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जन औषधि केंद्रों में दवाओं की कमी पर केंद्र एवं राज्य सरकार को नोटिस

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नवीन समाचार, नैनीताल, 8 जुलाई 2020। उत्तराखंड उच्च न्यायालय की मुख्य न्यायधीश रमेश रंगनाथन व न्यायमूर्ति आरसी खुल्बे की खंडपीठ ने जन औषधि केंद्रों में पिछले लंबे समय से दवाइयों की भारी कमी व वित्तीय अनियमितताओं के मामले में सुनवाई करते हुए केंद्र सरकार के औषधि सचिव एवं औषधि ब्यूरो तथा राज्य के स्वास्थ्य सचिव, जिला रेडक्रॉस सोसायटी नैनीताल व राज्य रेडक्रॉस सोसायटी को नोटिस जारी कर 21 दिनों के भीतर दवाइयां न आने पर विस्तृत जवाब पेश करने को कहा है।
उल्लेखनीय है कि इस मामले में हल्द्वानी निवासी समाजसेवी अमित खोलिया ने जनहित याचिका दायर कर कहा है कि नैनीताल जिले के सभी सरकारी अस्पतालों में गरीबों को बाजार मूल्य से कम दामों पर जैनरिक दवाइयों को उपलब्ध कराने के मकसद से रेडक्रॉस सोसायटी के माध्यम से प्रधानमंत्री जन औषधि केंद्र खोले गए थे। लेकिन लंबे समय से इन केंद्रों में आई ड्रॉप के अलावा अन्य दवाइयां उपलब्ध नहीं हैं। जन औषधि केंद्र केवल शोपीस बन के रह गए हैं। कोरोना काल में भी ऐसी ही बदतर स्थिति होने के कारण लोग बाजार से महंगी दवाइयां खरीदने के लिये मजबूर हैं। लिहाजा याचिका में जन औषधि केंद्रों का संचालन रेडक्रॉस सोसायटी से हटा कर किसी अन्य संस्था को देने की मांग की गई है। उल्लेखनीय है कि जिला मुख्यालय में तो डीएम सविन बंसल ने कुप्रबंधन का आरोप लगाते हुए जिला रेडक्रॉस सोसायटी पर कार्रवाई की थी। सोसायटी के प्रबंधन में भी बदलाव हुआ, फिर भी स्थितियां सुधरने की जगह और भी बिगड़ गईं।

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नवीन समाचार, काशीपुर, 25 जून 2020। चिकित्सक धरती पर भगवान के दूसरे रूप कहे जाते हैं। लेकिन कुछ चिकित्सकों भगवान के दूसरे रूप कहे जाने वाले चिकित्सकों की छवि को खराब करने में भी पीछे नहीं रहते। काशीपुर के एक सरकारी अस्पताल के चिकित्सक ने एक महिला की डिलीवरी के वक्त उसके पेट में तौलिया छोड़कर ऐसा ही काम किया है। अलबत्ता, एम्स ऋषिकेश के धरती के दूसरे भगवानों ने उनकी गलती का समाधान कर दिया है।
हुआ यह कि बैलपड़ाव की रहने वाली मनप्रीत कौर ने कुछ समय पूर्व काशीपुर के सरकारी अस्पताल में डॉ. नवप्रीत कौर सहोता से ऑपरेशन के जरिये डिलीवरी करवाई थी। डिलीवरी के बाद से ही मनप्रीत कौर ने डॉक्टर से पेट मे लगातार दर्द होने व दर्द के कम न होने की शिकायत की। लेकिन इसके बाद भी काशीपुर के सरकारी अस्पताल की डॉ. नवप्रीत ने उन्हें घर भेज दिया। जब मनप्रीत का दर्द कम होने की जगह और बढ़ने लगा तो वह इलाज कराने के लिए एम्स ऋषिकेश पहुंची। एम्स के डॉक्टरों ने पेट में कपड़ा होने की बात कही और ऑपरेशन करके उसके पेट से कपड़ा बाहर निकाल दिया।
इधर महिला एम्स ऋषिकेश से इलाज करवा कर स्वस्थ होने के बाद काशीपुर लौटी और उत्तराखण्ड राज्य महिला आयोग की पूर्व उपाध्यक्ष अमिता लोहनी को पूरा मामला बताया। लोहनी पीड़ित महिला को लेकर काशीपुर कोतवाली पहुंची, जहां पीड़ित मनप्रीत ने पुलिस को सारी कहानी बताई व तहरीर दे कर सरकारी अस्पताल की डॉ. नवप्रीत कौर सहोता के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर उचित कानूनी कार्रवाई की मांग की। पुलिस ने पीड़िता की तहरीर ले ली है। महिला द्वारा सरकारी चिकित्सक पर गंभीर आरोप के मामला को पुलिस द्वारा स्वास्थ्य विभाग को जल्द ही अवगत करवाया जाएगा। स्वास्थ्य विभाग द्वारा मामले की पुष्टि होने के बाद पुलिस आगे की कार्रवाई करेगी।

यह भी पढ़ें : ब्रेन ट्यूमर के इलाज में गरीब महिला को नहीं मिला प्रधानमंत्री आयुष्मान कार्ड योजना का लाभ

नवीन समाचार, नैनीताल, 06 जून 2020। नगर की एक जरूरतमंद गरीब महिला को ब्रेन ट्यूमर जैसी जानलेवा समस्या आने पर प्रधानमंत्री आयुष्मान कार्ड योजना का लाभ नहीं मिला। फलस्वरूप महिला का परिवार पर करीब तीन लाख रुपये का कर्ज चढ़ गया है।

पीड़ित महिला एवं उसका अटल आयुष्मान कार्ड।

प्राप्त जानकारी के अनुसार नगर के मल्लीताल नैनीताल में स्टाफ हाउस क्षेत्र में रहने वाली व लोगों के घर में झाड़ू-पोछा करके गुजारा करने वाली महिला प्रेमा देवी पत्नी दौलत राम को 28 दिसंबर 2019 को सिर में तेज दर्द व चक्कर आने की शिकायत पर स्थानीय बीडी पांडे जिला चिकित्सालय में दिखाया गया। यहां से उसे हल्द्वानी के सुशीला तिवारी मेडिकल कॉलेज के लिये संदर्भित कर दिया गया। महिला की पुत्री काजल ने बताया कि मेडिकल कॉलेज में उनकी मां को भर्ती किये बिना ही मस्तिष्क का सीटी स्कैन व एमआरआई स्कैन प्रधानमंत्री आयुष्मान कार्ड होने के बजाय निर्धारित शुल्क लेकर किया गया। पहले चिकित्सकों ने भर्ती नहीं किया, फिर बताया गया कि बिना भर्ती हुए प्रधानमंत्री आयुष्मान कार्ड का लाभ नहीं मिलता। यहां से उसे ब्रेन ट्यूमर बताकर हायर सेंटर रैफर कर दिया। ऐसे में महिला की बेटियां कर्ज लेकर उसे पहले हल्द्वानी के एक निजी चिकित्सालय और फिर 14 जनवरी को दिल्ली के एम्स ले गयीं। वहां बताया गया कि उत्तराखंड का प्रधानमंत्री आयुष्मान कार्ड नहीं चलेगा, लिहाजा पूरा भुगतान लेकर महिला का 15 फरवरी 2020 को सफल ऑपरेशन हो पाया। काजल ने बताया कि वह नगर में एक स्टोर में, पिता एक होटल में काम करते हैं। परिवार पर करीब तीन लाख रुपये का कर्ज चढ़ गया है। इधर लॉक डाउन की वजह से वह कर्ज भी नहीं चुका पा रहे हैं। लिहाजा उन्होंने प्रदेश के मुख्यमंत्री से मदद की गुहार लगाई है।

यह भी पढ़ें : बीडी पांडे जिला चिकित्सालय में चार मई तक आईसीयू सुविधा शुरू करने के आदेश

नवीन समाचार, नैनीताल, 29 अप्रैल 2020। अधिवक्ता दुष्यंत मैनाली द्वारा दायर जनहित याचिका में बुधवार को हुई सुनवाई के दौरान प्रदेश के स्वास्थ्य महानिदेशक ने उच्च न्यायालय को बताया कि उच्च न्यायालय के बीती 21 अप्रैल के आदेश के अनुपालन में अल्मोड़ा, बागेश्वर, चमोली, रुद्रप्रयाग, मेला अस्पताल हरिद्वार व बीडी पांडे जिला चिकित्सालय नैनीताल में आईसीयू, वेंटिलेटर, थर्मल स्कैनर व ऑक्सीजन सिलेंडर सहित सभी आवश्यक उपकरणों की आपूर्ति कर दी गई है। अलबत्ता याचिकाकर्ता की ओर से न्यायालय को बताया गया कि इन उपकरणों की आपूर्ति के बावजूद अभी तक इनकी स्थापना सभी 6 अस्पतालों में अब तक नहीं हो पाई है।
इस पर न्यायालय ने राज्य सरकार को आदेश दिया है कि बीडी पांडे जिला चिकित्सालय नैनीताल में 4 मई तक पूर्ण रूप से संचालित आईसीयू सुविधा स्थापित और संचालित हो जानी चाहिए। साथ ही राज्य सरकार को यह भी आदेशित किया है कि अन्य सभी अस्पतालों में जहां-जहां आईसीयू व वेंटीलेटर की आपूर्ति न्यायालय के आदेश के अनुक्रम में की गई है उनमें भी जल्द से जल्द आईसीयू और वेंटिलेटर को संचालित कर दिया जाए। मामले की अगली सुनवाई 5 मई को होगी। आज मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति सुधांशु धूलिया व न्यायमूर्ति रविंद्र मैठानी की खंडपीठ में हुई।

यह भी पढ़ें : नैनीताल जिला चिकित्सालय में एक्सरे मशीन व जनरेटर चलाने को तीन दिन का अल्टीमेटम

-छह माह पूर्व डीएम द्वारा मशीन व जनरेटर लगवाने के बावजूद संचालित नहीं हुए
नवीन समाचार, नैनीताल, 25 अप्रैल 2020। मुख्यालय स्थित बीडी पांडे जिला पुरुष चिकित्सालय में डीएम सविन बंसल ने करीब 6 माह पूर्व निरीक्षण करने के बाद आवश्यकता को देखते हुए आधुनिक एक्सरे मशीन तथा जनरेटर की व्यवस्था करा दी थी। परंतु चिकित्सालय प्रबंधन, ठेकेदारों तथा एक्सरे कम्पनी के लोगों की लापरवाही के चलते अब तक एक्सरे मशीन और जनरेटर संचालित नहीं हुए। इस बात पर नाराज डीएम ने सीएमएस से नाराजगी व्यक्त करते हुए शनिवार सुबह एसडीएम विनोद कुमार को चिकित्सालय भेजा। एसडीएम ने लगभग दो घंटे चिकित्सालय का निरीक्षण किया और प्रमुख चिकित्साधीक्षक डा. केएस धामी को निर्देश दिये कि तीन दिन के भीतर एक्सरे मशीन तथा जनरेटर स्थापित कर क्रियाशील करें। यदि निर्धारित अवधि मे यह सुविधायंे बहाल नही होती हैं तो आपदा प्रबंधन एक्ट के अंतर्गत मुकदमा दर्ज कराया जायेगा तथा एक्सरे मशीन व जनरेटर लगाने वाले ठेकेदार तथा अभियंताओें के विरूद्व एफआईआर दर्ज करायी जायेगी।
एसडीएम कुमार ने बताया कि चिकित्सालय में वर्तमान मे 250 सेनेटाइजर, 9419 ट्रिपल लेयर मास्क, 150 बीटीएम, 67 पीपीई किट, 295 एन-95 मास्क, दो वंेटिलेटर तथा चार आईसीयू बेड उपलब्ध है। उन्होेने बताया कि एक्सरे मशीन के लिए कक्ष तैयार किया जा रहा है तथा एक्सरे मशीन स्थापित करने के लिए कम्पनी के अभियंताओं को बुला लिया गया है तथा जनरेटर की स्थापना के लिए ठेकेदार द्वारा प्लेटफार्म का निर्माण शुरू कर दिया गया है दो तीन दिन बाद पुनः इन कामों का निरीक्षण किया जायेगा। निरीक्षण के दौरान डा. एमएस दुग्ताल, डा. अनुरुद्व गंगोला, डा. प्रियांशु श्रीवास्तव व डा. आरके वर्मा के अलावा भाजपा के पूर्व अध्यक्ष मनोज जोशी, शशि पांडे, एमएल चुनेटा, सीएस ताकुली तथा आईके जोशी आदि मौजूद रहे।

यह भी पढ़ें : गांव में मिले 98 जमाती, पूरा गांव सील कर किया क्वारंटीन

नवीन समाचार, हरिद्वार, 3 अप्रैल 2020। उत्तराखंड के हरिद्वार जिले के हरिद्वार-नजीबाबाद मार्ग के किनारे स्थित गैंडीखाता गुज्जर बस्ती में 98 जमाती मिलने पर पुलिस प्रशासन ने पूरे गांव को ही सील कर दिया है। इस गांव में पुलिस को इतनी बढी संख्या में जमाती मिले कि पुलिस ने इनसे कोरोना संक्रमण की बढती आशंका देख यहां की बाहर से आवाजाही पूरी तरह से बंद कर दी है। हरिद्वार जिले के श्यामपुर थाने के एसएचओ दीपक सिंह कठैत के मुताबिक पुलिस प्रशासन की टीम को जानकारी मिली थी कि गैंडीखाता गुज्जर बस्ती में दिल्ली, देवबंद और अन्य स्थानों से लौटकर आए 98 जमाती हैं। जिसको गांव जाकर सही पाने के बाद पुलिस ने इन सभी को होम क्वारंटीन कर दिया है। गांव में आवाजाही पूरी तरह से बंद करते हुए गांव में भारी पुलिस फोर्स की तैनाती की गई है। पुलिस ने बहादराबाद के बौंगला गांव स्थित आर्य इंटर कॉलेज में करीब 40 लोगों को क्वारंटीन किया हुआ है। ये लोग अपने परिवार वालों से मोबाइल पर संपर्क में हैं। जरूरी सामान उनके पास पहुंचाया जा रहा है।

यह भी पढ़ें : विधायक के हस्तक्षेप से हो पाया खाई में गिरकर घायल हुए बालक का इलाज..

नवीन समाचार, नैनीताल, 2 अप्रैल 2020। धारी ब्लाक के दुदुली ग्रामसभा निवासी मनीष कुमार (16) पुत्र भुवन चंद्र मंगलवार की शाम अनियंत्रित होकर खाई में जा गिरा। खाई में गिरने पर युवक की आवाज सुनकर ग्रामीणों उसे बाहर निकाला। जहां से युवक को परिजन हल्द्वानी के सुशीला तिवारी अस्पताल लेकर पहुंचे। घायल युवक के सिर, मुंह और हाथ पर गंभीर चोटें आई है। बताया गया कि चिकित्सालय ने उसका इलाज करने से मना कर दिया। इस पर क्षेत्रीय विधायक राम सिंह कैड़ा ने चिकित्सकों से वार्ता कर घायल का उचित इलाज करने को कहा है। समाजिक कार्यकर्ता रमेश टम्टा, धर्मपाल ने बताया कि घायल युवक गरीब परिवार की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं है। उन्होंने विधायक से पीड़ित परिवार को आर्थिक सहायता दिलाने की अपील की है।

यह भी पढ़ें : कोरोना के संक्रमण के बीच जन औषधि केंद्र में बुखार-सर्दी जुकाम की दवाइयां भी नहीं

नवीन समाचार, नैनीताल, 24 मार्च 2020। देश-दुनिया में फैले कोरोना विषाणु के संक्रमण के बीच मुख्यालय स्थित बीडी पांडे जिला चिकित्सालय स्थित प्रधानमंत्री जन औषधि केंद्र व्यवस्थाओं की पोल खोल रहा है। यहां सामान्य बुखार एवं सर्दी-जुकाम की दवाइयां तक नहीं हैं। मंगलवार को यहां बुखार व सर्दी-जुकाम की दवाइयां लेने गए लोगों को दवाइयां न होने की बात कहकर बैरंग लौटाया गया। बताया गया है कि यहां अन्य दवाइयों की स्थिति भी खराब है।
उल्लेखनीय है कि जिला रेडक्रॉस सोसायटी द्वारा संचालित जन औषधि केंद्र पर हमेशा से दवाइयां न होने के आरोप लगते रहते हैं। गत वर्ष भाजपा के तत्कालीन नगर अध्यक्ष की अगुवाई में जन औषधि केंद्र में ऐसे ही आरोपों में तालाबंदी भी कर दी गई थी। इसके बाद जन औषधि केंद्र के प्रबंधन में आमूलचूल परिवर्तन भी हुआ। डीएम सविन बंसल भी जन औषधि केंद्र की व्यवस्थाएं सुधारने के प्रति संवेदनशील दिखे, बावजूद यहां के हालात सुधरते नजर नहीं आ रहे हैं। इस बारे में पूछे जाने के लिए जिला रेडक्रॉस सोसायटी के अध्यक्ष से फोन पर संपर्क करने का प्रयास किया गया, किंतु उनका फोन स्विच ऑफ मिला।

यह भी पढ़ें : इस शोध रिपोर्ट को पढ़ने के बाद आप शहद खाने से पहले 10 बार सोचेंगे

-शोध छात्रा नगमा परवीन ने बताया एंटीबायोटिक युक्त शहद खाकर मानव पर एंटीबायोटिकों का असर और जीवाणुओं से लड़ने की शक्ति खत्म हो रही

यंग साइंटिस्ट अवार्ड प्राप्त करती डीएसबी की छात्रा नगमा परवीन।

नवीन समाचार, नैनीताल, 3 मार्च 2019। कुमाऊं विवि की शोध छात्रा नगमा परवीन को देहरादून के विज्ञान धाम में आयोजित ‘13वीं उत्तराखंड स्टेट साइंस एंड टेक्नोलॉजी कांग्रेस 2018-2019’ में ‘यंग साइंटिस्ट अवार्ड’ से नवाजा गया है। उन्हें यह पुरस्कार उनके द्वारा ‘स्टेटस ऑफ एंटीबायोटिक यूज्ड इन एपिकलचर बाय बीकीपर टू ट्रीट बैक्टीरियल पेथोजेनेसिस इन नैनीताल डिस्ट्रिक्ट’ विषय पर किये जा रहे शोध पर दिया गया है। उनके शोध के नतीजे बेहतर स्वास्थ्य के लिए शहद का सेवन करने वालों के लिए चेतावनीप्रद हो सकते हैं।
डीएसबी परिसर नैनीताल के जंतु विज्ञान विभाग में प्रो. सतपाल बिष्ट के निर्देशन में शोधरत नगमा ने बताया कि उन्होंने नैनीताल जिले के शहद के लिए प्रसिद्ध आठ गांवों-भल्यूटी, काठगोदाम, लोहरियासाल तल्ला, मदनपुर कुर्मि्म, नाथुपुर, नेरिपुरा छोई, बैलपड़ाव व शिवलालपुर पांडेय के 2 दर्जन से अधिक मधुमक्खी पालकों से साक्षात्कार लेकर यह निष्कर्ष निकाला है कि 75 प्रतिशत मधुमक्खी पालक मधुमक्खियों में जीवाणु जनित बीमारियों को खत्म करने के लिए टेरामायसिन नाम की एंटीबायोटिक दवाई का इस्तेमाल कर रहे हैं, जो की एक ब्रॉड स्पेक्ट्रम एंटीबायोटिक है। जब यह एंटीबायोटिक मधुमक्खियों को दी जाती है तो यह उनसे शहद में पहुंच जाती है। इस एंटीबायोटिक मिश्रित शहद के सेवन से मानव शरीर मंे एंटीबायोटिकों का असर कम हो जाता है और जीवाणुओं से लड़ने की शक्ति खत्म हो जाती है जोकि मानव स्वास्थ्य के लिए बहुत हानिकारक है। उन्होंने बताया कि वह अपनी इस उपलब्धि का श्रेय अपने गुरु माता पिता और भाइयों को देना चाहती हूँ।

यह भी पढ़ें : निजी अस्पतालों की हड़ताल खत्म, सीएम से वार्ता के बाद लिया फैसला

नवीन समाचार, नैनीताल, 23 फरवरी 2019। पिछले नौ दिन से चल रही इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आइएमए) से जुड़े निजी चिकित्सकों की प्रदेशव्यापी हड़ताल शनिवार रात मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत के साथ वार्ता के बाद समाप्त कर दी गई है। मुख्यमंत्री ने चिकित्सकों की मांगों का परीक्षण करने को वित्त मंत्री प्रकाश पंत की अध्यक्षता में एक कमेटी बनाने की घोषणा की। मुख्यमंत्री आवास में हुई वार्ता के बाद चिकित्सक भाजपा प्रदेश अध्यक्ष अजय भट्ट के साथ उनके यमुना कालोनी आवास पहुंचे और हड़ताल खत्म करने की जानकारी दी। दूसरी ओर, स्वास्थ्य सचिव नितेश झा ने बताया कि कमेटी की रिपोर्ट आने तक चिकित्सकों के प्रतिष्ठानों के विरुद्ध चल रही सीलिंग की कार्रवाई पर रोक लगा दी गई है। रविवार से चिकित्सक पूर्व की तरह अस्पताल व क्लीनिक खोलेंगे व मरीजों को उपचार देंगे।

उल्लेखनीय है कि निजी चिकित्सक गत 15 फरवरी से क्लीनिकल एस्टेब्लिशमेंट एक्ट में संशोधन करने या उत्तराखंड हेल्थकेयर एस्टेब्लिशमेंट एक्ट लागू करने की मांग को लेकर हड़ताल पर थे। जिससे मरीजों को काफी मुसीबतों का सामना करना पड़ रहा था। राज्य सरकार की ओर से सरकारी अस्पतालों में नाकाफी साबित हो रही वैकल्पिक व्यवस्थाएं की गई थीं। इसके बावजूद सरकार ने झुकने से इन्कार कर दिया और चिकित्सकों के प्रतिष्ठानों पर सीलिंग की कार्रवाई शुरू कर दी थी। इस दोतरफा कार्रवाई से दबाव में आए चिकित्सकों ने भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष अजय भट्ट से शुक्रवार को मुलाकात कर मुख्यमंत्री से वार्ता का समय मांगा था। जिस पर शनिवार रात मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत के आवास पर हड़ताली चिकित्सकों को बुलाया गया। चिकित्सकों ने कहा कि उत्तराखंड की भौगोलिक परिस्थिति व यहां के लोगों की आर्थिक स्थिति के लिहाज से एक्ट में संशोधन की सख्त जरूरत है। मुख्यमंत्री ने कहा कि क्लीनिकल एस्टेब्लिशमेंट एक्ट का हर हाल में पालन कराया जाएगा। कमेटी की रिपोर्ट आने के बाद देखा जाएगा कि इसमें संशोधन किया जा सकता है या नहीं।

पूर्व समाचार : हाईकोर्ट से मनमर्जी चाह रहे डॉक्टरों को बहुत जोर का झटका…

-अब मनमानी दवाइयां व जांचें नहीं लिख सकेंगे चिकित्सक
– चिकित्सकों के संगठन आईएमए को झटका, पुर्नविचार याचिका खारिज
नवीन समाचार, नैनीताल, 15 फरवरी 2019। उत्तराखंड उच्च न्यायालय की मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति रमेश रंगनाथन व न्यायमूर्ति मनोज कुमार तिवारी की खंडपीठ ने चिकित्सकों के संगठन आईएमए यानी इंडियन मेडिकल एसोसिएशन को बड़ा झटका देते हुए जेनरिक दवाएं लिखने तथा अनावश्यक टेस्ट नहीं लिखने के खिलाफ दायर पुनर्विचार याचिका खारिज कर दी है। साथ ही साफ कर दिया कि इस मामले में अब न्यायालय किसी भी तरह की अन्य पुनर्विचार याचिका स्वीकार नहीं करेगा। न्यायालय के आदेश के बाद साफ है कि सरकारी चिकित्सकों को मरीज को जैनरिक दवाएं ही लिखनी होंगी। वहीं इसके बाद अब एसोसिएशन के पास सुप्रीम कोर्ट जाने का विकल्प ही बचा है।
उल्लेखनीय है कि पिछले सितंबर 2018 में उच्च न्यायालय ने अधिवक्ता अतुल बंसल की जनहित याचिका पर महत्वपूर्ण आदेश पारित करते हुए कहा था कि सरकारी अस्पताल के चिकित्सक मरीजों को सिर्फ जैनरिक दवाएं ही लिखेंगे, और मरीजों को अनावश्यक जांच के लिए नहीं भेजेंगे। इस आदेश के खिलाफ हिमालयन रिसर्च इंस्टीट्यूट द्वारा पुर्नविचार याचिका दायर की थी, जिसे न्यायालय पूर्व में खारिज कर चुकी है। वहीं हाल ही में आइएमए की ओर से पुनर्विचार याचिका दायर की गई, जिसमें कहा गया था कि मरीज को कौन सी दवा लिखनी है, और कौन सी मेडिकल जांचें करानी हैं, यह चिकित्सक के विवेक पर निर्भर करता है। वहीं मूल जनहित याचिका दायर करने वाले अधिवक्ता अतुल बंसल ने इस पुनर्विचार याचिका का विरोध किया।

यह भी पढ़ें : भयावह तस्वीर: राज्य बनने के बाद करीब 10 हजार उत्तराखंडी हो गये एड्स के शिकार, 26 गुना बढ़ी संख्या…

-गर्भवती महिलाओं की संख्या भी लगातार बढ़ रही
-पिछले 16 वर्षों में 26 गुना बढ़ गयी है राज्य में एड्स पीड़ितों की संख्या
नवीन जोशी @ नवीन समाचार, नैनीताल, 18 फरवरी 2019। देवभूमि कहे जाने वाले उत्तराखंड राज्य में असुरक्षित यौन संबंधों के प्रमुख कारण से फैलने वाला जानलेवा एड्स का दानव लगातार सुरसा के मुंह की तरह बढ़ता जा रहा है। वर्ष दर वर्ष राज्य में एड्स पीड़ितों और इनमें भी गर्भवती माताओं के आंकड़े भी लगातार भयावह तरीके से बढ़ते जा रहे हैं।
जनपद के सूचना अधिकार कार्यकर्ता हेमंत गौनिया को सूचना के अधिकार के तहत स्वास्थ्य विभाग से प्राप्त आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2002-03 में राज्य में 292 पुरुषों व 178 महिलाओं यानी कुल 470 लोगों की एचआईवी संक्रमण की जांच हुई थी, जिनमें से 22 पुरुष व 15 महिलाएं यानी कुल 37 लोग एड्स से संक्रमित पाये गये। जबकि इधर 2017-18 में 60,325 पुरुषों एवं 51,318 महिलाओं को मिलाकर कुल एक लाख 11 हजार 649 लोगों की जांचें हुईं और इनमें से 607 पुरुष व 299 महिलाएं मिलाकर 908 महिलाओं के साथ ही 61 गर्भवती महिलाएं एड्स संक्रमित पायी गयी हैं। इस प्रकार यह संख्या 968 हो गयी है। इस प्रकार वर्ष दर वर्ष आने वाले एड्स पीड़ितों की संख्या में पिछले 16 वर्षों में 26 गुने से अधिक की बढ़ोत्तरी हो चुकी है। वहीं पिछले 16 वर्षों के कुल एड्स पीड़ितों की संख्या की बात करें तो इस दौरान 5911 पुरुष व 3139 महिलाओं तथा 536 गर्भवती महिलाओं सहित कुल 9603 लोग एड्स के संक्रमित हुए हैं। संख्या के लगातार बढ़ने पर चिकित्सकों का तर्क है कि लगातार जागरूकता बढ़ना भी संख्या बढ़ने का एक कारण है। पहले लोग जांचें नहीं कराते थे, इसलिए पीड़ितों की संख्या भी नहीं आ पाती थी। अब हर गर्भवती महिला की एचआईवी एड्स की जांच होती है।

इस भयावह तेजी से बढ़ रहे हैं आंकड़े

नैनीताल। राज्य में एड्स पीड़ितों की संख्या किस भयावह तरीके से बढ़ रही है इसका अंदाजा इस बात से लग जाता है कि वर्ष 2002-03 के बाद से वर्ष दर वर्ष 37, 95, 142, 267, 330, 507, 562, 718, 713, 780, 835, 817, 807ख् 773, 777 व 907 होते हुए बढ़ती गयी है। यह भी चिंताजनक तथ्य है कि महिलाओं और खासकर गर्भवती माताओं की संख्या भी लगातार पुरुषों की तरह बढ़ती रही है। वर्ष 2002 से 2004 तक जहां एक भी गर्भवती माता को एड्स नहीं था, वहीं अगले तीन वर्षों तक भी यह संख्या 2, 3 व 2 तक सीमित रही और वर्ष 2007-08 से यह संख्या 14 के साथ दहाई में गयी और 2008-09 में सीधे 43 हो गयी, और इधर लगातार बढ़ते हुए इस वर्ष सर्वाधिक 61 गर्भवती माताओं को एड्स का संक्रमण होने की पुष्टि हुई है।

नवीन समाचार
मेरा जन्म 26 नवंबर 1972 को हुआ था। मैं नैनीताल, भारत में मूलतः एक पत्रकार हूँ। वर्तमान में मार्च 2010 से राष्ट्रीय हिन्दी दैनिक समाचार पत्र-राष्ट्रीय सहारा में ब्यूरो चीफ के रूप में कार्य कर रहा हूँ। इससे पहले मैं पांच साल के लिए दैनिक जागरण के लिए काम कर चुका हूँ। कुमाऊँ विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग से ‘नए मीडिया’ विषय पर शोधरत हूँ। फोटोग्राफ़ी मेरा शौक है। मैं NIKON COOLPIX P530 और अडोब फोटोशॉप 7.0 के साथ फोटोग्राफी कर रहा हूँ। फोटोग्राफी मेरे लिए दुनियां की खूबसूरती को अपनी ओर से चिरस्थाई बनाने का बहुत छोटा सा प्रयास है। एक फोटो पत्रकार के रूप में मेरी तस्वीरों को नैनीताल राजभवन सहित विभिन्न प्रदर्शनियों में प्रस्तुत किया गया, तथा उत्तराखंड की राज्यपाल श्रीमती मार्गरेट अलवा द्वारा सम्मानित किया गया है। कुछ चित्रों को राष्ट्रीय-अंतर्राष्ट्रीय पुरस्कार भी प्राप्त हो चुके हैं। गूगल अर्थ पर चित्र उपलब्ध कराने वाली पैनोरामियो साइट पर मेरी प्रोफाइल को 18.85 Lacs से भी अधिक हिट्स प्राप्त हैं।पत्रकारिता और फोटोग्राफी के अलावा मुझे कवितायेँ लिखना पसंद है। काव्य क्षेत्र में मैंने नवीन जोशी “नवेन्दु” के रूप में अपनी पहचान बनाई है। मैंने बहुत सी कुमाउनी कवितायेँ लिखी हैं, कुमाउनी भाषा में मेरा काव्य संकलन उघड़ी आंखोंक स्वींड़ प्रकाशित हो चुका है, जो कि पुस्तक के के साथ ही डिजिटल (PDF) फार्मेट पर भी उपलब्ध होने वाली कुमाउनी की पहली पुस्तक है। मेरी यह पुस्तक गूगल एप्स पर भी उपलब्ध है। ’ यहां है एक पत्रकार, लेखक, कवि एवं छाया चित्रकार के रूप में मेरी रचनात्मकता, लेख, आलेख, छायाचित्र, कविताएं, हिंदी-कुमाउनी के ब्लॉग आदि कार्यों का पूरा समग्र। मेरी कोशिश है कि यहां नैनीताल, कुमाऊं, उत्तराखंड और वृहद संदर्भ में देश की विरासत, संस्कृति, इतिहास और वर्तमान को समग्र रूप में संग्रहीत करने की….। मेरे दिल में बसता है, मेरा नैनीताल, मेरा कुमाऊं और मेरा उत्तराखंड
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