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हद है: लॉक डाउन में सरकार ने काम तो करा लिया पर मानदेय नहीं देगी

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-सेवाओं के बावजूद भोजनमाताओं को जून माह का वेतन नहीं मिलने का प्राविधान, भोजनमाताओं ने मुख्यमंत्री को भेजा ज्ञापन
नवीन समाचार, नैनीताल, 30 जून 2020। प्रगतिशील भोजन माता संगठन के नैनीताल जनपद के कार्यकर्ताओं ने मंगलवार को अपनी 5 सूत्री मांग को लेकर सिटी मजिस्ट्रेट के माध्यम से मुख्यमंत्री को ज्ञापन भेजा। ज्ञापन में संगठन का कहना है कि भोजन माताओं को क्वारंन्टाइन सेंटरों में काम पर लगाया गया है, लेकिन उनको सुरक्षा के कोई उपकरण मुहैया नहीं कराए गए हैं, साथ ही मदद के रूप में कोई सहयोग राशि भी नहीं दी गई है।
संगठन की महामंत्री रजनी जोशी ने कहा कि भोजन माता बहुत गरीब परिवारों से आती हैं और उन्हें मिलने वाला मानदेय मात्र मात्र 2000 रुपए मासिक वर्ष में केवल 11 माह ही मिलता है। बढ़ती महंगाई में इससे उनका घर चलना पहले मुश्किल ही होता है, जबकि अब लॉक डाउन में कार्यरत रहने के बावजूद उन्हें इस जून माह का मानदेय नहीं मिलना है। उन्होंने बताया कि ज्ञापन देने के दौरान एसडीएम अपने कार्यालय में मौजूद नहीं थे। करीब डेढ़ घंटे के इंतजार के बाद उनकीएसडीएम ने फोन पर बात हो पाई, और काफी देर रुकने के बाद ही ज्ञापन दे पाये। ज्ञापन में उन्होंने न्यूनतम मानदेय 15000 रुपए करने, महंगाई भत्ता तथा जून माह का मानदेय भी देने, क्वारंटाइन सैंटरों में लगी भोजन माताओं को सुरक्षा के उपकरण मुहैया कराने एवं मदद के रूप में प्रतिमाह हजार रुपए की सहयोग राशि देने की मांग भी की है।

यह भी पढ़ें : क्वारन्टाइन सेंटर में दलित भोजन माता के हाथ का खाना न खाने पर नाबालिग सहित दो के खिलाफ मुकदमा दर्ज

-दलित भोजन माता के हाथ का खाना न खाकर घर से खाना मंगवाने का आरोप
नवीन समाचार, नैनीताल 20 मई 2020। देश में कोरोना संक्रमण के बीच देश-दुनिया में साफ-सफाई व संक्रमण के दृष्टिगत सामाजिक-शारीरिक दूरी बरतने के दिशा-निर्देशों के बीच अस्पृश्यता को लेकर उठे प्रश्नों के बीच नैनीताल जनपद में एक नाबालिग सहित दो लोगो पर अस्पृश्यता निवारण अधिनियम 1955 सहित अन्य धाराओं में मुकदमा दर्ज हुआ है। गांव के विद्यालय में क्वारन्टाइन किये गये सवर्ण जाति के 12 वर्षीय नाबालिग व उसके चाचा पर आरोप है कि वह दलित भोजन माता के हाथ का बना खाना नहीं खा रहे हैं, बल्कि अपने घर से भोजन मंगा कर खा रहे हैं। इस मामले में ग्राम प्रधान मुकेश चंद्र की शिकायत पर राजस्व पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर लिया है।
मामले में ग्राम पंचायत भुमका के ग्राम प्रधान मुकेश चंद्र ने राजस्व निरीक्षक पट्टी नाई तहसील धारी जनपद नैनीताल को लिखित शिकायती पत्र दिया है कि पूर्व माध्यमिम विद्यालय ग्राम सभा भुमका में बाहर से आने के कारण क्वारन्टाइन किये गये पांच लोगों में से तीन लोग अनुसूचित जाति के व दो सवर्ण जाति के हैं। सवर्ण जाति के दिनेश मेलकानी पुत्र पान देव मेलकानी व नाबालिग अंकित चंद्र पुत्र कैलाश चंद्र मेलकानी जातिवादी हीन भावना के कारण भोजन माता के हाथ का बना भोजन-पानी नहीं ले रहे हैं, बल्कि अपने घर से मंगा रहे हैं। इस मामले में उन्होंने अनुसूचित जाति जनजाति अत्याचार अधिनियम 1989, अस्पृश्यता निवारण अधिनियम 1955 व महामारी एक्ट 188 एवं संबंधित प्राविधानों के तहत कार्रवाई करने की मांग की। इस पर राजस्व उपनिरीक्षक रवि पांडे ने मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू करने की बात कही है।
इस मामले में कुछ नये तथ्य भी उजागर हुए हैं। देश-प्रदेश के एक प्रतिष्ठित समाचार चैनल की हूबहू कॉपी कर बनाये गये एक यूट्यूब चैनल न्यूज31 उत्तराखंड का एक वीडियो इस संबंध में सोशल मीडिया में वायरल हो रहा है। जिसमें कथित तौर पर चेहरे पर मास्क लगाया हुआ रिपोर्टर पूर्व माध्यमिम विद्यालय भुमका में बने क्वारन्टाइन सेंटर में क्वारन्टाइन किये गये लोगों का इसी विषय में साक्षात्कार लेता नजर आता है। बाद में उसी के डीलडॉल व कमीज पहने व्यक्ति इसी वीडियो में ग्राम प्रधान के रूप में अपना वक्तव्य देता है। यानी ऐसा लगता है कि ग्राम प्रधान ही रिपोर्टर के रूप में लोगों के साक्षात्कार ले रहा है। इस साक्षात्कार के शुरू में यह बात भी कही जाती है कि अब तक क्वारन्टाइन किये गये अनुसूचित जाति के व्यक्ति भी अपने घरों से ही भोजन ला रहे थे। इस मामले में क्षेत्रीय लोग ग्राम प्रधान के गैर अधिकृत यूट्यूब चैनल के रिर्पोटर के रूप में क्वारन्टाइन में जाकर नाबालिग बच्चे व अन्य की निजता को सार्वजनिक करने के भी आरोप लगा रहे हैं।
दूसरे, आरोपित युवक दिनेश मेलकानी के द्वारा नैनीताल के जिलाधिकारी को पत्र लिखकर कहा है कि वह स्वयं अथवा अपनी माता आदि परिजनों के हाथ का ही भोजन करते हैं। उन्हें धार्मिक स्वतंत्रता का अधिकार भी स्वयं बनाये भोजन को ग्रहण करने का अधिकार देता है। उन्होंने आरोप लगाया है कि उसे ग्राम प्रधान मुकेश बौद्ध उन पर भोजन माता के द्वारा बनाया भोजन ग्रहण करने के लिए बाध्य किया जा है। इस कारण वह मानसिक तनाव महसूस कर रहा है। मुकेश बौद्ध के खिलाफ जांच कराकर आवश्यक कार्रवाई की जाये, अन्यथा वह आत्महत्या के लिये विवश होगा।
इधर नैनीताल जनपद के जिलाधिकारी सविन बंसल ने अन्य मामले में बुधवार को जनपद के ग्राम प्रधानों को पत्र लिखकर कहा है, ‘चूंकि गांव में क्वारन्टाइन किये गये लोग गांव के ही निवासी हैं, इसलिये उनके भोजन व बिस्तर की व्यवस्था उनके घरों से करा ली जाये। यदि प्रवासी के घर के लोग बहुत गरीब हैं तो ग्राम प्रधान इसकी व्यवस्था करें और खर्च की प्रतिपूर्ति वित्त आयोग की कन्टीजेंसी मद से करा लें’।
इस प्रकार देखें तो क्वारन्टाइन में रखे गये लोगों के भोजना का पहला विकल्प उनके घरों से भेाजन मंगाने का ही है। घरों की आर्थिक स्थिति खराब होने पर ही ग्राम प्रधानों को भोजन का प्रबंध करना है। इस तरह इस मामले में कई नये पक्ष भी सामने आ रहे हैं।

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