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दिखाया होंसला-पेश की मिसाल: बेटों की तरह बहुओं ने दिया सास को कंधा, नहीं थी कोई मजबूरी

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नवीन समाचार, हल्द्वानी, 04 जनवरी 2020। बदलते दौर में महिलाएं मजबूत हो रही हैं। वह हर कार्य में पुरुषों के कंधे से कंधा मिलाने को तैयार भी नजर आ रही हैं। शहर से लगते गौलापार क्षेत्र में एक दुःखद स्थिति के बीच बदलते दौर में महिलाओं की मजबूती की सुखद तस्वीर सामने आई। यहां तारानवाड़ गांव बुजुर्ग बसंती देवी की मौत हुई तो उन्हें पुरुषों के साथ ही घर की महिलाओं ने आगे से कंधा दिया।
प्राप्त जानकारी के अनुसार में 84 वर्षीय बसंती देवी का रविवार को निधन हो गया। उनके पति प्रेम सिंह रौतेला का पूर्व में ही निधन हो चुका है। वर्तमान में वह अपने पोते योगेश, नवीन तथा भतीजे जगमोहन रौतेला के साथ गांव में रहती हैं। उनके निधन पर उनकी अंतिम यात्रा में आगे से उनके भतीजे की पत्नी रीता और योगेश की पत्नी मोनिका ने आगे से कंधा दिया, जबकि रानीबाग स्थित चित्रशिला घाट में जगमोहन, योगेश व नवीन ने उन्हें मुखाग्नि दी। इसकी गांव के साथ ही पूरे क्षेत्र में चर्चा हो रही है कि उन्होंने रुढ़ियों को त्यागने के साथ ही ऐसे दुःख के मौकों पर केवल आम महिलाओं की तरह सुबकने-रोने की जगह हिम्मत दिखाकर अपनी सास की अर्थी को कंधा दिया और सास-बहु के रिश्ते को मां-बेटी या बेटे के रिश्ते में भी बदल दिया, जबकि घर में पुरुषों के होने के कारण उनके समक्ष ऐसी कोई मजबूरी भी नहीं थी।

यह भी पढ़ें : लॉक डाउन खत्म होते हल्द्वानी की 14 लड़कियां ऐसे हुईं ‘अनलॉक’ कि… बदलते दौर की इस खबर को पढ़ आप दंग रह जाएंगे…

नवीन समाचार, हल्द्वानी, 28 नवम्बर 2020। कोरोना और लॉकडाउन के दौर में लोग अपने घरों में कैद रहे, पर लॉक डाउन हटने पर कैद से छूटों की तरह हर कायदे-कानून तोड़ने लगे। कोरोना व लॉक डाउन ने हर किसी पर प्रभाव डाला। इसी कड़ी में हल्द्वानी की कुछ लड़कियों की उद्वेलित करने वाली खबर आ रही है। लॉक डाउन के दौरान बदलते दौर की ये कुछ लड़कियां अपने घर के ‘लॉकडाउन’ को तोड़कर बाहर निकलने का प्लान बना रही थीं। जागरण की खबर के अनुसार अनलॉक की शुरुआत होते ही हल्द्वानी की 14 लड़कियां घरों से अचानक गायब हो गईं। परिजनों ने पुलिस थानों में उनकी गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई। कई महीनों की मशक्कत के बाद जब पुलिस इन लड़कियों तक पहुंची तब पता चला कि ये लड़कियां मौका मिलते ही अपने प्रेमियों संग फरार हो गई थीं। इसके बाद भी उनकी बातें सुनेंगे पुराने दौर के लोग दंग रह जाएंगे।
दरअसल बरामद लड़कियों को पुलिस ने वन स्टॉप सेंटर कठघरिया में भेजा। सखी वन स्टाप सेंटर में कई दिन तक काउंसलिंग चली। जिसके बाद कुछ लड़कियां घर लौटने को तैयार हो गईं, तो वहीं कुछ ने घर जाने से साफ इनकार कर दिया। बरामद लड़कियों की उम्र 14 से 30 साल है। पुलिस ने बताया कि एक लड़की सिर्फ 14 साल की थी तो वहीं कुछ लड़कियां 30 साल की भी थीं। कई लड़कियां घर जाने को तैयार ही नहीं हुईं। हल्द्वानी की ही एक 18 साल की लड़की ने काउंसलिंग के दौरान कहा कि प्रेमी संग जाने में बुराई क्या है। हम अपनी मर्जी से गए थे। घरवालों ने जबरदस्ती गुमशुदगी दर्ज करा दी। सखी वन स्टाप सेंटर की प्रबंधक और काउंसलर सरोजनी जोशी ने बताया कि बरामद लड़कियों का सबसे पहले कोरोना टेस्ट कराया गया। कुछ लड़कियों को घर भेजने के लिए उनकी कई बार काउंसलिंग की गई। परिजनों को भी खूब समझाया गया, तब कहीं जाकर बरामद लड़कियों को उनके घर भेजा जा सका। 

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