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केदारनाथ से आई खबर…. उत्तराखंड से चुनाव लड़ सकते हैं मोदी !

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-पीएम के भाई ने भी किए बदरीविशाल के दर्शन, पौड़ी या हरिद्वार सीट से चुनाव लड़ सकते हैं मोदी 
रोहित डिमरी, रुद्रप्रयाग, गोपेश्वर। दीपावली के दिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने केदारनाथ के दर्शन किए और आज बृहस्पतिवार को नरेंद्र मोदी के भाई पंकज मोदी ने भगवान बद्रीविशाल के दर्शन किये। दोनों भाई हर वर्ष भगवान भोले और नारायण के दर पर पहुंच रहे हैं। पंकज मोदी ने आज बद्रीनाथ धाम पहुंचकर सबसे पहले भगवान नारायण के विशेष पूजा-पाठ किया और भगवान बद्रीविशाल से देश और दुनिया की खुशहाली के लिए प्रार्थना की।
दीपावली के दिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के केदारनाथ पहुंचने के बाद सियासी हलकों में अटकलों का बाजार गरम हो गया है। प्रधानमंत्री मोदी का केदारनाथ में यह तीसरा दौरा था। प्रधानमंत्री मोदी के केदारनाथ में इतनी रुचि लेने से माना जा रहा है कि इस बार आम चुनाव में भाजपा का फोकस उत्तराखंड पर रहेगा। यह भी कयास लगाए जा रहे हैं कि मोदी पौड़ी या हरिद्वार सीट से चुनाव भी लड़ सकते हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अचानक ही दिवाली के मौके पर बाबा केदार के धाम जाने की योजना बनायी। हालांकि इस दौरान उत्तराखंड में निकाय चुनाव व पांच अन्य प्रदेश में विधानसभा चुनाव के चलते आचार संहिता लगी थी, इसके बावजूद उनका केदारनाथ दर्शन के लिए जाना सियासी हलकों में उबाल लाने जैसा है। सूत्रों के अनुसार अयोध्या मामले में भाजपा और संघ का रटारटाया राम मंदिर का मुद्दा पुराना हो चुका है और इसके झांसे में मतदाताओं के आने के कम ही चांस हैं। ऐसे में यदि मोदी केदारनाथ पुनर्निर्माण का श्रेय लेते हैं तो यह उनके लिए लाभ का कारण बन सकता है क्योंकि उत्तराखंड ही एक मात्र ऐसा प्रदेश है जहां गंगा-यमुना भी है और पंच केदार भी हैं। चारधाम भी हैं।राजनीतिक जानकारों का मानना है कि विपक्षी दलों के महागठबंधन से निटपने के लिए भाजपा हिन्दुत्व का कार्ड खेल सकती है। ऐसे में केदारनाथ में किये जा रहे पुनर्निर्माण कार्य और गंगा के निर्मल और अविरलता के लिए किये जा रहे प्रयासों को भाजपा भुना सकती है। कुछ जानकार मानते हैं कि नरेंद्र मोदी उत्तराखंड से चुनाव लड़कर पूरे हिन्दुओं का ध्यान आकर्षित कर सकते हैं कि वे देवभूमि का प्रतिनिधित्व करेंगे। ऐसे में वोटों का ध्रुवीकरण हो सकता है, लेकिन कुछ राजनीति जानकार मानते हैं कि मोदी ऐसी सीट से चुनाव लड़ेंगे, जहां से कम से कम बीस संसदीय क्षेत्र प्रभावित हो। भाजपा नेता अभी इस संबंध में कोई भी टिप्पणी नहीं कर रहे हैं। अलबत्ता उनका कहना है कि यदि मोदी उत्तराखंड से चुनाव लड़ते हैं तो यह गर्व की बात होगी। 
दीपावली के दिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के केदारनाथ पहुंचने के बाद सियासी हलकों में अटकलों का बाजार गरम हो गया है। प्रधानमंत्री मोदी का केदारनाथ में यह तीसरा दौरा था। प्रधानमंत्री मोदी के केदारनाथ में इतनी रुचि लेने से माना जा रहा है कि इस बार आम चुनाव में भाजपा का फोकस उत्तराखंड पर रहेगा। यह भी कयास लगाए जा रहे हैं कि मोदी पौड़ी या हरिद्वार सीट से चुनाव भी लड़ सकते हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अचानक ही दिवाली के मौके पर बाबा केदार के धाम जाने की योजना बनायी। हालांकि इस दौरान उत्तराखंड में निकाय चुनाव व पांच अन्य प्रदेश में विधानसभा चुनाव के चलते आचार संहिता लगी थी, इसके बावजूद उनका केदारनाथ दर्शन के लिए जाना सियासी हलकों में उबाल लाने जैसा है। सूत्रों के अनुसार अयोध्या मामले में भाजपा और संघ का रटारटाया राम मंदिर का मुद्दा पुराना हो चुका है और इसके झांसे में मतदाताओं के आने के कम ही चांस हैं। ऐसे में यदि मोदी केदारनाथ पुनर्निर्माण का श्रेय लेते हैं तो यह उनके लिए लाभ का कारण बन सकता है क्योंकि उत्तराखंड ही एक मात्र ऐसा प्रदेश है जहां गंगा-यमुना भी है और पंच केदार भी हैं। चारधाम भी हैं।राजनीतिक जानकारों का मानना है कि विपक्षी दलों के महागठबंधन से निटपने के लिए भाजपा हिन्दुत्व का कार्ड खेल सकती है। ऐसे में केदारनाथ में किये जा रहे पुनर्निर्माण कार्य और गंगा के निर्मल और अविरलता के लिए किये जा रहे प्रयासों को भाजपा भुना सकती है। कुछ जानकार मानते हैं कि नरेंद्र मोदी उत्तराखंड से चुनाव लड़कर पूरे हिन्दुओं का ध्यान आकर्षित कर सकते हैं कि वे देवभूमि का प्रतिनिधित्व करेंगे। ऐसे में वोटों का ध्रुवीकरण हो सकता है, लेकिन कुछ राजनीति जानकार मानते हैं कि मोदी ऐसी सीट से चुनाव लड़ेंगे, जहां से कम से कम बीस संसदीय क्षेत्र प्रभावित हो। भाजपा नेता अभी इस संबंध में कोई भी टिप्पणी नहीं कर रहे हैं। अलबत्ता उनका कहना है कि यदि मोदी उत्तराखंड से चुनाव लड़ते हैं तो यह गर्व की बात होगी। 

नवीन समाचार एक्सक्लूसिवः उत्तराखंड में ‘ट्रिपल इंजन’ लगाने का संदेश दे गये हैं प्रधानमंत्री मोदी ! निकाय चुनाव में कितना असर करेगा यह चुनावी दांव…

नैनीताल, 8 नवंबर 2018। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का 7 नवंबर दीपावली के अवसर पर उत्तराखंड दौरा और खासकर इस दौरान सीमांत सैन्य चौकी हर्षिल में पूर्व सैनिकों से आत्मीयता से मिलना, उन्हें अपने हाथों से मिठाइयां खिलाना और उनके परिजनों की भी कुशलक्षेम पूछना राज्य में आगामी 18 नवंबर को होने वाले निकाय चुनावों में भी अपना असर दिखा सकता है। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार इस दौरे से मोदी ने दो तरह से उत्तराखंड के लोगों को छुवा है। पहला इससे उत्तराखंड के प्रति मोदी का लगाव प्रकट हुआ है, दूसरे राज्य के सैन्य बहुल होने के नाते भी इसका गहरा संदेश गया है। सूत्रों के अनुसार इस दौरान प्रधानमंत्री मोदी के द्वारा राज्य में ‘डबल इंजन’ के बाद पहली बार नगर निकायों की ‘छोटी सरकारों’ में भी भाजपा प्रत्याशियों को जिताकर ‘ट्रिपल इंजन’ लगाने का संदेश भी कार्यकर्ताओं को दिया गया है। संदेश साफ है, यदि केंद्र एवं राज्य के साथ निकायों की छोटी सरकार में भी भाजपा होगी तो विकास के अवरुद्ध कार्यों को अधिक गति मिल सकेगी।

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केदारनाथ में नरेंद्र मोदीराजनीति के जानकार कहते हैं कि मोदी जो भी करते हैं उसके गहरे राजनीतिक अर्थ होते हैं। लिहाजा पूरी तरह गैर राजनीतिक कहे जा रहे प्रधानमंत्री के इस दौरे के भी राजनीतिक निहितार्थ निकाले जा रहे हैं। खासकर विपक्षी कांग्रेस की ओर से देखें तो वह मोदी के आने से पहले ही इसके विरोध में बोलकर अपनी राजनीतिक चिंता को प्रकट कर चुकी है।
उल्लेखनीय है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपने अब तक के कार्यकाल में दस बार उत्तराखंड आ चुके हैं। इससे पहले उनकी तरह देश का कोई नेता साढ़े चार वर्ष के कार्यकाल में इस छोटे से राज्य में आया हो, कहना मुश्किल है। इससे कहीं न कहीं वह यह संदेश देने में कामयाब रहे हैं कि वह उत्तराखंड की चिंता करते हैं और प्रदेश के विकास को लेकर वह अहम कदम भी उठा रहे हैं। केदारनाथ में केदारपुरी के पुर्ननिर्माण कार्यों के साथ ही चाहे ऑल वेदर रोड का मामला हो या फिर ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेललाइन परियोजना, प्रधानमंत्री इनकी प्रगति पर स्वयं नजर रखे हुए हैं। यहां तक कि इन्वेस्टर्स समिट में आकर भी प्रधानमंत्री ने उत्तराखंड में निवेश की संभावनाओं के द्वार खोले और राज्य के प्रति अपने लगाव को प्रदर्शित किया। इधर हर्षिल में सैनिकों को दिए गए संबोधन में प्रधानमंत्री ने ‘वन रैंक वन पेंशन’ से लेकर सेना को मजबूत करने के लिए सरकार के प्रयासों को साझा किया। सैनिक बहुल प्रदेश में प्रधानमंत्री का यह कदम पूर्व सैनिकों के साथ ही सैन्य परिवारों के बीच एक संदेश भी दे गया है। उनके इस लगाव से जनता भी कहीं न कहीं जुड़ रही है। इसका सीधा फायदा भाजपा संगठन व प्रदेश भाजपा सरकार को मिल सकता है।
जनता के बीच सरकार और संगठन, प्रधानमंत्री के उत्तराखंड के प्रति लगाव को प्रचारित भी कर रही हैं और केंद्र की सहयोग से प्रदेश में हो रहे कार्यों को भी इससे जोड़ रहे हैं। ऐसे में माना जा रहा है कि मौजूदा चुनावों में भी इसका असर पड़ेगा और मोदी के नाम पर एक बार फिर कई प्रत्याशी अपनी चुनावी वैतरणी पार लगा सकेंगे।

दिवाली उत्तराखंड के हर्षिल में तैनात जवानों का उत्साहवर्धन करने पहुंचे प्रधानमंत्री मोदी जवानों को खिलाई दीवाली की मिठाई

देहरादून, 7 नवंबर 2018 : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपने केदारनाथ दौरे के दौरान दीपावली के पवित्र पर्व पर बुधवार की सुबह देहरादून पहुंचने के बाद हर्षिल गए। वहां पर उन्होने जवानों का हौसला बढ़ाया। इसके साथ ही, पीएम ने सेना प्रमुख जनरल विपिन रावत और आईटीबीपी के डीजी से मुलाकात की। इस मौके पर उन्होंने जवानों को मिठाई खिलाकर दीपावली की बधाई दी। इसके बाद वह केदारनाथ धाम पहुंचे और बाबा के दर्शन के साथ ही निर्माण कार्यों का निरीक्षण किया।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी दिल्ली से सेना के विशेष विमान से 6: 47 बजे जौलीग्रांट एयरपोर्ट पर पहुचे। जौलीग्रांट एयरपोर्ट से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 7:10 पर सेना के 4 एम आई -17 हेलीकॉप्टर की सुरक्षा घेरे में एयरपोर्ट से उत्तरकाशी जिले में भारत चीन सीमा पर स्थित हर्षिल के लिए रवाना हुए। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने बुधवार को केदारनाथ मदिर में जाकर पूजा अर्चना की। उन्होंने अक्टूबर 2017 में परियोजना की रखी गई आधारशिला की भी समीक्षा की। 2013 में आए आपदा में हुआ भारी तबाही और बाढ़ के चलते हजारों लोग मारे गए थे। इसस पहले, मंगलवार को 5,100 दीये मंदिर के पास जलाए गए थे। उत्तराखंड की राज्यपाल बेबीरानी मौर्य, मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत, मुख्य सचिव उत्पल कुमार सिंह भी मौजूद रहे। पीएम मोदी मंदिर के अंदर करीब 10 से 15 मिनट रहे। उन्होंने पूजा करने के बाद मंदिर की परिक्रमा की और पिछले कुछ दिनों में धाम में हुई बर्फबारी से खूबसूरत हुए नजारे का भी दीदार किया। प्रधानमंत्री ने मंदिर प्रांगण में लगाई गई केदारनाथ की तस्वीरों का भी अवलोकन किया, जिसमें वर्ष 2013 में आई प्रलयंकारी भीषण आपदा से उजड़ गए क्षेत्र के पुनर्निर्माण की यात्रा को दर्शाया गया था। उल्लेखनीय है कि मोदी की बाबा केदार के प्रति अगाध श्रद्धा है। जब भी उन्हें अवसर मिलता है, वह केदारनाथ आते रहे हैं। यही नहीं, केदारपुरी का पुनर्निर्माण नमो के ड्रीम प्रोजेक्ट में शामिल है और वह इस पर लगातार निगरानी रखे हुए हैं। केदारपुरी में यह कार्य जोर-शोर से चल रहे हैं। इसे देखते हुए लंबे समय से चर्चा चल रही थी कि नौ नवंबर को केदारनाथ के कपाट बंद होने से पहले प्रधानमंत्री केदारनाथ पहुंचेंगे। साथ ही कुछ निर्माण कार्यों का लोकार्पण भी करेंगे। इस बीच राज्य में निकाय चुनाव की आचार संहिता लगने और लोकार्पण व शिलान्यास के लिए राज्य निर्वाचन आयोग से अनुमति न मिलने के मद्देनजर प्रधानमंत्री के दौरे को लेकर असमंजस की स्थिति भी बनी हुई थी।

यह भी देखें : वीडियो और पीएम मोदी का ट्वीट, उत्तराखंड के लाभार्थी को बिजली का कनेक्शन मिलने पर कैसे हैरान हुए मोदी

पुराना समाचार: पीएम मोदी ने सराही उत्तराखंड के किसानों की यह पहल, बताया देश के लिए अनुकरणीय

जहां पहाड़ के गांव पलायन का दंश झेल रहे हैं। वहीं कुछ गांव और उसमें रहने वाले लोग अपने प्रयासों से देशवासियों की प्रेरणा बन रहे हैं। ऐसा ही कुछ कर दिखाया है उत्तराखंड के बागेश्वर जनपद के सीमांत मुनार गांव के ग्रामीणों ने। इसीलिए प्रधानमंत्री मोदी ने मन की बात में मुनार के काश्तकारों से प्रेरणा लेने की अपील की है।

प्रधानमंत्री ने क्या कहा, यहां सुनिए :

प्रधानमंत्री मोदी ने मन की बात में कहा, “भाइयो, बहनो, उत्तराखंड के किसान देश भर के किसानों के लिए प्रेरणास्त्रोत बन गए हैं। उन्होंने संगठित प्रयास से काम किया। खेत की पैदावार से बिस्कुट बनाया और इन्हें बेचना शुरु किया। उस इलाके में पक्की मान्यता है कि बिस्कुट आयरन रिच होते हैं। यह आयरन रिच गर्भवती महिलाओं के लिए बहुत उपयोगी होते हैं। मुनार गांव में एक सहकारी संस्था बनाई है। बिस्कुट की फैक्ट्री खोल ली है। किसानों की हिम्मत देखते हुए सरकार ने भी इसे राष्ट्रीय आजीविका मिशन से जोड़ दिया है। यह बिस्कुट अब न केवल जिले के 50 आंगनबाड़ी केंद्रों में बल्कि अल्मोड़ा कौसानी में भी पहुंचाए जा रहे हैं। किसानों की मेहनत से कंपनी का सालाना टर्न ओवर 10 से 15 लाख पहुंच गया है। 900 परिवारों को रोजगार भी मिला है। जिले से होने वाला पलायन भी रुकना शुरु हुआ है।”

देश भर को इस तरह प्रेरणा बने मुनार के ग्रामीण

वास्तव में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने मन की बात कार्यक्रम में कपकोट ब्लाक के दूरस्थ, सरयू नदी के उद्गम स्थल सरमूल के आखिरी पड़ाव, मुनार के मडुवे के बिस्कुटों का जिक्र किया है। देश भर के लिए प्रेरणा बने मुनार के लोगों ने एक दशक पूर्व स्वयं सहायता समूह बनाया। उन्होंने एसएचजी के माध्यम से मडुवा, चौलाई, मक्का के बिस्कुट बनाने शुरु किए। पहले कुछ समय तक इन लोगों ने स्थानीय बाजार कपकोट, भराड़ी क्षेत्र के दुकानों में अपने मडुवे से बने उत्पादों को बेचा। किसानों की मेहनत रंग लाई। इसके बाद सरकार की नजर इन पर पड़ी और इसे व्यापक रुप दिया गया। 10 माह पूर्व इन लोगों ने एकीकृत आजीविका सहयोग परियोजना से मां चिल्टा आजीविका स्वायत्त सहकारिता, मुनार, लोहारखेत में बनाई। जहां हिलांस ब्रांड का मडुवा, चौलाई व मक्का से निर्मित बिस्कुट बनाए। जिसको व्यापक पैमाने में बाजार मिला। आज यह बागेश्वर, कौसानी, अल्मोड़ा आदि स्थानों पर आसानी से बिकने लगा है।

20 गांवों के 984 लोग जुड़े

स्यायत्त सहकारिता में 20 गांवों में 84 स्वयं सहायता समूह बनाए गए हैं। जिसमें सीधे तौर पर 984 सदस्य जुड़े हुए हैं। सरकार भी इनके काम को अब प्रोत्साहित करने लगी है। स्वायत्त सहकारिता की अध्यक्ष तारा टाकुली, कोषाध्यक्ष गंगा देवी ने कहा कि अब इस काम से लोग लगातार जुड़ रहे है। गत दिनों इस पर डीडी न्यूज में भी समाचार प्रसारित हुआ था। उसी समाचार को मोदी ने अपनी मन की बात में शामिल किया है।

(चंद्रशेखर द्विवेदी, बागेश्वर)

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मेरा जन्म 26 नवंबर 1972 को हुआ था। मैं नैनीताल, भारत में मूलतः एक पत्रकार हूँ। वर्तमान में मार्च 2010 से राष्ट्रीय हिन्दी दैनिक समाचार पत्र-राष्ट्रीय सहारा में ब्यूरो चीफ के रूप में कार्य कर रहा हूँ। इससे पहले मैं पांच साल के लिए दैनिक जागरण के लिए काम कर चुका हूँ। कुमाऊँ विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग से ‘नए मीडिया’ विषय पर शोधरत हूँ। फोटोग्राफ़ी मेरा शौक है। मैं NIKON COOLPIX P530 और अडोब फोटोशॉप 7.0 के साथ फोटोग्राफी कर रहा हूँ। फोटोग्राफी मेरे लिए दुनियां की खूबसूरती को अपनी ओर से चिरस्थाई बनाने का बहुत छोटा सा प्रयास है। एक फोटो पत्रकार के रूप में मेरी तस्वीरों को नैनीताल राजभवन सहित विभिन्न प्रदर्शनियों में प्रस्तुत किया गया, तथा उत्तराखंड की राज्यपाल श्रीमती मार्गरेट अलवा द्वारा सम्मानित किया गया है। कुछ चित्रों को राष्ट्रीय-अंतर्राष्ट्रीय पुरस्कार भी प्राप्त हो चुके हैं। गूगल अर्थ पर चित्र उपलब्ध कराने वाली पैनोरामियो साइट पर मेरी प्रोफाइल को 18.85 Lacs से भी अधिक हिट्स प्राप्त हैं।पत्रकारिता और फोटोग्राफी के अलावा मुझे कवितायेँ लिखना पसंद है। काव्य क्षेत्र में मैंने नवीन जोशी “नवेन्दु” के रूप में अपनी पहचान बनाई है। मैंने बहुत सी कुमाउनी कवितायेँ लिखी हैं, कुमाउनी भाषा में मेरा काव्य संकलन उघड़ी आंखोंक स्वींड़ प्रकाशित हो चुका है, जो कि पुस्तक के के साथ ही डिजिटल (PDF) फार्मेट पर भी उपलब्ध होने वाली कुमाउनी की पहली पुस्तक है। मेरी यह पुस्तक गूगल एप्स पर भी उपलब्ध है। ’ यहां है एक पत्रकार, लेखक, कवि एवं छाया चित्रकार के रूप में मेरी रचनात्मकता, लेख, आलेख, छायाचित्र, कविताएं, हिंदी-कुमाउनी के ब्लॉग आदि कार्यों का पूरा समग्र। मेरी कोशिश है कि यहां नैनीताल, कुमाऊं, उत्तराखंड और वृहद संदर्भ में देश की विरासत, संस्कृति, इतिहास और वर्तमान को समग्र रूप में संग्रहीत करने की….। मेरे दिल में बसता है, मेरा नैनीताल, मेरा कुमाऊं और मेरा उत्तराखंड

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