानमंत्री ने जो टोपी पहनी उसे लेकर सोशल मीडिया पर जबर्दस्त चर्चा चल रही है, और उत्तराखंडी टोपी व उत्तराखंडी ब्रह्मकमल टोपी ट्रेंड कर रही है।

उत्तराखंड के मुख्यमत्री ने प्रधानमंत्री की टोपी को रेखांकित करते हुए बकायदा ट्वीट किया, ‘‘आज 73वें गणतंत्र दिवस के अवसर पर माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी ने ब्रह्मकमल से सुसज्जित देवभूमि उत्तराखंड की टोपी धारण कर हमारे राज्य की संस्कृति एवं परम्परा को गौरवान्वित किया है। मैं उत्तराखंड की सवा करोड़ जनता की ओर से माननीय प्रधानमंत्री जी का हार्दिक आभार प्रकट करता हूँ।’’

सीएम धामी ने इस बात को भी रेखांकित किया कि प्रधानमंत्री मोदी ने गणतंत्र दिवस के अवसर पर उत्तराखंड की आन-बान-शान की प्रतीक पहाड़ी टोपी पहन कर देश के लिए अपने प्राणों की आहुति देने वाले सैनिकों को कृतज्ञ राष्ट्र की तरफ से नेशनल वॉर मेमोरियल पर श्रद्धांजलि दी। राजपथ पर देवभूमि उत्तराखंड की झांकी का मनोरम दृश्य :

उल्लेखनीय है कि ब्रह्मकमल उत्तराखंड का राजकीय पुष्प है। पीएम मोदी ने जो टोपी आज पहनी थी, उसमें ब्रह्मकमल भी अंकित था। इसलिए इसे ‘ब्रह्मकमल टोपी’ भी कहा जा रहा है। देश के रक्षा राज्य मंत्री अजय भट्ट ने भी आज वही टोपी पहनी थी। अजय भट्ट उत्तराखंड के नैनीताल से लोकसभा सांसद एवं पूर्व में उत्तराखंड भाजपा के अध्यक्ष रहे हैं।

उत्तराखंड में विधानसभा चुनाव हो रहे हैं। प्रधानमंत्री मोदी द्वारा आज देश की स्वतंत्रताा के वास्तविक पर्व गणतंत्र दिवस पर उत्तराखंड की ब्रह्मकमल टोपी पहनने को इससे जोड़कर भी देखा जा रहा है। इससे पूर्व हल्द्वानी में भी प्रधानमंत्री मोदी उत्तराखंडी-कुमाउनी टोपी में नजर आए थे। इस तरह यह पहली बार है भी कि उत्तराखंड के प्रतीक इस तरह राष्ट्रीय स्तर पर देश के सम्मान के रूप में प्रदर्शित हो रहे हैं। आगे विधानसभा चुनाव में भाजपा प्रधानमंत्री मोदी से मिले इस सम्मान को राज्य के चुनाव में प्रचार के लिए भी इस्तेमाल कर सकती है। आज के अन्य ताजा ‘नवीन समाचार’ पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें।

यह भी पढ़ें : मैं काम ठीक कर रहा हूं, आप इन्हें ठीक करो… : मोदी

modi in uttarakhand: उत्तराखंड के हल्द्वानी पहुंचे पीएम नरेंद्र मोदी ने कई  परियोजनाओं का किया उद्घाटन : Uttarakhand ke haldwani pahuche narendra modi  ne kai yojnao ka kiya udkhatan ...नवीन समाचार, हल्द्वानी, 30 दिसंबर 2021। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बृहस्पतिवार को 12 वर्ष के बाद कुमाऊं के प्रवेश द्वार, नैनीताल जनपद के हल्द्वानी पहुंचे। वह उत्तराखंड बनने के बाद ही नहीं, 25 वर्ष बाद हल्द्वानी-नैनीताल जनपद पहुंचने वाले प्रथम प्रधानमंत्री बने। इस दौरान उन्होंने कहा वह पिछली सरकारों द्वारा बिगाड़े कार्य अब तक भी ठीक करने लगे हैं। उन्होंने जनता का आह्वान किया वह उन्हें, इन कार्यों को बिगाड़ने वालों को ठीक करें। इस दौरान उन्होंने उत्तराखंड को करीब 17547 करोड़ रुपए की विकास योजनाओं का शिलान्यास व लोकार्पण कर तोहफा दिया। इस दौरान उन्होंने कुमाउनी बोली में जनसभा में मौजूद लोगों को नए साल और मकर संक्राति पर मनाए जाने वाले घुघुति पर्व की बधाई भी दी।

उल्लेखनीय है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को देखने के लिए गुरुवार को लोगों की इतनी भारी संख्या में भीड़ उमड़ पड़ी कि पुलिस-प्रशासन के व्यवस्था बनाने में हाथ-पैर फूल गए।। मैदान लोगों से खचाखच भर गया। जिसके बाद लोगों को वापस लौटाया गया। भीड़ बढ़ती देख पुलिस ने जनसभा स्थल के पास बैरिकेड लगाकर लोगों को रोक दिया और वापस भेज दिया। जिससे लोगों में रोष भी दिखाई दिया।

इस दौरान हल्द्वानी के एमबी इंटर कॉलेज के मैदान में करीब एक लाख लोगों की जनसभा को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने कुमउनी बोली में अपना संबोधन शुरू किया। कहा कि देश की आजादी में कुमाऊं ने अपना बड़ा योगदान दिया है। कहा कि पहाड़ की टोपी पहनना मेरे लिए गर्व की बात है। पीएम ने कहा कि हल्द्वानी वालों के लिए नए साल की सौगात लेकर आया हूं। हम दो हजार करोड़ रुपए की योजना लेकर आ रहे हैं। अब हल्द्वानी में पानी, सीवरेज, पार्किंग और स्ट्रीट लाइट सभी जगह अभूतपूर्व सुधार होगा। पीएम ने युवा, जवान, किसान के लिए हो रहे काम को अपने भाषण के केन्‍द्र में रखा। वहीं टनकपुर-बागेश्‍वर रेल लाइन, ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल लाइन, आलवेदर रोड को लेकर हो रहे काम को ऐतिहासिक बनाया।

PM Narendra Modi Uttarakhand Visit: Rally in Haldwani, huge rush geathered, photosप्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने हल्द्वानी (नैनीताल) में आयोजित कार्यक्रम में कुल 17 हजार 547 करोड रूपए के विकास कार्यों का लोकार्पण एवं शिलान्यास किया। इसमें  3 हजार 420 करोड रूपए़ की 06 योजनाओं का लोकार्पण औरं  14 हजार 127 करोड़ रूपए की 17 योजनाओं का शिलान्यास किया।

उत्तराखंड के लोगों का सामर्थ्य, इस दशक को उत्तराखण्ड का दशक बनाएगा

प्रधानमंत्री ने विकास परियोजनाओं के लिए उत्तराखण्ड की जनता को बधाई देते हुए कहा कि आज कुमाऊँ आने का सौभाग्य मिला तो कई पुरानी यादें ताजा हो गई हैं। और ये इतनी आत्मीयता से आपने जो उत्तराखंडी टोपी मुझे पहनाई गई है, वो उसे पहनकर मुझे गर्व का अनुभव हो रहा है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को युवा, कर्मठ और लोकप्रिय मुख्यमंत्री बताते हुए  कहा कि उत्तराखण्ड में तेजी से हो रहे विकास को और तेजी से करना है। उत्तराखंड के लोगों का सामर्थ्य, इस दशक को उत्तराखण्ड का दशक बनाएगा। उत्तराखंड में बढ़ रहा आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर, चार धाम महापरियोजना, नए बन रहे रेल रूट्स, इस दशक को उत्तराखण्ड का दशक बनाएंगे।

आपके सपने, हमारे संकल्प

प्रधानमंत्री ने कहा कि आपके सपने, हमारे संकल्प हैं, आपकी इच्छा, हमारी प्रेरणा है, और आपकी हर आवश्यकता को पूरा करना हमारी जिम्मेदारी है। आज दिल्ली और देहरादून में सत्ताभाव से नहीं, सेवाभाव से चलने वाली सरकारें हैं। उत्तराखंड तेज विकास की रफ्तार को और तेज करना चाहता है। प्रधानमंत्री ने कहा कि इस मिट्टी की ताकत को जानता हूं। बढ़ रहा इन्फ्रास्ट्रक्चर, चारधाम परियोजना, रेल परियोजना, नये हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट, बढ़ रही औद्योगिक क्षमता, टूरिज्म सेक्टर में बढ़ रही सुविधाएं, होम स्टे, प्राकृतिक खेती, हर्बल उत्पाद से ये दशक उत्तराखण्ड का दशक होगा। सबका साथ, सबका विकास से उत्तराखण्ड और देश का विकास हो रहा है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि एम्स के सैटेलाईट सेंटर और पिथौरागढ़ के मेडिकल कालेज से कुमाऊं और तराई क्षेत्र के लोगों के लिए विश्व स्तरीय स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध होंगी। विभिन्न सड़क प्रोजेक्ट कुमाऊं को बेहतर कनेक्टीवीटी देंगे। टनकपुर-बागेश्वर रेल लाईन पर भी जल्दी से काम शुरू होगा। ये सभी शिलान्यास, पत्थर मात्र नहीं हैं, ये हमारी संकल्प शिलाएं हैं। जिन्हें कि हमारी सरकार सिद्ध करके दिखाएगी।  प्रधानमंत्री ने कहा कि हल्द्वानी को नये साल की एक और सौगात दी जाएगी। हल्द्वानी के ऑवरऑल विकास के लिए 2 हजार करोड़ की योजनाएं लाएंगे जिससे यहां अभूतपूर्व विकास होगा।

दशकों से लटकी परियोजनाएं हो रही पूरी

प्रधानमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड से कितनी ही नदियां निकलती हैं। आजादी के बाद से ही, यहां के लोगों ने दो धाराएं और देखी हैं। एक धारा है- पहाड़ को विकास से वंचित रखने की। और दूसरी धारा है- पहाड़ के विकास के लिए दिन रात एक कर देने की। प्रधानमंत्री ने कहा कि जब हम किसी ऐतिहासिक स्थल पर जाते हैं तो वहां हमें ये बताया जाता है कि इस स्थान को इतने साल पहले बनाया गया था, ये इमारत इतनी पुरानी है। दशकों तक देश का ये हाल रहा है कि बड़ी योजनाओं की बात आते ही कहा जाता था- ये योजना इतने साल से अटकी है, ये प्रोजेक्ट इतने दशक से अधूरा है। आज यहां उत्तराखंड में जिस लखवाड़ प्रोजेक्ट का काम शुरू हुआ है, उसका भी यही इतिहास है। इस परियोजना के बारे में पहली बार 1976 में सोचा गया था। आज 46 साल बाद, हमारी सरकार ने इसके काम का शिलान्यास किया है।

गंगोत्री से गंगासागर तक स्वच्छ भारत मिशन

प्रधानमंत्री ने कहा कि गंगोत्री से गंगासागर तक हम एक मिशन में जुटे हैं। शौचालयों के निर्माण से, बेहतर सीवरेज सिस्टम से और पानी के ट्रीटमेंट की आधुनिक सुविधाओं से गंगा जी में गिरने वाले गंदे नालों की संख्या तेजी से कम हो रही है। केंद्र सरकार ने नैनीताल के देवस्थल पर भारत की सबसे बड़ी ऑप्टिकल टेलीस्कोप भी स्थापित की है। इससे देश-विदेश के वैज्ञानिकों को नई सुविधा तो मिली ही है, इस क्षेत्र को नई पहचान मिली है।

सेना और सैनिकों को मजबूत किया

प्रधानमंत्री ने कहा कि कनेक्टिविटी के साथ-साथ राष्ट्रीय सुरक्षा के हर पहलू को अनदेखा किया गया। हमारी सेना और सैनिकों को सिर्फ और सिर्फ इंतजार ही कराया। पहले की सरकारों ने सीमावर्ती राज्य होने के बावजूद कैसे इस क्षेत्र की अनदेखी की, ये राष्ट्ररक्षा के लिए संतानों को समर्पित करने वाली कुमाऊं की वीर माताएं भूली नहीं हैं। हमारी सरकार ने सैनिकों का मान बढ़ाया। उनकी वन रैंक वन पेंशन की मांग को पूरा किया। उच्च कोटि के हथियार उपलब्ध कराकर सेना को मजबूत किया। अब हमारी सेना को दुश्मन को करारा जवाब देने के लिए अनुमति का इंतजार नहीं करना पड़ता।

प्रधानमंत्री भारतीय संस्कृति की पताका विश्व में लहरा रहे : मुख्यमंत्री

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का देवभूमि उत्तराखण्ड में स्वागत करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री जी, स्वामी विवेकानंद जी की तरह भारतीय संस्कृति की पताका को पूरे विश्व में लहरा रहे हैं, सरदार वल्लभभाई पटेल जी की तरह राष्ट्र को सुदृढ़ एवं संगठित बना रहे हैं, बाबा साहेब भीमराव आंबेडकर की तरह दलितों एवं वंचितों की चिंता कर रहे हैं और पंडित दीनदयाल उपाध्याय जी के आदर्शों पर चलते हुए अंत्योदय के स्वप्न को साकार करने के लिए कार्य कर रहे हैं। प्रधानमंत्री जी जिस कठिन परिश्रम द्वारा भारत को पुनः विश्व गुरू बनाने के प्रति प्रयत्नशील है वह न केवल मेरे जैसे सामान्य व्यक्ति को और अधिक परिश्रम करने के लिए प्रेरित करता है बल्कि सवा सौ करोड़ भारतीयों में आशा एवं विश्वास का बीज रोपित करता है।

कोरोना महामारी में किये गये कार्यों की विश्वभर में हुई सराहना

मुख्यमंत्री ने कहा कि कोरोना महामारी से निपटने के लिए भारत द्वारा प्रधानमंत्री जी के नेतृत्व में किए जा रहे कार्यों की न केवल डब्ल्यूएचओ जैसे संगठनों ने सराहना की है बल्कि अन्य देश भी भारत द्वारा दिखाए गए अदम्य साहस, विश्वास एवं जीवटता की भूरि-भूरि प्रशंसा करते हैं। कोरोना काल में जहां एक ओर प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना ने करोड़ो लोगों के दो वक्त का भोजन सुनिश्चित किया है, वहीं आयुष्मान भारत योजना ने देश के नागरिकों को यह भरोसा दिलाया कि बीमार होने पर उन्हें निःशुल्क उपचार अवश्य मिलेगा। सर्वस्पर्शी विकास को लेकर प्रधानमंत्री जी की सोच कितनी व्यापक है ये नमामि गंगे, स्वच्छता अभियान, नई शिक्षा नीति, इन्द्रधनुष योजना, वन नेशन वन राशन कार्ड जैसी अनेकों जनकल्याणकारी योजनाओं से प्रदर्शित होता है।

राम मंदिर निर्माण का मार्ग प्रशस्त, धारा 370 का दाग मिटा

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री जी के नेतृत्व का ही कमाल है कि आज जहां एक ओर धारा 370 का काला दाग भारतीय संविधान से मिटा, वहीं भारत के राष्ट्र पुरुष मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम के भव्य मंदिर के निर्माण का मार्ग प्रशस्त हुआ। इसके साथ-साथ आज हम देखते हैं भव्य और दिव्य काशी का जो स्वप्न पंडित मदन मोहन मालवीय जी ने देखा था वो स्वप्न प्रधानमंत्री जी के नेतृत्व में साकार हो रहा है। प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में अयोध्या एवं काशी के कायाकल्प के साथ-साथ केदारपुरी के पुनर्निर्माण की यात्रा भी अत्यन्त ही रोचक है। जिस यात्रा का साक्षी मैं स्वयं भी हूं।

प्रधानमंत्री के मार्गदर्शन में उत्तराखण्ड उन्नति पथ पर अग्रसर

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी की विकास केंद्रित नीतियों पर चलकर ही आज उत्तराखण्ड उन्नति की राह पर अग्रसर है। उत्तराखंड के सतत विकास के प्रति यह आदरणीय प्रधानमंत्री जी के समर्पण का ही नतीजा है कि आज उनके द्वारा साढ़े सत्रह हजार करोड़ से अधिक की विकास योजनाओं का लोकार्पण व शिलान्यास किया गया है। जिसमें पांच हजार सात सौ सैंतालीस करोड़ रूपये की लखवाड़ बहुउद्देशीय परियोजना भी शामिल है। इस परियोजना से 300 मेगावाट जल विद्युत का उत्पादन होगा जिससे हमारा प्रदेश न केवल ऊर्जा के क्षेत्र में एक ’’पावर हाउस’’ बनेगा बल्कि हमारे यहां बड़े स्तर पर रोजगारों का सृजन भी होगा। साथ ही साथ इस परियोजना से 6 राज्यों को पीने का पानी भी उपलब्ध होगा।

मुख्यमंत्री ने कहा कि चाहे नजूल का मुद्दा हो, बंगाली समाज को पूर्वी पाकिस्तानी शब्द सम्बोधन से मुक्त करना हो या गन्ने का समर्थन मूल्य बढ़ाना हो, हमारी सरकार इन सभी समस्याओं को प्रधानमंत्री जी के ही सहयोग से दूर कर सकी है।  केन्द्र सरकार की ओर से कुमाऊं संभाग में लगभग 500 करोड़ से अधिक की लागत से एम्स का सेटेलाईट सेंटर के प्रारम्भ होने के पश्चात उत्तराखण्ड भारत का वह पहला राज्य बन जाएगा जहां एम्स के अतिरिक्त एम्स का सेटेलाइट सेंटर भी स्थापित होगा। पहाड़ के दुर्गम क्षेत्रों तक उच्च स्तरीय स्वास्थ्य सुविधाएं पहुंचाने के उद्देश्य से 455 करोड़ रुपये की लागत से पिथौरागढ़ में मेडिकल कॉलेज के निर्माण का मार्ग भी प्रशस्त हो गया है।  सरकार चारधाम कॉरिडोर की तर्ज पर कुमाऊं क्षेत्र में मानस खंड कॉरिडोर बनाने के लिए भी प्रयासरत है। इससे जहां एक ओर क्षेत्र में पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा, वहीं दूसरी ओर पूरे कुमाऊं के आधारभूत ढांचे को भी बल मिलेगा।

सपने हो रहे साकार

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री जी के नेतृत्व में हमने कनेक्टिविटी को विकास का मूल मानकर कार्य किया है। पहाड़ पर रेल का जो स्वप्न उत्तराखण्ड की कई पीढ़ियां वर्षों से देख रहीं थीं वो भी अब साकार होता प्रतीत हो रहा है। टनकपुर-बागेश्वर रेललाइन परियोजना भी इसी का एक उदाहरण है। विगत चौवालिस वर्षों से लंबित जमरानी बांध एवं पेयजल योजना प्रधानमंत्री जी के प्रयासों से शीघ्र ही प्रारम्भ होने जा रही है। हल्द्वानी में एकीकृत शहरी मूलभूत ढांचे के विकास (इन्टीग्रेटेड अर्बन इन्फ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट इन हल्द्वानी) के लिए केन्द्र सरकार के गंभीर प्रयासों से लगभग इक्कीस सौ करोड़ रूपये स्वीकृत हुए हैं। एक तरफ राज्य के आधारभूत ढांचे को मजबूत करने का काम किया जा रहा है वहीं पर्यटन, रोजगार और पलायन जैसे विषयों पर भी ठोस रणनीति बना कर प्रो एक्टिव मोड़ में कार्य किये जा रहे हैं। हमारी होम स्टे योजना पर्यटन और पर्यटन केंद्रित रोजगार के क्षेत्र में नित नए आयाम स्थापित कर रही है।

जनरल बिपिन रावत के सपनों को पूरा कर रही सरकार

मुख्यमंत्री ने कहा कि स्वर्गीय जनरल बिपिन रावत जी का असमय हमारे बीच से चले जाना जहां एक ओर देश और प्रदेश की अपूरणीय क्षति है, वहीं मेरे लिए भी यह एक निजी क्षति है। उनके दो ही ध्येय थे, सेना का सुदृढीकरण और उत्तराखंड की उन्नति। इन्हीं दो उद्देश्यों को लेकर हमारी केन्द्र व राज्य सरकारें निरन्तर कार्य कर रही हैं। आज हमें गर्व है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व में सेना का मनोबल और उसका आत्मसम्मान लगातार बढ़ रहा है। आधुनिक हथियारों और साजो सामान से जहां सेना को और भी अधिक सशक्त बनाया जा रहा है वहीं उन्हें दुश्मन को जवाब देने के लिए अब दिल्ली की ओर भी नहीं देखना पड़ता। गलवान घाटी हो या कश्मीर से लेकर कच्छ तक का इलाका… आज हमारे बहादुर सैनिक दुश्मन को उसी की भाषा में मुंहतोड़ जवाब देते हैं। आज सीमा से सटे इलाकों में जिस प्रकार से सड़कों और पुलों को निर्माण किया जा रहा है वो भी अपने आप में अभूतपूर्व है।

वर्ष 2025 तक उत्तराखण्ड को बनाएंगे श्रेष्ठ राज्य

मुख्यमंत्री ने कहा कि हमने हर विभाग से अगले दस साल का रोड मैप मंगवाया है, ताकि हम भविष्य की आवश्यकताओं के अनुरूप राज्य के विकास का खाका खींच सकें। उत्तराखण्ड को लेकर हमारी नीति और नीयत,  दोनों ही स्पष्ट हैं, ईमानदार हैं। आज हमारा उत्तराखण्ड विकास चाहता है। हमारा उत्तराखण्ड संभावनाओं से भरा आकाश चाहता है। हमारा उत्तराखण्ड अपने सपनों को साकार करना चाहता है और भाईयो-बहनो, उत्तराखण्ड फिर एक बार हमारी सरकार चाहता है।  जिस विकास पथ पर अपना उत्तराखण्ड बढ़ चला है, हमें इस यात्रा को रुकने नहीं देना है। हमने अपने प्रदेश को, राज्य की रजत जयंती वर्ष 2025 तक भारत का सर्वश्रेष्ठ राज्य बनाना है। हम ’’विकल्प रहित संकल्प’’ के मंत्र के अनुयायी हैं और उत्तराखण्ड के विकास के लिए यही हमारा अंतिम ध्येय है।

इस अवसर पर उत्तराखंड के राज्यपाल ले.ज.(से.नि.) गुरमीत सिंह, केन्द्र सरकार के  रक्षा राज्यमंत्री अजय भट्ट, भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष मदन कौशिक, पूर्व मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा, त्रिवेन्द्र सिंह रावत, तीरथ सिंह रावत, सांसद डा. रमेश पोखरियाल निशंक, अजय टम्टा, माला राज्यलक्ष्मी शाह, राज्यसभा सांसद नरेश बंसल, उत्तराखण्ड के कैबिनेट मंत्री डा. हरक सिंह रावत, सुबोध उनियाल, बिशन सिंह चुफाल, गणेश जोशी, अरविंद पाण्डेय, बंशीधर भगत, डा. धन सिंह रावत, रेखा आर्या, स्वामी यतीश्वरानंद तथा कई विधायक उपस्थित रहे।

इस दौरान हुए लोकार्पण

1. राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या 74 पर नगीना से काशीपुर कुल 99 किलोमीटर में सड़क का चौड़ीकरण : इस पर कुल  2536 करोड़ रूपये की लागत आई है। इसमें 6 बड़े ब्रिज, 19 छोटे ब्रिज, 2 रेलवे ओवरब्रिज और 36 अंडरपास बनाए गए हैं। इससे यात्रियों को आने जाने में समय व ईंधन की बचत होगी। ट्रैफिक जाम से मुक्ति मिलेगी। क्षेत्र में पर्यटन, औद्योगिक और वाणिज्यिक गतिविधियों में वृद्धि होगी। इससे रोजगार के अवसरों में प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष बढ़ोतरी होगी।

2. राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या 125 पर टनकपुर-पिथौरागढ़ रोड़ पर च्युरानी से ऐंकोली 32 किलोमीटर मे सड़क चौड़ीकरण : ऑल वेदर रोड़ प्रोजेक्ट के अंतर्गत इस पर 284 करोड़ रूपए की लागत आई है। इस मार्ग के निर्माण से जनपद पिथौरागढ़ की चीन से लगी अंतर्राष्ट्रीय सीमा में सैन्य आवागमन की सुलभता के साथ-साथ ही कैलाश मानसरोवर यात्रा के लिए भी ऑलवेदर उपलब्धता सुनिश्चित हुई है।

3. राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या 125 पर टनकपुर-पिथौरागढ़ रोड़ पर बिलखेत से चम्पावत-29 किलोमीटर मे सड़क चौड़ीकरण : इस पर 267 करोड़ रूपए की लागत आई है। इस मार्ग के निर्माण से भी जनपद पिथौरागढ़ की चीन से लगी अंतर्राष्ट्रीय सीमा में सैन्य आवागमन की सुलभता के साथ-साथ ही कैलाश मानसरोवर यात्रा के लिए भी ऑलवेदर उपलब्धता सुनिश्चित हुई है।

4. राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या 125 पर टनकपुर-पिथौरागढ़ रोड़ पर तिलोन से च्युरानी-28 किलोमीटर मे सड़क चौड़ीकरण : इस पर 233 करोड़ रूपए की लागत आई है। राज्य के दुर्गम व दूरस्थ क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को इसका काफी लाभ मिलेगा। इसका सामरिक महत्व के साथ ही कैलाश मानसरोवर यात्रा की दृष्टि से भी महत्व है।

5. सुरिनगाड फेज- II जलविद्युत परियोजना : मुन्स्यारी, पिथौरागढ़ में उत्तराखण्ड जल विद्युत निगम की रन ऑफ रिवर परियोजना‘सुरिनगाड फेज- II जलविद्युत परियोजना’ का निर्माण किया गया है। 5 मेगावाट विद्युत क्षमता की इस परियोजना पर 50 करोड़ रूपए की लागत आई है। इससे विद्युत उत्पादन के साथ ही स्थानीय ग्रामीणों के लिए रोजगार के अवसर उत्पन्न होंगे।

6. नमामि गंगे कार्यक्रम के अन्तर्गत 50 करोड़ रुपए की लागत से रामनगर, नैनीताल में सीवरेज कार्य :  नमामि गंगे कार्यक्रम के अन्तर्गत स्वीकृत 50 करोड़ रुपए की लागत से रामनगर, नैनीताल में 7 एमएलडी और 1.5 एमएलडी क्षमता के दो सीवरेज ट्रीटमेन्ट प्लान्ट एवं तत्सम्बन्धी कार्यो का निर्माण किया जा चुका है, जिसके अन्तर्गत 06 नालो को टैप कर इन्हें निर्मित एसटीपी से जोड़ा गया है। इससे कोसी नदी को प्रदूषित होने से रोका गया है।

इस दौरान हुए शिलान्यास :

1. लखवाड़ बहुद्देशीय परियोजना : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी की दृढ़ इच्छा शक्ति से दशकों से लम्बित राष्ट्रीय महत्व की परियोजना लखवाड़ बहुद्देशीय परियोजना अब साकार होने जा रही है। इसके जलाशय में 330 मिलियन क्यूबिक मीटरसंचित जल से उत्तराखण्ड, हिमाचल प्रदेश, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, राजस्थान और दिल्ली राज्यों को सिंचाई एवं पीने के पानी की आपूर्ति होगी। साथ ही यमुना नदी के पुनरूद्धिकरण की दिशा में प्रगति होगी। लगभग 33 हजार 780 हेक्टेयर अतिरिक्त भूमि की सिंचाई होगी। इस परियोजना से 300 मेगावाट जलविद्युत का भी उत्पादन होगा। परियोजना की कुल लागत 5747 करोड़ रूपए है। इससे ऊपरी यमुना क्षेत्र के विकास के साथ बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर उत्पन्न होंगे।

2. मुरादाबाद-काशीपुर 4 लेन रोड : कुल 4002 करोड़ रूपए की लागत से 85.3 किलोमीटर लम्बाई की 4 लेन मुरादाबाद-काशीपुर रोड राज्य के कुमांयू व गढ़वाल की कनैक्टीविटी को मजबूत करेगी। कार्बेट जाने में इससे 1.5 घंटे की बचत होगी। इसमें मुरादाबाद एवं काशीपुर बाईपास इस हाईवे पर निर्बाध यातायात सुनिश्चित करेगा। राज्य के कुमांऊ व तराई क्षेत्र के लिए यह एक बडी देन है।

3. जल जीवन मिशन के तहत 73 जलापूर्ति योजनाएं : प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी द्वारा हर घर को नल से जल के लिए महत्वाकांक्षी परियोजना 15 अगस्त, 2019 को प्रारम्भ की गई है। उत्तराखण्ड में जल जीवन मिशन के तहत वर्ष 2023 तक हर ग्रामीण घर को नल से जल उपलब्ध कराए जाने का लक्ष्य रखा गया है। इसमें बहुत तेजी से कार्य किया जा रहा है। वर्तमान में 15 लाख 18 हजार ग्रामीण घरों के सापेक्ष 7 लाख 50 हजार से अधिक घरों को पानी का कनेक्शन दिया जा चुका है। शेष को भी निर्धारित समय से पानी का कनेक्शन देने के लिए तेजी से प्रयास किये जा रहे है। इसी के तहत 13 जिलों में 73 पम्पिंग पेयजल योजनाओं का शिलान्यास किया गया है, जिसकी कुल लागत 1250 करोड़ है, इन योजनाओं के निर्माण उपरान्त प्रदेश के 1 लाख 33 हजार ग्रामीण परिवार लाभान्वित होंगे। पर्वतीय जनपदों में ऊंचाई के क्षेत्र में पम्पिंग द्वारा पेयजल आपूर्ति पश्चात् ग्रामीणों का श्रम एवं समय की बचत होगी तथा पेयजल की उपलब्धता से पलायन की समस्या का भी समाधान होने के साथ होम स्टे में रोजगार के अवसर में वृद्धि होगी।

4. पीएमजीएसवाई के अंतर्गत 133 सड़कों का डामरीकरण : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा नेशनल हाईवे के निर्माण के साथ-साथ गांवों को भी सड़क मार्ग से जोड़ने का काम किया गया है। डबल इंजन सरकार में प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना में उत्तराखण्ड में उल्लेखनीय कार्य हुए है। पी.एम.जी.एस.वाई के तहत कुल 627 करोड़ रूपए की लागत से प्रदेश में 133 सड़कों का डामरीकरण किया जायेगा। इनकी कुल लम्बाई 1157 किलोमीटर होगी। इससे निश्चित तौर पर राज्य की ग्रामीण अर्थव्यवस्था सुदृढ़ होगी और बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर उत्पन्न होंगे।

5. एम्स का सैटेलाइट सेंटर : ऊधमसिंहनगर में लगभग 500 करोड़ रूपये की लागत से एम्स का सैटेलाईट सेंटर स्थापित किया जा रहा है। यह उत्तराखण्ड को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी की एक बड़ी सौगात है। ऊधमसिंहनगर में एम्स के सैटेलाईट सेंटर से राज्य के कुमांऊ व तराई क्षेत्र के लोगों को विश्व स्तरीय स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध होंगी। एम्स ऋषिकेश, यहां के लोगों के लिए दूर पड़ता है। साथ ही उत्तर प्रदेश के सीमावर्ती क्षेत्रों से भी आने वाले जन-सामान्य को भी बेहतर चिकित्सा सुविधा का लाभ मिल पायेगा।

6. जगजीवन राम राजकीय मेडिकल कालेज, पिथौरागढ़ :  प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के मार्गदर्शन में डबल इंजन सरकार के समय राज्य में हेल्थ इंफ्रास्ट्रक्चर में काफी विस्तार हुआ है। सरकार की कोशिश है कि राज्य के दूरस्थ व दुर्गम क्षेत्रों तक उच्च स्तरीय स्वास्थ्य सुविधाएं पहुंचे। इसी क्रम में 455 करोड़ रूपए की लागत से जनपद पिथौरागढ़ में जगजीवन राम राजकीय मेडिकल कालेज बनाया जा रहा है।

7. पीएमजीएसवाई के अंतर्गत 151 सेतु का निर्माण : प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना में 151 सेतु बनाए जाएंगे। इन सभी कार्यों को सितम्बर, 2022 तक पूर्ण किये जाने का लक्ष्य है। इन सेतुओं के निर्माण के फलस्वरूप निर्मित मार्गों पर बारहमासी यातायात की सुविधा में वृद्धि होगी। इससे प्रदेश की ग्रामीण कनेक्टिविटी मजबूत होगी।

8. हरिद्वार व नैनीताल में जलापूर्ति योजनाएं : विश्व बैंक कार्यक्रम के अन्तर्गत स्वीकृत पैरी अरबन क्षेत्रों हेतु हरिद्वार के जगजीतपुर, बहादराबाद व ढ़ढेरा जलापूर्ति योजना से 14 हजार 496 उपभोक्ता कनैक्शन दिये जाएंगे और 1,03,080 जनसंख्या लाभान्वित होगी। इससे मानको के अनुरुप क्वॉलिटी पानी की सतत आपूर्ति सुनिश्चित होगी। इसी प्रकार हल्द्वानी (नैनीताल) में गौजाजाली उत्तर जलापूर्ति योजना से 2 हजार 423 प्राइवेट उपभोक्ताओं को पानी के कनेक्शन दिये जाएंगे, जिससे 12 हजार 408 जनसंख्या लाभान्वित होगी। इससे मानकों के अनुरूप  24X7 क्वालिटी जल की सत्त आपूर्ति सुनिश्चित होगी।

9. नमामि गंगे के अंतर्गत जनपद ऊधमसिंहनगर में नदी पुनरुद्धार :  ऊधमसिंहनगर में 6 स्थानीय नदियों में प्रदूषण रोकने के लिए 9 एस.टी.पी. नमामि गंगे कार्यक्रम में स्वीकृत किये गये है, जिसके अन्तर्गत 17 नालों को टेप करके दूषित जल को इन एस.टी.पी. के द्वारा शोधित किया जाएगा। इस योजना में काम्प्रीहेन्सिव को-ट्रीटमेंट और स्लज ट्रीटमेंट सुविधा युक्त एस.टी.पी. का निर्माण किया जा रहा है, जो कि उत्तराखण्ड में इस प्रकार का पहला प्रोजेक्ट है। इसके अतिरिक्ति दूरवर्ती क्षेत्रों में 3 पैकेज्ड एस.टी.पी. भी स्थापित किये जाएंगे। इस पर कुल लागत 199 करोड़ रूपए आएगी।

10. प्रधानमंत्री आवास योजना में 2424 आवासीय इकाइयों का निर्माण : आवास और शहरी कार्य मंत्रालय, भारत सरकार की प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) एवं आवास विभाग उत्तराखण्ड सरकार की उत्तराखण्ड जनआवास योजना के अंतर्गत जिला उधमसिंह नगर के सितारगंज में 1168 आवास एवं काशीपुर में 1256 आवास कुल 2424 आवास अल्प आय वर्ग हेतु बनाए जा रहे हैं। उक्त आवासों के निर्माण में कुल रू. 171 करोड़ की लागत आयेगी। आगामी 02 वर्षों में यह आवास आवंटियों को निवास हेतु उपलब्ध हो जायेंगे। उक्त योजना में प्रति आवास मात्र रू0 6 लाख मूल्य के सापेक्ष प्रत्येक लाभार्थी को प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) के अन्तर्गत रू. 1 लाख 50 हजार तथा उत्तराखण्ड जनआवास योजना अंतर्गत रू. 1 लाख कुल रू. 2 लाख 50 हजार का अनुदान प्राप्त होगा। शेष रू. 3 लाख 50 हजार लाभार्थी द्वारा 02 वर्षों में निर्माण की प्रगति के सापेक्ष भुगतान किया जाना होगा। लाभार्थी के अंशदान हेतु बैंकों द्वारा गृह ऋण की सुविधा भी उपलब्ध करायी जा रही है। इन परियोजनाओं में गेट बन्द कॉलोनी के साथ-साथ, सड़क, नाली, सीवर शोधक संयन्त्र, सामुदायिक सुविधायें, विद्युत एवं स्वच्छ पेयजल की सुविधा उपलब्ध होगी। इन परियोजनाओं के निर्माण से 2424 दुर्बल आय वर्ग के परिवारों का अपने घर का सपना पूर्ण हो सकेगा।

11. एरोमा पार्क : सगंध क्षेत्र के कृषकों की उपजों को स्थानीय स्तर पर बेहतर बाजार उपलब्ध कराने और उद्योगों को उनकी आवश्यकानुसार एकीकृत सुविधा उपलब्ध कराने के लिएसिडकुल द्वारा काशीपुर में 41 एकड़ में एरोमा पार्क विकसित किया जा रहा है। एरोमा पार्क में परीक्षण प्रयोगशाला सी.ई.टी.पी., लॉजिस्टिक एवं पार्किंग की सुविधाओं के साथ विश्वस्तरीय इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित किया जाएगा। 35 करोड़ रूपए की लागत से 6 माह में एरोमा पार्क का निर्माण पूर्ण कर लिया जाएगा।  एरोमा पार्क में 300 करोड़ रूपए से अधिक के निवेश की सम्भावना है, जिससे 2500 व्यक्तियों को प्रत्यक्ष रोजगार का अवसर उपलब्ध होने के साथ राज्य के सगंध कृषकों को अपनी उपज का उचित बाजार उपलब्ध होगा।

12. नैनीताल में सीवरेज कार्य : प्रदेश के मुख्य पर्यटन नगरों में से एक नैनीताल शहर में रू. 77 करोड़ 58 लाख लागत की इस परियोजनामें 3.04 कि.मी. सीवर लाइन तथा 17.5 एम.एल.डी के सीवर शोधन संयंत्र के निर्माण से लगभग 50 हजार जनसंख्या लाभान्वित होगी। इस परियोजना के निर्माण से नैनीताल झील को प्रदूषित होने से बचाया जा सकेगा। पर्यावरणीय दृष्टि से भी उपयोगी इस परियोजना के अन्तर्गत सीवर शोधन संयंत्र से प्राप्त शोधित जल को सिंचाई हेतु भी उपयोग किया जा सकेगा।

13. प्लास्टिक पार्क : भारत सरकार द्वारा घरेलू डाउन स्ट्रीम प्लास्टिक प्रसंस्करण उद्योगों की क्षमताओं को समेकित करने के लिए आवश्यकता आधारित प्लास्टिक पार्क योजना लागू की गई है। इसी के तहत सितारगंज में 40 एकड़ में प्लास्टिक औद्योगिक पार्क स्थापित किया जा रहा है। लगभग 66 करोड़ की लागत से इसमें आवश्यक इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित किया जा रहा है। एक साल में इसे पूर्ण कर लिया जाएगा। यहां लगभग 250 करोड़ रूपये के निवेश की सम्भावना है, जिससे 2500 व्यक्तियों को प्रत्यक्ष रोजगार के अवसर उपलब्ध होंगे।

14. मदकोटा से हल्द्वानी सड़क सुदृढिकरण : केन्द्रीय सड़क अवस्थापना निधि के अन्तर्गत गदरपुर-दिनेशपुर- मदकोटा- हल्द्वानी मोटरमार्ग (राज्य मार्ग सं.-5) को गदरपुर से हल्द्वानी तक दो-लेन पेव्ड शोल्डर सहित चौड़ीकरण एवं सुदृढ़ीकरण के कार्य हेतु 21.640 कि.मी. लम्बाई में रू. 58.06 करोड़ की लागत से निर्मित किया जा रहा है। यह मार्ग राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली व इस क्षेत्र के अन्य प्रमुख मैदानी नगरों को जोड़ने वाला मुख्य मार्ग है। पर्यटन स्थल नैनीताल, अल्मोड़ा, पिथौरागढ, कैलाश मानसरोवर आदि दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है। मार्ग के चौडीकरण से सिड़कुल इण्डस्ट्रीयल एरिया रूद्रपुर व इण्डस्ट्रीयल एरिया लालकुआ प्रत्यक्ष रूप से लाभान्वित होंगे। साथ ही प्रस्तावित अमृतसर इकोनोमिक इण्डस्ट्रीयल कोरीडोर के लिए भी प्रमुख मार्ग के रूप में कार्य करेगा।

15. किच्छा से पंतनगर सड़क सुदृढ़िकरण : केन्द्रीय सड़क अवस्थापना निधि के अन्तर्गत जनपद ऊधमसिंहनगर में नगला-किच्छा राज्य मार्ग संख्या-44 (किच्छा पन्तनगर मोटर मार्ग) का दो-लेन में पेव्ड शोल्डर सहित चौड़ीकरण एवं सुद्वढीकरण के कार्य हेतु 17.700 कि.मी. लम्बाई में रू. 53 करोड़ 73 लाख की लागत से स्वीकृत है। यह मार्ग सिड़कुल इण्डस्ट्रीयल एरिया व इण्डस्ट्रीयल एरिया लालकुॅआ को प्रत्यक्ष रूप से लाभान्वित करेगा। साथ ही प्रस्तावित अमृतसर इकोनोमिक इण्डस्ट्रियल कॉरिडोर के लिए प्रमुख मार्ग के रूप में कार्य करेगा।

16. किच्छा बाईपास : ऊधमसिंह नगर जिले में खटीमा बाईपास, कुमराहा गांव से प्रारम्भ होकर कुटारी गांव तक बनेगा। इस पर 1 बड़ा व 3 छोटे पुल प्रस्तावित हैं। 53 करोड़ की लागत से खटीमा बाईपास के निर्माण से यात्रियों के समय व ईंधन की बचत होगी। पिथौरागढ़ से बेहतर कनैक्टीविटी होगी। क्षेत्र का आर्थिक विकास होने से रोजगार के अवसर उत्पन्न होंगे। नेपाल से कनेक्टिविटी में भी सुधार होगा।

17. एशियन हाईवे के अंतर्गत नेपाल से कनेक्टीवीटी : एशियन हाईवे के अन्तर्गत नेपाल के साथ कनैक्टीविटी बढ़ाने के लिए 3.86 कि.मी. से लगभग 177 करोड़ रूपए की लागत से 4-लेन राष्ट्रीय राजमार्ग (एनएच 109 डी) का निर्माण किया जा रहा है। इसके अंतर्गत 02 वी.यू.पी., 01 एल.यू.वी.पी., 01 बड़ा ब्रिज कम अंडरपास व 01 आर.ओ.बी का निर्माण किया जाएगा। इससे उत्तराखण्ड व नेपाल में कनेक्टिविटी बेहतर होगी और बिना बाधा के यातायात व वस्तुओं का परिवहन होगा। इससे नेपाल के साथ आर्थिक गतिविधियों में वृद्धि होगी और आपसी संबंध और भी मजबूत होंगे।

इससे पूर्व करीब एक घंटे की देरी से दोपहर दो बजे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जनसभा स्थल पहुंचे। उनके पहुंचते ही सभा में मौजूद लोगों ने मोदी-मोदी के नारे लगाने शुरू कर दिये। मैदान इन नारों को गूंजायमान हो गया। मंच पर पहुंचकर पीएम मोदी ने हाथ हिलाकर जनता का अभिवादन किया। सीएम पुष्कर सिंह धामी ने पीएम मोदी का शॉल ओढ़ाकर व भाजपा अध्यक्ष मदन कौशिक ने उत्तराखंडी टोपी पहनाकर स्वागत किया। (डॉ.नवीन जोशी) आज के अन्य ताजा ‘नवीन समाचार’ पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें।

यह भी पढ़ें : आज 12 वर्ष बाद नैनीताल जनपद आकर उत्तराखंड को नव वर्ष पर करीब साढ़े 17 हजार करोड़ रुपए की योजनाओं का तोहफा देंगे प्रधानमंत्री मोदी, यहाँ देखें लाइव..

डॉ. नवीन जोशी @ नवीन समाचार, नैनीताल, 30 दिसंबर 2021। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 2009 के लोकसभा चुनाव से पहले नैनीताल आए थे। इसके करीब 12 वर्ष बाद, और अपने प्रधानमंत्री के कार्यकाल में पहली बार मोदी आज 30 दिसंबर को नैनीताल जनपद में हल्द्वानी आ रहे हैं। इस दौरान वह नव वर्ष की पूर्व संध्या पर उत्तराखंड को करीब साढ़े 17 हजार करोड़ रुपए की योजनाओं का तोहफा देंगे। इनमें करीब 14 हजार करोड़ की लागत वाली योजनाओं का शिलान्यास और करीब साढ़े तीन हजार करोड़ की योजनाओं का लोकार्पण शामिल है।

यहाँ प्रधानमंत्री मोदी को देखें लाइव :

यह भी आ चुके हैं हल्द्वानी 

इससे पहले वर्ष 1982 में प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी का नैनीताल आते हुए हल्द्वानी के एमबीपीजी कालेज में संक्षिप्त कार्यक्रम हुआ था। इसके बाद एचएमटी फैक्ट्री के उद्घाटन के लिए वर्ष 1985 में प्रधानमंत्री राजीव गांधी हल्द्वानी आए थे। जबकि वर्ष 1997 में डा. सुशीला तिवारी राजकीय चिकित्सालय का शुभारंभ के लिए प्रधानमंत्री एचडी देवगौड़ा हल्द्वानी आए थे। इस दौरान उन्होंने उत्तराखंड राज्य बनाने की घोषणा की थी, हालांकि वह राज्य बना नहीं पाए थे। गौरतलब है कि सोनिया गांधी भी हल्द्वानी आ चुकी हैं। उनकी हल्द्वानी के तत्कालीन पीपुल्स कॉलेज मैदान में जनसभा हुई थी।

सूत्रों के अनुसार प्रधानमंत्री हल्द्वानी में जिन 14 हजार करोड़ की योजनाओं का शिलान्यास करेंगे उनमें लखवाड़ जल विद्युत परियोजना, राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण की कई सड़कें, ऊधमसिंह नगर जिले में अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान का सेटेलाइट सेंटर, पिथौरागढ़ व रुद्रपुर में मेडिकल कालेज, भारतमाला सड़क परियोजना की कुछ सड़कें, हल्द्वानी रिंग रोड व नैनीताल के लिए करीब 74 करोड़ की सीवर ट्रीटमेंट की परियोजना आदि शामिल हैं। इसके अलावा लोकार्पित की जाने वाली परियोजनाओं में नगीना-काशीपुर राजमार्ग, नमामि गंगे के तहत नैनीताल में हुए कार्य, पिथौरागढ़ जिले में दो हाइडिल प्रोजेक्ट, ऑल वेदर रोड परियोजना की कुमाऊं से संबंधित सड़कें मुख्य रूप से हैं। शिलान्यास और लोकार्पण के बाद प्रधानमंत्री जनसभा को संबोधित करेंगे। इसका सभी को इंतजार है।

उल्लेखनीय है कि इससे पहले प्रधानमंत्री मोदी ने गत चार दिसंबर को देहरादून में 18 हजार करोड़ रुपये की लागत वाली परियोजनाओं का शिलान्यास व लोकार्पण करने के बाद जनसभा को संबोधित किया था। इसके बाद भाजपा के प्रांतीय नेतृत्व की ओर से कुमाऊं क्षेत्र के लिए भी प्रधानमंत्री का इसी तरह का कार्यक्रम निर्धारित करने का आग्रह केंद्रीय नेतृत्व से किया गया। पूर्व में प्रधानमंत्री का 24 दिसंबर का कार्यक्रम बना, लेकिन इसे आगे के खिसका दिया गया। अब 30 दिसंबर को प्रधानमंत्री का हल्द्वानी दौरा फाइनल हो गया है। आज के अन्य ताजा ‘नवीन समाचार’ पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें।

यह भी पढ़ें : 2009 में नैनीताल आए थे मोदी, यहां पहली बार दिखी थी ‘पीएम इन फ्यूचर’ की छवि, अब 12 वर्ष बाद जिले में आकर देंगे 17.5 हजार करोड़ रुपए के तोहफे

-अपनी फायरब्रांड हिंदूवादी नेता की छवि के विपरीत की थी गुजरात के विकास की बात
-यूपीए को ‘अनलिमिटेड प्राइममिनिस्टर्स एलाइंस’ और सोनिया, राहुल व प्रियंका गांधी के लिए किया था ‘एसआरपी’ शब्द का प्रयोग

2009 में नैनीताल के ऐतिहासिक डीएसए मैदान से जनसभा को संबोधित करते नरेंद्र मोदी।

डॉ. नवीन जोशी @ नवीन समाचार, नैनीताल, 29 दिसंबर 2021। देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी वर्ष 2009 में छह मई को लोक सभा चुनाव के दौरान गुजरात के मुख्यमंत्री रहते तत्कालीन भाजपा प्रत्याशी बची सिंह रावत के चुनाव प्रचार के लिए नैनीताल आए थे। नैनीताल में उस दौर की जनसभाओं के लिहाज से पहली बार भारी भीड़ उमड़ी थी, और लोग भाजपा के तत्कालीन ‘पीएम इन वेटिंग’, राष्ट्रीय लोकतांत्रिक गठबंधन के प्रधानमंत्री पद के प्रत्याशी लाल कृष्ण आडवाणी की जगह मोदी के मुखौटे चेहरों पर लगा कर रैली में आए थे। साफ था कि नैनीताल वासी तभी मोदी को भविष्य के प्रधानमंत्री के रूप में देख रहे थे। अब मोदी करीब 12 वर्ष के बाद 30 दिसंबर 2021 को नैनीताल जनपद के हल्द्वानी आ रहे हैं।

छह मई 2009 को नगर के ऐतिहासिक फ्लैट्स मैदान में मोदी की जनसभा हुई थी। इसके लिए भाजपाई कई दिनों से नैनीताल क्लब में बैठकें कर तैयारी कर रहे थे। तब आज के दौर की चुनावी जनसभाओं जैसे प्रबंध नहीं किए गए थे, परंतु मोदी की सुरक्षा के लिए जो ‘डी घेरा’ बना था, उसे नैनीतालवासियों ने पहली बार देखा था। छायाकारों ने पहली बार इतनी दूरी से मोदी की तस्वीरें ली थीं। मोदी ने इकलौते माइक से जनसभा को संबोधित किया था। उनके पीछे लगी इकलौती होर्डिंग में लालकृष्ण आडवाणी, राजनाथ सिंह, भुवन चंद्र खंडूड़ी, भगत सिंह कोश्यारी व तत्कालीन लोकसभा प्रत्याशी बची सिंह रावत की फोटो लगी थी और मंच पर बची सिंह रावत, बलराज पासी, मनोहर कांत ध्यानी, शांति मेहरा, गोपाल रावत, दिनेश आर्य व मनोज साह आदि भाजपाई मौजूद थे। इस दौरान उन्हें नगर के भाजपा कार्यकर्ताओं के द्वारा माता नंदा-सुनंदा की तस्वीर प्रतीक स्वरूप भेंट की गई थी।

यहां जनसभा के दौरान मोदी के भाषणों में गुजरात का विकास पूरी तरह से छाया हुआ था। अपनी रौ में मोदी ने यहां जो कहा, उसमें विकास का मतलब ‘गुजरात’ हो गया था और यूपीए सरकार के साथ ही एनडीए काल की ‘दिल्ली’ भी मानो कहीं गुम हो गई थी। उन्होंने यहां राजग के प्रधानमंत्री प्रत्याशी आडवाणी का नाम भी केवल एक बार उनके (आडवाणी के द्वारा) तत्कालीन प्रधानमंत्री डा.मनमोहन सिंह को कमजोर कहने के एक संदर्भ के अलावा कहीं नहीं लिया था।

देश का चुनाव होने के बावजूद मोदी यहां अपने भाषण में पूरी तरह गुजरात केंद्रित हो गऐ थे। उनकी आवाज में यह कहते हुऐ गर्व था कि कभी व्यापारियों का राज्य माना जाने वाला गुजरात उनकी विकास परक सरकार आने के बाद से न केवल औद्योगिक क्षेत्र में वरनएक अमेरिकी शोध अध्ययन रिपोर्ट के अनुसार खारे पानी के समुद्र और रेगिस्तान से घिरा गुजरात कृषि क्षेत्र में वृद्धि के लिए भी देश में प्रथम स्थान पर आ गया है। उन्होंने बताया, गरीबों के हितों के लिए चलाऐ जाने वाले 20 सूत्रीय कार्यक्रमों में गुजरात नंबर एक पर रहा है, साथ ही सूची में प्रथम पांच स्थानों पर भाजपा शासित और प्रथम 10 स्थानों पर एनडीए शासित राज्य ही हैं, जबकि एक भी कांग्रेस शासित राज्य इस सूची में नहीं है। इन आंकड़ों के जरिए उन्होंने पूछा कि ऐसे में कैसे ‘कांग्रेस का हाथ गरीबों व आम आदमी के साथ’ हो सकता है।

मोदी ने गुजरात की कांग्रेस शासित राज्य आसाम से भी तुलना की। कहा, दोनों राज्य समान प्रकृति के पड़ोसियों बांग्लादेश और पाकिस्तान से सटे हैं। आसाम के मुसलमान परेशान हैं कि वहां भारी संख्या में हो रही बांग्लादेशियों की अवैध घुसपैठ से उन्हें काम और पहले जैसी मजदूरी नहीं मिल रही। यूपीए नेता घुसपैठियों को वोट की राजनीति के चलते नागरिकता देने की मांग कर रहे हैं, वहीं पाकिस्तानी गुजरात में घुसने की हिम्मत करना तो दूर उनसे (मोदी से) डरे बैठे हैं। इस दौरान मोदी ने पूर्व की एनडीए सरकार की भी कोई उपलब्धि नहीं बताई, अलबत्ता उत्तराखंड की तत्कालीन खंडूड़ी के नेतृत्व वाली भाजपा सरकार की तारीफ अवश्य की। कहा, एकमात्र विकास ही देश को बचा सकता है। उस दौर में अपनी फायरब्रांड और कट्टर हिंदूवादी नेता की पहचान वाले मोदी नैनीताल में अपनी छवि के अनुरूप एक शब्द भी नहीं बोले, जिससे सुनने वालों में थोड़ी बेचौनी भी देखी गई थी।

इसके अलावा मोदी शब्दों को अलग विस्तार देने व अलग अर्थ निकालने की कला भी नैनीताल में दिखा गए थे। उन्होंने यूपीए को ‘अनलिमिटेड प्राइममिनिस्टर्स एलाऐंस’ यानी असीमित प्रधानमंत्रियों का गठबंधन करार दिया। कहा कि शरद पवार, लालू यादव, पासवान सहित यूपीए के सभी घटक दलों के नेता प्रधानमंत्री डा. मनमोहन सिंह के बजाय स्वयं को भावी प्रधानमंत्री बता रहे हैं, वहीं गांधी परिवार के अलावा कांग्रेस के एक भी वरिष्ठ नेता ने उनका नाम प्रधानमंत्री के रूप में नहीं लिया। उन्होंने गांधी परिवार के लिए ‘एसआरपी’ (सोनिया, राहुल व प्रियंका) शब्द का प्रयोग करते हुए पूछा, क्या एसआरपी ही देश का अगला प्रधानमंत्री तय करेंगे। आज के अन्य ताजा ‘नवीन समाचार’ पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें।

यह भी पढ़ें : नैनीताल के सात लोगों से सीधे ‘मन की बात’ करेंगे प्रधानमंत्री मोदी, डीएम के प्रयास हैं महत्वपूर्ण…

PM Narendra Modi Seeks Feedback On His NaMo App, Mahagathbandhan Features  In Surveyडॉ. नवीन जोशी @ नवीन समाचार, नैनीताल, 20 दिसंबर 2021। उत्तराखंड के नैनीताल जनपद के जिलाधिकारी धीराज गर्ब्याल द्वारा कुमाऊं मंडल विकास निगम के एमडी रहते अपने पूर्व कार्यकाल में की गई पहल रंग लाने लगी है। कुमाऊं मंडल में श्री गर्ब्याल के गृह क्षेत्र पिथौरागढ़ जनपद में कैलास मानसरोवर यात्रा के सीमावर्ती पड़ावों से लेकर अल्मोड़ा जनपद के बिन्सर, पौड़ी और इधर नैनीताल जनपद में विभिन्न स्थानों पर ‘होम स्टे’ लोगों की घर बैठे आजीविका, स्वरोजगार व रिवर्स पलायन का बड़ा माध्यम बना है। वर्ष 2018 में राजपथ पर गणतंत्र दिवस की परेड में उत्तराखंड की झांकी में शामिल होकर देश-दुनिया का ध्यान खींचने वाला उत्तराखंड का ‘होम स्टे’ मॉडल कोरोना काल में ‘वर्केशन’ यानी काम करते हुए लंबी छुट्टियां बिताने का एक नया माध्यम भी बना।

अब होम स्टे एक बार पुनः चर्चा में है। बताया जा रहा है कि देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी उत्तराखंड के नैनीताल जनपद के मुक्तेश्वर क्षेत्र के प्यूड़ा व सतोली गांवों में सफल तरीके से संचालित किए जा रहे ‘होम स्टे’ के सात चुनिंदा संचालकों से अपने नए ‘मन की बात’ संस्करण के तहत बात करेंगे और होम स्टे की सफलता के साथ-साथ संचालकों के अनुभवों को साझा करेंगे। जानकारी के अनुसार पीएम मोदी से पहले प्रदेश के सीएम पुष्कर धामी भी इन होम स्टे संचालकों के साथ बैठक करेंगे और उनकी समस्याओं को जानेंगे।

उल्लेखनीय है कि पिछले दिनों प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में वाराणसी में मुख्यमंत्री परिषद के सुशासन सम्मेलन में उत्तराखंड का होम स्टे चर्चा में रहा। इस सम्मेलन में सीएम पुष्कर सिंह धामी ने इस पर प्रस्तुतीकरण दिया था और इसकी पीएम मोदी ने तारीफ भी की थी। सीएम धामी ने स्वरोजगार के लिए इस योजना की प्रभावी तरीके से लागू करने की बात कही थी और बताया था कि राज्य सरकार स्वरोजगार के नए अवसर प्रदान करने होम स्टे पर विशेष ध्यान दे रही है।

प्रधानमंत्री मोदी इस प्रस्तुतीकरण से इतने प्रभावित हुए थे और उन्होंने होम स्टे संचालकों से बात करने की इच्छा जताई थी, लिहाजा आगामी ‘मन की बात’ कार्यक्रम में वह होम स्टे संचालकों से बात करेंगे और उनके अनुभवों को देशे के लोगों के साथ साझा करेंगे। इस हेतु जिला प्रशासन की ओर से तैयारियां की जा रही हैं।

बताया जा रहा है कि नैनीताल जिले में डीएम गर्ब्याल की पहल पर 150 से अधिक घरों में ठहरने की योजना शुरू की गई है। इसके अलावा जनपद में होम स्टे से ही जोड़कर ‘एस्ट्रो टूरिज्म’ योजना भी शुरू की जा रही है, जिसमें सैलानी शहरी व रात्रि में रोशनियों की चकाचौंध से दूर साफ आसमान में ग्रह-नक्षत्रों का भी दूरबीनों के माध्यम से अवलोकन करेंगे। इस तरह ग्रामीणों के साथ उनके घरों में रहते हुए सैलानी स्थानीय संस्कृति, परंपराओं, जीवन शैली, लोक कलाओं, लोक संगीत, ग्रामीण रहन-सहन के साथ स्थानीय उत्पादों व खान पान में रच-बस कर भी अवगत होंगे। आज के अन्य ताजा ‘नवीन समाचार’ पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें।

पीएम नरेंद्र मोदी
नवीन समाचार,  रामनगर,  13 फरवरी 2019। उत्तराखंड के ‘रॉयल बंगाल टाइगर’ बाघों सी चाल-ढाल वाले  प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आगामी 14 फरवरी को उत्तराखंड आगमन पर  देश के पहले जिम कार्बेट पार्क की सैर पर भी आ सकते हैं। इसे  एक बाघ की  दूसरे बाघों से  वेलेंटाइन मुलाकात भी कहा जा सकता है। कार्बेट पार्क के इतिहास में यह पहली बार होगा कि सैर सपाटे के सीजन में ढिकाला जोन में 13 फरवरी को रात्रि विश्राम और 14 को दिन के भ्रमण की इजाजत नहीं होगी। माना जा रहा है कि रुद्रपुर में 14 फरवरी की प्रस्तावित रैली में शामिल होने आ रहे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी यहां भ्रमण पर आ सकते हैं और इसी की तैयारी के तहत पार्क प्रशासन ने यह फैसला किया है।
कार्बेट पार्क प्रशासन ने मंगलवार को वेबसाइट पर 13 फरवरी के नाइट स्टे और 14 फरवरी को डे विजिट के निरस्त होने की जानकारी दी है। अचानक ही लिए गए इस निर्णय के पीछे असल वजह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का रुद्रपुर दौरा माना जा रहा है। सूत्रों के मुताबिक 14 फरवरी को रुद्रपुर में प्रस्तावित जनसभा में शामिल होने  से पहले ही प्रधानमंत्री कार्बेट पार्क की ओर रुख कर सकते हैं। सूत्रों की मानें तो पीएमओ से यह संकेत मिलने के बाद पार्क प्रशासन तैयारी में जुट गया है।  इस तैयारी में भाजपा के आला नेता भी शामिल हैं। प्रधानमंत्री की सुरक्षा को देखते हुए तैयारी को बेहद गोपनीय तरीके से अंजाम दिया जा रहा है। कोई भी अधिकारी अचानक डे और नाइट विजिट को निरस्त करने के पीछे का कारण बताने को तैयार नहीं है। यह तब है जबकि  कॉर्बेट में वीवीआईपी या वीआईपी के आने की जानकारी पहले ही मिल जाती है। ज्यादा जोर देने पर कहा जा रहा है कि ढिकाला जोन में ग्लोबल टाइगर फाउंडेशन की महत्वपूर्ण बैठक प्रस्तावित है। इसमें देश विदेश से प्रतिनिधि आएंगे। इस बैठक में कई सांसदों के आने की भी उम्मीद है। ऐसे में उनकी सुरक्षा और गोपनीयता को देखते हुए ढिकाला जोन को बंद किया गया है। यह तर्क भी पर्यटकों और कारोबारियों के गले नहीं उतर रहा है। कारण यह भी है कि कार्बेट पार्क को सीजन के दौरान अब से पहले कभी बंद नहीं किया गया। सीटीआर के निदेशक राहुल से भी संपर्क नहीं हो पा रहा है।

यह भी पढ़ें : नवीन समाचार एक्सक्लूसिवः क्या आपको पता है केदारनाथ के अलावा उत्तराखंड के कुमाऊं में यहां भी नरेंद्र मोदी ने की थी तपस्या

<

p style=”text-align: justify;”>-17 की उम्र में प्रधानमंत्री मोदी ने अल्मोड़ा में की थी तपस्या
-नरेंद्र मोदी पर बन रही फिल्म ‘मन बैरागी’ में दिखाया जाएगा अल्मोड़ा से मोदी का जुड़ाव, चुनाव से पूर्व फिल्म होगी प्रदर्शित

नैनीताल में मोदी को माता नंदा-सुनंदा के चित्र युक्त प्रतीक चिन्ह भेंट करते बची सिंह रावत, बलराज पासी व अन्य स्थानीय नेता (फाइल फोटो)।
फिल्म के स्थानीय प्रतिनिधि सगीर खान

नवीन जोशी @ नवीन समाचार, नैनीताल, 3 फ़रवरी 2019।

<

<

p style=”text-align: justify;”>p style=”text-align: justify;”>प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा उत्तराखंड में केदारनाथ के निकट गरुड़ चट्टी नाम के स्थान पर तपस्या करने की बात तो अब काफी लोगों को पता है किंतु यह बात शायद किसी को पता नहीं कि मोदी का उत्तराखंड के एक अन्य स्थान से भी गहरा संबंध रहा है। और अब तक इस स्थान के बारे में नरेंद्र मोदी ने भी कभी बात नहीं की है। लेकिन इधर प्रधानमंत्री मोदी पर बन रही एक फिल्म में राज्य के उस स्थान और उस स्थान पर मोदी द्वारा बिताये गये समय का बड़े स्तर पर जिक्र होने जा रहा है। ‘मन बैरागी’ नाम की यह फिल्म प्रधानमंत्री मोदी के 17 वर्ष की उम्र से उनके प्रधानमंत्री बनने के बीच की अवधि में उनके जीवन संघर्ष को बयां करने वाली है। फिल्म के निर्माताओं की कोशिश है कि फिल्म को आगामी लोक सभा चुनाव से पूर्व रिलीज किया जाये।
यूं उत्तराखंड को देवभूमि और इसके कण-कण में देवत्व होने की बात कही जाती है, लेकिन प्रदेश में सांस्कृतिक नगरी के नाम से प्रसिद्ध अल्मोड़ा नगर है जो धार्मिक-आध्यात्मिक आस्था से बचपन से ही ओतप्रोत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को सबसे पहले अपने पास खींच कर लाया था। फिल्म के प्रोडक्शन इंचार्ज जीतू भाई ने बताया कि उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी पर लंबा शोध एवं स्वयं मोदी से बात करने के बाद उनके जीवन के कई रहस्यों व उनके जीवन संघर्ष को लेकर इस फिल्म का निर्माण शुरू किया है।

इस तरह किशोरवय मोदी पहुंचे अल्मोड़ा

फिल्म ‘मन बैरागी’ की कहानी मोदी के देवभूमि अल्मोड़ा स्थित अद्भुत शक्तियों युक्त कसारदेवी मंदिर से शुरू होती है। जीतू ने बताया कि एक पंडित ने नरेंद्र मोदी के परिजनों को उनके सांसारिक मोह माया से विरत ‘बैरागी’ बनने की भविष्यवाणी की थी। इसलिये उनके परिजन 17 वर्ष की उम्र में ही उनके विवाह की योजना बना रहे थे। लेकिन इससे पहले ही आध्यात्म में रम चुके नरेंद्र विवाह से बचने के लिए अपने आदर्श स्वामी विवेकानंद के स्थान कलकत्ता के बेलूर मठ भाग आये। किंतु वहां उन्हें प्रवेश नहीं मिल पाया। उन्हें कहा गया कि मठ में केवल स्नातकों को ही प्रवेश दिया जाता है, और वे स्नातक नहीं थे, इसलिये उन्हें प्रवेश नहीं मिल सकता है। अलबत्ता वे स्वामी विवेकानंद के कसारदेवी, अल्मोड़ा स्थित सारदा मठ में प्रवेश ले सकते हैं, जहां स्वयं विवेकानंद भी अगस्त 1890 में कुमाऊं आगमन पर तपस्या कर चुके थे। इस पर नरेंद्र 17 वर्ष की उम्र में ही अल्मोड़ा के कसारदेवी मंदिर चले आये और यहां लंबे समय तक तपस्या की। फिल्म के स्थानीय प्रतिनिधि सगीर खान ने बताया कि गत 28 से 31 जनवरी तक कसारदेवी मंदिर में नरेंद्र मोदी द्वारा तपस्या करने के दृश्यों का फिल्मांकन किया गया है। आगे फिल्म की शूटिंग कोलकाता व गुजरात में होने जा रही है।

नासा के वैज्ञानिकों के अनुसार भी अद्भुत चुंबकीय शक्ति का विशेष पुंज है कसारदेवी में

कसारदेवी मंदिर

अल्मोड़ा से 5 किमी दूर स्थित दूसरी शताब्दी में बने कसार देवी मंदिर में महान भारतीय संन्यासी स्वामी विवेकानंद ने ध्यान-योग किया था। इस स्थान पर मौजूद ‘असीम’ शक्ति से नासा के वैज्ञानिक भी हैरान हैं। नासा के वैज्ञानिकों के अनुसार कसारदेवी दक्षिण अमेरिका के पेरू स्थित माचू-पिच्चू व इंग्लैंड के स्टोन हेंग की तरह अद्वितीय चुंबकीय शक्ति का केंद्र हैं। कसारदेवी मंदिर के आसपास वाला पूरा क्षेत्र ‘वैन एलेन बेल्ट’ कहा जाता है, जहां धरती के भीतर विशाल भू-चुंबकीय पिंड है। इस पिंड में विद्युतीय चार्ज कणों की परत होती है जिसे रेडिएशन भी कह सकते हैं। जानकारी के अनुसार पिछले कई सालों से नासा के वैज्ञानिक इस बैल्ट के बनने के कारणों एवं इनसे मानव मस्तिष्क या प्रकृति पर पड़ने वाले असर का पता लगाने में जुटे हैं।

अल्मोड़ा के निकट काकड़ीघाट में नरेंद्र से महर्षि बने थे स्वामी विवेकानंद

<

<

p style=”text-align: justify;”>p style=”text-align: justify;”>नैनीताल। देश के विचारवान युवाओं और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी व पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी बाजपेयी आदि अनेकानेक लोगों के आदर्श स्वामी विवेकानंद का नैनीताल-कुमाऊं-उत्तराखंड से गहरा संबंध रहा है। वस्तुतः यहीं उनके ‘बोधगया’ कहे जाने वाले काकड़ीघाट धाम में उनके ‘बोधिवृक्ष’ सदृश पीपल के पेड़ के नीचे उन्हें ‘समूचे ब्रह्मांड को एक अणु में दिखाने वाला’ ज्ञान प्राप्त हुआ और इसी पुण्यधरा ने उन्हें एक साधारण कमउम्र साधु नरेंद्र से स्वामी विवेकानंद और फिर राजर्षि विवेकानंद बनते हुए देखा।
उल्लेखनीय है कि 19वीं शताब्दी के उस दौर में सपेरों के देश माने जाने वाले भारत को दुनिया के समक्ष आध्यात्मिक गुरु के रूप में प्रवर्तित करने वाले युगदृष्टा राजर्षि विवेकानंद को आध्यात्मिक ज्ञान नैनीताल जनपद के काकड़ीघाट नाम के स्थान पर प्राप्त हुआ था। यानी सही मायनों में बालक नरेंद्र के राजर्षि विवेकानंद बनने की यात्रा देवभूमि के इसी स्थान से प्रारंभ हुई थी, और काकड़ीघाट ही उनका ‘बोध गया’ था। यहीं उनके अवचेतन शरीर में अजीब सी सिंहरन हुई, और वह यहीं ‘बोधि वृक्ष’ सरीखे पीपल का पेड़ के नीचे ध्यान लगा कर बैठ गऐ। इस बात का जिक्र करते हुऐ बाद में स्वामी जी ने कहा था, यहां (काकड़ीघाट) में उन्हें पूरे ब्रह्मांड के एक अणु में दर्शन हुऐ। यही वह ज्ञान था जिसे 11 सितंबर 1893 को शिकागो में आयोजित धर्म संसद में स्वामी जी ने पूरी दुनिया के समक्ष ‘मेरे अमेरिकावासी भाइयोे और बहनो…’ से अपना संबोधन शुरू करके विश्व को चमत्कृत कर दिया था। साथ ही सम्भवतः स्वामी जी को अपने मंत्र ‘उत्तिष्ठ जागृत प्राप्यवरान्निबोध्’ के प्रथम शब्द ‘उत्तिष्ठ’ की प्रेरणा भी उत्तराखंड के अल्मोड़ा के वर्तमान राजकीय इंटर कालेज में हिन्दी में अपना पहला भाषण देते हुए मिली थी।

विवेकानंद जीवन के तीन महत्वपूर्ण पड़ावों के साथ चार बार आए उत्तराखंड

स्वामी विवेकानंद चार बार देवभूमि आऐ, और उनका देवभूमि से संबंध उनके तीन चरणों यानी उनके नरेंद्र होने से लेकर स्वामी विवेकानंद और फिर राजर्षि विवेकानंद बनने तक का था। अगस्त 1890 में अपनी पहली आध्यात्मिक यात्रा में वे एक सामान्य साधु नरेंद्र के रूप में गुरु भाई अखंडानंद के साथ नैनीताल में प्रसन्न भट्टाचार्य के घर पर छह दिन रूककर अल्मोड़ा की तरफ चल पड़े। तभी काकड़ीघाट में एक पीपल के पेड़ के नीचे उन्हें यह आत्मज्ञान प्राप्त हुआ कि कैसे समूचा ब्रह्मांड एक अणु में समाया हुआ है। स्वामीजी ने उस दिन की अनुभूति की बात बांग्ला में लिखी, ‘आमार जीवनेर एकटा मस्त समस्या आमि महाधामे फेले दिये गेलुम!’ यानी ‘आज मेरे जीवन की एक बहुत गूढ़ समस्या का समाधान इस महा धाम में प्राप्त हो गया है।’ काकड़ीघाट में आज भी उन्हें ज्ञान प्रदान कराने वाला वह बोधि वृक्ष सरीखा पीपल का पेड़ तथा आश्रम आज भी मौजूद है। यहां से आगे चलते हुए वह अल्मोड़ा की ओर बढ़े। कहते हैं कि अल्मोड़ा से पहले वर्तमान मुस्लिम कब्रिस्तान करबला के पास खड़ी चढ़ाई चढ़ने व भूख-प्यास के कारण उन्हें मूर्छा आ गई। वहां एक मुस्लिम फकीर ने उन्हें ककड़ी (पहाड़ी खीरा) खिलाकर ठीक किया। इस दौरान उन्होंने अल्मोड़ा नगर से आठ किलोमीटर की दूरी पर स्थित दुर्गा के मंदिर-कसारदेवी की गुफा में ध्यान और साधना भी की थीे। उन्होने यहां कई दिनों तक एक शिला पर बैठ कर साधना की। अल्मोड़ा के देवलधार और स्याही देवी मंदिर भी उनके प्रिय स्थल थे। ऐसी कुछ बातों का जिक्र स्वामी जी ने शिकागो से लौटकर मई 1897 में दूसरी बार अल्मोड़ा आने पर किया। इस बार अल्मोड़ा में वह लाला बद्रीश शाह के आतिथ्य में रहे। यह स्वामी विवेकानंद का राजर्षि के रूप में नया अवतार था। इस मौके पर हिंदी के छायावादी सुकुमार कवि सुमित्रानंदन ने कविता लिखी थी, ‘मां अल्मोड़े में आऐ थे जब राजर्षि विवेकानंद, तब मग में मखमल बिछवाया था, दीपावली थी अति उमंग”। स्वामी जी अल्मोड़ा से आगे चंपावत जिले के मायावती आश्रम भी गऐ थे, जहां आज भी स्वामी जी का प्रचुर साहित्य संग्रहीत है, तथा अल्मोड़ा में स्वामी जी के गुरु रामकृष्ण परमहंस के नाम से मठ व कुटीर आज भी मौजूद है। बाद में उनके भाषणों का संग्रह ‘कोलंबो से अल्मोड़ा तक’ नाम से प्रकाशित हुआ था। वहीं 1898 में की गई अपनी तीसरी यात्रा के दौरान अल्मोड़ा में उन्होंने अपनी मद्रास से प्रकाशित होने वाली पत्रिका ‘प्रबुद्ध भारत’ का प्रकाशन मायावती आश्रम से करने का निर्णय लिया था। इसके अलावा दिसंबर से जनवरी 1901 के बीच वे उत्तराखंड के अद्वैत आश्रम मायावती चंपावत की यात्रा पर आये थे।

यह भी पढ़ें : केदारनाथ से आई खबर…. उत्तराखंड से चुनाव लड़ सकते हैं मोदी !

<

<

p style=”text-align: justify;”>p style=”text-align: justify;”>-पीएम के भाई ने भी किए बदरीविशाल के दर्शन, पौड़ी या हरिद्वार सीट से चुनाव लड़ सकते हैं मोदी 
रोहित डिमरी, रुद्रप्रयाग, गोपेश्वर। दीपावली के दिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने केदारनाथ के दर्शन किए और आज बृहस्पतिवार को नरेंद्र मोदी के भाई पंकज मोदी ने भगवान बद्रीविशाल के दर्शन किये। दोनों भाई हर वर्ष भगवान भोले और नारायण के दर पर पहुंच रहे हैं। पंकज मोदी ने आज बद्रीनाथ धाम पहुंचकर सबसे पहले भगवान नारायण के विशेष पूजा-पाठ किया और भगवान बद्रीविशाल से देश और दुनिया की खुशहाली के लिए प्रार्थना की।
दीपावली के दिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के केदारनाथ पहुंचने के बाद सियासी हलकों में अटकलों का बाजार गरम हो गया है। प्रधानमंत्री मोदी का केदारनाथ में यह तीसरा दौरा था। प्रधानमंत्री मोदी के केदारनाथ में इतनी रुचि लेने से माना जा रहा है कि इस बार आम चुनाव में भाजपा का फोकस उत्तराखंड पर रहेगा। यह भी कयास लगाए जा रहे हैं कि मोदी पौड़ी या हरिद्वार सीट से चुनाव भी लड़ सकते हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अचानक ही दिवाली के मौके पर बाबा केदार के धाम जाने की योजना बनायी। हालांकि इस दौरान उत्तराखंड में निकाय चुनाव व पांच अन्य प्रदेश में विधानसभा चुनाव के चलते आचार संहिता लगी थी, इसके बावजूद उनका केदारनाथ दर्शन के लिए जाना सियासी हलकों में उबाल लाने जैसा है। सूत्रों के अनुसार अयोध्या मामले में भाजपा और संघ का रटारटाया राम मंदिर का मुद्दा पुराना हो चुका है और इसके झांसे में मतदाताओं के आने के कम ही चांस हैं। ऐसे में यदि मोदी केदारनाथ पुनर्निर्माण का श्रेय लेते हैं तो यह उनके लिए लाभ का कारण बन सकता है क्योंकि उत्तराखंड ही एक मात्र ऐसा प्रदेश है जहां गंगा-यमुना भी है और पंच केदार भी हैं। चारधाम भी हैं।राजनीतिक जानकारों का मानना है कि विपक्षी दलों के महागठबंधन से निटपने के लिए भाजपा हिन्दुत्व का कार्ड खेल सकती है। ऐसे में केदारनाथ में किये जा रहे पुनर्निर्माण कार्य और गंगा के निर्मल और अविरलता के लिए किये जा रहे प्रयासों को भाजपा भुना सकती है। कुछ जानकार मानते हैं कि नरेंद्र मोदी उत्तराखंड से चुनाव लड़कर पूरे हिन्दुओं का ध्यान आकर्षित कर सकते हैं कि वे देवभूमि का प्रतिनिधित्व करेंगे। ऐसे में वोटों का ध्रुवीकरण हो सकता है, लेकिन कुछ राजनीति जानकार मानते हैं कि मोदी ऐसी सीट से चुनाव लड़ेंगे, जहां से कम से कम बीस संसदीय क्षेत्र प्रभावित हो। भाजपा नेता अभी इस संबंध में कोई भी टिप्पणी नहीं कर रहे हैं। अलबत्ता उनका कहना है कि यदि मोदी उत्तराखंड से चुनाव लड़ते हैं तो यह गर्व की बात होगी। 
दीपावली के दिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के केदारनाथ पहुंचने के बाद सियासी हलकों में अटकलों का बाजार गरम हो गया है। प्रधानमंत्री मोदी का केदारनाथ में यह तीसरा दौरा था। प्रधानमंत्री मोदी के केदारनाथ में इतनी रुचि लेने से माना जा रहा है कि इस बार आम चुनाव में भाजपा का फोकस उत्तराखंड पर रहेगा। यह भी कयास लगाए जा रहे हैं कि मोदी पौड़ी या हरिद्वार सीट से चुनाव भी लड़ सकते हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अचानक ही दिवाली के मौके पर बाबा केदार के धाम जाने की योजना बनायी। हालांकि इस दौरान उत्तराखंड में निकाय चुनाव व पांच अन्य प्रदेश में विधानसभा चुनाव के चलते आचार संहिता लगी थी, इसके बावजूद उनका केदारनाथ दर्शन के लिए जाना सियासी हलकों में उबाल लाने जैसा है। सूत्रों के अनुसार अयोध्या मामले में भाजपा और संघ का रटारटाया राम मंदिर का मुद्दा पुराना हो चुका है और इसके झांसे में मतदाताओं के आने के कम ही चांस हैं। ऐसे में यदि मोदी केदारनाथ पुनर्निर्माण का श्रेय लेते हैं तो यह उनके लिए लाभ का कारण बन सकता है क्योंकि उत्तराखंड ही एक मात्र ऐसा प्रदेश है जहां गंगा-यमुना भी है और पंच केदार भी हैं। चारधाम भी हैं।राजनीतिक जानकारों का मानना है कि विपक्षी दलों के महागठबंधन से निटपने के लिए भाजपा हिन्दुत्व का कार्ड खेल सकती है। ऐसे में केदारनाथ में किये जा रहे पुनर्निर्माण कार्य और गंगा के निर्मल और अविरलता के लिए किये जा रहे प्रयासों को भाजपा भुना सकती है। कुछ जानकार मानते हैं कि नरेंद्र मोदी उत्तराखंड से चुनाव लड़कर पूरे हिन्दुओं का ध्यान आकर्षित कर सकते हैं कि वे देवभूमि का प्रतिनिधित्व करेंगे। ऐसे में वोटों का ध्रुवीकरण हो सकता है, लेकिन कुछ राजनीति जानकार मानते हैं कि मोदी ऐसी सीट से चुनाव लड़ेंगे, जहां से कम से कम बीस संसदीय क्षेत्र प्रभावित हो। भाजपा नेता अभी इस संबंध में कोई भी टिप्पणी नहीं कर रहे हैं। अलबत्ता उनका कहना है कि यदि मोदी उत्तराखंड से चुनाव लड़ते हैं तो यह गर्व की बात होगी। 

नवीन समाचार एक्सक्लूसिवः उत्तराखंड में ‘ट्रिपल इंजन’ लगाने का संदेश दे गये हैं प्रधानमंत्री मोदी ! निकाय चुनाव में कितना असर करेगा यह चुनावी दांव…

नैनीताल, 8 नवंबर 2018। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का 7 नवंबर दीपावली के अवसर पर उत्तराखंड दौरा और खासकर इस दौरान सीमांत सैन्य चौकी हर्षिल में पूर्व सैनिकों से आत्मीयता से मिलना, उन्हें अपने हाथों से मिठाइयां खिलाना और उनके परिजनों की भी कुशलक्षेम पूछना राज्य में आगामी 18 नवंबर को होने वाले निकाय चुनावों में भी अपना असर दिखा सकता है। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार इस दौरे से मोदी ने दो तरह से उत्तराखंड के लोगों को छुवा है। पहला इससे उत्तराखंड के प्रति मोदी का लगाव प्रकट हुआ है, दूसरे राज्य के सैन्य बहुल होने के नाते भी इसका गहरा संदेश गया है। सूत्रों के अनुसार इस दौरान प्रधानमंत्री मोदी के द्वारा राज्य में ‘डबल इंजन’ के बाद पहली बार नगर निकायों की ‘छोटी सरकारों’ में भी भाजपा प्रत्याशियों को जिताकर ‘ट्रिपल इंजन’ लगाने का संदेश भी कार्यकर्ताओं को दिया गया है। संदेश साफ है, यदि केंद्र एवं राज्य के साथ निकायों की छोटी सरकार में भी भाजपा होगी तो विकास के अवरुद्ध कार्यों को अधिक गति मिल सकेगी।

यह भी पढ़ें : मोदी होने के मायने

<

<

p style=”text-align: justify;”>p style=”text-align: justify;”>केदारनाथ में नरेंद्र मोदीराजनीति के जानकार कहते हैं कि मोदी जो भी करते हैं उसके गहरे राजनीतिक अर्थ होते हैं। लिहाजा पूरी तरह गैर राजनीतिक कहे जा रहे प्रधानमंत्री के इस दौरे के भी राजनीतिक निहितार्थ निकाले जा रहे हैं। खासकर विपक्षी कांग्रेस की ओर से देखें तो वह मोदी के आने से पहले ही इसके विरोध में बोलकर अपनी राजनीतिक चिंता को प्रकट कर चुकी है।
उल्लेखनीय है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपने अब तक के कार्यकाल में दस बार उत्तराखंड आ चुके हैं। इससे पहले उनकी तरह देश का कोई नेता साढ़े चार वर्ष के कार्यकाल में इस छोटे से राज्य में आया हो, कहना मुश्किल है। इससे कहीं न कहीं वह यह संदेश देने में कामयाब रहे हैं कि वह उत्तराखंड की चिंता करते हैं और प्रदेश के विकास को लेकर वह अहम कदम भी उठा रहे हैं। केदारनाथ में केदारपुरी के पुर्ननिर्माण कार्यों के साथ ही चाहे ऑल वेदर रोड का मामला हो या फिर ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेललाइन परियोजना, प्रधानमंत्री इनकी प्रगति पर स्वयं नजर रखे हुए हैं। यहां तक कि इन्वेस्टर्स समिट में आकर भी प्रधानमंत्री ने उत्तराखंड में निवेश की संभावनाओं के द्वार खोले और राज्य के प्रति अपने लगाव को प्रदर्शित किया। इधर हर्षिल में सैनिकों को दिए गए संबोधन में प्रधानमंत्री ने ‘वन रैंक वन पेंशन’ से लेकर सेना को मजबूत करने के लिए सरकार के प्रयासों को साझा किया। सैनिक बहुल प्रदेश में प्रधानमंत्री का यह कदम पूर्व सैनिकों के साथ ही सैन्य परिवारों के बीच एक संदेश भी दे गया है। उनके इस लगाव से जनता भी कहीं न कहीं जुड़ रही है। इसका सीधा फायदा भाजपा संगठन व प्रदेश भाजपा सरकार को मिल सकता है।
जनता के बीच सरकार और संगठन, प्रधानमंत्री के उत्तराखंड के प्रति लगाव को प्रचारित भी कर रही हैं और केंद्र की सहयोग से प्रदेश में हो रहे कार्यों को भी इससे जोड़ रहे हैं। ऐसे में माना जा रहा है कि मौजूदा चुनावों में भी इसका असर पड़ेगा और मोदी के नाम पर एक बार फिर कई प्रत्याशी अपनी चुनावी वैतरणी पार लगा सकेंगे।

दिवाली उत्तराखंड के हर्षिल में तैनात जवानों का उत्साहवर्धन करने पहुंचे प्रधानमंत्री मोदी जवानों को खिलाई दीवाली की मिठाई

देहरादून, 7 नवंबर 2018 : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपने केदारनाथ दौरे के दौरान दीपावली के पवित्र पर्व पर बुधवार की सुबह देहरादून पहुंचने के बाद हर्षिल गए। वहां पर उन्होने जवानों का हौसला बढ़ाया। इसके साथ ही, पीएम ने सेना प्रमुख जनरल विपिन रावत और आईटीबीपी के डीजी से मुलाकात की। इस मौके पर उन्होंने जवानों को मिठाई खिलाकर दीपावली की बधाई दी। इसके बाद वह केदारनाथ धाम पहुंचे और बाबा के दर्शन के साथ ही निर्माण कार्यों का निरीक्षण किया।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी दिल्ली से सेना के विशेष विमान से 6: 47 बजे जौलीग्रांट एयरपोर्ट पर पहुचे। जौलीग्रांट एयरपोर्ट से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 7:10 पर सेना के 4 एम आई -17 हेलीकॉप्टर की सुरक्षा घेरे में एयरपोर्ट से उत्तरकाशी जिले में भारत चीन सीमा पर स्थित हर्षिल के लिए रवाना हुए। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने बुधवार को केदारनाथ मदिर में जाकर पूजा अर्चना की। उन्होंने अक्टूबर 2017 में परियोजना की रखी गई आधारशिला की भी समीक्षा की। 2013 में आए आपदा में हुआ भारी तबाही और बाढ़ के चलते हजारों लोग मारे गए थे। इसस पहले, मंगलवार को 5,100 दीये मंदिर के पास जलाए गए थे। उत्तराखंड की राज्यपाल बेबीरानी मौर्य, मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत, मुख्य सचिव उत्पल कुमार सिंह भी मौजूद रहे। पीएम मोदी मंदिर के अंदर करीब 10 से 15 मिनट रहे। उन्होंने पूजा करने के बाद मंदिर की परिक्रमा की और पिछले कुछ दिनों में धाम में हुई बर्फबारी से खूबसूरत हुए नजारे का भी दीदार किया। प्रधानमंत्री ने मंदिर प्रांगण में लगाई गई केदारनाथ की तस्वीरों का भी अवलोकन किया, जिसमें वर्ष 2013 में आई प्रलयंकारी भीषण आपदा से उजड़ गए क्षेत्र के पुनर्निर्माण की यात्रा को दर्शाया गया था। उल्लेखनीय है कि मोदी की बाबा केदार के प्रति अगाध श्रद्धा है। जब भी उन्हें अवसर मिलता है, वह केदारनाथ आते रहे हैं। यही नहीं, केदारपुरी का पुनर्निर्माण नमो के ड्रीम प्रोजेक्ट में शामिल है और वह इस पर लगातार निगरानी रखे हुए हैं। केदारपुरी में यह कार्य जोर-शोर से चल रहे हैं। इसे देखते हुए लंबे समय से चर्चा चल रही थी कि नौ नवंबर को केदारनाथ के कपाट बंद होने से पहले प्रधानमंत्री केदारनाथ पहुंचेंगे। साथ ही कुछ निर्माण कार्यों का लोकार्पण भी करेंगे। इस बीच राज्य में निकाय चुनाव की आचार संहिता लगने और लोकार्पण व शिलान्यास के लिए राज्य निर्वाचन आयोग से अनुमति न मिलने के मद्देनजर प्रधानमंत्री के दौरे को लेकर असमंजस की स्थिति भी बनी हुई थी।

यह भी देखें : वीडियो और पीएम मोदी का ट्वीट, उत्तराखंड के लाभार्थी को बिजली का कनेक्शन मिलने पर कैसे हैरान हुए मोदी

पुराना समाचार: पीएम मोदी ने सराही उत्तराखंड के किसानों की यह पहल, बताया देश के लिए अनुकरणीय

जहां पहाड़ के गांव पलायन का दंश झेल रहे हैं। वहीं कुछ गांव और उसमें रहने वाले लोग अपने प्रयासों से देशवासियों की प्रेरणा बन रहे हैं। ऐसा ही कुछ कर दिखाया है उत्तराखंड के बागेश्वर जनपद के सीमांत मुनार गांव के ग्रामीणों ने। इसीलिए प्रधानमंत्री मोदी ने मन की बात में मुनार के काश्तकारों से प्रेरणा लेने की अपील की है।

प्रधानमंत्री ने क्या कहा, यहां सुनिए :

प्रधानमंत्री मोदी ने मन की बात में कहा, “भाइयो, बहनो, उत्तराखंड के किसान देश भर के किसानों के लिए प्रेरणास्त्रोत बन गए हैं। उन्होंने संगठित प्रयास से काम किया। खेत की पैदावार से बिस्कुट बनाया और इन्हें बेचना शुरु किया। उस इलाके में पक्की मान्यता है कि बिस्कुट आयरन रिच होते हैं। यह आयरन रिच गर्भवती महिलाओं के लिए बहुत उपयोगी होते हैं। मुनार गांव में एक सहकारी संस्था बनाई है। बिस्कुट की फैक्ट्री खोल ली है। किसानों की हिम्मत देखते हुए सरकार ने भी इसे राष्ट्रीय आजीविका मिशन से जोड़ दिया है। यह बिस्कुट अब न केवल जिले के 50 आंगनबाड़ी केंद्रों में बल्कि अल्मोड़ा कौसानी में भी पहुंचाए जा रहे हैं। किसानों की मेहनत से कंपनी का सालाना टर्न ओवर 10 से 15 लाख पहुंच गया है। 900 परिवारों को रोजगार भी मिला है। जिले से होने वाला पलायन भी रुकना शुरु हुआ है।”

देश भर को इस तरह प्रेरणा बने मुनार के ग्रामीण

वास्तव में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने मन की बात कार्यक्रम में कपकोट ब्लाक के दूरस्थ, सरयू नदी के उद्गम स्थल सरमूल के आखिरी पड़ाव, मुनार के मडुवे के बिस्कुटों का जिक्र किया है। देश भर के लिए प्रेरणा बने मुनार के लोगों ने एक दशक पूर्व स्वयं सहायता समूह बनाया। उन्होंने एसएचजी के माध्यम से मडुवा, चौलाई, मक्का के बिस्कुट बनाने शुरु किए। पहले कुछ समय तक इन लोगों ने स्थानीय बाजार कपकोट, भराड़ी क्षेत्र के दुकानों में अपने मडुवे से बने उत्पादों को बेचा। किसानों की मेहनत रंग लाई। इसके बाद सरकार की नजर इन पर पड़ी और इसे व्यापक रुप दिया गया। 10 माह पूर्व इन लोगों ने एकीकृत आजीविका सहयोग परियोजना से मां चिल्टा आजीविका स्वायत्त सहकारिता, मुनार, लोहारखेत में बनाई। जहां हिलांस ब्रांड का मडुवा, चौलाई व मक्का से निर्मित बिस्कुट बनाए। जिसको व्यापक पैमाने में बाजार मिला। आज यह बागेश्वर, कौसानी, अल्मोड़ा आदि स्थानों पर आसानी से बिकने लगा है।

20 गांवों के 984 लोग जुड़े

स्यायत्त सहकारिता में 20 गांवों में 84 स्वयं सहायता समूह बनाए गए हैं। जिसमें सीधे तौर पर 984 सदस्य जुड़े हुए हैं। सरकार भी इनके काम को अब प्रोत्साहित करने लगी है। स्वायत्त सहकारिता की अध्यक्ष तारा टाकुली, कोषाध्यक्ष गंगा देवी ने कहा कि अब इस काम से लोग लगातार जुड़ रहे है। गत दिनों इस पर डीडी न्यूज में भी समाचार प्रसारित हुआ था। उसी समाचार को मोदी ने अपनी मन की बात में शामिल किया है।

डॉ. नवीन जोशी @ नवीन समाचार
‘नवीन समाचार’ विश्व प्रसिद्ध पर्यटन नगरी नैनीताल से ‘मन कही’ के रूप में जनवरी 2010 से इंटरननेट-वेब मीडिया पर सक्रिय, उत्तराखंड का सबसे पुराना ऑनलाइन पत्रकारिता में सक्रिय समूह है। यह उत्तराखंड शासन से मान्यता प्राप्त, अलेक्सा रैंकिंग के अनुसार उत्तराखंड के समाचार पोर्टलों में अग्रणी, गूगल सर्च पर उत्तराखंड के सर्वश्रेष्ठ, भरोसेमंद समाचार पोर्टल के रूप में अग्रणी, समाचारों को नवीन दृष्टिकोण से प्रस्तुत करने वाला ऑनलाइन समाचार पोर्टल भी है।
https://navinsamachar.com

One Reply to “अल्मोड़ा पहुंचे मोदी ने कहा, विकास की राह में ब्रेक लगाने वालों को नहीं आने दें, कहा हमारे दिल में कमल व मांथे पर ब्रह्मकमल

Leave a Reply