आज से उत्तराखंड में परिवहन क्षेत्र में होगा नये युग का आगाज, इन रूटों पर 50 इलेक्ट्रिक बसें चलाने की तैयारी

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देहरादून, 3 सितंबर 2018। उत्तराखंड परिवहन निगम यानी रोडवेज उत्तराखंड के हल्द्वानी-नैनीताल और देहरादून-मसूरी रूटों सहित अन्य पर्वतीय मार्गों पर इलेक्ट्रिक बसें चलाने की कोशिश में है। इस योजना के तहत उत्तराखंड में करीब एक करोड़ रुपए लागत की एक ईको फ्रेंडली इलेक्ट्रिक बस आ भी गई है। माना जा रहा है कि गुरुवार से इस बस का मसूरी मार्ग पर परीक्षण किया जाएगा। यह प्रयोग सफल रहा तो राज्य में पीपीपी मोड पर 50 बसों का संचालन किया जा सकता है।
बताया गया है कि बढ़ते प्रदूषण पर लगाम लगाने के उद्देश्य के साथ उत्तराखंड सरकार की कोशिश इलेक्ट्रिक वाहनों को चलाने की है। लेकिन उत्तराखंड परिवहन निगम की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं होने के कारण पीपीपी मोड में इलेक्ट्रिक बसें चलाने की योजना बनाई गयी है। बीती एक अगस्त को मुख्य सचिव उत्पल कुमार की अध्यक्षता में परिवहन सुविधाओं में बढ़ोत्तरी को लेकर हुई बैठक में सूबे में रोडवेज के जरिए इलेक्ट्रिक बसें चलाने पर सहमति बनी थी। मुख्य सचिव ने रोडवेज को दून शहर में इलेक्ट्रिक सिटी बसें संचालित करने रोडमैप तैयार करने और दून शहर में प्रयोग के तौर पर रोडवेज को इलेक्ट्रिक स्कूल बस चलाने के निर्देश भी दिए थे। इसी के तहत रोडवेज की ओर से निजी कंपनियों से प्रस्ताव मांगे गए थे। इनमें तमिलनाडू की एक कंपनी ने एक करोड़ की कीमत की एक बस परीक्षण के लिए देहरादून के हरिद्वार रोड स्थित कार्यशाला में पहुंचा दी है। रोडवेज के महाप्रबंधक (संचालन) दीपक जैन ने बताया कि इस बस को देहरादून-मसूरी, देहरादून से ऋषिकेश और देहरादून-हरिद्वार रूट पर परीक्षण के लिए चलाया जाएगा। देखा जाएगा कि बस पर्वतीय मार्ग पर लोड ले रही या नहीं। यदि यह प्रयोग सफल रहा तो पीपीपी मोड पर 50 बसें चलाने के लिए निविदा आमंत्रित की जाएगी। इनमें से 25 बसें देहरादून से मसूरी और बाकी 25 हल्द्वानी-नैनीताल के बीच चलाने का फैसला लिया था।

यह हैं इलेक्ट्रिक बस की खासियत
देहरादून। नई इलेक्ट्रिक बस 32 सीटर 32 सीटर है और ईको फ्रेंडली है। यह ध्वनि और वायु प्रदूषण नहीं करती है। कंपनी का दावा है कि इस बस में इंजन ही नहीं है। इसमें मोटर इलेक्ट्रिक ऊर्जा को मैकेनिकल ऊर्जा में बदलती है। बस एक बार चार्ज होने पर दो से ढाई सौ किमी चलती है, और अधिकतम 80 किमी प्रतिघंटा की गति तक दौड़ सकती है। पर्वतीय मार्गों को देखते हुए बस 166 व्हीलबेस की है।

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नैनीताल, 20 अप्रैल 2018। नगर के अशोक टॉकीज की जगह करीब 300 से 400 वाहनों की मैकेनाइज्ड (यांत्रिक) पार्किग बनाई जाएगी। शुक्रवार को उत्तराखंड उच्च न्यायालय से नगर में प्रस्तावित पार्किंग स्थलों के निरीक्षण लिए नियुक्त अपर महाधिवक्ता एमसी पांडे ने प्रशासनिक अधिकारियो के साथ नगर के नारायण नगर, अशोक टॉकीज एवं कैलाखान में प्रस्तावित पार्किग स्थलों का निरीक्षण किया, एवं अशोक टॉकीज की पार्किंग के लिए नगर पालिका के अधिशासी अधिकारी रोहिताश शर्मा को इस स्थल की भूधारण क्षमता का आंकलन कराकर एक माह के भीतर प्रस्तावित पार्किंग की विस्तृत प्रोजेक्ट रिपोर्ट तैयार करने को कहा। निरीक्षण में ईओ रोहिताश शर्मा के साथ ही एडीएम हरबीर सिंह एवं अन्य अधिकारी भी मौजूद रहे।

हल्द्वानी-कालाढुंगी से नैनीताल को 20 सीटर शटल बसें चलाने के दिए आदेश

नैनीताल, 18 अप्रैल 2018। उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने आसन्न ग्रीष्मकालीन पर्यटन सीजन को देखते हुए प्रशासन से हल्द्वानी व कालाढूंगी से नैनीताल के 20 सीटर बसों का संचालन करने को कहा है। साथ ही अपने पूर्व के आदेशों पर जिला प्रशाशन द्वारा चार समाचार पत्रों में नैनीताल में पर्यटक वाहनों की पार्किंग के लिए प्रकाशित की गयी विज्ञप्ति से संतुष्ट न होकर दुबारा इस विज्ञप्ति को समाचार के रूप में प्रकाशित करने को कहा है।

तो रोडवेज कर रहा है उच्च न्यायालय के आदेशों की अवमानना: जोशी
नैनीताल। नैनीताल के लिए शटल सेवा के रूप में बसें चलाने के आदेश पर नैनीताल टैक्सी-ट्रेवल यूनियन के अध्यक्ष नीरज जोशी ने कहा कि उत्तराखंड राज्य के अधिनियम के अनुसार नैनीताल में 218 इंच ह्वील बेस की बसें भी आ सकती हैं, जबकि उच्च न्यायालय ने 166 इंच ह्वील बेस या 35 सीटर में से जो भी कम हो, छोटी बसें ही नैनीताल में आने की इजाजत अपने 3 जुलाई 2017 के आदेश में दी थी, और इससे बड़ी बसों के आने पर पाबंदी लगा दी थी। उनका कहना है कि उत्तराखंड परिवहन निगम यानी रोडवेज इससे इतर 184 ह्वील बेस की बसें भी नैनीताल के लिए चला रहा है, जो कि उच्च न्यायालय के आदेशों की अवमानना है। वहीं प्रशासन ने नैनीताल के लिए पर्यटक बसों के आने पर पाबंदी लगा दी है, जबकि एक बस के आने से कई छोटी टैक्सियों से होने वाली जाम की समस्या बचती है। 

कम पार्किंग पर बंद नहीं होंगे होटल, पूर्व मुख्य सचिव नए कोर्ट कमिश्नर नियुक्त

उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने नैनीताल की जनहित याचिका को सुनते हुए प्रशासन की पार्किंग व्यवस्था से संतुष्ट होकर नगर के होटलों में 50 प्रतिशत पार्किंग नहीं होने पर कमरे सील करने के अपने आदेश पर फिलहाल प्रशासन से कोई कार्यवाही नहीं करने को कहा है। इसके  अलावा नैनीताल निवासी राज्य के पूर्व मुख्य सचिव इन्दु कुमार पाण्डे को पब्लिक कोर्ट कमिश्नर नियुक्त किया है। न्यायालय ने कहा कि ‘अतिथि देवो भवः’ का सिद्धांत अपनी जगह है, लेकिन पर्यटक अपने वाहनों के बगैर नैनीताल आएं, तो अच्छा है। रोड में वाहनों के सुगम आवागमन के लिए न्यायालय ने कहा की अगर लोअर मॉल रोड दो फ़ीट चौड़ी हो जाती तो बहुत अच्छा होता, इस पर एसएसपी जन्मेजय खंडूरी ने कहा की हैंगिंग ब्रिज बनाया जा सकता है । जबकि सरकारी अधिवक्ता ने कहा कि भूगर्भ वैज्ञानिक इसे स्लाइडिंग जोन मानते हुए इसकी इजाजत नहीं देते हैं। मामले में अगली सुनवाई 10 मई को होनी तय हुई है।

हाईकोर्ट ने जियो कंपनी के ठेकेदार पर लगाया 5 लाख का जुर्माना

-18 अप्रैल की तय सीमा तक केबिल लाइनें डालने के लिए खोदे गए गड्ढे न भरने पर की कड़ी कार्रवाई
नैनीताल। उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने नैनीताल शहर में 18 अप्रैल की तय सीमा तक विभिन्न दूरसंचार कम्पनियो द्वारा बिछाई जा रही केबिल लाइनों के गड्ढे न भरने पर जिओ कम्पनी के ठेकेदार को 5 लाख रूपये का जुर्माना लगाया है।
उल्लेखनीय है कि नैनीताल निवासी डा. अजय रावत की बहुचर्चित जनहित याचिका में बुधवार को सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति सुधांशु धुलिया व न्यायमूर्ति लोकपाल सिंह की खंडपीठ ने जिला प्रशाशन से पूर्व में जारी आदेशो के क्रियान्वयन की जानकारी ली। इस दौरान जिओ कम्पनी के अधिवक्ता ने लाइन बिछाने के लिए न्यायालय से 20 दिन का अतरिक्त समय माँगा। इस पर न्यायालय ने नाराजगी जताते हुए कम्पनी के ठेकेदार पर 5 लाख का जुर्माना लगाया।

अपर महाधिवक्ता परखेंगे नारायण नगर, रानीबाग व कैलाखान की प्रस्तावित पार्किंगों को
नैनीताल। डा. अजय रावत की बहुचर्चित जनहित याचिका में बुधवार को सुनवाई के दौरान जिला प्रशाशन की ओर से डीएम वीके सुमन व एसएसपी जनमेजय खंडूड़ी ने नारायणनगर में करीब 300, एचएमटी रानीबाग में करीब 500 व कैलाखान में कुछ वाहन पार्किंग की व्यवस्था किये जाने की जानकारी दी। इस पर अदालत ने अपर महाधिवक्ता मोहन चन्द्र पांडे को इन पार्किंग स्थलों का मुआयना कर 10 मई तक न्यायालय में रिपोर्ट पेश करने को कहा।

वेंडर जोन पर डीएम ने उच्च न्यायालय को दी जानकारी 

नैनीताल। डा. रावत की जनहित याचिका में नैनीताल में वेंडर जोन चिन्हित करने के संबंध में डीएम वीके सुमन ने बुधवार को उच्च न्यायालय को बताया कि वेंडर जोन कमेटी गठित कर ली गई है, और पात्र हॉकरों का चयन किया जा रहा है, साथ ही वेंडिंग जोन के लिए कुछ जगहें  भी चिन्हित कर ली गयी हैं। 

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-आईआईटी रुड़की ने की पैरवी, दोनों विषय लंबे समय से हैं चर्चाओं में, और उच्च न्यायालय से भी है रोक
नैनीताल, 13 अप्रैल, 2018। नैनीताल नगर में यातायात को सुगम बनाने के लिए आईआईटी रुड़की के वैज्ञानिकों ने अल्पकालीन व दीर्घकालीन योजनाएं सुझायीं हैं। इनमें नैनीताल में बड़ी पर्यटक बसों को आने देने और फ्लैट्स मैदान में बहुमंजिला पार्किंग बनाने के सुझाव सर्वाधिक उल्लेखनीय हैं। उल्लेखनीय है कि नैनीताल में बसों के प्रवेश पर जिला प्रशासन के द्वारा उत्तराखंड उच्च न्यायालय के आदेशों से रोक बताई जाती है, वहीं पार्किंग के निर्माण के बाबत भी प्रशासन उच्च न्यायालय के आदेशों पर नगर में निर्माणों की रोक बताता रहता है, और नगर की बजाय नगर से दूर-बाहर नारायण नगर, कालाढुंगी व रानीबाग में पार्किंग बनाने की संभावनाएं बरसों से तलाशी जा रही है, अलबत्ता किसी भी पार्किंग निर्माण अभी शुरू भी नहीं हो पाया है।


आईआईटी रुड़की की नैनीताल के ही बिड़ला विद्या मंदिर से पढ़ी विशेषज्ञ प्रो. गीतम तिवारी ने विशेष भेंट में बताया कि एक बड़ी बस के नैनीताल में आने से कई छोटी गाड़ियों की भीड़ नैनीताल में आने से रोकी जा सकती है। प्रशासन को रेलवे स्टेशन से नैनीताल के लिए बसें चलानी चाहिए। उन्होंने बसों के लिए तल्लीताल रोडवेज बस स्टेंड पर यात्रियों को पूर्व की तरह उतारकर वापस शहर से बाहर खड़े होने की व्यवस्था बताई। इसके अलावा उनके साथ ही शिवनागर विवि ग्रेटर नोएडा के जियो तकनीकी विशेषज्ञ प्रो. गिरीश अग्रवाल व आईआइ्रटी रुड़की के निर्माण प्रबंधन विशेषज्ञ प्रो. नीरज झा ने नगर के फ्लैट्स मैदान में मौजूदा कार पार्किंग के स्थान पर बहुमंजिला पार्किग बनाने की अनुशंसा की। उन्होंने कहा कि आधुनिक तकनीकों से सामने के पहाड़ की ओर, नीचे से नंदा देवी व दुर्गा पूजा के मेले गुजारने के प्रबंध के साथ बड़ी पार्किंग बनायी जा सकती है। इससे नगर में पार्किंग की समस्या का बड़े स्तर पर समाधान हो सकता है। इसके अलावा अल्पकालीन व त्वरित प्रबंधों के तहत उन्होंने मल्लीताल पंत पार्क से नगर पालिका के बगीचे से होते हुए पैदल यात्रियों के लिए करीब 3 मीटर चौड़ा पाथ-वे, पंत मूर्ति पर थोड़ा बड़ा व स्टेट बैंक के पास छोटा गोल चक्कर बनाये जाने की भी अपनी रिपोर्ट में अनुशंसा की है। इसके अलावा उन्होंने नगर में ई-रिक्शा चलाने तथा आगे नगर के बाहर नारायण नगर व रूसी बाईपास पर यात्रियों, खासकर महिला यात्रियों व वाहन चालकों के लिए शौचालय, प्रसाधन आदि के प्रबंध किये जाने की भी जरूरत बतायी।
उल्लेखनीय है कि इससे पूर्व डीएम वीके सुमन के साथ भी आईआईटी रुड़की के वैज्ञानिकों ने नगर में प्रस्तावित पाथ-वे व पार्किंग स्थल का निरीक्षण किया। इस दौरान आईआईटी रुड़की के अन्य विशेषज्ञ प्रो. दिनेश मोहन, एडीएम हरबीर सिंह, पालिका ईओ रोहिताश शर्मा व आरटीओ सहित लोनिवि के अधिकारी भी साथ रहे।

शटल टैक्सी चलाने को प्रशासन ने टैक्सी-ट्रेवल संगठनों से मांगा सहयोग

नैनीताल। नैनीताल नगर में आगामी पर्यटन सीजन में यातायात को सुगम बनाने के लिए जिला प्रशासन ने आईआईटी रुड़की के विशेषज्ञों के साथ नगर के टैक्सी-ट्रेवल संगठनों से करीब 10 अच्छी स्तरीय ब्रांड व मॉडल के वाहन उपलब्ध कराने का सहयोग मांगा। नगर पालिका के सभागार में हुई बैठक में टैक्सी-ट्रेवल एसोसिएशन के अध्यक्ष नीरज जोशी ने नगर में बड़ी बसों का प्रवेश प्रतिबंधित होने और टैक्सियों के भी नैनीताल आने पर प्रतिबंध लगाने के प्रशासन के आदेश की कड़ी मुखालफत की। उन्होंने नगर की व्यवस्थाओं को सुधारने के लिए अपनी ओर से सुगम यातायात की योजना भी प्रस्तुत की, और नगर की यातायात योजना में अब तक यातायात से जुड़े लोगों के सुझाव न लिये जाने पर नाराजगी भी जताई। उन्होंने ग्रीष्मकालीन पर्यटन सीजन में नगर के स्कूलों के वार्षिकोत्सव आयोजित करने की अनुमति न देने का भी सुझाव दिया। बैठक में नगर पलिका ईओ, आरटीओ, एएसपी, नगर कोतवाल, तल्लीताल थाना प्रभारी तथा टैक्सी एसोसिएशन के ओमवीर सिंह, बबलू बोरा व दीपक मटियाली सहित बड़ी संख्या में प्रतिनिधि शामिल रहे।

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उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने नैनीताल को ईको संसेटिव जोन (पर्यावरण संवेदनशील क्षेत्र) बनाये जाने संबंधी डा. अजय रावत की जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान अपने वाहन से नैनीताल आने वाले पर्यटकों को यह सूचित करने को कहा है कि वे नैनीताल आने से पहले अपने वाहन के लिए यहाँ  पार्किंग की अग्रिम व्यवस्था करके ही आयें, उन्हें इसके बाद ही नैनीताल आने दिया जाएगा। इस बारे में जिला प्रशासन को चार राष्ट्रीय अखबारों में पार्किंग संबंधी विज्ञापन जारी कर पर्यटकों को यह सूचना देने को कहा है। आदेश में फ्लैट्स मैदान के खेल वाले हिस्से का इस्तेमाल पार्किंग के रूप में न करने के आदेश भी दिये गए हैं। इस आदेश पर हर मन में उठ रहे इस सवाल का जवाब किसी के पास नहीं है कि कोई यात्री पार्किंग की अग्रिम व्यवस्था सुनिश्चित कर सकता है ? क्या महीने भर पहले होटल के साथ पार्किंग बुक हो सकती है ? और यदि हो भी जाये तो क्या पर्किंग संचालक किसी बुकिंग के लिए पहले से स्थान खाली रख सकता है ? वह भी तब पार्किंग के स्थान की भारी किल्लत है।

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उल्लेखनीय है की पूर्व में हाई कोर्ट ने इसी जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए नगर के होटल व्यवसायियों को पार्किंग सुनिश्चित करने के लिए मोबाइल ऐप बनाने को कहा था। नैनीताल होटल रेस्टोरेंट एसोसिएशन ने इस के बाद ऐप बनाया तो उसे हाईकोर्ट ने खारिज कर दिया। जिसके बाद एसोसिएशन ने पुनः नया ऐप बनाने की कवायद शुरू की है। इधर नगर की फ्लैट्स मैदान व मेट्रोपोल होटल शत्रु संपत्ति की कार पार्किंग में ऑटोमेटेड बूम बैरियर भी लगवा दिये हैं। वहीं पूर्व में उच्च न्यायालय ने नगर के होटलों को यह आदेश दे दिया था कि वे अपने होटलों में ठहरने वाले यात्रियों के वाहनों के लिए पार्किंग की व्यवस्था करें, अन्यथा उनके 50 फीसद कक्ष बंद कर दिये जाएंगे। इस सीमा को अब 60 फीसद तक बढ़ा दिया गया है। नगर के बाहर नारायण नगर में 50 करोड़ रुपए से पार्किंग बननी प्रस्तावित है, परंतु कब तक बननी शुरू होगी, कहना मुश्किल है, जबकि काठगोदाम, रानीबाग व कालाढुंगी में पार्किंग के लिए स्थान तलाशा जाना भी भारी पड़ रहा है। ऑल इंडिया होटल एंड रेस्टोरेंट एसोसिएशन के सदस्य प्रवीण शर्मा ने उच्च न्यायालय के मौजूदा आदेश पर टिप्पणी करते हुए कहा कि आज के दौर में पार्किंग की समस्या केवल नैनीताल नहीं वरन पूरी दुनिया की है। प्रशासन को शहर से बाहर पार्किंग की व्यवस्था करनी चाहिए। अन्यथा नगर का पर्यटन पूरी तरह तबाह हो जाएगा।

गौरतलब है कि जनहित याचिकाकर्ता का कहना है कि उनकी मूल याचिका नैनीझील के मुख्य प्राकृतिक जलस्रोत सूखाताल को अतिक्रमण मुक्त करने की थी, किंतु कई वर्षों की सुनवाई के बाद भी उनकी याचिका के इस मूल बिंदु पर कोई कार्रवाई नहीं हुई है, इसलिए उन्हें याचिका वापस लेने की अनुमति दी जाए, किंतु उच्च न्यायालय ने उनके इस आग्रह को खारिज कर दिया है।

इसके अलावा कोर्ट ने शहर में चल रहे ओएफसी केबल कार्य को निजी और आर्मी की लाइन 17 अप्रैल तक पूर्ण करने को कहा है। याची के अधिवक्ता राजीव बिष्ट ने कोर्ट से कहा कि उनके उठाए मुद्दे अभी तक अनसुलझे हैं। लिहाजा उनकी याचिका वापस दी जाय। इस पर कोर्ट ने उनकी याचिका वापस लेने के प्रार्थना पत्र को खारिज कर दिया है। हॉकर वैंडर जोन बनाए जाने के मुद्दे पर कोर्ट ने प्रशासन से कहा कि आगामी 18 अप्रैल तक जगह चिन्हित कर कोर्ट को अवगत कराए। फ्लैट्स मैदान में गाड़ी पार्किंग करने के मामले में कोर्ट ने नाराजगी जताते हुए कहा कि क्रिकेट स्टेडियम में गाड़ी नहीं खड़ी की जानी चाहिए।

सर्वोच्च न्यायालय से हटी नैनी झील के दो किमी दायरे में निर्माण पर लगी रोक

राष्ट्रीय सहारा, 24 जनवरी 2018

नैनीताल। सर्वोच्च न्यायालय ने सरोवरनगरी नैनीताल में नैनी झील के दो किमी के दायरे में निर्माणों पर उत्तराखंड उच्च न्यायालय द्वारा लगायी गयी रोक को हटा दिया है। साथ ही मामले में उत्तराखंड सरकार व याचिकाकर्ता रीगन गुप्ता से आठ सप्ताह में जवाब दाखिल करने को कहा है। उल्लेखनीय है कि उच्च न्यायालय की खंडपीठ ने एक एनजीओ संचालक तारा चंद्र राजपूत की भीमताल झील के घटते जलस्तर व उसके दो किमी के दायरे में वनों के कटान पर रोक लगाने से संबंधित जनहित याचिका पर अभूतपूर्व निर्णय सुनाते हुए नागपुर की नेशनल इंवायरनमेंट इंजीनियरिंग रिसर्च इंस्टीट्यूट यानी नीरी संस्था की अनुमति व भार वहन क्षमता के परीक्षण के बिना नैनीताल, भीमताल, सातताल, नौकुचियाताल, खुर्पाताल व सरियाताल झीलों के दो किमी के दायरे में सरकारी व गैर सरकारी निर्माणों पर रोक लगा दी थी। साथ ही हिमालयी ग्लेशियरों के 20 किमी के दायरे में आग जलाने, प्लास्टिक ले जाने व पेड़ों के कटान पर भी प्रतिबंध लगा दिया था। इस आदेश को रीगन गुप्ता ने विशेष अनुमति याचिका दाखिल कर सर्वोच्च न्यायालय में चुनौती दी थी। याचिका में कहा गया था कि उच्च न्यायालय ने पूर्व याचिकाकर्ता की एक व्यक्ति के खिलाफ दायर याचिका का दायरा बढ़ाते हुए तथा प्रभावित पक्षकारों का पक्ष सुने बिना यह आदेश दे दिया है। इस आदेश के बाद कुमाऊं मंडल विकास निगम के मुख्यालय सहित कई सरकारी सड़कों आदि के निर्माण भी लटक गये थे, तथा भीमताल, नौकुचियाताल क्षेत्र में बिल्डरों के कार्य भी रुक गये थे।

उत्तराखंड के एक वरिष्ठ आईपीएस के खिलाफ एसआईटी जांच के आदेश
  • हाईकोर्ट ने दिये ओनिडा अग्निकांड मामले में तत्काल एसआईटी गठित कर जांच के आदेश
  • वरिष्ठ आईएएस केवल खुराना फंस सकते हैं मुसीबत में, एसएचओ के साथ एसएसपी पर है कंपनी के जीएम व मैनेजर का नाम एफआईआर से हटाने का आरोप
  • उत्तराखंड के सहायक पुलिस महानिरीक्षक यातायात के पद पर हैं तैनात हैं खुराना, विवादों से रहा है चोली दामन का साथ
  • उन पर पहले भी कई मामलों में मुकदमे दर्ज हो चुके हैं, ऊधमसिंह नगर के एसएसपी रहते जिले के दिनेशपुर थाने के प्रभारी ने भी विभिन्न
  • धाराओं के तहत दर्ज कराया था मुकदमा, राजभवन ने जांच पुलिस से हटाकर सीबीसीआईडी को सोंपी थी
  • उनके खिलाफ मिर्क अग्निकांड में 11 लोगों की मौत के मामले में विवेचना बदलने के आरोप में विवेचनाधिकारी इंस्पेक्टर के साथ 24 मार्च 2016 को भी दर्ज हुआ था मुकदमा
  • तत्कालीन डीजीपी बीएस सिद्धू से तल्खी के लिए भी चर्चित रहे खुराना

नैनीताल। उत्तराखंड उच्च न्यायालय की न्यायमूर्ति सुधांशु धुलिया की एकलपीठ ने आठ फरवरी 2012 को हरिद्वार के बहादरराबाद स्थित ओनिडा कम्पनी के उत्पाद बनाने वाली मिर्क इलेक्ट्रॉनिक्स फैक्ट्री में आग लगने से 11 कर्मचारियों की जिंदा जल कर मौत होने के मामले में एसआईटी गठित कर तत्काल प्रभाव से जाँच करने के आदेश दिए है। उल्लेखनीय है कि इस मामले में उत्तराखंड के सहायक पुलिस महानिरीक्षक यातायात के पद पर तैनात वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी केवल खुराना मुसीबत में फंस सकते हैं। उनके विरुद्ध इस मामले में संबंधित थाने के कोतवाल के साथ मिर्क कंपनी के जीएम व मैनेजर का नाम एफआईआर से हटाने का आरोप है। गौरतलब है कि खुराना का लंबे समय से विवादों से चोली दामन का साथ रहा है। ऊधमसिंह नगर के एसएसपी रहते जिले के ही दिनेशपुर थाने के प्रभारी ने भी उनके विरुद्ध विभिन्न धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज कराया था, जिस पर राजभवन ने जांच पुलिस से हटाकर सीबीसीआईडी को सोंपी थी। उनके खिलाफ जुलाई 2016 में भी आईपीएस नीरू गर्ग व अजय जोशी को शामिल करते हुए एसआईटी गठित की गयी थी। इसके अलावा तत्कालीन डीजीपी बीएस सिद्धू से तल्खी के लिए भी खुराना चर्चित रहे हैं।
ज्ञात हो कि वर्ष 2012 मे हरिद्वार के बहादराबाद स्थित ओनिडा कंपनी के उत्पाद बनाने वाली मिर्क इलेक्ट्रॉनिक्स फैक्ट्री में आग लग जाने से वहां पर काम कर रहे 11 कर्मचारियो की जिंदा जल कर मौत हो गई थी। इस पर रानीपुर हरिद्वार में इन 11 मृतकों के परिजनों द्वारा एफआईआर दर्ज कराई गई थी। इनमें से एक मृतक अभिषेक के पिता रविन्द्र द्वारा नैनीताल उच्च न्यायालय में याचिका दायर की गयी और मामले की जाँच सीबीआई से कराने की मांग की गई थी। याचिका में रविन्द्र ने कहा है कि एसएसपी केवल खुराना और कोतवाल राजीव डंडरियाल ने गलत तरीके से एफआईआर से कंपनी के मालिक जीआई मूलचंदानी और कंपनी के मैनेजर का नाम एफआईआर से हटा दिया। इसकी शिकाात उन्होंने डीआईजी से की, और मामले में दुबारा एफआईआर दर्ज करने की मांग की। मंगलवार को मामले में सुनवाई के बाद न्यायालय ने सरकार को आदेश दिए है कि इस मामले की तत्काल प्रभाव से एसआईटी से जांच कराई जाय।

बढ़ती धर्मांतरण की घटनाओं पर सरकार को नसीहत देने को मजबूर हुआ उत्तराखंड हाईकोर्ट
  • धर्मांतरण पर उत्तराखंड सरकार को दी कानून बनाने की नसीहत
  • कहा-एमपी, हिमांचल की तरह कानून बनाए सरकार, सफाई भी दी कि हालांकि सरकार को सुझाव देना न्यायालय का कार्य नहीं है, लेकिन धर्मांतरण की बढ़ रही घटनाओं के मद्देनजर दिया जा रहा है सुझाव

नैनीताल। प्रदेश में धर्मांतरण, खासकर शादी के लिए धर्मांतरण और ‘लव जिहाद’ जैसी बढ़ती घटनाओं पर उत्तराखंड उच्च न्यायालय प्रदेश सरकार को नसीहत देने को मजबूर हो गया लगता है। उच्च न्यायालय की न्यायमूर्ति राजीव शर्मा की एकल पीठ ने उत्तराखंड सरकार को धर्मांतरण के संबंध में मध्य प्रदेश व हिमांचल प्रदेश के धार्मिक स्वतंत्रता कानून यानी ‘फ्रीडम ऑफ रिलीजन एक्ट’ की तरह कानून बनाने का सुझाव दिया है। साथ ही यह स्पष्टीकरण भी दिया है कि राज्य सरकार को सुझाव देना न्यायालय का कार्य नहीं है, लेकिन बदलते हुए सामाजिक परिवेश को देखते हुए और धर्मांतरण की बढ़ रही घटनाओं के मद्देनजर यह सुझाव दिया जा रहा है, ताकि केवल शादी के लिए धर्मांतरण न किया जाए।

मामले में मुस्लिम युवक द्वारा बदला गया अपना धर्म, बावजूद हिंदू युवती ने उसे ठुकराया
उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने उत्तराखंड सरकार को धर्मांतरण पर कानून बनाने का सुझाव जिस मामले में दिया है, यह मामला भी बेहद दिलचस्प है। अपनी तरह के इस अनूठे मामले में उत्तराखंड के रुद्रपुर निवासी उमेश कुमार शर्मा ने अपनी पुत्री के गायब होने की सूचना रुद्रपुर पुलिस को दी थी। बाद में उसे पता चला की उसकी पुत्री को एक मुस्लिम लड़के ने जबरदस्ती अपने पास रखा है। इस पर शर्मा ने उत्तराखंड उच्च न्यायालय में बन्दी प्रत्यक्षीकरण याचिका दायर की। इस याचिका पर बीती 14 नवम्बर को हुए सुनवाई के दौरान लड़का-लड़की दोनों पुलिस के द्वारा न्यायालय में पेश किए गए थे, और इस दौरान लड़की ने न्यायालय को बताया कि उसने धर्म बदलकर अतुल शर्मा बन गये बिजनौर उत्तर प्रदेश के युवक के साथ आर्य समाज मंदिर बिजनौर में शादी कर ली है। शादी के लिए उसके पति ने धर्म बदल लिया है। शादी से पहले वह मुस्लिम धर्म से था, और उसका नाम आदिल हुसैन अंसारी था। जबकि उसके पिता की ओर से उच्च न्यायालय को बताया गया कि देश के सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय के अनुसार केवल शादी करने के लिए धर्म परिवर्तन नही किया जा सकता है। इस दलील पर उच्च न्यायालय ने लड़की को एक सप्ताह के लिए रुद्रपुर के गर्ल्स हॉस्टल में रहने के लिए भेज दिया था। इस दौरान उसे अपने माता-पिता के साथ ही कथित पति से फोन पर भी बात करने की इजाजत नहीं दी गयी थी। इस आदेश की तय समय सीमा पूरी होने पर सोमवार 20 नवंबर को सुनवाई पर लड़की ने उच्च न्यायालय में अपने कथित पति की जगह अपने माता-पिता के पास जाने की इच्छा जताई। उसकी इस इच्छा का सम्मान करते हुए उच्च न्यायालय की न्यायमूर्ति राजीव शर्मा की एकल पीठ ने उसे पिता के साथ पुलिस की सुरक्षा में उसके घर तक छोड़ने के आदेश पुलिस को दिए।

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मेरा जन्म 26 नवंबर 1972 को हुआ था। मैं नैनीताल, भारत में मूलतः एक पत्रकार हूँ। वर्तमान में मार्च 2010 से राष्ट्रीय हिन्दी दैनिक समाचार पत्र-राष्ट्रीय सहारा में ब्यूरो चीफ के रूप में कार्य कर रहा हूँ। इससे पहले मैं पांच साल के लिए दैनिक जागरण के लिए काम कर चुका हूँ। कुमाऊँ विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग से ‘नए मीडिया’ विषय पर शोधरत हूँ। फोटोग्राफ़ी मेरा शौक है। मैं NIKON COOLPIX P530 और अडोब फोटोशॉप 7.0 के साथ फोटोग्राफी कर रहा हूँ। फोटोग्राफी मेरे लिए दुनियां की खूबसूरती को अपनी ओर से चिरस्थाई बनाने का बहुत छोटा सा प्रयास है। एक फोटो पत्रकार के रूप में मेरी तस्वीरों को नैनीताल राजभवन सहित विभिन्न प्रदर्शनियों में प्रस्तुत किया गया, तथा उत्तराखंड की राज्यपाल श्रीमती मार्गरेट अलवा द्वारा सम्मानित किया गया है। कुछ चित्रों को राष्ट्रीय-अंतर्राष्ट्रीय पुरस्कार भी प्राप्त हो चुके हैं। गूगल अर्थ पर चित्र उपलब्ध कराने वाली पैनोरामियो साइट पर मेरी प्रोफाइल को 18.85 Lacs से भी अधिक हिट्स प्राप्त हैं।पत्रकारिता और फोटोग्राफी के अलावा मुझे कवितायेँ लिखना पसंद है। काव्य क्षेत्र में मैंने नवीन जोशी “नवेन्दु” के रूप में अपनी पहचान बनाई है। मैंने बहुत सी कुमाउनी कवितायेँ लिखी हैं, कुमाउनी भाषा में मेरा काव्य संकलन उघड़ी आंखोंक स्वींड़ प्रकाशित हो चुका है, जो कि पुस्तक के के साथ ही डिजिटल (PDF) फार्मेट पर भी उपलब्ध होने वाली कुमाउनी की पहली पुस्तक है। मेरी यह पुस्तक गूगल एप्स पर भी उपलब्ध है। ’ यहां है एक पत्रकार, लेखक, कवि एवं छाया चित्रकार के रूप में मेरी रचनात्मकता, लेख, आलेख, छायाचित्र, कविताएं, हिंदी-कुमाउनी के ब्लॉग आदि कार्यों का पूरा समग्र। मेरी कोशिश है कि यहां नैनीताल, कुमाऊं, उत्तराखंड और वृहद संदर्भ में देश की विरासत, संस्कृति, इतिहास और वर्तमान को समग्र रूप में संग्रहीत करने की….। मेरे दिल में बसता है, मेरा नैनीताल, मेरा कुमाऊं और मेरा उत्तराखंड

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