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बिग ब्रेकिंग : उत्तराखंड में डीज़ल-पेट्रोल के दामों में देश में सबसे बड़ी 5 रुपये की कमी का एलान

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नई दिल्ली, 6 अक्टूबर 2018। पेट्रोल-डीजल की कीमतों का लगातार बढ़ना जारी है। गुरुवार को भी इनके दामों में क्रमश: 15 पैसे और 20 पैसे प्रति लीटर की बढ़ोत्तरी दर्ज की गई। सार्वजनिक तेल विपणन कंपनियों ने गुरुवार को जारी अधिसूचना में बताया कि पेट्रोल और डीजल के दाम क्रमश: 15 पैसे और 20 पैसे प्रति लीटर बढ़ाये गए हैं। इस वृद्धि के बाद दिल्ली में पेट्रोल अब 84 रुपये प्रति लीटर तथा डीजल 75.45 रुपये प्रति लीटर पर पहुंच गया। यह दोनों का सर्वकालिक उच्च स्तर है। इसके बाद केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली ने डीज़ल व पेट्रोल के दामों में 2 .50 रुपये की कमी की घोषणा की। वहीँ इसके बाद उत्तराखंड के मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र रावत ने भी उत्तराखंड में अलग से 2 .50 रुपये की कमी की घोषणा की। इस प्रकार उत्तराखंडवासियों को देश में सर्वाधिक 5 रुपये सस्ते पेट्रोल-डीज़ल मिल सकेंगे।

मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र रावत ने इस बारे में ट्वीट किया-पेट्रोल,डीजल के दामों में प्रति लीटर 2.5 रुपये /ली. की कटौती के केंद्र सरकार के फैसले का स्वागत करता हूं। उत्तराखंड की जनता को राहत देते हुए राज्य सरकार ने भी पेट्रोल, डीजल में 2.5 रुपये /ली. की अतिरिक्त कटौती का फैसला लिया है। उत्तराखंड की लोगों को पेट्रोल,डीजल में 5 रुपयेप्रति ली.की राहत मिलेगी।

साथ ही बताया कि इस फैसले से राज्य सरकार को पेट्रोल में 100 करोड़ और डीजल में 225 करोड़ यानी कुल 325 करोड़ रुपए के राजस्व का नुकसान उठाना पड़ेगा। लेकिन आम जनता के हित को ध्यान मे रखते हुए सरकार ने ये फैसला लिया है। यह फैसला आज आधी रात से मान्य होगा।

देश के किसी भी शहर में ताज़ा व पुराने पेट्रोल, डीजल व रसोई गैस आदि के दाम इस लिंक पर देखें : https://www.mypetrolprice.com/170/Petrol-price-in-Nainital

– वित्त मंत्री ने पेट्रोल-डीजल के दाम ढाई रुपये कम करने का ऐलान किया
– महंगाई दर 4 फीसदी के भीतर है: अरुण जेटली
– भारतीय बाजार पर अमेरिकी बाजार का असर है: अरुण जेटली
पेट्रोल-डीजल की बढ़ती कीमतों से चिंतित सरकार इसके अर्थव्यवस्था पर पड़ने वाले प्रतिकूल असर को रोकने के विकल्पों पर विचार कर रही है। सूत्रों ने जानकारी दी की कि इस संबंध में बुधवार शाम को वित्त मंत्री अरुण जेटली ने पेट्रोलियम मंत्री धर्मेन्द्र प्रधान से मुलाकात की। ऐसी संभावना जताई जा रही है कि आज थोड़ी देर में वित्तमंत्री कुछ रियायतों की घोषणा कर सकते हैं।
ईंधन के बढ़ते दाम से किसानों की पहले से बदहाल स्थिति और खराब होने की आशंका है। विशेषकर रबी फसलों पर इसका अधिक प्रभाव पड़ने का अनुमान है। डीजल अभी रिकॉर्ड उच्च कीमत पर बेचा जा रहा है। यह कृषि क्षेत्र में सर्वाधिक इस्तेमाल किया जाता है। खेत जोतने के लिए ट्रैक्टर से लेकर सिंचाई के पंपसेट तक डीजल से ही चलते हैं। अत: डीजल के महंगा होने से किसानों पर इसका असर पड़ना अवश्यंभावी है।
ऐसा माना जा रहा है कि दोनों मंत्रियों ने कच्चा तेल की बढ़ती अंतरराष्ट्रीय कीमतों तथा रुपये के रिकॉर्ड निचले स्तर तक गिरते जाने के प्रभावों को दूर करने पर चर्चा की। साथ ही सब्सिडी वाला घरेलू रसोई गैस सिलेंडर भी पहली बार 500 रुपये प्रति सिलिंडर को पार कर गया है।

यह भी पढ़ें: एनडीए के चार वर्ष में पेट्रोल के दामों में मात्र 6.74 रुपए यानी 9.4 फीसद की ही वृद्धि

पेट्रोल व डीजल की कीमतों में पिछले पांच दिनों से मामूली सी ही सही किंतु कटौती जारी है। कभी 1 पैसा तो कभी 6 पैसे की कटौती के साथ देश भर में पिछले छह दिनों में पेट्रोल की कीमत में 43 पैसे की कटौती हुई है। वहीं, डीजल की कीमत में 32 पैसे की कमी आई है। राजधानी दिल्ली में शनिवार को पेट्रोल की कीमत में 9 पैसे और रविवार को 8 पैसे की कटौती हुई, जिसके बाद दिल्ली में पेट्रोल की कीमत 78.24 रुपये और डीजल की कीमत 69.11 रुपये प्रति लीटर थी, जबकि रविवार को पेट्रोल 78.15 और डीजल 69.15 की कीमत पर स्थिर रहा। यह अलग बात है कि अभी भी पेट्रोल व डीजल की कीमतों में बढ़ोत्तरी का ही हल्ला है।

इधर नैनीताल की बात करें तो यहाँ पेट्रोल की कीमतें विभिन्न तिथियों को इस प्रकार रहीं :

4 जून 2018 : 79.11 (-0.11) रुपये/लीटर

3 जून 2018 : 79.23 (-0.08) रुपये/लीटर

2 जून 2018 : 79.31 रुपये/लीटर

14 मई 2018 : 76.63 रुपये/लीटर

5 मार्च 2018 : 74.67 रुपये/लीटर

5 दिसंबर 2017 : 72.28 रुपये/लीटर

16 जून 2017 : 69.28 रुपये/लीटर

मालूम हो कि एनडीए सरकार के सत्ता में आने के दौरान मई 2014 में अंतरराष्ट्रीय बाजार से कच्चे तेल का भारतीय खरीद मूल्य 106.85 डॉलर प्रति बैरल तथा पेट्रोल का दाम 71.41 रुपये प्रति लीटर था। इस प्रकार एनडीए के चार वर्ष के कार्यकाल में पेट्रोल के दामों में 2 जून 2018 को 78.15 रुपये के मूल्य होने तक मात्र 6.79 रुपए की ही वृद्धि हुई है, जो कि महज 9.4 फीसद ही अधिक है।
उल्लेखनीय है कि राजधानी दिल्ली में पेट्रोल-डीजल की कीमतों में 30 मई से कटौती शुरू हुई है। 30 मई को 1 पैसा की कटौती हुई, जिससे सरकार की काफी आलोचना भी हुई। इसके बाद 31 मई को 7 पैसे तथा 1 जुलाई को 6 और 2 जुलाई को 9 पैसे की कटौती की गई। ऐसा ही डीजल की कीमत में भी हुआ है। डीजल की कीमत में 30 मई को 1 पैसा, 31 मई और 1 जून को 5-5 पैसे और 2 जुलाई को 9 पैसे की कटौती हुई।

उल्लेखनीय है कि इससे पूर्व 2016 में एनडीए के 20 महीने के शासनकाल में पेट्रोल के दाम 16 प्रतिशत घटकर 60 रुपये प्रति लीटर पर आ गये थे। अलबत्ता इस दौरान अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल के दाम 106.85 डॉलर प्रति बैरल से दो-तिहाई तक गिर कर 29.80 डॉलर प्रति बैरल पर आ गये थे।

इन तिथियों को नियंत्रण मुक्त हुए पेट्रोलियम पदार्थों के दाम

सरकार ने हवाई जहाजों में इस्तेमाल होने वाले ईंधन (एटीएफ) की कीमतें अप्रैल 2001 को व पेट्रोल के दाम 26 जून 2010 को नियंत्रणमुक्त कर दिये थे जबकि डीजल के दाम 19 अक्टूबर 2014 को बाजार पर छोड़ दिये गये थे। उसके बाद से तेल विपण कंपनियां पेट्रोल और डीजल के दाम अंतरराष्ट्रीय मूल्य और अन्य बाजार परिस्थितियों के अनुरूप तय करते रहे हैं।

इसलिये केवल कच्चे तेल की वैश्विक कीमतों से सीधे नहीं जुड़तीं पेट्रोल-डीजल की कीमतें

पेट्रोल-डीजल की कीमतें वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों से कदम ताल नहीं मिला सकतीं, इसके पीछे दो बड़ी वजहें हैं-
1. रुपये की कीमत: भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों का 80 प्रतिशत आयात से पूरा करता है। इसलिए देश में पहुंचने तक ईंधन की लागत क्या होगी, यह बहुत हद तक एक्सचेंज रेट पर निर्भर करती है। जून 2014 में डॉलर की कीमत करीब 60 रुपये के बराबर थी, लेकिन धीरे-धीरे रुपया कमजोर होता गया और इधर लंबे समय से इसका भाव डॉलर के मुकाबले करीब-करीब 68 रुपये पर स्थिर सा है। रुपए की कमजोरी की वजह से भारत पहुंचने तक कच्चे तेल की कीमत बढ़ जाती है।
2. टैक्स: केंद्र की मोदी सरकार ने पेट्रोल-डीजल पर लग रहे करों में धीरे-धीरे बढ़ोतरी कर दी है, ताकि राजस्व बढ़ाया जा सके। मई 2014 में एनडीए सरकार बनने के बाद पेट्रोल-डीजल पर एक्साइज ड्यूटी दोगुने से भी ज्यादा हो गई है। अप्रैल 2014 में पेट्रोल पर एक्साइज ड्यूटी 9.48 रूपए प्रति लीटर थी जो छह बार में ही बढ़ते-बढ़ते अभी 19.36 रूपए प्रति लीटर पर पहुंच गई थी। इसी तरह, डीजल पर अप्रैल 2014 में 3.65 रूपए प्रति लीटर की दर से एक्साइज ड्यूटी तय थी। इसमें भी छह बार बढ़ोतरी हुई और अब यह आंकड़ा 11.83 रूपए प्रति लीटर तक पहुंच गया है।

पेट्रोल-डीजल की कीमतों पर राजनितिक लगाम के लिए जीएसटी लगाने की तैयारी में है सरकार

पेट्रोल और डीजल की कीमतों को लेकर बढ़ रही राजनीति पर लगाम लगाने के लिए अब केंद्र सरकार के पास जीएसटी ही एकमात्र रास्ता बचा है। वैसे जीएसटी के तहत इन उत्पादों को लाने के बावजूद ग्राहकों को इनकी कीमतों में कोई भारी राहत नहीं मिलेगी क्योंकि इन उत्पादों के लिए जीएसटी की ऐसी दर (रेवेन्यू न्यूट्रल रेट) तलाशनी होगी जिससे केंद्र व राज्यों के खजाने को कोई भारी चपत न लगे। इस मुश्किल से निकलने के लिए सरकार पेट्रोलियम उत्पादों के लिए अब तक लागू चार तरह की दरों (5,12, 18, 28 फीसद) से इतर कोई नई दर लाने पर विचार कर रही है, ताकि इनसे भविष्य में जो राजस्व संग्रह हो, वह मौजूदा संग्रह से कम नहीं हो। हालांकि जानकार मानते हैं कि जीएसटी के तहत आने के बावजूद ग्राहकों को खुदरा कीमत में कोई बड़ी राहत नहीं मिलेगी। वित्त मंत्रालय के आला अधिकारियों के मुताबिक भी यह कोई अच्छी अर्थनीति नहीं होगी कि एक झटके में पेट्रोल व डीजल की कीमतों में भारी कटौती कर दी जाये। हालांकि ग्राहकों को इससे तात्कालिक राहत जरूर मिलेगी।

अभी पेट्रोल-डीजल से इतना मुनाफा कमा रहे हैं राज्य

आंकड़े गवाह है कि केंद्र व राज्य पेट्रो उत्पादों से खूब कमाई कर रहे हैं। 28 राज्यों में पेट्रोल पर 25 से 35 फीसद के बीच जीएसटी की दर है। डीजल की भी यही स्थिति है। 13 राज्यों में वैट की दर 20 फीसद से ज्यादा है। चालू वित्त वर्ष के पहले नौ महीनों में केंद्र ने तमाम पेट्रोलियम उत्पादों पर टैक्स लगा कर 1,97,715 करोड़ रुपये का राजस्व हासिल किया जबकि राज्यों के लिए यह राशि 1,50,916 करोड़ रुपये थी। इसका मतलब यह हुआ कि जीएसटी में शामिल करने के बाद इन पर लगाई जाने वाली दर इतनी होनी चाहिए कि कुल संग्रह केंद्र व राज्य की तरफ से इनसे वसूले जाने वाले संग्रह से कम न हो।

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मेरा जन्म 26 नवंबर 1972 को हुआ था। मैं नैनीताल, भारत में मूलतः एक पत्रकार हूँ। वर्तमान में मार्च 2010 से राष्ट्रीय हिन्दी दैनिक समाचार पत्र-राष्ट्रीय सहारा में ब्यूरो चीफ के रूप में कार्य कर रहा हूँ। इससे पहले मैं पांच साल के लिए दैनिक जागरण के लिए काम कर चुका हूँ। कुमाऊँ विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग से ‘नए मीडिया’ विषय पर शोधरत हूँ। फोटोग्राफ़ी मेरा शौक है। मैं NIKON COOLPIX P530 और अडोब फोटोशॉप 7.0 के साथ फोटोग्राफी कर रहा हूँ। फोटोग्राफी मेरे लिए दुनियां की खूबसूरती को अपनी ओर से चिरस्थाई बनाने का बहुत छोटा सा प्रयास है। एक फोटो पत्रकार के रूप में मेरी तस्वीरों को नैनीताल राजभवन सहित विभिन्न प्रदर्शनियों में प्रस्तुत किया गया, तथा उत्तराखंड की राज्यपाल श्रीमती मार्गरेट अलवा द्वारा सम्मानित किया गया है। कुछ चित्रों को राष्ट्रीय-अंतर्राष्ट्रीय पुरस्कार भी प्राप्त हो चुके हैं। गूगल अर्थ पर चित्र उपलब्ध कराने वाली पैनोरामियो साइट पर मेरी प्रोफाइल को 18.85 Lacs से भी अधिक हिट्स प्राप्त हैं।पत्रकारिता और फोटोग्राफी के अलावा मुझे कवितायेँ लिखना पसंद है। काव्य क्षेत्र में मैंने नवीन जोशी “नवेन्दु” के रूप में अपनी पहचान बनाई है। मैंने बहुत सी कुमाउनी कवितायेँ लिखी हैं, कुमाउनी भाषा में मेरा काव्य संकलन उघड़ी आंखोंक स्वींड़ प्रकाशित हो चुका है, जो कि पुस्तक के के साथ ही डिजिटल (PDF) फार्मेट पर भी उपलब्ध होने वाली कुमाउनी की पहली पुस्तक है। मेरी यह पुस्तक गूगल एप्स पर भी उपलब्ध है। ’ यहां है एक पत्रकार, लेखक, कवि एवं छाया चित्रकार के रूप में मेरी रचनात्मकता, लेख, आलेख, छायाचित्र, कविताएं, हिंदी-कुमाउनी के ब्लॉग आदि कार्यों का पूरा समग्र। मेरी कोशिश है कि यहां नैनीताल, कुमाऊं, उत्तराखंड और वृहद संदर्भ में देश की विरासत, संस्कृति, इतिहास और वर्तमान को समग्र रूप में संग्रहीत करने की….। मेरे दिल में बसता है, मेरा नैनीताल, मेरा कुमाऊं और मेरा उत्तराखंड

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