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खुशखबरी: 13 मीटर चौड़ा होगा नैनीताल हाईवे, गुलाबघाटी की संकरी-भूस्खलन प्रभावित सड़क का 17 करोड़ से बनेगा विकल्प

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-अमृतपुर से काठगोदाम गौला पुल तक बनेगा 6 किमी लंबा वैकल्पिक मार्ग, हल्द्वानी में 18 स्थानों में लगेंगी ट्रैफिक लाइटें और काठगोदाम से मंडी तक बंद होंगे अनावश्यक टर्न
नवीन समाचार, हल्द्वानी, 8 नवंबर 2019। कुमाऊं मंडल के प्रमुख प्रवेश द्वार रानीबाग के निकट गुलाबघाटी पर सड़क पर अक्सर होने वाले भूस्खलन और यहां मार्ग संकरा होने के कारण अक्सर लगने वाले जाम का विकल्प तलाश लिया गया है। अमृतपुर से गौलापार पुल तक 6 किमी लंबे बाईपास के निर्माण को सहमति प्राप्त हो गई है। यहां 1731.50 लाख रुपए से बाइपास का निर्माण किया जाएगा। इसके बाद हल्द्वानी के गौलापार बाइपास से वाहन काठगोदाम के पुल पर आने के बजाय गौला नदी के पार से ही अमृतपुर को निकल जाएंगे। इसके अलावा नैनीताल राजमार्ग की चौड़ाई 13 मीटर तक बढ़ाई जाएगी।
शुक्रवार को कुमाऊं मंडल के आयुक्त राजीव रौतेला ने काठगोदाम स्थित सर्किट हाउस में हल्द्वानी शहर के लगातार हो रहे विस्तार को देखते हुए इसकी भविष्य की यातायात व्यवस्था के दृष्टिगत अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक की। इसी दौरान उन्होंने अमृतपुर-गौलापार बाईपास के बीच 6 किमी लंबे मार्ग एवं नैनीताल राजमार्ग की चौड़ाई 13 मीटर तक बढ़ाने के लिए प्रस्ताव तैयार करने की जानकारी दी। इस दौरान डीएम सविन बंसल ने सड़क सुरक्षा समिति द्वारा हल्द्वानी में यातायात के दबाव को कम करने के लिए सुझाये गये 13 बिंदुओं पर काम शुरू करने की जानकारी दी। डीआईजी जगतराम जोशी ने नरीमन चौराहा काठगोदाम से हल्द्वानी मंडी तक अनावश्यक डिवाइडर कट को बंद किये जाने की बात कही ताकि लोग अनावश्यक टर्न न ले सकें। बैठक में तहसील परिसर में बनने वाले नये भवन के बेसमेंट में पार्किंग की व्यवस्था करने, हल्द्वानी में डिवाइडर बनाने के साथ ही नारीमन तिराहा, हाइडिल तिराहा, डिग्री कालेज तिराहा, आईटीआई तिराहा, पीलीकोठी तिराहा, कुसुमखेड़ा तिराहा आदि 18 स्थानों पर 18 स्थानों पर ट्रैफिक लाइटें लगाने की बात भी कही गई। बैठक में वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक सुनील कुमार मीणा, सिटी मजिस्ट्रेट प्रत्यूष सिंह, मुख्य नगर आयुक्त सीएस मर्तोलिया, एसपी सिटी अमित श्रीवास्तव, आरटीओ राजीव मेहरा, आरएम परिवहन यशपाल सिंह, एआरटीओ डॉ.गुरदेव सिंह, विमल पाण्डे, एसडीएम गौरव चटवाल, अधीक्षण अभियंता लोनिवि रणजीत सिंह रावत, अधिशासी अभियंता लोनिवि हिम्मत सिंह रावत, मुख्य अभियंता लोनिवि वीके तिवारी, व्यापरी गोविन्द बगड़वाल के अलावा विद्यालयों के प्रबन्धक एवं प्रधानाचार्य सहित विभिन्न संगठनों के प्रतिनिधि आदि मौजूद रहे।

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-बड़े आकार की कारों से भी बसों-ट्रकों के लिए अनुमन्य 200 रुपए लिया जा रहा है शुल्क
-पार्किंग का चेक-आउट समय 11 की जगह 9 बजे करके भी किया गया है खेल

तमाम कमियों से भरी नगर पालिका की पार्किंग की स्लिप, जिसमें न गाड़ी का पूरा नंबर है न ही हस्ताक्षर

नवीन समाचार, नैनीताल, 13 जुलाई 2019। शनिवार को नगर से हटाये गये नगर पालिका के अधिशासी अधिकारी रोहिताश शर्मा के आदेशों पर नगर की लेक ब्रिज चुंगी में पालिका उपनियमों के विपरीत 5 की जगह 13 घंटे दोगुना शुल्क वसूले जाने का समाचार ‘नवीन समाचार’ ने प्रकाशित किया था। इस समाचार के बाद नगर पालिका को चुंगी पर लगाये गये बोर्डों में सुधार कर नियमानुसार चुंगी वसूलने की व्यवस्था लागू करनी पड़ी थी। इधर ईओ शर्मा के द्वारा नगर की पार्किंगों में भी किये गये एक बड़े गोलमाल की बात सामने आयी है।

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नगर की पार्किंगों में दो तरीके से नगर के आम जन व सैलानियों की जेब पर डाका डालने एवं ठेकेदारों को अनावश्यक लाभ पहुंचाने का प्रबंध किया गया है। पालिका उपनियमों के अनुसार नगर की पार्किंगों में छोटे वाहनों के लिए 100 एवं बड़े वाहनों के लिए 200 रुपए शुल्क लिये जाने की व्यवस्था है। परंतु यह साफ-साफ लिखा है कि बड़े वाहनों की श्रेणी में बस एवं ट्रक जाएंगे। वर्तमान में नगर में बस एवं ट्रकों का आना ही प्रतिबंधित है। शेष सभी चार पहिया वाहन छोटे वाहनों में ही गिने जाने हैं, किंतु नगर पालिका की पार्किंगों में एसयूवी की श्रेणी वाली बड़े आकार की कारों से बस एवं ट्रकों के लिए अनुमन्य दोगुना शुल्क लिया जा रहा है। अंडा मार्किट सहित कई पार्किंग में पार्किंग की दर सार्वजनिक न करके भी मनमाना शुल्क वसूलने का इंतजाम किया गया है। 

वहीं दूसरा गोलमाल चेक-आउट यानी पार्किंग छोड़ने के समय में किया गया है। पूर्व में नगर की पार्किंगों का चेक-आउट समय सुबह 11 बजे का था, जिसे बिना नियमों में परिवर्तन के 9 बजे कर दिया गया है। इसके परिणामस्वरूप पहले दिन पार्किंग में वाहन खड़े करने वालों को दूसरी सुबह 11 की जगह 9 बजे से ही दूसरे दिन का शुल्क देना पड़ता है। उल्लेखनीय है कि नगर के होटलों का चेक-आउट समय 10 बजे का है। इस प्रकार नगर में एक रात्रि ही रहकर अगली सुबह 10 बजे होटल छोड़कर जाने वाले यात्रियों को देा दिन का पार्किंग शुल्क देना पड़ता है। यदि चेक आउट समय पूर्व की तरह 11 बजे होता तो उन्हें एक दिन का ही शुल्क देना पड़ता।

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भव्य हुआ आयोजन, कई अच्छे संदेश भी दिये

नवीन समाचार, नैनीताल, 9 जून 2019। सरोवरनगरी में तीन दिन पूर्व होने वाले सिखों के पांचवे गुरु अर्जुन देव जी का शहीदी दिवस हर वर्ष की भांति ठीक सीजन के बीच एवं सबसे अधिक व्यस्त सप्ताहांत को भव्य तरीके से आयोजित हुआ। इस दौरान प्रदेश के नानकमत्ता, रुद्रपुर, बाजपुर ही नहीं यूपी के बिलासपुर, रामपुर से लेकर पंजाब के अमृतसर सहित अन्य शहरों से ही गुरु के भक्त नगर में आयोजित गुरुग्रंथ साहिब की नगर परिक्रमा में शामिल हुए। इस दौरान कई रागी जत्थों ने जहां माहौल को भक्तिमय बना दिया और गतका पार्टियों ने बच्चों व युवतियों के युवाओं के हथियारों और बिना हथियारों से भिड़ने के साथ ही सीने पर बर्फ की सिल्लियां तोड़ने जैसे अनूठे करतबों से माहौल को जोशीला बना दिया। साथ ही पंच प्यारों की मौजूदगी में सड़कों को कार सेवा करते हुए झाडूू लगाने व बुहारने के साथ ही गुरु ग्रंथ साहिब पर बरसाये जाने वाले फूलों को भी बाद में साफ करने का अद्भुत व अनुकरणीय पर्यावरण संरक्षण का संदेश भी मिला।

यातायात व्यवस्था बुरी तरह से हुई प्रभावित, लोग न शहर में आ पाये-न लौट पाए

नैनीताल। गुरु अर्जुन देव जी का शहीदी दिवस के दौरान नगर की यातायात व्यवस्था प्रशासन के प्रयासों के बावजूद पूरी तरह से कमोबेश ठप रही। नगर की प्रमुख सड़क माल रोड पर जुलूस के निकलने और वापस लौटने के करीब 4 घंटों के समय में नगर में भी वाहन जहां-तहां पुलिस द्वारा रोके गये। वहीं नगर के बाहर तो हालात भयावह रहे। हल्द्वानी रोड पर रूसी बैंड से बल्दियाखान से आगे तक वाहनों का घंटों जाम लगा रहा। नगर से भी वाहन बाहर नहीं निकल पाये। बमुश्किल रोडवेज की कुछ बसों को गुजारा गया, लेकिन उनमें चढ़ने के लिए लोग उल्टियों से सनी खिड़कियों के रास्ते बसों के अंदर प्रवेश करने तथा पूरी यात्रा में खड़े-खड़े यात्रा करने को मजबूर रहे। नगर से हल्द्वानी या भवाली को जाने के लिए मुंहमांगे दामों पर भी टैक्सियां भी नहीं मिल रही थीं। पूछे जाने पर आयोजक संस्था गुरुद्वारा गुरु सिंह सभा का कहना था कि हर बार ही रविवार को जुलूस निकाले जाने की परंपरा है। इस वर्ष पहले ईद की वजह से भी इस रविवार को आयोजन करना पड़ा। इधर इस सीजन में पहली बार डीएसए मैदान के खेल वाले हिस्से में भी दोपहिया व चार पहिया वाहन खड़े गये।

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-क्यों जहां पुलिस खड़ी होती है, वहीं पर बनता है ‘बॉटल नेक’, क्यों वहीं से शुरू होता है वाहनों का जाम

-जो भी लोग इन दिनों घर से बाहर वाहनों से निकल रहे हैं, सभी यह बात महसूस कर रहे हैं
नवीन समाचार, नैनीताल, 2 जून 2019। नगर में सैलानियों के वाहनों की अधिक आवक के बीच नैनीताल पुलिस यातायात को व्यवस्थित करने की जगह धरातल पर अव्यस्था अधिक फैलाती नजर आ रही है। जो भी लोग इन दिनों घर से बाहर वाहनों से निकल रहे हैं, सभी यह बात महसूस कर रहे हैं। रविवार को नगर की सभी पार्किंग नहीं भरीं, इसलिये वाहनोें को रूसी बाइपास पर रोका एवं खुर्पाताल की ओर डायवर्ट तो नहीं किया गया, अलबत्ता हनुमानगढ़ी के पास वाहनों को अनावश्यक तौर पर रोका गया, जिसका कोई लाभ शहर में नजर नहीं आया। यहां से पांच-पांच मिनट के अंतराल मे पांच-पांच वाहनों के समूह को नगर में प्रवेश कराया जा रहा था, जिस कारण कई बार चील चक्कर मोड़ तक वाहनों की कतार लगी रहीं, और सैलानियों ही नहीं नगर वासियों के वाहन भी आधा घंटा से अधिक वहां रुकने को मजबूर हुए। एसएसपी के स्तर से स्थानीय वाहनों के लिए सैलानियोे से इतर व्यवस्था बनाने की बात कही गयी है, लेकिन स्थानीय लोगों को शहर में जल्दी प्रवेश देने की कोई व्यवस्था नहीं की गयी है। वहीं आगे देखा जा रहा है कि जहां-जहां पुलिस कर्मी खड़े है, वहीं पर वाहनों का ‘बॉटल नेक’ बन रहा है, और जाम लग रहा है। नगर में वाहन तल्लीताल में प्रवेश करते हैं तो तल्लीताल डांठ पर पहला जाम लगता है इसके बाद लेक ब्रिज चुंगी पर वाहन फंसते हैं। इसके बाद इंडिया होटल डायवर्जन, फिर मल्लीताल रिक्शा स्टेंड और इसके बाद मस्जिद तिराहे पर वाहन रुकते हैं और कई बार इनके बीच में अपेक्षाकृत अधिक गति से भी चल पाते हैं। यानी जहां-जहां पुलिस कर्मी खड़े होते हैं, वहीं पर वाहन रुकते हैं, और बीच में ठीक से लाइन बनाकर चलते हैं।

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कोश्यारी से मिलते नैनीताल होटल रेस्टोरेंट एसोसिएशन के पदाधिकारी।

नवीन समाचार, नैनीताल, 1 जून 2019। नगर में ग्रीष्मकालीन पर्यटन सीजन में नगर की सीमित सड़कों एवं बढ़ते वाहनों के दबाव के कारण हो रही समस्याओं को लेकर सोमवार को नगर के होटल रेस्टोरेंट एसोसिएशन का एक शिष्टमंडल नगर में आये पूर्व मुख्यमंत्री एवं पूर्व सांसद भगत सिंह कोश्यारी से मिला। शिकायत की कि व्यवस्था बनाने के नाम पर नगर में आने वाले सैलानियों का उत्पीड़न किया जा रहा है। नगर में होटल खाली पड़े हैं और पुलिस कर्मी वाहनों को यहां-वहां रोककर और दूसरे लंबे रास्तों से भेजकर सड़कों पर बेवजह भीड़ बढ़ा रहे हैं तथा कुछ पूछने पर सीधे एसएसपी से बात करने को कह रहे हैं। रात्रि आठ बजे के बाद सैलानियों के वाहनों को हल्द्वानी से ऊपर न आने देने का आदेश एसएसपी के स्तर से दिया गया है।। नगर में एएसपी रुचि जुयाल को लेकर भी व्यवस्था के नाम पर उत्पीड़न करने के आरोप लगाये गये। इस पर कोश्यारी ने डीएम विनोद कुमार सुमन को फोन करके कहा कि उन्होंने स्वयं अनुभव किया है कि नगर में पर्यटक वाहन नहीं हैं, और होटल खाली पड़े हैं, लेकिन प्रशासन व्यवस्था के नाम पर वाहनों को यहां-वहां रोकने की बात कर रहा है। उन्होंने कहा, प्रशासन व्यवस्था बनाये पर व्यवस्था के नाम पर उत्पीड़न न करे। कहीं भी आना-जाना लोगों का मौलिक अधिकार है। किसी को कहीं रोका नहीं जाना चाहिए। वहीं होटल एसोसिएशन के सदस्यों ने कहा कि बुधवार को इस संबंध में डीएम से मिलेंगे। कोश्यारी से मिलने वालों में नैनीताल होटल रेस्टोरेंट एसोसिएशन के अध्यक्ष दिनेश साह, वेद साह, दिग्विजय बिष्ट, आलोक साह व कमल जगाती आदि लोग शामिल रहे।

एसएसपी ने दी सफाई, कहा-सभी पार्किंग भरने के बाद ही रात्रि आठ बजे हल्द्वानी से ऊपर नहीं आने देंगे

नैनीताल। एसएसपी सुनील कुमार मीणा ने पूछे जाने पर कहा कि हमेशा नहीं, केवल नैनीताल नगर के साथ ही रूसी बाईपास, सूखाताल आदि की सभी पार्किंग भर जाने के बाद ही रात्रि आठ बजे के बाद सैलानियों को नैनीताल नहीं आने देने के आदेश दिये गये हैं।

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नवीन समाचार, नैनीताल, 6 अप्रैल 2019। राज्य की सभी जिलों की अदालतों में शनिवार को यातायात के चालान संबंधी मामलों के लिये विशेष लोक अदालत का आयोजन किया गया। इस दौरान पूरे प्रदेश में 19293 मामले पंजीकृत किये गये थे, जिनमें से 6616 मामले निपटा दिये गये और इनसे 12 लाख 24 हजार 90 रुपये जुर्माने के रूप में वसूले गये।
उत्तराखंड राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण से प्राप्त जानकारी के अनुसार ऊधमसिंह नगर जिले में निपटाये गये सर्वाधिक 2902 मामलों से 1.66 लाख, देहरादून से 2249 मामलों से 2.37 लाख, हरिद्वार से 513 मामलों से 1.37 लाख, पौड़ी गढ़वाल से 235 मामलों से 1.05 लाख, चंपावत से 135 मामलों से 1.55 लाख, नैनीताल से 130 मामलों से 1.02 लाख, टिहरी गढ़वाल से 104 मामलों से 63350, उत्तरकाशी से 99 मामलों से 56600, बागेश्वर से 84 मामलों से 70100, चमोली से 48 मामलों से 55350, रुद्रप्रयाग से 47 मामलों से 9600, अल्मोड़ा से 37 मामलों से 59100 व पिथौरागढ़ से 33 मामलों से 8000 रुपये के जुर्माने वसूले गये।

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नवीन जोशी @ नवीन समाचार, नैनीताल, 1 अप्रैल 2019। प्रकृति से दोनों हाथों से सजाये एवं अपने सर्वश्रेष्ठ संसाधनों से उपकृत, पर्यटन की अपार संभावनाओं से युक्त उत्तराखंड को प्रदेश सरकार पर्यटन प्रदेश के तौर पर भी प्रचारित करती रही है। लेकिन प्रदेश में अब तक आने वाले पर्यटकों के लिए वाहनों को खड़ा करने के लिए पार्किंग की व्यवस्था करने की कोई ठोस योजना व नीति नहीं है। यहां तक कि राज्य बनने के दो दशकों में नगर में 20 वाहनों को पार्क करने की भी नई व्यवस्था नहीं हो पाई है।

अव्यवस्था : सूखाताल झील में प्रशासन द्वारा खड़े किये गये वाहन। (फाइल फोटो )

ऐसे में उत्तराखंड उच्च न्यायालय को बीते वर्ष नैनीताल से संबंधित एक जनहित याचिका को सुनते हुए प्रशासन की पार्किंग व्यवस्था से संतुष्ट होकर नगर के होटलों में 50 प्रतिशत पार्किंग नहीं होने पर कमरे सील करने के आदेश देने पड़े। बाद में इस सीमा को 60 फीसद तक बढ़ाया गया। साथ ही नैनीताल को ईको संसेटिव जोन (पर्यावरण संवेदनशील क्षेत्र) बनाये जाने संबंधी डा. अजय रावत की जनहित याचिका पर प्रशासन से सैलानियों को यह सूचित करने को कहा कि सैलानी अपने वाहन से नैनीताल आने से पहले अपने वाहन के लिए यहाँ पार्किंग की अग्रिम व्यवस्था करके ही आयें, साथ ही नगर के फ्लैट्स मैदान के खेल वाले हिस्से का इस्तेमाल पार्किंग के रूप में न करने के आदेश भी दिये गए। नगर में वाहनों की भीड़भाड़ को रोकने के लिए नगर में बसों का प्रवेश भी रोक दिया गया।

नारायणनगर पार्किंग पर बात कुछ आगे बढ़ी

नैनीताल। नैनीताल जिला प्रशाशन ने एक वर्ष पूर्व नारायणनगर में करीब 300, एचएमटी रानीबाग में करीब 500 व कैलाखान में कुछ वाहन पार्किंग की व्यवस्था किये जाने की जानकारी दी थी। किंतु एक वर्ष बाद नारायण नगर की पार्किंग को छोड़कर अन्य पार्किंग में कोई खास प्रगति नहीं दिख रही है। बताया गया है कि नारायणनगर-चारखेत में 50 करोड़ रुपये से प्रस्तावित करीब 1000 वाहनों की क्षमता वाली बहुमंजिला पार्किंग की राह में राज्य के वन विभाग के नोडल अधिकारी की ओर से पिछले एक वर्ष से लगी आपत्ति हट गयी है। अब इस प्रस्ताव को अंतिम स्वीकृति के लिए केंद्र सरकार के देहरादून स्थित नोडल कार्यालय को भेज दिया गया है। इसके साथ ही पार्किंग के निर्माण के लिए जियो टेक्निकल सर्वे कराने की तैयारी भी शुरू की जा रही है। लेकिन इस वर्ष के सीजन के लिए प्रशासन वाहनों की पार्किंग का कोई ठोस प्रबंध नहीं कर पाया है, बल्कि रूसी बाइपास पर 400 छोटे-बड़े वाहनों को सड़क किनारे पार्क करा कर काम चलाने की कोशिश की जा रही है। इसके लिए पिछले दिनों निविदा आमंत्रित की गयी हैं।

विशेषज्ञों की संस्तुतियों पर एक वर्ष में एक कदम भी नहीं बढ़े हैं कदम

नैनीताल। जिला प्रशासन ने आईआईटी के विशेषज्ञों की एक समिति से नगर में वाहनों के बेहतर आवागमन के लिए एक वर्ष पूर्व सुझाव प्राप्त किये थे, जिन पर एक वर्ष के बाद भी कोई अमल होता नहीं दिखा है। समिति की एक सदस्य-आईआईटी रुड़की की नैनीताल के ही बिड़ला विद्या मंदिर से पढ़ी विशेषज्ञ प्रो. गीतम तिवारी ने इस पर सुझाव दिये कि बड़ी बसें आने देनी चाहिए। क्योंकि एक बस के आने से कई छोटी गाड़ियों की भीड़ आने से रोकी जा सकती है। वहीं शिवनागर विवि ग्रेटर नोएडा के जियो तकनीकी विशेषज्ञ प्रो. गिरीश अग्रवाल व आईआईटी रुड़की के निर्माण प्रबंधन विशेषज्ञ प्रो. नीरज झा ने नगर के फ्लैट्स मैदान में मौजूदा कार पार्किंग के स्थान पर आधुनिक तकनीकों से सामने के पहाड़ की ओर, नीचे से नंदा देवी व दुर्गा पूजा के मेले गुजारने के प्रबंध के साथ बड़ी बहुमंजिला पार्किग बनाने की अनुशंसा की। इसके अलावा अल्पकालीन व त्वरित प्रबंधों के तहत मल्लीताल पंत पार्क से नगर पालिका के बगीचे से होते हुए पैदल यात्रियों के लिए करीब 3 मीटर चौड़ा पाथ-वे, पंत मूर्ति पर थोड़ा बड़ा व स्टेट बैंक के पास छोटा गोल चक्कर बनाये जाने के साथ ही नगर में ई-रिक्शा चलाने तथा आगे नगर के बाहर नारायण नगर व रूसी बाईपास पर यात्रियों, खासकर महिला यात्रियों व वाहन चालकों के लिए शौचालय, प्रसाधन आदि के प्रबंध किये जाने की भी अनुशंसा की थी।

यह भी पढ़ें : हल्द्वानी में 71 अतिक्रमणकारियों को 26 मार्च तक हटाने व बिजली-टेलीफोन की लाइनें अंडर ग्राउंड करने के निर्देश

नवीन समाचार, नैनीताल, 25 फरवरी 2019। उत्तराखंड हाई कोर्ट ने हल्द्वानी के कालाढूंगी रोड में चिह्रित 71 अतिक्रमणकारियों को 26 मार्च तक हटाने व बिजली व टेलीफोन की लाइन अंडर ग्राउंड करने के निर्देश दिए हैं। कोर्ट ने मुखानी चौराहे में सीसीटीवी लगें या नहीं तथा फ्लाईओवर का मानचित्र प्रस्तुत करने को कहा है। पार्किंग व वैंडर जोन की स्थिति पर भी रिपोर्ट मांगी है।

छोटी मुखानी हल्द्वानी निवासी पूरन चंद्र जोशी ने जनहित याचिका दायर कर कहा था कि कालाढूंगी रोड खासकर मुखानी में आए दिन जाम लगा रहता है। स्कूल, दफ्तर व जरूरी कामों के लिए जाने वाले लोगों का अधिकांश समय जाम में बीत जाता है। याचिका में इस जाम से निजात दिलाने के लिए फ्लाइओवर बनाने की मांग की थी। पिछली सुनवाई के दौरान डीएम ने शपथ पत्र पेश कर कहा था कि फ्लाइओवर बनाने के लिए बजट का निर्धारण करना है। कालाढूंगी रोड में 71 अतिक्रमण चिन्‍हित किए गए हैं। बिजली, टेलीफोन के पोल तथा ट्रांसफार्मर शिफ्ट करना है। मंगलवार को मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति रमेश रंगनाथन व न्यायमूर्ति रमेश चंद्र खुल्बे की खंडपीठ ने मामले में सुनवाई करते हुए डीएम से पूछा है कि मुखानी से सुशीला तिवारी को जाने वाली सड़क में कितना अतिक्रमण हुआ है। कोर्ट ने याचिकाकर्ता को भी मुखानी से सुशीला तिवारी अस्पताल को जाने वाली सड़क में अतिक्रमण की जानकारी देने को कहा है। खंडपीठ ने जिला प्रशासन को चिह्निïत अतिक्रमण 26 मार्च तक हटाने के निर्देश दिए हैं।

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नवीन समाचार, नैनीताल, 24 फरवरी 2019। पर्यटन नगरी नैनीताल की सबसे बड़ी पार्किंग की समस्या के समाधान की एक बार पुनः उम्मीद बन गयी है। नगर के नारायणनगर-चारखेत में 50 करोड़ रुपये से प्रस्तावित करीब 1000 वाहनों की क्षमता वाली बहुमंजिला पार्किंग की राह में राज्य के वन विभाग के नोडल अधिकारी की ओर से पिछले एक वर्ष से लगी आपत्ति हट गयी है। यहां से पार्किंग के निर्माण की संस्तुति कर दी गयी है। अब इस प्रस्ताव को अंतिम स्वीकृति के लिए केंद्र सरकार के देहरादून स्थित नोडल कार्यालय को भेज दिया गया है। इसके साथ ही पार्किंग के निर्माण के लिए जियो टेक्निकल सर्वे कराने की तैयारी भी शुरू की जा रही है।
उल्लेखनीय है कि अक्टूबर 2017 में मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने नैनीताल आगमन पर विधायक संजीव आर्य के प्रयासों से नारायणनगर में बहुमंजिला पार्किंग के लिए 50 करोड़ रुपये देने की घोषणा की थी। इसे मुख्यमंत्री एवं विधायक संजीव आर्य की महत्वाकांक्षी एवं नगर के पार्किंग समस्या का समाधान कर नगर में पर्यटन बढ़ाने वाली योजना के रूप में देखा गया। इसके बाद एडीबी ने पर्यटन की ट्रांस-3 योजना के तहत नगर से करीब आठ किमी दूर नारायण नगर में करीब डेढ़ हेक्टेयर जमीन पर 6-7 मंजिला पार्किंग के लिए करीब 80 करोड़ देने का प्रस्ताव तैयार किया, किंतु फरवरी 2018 से इस मामले में वन भूमि का पेंच फंस गया था। आरोप लगे कि पूर्व में इस स्थान के पास ही बतौर वन वर्धनिक उत्तराखंड नैनीताल में रहते हिमालय बॉटनिकल गार्डन विकसित करने वाले वन विभाग के नोडल अफसर मनोज चंद्रन ने अपने अधिकार क्षेत्र से भी बाहर जाकर इस पर बेवजह आपत्तियां लगाकर इसे निरस्त करने की रिपोर्ट केंद्र सरकार को भेज दी थीं। इधर मोनिष मलिक के नोडल अफसर बनने के बाद आपत्तियों का निस्तारण का निस्तारण हो गया है और वन भूमि हस्तांतरण के प्रस्ताव को सैद्धांतिक सहमति देते हुए इसके प्रस्ताव को भारत सरकार के देहरादून स्थित कार्यालय के पास अंतिम स्वीकृति के लिए भेज दिया है। आगे विधायक संजीव आर्य ने कहा कि पहला जियो टेक्निकल सर्वे वन भूमि हस्तांतरण के लिहाज से ऑलवेदर रोड व नर्मदा सरोवर बांध का सर्वे करने वाली वेबकॉस संस्था से कराया गया था। अब इसी संस्था से विस्तृत जियो टेक्निकल सर्वे कराया जाएगा। पार्किंग निर्माण के साथ वहां से नगर के लिए शटल सेवा संचालित करने का भी प्राविधान किया जा रहा है। इधर यदि जल्द केंद्र सरकार से वन भूमि हस्तांतरण को स्वीकृति मिल जाती है तो संभव है कि आसन्न ग्रीष्मकालीन पर्यटन सीजन से पहले ही इस स्थान को समतल करके इस स्थान का उपयोग करीब 500 वाहनों के लिए पार्किंग के रूप में किया जा सकता है।

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-रूसी बाइपास में 400 वाहनों की सड़क किनारे पार्किंग बनाने के लिए आमंत्रित की सुरक्षा हेतु निविदाएं
नवीन समाचार, नैनीताल, 19 फरवरी 2019। पिछले वर्ष ग्रीष्मकालीन पर्यटन सीजन में वाहनों के आवागमन-पार्किंग की समस्याओं के बाद हर बार की तरह इन समस्याओं का समाधान करने की बात जोरशोर से कही गयी थी। आईआईटी के विशेषज्ञों से कई संस्तुतियां भी प्राप्त की गयी थीं, किंतु यहां ग्रीष्मकालीन पर्यटन सीजन शुरू होने में अब एक तिमाही भी नहीं बची है, और बीच में लोकसभा चुनाव की प्रक्रिया भी होनी है, बावजूद इस ओर प्रशासन एक कदम भी आगे बढ़ता नजर नहीं आया है।

इधर जबकि नारायणनगर में मुख्यमंत्री के स्तर से भी बहुप्रचारित 50 करोड़ रुपये से प्रस्तावित बहुमंजिला पार्किंग के निर्माण में वन विभाग के अड़ंगे के बाद अब लोनिवि ने रूसी बाइपास पर 400 छोटे-बड़े वाहनों की पार्किंग विकसित की प्रक्रिया शुरू कर दी है। हालांकि इसे खानापूरी अधिक माना जा रहा है। क्योंकि निविदाएं पार्किंग विकसित करने के लिए नहीं वरन खुली सड़क पर वाहनों की सुरक्षा के लिए आमंत्रित की गयी हैं।
आईआईटी रुड़की के विशेषज्ञों की संस्तुति पर नगर से आठ किमी दूर रूसी बाइपास के चौड़ाई वाले स्थानों पर सीसीटीवी की निगरानी में पार्किंग स्थल तैयार करने के लिए लोनिवि ने जिला प्रशासन की ओर से सुरक्षा एजेंसियों से निविदाएं आमंत्रित की हैं। सुरक्षा एजेंसियों को बाईपास पर खड़े होन वाले वाहनों की सुरक्षा का प्रबंध करने के लिए सीसीटीवी लगाने जैसी अपनी योजना प्रस्तुत करनी होगी। यह निविदाएं अब 28 फरवरी को खुलेंगी। इसके बाद लोनिवि के द्वारा बाईपास के चौड़े हिस्सों को पाक्रिंग के लिए चिन्हित किया जाएगा। अलबत्ता नगर से आठ किमी दूर केवल सड़क किनारे वाहन खड़े करने के लिए इस प्रस्तावित पार्किंग से ग्रीष्मकालीन पर्यटन सीजन में कितना लाभ मिल पायेगा कहना मुश्किल है।

विशेषज्ञों की संस्तुतियों पर एक वर्ष में एक कदम भी नहीं बढ़े हैं कदम

नैनीताल। आईआईटी रुड़की की विशेषज्ञ प्रो. गीतम तिवारी, शिवनागर विवि ग्रेटर नोएडा के जियो तकनीकी विशेषज्ञ प्रो. गिरीश अग्रवाल व आईआइ्रटी रुड़की के निर्माण प्रबंधन विशेषज्ञ प्रो. नीरज झा ने नगर के फ्लैट्स मैदान में मौजूदा कार पार्किंग के स्थान पर आधुनिक तकनीकों से सामने के पहाड़ की ओर, नीचे से नंदा देवी व दुर्गा पूजा के मेले गुजारने के प्रबंध के साथ बड़ी बहुमंजिला पार्किंग तथा अशोक सिनेमा के मैदान में 400 वाहनों की यांत्रिक पार्किंग पार्किग बनाने, मल्लीताल पंत पार्क से नगर पालिका के बगीचे से होते हुए पैदल यात्रियों के लिए करीब 3 मीटर चौड़ा पाथ-वे, पंत मूर्ति पर थोड़ा बड़ा व स्टेट बैंक के पास छोटा गोल चक्कर बनाये जाने की भी अपनी रिपोर्ट में अनुशंसा की है। इसके अलावा उन्होंने नगर में ई-रिक्शा चलाने तथा आगे नगर के बाहर नारायण नगर व रूसी बाईपास पर यात्रियों, खासकर महिला यात्रियों व वाहन चालकों के लिए शौचालय, प्रसाधन आदि के प्रबंध किये जाने की भी जरूरत बतायी थी। इन सभी कार्यों पर एक वर्ष बीतने तक प्रशासन एक कदम भी आगे बढ़ा नजर नहीं आ रहा है।

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देहरादून, 3 सितंबर 2018। उत्तराखंड परिवहन निगम यानी रोडवेज उत्तराखंड के हल्द्वानी-नैनीताल और देहरादून-मसूरी रूटों सहित अन्य पर्वतीय मार्गों पर इलेक्ट्रिक बसें चलाने की कोशिश में है। इस योजना के तहत उत्तराखंड में करीब एक करोड़ रुपए लागत की एक ईको फ्रेंडली इलेक्ट्रिक बस आ भी गई है। माना जा रहा है कि गुरुवार से इस बस का मसूरी मार्ग पर परीक्षण किया जाएगा। यह प्रयोग सफल रहा तो राज्य में पीपीपी मोड पर 50 बसों का संचालन किया जा सकता है।
बताया गया है कि बढ़ते प्रदूषण पर लगाम लगाने के उद्देश्य के साथ उत्तराखंड सरकार की कोशिश इलेक्ट्रिक वाहनों को चलाने की है। लेकिन उत्तराखंड परिवहन निगम की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं होने के कारण पीपीपी मोड में इलेक्ट्रिक बसें चलाने की योजना बनाई गयी है। बीती एक अगस्त को मुख्य सचिव उत्पल कुमार की अध्यक्षता में परिवहन सुविधाओं में बढ़ोत्तरी को लेकर हुई बैठक में सूबे में रोडवेज के जरिए इलेक्ट्रिक बसें चलाने पर सहमति बनी थी। मुख्य सचिव ने रोडवेज को दून शहर में इलेक्ट्रिक सिटी बसें संचालित करने रोडमैप तैयार करने और दून शहर में प्रयोग के तौर पर रोडवेज को इलेक्ट्रिक स्कूल बस चलाने के निर्देश भी दिए थे। इसी के तहत रोडवेज की ओर से निजी कंपनियों से प्रस्ताव मांगे गए थे। इनमें तमिलनाडू की एक कंपनी ने एक करोड़ की कीमत की एक बस परीक्षण के लिए देहरादून के हरिद्वार रोड स्थित कार्यशाला में पहुंचा दी है। रोडवेज के महाप्रबंधक (संचालन) दीपक जैन ने बताया कि इस बस को देहरादून-मसूरी, देहरादून से ऋषिकेश और देहरादून-हरिद्वार रूट पर परीक्षण के लिए चलाया जाएगा। देखा जाएगा कि बस पर्वतीय मार्ग पर लोड ले रही या नहीं। यदि यह प्रयोग सफल रहा तो पीपीपी मोड पर 50 बसें चलाने के लिए निविदा आमंत्रित की जाएगी। इनमें से 25 बसें देहरादून से मसूरी और बाकी 25 हल्द्वानी-नैनीताल के बीच चलाने का फैसला लिया था।

यह हैं इलेक्ट्रिक बस की खासियत
देहरादून। नई इलेक्ट्रिक बस 32 सीटर 32 सीटर है और ईको फ्रेंडली है। यह ध्वनि और वायु प्रदूषण नहीं करती है। कंपनी का दावा है कि इस बस में इंजन ही नहीं है। इसमें मोटर इलेक्ट्रिक ऊर्जा को मैकेनिकल ऊर्जा में बदलती है। बस एक बार चार्ज होने पर दो से ढाई सौ किमी चलती है, और अधिकतम 80 किमी प्रतिघंटा की गति तक दौड़ सकती है। पर्वतीय मार्गों को देखते हुए बस 166 व्हीलबेस की है।

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नैनीताल, 20 अप्रैल 2018। नगर के अशोक टॉकीज की जगह करीब 300 से 400 वाहनों की मैकेनाइज्ड (यांत्रिक) पार्किग बनाई जाएगी। शुक्रवार को उत्तराखंड उच्च न्यायालय से नगर में प्रस्तावित पार्किंग स्थलों के निरीक्षण लिए नियुक्त अपर महाधिवक्ता एमसी पांडे ने प्रशासनिक अधिकारियो के साथ नगर के नारायण नगर, अशोक टॉकीज एवं कैलाखान में प्रस्तावित पार्किग स्थलों का निरीक्षण किया, एवं अशोक टॉकीज की पार्किंग के लिए नगर पालिका के अधिशासी अधिकारी रोहिताश शर्मा को इस स्थल की भूधारण क्षमता का आंकलन कराकर एक माह के भीतर प्रस्तावित पार्किंग की विस्तृत प्रोजेक्ट रिपोर्ट तैयार करने को कहा। निरीक्षण में ईओ रोहिताश शर्मा के साथ ही एडीएम हरबीर सिंह एवं अन्य अधिकारी भी मौजूद रहे।

हल्द्वानी-कालाढुंगी से नैनीताल को 20 सीटर शटल बसें चलाने के दिए आदेश

नैनीताल, 18 अप्रैल 2018। उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने आसन्न ग्रीष्मकालीन पर्यटन सीजन को देखते हुए प्रशासन से हल्द्वानी व कालाढूंगी से नैनीताल के 20 सीटर बसों का संचालन करने को कहा है। साथ ही अपने पूर्व के आदेशों पर जिला प्रशाशन द्वारा चार समाचार पत्रों में नैनीताल में पर्यटक वाहनों की पार्किंग के लिए प्रकाशित की गयी विज्ञप्ति से संतुष्ट न होकर दुबारा इस विज्ञप्ति को समाचार के रूप में प्रकाशित करने को कहा है।

तो रोडवेज कर रहा है उच्च न्यायालय के आदेशों की अवमानना: जोशी
नैनीताल। नैनीताल के लिए शटल सेवा के रूप में बसें चलाने के आदेश पर नैनीताल टैक्सी-ट्रेवल यूनियन के अध्यक्ष नीरज जोशी ने कहा कि उत्तराखंड राज्य के अधिनियम के अनुसार नैनीताल में 218 इंच ह्वील बेस की बसें भी आ सकती हैं, जबकि उच्च न्यायालय ने 166 इंच ह्वील बेस या 35 सीटर में से जो भी कम हो, छोटी बसें ही नैनीताल में आने की इजाजत अपने 3 जुलाई 2017 के आदेश में दी थी, और इससे बड़ी बसों के आने पर पाबंदी लगा दी थी। उनका कहना है कि उत्तराखंड परिवहन निगम यानी रोडवेज इससे इतर 184 ह्वील बेस की बसें भी नैनीताल के लिए चला रहा है, जो कि उच्च न्यायालय के आदेशों की अवमानना है। वहीं प्रशासन ने नैनीताल के लिए पर्यटक बसों के आने पर पाबंदी लगा दी है, जबकि एक बस के आने से कई छोटी टैक्सियों से होने वाली जाम की समस्या बचती है। 

कम पार्किंग पर बंद नहीं होंगे होटल, पूर्व मुख्य सचिव नए कोर्ट कमिश्नर नियुक्त

उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने नैनीताल की जनहित याचिका को सुनते हुए प्रशासन की पार्किंग व्यवस्था से संतुष्ट होकर नगर के होटलों में 50 प्रतिशत पार्किंग नहीं होने पर कमरे सील करने के अपने आदेश पर फिलहाल प्रशासन से कोई कार्यवाही नहीं करने को कहा है। इसके  अलावा नैनीताल निवासी राज्य के पूर्व मुख्य सचिव इन्दु कुमार पाण्डे को पब्लिक कोर्ट कमिश्नर नियुक्त किया है। न्यायालय ने कहा कि ‘अतिथि देवो भवः’ का सिद्धांत अपनी जगह है, लेकिन पर्यटक अपने वाहनों के बगैर नैनीताल आएं, तो अच्छा है। रोड में वाहनों के सुगम आवागमन के लिए न्यायालय ने कहा की अगर लोअर मॉल रोड दो फ़ीट चौड़ी हो जाती तो बहुत अच्छा होता, इस पर एसएसपी जन्मेजय खंडूरी ने कहा की हैंगिंग ब्रिज बनाया जा सकता है । जबकि सरकारी अधिवक्ता ने कहा कि भूगर्भ वैज्ञानिक इसे स्लाइडिंग जोन मानते हुए इसकी इजाजत नहीं देते हैं। मामले में अगली सुनवाई 10 मई को होनी तय हुई है।

हाईकोर्ट ने जियो कंपनी के ठेकेदार पर लगाया 5 लाख का जुर्माना

-18 अप्रैल की तय सीमा तक केबिल लाइनें डालने के लिए खोदे गए गड्ढे न भरने पर की कड़ी कार्रवाई
नैनीताल। उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने नैनीताल शहर में 18 अप्रैल की तय सीमा तक विभिन्न दूरसंचार कम्पनियो द्वारा बिछाई जा रही केबिल लाइनों के गड्ढे न भरने पर जिओ कम्पनी के ठेकेदार को 5 लाख रूपये का जुर्माना लगाया है।
उल्लेखनीय है कि नैनीताल निवासी डा. अजय रावत की बहुचर्चित जनहित याचिका में बुधवार को सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति सुधांशु धुलिया व न्यायमूर्ति लोकपाल सिंह की खंडपीठ ने जिला प्रशाशन से पूर्व में जारी आदेशो के क्रियान्वयन की जानकारी ली। इस दौरान जिओ कम्पनी के अधिवक्ता ने लाइन बिछाने के लिए न्यायालय से 20 दिन का अतरिक्त समय माँगा। इस पर न्यायालय ने नाराजगी जताते हुए कम्पनी के ठेकेदार पर 5 लाख का जुर्माना लगाया।

अपर महाधिवक्ता परखेंगे नारायण नगर, रानीबाग व कैलाखान की प्रस्तावित पार्किंगों को
नैनीताल। डा. अजय रावत की बहुचर्चित जनहित याचिका में बुधवार को सुनवाई के दौरान जिला प्रशाशन की ओर से डीएम वीके सुमन व एसएसपी जनमेजय खंडूड़ी ने नारायणनगर में करीब 300, एचएमटी रानीबाग में करीब 500 व कैलाखान में कुछ वाहन पार्किंग की व्यवस्था किये जाने की जानकारी दी। इस पर अदालत ने अपर महाधिवक्ता मोहन चन्द्र पांडे को इन पार्किंग स्थलों का मुआयना कर 10 मई तक न्यायालय में रिपोर्ट पेश करने को कहा।

वेंडर जोन पर डीएम ने उच्च न्यायालय को दी जानकारी 

नैनीताल। डा. रावत की जनहित याचिका में नैनीताल में वेंडर जोन चिन्हित करने के संबंध में डीएम वीके सुमन ने बुधवार को उच्च न्यायालय को बताया कि वेंडर जोन कमेटी गठित कर ली गई है, और पात्र हॉकरों का चयन किया जा रहा है, साथ ही वेंडिंग जोन के लिए कुछ जगहें  भी चिन्हित कर ली गयी हैं। 

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-आईआईटी रुड़की ने की पैरवी, दोनों विषय लंबे समय से हैं चर्चाओं में, और उच्च न्यायालय से भी है रोक
नैनीताल, 13 अप्रैल, 2018। नैनीताल नगर में यातायात को सुगम बनाने के लिए आईआईटी रुड़की के वैज्ञानिकों ने अल्पकालीन व दीर्घकालीन योजनाएं सुझायीं हैं। इनमें नैनीताल में बड़ी पर्यटक बसों को आने देने और फ्लैट्स मैदान में बहुमंजिला पार्किंग बनाने के सुझाव सर्वाधिक उल्लेखनीय हैं। उल्लेखनीय है कि नैनीताल में बसों के प्रवेश पर जिला प्रशासन के द्वारा उत्तराखंड उच्च न्यायालय के आदेशों से रोक बताई जाती है, वहीं पार्किंग के निर्माण के बाबत भी प्रशासन उच्च न्यायालय के आदेशों पर नगर में निर्माणों की रोक बताता रहता है, और नगर की बजाय नगर से दूर-बाहर नारायण नगर, कालाढुंगी व रानीबाग में पार्किंग बनाने की संभावनाएं बरसों से तलाशी जा रही है, अलबत्ता किसी भी पार्किंग निर्माण अभी शुरू भी नहीं हो पाया है।


आईआईटी रुड़की की नैनीताल के ही बिड़ला विद्या मंदिर से पढ़ी विशेषज्ञ प्रो. गीतम तिवारी ने विशेष भेंट में बताया कि एक बड़ी बस के नैनीताल में आने से कई छोटी गाड़ियों की भीड़ नैनीताल में आने से रोकी जा सकती है। प्रशासन को रेलवे स्टेशन से नैनीताल के लिए बसें चलानी चाहिए। उन्होंने बसों के लिए तल्लीताल रोडवेज बस स्टेंड पर यात्रियों को पूर्व की तरह उतारकर वापस शहर से बाहर खड़े होने की व्यवस्था बताई। इसके अलावा उनके साथ ही शिवनागर विवि ग्रेटर नोएडा के जियो तकनीकी विशेषज्ञ प्रो. गिरीश अग्रवाल व आईआइ्रटी रुड़की के निर्माण प्रबंधन विशेषज्ञ प्रो. नीरज झा ने नगर के फ्लैट्स मैदान में मौजूदा कार पार्किंग के स्थान पर बहुमंजिला पार्किग बनाने की अनुशंसा की। उन्होंने कहा कि आधुनिक तकनीकों से सामने के पहाड़ की ओर, नीचे से नंदा देवी व दुर्गा पूजा के मेले गुजारने के प्रबंध के साथ बड़ी पार्किंग बनायी जा सकती है। इससे नगर में पार्किंग की समस्या का बड़े स्तर पर समाधान हो सकता है। इसके अलावा अल्पकालीन व त्वरित प्रबंधों के तहत उन्होंने मल्लीताल पंत पार्क से नगर पालिका के बगीचे से होते हुए पैदल यात्रियों के लिए करीब 3 मीटर चौड़ा पाथ-वे, पंत मूर्ति पर थोड़ा बड़ा व स्टेट बैंक के पास छोटा गोल चक्कर बनाये जाने की भी अपनी रिपोर्ट में अनुशंसा की है। इसके अलावा उन्होंने नगर में ई-रिक्शा चलाने तथा आगे नगर के बाहर नारायण नगर व रूसी बाईपास पर यात्रियों, खासकर महिला यात्रियों व वाहन चालकों के लिए शौचालय, प्रसाधन आदि के प्रबंध किये जाने की भी जरूरत बतायी।
उल्लेखनीय है कि इससे पूर्व डीएम वीके सुमन के साथ भी आईआईटी रुड़की के वैज्ञानिकों ने नगर में प्रस्तावित पाथ-वे व पार्किंग स्थल का निरीक्षण किया। इस दौरान आईआईटी रुड़की के अन्य विशेषज्ञ प्रो. दिनेश मोहन, एडीएम हरबीर सिंह, पालिका ईओ रोहिताश शर्मा व आरटीओ सहित लोनिवि के अधिकारी भी साथ रहे।

शटल टैक्सी चलाने को प्रशासन ने टैक्सी-ट्रेवल संगठनों से मांगा सहयोग

नैनीताल। नैनीताल नगर में आगामी पर्यटन सीजन में यातायात को सुगम बनाने के लिए जिला प्रशासन ने आईआईटी रुड़की के विशेषज्ञों के साथ नगर के टैक्सी-ट्रेवल संगठनों से करीब 10 अच्छी स्तरीय ब्रांड व मॉडल के वाहन उपलब्ध कराने का सहयोग मांगा। नगर पालिका के सभागार में हुई बैठक में टैक्सी-ट्रेवल एसोसिएशन के अध्यक्ष नीरज जोशी ने नगर में बड़ी बसों का प्रवेश प्रतिबंधित होने और टैक्सियों के भी नैनीताल आने पर प्रतिबंध लगाने के प्रशासन के आदेश की कड़ी मुखालफत की। उन्होंने नगर की व्यवस्थाओं को सुधारने के लिए अपनी ओर से सुगम यातायात की योजना भी प्रस्तुत की, और नगर की यातायात योजना में अब तक यातायात से जुड़े लोगों के सुझाव न लिये जाने पर नाराजगी भी जताई। उन्होंने ग्रीष्मकालीन पर्यटन सीजन में नगर के स्कूलों के वार्षिकोत्सव आयोजित करने की अनुमति न देने का भी सुझाव दिया। बैठक में नगर पलिका ईओ, आरटीओ, एएसपी, नगर कोतवाल, तल्लीताल थाना प्रभारी तथा टैक्सी एसोसिएशन के ओमवीर सिंह, बबलू बोरा व दीपक मटियाली सहित बड़ी संख्या में प्रतिनिधि शामिल रहे।

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उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने नैनीताल को ईको संसेटिव जोन (पर्यावरण संवेदनशील क्षेत्र) बनाये जाने संबंधी डा. अजय रावत की जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान अपने वाहन से नैनीताल आने वाले पर्यटकों को यह सूचित करने को कहा है कि वे नैनीताल आने से पहले अपने वाहन के लिए यहाँ  पार्किंग की अग्रिम व्यवस्था करके ही आयें, उन्हें इसके बाद ही नैनीताल आने दिया जाएगा। इस बारे में जिला प्रशासन को चार राष्ट्रीय अखबारों में पार्किंग संबंधी विज्ञापन जारी कर पर्यटकों को यह सूचना देने को कहा है। आदेश में फ्लैट्स मैदान के खेल वाले हिस्से का इस्तेमाल पार्किंग के रूप में न करने के आदेश भी दिये गए हैं। इस आदेश पर हर मन में उठ रहे इस सवाल का जवाब किसी के पास नहीं है कि कोई यात्री पार्किंग की अग्रिम व्यवस्था सुनिश्चित कर सकता है ? क्या महीने भर पहले होटल के साथ पार्किंग बुक हो सकती है ? और यदि हो भी जाये तो क्या पर्किंग संचालक किसी बुकिंग के लिए पहले से स्थान खाली रख सकता है ? वह भी तब पार्किंग के स्थान की भारी किल्लत है।

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उल्लेखनीय है की पूर्व में हाई कोर्ट ने इसी जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए नगर के होटल व्यवसायियों को पार्किंग सुनिश्चित करने के लिए मोबाइल ऐप बनाने को कहा था। नैनीताल होटल रेस्टोरेंट एसोसिएशन ने इस के बाद ऐप बनाया तो उसे हाईकोर्ट ने खारिज कर दिया। जिसके बाद एसोसिएशन ने पुनः नया ऐप बनाने की कवायद शुरू की है। इधर नगर की फ्लैट्स मैदान व मेट्रोपोल होटल शत्रु संपत्ति की कार पार्किंग में ऑटोमेटेड बूम बैरियर भी लगवा दिये हैं। वहीं पूर्व में उच्च न्यायालय ने नगर के होटलों को यह आदेश दे दिया था कि वे अपने होटलों में ठहरने वाले यात्रियों के वाहनों के लिए पार्किंग की व्यवस्था करें, अन्यथा उनके 50 फीसद कक्ष बंद कर दिये जाएंगे। इस सीमा को अब 60 फीसद तक बढ़ा दिया गया है। नगर के बाहर नारायण नगर में 50 करोड़ रुपए से पार्किंग बननी प्रस्तावित है, परंतु कब तक बननी शुरू होगी, कहना मुश्किल है, जबकि काठगोदाम, रानीबाग व कालाढुंगी में पार्किंग के लिए स्थान तलाशा जाना भी भारी पड़ रहा है। ऑल इंडिया होटल एंड रेस्टोरेंट एसोसिएशन के सदस्य प्रवीण शर्मा ने उच्च न्यायालय के मौजूदा आदेश पर टिप्पणी करते हुए कहा कि आज के दौर में पार्किंग की समस्या केवल नैनीताल नहीं वरन पूरी दुनिया की है। प्रशासन को शहर से बाहर पार्किंग की व्यवस्था करनी चाहिए। अन्यथा नगर का पर्यटन पूरी तरह तबाह हो जाएगा।

गौरतलब है कि जनहित याचिकाकर्ता का कहना है कि उनकी मूल याचिका नैनीझील के मुख्य प्राकृतिक जलस्रोत सूखाताल को अतिक्रमण मुक्त करने की थी, किंतु कई वर्षों की सुनवाई के बाद भी उनकी याचिका के इस मूल बिंदु पर कोई कार्रवाई नहीं हुई है, इसलिए उन्हें याचिका वापस लेने की अनुमति दी जाए, किंतु उच्च न्यायालय ने उनके इस आग्रह को खारिज कर दिया है।

इसके अलावा कोर्ट ने शहर में चल रहे ओएफसी केबल कार्य को निजी और आर्मी की लाइन 17 अप्रैल तक पूर्ण करने को कहा है। याची के अधिवक्ता राजीव बिष्ट ने कोर्ट से कहा कि उनके उठाए मुद्दे अभी तक अनसुलझे हैं। लिहाजा उनकी याचिका वापस दी जाय। इस पर कोर्ट ने उनकी याचिका वापस लेने के प्रार्थना पत्र को खारिज कर दिया है। हॉकर वैंडर जोन बनाए जाने के मुद्दे पर कोर्ट ने प्रशासन से कहा कि आगामी 18 अप्रैल तक जगह चिन्हित कर कोर्ट को अवगत कराए। फ्लैट्स मैदान में गाड़ी पार्किंग करने के मामले में कोर्ट ने नाराजगी जताते हुए कहा कि क्रिकेट स्टेडियम में गाड़ी नहीं खड़ी की जानी चाहिए।

सर्वोच्च न्यायालय से हटी नैनी झील के दो किमी दायरे में निर्माण पर लगी रोक

राष्ट्रीय सहारा, 24 जनवरी 2018

नैनीताल। सर्वोच्च न्यायालय ने सरोवरनगरी नैनीताल में नैनी झील के दो किमी के दायरे में निर्माणों पर उत्तराखंड उच्च न्यायालय द्वारा लगायी गयी रोक को हटा दिया है। साथ ही मामले में उत्तराखंड सरकार व याचिकाकर्ता रीगन गुप्ता से आठ सप्ताह में जवाब दाखिल करने को कहा है। उल्लेखनीय है कि उच्च न्यायालय की खंडपीठ ने एक एनजीओ संचालक तारा चंद्र राजपूत की भीमताल झील के घटते जलस्तर व उसके दो किमी के दायरे में वनों के कटान पर रोक लगाने से संबंधित जनहित याचिका पर अभूतपूर्व निर्णय सुनाते हुए नागपुर की नेशनल इंवायरनमेंट इंजीनियरिंग रिसर्च इंस्टीट्यूट यानी नीरी संस्था की अनुमति व भार वहन क्षमता के परीक्षण के बिना नैनीताल, भीमताल, सातताल, नौकुचियाताल, खुर्पाताल व सरियाताल झीलों के दो किमी के दायरे में सरकारी व गैर सरकारी निर्माणों पर रोक लगा दी थी। साथ ही हिमालयी ग्लेशियरों के 20 किमी के दायरे में आग जलाने, प्लास्टिक ले जाने व पेड़ों के कटान पर भी प्रतिबंध लगा दिया था। इस आदेश को रीगन गुप्ता ने विशेष अनुमति याचिका दाखिल कर सर्वोच्च न्यायालय में चुनौती दी थी। याचिका में कहा गया था कि उच्च न्यायालय ने पूर्व याचिकाकर्ता की एक व्यक्ति के खिलाफ दायर याचिका का दायरा बढ़ाते हुए तथा प्रभावित पक्षकारों का पक्ष सुने बिना यह आदेश दे दिया है। इस आदेश के बाद कुमाऊं मंडल विकास निगम के मुख्यालय सहित कई सरकारी सड़कों आदि के निर्माण भी लटक गये थे, तथा भीमताल, नौकुचियाताल क्षेत्र में बिल्डरों के कार्य भी रुक गये थे।

उत्तराखंड के एक वरिष्ठ आईपीएस के खिलाफ एसआईटी जांच के आदेश
    • हाईकोर्ट ने दिये ओनिडा अग्निकांड मामले में तत्काल एसआईटी गठित कर जांच के आदेश
    • वरिष्ठ आईएएस केवल खुराना फंस सकते हैं मुसीबत में, एसएचओ के साथ एसएसपी पर है कंपनी के जीएम व मैनेजर का नाम एफआईआर से हटाने का आरोप
    • उत्तराखंड के सहायक पुलिस महानिरीक्षक यातायात के पद पर हैं तैनात हैं खुराना, विवादों से रहा है चोली दामन का साथ
    • उन पर पहले भी कई मामलों में मुकदमे दर्ज हो चुके हैं, ऊधमसिंह नगर के एसएसपी रहते जिले के दिनेशपुर थाने के प्रभारी ने भी विभिन्न
    • धाराओं के तहत दर्ज कराया था मुकदमा, राजभवन ने जांच पुलिस से हटाकर सीबीसीआईडी को सोंपी थी
    • उनके खिलाफ मिर्क अग्निकांड में 11 लोगों की मौत के मामले में विवेचना बदलने के आरोप में विवेचनाधिकारी इंस्पेक्टर के साथ 24 मार्च 2016 को भी दर्ज हुआ था मुकदमा
  • तत्कालीन डीजीपी बीएस सिद्धू से तल्खी के लिए भी चर्चित रहे खुराना

नैनीताल। उत्तराखंड उच्च न्यायालय की न्यायमूर्ति सुधांशु धुलिया की एकलपीठ ने आठ फरवरी 2012 को हरिद्वार के बहादरराबाद स्थित ओनिडा कम्पनी के उत्पाद बनाने वाली मिर्क इलेक्ट्रॉनिक्स फैक्ट्री में आग लगने से 11 कर्मचारियों की जिंदा जल कर मौत होने के मामले में एसआईटी गठित कर तत्काल प्रभाव से जाँच करने के आदेश दिए है। उल्लेखनीय है कि इस मामले में उत्तराखंड के सहायक पुलिस महानिरीक्षक यातायात के पद पर तैनात वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी केवल खुराना मुसीबत में फंस सकते हैं। उनके विरुद्ध इस मामले में संबंधित थाने के कोतवाल के साथ मिर्क कंपनी के जीएम व मैनेजर का नाम एफआईआर से हटाने का आरोप है। गौरतलब है कि खुराना का लंबे समय से विवादों से चोली दामन का साथ रहा है। ऊधमसिंह नगर के एसएसपी रहते जिले के ही दिनेशपुर थाने के प्रभारी ने भी उनके विरुद्ध विभिन्न धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज कराया था, जिस पर राजभवन ने जांच पुलिस से हटाकर सीबीसीआईडी को सोंपी थी। उनके खिलाफ जुलाई 2016 में भी आईपीएस नीरू गर्ग व अजय जोशी को शामिल करते हुए एसआईटी गठित की गयी थी। इसके अलावा तत्कालीन डीजीपी बीएस सिद्धू से तल्खी के लिए भी खुराना चर्चित रहे हैं।
ज्ञात हो कि वर्ष 2012 मे हरिद्वार के बहादराबाद स्थित ओनिडा कंपनी के उत्पाद बनाने वाली मिर्क इलेक्ट्रॉनिक्स फैक्ट्री में आग लग जाने से वहां पर काम कर रहे 11 कर्मचारियो की जिंदा जल कर मौत हो गई थी। इस पर रानीपुर हरिद्वार में इन 11 मृतकों के परिजनों द्वारा एफआईआर दर्ज कराई गई थी। इनमें से एक मृतक अभिषेक के पिता रविन्द्र द्वारा नैनीताल उच्च न्यायालय में याचिका दायर की गयी और मामले की जाँच सीबीआई से कराने की मांग की गई थी। याचिका में रविन्द्र ने कहा है कि एसएसपी केवल खुराना और कोतवाल राजीव डंडरियाल ने गलत तरीके से एफआईआर से कंपनी के मालिक जीआई मूलचंदानी और कंपनी के मैनेजर का नाम एफआईआर से हटा दिया। इसकी शिकाात उन्होंने डीआईजी से की, और मामले में दुबारा एफआईआर दर्ज करने की मांग की। मंगलवार को मामले में सुनवाई के बाद न्यायालय ने सरकार को आदेश दिए है कि इस मामले की तत्काल प्रभाव से एसआईटी से जांच कराई जाय।

बढ़ती धर्मांतरण की घटनाओं पर सरकार को नसीहत देने को मजबूर हुआ उत्तराखंड हाईकोर्ट
  • धर्मांतरण पर उत्तराखंड सरकार को दी कानून बनाने की नसीहत
  • कहा-एमपी, हिमांचल की तरह कानून बनाए सरकार, सफाई भी दी कि हालांकि सरकार को सुझाव देना न्यायालय का कार्य नहीं है, लेकिन धर्मांतरण की बढ़ रही घटनाओं के मद्देनजर दिया जा रहा है सुझाव

नैनीताल। प्रदेश में धर्मांतरण, खासकर शादी के लिए धर्मांतरण और ‘लव जिहाद’ जैसी बढ़ती घटनाओं पर उत्तराखंड उच्च न्यायालय प्रदेश सरकार को नसीहत देने को मजबूर हो गया लगता है। उच्च न्यायालय की न्यायमूर्ति राजीव शर्मा की एकल पीठ ने उत्तराखंड सरकार को धर्मांतरण के संबंध में मध्य प्रदेश व हिमांचल प्रदेश के धार्मिक स्वतंत्रता कानून यानी ‘फ्रीडम ऑफ रिलीजन एक्ट’ की तरह कानून बनाने का सुझाव दिया है। साथ ही यह स्पष्टीकरण भी दिया है कि राज्य सरकार को सुझाव देना न्यायालय का कार्य नहीं है, लेकिन बदलते हुए सामाजिक परिवेश को देखते हुए और धर्मांतरण की बढ़ रही घटनाओं के मद्देनजर यह सुझाव दिया जा रहा है, ताकि केवल शादी के लिए धर्मांतरण न किया जाए।

मामले में मुस्लिम युवक द्वारा बदला गया अपना धर्म, बावजूद हिंदू युवती ने उसे ठुकराया
उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने उत्तराखंड सरकार को धर्मांतरण पर कानून बनाने का सुझाव जिस मामले में दिया है, यह मामला भी बेहद दिलचस्प है। अपनी तरह के इस अनूठे मामले में उत्तराखंड के रुद्रपुर निवासी उमेश कुमार शर्मा ने अपनी पुत्री के गायब होने की सूचना रुद्रपुर पुलिस को दी थी। बाद में उसे पता चला की उसकी पुत्री को एक मुस्लिम लड़के ने जबरदस्ती अपने पास रखा है। इस पर शर्मा ने उत्तराखंड उच्च न्यायालय में बन्दी प्रत्यक्षीकरण याचिका दायर की। इस याचिका पर बीती 14 नवम्बर को हुए सुनवाई के दौरान लड़का-लड़की दोनों पुलिस के द्वारा न्यायालय में पेश किए गए थे, और इस दौरान लड़की ने न्यायालय को बताया कि उसने धर्म बदलकर अतुल शर्मा बन गये बिजनौर उत्तर प्रदेश के युवक के साथ आर्य समाज मंदिर बिजनौर में शादी कर ली है। शादी के लिए उसके पति ने धर्म बदल लिया है। शादी से पहले वह मुस्लिम धर्म से था, और उसका नाम आदिल हुसैन अंसारी था। जबकि उसके पिता की ओर से उच्च न्यायालय को बताया गया कि देश के सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय के अनुसार केवल शादी करने के लिए धर्म परिवर्तन नही किया जा सकता है। इस दलील पर उच्च न्यायालय ने लड़की को एक सप्ताह के लिए रुद्रपुर के गर्ल्स हॉस्टल में रहने के लिए भेज दिया था। इस दौरान उसे अपने माता-पिता के साथ ही कथित पति से फोन पर भी बात करने की इजाजत नहीं दी गयी थी। इस आदेश की तय समय सीमा पूरी होने पर सोमवार 20 नवंबर को सुनवाई पर लड़की ने उच्च न्यायालय में अपने कथित पति की जगह अपने माता-पिता के पास जाने की इच्छा जताई। उसकी इस इच्छा का सम्मान करते हुए उच्च न्यायालय की न्यायमूर्ति राजीव शर्मा की एकल पीठ ने उसे पिता के साथ पुलिस की सुरक्षा में उसके घर तक छोड़ने के आदेश पुलिस को दिए।

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