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खुशखबरी: अब अपने मोबाइल पर कुमाउनी-गढ़वाली में लिख सकेंगे अपने मन की बात… गूगल ने शुरू की सेवा

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       नवीन समाचार, नैनीताल, 02 दिसम्बर 2020। उत्तराखंड की लोकभाषाओं के बोलने वालों, साहित्यकारों, पाठकों व चाहने वालों के लिए खुशखबरी व बड़ी सफलता है। गूगल ने उत्तराखंड की दो प्रमुख लोक भाषाओं गढ़वाली व कुमाउनी को अपने गूगल कीबोर्ड-जीबोर्ड में स्थान दे दिया है। इसका लाभ अब कुमाउनी व गढ़वाली में लिखना चाहने वाले […]

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कुमाउनी भाषा का इतिहास

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      तारा चंद्र त्रिपाठी की पुस्तक ‘मध्य पहाड़ी भाषाओं का ऐतिहासिक स्वरूप’ पुस्तक में इतिहासकार मदन चंद्र भट्ट की पुस्तक ‘कुमाऊं की जागर कथायें’ के आधार पर कुमाउनी के शाके 911 यानी यान 989 और गढवाली के शाके 1377 यानी सन् 1455 तक के दान पत्र मिलने की बात कही गई है। सन् 989 के राजा […]

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उत्तराखण्ड की पत्रकारिता का इतिहास

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       आदि-अनादि काल से वैदिक ऋचाओं की जन्मदात्री उर्वरा धरा रही देवभूमि उत्तराखण्ड में पत्रकारिता का गौरवपूर्ण अतीत रहा है। कहते हैं कि यहीं ऋषि-मुनियों के अंतर्मन में सर्वप्रथम ज्ञानोदय हुआ था। बाद के वर्षों में आर्थिक रूप से पिछड़ने के बावजूद उत्तराखंड बौद्धिक सम्पदा के मामले में हमेशा समृद्ध रहा। शायद यही कारण हो […]

कुमाउनी समग्र

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       पढ़ें कुमाऊनी कवितायेँ, हिंदी भावानुवाद के साथ : दशहराक दिनाक तें खास कविता: भैम पनर अगस्ता्क दिन गाड़ ऐ रै… नईं जमा्न में… चुनावों पारि कुमाउनी कविता: फरक पडूं कां है रै दौड़ आम आदिम होलि पारि रंङोंकि कविता: पर्या रंङ खबरदार ! उमींद उदंकार लड़ैं चिनांड़ पछ्यांण ‘लौ’ कि ल्येखूं सिणुंक ढुड. राजक […]

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