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बड़ा समाचार : उत्तराखंड में हिंसा की संभावित घटनाओं के तहत रासुका लागू

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नवीन समाचार, देहरादून, 4 अक्टूबर 2021। उत्तराखंड सरकार ने यूपी की घटना के बाद प्रदेश में कुछ स्थानों पर हुई हिंसा की घटनाओं को देखते हए आगामी 31 दिसंबर तक एनएसए यानी राष्ट्रीय सुरक्षा कानून-1980 या रासुका लागू कर दिया है। बताया गया है कि विभिन्न जिलों में हुई हिंसा की घटनाओं के बाद राज्य के अन्य हिस्सों में भी ऐसी घटनाएं होने की संभावना को देखते हुए यह कदम उठाया गया है। राज्य के सभी जिलों के जिलाधिकारियों को 31 दिसंबर तक एनएसए में शामिल शक्तियों के प्रयोग का भी अधिकार दे दिये गये हैं।

उल्लेखनीय है कि रासुका राष्ट्रीय सुरक्षा में बाधा डालने वालों पर लगाम लगाने के लिए उपयोग किया जाता है। इस अधिनियम में देश की सुरक्षा के लिए सरकार को अधिक शक्ति देने का प्राविधान है। किसी भी राज्य की सरकार को अगर लगता है कि कोई भी कानून व्यवस्था में किसी तरह की परेशानी बन रहा है तो उसे एनएसए के तहत गिरफ्तारी का आदेश दिया जा सकता है। आवश्यक सेवाओं की आपूर्ति में बाधा बनने पर भी एनएसए लागू किया जा सकता है। (डॉ.नवीन जोशी) आज के अन्य ताजा ‘नवीन समाचार’ पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें।

यह भी पढ़ें : राज्य में आय प्रमाण पत्र की व्यवस्था में बड़ा बदलाव

नवीन समाचार, देहरादून, 27 सितंबर 2021। उत्तराखंड सरकार ने आम जन की सुविधा के लिए बड़ा कदम उठाया है। आय प्रमाणपत्र की वैधता की अवधि को छह माह के स्थान पर एक वर्ष कर दिया गया है। अब आय प्रमाणपत्र एक अप्रैल से वित्तीय वर्ष के अंत, यानी 31 मार्च तक वैध होंगे। इससे राज्य वासियों को जरूरत पड़ने पर साल में दो आय प्रमाण पत्र नहीं बनाने पड़ेंगे।

अपर सचिव डॉ. आनंद श्रीवास्तव ने सोमवार को इस संबंध में राजस्व परिषद के आयुक्त एवं सचिव को आदेश जारी किए। आदेश के अनुसार आय प्रमाण पत्र सेवा का अधिकार, अधिनियम-2011 के अंतर्गत अधिसूचित है। छह महीने तक ही आय प्रमाणपत्र की वैधता होने की वजह से लोगों को परेशानी हो रही थी। इस वजह से राजस्व परिषद ने इसकी अवधि बढ़ाने की संस्तुति की थी।

शासनादेश में कहा गया है कि प्रदेश में प्रत्येक नागरिक की आय में प्रति वर्ष परिवर्तन होता है। पर्वतीय क्षेत्रों में अधिकतर आय के साधन कृषि से संबंधित हैं। एक वर्ष की आय में खरीफ व रबी की फसल से ही आय का आकलन होता है। साथ में आय की गणना वित्तीय वर्ष एक अप्रैल से प्रारंभ होकर 31 मार्च तक की जाती है।

इस वजह से सेवा का अधिकार अधिनियम के तहत अधिसूचित सेवा आय प्रमाण पत्र की वैधता अवधि को एक साल तक बढ़ाने को राज्यपाल ने स्वीकृति दी है। शासन ने ई-डिस्ट्रिक्ट पोर्टल पर आय प्रमाणपत्र का नया प्रारूप अपलोड करने के निर्देश दिए हैं। (डॉ.नवीन जोशी) आज के अन्य ताजा ‘नवीन समाचार’ पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें।

यह भी पढ़ें : डीएम ने फिर जारी किए सप्ताहांत पर जनपद में आने वाले सैलानियों व अधिकारियों के लिए नए दिशा-निर्देश

डॉ. नवीन जोशी @ नवीन समाचार, नैनीताल, 7 अगस्त 2021। जनपद में इस सप्ताहांत व अगले सप्ताहांत स्वतंत्रता दिवस पर सैलानियों की संख्या बढ़ने की संभावना को देखते हुए डीएम धीराज गर्ब्याल ने मातहतों के पेंच कसे हैं। शनिवार को डीएम गर्ब्याल ने कहा कि जनपद के नैनीताल, रामनगर, भीमताल इत्यादि शहरों में जनपद के अन्य क्षेत्र मे सप्ताहांत में पर्यटकों की भीड़ के दृष्टिगत पर्यटन स्थलों में कोविड गाइड लाइन का कड़ाई से अनुपालन सुनिश्चित करने एवं पर्यटकों की भीड को नियंत्रित करने हेतु संबंधित क्षेत्र के उपजिलाधिकारी, पुलिस क्षेत्राधिकारी, नगर निकाय-अपर मुख्य अधिकारी की समिति गठित की है। उन्होंने समिति के सदस्यों को निर्देश दिये कि वे पर्यटक स्थलों मे कोविड 19 गाइड लाइन का कड़ाई से अनुपालन कराना सुनिश्चित करें।

श्री गर्ब्याल ने कहा कि पर्यटन स्थलों में सामाजिक दूरी, मास्क पहनना, सेनिटाइजर का प्रयोग करना सुनिश्चित कराया जाए, साथ ही कहा कि आवश्यकता के अनुरूप पर्याप्त सुरक्षा बल तैनात रहेंगे। उन्होंने कहा कि सप्ताहांत में यदि पर्यटकों की भीड़ अत्यधिक होती है जिससे उनके वाहनों से नैनीताल शहर में यातायात अव्यवस्थित होने की सम्भावना होती है तो ऐसी स्थिति मे समिति भीड़ नियंत्रण हेतु पर्यटकों के वाहनों की पार्किग शहर से बाहर पूर्व निर्धारित पार्किंग में पार्क कराना सुनिश्चित करेंगे। साथ ही सभी पार्किंगों में मूलभूत सुविधाओं की व्यवस्था भी सुनिश्चित करेंगे। तथा भारत सरकार, राज्य सरकार व जिला प्रशासन द्वारा समय-समय पर निर्गत सुरक्षा मानकों का अनुपालन कराना भी सुनिश्चित करेंगे। (डॉ.नवीन जोशी) आज के अन्य ताजा ‘नवीन समाचार’ पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें।

यह भी पढ़ें : केंद्र सरकार ने लंबी बढ़ाई कोरोना के प्रति सख्ती बरतने की समय सीमा

-गत 29 अप्रैल को जारी सख्ती के प्राविधान 30 जून तक बढ़ाए, अलबत्ता लॉक डाउन-कर्फ्यू पर कुछ नहीं कहा
नवीन समाचार, नई दिल्ली, 28 मई 2021। भारत सरकार कोरोना के नए मामलों में आ रही कमी के बावजूद बरती जा रही सख्ती में किसी तरह की ढील देने के पक्ष में नहीं है। केंद्रीय गृह मंत्रालय ने केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय की ओर से गत 29 अप्रैल को कोरोना से बचाव के लिए बरती जाने वाली सख्ती के प्राविधानों को अगले माह के आखिर यानी 30 जून तक बढ़ा दिया है। गृह मंत्रालय की ओर से कहा गया कि जिन जिलों में कोरोना विषाणु के मामलों की संख्या अधिक है, वहां पर गहन एवं स्थानीय स्तर पर नियंत्रण के उपाय किए जाएं। अलबत्ता, गृह मंत्रालय ने महामारी को देखते हुए जारी ताजा दिशा-निर्देशों में देश में कहीं भी लॉकडाउन या कर्फ्यू लगाने के बारे में कुछ नहीं कहा है।

अपने नए आदेश में केंद्रीय गृह सचिव अजय भल्ला ने कहा है कि नियंत्रण के उपायों को सख्ती से लागू करने से दक्षिण और पूर्वोत्तर के कुछ इलाकों को छोड़कर सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में नए और उपचाराधीन मामलों में गिरावट आई है। लेकिन नए मामलों में गिरावट की प्रवृत्ति के बावजूद, वर्तमान में उपचाराधीन मामलों की संख्या अब भी बहुत अधिक है। लिहाजा यह अहम है कि नियंत्रण के उपायों को सख्ती से लागू रखा जाए।’

राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के मुख्य सचिवों को जारी अपने आदेश में केंद्रीय गृह सचिव ने कहा कि स्थानीय हालात, जरूरत और स्रोतों का आकलन करने के बाद राज्य और केंद्र शासित प्रदेश उचित समय पर चरणबद्ध तरीके से पाबंदियों में किसी तरह की रियायत देने पर विचार कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि मई महीने के लिए 29 अप्रैल को जारी किए गए दिशा-निर्देश 30 जून तक लागू रहेंगे। दिशा-निर्देशों के अनुसार, गृह मंत्रालय ने राज्यों से कहा है कि ऑक्सीजन से लैस बिस्तर, आईसीयू बिस्तर, वेंटिलेटर, एम्बुलेंस की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक कार्रवाई करें और जरूरत पड़ने पर अस्थायी अस्पतालों का निर्माण करें। इसी के साथ पर्याप्त पृथक केंद्रों की व्यवस्था भी रखें। (डॉ.नवीन जोशी)

यह भी पढ़ें : उत्तराखंड में अंतरराज्यीय या अंतरजनपदीय यात्रा के लिए आए नए नियम

नवीन समाचार, देहरादून, 26 मई 2021। उत्तराखंड के मैदानी जिलों से पर्वतीय जिलों में जाने वाले लोगों के लिए 72 घंटे की आरटीपीसीआर निगेटिव रिपोर्ट दिखानी अनिवार्य कर दी गई है। वहीं, आगामी एक जून तक सभी यात्री वाहनों में क्षमता के 50 फीसद यात्रियों को ही बैठने की अनुमति होगी। जबकि वाहनों के लिए एक जिले से दूसरे जिले या एक राज्य से दूसरे राज्य में जाने पर सैनिटाइजेशन करना अनिवार्य कर दिया गया है।
प्रदेश सरकार द्वारा जारी की गई नई एसओपी के अनुसार राज्य के भीतर या राज्य के बाहर वाहनों के संचालन में पूर्ण रूप से कोविड नियमों का पालन करना होगा। कोई भी वाहन 50 फीसदी यात्री क्षमता के अतिरिक्त यात्री नहीं बैठाएगा और न ही अतिरिक्त किराया वसूलेगा। हर यात्रा के बाद वाहन के प्रवेश द्वार, हैंडिल, स्टेयरिंग, रेलिंग, गीयर लीवर और सीटों पर सैनिटाइजेशन कराना अनिवार्य होगा। वाहन चालकों व परिचालकों को फेस मास्क व ग्लब्स अनिवार्य रूप से पहनने होंगे। अंतरराज्यीय या अंतरजनपदीय यात्रा के दौरान वाहन में प्रवेश करने वाले हर यात्री की थर्मल स्कैनिंग जरूरी होगी। चालक-परिचालकों के साथ ही यात्रा करने वाले सभी यात्रियों को अपने मोबाइल पर आरोग्य सेतु एप डाउनलोड करना अनिवार्य होगा। यात्रियों के लिए भी मास्क अनिवार्य है। यात्रा करते समय पान, तम्बाकू, गुटका एवं शराब आदि का सेवन प्रतिबंधित रहेगा। वाहन में थूकना दंडनीय होगा। (डॉ.नवीन जोशी)

यह भी पढ़ें : केंद्र सरकार ने कोरोना टीका लगाने, रक्तदान करने को लेकर जारी किए नए दिशा-निर्देश..

नवीन समाचार, नई दिल्ली, 20 मई 2021। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने कोरोना के टीके लगाने को लेकर नए दिशा-निर्देश जारी किए हैं। नए निर्देशों में कहा गया है कि जो लोग कोविड-19 से संक्रमित हो चुके हैं अथवा टीके की पहली खुराक के बाद संक्रमित हुए हैं उन्हें संक्रमण से पूरी तरह उबरने के तीन महीने के बाद ही टीकाकरण कराना चाहिए। स्तनपान कराने वाली महिलाएं भी कोविड-19 टीकाकरण करा सकती हैं। यह भी कहा गया है कि कोई भी व्यक्ति संक्रमित होने के बाद आरटी-पीसीआर जांच में निगेटिव आने पर अथवा कोरोना वायरस निरोधक टीका लेने के 14 दिन बाद रक्तदान कर सकता है।
सरकारी बयान में कहा गया है कि कोविड-19 टीकाकरण पर राष्ट्रीय विशेषज्ञ समूह की ताजा सिफारिशों के बाद मंत्रालय ने यह निर्णय किया है और इस बारे में राज्यों तथा केंद्र शासित प्रदेशों को भी सूचित कर दिया गया है। मंत्रालय ने कहा कि ये सिफारिशें कोविड-19 महामारी की उभरती स्थिति और उभरते वैश्विक वैज्ञानिक साक्ष्य और अनुभव पर आधारित हैं। कोरोना से ठीक होने के बाद तीन महीने तक के लिए कोविड-19 रोधी टीकाकरण टाला जा सकता है। कोविड-19 के ऐसे मरीज जिन्हें सार्स-2 निरोधक मोनोक्लोनल एंटीबॉडीज अथवा कनवेलसेंट प्लाज्मा दिया गया हो, उन्हें अस्पताल से छुट्टी दिए जाने के तीन महीने तक टीकाकरण टाल दिया जाना चाहिए। मंत्रालय ने कहा कि व्यक्तिगत मामलों में, जिन लोगों को टीके की पहली खुराक मिल चुकी है और वह दूसरी खुराक लेने से पहले कोविड संक्रमित हो जाते हैं तो क्लिनिकली संक्रमण मुक्त होने के तीन महीने तक दूसरी खुराक टाल देनी चाहिए।

यह भी पढ़ें : नई व्यवस्था : अब होम आइसोलेशन में स्वास्थ्य लाभ ले रहे कोरोना रोगियों को मेडिकल काउंसलर भी उपलब्ध कराएगी सरकार, वीडियो कॉल से रखी जाएगी घर पर नजर..

नवीन समाचार, देहरादून, 15 मई 2021। उत्तराखंड सरकार राज्य में होम आइसोलेशन में रहकर उपचार करने वाले कोरोना संक्रमित रोगियों के स्वास्थ्य एवं जरूरत पड़ने पर तत्काल चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने के लिए नई व्यवस्था लागू करने जा रही है। हालांकि अभी भी होम आइसोलेशन में रहकर उपचार कर रहे रोगियों को कॉल सेंटर से समय-समय पर फोन करते हुए उनकी सेहत व जरूरत के संबंध में जानकारी प्राप्त की जा रही है किंतु अब शासन ने निर्णय लिया है कि आइसोलेशन में उपचार ले रहे रोगियों को प्रभावी उपचार के लिए किसी मेडिकल काउंसलर के माध्यम से परामर्श उपलब्ध कराया जाएगा। रोगियों की विशेष रूप से होम आइसोलेशन के पूरे 10 दिन निगरानी रखी जाएगी। साथ ही रोगियों को होम आइसोलेशन किट का वितरण हो रहा है अथवा नहीं, ज्ञात करने और उन्हें बुनियादी स्वास्थ्य मॉनिटरिंग मेडिकल काउंसलिंग उपलब्ध कराए जाने के उद्देश्य से एसओपी का निर्धारण किया जा रहा है।
नई व्यवस्था के तहत होम आइसोलेशन में रह रहे सभी कोविड-19 पॉजिटिव पाए गए रोगियों की सूची स्वास्थ्य विभाग द्वारा प्रतिदिन नोडल अधिकारी-होम आइसोलेशन व संबंधित जनपद के जिला अधिकारी को उपलब्ध कराई जाएगी। इसके अलावा जिलाधिकारी द्वारा होम आइसोलेशन में रखे गए सभी रोगियों को एक मेडिकल काउंसलर आवंटित किया जाएगा। इस आवंटन में निर्धारण किए गए मेडिकल काउंसलर का नाम व फोन नंबर की जानकारी होगी। इसके लिए जनपद में तैनात एलोपैथिक चिकित्सक, फार्मासिस्ट, नर्सिंग स्टाफ, आयुष चिकित्सक, दंत चिकित्सक, प्रदेश के राजकीय विभिन्न मेडिकल कॉलेज के पीजी स्कॉलर्स, राजकीय मेडिकल कॉलेज के ऐसा कार्य करने में सक्षम कर्मी, ऐसी योग्यता रखने वाले निजी क्षेत्र में कार्य करने वाले व्यक्ति मेडिकल काउंसलर हो सकते हैं। एक मेडिकल काउंसलर को प्रतिदिन की मॉनिटरिंग के लिए अधिकतम 50 रोगियों तक की संख्या दी जाएगी। मेडिकल काउंसिल प्रतिदिन दूरभाष पर अथवा वीडियो कॉल के माध्यम से पूर्व में निर्धारित प्रोटोकॉल के आधार पर रोगी की स्वास्थ्य संबंधी जानकारी लेंगे, और आवश्यकतानुसार चिकित्सा परामर्श देंगे। वे पूर्व निर्धारित प्रोटोकॉल द्वारा दी गई जानकारियों का संकलन भी करेंगे तथा होम आइसोलेट रोगी को उसके निवास स्थान पर होम आइसोलेशन किट व यथासंभव आयुष किट उपलब्ध करा दी गई है या नहीं आदि की जानकारी भी रखेंगे व तदनुसार कार्रवाई करेंगे।

यह भी पढ़ें : उत्तराखंड में सर्वोच्च न्यायालय के नियम होंगे लागू, कोरोना रोगियों को जरूरत होने पर उपचार से मना नहीं कर पाएंगे अस्पताल, शासन से नया प्रोटोकॉल हुआ जारी…

नवीन समाचार, देहरादून, 14 मई 2021। उत्तराखंड में अब सरकारी अथवा निजी चिकित्सालय कोरोना रोगियों को उपचार करने से मना नहीं कर पाएंगे। साथ ही रोगियों के लिए अब चिकित्सालय को कोरोना की पॉजिटिव जांच रिपोर्ट तथा अपना परिचय पत्र दिखाना भी अनिवार्य नहीं होगा। शासन ने कोरोना रोगियों की चिकित्सा के लिए शुक्रवार को नया प्रोटोकॉल लागू कर दिया गया है।
स्वास्थ्य सचिव डा. पंकज कुमार पांडेय ने जारी आदेश में कहा है कि कोरोना पीड़ित मरीजों के लिए त्रिस्तरीय व्यवस्था बनाई गई है। कम संक्रमित मरीजों को कोविड केयर सेंटर, अधिक संक्रमितों को जिला कोविड हेल्थ सेंटर और गंभीर मामलों को जिला कोविड अस्पतालों में भेजा जाएगा। कोरोना उपचार से जुड़े सरकारी और निजी अस्पतालों को सर्वोच्च न्यायालय के आदेश के अनुसार मरीजों को भर्ती करने और उपचार करना अनिवार्य होगा। कोरोना की आशंका वाले मरीजों को पॉजिटिव रिपोर्ट को आधार बनाकर भर्ती करने से इंकार नहीं किया जा सकेगा। ऐसे व्यक्ति को सस्पेक्ट वार्ड में भर्ती कराया जाएगा। किसी भी मरीज को उपचार यानी आक्सीजन अथवा जरूरी दवाइयों अथवा अन्य शहर से संबंध रखने की वजह से भर्ती करने से अस्पताल रोक नहीं सकेंगे। इसके साथ ही संबंधित शहर का वैध परिचय पत्र को आधार बनाकर भी मरीजों को उपचार अथवा अस्पतालों में भर्ती करने से मना नहीं किया जाएगा। नए प्रोटोकॉल में अस्पतालों में बेड को लेकर मारामारी को लेकर भी व्यवस्था बनाई गई है। अब अस्पतालों में भर्ती के लिए रोग के अनुसार मरीजों की जरूरत का ध्यान रखा जाएगा। जिस व्यक्ति को अस्पताल में भर्ती करने की जरूरत नहीं है, उसे बेड नहीं देने के सख्त निर्देश हैं। इसकी व्यवस्था बनाने की हिदायत दी गई है। इसके साथ ही केंद्र की ओर से मरीजों को अस्पताल से डिस्चार्ज करने की संशोधित नीति का पालन करना भी अनिवार्य किया गया है।

यह भी पढ़ें : कोरोना की एक वैक्सीन की दूसरी खुराक लगाने के नियम दूसरी बार बदले… दूसरी के नियम यथावत…

-अब 6 से 8 सप्ताह की जगह 12-16 सप्ताह में लगाया जाएगा दूसरा टीका
नवीन समाचार, नई दिल्ली, 14 मई 2021। केंद्र सरकार ने ‘कोविशील्ड’ के दो टीकों के बीच के अंतराल को दूसरी बार 6 से 8 सप्ताह से बढ़ाकर 12-16 सप्ताह कर दिया है। मीडिया के एक वर्ग में यह चर्चा भी है कि टीकों की कमी की कमी की वजह से सरकार ने यह फैसला लिया है। उल्लेखनीय है कि सर्वोच्च न्यायालय ने भी टिप्पणी की है कि जब देश में कोरोना के टीकों की कमी है तो मोबाइल पर कोरोना टीकाकरण कराने की कॉलर ट्यून बजाकर क्यों परेशान किया जा रहा है।
हालांकि स्वास्थ्य मंत्रालय ने जानकारी दी है कि डॉ. एनके अरोड़ा के नेतृत्व वाले कोविड कार्य समूह की सिफारिशों पर समय अंतराल बढ़ाया गया है। सरकार का कहना है कि उपलब्ध रियल-लाइफ साक्ष्यों, व विशेष रूप से ब्रिटेन के साक्ष्यों के आधार पर, कोविड कार्य समूह ने कोविशील्ड की दोनों खुराक के अंतर को 12-16 सप्ताह बढ़ाने पर सहमति जताई है। कार्य समूह ने कोवैक्सीन टीके के अंतराल में परिवर्तन की सिफारिश नहीं की है। अंतराल बढ़ाने का फैसला दूसरी बार क्यों लिया गया है। इसके जवाब में एम्स के डायरेक्टर डॉ. रणदीप गुलेरिया ने कहा है कि यदि आप 4 सप्ताह से कम समय में अपनी बूस्टर खुराक (कोविशील्ड का दूसरी डोज) लेते हैं, तो प्रभावकारिता 55-60 प्रतिशत के बीच होती है। और अगर आप इसे 12 सप्ताह या उससे अधिक समय बाद लेते हैं, तो इसकी प्रभावकारिता 81-90 प्रतिशत के करीब हो जाती है। यदि आप अपनी दूसरी खुराक (कोविशील्ड की) 12 सप्ताह या उससे अधिक समय बाद लेते हैं तो आपको बेहतर बूस्टर प्रभाव मिलता है। यह समझना चाहिए कि जैसे ही महामारी विकसित होती है और हम अधिक ज्ञान प्राप्त करते हैं, जिससे सिफारिशें बदलती हैं। डेटा बताता है कि एक खुराक के साथ भी आपके पास 60-65 प्रतिशत प्रभावकारिता है। यह व्यक्ति को 3 महीने तक संक्रमण होने से रोकता है।
इधर ‘द लैंसेट’ में भी कहा गया है कि 12 हफ्तों के अंतराल पर दूसरी खुराक लेने से असर बढ़ता है। एस्ट्राजेनेका ने भी कहा था कि कोविशील्ड की दो खुराक में 2-3 महीने के अंतर से यह 90 प्रतिशत तक असरदार होगी। बताया गया है कि नेशनल टेक्नीकल एडवाइजरी ग्रुप ऑन इम्युनाइजेशन (एनटीएजीआई) ने यह भी कहा है कि जो लोग कोविड-19 से पीड़ित रह चुके हैं और जांच में उनके सार्स-सीओवी-2 से संक्रमित होने की पुष्टि हुई है, उन लोगों को स्वस्थ होने के बाद 6 महीने तक वैक्सीन की डोज नहीं लगवाना चाहिए। कोविशील्ड वैक्सीन के दो खुराक के बीच बढ़ाए गए इस अंतराल पर इंस्टीट्यूट ऑफ लिवर ट्रांसप्लांटेशन एंड रीजेनरेटिव मेडिसिन के चेयरमैन डॉ. अरविंदर सिंह सोइन ने अपनी प्रतिक्रिया देते हुए इस निर्णय को सही बताया है। डॉ. सोइन ने कहा कि कोविशील्ड वैक्सीन के दो डोज के बीच 12 से 16 हफ्ते का अंतराल रखा जाना और कोरोना पॉजिटिव होने के बाद छह महीने तक टीका नहीं लगवाना दोनों ही सही दिशा में लिया गया फैसला है।

यह भी पढ़ें : अब एक से दूसरे राज्य में जाने के लिए आरटीपीसीआर जांच जरूरी नहीं होगी, बदले कोरोना जांच के तीन नियम…

नवीन समाचार, नई दिल्ली, 12 मई 2021। जी हां, केंद्र सरकार की ओर से एक से दूसरे राज्य में जाने वालों के लिए आरटीपीसीआर रिपोर्ट जरूरी करने के उत्तराखंड सहित कुछ राज्यों के फैसले को बदलने के निर्देश जारी किए जा रहे हैं। राज्यों के इस फैसले से आ रही समस्याओं को देखते हुए केंद्र सरकार को इस दिशा में रणनीति बदलने पर मजबूर कर दिया है। अब नए नियमों के तहत जो लोग एंटीजन जांच में संक्रमित मिलेंगे, उनकी दोबारा आरटीपीसीआर जांच नहीं की जाएगी। इसके अलावा अस्पताल से डिस्चार्ज मरीज के लिए भी दूसरी बार कोविड जांच की जरूरत नहीं होगी। इन तीन बदलावों के पीछे मुख्य वजह यह है कि आईसीएमआर कम समय में सही मरीज तक पहुंचना चाहता है ताकि संक्रमण को तत्काल आइसोलेट किया जा सके। केंद्र सरकार के इस आदेश के बाद उत्तराखंड सहित यह व्यवस्था लागू कर चुके राज्य जल्द अपनी ओर से नए निर्देश जारी कर यह नियम लागू कर सकते हैं।
इसका कारण यह है कि एक से दूसरे राज्य जाने के लिए आरटीपीसीआर जांच के नियम से देश की प्रयोगशालाओं पर अत्यधिक भार बढ़ा है। इससे जिन लोगों में कोरोना के लक्षण नहीं हैं, उन्हें अनावश्यक जांच करानी पड़ रही है। जबकि इस कारण से जिन्हें यह जांच करानी जरूरी है, उनकी रिपोर्ट आने में देरी हो रही है। उन्हें समय से उपचार नहीं मिल पा रहा है। हालांकि मंत्रालय ने यह भी कहा कि यह छूट केवल उन्हीं लोगों को मिलनी चाहिए जोकि पूरी तरह स्वस्थ्य हों। भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) के महानिदेशक डॉ। बलराम भार्गव ने यह अपील भी की कि अगर किसी को सर्दी, जुकाम या बुखार मामूली रुप से भी है तो भी उन्हें घर से बाहर नहीं निकलना चाहिए।

यह भी पढ़ें : उत्तराखंड में लगेगा कोविड कर्फ्यू…

-सोमवार को मिलेगी छूट, मंगलवार से सख्ती से लागू होंगी पाबंदियां
नवीन समाचार, देहरादून, 9 मई 2021। उत्तराखंड में कोरोना संक्रमण पर नियंत्रण के लिए सरकार ने अब पूरे राज्य में मंगलवार से एक हफ्ते के लिए कोविड कर्फ्यू लागू करने का ऐलान कर दिया है। इस दौरान आवश्यक सेवाओं से जुड़े कलक्ट्रेट, मंडलायुक्त कार्यालय, विधानसभा, सचिवालय और आवश्यक सेवाओं के निदेशालयों को छोड़कर शेष कार्यालय बंद रहेंगे। इन कार्यालयों में 50 फीसदी कर्मचारियों की उपस्थिति रहेगी, जबकि अन्य दफ्तर पूरी तरह से बंद रहेंगे। बैंक कम कार्मिकों के साथ खुले रहेंगे। कैबिनेट मंत्री व प्रदेश सरकार के प्रवक्ता सुबोध उनियाल ने बताया कि राज्य में 11 मई (मंगलवार) से 18 मई (मंगलवार) की सुबह तक एक सप्ताह का कोविड कर्फ्यू सख्ती के साथ लागू किया जाएगा। इस दौरान सोमवार को तो पूर्व की भांति परचून आदि जरूरी सामानों की दुकानें दोपहर 12 बजे तक खुलेंगी, लेकिन मंगलवार 11 मई से मांस-मछली दूध, फल और सब्जियों की दुकानों को भी सुबह सात से दस बजे तक ही खोलने की इजाजत रहेगी। उनियाल के अनुसार 17 मई को स्थिति का आकलन कर आगे के लिए फैसला लिया जाएगा।
इस दौरान प्रदेश में हर तरह के धार्मिक व राजनीतिक आयोजनों पर प्रतिबंध रहेगा। शादियों में जिला प्रशासन से अनुमति लेने के बाद भी 20 से अधिक लोग शामिल नहीं हो सकेंगे। वहीं बाहर से आने वालों को 72 घंटे पूर्व की निगेटिव आरटीपीसीआर रिपोर्ट दिखाई होगी और स्मार्ट सिटी के पोर्टल पर अनिवार्य रूप से पंजीकरण कराना होगा। जबकि जबकि प्रवासियों के लिए भी स्मार्ट सिटी के पोर्टल पर पंजीकरण अनिवार्य होगा, अलबत्ता उन्हें आरटीपीसीआर रिपोर्ट की आवश्यकता नहीं होगी। पर विभिन्न प्रांतों से आने वाले प्रवासियों को सात दिन अनिवार्य रूप से क्वारंटाइन में रहना होगा। ग्राम पंचायतें इसके लिए व्यवस्था करेंगी। एक हफ्ते बाद यदि किसी व्यक्ति में कोई लक्षण नजर नहीं आते तब ही उन्हें घर जाने की इजाजत दी जाएगी।
सरकारी प्रवक्ता सुबोध उनियाल ने बताया कि 13 मई से राशन व सरकारी सस्ते गल्ले की दुकानें भी कोविड कर्फ्यू के दौरान पूरी तरह से बंद रहेंगी। अलबत्ता दवा और स्वास्थ्य उपकरणों से जुड़ी दुकानों के साथ ही पशु चारे और कृषि व बागवानी से संबंधित दुकानें खुली रहेंगी। पेट्रोल पंपों को भी खुले रहने छूट दी गई है। वहीं सरकार ने औद्योगिक इकाइयों के लिए भी इस बार सख्त मानक बनाए हैं। अंतरराज्यीय व अंतर जनपदीय परिवहन में 50 फीसद क्षमता के साथ सार्वजनिक वाहन चलेंगे। माल वाहनों को कर्फ्यू में चलने की छूट दी गई है। वहीं उद्योग इस शर्त पर ही खुल सकेंगे कि वे कर्मचारियों को उसी परिसर में ठहराने या फिर अपने यातायात माध्यम से उन्हें घरों से ले जाने व छोड़ने की व्यवस्था करेंगे। राज्य में 18 से 45 वर्ष के बीच के युवाओं को इस दौरान वैक्सीनेशन के लिए जाने पर अपने मोबाइल पर पंजीकरण दिखाना अनिवार्य होगा। वैक्सीन लगाने के बाद उन्हें सीधे घर लौटना होगा। राज्य में सोमवार से कई केंद्रों पर इस उम्र वालों के लिए टीकाकरण की शुरूआत होने जा रहा है।

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नवीन समाचार, देहरादून, 1 मई 2021। उत्तराखंड शादियों में अब अधिकतम 25 लोग ही शामिल हो सकेंगे। ग्रामीण बाज़ारों में बाज़ार खुलने के समय को ज़िला अधिकारी अपने अनुसार घटा सकते हैं। मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत ने सीएम राहत कोष से आशा कार्यकत्रियो को एक-एक हजार रुपए की प्रोत्साहन राशि उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं। शनिवार को राज्य सचिवालय में आयोजित वीडियो कांफ्रेंसिग द्वारा शासन के वरिष्ठ अधिकारियों और जिलाधिकारियों के साथ कोविड की स्थिति की समीक्षा करते हुए मुख्यमंत्री ने डोर टू डोर सर्वे के निर्देश दिये। इसके साथ ही 104 के अतिरिक्त सीएम हेल्पलाइन और पुलिस विभाग के कॉलसेंटर में फोन लाईनों की संख्या बढाने के निर्देश भी दिए। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि कॉलसेंटर और हेल्पलाईन पूरी तरह से सक्रिय रहें और बेड, इंजेक्शन सम्बंधी जानकारी भी अपडेट रहें। आक्सीजन के सिलेंडरों की संख्या बढाने के लिये हर सम्भव कोशिश की जाए। इसमें विभिन्न संगठनों, उद्योगों की सहायता भी ली जा सकती है। कोविड अस्पतालों में भर्ती मरीजों को भोजन, पानी जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराने में कोई ढिलाई न हो। इसके साथ ही छोटे-छोटे स्थानों में सेनेटाइजेशन का काम किया जाए जहां संक्रमण की अधिक सम्भावनाएं हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि आक्सीजन प्लांटों में बिजली की निर्बाध आपूर्ति हो। सभी कोविड केयर सेंटर व अस्पतालों में फायर सेफ्टी सुनिश्चित की जाए। कोविड टेस्ट की रिपोर्ट में समय न लगे। टेस्ट होते ही तुरंत सभी को कोविड किट दिया जाए। शासन से जो भी निर्देश दिये जाते हैं, उनका प्रभावी क्रियान्वयन हो। टेस्ट सेंटरों और वैक्सीनैशन सेंटरों में कोविड प्रोटोकॉल का ध्यान रखा जाए। ई-संजीवनी पोर्टल को और प्रभावी बनाते हुए प्रचारित किया जाए ताकि जन सामान्य उसका अधिक लाभ उठा सके। होम आइसोलेशन में रहने वालों को मालूम होना चाहिए कि उन्हें किन बातों का ध्यान रखना है। मुख्यमंत्री ने कहा कि बाहर से आने वालों का रजिस्ट्रेशन अनिवार्य है। इसका पालन कड़ाई से हो। सरकारी व निजी अस्पतालों में कोविड मरीजों की व्यवस्था को लगातार क्रास चेक करवाया जाए। संबंधित मरीजों और उनके परिजनों से इसका फीड बैक लिया जाए। मुख्यमंत्री ने कहा कि कोविड मरीज़ों हेतु एम्बुलेंस की दरें निर्धारित की जाएं ताकि ओवररेटिंग जैसी शिकायत ना हो। दवाओं के कालाबाजारी को रोकने के लिए 147 एसटीएफ टीमें बनाई गई हैं। अभिसूचना तंत्र को मजबूत किया जाए। सरकारी अस्पतालों के साथ ही प्राईवेट अस्पतालों में भी आक्सीजन बेड की उपलब्धता की व्यवस्था को पारदर्शी बनाया जाए। सीमा पर रेजिस्ट्रेशन क्यूआर कोड रीडर के करिए चैकिंग की जाए। कोविड कर्फ्यू में निर्माण कार्यों को छूट है इसलिए निर्माण से संबंधित सीमेंट, सरिया की दुकानों को बंद न करायें। बैठक में जानकारी दी गई कि सीमा पर अधिकतर लोगों की कोविड नेगेटिव रिपोर्ट प्राप्त हो रही है, जिनकी रिपोर्ट नहीं है उनकी भी सैंप्लिंग की जा रही है। बैठक में अपर मुख्य सचिव राधा रतूड़ी, अपर मुख्य सचिव मनीषा पंवार, डीजीपी अशोक कुमार, सचिव अमित नेगी, शैलेश बगोली, डाॅ. पंकज कुमार पाण्डेय, सूचना महानिदेशक रणबीर सिंह चौहान सहित वरिष्ठ अधिकारी व जिलाधिकारी उपस्थित रहे। 

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नवीन समाचार, नैनीताल, 26 अप्रैल 2021। कोरोना संक्रमण की रफ्तार कम करने के लिए लगातार एक सप्ताह तक कर्फ्यू लागू रहेगा। डीएम ने 27 अप्रैल से 3 मई तक नगर निगम हल्द्वानी-काठगोदाम नगर पालिका लालकुआं व रामनगर में कफ्र्यू का आदेश दिया है। सोमवार 26 अप्रैल को शाम सात बजे तक दुकानें खुली रहेंगी। कोरोना संक्रमण की रफ्तार कम करने के लिए लगातार एक सप्ताह तक कर्फ्यू लागू रहेगा। शाम सात बजे से पहले की तरह रात्रि कर्फ्यू लागू रहेगा। जिले के अन्य स्थानों पर पूर्व आदेश लागू रहेगा।
डीएम धीराज गब्र्याल ने बताया कि कर्फ्यू वाले संबंधित क्षेत्रों में फल सब्जी, डेयरी, बेकरी, मीट, मछली राशन, सरकारी सस्ता गल्ला, पशुचारे आदि की दुकानें दोपहर 12 बजे तक खुलेंगी। पेट्रोल पंप, गैस आपूर्ति तथा दवाई की दुकानें कर्फ्यू से मुक्त रहेंगी। कफ्र्यू के दौरान ट्रेन, बस, टैक्सी से यात्रा की जा सकेगी। बैंक्वेट हाल, विवाह समारोह में जाने वाले वाहनों के संचालन पर प्रतिबंधों के साथ छूट रहेगी। औद्योगिक इकाइयों तथा इनके वाहन व कार्मिकों के आने-जाने की छूट रहेगी। मालवाहक तथा शव यात्रा से संबंधित वाहन चल सकेंगे। चिकित्सालय व उपचार के लिए जाने वाले वाहन संचालित हो सकेंगे। पोस्ट आफिस बैंक आदि से जुड़े कर्मचारियों के वाहनों के संचालन की छूट रहेगी।

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नवीन समाचार, देहरादून, 20 अप्रैल 2021। राज्य में कोरोना संक्रमण के नित नए रिकॉर्ड मामले आने को देखते हुए सरकार ने नियमों को और कड़ा कर दिया है। अब उत्तराखंड के शहरी क्षेत्रों में बुधवार से प्रतिदिन दोपहर दो बजते ही आवश्यक सेवाओं को छोड़कर शेष बाजार बंद हो जाएंगे। साथ ही रात्रि कालीन कर्फ्यू के समय में ढाई घंटे की बढ़ोतरी की गई है। रात नौ बजे के बजाय अब सात बजे से ही रात्रि कर्फ्यू लागू हो जाएगा। पूरे प्रदेश में रविवार को सम्पूर्ण कोविड कर्फ्यू रहेगा। अलबत्ता कुंभ के लिए 26 फरवरी को जारी आदेश यथावत रहेंगे।
मुख्य सचिव ओमप्रकाश की ओर से जारी आदेश में कहा गया है कि प्रदेश में अब रात्रि कर्फ्यू शाम सात बजे से ही लागू हो जाएगा, और सुबह पांच बजे तक जारी रहेगा। वहीं रविवार को सम्पूर्ण कोविड कर्फ्यू पूर्ववत जारी रहेगा। कर्फ्यू के दौरान बाहर से आने जाने वाले यात्री, शादी समारोह वालों को पूर्व निर्धारित शर्त के अनुसार आने-जाने की छूट रहेगी। इसी तरह दूसरे राज्यों के नागरिकों को अब उत्तराखंड में प्रवेश के लिए देहरादून स्मार्ट सिटी की वेबसाइट पर पूर्व पंजीकरण करवाना होगा। साथ ही 72 घंटे के भीतर की आरटी पीसीआर निगेटिव रिपोर्ट भी प्रस्तुत करनी होगी। जबकि दूसरे राज्यों से अपने घर लौट रहे राज्य के नागरिकों को भी इसी प्रकार पंजीकरण करवाना होगा। हालांकि उनके लिए कोविड जांच की अनिवार्यता नहीं रखी गई है। उन्हें अपने घर पर ही क्वारंटीन होना पड़ेगा।
इधर, सरकार ने जिला स्तरीय कार्मिकों के अवकाश सीधे निदेशालय स्तर से मंजूर किए जाने पर रोक लगाते हुए, इसके लिए जिलाधिकारी को अधिकृत कर दिया है। उक्त सभी आदेश बुधवार 21 अप्रैल से ही लागू होंगे। सार्वजनिक वाहनों में अधिकतम 50 प्रतिशत यात्रियों का नियम लागू कर दिया है। इसके तहत किसी भी तरह के यात्री वाहन अधिकतम 50 प्रतिशत सवारियों की क्षमता के साथ ही चलेंगे। हर यात्रा के शुरू होने से पहले और खत्म होने पर पूरे वाहन को भीतर से सैनिटाइज करना अनिवार्य होगा। छूने वाली जगहों को विशेषकर सैनिटाइज करना होगा। बिना मास्क किसी भी यात्री को वाहन में प्रवेश नहीं दिया जाएगा। वाहन में यात्रा के समय पान, गुटखा, तंबाकू, सिगरेट आदि पर पूर्ण रूप से प्रतिबंधित होगा। कंटेनमेंट जोन या माइक्रो कंटेनमेंट जोन आदि में सभी गतिविधियों पर पूर्ण प्रतिबंध लागू रहेगा। 65 से अधिक और 10 वर्ष से कम उम्र के बच्चों, गर्भवती महिलाओं व गंभीर बिमारी से ग्रसित लोगों को घर पर रहने की दी सलाह दी गई है। सामाजिक दूरी, मास्क पहनना और हाथों को बार-बार धोने के नियम का सभी पर्यटकों और स्थानीय लोगों को सार्वजनिक स्थल पर अनिवार्य रूप से पालन करना होगा। मास्क न पहनने पर 500 रुपये जुर्माना लगेगा। जारी दिशा-निर्देश में सभी धार्मिक, राजनीतिक और सामाजिक आयोजनों, विवाह आदि में अधिकतम 100 लोग ही शामिल होंगे। सभी बार, सिनेमा हॉल, रेस्तरां, जिम आदि में भी कुल क्षमता के 50 प्रतिशत लोगों को ही प्रवेश दिया जाएगा। प्रदेश के सभी जिलों में कोचिंग संस्थानों, स्विमिंग पूल, स्पा आदि को बंद करने के आदेश जारी किए गए हैं।

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नवीन समाचार, देहरादून, 19 अप्रैल 2021। मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत ने प्रदेश की सभी शिक्षण संस्थानों को बंद करने के निर्देश देते हुए कहा कि राज्य की सीमाओं पर पूरी गम्भीरता से चेकिंग की जाए। नेगेटिव रिपोर्ट के बिना किसी को भी राज्य में आने की अनुमति न दी जाए।
जिलाधिकारियों के साथ वीडियो कांफ्रेंसिग में मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत ने प्रदेश में कोविड की स्थिति की समीक्षा के दौरान यह निर्देश दिए। मुख्यमंत्री ने कहा कि कोविड दिशा निर्देशों का पालन पूरी सख्ती से कराया जाए। हर जिले में कोविड केयर सेंटरों को मजबूत किया जाए। राज्य के सभी शिक्षण संस्थानों को बंद किया जाये। प्रदेश में आने वाले दूसरे राज्यो के लोगों को आरटीपीसीआर की नेगेटिव रिपोर्ट के बिना अनुमति न दी जाए। उत्तराखण्ड वापस आने वाले प्रवासियों के लिए पंजीकरण की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। इसके लिये पिछली बार के पोर्टल को पुनः सक्रिय किया जाए। घर लौटने पर प्रवासियों के लिये गृह एकांतवास अनिवार्य किया जाए। मुख्यमंत्री ने कहा कि स्थानीय जनप्रतिनिधियों का सहयोग लेने की आवश्यकता है। धरातल पर काम करने वाले प्रथम श्रेणी के योद्धाओं का मनोबल बढाया जाए। कोशिश की जाए कि स्वास्थ्य कर्मी और अन्य प्रथम श्रेणी के योद्धा संक्रमित न हों। इसके लिए सभी तरह की सावधानी बरती जाए। टीकाकरण में और तेजी लानी है। बैठक में अपर मुख्य सचिव राधा रतूङी, डीजीपी अशोक कुमार, सचिव अमित नेगी, नितेश झा,शैलेश बगोली, डॉ. पंकज कुमार पाण्डेय, सहित अन्य अधिकारी उपस्थित रहे।

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नवीन समाचार, देहरादून, 18 अप्रैल 2021। कोरोना विषाणु के बढ़ते खतरे को देखते हुए उत्तराखंड सरकार ने नियमों को 24 घंटे के भीतर ही और कड़ा कर दिया है। अब शादी-विवाह में अब 200 की जगह केवल 100 घराती-बरती ही शामिल हो सकेंगे। इसके अलावा अब मास्क न पहनने पर 200 की जगह अब होगा 500 रुपए का चालान किया जाएगा। कोविद-19 की चुनौतियों से निपटने के लिए मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत की अध्यक्षता की अध्यक्षता में आयोजित बैठक में यह निर्णय लिए गए। बैठक में मुख्यमंत्री रावत ने इस महामारी को हल्के में न लेने और इससे सख्ती से निपटने के लिए उन्होंने राज्य के लोगों से अपील करते हुए नियमों का पालन करने को कहा। सीएम तीरथ सिंह रावत ने महामारी अधिनियम की पाबंदियों को न मानने वाले लोगों के खिलाफ पुलिस प्रशासन से सख्ती से निपटने के निर्देश भी दिए के निर्देश भी दिए। बीजापुर गेस्ट हाउस में अधिकारियों के साथ बैठक करते हुए उन्होंने रात्रि कर्फ्यू का भी सख्ती से पालन कराने के लिए पुलिस को निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि कोरोना से बचाव के लिए लोगों का मास्क पहनना और सोशल डिस्टेसिंग का पालन करना अत्यावश्यक है।

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नवीन समाचार, देहरादून, 17 अप्रैल 2021। उत्तराखंड सरकार ने कोरोना के दृष्टिगत अपनी 15 अप्रैल की संशोधित गाइडलाइन में 18 से 30 अप्रैल के लिए पुनः परिवर्तन कर दिया है। इसके अलावा राज्य के देहरादून जिले में 18 अप्रैल को तथा अप्रैल माह में प्रत्येक शनिवार व रविवार को तथा राज्य के अन्य जनपदों में रविवार को साप्ताहिक कोविड कर्फ्यू लागू कर दिया गया है। वहीं देहरादून में आवश्यक सेवाओं से संबंधित सभी सरकारी एवं गैर सरकारी कार्यालय व संस्थान शनिवार को भी खुले रहेंगे।
देखें विस्तृत दिशा निर्देश :

यह भी पढ़ें : पूरे उत्तराखंड में रात्रि कर्फ्यू तथा स्विमिंग पूल, स्पा व कोचिंग संस्थान पूरी तरह से बंद करने के नए दिशा-निर्देश जारी

नवीन समाचार, देहरादून, 15 अप्रैल 2021। उत्तराखंड में बृहस्पतिवार को अब तक के सर्वाधिक 2220 मामले आने के बाद राज्य सरकार एक बार फिर से नए कठोर प्राविधान लागू करने को मजबूर हो गई है। राज्य में अब रात्रि साढ़े 10 से सुबह 5 बजे तक कुछ प्रतिबंधों को छोड़कर रात्रि कर्फ्यू लागू कर दिया गया है। इसके अलावा सभी स्विमिंग पूल, स्पा व कोचिंग संस्थान पूरी तरह से बंद करने, जिम, सिनेमा हॉल, रेस्टोरेंट, बार एवं बस, ऑटो, रिक्शा आदि सार्वजनिक वाहन कंटेनमेंट जोन में पूरी तरह से एवं अन्य जगहों पर 50 फीसद क्षमता में ही संचालित करने के निर्देश भी जारी किए गए हैं।
वहीं 65 वर्ष से अधिक एवं 10 वर्ष से कम उम्र के बच्चों को घर से बाहर न निकलने की सलाह दी गई है। सभी जिलों में निवसियों व सैलानियों के लिए सार्वजनिक स्थानों पर अनिवार्य रूप से मास्क पहनने व सामाजिक दूरी का कड़ाई से पालन करना तथा केंद्र सरकार द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का पालन करना भी अनिवार्य कर दिया गया है।
देखें विस्तृत दिशा-निर्देश:

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नवीन समाचार, देहरादून, 12 अप्रैल 2021। उत्तराखंड सरकार ने एक बार फिर कोरोना के दृष्टिगत पाबंदियां लागू करनी शुरू कर दी हैं। राज्य में अब अगले आदेशों तक विवाह समारोहों में अधिकतम 200 लोग ही शामिल हो सकेंगे, और उन्हें भी कोविद-19 के संक्रमण से बचने के लिए मास्क पहनने तथा सामाजिक दूरी का पालन करना होगा। इस संबंध में सोमवार को प्रदेश के मुख्य सचिव एवं उत्तराखंड राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के मुख्य कार्यकारी अधिकारी ओम प्रकाश की ओर से राज्य के सभी अपर मुख्य सचिवों, प्रमुख सचिवों, डीजीपी, सचिव, प्रभारी सचिव, दोनों मंडलों के आयुक्त एवं राज्य के सभी जिलाधिकारियों को पत्र जारी कर इन दिशा-निर्देशों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक कार्रवाई करने को कहा गया है।

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नवीन समाचार, देहरादून, 10 मार्च 2021। उत्तराखंड में कोरोना संक्रमण की रफ्तार को थामने के लिए नई रणनीति से कार्य किया जायेगा। इसके तहत कंटेनमेंट जोन में शत -प्रतिशत लोगों की जांच कराई जाएगी। इसके साथ ही विषाणु की चेन को तोड़ने के लिए माइक्रो कंटेनमेंट जोन बनाने को कहा गया है। मुख्य सचिव ओमप्रकाश ने शनिवार को सचिवालय में कोरोना संक्रमण की समीक्षा की। उन्होंने कहा कि देशभर में कोरोना के मामले बढ़ रहे हैं ऐसे में संक्रमण की रोकथाम के लिए राज्य में प्रोएक्टिव होकर कार्य करना होगा। उन्होंने सभी जिलाधिकारियों को निर्देश दिए कि कोरोना संक्रमण की दृष्टि से अपनी तैयारियां पूरी रखें। उन्होंने सभी जनपदो में कोरोना जांच बढ़ाने के निर्देश दिए और कहा कि कंटेनमेंट जोन में शत प्रतिशत टेस्टिंग सुनिश्चित की जाए। होटल, रेस्टोरेंट सहित भीड़ भाड़ वाले क्षेत्रों में सोशल डिस्टेंसिंग और कोविड मानकों का पालन सुनिश्चित किया जाए। कोरोना से संक्रमित लोगों के इलाज में विशेष सावधानी बरतने के भी निर्देश दिए गए। इसके साथ ही कोरोना संक्रमण के बाद मौत के मामलों में कमी लाने के लिए डेथ रिव्यू करने के निर्देश भी दिए गए हैं। इसके लिए हर जिले में सीनियर ऑफीसर को नियुक्त करने को कहा गया है। मुख्य सचिव ने इस दौरान राज्य में कोरोना जांच में तेजी लाने, अधिक से अधिक लोगों की जांच कराने, टीकाकरण अभियान को और तेज करने और जागरुकता को बढ़ाए जाने के भी निर्देश दिए। 11 अप्रैल से 14 अप्रैल तक टीका उत्सव के रूप में मनाने को कहा गया है। मुख्य सचिव ने कहा कि गणमान्य लोग आमजन को जागरूक करें। जागरूकता अभियान में युवाओं को फोकस किया जाना चाहिए। कुम्भ क्षेत्र में विशेष ध्यान देते हुए अधिक से अधिक लोगों की टेस्टिंग की जाए।

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-‘कॉन्टैक्ट ट्रेसिंग’ से करेंगे कोरोना का सामना
नवीन समाचार, नैनीताल, 09 अप्रैल 2021। नैनीताल जनपद में कोरोना के अचानक बेहद तेजी से बढ़ते मामलों के दृष्टिगत जिला प्रशासन ने नई रणनीति बना ली है। इस रणनीति के तहत जनपद में कोरोना संक्रमित पाये जा रहे लोगों की ‘कॉन्टैक्ट ट्रेसिंग’ यानी उनके संपर्क में आए लोगों को चिन्हित करने पर जोर दिया जाएगा। इस कार्य के लिए डीएम धीराज गर्ब्याल ने जनपद के एसीएमओ डॉ. तरुण टम्टा को नोडल अधिकारी नियुक्त कर दिया है। डीएम गर्ब्याल ने कहा है कि एसीएमओ टम्टा एआरटी, वीआरटी व सीआरटी टीमों की मदद से किसी व्यक्ति के कोरोना संक्रमित पाए जाने के दिन ही उसके संपर्क में आए लोगों की पहचान कर आगे की कार्रवाई करेंगे।
श्री गर्ब्याल ने बताया कि कोरोना कन्ट्रोल रूम में कोरोना संक्रमित मरीजों की जानकारी का संकलन करते हुए संक्रमित व्यक्ति की जानकारी उसके निवास स्थान के निकटतम चिकित्साधीक्षक, चिकित्साधिकारी के साथ ही नोडल अधिकारी को भी दी जाएगी। इसके तत्काल बाद कोरोना कंट्रोल रूम, नोडल अधिकारी आईआरटी व अन्य पूर्व में बनाई गई क्षेत्र के विभागीय अधिकारियों व चिकित्साधिकारी की वीआरटी तथा सीआरटी के जरिये कॉंटैक्ट टेªसिंग का कार्य प्रारम्भ करेंगे। अन्य कर्मी उनका मात्र सहयोग करेंगे।

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-कोविद-19 से संबंधित समस्त नियम नैनीताल जनपद में भी लागू

धीराज गर्ब्याल

नवीन समाचार, नैनीताल, 31 मार्च 2021। नैनीताल जनपद में मुख्य सचिव उत्तराखण्ड शासन एवं उत्तराखण्ड राज्य आपदा प्रबन्धन प्राधिकरण के मुख्य कार्यकारी अधिकारी द्वारा के द्वारा कोविड-19 संक्रमण से बचाव के दृष्टिगत समस्त दिशा-निर्देश 1 अप्रैल से यथावत लागू रहेंगे। जानकारी देते हुए डीएम धीराज सिंह गर्ब्याल ने बताया कि महाराष्ट्र, केरला, पंजाब, कर्नाटक, छत्तीसगढ़, मध्यप्रदेश, तमिलनाडु, गुजरात, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, दिल्ली एवं राजस्थान यानी 12 राज्यों से जनपद में किसी भी यातायात माध्यम से आने वाले लोगों को एक अप्रैल से जनपद में प्रवेश के लिए 72 घंटे के भीतर कराई गई आरटीपीसीआर जॉच की निगेटिव रिपोर्ट दिखाना अनिवार्य कर दिया गया है। इन राज्यों से आने वाले लोगों को बिना निगेटिव रिपोर्ट दिखाए जनपद में प्रवेश नहीं दिया जायेगा। इसके साथ ही श्री गर्ब्याल ने कोविड-19 के संक्रमण से बचाव हेतु जनता से सामाजिक दूरी का अनुपालन करने, मास्क पहनने एवं समय-समय पर साबुन आदि से हाथ धोने की अपील की है।

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-राज्य में आरटी-पीसीआर टेस्ट एवं वैक्सीनेशन में तेजी लाने के निर्देश
-खासकर हरिद्वार में कुंभ के स्नानों को देखते हुए वहां वैक्सीनेशन और आरटी-पीसीआर टेस्ट के लिए विशेष अभियान चलाने को भी कहा
-राज्य में जहां भी कोरोना के मामले बढ़ रहे हैं, वहां कंटेनमेंट एवं माइक्रो कंटेनमेंट जोन बनाने और टीकाकरण पर विशेष ध्यान देने को कहा
-जिन राज्यों में कोरोना के मामले बढ़ रहे हैं, वहां से आने वालों को कोरोना की निगेटिव रिपोर्ट लाने पर ही मिलेगा राज्य में प्रवेश

नवीन समाचार, देहरादून 30 मार्च 2021। उत्तराखंड में कोरोना के अचानक बहुत तेजी से बढ़ते मामलों को देखते हुए प्रदेश के मुख्यमंत्री ने आखिर अपना कोरोना पर अपना स्टेंड बदल दिया है। मुख्यमंत्री रावत ने मंगलवार को कोविड पर प्रभावी नियंत्रण के लिए वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से अधिकारियों की बैठक ली, और उन्हें राज्य में आरटी-पीसीआर टेस्ट एवं वैक्सीनेशन में तेजी लाने के निर्देश दिए। खासकर हरिद्वार में कुंभ के स्नानों को देखते हुए वहां वैक्सीनेशन और आरटी-पीसीआर टेस्ट के लिए विशेष अभियान चलाने को भी कहा है। साथ ही उन्होंने कहा कि राज्य में जहां भी कोरोना के मामले बढ़ रहे हैं, वहां कंटेनमेंट एवं माइक्रो कंटेनमेंट जोन बनाए जाएं और टीकाकरण पर विशेष ध्यान दिया जाए। बैठक में यह भी निर्देश दिए गए कि जिन राज्यों में कोरोना के मामले बढ़ रहे हैं, वहां से आने वालों को कोरोना की निगेटिव रिपोर्ट लाने पर ही प्रवेश दें। उन्होंने इसके लिए शीघ्र गाइडलाइन जारी करने को भी कहा।

12 राज्यों से आने वालों को लानी होगी निगेटिव रिपोर्ट
देश भर में कोरोना के बढ़ते मामलों को देखते हुए उत्तराखंड सरकार ने अन्य राज्यों से आने वाले यात्रियों पर सख्ती करनी शुरू कर दी है। सरकार ने 12 राज्यों-महाराष्ट्र, केरल, पंजाब, कर्नाटक, छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश, तमिलनाडु, गुजरात, हरियाणा, उत्तरप्रदेश, दिल्ली और छत्तीसगढ़ से उत्तराखंड आने वाले यात्रियों से अपने साथ कोरोना की आरटीपीसीआर जांच की निगेटिव रिपोर्ट लाने को कहा है। यह व्यवस्था एक अप्रैल से लागू हो जाएगी। यह स्पष्ट किया गया है कि यह रिपोर्ट उत्तराखंड आने से पहले के 72 घंटे से अधिक अवधि की नहीं होनी चाहिए।

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-मुख्यमंत्री के रुख से पलटते हुए कुंभ मेले में गाइडलाइन का सख्ती से पालन कराने के निर्देश
-गाइडलाइन को कड़ाई से पालन करने और केंद्र सरकार के निर्देश को तहसील, ब्लॉक व गांव स्तर तक पालन करने को कहा है
नवीन समाचार, देहरादून, 22 मार्च 2021। उत्तराखंड शासन की ओर से कोरोना तालाबंदी की क्रमवार समाप्ति के संबंध में फिर से नई गाइडलाइन जारी की गई है जिसमें जिला प्रशासन समेत केंद्र और राज्य सरकार के तमाम संस्थानों को कोविड विषाणु से बचाव के मानको को पालन करने और मास्क पहनने के साथ शारीरिक दूरी और हाथ धोने के निर्देश दिए गए हैं।
मुख्य सचिव ओमप्रकाश की ओर से सोमवार को अपर मुख्य सचिव, जिला प्रशासन और सचिव, मंडल आयुक्त सहित अन्य अधिकारियों को प्रेषित पत्र में कहा गया है कि लगातार 5 महीने कोरोना के मामलों में कमी देखी गई थी, लेकिन पिछले कुछ हफ्तों से कोरोना के मामलों में तेजी आ रही है। इसके पीछे बड़ा कारण लोगों के बीच कोरोना को लेकर लापरवाही देखी जा रही है। खास तौर पर भीड़भाड़ वाले इलाके में कोरोना की नई लहर आई है। उसको देखते हुए महाकुंभ मेला हरिद्वार में गाइडलाइन को कड़ाई से पालन करने के निर्देश दिए गए हैं। जिसमें मास्क पहनने स्वच्छ रहने व सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करने के निर्देश शामिल हैं। इसके साथ ही राज्य सरकार के सभी जिला अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि कोरोना विषाणु को लेकर किसी भी तरीके से कोताही न बरती जाए। गाइडलाइन को कड़ाई से पालन किया जाए और केंद्र सरकार के निर्देश को तहसील, ब्लॉक व गांव स्तर तक पालन किया जाए।

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रवीन्द्र देवलियाल @ नवीन समाचार, नैनीताल, 09 मार्च 2021। तीर्थनगरी हरिद्वार में अब महाशिवरात्रि व सोमवती अमावस्या यानी 11 व 12 मार्च को होेने वाले शाही स्थानों के मौके पर भी श्रद्धालुुओं को प्रदेश सरकार की ओर से जारी मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) का पालन करना होगा। राज्य सरकार की ओर से इसका सख्ती से पालन करने को कहा गया है।
प्रदेश सरकार की ओर से इस आशय के आदेश सोमवार को जारी किये गये हैं। राज्य आपदा प्रबंधन के मुख्य कार्यकारी अधिकारी व प्रदेश के मुख्य सचिव ओमप्रकाश की ओर से जारी पत्र में कहा गया है कि हरिद्वार मेला क्षेत्र में एसओपी 10 मार्च से 12 मार्च की अवधि में भी लागू रहेगी। मुख्य सचिव की ओर से कुंभ मेला अधिकारी दीपक रावत, आईजी कुंभ मेला व आयुक्त गढ़वाल, जिलाधिकारी हरिद्वार, पौड़ी व टिहरी को गाइड लाइन का सख्ती से पालन करने के निर्देश दिये गये हैं। इससे साफ है कि अब दोनों शाही स्नानों में हरिद्वार आने वाले श्रद्धालुओं को अब 72 घंटे पहले की कोरोना की जांच रिपोर्ट अपने साथ लानी होगी। इसके साथ ही श्रद्धालुओं को राज्य सरकार के कुंभ मेला से संबंधित वेब पोर्टल पर भी पंजीकरण करना अनिवार्य होगा और पंजीकरण संबंधी ई-पास भी अपने पास रखना होगा। साथ ही आरोग्य सेतु एप को भी अपने मोबाइल में चालू रखना होगा। इन शर्तों को पूरा करने वाले श्रद्धालुओं को ही हरिद्वार कंुभ मेला में प्रवेश करने दिया जायेगा। यही नहीं सभी श्रद्धालुओं के लिये सामाजिक दूरी (सोशल डिस्टेशिंग) के व मास्क पहनना भी अनिवार्य होगा। एसओपी के अनुसार मेला क्षेत्र में थूकने पर भी प्रतिबंध रहेगा। जिले से जुड़ी सभी सीमाओं, प्रवेश द्वारों, रेलवे स्टेशनों व बस अड्डों पर सख्ती के निर्देश दिये गये हैं। विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं व तीर्थ यात्रियों के लिये भारत सरकार व राज्य सरकार के मानकों का पालन करना अनिवार्य होगा।
यहां यह भी बता दें कि राज्य सरकार ने उच्च न्यायालय के आदेश के बाद यह कदम उठाया है। उच्च न्यायालय ने विगत पांच मार्च को कोविड महामारी से जुड़ी जनहित याचिका की सुनवाई करते हुए ये एसओपी को 11 मार्च व 12 मार्च को होने वाले स्नानों के लिये भी लागू करने के निर्देश दिये थे।

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नवीन समाचार, देहरादून, 30 जनवरी 2021। उत्तराखंड में अब बाहर से आने वाले लोगों को पंजीकरण कराने की जरूरत नहीं पड़ेगी। अब लोग कोरोना काल से पहले की तरह कभी भी प्रदेश में आ-जा सकते हैं। प्रदेश सरकार ने अनलॉक के नए दिशा-निर्देशों में इस व्यवस्था को लागू कर दिया है। वहीं, सामाजिक, धार्मिक, खेल, मनोरंजन व शैक्षणिक गतिविधियों में संख्या बढ़ाने को लेकर जिला प्रशासन निर्णय लेंगे। सिनेमाहाल, थियेटर, स्वीमिंग पूल, प्रदर्शनी कक्षों के संबंध में केंद्र के अलग-अलग मंत्रालयों द्वारा जारी की जाने वाली संशोधित एसओपी के अनुसार निर्णय लिया जाएगा। यह नई व्यवस्था एक फरवरी से लागू होगी। कुंभ मेले को लेकर स्पष्ट किया है कि इसके लिए जल्द ही प्रदेश सरकार अलग एसओपी जारी करेगा।
उल्लेखनीय है कि केंद्रीय गृह मंत्रालय ने बीते बुधवार कोरोना संक्रमण के मद्देनजर रियायतों में इजाफा करते हुए राज्यों के लिए नई एसओपी (मानक संचालन प्रक्रिया) जारी की थी। इस कड़ी में शुक्रवार को मुख्य सचिव ओमप्रकाश ने राज्य के लिए गाइडलाइन जारी की। इसमें यह स्पष्ट किया गया है कि अब अंतरराज्यीय व अंतरजनपदीय आवागमन पर व्यक्तियों व वस्तुओं की आवाजाही पर कोई रोक नहीं रहेगी। यह व्यवस्था ऐसे पड़ोसी देशों के साथ भी लागू होगी जिनके साथ क्रास बार्डर संधि है। इससे अब नेपाल से भी सुचारू आवागमन हो सकेगा। गाइडलाइन में यह कहा गया है कि प्रदेश में सामाजिक, धार्मिक, खेल, मनोरंजन, शैक्षणिक व सांस्कृतिक गतिविधियां केंद्र व जिला प्रशासन द्वारा जारी एसओपी के तहत संचालित होंगी। सिनेमा हाल व थियेटर केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय से जारी की जाने वाली संशोधित एसओपी के तहत संचालित होंगे। इसी प्रकार स्वीमिंग पूल के उपयोग के लिए केंद्रीय खेल एवं युवा कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी की जाने वाली संशोधित गाइडलाइन और प्रदर्शनी कक्षों का संचालन वाणिज्य विभाग द्वारा जारी की जाने वाली संशोधित एसओपी के अनुसार किया जाएगा। इसके अलावा ट्रेन, हवाई जहाज, स्कूल, उच्च शिक्षण संस्थान, होटल, रेस्टोरेंट, शापिंग माल, मल्टीप्लेक्स, मनोरंजन पार्क, योग केंद्र और जिम आदि केंद्र व प्रदेश सरकार द्वारा समय-समय पर जारी होने वाली एसओपी के अंतर्गत संचालित किए जाएंगे। जिला प्रशासन इनका सख्ती से अनुपालन करना सुनिश्चित कराएगा। गाइडलाइन में 65 वर्ष से अधिक आयु के बुजुर्ग, गंभीर बीमारियों से ग्रस्त व्यक्तियों व 10 साल से कम आयु के बच्चों को लेकर जरूरी सावधानी बरतने की अपेक्षा की गई है। जिला प्रशासन केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के दिशा-निर्देशों के क्रम में कंटेनमेंट जोन का निर्धारण सूक्ष्म स्तर पर करेगा। इसके साथ ही सभी से उचित शारीरिक दूरी, अनिवार्य रूप से मास्क पहनने व हाथ धोने समेत केंद्र सरकार के कोरोना से बचाव को लेकर समय-समय पर जारी दिशा-निर्देशों का अनुपालन कराने की हिदायत दी गई है। इसमें जिलाधिकारियों से कोरोना बचाव के मानकों के अनुपालन को सख्त कदम उठाने और जरुरत पडने पर धारा 144 लगाने को भी कहा गया है। गाइडलाइन का उल्लंघन करने वालों पर महामारी एक्ट की धाराओं में कार्यवाही करने के निर्देश दिए गए है।

यह भी पढ़ें : कोरोना के दृष्टिगत नई गाइड लाइन जारी

नवीन समाचार, नई दिल्ली, 29 दिसम्बर 2020। केंद्रीय गृह मंत्रालय ने कोरोना मामलों के मद्देनजर एक नई गाइडलाइन जारी की है। इसमें मौजूदा कोविड-19 गाइडलाइन को 31 जनवरी तक बढ़ा दिया गया है। इसके अलावा गृह मंत्रालय ने ब्रिटेन में पाए गए कोरोना के नए स्ट्रेन से सावधान रहने के लिए भी कहा है। केंद्र से जारी दिशा निर्देशों को राज्य सरकार ने भी अक्षरशः लागू करने की दिशा में आदेश जारी कर दिया है।
गृह मंत्रालय ने अपनी गाइडलाइन में कहा कि भारत में कोरोना के ऐक्टिव केसों की संख्या लगातार घट रही है, लेकिन वैश्विक स्तर पर मामले बढ़ रहे हैं। गृह मंत्रालय ने राज्यों को कंटेनमेंट जोन का दायरा सावधानीपूर्वक निर्धारित करने, मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) का सख्ती से पालन करने को कहा। गृह मंत्रालय ने कहा, ‘कंटेनमेंट जोन का सावधानीपूर्वक सीमांकन जारी रखा जाए, इन क्षेत्रों में संक्रमण के प्रसार के रोकथाम के लिए निर्धारित उपायों का सख्ती से पालन किया जाए, कोविड से जुड़े उपयुक्त व्यवहार को बढ़ावा दिया जाए और उन्हें सख्ती से लागू किया जाए तथा विभिन्न गतिवधियों के संदर्भ में सुझाई गई मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) का पूरी गंभीरता से पालन किया जाए।’

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नवीन समाचार, नैनीताल, 05 दिसम्बर 2020। जिला-मंडल मुख्यालय में बाहर से आ रहे लोगों के माध्यम से आ रहे संक्रमण पर नियंत्रण के उद्देश्य से जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग अब नैनीताल के प्रवेश द्वारों पर पर्यटकों की कोरोना जांच कराएगा। नगर के तल्लीताल और सूखाताल में इसके लिए दो टीमों का गठन किया गया है। बीडी पांडे अस्पताल के पीएमएस डॉ. केएस धामी के हवाले से प्राप्त समाचार के अनुसार कोरोना संक्रमण से शहर को बचाने के लिए यह कोशिश की जा रही है। इसके तहत नगर के तल्लीताल चुंगी और बारापत्थर चेक पोस्ट पर बाहर से आने वाली गाड़ियों में बैठे लोगों की स्क्रीनिंग की जाएगी। जिन यात्रियों में स्क्रीनिंग के दौरान कोरोना के लक्षण दिखाई देंगे उनका रैपिड एंटीजन टेस्ट किया जाएगा। और टेस्ट में पॉजिटिव आने वाले लोगों को आइसोलेट कर दिया जाएगा, ताकि कोई भी कोरोना संक्रमित व्यक्ति शहर में न पहुंच पाए। अभियान की बागडोर डॉ. प्रियांशु श्रीवास्तव को सौंपी गई है।

यह भी पढ़ें : दिल्ली से आने वाले यात्रियों के लिये आये नए दिशा-निर्देश

नवीन समाचार, हल्द्वानी, 29 नवम्बर 2020। दिल्ली में कोरोना के बढ़ते संक्रमण को देख उत्तराखंड परिवहन निगम गंभीर हो गया है। अफसरों ने सभी डिपो को निर्देशित किया है कि दिल्ली से बस में बैठकर हल्द्वानी या रुद्रपुर लौट रहीं सवारियों को रास्ते में न उतारे। इन्हें बस स्टेशन तक लाया जाएगा। स्वास्थ्य विभाग की टीम कभी भी रैंडम चेकिंग कर यात्रियों के सैंपल ले सकती है। स्टेशन प्रभारियों ने चालक व परिचालकों को इस आदेश का पालन करने को कहा है।
दिल्ली में कोरोना के बढ़ते मामलों की वजह से खतरा और बढ़ गया है। पहले निर्देश थे कि इस रूट पर जाने और आने वाले यात्रियों का पूरा ब्यौरा रखा जाए। ताकि एलआइयू व स्वास्थ्य विभाग को संदिग्ध मरीज तलाशने में परेशानी का सामना न करना पड़े। वहीं, स्टेशन इंचार्ज हल्द्वानी रवि शेखर कापड़ी ने बताया कि अब आदेश आया है कि जो यात्री दिल्ली से रुद्रपुर तक की सवारी कटाएंगे उन्हें रुद्रपुर बस अड्डे पर उतारा जाएगा। और जिन्होंने हल्द्वानी तक का टिकट कटवाया है। वो सवारी भी सीधे स्टेशन पर छोड़ी जाएगी। इससे पूर्व यात्री अपनी सुविधा के हिसाब से रास्ते में उतर जाते थे। मगर अब सैंपलिंग के लिए उन्हें सीधा स्टेशन लाया जाएगा।

यह भी पढ़ें : उत्तराखंड के सिटी पोर्टल में बड़ी सुरक्षा खामी उजागर, 60 वर्षीय महिला को डर कर स्थगित करनी पड़ी यात्रा

नवीन समाचार, नैनीताल, 13 अक्टूबर 2020। उत्तराखंड आगमन के लिए प्रदेश सरकार द्वारा जिस ‘स्मार्ट सिटी देहरादून’ पोर्टल पर पंजीकरण की व्यवस्था की गई है, उसमें बड़ी सुरक्षा खामी उजागर हुई है। इस कारण एक 62 वर्षीय महिला को डर कर अपनी यात्रा स्थगित करनी पड़ी है।
जनपद के मुक्तेश्वर निवासी होटलियर दीपक गुप्ता ने बताया कि उनकी 62 वर्षीया बहन ने गुरुग्राम से बुधवार 14 अक्टूबर को अपने चालक के साथ मुक्तेश्वर आने के लिए उत्तराखंड सिटी पोर्टल पर आवेदन किया था। लेकिन इसके तुरंत बाद उन्हें 7900810884 से उनके द्वारा पोर्टल पर दी गई जानकारियांे का उल्लेख करते हुए फोन आया। उन्होंने इस नंबर के बारे मे पोर्टल के नंबरों से जानकारी मांगी तो बताया गया कि उनका इस नंबर से कोई संबंध नहीं है। वे 200 लाइनों वाले लैंडलाइन नंबर से ही फोन करते हैं। इस नंबर की पड़ताल करने पर पता चला कि यह नंबर नोएडा का है और ‘स्पैम’ व ‘फ्रॉड’ बताया जा रहा है। काफी फोन करने के बाद अब इस नंबर को डाइल करने ‘उपलब्ध नहीं’ की जानकारी आ रही है। श्री गुप्ता ने बताया कि ऐसा होने के बाद उनकी बहन काफी डरी हुई है और अपनी 14 अक्टूबर की यात्रा को स्थगित कर और संबंधित चालक की जगह अन्य दिन व अन्य माध्यम से यहां आने जा रही हैं।
उल्लेखनीय है कि इससे पूर्व भी ‘नवीन समाचार’ स्मार्ट सिटी पोर्टल की एक बड़ी कमी की ओर ध्यान आकृष्ट कर चुका है, जिसे ‘नवीन समाचार’ पर समाचार प्रकाशित होने के बाद कमी को दूर कर दिया गया था।

यह भी पढ़ें : Breaking : उत्तराखंड में सार्वजनिक परिवहन के लिए नई SOP जारी

नवीन समाचार, देहरादून, 28 सितंबर 2020। उत्तराखंड में सार्वजनिक परिवहन के लिए नई एसओपी यानी मानक विचलन कार्यविधि जारी कर दी है। प्रदेश के मुख्य सचिव ओम प्रकाश के अनुसार उत्तराखंड परिवहन निगम एवं अन्य राज्यों के बीच अंतर्राज्यीय मार्गों पर पहले चरण में अधिकतम 100-100 फेरे प्रति दिन वाहन चल सकेंगे। यात्रियों से राज्य परिवहन प्राधिकरण द्वारा तय दरों पर किराया लिया जाएगा। सभी यात्रियों, वाहन चालक-परिचालक आदि को अपने मोबाइल में आरोग्य सेतु ऐप डाउनलोड करना होगा व उसका उपयोग करना होगा।
देखें एवं फॉलो करें विस्तृत दिशा-निर्देश ‘नवीन समाचार’ के इस ट्वीट पर :

 

यह भी पढ़ें : फिर बदले उत्तराखंड आने-जाने के नियम : उत्तराखंड आने वाले पर्यटकों के लिए बड़ी खुशखबरी

वीन समाचार, देहरादून, 22 सितंबर 2020। उत्तराखंड में आने वाले पर्यटकों के लिए बड़ी खुशखबरी है। उत्तराखंड के मुख्य सचिव ने मंगलवार देर शाम पर्यटकों के लिए नई गाइडलाइन जारी कर दिए हैं। इन नए दिशा-निर्देशों के अनुसार किसी भी तरह के वाहन से उत्तराखंड आने वाले सैलानियों को पूर्व की तरह राज्य सरकार के पोर्टल http://smartcitydehradun.uk.gov.in में ऑनलाइन पंजीकरण करना अनिवार्य होगा। लेकिन पर्यटकों के लिए अब राज्य के होटलों-गेस्ट हाउसों में दो दिन अनिवार्य रुकना अनिवार्य नहीं होगा। साथ ही अब सैलानियों के लिए अब राज्य में आगमन के लिए कोरोना निगेटिव की रिपोर्ट लाना भी जरूरी नहीं होगा।

देखें विस्तृत दिशा निर्देश ‘नवीन समाचार’ के इस ट्वीट पर : 

हालांकि होटलों-रेस्टोरेंटों को सैलानियों के लिए थर्मल स्कैनिंग, सेनेटाइजेशन और अन्य जरूरी उपाय करने होंगे। होटल प्रबंधन भी संक्रमण के बचाव के लिए अपने होटल में अपने अनुसार नियम लागू कर सकते हैं। वहीं अगर कोई पर्यटक कोरोना पॉजिटिव पाया जाता है तो होटल प्रबंधन को जिला प्रशासन को सूचित करना होगा। आगे जिला प्रशासन होटलों में केंद्रीय गृह मंत्रालय के दिशा-निर्देशों के तहत रैंडम चेकिंग की व्यवस्था बनाऐंगे, ताकि सभी नियमों का पालन होना सुनिश्चित हो सकेंगे। आज के इस आदेश के बाद 19 सितंबर का आदेश निरस्त माना जाएगा।

यह भी पढ़ें : आज से बदले उत्तराखंड आने-जाने के नियम, अब बड़ों-छोटों, कम-अधिक दिन के लिए आने-जाने वालों के लिए अलग-अलग नियम

नवीन समाचार, देहरादून, 19 सितंबर 2020। उत्तराखंड सरकार ने अनलॉक 4.0 में उत्तराखंड आने-जाने के नियम एक बार फिर से बदल दिये हैं। बदले नियमों में जहां बड़ों-छोटों, कम-अधिक दिन के लिए आने वालों के लिए अलग-अलग नियम नजर आ रहे हैं, वहीं कोरोना के आज रिकॉर्ड दो हजार से अधिक मामले आने के बावजूद नियमों में कड़ाई की जगह सरलता नजर आ रही है। अलबत्ता सरलता कोरोना के गैर लक्षणों वाले लोगों के लिए लग रही है। ऐसा लगता है कि सरकार गैर लक्षणों वाले लोगों को राज्य में आने के लिए अधिक छूट देना चाहती है। नये दिशा-निर्देश 21 सितंबर से प्रभावी हो गए है।
देखें विस्तृत दिशा निर्देश ‘नवीन समाचार’ के इस ट्वीट पर :

शनिवार को प्रदेश के मुख्य सचिव द्वारा जारी नये दिशा-निर्देशों के अनुसार अब राज्य की सीमा पर केवल कोरोना के लक्षणों वाले लोगों की ही एंटीजन टेस्ट से जांच की जाएगी। पहले सभी आने वालों की एंटीजन जांच किये जाने का नियम था। इसके अलावा सात दिन से कम अवधि के लिए उत्तराखंड आने वाले लक्षणविहीन लोग अब बिना जांच के भी उत्तराखंड आ सकते हैं, अलबत्ता उन्हें लक्षण मिलने पर अपनी जांच करानी होगी और जिला प्रशासन को इसकी जानकारी देनी होगी व केंद्रीय गृह मंत्रालय के आदेशों को मानना होगा। वहीं सात दिन से अधिक समय के लिए आ रहे लोगों को 10 दिन के होम क्वारन्टाइन में रहना होगा। पहले यह अवधि 14 दिन की थी। इसके अलावा अब केंद्र एवं राज्य सरकार के मंत्रियों, सर्वाेच्च न्यायालय व उच्च न्यायालय के न्यायाधीशों, महाधिवक्ता, सांसदों, विधायकों और उनके सहयोगी कर्मियों आदि विशिष्टजनों को राज्य में आने पर क्वारन्टाइन करने से छूट रहेगी। 5 दिन से अधिक अवधि के लिए राज्य के बाहर जाने वाले राज्य के अधिकारियों को अपना कोविद टेस्ट कराना होगा। वहीं उत्तराखंड से बाहर जाकर पांच दिन के भीतर लौटने वाले गैर लक्षणविहीन लोगों को भी क्वारन्टाइन होने से छूट मिलेगी। लेकिन इससे अधिक अवधि के लिए बाहर जाने पर 10 दिन के लिए क्वारन्टाइन होना होगा। वहीं 96 घंटे के भीतर आरटीपीसीआर, ट्रूनेट, सीबीनेट व एंटीजन टेस्ट करा कर उत्तराखंड आने वालों को भी क्वारन्टाइन से छूट मिलेगी।

यह भी पढ़ें : बिना कोरोना जांच नहीं आ सकेंगे नैनीताल जिले में, प्राइवेट लैब को सीमा पर जांच जिम्मा

नवीन समाचार, नैनीताल, 15 सितंबर 2020। बाहरी राज्यों से उत्तराखंड आने वाले लोग अब नैनीताल जनपद में बिना कोरोना जांच के नहीं आ सकेंगे। इसके लिए उन्हें जनपद में आने पर अपने खर्च पर कोरोना की आरटी-पीसीआर जांच करानी होगी। डीएम सविन बंसल ने इस बारे में आदेश जारी करते हुए बताया कि जनपद में हल्द्वानी के गौलापार अंतरराष्ट्रीय स्टेडियम व रामनगर में जांच की व्यवस्था की जा रही है। यह जांचें दो निजी पैथोलॉजी लैबों के द्वारा की जाएगी। यां आरटी-पीसीआर जांच के लिए 2400 रुपये और रैपिड एंटीजन जांच कराने के लिए 1050 रुपए का शुल्क निर्धारित किया गया है। डीएम
जनपद की सीएमओ डॉ. भागीरथी जोशी ने बताया कि जिले की दो निजी लैब इन स्थानों पर अपनी व्यवस्थाएं करने में जुट गई है। इधर यह भी बताया गया है कि प्राइवेट लैबों के द्वारा जांच की व्यवस्था शुरू करने से पहले ही पुलिस ने डीएम के आदेश सख्ती और बढ़ा दी है। दूसरे राज्यों से आने वाले लोगों को काठगोदाम से आगे नहीं जाने दिया जा रहा है। सभी को गौलापार अंतरराष्ट्रीय स्टेडियम में बने स्टेजिंग एरिया में भेज दिया जा रहा है। बताया गया है कि बाहर से आने वाले लोग अगर जांच नहीं कराते हैं तो उन्हें नियम के अनुसार पहले क्वारंटाइन कर जांच की जाएगी।

6 निजी चिकित्सालयों के 25 फीसद बेड कोरोरा संक्रमितों के इलाज के लिए आरक्षित
नैनीताल। डीएम सविन बंसल ने जनपद के 6 निजी चिकित्सालयों-सेंट्रल हॉस्पिटल, बृजलाल हॉस्पिटल एवं रिसर्च सेंटर, नीलकंठ, सांई व विवेकानंद के 25 फीसद बेड कोरोरा संक्रमितों के इलाज के लिए आरक्षित कर दिया है। इन चिकित्सालयों के द्वारा 80 प्रतिशत उपचार शुल्क लेकर आईसीएमआर के मानकों के अनुरूप उपचार किया जाएगा। वहीं सीडीओ नरेंद्र सिंह भंडारी ने आज गौलापार स्टेडियम में 200 बेड एवं मिनी स्टेडियम हल्द्वानी में 150 बेड के ऑक्सीजन युक्त कोविद-19 केयर सेंटर की स्थापना के लिए विभागीय अधिकारियों के साथ इन स्थलों का निरीक्षण किया।

यह भी पढ़ें : बाहरी प्रदेशों से उत्तराखंड आने के लिए बदले नियम..

नवीन समाचार, देहरादून, 12 सितंबर 2020। उत्तराखंड शासन ने दूसरे राज्यों से उत्तराखंड आने वाले लोगों के लिए नये दिशा-निर्देश जारी कर दिए हैं। प्रदेश के मुख्य सचिव ओम प्रकाश की ओर से जारी ताजा आदेशों के अनुसार देहरादून सिटी पोर्टल में पंजीकरण में प्रदर्शित यात्रा के समय से 96 घंटों पूर्व की कोविड जांच रिपोर्ट प्रस्तुत करने पर उन्हें संस्थागत एवं गृह एकांतवास के नियमों का पालन करने से छूट मिलेगी। वहीं बिना कोविड जांच के उत्तराखंड आने वाले लोगों को अब सीमा पर बनी पोस्ट्स पर अपनी कोविद जांच भुगतान देकर कराने की सुविधा भी मिलेगी। बताया गया है कि इस जांच में प्रति व्यक्ति करीब 1680 रुपए का खर्च आएगा। इस जांच में यदि वे कोरोना पॉजिटिव पाए जाते हैं तो जिला प्रशासन केंद्रीय गृह मंत्रालय एवं राज्य सरकार के दिशा-निर्देशों के तहत कार्रवाई करेगा। और यदि वे निगेटिव पाए जाते हैं तो उन्हें सामाजिक दूरी बरतने व मास्क पहनने आदि नियमों का पालन करना होगा, और यदि इस बीच उनमें कोरोना के कोई लक्षण उभरते हैं तो उन्हें तत्काल स्थानीय स्वास्थ्य एवं जिला प्रशासन को इसकी सूचना देनी होगी।

यह भी पढ़ें : खुलने वाले हैं स्कूल, नई गाइडलाइन जारी, तय हुआ क्या प्रबंध करने होंगे स्कूल…

नवीन समाचार, नई दिल्ली, 9 सितंबर 2020। 5 महीने से बंद स्कूल अब 21 सितंबर से खुलने जा रहे है। कक्षा 9वीं से 12वीं तक के छात्रों के लिए केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय की ओर से गाइडलाइन जारी कर दी गई हैं। नए एसओपी के अनुसार, विद्यार्थी अपने शिक्षकों से मार्गदर्शन ले सकते हैं। लेकिन ये उनकी स्वेच्छा पर है यानी अगर वे जाना चाहते हैं, तभी जाएं, उन पर स्कूल जाने का कोई दबाव नहीं है। इसके ल‍िए अभिभावकों की ल‍िख‍ित अनुमत‍ि जरूरी होगी। कक्षाओं में स्कूल प्रशासन की ओर से बायोमीट्रिक उपस्थिति के बजाय ‘कॉन्टैक्ट लेस अटेंडेंस’ यानी छुए बिना उपस्थिति दर्ज करने की वैकल्पिक व्यवस्था की जाएगी। इसके अलावा 6 फीट के अंतर को दर्शाते हुए फर्श तैयार किया जा सकता है। इसी तरह, स्टाफ रूम, ऑफिस एरिया (रिसेप्शन एरिया सहित), और अन्य जगहों (मेस, लाइब्रेरी, कैफेटेरिया, आदि) में भी सोशल डिस्टेंसिंग को फॉलो करना जरूरी होगा। वहीं स्कूल असेंबली यानी प्रार्थना सभा, खेल व अन्य गतिविधियों में भीड़भाड़ पर सख्ती से रोक होगी। स्कूल को किसी भी आपात स्थिति में संपर्क करने के लिए शिक्षकों / छात्रों / कर्मचारियों को राज्य के हेल्पलाइन नंबर और स्थानीय स्वास्थ्य अधिकारियों के नंबर आदि बोर्ड पर डिस्प्ले करने होंगे।
एयर-कंडीशनिंग और वेंटिलेशन के लिए सभी एयर कंडीशनिंग उपकरणों की तापमान सेटिंग 24-30 डिग्री सेल्सियस की सीमा में होनी चाहिए। इसके अलावा सापेक्ष आर्द्रता 40-70% की सीमा में होनी चाहिए. क्लासरूम में ताजी हवा जरूरी है। स्कूल के जिमनेजियम को भी स्वास्थ्य मंत्रालय की पूरी गाइडलाइन फॉलो करनी होगी। इसके अलावा स्वीमिंग पूल कहीं भी नहीं खुलेंगे। ये पहले की तरह ही बंद रहेंगे।
विद्यार्थियों के लॉकर पहले की तरह इस्तेमाल होंगे. लेकिन इसमें नियमित डिसइन्फेंक्शन किया जाएगा। स्कूल और कक्षाओं में सोशल डिस्टेंसिंग का सख्ती से पालन होगा। विद्यार्थी पहले की तरह एक पंक्त‍ि में नहीं बैठ पाएंगे और आपस मे नोटबुक, पेन / पेंसिल, इरेज़र, पानी की बोतल जैसी वस्तुओं को साझा करने की अनुमति नहीं होगी। स्कूलों में पर्सनल प्रोटेक्शन की चीजें जैसे फेस कवर, मास्क, हैंड सैनिटाइजर्स आदि का बैकअप स्टॉक होना जरूरी होगा। ये सारी चीजें प्रबंधन ही शिक्षकों और कर्मचारियों को उपलब्ध कराएगा। शिक्षण संकाय यह सुनिश्चित करेगा कि वे स्वयं और छात्र शिक्षण / मार्गदर्शन गतिविधियों के संचालन के दौरान मास्क पहनते हैं। COVID की जांच के लिए थर्मल गन, अल्कोहल वाइप्स या 1% सोडियम हाइपोक्लोराइट के घोल और डिस्पोजेबल पेपर टॉवल, साबुन, आईईसी सामग्री की पर्याप्त आपूर्ति प्रदान करें। किसी भी रोगग्रस्त व्यक्ति के ऑक्सीजन स्तर की जांच के लिए पल्स ऑक्सीमीटर की व्यवस्था भी करनी चाहिए। स्कूल प्रशासन पर्याप्त कवर किए गए डस्टबिन और कचरा डिब्बे की उपलब्धता सुनिश्चित करें। विद्यालय परिसर के भीतर कमरों या खुली जगहों में एक्ट‍िविटी कराई जाएं। इसके अलावा स्कूल में कुर्सियों, डेस्क आदि के बीच 6 फीट की दूरी सुनिश्चित करने के लिए बैठने की व्यवस्था की जाए। स्कूल में सैनिटाइजेशन के लिए टाइम स्लॉट बनाए जाएं।

यह भी पढ़ें : अब बिना डॉक्टर की पर्ची के भी करा सकते हैं कोरोना जांच, रैपिड एंटीजन व आरटी-पीसीआर जांच पर भी साफ हुई स्थिति

नवीन समाचार, नई दिल्ली, 5 सितंबर 2020। देश में कोरोना संक्रमण की रफ्तार हर रोज बढ़ती जा रही है। इस बीच, भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) ने कोरोना टेस्टिंग को लेकर नई गाइडलाइंस जारी की हैं। नए दिशा-निर्देश के मुताबिक विदेश या देश के दूसरे राज्यों में यात्रा करने वालों के पास कोरोना टेस्ट का निगेटिव सर्टिफिकेट होना चाहिए। इसलिए लोग बिना चिकित्सक की पर्ची के भी अपनी कोरोना जांच करा सकते हैं।
आईसीएमआर ने कहा है कि अगर कोई व्यक्ति खुद का टेस्ट कराना चाहते हैं (टेस्टिंग ऑन डिमांड) तो उनके लिए राज्य सरकारों को नियम तय करने चाहिए। नई टेस्टिंग गाइडलाइन के अनुसार रैपिड एंटीजन टेस्ट के टेस्टिंग प्रोटोकॉल में भी बदलाव किया गया है। अब अगर रैपिड एंटीजन टेस्ट में व्यक्ति पॉजिटिव आया तो उसको पॉजिटिव मान लिया जाएगा। लेकिन अगर टेस्ट में नेगेटिव आने के बावजूद व्यक्ति में लक्षण दिखते हैं तो उसका निश्चित तौर पर आरटी-पीसीआर टेस्ट कराया जाएगा। आईसीएमआर की नई गाइडलाइंस के अनुसार सार्वजनिक स्वास्थ्य अधिकारियों को यह नोटिफाई करना चाहिए कि लेबोरेट्री ट्रैकिंग और कॉन्ट्रैक्ट ट्रेसिंग मैकेनिज्म को सुनिश्चित करें। राज्य सरकार को इसके लिए आसान तौर-तरीका अपनाना चाहिए। कोरोना टेस्ट को लेकर कोविड-19 पर गठित नेशनल टास्क फोर्स ने इन बदलावों की सिफारिश की है। आईसीएमआर की यह सामान्य गाइडलाइंस है और इसे राज्य के स्वास्थ्य अधिकारियों के अनुसार संशोधित किया जा सकता है। कोरोना टेस्टिंग को चार वर्गों में बांटा गया है। मसलन कंटेनमेंट जोन, गैर कंटेनमेंट एरिया में नियमित निगरानी, अस्पताल और ऑन डिमांड टेस्टिंग।
कंटेनमेंट इलाके में पहले रैपिड एंटीजन टेस्ट (आरएटी) फिर आरटी-पीसीआर या ट्रूनाट या सीबीनाट टेस्ट होता है। गाइडलाइंस के मुताबिक कंटेनमेंट जोन में एंट्री प्वॉइंट्स पर लगातार नजर रखी जाए। इन जगहों पर लगातार स्क्रीनिंग होनी चाहिए। एंटीजन टेस्ट को किया जाना चाहिए। आरटी-पीसीआर टेस्ट उस वक्त ही किया जाए जब कोई शख्स एंटीजन टेस्ट में निगेटिव पाए जाने के बाद भी सांस लेने में तकलीफ या फिर कोई अन्य लक्षण दिखाए। कंटेनमेंट जोन में रहने वाले लोगों के लिए 100 फीसदी टेस्टिंग की जानी चाहिए। हेल्थ वर्कर और मोर्चे पर तैनात स्वास्थ्यकर्मियों का टेस्ट होना चाहिए।
वहीं गैर कंटेनमेंट जोन के लिए कहा गया है कि ऐसे इलाके की नियमित निगरानी किए जाने की जरूरत है। पिछले 14 दिनों में अंतरराष्ट्रीय यात्रा करने वालों का टेस्ट किया जाना चाहिए। नई गाइडलाइंस शहर लौटने वाले श्रमिकों, सभी स्वास्थ्यकर्मियों के टेस्ट की बात कही गई है।
आईसीएमआर ने टेस्टिंग की नई गाइडलाइंस में कहा है कि टेस्ट की कमी के चलते किसी भी आपातकालीन प्रक्रिया जिसमें प्रसव यानी डिलिवरी भी शामिल है, उसमें देरी नहीं होनी चाहिए। हालांकि सैंपल को एक साथ टेस्ट के लिए भेजा जा सकता है। सरकार को इसके लिए सभी व्यवस्था तय करनी चाहिए। साथ ही कहा गया है कि सर्जिकल या गैर-सर्जिकल प्रक्रियाओं के तहत आने वाले सभी मरीजों का टेस्ट किया जा सकता है। मगर सप्ताह में एक बार से अधिक नहीं। स्ट्रोक, एंसेफलाइटिस, हेमोप्टाइसिस जैसे मरीजों का डॉक्टर की सलाह के अनुसार जरूरी लगने पर टेस्ट किया जा सकता है।

यह भी पढ़ें : हर सप्ताहांत ‘लॉक डाउन’ पर फिर बदली व्यवस्था

-इस सप्ताह नहीं रहेगा शनिवार-रविवार को लॉकडाउन
नवीन समाचार, देहरादून/नैनीताल, 30 जुलाई 2020। राज्य के चार जनपदों-देहरादून, हरिद्वार, उधमसिंह नगर व नैनीताल में कोरोना के बढ़ते मामलों के दृष्टिगत हर सप्ताहांत यानी शनिवार व रविवार लॉक डाउन लागू करने की व्यवस्था में फिर बदलाव हो गया है। इसे नैनीताल विधायक संजीव आर्य की पहल का परिणाम माना जा रहा है। इस बारे में मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने कहा है कि फिलहाल इस सप्ताह राखी व अन्य त्योहारों को देखते हुए आने वाले शनिवार और रविवार को लॉकडाउन नहीं रहेगा। अब मुख्य सचिव को इस संबंध में आदेश जारी करना है।
उल्लेखनीय है कि नैनीताल के व्यापारी बीते तीन दिनों से इस मामले में खुला विरोध-प्रदर्शन कर रहे थे। इस पर विधायक संजीव आर्य ने जनपद के प्रभारी मंत्री के माध्यम से मुख्यमंत्री एवं मुख्य सचिव से वार्ता की। इस पर शासन से बुधवार को स्थानीय प्रशासन से आंदोलित व्यापारियों से वार्ता करने का संदेश आया। एसडीएम के स्तर पर वार्ता हुई, जिसमें व्यापारियों ने अपना पक्ष रखा, और शाम तक मुख्यमंत्री की ओर से इस सप्ताहांत लॉक डाउन लागू न होने का बयान भी आ गया। इसके बाद नगर के व्यापारियों ने बृहस्पतिवार को प्रस्तावित अपना जुलूस स्थगित कर दिया है। अलबत्ता, अगले सप्ताह से भी लॉक डाउन न लगाया जाए, इस हेतु शनिवार को व्यापारियों की बैठक बुलाई गई है।

नैनीताल: होटल संचालक-व्यापारी नेता व साथियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज, ऐसे ही मामले में पहले भी दो बार हो चुकी है चालान की कार्रवाई

यह भी पढ़ें : जरूरी समाचार: कोरोना का रैपिड एंटीजन टेस्ट निगेटिव आने के बाद भी होना होगा 7 से 14 दिन होम क्वारन्टाइन

नवीन समाचार, नैनीताल, 27 जुलाई 2020। जी हां, यदि आप में कोरोना से संबंधित ILA/SARI के लक्षण हैं और आपकी रैपिड एंटीजन टेस्ट से जांच की जाती है, और जांच में रिपोर्ट निगेटिव आती है, तो भी यदि आप उत्तराखंड के बाहर से उत्तराखंड में आ रहे हैं, तो आपको 14 दिन, और यदि उत्तराखंड के भीतर ही एक स्थान से दूसरे स्थान पर आ रहे हैं तो 7 दिन के लिए होम क्वारन्टाइन किया जाएगा। इस संबंध में प्रदेश के प्रभारी चिकित्सा-स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण सचिव पंकज कुमार पांडे ने आदेश जारी कर दिये हैं।
आदेश में आगे कहा गया है कि कोरोना के लक्षण होने के बावजूद रैपिड एंटीजन टेस्ट की रिपोर्ट निगेटिव आने की स्थिति में संबंधित व्यक्ति का आरटी-पीसीआर जांच करोई जाएगी और जांच रिपोर्ट आने तक संबंधित व्यक्ति को उसके लक्षणों की गंभीरता के अनुसार आइसोलेट रखा जाएगा।
उल्लेखनीय है कि 17 जून से दिल्ली में प्रारंभ हुए रैपिड एंटीजन टेस्ट-आरएटी की रिपोर्ट केवल आधे घंटे से दो घंटे के बीच आ सकती है। लेकिन आईसीएमआर के अनुसार इस तकनीक की रिपोर्ट 100 प्रतिशत सही नहीं आती। अलबत्ता, यदि इस टेस्ट की रिपोर्ट पॉजिटिव आती है तो संबंधित व्यक्ति को 100 प्रतिशत कोरोना पॉजिटिव माना जाता है, और रिपोर्ट निगेटिव आने के बावजूद यदि व्यक्ति में लक्षण होते हैं तो उसकी आरटी-पीसीआर जोच करानी होती है। वहीं आरटी-पीसीआर जांच की रिपोर्ट को दुनियाभर में 100 फीसद सही माना जाता है। गौरतलब है कि वर्तमान में उत्तराखंड में पूरे दिन में करीब 1000 आरटी-पीसीआर और 4000 रैपिट एंटीजन टेस्ट हो पा रहे हैं। इनकी वजह से ही राज्य में कोरोना जांच की गति बढ़ पाई है।

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नवीन समाचार, नैनीताल, 8 जुलाई 2020। लॉकडाउन के कारण आर्थिक संकट झेल रहे, सरकारी विभागों में पंजीकृत नगर के रिक्शा, घोड़े-खच्चर व नाव चालकों तथा फड़ वालों को आर्थिक सहायता देने के लिए मुख्यमंत्री राहत कोष से 1.47 करोड़ की धनराशि पर्यटन विभाग को जारी कर दी गई है। इस धनराशि से चिन्हित चालकों को एक-एक हजार रुपए की धनराशि दी जाएगी। साथ ही पर्यटन विभाग से संचालित वीर चंद्र सिंह गढ़वाली और होम स्टेट योजना के 250 लाभार्थियों के अप्रैल, मई और जून का तीन माह का ब्याज विभाग द्वारा जमा किया जाएगा। लाभार्थियों को ब्याज से छूट दी गई है।
जिला पर्यटन अधिकारी अरविंद गौड़ ने बताया कि धनराशि जिलाधिकारी कार्यालय में प्राप्त हो गई है। नगर के पंजीकृत रिक्शा, घोड़े-खच्चर व नाव चालकों तथा फड़ वालों के बारे में नगर पालिका से जानकारी ली जा रही है। धनराशि सीधे पंजीकृत रिक्शा, घोड़े-खच्चर व नाव चालकों तथा फड़ वालों के खातों में जमा की जाएगी।

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नवीन समाचार, देहरादून, 13 जून 2020 । उत्तराखंड में कोरोना से बचाव एवं रोकथाम के मद्देनजर मास्क नहीं पहनने और शारीरिक दूरी (सोशल डिस्टेंसिंग) के नियमों का उल्लंघन करने वालों की अब खैर नहीं है। इन नियमों की अनदेखी करने पर अब 6 माह की सजा या 5000 रुपये जुर्माना अदा करना होगा। राज्यपाल बेबी रानी मौर्य ने आज महामारी अधिनियम 1897 उत्तराखंड राज्य संशोधन अध्यादेश को स्वीकृति प्रदान कर दी है।
केंद्रीय अधिनियम में संशोधन करने वाला उत्तराखंड अब केरल और उड़ीसा के बाद तीसरा राज्य बन गया है, जिसने धारा 2 और 3 में संशोधन किया है। अब महामारी अधिनियम 1897 के तहत राज्य में जो कोरोना के फेस मास्क और एकांतवास (क्वारंटाइन) आदि से सम्बंधित नियम हैं, उनके उल्लंघन पर अधिकतम 6 माह की सजा और 5000 रुपये जुर्माने की व्यवस्था लागू हो गई है। मास्क न पहनने पर पहली गलती पर 100 रुपये का जुर्माना लगाने की व्यवस्था की है। इसके बाद यह जुर्माना बढ़ता रहेगा। इसी प्रकार अन्य मामलों में भी जुर्माने की राशि तय करने की व्यवस्था की गई है।अभी तक नियम तो थे परन्तु अधिनियम में प्रावधान न होने पर कम्पाउंडिंग की सुविधा नहीं थी। अब अध्यादेश जारी होने के बाद कोरोना से जुड़े नियम सख़्त और प्रभावी ढंग से लागू होंगे।

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नवीन समाचार, हल्द्वानी 11 जून 2020। जिलाधिकारी सविन बंसल ने कहा कि जनपद में अन्य प्रान्तों से आने वाले समस्त व्यक्तियों को अनिवार्य रूप से संस्थागत एवं होम कोरेन्टीन किया जायेगा। वहीं कोरोना वायरस से उच्च संक्रमित प्रदेशों व शहरों से आने वाले लोगों को अनिवार्य रूप से सात दिन संस्थागत व 14 दिन होम कोरेन्टीन मे रखा जायेगा। बाहरी प्रान्तो से आने वाले वाहनों के लिए वेब पोर्टल पर पंजीकरण करना भी अनिवार्य होगा।
जिलाधिकारी श्री बंसल ने अपने हल्द्वानी स्थित कैम्प कार्यालय में बैठक लेते हुये पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों को निर्देश दिये कि बाहर से आने वाले व्यक्तियों व वाहनों को जनपद की सीमा पर ही रोक कर ट्रैक किया जाए तथा वाहनों के पास चेक कर वाहनों में मार्क स्टिकर लगायें। उन्होने कहा कि बाहरी प्रान्तों से बरेली रोड, रामपुर रोड तथा चोरगलिया रोड से आने वाले वाहनों को स्टेजिंग एरिया अन्तर्राष्ट्रीय स्टेडियम गौलापार में लाया जायेगा जहां पर लोगों की स्कैनिंग व स्वास्थ्य परीक्षण कर हल्द्वानी मे ही संस्थागत अथवा होम कोरेन्टीन किया जायेगा। इसी प्रकार जनपद में काशीपुर, बाजपुर की ओर से बाहरी प्रदेशों के वाहनों से आने वाले व्यक्तियों को स्टेजिंग एरिया रामनगर मे लाया जायेगा, जहां पर उन्हें संस्थागत अथवा होम कोरेन्टीन किया जायेगा। श्री बंसल ने जनपद के बाॅर्डर पर सुरक्षा व्यवस्था सख्त करने करते हुये सघन चैकिंग करने के निर्देश भी दिये। कहा कि बाजपुर से आने वाले सडक मार्ग पर गड़प्पू पर भी वाहनों की कड़ी जांच कर यात्रियों को रामनगर व हल्द्वानी के स्टेजिंग एरिया में भेजा जाएगा। 

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नवीन समाचार, नैनीताल, 10 जून 2020। नैनीताल जनपद के टैक्सी चालकों को अब प्रदेश के किसी अन्य जिले में जाने पर क्वारंटाइन नहीं किया जाएगा। जनपद के  एडीएम एसएस जंगपांगी ने इस आशय के आदेश जारी कर दिए हैं। अपने आदेश में श्री जंगपांगी ने कहा है कि मंडलायुक्त के आदेशों पर यह व्यवस्था की जा रही है। अनुमति लेकर प्रदेश के किसी जनपद में सवारी छोड़कर एक-दो दिन में वापस लौटने वाले चालकों को अब क्वॉरेंटाइन नहीं किया जाएगा। अलबत्ता राज्य से बाहर जाकर लौटने वाले चालकों को लौटने पर अनिवार्य रूप से अपना स्वास्थ्य परीक्षण कराना होगा।  उल्लेखनीय है कि नैनीताल टैक्सी एसोसिएशन ने इस संबंध में कुमाऊं मंडलायुक्त अरविंद सिंह ह्यांकी को मंगलवार को ज्ञापन सौंपा था।

यह भी पढ़ें : बड़ा समाचार-बड़ी राहत: अब उत्तराखंड में रेड, ऑरेंज, ग्रीन जोन नहीं, राज्य के बाहर से आने वालों के लिए पास की बाध्यता भी समाप्त

नवीन समाचार, देहरादून, 8 जून 2020। उत्तराखंड राज्य में अब कोई भी जिला रेड, ग्रीन व आरेंज जोन में नहीं रहेगा। अब केवल कंटेनमेंट जोन ही चिह्नित किए जाएंगे। अलबत्ता, कंटेनमेंट जोन की निगरानी मुस्तैदी से की जायेगी ताकि संक्रमण न फैले। यही नहीं अब प्रदेश में अन्य राज्यों से आने वालो के लिए पास की व्यवस्था को भी समाप्त किया जा रहा है। साथ ही सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था को भी जल्द ही अन्य राज्यों के लिए भी खोल दिया जाएगा।
प्रदेश के मुख्य सचिव उत्पल कुमार सिंह ने सोमवार को सचिवालय में मीडिया सेंटर में प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए यह बात कही। रहे थे। उन्होंने कहा कि कोरोना के साथ ही अब डेगू जैसी घातक बीमारी की चुनौती हमारे सामने आने वाली है। इसको देखते हुए अभी से पुख्ता इंतजाम किए जा रहे हैं। मुख्य सचिव ने कहा कि प्रदेश में होटल, शॉपिंग मॉल, धार्मिक स्थलों के लिए गाइडलाइन जारी की गई है। इन स्थानों पर फिजिकल डिस्टेंसिंग, सफाई, सेनेटाइजेशन, मास्क का अनिवार्यता से पालन किया जाना है। अगर अनुशासन का परिचय देते हुए आवश्यक नियमों का पालन किया जाता है तो आगे सुविधाओं में बढ़ोतरी की जा सकती है। माना जा रहा है कि इस बारे में शीघ्र ही शासनादेश जिलों को प्राप्त हो जाएंगे। इसके बाद ही रेड जोन नैनीताल व प्रदेश के 11 ऑरेंज जिलों से जोन की व्यवस्था समाप्त हो सकेगी।

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नवीन समाचार, देहरादून, 04 जून 2020। मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने आज कहा कि उत्तराखंड के कोरोना संक्रमित व्यक्ति की मृत्यु पर उसके आश्रित को एक लाख रुपये की सहायता राशि दी जाएगी। मुख्यमंत्री ने कन्टेनमेंट जोन में गाइडलाइन का कड़ाई से साथ पालन करवाए जाने के निर्देश दिये। कहा कि कन्टेनमेंट जोन के बाहर भी शारीरिक दूरी और मास्क की अनिवार्यता के लिए लोगों को लगातार जागरूक किया जाए। जो लोग इनका पालन न करें, उन पर सख्त कार्रवाई की जाए। इसके लिए फील्ड सर्विलांस पर विशेष ध्यान दिया जाए।

वीडियो कान्फ्रेंसिग द्वारा प्रदेश में कोरोना की स्थिति की समीक्षा करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि एकांतवास केंद्रों में आवश्यक सुविधाओं की उपलब्धता सुनिश्चित की जाए। गृह एकांतवास का मानकों के अनुरूप पालन हो रहा है या नहीं, इस पर लगातार चेकिंग भी की जाए। आकस्मिक निरीक्षण किए जाएं। गांवों में एकांतवास सुविधाओं पर विशेष ध्यान दिया जाए। इसके लिए ग्राम प्रधानों को निर्देशानुसार धनराशि दी जाए। कोविड केयर सेंटर में प्रशिक्षित स्टाफ व अन्य आवश्यक उपकरणों की व्यवस्था हो।

मुख्यमंत्री ने कहा कि डाटा फीडिंग को पूरी गम्भीरता से लिया जाए। सभी जिलाधिकारी आने वाले समय की आवश्यकताओं का आकलन करते हुए इन्फ्रास्ट्रक्चर और लाजिस्टिक का गैप एनालिसिस करें। इस गैप के अनुसार सुविधाएं और उपकरण जुटाना सुनिश्चित करें। मुख्यमंत्री ने कहा कि कोरोना से लड़ाई में जन सहयोग बहुत जरूरी है। हमें लोगों को साथ लेकर ये लड़ाई लड़नी है। सख्ती और जागरूकता हमारे दो प्रमुख अस्त्र हैं।

देहरादून में शनिवार और रविवार को सेनेटाइजेशन के लिए पूर्णबंदी

मुख्यमंत्री ने कहा कि शनिवार और रविवार को (दो दिन) देहरादून में पूर्ण बंद कर सेनेटाइजेशन करवाया जाएगा। कोरोना संक्रमण के मामलों को देखते हुए देहरादून की निरंजनपुर सब्जी मण्डी को बंद कर वैकल्पिक व्यवस्था कर ली जाए। फ्रंटलाइन वारियर्स की सुरक्षा को सुनिश्चित किया जाए। राशन की कालाबाजारी की शिकायत नहीं आनी चाहिए। इसमें लिप्त लोगों पर सख्त से सख्त कार्रवाई की जाए। हर जरूरतमंद तक राशन पहुंचना चाहिए।

रोजगार और आजीविका के लिए कृषि व संबंधित क्षेत्रों पर फोकस

मुख्यमंत्री ने कहा कि हमें त्वरित रोजगार और आजीविका सृजन के लिए खेती, बागवानी, पशुपालन, मत्स्य को प्राथमिकता देनी होगी। हाल ही में किसानों के लिए केन्द्र सरकार द्वारा कई महत्वपूर्ण निर्णय लिये गए हैं। इनका लाभ किसानों तक पहुंचाने के लिए कार्ययोजना बनाई जाए। स्थानीय मांग का अध्ययन कर लिया जाए और उनकी आपूर्ति स्थानीय संसाधनों से ही पूरा कराए जाने की कोशिश की जाए। स्वयं सहायता समूहों और स्थानीय लोगों को किस प्रकार रोजगार उपलब्ध कराया जा सकता है, इस पर फोकस किया जाए। यह हर जिलाधिकारी का लक्ष्य होना चाहिए। मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना से युवाओं को लाभान्वित कराएं। किसानों के लिए क्वालिटी इनपुट और मार्केट उपलब्ध कराना सुनिश्चित किया जाए।

टेस्टिंग को और बढ़ाया जाएः मुख्य सचिव

मुख्य सचिव उत्पल कुमार सिंह ने टेस्टिंग को बढ़ाने और कान्टेक्ट ट्रेसिंग पर विशेष ध्यान देने को कहा। उन्होंने कहा कि किसी भी तरह की आवश्यकता होने पर शासन को तत्काल अवगत कराया जाए।

686 करोड़ रुपये उपलब्ध कराए गए

सचिव अमित नेगी ने कहा कि कोरोना के लिए कुल 686 करोड़ रुपये का बजट उपलब्ध कराया जा चुका है। इसमें एनएचएम को 160 करोड़ रुपये, चिकित्सा शिक्षा को 150 करोड़, एसडीआरएफ से स्वास्थ्य को 16 करोड़ रुपये, जिला प्लान में 150 करोड़ रुपये, डीएम फंड में 70 करोड़ रुपये, सीएम राहत कोष से 50 करोड़ रुपये और एसडीआरएफ से जिलाधिकारियों को 90 करोड़ रुपये उपलब्ध कराए गए हैं। बजट की कोई कमी नहीं है।

फसलों का क्लस्टर चिह्नीकरण

सचिव (कृषि) आर मीनाक्षी सुंदरम ने जिलाधिकारियों को फसलों का क्लस्टर चिह्नीकरण जल्द करने के निर्देश दिये। कृषि और सम्बंधित क्षेत्रों पर विशेष ध्यान दिया जाए। मुख्यमंत्री राज्य कृषि विकास योजना, राज्य बागवानी मिशन आदि योजनाओं का उपयोग किया जा सकता है।

बैठक के दौरान सभी जिलाधिकारियों ने कोरोना के लिए जिलों में की गई व्यवस्थाओं के बारे मे जानकारी दी। वीडियो कान्फ्रेंसिग में डीजीपी अनिल कुमार रतूड़ी, सचिव डाॅ पंकज कुमार पाण्डे सहित शासन के अन्य वरिष्ठ अधिकारी और जिलाधिकारी उपस्थित रहे।

यह भी पढ़ें : कल से प्रवासियों को रखने की व्यवस्था में बदलाव करेगी सरकार !

-अब ग्रामीण प्रवासियों को सीधे गांव भेजने के बजाय राज्य में प्रवेश करने पर वहीं सात दिन के लिए होटलों-धर्मशालाओं आदि में क्वारन्टाइन में रखा जाएगा
-कोरोना पॉजिटिव आने वाले लोगों को गिनने की व्यवस्था में भी बदलाव करने पर चल रहा है विचार
नवीन समाचार, देहरादून, 25 मई 2020। प्रदेश सरकार उच्च न्यायालय के निर्देशों पर प्रदेश में बाहरी प्रदेशों से आ रहे प्रवासियों को राज्य की सीमा पर ही रोककर वहीं सात दिन होटलों-धर्मशालाओं आदि में क्वारन्टाइन यानी एकांतवास में रखेगी और इस दौरान कोरोना की पुष्टि न होने पर अगले सात दिनो के लिए गांव भेजकर होम क्वारन्टाइन में रखेगी। इसके साथ ही सरकार में कोरोना संक्रमितों को गिनने की व्यवस्था में बदलाव करने पर भी विचार चल रहा है। अब तक जिस जनपद में जांच कराने पर व्यक्ति कोरोना संक्रमित पाये जा रहे हैं, उस जिले में ही संबंधित की गिनती हो रही है, लेकिन नयी व्यवस्था के तहत कोरोना संक्रमितों को उनके मूल जनपदों के हिस्से में गिना जा सकता है। इससे कोरोना संक्रमितों का उपचार करा रहे जिलों में कोरोना संक्रमितों की संख्या बढ़ रही थी और उनके रेड जोन में शामिल होने की संभावना बढ़ रही थी।
इधर सोमवार को प्रदेश के उच्च शिक्षा मंत्री डा. धन सिंह रावत ने पत्रकारों को बताया कि उच्च न्यायालय के निर्देशों पर पर सीमा पर ही प्रवासियों को एकांतवास में रखने की व्यवस्था करने का निर्णय मुख्यमंत्री के स्तर से ले लिया गया है। इस संबंध में जिलाअधिकारियों को निर्देश जारी किये जा रहे हैं।

यह भी पढ़ें : बाहर आने पर मास्क पहनने, बाहर से आने वालों व गुटखा व पान मसाले की बिक्री पर आये नये दिशा-निर्देश

नवीन समाचार, नैनीताल, 22 मई 2020। नैनीताल जनपद में बाहर से आने वाले हर व्यक्ति को संस्थागत क्वारन्टाइन यानी एकांतवास में रहना होगा और हर व्यक्ति को सार्वजनिक स्थान पर मास्क पहनना होगा। मास्क न पहनने पर एक वर्ष तक की कैद की सजा भी हो सकती है।
डीएम सविन बंसल ने कहा है कि भारत सरकार के दिशा-निर्देषों के अनुसार सार्वजनिक स्थानों पर मास्क पहनना अनिवार्य किया गया है। जो लोग मास्क नही पहन रहे हैं उन पर आर्थिक दंड के साथ ही एक साल की सजा का भी प्राविधान किया गया है। उन्होंने सभी जनपद वासियों से दो टूक शब्दों मे कहा है कि अनिवार्य रूप से मास्क पहनें तथा सामाजिक-शारीरिक दूरी को अपनी जिंदगी का हिस्सा बना लें और बिना मास्क के सडकों पर ना आयें, ऐसा ना करने पर प्रशासन द्वारा सख्ती करते हुये कार्यवाही की जायेगी। लाकडाउन अवधि मे बच्चे, बुजुर्ग तथा गर्भवती महिलायें घर से कतई बाहर ना निकलें।
उन्होंने यह भी बताया कि शासन से प्राप्त नई गाइडलाइन के अनुसार गुटखा तथा पान मसाले की बिक्री को तत्काल प्रभाव से प्रतिबंधित कर दिया है। क्योंकि गुटखा व पान मसाला खाकर लोग इधर-उधर सडकों पर थूकते है, थूक के जरिये भी संक्रमण होने की सम्भावनायें हैं। उन्होनेे कहा कि गुटखा, पान मसाला बेचने वाले तथा इसे खाकर इधर-उधर थूकने वालों पर भी कार्यवाही की जाएगी।
इसके साथ उन्होंने बताया कि जिले मे बाहर से विभिन्न जनपदों एवं प्रांतों से आने वाले लोगों को अनिवार्य रूप से संस्थागत क्वारन्टाइन सेंटरों में रहना होगा। स्वास्थ्य विभाग की संस्तुति पर ही होम कोरेन्टाइन की व्यवस्था होगी। उन्होने बताया कि ग्रामीण क्षेत्रों के कोरेन्टाइन सेन्टर मे व्यवस्थाओं की जिम्मेदारी ग्राम प्रधानों को दी गई है तथा ग्रामीण क्वारन्टाइन सेंटरों की मॉनीटरिंग के लिए ग्राम पंचायत अधिकारी, ग्राम विकास अधिकारी तथा संबंधित विद्यालय के अध्यापकों को ड्यूटी पर लगाया गया है। उन्होंने ग्राम प्रधानों से कहा है कि ग्राम सभाओं मे तैनात किये गये ग्राम विकास अधिकारी, ग्राम पंचायत अधिकारी तथा अध्यापक यदि ड्यूटी पर नही आ रहे है अथवा सहयोग नही कर रहे हैं तो इसकी भी जानकारी कंट्रोल रूम के नंबरों पर दें। ऐसे लापरवाह कर्मचारियों के विरूद्व दैवीय आपदा एक्ट की विभिन्न धाराओ में कार्यवाही की जायेगी। साथ ही कहा कि सभी ग्राम प्रधानों के पास राज्य वित्त से सम्बन्धित सभी वित्तीय संसाधन उपलब्ध है। पिछले वर्ष की लम्बित धनराशि को सभी ग्राम प्रधान कोरोना संक्रमण आपदा के लिए विशेष परिस्थितियों मे व्यय करें। उन्होेने सभी ग्राम प्रधानों को आश्वस्त करते हुये कहा है कि यदि और धनराशि की आवश्यकता होगी तो उन्हे धनराशि मुख्य मंत्री राहत कोष अथवा जिला दैवीय आपदा मद से अवमुक्त की जायेगी।

यह भी पढ़ें : जनपदों में कोरोना की जांच के नियम बदले, नये कलेक्शन सेंटर भी स्थापित

-कोरोना के लिए जनपद में बने पांच नये कलेक्शन सेंटर
-65 वर्ष से अधिक उम्र के सभी तथा अन्य में से पांच फीसद के लिए जाएंगे जांच हेतु नमूने
नवीन समाचार, नैनीताल, 17 मई 2020। जनपदों में कोरोना की जांच के नियम बदल गये हैं, अब 60 वर्ष से अधिक के लोगों को छोड़कर अन्य की उनके जिलों में ही कोरोना जांच होगी।
जनपद के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र गरमपानी, भवाली, पदमपुरी, कालाढुंगी व मोटाहल्दू में भी अब कोरोना के लिये नमूने लिये जा सकेंगे। सीएमओ डा. भारती राणा ने बताया कि डीएम के निर्देशों पर जनपद में पांच सैम्पल कलेक्शन टीमों की तैनाती करते हुए, 5 कलेक्शन संेटर बनाये है। उन्होंने बताया कि बेतालघाट, सुयालबाडी व गरमपानी क्षेत्र मेें आये प्रवासियों की लाइन लिस्टिंग एवं सैम्पल लेने हेतु सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र गरमपानी को कलेक्शन सेन्टर बनाया है। इसी तरह भवाली, भीमताल व रामगढ क्षेत्रों का कलेक्शन सेंटर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र भवाली, पदमपुरी व ओखलकांडा क्षेत्र के प्रवासियों हेतु प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पदमपुरी, कालाढूगी, कोटाबाग व बैलपडाव के प्रवासियों हेतु सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र कालाढूगी तथा मोटाहल्दू, लालकुआं व बिंदुखत्ता क्षेत्र मे आये प्रवासियों के लिये प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र मोटाहल्दू को कलेक्शन सेंटर बनाया गया है। उल्लेखनीय है कि डीएम बंसल ने निर्देश दिये है कि जनपद मे आये सामान्य प्रवासियों में 5 प्रतिशत लोगों की रेंडम आधार पर जबकि 65 वर्ष व उससे अधिक आयु वाले प्रवासियों के शत-प्रतिशत कोरोना जांच हेतु सैम्पल लिये जाएंगे।

बुजुर्गों को छोड़ शेष की अपने जिलों में ही होगी कोरोना जाच
नैनीताल। नैनीताल जनपद में रेलगाड़ियों से आ रहे प्रवासियों में से केवल नैनीताल जनपद के लोगों एवं दूसरे जनपदों के 60 वर्ष या उससे अधिक उम्र के लोगों का ही स्वास्थ्य परीक्षण किया जाएगा। डीएम सविन बंसल ने बताया है कि शासन के दिशा निर्देेशों के तहत अब केवल नैनीताल जिले के यात्रियों का मेडिकल चेकअप ही रेलवे स्टेशन तथा स्टेजिंग एरिया मे किया जायेगा। नई व्यवस्था के अनुसार अन्य जिलों के यात्रियों का चेकअप संबंधित जिलों में ही किया जाएगा। अन्य जनपदों के 60 वर्ष या उससे अधिक आयु के बुर्जुगों का परीक्षण भी जनपद नैनीताल मे ही किया जायेगा तथा उन्हें यहीं क्वारन्टाइन भी यही किया जायेगा।

यह भी पढ़ें : खबरदार ! फेस मास्क न पहनने, खुले में थूकने पर भी दर्ज हो सकता है मुकदमा

नवीन समाचार, नैनीताल, 15 मई 2020। नैनीताल जनपद में अब सार्वजनिक स्थलों अथवा कार्यस्थल पर फेस मास्क न पहनने, सार्वजनिक जगह पर थूकने, सामाजिक दूरी ना बनाने एवं गुटका, तम्बाकू के विक्रय करने पर अर्थदंड के साथ ही पुनरावृत्ति पर पुलिस एक्ट के चालान के साथ ही आपदा अधिनियम के तहत मुकदमा दर्ज करने की कार्रवाई भी की जायेगी। जिलाधिकारी सविन बंसल ने यह जानकारी देते हुए बताया कि सार्वजनिक स्थल पर फेसमास्क पहने बगैर मिले तो पहली बार 200 रुपए जुर्माना भरना होगा, दोबारा मास्क ना लगाये पाये जाने पर 500 रुपये का जुर्माना लगाया जायेगा। इसी तरह सार्वजनिक स्थानों पर थूकने पर भी 200 रुपये अर्थदण्ड तथा द्वितीय बार थूकते पाये जाने पर पुलिस एक्ट की धारा-81 के तहत चालान किया जायेगा। उन्होंने कहा कि सार्वजनिक स्थानोें पर सामाजिक दूरी के निर्देशोें का पालन ना करने वाले व्यापारिक प्रतिष्ठान, दुकान व ठेली आदि पर 500 रुपये सबंधित दुकानदार, प्रतिष्ठान स्वामी पर अर्थदण्ड लगाया जायेगा, द्वितीय बार सामाजिक दूरी अनुपालन ना करने पर 2000 रुपये का अर्थदण्ड, इसी तरह गुटका, तम्बाकू बिक्री करने वालों पर प्रथम बार 1000 रुपये, द्वितीय बार पकडे जाने पर 2000 रुपये का अर्थदण्ड लगाया जायेगा। वहीं पुनरावृत्ति पर आपदा प्रबंधन अधिनियम 2005 की धारा 51 से 60 प्राविधानों के अन्तर्गत नियमानुसार कार्यवाही की जायेगी। अर्थदंड वसूलने एवं दण्डात्मक कार्यवाही करने हेतु अपने-अपने क्षेत्रान्तर्गत पूर्व से विधिमान प्राविधानों एवं प्राधिकृत व्यक्तियों के अतिरिक्त अपने-अपने कार्यक्षेत्र के अन्तर्गत पुलिस अधिकारी, राजस्व अधिकारी, नगर आयुक्त, अधिशासी अधिकारी, उपखण्ड मजिस्टेªट प्राधिकृत होंगे।

यह भी पढ़ें : होम क्वारन्टाइन का पालन न करने वालों को संस्थागत क्वारन्टाइन में भेजा जाएगा

नवीन समाचार, नैनीताल, 14 मई 2020। जनपद में बाहर से बाहर के जनपदों में ट्रेन. बसों व प्राइवेट वाहनों से आने वालोें लोगों को अनिवार्य रूप से क्वारन्टाइन यानी एकांतवास मे रखना होगा। डीएम सविन बंसल ने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों मे वहां के स्कूल अथवा पंचायत भवनों मे इसकी व्यवस्था ग्राम प्रधान करेंगे और संबंधित क्षेत्र के ग्राम पंचायत अधिकारी व पटवारी उनकी सहायता करेंगे। वहीं शहरी क्षेत्रों मे बाहर से आने वाले लोगों को धर्मशाला, बारात घरों, संस्थागत कोरेन्टीन सेंटरोें व निजी पृथक कमरों मे क्वारन्टाइन कराने की जिम्मेदारी अधिशासी अधिकारियोें व सीआरटी टीमों की होगी। क्वारन्टाइन किये गये लोगांे के रहने के भवनों के बाहर क्वारन्टाइन स्टीकर भी लगाये जाएंगे। क्वारन्टाइन प्रोटोकाल का अनुपालन न करने व बाहर घूमते पाये जाने पर संबंधित एसडीएम को सूचना देनी होगी, जो उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज करते हुये उन्हें संस्थागत क्वारन्टाइन कराएंगे।
क्वारन्टाइन में रखे गये लोगों की 14 दिनों तक नियमित मॉनीटरिंग एवं स्वास्थ्य परीक्षण स्वास्थ्य विभाग की आईडीएसपी की टीम करेगी। क्वारन्टाइन किये गये लोगों मे किसी प्रकार के लक्षण दिखते ही उन्हें स्वास्थ्य परीक्षण एवं जांच हेतु चिकित्सालय लाया जायेगा। इसी तरह ग्रामीण क्षेत्रो की नियमित मॉनीटरिंग डीपीआरओ व वीआरटी टीमंे करेंगी जो अपनी रिपोर्ट नियमित मुख्य विकास अधिकारी को प्रस्तुत करेेंगी। ग्रामीण क्षेत्रोें में क्वारन्टाइन हेतु सूक्ष्म व्यय ग्राम निधि से ग्राम प्रधान द्वारा किया जायेगा।

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-मुख्य सचिव उत्पल कुमार सिंह ने बुधवार को मीडिया ब्रीफिंग कर कोविड-19 के संबंध में अपडेटेड स्थिति की दी जानकारी

नवीन समाचार, देहरादून, 6 मई 2020। मुख्य सचिव ने कहा कि सरकार दूसरे राज्यों से उत्तराखण्ड लौटने के इच्छुक प्रवासियों को वापस लाने के लिए प्रतिबद्ध है। लगभग 1 लाख 64 हजार लोगों ने इसके लिए पंजीकरण कराया है। अभी तक 7300 लोगों को दूसरे राज्यों से लाया जा चुका है जबकि 8146 को राज्य के भीतर ही एक जिले से दूसरे जिले में भेजा गया है। जो भी उत्तराखण्ड लौटना चाहते हैं, उन्हें वापस लाया जाएगा। थोड़ा संयम और धैर्य रखने की जरूरत है। तमाम तरह की सावधानियां बरतनी होती है। इसलिए एक साथ इकट्ठा सबको नहीं लाया जा सकता है। स्वास्थ्य परीक्षण, वाहनों की व्यवस्था, रूकने की व्यवस्था आदि बातें देखनी होती हैं। सरकार इस काम में दिन रात लगी है। पूरा काम सुनियोजित तरीके से किया जाना है। हरियाणा से 1500 लोगों को निजी वाहन से आने की अनुमति दी गई है। यहां बसें भी भेजी जाएंगी। उदयपुर व जम्मू से 400-400 लोगों को लाने की व्यवस्था की जा रही है। गुजरात व महाराष्ट्र को सूचना दी गई है कि सूरत, अहमदाबाद व पुणे से लोगों को ट्रेन से लाया जाना है। हमारेल मंत्रालय से बात हो चुकी है। संबंधित राज्यों को भी रेल मंत्रालय से बात करनी है। उत्तराखण्ड के लोगों को ट्रेन से लाने में जो भी व्यय आएगा, उसका वहन उत्तराखण्ड सरकार द्वारा किया जाएगा। केरल के दो शहरों से भी लगभग 1000 लोगों को लाया जाना है।
भारत सरकार द्वारा विदेशों से भारतीय नागरिकों को लाने की व्यवस्था की जा रही है। इनमें उत्तराखण्ड का व्यक्ति होने पर विदेश मंत्रालय द्वारा हमें अवगत कराया जाएगा। इसके लिए हमने एसओपी तैयार कर ली है।

कोरोना की डबलिंग रेट में लगातार हो रहा सुधार
मुख्य सचिव ने कहा कि पिछले दो दिन से प्रदेश में कोई भी कोरोना पॉजिटिव केस नहीं आया है। वर्तमान में कुल पॉजिटिव केस 61 हैं, इनमें से 39 रिकवर हो चुके हैं जबकि 21 एक्टिव केस हैं। इनमें भी सभी की स्थिति सामान्य है। एक महिला जिसकी मृत्यु हुई है, उन्हें काफी क्रिटिकल हालत में एम्स ऋषिकेश में लाया गया था, बाद में जांच में इन्हें कोरोना संक्रमित पाया गया। परंतु उनकी मृत्यु अन्य कारण से हुई है। अभी तक कुल 7784 टेस्ट की रिपोर्ट प्राप्त हुई है। इनमें से 7723 की रिपोर्ट नेगेटिव आई है। प्रदेश में कोरोना मामलों के दोगुने होने की दर में लगातार सुधार हो रहा है। आज के दिन हमाडबलिंग रेट 47 दिन है। इस दृष्टि से हम देश के अग्रणी राज्यों में हैं। यहां के कुल कोराना पॉजिटिव मामलों में 85 प्रतिशत पुरूष हैं जबकि 15 प्रतिशत महिलाएं हैं। इसमें भी अधिकांश युवा हैं। इसलिए हमारे यहां रिकवर होने की अधिक सम्भावना है। देश में भेजे गए सेम्पल के सापेक्ष पॉजिटिव केस 3.86 प्रतिशत है जबकि राज्य में यह 0.78 प्रतिशत है। हमामृत्यु दर भी राष्ट्रीय औसत से लगभग आधी है। हालांकि ये मृत्यु भी प्रत्यक्ष रूप से कोरोना से नहीं हुई है। अभी तक प्रदेश में कोरोना को काफी हद तक नियंत्रित रखा गया है। हमारे यहां कान्टेक्ट ट्रेसिंग भी प्रभावी तौर पर की गई।

401 चिकित्सकों को दी गई नियुक्ति, 647 की और होगी नियुक्ति
मुख्य सचिव ने बताया कि प्रदेश में 426 चिकित्सक ऐसे थे जिनका आयेाग द्वारा वर्ष 2010 से 2015 के बीच चयन किया गया परंतु उन्होंने या तो जॉइन नहीं किया या परिवीक्षा अवधि पूनहीं की। ऐसे चिकित्सकों की सेवाएं समाप्त की गई हैं। अब हम इनकी जगह पर चिकित्सकों की नई भर्ती कर सकते हैं। हाल ही में 401 चिकित्सकों को नियुक्ति दी गई है। 467 पदों का अध्याचन भी चयन आयोग को भेजा जा रहा है। आयोग से चयन प्रक्रिया को जल्द पूरा करने का अनुरोध किया जाएगा। इसके अलावा कैबिनेट द्वारा 180 पदों को पुनर्जीवित किया गया था। इन पदों पर जल्द भर्ती कराई जाएगी।

आम जन से मास्क और सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करने की अपील
मुख्य सचिव ने कहा कि अभी तक जनता ने पूरा सहयोग किया है। लॉकडाउन-3 में भी हमें जिम्मेवाका परिचय देना है। मास्क, सेनेटाईजेशन और सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करें। वर्तमान में दी गई शिथिलता चलती रहेगी। यदि अनुशासन बनाए रखा जाएगा तो और भी शिथिलता पर विचार किया जा सकता है। कोरोना संक्रमित होने पर घबराने की जरूरत नहीं है।

मनरेगा के 7910 कार्य प्रारम्भ, 93 हजार से अधिक श्रमिकों को मिला काम
मुख्य सचिव ने बताया कि प्रदेश में मनरेगा के वर्तमान में 7910 कार्य प्रारम्भ हो गए हैं। इनमें 93 हजार से अधिक लोग काम कर रहे हैं। इनमें एक विशेष बात है कि मनरेगा में 1089 नए श्रमिकों ने पंजीकरण कराया है, इनमें से 850 को कार्य भी दिया गया है। मनरेगा के तहत जल संचय, जल संवर्धन और जल संरक्षण के काम प्राथमिकता से किए जा रहे हैं।

4479 उद्योगों को अनुमति, निर्माण कार्यों की आवश्यकता को देखते हुए खनन शुरू
प्रदेश में औद्योगिक गतिविधियां भी शुरू की गई हैं। 4479 उद्योगों को ऑनलाईन अनुमति दी गई है। इन्होंने काम भी शुरू कर दिया है। इनमें 1 लाख 66 हजार श्रमिक, कार्मिक संलग्न हैं। सड़क, रेल, एयरपोर्ट, भवन निर्माण आदि काम शुरू होने जा रहे हैं। इनकी आवश्यकता को देखते हुए खनन का काम भी शुरू कर दिया गया है। जिलाधिकारियों को इसे प्राथमिकता से देखने को कहा गया है।

1 लाख 98 हजार श्रमिकों को 2-2 हजार रूपए की सहायता
भवन निर्माण से जुड़े श्रमिकों को लॉकडाउन में राहत देने के लिए दो किश्तों में 1-1 हजार, कुल दो-दो हजार रूपए उनके खातों में ट्रांसफर किए गए हैं। लगभग 1 लाख 98 हजार श्रमिक इससे लाभान्वित हुए हैं।

प्रामाणिक जानकारी पर ही विश्वास करें
मुख्य सचिव ने कहा कि सोशल मीडिया में सरकार की तैयारियों के बारे में बहुत सी अफवाहें चलती रहती हैं। लोगों से अनुरोध है कि प्रामाणिक जानकारियों पर ही विश्वास करें। हम पूव्यवस्था कर रहे हैं।

एनटीपीसी और पीएफसी देगी 12 एम्बुलेंस और 10-10 हजार पीपीई किट व मास्क
मुख्यमंत्री राहत कोष और एसडीआरएफ (स्टेट डिजास्टर रिलीफ फंड) में लगभग 60 करोड़ रूपए विभिन्न संस्थाओं, व्यक्तियों द्वारा जमा कराए गए है। इसका प्रयोग कोविड-19 से लड़ाई में किया जा रहा है। इस राशि का एक बड़ा भाग श्रमिकों व बेसहारा लोगों को भोजन आदि उपलब्ध कराने में प्रयोग किया गया है। बहुत से उद्योगों और संस्थाओं ने चिकित्सा उपकरण उपलब्ध कराए हैं। नेशनल थर्मल पावर कारपोरेशन और पावर फाईनेंस कारपोरेशन ने सीएसआर से राज्य को 12 एम्बुलेंस, 10 हजार पीपीई किट और 10 हजार मास्क देने पर सहमति व्यक्त की है।

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नवीन समाचार, नई दिल्ली, 27 अप्रैल 2020। आगामी 3 मई को देश में लॉकडाउन खत्म होगा या जारी रहेगा। यह सवाह पूरे देशवासियों के मन में उमड़-घुमड़ रहा है। सोमवार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की आज मुख्यमंत्रियों के संग हुई बैठक में भी यही बड़ा प्रश्न अन्य सभी प्रश्नों के केंद्र में दिखाई दिया। बैठक में दिल्ली, गुजरात, मध्य प्रदेश, गुजरात जैसे उन करीब 10 राज्यों के मुख्यमंत्रियों ने 3 मई के बाद भी लॉकडाउन बढ़ाने की अपील की, जहां अभी भी कोरोना के अधिक मामले मिल रहे हैं। पीएम ने मीटिंग में कहा कि यह लंबी लड़ाई है, हमको धैर्यपूर्वक लड़ना है। तेलंगाना ने पहले ही 7 मई तक लॉकडाउन बढ़ाने का ऐलान कर रखा है। ऐसे में बैठक में इस बात पर भी सहमति बनती दिखी की लॉकडाउन में अचानक ढील नहीं दी जाए। पीएम मोदी ने बैठक में कहा कि देश में लॉक डाउन का लाभ हुआ है और दूसरे देशों की तुलना में भारत की स्थिति अच्छी है। हालांकि पीएम ने साथ ही कहा कि कोरोना के खिलाफ लड़ाई को हमें धैर्यपूर्वक लड़ना होगा। वहीं सूत्रों के अनुसार 3 मई के बाद लॉकडाउन पर अभी तुरंत फैसला नहीं हुआ लेकिन पीएम मोदी सहित सभी सीएम की आम राय यह बनती रही कि 3 मई के बाद अचानक ढील दिए जाने के हालात नहीं है। लेकिन अब लॉकडाउन का स्वरूप अधिक स्थानीय करने की जरूरत है। वहीं पीएमओ सूत्रों के अनुसार सीएम के साथ मीटिंग करने के बाद अगले दो-तीन दिनों तक आगे की रणनीति को अंतिम रूप दिया जाएगा। इसके तहत 3 मई के बाद लॉकडाउन के स्वरूप की चर्चा होगी और वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के साथ वित्तीय पैकेज पर बात होगी। इसके बाद सप्ताह के अंत में शनिवार या रविवार को पीएम मोदी देश को दोबारा संबोधित कर सकते हैं। कोरोना संकट पर पर यह उनका चौथा देश के नाम संबोधन हो सकता है।
बैठक में टेस्टिंग को कोरोना के खिलाफ लड़ाई में अहम हथियार बताया गया। अमेरिका का लक्ष्य है कि रोज 2.2 करोड़ टेस्ट किए जाएं ताकि हर दो हफ्ते में पूरी जनसंख्या की जांच हो जाए। भारत अभी प्रतिदिन 50 हजार से भी कम टेस्ट कर रहा है। अपर्याप्त टेस्टिंग से वायरस तेजी से फैलता है। अगर हम सिर्फ लक्षणों वाले मरीजों को टेस्ट करेंगे तो वायरस को नहीं रोक पाएंगे। वैसे भी आंकड़ेां के मुताबिक, भारत में 69 फीसदी मरीज ऐसे हैं जिनमें कोई लक्षण नहीं दिखे। यानी हमें स्वस्थ लोगों के भी टेस्ट करने की जरूरत है क्योंकि वे ‘सुपर स्प्रेडर्स’ हो सकते हैं।

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-देश में औसतन तो उत्तराखंड में 26.6 दिनों में कोरोना संक्रमित हो रहे दोगुने
-कोरोना वारियर्स का माला पहनाकर, शॉल ओढ़ाकर या बुके देकर सम्मान करना पूर्णतः प्रतिबंधित, दूर से कर सकते हैं पुष्प वर्षा
नवीन समाचार, देहरादून, 22 अप्रैल 2020। मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने बुधवार को मुख्यमंत्री आवास में कोविड-19 पर नियंत्रण एवं विभिन्न व्यवस्थाओं के संबंध में उच्च अधिकारियों के साथ बैठक की। इस मौके पर उन्होंने कहा कि कोविड-19 के मामले पूरे भारत में जहां औसतन 7.5 दिनों में दोगुने हो रहे हैं, वहीं उत्तराखंड में 26.6 दिन में दोगुना हो रहे हैं। इस दृष्टि से उत्तराखंड कोरोना संक्रमण रोकने में देश में तीसरे स्थान पर है और कहीं बेहतर स्थिति में है। उन्होंने कहा कि कोविड-19 पर प्रभावी नियंत्रण के लिए कोरोना वारियर्स का माला पहनाकर, शॉल ओढ़ाकर या बुके देकर सम्मान किया जा रहा है, इसे पूर्णतः प्रतिबंधित कराया जाए। कोरोना वारियर्स का सम्मान दूर से पुष्प वर्षा से किया जा सकता है। इसके अलावा लोगों को जो सामान वितरित किया जा रहा है वितरित करने वाले लोगों के साथ फोटो ना खींचें एवं सामाजिक दूरी का पूरा पालन हो। साथ ही छोटे व्यवसायियों एवं स्थानीय लोगों की आय का सृजन करने के लिए कार्य योजना बनाई जाए। कृषि कार्यों के लिए भारत सरकार की गाइडलाइन के अनुसार अनुमति दी जाए। स्मार्ट सिटी के कार्य भी कम मैन पावर के साथ शुरू किए जा सकते हैं।

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-मुख्यमंत्री ने की विद्युत बिलों में राहत की घोषणा पर फिक्स्ड दरों की जगह उपयोग के आधार पर बिल जारी करने की मांग नहीं मानी
नवीन समाचार, देहरादून, 14 अप्रैल 2020। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा देश में तीन मई तक लॉक डाउन के दूसरे चरण की घोषणा करने के साथ ही उत्तराखंड में किसानों, उद्योगों व वाणिज्यिक प्रतिष्ठानों की मांग और लॉकडाऊन की कठिनाईयों को देखते हुए बिजली उपभोक्ताओं को राहत देने के लिए मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत के कई राहतों की घोषणा की है। इससे 26 लाख से अधिक विद्युत उपभोक्ताओं को लाभ मिलेगा। अलबत्ता, राज्य में कई पर्यटन सहित सेक्टरों के लोगों के द्वारा फिक्सड दरों की जगह उपयोग के आधार पर विद्युत बिल दिये जाने की मांग की जा रही थी। इस पर अभी सरकार की ओर से कुछ नहीं कहा गया है। गौरतलब है कि इस दौरान होटलों-उद्योगों आदि में विद्युत का उपयोग कम हुआ है, इसलिए यदि उपयोग के आधार पर बिल आते तो इन उपभोक्ताओं को लाभ मिलता।
मुख्यमंत्री द्वारा मंगलवार को दिये गए निर्देशों के अनुसार सभी श्रेणियों के जो बिजली उपभोक्ता देय तिथि तक बिल का ऑनलाइन भुगतान करेंगे, उन्हें वर्तमान बिल की राशि में 1 प्रतिशत की छूट दी जाएगी। जिसमें एचटी उपभोक्ताओं को अधिकतम एक लाख तथा एलटी उपभोक्ताओं को अधिकतम 10 हजार रूपए की छूट प्रदान की जाएगी। इस पर आने वाले प्रतिमाह लगभग दो करोड़ के व्यय का वहन यूपीसीएल द्वारा किया जाएगा। इससे 25 लाख उपभोक्ताओं को लाभ होगा। इसके अलावा विद्युत उपभोक्ताओं के व्यापक हित में मुख्यमंत्री ने प्रदेश में 30 जून तक किसी भी श्रेणी के उपभोक्ता का विद्युत संयोजन विद्युत देयों के भुगतान नहीं किए जाने की दशा में काटे नहीं जाने के भी निर्देश दिए हैं।
इसके अलावा 30 जून तक बिल का भुगतान करने वाले निजी नलकूप श्रेणी के उपभोक्ताओं को विलम्ब भुगतान अधिभार में छूट दी जाएगी। इससे 20 हजार किसानों को लाभ होगा। इसमें आने वाले 3 करोङ 64 लाख रूपये के वित्तीय भार का वहन राज्य सरकार द्वारा किया जाएगा। इसके अलावा औद्योगिक और वाणिज्यिक श्रेणी के उपभोक्ताओं से मार्च 2020 से मई 2020 तक की बिजली खपत के सापेक्ष फिक्सड-डिमान्ड चार्ज की वसूली स्थगित रहेगी और विलम्ब भुगतान अधिभार में भी छूट दी जाएगी। इससे 2 लाख 70 हजार उपभोक्ताओं को लाभ होगा। इस पर आने वाले लगभग 8 करोड़ रूपए के वित्तीय भार का वहन राज्य सरकार द्वारा किया जाएगा।

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नवीन समाचार, देहरादून, 9 अप्रैल 2020। मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत के निर्देश पर उत्तराखंड सरकार ने निर्णय लिया है कि कोविड-19 यानी कोरोना विषाणु के संक्रमण की रोकथाम और बचाव कार्यों में लगे सभी संविदा, आउटसोर्स में कार्यरत एवं सरकारी अधिकारियों और कर्मचारियों सहित सभी कोरोना वारियर्स-को संक्रमण होने पर उनके उपचार का व्यय राज्य सरकार द्वारा वहन किया जाएगा। साथ ही उनके जीवन की क्षति होने पर उनके आश्रित को मुख्यमंत्री राहत कोष से सीधे 10 लाख रूपए की राहत-सम्मान राशि दी जाएगी।
इसके अलावा एक अन्य निर्णय में मुख्यमंत्री रावत के निर्देश पर कोरोना विषाणु की रोकथाम हेतु चिह्नित किए गए राजकीय मेडिकल कालेजों को सुदृढ़ किए जाने और उनकी क्षमता में वृद्धि किए जाने के उद्देश्य से मुख्यमंत्री राहत कोष से चिकित्सा शिक्षा विभाग को 10 करोङ रुपए अवमुक्त किए गए हैं।

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नवीन समाचार, देहरादून, 8 अप्रैल 2020। बुधवार को राज्य मंत्रिमंडल की बैठक मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत की अध्यक्षता में हुई। शासकीय प्रवक्ता मदन कौशिक ने कोरोना विषाणु कोविड-19 के सम्बन्ध में मंत्रिमंडल के निर्णय के बारे में जानकारी दी। बताया कि राज्य में कोरोना संक्रमित जामातियों की संख्या बढने के कारण कोरोना विषाणु कोविड-19 पर नियंत्रण के लिए 14 अप्रैल के बाद लॉकडाउन बढाने की संस्तुति केंद्र सरकार को भेजी जाएगी। साथ ही मंत्रिमंडल ने रोजाना आवश्यक सामग्री के खरीद हेतु दी गई समय सीमा को कम करने का अधिकार मुख्यमंत्री को सौंप दिया है।
इसके अलावा भारत सरकार की गाईडलाईन के अनुसार कोविड-19 फंड के लिए मुख्यमंत्री, मंत्री और समस्त विधायकों के वेतन में 30 प्रतिशत की कटौती की जाएगी। साथ ही आगामी दो वर्षो तक विधायक निधि से एक-एक करोड रुपये की कटौती भी कोविड-19 फंड के लिए की जाएगी। साथ ही राज्य सरकार ने बैठक में खाद्यान्न सुरक्षा योजना के अन्तर्गत सभी नागरिकों को पर्याप्त राशन उपलब्ध कराने का निर्णय भी लिया गया। इसके तहत अन्त्योदय योजना के अन्तर्गत 35 किग्रा राशन गेहूँ और चावल के रूप में 3 माह का राशन उपलब्ध रहेगा। साथ ही खाद्यान सुरक्षा योजना सफेद कार्ड धारकों को प्रति यूनिट 5 किग्रा चावल एवं दाल निःशुल्क उपलब्ध करायी जाएगी। इन दोनों कार्डों से अलग 40 लाख यूनिट वाले 10 लाख राशन कार्ड धारकों को 7.5 किग्रा राशन की मात्रा को दोगुना कर 15 किग्रा राशन कार्ड धारकों को अप्रैल, मई, और जून तीन माह के लिए वितरण किया जाएगा। जिसके पास कोई भी राशन कार्ड नही होगा उन्हे राशन किट दिया जाएगा। खाद्यान्न वितरण स्वयं सेवी संगठन प्रशासन के माध्यम से कराएंगे। बैठक में कोविड-19 से विकास हेतु ढांचागत सुविधाओं के लिए उत्तराखंड चिकित्सा शिक्षा विभाग में तकनीशियन संवर्ग के 347 पदों पर नियुक्ति की जाएगी।

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नवीन समाचार, देहरादून, 1 अप्रैल 2020। राशन कार्ड धारकों को अप्रैल से जून 2020 तक सार्वजनिक वितरण प्रणाली की केंद्र सरकार की राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा योजना की अन्त्योदय अन्य योजना एवं प्राथमिक परिवारों हेतु प्रतिमाह प्रतिव्यक्ति अंतर्गत नियमित आवंटन के अतिरिक्त पांच किलो चावल निःशुल्क मिलेगा। जिन जिलों में सार्वजनिक वितरण प्रणाली की विभिन्न योजनाओं में अप्रैल माह का नियमित आवंटन हो चुका है वहां भी अप्रैल माह में ही यह चावल निःशुल्क वितरित किया जाएगा। इस संबंध में खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग ने प्रदेश के सभी जिला पूर्ति अधिकारियों को बुधवार को आदेश जारी कर दिये हैं।

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नवीन समाचार, देहरादून, 29 मार्च 2020। केंद्र सरकार के दिशानिर्देशों के बाद उत्तराखंड में 31 मार्च को अंतर जनपदीय परिवहन सेवा खुली रहने का आदेश वापस ले लिया गया है। मुख्यमंत्री ने रविवार अपराह्न आठ बजे अपने फेसबुक पेज पर नई पोस्ट लेकर इसका खुलासा किया। देखें मुख्यमंत्री का वीडियो संदेश:

मुख्यमंत्री ने लिखा है: ‘केंद्र सरकार के दिशानिर्देशों के बाद उत्तराखंड में 31 मार्च को अंतर जनपदीय परिवहन सेवा खुली रहने का आदेश वापस लिया जाता है। आप लोग जहां हैं, वहीं पर सुरक्षित रहें। आपके लिए आवश्यक वस्तुओं की उचित व्यवस्था है। राज्य में जरूरी वस्तुओं की दुकानें खुलने का समय (सुबह 7 बजे से दोपहर 1 बजे) यथावत रखा गया है। आपको हुई असुविधा के लिए क्षमा चाहता हूं।’ उल्लेखनीय है कि इससे पहले राज्य सरकार ने आज सुबह ही 31 मार्च को लॉक डाउन से छूट के लिए कुछ शर्तों युक्त नये दिशा-निर्देश जारी किये थे, लेकिन अब उनका कोई अर्थ नहीं रह गया है। लगता है कि केंद्र सरकार उत्तराखंड सरकार की इस दरियादिली पर संतुष्ट नहीं हो पाई।

पूर्व समाचार : 31 मार्च को मिलेगी लॉक डाउन से बड़ी छूट

नवीन समाचार, देहरादून, 28 मार्च 2020। प्रदेश के भीतर जो लोग एक जिले से दूसरे जिले में जाना चाहते हैं, वे लोग 31 मार्च को सुबह 7 बजे से सांय 8 बजे तक जा सकेंगे। मुख्यमंत्री श्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने यह जानकारी देते हुए बताया कि केवल मंगलवार 31 मार्च के लिए ही यह अनुमति होगी। एक दिन का यह विंडो इसलिए दिया जा रहा है क्योंकि जगह-जगह से ऐसी बातें आ रही थी कि बहुत से लोग अपने काम से आए हुए थे और लाॅकडाऊन के कारण अपने घर से बाहर फंसे हैं। बसों व टैक्सियों को सेनेटाइज करवाया जाना होगा। इसमें सोशल डिस्टेंसिंग का भी पालन किया जाना होगा।

मुख्यमंत्री ने कहा कि सुबह 7 से दोपहर 1 बजे तक आवश्यक वस्तुओं की दुकानों को खोलने की व्यवस्था का अच्छा रेस्पोंस मिला है। इससे लोगों में घबराहट खत्म हुई है, भीङ भी नही हो रही। लोग भी अब समझने लगे हैं। इसलिए इसी व्यवस्था को जारी रखा जाएगा। मुख्यमंत्री ने बताया कि दिल्ली में जो उत्तराखंडवासी फंस गए हैं उनके लिए उत्तराखंड सदन ओपन कर दिया गया है। वहां उनके भोजन, मेडिकल आदि व्यवस्था है। इसी प्रकार मुम्बई में भी उत्तराखंड भवन को लाॅकडाऊन में फंसे उत्तराखंड के लोगों के लिए ओपन किया गया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि हम दो तीन दिन में 500 चिकित्सकों की भर्ती करने जा रहे हैं। इससे हमारे यहाँ चिकित्सक पर्याप्त संख्या में हो जाएंगे। मुख्यमंत्री ने बताया कि पेंशनरों के लिए जीवन प्रमाण पत्र और वाहन चालकों के लिए ड्राइविंग लाइसेंस नवीनीकरण के लिए एक माह की छूट दी गई है।

मुख्यमंत्री श्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने अपने पार्टी कार्यकर्ताओं से भी कोरोना वायरस  के संक्रमण से बचाव हेतु सतर्क रहने और संयम बरतने का अनुरोध किया है। अपने संदेश में मुख्यमंत्री ने  कहा कि अगर किसी को खांसी, जुकाम, बुखार आदि इस प्रकार की कोई तकलीफ है तो इसके लिए डॉक्टर से संपर्क करें।  उन्होंने कहा कि देश इस वक्त कोरोना महामारी से गुजर रहा है। प्रधानमंत्री जी स्वयं एक सप्ताह में दो बार राष्ट्र को संबोधित कर चुके हैं। पूरी दुनिया इस वक्त इस महामारी से ग्रस्त है। भारत में अभी इस की शुरुआत हुई है लेकिन भारत जैसे देश में यह समस्या कितनी गंभीर हो सकती है आप इसका अंदाजा इस बात से लगा सकते हैं कि अमेरिका और इटली जैसे देश तमाम तरह की स्वास्थ्य सुविधाओं के होते हुए भी आज किस हालात में हैं। हमारे पास केवल और केवल यही एक समाधान है कि हम सामाजिक दूरी बनाकर रखें। हमको दूरी बनाकर रखनी है। मंदिरों मस्जिदों गुरुद्वारों गिरिजाघरों में सामूहिक पूजा अर्चना को प्रतिबंधित किया गया है। वहां पर केवल पुजारी, मौलवी एवं पादरी ही पूजा पाठ कर सकते है। मेरा आपसे अनुरोध है कि हम सोशल डिस्टेंस बनाकर रखें। इसका स्वयं भी पालन करें और औरों को भी इसका पालन करने हेतु जागरूक करें। उन्होंने अनुरोध किया कि सोशल डिस्टेंस का पालन करें। यदि कोई बाहर से आया है तो हम उससे सामाजिक दूरी बनाते हुए उसकी सूचना शासन को दें। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य एवं पुलिस विभाग के लोग रात दिन अपने जीवन को खतरे में डालते हुए अपने दायित्वों का निर्वहन कर रहे हैं। हमें उनके भी चिंता करनी है। उन्होंने पार्टी के पदाधिकारियों से कहा कि हमारे पास 11000 से अधिक बूथ हैं। बूथ अध्यक्ष एवं सभी कार्यकर्ता मोहल्ले में घूम घूम कर यह देखें कि कोई गरीब भूखा ना सोए। यह हमारी सबसे बड़ी चिंता है। प्रशासन के साथ तालमेल करके उनके घर राशन पहुंचाने का कार्य में किया जाए। अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद का बहुत बड़ा तंत्र है, ऐसी तमाम सामाजिक संस्थाएं इस कार्य में सहयोग करके प्रशासन की सहायता करने में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएं।

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नवीन समाचार, देहरादून, 27 मार्च 2020। कोरोना वायरस (ब्व्टप्क्-19) की प्रभावी रोकथाम, नियंत्रण एवं अनुश्रवण हेतु राज्य के कैबिनेट एवं राज्यमंत्रियों को राज्य के जनपदों का प्रभारी नियुक्त किया गया है। इस क्रम में कैबिनेट मंत्री सतपाल महाराज को हरिद्वार, सुबोध उनियाल को टिहरी व उत्तरकाशी, डॉ. हरक सिंह रावत को पौड़ी, अरविंद पांडेय को चम्पावत व पिथौरागढ़, यशपाल आर्य को अल्मोड़ा व नैनीताल एवं मदन कौशिक को देहरादून व ऊधमसिंह नगर, राज्यमंत्री डॉ. धनसिंह रावत को रुद्रप्रयाग व चमोली एवं रेखा आर्या को बागेश्वर का प्रभारी नियुक्त किया गया है।

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-सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय भारत सरकार के पत्र सूचना ब्यूरो ने विभिन्न विभागों की जनोपयोगी व आकर्षक योजनाओं की दी जानकारी

 

ग्रामीण क्षेत्रों में सूचना के बेहतर प्रचार-प्रसार हेतु मीडिया कार्यशाला-वार्तालाप में पत्रकारों को योजनाओं की जानकारी देते अधिकारी।

नवीन समाचार, नैनीताल, 14 फरवरी 2020। भारत सरकार की वित्तीय समावेशन के अंतर्गत सुरक्षा बीमा योजना में मात्र 12 रुपए प्रति वर्ष में दो लाख रुपए का बीमा मिलता है। अटल पेंशन योजना से मात्र 42 रुपए में एक हजार रुपए पेंशन मिलती है। एबीपीएस यानी आधार बेस्ड पेमेंट सिस्टम के तहत कोई व्यक्ति दूसरे शहर में जेब कट जाने जैसी स्थितियों में एटीएम एवं अपने खाते वाला बैंक न होने पर भी किसी भी बैंक अथवा बैंक मित्र से मात्र अपना आधार नंबर बताकर ढाई हजार रुपए नगद प्राप्त कर सकता है। हर किसान को किसान योजना के तीन वर्ष में 6000 रुपए की किसान सम्मान निधि प्राप्त हो सकती है। अटल आयुष्मान योजना से पांच लाख रुपए तक की निःशुल्क स्वास्थ्य सुविधाएं मिलती हैं। पहली बार गर्भधारण करने पर महिलाओं को 6400 रुपए, मातृ वंदना योजना में 45 हजार रुपए तथा बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ योजना के तहत बच्चियों के पैदा होने पर शादी होने तक 62 हजार रुपए, 10वीं-12वीं से आगे पढ़ने के लिए पूरी फीस मिलती है।
केंद्र एवं राज्य सरकार की ऐसी ही और भी कई योजनाएं हैं, जिनका लाभ लोग जानकारी के अभाव में नहीं ले पाते हैं। किंतु इधर मुख्यालय में पहली बार सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय भारत सरकार के पत्र सूचना ब्यूरो ने पत्रकारों के साथ विभिन्न विभागों के अधिकारियों का ‘ग्रामीण क्षेत्रों में सूचना के बेहतर प्रचार-प्रसार हेतु मीडिया कार्यशाला-वार्तालाप’ आयोजित कराकर विभागीय जनोपयोगी व आकर्षक योजनाओं की जानकारी दी। नगर पालिका सभागार में आयोजित कार्यशाला में पत्र सूचना ब्यूरो के अपर महानिदेशक एनके कौशल ने पत्रकारों को रोचक खबरों के पीछे भागने तथा ‘न्यूज के साथ व्यूज’ परोसने की जगह जनता को उनके लिए उपयोगी योजनाओं की जानकारी पहुंचाने का उनका मूल कर्तव्य याद दिलाया। इस मौके पर भीमताल विकास खंड की सीडीपीओ कमला कोरंगा, जिला लीड बैंक मैनेजर एसएस जंगपांगी, राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन के जिला परियोजना प्रबंधक मदन मेहरा आदि ने अपने विभागों की जानकारियां दीं। इस मौके पर पीआईबी के भूपेंद्र नेगी, मनोज साह, रोहित त्रिपाठी, श्रमिष्ठा बिष्ट, दीपा जोशी, शोभा चारक, भूपेंद्र जड़ौत व गोपेश बिष्ट सहित अन्य विभागीय लोग मौजूद रहे।

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मुख्यमंत्री श्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत की पहल पर आयोजित मंथन में मंत्रियों और विधायकों ने किया गहन विचार-विमर्श, मंत्रियों ने तीन वर्ष की उपलब्धियों के साथ ही भावी कार्ययोजना रखी
विधायकों ने अपने क्षेत्र की आवश्यकताओं से अवगत कराने के साथ दिए सुझाव
नवीन समाचार, देहरादून , 13 फरवरी 2020। गुरूवार को मुख्यमंत्री आवास में मंथन कार्यक्रम आयोजित किया गया। मुख्यमंत्री श्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत की पहल पर आयोजित मंथन में मंत्रियों और विधायकों ने गहन विचार विमर्श किया। मंत्रियों ने अपने विभागों की तीन वर्ष की उपलब्धियों के बारे में बताते हुए साथ ही भावी कार्ययोजना भी विधायकों के समक्ष रखीं। विधायकों ने अपने क्षेत्र की आवश्यकताओं से अवगत कराने के साथ ही सुझाव भी दिए।  
सीएम आवास स्थित सभागार में आयोजित मंथन कार्यक्रम को सम्बोधित करते हुए मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने प्रदेश सरकार की तीन वर्ष की अवधि में किये गये कार्यों का उल्लेख करते हुए विकास की भावी रणनीति पर चर्चा की। उन्होंने कहा कि मंथन कार्यक्रम की पूर्व संध्या पर मंत्रिगणों एवं विधायक गणों से हुए विचार विमर्ष में राज्य के समग्र विकास की दिशा तय करने को सम्बन्धित महत्वपूर्ण सुझाव प्राप्त हुए हैं। इस मंथन से प्राप्त होने वाला अमृत, प्रदेश को नई दिशा देने में मददगार होगा। 
मुख्यमंत्री ने कहा इन तीन वर्षों में हम क्या कर पाये इसका आकलन करने को मिला है। तीन वर्ष की अवधि में राज्य हित में की गई 57 प्रतिशत घोषणाएं पूर्ण की जा चुकी हैं। अन्य घोषणाओं पर कार्यवाही गतिमान है।  सीएम घोषणाओं का शत प्रतिशत अनुपालन सुनिश्चित करने के निर्देश अधिकारियों को दिए गए हैं। हम घोषणा पत्र के अनुपालन की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। घोषणा पत्र के इतर भी कई कार्य जनहित में किये जा रहे हैं। 
मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारी सरकार के तीन वर्ष पूर्ण होने के अवसर हमने तीन कार्यक्रमों के आयोजन का लक्ष्य रखा है। इसमें रिवर्स पलायन की दिशा में पहल करने वाले युवाओं के लिए ‘आवा अपणा घर आवा’ के सन्देश का आधार तैयार करने वालो का सम्मेलन आयोजित किया जायेगा। इसके अतिरिक्त रामनगर मे एडवेंचर समिट का आयोजन किया जायेगा। टिहरी झील को देश व दुनिया में पहचान दिलाने तथा एडवेंचर टूरिज्म का प्रमुख केन्द्र बनाने के लिये टिहरी लेक महोत्सव को बड़ी भव्यता के साथ आयोजित किया जायेगा। 
मुख्यमंत्री ने कहा कि उधमसिंह नगर के बोर जलाशय, पिथौरागढ़ के मोस्टमानु में टयूलिप गार्डन के साथ ही विभिन्न स्थलों पर पर्यटन गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिये धनराषि उपलब्ध करायी गयी है।
मुख्यमंत्री श्री त्रिवेन्द्र ने कहा कि प्रदेश की आर्थिक दशा में सुधार के लिये भी प्रभावी कदम उठाये गये हैं। 15वें वित्त आयोग ने राज्य को 14वें वित्त आयोग के स्तर पर हुए नुकसान की भरपाई करते हुए पांच हजार करोड़ रूपए सालाना धनराशि की संस्तुति की है। इसमें राज्य को आगामी वर्षों में 30 हजार करोड़ का लाभ होगा। आपदा मद में राज्य को अब 200 करोड़ रूपए के स्थान पर 1041 करोड रूपए़ की धनराशि उपलब्ध होगी। राज्य को केन्द्रीय करों की मद से दी जाने वाली धनराशि में भी बढ़ोतरी की गई है। यही नहीं उत्तर प्रदेश सरकार से वर्षों से लम्बित पेंशन की धनराशि राज्य को दिये जाने का रास्ता साफ हो गया। 
मंथन कार्यक्रम में मंत्रिगणों ने तीन वर्ष के कार्यकाल व भविष्य की कार्ययोजना के आधार पर प्रस्तुतिकरण दिया। बताया गया कि सभी सेक्टर्स में उत्कृष्ट प्रदर्शन हेतु नीति आयोग द्वारा जारी ‘‘भारतीय नवाचार सूचकांक 2019’’ में पूर्वोत्तर एवं पहाड़ी राज्यों की श्रेणी में उत्तराखण्ड राज्य को सर्वश्रेष्ठ तीन राज्यों में शामिल किया गया। प्रदेश में प्रति व्यक्ति आय वर्ष 2018-19 में 1,98,738 रूपए रही जोकि देश की औसत प्रति व्यक्ति आय से अधिक है। 
अटल आयुष्मान योजना के अन्तर्गत प्रत्येक परिवार को पाँच लाख का मुफ्त इलाज सरकारी एवं गैर सरकारी चिकित्सालयों में अनुमन्य करने वाले देश का प्रथम राज्य है। वर्तमान तक इस योजना के अन्तर्गत 37 लाख 98 हजार लाभार्थियों को गोल्डन कार्ड उपलब्ध कराए जा चुके हैं।
गत तीन वर्षों में लोक निर्माण विभाग द्वारा माह जनवरी तक 2027.34 किमी. मार्गों का नव निर्माण, 2374.20 किमी. लम्बाई में पुनः निर्माण व 205 न. सेतुओं का निर्माण करते हुए 353 ग्रामां को संयोजकता प्रदान की गयी। जल जीवन मिशन के अन्तर्गत प्रदेश में 15 लाख से अधिक परिवारों को हर घर को नल से जल/कनेक्शन की योजना प्रारम्भ की गई है। 22 अर्द्धनगरीय क्षेत्रों में पेयजल सुलभ कराने हेतु रू0 975 करोड़ स्वीकृत। 
प्रधानमंत्री सहज बिजली हर घर योजना ‘‘सौभाग्य’’ के अन्तर्गत प्रदेश के सभी इच्छुक अविद्युतीकृत घरों/परिवारों के शत-प्रतिशत विद्युतीकरण किया गया है। राज्य सरकार द्वारा पाईन निडिल एवं अन्य बायोमास आधारित ऊर्जा उत्पादन नीति-2018 जारी की गई है। जिसके अर्न्तगत 1060 किलोवाट सम्मिलित क्षमता की 36 योजनाऐं तथा 2000 मी0टन क्षमता की दो ब्रिकेटिंग प्लाण्ट योजना निजी विकासकर्ताओं को स्थापना हेतु आवंटित की जा चुकी हैं। इस योजना से वनाग्नि को रोकने के साथ ही स्वरोजगार विकसित होंगे।
सौर ऊर्जा नीति के अन्तर्गत पर्वतीय श्रेणी में स्थानीय निवासियों के माध्यम से 203 मेगावाट क्षमता की सौर ऊर्जा परियोजना की स्थापना हेतु कुल 283 फर्मो को परियोजनाऐं आवंटित की गयी है। हरिपुर एवं तुमरिया जलाशय पर 40 मेगावाट क्षमता के सोलर पावर प्रोजेक्ट की स्थापना जिससे 6.8 करोड़ यूनिट बिजली प्रतिवर्ष उत्पादित होगी। 
प्रदेश में आयोजित निवेशक सम्मेलन में एक लाख करोड़ के एम.ओ.यू. हस्ताक्षरित हुए जिसमें से प्रथम चरण में 19000 करोड़ के निवेश की ग्राउंडिंग हो चुकी है। वर्तमान में 450 प्रोजेक्टस गतिमान हैं, इससे लगभग 56 हजार लोगों को रोजगार मिलेगा। सिंगल विन्डो क्लीयरेंस सिस्टम के अन्तर्गत वर्तमान में लगभग 18 हजार निवेशकों द्वारा पंजीकरण कराया गया है। 
देहरादून शहर में स्मार्ट सुविधाओं के विकास हेतु रू0 1400 करोड़ की धनराशि वाह्य सहायतित परियोजना के अन्तर्गत स्वीकृत किए गए हैं। 
मार्च 2019 में केन्द्र सरकार द्वारा उत्तराखण्ड को खाद्यान्न उत्पादन श्रेणी-2 में उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए कृषि कर्मण प्रशंसा पुरस्कार दिया गया। जैविक कृषि में उत्कृष्ट कार्य हेतु प्रदेश को जैविक इंडिया अवार्ड 2018 में राष्ट्रीय पुरस्कार प्राप्त हुआ। प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना के अन्तर्गत 3,40,479 कृषकों को आर्थिक सहायता। किसानों के लिए ब्याज रहित रू0 1 लाख तक का ऋण दिया जा रहा है। टिहरी झील को महत्वपूर्ण पर्यटक स्थल के रूप में विकसित किया जा चुका है जिसमें पर्यटकों की संख्या में उत्तरोत्तर अभिवृद्धि हो रही है। टिहरी झील में पर्यटक सुविधाओं के विकास हेतु रू0 1200 करोड़ की धनराशि स्वीकृत की जा चुकी है। 
चिकित्सा विभाग में चिकित्सकों के कुल 2735 सृजित पदों के सापेक्ष 2045 चिकित्सकों की तैनाती की जा चुकी है। राज्य के 35 प्रमुख चिकित्सालयों पर मरीजों की जांच एवं डाइग्नोस्टिक सुविधा हेतु टेली रेडियोलॉजी सेवा प्रारम्भ की गई है। प्रदेश के तीन सरकारी मेडिकल कॉलेजों यथा दून, हल्द्वानी एवं श्रीनगर समेत पिथौरागढ़, पौड़ी, उत्तरकाशी एवं टिहरी जिला अस्पतालों में भी आई.सी.यू. की सुविधा की गई है।
प्रशासनिक सुचिता एवं कार्य संस्कृति विकास हेतु सी.एम. मानीटरिंग डैशबोर्ड, ‘उत्कर्ष’, जन समस्याओं के त्वरित समाधान हेतु सी.एम. हेल्पलाईन 1905 एवं सेवा का अधिकार आदि कार्य मिशन मोड में संचालित किए जा रहे हैं। 
विद्यालयी शिक्षा विभाग के अन्तर्गत समस्त राजकीय विद्यालयों में एन.सी.ई.आर.टी. पाठ्यक्रम लागू। विद्यालयी शिक्षा विभाग के अन्तर्गत 500 राजकीय विद्यालयों में वर्चुअल क्लासेस का संचालन किया जा रहा है एवं 700 विद्यालयों में वर्चुअल क्लासेस संचालन हेतु कार्य गतिमान है। उच्च शिक्षा विभाग के अन्तर्गत बी.एच.ई.एल. रानीपुर, जनपद हरिद्वार एवं किच्छा जनपद उद्यमसिंहनगर में मॉडल कॉलेज स्वीकृत किए गए हैं।
नवीनतम तकनीक आधारित ग्रीन स्टेट डेटा सेन्टर एवं ड्रोन एप्लीकेशन  रिसर्च केन्द्र की स्थापना की गई है। ई-डिस्ट्रिक्ट परियोजना के अन्तर्गत 82 सेवायें प्रदान की जा रही हैं। 
सभी 670 न्याय पंचायतों को ग्रोथ सेन्टर बनाने की योजना लागू। विभिन्न विभागों के अन्तर्गत वर्तमान में 83 ग्रोथ सेन्टर स्वीकृत किए गए हैं। इनमें से  75 ग्रोथ सेन्टर हेतु धनराशि स्वीकृत की जा चुकी है।  
राज्य में 27 हेलीपोर्ट विकसित किए जा चुके हैं। क्षेत्रीय संपर्क योजना के अन्तर्गत देहरादून (सहस्रधारा) को पंतनगर, पिथौरागढ़, चिन्यालीसौड़ एवं गौचर से जोड़ा जा चुका है। जौलीग्रान्ट एयरपोर्ट को अंतरार्ष्ट्रीय स्तर का बनाया जा रहा है। 
लम्बे समय से लम्बित जमरानी बहुउद्देशीय परियोजना की पर्यावरण स्वीकृति उपरान्त धनराशि भी स्वीकृत की गई है। देहरादून शहर एवं उसके उपनगरीय क्षेत्रों की वर्ष 2053 तक अनुमानित आबादी हेतु पेयजल सुनिश्चितता हेतु रू0 1290 करोड़ की सौंग बांध पेयजल परियोजना की कार्यवाही गतिमान है।  
महिला स्वयं सहायता समूहों को बिना ब्याज के 05 लाख रूपए तक का ऋण का प्रावधान किया गया है। मुख्यमंत्री आंचल अमृत योजना के अन्तर्गत बीस हजार आंगनबाड़ी केन्द्रों के माध्यम से ढाई लाख बच्चों को निःशुल्क दूध की व्यवस्था की गई है। 
13 डिस्ट्रिक्ट-13 न्यू पर्यटक डेस्टिनेशन चिन्हित कर पर्यटक स्थल विकसित किए जा रहे हैं। आई.डी.पी.एल. ऋषिकेश में वेलनेस सिटी एवं कन्वेंशन सेंटर बनाया जा रहा है। प्रदेश के मूल/स्थायी निवासियों हेतु होम स्टे योजना प्रारम्भ की गई है। कद््दूखाल-सुरकण्डा देवी रोपवे निर्माण कार्य गतिमान है। ठुलीगाड़ से पूर्णागिरी देवी, रोपवे निर्माण कार्य प्रारम्भ।
जनसहभागिता से कोसी एवं रिस्पना नदियों का पुनर्जीवन कार्य किया जा रहा है। प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) में 16 हजार से अधिक आवास अनुमन्य। 12535 को आवास स्वीकृत किए गए हैं। समेकित सहकारिता विकास निधि हेतु रू0 3340 करोड़ की स्वीकृति मिली है।
द्वितीय विश्वयुद्ध के पूर्व सैनिकों/सैनिक विधवाओं की पेंशन चार हजार से बढ़ाकर आठ हजार प्रतिमाह की गयी है। आंगनबाड़ी कार्यकत्री का मानदेय रू. 6000 से बढ़ाकर रू. 7500, आंगनबाड़ी सहायिका का मानदेय रू. 3000 से बढ़ाकर रू. 3750, मिनी आंगनबाड़ी कार्यकत्री का मानदेय रू. 3500 से बढ़ाकर रू. 4750 किया गया एवं होमगार्डस का मानदेय रू. 13950 से बढ़ाकर रू. 18600 प्रतिमाह किया गया। 
चारधाम यात्रा की महत्ता के दृष्टिगत 889 किमी लम्बी ऑल वेदर रोड़ का रू0 11700 करोड़ का कार्य युद्धस्तर पर गतिमान। हरिद्वार में भूमिगत केबलिंग हेतु केन्द्र सरकार से रू0 400 करोड़ का कार्य गतिमान। प्रधानमंत्री मातृवंदना योजना के अन्तर्गत 63908 महिलाओं को रू0 5000 की धनराशि डी.बी.टी. के माध्यम से उपलब्ध कराई गई है। अल्पसंख्यक कल्याण हेतु प्रधानमंत्री जन विकास कार्यक्रम के अन्तर्गत रू0 1324 लाख की धनराशि अवमुक्त की गई है। 
इस अवसर पर विधानसभा अध्यक्ष श्री प्रेमचंद अग्रवाल, कैबिनेट मंत्री श्री सतपाल महाराज, डॉ0 हरक सिंह रावत, श्री मदन कौशिक, श्री यशपाल आर्य, श्री सुबोध उनियाल, श्री अरविन्द पाण्डेय, राज्य मंत्री डॉ0 धन सिंह रावत, श्रीमती रेखा आर्या सहित विधायकगण, मुख्य सचिव श्री उत्पल कुमार सिंह सहित अपर मुख्य सचिव, प्रमुख सचिव एवं शासन के उच्चाधिकारी उपस्थित थे।

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-भवाली की रोडवेज कार्यशाला फरसौली में नवनिर्मित भवन में हुई स्थानांतरित, दिल्ली के लिए बेतालघाट से रामनगर होते हुए रोडवेज बस सेवा का भी हुआ शुभारंभ

नवीन समाचार, नैनीताल, 4 फरवरी 2020। अब तक शिलान्यासों तक सीमित राज्य सरकार अब योजनाओं के लोकार्पण तक पहुंचती और इस तरह सरकार का विकास धरातल पर उतरता नजर आने लगा है। मंगलवार को मुख्यालय के निकटवर्ती भवाली की जाम की समस्या का आंशिक समाधान करते हुए समीपवर्ती फरसोली में 3 करोड़ 48 लाख की लागत से बनी रोडवेज कार्यशाल का लोकार्पण परिवहन मंत्री यशपाल आर्य तथा क्षेत्रीय विधायक संजीव आर्य ने संयुक्त रूप से किया। इस दौरान काबीना मंत्री आर्य ने बेतालघाट से रामनगर होते हुये देहरादून के लिए नई बस सेवा का हरी झंडी दिखाकर शुभारंभ भी किया। इस मौके पर विधायक संजीव आर्य ने 25 करोड़ के विकास कार्य कराने की जानकारी दी।
इस मौके पर काबीना मंत्री आर्य ने कहा कि इस कार्यशाला के बन जाने से फरसोली उत्तराखंड के नक्शे पर उभरेगा साथ ही क्षेत्र में पर्यटन भी बढ़ेगा। लोगों को रोजगार के अवसर भी मिलेंगे। प्रदेश सरकार का प्रयास है कि प्रदेश के दुर्गम इलाकों में बस सेवा पहुंचाई जाए। इसी क्रम में बेतालघाट से नई दिल्ली के बस सेवा शुरू की गई। अब बेतालघाट से राजधानी दून के लिए बस सेवा की शुरुआत हो गई है। शीघ्र ही बेतालघाट में एक बस स्टैंड भी बनाया जाएगा। साथ ही रामगढ़ में बस अड्डे का जीर्णोद्धार और बाजपुर में भी बस अड्डे का निर्माण किया जाएगा।
वहीं क्षेत्रीय विधायक संजीव आर्य ने कहा कि उनकी विधानसभा के तहत भवाली तथा उसके आसपास के क्षेत्र में लगभग 25 करोड़ की लागत से विकास कार्य किये जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि भवाली रोडवेज परिसर मे 4 करोड़ की लागत से बहुमंजिला पार्किंग बनाने की स्वीकृति प्राप्त हो चुकी है। इस पार्किग मे लगभग 100 वाहन पार्क किये जा सकेंगे, इससे शहर को जाम से निजात मिलेगी। नैनीताल में पार्किंग को भी मंजूरी मिल गई है। कार्यक्रम में ब्लाक प्रमुख डा. हरीश बिष्ट, दर्जा मंत्री पीसी गोरखा, नितेश विष्ट, मनीष बिष्ट, अध्यक्ष मंडी परिषद मनोज साह, पुष्कर जोशी, आनन्द बिष्ट, कुन्दन बिष्ट, पवन भाकुनी, विवेक साह, मुकेश, पदमा आर्य, चतुर सिह बोरा, योगेश रजवार, राजेश नेगी, शरद पांडे, दयाकिशन पोखरिया, रोहित भाटिया, पान सिंह खनी, प्रेमा अधिकारी, भावना मेहरा, मानव अधिकारी, मोहन बिष्ट, सुनील मेहता, मुकेश आर्य, ममता बिष्ट, ऊषा कनौजिया, त्रिलोकनाथ गोस्वामी, अम्बा आर्या, दिनेश सांगुडी, ललित आर्य, नीरज जोशी, मूर्ति देवी, संजय भगत, दीवान मेहरा के अलावा जीएम परिवहन निगम दीपक जैन, क्षेत्रीय प्रबन्धक यशपाल सिंह, एजीएम विजय तिवारी, परियोजना प्रबन्धक पेयजल संस्थान विकास एवं विमोचन निगम, मृदुला सिह, जिला समाज कल्याण अधिकारी अमन अनिरूद्व, एआरटीओ डा. गुरदेव सिह आदि मौजूद रहे।

यह भी पढ़ें : उत्तराखंड देवस्थानम बोर्ड राज्य में धार्मिक पर्यटन की तस्वीर को बदल कर रख देगा

उत्तराखंड की त्रिवेंद्र सिंह रावत सरकार ने राज्य में स्थापित मंदिरों की व्यवस्था को एकरूपता देने और राज्य में चार धाम यात्रा को और बेहतर बनाने के लिए उत्तराखंड देवस्थानम बोर्ड बनाकर एक बड़ा कदम उठाया है। सरकार को उम्मीद है कि इस व्यवस्था के बाद राज्य में चार धाम यात्रा पहले के कहीं अधिक सुचारू रूप से चलेगी। राज्य में मंदिरों की देखभाल ठीक तरीके से हो सकेगी और देवसंस्कृति के वाहक पुरोहित समाज को भी पहले से अधिक सुविधाएं मिल दी जा सकेंगी। सीएम त्रिवेंद्र सिंह रावत इस बोर्ड के गठन के बाद न सिर्फ उत्साहित हैं बल्कि उम्मीद जता रहें हैं कि ये बोर्ड राज्य में धार्मिक पर्यटन की तस्वीर को बदल कर रख देगा।

इंफ्रास्ट्रक्चर होगा बेहतर

देवस्थानम बोर्ड बनाने के पीछे उत्तराखंड सरकार का प्रमुख उद्देश्य राज्य के  मंदिरों में आधारभूत ढांचागत विकास करना है। इस बोर्ड के अधीन राज्य के चारों धाम और 51 मंदिर आएंगे। इन मंदिरों में देश ही नहीं विदेशों से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं। ऐसे में इन मंदिरों में विश्व स्तरीय सुविधाओं का विकास भी किया जाएगा। सरकार अब राज्य में धार्मिक पर्यटन पर आने वालों के लिए सिंगल प्वाइंट अरेंजमेंट की ओर कदम बढ़ा रही है।

पुरोहितों के हित सुरक्षित

देवस्थानम बोर्ड के गठन के ऐलान के साथ ही इसका विरोध भी पटल पर आ गया। बड़ी संख्या में पुरोहित समाज के लोगों ने इस बोर्ड के गठन के विरोध में मोर्चा खोल दिया। हालांकि इस बोर्ड गठन के बाद अब पुरोहित समाज का बड़ा तबका इसके समर्थन में आ गया है। वहीं सरकार शुरुआत से इस बात का दावा करती रही है कि इस बोर्ड के गठन से पुरोहित समाज के हितों की अनदेखी किसी स्तर पर नहीं होगी। रावत और पुरोहितों की सदियों पुरानी व्यवस्था में कोई बदलाव नहीं आएगा। प्रबंधन के स्तर पर बोर्ड व्यवस्थाओं को बेहतर करेगा। इसी लिहाज से सरकार ने बोर्ड में चारों धामों के प्रतिनिधियों को भी स्थान दिया है।  सरकार की माने तो इस बोर्ड के गठन के बाद चारों धामों की व्यवस्था में समन्वय बनेगा।

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भविष्य के लिए जरूरी

त्रिवेंद्र सरकार राज्य में धार्मिक तीर्थाटन को भविष्य के लिहाज से व्यवस्थित करना चाहती है। वैष्णो देवी और तिरुपति बालाजी जैसे मंदिरों में की गई व्यवस्थाओं के मुताबिक ही त्रिवेंद्र सरकार उत्तराखंड के मंदिरों में भी व्यवस्थाएं करना चाहती है। सरकार को उम्मीद है कि इससे राज्य के मंदिरों में धार्मिक पर्यटन बढ़ेगा। हालांकि सरकार के प्रयासों से चार धामों में आने वाले यात्रियों का आंकड़ा तेजी से बढ़ा है। फिलहाल तकरीबन चालीस लाख पर्यटक पहुंच रहें हैं। राज्य में जारी ऑल वेदर रोड और ऋषिकेश कर्णप्रयाग रेल लाइन के निर्माण के बाद पर्यटकों की संख्या करोड़ों में पहुंच सकती है। ऐसे में राज्य के मंदिरों की व्यवस्थाओं को सुदृढ़ करने के लिए सरकार को इस तरह के बोर्ड के गठन की जरूरत महसूस हो रही थी।

नवीन समाचार
‘नवीन समाचार’ विश्व प्रसिद्ध पर्यटन नगरी नैनीताल से ‘मन कही’ के रूप में जनवरी 2010 से इंटरननेट-वेब मीडिया पर सक्रिय, उत्तराखंड का सबसे पुराना ऑनलाइन पत्रकारिता में सक्रिय समूह है। यह उत्तराखंड शासन से मान्यता प्राप्त, अलेक्सा रैंकिंग के अनुसार उत्तराखंड के समाचार पोर्टलों में अग्रणी, गूगल सर्च पर उत्तराखंड के सर्वश्रेष्ठ, भरोसेमंद समाचार पोर्टल के रूप में अग्रणी, समाचारों को नवीन दृष्टिकोण से प्रस्तुत करने वाला ऑनलाइन समाचार पोर्टल भी है।
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3 Replies to “बड़ा समाचार : उत्तराखंड में हिंसा की संभावित घटनाओं के तहत रासुका लागू

  1. यदि बाहरी राज्यो के पर्यटक उत्तराखंड आना ही बन्द कर दें तो समूचा उत्तराखंड कारोबारी बेरोज़गारी के बोझ तले मर जायेगा, सरकार को इसका अहसास हुआ कि भुखमरी फ़ैल सकती है तभी नियमो को सरल बनाकर बाहरी लोगो को हाथ जोड़कर बुलाया जा रहा है ।

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