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वन व एनडीआरएफ की टीमें रहीं आग बुझाने में नाकाम तो ग्रामीणों ने संभाला मोर्चा

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नवीन समाचार, नैनीताल, 16 अप्रैल 2021। मुख्यालय के निकट मनोरा रेंज के अंतर्गत ज्योलीकोट के समीप के ग्राम चोपड़ा के जंगल बीते बुधवार की रात्रि से बृहस्पति तक धधकते रहे। बताया गया है कि इस अग्निकांड में कई हेक्टेयर जंगल जल कर नष्ट हो गए। धधकते हुए जंगलों की आग बुझाने के लिए एनडीआरएफ और वन विभाग की टीमें आग को बुझाने में नाकाम रहीं। इस पर गाँव के नजदीक पहुंची आग को आबादी क्षेत्र में फैलने से रोकने के लिये ग्राम के धन सिंह राठौर, मोती सिंह रावत, प्रेम बल्लभ पांडे, भीम सिंह रावत, गोपाल दत्त जोशी, खीमानन्द जोशी, भानु राठौर, यश जोशी, निखिल जोशी, रमेश रावत, हिमांशु जोशी, धर्मेंद्र कुंवर, योगेश कुंवर व पारस कुंवर आदि लोगों ने कमान संभाल कर आग को फैलने से रोका। ग्रामीणों ने वन विभाग की कार्य प्रणाली पर भी असंतोष व्यक्त किया है और बताया कि आज शुक्रवार को भी जंगल सुलग रहे है जिससे आग फैलने का खतरा बना हुआ है।

बिड़ला के जंगल में भी लगी आग
नैनीताल। नगर एवं आसपास के क्षेत्रों में वनाग्नि की घटनाएं जारी हैं। शुक्रवार को मुख्यालय में नगर पालिका की सीमा के अंतर्गत बिड़ला विद्या मंदिर के नीचे के जंगल में आग लग गई। नगर पालिका रेंज के वन क्षेत्राधिकारी प्रमोद तिवारी ने बताया कि वन कर्मियों ने आग पर काबू पा लिया है।

यह भी पढ़ें : चारखेत व पाइंस के जंगलों में लगी भीषण आग, केपी हॉस्टल की छात्राएं खुद बाल्टियों से जुटीं आग बुझाने में

नवीन समाचार, नैनीताल, 14 अप्रैल 2021। जनपद एवं राज्य में एक बार फिर वनाग्नि की घटनाएं बढ़ने लगी हैं। बुधवार को मुख्यालय और मुख्यालय के निकट दोनों ओर वनाग्नि की कई बड़ी घटनाएं हुईं। आज नगर में डीएसबी परिसर के छात्राओं के केपी छात्रावास की पास के जंगल में आग लग गई। इसे बुझाने के लिए खुद छात्राएं आगे आईं। उन्होंने छात्रावास से बाल्टियों से पानी लाकर ‘संघे शक्तिः’ का परिचय देते हुए आग पर काबू पा लिया।
उधर नगर के भवाली रोड पर पाइंस और कालाढुंगी रोड पर चारखेत के पास के जंगलों में भी भीषण आग लग गई। यहां आग की लपड़ें काफी ऊंची उठती नजर आईं। वन और अग्निशमन विभाग की टीमें आग बुझाने के कार्य में जुटी रहीं।

यह भी पढ़ें : गैर चीड़ के नमी वाले टिफिन टॉप के जंगल में लगी आग

नवीन समाचार, नैनीताल, 13 अप्रैल 2021। कुछ दिन थमने के बाद एक बार फिर वनों में आग लगने की घटनाएं प्रारंभ हो गई हैं। मंगलवार को नगर के टिफिन टॉप की पहाड़ी में आग लग गई। उल्लेखनीय है कि टिफिन टॉप की पहाड़ी उत्तरी ढाल की पहाड़ी है। इस पर धूप की कम मौजूदगी रहती है, और यहां चीड़ के पेड़ भी नहीं है, बल्कि यहां बांज-बुरांश एवं रिंगाल आदि का घना जंगल है। यहां आम तौर पर आग लगने की घटनाएं होती भी नहीं हैं। इस प्रकार साफ तौर पर माना जा रहा है कि किसी ने यहां आग लगाई होगी। बहरहाल, वन एवं अग्निशमन विभाग की टीम ने आग पर फायर टेंडर की मदद से काबू पा लिया।

यह भी पढ़ें : भूमियाधार, खूपी व करकोटक पहाड़ी पर जंगल में लगी आग

नवीन समाचार, नैनीताल, 11 अप्रैल 2021। अभी भी आग की घटनाएं रुकने का नाम नहीं ले रही हैं। दो दिन पूर्व मुख्यालय के निकट देवता गांव में और एक दिन पूर्व शनिवार को हल्द्वानी रोड पर वेलुवाखान के पास वनाग्नि की घटनाएं हुई थीं। बेलुवाखान के पास आग लगने से जलकर एक पेड़ सड़क पर आ गिरा था, इस कारण मार्ग पर एक घंटे यातायात भी बंद रहा था। अब रविवार को निकटवर्ती भूमियाधार व खूपी गांवों के पास और उधर भीमताल की प्रसिद्ध करकोटक पहाड़ी पर आग लगने की घटनाएं हुईं। करकोटक में वन विभाग के कर्मियों को यहां आग बुझाने में काफी मशक्कत करनी पड़ी। जबकि भूमियाधार-खूपी में वनाग्नि को बुझाने में अग्निशमन बल के चंदन राम आर्य, संदीप सिंह, भोपाल सिंह मेहता, उमेश कुमार, मनोज भट्ट, नीरज कुमार, मोहन सिंह, धीरेंद्र सिंह व रवींद्र कुमार आदि कर्मचारियों ने योगदान दिया। इधर हल्द्वानी में भी गौलापार क्षेत्र में खेड़ा के पास के जंगलों में अभी जबर्दस्त आग लगी हुई है।

यह भी पढ़ें : मुख्यालय के निकट के गांव के पास जंगल में ‘लगाई’ आग !

नवीन समाचार, नैनीताल, 07 अप्रैल 2021। बुधवार को पहाड़ों पर अनेक स्थानों पर हुई हल्की बारिश के साथ मौसम में हल्की नमी होने के साथ पहाड़ों पर वनाग्नि की घटनाओं में कमी आने की उम्मीद की जा रही है, परंतु बृहस्पतिवार सुबह मुख्यालय के निकट हनुमानगढ़ी के पास स्थित देव़ता गांव के नीचे के जंगल में आग लगी नजर आ रही है। इसकी सूचना वन विभाग के अधिकारियों को दी गई है। माना जा रहा है कि जल्द आग पर काबू पा लिया जाएगा। विश्वस्त सूत्रों की ओर से बताया गया है कि आसपास पशु पालक रहते हैं, और वे अच्छी घास के लिए आग लगाते हैं। कुछ दिन पूर्व भी यहां आग लगाई गई थी, जिसे बुझा दिया गया था। अब बृहस्पतिवार सुबह पुनः यहां आग लगाई गई है।

यह भी पढ़ें : तीसरे दिन भी नाकाम रहा हेलीकॉप्टर लौटा, इधर कुमाऊं मंडल में वनाग्नि पर पूरी तरह नियंत्रण का दावा

नवीन समाचार, नैनीताल, 07 अप्रैल 2021। भारतीय सेना द्वारा कुमाऊं मंडल में आग पर नियंत्रण के लिए उपलब्ध कराया गया एमआई-17 हेलीकॉप्टर बुधवार को लगातार तीसरे दिन भी दृश्यता शून्य होने के कारण भीमताल झील से पानी नहीं ले पाया और वापस लौट गया। कुमाऊं मंडल में आग पर नियंत्रण के लिए हेलीकॉप्टर की सेवाओं के प्रयोग के लिए नियुक्त नोडल अधिकारी डीएफओ टीआर बीजूलाल ने बताया कि इस बीच नैनीताल वन प्रभाग में आग पूरी तरह से नियंत्रण में है। मंगलवार को जनपद में 24 स्थानों पर आग लगी थी, जिसे बुझा दिया गया। बुधवार को सुबह केवल एक स्थान-गेठिया में आग लगी थी, जिसे सुबह ही बुझा लिया गया। वहीं उन्होंने आग से अधिक प्रभावित बागेश्वर व पिथौरागढ़ जनपदों में आज दो दौर की बारिश के बाद आग के वन कर्मियों व बारिश से बुझ जाने का दावा किया। उधर बताया गया है कि बागेश्वर में सुबह हल्की बारिश के बाद दृश्यता में काफी सुधार आया है। अब दूर की पहाड़िया भी नजर आने लगी हैं। इधर श्री बीजूलाल ने बताया कि अब आपात स्थिति में ही हेलीकॉप्टर की सेवाएं ली जाएंगी। गौरतलब है कि हेलीकॉप्टर कुमाऊं मंडल में आग पर नियंत्रण हेतु धुंवे व प्रदूषण की वजह से दृश्यता शून्य होने के कारण एक बार भी अपनी सेवाएं नहीं दे पाया।

इधर वन विभाग के अनुसार  पिछले अक्टूबर से अब तक प्रदेश में 1 हजार 916 हेक्टेअर से अधिक का क्षेत्र वनाग्नि से प्रभावित हुआ है। इस अवधि में आग लगने की 1 हजार 409 घटनायें व 4 लोगों की मृत्यु हो चुकी है। अब तक राज्य में वनाग्नि से 51 लाख 17 हजार 664 रुपये की आर्थिक क्षति हुई है।

यह भी पढ़ें : वनाग्नि की घटनाओं पर हाईकोर्ट ने स्वतः संज्ञान लिया, पीसीसीएफ कल कोर्ट में व्यक्तिगत रूप से तलब

नवीन समाचार, नैनीताल, 06 अप्रैल 2021। उत्तराखंड के जंगलों में लगी भीषण आग पर उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने मंगलवार को स्वतः संज्ञान लेते हुए राज्य सरकार को कड़ी फटकार लगाने के साथ ही प्रमुख वन संरक्षक राजीव भरतरी को बुधवार को सुबह सवा दस बजे व्यक्तिगत रूप से तलब किया है। न्यायालय ने पूछा है कि इस संबंध में 2016 के न्यायालय के आदेश का अनुपालन क्यों नहीं किया गया। उल्लेखनीय है कि 2016 में भी उच्च न्यायालय ने वनाग्नि की बड़ी घटनाएं होने पर स्वतः संज्ञान लेते हुए वनाग्नि की घटनाओं पर नियंत्रण के लिए आधुनिक उपकरण क्रय करने सहित वनाग्नि पर नियंत्रण के लिए जरूरी कदम उठाने के आदेश पारित किए थे। मंगलवार को उत्तराखंड उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति आरएस चौहान व न्यायाधीश न्यायमूर्ति आलोक कुमार वर्मा की खंडपीठ में इस मामले में सुनवाई हुई।
दूसरे दिन भी भीमताल झील से पानी नहीं ले पाया हेलीकॉप्टर
नैनीताल। भारतीय वायु सेना से उत्तराखंड को वनाग्नि बुझाने के लिए मिले दो में से एक हेलीकॉप्टर मंगलवार को दूसरे दिन भी कुमाऊं मंडल के वनों में लगी आग बुझाने के लिए भीमताल झील से पानी नहीं ले पाया। ऐसा इसलिए कि यहां वनाग्नि की वजह से एवं मैदानी क्षेत्रों की ओर से आई, वातावरण में फैली धुंध की वजह से दृश्यता बेहद कम रही। इस कारण हेलीकॉप्टर ने यहां पानी लेने के लिए आने का प्रयास किया किंतु वह इसमें सफल नहीं हो पाया। कुमाऊं मंडल में वनाग्नि बुझाने के लिए प्रयोग होने वाले हेलीकॉप्टर के नोडल प्रभारी नैनीताल के प्रभागीय वनाधिकारी बीजू लाल टीआर ने बताया कि दृश्यता बेहद कम है, और लगातार घट रही है। शाम पांच बजे तक हेलीकॉप्टर द्वारा पुनः प्रयास किए जाने की संभावना है।

अब खुद लोग स्वयं को वनाग्नि से बचाने के लिए आसपास लगा रहे आग
नैनीताल। जानकारी के अनुसार कुमाऊं मंडल में वनाग्नि की अनेक भीषण घटनाओं, एवं कुछ घटनाओं में वनाग्नि से ग्रामीणों के भी झुलसने की घटनाओं से लोगों में वनाग्नि से भय भी व्याप्त हो रहा है। ऐसे में लोग अपने घरों, गांवों के आसपास चारों ओर खुद ही नियंत्रित तरीके से आग लगाकर वनाग्नि से बचने का प्रयास कर रहे हैं। ऐसे में पूरे वायुमंडल में धुंध छायी हुई है, और दृश्यता शून्य के करीब है।

यह भी पढ़ें : भीमताल झील से पानी नहीं ले पा रहा हेलीकॉप्टर, वन विभाग की वेबसाइट के अनुसार दो वर्ष से राज्य में नहीं लगी वनाग्नि

-एक घंटे बाद पुनः करेगा प्रयास
नवीन समाचार, भीमताल (नैनीताल), 05 अप्रैल 2021। भारतीय वायु सेना से उत्तराखंड को वनाग्नि बुझाने के लिए मिले दो में से एक हेलीकॉप्टर ने सोमवार को टिहरी झील से पानी लेकर आग बुझाने में अपना योगदान दिया। वहीं कुमाऊं मंडल में वनाग्नि बुझाने के लिए आया हेलीकॉप्टर भीमताल झील के पास नहीं आ पाया। ऐसा इसलिए कि यहां वनाग्नि की वजह से एवं मैदानी क्षेत्रों की ओर से आई, वातावरण में फैली धुंध की वजह से दृश्यता बेहद कम हो गई। इस कारण हेलीकॉप्टर ने यहां पानी लेने के लिए आने का प्रयास किया किंतु वह इसमें सफल नहीं हो पाया। कुमाऊं मंडल में वनाग्नि बुझाने के लिए प्रयोग होने वाले हेलीकॉप्टर के नोडल प्रभारी नैनीताल के प्रभागीय वनाधिकारी बीजू लाल टीआर ने बताया कि दृश्यता बेहद कम है, और लगातार घट रही है। सूर्य भी नजर नहीं आ रहे हैं। इस कारण हेलीकॉप्टर नहीं आ पा रहा है। एक घंटे बाद हेलीकॉप्टर द्वारा पुनः प्रयास किए जाने की संभावना है।

मई 2020 से अपडेट नहीं हुआ उत्तराखंड वन विभाग का ट्विटर अकाउंट, मई 2019 से वेबसाइट अपडेट नहीं
नैनीताल। डिजिटल इंडिया के दौर में उत्तराखंड वन विभाग एक वर्ष पीछे नजर आ रहा है। उत्तराखंड वन विभाग का ट्विटर खाता फरवरी 2020 में बनने के बाद 27 मई 2020 से अपडेट नहीं हुआ है। वहीं विभाग के एफआरएमएस यानी फायर रिपोर्ट मैनेजमेंट सिस्टम की बात करें तो इसके अनुसार राज्य में 6 मई 2019 के बाद से आग नहीं लगी है।

यह भी पढ़ें : दोहराया जाएगा 2016, फिर बॉम्बी बकेट युक्त हेलीकॉप्टर बुझाएंगे उत्तराखंड के जंगलों में लगी आग

नवीन समाचार, देहरादून, 04 अप्रैल 2021। उत्तराखंड में कम बारिश और बर्फबारी के कारण इस बार फायर सीजन की शुरुआत में ही, मार्च माह से ही राज्य के जंगल धधकने लगे थे, जबकि अब अप्रैल माह में वनों की आग विकराल हो गई है। फरवरी से शुरू हुए फायर सीजन के बाद से अब तक कुमाऊं में 400 से अधिक व पूरे उत्तराखंड में 983 आग की घटनाएं हो चुकी हैं। इन घटनाओं में 1291.13 हेक्टेयर वन क्षेत्र को नुकसान पहुंचा है, 5 व्यक्तियों की आग बुझाने के दौरान मौत हो चुकी है और 2 व्यक्ति घायल हुए हैं। ऐसे में उत्तराखंड में बेकाबू होती जंगल की आग पर नियंत्रण के लिए वायु सेना की मदद ली जा रही है। रविवार को राज्य में वायु सेना की टीम रेकी करने के लिए उत्तराखंड पहुंच रही है। उम्मीद जताई जा रही कि एक-दो दिन के भीतर वायु सेना की टीम हेलीकॉप्टरों से राज्य में वनाग्नि पर नियंत्रण करने के लिए मोर्चा संभाल लेगी। उत्तराखंड के जंगलों में आग के सम्बंध में आज केंद्रीय गृह मंत्री अमित साह ने भी प्रदेश के मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत से बात कर जानकारी ली। और आग पर काबू पाने और जानमाल के नुकसान को रोकने के लिए केंद्र सरकार ने तुरंत उत्तराखंड सरकार को एनडीआरएफ की टीमें और हेलिकॉप्टर भेजने के निर्देश दिए हैं। उल्लेखनीय है कि इससे पहले वर्ष 2016 में जंगलों की आग पर नियंत्रण को सेना के हेलीकाप्टरों की मदद ली गई थी। 

प्राप्त जानकारी के अनुसार गत दिवस मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत ने जंगल की आग की समीक्षा के दौरान सेना के हेलीकाप्टरों की मदद लेने के लिए केंद्र को प्रस्ताव भेजने के निर्देश दिए थे। इस पर प्रमुख मुख्य वन संरक्षक (पीसीसीएफ) राजीव भरतरी ने प्रस्ताव तैयार कर शासन को भेजा, जिसमें वायु सेना की बाम्बी बकेट सहित दो हेलीकाप्टर सेवाएं उपलब्ध कराने का आग्रह किया गया। सचिव आपदा प्रबंधन एसए मुरुगेशन के अनुसार शनिवार सुबह शासन ने दो हेलीकाप्टरों की सेवाएं उपलब्ध कराने का आग्रह करते हुए इस संबंध में रक्षा मंत्रालय को पत्र भेजा गया। इसके बाद देर शाम वायु सेना ने सकारात्मक रुख दिखाते हुए वन विभाग के मुखिया पीसीसीएफ से विभिन्न जानकारियां मांगी। पीसीसीएफ राजीव भरतरी के अनुसार वायु सेना ने राज्य में आग की स्थिति, हेलीकाप्टरों के बेस स्टेशन सहित अन्य जानकारियां मांगी, जो उपलब्ध करा दी गई हैं। उन्होंने बताया कि वायु सेना की टीम रेकी के लिए रविवार को पहुंच रही है। वायु सेना के साथ समन्वय के लिए गढ़वाल में वन संरक्षक एनएन पांडेय और कुमाऊं क्षेत्र के लिए डीएफओ नैनीताल बीजूलाल की बतौर समन्वयक तैनाती भी कर दी गई है। उन्होंने बताया कि वायु सेना का एक हेलीकाप्टर गढ़वाल और दूसरा कुमाऊं क्षेत्र में सेवाएं देगा। गढ़वाल क्षेत्र में सेवाएं देने वाला हेलीकाप्टर बाम्बी बकेट के जरिये टिहरी बांध से पानी प्राप्त करेगा, जबकि कुमाऊं का नौकुचियाताल (नैनीताल) से। बकेट में पानी भरकर एक निश्चित ऊंचाई से आग प्रभावित क्षेत्र में उड़ेला जाएगा। उन्होंने बताया कि हेलीकाप्टरों का उपयोग उन क्षेत्रों में अधिक किया जाएगा, जहां आबादी के नजदीक आग पहुंचने की आशंका हो।

यह भी पढ़ें : नैनीताल वन प्रभाग में आग लगाने वालों की सूचना देने वालों को मिलेगा 10 हजार रुपए का इनाम

नवीन समाचार, नैनीताल, 03 अप्रैल 2021। प्रदेश में चिंताजनक स्तर तक लगातार बढ़ रहीं वनाग्नि की घटनाओं को रोकने के लिए नैनीताल वन प्रभाग के प्रभागीय वनाधिकारी टीआर बीजूलाल ने अपनी ओर से बड़ी पहल की है। उन्होंने आग लगाने वालों की सूचना देने वाले व्यक्ति को अपनी ओर से 10 हजार रुपए का नगद ईनाम देने की घोषणा की है। साथ ही यह भी आश्वस्त किया है कि सूचना देने वाले की पहचान पूरी तरह से गोपनीय रखी जाएगी। वहीं आग लगाने वालों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई करते हुए उन्हें जेल भेजा जाएगा।

DFO टीआर बीजूलाल

श्री बीजूलाल ने इसके साथ ही जनसामान्य से अपील की है कि वह आग लगने की सूचना देने के साथ ही आग को रोकने व बुझाने में स्वयं भी योगदान देकर वन विभाग का सहयोग करें। उन्होंने कहा है कि वन सभी के हैं, और सभी का जीवन वनों पर निर्भर है। बिना जनसहयोग के वनाग्नि को रोकना भी वन विभाग के लिए अकेले संभव नहीं है। साथ ही उन्होंने बताया कि वन विभाग के नैनीताल वन प्रभाग के द्वारा लीसा एवं पिरूल एकत्रीकरण के जरिये स्थानीय युवाओं को रोजगार देने का प्रयास भी किया जा रहा है।

वनाग्नि बुझाने में हेलीकॉप्टर लगाए जाएं: प्रो. तिवारी
नैनीताल। कुमाऊं विश्वविद्यालय के शोध एवं प्रसार निदेशक तथा वनस्पति विज्ञानी प्रो. ललित तिवारी ने कहा कि प्रदेश में हो रही वनाग्नि की घटनाओं में बड़े पैमाने पर जैव विविधता को नुकसान पहुंच रहा है। उन्होंने इसे बुझाने के लिए तुरंत हेलीकॉप्टरों की सेवाएं लिए जाने की आवश्यकता जताई है। प्रो. तिवारी ने बताया कि राज्य में 4900 आवृतबीजी प्रजातियां हैं, इनमें से 701 प्रजातियां औषधीय पौधों की हैं। इनके अलावा भी हिमालयी क्षेत्र में 17000 जैव विविधता की प्रजातियां हैं। इन्हें वनाग्नि से नुकसान पहुंच रहा है। खासकर वनाग्नि से प्रभावित चीड़ व बांज के जंगलों में काफल, किल्मोड़ा, पत्थरचट्टा व हिसालू जैसी प्रजातियों को वनाग्नि से काफी नुकसान पहुंच रहा है। इसके साथ ही वनाग्नि छोटे जानवरों के साथ ही पक्षियों के घोंसलों व अंडों को भी सीधा नुकसान पहुंचा रही है। वनाग्नि के कारण वन्य जीव मानव बस्तियों का रुख कर सकते हैं। इससे मानव-वन्य जीव संघर्ष बढ़ सकता है।

जिला न्यायालय में हुई कोरोना सैंपलिंग
कोरोना के बड़ते मामलों के देखते हुवे शुक्रवार को जिला न्यायालय में जिला बार एसोसिएशन के अनुरोध पर न्यायिक अधिकारियों व अधिवक्ताओं सहित न्यायिक कर्मियों के कोरोना की आरटीपीसीआर जांच हेतु नमूने लिये गये। इस अवसर पर जिला न्यायालय परिसर में बीडी पांडे जिला चिकित्सालय के चिकित्सकोे कुल 94 लोगो के नमूने लिए। प्रमुख चिकित्सा अधीक्षक डॉ. केएस धामी ने बताया कि जल्द ही सभी की जांच रिपोर्ट आ जायेगी। तब तक सभी से खुद को आइसोलेट होने को कहा गया है। इस मौके पर डॉ. अनिरुद्ध गंगोला, डॉ. प्रियांशु श्रीवास्तव, डॉ हिमानी पलड़िया, विशाल मार्टिन व नंदा बल्लभ पालीवाल सहित अन्य कर्मचारी मौजूद रहे।

वन व एनडीआरएफ की टीमें रहीं आग बुझाने में नाकाम तो ग्रामीणों ने संभाला मोर्चा
नवीन समाचार, नैनीताल, 16 अप्रैल 2021। मुख्यालय के निकट मनोरा रेंज के अंतर्गत ज्योलीकोट के समीप के ग्राम चोपड़ा के जंगल बीते बुधवार की रात्रि से बृहस्पति तक धधकते रहे। बताया गया है कि इस अग्निकांड में कई हेक्टेयर जंगल जल कर नष्ट हो गए। धधकते हुए जंगलों की आग बुझाने के लिए एनडीआरएफ और वन विभाग की टीमें आग को बुझाने में नाकाम रहीं। इस पर गाँव के नजदीक पहुंची आग को आबादी क्षेत्र में फैलने से रोकने के लिये ग्राम के धन सिंह राठौर, मोती सिंह रावत, प्रेम बल्लभ पांडे, भीम सिंह रावत, गोपाल दत्त जोशी, खीमानन्द जोशी, भानु राठौर, यश जोशी, निखिल जोशी, रमेश रावत, हिमांशु जोशी, धर्मेंद्र कुंवर, योगेश कुंवर व पारस कुंवर आदि लोगों ने कमान संभाल कर आग को फैलने से रोका। ग्रामीणों ने वन विभाग की कार्य प्रणाली पर भी असंतोष व्यक्त किया है और बताया कि आज शुक्रवार को भी जंगल सुलग रहे है जिससे आग फैलने का खतरा बना हुआ है।

बिड़ला के जंगल में भी लगी आग
नैनीताल। नगर एवं आसपास के क्षेत्रों में वनाग्नि की घटनाएं जारी हैं। शुक्रवार को मुख्यालय में नगर पालिका की सीमा के अंतर्गत बिड़ला विद्या मंदिर के नीचे के जंगल में आग लग गई। नगर पालिका रेंज के वन क्षेत्राधिकारी प्रमोद तिवारी ने बताया कि वन कर्मियों ने आग पर काबू पा लिया है।

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नवीन समाचार, नैनीताल, 14 अप्रैल 2021। जनपद एवं राज्य में एक बार फिर वनाग्नि की घटनाएं बढ़ने लगी हैं। बुधवार को मुख्यालय और मुख्यालय के निकट दोनों ओर वनाग्नि की कई बड़ी घटनाएं हुईं। आज नगर में डीएसबी परिसर के छात्राओं के केपी छात्रावास की पास के जंगल में आग लग गई। इसे बुझाने के लिए खुद छात्राएं आगे आईं। उन्होंने छात्रावास से बाल्टियों से पानी लाकर ‘संघे शक्तिः’ का परिचय देते हुए आग पर काबू पा लिया।
उधर नगर के भवाली रोड पर पाइंस और कालाढुंगी रोड पर चारखेत के पास के जंगलों में भी भीषण आग लग गई। यहां आग की लपड़ें काफी ऊंची उठती नजर आईं। वन और अग्निशमन विभाग की टीमें आग बुझाने के कार्य में जुटी रहीं।

यह भी पढ़ें : गैर चीड़ के नमी वाले टिफिन टॉप के जंगल में लगी आग

नवीन समाचार, नैनीताल, 13 अप्रैल 2021। कुछ दिन थमने के बाद एक बार फिर वनों में आग लगने की घटनाएं प्रारंभ हो गई हैं। मंगलवार को नगर के टिफिन टॉप की पहाड़ी में आग लग गई। उल्लेखनीय है कि टिफिन टॉप की पहाड़ी उत्तरी ढाल की पहाड़ी है। इस पर धूप की कम मौजूदगी रहती है, और यहां चीड़ के पेड़ भी नहीं है, बल्कि यहां बांज-बुरांश एवं रिंगाल आदि का घना जंगल है। यहां आम तौर पर आग लगने की घटनाएं होती भी नहीं हैं। इस प्रकार साफ तौर पर माना जा रहा है कि किसी ने यहां आग लगाई होगी। बहरहाल, वन एवं अग्निशमन विभाग की टीम ने आग पर फायर टेंडर की मदद से काबू पा लिया।

यह भी पढ़ें : भूमियाधार, खूपी व करकोटक पहाड़ी पर जंगल में लगी आग

नवीन समाचार, नैनीताल, 11 अप्रैल 2021। अभी भी आग की घटनाएं रुकने का नाम नहीं ले रही हैं। दो दिन पूर्व मुख्यालय के निकट देवता गांव में और एक दिन पूर्व शनिवार को हल्द्वानी रोड पर वेलुवाखान के पास वनाग्नि की घटनाएं हुई थीं। बेलुवाखान के पास आग लगने से जलकर एक पेड़ सड़क पर आ गिरा था, इस कारण मार्ग पर एक घंटे यातायात भी बंद रहा था। अब रविवार को निकटवर्ती भूमियाधार व खूपी गांवों के पास और उधर भीमताल की प्रसिद्ध करकोटक पहाड़ी पर आग लगने की घटनाएं हुईं। करकोटक में वन विभाग के कर्मियों को यहां आग बुझाने में काफी मशक्कत करनी पड़ी। जबकि भूमियाधार-खूपी में वनाग्नि को बुझाने में अग्निशमन बल के चंदन राम आर्य, संदीप सिंह, भोपाल सिंह मेहता, उमेश कुमार, मनोज भट्ट, नीरज कुमार, मोहन सिंह, धीरेंद्र सिंह व रवींद्र कुमार आदि कर्मचारियों ने योगदान दिया। इधर हल्द्वानी में भी गौलापार क्षेत्र में खेड़ा के पास के जंगलों में अभी जबर्दस्त आग लगी हुई है।

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नवीन समाचार, नैनीताल, 07 अप्रैल 2021। बुधवार को पहाड़ों पर अनेक स्थानों पर हुई हल्की बारिश के साथ मौसम में हल्की नमी होने के साथ पहाड़ों पर वनाग्नि की घटनाओं में कमी आने की उम्मीद की जा रही है, परंतु बृहस्पतिवार सुबह मुख्यालय के निकट हनुमानगढ़ी के पास स्थित देव़ता गांव के नीचे के जंगल में आग लगी नजर आ रही है। इसकी सूचना वन विभाग के अधिकारियों को दी गई है। माना जा रहा है कि जल्द आग पर काबू पा लिया जाएगा। विश्वस्त सूत्रों की ओर से बताया गया है कि आसपास पशु पालक रहते हैं, और वे अच्छी घास के लिए आग लगाते हैं। कुछ दिन पूर्व भी यहां आग लगाई गई थी, जिसे बुझा दिया गया था। अब बृहस्पतिवार सुबह पुनः यहां आग लगाई गई है।

यह भी पढ़ें : तीसरे दिन भी नाकाम रहा हेलीकॉप्टर लौटा, इधर कुमाऊं मंडल में वनाग्नि पर पूरी तरह नियंत्रण का दावा

नवीन समाचार, नैनीताल, 07 अप्रैल 2021। भारतीय सेना द्वारा कुमाऊं मंडल में आग पर नियंत्रण के लिए उपलब्ध कराया गया एमआई-17 हेलीकॉप्टर बुधवार को लगातार तीसरे दिन भी दृश्यता शून्य होने के कारण भीमताल झील से पानी नहीं ले पाया और वापस लौट गया। कुमाऊं मंडल में आग पर नियंत्रण के लिए हेलीकॉप्टर की सेवाओं के प्रयोग के लिए नियुक्त नोडल अधिकारी डीएफओ टीआर बीजूलाल ने बताया कि इस बीच नैनीताल वन प्रभाग में आग पूरी तरह से नियंत्रण में है। मंगलवार को जनपद में 24 स्थानों पर आग लगी थी, जिसे बुझा दिया गया। बुधवार को सुबह केवल एक स्थान-गेठिया में आग लगी थी, जिसे सुबह ही बुझा लिया गया। वहीं उन्होंने आग से अधिक प्रभावित बागेश्वर व पिथौरागढ़ जनपदों में आज दो दौर की बारिश के बाद आग के वन कर्मियों व बारिश से बुझ जाने का दावा किया। उधर बताया गया है कि बागेश्वर में सुबह हल्की बारिश के बाद दृश्यता में काफी सुधार आया है। अब दूर की पहाड़िया भी नजर आने लगी हैं। इधर श्री बीजूलाल ने बताया कि अब आपात स्थिति में ही हेलीकॉप्टर की सेवाएं ली जाएंगी। गौरतलब है कि हेलीकॉप्टर कुमाऊं मंडल में आग पर नियंत्रण हेतु धुंवे व प्रदूषण की वजह से दृश्यता शून्य होने के कारण एक बार भी अपनी सेवाएं नहीं दे पाया।

इधर वन विभाग के अनुसार  पिछले अक्टूबर से अब तक प्रदेश में 1 हजार 916 हेक्टेअर से अधिक का क्षेत्र वनाग्नि से प्रभावित हुआ है। इस अवधि में आग लगने की 1 हजार 409 घटनायें व 4 लोगों की मृत्यु हो चुकी है। अब तक राज्य में वनाग्नि से 51 लाख 17 हजार 664 रुपये की आर्थिक क्षति हुई है।

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नवीन समाचार, नैनीताल, 06 अप्रैल 2021। उत्तराखंड के जंगलों में लगी भीषण आग पर उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने मंगलवार को स्वतः संज्ञान लेते हुए राज्य सरकार को कड़ी फटकार लगाने के साथ ही प्रमुख वन संरक्षक राजीव भरतरी को बुधवार को सुबह सवा दस बजे व्यक्तिगत रूप से तलब किया है। न्यायालय ने पूछा है कि इस संबंध में 2016 के न्यायालय के आदेश का अनुपालन क्यों नहीं किया गया। उल्लेखनीय है कि 2016 में भी उच्च न्यायालय ने वनाग्नि की बड़ी घटनाएं होने पर स्वतः संज्ञान लेते हुए वनाग्नि की घटनाओं पर नियंत्रण के लिए आधुनिक उपकरण क्रय करने सहित वनाग्नि पर नियंत्रण के लिए जरूरी कदम उठाने के आदेश पारित किए थे। मंगलवार को उत्तराखंड उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति आरएस चौहान व न्यायाधीश न्यायमूर्ति आलोक कुमार वर्मा की खंडपीठ में इस मामले में सुनवाई हुई।
दूसरे दिन भी भीमताल झील से पानी नहीं ले पाया हेलीकॉप्टर
नैनीताल। भारतीय वायु सेना से उत्तराखंड को वनाग्नि बुझाने के लिए मिले दो में से एक हेलीकॉप्टर मंगलवार को दूसरे दिन भी कुमाऊं मंडल के वनों में लगी आग बुझाने के लिए भीमताल झील से पानी नहीं ले पाया। ऐसा इसलिए कि यहां वनाग्नि की वजह से एवं मैदानी क्षेत्रों की ओर से आई, वातावरण में फैली धुंध की वजह से दृश्यता बेहद कम रही। इस कारण हेलीकॉप्टर ने यहां पानी लेने के लिए आने का प्रयास किया किंतु वह इसमें सफल नहीं हो पाया। कुमाऊं मंडल में वनाग्नि बुझाने के लिए प्रयोग होने वाले हेलीकॉप्टर के नोडल प्रभारी नैनीताल के प्रभागीय वनाधिकारी बीजू लाल टीआर ने बताया कि दृश्यता बेहद कम है, और लगातार घट रही है। शाम पांच बजे तक हेलीकॉप्टर द्वारा पुनः प्रयास किए जाने की संभावना है।

अब खुद लोग स्वयं को वनाग्नि से बचाने के लिए आसपास लगा रहे आग
नैनीताल। जानकारी के अनुसार कुमाऊं मंडल में वनाग्नि की अनेक भीषण घटनाओं, एवं कुछ घटनाओं में वनाग्नि से ग्रामीणों के भी झुलसने की घटनाओं से लोगों में वनाग्नि से भय भी व्याप्त हो रहा है। ऐसे में लोग अपने घरों, गांवों के आसपास चारों ओर खुद ही नियंत्रित तरीके से आग लगाकर वनाग्नि से बचने का प्रयास कर रहे हैं। ऐसे में पूरे वायुमंडल में धुंध छायी हुई है, और दृश्यता शून्य के करीब है।

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-एक घंटे बाद पुनः करेगा प्रयास
नवीन समाचार, भीमताल (नैनीताल), 05 अप्रैल 2021। भारतीय वायु सेना से उत्तराखंड को वनाग्नि बुझाने के लिए मिले दो में से एक हेलीकॉप्टर ने सोमवार को टिहरी झील से पानी लेकर आग बुझाने में अपना योगदान दिया। वहीं कुमाऊं मंडल में वनाग्नि बुझाने के लिए आया हेलीकॉप्टर भीमताल झील के पास नहीं आ पाया। ऐसा इसलिए कि यहां वनाग्नि की वजह से एवं मैदानी क्षेत्रों की ओर से आई, वातावरण में फैली धुंध की वजह से दृश्यता बेहद कम हो गई। इस कारण हेलीकॉप्टर ने यहां पानी लेने के लिए आने का प्रयास किया किंतु वह इसमें सफल नहीं हो पाया। कुमाऊं मंडल में वनाग्नि बुझाने के लिए प्रयोग होने वाले हेलीकॉप्टर के नोडल प्रभारी नैनीताल के प्रभागीय वनाधिकारी बीजू लाल टीआर ने बताया कि दृश्यता बेहद कम है, और लगातार घट रही है। सूर्य भी नजर नहीं आ रहे हैं। इस कारण हेलीकॉप्टर नहीं आ पा रहा है। एक घंटे बाद हेलीकॉप्टर द्वारा पुनः प्रयास किए जाने की संभावना है।

मई 2020 से अपडेट नहीं हुआ उत्तराखंड वन विभाग का ट्विटर अकाउंट, मई 2019 से वेबसाइट अपडेट नहीं
नैनीताल। डिजिटल इंडिया के दौर में उत्तराखंड वन विभाग एक वर्ष पीछे नजर आ रहा है। उत्तराखंड वन विभाग का ट्विटर खाता फरवरी 2020 में बनने के बाद 27 मई 2020 से अपडेट नहीं हुआ है। वहीं विभाग के एफआरएमएस यानी फायर रिपोर्ट मैनेजमेंट सिस्टम की बात करें तो इसके अनुसार राज्य में 6 मई 2019 के बाद से आग नहीं लगी है।

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नवीन समाचार, देहरादून, 04 अप्रैल 2021। उत्तराखंड में कम बारिश और बर्फबारी के कारण इस बार फायर सीजन की शुरुआत में ही, मार्च माह से ही राज्य के जंगल धधकने लगे थे, जबकि अब अप्रैल माह में वनों की आग विकराल हो गई है। फरवरी से शुरू हुए फायर सीजन के बाद से अब तक कुमाऊं में 400 से अधिक व पूरे उत्तराखंड में 983 आग की घटनाएं हो चुकी हैं। इन घटनाओं में 1291.13 हेक्टेयर वन क्षेत्र को नुकसान पहुंचा है, 5 व्यक्तियों की आग बुझाने के दौरान मौत हो चुकी है और 2 व्यक्ति घायल हुए हैं। ऐसे में उत्तराखंड में बेकाबू होती जंगल की आग पर नियंत्रण के लिए वायु सेना की मदद ली जा रही है। रविवार को राज्य में वायु सेना की टीम रेकी करने के लिए उत्तराखंड पहुंच रही है। उम्मीद जताई जा रही कि एक-दो दिन के भीतर वायु सेना की टीम हेलीकॉप्टरों से राज्य में वनाग्नि पर नियंत्रण करने के लिए मोर्चा संभाल लेगी। उत्तराखंड के जंगलों में आग के सम्बंध में आज केंद्रीय गृह मंत्री अमित साह ने भी प्रदेश के मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत से बात कर जानकारी ली। और आग पर काबू पाने और जानमाल के नुकसान को रोकने के लिए केंद्र सरकार ने तुरंत उत्तराखंड सरकार को एनडीआरएफ की टीमें और हेलिकॉप्टर भेजने के निर्देश दिए हैं। उल्लेखनीय है कि इससे पहले वर्ष 2016 में जंगलों की आग पर नियंत्रण को सेना के हेलीकाप्टरों की मदद ली गई थी। 

प्राप्त जानकारी के अनुसार गत दिवस मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत ने जंगल की आग की समीक्षा के दौरान सेना के हेलीकाप्टरों की मदद लेने के लिए केंद्र को प्रस्ताव भेजने के निर्देश दिए थे। इस पर प्रमुख मुख्य वन संरक्षक (पीसीसीएफ) राजीव भरतरी ने प्रस्ताव तैयार कर शासन को भेजा, जिसमें वायु सेना की बाम्बी बकेट सहित दो हेलीकाप्टर सेवाएं उपलब्ध कराने का आग्रह किया गया। सचिव आपदा प्रबंधन एसए मुरुगेशन के अनुसार शनिवार सुबह शासन ने दो हेलीकाप्टरों की सेवाएं उपलब्ध कराने का आग्रह करते हुए इस संबंध में रक्षा मंत्रालय को पत्र भेजा गया। इसके बाद देर शाम वायु सेना ने सकारात्मक रुख दिखाते हुए वन विभाग के मुखिया पीसीसीएफ से विभिन्न जानकारियां मांगी। पीसीसीएफ राजीव भरतरी के अनुसार वायु सेना ने राज्य में आग की स्थिति, हेलीकाप्टरों के बेस स्टेशन सहित अन्य जानकारियां मांगी, जो उपलब्ध करा दी गई हैं। उन्होंने बताया कि वायु सेना की टीम रेकी के लिए रविवार को पहुंच रही है। वायु सेना के साथ समन्वय के लिए गढ़वाल में वन संरक्षक एनएन पांडेय और कुमाऊं क्षेत्र के लिए डीएफओ नैनीताल बीजूलाल की बतौर समन्वयक तैनाती भी कर दी गई है। उन्होंने बताया कि वायु सेना का एक हेलीकाप्टर गढ़वाल और दूसरा कुमाऊं क्षेत्र में सेवाएं देगा। गढ़वाल क्षेत्र में सेवाएं देने वाला हेलीकाप्टर बाम्बी बकेट के जरिये टिहरी बांध से पानी प्राप्त करेगा, जबकि कुमाऊं का नौकुचियाताल (नैनीताल) से। बकेट में पानी भरकर एक निश्चित ऊंचाई से आग प्रभावित क्षेत्र में उड़ेला जाएगा। उन्होंने बताया कि हेलीकाप्टरों का उपयोग उन क्षेत्रों में अधिक किया जाएगा, जहां आबादी के नजदीक आग पहुंचने की आशंका हो।

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नवीन समाचार, नैनीताल, 03 अप्रैल 2021। प्रदेश में चिंताजनक स्तर तक लगातार बढ़ रहीं वनाग्नि की घटनाओं को रोकने के लिए नैनीताल वन प्रभाग के प्रभागीय वनाधिकारी टीआर बीजूलाल ने अपनी ओर से बड़ी पहल की है। उन्होंने आग लगाने वालों की सूचना देने वाले व्यक्ति को अपनी ओर से 10 हजार रुपए का नगद ईनाम देने की घोषणा की है। साथ ही यह भी आश्वस्त किया है कि सूचना देने वाले की पहचान पूरी तरह से गोपनीय रखी जाएगी। वहीं आग लगाने वालों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई करते हुए उन्हें जेल भेजा जाएगा।

DFO टीआर बीजूलाल

श्री बीजूलाल ने इसके साथ ही जनसामान्य से अपील की है कि वह आग लगने की सूचना देने के साथ ही आग को रोकने व बुझाने में स्वयं भी योगदान देकर वन विभाग का सहयोग करें। उन्होंने कहा है कि वन सभी के हैं, और सभी का जीवन वनों पर निर्भर है। बिना जनसहयोग के वनाग्नि को रोकना भी वन विभाग के लिए अकेले संभव नहीं है। साथ ही उन्होंने बताया कि वन विभाग के नैनीताल वन प्रभाग के द्वारा लीसा एवं पिरूल एकत्रीकरण के जरिये स्थानीय युवाओं को रोजगार देने का प्रयास भी किया जा रहा है।

वनाग्नि बुझाने में हेलीकॉप्टर लगाए जाएं: प्रो. तिवारी
नैनीताल। कुमाऊं विश्वविद्यालय के शोध एवं प्रसार निदेशक तथा वनस्पति विज्ञानी प्रो. ललित तिवारी ने कहा कि प्रदेश में हो रही वनाग्नि की घटनाओं में बड़े पैमाने पर जैव विविधता को नुकसान पहुंच रहा है। उन्होंने इसे बुझाने के लिए तुरंत हेलीकॉप्टरों की सेवाएं लिए जाने की आवश्यकता जताई है। प्रो. तिवारी ने बताया कि राज्य में 4900 आवृतबीजी प्रजातियां हैं, इनमें से 701 प्रजातियां औषधीय पौधों की हैं। इनके अलावा भी हिमालयी क्षेत्र में 17000 जैव विविधता की प्रजातियां हैं। इन्हें वनाग्नि से नुकसान पहुंच रहा है। खासकर वनाग्नि से प्रभावित चीड़ व बांज के जंगलों में काफल, किल्मोड़ा, पत्थरचट्टा व हिसालू जैसी प्रजातियों को वनाग्नि से काफी नुकसान पहुंच रहा है। इसके साथ ही वनाग्नि छोटे जानवरों के साथ ही पक्षियों के घोंसलों व अंडों को भी सीधा नुकसान पहुंचा रही है। वनाग्नि के कारण वन्य जीव मानव बस्तियों का रुख कर सकते हैं। इससे मानव-वन्य जीव संघर्ष बढ़ सकता है।

नवीन समाचार
‘नवीन समाचार’ विश्व प्रसिद्ध पर्यटन नगरी नैनीताल से ‘मन कही’ के रूप में जनवरी 2010 से इंटरननेट-वेब मीडिया पर सक्रिय, उत्तराखंड का सबसे पुराना ऑनलाइन पत्रकारिता में सक्रिय समूह है। यह उत्तराखंड शासन से मान्यता प्राप्त, अलेक्सा रैंकिंग के अनुसार उत्तराखंड के समाचार पोर्टलों में अग्रणी, गूगल सर्च पर उत्तराखंड के सर्वश्रेष्ठ, भरोसेमंद समाचार पोर्टल के रूप में अग्रणी, समाचारों को नवीन दृष्टिकोण से प्रस्तुत करने वाला ऑनलाइन समाचार पोर्टल भी है।
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