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उपलब्धि: नैनीताल के विमल चौधरी बने देश की शीर्ष खेल संस्था-CFI के उपाध्यक्ष

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उपाध्यक्ष की जिम्मेदारी मिलने पर साइकिलिंग फेडरेशन के अध्यक्ष एवं अन्य पदाधिकारियों के साथ विमल चौधरी।

नगर के उद्यमी विमल चौधरी 1946 में स्थापित साइकिलिंग के क्षेत्र में देश की शीर्ष नियामक संस्था सीएफआई-साइकिलिंग फेडरेशन ऑफ इंडिया के उपाध्यक्ष बन गये हैं। श्री चौधरी ने बताया कि उन्हें देश के युवाओं को साइकिलिंग के क्षेत्र में युवाओं को आगे बढ़ाने की जिम्मेदारी मिली है। उन्होंने संकल्प जताया कि इस क्षेत्र की सर्वश्रेष्ठ प्रतिभाओं को आगे लाने की अपनी जिम्मेदारी से पूरा न्याय करेंगे। उनकी इस उपलब्धि पर नगर के खेल प्रेमियों में हर्ष का माहौल है। उल्लेखनीय है कि नगर के निवासी राजीव मेहता लंबे समय से भारतीय ओलंपिक संघ के महासचिव पद की बड़ी जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। इस प्र्रकार चौधरी देश की किसी शीर्ष खेल संस्था पर पहंुंचने वाले वर्तमान में दूसरे व्यक्ति बन गये हैं।
चौधरी के अतिरिक्त मंजीत सिंह, देवेंद्र बी सोलंकी, श्रीधर एम गोरे, प्रशांत सिंह, एम पृथ्वीराज ंिसह, पी माला रेड्डी भी सीएफआई के उपाध्यक्ष बनाये गये हैं, जबकि परमिंदर सिंह ढींढसा एफएसआई के अध्यक्ष एवं मनिंदर पाल सिंह महासचिव बने हैं।

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नवीन समाचार, नैनीताल, 23 दिसंबर 2018 । उत्तराखंड की राष्ट्रीय खेलों की मेजबानी का सपना पूरा हो गया। भारतीय ओलंपिक संघ ने प्रदेश में 2020 राष्ट्रीय खेलों की मेजबानी पर मुहर लगा दी है। मेजबानी के लिए दावेदार तीन राज्यों में से उत्तराखंड का चयन किया गया। भारतीय ओलंपिक संघ ने आगामी वर्षों में छत्तीसगढ़ और मिजोरम की मेजबानी पर भी फैसला कर लिया है।
2019 में राज्य में राष्ट्रीय खेलों के आयोजन की पूरी तैयारी थी, लेकिन ऐन वक्त पर भारतीय ओलंपिक संघ ने गोवा को राष्ट्रीय खेलों की मेजबानी सौंप दी। इसके बाद प्रदेश ओलंपिक संघ और राज्य सरकार ने 2020 में राष्ट्रीय खेल कराने की तैयारी शुरू कर दी। हालांकि 2010 राष्ट्रीय खेलों की मेजबानी के लिए उत्तराखंड के साथ ही मिजोरम और छत्तीसगढ़ भी दावा ठोक रहे थे।मेजबानी के लिए तीनों राज्यों के अधिकारी दिल्ली में होने वाली भारतीय ओलंपिक संघ की जनरल बॉडी की मिटिंग में पहुंचे थे। राज्य की ओर से खेल सचिव भूपिंदर कौर औलख और खेल निदेशक प्रताप साह इस बैठक में हिस्सा लेने पहुंचे थे। खेल सचिव ने ओलंपिक संघ की मीटिंग में राज्य की तैयारियों को रखा। इसके बाद 2020 राष्ट्रीय खेलों के आयोजन के लिए ओलंपिक संघ की जनरल बॉडी ने उत्तराखंड को चुना। उत्तरांचल ओलंपिक संघ के महासचिव डीके सिंह ने भी मेजबानी मिलने की पुष्टि की है।
उल्लेखनीय है कि इससे पूर्व उत्तराखंड में वर्ष 2018 में देश के 38वें राष्ट्रीय खेल आयोजित किए जाने की 19 दिसंबर 2014 को भारतीय ओलंपिक संघ ने घोषणा कर दी गयी थी। इसे उत्तराखंड सरकार के द्वारा मुख्यमंत्री हरीश रावत के स्वप्न के सच होने के रूप में प्रचारित किया गया था। इस सम्बन्ध में हमने 2 नवंबर 2014 को बोट हाउस क्लब में यहीं नैनीताल निवासी भारतीय ओलंपिक संघ के महासचिव राजीव मेहता से मुलाकात के आधार पर 5 नवंबर के अंक में प्रथम पृष्ठ पर एवं ‘नवीन जोशी समग्र’ पर यह समाचार प्रकाशित कर दिया था। श्री मेहता ने कहा था-उनकी हमेशा से इच्छा थी कि वह भारतीय ओलंपिक संघ में होने का लाभ लेते हुए अपने राज्य को कुछ दें। उन्होंने राज्य के पूर्व मुख्यमंत्रियों से भी इस बाबत बात की थी, पर शायद उनकी समझ में बात नहीं आई। अलबत्ता, हरीश रावत ने उन्हें इस बाबत औपचारिक पत्र देने का वादा किया है। लेकिन 2018 में यह  खेल नहीं हो पाए। 
5 अक्टूबर 2017 को नैनीताल पहुंची 21वें राष्ट्रमंडल खेलों की क्वीन’स बेटन
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नवीन जोशी, नैनीताल। 1930 से हो रहे राष्ट्रमण्डल खेलों के 70 वर्षों के इतिहास में भारत को 19वें संस्करण में आयोजन का जो पहला मौका मिला….

राष्ट्रमंडल खेलों की क्वीन्स बेटन रिले के साथ अपने गृहनगर सरोवरनगरी नैनीताल पहुंचे श्री मेहता ने बातों के दौरान इस बात पर निराशा भी जताई कि उत्तराखंड का खेलों का बजट केवल 40 करोड़ रुपए है, जबकि 2018 में 38वें राष्ट्रीय खेल आयोजित करने जा रहे गोवा का बजट 300 करोड़ रुपए का है। ऐसे में उत्तराखंड के 39वें राष्ट्रीय खेल कराने की गंभीरता को भी समझा जा सकता है। वहीं राज्य में पिछली सरकार के दौर में 38वें राष्ट्रीय खेलों के लिये हामी तो भरी गयी, किंतु तैयारियों के नाम पर हल्द्वानी में बनाए गए अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम को बड़ी उपलब्धि के रूप में प्रदर्शित किया गया, जबकि सच्चाई यह है कि एक खेल के बजाय खली के मनोरंजक सीडब्लूई यानी कांटिनेंटल रेसलिंग इंटरटेनमेंट कार्यक्रम के जरिये शुभारंभ किये गए इस मैदान का क्रिकेट के अलावा अन्य किसी भी खेल के लिये उपयोग हो ही नहीं सकता है। राष्ट्रीय खेलों में भी इस मैदान का उपयोग नहीं हो सकता है, जबकि अन्य स्टेडियमों का निर्माण बस कहने भर को ही हो रहा है। ऐसे में जनवरी 17 तक यह मैदान राज्य खेलों के लिये भी तैयार हो जाएं तो बड़ी बात होगी। अलबत्ता स्थानीय विधायक संजीव आर्य एवं पूर्व में जिला क्रीड़ा अधिकारी व राष्ट्रीय स्तर के खिलाड़ी रहे द्वाराहाट के विधायक महेश नेगी ने उम्मीद जताई कि उत्तराखंड निश्चित रूप से 39वें राष्ट्रीय खेल आयोजित करेगा।

भाजपा सरकार ने खेलों का बजट आधा कर दिया: हरीश रावत

नैनीताल। शुक्रवार को सरोवरनगरी में मौजूद प्रदेश के पूर्व सीएम हरीश रावत ने राष्ट्रीय खेलों की मेजबानी के बाबत पूछे जाने पर दावा किया कि मौजूदा भाजपा सरकार ने राज्य का खेलों का बजट आधा कर दिया है। हालांकि वह बता नहीं पाए कि उनकी सरकार के समय खेलों का बजट कितना था। उन्होंने कहा कि उन्होंने तीन वर्षों में हर वर्ष ग्रामीण खेलों, खेल क्लबों और खेल संस्थाओं को समय दिया था। साथ ही मुन्स्यारी में ‘हाई एल्टीट्यूड’ प्रशिक्षण संस्थान स्थापित करने के साथ देहरादून, हल्द्वानी, अल्मोड़ा, काशीपुर व पिथौरागढ़ आदि स्थानों के पुराने खेल स्टेडियमों के विस्तार के कार्य भी शुरू करवाए थे।

नवीन समाचार

मेरा जन्म 26 नवंबर 1972 को हुआ था। मैं नैनीताल, भारत में मूलतः एक पत्रकार हूँ। वर्तमान में मार्च 2010 से राष्ट्रीय हिन्दी दैनिक समाचार पत्र-राष्ट्रीय सहारा में ब्यूरो चीफ के रूप में कार्य कर रहा हूँ। इससे पहले मैं पांच साल के लिए दैनिक जागरण के लिए काम कर चुका हूँ। कुमाऊँ विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग से ‘नए मीडिया’ विषय पर शोधरत हूँ। फोटोग्राफ़ी मेरा शौक है। मैं NIKON COOLPIX P530 और अडोब फोटोशॉप 7.0 के साथ फोटोग्राफी कर रहा हूँ। फोटोग्राफी मेरे लिए दुनियां की खूबसूरती को अपनी ओर से चिरस्थाई बनाने का बहुत छोटा सा प्रयास है। एक फोटो पत्रकार के रूप में मेरी तस्वीरों को नैनीताल राजभवन सहित विभिन्न प्रदर्शनियों में प्रस्तुत किया गया, तथा उत्तराखंड की राज्यपाल श्रीमती मार्गरेट अलवा द्वारा सम्मानित किया गया है। कुछ चित्रों को राष्ट्रीय-अंतर्राष्ट्रीय पुरस्कार भी प्राप्त हो चुके हैं। गूगल अर्थ पर चित्र उपलब्ध कराने वाली पैनोरामियो साइट पर मेरी प्रोफाइल को 18.85 Lacs से भी अधिक हिट्स प्राप्त हैं।पत्रकारिता और फोटोग्राफी के अलावा मुझे कवितायेँ लिखना पसंद है। काव्य क्षेत्र में मैंने नवीन जोशी “नवेन्दु” के रूप में अपनी पहचान बनाई है। मैंने बहुत सी कुमाउनी कवितायेँ लिखी हैं, कुमाउनी भाषा में मेरा काव्य संकलन उघड़ी आंखोंक स्वींड़ प्रकाशित हो चुका है, जो कि पुस्तक के के साथ ही डिजिटल (PDF) फार्मेट पर भी उपलब्ध होने वाली कुमाउनी की पहली पुस्तक है। मेरी यह पुस्तक गूगल एप्स पर भी उपलब्ध है। ’ यहां है एक पत्रकार, लेखक, कवि एवं छाया चित्रकार के रूप में मेरी रचनात्मकता, लेख, आलेख, छायाचित्र, कविताएं, हिंदी-कुमाउनी के ब्लॉग आदि कार्यों का पूरा समग्र। मेरी कोशिश है कि यहां नैनीताल, कुमाऊं, उत्तराखंड और वृहद संदर्भ में देश की विरासत, संस्कृति, इतिहास और वर्तमान को समग्र रूप में संग्रहीत करने की….। मेरे दिल में बसता है, मेरा नैनीताल, मेरा कुमाऊं और मेरा उत्तराखंड

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