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चमत्कार : बादलों के कारण सदी का सबसे लंबा चंद्रग्रहण नहीं देख पा रहे हैं तो यहां देखें लाइव..

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नवीन जोशी, नैनीताल। 27 जुलाई को पड़ने जा रहा चंद्रग्रहण 21वीं शताब्दी का सबसे लंबा चंद्र ग्रहण तो है ही, साथ ही यह इसलिए भी खास है कि इस दौरान मंगल ग्रह की भी अनूठी युति बन रही है। 27 जुलाई को मंगल ग्रह के साथ ‘समक्षता’ की अनूठी स्थिति बन रही है। इस स्थिति में 27 जुलाई के सूर्यास्त के दौरान जहां सूर्य पश्चिम दिशा में छुप रहा होगा, वहीं मंगल ठीक इसी समय पूर्व दिशा से उदित हो रहा होगा। यानी मंगल और सूर्य इस दिन पृथ्वी के सापेक्ष ठीक विपरीत दिशाओं में होंगे। साथ ही यह भी विदित तो इसके चार दिन बाद ही 31 जुलाई को मंगल ग्रह पृथ्वी के सर्वाधिक करीब, केवल 15.76 करोड़ किमी की दूरी पर होने वाला है, और 27 जुलाई को भी यह दूरी इससे बहुत अधिक नहीं होगी। यानी इस दिन एक तो सबसे लंबा चंद्र्रग्रहण होगा, साथ ही मंगल भी बहुत करीब होगा। ऐसे में यह मौका खगोल वैज्ञानिकों के लिए तो बहुत खास होगा ही साथ ही चांद-सितारों में रुचि रखने वाले आम लोगों के लिए भी अविस्मरणीय होगा। इस दौरान खासकर वैज्ञानिकों को यह दुविधा भी रहेगी कि वह चांद का अध्ययन करें, अथवा मंगल का, अथवा दोनों का। इस दौरान मंगल की चमक अपनी औसत चमक से करीब 12 गुना अधिक होगी। जिसमें लालिमा लिए लाल ग्रह को पहचान पाना जरा भी मुश्किल नहीं होगा। आसमानी आतिशबाजी में डेल्टा एक्वारिड्स उल्का वृष्टि 27 जुलाई की रात चरम पर रहने वाली है, जिसमें इस वृष्टि की सर्वाधिक उल्काएं नजर आएंगी। इसके बाद भी इसे अगस्त माह तक देखा जा सकेगा। इस दौरान देश के अधिकाँश क्षेत्रों में बरसात के मौसम का आसमान बादलों से ढका हुआ है। ऐसे में चंद्रग्रहण पर भी ‘ग्रहण’ लग रहा है। अधिकाँश लोग चंद्रग्रहण को नहीं देख पा रहे हैं।
उल्लेखनीय है कि 27 जुलाई 2018 के दिन शुक्रवार को पूरे एशिया, यूरोप के अनेक हिस्सों के साथ ही ऑस्ट्रेलिया, अफ्रीका और दक्षिण अमेरिका से भी चद्र ग्रहण देखा जा सकेगा। यह चंद्र ग्रहण 31 जनवरी को तीन घंटे 23 मिनट तक रहे ब्लड मून, ब्लू मून और सुपर मून भी कहे गये पहले चंद्रग्रहण के बाद साल 2018 का दूसरा चंद्र ग्रहण है। इस बार का चंद्र ग्रहण इसलिए अधिक महत्वपूर्ण है क्योंकि इस दौरान हमारी पृथ्वी सूर्य और मंगल के बीच से होकर गुजर रही है, और 27 जुलाई को मंगल 2003 के बाद ऐसी ‘समक्षता’ की सर्वश्रेष्ठ स्थिति में होने वाला है। ऐसे में इस दौरान मंगल 15 वर्ष के बाद पृथ्वी से सबसे नजदीक और साफ दिखाई देगा।

ग्रहणों के बारे में रोचक तथ्य :

वैज्ञानिकों के अनुसार धरती की ऋतुओं की ही तरह ग्रहण का भी बाकायदा सीजन होता है जो लगभग हर छह माह के अंतराल पर आता है और 31 से 37 दिन तक चलता है, और अगले करीब छह माह (173.31 दिन ) तक कोई ग्रहण नहीं पड़ता है। साथ ही सूर्य और चंद्रग्रहण कभी भी अकेले नहीं लगते बल्कि 14 या 15 दिन के अंतराल पर छमाही सीजन की 31 से 37 दिन की अवधि के दौरान हर पूर्णिमा पर अवश्य ही (कभी पूर्ण और कभी आंशिक) चंद्र और हर अमावस्या पर सूर्य ग्रहण पड़ता है। इस अवधि में कम से कम एक-एक अमावस्या और पूर्णिमा अवश्य पड़ती हैं और कभी-कभी तीन भी पड़ सकती हैं।  जो भी ग्रहण पड़ेंगे वे इस 31 से 37 दिन की अवधि में ही पड़ेंगे और छह माह बाद पुन: 31 से 37 दिन का ग्रहण सीजन आएगा और तब उसमें ग्रहण  पड़ेंगे।  ये ग्रहण विश्व के अलग हिस्सों में बारी-बारी से सूर्य और चंद्रमा पर लगते हैं। इसलिए कई बार ये एक ही देश-क्षेत्र से नहीं भी देखे जा सकते हैं।

प्रत्येक सीजन में कम से कम दो और अधिकतम तीन ग्रहण पड़ सकते हैं। इस प्रकार दो सीजन में कम से कम चार व अधिकतम छह ग्रहण पड़ते हैं।  दोनों सीजन के बीच की अवधि छह माह से कुछ 173.31 दिन की होती है जो कि सूर्य के एक से दूसरे गोलार्ध में जाने की अवधि है। इस प्रकार कभी-कभी यदि वर्ष की बिल्कुल शुरुआत में ग्रहण सीजन पड़ जाए तो 365 दिवसीय कैलेंडर वर्ष में तीसरा ग्रहण सीजन भी लग जाता है।  ऐसे में एक वर्ष में अधिकतम कुल सात ग्रहण भी पड़ सकते हैं।  आर्य भट्ट शोध एवं प्रेक्षण विज्ञान संस्थान एरीज के निदेशक डा. अनिल पांडे का कहना है कि प्रत्येक ग्रह के अपनी धुरी या सूर्य के चारों ओर घूमने का या धूमकेतु आदि के नजर आने की अवधि का अपना टाइम टेबल होता है जिसके अनुरूप ये चलते हैं।

बीते पांच वर्षों में पड़े ग्रहण और आगामी पांच वर्षों में पड़ने वाले ग्रहणों की नासा द्वारा घोषित तिथियां :

वर्ष 2014  : 15 अप्रैल पूर्ण चंद्र ग्रहण, 29 अप्रैल  सूर्यग्रहण, 08 अक्टूबर पूर्ण चंद्र ग्रहण, 23 अक्टूबर सूर्य ग्रहण 
वर्ष 2015 : 20 मार्च पूर्ण सूर्य ग्रहण, 04 अप्रैल पूर्ण चंद्र ग्रहण, 13 सितंबर सूर्य ग्रहण, 27 सितंबर चंद्र ग्रहण 
वर्ष 2016 :  8-9 मार्च पूर्ण सूर्य ग्रहण, 23 मार्च चंद्र ग्रहण, 18 अगस्त चंद्र ग्रहण, 01 सितंबर सूर्य ग्रहण, 16-17 सितंबर चंद्र ग्रहण 
वर्ष 2017 : 10-11 फरवरी चंद्र ग्रहण26, फरवरी सूर्य ग्रहण, 7-8 अगस्त  चंद्र ग्रहण, 21 अगस्त सूर्य ग्रहण 
वर्ष 2018 : 31 जनवरी पूर्ण चंद्रग्रहण, 15 फरवरी आंशिक सूर्यग्रहण, 13 जुलाई आंशिक सूर्य ग्रहण, 27-28 जुलाई पूर्ण चंद्र ग्रहण, 11 अगस्त आंशिक सूर्य ग्रहण 
वर्ष 2019 : 5-6 जनवरी आंशिक सूर्य ग्रहण, 20-21 जनवरी पूर्ण सूर्य ग्रहण, 2 जुलाई पूर्ण सूर्य ग्रहण, 16-17 जुलाई आंशिक चंद्र ग्रहण, 19 दिसंबर आंशिक सूर्य ग्रहण 
वर्ष 2020 : 19 दिसंबर 1919 के ग्रहण के 15 दिन बाद 10 जनवरी चंद्र ग्रहण, 5 जून चंद्र ग्रहण, 21 जून सूर्य ग्रहण, 4 जुलाई चंद्र ग्रहण 
वर्ष 2021 : 26 मई पूर्ण चंद्र ग्रहण, 10 जून सूर्य ग्रहण, 18-19 नवंबर चंद्र ग्रहण, 4 दिसंबर पूर्ण सूर्य ग्रहण 
वर्ष 2022 : 30 अप्रैल सूर्य ग्रहण, 15 मई चंद्र ग्रहण, 25 अक्टूबर सूर्य ग्रहण, 8 नवंबर पूर्ण चंद्र ग्रहण 
वर्ष 2023 : 20 अप्रैल पूर्ण सूर्य ग्रहण, 5 मई  चंद्र ग्रहण, 14 अक्टूबर सूर्य ग्रहण, 28 अक्टूबर चंद्र ग्रहण

चंद्रग्रहण के समय क्या करें, क्या न करें : 

27 -28 जुलाई 2018 की मध्य रात्रि को घटित होने वाला चंद्रग्रहण पूर्ण चंद्रग्रहण है तथा 21वीं सदी का सबसे देर तक चलने वाला चंद्रग्रहण है । सामान्यतः ग्रहण की अवधि एक या डेढ़ घंटे की होती है, परन्तु यह चंद्रग्रहण 3 घंटे 55 मिनट तक रहेगा। खगोलविदों के अनुसार इतना लंबा चंद्रग्रहण इसके बाद सदी के अंत तक दिखाई नहीं देगा। इस बार ग्रहण के दिन गुरु पूर्णिमा भी है इस कारण इस चंद्रग्रहण का विशेष महत्व होगा। चंद्रग्रहण की शुरुआत चंद्रमा के उदय के साथ रात 11 बजकर 54 मिनट से होगी। ग्रहण का मध्यकाल रात 1 बजकर 54 मिनट पर होगा और ग्रहण की समाप्ति 3 बजकर 49 मिनट पर होगी।

चंद्रग्रहण के दौरान यह करें और यह न करें :

  1. ग्रहण के समय भोजन नहीं करना चाहिए।भोजन करने से अनेक प्रकार के व्याधियों से ग्रसित हो सकते है। यही कारण ग्रहणकाल में भोजन करना निषेध है  उस समय घर में रखा हुआ खाना या पेय पदार्थ पुनः उपयोग करने लायक नहीं होता है। हाँ ग्रहण या सूतक से पहले ही यदि सभी भोज्य पदार्थ यथा दूध दही चटनी आचार आदि में कुश  या तुलसी का पत्तारख देते है तो यह भोजन दूषित नहीं होता है और आप पुनः इसको उपयोग में ला सकते है।
  2. सूतक एवं ग्रहण काल में झूठ, कपट, डींग हाँकना आदि कुविचारों से परहेज करना चाहिए।
  3. ग्रहण काल में मन तथा बुद्धि पर पड़ने वाले कुप्रभाव से बचने के लिए जप, ध्यानादि करना चाहिए।
  4. ग्रहण काल में व्यक्ति को मूर्ति स्पर्श, नाख़ून काटना, बाल काटना अथवा कटवाना, निद्रा मैथुन आदि कार्य नहीं करना चाहिए।
  5. इस काल में स्त्री प्रसंग से नर-नारी दोनों को बचना चाहिए अन्यथा आँखो की बिमारी होने का गंभीर खतरा बना रहता है।
  6. इस समय बच्चे, वृद्ध, गर्भवती महिला, एवं रोगी को यथानुकूल खाना अथवा दवा लेने में कोई दोष नहीं लगता है।
  7. ग्रहण काल में शरीर, मन तथा बुद्धि में सामंजस्य बनाये रखना चाहिए मन-माने आचरण करने से मानसिक तथा बौद्धिक विकार के साथ-साथ शारीरिक स्वास्थ्य का भी क्षय होता है।
  8. ग्रहणकाल में मन, वचन तथा कर्म से सावधान रहना चाहिए।
चंद्रग्रहण के समय क्या करें, क्या न करें
दान करते हुए दानवीर कर्ण

9. चंद्रग्रहण के समय धार्मिक श्रद्धालु लोगों को अपनी राशि के अनुसार दान योग्य वस्तुओं का संग्रह करके संकल्प करना चाहिए तत्त्पश्चात् ग्रहण मोक्ष के अनन्तर अथवा अगले दिन यानि  28 जुलाई 2018 को सुबह सूर्योदय काल में स्नान करके संकल्प पूर्वक अपने सामर्थ्य के अनुसार योग्य ब्राह्मण को दान देना चाहिए।

चंद्रग्रहण का विभिन्न राशियों पर पड़ने वाले शुभ-अशुभ फल :

मेष राशि

इस राशि वाले वाले जातकों के ऊपर चंद्रग्रहण का प्रभाव अशुभ होगा। मेष राशि वाले जातक रोग के प्रभाव में आ सकते है। शारीरिक कष्ट होगा तथा चिंता एवं भय का माहौल बना रहेगा। बिना संघर्ष के कोई भी कार्य होने की स्थिति में नहीं होगा। समस्याएं विकराल रूप धारण कर सकती है।अतएव धैर्य धारण करना ही श्रेष्ठकर होगा।

वृष राशि

इस राशि वाले वाले जातकों के ऊपर चंद्रग्रहण का प्रभाव अशुभ तथा शुभ दोनों रूप में  होगा। मकर तथा वृष राशि का सम्बन्ध पंचम नवम होने से संतान कष्ट एवं संतान सम्बन्धी चिंताए बढ़ जाएगी। इसके अतिरिक्त नए कार्यो की सम्भावनाये बढ़ेंगी। पिता से सम्बन्धो में किंच्चित कड़वाहट आ सकती है।

मिथुन राशि

इस राशि वाले  वाले जातकों के ऊपर चंद्रग्रहण का प्रभाव अशुभ होगा। जातक को दुर्घटना का भय बना रहेगा अतः गाड़ी संभलकर चलाये। शत्रु अधिक प्रभावी हो जायेंगे। अनावश्यक खर्च अधिक बढ़ जायेगा। कार्यो में व्यवधान उत्पन्न होगा रिश्वत लेने वाले संभलकर रिश्वत ले या रिश्वत लेना बंद कर दे अन्यथा दंड के पात्र बन सकते है।

कर्क राशि

मकर तथा कर्क राशि का समसप्तक सम्बन्ध होने के कारण पति-पत्नी के सम्बन्धो में कटुता एवं अविश्वास का माहौल बना रहेगा। शारीरिक कष्ट बढ़ेगा। साझेदारी के कार्यो में व्यर्थ के तनाव हो सकते है।

सिंह राशि

सिंह राशि वाले जातकों के ऊपर इस चंद्र ग्रहण का प्रभाव अशुभ ही होगा। चंद्रग्रहण मकर राशि में घटित हो रहा है सिंह राशि से मकर राशि का स्थान षष्ठ है तथा मकर से सिंह राशि अष्टम है 6/8 का सम्बन्ध ज्योतिष में अच्छा नहीं माना जाता है एतदर्थ इस राशि वाले जातक रोग के प्रभाव में आ सकते है। किंचित आंतरिक चिंता बढ़ जाएगी। कार्य विलम्ब से होगा तथा कार्यस्थल पर भी समस्याएं आ सकती है।

 कन्या राशि

इस राशि वाले वाले जातकों के ऊपर चंद्रग्रहण का प्रभाव अशुभ तथा शुभ दोनों रूप में  होगा। मकर तथा कन्या राशि का सम्बन्ध नवम-पंचम होने से संतान कष्ट एवं संतान सम्बन्धी चिंताए बढ़ जाएगी। इसके अतिरिक्त नए कार्यो की सम्भावनाये बढ़ेंगी। पिता के साथ रिश्तो में तनाव आ सकता है।

तुला राशि

इस राशि के जातको का भागदौड़ अधिक बढ़ जायेगा। मकर तुला राशि का चतुर्थ-दशम सम्बन्ध होने के कारण शुभ कार्यों के ऊपर खर्च बढ़ेगा। कार्यो का विस्तार होगा। पारिवारिक वृद्धि होगी।

वृश्चिक राशि

इस राशि वालों के लिए भी यह ग्रहण शुभ फल प्रदान करने वाला होगा। कार्यो में प्रगति होगी। नए कार्य के अनेक अवसर आएंगे तथा वह कार्य जो किसी कारणवश रुके हुए थे उस कार्य को करने के लिए आपमें उत्साह आएगा तथा कार्य शीघ्र ही पूरा हो जायेगा। जातक के पुरुषार्थ चतुष्टय (धर्म,अर्थ,काम और मोक्ष) में वृद्धि होगी।

धनु राशि

इस राशि वाले जातकों के ऊपर इस चंद्रग्रहण का प्रभाव अशुभ ही होगा। मकर तथा धनु राशि का का सम्बन्ध द्विद्वादश 2/12 होने से धन की हानि होगी। सामान्य जीवन में खर्च अधिक बढ़ जायेगा। आपको व्यर्थ में यात्रा करनी पड़ेगी। सिंह राशि पर शनि की दृष्टि पड़ने से अशुभ कार्यो में या रोग आदि में व्यय करने पड़ सकते है।

मकर राशि

मकर राशि वालो का इस चंद्रग्रहण का फल विशेष रूपेण अशुभ एवं कष्टकारी होगा। शारीरिक कष्ट, शरीर में चोट लगना तथा मन में भय बना रहेगा। धन हानि की प्रबल संभावनाएं बनी रहेगी अतः सोच समझकर ही योजनाए बनाये। कार्यो में व्यवधान उत्पन्न होगा रिश्वत लेने वाले संभलकर रिश्वत ले या रिश्वत लेना बंद कर दे अन्यथा दंड के पात्र बन सकते है।

कुम्भ राशि

इस राशि वाले जातकों के ऊपर चंद्रग्रहण का प्रभाव अशुभ ही होगा। धन-हानि की संभावनाए शत प्रतिशत बनी रहेगी। पारिवारिक क्लेश एवं विचार भिन्नता के कारण घर में अशांति का वातावरण बना रहेगा।

मीन राशि

मीन राशि वाले जातकों के ऊपर इस चंद्रग्रहण का प्रभाव  शुभ होगा। धन धान्य की वृद्धि होगी। पारिवारिक सुख एवं सौहार्द बना रहेगा। कार्यो का विस्तार होगा। अपने परिश्रम से आप भाग्य का निर्माण करने में समर्थ होंगे।

ग्रहण के अशुभ प्रभाव के समाधान के उपाय : 

जिस राशि के लिए ग्रहण का फल अशुभ होगा उस जातक को अपने सामर्थ्य के अनुसार ग्रह राशि (चन्द्रमा तथा राशि स्वामी बुध की) कारक वस्तुओं का दान करना चाहिए इससे जातक के ऊपर पड़ने वाले अशुभ प्रभाव को कम किया जा सकता है | साथ ही मंत्र एवं स्तोत्र का जप-पाठ करने से भी अशुभ प्रभाव कम हो जाता है। ग्रहण के बाद औषधि स्नान करने से भी अशुभ प्रभाव को दूर किया जा सकता है।

यह भी पढ़ें : अशुभ 13 तारीख को 44 साल बाद सूर्यग्रहण पर होगा ऐसा..

शुक्रवार 13 जुलाई को सुबह 7 बजकर 18 मिनट से साल का दूसरा आंशिक सूर्यग्रहण लगने जा रहा है। हालांकि, इस  2 घंटे 25 मिनट तक लगने वाले ग्रहण को भारत में लोग नहीं देख पाएंगे। इसे आस्ट्रेलिया के सुदूर दक्षिणी भागों, तस्मानिया, न्यू जीलैंड के स्टीवर्ट आइलैंड, अंटार्कटिका के उत्तरी हिस्से, प्रशांत और हिंद महासागर में ही देखा जा सकेगा। लेकिन यह ग्रहण कुछ मायनों में दूसरे सूर्यग्रहण से अलग है।

13 जुलाई को चूंकि शुक्रवार है। इस 13 तारीख और शुक्रवार के मेल को लोकप्रिय संस्कृति में ‘बुरी किस्मत’ का सूचक माना जाता है। इस दिन और तारीख को 44 साल पहले 13 दिसंबर 1974 को ग्रहण लगा था। ‘टाइम’ पत्रिका के अनुसार इसके बाद से अब तक कोई भी सूर्यग्रहण इस तारीख को नहीं लगा। आगे अब शुक्रवार और 13 तारीख के मेल वाला ऐसा सूर्यग्रहण 13 सितंबर 2080 को लगेगा।

सूर्य ग्रहण के दौरान क्या करें-क्या नहीं
ज्योतिषियों के अनुसार सूर्य ग्रहण के 12 घंटे पहले सूतक लग जाते हैं और सूतक के दौरान कुछ खास कामों को करने की मनाही होती है। कोई भी शुभ काम सूतक के समय नहीं करने चाहिए। 12 घंटे के अनुसार सूर्य ग्रहण के सूतक 12 जुलाई की शाम 8 बजे से लग जायेंगे। इसके अलावा अमावस्या भी 13 जुलाई के दिन सुबह 8:17 मिनट तक रहेगी। ज्योतिषों का कहना है कि इस सूर्य ग्रहण का प्रभाव भारत में ज्यादा नहीं पड़ेगा क्योंकि भारत में ये आंशिक ही दिखाई देगा।
ग्रहण के अलावा आषाढ़ अमावस्या पूर्वजों की आत्मा की तृप्ति के लिए खास मानी जाती है। इसमें श्राद्ध की रस्में की जाती हैं और पूर्वजों को प्रसन्न किया जाता है। इसी के साथ बता दें ग्रहण 13 जुलाई को भारतीय समयानुसार सुबह 7 बजकर 18 मिनट 23 सेकंड से शुरू होगा, और 8 बजकर 13 मिनट 5 सेकंड तक रहेगा। इस दौरान कोई भी काम करने से बचें. माना जाता है ग्रहण के दौरान किसी भी काम को नहीं करना चाहिए।
क्यों लगता है सूर्यग्रहण?
बता दें कि विज्ञान के मुताबिक सूर्य ग्रहण एक खगोलीय घटना है। जब भी चांद चक्कर काटते हुए सूरज और पृथ्वी के बीच आता है तो पृथ्वी पर सूर्य आंशिक या पूरी तरह से दिखना बंद हो जाता है। सूर्य, चंद्रमा और पृथ्वी तीनों के एक ही सीधी रेखा में आ जाने से चांद सूर्य की उपछाया से होकर गुजरता है, जिस वजह से उसकी रोशनी फीकी पड़ जाती है। इसी को सूर्यग्रहण कहा जाता है।

यह भी पढ़ें : ब्लू, सुपर व ब्लड मून चंद्रग्रहण के बहाने धरती की सेहत जांचने में जुटे भारत व जापान के वैज्ञानिक

  • इस अध्ययन से यदि कोई नये वैज्ञानिक तथ्य स्थापित होते हैं, तो वैज्ञानिक दूसरे ग्रहों पर जीवन की संभावनाओं जैसे बड़े लक्ष्य के लिए भी कर सकते हैं इस तकनीक का उपयोग
  • एरीज में 104 सेमी की दूरबीन पर एरीज द्वारा ही निर्मित यंत्र पोलेरोमीटर से रख रहे हैं चांद पर नजर
  • आसमान में हल्के बादल, रात्रि तक रहे तो लग सकता है उम्मीदों को झटका
31 जनवरी 2018 के चंद्रग्रहण की ताज़ा तस्वीर

नवीन जोशी, नैनीताल। मानव हर स्थिति में अपने लिए कुछ लाभ के अवसर खोज ही लेता है। करीब 3.63 लाख किमी दूर चांद पर पड़ने जा रही पूर्ण चंद्रग्रहण की आभाषीय स्थिति में भी मानव ने अपना लाभ खोजने का अवसर निकाल लिया है। भारत और जापान के वैज्ञानिक मुख्यालय स्थित आर्यभट्ट प्रेक्षण विज्ञान शोध संस्थान यानी एरीज में चंद्रग्रहण का एरीज में ही निर्मित पोलेरोमीटर नामक यंत्र से प्रेक्षण कर पृथ्वी के वायुमंडल का अध्ययन करने में जुट गये हैं। यह पहली बार है जब जापान के बाद भारत में इस तरह के चंद्रग्रहण के दौरान प्रेक्षण किये जा रहे हैं। इस अध्ययन से यदि पृथ्वी के वायुमंडल के बारे में यदि कोई नये वैज्ञानिक तथ्य स्थापित होते हैं, तो वैज्ञानिक इस तकनीक का इस्तेमाल दूसरे ग्रहों पर जीवन की संभावनाओं जैसे बड़े लक्ष्य के लिए भी कर सकते हैं। अलबत्ता, नैनीताल में बुधवार को उभर आए हल्के बादलों की उपस्थिति ने वैज्ञानिकों की उम्मीदों व संभावनाओं को कुछ झटका देने का इशारा भी किया है।

चंद्रग्रहण पर अध्ययनों के बारे में जानकारी देते एरीज व जापान के वैज्ञानिक।

बुधवार को एरीज में एरीज के निदेशक डा. अनिल कुमार पांडे जापान की निशी हारिमा ऑब्जरवेटरी के निदेशक प्रो. वाई ईटो व जापान के साथ इस संयुक्त परियोजना के प्रभारी दिल्ली विश्वविद्यालय के डा. वाईपी सिंह व वरिष्ठ वैज्ञानिक डा. शशिभूषण पांडे तथा अन्य के साथ प्रेस से मुखातिब हुए। इस दौरान उन्होंने बताया कि प्रो. ईटो ने चार अप्रैल 2015 को जापान की हवाई स्थित 8 मीटर व्यास की सुबारू नाम की ऑप्टिकल टेलीस्कोप से इस तरह का अध्ययन किया था, जिसके प्रेक्षणों का यहां एरीज से पुष्टि करने की कोशिश है। यह इसलिए भी महत्वपूर्ण है कि जापान में 29 डिग्री अक्षांस से प्रेक्षण किये गये, जबकि इस बार जापान व भारत में 35 अंश अक्षांस पर स्थित एरीज से साथ-साथ इस तरह के प्रेक्षण किये जा रहे हैं, इससे अक्षांसों के अंतर पर अध्ययनों में अंतर का भी अध्ययन किया जा सकेगा। यह अध्ययन इसलिए भी खास हैं कि यह एरीज द्वारा ही वर्ष 2005 में बने पोलरमेट्री (ध्रुवीयमिति) नाम के उपकरण और यहां 1972 में स्थापित 104 सेमी व्यास की संपूर्णानंद दूरबीन पर किए जाएंगे। इस मौके पर दिल्ली विवि की शोध छात्रा सुषमा दास तथा जापान की छात्राएं मायू कारिटाव माई त्सुकाडा भी मौजूद रहीं। वैज्ञानिकों ने बताया कि भूकंप का भूकंप से कोई संबंध नहीं होता। आज अफगानिस्तान के हिंदुकुश क्षेत्र में आये भूकंप से भी आज होने जा रहे चंद्रग्रहण से कोई संबंध नहीं है।

इस तरह होगा अध्ययन
नैनीताल। बुधवार रात्रि चंद्रग्रहण के दौरान जो अध्ययन होना है, उसमें दूरबीन व पोलरमेट्री नाम के उपकरण की मदद से सूर्य व चंद्रमा के बीच आई पृथ्वी के ध्रुवों व बाहरी वायुमंडल से गुजरकर चांद पर पड़ने वाले प्रकाश का अध्ययन किया जाएगा। चूंकि चंद्रग्रहण के दौरान पृथ्वी सूर्य व चांद के बीच आ जाएगी, और पृथ्वी चांद पर पड़ने वाले सूर्य के प्रकाश को रोक देगी, बावजूद कुछ प्रकाश पृथ्वी के बाहरी छोरों, ध्रुवों से होकर चांद पर चला जाएगा। यही प्रकाश चांद पर लाल रंग की अनुभूति कराकर चांद को ‘ब्लड मून’ या रक्तवर्ण के चांद में बदल देगा। इस प्रकार इस अध्ययन से पृथ्वी के बाहरी वायुमंडल में मौजूद धूल के कणों व अन्य तत्वों का अध्ययन भी किया जा सकेगा। यदि इस तरह कोई वैज्ञानिक तथ्य स्थापित हो जाते हैं तो इस तकनीक का प्रयोग सौरमंडल के अन्य ग्रहों के वातावरण व वहां जीवन की संभावनाओं के अध्ययन में भी किया जा सकेगा।

ब्लू, सुपर व ब्लड मून की ऐसी अगली अनोखी घटना 2034 में होगी

नैनीताल। इसे समझने से पहले यह समझ लें कि किसी अंग्रेजी महीने में दो पूर्णिमा पड़ने पर दूसरी पूर्णिमा के चांद को ‘ब्लू मून’, पूर्णिमा के दिन चांद के अपने परवलयाकार पथ पर धरती से सबसे करीब (करीब 3.63 लाख किमी दूर) होने की स्थिति में पूर्णिमा के चांद को ‘सुपर मून’ एवं ग्रहण की दशा में पृथ्वी के परावर्तित प्रकाश के प्रभाव में लाल दिखाई देने को ‘ब्लड मून’ कहा जाता है। वैज्ञानिकों ने बताया कि यह तीनों स्थितियां दशकों बाद होती हैं। हालांकि हर वर्ष दुनिया में करीब दो चंद्र और दो या तीन सूर्यग्रहण पड़ते हैं, और आगे 27-28 जुलाई 2018, 20-21 जनवरी 2019, 26 मई 2021, 15-16 मई 2022 को भी चंद्रग्रहण पड़ेंगे, किंतु ब्लू, सुपर व ब्लड मून की घटना अगली बार 25 नवंबर 2034 में होगी। इससे पहले भी ऐसा संयोग करीब डेढ़ दशक पूर्व ही बना था। बताया कि इस दौरान पृथ्वी से सर्वाधिक करीब होने के कारण चांद करीब 12 से 14 फीसद बड़ा एवं 30 फीसद अधिक चमकदार होगा। चंद्रग्रहण शाम 5.18 पर शुरू होगा, 6.21 से 7.37 तक पूर्णता की स्थिति में होगा, और 8.41 बजे समाप्त हो जाएगा।
चंद्रग्रहण पर अध्ययनों के बारे में जानकारी देते एरीज व जापान के वैज्ञानिक।

इसके साथ ही वैज्ञानिकों ने यह साफ किया कि ब्लू, ब्लड व सुपर मून का चांद के रंगों से कोई संबंध नहीं है। आज तीन रंगों में चांद के दिखने की मीडिया में चल रही बातें झूठी हैं। ब्लू मून का अर्थ चांद का नीला दिखना नहीं है, बल्कि जैसा ऊपर लिखा है वह है। अलबत्ता चांद इस दौरान लाल रंग में नजर आएगा।

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नवीन समाचार

मेरा जन्म 26 नवंबर 1972 को हुआ था। मैं नैनीताल, भारत में मूलतः एक पत्रकार हूँ। वर्तमान में मार्च 2010 से राष्ट्रीय हिन्दी दैनिक समाचार पत्र-राष्ट्रीय सहारा में ब्यूरो चीफ के रूप में कार्य कर रहा हूँ। इससे पहले मैं पांच साल के लिए दैनिक जागरण के लिए काम कर चुका हूँ। कुमाऊँ विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग से ‘नए मीडिया’ विषय पर शोधरत हूँ। फोटोग्राफ़ी मेरा शौक है। मैं NIKON COOLPIX P530 और अडोब फोटोशॉप 7.0 के साथ फोटोग्राफी कर रहा हूँ। फोटोग्राफी मेरे लिए दुनियां की खूबसूरती को अपनी ओर से चिरस्थाई बनाने का बहुत छोटा सा प्रयास है। एक फोटो पत्रकार के रूप में मेरी तस्वीरों को नैनीताल राजभवन सहित विभिन्न प्रदर्शनियों में प्रस्तुत किया गया, तथा उत्तराखंड की राज्यपाल श्रीमती मार्गरेट अलवा द्वारा सम्मानित किया गया है। कुछ चित्रों को राष्ट्रीय-अंतर्राष्ट्रीय पुरस्कार भी प्राप्त हो चुके हैं। गूगल अर्थ पर चित्र उपलब्ध कराने वाली पैनोरामियो साइट पर मेरी प्रोफाइल को 18.85 Lacs से भी अधिक हिट्स प्राप्त हैं।पत्रकारिता और फोटोग्राफी के अलावा मुझे कवितायेँ लिखना पसंद है। काव्य क्षेत्र में मैंने नवीन जोशी “नवेन्दु” के रूप में अपनी पहचान बनाई है। मैंने बहुत सी कुमाउनी कवितायेँ लिखी हैं, कुमाउनी भाषा में मेरा काव्य संकलन उघड़ी आंखोंक स्वींड़ प्रकाशित हो चुका है, जो कि पुस्तक के के साथ ही डिजिटल (PDF) फार्मेट पर भी उपलब्ध होने वाली कुमाउनी की पहली पुस्तक है। मेरी यह पुस्तक गूगल एप्स पर भी उपलब्ध है। ’ यहां है एक पत्रकार, लेखक, कवि एवं छाया चित्रकार के रूप में मेरी रचनात्मकता, लेख, आलेख, छायाचित्र, कविताएं, हिंदी-कुमाउनी के ब्लॉग आदि कार्यों का पूरा समग्र। मेरी कोशिश है कि यहां नैनीताल, कुमाऊं, उत्तराखंड और वृहद संदर्भ में देश की विरासत, संस्कृति, इतिहास और वर्तमान को समग्र रूप में संग्रहीत करने की….। मेरे दिल में बसता है, मेरा नैनीताल, मेरा कुमाऊं और मेरा उत्तराखंड

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