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आयुष्मान योजना : एक ओर सरकार खुद बजा रही ढिंढोरा, दूसरी तरह लाखों लोग खुद किया है योजना से दूर

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-उत्तराखंड के लाखों लोग छह वर्षों से आयुष्मान कार्ड के इंतजार में
-2015-16 से पूर्व ऑनलाइन हुए राशन कार्ड धारकों के लिए आयुष्मान कार्ड बन पा रहे हैं
-2015-16 के बाद ऑनलाइन हुए राशन कार्ड अब तक आयुष्मान योजना से लिंक नहीं होने से नहीं बन पा रहे आयुष्मान कार्ड
डॉ. नवीन जोशी @ नवीन समाचार, नैनीताल, 11 अप्रैल 2021। एक ओर केंद्र व खासकर सरकार आयुष्मान कार्ड व गोल्डन कार्ड बनाने के लिए अलग-अलग स्थानों पर शिविर लगा रहे हैं, और लोगों से अपनी स्वास्थ्य सुरक्षा हेतु यह कार्ड बनाने की अपील कर रहे हैं, वहीं राज्य के लाखों लोग, जिन्होंने वर्ष 2015-16 के बाद अपने राशन कार्डों को ऑनलाइन कराया था, पिछले करीब छह वर्षों से चाहकर भी वह लोग अपने आयुष्मान कार्ड नहीं बना पा रहे हैं। इन लोगों के बारे में जिलों से लेकर शासन-प्रशासन तक जानकारी भी सबको है, परंतु समाधान अनचाहे अथवा जानबूझकर क्यों नहीं निकल रहा, इसका जवाब किसी के पास नहीं है।
उल्लेखनीय है कि वर्ष 2014-15 में राज्य में राशन कार्डों को ऑनलाइन करने का कार्य प्रारंभ हुआ। साथ ही इसी दौरान यह नई व्यवस्था भी लागू हुई कि बीपीएल एवं अंत्योदय को छोड़कर अन्य यानी गरीबी रेखा से ऊपर के कार्ड धारकों को चीनी, केरोसीन आदि उत्पाद नहीं मिलेंगे। इससे लोगों का राशन कार्डों के प्रति निर्भरता कम हुई। इसलिए लोग अपने राशन कार्डों को ऑनलाइन कराने में भी पीछे रहे। लेकिन तभी वर्ष 2015-16 में ऑनलाइन हुए राशन कार्डों के आधार पर आयुष्मान कार्ड बनाने की व्यवस्था लागू हुई तो लोग अपने राशन कार्डों को ऑनलाइन कराने लगे। जबकि तब तक केवल उन्हीं लोगों के आयुष्मान कार्ड बनने लगे जिनके राशन कार्ड खाद्य आपूर्ति विभाग के द्वारा ऑनलाइन कर लिए गए थे। यही व्यवस्था अब भी चल रही है। केवल 2015-16 से पहले राशन कार्डों को ऑनलाइन कराने वाले लोगों के ही राशन कार्ड बन पा रहे हैं, उनके बाद के बाद के लोगों के नहीं। बताया जा रहा है कि 2015-16 के बाद ऑनलाइन हुए राशन कार्डों के डाटा छह वर्ष बीत जाने के बावजूद स्वास्थ्य विभाग द्वारा संचालित आयुष्मान कार्ड योजना की वेबसाइट से लिंक नहीं हो पाए हैं। इस बारे में सीएमओ से लेकर डीएम एवं स्वास्थ्य निदेशक-कुमाऊं के साथ ही खाद्य आपूर्ति विभाग के अधिकारियों के स्तर पर भी आयुष्मान कार्ड न बनने की समस्या से स्वास्थ्य निदेशालय को अवगत कर प्रेच्छा की जा चुकी है, लेकिन शासन से कोई जवाब या आयुष्मान कार्ड न बनने का कारण नहीं बताया जा रहा है। सीएमओ डा. भागीरथी जोशी ने भी कहा कि शासन व निदेशालय से कई बार जानकारी लेने का प्रयास किया गया है। वहां से केवल यह ही बताया जा रहा है कि शीघ्र ही राशन कार्ड लिंक हो जाएंगे और आयुष्मान कार्ड बन सकेंगे।

यह भी पढ़ें : हल्द्वानी के अस्पताल का कमाल, बच्चेदानी के ऑपरेशन के बाद महिला को पेशाब के रास्ते से लैट्रिन होनी शुरू हो गई..

नवीन समाचार, हल्द्वानी, 06 मार्च 2021। उत्तराखंड के कुमाऊं मंडलवासियों के लिए हल्द्वानी में सर्वश्रेष्ठ स्वास्थ्य सुविधाएं मिलने का दावा किया जाता है। परंतु शनिवार को यहां एक ऐसा मामला आया है जो शहर की स्वास्थ्य सुविधाओं की पोल खोेलने वाला है। शहर कोतवाल को दी गई तहरीर के अनुसार यहां पश्चिमी राजीव नगर बिंदूखत्ता निवासी प्रेमपाल नाम के व्यक्ति की पत्नी हरप्यारी डेढ़-दो माह के गर्भ से थी। इसी दौरान खून बहने के कारण उसे परेशानी होने लगी। इस पर उसने गर्भस्थ भ्रूण की स्थिति जानने के लिए अपनी पत्नी को 11 जनवरी 2021 को शहर के मां जगदम्बा अस्पताल में भर्ती कराया। 13 जनवरी को अस्पताल की चिकित्सक ने हरप्यारी का अस्पताल की दूसरी लैब से अल्ट्रासाउंड कराने को भेजा। वहां की रिपोर्ट देखकर 14 जनवरी को मरीज की बच्चेदारी का ऑपरेशन किया गया और 15 जनवरी को मरीज की स्थिति ठीक बताकर अस्पताल से छुट्टी कर दी गई।

लेकिन अस्पताल से छुट्टी के बाद हरप्यारी को गैस की शिकायत हो रही थी। इस पर उसे अस्पताल के काउंटर से गैस की दवा देकर ठीक हो जाने का दावा किया गया। लेकिन घर जाकर इसी दिन मरीज की गैस की दिक्कत से सांस टूटने लगी। हालत खराब होने पर उसका हल्द्वानी की परख लैब से फिर अल्ट्रासाउंड कराया गया। परख लैब से भी उसकी रिपोर्ट को ठीक-ठाक बताया गया। लेकिन हालत और खराब होने पर प्रेमपाल ने पत्नी को बरेली के फैय्याज अस्पताल में भर्ती कराया गया। लेकिन वहां चिकित्सकों ने हरप्यारी की सीटी रिपोर्ट देखने के बाद खुलासा किया कि मां जगदम्बा अस्पताल में उसकी बच्चेदारी को फाड़ दिया गया है और उसकी आंत के दो हिस्से करके कुछ ऐसा कर दिया कि हरप्यारी को पेशाब के रास्ते से लैट्रिन होनी शुरू हो गई। इसके बाद फैय्याज अस्पताल ने दो ऑपरेशन करने बताए। इसमें से एक ऑपरेशन कर दिया है, और दूसरे आंत के ऑपरेशन में काफी खर्चा बताया है। प्रेमपाल का कहना है कि वह मजदूर है। उसके पास पत्नी के ऑपरेशन के लिए इतने रुपए नहीं हैं। उसने पत्नी के साथ कोई अनहोनी होने पर इसके लिए मां जगदम्बा अस्पताल की जिम्मदारी बताई है। इस मुद्दे को लेकर शनिवार को लोगों ने मां जगदम्बा अस्पताल प्रबंधन का पुतला भी फूंका है।

यह भी पढ़ें : 108 के पहले ही महिला का खेत में कराना पड़ा प्रसव..

नवीन समाचार, पिथौरागढ़, 19 फरवरी 2021। सरकारें स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार के तमाम दावे कर रही हैं, लेकिन हकीकत राज्य के सुदूर ग्रामीण क्षेत्रों में देखी जा सकती हैं। जहां स्वास्थ्य सेवाएं शून्य हैं। महिलाएं जान हथेली पर रखकर प्रसव के लिए मजबूर हैं। डीडीहाट तहसील के भड़गांव की एक महिला का खेत में ही प्रसव कराना पड़ा। सौभाग्य से महिला को 108 एंबुलेंस कर्मियों की सेवाएं मिल गई। महिला और नवजात को अस्पताल में भर्ती करा दिया गया है।
भड़गांव निवासी तनूजा देवी को गुरुवार की सुबह प्रसव पीड़ा हुई। परिजनों ने 108 एंबुलेंस को काल की। डीडाहाट से एंबुलेंस सड़क पर पहुंच गई। गांव तक सड़क सुविधा नहीं थी और महिला सड़क तक पहुंच पाने की स्थिति में नहीं थी।अत्यधिक प्रसव पीड़ा के कारण महिला खेत में ही बैठ गई और उठ नहीं पाई। इस पर 108 महिला कर्मी पुष्पा साह सड़क से आधा किलोमीटर ढलान में उतरकर महिला तक पहुंची। पुष्पा ने पूरी सावधानी के साथ महिला का खेत में ही प्रसव करा दिया। महिला ने बच्ची को जन्म दिया। प्रसव के बाद महिला को डोली पर बिठाकर रोड तक लाया गया, जहां से महिला और नवजात को अस्पताल लाकर भर्ती कराया गया। परिजनों ने 108 सेवा और महिला कर्मी की सराहना की है। 

यह भी पढ़ें : आईएमए का विरोध प्रदर्शन और हड़ताल की घोषणा की आयुर्वेद, यूनानी व आयुष एसोसिएशनों ने की कड़ी आलोचना..

नवीन समाचार, नैनीताल, 06 दिसम्बर 2020। केंद्र सरकार के आयुष मंत्रालय द्वारा आयुर्वेद के परास्नातक चिकित्सकों को सर्जरी करने के अधिकार से संबंधित अधिसूचना जारी की गयी है। अधिसूचना के अनुसार आयुर्वेद चिकित्सक अब 58 प्रकार की सर्जरी कर सकेंगें। राजकीय आयुर्वेद एवं यूनानी चिकित्सा सेवा संघ उत्तराखंड के प्रदेश मीडिया प्रभारी ने बताया कि इसकी घोषणा साल 2016 में ही कर दी गयी थी। इस फैसले का आयुर्वेद चिकित्सकों द्वारा स्वागत किया गया है एवं उनमें हर्ष का माहौल है, वहीं अधिकांश एलोपैथिक चिकित्सकों एवं उनकी एसोसिएशन आईएमए को सरकार का यह फैसला नागवार गुजरा है। डा. पसबोला का कहना है कि बिना पूरा प्रकरण जाने-समझे ही उनके द्वारा आयुर्वेद विरोधी मानसिकता का इस बार भी प्रदर्शन करते हुए 8 दिसम्बर को विरोध प्रदर्शन एवं 11 दिसम्बर को हड़ताल की घोषणा कर दी गयी है।
संघ के उपाध्यक्ष डॉ. अजय चमोला ने भी आईएमए के फैसले की कड़ी आलोचना करते हुए दुर्भाग्यपूर्ण एवं निंदनीय बताते हुए बताया कि धरने और हड़ताल संबधी फैसले का नेशनल इंटिग्रेटेड मेडिकल एसोसिएशन (आयुष) ने भी कड़ी आलोचना की है। आयुष एसोसिएशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. आरपी पाराशर ने कठोर चेतावनी देते हुए कहा कि यदि आईएमए ने अपना अड़ियल रवैया नहीं छोड़ा तो एलौपैथिक चिकित्सकों का व्यावसायिक बहिष्कार किया जाएगा। उन्होंनें आईएमए के पदाधिकारियों और सदस्यों के दोहरेपन की निंदा करते हुए कहा है कि दिन में जो चिकित्सकों एवं नर्सिंग होम के मालिक आयुर्वेदिक चिकित्सकों के पास आकर उनके यहां मरीज रेफर करने की प्रार्थना करते हैं, रात को वही आईएमए की मीटिंग में विरोध प्रदर्शन की बात करने लगते हैं, जो कि सही नहीं है। यहां तक उनकी एलोपैथी को नाम ही खुद होम्योपैथी के जनक सैमुअल हैनीमैन के द्वारा दिया गया है। यह भी दावा किया कि 17वीं शताब्दी तक एलोपैथी की कोई पहचान नहीं थी। एलोपैथी के जन्म से भी 3000 वर्ष पूर्व ‘फादर आफ सर्जरी’ कहे जाने वाले आचार्य सुश्रुत ने काशी में सर्जरी का पहला विश्वविद्यालय खोला था। उस समय भी भारत में आंख, कान, नाक, मुख के आपरेशन होते थे। फिर भी एलोपैथी चिकित्सकों के द्वारा अपने देश की चिकित्सा पद्धति को हीनभाव से देखना एवं विरोध करना निंदनीय एवं अक्षम्य है।

यह भी पढ़ें : 18 माह के बच्चे ने खोल दी नैनीताल से लेकर हल्द्वानी के नामचीन निजी चिकित्सालयों की पोल

नवीन समाचार, हल्द्वानी, 31 अक्टूबर 2020। जिला-मंडल मुख्यालय के करीब बजून निवासी एक डेढ़ वर्ष के बच्चे ने शनिवार को मुख्यालय से लेकर कुमाऊं का मेडिकल हब कहे जाने वाले हल्द्वानी की चिकित्सा व्यवस्था की पोल खोल कर रख दी। 18 माह के इस मासूम को गोद में लेकर उसका पिता हल्द्वानी के चार निजी अस्पतालों के चक्कर काटता रहा। लेकिन हर जगह कोई न कोई वजह बताकर बच्चे को भर्ती करने से मना कर दिया गया। निराश परिजन बच्चे को उपचार के लिए भोजीपुरा स्थित अस्पताल ले गए, जहां उसकी हालात स्थिर बताई जा रही है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार नैनीताल मुख्यालय के निकटवर्ती ग्राम बजून निवासी पूरन सिजवाली के 18 माह के बेटे ने बृहस्पतिवार सुबह करीब 10 बजे घर में रखे कीटनाशक को गलती से पी लिया। उसकी हालात खराब हुई तो परिजनों उसे लेकर फौरन नैनीताल स्थित बीडी पांडे जिला चिकित्सालय पहुंचे। परिजनों के अनुसार यहां बच्चे को प्राथमिक उपचार देने के बाद चिकित्सकों ने उसे शीघ्र हल्द्वानी ले जाने की सलाह दी। परिजन हल्द्वानी में सबसे पहले गुरुनानकपुरा स्थित निजी अस्पताल में मासूम को लेकर पहुंचे, जहां चिकित्सकों ने पहले उपचार के लिए हामी भरी फिर मना कर दिया गया। वहां से परिजन गैस गोदाम चौराहा स्थित अस्पताल आए, जहां बाल रोग विशेषज्ञ नहीं होने की बात कहते हुए इलाज के लिए मना कर दिया गया। इधर, मासूम की हालत बिगड़ती देख परिजन उसे रामपुर रोड और मुखानी चौराहे स्थित दो और निजी अस्पतालों में भी ले गए, जहां भी इलाज के लिए मना कर दिया गया। बच्चा पिता की गोद में दर्द से तड़पता रहा, लेकिन किसी भी डॉक्टर का दिल नहीं पसीजा। इस पर एक परिचित की सलाह पर मासूम को भोजीपुरा स्थित राम मूर्ति अस्पताल लेकर पहुंचे परिजनों ने बताया कि डॉक्टरों के मुताबिक बच्चे की हालत स्थिर है पर खतरा अभी टला नहीं है। परिजनों का कहना है कि उपचार के लिए रुपयों की किल्लत नहीं है यह बात बताने के बावजूद हल्द्वानी में किसी भी निजी अस्पताल ने बच्चे को भर्ती नहीं किया।

यह भी पढ़ें : नंगे पांव 30 किलोमीटर चलकर व्यवस्थाओं को दिखाया आईना..

-स्वास्थ्य सेवाओं की बदहाली पर शासन-प्रशासन को जगाने नंगे पांव कुमाऊं कमिश्नरी पहुंचे ग्रामीण

नंगे पांव कुमाऊं कमिश्नरी पहुंचे खैरना के ग्रामीण।

नवीन समाचार, नैनीताल, 09 अक्टूबर 2020। जनपद के खैरना स्वास्थ्य केंद्र में बदहाल स्वास्थ्य व्यवस्था का आरोप लगाते हुए नैनीताल जिले के गरमपानी, खैरना, बल्याली, चापड़ व धनियाकोट सहित आसपास के गांवों के लोग नंगे पांव 30 किमी से अधिक लंबी यात्रा कर जिला-मंडल मुख्यालय पहुंचे, और सरकार को आईना दिखाया। अलबत्ता मुख्यालय में कई जूता पहने लोग भी उनके साथ शामिल हो गए।
उनका कहना था कि उनके द्वारा गत 12 सितंबर सेे खैरना सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के बदहाल हालातों के दृष्टिगत बाल रोग, स्त्री रोग व हड्डी रोग विशेषज्ञ चिकित्सकों की तैनाती तथा चिकित्सा प्रभारी के व्यवहार से दुःखी होकर उन्हें हटाने या उनसे प्रभारी का कार्यभार हटाने की मांग को लेकर आंदोलनरत हैं। उनके द्वारा आमरण अनशन भी करने के बावजूद उनकी आवाज ना ही सरकार और ना ही व्यवस्था तक पहुंच पाई है। इसलिए व्यवस्था को जगाने नंगे पांव मंडल मंडल मुख्यालय पहुंचे हैं। यहां उन्होंने कुमाऊं कमिश्नरी पहुँच कर अपर आयुक्त को ज्ञापन सौंपा और चेतावनी देते हुए कहा कि जल्द स्वास्थ्य केंद्र की हालत नही सुधरी तो ग्रामीण आंदोलन को और अधिक उग्र करने को विवश होंगे। इसकी पूरी जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होगी। ज्ञापन में विरेंद्र जंतवाल, संजय बिष्ट, दिनेश बिष्ट, मनीश साह, वीरेंद्र बिष्ट, उमराव अधिकारी, मनीष तिवारी, कैलाश पांडे आदि के हस्ताक्षर रहे।

यह भी पढ़ें : हल्द्वानी के निजी चिकित्सालयों की अमानवीयता से तीन लोगों की मौत ! डीएम ने दिये जांच के आदेश

नवीन समाचार, हल्द्वानी 12 सितम्बर 2020। हल्द्वानी के निजी चिकित्यालयों की कथित तौर पर लापरवाही की वजह से तीन रोगियों की मौत हो गई है। डीएम सविन बंसल का कहना है कि ऐसा इसलिए हुआ कि इन निजी चिकित्सालयों ने कथित तौर पर गंभीर रोगों से ग्रस्त रोगियों को बिना कोविड जांच किये हुये उपचार नहीं दिया। डीएम बंसल ने इस पर कडी नाराजगी व्यक्त करते हुए एडीएम (प्रशासन) की अध्यक्षता मे टीम गठित कर मामले की जांच सोंप दी है। साथ ही उन्हांेने जनपद की मुख्य चिकित्साधिकारी व नगर मजिस्टेªट हल्द्वानी (अध्यक्ष आईआरटी) से अब तक निजी चिकित्यालयों द्वारा गम्भीर रोगियों का उपचार नही करने के कारण हुई मौतों के मामले में संबंधित चिकित्सालयों के खिलाफ की गई कार्यवाही की रिपोर्ट तलब की है।
डीएम बंसल ने कहा कि निजी चिकित्सालयों द्वारा मरीजों के उपचार मे इस प्रकार की लापरवाही व संवेदनहीनता बरतने से जहां एक ओर आम जनता के स्वास्थ्य व जीवन को विपरीत रूप से प्रभावित किया जा रहा है वही दूसरी ओर जनपद की स्वास्थ्य व्यवस्था की छवि को भी धूमिल किया जा रहा है। निजी चिकित्सालयों द्वारा गम्भीर रोगियों को बिना कोविड जांच किये हुये उपचार प्रदान नही किया जा रहा है तथा रोगियों से उपचार से पूर्व कोविड जांच सम्बन्धी प्रमाण पत्र मांगा जा रहा है जो गम्भीर प्रकरण है। उन्होने कहा कि निजी चिकित्सालयों के लैब चिकित्सकों, तकनीशियनों को मुख्य चिकित्साधिकारी द्वारा माह अप्रैल कोविड 19 सेम्पलिंग की ट्रेनिंग भी दी गई थी तथा निजी चिकित्सालयों के सक्षम अधिकारियोें द्वारा इस आशय का प्रमाण पत्र भी दिया गया है कि उनका चिकित्सालय कोविड 19 सैम्पलिंग हेतु सक्षम है और यदि किसी आकस्मिक परिस्थिति मे कोई ऐसा मरीज आता है तो सम्बन्धित मरीज का कोविड 19 सैम्पल उनके चिकित्सालय द्वारा ही लिया जायेगा साथ ही चिकित्सालयों में कोविड 19 से निपटने हेतु आइसोलेशन वार्ड की स्थापना का भी र्प्रमाण पत्र निजी चिकित्सालयों द्वारा दिया गया है। उक्त के अतिरिक्त सक्षम स्तर से जनपद में कोविड 19 सैम्पलिंग हेतु निजी लैबों को भी अधिकृत किया गया है। इस हेतु शासनादेश भी निर्गत किये गये है।

यह भी पढ़ें : पहाड़ की बदहाल स्वास्थ्य ने ली ‘देश के एक भविष्य’ की जान, देवभूमि की एक देवी की जान भी आई आफत में..

नवीन समाचार, हल्द्वानी, 11 सितंबर 2020। पहाड़ की बदहाल स्वास्थ्य व्यवस्था ने कोख में ही देश का भविष्य कहे जाने वाले एक बच्चे की जान ले ली। साथ ही बच्चे की मां यानी देवभूमि की एक देवी की जान भी आफत में डाल दी।
हुआ यह कि बेरीनाग के निकट पांखू-कोटगाड़ी निवासी 22 वर्षीया नौ माह की गर्भवती हेमा को बीते बुधवार की सुबह प्रसव पीड़ा शुरू हुई। बेरीनाग के स्थानीय चिकित्सालय में हुई जांच में उसका रक्तचाप बढ़ा हुआ मिला। इस पर उसकी सिजेरियन डिलिवरी की आशंका को देखते हुए चिकित्सकों ने उसे अल्मोड़ा रेफर कर दिया। लेकिन अल्मोड़ा में चिकित्सकों ने उसे आईसीयू व अन्य जरूरी सुविधाएं न होने का हवाला देते हुए हल्द्वानी के लिए रेफर कर दिया। दर्द से तड़पती प्रसूता को उसके परिजन रात करीब एक बजे हल्द्वानी के महिला अस्पताल लेकर पहुंचे। यहां जांच में पता चला कि तब तक गर्भस्थ शिशु ने गर्भ में ही दम तोड़ दिया था। साथ ही प्रसूता महिला की हालत भी बहुत खराब हो चुकी थी। चिकित्सकों के अनुसार यदि थोड़ी देर और होती तो महिला की जान जाने का भी डर था। बहरहाल चिकित्सकों ने कड़ी मशक्कत कर महिला के गर्भस्थ मृत शिशु को बाहर निकाला। महिला अब भी अस्पताल में भर्ती है।

यह भी पढ़ें : एक और ‘गब्बर’ वाला अस्पताल, पहले इलाज के नाम पर लूटा, फिर शव देने के नाम पर भी की डिमांड….

नवीन समाचार, रुद्रपुर, 2 सितंबर 2020। बॉलीवुड फिल्म गब्बर में एक अस्पताल मृत व्यक्ति का उपचार करने और बाद में मृतक का शव देने के नाम पर रुपए ऐंठता है। ऐसे ही आरोप काशीपुर के एक अस्पताल पर लगे हैं। बताया गया है कि 11 दिन पहले सड़क हादसे में ग्राम कुंडेश्वरी निवासी जसवंत सिंह घायल हो गया था। उसे काशीपुर के मानपुर रोड स्थित एक अस्पताल में भर्ती कराया गया। चिकित्सक उसके परिजनों को लगातार उसके जल्द ठीक होने का आश्वासन देते रहे और इलाज के नाम पर करीब चार लाख रुपए वसूले। इसके बावजूद जसवंत सिंह की मौत हो गई। पुलिस के अनुसार परिजनों ने इस मामले में पुलिस में तहरीर देकर आरोप लगाया है कि जसवंत सिंह की मृत्यु होने के बाद भी चिकित्सकों द्वारा उसके शव को परिजनों को नहीं सौंपा गया और एक लाख रुपए जमा करने के बाद शव ले जाने की बात कही। अलबत्ता, परिजनों से घटना की सूचना मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची और शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेजा। पुलिस ने तहरीर में लगाए गए आरोपों पर जांच कर कार्रवाई करने की बात भी कही है।

यह भी पढ़ें : बीडी पांडे जिला चिकित्सालय के वरिष्ठ चिकित्सक डा. दुग्ताल पथरी से परेशान

नवीन समाचार, नैनीताल, 22 जुलाई 2020। जिला-मंडल मुख्यालय में पेट की, खासकर पथरी की समस्या बड़ी समस्या है। कम ही लोग यहां पथरी की समस्या से बच पाते हैं। यह तब है, जबकि नगर में पेयजल की कठोरता को दूर करने के लिए सॉफ्टनिंग प्लांट भी मौजूद है, फिर भी पानी में चूने की वजह से यहां लोग पथरी की समस्या से ग्रस्त रहते हैं। इधर बीडी पांडे जिला चिकित्सालय के वरिष्ठ फिजीशियन डा. एमएस दुग्ताल भी पथरी की समस्या से ग्रस्त हो गये हैं और जिला उन्हें चिकित्सालय में भर्ती होना पड़ा है। उनके इस तरह बीमार हो जाने से चिकित्सालय दिखाने आये अनेक लोगों को भी बैरंग लौटना पड़ा है।

यह भी पढ़ें : जन औषधि केंद्रों में दवाओं की कमी पर केंद्र एवं राज्य सरकार को नोटिस

नवीन समाचार, नैनीताल, 8 जुलाई 2020। उत्तराखंड उच्च न्यायालय की मुख्य न्यायधीश रमेश रंगनाथन व न्यायमूर्ति आरसी खुल्बे की खंडपीठ ने जन औषधि केंद्रों में पिछले लंबे समय से दवाइयों की भारी कमी व वित्तीय अनियमितताओं के मामले में सुनवाई करते हुए केंद्र सरकार के औषधि सचिव एवं औषधि ब्यूरो तथा राज्य के स्वास्थ्य सचिव, जिला रेडक्रॉस सोसायटी नैनीताल व राज्य रेडक्रॉस सोसायटी को नोटिस जारी कर 21 दिनों के भीतर दवाइयां न आने पर विस्तृत जवाब पेश करने को कहा है।
उल्लेखनीय है कि इस मामले में हल्द्वानी निवासी समाजसेवी अमित खोलिया ने जनहित याचिका दायर कर कहा है कि नैनीताल जिले के सभी सरकारी अस्पतालों में गरीबों को बाजार मूल्य से कम दामों पर जैनरिक दवाइयों को उपलब्ध कराने के मकसद से रेडक्रॉस सोसायटी के माध्यम से प्रधानमंत्री जन औषधि केंद्र खोले गए थे। लेकिन लंबे समय से इन केंद्रों में आई ड्रॉप के अलावा अन्य दवाइयां उपलब्ध नहीं हैं। जन औषधि केंद्र केवल शोपीस बन के रह गए हैं। कोरोना काल में भी ऐसी ही बदतर स्थिति होने के कारण लोग बाजार से महंगी दवाइयां खरीदने के लिये मजबूर हैं। लिहाजा याचिका में जन औषधि केंद्रों का संचालन रेडक्रॉस सोसायटी से हटा कर किसी अन्य संस्था को देने की मांग की गई है। उल्लेखनीय है कि जिला मुख्यालय में तो डीएम सविन बंसल ने कुप्रबंधन का आरोप लगाते हुए जिला रेडक्रॉस सोसायटी पर कार्रवाई की थी। सोसायटी के प्रबंधन में भी बदलाव हुआ, फिर भी स्थितियां सुधरने की जगह और भी बिगड़ गईं।

यह भी पढ़ें : हद है: ‘धरती के भगवानों’ ने प्रसूता महिला के पेट से बच्चा निकाला, कपड़ा अंदर छोड़ दिया..

नवीन समाचार, काशीपुर, 25 जून 2020। चिकित्सक धरती पर भगवान के दूसरे रूप कहे जाते हैं। लेकिन कुछ चिकित्सकों भगवान के दूसरे रूप कहे जाने वाले चिकित्सकों की छवि को खराब करने में भी पीछे नहीं रहते। काशीपुर के एक सरकारी अस्पताल के चिकित्सक ने एक महिला की डिलीवरी के वक्त उसके पेट में तौलिया छोड़कर ऐसा ही काम किया है। अलबत्ता, एम्स ऋषिकेश के धरती के दूसरे भगवानों ने उनकी गलती का समाधान कर दिया है।
हुआ यह कि बैलपड़ाव की रहने वाली मनप्रीत कौर ने कुछ समय पूर्व काशीपुर के सरकारी अस्पताल में डॉ. नवप्रीत कौर सहोता से ऑपरेशन के जरिये डिलीवरी करवाई थी। डिलीवरी के बाद से ही मनप्रीत कौर ने डॉक्टर से पेट मे लगातार दर्द होने व दर्द के कम न होने की शिकायत की। लेकिन इसके बाद भी काशीपुर के सरकारी अस्पताल की डॉ. नवप्रीत ने उन्हें घर भेज दिया। जब मनप्रीत का दर्द कम होने की जगह और बढ़ने लगा तो वह इलाज कराने के लिए एम्स ऋषिकेश पहुंची। एम्स के डॉक्टरों ने पेट में कपड़ा होने की बात कही और ऑपरेशन करके उसके पेट से कपड़ा बाहर निकाल दिया।
इधर महिला एम्स ऋषिकेश से इलाज करवा कर स्वस्थ होने के बाद काशीपुर लौटी और उत्तराखण्ड राज्य महिला आयोग की पूर्व उपाध्यक्ष अमिता लोहनी को पूरा मामला बताया। लोहनी पीड़ित महिला को लेकर काशीपुर कोतवाली पहुंची, जहां पीड़ित मनप्रीत ने पुलिस को सारी कहानी बताई व तहरीर दे कर सरकारी अस्पताल की डॉ. नवप्रीत कौर सहोता के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर उचित कानूनी कार्रवाई की मांग की। पुलिस ने पीड़िता की तहरीर ले ली है। महिला द्वारा सरकारी चिकित्सक पर गंभीर आरोप के मामला को पुलिस द्वारा स्वास्थ्य विभाग को जल्द ही अवगत करवाया जाएगा। स्वास्थ्य विभाग द्वारा मामले की पुष्टि होने के बाद पुलिस आगे की कार्रवाई करेगी।

यह भी पढ़ें : ब्रेन ट्यूमर के इलाज में गरीब महिला को नहीं मिला प्रधानमंत्री आयुष्मान कार्ड योजना का लाभ

नवीन समाचार, नैनीताल, 06 जून 2020। नगर की एक जरूरतमंद गरीब महिला को ब्रेन ट्यूमर जैसी जानलेवा समस्या आने पर प्रधानमंत्री आयुष्मान कार्ड योजना का लाभ नहीं मिला। फलस्वरूप महिला का परिवार पर करीब तीन लाख रुपये का कर्ज चढ़ गया है।

पीड़ित महिला एवं उसका अटल आयुष्मान कार्ड।

प्राप्त जानकारी के अनुसार नगर के मल्लीताल नैनीताल में स्टाफ हाउस क्षेत्र में रहने वाली व लोगों के घर में झाड़ू-पोछा करके गुजारा करने वाली महिला प्रेमा देवी पत्नी दौलत राम को 28 दिसंबर 2019 को सिर में तेज दर्द व चक्कर आने की शिकायत पर स्थानीय बीडी पांडे जिला चिकित्सालय में दिखाया गया। यहां से उसे हल्द्वानी के सुशीला तिवारी मेडिकल कॉलेज के लिये संदर्भित कर दिया गया। महिला की पुत्री काजल ने बताया कि मेडिकल कॉलेज में उनकी मां को भर्ती किये बिना ही मस्तिष्क का सीटी स्कैन व एमआरआई स्कैन प्रधानमंत्री आयुष्मान कार्ड होने के बजाय निर्धारित शुल्क लेकर किया गया। पहले चिकित्सकों ने भर्ती नहीं किया, फिर बताया गया कि बिना भर्ती हुए प्रधानमंत्री आयुष्मान कार्ड का लाभ नहीं मिलता। यहां से उसे ब्रेन ट्यूमर बताकर हायर सेंटर रैफर कर दिया। ऐसे में महिला की बेटियां कर्ज लेकर उसे पहले हल्द्वानी के एक निजी चिकित्सालय और फिर 14 जनवरी को दिल्ली के एम्स ले गयीं। वहां बताया गया कि उत्तराखंड का प्रधानमंत्री आयुष्मान कार्ड नहीं चलेगा, लिहाजा पूरा भुगतान लेकर महिला का 15 फरवरी 2020 को सफल ऑपरेशन हो पाया। काजल ने बताया कि वह नगर में एक स्टोर में, पिता एक होटल में काम करते हैं। परिवार पर करीब तीन लाख रुपये का कर्ज चढ़ गया है। इधर लॉक डाउन की वजह से वह कर्ज भी नहीं चुका पा रहे हैं। लिहाजा उन्होंने प्रदेश के मुख्यमंत्री से मदद की गुहार लगाई है।

यह भी पढ़ें : बीडी पांडे जिला चिकित्सालय में चार मई तक आईसीयू सुविधा शुरू करने के आदेश

नवीन समाचार, नैनीताल, 29 अप्रैल 2020। अधिवक्ता दुष्यंत मैनाली द्वारा दायर जनहित याचिका में बुधवार को हुई सुनवाई के दौरान प्रदेश के स्वास्थ्य महानिदेशक ने उच्च न्यायालय को बताया कि उच्च न्यायालय के बीती 21 अप्रैल के आदेश के अनुपालन में अल्मोड़ा, बागेश्वर, चमोली, रुद्रप्रयाग, मेला अस्पताल हरिद्वार व बीडी पांडे जिला चिकित्सालय नैनीताल में आईसीयू, वेंटिलेटर, थर्मल स्कैनर व ऑक्सीजन सिलेंडर सहित सभी आवश्यक उपकरणों की आपूर्ति कर दी गई है। अलबत्ता याचिकाकर्ता की ओर से न्यायालय को बताया गया कि इन उपकरणों की आपूर्ति के बावजूद अभी तक इनकी स्थापना सभी 6 अस्पतालों में अब तक नहीं हो पाई है।
इस पर न्यायालय ने राज्य सरकार को आदेश दिया है कि बीडी पांडे जिला चिकित्सालय नैनीताल में 4 मई तक पूर्ण रूप से संचालित आईसीयू सुविधा स्थापित और संचालित हो जानी चाहिए। साथ ही राज्य सरकार को यह भी आदेशित किया है कि अन्य सभी अस्पतालों में जहां-जहां आईसीयू व वेंटीलेटर की आपूर्ति न्यायालय के आदेश के अनुक्रम में की गई है उनमें भी जल्द से जल्द आईसीयू और वेंटिलेटर को संचालित कर दिया जाए। मामले की अगली सुनवाई 5 मई को होगी। आज मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति सुधांशु धूलिया व न्यायमूर्ति रविंद्र मैठानी की खंडपीठ में हुई।

यह भी पढ़ें : नैनीताल जिला चिकित्सालय में एक्सरे मशीन व जनरेटर चलाने को तीन दिन का अल्टीमेटम

-छह माह पूर्व डीएम द्वारा मशीन व जनरेटर लगवाने के बावजूद संचालित नहीं हुए
नवीन समाचार, नैनीताल, 25 अप्रैल 2020। मुख्यालय स्थित बीडी पांडे जिला पुरुष चिकित्सालय में डीएम सविन बंसल ने करीब 6 माह पूर्व निरीक्षण करने के बाद आवश्यकता को देखते हुए आधुनिक एक्सरे मशीन तथा जनरेटर की व्यवस्था करा दी थी। परंतु चिकित्सालय प्रबंधन, ठेकेदारों तथा एक्सरे कम्पनी के लोगों की लापरवाही के चलते अब तक एक्सरे मशीन और जनरेटर संचालित नहीं हुए। इस बात पर नाराज डीएम ने सीएमएस से नाराजगी व्यक्त करते हुए शनिवार सुबह एसडीएम विनोद कुमार को चिकित्सालय भेजा। एसडीएम ने लगभग दो घंटे चिकित्सालय का निरीक्षण किया और प्रमुख चिकित्साधीक्षक डा. केएस धामी को निर्देश दिये कि तीन दिन के भीतर एक्सरे मशीन तथा जनरेटर स्थापित कर क्रियाशील करें। यदि निर्धारित अवधि मे यह सुविधायंे बहाल नही होती हैं तो आपदा प्रबंधन एक्ट के अंतर्गत मुकदमा दर्ज कराया जायेगा तथा एक्सरे मशीन व जनरेटर लगाने वाले ठेकेदार तथा अभियंताओें के विरूद्व एफआईआर दर्ज करायी जायेगी।
एसडीएम कुमार ने बताया कि चिकित्सालय में वर्तमान मे 250 सेनेटाइजर, 9419 ट्रिपल लेयर मास्क, 150 बीटीएम, 67 पीपीई किट, 295 एन-95 मास्क, दो वंेटिलेटर तथा चार आईसीयू बेड उपलब्ध है। उन्होेने बताया कि एक्सरे मशीन के लिए कक्ष तैयार किया जा रहा है तथा एक्सरे मशीन स्थापित करने के लिए कम्पनी के अभियंताओं को बुला लिया गया है तथा जनरेटर की स्थापना के लिए ठेकेदार द्वारा प्लेटफार्म का निर्माण शुरू कर दिया गया है दो तीन दिन बाद पुनः इन कामों का निरीक्षण किया जायेगा। निरीक्षण के दौरान डा. एमएस दुग्ताल, डा. अनुरुद्व गंगोला, डा. प्रियांशु श्रीवास्तव व डा. आरके वर्मा के अलावा भाजपा के पूर्व अध्यक्ष मनोज जोशी, शशि पांडे, एमएल चुनेटा, सीएस ताकुली तथा आईके जोशी आदि मौजूद रहे।

यह भी पढ़ें : गांव में मिले 98 जमाती, पूरा गांव सील कर किया क्वारंटीन

नवीन समाचार, हरिद्वार, 3 अप्रैल 2020। उत्तराखंड के हरिद्वार जिले के हरिद्वार-नजीबाबाद मार्ग के किनारे स्थित गैंडीखाता गुज्जर बस्ती में 98 जमाती मिलने पर पुलिस प्रशासन ने पूरे गांव को ही सील कर दिया है। इस गांव में पुलिस को इतनी बढी संख्या में जमाती मिले कि पुलिस ने इनसे कोरोना संक्रमण की बढती आशंका देख यहां की बाहर से आवाजाही पूरी तरह से बंद कर दी है। हरिद्वार जिले के श्यामपुर थाने के एसएचओ दीपक सिंह कठैत के मुताबिक पुलिस प्रशासन की टीम को जानकारी मिली थी कि गैंडीखाता गुज्जर बस्ती में दिल्ली, देवबंद और अन्य स्थानों से लौटकर आए 98 जमाती हैं। जिसको गांव जाकर सही पाने के बाद पुलिस ने इन सभी को होम क्वारंटीन कर दिया है। गांव में आवाजाही पूरी तरह से बंद करते हुए गांव में भारी पुलिस फोर्स की तैनाती की गई है। पुलिस ने बहादराबाद के बौंगला गांव स्थित आर्य इंटर कॉलेज में करीब 40 लोगों को क्वारंटीन किया हुआ है। ये लोग अपने परिवार वालों से मोबाइल पर संपर्क में हैं। जरूरी सामान उनके पास पहुंचाया जा रहा है।

यह भी पढ़ें : विधायक के हस्तक्षेप से हो पाया खाई में गिरकर घायल हुए बालक का इलाज..

नवीन समाचार, नैनीताल, 2 अप्रैल 2020। धारी ब्लाक के दुदुली ग्रामसभा निवासी मनीष कुमार (16) पुत्र भुवन चंद्र मंगलवार की शाम अनियंत्रित होकर खाई में जा गिरा। खाई में गिरने पर युवक की आवाज सुनकर ग्रामीणों उसे बाहर निकाला। जहां से युवक को परिजन हल्द्वानी के सुशीला तिवारी अस्पताल लेकर पहुंचे। घायल युवक के सिर, मुंह और हाथ पर गंभीर चोटें आई है। बताया गया कि चिकित्सालय ने उसका इलाज करने से मना कर दिया। इस पर क्षेत्रीय विधायक राम सिंह कैड़ा ने चिकित्सकों से वार्ता कर घायल का उचित इलाज करने को कहा है। समाजिक कार्यकर्ता रमेश टम्टा, धर्मपाल ने बताया कि घायल युवक गरीब परिवार की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं है। उन्होंने विधायक से पीड़ित परिवार को आर्थिक सहायता दिलाने की अपील की है।

यह भी पढ़ें : कोरोना के संक्रमण के बीच जन औषधि केंद्र में बुखार-सर्दी जुकाम की दवाइयां भी नहीं

नवीन समाचार, नैनीताल, 24 मार्च 2020। देश-दुनिया में फैले कोरोना विषाणु के संक्रमण के बीच मुख्यालय स्थित बीडी पांडे जिला चिकित्सालय स्थित प्रधानमंत्री जन औषधि केंद्र व्यवस्थाओं की पोल खोल रहा है। यहां सामान्य बुखार एवं सर्दी-जुकाम की दवाइयां तक नहीं हैं। मंगलवार को यहां बुखार व सर्दी-जुकाम की दवाइयां लेने गए लोगों को दवाइयां न होने की बात कहकर बैरंग लौटाया गया। बताया गया है कि यहां अन्य दवाइयों की स्थिति भी खराब है।
उल्लेखनीय है कि जिला रेडक्रॉस सोसायटी द्वारा संचालित जन औषधि केंद्र पर हमेशा से दवाइयां न होने के आरोप लगते रहते हैं। गत वर्ष भाजपा के तत्कालीन नगर अध्यक्ष की अगुवाई में जन औषधि केंद्र में ऐसे ही आरोपों में तालाबंदी भी कर दी गई थी। इसके बाद जन औषधि केंद्र के प्रबंधन में आमूलचूल परिवर्तन भी हुआ। डीएम सविन बंसल भी जन औषधि केंद्र की व्यवस्थाएं सुधारने के प्रति संवेदनशील दिखे, बावजूद यहां के हालात सुधरते नजर नहीं आ रहे हैं। इस बारे में पूछे जाने के लिए जिला रेडक्रॉस सोसायटी के अध्यक्ष से फोन पर संपर्क करने का प्रयास किया गया, किंतु उनका फोन स्विच ऑफ मिला।

यह भी पढ़ें : इस शोध रिपोर्ट को पढ़ने के बाद आप शहद खाने से पहले 10 बार सोचेंगे

-शोध छात्रा नगमा परवीन ने बताया एंटीबायोटिक युक्त शहद खाकर मानव पर एंटीबायोटिकों का असर और जीवाणुओं से लड़ने की शक्ति खत्म हो रही

यंग साइंटिस्ट अवार्ड प्राप्त करती डीएसबी की छात्रा नगमा परवीन।

नवीन समाचार, नैनीताल, 3 मार्च 2019। कुमाऊं विवि की शोध छात्रा नगमा परवीन को देहरादून के विज्ञान धाम में आयोजित ‘13वीं उत्तराखंड स्टेट साइंस एंड टेक्नोलॉजी कांग्रेस 2018-2019’ में ‘यंग साइंटिस्ट अवार्ड’ से नवाजा गया है। उन्हें यह पुरस्कार उनके द्वारा ‘स्टेटस ऑफ एंटीबायोटिक यूज्ड इन एपिकलचर बाय बीकीपर टू ट्रीट बैक्टीरियल पेथोजेनेसिस इन नैनीताल डिस्ट्रिक्ट’ विषय पर किये जा रहे शोध पर दिया गया है। उनके शोध के नतीजे बेहतर स्वास्थ्य के लिए शहद का सेवन करने वालों के लिए चेतावनीप्रद हो सकते हैं।
डीएसबी परिसर नैनीताल के जंतु विज्ञान विभाग में प्रो. सतपाल बिष्ट के निर्देशन में शोधरत नगमा ने बताया कि उन्होंने नैनीताल जिले के शहद के लिए प्रसिद्ध आठ गांवों-भल्यूटी, काठगोदाम, लोहरियासाल तल्ला, मदनपुर कुर्मि्म, नाथुपुर, नेरिपुरा छोई, बैलपड़ाव व शिवलालपुर पांडेय के 2 दर्जन से अधिक मधुमक्खी पालकों से साक्षात्कार लेकर यह निष्कर्ष निकाला है कि 75 प्रतिशत मधुमक्खी पालक मधुमक्खियों में जीवाणु जनित बीमारियों को खत्म करने के लिए टेरामायसिन नाम की एंटीबायोटिक दवाई का इस्तेमाल कर रहे हैं, जो की एक ब्रॉड स्पेक्ट्रम एंटीबायोटिक है। जब यह एंटीबायोटिक मधुमक्खियों को दी जाती है तो यह उनसे शहद में पहुंच जाती है। इस एंटीबायोटिक मिश्रित शहद के सेवन से मानव शरीर मंे एंटीबायोटिकों का असर कम हो जाता है और जीवाणुओं से लड़ने की शक्ति खत्म हो जाती है जोकि मानव स्वास्थ्य के लिए बहुत हानिकारक है। उन्होंने बताया कि वह अपनी इस उपलब्धि का श्रेय अपने गुरु माता पिता और भाइयों को देना चाहती हूँ।

यह भी पढ़ें : निजी अस्पतालों की हड़ताल खत्म, सीएम से वार्ता के बाद लिया फैसला

नवीन समाचार, नैनीताल, 23 फरवरी 2019। पिछले नौ दिन से चल रही इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आइएमए) से जुड़े निजी चिकित्सकों की प्रदेशव्यापी हड़ताल शनिवार रात मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत के साथ वार्ता के बाद समाप्त कर दी गई है। मुख्यमंत्री ने चिकित्सकों की मांगों का परीक्षण करने को वित्त मंत्री प्रकाश पंत की अध्यक्षता में एक कमेटी बनाने की घोषणा की। मुख्यमंत्री आवास में हुई वार्ता के बाद चिकित्सक भाजपा प्रदेश अध्यक्ष अजय भट्ट के साथ उनके यमुना कालोनी आवास पहुंचे और हड़ताल खत्म करने की जानकारी दी। दूसरी ओर, स्वास्थ्य सचिव नितेश झा ने बताया कि कमेटी की रिपोर्ट आने तक चिकित्सकों के प्रतिष्ठानों के विरुद्ध चल रही सीलिंग की कार्रवाई पर रोक लगा दी गई है। रविवार से चिकित्सक पूर्व की तरह अस्पताल व क्लीनिक खोलेंगे व मरीजों को उपचार देंगे।

उल्लेखनीय है कि निजी चिकित्सक गत 15 फरवरी से क्लीनिकल एस्टेब्लिशमेंट एक्ट में संशोधन करने या उत्तराखंड हेल्थकेयर एस्टेब्लिशमेंट एक्ट लागू करने की मांग को लेकर हड़ताल पर थे। जिससे मरीजों को काफी मुसीबतों का सामना करना पड़ रहा था। राज्य सरकार की ओर से सरकारी अस्पतालों में नाकाफी साबित हो रही वैकल्पिक व्यवस्थाएं की गई थीं। इसके बावजूद सरकार ने झुकने से इन्कार कर दिया और चिकित्सकों के प्रतिष्ठानों पर सीलिंग की कार्रवाई शुरू कर दी थी। इस दोतरफा कार्रवाई से दबाव में आए चिकित्सकों ने भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष अजय भट्ट से शुक्रवार को मुलाकात कर मुख्यमंत्री से वार्ता का समय मांगा था। जिस पर शनिवार रात मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत के आवास पर हड़ताली चिकित्सकों को बुलाया गया। चिकित्सकों ने कहा कि उत्तराखंड की भौगोलिक परिस्थिति व यहां के लोगों की आर्थिक स्थिति के लिहाज से एक्ट में संशोधन की सख्त जरूरत है। मुख्यमंत्री ने कहा कि क्लीनिकल एस्टेब्लिशमेंट एक्ट का हर हाल में पालन कराया जाएगा। कमेटी की रिपोर्ट आने के बाद देखा जाएगा कि इसमें संशोधन किया जा सकता है या नहीं।

पूर्व समाचार : हाईकोर्ट से मनमर्जी चाह रहे डॉक्टरों को बहुत जोर का झटका…

-अब मनमानी दवाइयां व जांचें नहीं लिख सकेंगे चिकित्सक
– चिकित्सकों के संगठन आईएमए को झटका, पुर्नविचार याचिका खारिज
नवीन समाचार, नैनीताल, 15 फरवरी 2019। उत्तराखंड उच्च न्यायालय की मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति रमेश रंगनाथन व न्यायमूर्ति मनोज कुमार तिवारी की खंडपीठ ने चिकित्सकों के संगठन आईएमए यानी इंडियन मेडिकल एसोसिएशन को बड़ा झटका देते हुए जेनरिक दवाएं लिखने तथा अनावश्यक टेस्ट नहीं लिखने के खिलाफ दायर पुनर्विचार याचिका खारिज कर दी है। साथ ही साफ कर दिया कि इस मामले में अब न्यायालय किसी भी तरह की अन्य पुनर्विचार याचिका स्वीकार नहीं करेगा। न्यायालय के आदेश के बाद साफ है कि सरकारी चिकित्सकों को मरीज को जैनरिक दवाएं ही लिखनी होंगी। वहीं इसके बाद अब एसोसिएशन के पास सुप्रीम कोर्ट जाने का विकल्प ही बचा है।
उल्लेखनीय है कि पिछले सितंबर 2018 में उच्च न्यायालय ने अधिवक्ता अतुल बंसल की जनहित याचिका पर महत्वपूर्ण आदेश पारित करते हुए कहा था कि सरकारी अस्पताल के चिकित्सक मरीजों को सिर्फ जैनरिक दवाएं ही लिखेंगे, और मरीजों को अनावश्यक जांच के लिए नहीं भेजेंगे। इस आदेश के खिलाफ हिमालयन रिसर्च इंस्टीट्यूट द्वारा पुर्नविचार याचिका दायर की थी, जिसे न्यायालय पूर्व में खारिज कर चुकी है। वहीं हाल ही में आइएमए की ओर से पुनर्विचार याचिका दायर की गई, जिसमें कहा गया था कि मरीज को कौन सी दवा लिखनी है, और कौन सी मेडिकल जांचें करानी हैं, यह चिकित्सक के विवेक पर निर्भर करता है। वहीं मूल जनहित याचिका दायर करने वाले अधिवक्ता अतुल बंसल ने इस पुनर्विचार याचिका का विरोध किया।

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-गर्भवती महिलाओं की संख्या भी लगातार बढ़ रही
-पिछले 16 वर्षों में 26 गुना बढ़ गयी है राज्य में एड्स पीड़ितों की संख्या
नवीन जोशी @ नवीन समाचार, नैनीताल, 18 फरवरी 2019। देवभूमि कहे जाने वाले उत्तराखंड राज्य में असुरक्षित यौन संबंधों के प्रमुख कारण से फैलने वाला जानलेवा एड्स का दानव लगातार सुरसा के मुंह की तरह बढ़ता जा रहा है। वर्ष दर वर्ष राज्य में एड्स पीड़ितों और इनमें भी गर्भवती माताओं के आंकड़े भी लगातार भयावह तरीके से बढ़ते जा रहे हैं।
जनपद के सूचना अधिकार कार्यकर्ता हेमंत गौनिया को सूचना के अधिकार के तहत स्वास्थ्य विभाग से प्राप्त आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2002-03 में राज्य में 292 पुरुषों व 178 महिलाओं यानी कुल 470 लोगों की एचआईवी संक्रमण की जांच हुई थी, जिनमें से 22 पुरुष व 15 महिलाएं यानी कुल 37 लोग एड्स से संक्रमित पाये गये। जबकि इधर 2017-18 में 60,325 पुरुषों एवं 51,318 महिलाओं को मिलाकर कुल एक लाख 11 हजार 649 लोगों की जांचें हुईं और इनमें से 607 पुरुष व 299 महिलाएं मिलाकर 908 महिलाओं के साथ ही 61 गर्भवती महिलाएं एड्स संक्रमित पायी गयी हैं। इस प्रकार यह संख्या 968 हो गयी है। इस प्रकार वर्ष दर वर्ष आने वाले एड्स पीड़ितों की संख्या में पिछले 16 वर्षों में 26 गुने से अधिक की बढ़ोत्तरी हो चुकी है। वहीं पिछले 16 वर्षों के कुल एड्स पीड़ितों की संख्या की बात करें तो इस दौरान 5911 पुरुष व 3139 महिलाओं तथा 536 गर्भवती महिलाओं सहित कुल 9603 लोग एड्स के संक्रमित हुए हैं। संख्या के लगातार बढ़ने पर चिकित्सकों का तर्क है कि लगातार जागरूकता बढ़ना भी संख्या बढ़ने का एक कारण है। पहले लोग जांचें नहीं कराते थे, इसलिए पीड़ितों की संख्या भी नहीं आ पाती थी। अब हर गर्भवती महिला की एचआईवी एड्स की जांच होती है।

इस भयावह तेजी से बढ़ रहे हैं आंकड़े

नैनीताल। राज्य में एड्स पीड़ितों की संख्या किस भयावह तरीके से बढ़ रही है इसका अंदाजा इस बात से लग जाता है कि वर्ष 2002-03 के बाद से वर्ष दर वर्ष 37, 95, 142, 267, 330, 507, 562, 718, 713, 780, 835, 817, 807ख् 773, 777 व 907 होते हुए बढ़ती गयी है। यह भी चिंताजनक तथ्य है कि महिलाओं और खासकर गर्भवती माताओं की संख्या भी लगातार पुरुषों की तरह बढ़ती रही है। वर्ष 2002 से 2004 तक जहां एक भी गर्भवती माता को एड्स नहीं था, वहीं अगले तीन वर्षों तक भी यह संख्या 2, 3 व 2 तक सीमित रही और वर्ष 2007-08 से यह संख्या 14 के साथ दहाई में गयी और 2008-09 में सीधे 43 हो गयी, और इधर लगातार बढ़ते हुए इस वर्ष सर्वाधिक 61 गर्भवती माताओं को एड्स का संक्रमण होने की पुष्टि हुई है।

नवीन समाचार
‘नवीन समाचार’ विश्व प्रसिद्ध पर्यटन नगरी नैनीताल से ‘मन कही’ के रूप में जनवरी 2010 से इंटरननेट-वेब मीडिया पर सक्रिय, उत्तराखंड का सबसे पुराना ऑनलाइन पत्रकारिता में सक्रिय समूह है। यह उत्तराखंड शासन से मान्यता प्राप्त, अलेक्सा रैंकिंग के अनुसार उत्तराखंड के समाचार पोर्टलों में अग्रणी, गूगल सर्च पर उत्तराखंड के सर्वश्रेष्ठ, भरोसेमंद समाचार पोर्टल के रूप में अग्रणी, समाचारों को नवीन दृष्टिकोण से प्रस्तुत करने वाला ऑनलाइन समाचार पोर्टल भी है।
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