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पत्नी को चिकित्सक का ‘भाभी’ कहना ऐसा खला कि… पत्नी को पहुंचाना पड़ गया अस्पताल

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प्रतीकात्मक तस्वीर
प्रतीकात्मक तस्वीर

नवीन समाचार, हल्द्वानी, 21 फरवरी 2022। आजकल कौन ‘भैया’, ‘भाभी’, ‘अंकल’ या ‘आंटी’ कहने से भी चिढ़ जाए, कुछ पता नहीं चलता। अब एक ऐसा मामला आया है कि एक व्यक्ति को एक चिकित्सक का अपनी पत्नी को भाभी कहना ऐसा खला कि पत्नी को अस्पताल ही भर्ती करने की जरूरत पड़ गई।

प्राप्त जानकारी के अनुसार शहर के बनभूलपुरा थाना क्षेत्र में एक महिला की तबीयत कुछ दिन से खराब थी। इलाके का ही एक चिकित्सक उसका इलाज करने के लिए घर पर जा रहा था। इधर शनिवार को चिकित्सक ने महिला को घर पर आकर भाभी कहकर तबीयत पूछी तो वहां मौजूद उसका पति भड़क गया।

पति का कहना है कि उसे लगा कि चिकित्सक जानबूझकर उसकी पत्नी से नजदीकी बढ़ाने की कोशिश कर रहा है। इसलिए उसने हंगामा कर चिकित्सक को घर से भगा दिया। वह इतना भड़क गया था कि आसपास के लोगों ने किसी तरह उसे शांत कराया। उधर, बेवजह हंगामा करने से तनाव में आई उसकी पत्नी ने एक साथ पैरासिटामोल की पांच गोलियां खा लीं। हालत बिगड़ने पर उसे अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा है। (डॉ.नवीन जोशी) आज के अन्य ताजा ‘नवीन समाचार’ पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें।

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अधिवक्ता पर दो लाख का जुर्माना - Hindi Newspaper | National News Paper |  Weekly Newspaper | thesundaypost.inनवीन समाचार, देहरादून, 25 नवंबर 2021। उत्तराखंड में अनुसूचित जाति एवं जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम १९८९ के मामले में बिना हिरासत के ही आरोपित को जमानत मिल गई है। मामला भ्रष्टाचार के विरुद्ध संघर्षरत सामाजिक कार्यकर्ता चंद्रशेखर करगेती का है। चंद्रशेखर करगेती ने प्रदेश में अरबों रुपये के समाज कल्याण छात्रवृत्ति घोटाले का खुलासा किया था। उन्होंने उत्तराखंड बहुउद्देश्यीय वित्त विकास निगम में धनराशि के दुरुपयोग के मामले में जनहित याचिका दायर की थी।

तब निगम का जिम्मा गीताराम नौटियाल के पास था। इसके बाद अनुसूचित जाति आयोग के तत्कालीन सचिव गीता राम नौटियाल ने करगेती पर उनकी छवि को नुकसान पहुंचाने का आरोप लगाते हुए बसंत विहार थाने में करगेती के खिलाफ एससीएसटी एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज करवाया था। गीताराम नौटियाल जौनसार वावर क्षेत्र के जनजातीय व्यक्ति हैं। बहरहाल इस मामले में करगेती ने सुप्रीम कोर्ट से राहत पा ली थी, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने २६ अक्टूबर २०२१ को उनकी अग्रिम जमानत के लिए विशेष अनुमति याचिका रद्द कर दी।

हाईकोर्ट ने निर्देश दिये करगेती १० नवम्बर २०२१ को संबंधित अदालत यानी अनुसूचित जाति एवं जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम १९८९, पंचम सत्र न्यायाधीश देहरादून के समक्ष पेश होकर जमानत याचिका दाखिल करें। इस पर गीताराम नौटियाल ने जमानत का यह कहकर विरोध किया कि आरोपित सुप्रीम कोर्ट के आदेश की अवहेलना करते हुए खुद उपस्थित नहीं हुए। एससीएसटी एक्ट में दर्ज मामले का निस्तारण दो माह में पूरा होना होता है, लेकिन करगेती मामले में सहयोग नहीं कर रहे व सुप्रीम कोर्ट व हाईकोर्ट के आदेशों की अवहेलना व दुरुपयोग कर रहे हैं, जबकि आरोपित के अधिवक्ता ने कहा कि उन्होंने सतेंद्र कुमार अंतिल बनाम सीबीआई एवं अन्य मामले में सुप्रीम कोर्ट की दी गई व्यवस्था में साफ है कि अनुसूचित जाति एवं जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम १९८९ में यह व्यवस्था लागू नहीं होती।

२३ नवम्बर को अंतरिम जमानत को लेकर जारी आदेश के क्रम में करगेती खुद अदालत में उपस्थित हुए। उनकी ओर से तर्क दिया गया कि सतेंद्र कुमार अंतिल बनाम सीबीआई एवं अन्य मामले में सुप्रीम कोर्ट ने साफ निर्देश दिये हैं कि जहां अन्वेषण के दौरान आरोपित को गिरफ्तार न किया गया हो और मामला सात साल या उससे कम सजा का हो तो आरोपित को बिना हिरासत में लिए उसके जमानत प्रार्थनापत्र को करना चाहिए। इस मामले में तो अधिकतम पांच साल की सजा ही है। विशेष न्यायाधीश एससीएसटी एक्ट पंचम अपर सत्र न्यायाधीश आशुतोष मिश्रा ने आरोपित के अधिवक्ता चंद्रशेखर तिवारी, विशेष लोक अभियोजक संजीव सिसौदिया व पीड़ित पक्ष के अधिवक्ता रजनीश गुप्ता के तर्क सुने व आरोपित पक्ष की ओर से पेश किये गए दृष्टांत को मानते हुए उनकी जमानत अर्जी मान ली और उन्हें २० हजार रुपये के निजी बांड व इसी धनराशि की दो जमानत पेश करने पर जमानत पर रिहा करने के आदेश दे दिये। (डॉ.नवीन जोशी) आज के अन्य ताजा ‘नवीन समाचार’ पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें।

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-26 सितम्बर को हरिद्वार में अखिल ब्राह्मण उत्थान महासभा के तत्वावधान में आयोजित होगा ‘विशाल ब्राह्मण हुंकार महासम्मेलन’
Parshuram jayanti 2021: क्षत्रियों के विनाश के बाद हताश हो गए थे भगवान  परशुराम - Spirituality AajTakडॉ. नवीन जोशी, नवीन समाचार, नैनीताल, 22 सितंबर 2021। बदलते समय के साथ स्वयं को उपेक्षित महसूस कर रहे ब्राह्मण भी अपनी मांगों व समस्याओं पर मुखर होने जा रहे हैं। अखिल ब्राह्मण उत्थान महासभा के तत्वावधान में ब्राह्मणों के सभी संगठन आगामी 26 सितंबर को एक मंच पर आकर धर्म नगरी हरिद्वार के ज्वालापुर में आयोजित होने वाले विशाल ब्राह्मण हुंकार महासम्मेलन में शिरकत कर सरकार को कई बिंदुओं पर मांग पत्र प्रेषित करेंगे।

महासभा के प्रदेश मीडिया प्रभारी राजू पांडे ने बताया कि हरिद्वार में होने वाले विशाल ब्राह्मण हुंकार महासम्मेलन में राज्य भर से करीब 3 हजार से अधिक ब्राह्मण एकजुट होंगे। इस महासम्मेलन में भगवान परशुराम के जन्म दिवस पर सार्वजनिक अवकाश की मांग, उत्तराखंड के मंदिरों के पुरोहितों को मासिक भत्ता दिये जाने, सवर्ण आयोग का शीघ्र गठन करने, राज्य के प्रत्येक शहर में भगवान परशुराम की प्रतिमा लगाने की अनुमति देने व ब्राह्मण निर्धन कन्याओं के लिये शिक्षा एवं विवाह हेतु आर्थिक सहायता प्रदान किये जाने सहित अन्य बिंदुओं पर सरकार को मांग पत्र प्रेषित किया जायेगा।

उन्होंने बताया कि सम्मेलन की तैयारियों को लेकर अखिल ब्राह्मण उत्थान महासभा के प्रदेश अध्यक्ष पंडित विशाल शर्मा व वरिष्ठ उपाध्यक्ष पंडित हेम चंद्र भट्ट सहित अनेक वरिष्ठ पदाधिकारी जुटे हुए हैं। आज के अन्य ताजा ‘नवीन समाचार’ पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें। 

यह भी पढ़ें : आयोग की जनसुनवाई में अनुपस्थित अधिकारियों को कारण बताओ नोटिस, खनन मामले में निलंबन के आदेश

डॉ. नवीन जोशी @ नवीन समाचार, नैनीताल, 18 अगस्त 2021। मुख्यालय स्थित नैनीताल क्लब में मंगलवार और बुधवार को अनुसूचित जाति आयोग के उपाध्यक्ष पीसी गोरखा द्वारा विभिन्न शिकायतों का निस्तारण करने हेतु जनसुनवाई की गई। इस दौरान मंगलवार को 23 और बुधवार को बागेश्वर और पिथौरागढ़ जिलों के पंजीकृत 28 में से 25 मामलों की सुनवाई हुई। सुनवाई के दौरान अनुपस्थित रहे अधिकारियों को कारण बताओ नोटिस भेजा गया।

इसके अलावा एसडीएम मुनस्यारी को खड़िया खनन के प्रकरण में शिकायत कर्ता के फर्जी हस्ताक्षर की जांच कर मामले में लिप्त अधिकारियों की संलिप्तता पाए जाने पर उन्हें निलम्बित करने के सख्त आदेश भी जारी हुए। साथ ही मामले की गम्भीरता को देखते हुए अग्रिम आदेश तक खड़िया की निकासी पर रोक लगा दी गयी। इस अवसर पर अनुसूचित जाति आयोग की सचिव कविता टम्टा, विधि सलाहकार देव सिंह व मनीष सेमवाल तथा एसडीएम बागेश्वर जोगेंदर सिंह, नैनीताल प्रतीक जैन, आरएस रौतेला, मानस मित्तल, पदमेंद्र सकलानी, हेम चंद्र तिवाड़ी, नरेश कुमार, सपना रानी सहित अनेक अधिकारी और लाभार्थी मौजूद रहे। आज के अन्य ताजा ‘नवीन समाचार’ पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें। 

यह भी पढ़ें : ब्राह्मण महासभा ने पूछा-20 फीसद होने के बावजूद 10 फीसद में ही भागीदार क्यों, कहा-मांगा ब्राह्मणों के लिए आरक्षण व अगला मुख्यमंत्री

नवीन समाचार, नैनीताल, 03 अप्रैल 2021। अखिल ब्राह्मण उत्थान महासभा के प्रदेश अध्यक्ष पंडित विशाल शर्मा ने कहा कि उत्तराखंड में 22 लाख यानी राज्य की जनसंख्या के 20 फीसद ब्राह्मण हैं, फिर भी राज्य में उनकी भागेदारी राज्य की मौजूदा सरकार में 90 फीसद भागीदारी वाली केवल एक जाति विशेष को छोड़कर शेष अन्य सभी जातियों के साथ केवल 10 फीसद में है। राज्य सरकार में 90 फीसद फीसद दायित्व भी एक ही जाति विशेष के लोगों के पास हैं। उन्होंने कहा कि ब्राह्मणों के बच्चे अच्छे प्रदर्शन के बावजूद सरकारी नौकरियां प्राप्त नहीं कर पा रहे हैं, और फलस्वरूप आत्महत्या कर रहे हैं।

इसलिए अखिल ब्राह्मण उत्थान महासभा ब्राह्मणों के लिए गुजरात व पंजाब की तरह आरक्षण की मांग करती है। करीब 40 हजार की सदस्य संख्या वाली महासभा आगामी विधानसभा चुनाव में उसी पार्टी का सहयोग करेगी जो अपने चुनावी एजेंडे में साफ तौर पर ब्राह्मणों को आरक्षण देने की घोषणा करेंगे। उन्होंने राज्य में पिछले 10 वर्षों से एक ही जाति विशेष से मुख्यमंत्री से होने की बात करते हुए राज्य में अगला मुख्यमंत्री ब्राह्मणों से बनाने की मांग भी की।

पत्रकार वार्ता में मौजूद ब्राह्मण महासभा के पदाधिकारी।

पंडित शर्मा रविवार को नगर में एक पत्रकार वार्ता में बोल रहे थे। उन्होंने कहा कि ब्राह्मण शास्त्रों के साथ ही शस्त्रों में भी निपुण हैं। परशुराम उनके आदि भगवान हैं। इसलिए वे प्रारंभिक तौर पर भगवान परशुराम की जयंती 14 मई को उसी तरह अवकाश घोषित करने की मांग कर रहे हैं, जैसे राज्य में बेहद कम जनसंख्या के बावजूद छठ पूजा व गुड फ्राइडे को अवकाश होते हैं।

उन्होंने बताया कि आगामी 14 मई को राज्य के 10 हजार ब्राह्मणों का सर्वदलीय सम्मेलन हल्द्वानी में होगा। उन्होंने दोहराया कि देश में या तो आरक्षण की व्यवस्था समाप्त होनी चाहिए, अथवा आर्थिक आधार पर आरक्षण दिया जाना चाहिए अथवा ब्राह्मणों को आरक्षण दिया जाना चाहिए। इस मौके पर महासभा के प्रदेश मीडिया प्रभारी राजू पांडे व हल्द्वानी के नगर महामंत्री ललित मोहन पांडे भी मौजूद रहे।

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-सेवाओं के बावजूद भोजनमाताओं को जून माह का वेतन नहीं मिलने का प्राविधान, भोजनमाताओं ने मुख्यमंत्री को भेजा ज्ञापन
नवीन समाचार, नैनीताल, 30 जून 2020। प्रगतिशील भोजन माता संगठन के नैनीताल जनपद के कार्यकर्ताओं ने मंगलवार को अपनी 5 सूत्री मांग को लेकर सिटी मजिस्ट्रेट के माध्यम से मुख्यमंत्री को ज्ञापन भेजा। ज्ञापन में संगठन का कहना है कि भोजन माताओं को क्वारंन्टाइन सेंटरों में काम पर लगाया गया है, लेकिन उनको सुरक्षा के कोई उपकरण मुहैया नहीं कराए गए हैं, साथ ही मदद के रूप में कोई सहयोग राशि भी नहीं दी गई है।

संगठन की महामंत्री रजनी जोशी ने कहा कि भोजन माता बहुत गरीब परिवारों से आती हैं और उन्हें मिलने वाला मानदेय मात्र मात्र 2000 रुपए मासिक वर्ष में केवल 11 माह ही मिलता है। बढ़ती महंगाई में इससे उनका घर चलना पहले मुश्किल ही होता है, जबकि अब लॉक डाउन में कार्यरत रहने के बावजूद उन्हें इस जून माह का मानदेय नहीं मिलना है। उन्होंने बताया कि ज्ञापन देने के दौरान एसडीएम अपने कार्यालय में मौजूद नहीं थे।

करीब डेढ़ घंटे के इंतजार के बाद उनकीएसडीएम ने फोन पर बात हो पाई, और काफी देर रुकने के बाद ही ज्ञापन दे पाये। ज्ञापन में उन्होंने न्यूनतम मानदेय 15000 रुपए करने, महंगाई भत्ता तथा जून माह का मानदेय भी देने, क्वारंटाइन सैंटरों में लगी भोजन माताओं को सुरक्षा के उपकरण मुहैया कराने एवं मदद के रूप में प्रतिमाह हजार रुपए की सहयोग राशि देने की मांग भी की है।

यह भी पढ़ें : क्वारन्टाइन सेंटर में दलित भोजन माता के हाथ का खाना न खाने पर नाबालिग सहित दो के खिलाफ मुकदमा दर्ज

-दलित भोजन माता के हाथ का खाना न खाकर घर से खाना मंगवाने का आरोप
नवीन समाचार, नैनीताल 20 मई 2020। देश में कोरोना संक्रमण के बीच देश-दुनिया में साफ-सफाई व संक्रमण के दृष्टिगत सामाजिक-शारीरिक दूरी बरतने के दिशा-निर्देशों के बीच अस्पृश्यता को लेकर उठे प्रश्नों के बीच नैनीताल जनपद में एक नाबालिग सहित दो लोगो पर अस्पृश्यता निवारण अधिनियम 1955 सहित अन्य धाराओं में मुकदमा दर्ज हुआ है। गांव के विद्यालय में क्वारन्टाइन किये गये सवर्ण जाति के 12 वर्षीय नाबालिग व उसके चाचा पर आरोप है कि वह दलित भोजन माता के हाथ का बना खाना नहीं खा रहे हैं, बल्कि अपने घर से भोजन मंगा कर खा रहे हैं। इस मामले में ग्राम प्रधान मुकेश चंद्र की शिकायत पर राजस्व पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर लिया है।

मामले में ग्राम पंचायत भुमका के ग्राम प्रधान मुकेश चंद्र ने राजस्व निरीक्षक पट्टी नाई तहसील धारी जनपद नैनीताल को लिखित शिकायती पत्र दिया है कि पूर्व माध्यमिम विद्यालय ग्राम सभा भुमका में बाहर से आने के कारण क्वारन्टाइन किये गये पांच लोगों में से तीन लोग अनुसूचित जाति के व दो सवर्ण जाति के हैं। सवर्ण जाति के दिनेश मेलकानी पुत्र पान देव मेलकानी व नाबालिग अंकित चंद्र पुत्र कैलाश चंद्र मेलकानी जातिवादी हीन भावना के कारण भोजन माता के हाथ का बना भोजन-पानी नहीं ले रहे हैं, बल्कि अपने घर से मंगा रहे हैं। इस मामले में उन्होंने अनुसूचित जाति जनजाति अत्याचार अधिनियम 1989, अस्पृश्यता निवारण अधिनियम 1955 व महामारी एक्ट 188 एवं संबंधित प्राविधानों के तहत कार्रवाई करने की मांग की। इस पर राजस्व उपनिरीक्षक रवि पांडे ने मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू करने की बात कही है।

इस मामले में कुछ नये तथ्य भी उजागर हुए हैं। देश-प्रदेश के एक प्रतिष्ठित समाचार चैनल की हूबहू कॉपी कर बनाये गये एक यूट्यूब चैनल न्यूज31 उत्तराखंड का एक वीडियो इस संबंध में सोशल मीडिया में वायरल हो रहा है। जिसमें कथित तौर पर चेहरे पर मास्क लगाया हुआ रिपोर्टर पूर्व माध्यमिम विद्यालय भुमका में बने क्वारन्टाइन सेंटर में क्वारन्टाइन किये गये लोगों का इसी विषय में साक्षात्कार लेता नजर आता है। बाद में उसी के डीलडॉल व कमीज पहने व्यक्ति इसी वीडियो में ग्राम प्रधान के रूप में अपना वक्तव्य देता है। यानी ऐसा लगता है कि ग्राम प्रधान ही रिपोर्टर के रूप में लोगों के साक्षात्कार ले रहा है। इस साक्षात्कार के शुरू में यह बात भी कही जाती है कि अब तक क्वारन्टाइन किये गये अनुसूचित जाति के व्यक्ति भी अपने घरों से ही भोजन ला रहे थे। इस मामले में क्षेत्रीय लोग ग्राम प्रधान के गैर अधिकृत यूट्यूब चैनल के रिर्पोटर के रूप में क्वारन्टाइन में जाकर नाबालिग बच्चे व अन्य की निजता को सार्वजनिक करने के भी आरोप लगा रहे हैं।

दूसरे, आरोपित युवक दिनेश मेलकानी के द्वारा नैनीताल के जिलाधिकारी को पत्र लिखकर कहा है कि वह स्वयं अथवा अपनी माता आदि परिजनों के हाथ का ही भोजन करते हैं। उन्हें धार्मिक स्वतंत्रता का अधिकार भी स्वयं बनाये भोजन को ग्रहण करने का अधिकार देता है। उन्होंने आरोप लगाया है कि उसे ग्राम प्रधान मुकेश बौद्ध उन पर भोजन माता के द्वारा बनाया भोजन ग्रहण करने के लिए बाध्य किया जा है। इस कारण वह मानसिक तनाव महसूस कर रहा है। मुकेश बौद्ध के खिलाफ जांच कराकर आवश्यक कार्रवाई की जाये, अन्यथा वह आत्महत्या के लिये विवश होगा।

इधर नैनीताल जनपद के जिलाधिकारी सविन बंसल ने अन्य मामले में बुधवार को जनपद के ग्राम प्रधानों को पत्र लिखकर कहा है, ‘चूंकि गांव में क्वारन्टाइन किये गये लोग गांव के ही निवासी हैं, इसलिये उनके भोजन व बिस्तर की व्यवस्था उनके घरों से करा ली जाये। यदि प्रवासी के घर के लोग बहुत गरीब हैं तो ग्राम प्रधान इसकी व्यवस्था करें और खर्च की प्रतिपूर्ति वित्त आयोग की कन्टीजेंसी मद से करा लें’।

इस प्रकार देखें तो क्वारन्टाइन में रखे गये लोगों के भोजना का पहला विकल्प उनके घरों से भेाजन मंगाने का ही है। घरों की आर्थिक स्थिति खराब होने पर ही ग्राम प्रधानों को भोजन का प्रबंध करना है। इस तरह इस मामले में कई नये पक्ष भी सामने आ रहे हैं। (डॉ.नवीन जोशी) आज के अन्य ताजा ‘नवीन समाचार’ पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें।

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