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हल्द्वानी तक पहुंचा अफ्रीकन स्वाइन फ्लू, 8 सुअरों की रिपोर्ट पॉजिटिव आई, हड़कंप

African Swine Fever: मिजोरम में 87 सूअरों की मौत, स्वाइन फीवर की आशंका से  फैली घबराहट - African Swine Fever 87 pigs die in Mizoram village near  Bangladesh borderनवीन समाचार, हल्द्वानी, 7 अगस्त 2022। कोरोना के साथ लगातार नई-नई संक्रामक बीमारियां मानव जीवन पर नया खतरा बनकर उभर रही हैं। पहले से ही जताई जा रही आशंकाओं के बीच अफ्रीकन स्वाइन फ्लू हल्द्वानी तक पहुंच गया है। यहां राजपुरा क्षेत्र में भी 8 सुअरों की रिपोर्ट पॉजिटिव आने पर पशुपालन विभाग में हड़कंप मच गया है।

जनपद के मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी डॉ. बीएस जंगपांगी ने बताया कि राजपुरा और जवाहर नगर क्षेत्र से सुअरों की ब्लड रिपोर्ट टेस्ट के लिए भेजा था। जिसमें इनकी रिपोर्ट पॉजिटिव आई है। इन सुअरों को जिला प्रशासन की अनुमति के बाद मारने की कार्रवाई की गई है।

उल्लेखनीय है कि मामले की गंभीरता को देखते हुए प्रदेश के पशुपालन मंत्री सौरभ बहुगुणा ने विभागीय अधिकारियों को भी मामले को गंभीरता से लेने के आदेश दिए हैं। अग्रिम आदेशों तक सुअर का मांस प्रतिबंधित कर दिया गया है और बीमारी की रोकथाम के लिए संक्रमित इलाकों में अतिरिक्त निगरानी बढ़ा दी गई है।

अफ्रीकन स्वाइन फीवर एक अत्यधिक संक्रामक और खतरनाक पशु रोग है, जो घरेलू और जंगली सुअरों को संक्रमित करता है। इसके संक्रमण से सुअर एक प्रकार के तीव्र रक्तस्रावी बुखार से पीड़ित होते हैं। इस बीमारी को पहली बार 1920 के दशक में अफ्रीका में देखा गया था। इस रोग में मृत्यु दर 100 प्रतिशत के करीब होती है और इस बुखार का अभी तक कोई इलाज नहीं है। इसके संक्रमण को फैलने से रोकने का एकमात्र तरीका जानवरों को मारना है। वहीं, जो लोग इस बीमारी से ग्रसित सुअरों के मांस का सेवन करते हैं उनमें तेज बुखार, अवसाद सहित कई गंभीर समस्याएं शुरू हो जाती हैं। (डॉ.नवीन जोशी) आज के अन्य ताजा ‘नवीन समाचार’ पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें।

यह भी पढ़ें : हल्द्वानी-काठगोदाम के तीन क्षेत्रों में ‘अफ्रीकन स्वाईन फीवर’ रोग की पुष्टि, ‘निगरानी क्षेत्र’ घोषित

नवीन समाचार, हल्द्वानी, 26 जुलाई 2022। शहर में अफ्रीकन स्वाइन फ्लू ने दस्तक दे दी है और चिंता को बढ़ा दिया है। डीएम धीराज सिंह गर्ब्याल ने बताया है कि हल्द्वानी के जवाहर नगर, नई बस्ती और काठगोदाम में सूअर पशुओं में ‘अफ्रीकन स्वाईन फीवर’ रोग की पुष्टि हुई है।

इस बीमारी को बढ़ने से रोकने के लिए तीनों जगहों को तीन भागों में बांटा गया है। पूरे क्षेत्र की 1 किमी की परिधि को आगामी दो माह अथवा क्षेत्र में रोग के प्रकोप की सूचना शून्य होने तक सर्विलांस जोन यानी ‘निगरानी क्षेत्र’ घोषित किया गया है। इस जोन में सूअर के मांस व सूअर के मांस की दुकानों, सूअर के आवागमन को पूर्णतया प्रतिबिन्धत कर दिया गया है।

मुख्य पशु चिकित्साधिकारी को संक्रमित वार्डों एवं स्थानों में प्रभावी कार्रवाई करने, दवा युक्त धंुवा छोड़ने व सूअरों को मारने व उनका वैज्ञानिक तरीके से निस्तारण करने तथा प्रत्येक 15 दिनों के अन्तराल में इन क्षेत्रों से सूअरों के प्राप्त नमूने जांच के लिए आईसीएआर निसाद प्रयोगशाला भोपाल भेजने के निर्देश दिए हैं। इस क्षेत्र में कोई भी सूअर पशु अन्य क्षेत्रों में नही भेजा जाएगा और न ही लाया जाएगा। इस क्षेत्र से बाहर के जनपद के अन्य क्षेत्रों को बीमारी मुक्त क्षेत्र घोषित किया गया है। आज के अन्य ताजा ‘नवीन समाचार’ पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें।

यह भी पढ़ें : जिला चिकित्सालय सहित पांच चिकित्सालय जाने के बाद भी नही बची प्रसूता की जान

Maternity Life Did Not Survive Even After Going To Five Hospitals - पांच  अस्पताल जाने के बाद भी नहीं बची प्रसूता की जान - Champawat Newsनवीन समाचार, चंपावत, 31 जुलाई 2022। इसे चिकित्सालयों की लापरवाही कहें, स्वयं जनता की बुरी किस्मत या कि व्यवस्था की बड़ी खामी, मुख्यमंत्री के गृह जनपद में जिला चिकित्सालय सहित पांच चिकित्सालय जाने के बाद भी एक प्रसूता की जान चली गई। कहने को तो कहा जा रहा है कि जिला चिकित्सालय में संध्या नाम की प्रसूता का ऑपरेशन से सुरक्षित प्रसव कराया गया, और तीन दिन तक चिकित्सालय में उसकी पूरी देखभाल भी की गई। लेकिन चिकित्सालय दोबारा आने के बाद एकाएक उसकी तबीयत बिगड़ गई। इस पर उसे हायर सेंटर रेफर किया गया और उसकी मौत हो गई।

प्राप्त जानकारी के अनुसार चंपावत के बाजरीकोट निवासी 24 वर्षीय संध्या पत्नी दीपक ने गत 19 जुलाई को जिला अस्पताल में ऑपरेशन से शिशु को जन्म दिया। 21 जुलाई को जच्चा-बच्चा को अस्पताल से छुट्टी दे दी गई। संध्या के चाचा हरीश कुमार ने बताया कि उनकी भतीजी को 23 जुलाई से लगातार बुखार रहा। दवा से राहत नहीं मिलने और तबीयत बिगड़ने पर 27 जुलाई को संध्या को फिर से जिला अस्पताल में भर्ती कराया लेकिन एक दिन बाद 28 जुलाई को यहां से हल्द्वानी सुशीला तिवारी अस्पताल रेफर कर दिया गया।

हल्द्वानी ले जाने से पहले उसे एक निजी अस्पताल में भी दिखाया। परीक्षण के बाद निजी अस्पताल ने संक्रमण फैलने की दलील देते हुए बाहर ले जाने की सलाह दी। इस पर उसे हल्द्वानी के सुशीला तिवारी अस्पताल और वहां से भी जवाब देने के बाद वे 29 जुलाई को बरेली के भोजीपुरा स्थित मेडिकल कॉलेज ले गए। वहां डॉक्टरों ने संक्रमण फैलने से शरीर के अधिकांश अंगों के काम नहीं करने की जानकारी दी, और इसी दिन शाम को इसी अस्पताल में संध्या ने दम तोड़ दिया।

इस पर परिजनों ने जिला अस्पताल पर लापरवाही का आरोप लगाया। उनका आरोप है कि प्रसव के दौरान लापरवाही और बाद में रेफर करने में की गई देरी की वजह से संध्या की जान गई है। इस मामले की सीएम, स्वास्थ्य मंत्री, डीएम और सीएमओ से शिकायत कर जांच की मांग की है। इस पर जिला चिकित्सालय के पीएमएस डॉ. एचएस ऐरी ने अस्पताल की लापरवाही से पूरी तरह से इंकार किया है। (डॉ.नवीन जोशी) आज के अन्य ताजा ‘नवीन समाचार’ पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें।

यह भी पढ़ें : उत्तराखंड में मरीजों को बरगला रहे 41 चिकित्सकों पर कार्रवाई की तलवार

Uttarakhand Medical Council Online Registration / Renewal | www.statusin.inनवीन समाचार, देहरादून, 7 जुलाई 2022। उत्तराखंड मेडिकल काउंसिल ने विज्ञापनों में झूठे दावे करने वाले उत्तराखंड के 41 डॉक्टरों को नोटिस जारी किया है। उन्हें चेताया है कि इसके बाद भी वह न माने तो उन पर कार्रवाई की जा सकती है। बताया गया है कि प्रोफेशनल कंडक्ट, एटीक्यूट एंड एथिक्स रेगुलेशन 2002 यानी पेशेवर आचरण, रवैया एवं नैतिकता नियमन अधिनियम 2002 के तहत कोई भी चिकित्सक न तो अपनी तस्वीर किसी विज्ञापन में प्रकाशित करा सकता है और न ही कोई बरगलाने वाला दावा कर सकता है।

लेकिन कई चिकित्सक किसी एक विषय के ही विशेषज्ञ होने के बावजूद अपने विज्ञापन में कई-कई दावे कर रहे हैं, और कई अधिनियम का उल्लंघन करते हुए अपनी बड़ी तस्वीरों के साथ विज्ञापन प्रकाशित, प्रसारित करा रहे हैं। मेडिकल काउंसिल की अनुशासनात्मक समिति के सदस्य सचिव डॉ. डीडी चौधरी का कहना है कि वह लगातार इन विज्ञापनों की निगरानी करते हैं। सितंबर से यह प्रक्रिया चल रही है। विज्ञापन में अपनी तस्वीर प्रकाशित कर रहे, या मरीजों को गुमराह करने वाले विज्ञापन प्रकाशित कर रहे 41 चिकित्सकों को रेगुलशन के नोटिस जारी किये जा चुके है। जबकि कई अन्य भी इस जद में हैं। चिकित्सकों को नियमों के प्रति सजग रहने को भी कहा गया है। (डॉ.नवीन जोशी) आज के अन्य ताजा ‘नवीन समाचार’ पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें।

यह भी पढ़ें : पीएमएस हुए सेवानिवृत्त, हृदयरोग विशेषज्ञ विहीन हुआ प्रदेश, पुनेरा को कार्यभार

world heart day: take care of your heart - हृदय रोग: लक्षण, कारण, टाइप और  परहेज - Navbharat Times Photogallery

डॉ. नवीन जोशी @ नवीन समाचार, नैनीताल, 30 जून 2022। मुख्यालय स्थित बीडी पांडे जिला चिकित्सालय के पीएमएस यानी प्रमुख चिकित्सा अधीक्षक का पद पिछले एक माह से संभाल रहे डॉ. केबी जोशी गुरुवार को अधिवर्षता आयु पूरी कर सेवानिवृत्त हो गए। सेवानिवृत्ति पर उन्हें जिला चिकित्सालय में अन्य सेवानिवृत्त हो रहे प्रभारी फार्मेसी अधिकारी डीके जोशी के साथ विदाई दी गई।

इस अवसर पर वक्ताओं ने डॉ. जोशी के कार्यकाल की उपलब्धियां गिनाते हुए बताया कि वह प्रदेश के सरकारी चिकित्सालयों में कार्यरत एकमात्र हृदय रोग विशेषज्ञ थे। उनके सेवानिवृत्त होने के बाद जिला चिकित्सालय ही नहीं पूरा प्रदेश हृदय रोग विशेषज्ञ विहीन हो गया है।

उनकी सेवानिवृत्ति के उपरांत शासन ने पूर्व में महिला चिकित्सालय के एमएस यानी चिकित्सा अधीक्षक रहे व चिकित्सालय के वरिष्ठतम चिकित्सक डॉ. वीके पुनेरा को जिला चिकित्सालय का नया प्रमुख चिकित्सा अधीक्षक नियुक्त किया है। वह शुक्रवार से कार्यभार ग्रहण करेंगे। बताया गया है कि डॉ. पुनेरा का करीब 3 वर्ष का कार्यकाल शेष है।

सेवानिवृत्ति पर आयोजित विदाई कार्यक्रम में जनपद की मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. भागीरथी जोशी, अपर मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. तरुण टम्टा, सेवानिवृत्त पीएमएस डॉ. केएस धामी, डॉ. एमएस दुग्ताल, डॉ.संजीव खर्कवाल, डॉ. मोनिका कांडपाल, डॉ.वीके मिश्रा, डॉ.अनिरुद्ध गंगोला, डॉ.प्रियांशु श्रीवास्तव, डॉ.ममता पांग्ती व डॉ.पंकज वर्मा सहित बड़ी संख्या में चिकित्सा कर्मी मौजूद रहे। आज के अन्य ताजा ‘नवीन समाचार’ पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें।

नैनीताल: आगामी 30 से जिला चिकित्सालय के साथ पूरा प्रदेश हो जाएगा हृदय रोग विशेषज्ञ विहीन

डॉ. नवीन जोशी @ नवीन समाचार, नैनीताल, 26 जून 2022। मुख्यालय स्थित बीडी पांडे जिला चिकित्सालय के प्रमुख चिकित्सा अधीक्षक डॉ. केबी जोशी इस पद पर एक माह कार्यरत रहने के बाद इस 30 जून को सेवानिवृत हो रहे हैं। वह यहां मूलतः हृदय रोग विशेषज्ञ के तौर पर सेवाएं दे रहे हैं। बताया जा रहा है कि वह प्रदेश के समस्त राजकीय चिकित्सालयों में कार्यरत एकमात्र हृदय रोग विशेषज्ञ थे। इस प्रकार कहा जा रहा है कि उनकी सेवानिवृत्ति से जहां हृदय रोग विशेषज्ञ के साथ प्रमुख चिकित्सा अधीक्षक का पद रिक्त हो जाएगा, वहीं प्रदेश भर के सरकारी चिकित्सालयों में एक भी हृदय रोग विशेषज्ञ नहीं रह जाएगा, यानी राज्य के सरकारी चिकित्सालय हृदय रोग विशेषज्ञ विहीन हो जाएंगे।

बताया गया है कि पूरे प्रदेश एवं पूरे स्वास्थ्य विभाग में वर्तमान में केवल एक ही हृदय रोग विशेषज्ञ डॉ केबी जोशी हैं, जिनको दो वर्ष पूर्व नैनीताल के बीडी पांडे अस्पताल में तैनाती दी गई थी। इधर 31 मई को तत्कालीन प्रमुख चिकित्सा अधीक्षक डॉ. केएस धामी के सेवानिवृत्त होने पर उन्हें इस पद पर भी तैनाती दी गई थी। डॉ. केबी जोशी का कहना है कि कार्डियोलॉजिस्ट विशेषज्ञ बनने के लिए एमबीबीएस के बाद एमडी और फिर डॉक्टरेट इन मेडिशन की पढ़ाई करनी पड़ती है। लेकिन प्रदेश के मेडिकल कालेजों में एमडी की पढ़ाई की व्यवस्था नहीं है। जिस कारण मेडिकल छात्र कार्डियोलॉजी की पढ़ाई पूरी नहीं कर पाते हैं।

वहीं उत्तराखंड की स्वास्थ्य महानिदेशक डॉ. शैलेजा भट्ट ने बताया कि निदेशालय स्तर पर हृदय रोग विशेषज्ञ की तैनाती के प्रयास किये जा रहे हैं। विशेषज्ञ चिकित्सको को सेवानिवृत होने के बाद भी सेवाकाल में विस्तार करने की व्यवस्था भी शुरू की गई है। सेवाकाल विस्तार के लिए डॉ. जोशी से बात की जा रही है। आज के अन्य ताजा ‘नवीन समाचार’ पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें।

यह भी पढ़ें : हल्द्वानी : निजी चिकित्सालय में दिखाने के बाद चार बच्चों की हालत बिगड़ी, एक की मौत

one child dead and three infected by food poisoning in kaushambi up | फूड  प्वाइजनिंग से मासूम की मौत, परिवार के ही तीन अन्य बच्चों की हालत गंभीर |  Patrika Newsनवीन समाचार, हल्द्वानी, 28 मई 2022। जनपद के लालकुआं के आसपास के क्षेत्रों में बच्चों में खांसी, सर्दी-जुकाम निमोनिया जैसी स्थिति में तीन परिवारों के चार बच्चों को हल्द्वानी के डा. सुशीला तिवारी राजकीय चिकित्सालय (एसटीएच) में पिछले तीन दिनों में भर्ती कराया गया है। इनमें से दो साल के एक बच्चे की इलाज के दौरान मौत हो गई है, जबकि एक अन्य बच्चे की हालत भी गंभीर बनी हुई है। जबकि दो बच्चों के स्वास्थ्य में उपचार के बाद सुधार आया है। बताया जा रहा है कि बच्चों को निजी अस्पताल में दिखाया गया था। वहां खांसी की दवा पीने के बाद बच्चों की हालत बिगड़ी।

प्राप्त जानकारी के अनुसार बिंदुखत्ता निवासी आठ माह के आरव और दो वर्ष के लक्ष्य नैनवाल के अलावा मोटाहल्दू निवासी 11 माह के जुड़वा भाई हिमांशु व हर्ष को बेहद गंभीर स्थिति में एसटीएच में भर्ती कराया गया था। यहां लक्ष्य नैनवाल की उपचार के दौरान शनिवार को मौत हो गई। चिकित्सकों ने बताया कि जब उसे अस्पताल लाया गया तब उसकी हालत बहुत गंभीर थी। उसके दोनों फेफड़ों में संक्रमण था। शरीर का रंग नीला पड़ गया था। उसे वेंटिलेटर पर भर्ती करना पड़ा। निमोनिया इतना बिगड़ चुका था कि उसको सांस लेने में बहुत दिक्कत हो रही थी।

अन्य बच्चों को भी बुखार, जुकाम, खांसी जैसी शिकायत होने के बाद किसी निजी क्लीनिक में दिखाने के बाद खांसी की दवा दिलाने की बात बताई गई है। जिसके बाद बच्चों का स्वास्थ्य अधिक बिगड़ गया। बेहोशी होने, सांस लेने में तकलीफ जैसी गंभीर लक्षण होने पर चारों बच्चों को एसटीएच के बाल रोग विभाग में वेंटिलेटर पर रखा गया था।

बाल रोग विभागाध्यक्ष डा. ऋतु रखोलिया ने बताया कि बच्चे को बार-बार बेहोशी के दौरे पड़ रहे थे। उनका कहना था कि खांसी, जुकाम की दवा से बच्चे इतनी गंभीर अवस्था में नहीं जा सकते। बच्चों के परिजनों ने फिलहाल दवा का कोई पर्चा उन्हें नहीं दिखाया है। सीएमओ नैनीताल डा. भागीरथी जोशी ने कहा कि यह गंभीर मामला है। मामले की जांच कराई जाएगी ओर लापरवाही सामने आने पर संबंधित के विरुद्ध कार्रवाई की जाएगी। आज के अन्य ताजा ‘नवीन समाचार’ पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें।

यह भी पढ़ें : हल्द्वानी मेडिकल कॉलेज में रैगिंग पर हाईकोर्ट के निर्देशों के बाद कार्रवाई-सजा का ऐलान…

नवीन समाचार, हल्द्वानी, 26 मार्च 2022। अब तक लगातार नकारने के बाद राजकीय मेडिकल कालेज प्रशासन ने शनिवार को मान लिया है कि रैगिंग हुई थी, और दूसरी बार एंटी रैगिंग कमेटी की बैठक कर 121 सीनियर छात्रों पर सामूहिक तौर पर कार्रवाई करते हुए सभी छात्रों पर पांच हजार रुपये का अर्थदंड लगा दिया है।

Video Of Alleged Ragging In Haldwani Medical College Goes Viral. उत्तराखंड: मेडिकल  कॉलेज में रैगिंग, 27 छात्रों के सिर मुंडवाए गए…वायरल हुआ वीडियो. Haldwani  Medical College Ragging Videos ...शनिवार को राजकीय मेडिकल हल्द्वानी के प्राचार्य कार्यालय में एंटी रैगिंग कमेटी की बैठक में हाई कोर्ट के आदेश पर गठित कमेटी के सभी सदस्यों ने माना कि जूनियर छात्रों के साथ रैगिंग व दुर्व्यवहार हुई है। हालंाकि रैगिंग करने वालों की पहचान नहीं हो सकी। इस आधार पर कमेटी ने सामूहिक रूप से हास्टल संख्या दो में रहने वाले करीब 121 छात्रों पर पांच हजार रुपये अर्थदंड लगा दिया। यह धनराशि चार अप्रैल तक जमा करनी होगी। अर्थदंड जमा नहीं करने वाले छात्रों को हॉस्टल से निष्कासित किया जाएगा, तथा कक्षाओं से भी वंचित किया जाएगा।

उल्लेखनीय है कि राजकीय मेडिकल कालेज में एमबीबीएस में प्रथम वर्ष के प्रवेश के बाद चार मार्च को एक वीडियो वायरल हुआ था, जिसमें 27 छात्र सिर मुड़वाए हुए हास्टल से कक्षा में जाते समय सिर नीचे किए हुए और हाथ पीछे बांधे हुए चल रहे थे। सात मार्च कोएंटी रैगिंग कमेटी की पहली बैठक में पता चला कि 43 छात्रों ने सिर मुड़वाए थे। लेकिन अधिकांश छात्रों ने रैगिंग की शिकायत नहीं की थी। इसके बाद हाई कोर्ट ने नौ मार्च को जनहित याचिका की सुनवाई में कमिश्नर व डीआइजी को जांच के निर्देश दिए थे। (डॉ.नवीन जोशी) आज के अन्य ताजा ‘नवीन समाचार’ पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें।

यह भी पढ़ें : महिला विधायक प्रत्याशी के गांव में महिला ने सड़क पर दिया बच्चे को जन्म

नवीन समाचार, भवाली, 20 जनवरी 2022। नैनीताल से भाजपा की प्रत्याशी व पूर्व विधायक सरिता आर्य के गांव भूमियाधार में दो घंटे तक इंतजार के बावजूद 108 आपातकालीन एंबुलेंस के नहीं आने से गुरुवार को एक महिला ने सड़क पर ही बच्चे को जन्म दे दिया। बाद में स्थानीय लोगों की मदद से महिला को भवाली के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया, जहां से दोनों जच्चा-बच्चा को हल्द्वानी रेफर कर दिया गया।

प्राप्त जानकारी के अनुसार मल्ला भूमियाधार निवासी निर्मला आर्य पत्नी मनोज आर्य ने सुबह नौ बजे 108 एंबुलेंस को फोन किया, लेकिन 10 बजे तक एंबुलेंस नहीं पहुंची। इसके बाद परिवार और स्थानीय महिलाएं प्रसूता को सड़क तक लाई और 108 एंबुलेंस का इंतजार करते रहे। जब दो घंटे बाद प्रसूता को काफी पीड़ा होने लगी और उसने सड़क पर ही बच्चे को जन्म दे दिया। इसके बाद दोनों को अस्पताल पहुंचाया गया, जहां से चिकित्सकों ने प्राथमिक उपचार के बाद दोनों को हल्द्वानी रेफर किया। उम्मीद करनी होगी कि आगे इन स्थितियों में सुधार आएगा। (डॉ.नवीन जोशी) आज के अन्य ताजा ‘नवीन समाचार’ पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें।

यह भी पढ़ें : जवाहर नवोदय विद्यालय में सैकड़ों छात्र सर्दी-जुकाम व पांच दर्जन वायरल की चपेट में

Jawahar Navodaya Vidyalaya, Dhungir, Purola: Admission, Fee, Affiliationनवीन समाचार, पुरोला, 28 नवंबर 2021। पुरोला के जवाहर नवोदय विद्यालय धुनगिर में वायरल बुखार से स्थिति गंभीर हो गई है। यहां कक्षा छह से लेकर 12वीं तक के सैकड़ों छात्र खांसी-जुकाम की चपेट में और इनमें से करीब पांच दर्जन से अधिक बच्चे वायरल की चपेट में बताए गए हैं। रविवार को पुरोला सीएचसी में इनमें से एक दर्जन से अधिक बच्चों का रैपिड एंटीजन व आरटीपीसीआर टेस्ट किया गया। इससे पूर्व भी विद्यालय के 35 बच्चों का आरटीपीसीआर टेस्ट किया गया था, जिनकी रिपोर्ट निगेटिव आई है।

रविवार को विद्यालय की जीएनएम मीनाक्षी ने 14 छात्रों का यहां सीएचसी में रैपिड व आरटीपीसीआर टेस्ट करवाया। रैपिड टेस्ट में सभी छात्रो की रिपोर्ट निगेटिव आई है। उन्होंने बताया कि विद्यालय में करीब 60 छात्र वायरल से पीड़ित है, जिनका उपचार किया जा रहा है। इनके अलावा विद्यालय में खांसी से सैकड़ों छात्र पीड़ित हैं। विद्यालय के प्राचार्य प्रमोद रावत ने बताया कि पूर्व में वायरल से पीड़ित 35 बच्चों का कोरोना टेस्ट किया गया था। वर्तमान की उनको जानकारी नहीं है। वह अवकाश पर चल रहे है। (डॉ.नवीन जोशी) आज के अन्य ताजा ‘नवीन समाचार’ पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें।

यह भी पढ़ें : कोरोना के उपचार में 17 लाख खर्चने के बावजूद नहीं बची महिला, अस्पताल प्रबंधन सहित अनेक चिकित्सकों-चिकित्सा कर्मियों पर दर्ज हुआ मुकदमा

नवीन समाचार, देहरादून, 3 नवंबर 2021। कोरोना संक्रमित मरीज के इलाज के लिए निर्धारित से अधिक फीस लेने पर राजपुर थाना पुलिस ने राजधानी के मसूरी डायवर्जन स्थित मैक्स अस्पताल, अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक और पांच चिकित्सकों अन्य चिकित्सालय कर्मियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया है।

Max Hospital, Dehradun | Health/medical/pharmaceuticals | -NA-प्राप्त जानकारी के अनुसार विशाल अग्रवाल निवासी एकता एवेन्यू डालनवाला ने गत सप्ताह पुलिस महानिदेशक अशोक कुमार से मैक्स अस्पताल के विरुद्ध शिकायत कर कहा था कि उनकी माता सावित्री देवी को कोरोना संक्रमण होने पर 23 अप्रैल 2021 को मैक्स अस्पताल में भर्ती कराया गया था। यहां कुछ दिन बाद उनकी रिपोर्ट निगेटिव आई। इस दौरान अस्पताल प्रबंधन ने उनसे इलाज के नाम पर 17 लाख रुपये वसूल लिए, जो निर्धारित शुल्क से काफी अधिक थे। उन चिकित्सकों की भी विजिटिंग फीस वसूल की गई, जिन्होंने उनकी माता का इलाज नहीं किया। विशाल का कहना है कि इसकी पुष्टि मुख्य चिकित्सा अधिकारी कार्यालय की ओर से भी की जा चुकी है।

उनका आरोप है कि इसके बावजूद दो जून को चिकित्सकों की लापरवाही के कारण उनकी माता का निधन हो गया। हालांकि, अस्पताल ने उन्हें अतिरिक्त धनराशि नहीं लौटाई। विशाल का यह भी आरोप है कि इस मामले में उन्होंने राजपुर थाना पुलिस और एसएसपी से शिकायत की थी, लेकिन दोनों ही स्तर से कोई कार्रवाई नहीं की गई। ऐसे में पुलिस महानिदेशक से गुहार लगानी पड़ी।

राजपुर के थानाध्यक्ष मोहन सिंह ने बताया कि पुलिस महानिदेशक के आदेश पर मैक्स अस्पताल, अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक, डा. प्रीति शर्मा, डा. पुनीत त्यागी, डा. वैभव छाजर, डा. चंद्रकांत, डा. बिपेश उनियाल सहित अन्य स्टाफ के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया गया है। उधर, मैक्स अस्पताल प्रबंधन का कहना है कि मुकदमे की प्रति उन्हें प्राप्त हो गई है। वह जांच में पूर्ण सहयोग करेंगे। (डॉ.नवीन जोशी) आज के अन्य ताजा ‘नवीन समाचार’ पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें।

यह भी पढ़ें : अपने पैरों पर चलकर चिकित्सालय आए तीन साल के बच्चे की अनदेखी की वजह से मौत !

नवीन समाचार, हल्द्वानी, 30 सितंबर 2021। ऊधमसिंह नगर जिले के किच्छा नई बस्ती निवासी तीन साल के बच्चे की बीती रात्रि हल्द्वानी के सुशीला तिवारी राजकीय चिकित्सालय में मौत हो गई। बच्चे के परिजनों ने इसके लिए चिकित्सालय के कर्मियों एवं चिकित्सकों की लापरवाही को जिम्मेदारी बताया है और इसकी शिकायत चिकित्सालय के प्राचार्य से की है।

सुशीला तिवारी अस्पताल में तीन साल के बच्चे की मौत, स्वजनों ने लगाया इलाज में लापरवाही का आरोपमृतक बच्चे के पिता मुकेश के अनुसार उसके बेटे कपिल को पेशाब नहीं आ रही थी, ओर वह जांघ के पास दर्द की शिकायत कर रहा था। इसके इलाज के लिए वह 24 सितंबर की शाम एसटीएच आए थे। रात इमरजेंसी में दिखाने के बाद 25 सितंबर को उन्होंने बच्चे को बच्चा वार्ड में दिखाया। इस पर चिकित्सकों ने बच्चे को भर्ती कराने की सलाह दी। 26 सितंबर को उन्होंने बच्चे को अस्पताल में भर्ती कराया।

आरोप लगाया कि चिकित्सकों ने दवाएं मंगाने के बावजूद दवाएं बच्चे को नहीं दी। इधर बुधवार यानी 29 सितंबर की रात बच्चे की परेशानी बढ़ गई। इस दौरान चिकित्सकों ने बच्चे को देखा भी नहीं। इस कारण उसकी मौत हो गई। बच्चे के परिजनों का कहना था कि बच्चा अपने पैरों पर चलकर चिकित्सालय आया पर चिकित्सकों की लापरवाही व अनदेखी की वजह से उसकी मौत हो गई। (डॉ.नवीन जोशी) आज के अन्य ताजा ‘नवीन समाचार’ पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें।

यह भी पढ़ें : पर्वतीय क्षेत्र में चिकित्सालयों की स्थापना व सीईए में शिथिलीकरण की मांग को HC में याचिका दायर

डॉ. नवीन जोशी @ नवीन समाचार, नैनीताल, 28 जुलाई 2021। उत्तराखंड में स्वास्थ्य सुविधाएं बढ़ाने के लिये हाईकोर्ट में जनहित याचिका की गई है। याचिका पर उच्च न्यायालय ने सरकार को नोटिस जारी कर 4 हफ्ते में अपना पक्ष रखने का आदेश दिया है।

अपने साथियों के साथ इंटरनेट पर ‘कोविड हेल्प सेण्टर यूके’ व अन्य ग्रुप चलाने वाले देहरादून के सामाजिक कार्यकर्ता अभिनव थापर द्वारा दायर की गई इस याचिका में आवास विभाग से पर्वतीय क्षेत्रों में चिकित्सालय, नर्सिंग होम व स्वास्थ्य सेवाएं देने वाले संस्थानों के लिए ‘वन टाइम सेटलमेंट योजना ‘ओटीएस-2021’ में कमियों व क्लीनिकल एस्टेब्लिशमेंट एक्ट-सीईए में शिथिलता की मांग की गई है, ताकि इससे राज्य के चिकित्सालयों में बेडों की वर्तमान संख्या को घटने से रोकने व उनकी संख्या बढ़ाई जा सकेगी। याचिकाकर्ता के अधिवक्ता अभिजय नेगी ने बताया कि हाईकोर्ट की मुख्य न्यायाधीश की खंडपीठ ने इस याचिका के स्वास्थ्य सेवाओं को बढ़ाने के विषय का संज्ञान लेते हुए सरकार को नोटिस जारी कर चार सप्ताह में अपना पक्ष रखने को कहा है। आज के अन्य ताजा ‘नवीन समाचार’ पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें। 

यह भी पढ़ें : तो बायोमेट्रिक्स मशीन से कोरोना को बुलावा देकर मेडिकल कॉलेज करेगा कोरोना की तीसरी लहर का मुकाबला !

नवीन समाचार, हल्द्वानी, 24 जुलाई 2021। डा. सुशीला तिवारी मेडिकल कालेज प्रशासन ने आगामी 26 जुलाई से शिक्षकों, अधिकारियों व कर्मचारियों के लिए अपने कार्यालयों में आने पर बायोमेट्रिक्स तरीके से उपस्थिति लगाना अनिवार्य कर दिया गया है। इसका विरोध भी शुरू हो गया है। कर्मियों का कहना है कि एक ओर कोरोना की तीसरी लहर देश में दस्तक दे रही है, ऐसे में बायोमेट्रिक्स तरीके से उपस्थिति का फरमान कालेज के कर्मियों के लिए कोरोना को आमंत्रण देने वाला साबित हो सकता है।

बताया गया है कि कॉलेज प्रशासन ने बायोमेट्रिक्स तरीके से उपस्थिति का फरमान तत्कालीन प्राचार्य डा. सीपी भैंसोड़ा ने गत 9 जुलाई को प्रदेश के चिकित्सा शिक्षा एवं स्वास्थ्य मंत्री डा. धन सिंह रावत द्वारा नए विभाग का जिम्मा संभालते ही मेडिकल कॉलेजों की पहली समीक्षा बैठक में दिए गए आदेशों के अनुपालन में जारी किया था। उनके तबादले के बाद नए प्राचार्य डा. अरूण जोशी ने भी उसी आदेश को लागू करने का फरमान जारी कर दिया है।

उल्लेखनीय है कि मेडिकल कालेज में पहले भी बायोमेट्रिक्स तरीके से उपस्थिति की व्यवस्था थी लेकिन कोरोना शुरू होने के बाद सावधानी के तौर पर बायोमेट्रिक्स मशीनों को हटा दिया गया था। महामारी की दो लहरों तक इन मशीनों को उपयोग नहीं किया गया। लेकिन अब जब देश में तीसरी लहर का अंदेशा जताया जा रहा है, फिर से इन मशीनों के उपयोग का आदेश किसी के भी गले नहीं उतर रहा है। आज के अन्य ताजा ‘नवीन समाचार’ पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें। 

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डॉ. नवीन जोशी @ नवीन समाचार
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