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आखिर अध्यादेश के आठ साल बाद जगी उत्तराखंड में राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय बनने की उम्मींद

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-2010 में हुआ था भवाली में स्थापित करने के लिये शासनादेश, 2015 में पहले तत्कालीन उच्च शिक्षा निदेशक अग्रवाल एवं फिर कुमाऊं विवि के तत्कालीन कुलपति प्रो. धामी को बनाया था प्रस्तावित विवि का ओएसडी

-गत दिवस केंद्रीय कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद ने देहरादून में स्थापना करने की की थी घोषणा
नवीन जोशी, नैनीताल, , 19 जून 2018। आखिर अध्यादेश के आठ सालों के बाद उत्तराखंड में राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय बनने की उम्मींद फिर से बन गयी है। अलबत्ता पूर्व में नैनीताल जिले के भवाली में प्रस्तावित और इधर गत दिवस केंद्रीय कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद द्वारा देहरादून में स्थापना करने की घोषणा वाला राष्ट्रीय महत्व का यह विश्वविद्यालय नैनीताल जिले के हाथ से खिसक गया है। इसका कारण नैनीताल के डीएम द्वारा प्रस्तावित विवि के लिए जरूरी भूमि उपलब्ध न करा पाना बताया जा रहा है। उत्तराखंड उच्च न्यायालय की वरिष्ठ न्यायाधीश न्यायमूर्ति राजीव शर्मा व न्यायमूर्ति लोकपाल सिंह खंडपीठ ने ऊधमसिंह नगर जिले के प्राग व खुरपिया फार्म में इसे स्थापित कर बकायदा 16 अगस्त से कक्षाएं शुरू करने के आदेश दे दिये हैं। उल्लेखनीय है कि पूर्व में 4 अक्टूबर 2015 को मामले में वरिष्ठ अधिवक्ता डा. भूपाल सिंह भाकुनी की जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए तत्कालीन कार्यकारी मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति वीके बिष्ट एवं न्यायमूर्ति सुधांशु धूलिया की संयुक्त खंडपीठ ने अपर शिक्षा निदेशक उच्च शिक्षा अजय अग्रवाल को भवाली में प्रस्तावित राष्ट्रीय विधि विवि का विशेष कार्याधिकारी नियुक्त कर दिया था, और बाद में कुमाऊं विवि के कुलपति प्रो. होशियार सिंह धामी को यह दायित्व दे दिया गया था।

डा. भूपाल सिंह भाकुनी

उल्लेखनीय है कि राष्ट्रीय विधि विवि का शासनादेश चार नवम्बर 2010 में जारी हा गया था। तभी से वरिष्ठ अधिवक्ता डा. भूपाल सिंह भाकुनी व वरिष्ठ अधिवक्ता तथा पूर्व सांसद डा. महेंद्र पाल भवाली में राष्ट्रीय विधि विवि की स्थापना के लिए प्रयासरत थे। 2014 तक इसकी स्थापना के लिए सरकार के स्तर पर कोई प्रयास नहीं होने पर उन्होंने उत्तराखंड उच्च न्यायालय में जनहित याचिका डाली। डा. भाकुनी ने मंगलवार को उच्च न्यायालय के आदेश के बाद अब इसकी स्थापना हो जाने का विश्वास जताते हुए बताया कि नैनीताल के डीएम के द्वारा आवश्यक भूमि उपलब्ध नहीं करायी गयी। इस पर उन्होंने नैनीताल जिले में पटवाडांगर, टीवी सैनिटोरियम भवाली, भवाली-भीमताल के बीच फरसौली, कृषि विज्ञान केंद्र ग्वालीकोट, आर्मी कैंप नेपा फार्म मालधनचौड़ व एचएमटी रानीबाग तथा ऊधमसिंह नगर जिले में किच्छा के खुरपिया फार्म, प्राग फार्म में सीलिंग की निकली 1800 एकड़ भूमि के स्थानों के विकल्प उच्च न्यायालय को सुझाये थे। जिनमें से प्राग फार्म के विकल्प को स्वीकार कर लिया गया है।

पांच मुख्यमंत्री बदले पर नहीं लगी विधि विवि की नींव की ईंट

नैनीताल। वर्ष 2010 में तत्कालीन केंद्र सरकार द्वारा राज्य में निशंक सरकार के कार्यकाल में भवाली में उत्तराखंड के राष्ट्रीय विधि विवि की स्थापना के लिए असाधारण गजट एवं अध्यादेश जारी हुआ था। लेकिन इसके आठ वर्ष बीत जाने और इस दौरान राज्य में पांच मुख्यमंत्री बदल जाने के बावजूद विधि विवि की स्थापना तो दूर इसका जिक्र भी कहीं नहीं हुआ। गौरतलब है कि उत्तराखंड ने शुरुआती चरण में इस तोहफे को हाथों हाथ लिया, और राज्य विधानसभा में इसका प्रस्ताव पारित होने के उपरांत एक नवंबर 2010 को तत्कालीन राज्यपाल मार्गरेट आल्वा की स्वीकृति के बाद राज्य सरकार ने चार नवंबर 2010 को इस बाबत असाधारण गजट भी जारी कर दिया था। इसे नैनीताल जनपद के भवाली में उजाला (उत्तराखंड न्यायिक एवं विधिक अकादमी) के पास उपलब्ध आठ एकड़ में से करीब पांच एकड़ भूमि में स्नातक, डिप्लोमा एवं सर्टिफिकेट कोर्स की पढ़ाई की सुविधा के साथ स्थापित किए जाने का प्रस्ताव था। इसकी स्थापना की तैयारी चल ही रही थी कि राज्य में सत्ता परिवर्तन हो गया और निशंक की जगह खंडूड़ी सरकार अस्तित्व में आ गई, और विस चुनावों का बिगुल बज उठा। आगे सत्ता के भाजपा से कांग्रेस के हाथों में आने तथा कांग्रेस राज में भी दो मुख्यमंत्री बदल जाने के घटनाक्रमों के बीच राज्य को मिला यह विवि एक कदम भी आगे नहीं बढ़ पाया। गौरतलब है कि नैनीताल में राज्य का उच्च न्यायालय होने के आलोक में पास ही स्थित भवाली में इसकी स्थापना के स्थापित होने पर राज्य में उच्च स्तरीय विधि छात्रों, विशेषज्ञों के तैयार होने और इस तरह राज्य में न्यायिक व विधिक ज्ञान संपदा व दक्षता में वृद्धि होने की उम्मीद की जा रही थी। इसके बाद राष्ट्रीय विधि विवि की पैरवी कर रहे उत्तराखंड कांग्रेस के तत्कालीन प्रदेश प्रवक्ता डा. भूपाल भाकुनी ने इस बाबत मुख्यमंत्री को पत्र लिखा था, और पत्र की प्रति उत्तराखंड उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश को भी भेजी थी, जिसे लेकर उच्च न्यायालय ने गंभीर रुख अपनाते हुए पत्र को ही जनहित याचिका के रूप में लेते हुए राज्य सरकार को छह सप्ताह के भीतर शपथ पत्र दायर करने के आदेश दिए हैं कि क्यों चार वर्ष के भीतर इसकी स्थापना के लिए कदम आगे नहीं बढ़ाए गए।

स्थापित होने पर देश का 15वां विधि विवि होगा

यदि प्रदेश में राष्ट्रीय विधि विवि की स्थापना हो जाए तो उत्तराखंड इसे स्थापित करने वाला 15वां राज्य होगा। अभी देश में बंगलुरु, दिल्ली, हैदराबाद, भोपाल, कोलकाता, जोधपुर, रायपुर, गांधीनगर, लखनऊ, पटियाला, पटना, कोच्ची, उड़ीसा व नालसार में ही राष्ट्रीय विधि विवि स्थापित हैं।

पूर्व समाचार : प्रो. धामी को दिया गया विधि विवि के सीईओ का जिम्मा

Kumaon University Vice Chancellor Pr. Hoshiyar Singh Dhami
प्रो. होशियार सिंह धामी

प्रो. धामी को कुमाऊं विवि का कुलपति बनने के कार्यकाल में मिली किसी विविद्यालय की चौथी जिम्मेदारी

 

नैनीताल। आखिर अध्यादेश के पांच साल बाद जगी उत्तराखंड का राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय बनने की उम्मींद बन गयी है। कुमाऊं विवि के कुलपति प्रो. होशियार सिंह धामी को प्रस्तावित राष्ट्रीय विधि विविद्यालय के विशेष कार्याधिकारी का दायित्व दिया गया है। यह प्रो. धामी को कुमाऊं विवि का कुलपति बनने के कार्यकाल में मिली किसी विविद्यालय की चौथी जिम्मेदारी है। इससे पूर्व उन्हें कुमाऊं विवि का दायित्व रहते पंतनगर विवि के कुलपति का भी अतिरिक्त दायित्व दिया गया था, जबकि वह वर्तमान में अल्मोड़ा में प्रस्तावित आवासीय विवि की स्थापना का दायित्व का भी पूरा दायित्व संभाले हुए हैं, जबकि अब उन्हें एक अन्य, राष्ट्रीय विधि विवि की जिम्मेदारी दी गई है। प्रमुख सचिव उच्च शिक्षा एस रामास्वामी की ओर से इस बाबत जारी कार्यालय ज्ञाप में कहा गया है कि प्रो. धामी कुमाऊं विवि का दायित्व देखते हुए राष्ट्रीय विधि विवि की स्थापना से संबंधित समस्त कायरे का संपादन भी करेंगे। उल्लेखनीय है कि देश का 15वां राष्ट्रीय विधि विवि भवाली में प्रस्तावित है। नैनीताल में उत्तराखंड उच्च न्यायालय होने के मद्देनजर इसकी काफी आवश्यकता महसूस की जा रही है। उल्लेखनीय है कि राष्ट्रीय विधि विवि का शासनादेश चार नवम्बर 2010 में जारी हा गया है।

यह भी पढ़ें : राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय के लिए न्यायालय ने नियुक्त किया ओएसडी

नवीन जोशी, नैनीताल। उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने उत्तराखंड राज्य को चार वर्ष पूर्व केंद्र सरकार से स्वीकृति के बावजूद स्थापना की बाट जोह रहे आईएमए या केंद्रीय विवि सरीखा राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय (नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी ऑफ उत्तराखंड) के तोहफे को अमली जामा पहनाने के लिए विशेष कार्याधिकारी नियुक्त कर दिया है। शुक्रवार(4th October 2015) को मामले में वरिष्ठ अधिवक्ता डा. भूपाल सिंह भाकुनी व एक अन्य वरिष्ठ अधिवक्ता पूर्व सांसद डा. महेंद्र पाल की जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए कार्यकारी मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति वीके बिष्ट एवं न्यायमूर्ति सुधांशु धूलिया की संयुक्त खंडपीठ ने अपर शिक्षा निदेशक उच्च शिक्षा अजय अग्रवाल को भवाली में प्रस्तावित राष्ट्रीय विधि विवि का विशेष कार्याधिकारी नियुक्त कर दिया है। श्री अग्रवाल से विवि की स्थापना के लिए जमीन अधिगृहीत करने सहित इसकी स्थापना के लिए अन्य जरूरी जिम्मेदारियां निभाने को कहा गया है। इसी मामले में एक अन्य वरिष्ठ अधिवक्ता पूर्व सांसद डा. महेंद्र पाल ने भी जल्द राष्ट्रीय विधि विवि की स्थापना के लिए उच्च न्यायालय में जनहित याचिका दायर की है। संयुक्त खंडपीठ ने दोनों याचिकाओं को एक साथ संबद्ध करते हुए मामले की अगली सुनवाई के लिए 18 दिसंबर की तिथि नियत कर दी है।

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मेरा जन्म 26 नवंबर 1972 को हुआ था। मैं नैनीताल, भारत में मूलतः एक पत्रकार हूँ। वर्तमान में मार्च 2010 से राष्ट्रीय हिन्दी दैनिक समाचार पत्र-राष्ट्रीय सहारा में ब्यूरो चीफ के रूप में कार्य कर रहा हूँ। इससे पहले मैं पांच साल के लिए दैनिक जागरण के लिए काम कर चुका हूँ। कुमाऊँ विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग से ‘नए मीडिया’ विषय पर शोधरत हूँ। फोटोग्राफ़ी मेरा शौक है। मैं NIKON COOLPIX P530 और अडोब फोटोशॉप 7.0 के साथ फोटोग्राफी कर रहा हूँ। फोटोग्राफी मेरे लिए दुनियां की खूबसूरती को अपनी ओर से चिरस्थाई बनाने का बहुत छोटा सा प्रयास है। एक फोटो पत्रकार के रूप में मेरी तस्वीरों को नैनीताल राजभवन सहित विभिन्न प्रदर्शनियों में प्रस्तुत किया गया, तथा उत्तराखंड की राज्यपाल श्रीमती मार्गरेट अलवा द्वारा सम्मानित किया गया है। कुछ चित्रों को राष्ट्रीय-अंतर्राष्ट्रीय पुरस्कार भी प्राप्त हो चुके हैं। गूगल अर्थ पर चित्र उपलब्ध कराने वाली पैनोरामियो साइट पर मेरी प्रोफाइल को 18.85 Lacs से भी अधिक हिट्स प्राप्त हैं।पत्रकारिता और फोटोग्राफी के अलावा मुझे कवितायेँ लिखना पसंद है। काव्य क्षेत्र में मैंने नवीन जोशी “नवेन्दु” के रूप में अपनी पहचान बनाई है। मैंने बहुत सी कुमाउनी कवितायेँ लिखी हैं, कुमाउनी भाषा में मेरा काव्य संकलन उघड़ी आंखोंक स्वींड़ प्रकाशित हो चुका है, जो कि पुस्तक के के साथ ही डिजिटल (PDF) फार्मेट पर भी उपलब्ध होने वाली कुमाउनी की पहली पुस्तक है। मेरी यह पुस्तक गूगल एप्स पर भी उपलब्ध है। ’ यहां है एक पत्रकार, लेखक, कवि एवं छाया चित्रकार के रूप में मेरी रचनात्मकता, लेख, आलेख, छायाचित्र, कविताएं, हिंदी-कुमाउनी के ब्लॉग आदि कार्यों का पूरा समग्र। मेरी कोशिश है कि यहां नैनीताल, कुमाऊं, उत्तराखंड और वृहद संदर्भ में देश की विरासत, संस्कृति, इतिहास और वर्तमान को समग्र रूप में संग्रहीत करने की….। मेरे दिल में बसता है, मेरा नैनीताल, मेरा कुमाऊं और मेरा उत्तराखंड

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