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कांग्रेस अध्यक्ष का बयान हुआ वायरल, कांग्रेस के लोगों ने अपनी गर्लफ्रेंडें भाजपा में छोड़ रखी हैं…

Big breaking :-कांग्रेस अध्यक्ष करन माहरा का बड़ा बयान, कहा कांग्रेस में  बीजेपी के सिलिपिंग सेल, कुछ दिखते कांग्रेस में है लेकिन अपनी गर्ल ...नवीन समाचार, देहरादून, 25 नवंबर 2022। कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष उत्तराखंड कांग्रेस करन माहरा का एक बयान सुर्खियां बन गया है। उन्होंने बिना किसी का नाम लिए कहा कि कुछ लोग कांग्रेस में दिखते हैं, लेकिन उन्होंने अपनी गर्लफ्रैंड को भाजपा ज्वाइन करा रखी है। उन्होंने कहा कि भाजपा ने कांग्रेस में कई एजेंट छोड़ रखे हैं, जो दिनभर कांग्रेस दफ्तर में बैठते हैं, लेकिन शाम को भाजपा नेताओं से उनके घर पर मिलते हैं। यह भी पढ़ें : नैनीताल में बिड़ला रोड पर घंटों आवागमन रहा ठप… देखें वीडियो:

कांग्रेस भवन में आयोजित एक कार्यक्रम में प्रदेश अध्यक्ष करन माहरा ने यह बयान देकर सभी को चौंका दिया। उनका यह बयान सोशल मीडिया पर भी खूब वायरल होने लगा है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष ने कार्यक्रम में कहा कि भाजपा ने कांग्रेस को कमजोर करने के लिए कुछ लोगों को एजेंट बनाकर भेजा हुआ है। बीजेपी के कई ऐसे लोग कांग्रेस में घुस आए हैं, इन्हें पहचानने और इनसे सतर्क रहने की जरूरत है। उन्होंने कार्यकर्ताओं से आह्वान किया कि सोची समझी साजिश के तहत यह लोग आपना चरित्रहनन भी कर सकते हैं। यह भी पढ़ें : रात्रि में नाले में गिरा व्यक्ति, पता न चलता तो…

उन्होंने कहा कि पिछले दिनों भाजपा के पूर्व केंद्रीय अध्यक्ष अमित साह ने विधायकों की बैठक ली। इस बैठक में सत्ता पाने और कांग्रेस को कमजोर करने के तरीकों पर विचार किया गया। बकौल मेहरा, बैठक में उन्होंने साफ कहा कि कांग्रेसियों का मूर्ति भंजन करो। मतलब चरित्र पर कीचड़ उछालो और व्यक्तिगत छवि खराब करो। कांग्रेस में मिले हुए भाजपा के लोग यही काम कर रहे हैं। ऐसे लोगों से कांग्रेस कार्यकर्ताओं को सावधान रहने की जरूरत है। (डॉ. नवीन जोशी) आज के अन्य ताजा ‘नवीन समाचार’ पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें।

यह भी पढ़ें : एक कदम और बढ़ी विधायक व पूर्व पालिका वरिष्ठ उपाध्यक्ष की बहस, फिर आया जवाब…

पूर्व वरिष्ठ उपाध्यक्ष डीएन भट्टनवीन समाचार, नैनीताल, 13 नवंबर 2022। स्थानीय विधायक सरिता आर्य द्वारा गत 9 नवंबर को राज्य स्थापना दिवस के मौके पर दिये गए बयान पर आरोप-प्रत्यारोप रुकने का नाम नहीं ले रहे हैं। कार्यक्रम में श्रीमती आर्य के कांग्रेस में रहते सहयोगी रहे नगर पालिका के पूर्व वरिष्ठ उपाध्यक्ष डीएन भट्ट ने कहा था कि नैनीताल के आधार बलियानाला में 2003 से 58 करोड़ रुपए के कार्य हुए, लेकिन इसका 1 फीसद यानी 58 लाख के कार्य भी धरातल पर मौजूद नहीं हैं। इस पर श्रीमती आर्य ने अपने संबोधन में कहा कि स्थानीय लोग भी इस कार्य से उपकृत हुए हैं। उन्हें दर्द तब क्यों नहीं हुआ, जब वहां यह धनराशि बर्बाद हो रही थी। यह भी पढ़ें : आज व कल उत्तराखंड के एक दरोगा व दो पुलिस कर्मी भुगतेंगे अनूठी सजा, श्मशान घाटों पर शवदाह में करेंगे सहयोग, जानें क्यों

इस पर पलटवार करते हुए श्री भट्ट ने प्रेस को बयान जारी कर श्रीमती आर्य को बलियानाला के कार्यों से लाभ कमाने वाले लोगों के नाम सार्वजनिक करने की चुनौती दी, एवं इस संबंध में सिचाई विभाग से सूचना के अधिकार के तहत बलियानाला के कार्य करने वाले लोगों की सूची भी मांग ली। इस पर श्रीमती आर्य ने रविवार को फिर जवाब देते हुए कहा कि लोग अंतरात्मा की आवाज पर कहें कि बलियानाला के कार्यों से (आर्थिक तौर पर) लाभान्वित हुए या नहीं। यह भी कहा कि कार्य ठीक न होने की जिम्मेदारी से स्थानीय जनप्रतिनिधि बच नहीं सकते। यह भी पढ़ें : पत्नी व उसके प्रेमी ने किया सोते हुए पति का गला दबाने का प्रयास, फिर….

अब सोमवार को इस पर पुनः श्री भट्ट ने प्रेस को बयान जारी किया है, और कहा है कि लोकतंत्र में शिकायतें भी जनप्रतिनिधि से की जाती हैं और सवाल भी उन्हीं से पूछे जाते हैं। जिन जन-प्रतिनिधियों के पास उन सवालों का तर्कसंगत जवाब नहीं होते, वह उन सवालों से बचने के लिए अर्थहीन जवाब व तर्क देते हैं। परन्तु विधायक ने उनके सवाल का जबाव न देकर स्थानीय जनता को कठघरे में खड़ा कर उन पर ही भ्रष्टाचार के आरोप मढ़ दिए। अब जब विधायक के कथनानुसार उनके द्वारा लगाए गए आरोपों का प्रमाण मांगा जा रहा है तो वह अंतरात्मा की आवाज पर आ गई हैं। जब उन्होंने स्थानीय जनता पर मिथ्या एवं मनगढंत आरोप लगाए थे, तब उनकी अंतरात्मा कहाँ थी ? यह भी पढ़ें : नैनीताल से उच्च न्यायालय को स्थानांतरित किए जाने पर आया विधायक का बयान, बलियानाले के मुद्दे पर भी फिर बोलीं…

उन्होंने कहा है, वह नैनीताल नगर की ईष्ट देवी माँ नैना देवी को साक्षी रखकर स्पष्ट करते हैं कि बलिया नाला प्रोजेक्ट में अभी तक जितने भी ठेकेदारों-फर्मों ने निर्माण कार्यों का सम्पादन किया है, वह लोग सुपरवाइजरों से लेकर मिस्त्री, लेबर, टैक्निकल स्टाफ, सामान ढोने की गाड़ियाँ तक अपने साथ लाए। बलिया नाले में स्थानीय लोगों की ठेकेदारी की बात तो बहुत दूर, स्थानीय लोगों को लेबर का काम तक नहीं मिला। यह भी पढ़ें : 17 वर्षीय नाबालिग की एंबुलेंस में अस्पताल लाते हुए संदिग्ध परिस्थितियों में मौत…

उन्होंने मीडिया से भी अपील की है कि वह बलिया नाले में जीआईसी के मैदान से लेकर बीरभट्टी, छीणा गाँव तक के क्षेत्र में हुए निर्माण कार्यों का भ्रमण कर स्थानीय नागरिकों से पता करें कि उन्होंने बलिया नाले में ठेकेदारी तो बहुत दूर की बात, किसी स्थानीय निवासी को 1 रुपए की मजदूरी का काम भी मिला था। इससे स्पष्ट हो जाएगा कि नैनीताल नगर के अस्तित्व पर प्रश्न चिन्ह लगाते बलियानाले जैसे गंभीर मुद्दे पर कौन झूठ बोलकर जनता को गुमराह कर रहा है ? यह भी पढ़ें : अब दूरस्थ गांव में भी स्थापित हुआ खुला रंगमंच, छोटा कैलाश धाम में ब्लॉक प्रमुख ने किया लोकार्पण

विधायक सरिता ने यह कहा था : इस मामले में विधायक सरिता आर्य ने दोहराया कि बलियानाला ट्रीटमेंट के लिए हर सरकार ने बजट दिया था लेकिन ठेकेदारों ने गुणवत्तापूर्ण काम नहीं किया। उन्होंने किसी ठेकेदार का नाम नहीं लिया लेकिन कहा कि उन ठेकेदारों को जरूर अंतरात्मा में झांकना चाहिए, जो ट्रीटमेंट में खराब काम कर बेवज़ह उन्हें निशाना बना रहे हैं। उनके लिए कृष्णापुर की जनता देवतुल्य है, बलियानाला ट्रीटमेंट को लेकर मुख्यमंत्री व वह खुद गंभीर हैं। ट्रीटमेंट कार्य होगा। जो लोग अब सवाल उठा रहे हैं, जब ट्रीटमेंट में खराब काम हो रहा था, तब मॉनिटरिंग के बजाय निजी हित को देखते हुए चुप्पी साधे रहे। विधायक ने कहा कि भविष्य में ट्रीटमेंट कार्य की सख्त मॉनिटरिंग की जाएगी। यह सुनिश्चित किया जाएगा कि काम गुणवत्तापूर्ण हो और समस्या का स्थाई निदान हो। (डॉ.नवीन जोशी) आज के अन्य ताजा ‘नवीन समाचार’ पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें।

यह भी पढ़ें : अब उत्तराखंड में भाजपा नेता ने दोहराया राहुल गांधी का ‘लड़कियां छेड़ने मंदिर जाने’ वाला बयान, तो मच गया हंगामा

Dushyant Kumar Gautam controversial statement congressmen go to tease girls  in temples - मंदिरों में लड़कियां छेड़ने जाते हैं कांग्रेसी...बीजेपी नेता  दुष्यंत कुमार गौतम के ...नवीन समाचार, देहरादून, 19 अक्तूबर 2022। 20 अगस्त 2014 को केंद्र की सत्ता में रहते कांग्रेस के शीर्ष नेता राहुल गांधी ने अपने पिता व पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की 70वीं जयंती पर महिला कांग्रेस द्वारा आयोजित ‘संकल्प सम्मेलन’ में कथित तौर पर कहा था, ‘जो लोग मंदिर जाते हैं, वही महिलाओं को छेड़ते हैं…’ यह बयान तब काफी सुर्खियों में रहा था, और अब भी गाहे-बगाहे उभर आता है।‘नवीन समाचार’ के माध्यम से दीपावली पर अपने प्रियजनों को शुभकामना संदेश दें मात्र 500 रुपए में… संपर्क करें 8077566792, 9412037779 पर, अपना संदेश भेजें saharanavinjoshi@gmail.com पर… यह भी पढ़ें : सोशल मीडिया पर आए एक वीडियो के बाद तीन पुलिस कर्मियों पर डीआईजी ने की प्रशासनिक कार्रवाई…

Imageअब कुछ इसी तर्ज पर भाजपा के राष्ट्रीय महामंत्री और उत्तराखंड के प्रभारी दुष्यंत कुमार गौतम ने कांग्रेसियों को लेकर विवादित बयान दिया है। देहरादून स्थित पार्टी मुख्यालय में मीडिया से बातचीत में उन्होंने कहा, ‘कांग्रेसी मंदिरों में लड़कियां छेड़ने जाते हैं।’ उन्होंने कहा कि जिस प्रकार का प्रयोग कांग्रेसी चाहते हैं, उससे हमें कोई दुख नहीं है, पर दुख उनकी विचारधारा से है। यह भी पढ़ें : आंचल ने अपने इतिहास में पहली बार, डेढ़ माह में दूसरी बार बढ़ा दिए दुग्ध उत्पादों के दाम…

कांग्रेस सनातन धर्म का विरोध करती है व उसके कार्यकर्ता मंदिरों में लड़की छेड़ने जाते हैं। बकौल गौतम-कांग्रेस तो यहां तक कहती है कि भगवान राम थे ही नहीं। अब वे उसी परिपाटी का अध्यक्ष ढूंढने की कोशिश कर रहे हैं, जो कहते हैं कि सनातन धर्म आ जाएगा तो देश के अंदर हाहाकार मच जाएगा। हिन्दुत्व बढ़ जाएगा। यह भी पढ़ें : कलयुगी पिता ने अपनी ही 12 व 14 साल की नाबालिग बेटियों से किया दुष्कर्म का प्रयास, विरोध करने पर पत्नी को पीटा…

इसके बाद से उत्तराखंड के राजनीतिक गलियारों में हलचल मच गई है। कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष करन माहरा ने इस बयान के बाद भाजपा पर पलटवार करते हुए कहा कि ऐसा कहने से पहले भाजपा को अपने अंदर झांकना चाहिए। उन्होंने गौतम के बयान की निंदा करते हुए इसे भाजपा की सोच करार दिया। बताया जा रहा है कि कांग्रेस पार्टी इस बयान के खिलाफ अभी थोड़ी देर में पत्रकार वार्ता भी कर सकती है। बहरहाल, उन्हें याद रखना होगा कि उनके शीर्ष नेता ने भी ऐसा ही बयान दिया था। (डॉ. नवीन जोशी) आज के अन्य ताजा ‘नवीन समाचार’ पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें।

यह भी पढ़ें : देवी-देवताओं के प्रति अपने सड़कछाप बोलों से फिर चर्चा में पूर्व मंत्री…

नवीन समाचार, हल्द्वानी, 11 अक्तूबर 2022। अपने ऊलजुलूल, खासकर महिलाओं के प्रति अभद्र बयानों से कई बार खुद की खिल्ली उड़वा चुके और अपनी पार्टी की भी किरकिरी करा चुके भाजपा के बुजुर्ग विधायक, पूर्व मंत्री व पूर्व प्रदेश अध्यक्ष बंशीधर भगत एक बार फिर अपने बयान को लेकर निशाने पर हैं। इस बार वह देवी-देवताओं का नाम लेकर कुछ ऐसा कह गए जो शायद सड़कछाप-अनपढ़ लोग भी न कहते हों। देखें पूर्व मंत्री ने क्या कहा:

मंगलवार को हल्द्वानी में आयोजित अंतरराष्ट्रीय बालिका दिवस के मौके पर जहां प्रदेश की महिला एवं बाल विकास मंत्री रेखा आर्य मुख्य अतिथि के रूप में मौजूद थीं, भगत ने अपने संबोधन में जो कहा, उससे खास तौर पर बालिकाओं व महिलाओं के लिए आयोजित इस कार्यक्रम में हजारों की संख्या में महिलाएं और बालिकाएं हक्की-बक्की रह गईं, जबकि कई लोग पूर्व मंत्री की वाकशैली पर ठठ्ठा मारकर हंसने लगे।

इस दौरान बंशीधर भगत बोले, बालिकाओं का हमेशा सम्मान होता है लेकिन बालकों को भी सम्मान मिलना चाहिए। उन्होंने कहा, जब विद्या मांगने की बारी आती है तो “सरस्वती को पटाओ” शक्ति मांगनी हो तो दुर्गा को पटाओ” धन चाहिए तो लक्ष्मी को पटाओ। वही यहीं नहीं रुके। बोले, दूसरी ओर पुरुष भगवान शिव हैं, जो हिमालय पर जाकर पहाड़ पर ठंड में पड़े हुए हैं ऊपर से उनके सर पर सांप बैठा हुआ है, और ऊपर से पानी पड़ रहा है। वहीं, भगवान विष्णु समुद्र की गहराई में छुपे हुए हैं। उन बेचारों की की आपस में बात भी नहीं हो पाती है।

उल्लेखनीय है कि बंशीधर पूर्व में तत्कालीन नेता प्रतिपक्ष, कांग्रेस पार्टी की वरिष्ठ नेत्री इंदिरा हृदयेश को लेकर भी एक बेहद आपत्तिजनक बात कह चुके हैं। इसके अलावा प्रधानमंत्री को लेकर दिया गया उनका एक बयान भी चर्चा में रहा, जबकि चुनाव के दौरान एक ऑडियो को लेकर भी वह निशाने पर रहे। यह अलग बात है कि उनकी उम्र के देखते हुए ओर उनके लगातार आते ऐसे बोलों से जैसे सभी लोग अभ्यस्त भी हो चुके हैं, इसलिए उन्हें व उनके ऐसे बोलों को अब तवज्जो मिलनी भी बंद हो चुकी है। (डॉ.नवीन जोशी) आज के अन्य ताजा ‘नवीन समाचार’ पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें।

यह भी पढ़ें : बेटा-बेटी के भाजपा में जाने पर विधायक ममता राकेश बोलीं, बच्चे बड़े हो रहे हैं….

Big breaking :-बेटे और बेटी की BJP में एंट्री पर बोली ममता राकेश, तो  कांग्रेस प्रवक्ता ने लगा डाले गंभीर आरोप - News Heightनवीन समाचार, हरिद्वार, 3 अक्टूबर 2022। रविवार को गांधी जयंती के अवसर पर भगवानपुर विधानसभा की कांग्रेस की विधायक ममता राकेश के पुत्र अभिषेक राकेश और उनकी पुत्री आयुषी राकेश ने भी भाजपा का दामन थाम लिया। इससे भगवानपुर विधानसभा के लोग अचरज में हैं।

दरअसल, त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव सम्पन्न होने के बाद नेता अब पद पाने के लिए दूसरी पार्टियों में सेंध लगा रहे हैं। इसी कड़ी में भगवानपुर विधायक ममता राकेश के बेटे और बेटी ने भाजपा का दामन थाम लिया। इस पर अब ममता राकेश का कहना है कि बच्चे बड़े हो रहे हैं। अब यह उनका स्वयं का निर्णय है। रायशुमारी के बाद उन्होंने खुद फैसला लिया है।

उन्होंने कहा-बेटी आयुषी निर्विरोध क्षेत्र पंचायत सदस्य चुनी गई हैं। जबकि बेटे अभिषेक राकेश को क्षेत्र के कुछ वरिष्ठ कांग्रेस के नेताओं ने चुनाव हराने का काम किया है, इसलिए उसने ये फैसला लिया है। अलबत्ता उन्होंने खुद के लिए कहा कि वह कांग्रेस की सच्ची व पक्की सिपाही हैं और रहेंगी। उन्होंने कहा, कांग्रेस ने मुझे बहुत कुछ दिया है। कई नेताओं के परिवार के लोग अलग विचार धाराओं से जुड़े हैं। अब उनके परिवार में भी हो गया है।

उल्लेखनीय है कि ममता राकेश के पति बहुजन समाज पार्टी के नेता थे। वह भी पूर्व में बसपा में रहीं, जबकि उनके देवर पहले भाजपा और अब कांग्रेस में हैं। बीते चुनाव में उन्होंने अपने ही देवर को हराकर जीत दर्ज की थी, इस प्रकार ममता राकेश के घर में पहले से ही लोग एक से अधिक दलों में रहे हैं। (डॉ.नवीन जोशी) आज के अन्य ताजा ‘नवीन समाचार’ पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें।

यह भी पढ़ें : अंकिता के परिवार को 25 लाख रुपए देने पर प्रसिद्ध कवि कुमार विश्वास उठाया सवाल तो लग गई आरोप-प्रत्यारोपों की झड़ी

Imageडॉ. नवीन जोशी @ नवीन समाचार, नैनीताल, 29 सितंबर 2022। अपनी तरह के अलग, सुप्रसिद्ध कवि कुमार विश्वास ने उत्तराखंड के बहुचर्चित अंकिता भंडारी हत्याकांड में सरकार द्वारा अंकिता के 25 लाख रुपए देने के प्रश्न पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा, ‘पर क्यूँ ? सत्ता के अहंकार में डूबे उस नीच दुर्योधन के कुकर्मों का मुआवजा टैक्स-पेयर के पैसे से क्यूँ दिया जाएगा ? उस नराधम के रिसोर्ट और सम्पत्तियों की नीलामी करके इस बिटिया के परिजनों को सारा धन दिया जाए। अनाचार करें पॉलिटिकल परिवार के संरक्षण में पले बेलगाम लड़के और भरे जनता ?’

कुमार विश्वास ने इस बयान को इस रूप में देखा जा रहा है कि दुष्कर्म के मामलों में सरकार की ओर से राज्य की जनता का पैंसा नहीं, बल्कि दुष्कर्मी की संपत्ति की नीलामी कर उससे पीड़िता के परिजनों को मुआवजा मिलना चाहिए। श्री विश्वास द्वारा उठाए गए इस सवाल पर आ रही टिप्पणियों में भी कुछ ही लोग हैं जो कह रहे हैं कि सरकार की ओर से ऐसे मामलों में मुआवजा देना ठीक है। जैसे एक व्यक्ति ने कहा है, ‘जनता के पैसे से सहायता देना बिल्कुल उचित है, ऐसा होता रहा है और यही सरकारी खजाने की सार्थकता है।’ वहीं अन्य लोग कह रहे हैं, ‘लेकिन अगर 25 लाख रुपए जनता दे रही है तो कम से कम 250 लाख उस दरिंदे की संपत्तियाँ नीलाम कर के अंकिता के परिजनों को मिले।’

अन्य ने लिखा है, ‘और सरकार ये सुनिश्चित करे कि उस नीच के नाम कोई संपत्ति बची न रह जाए… इस सुझाव का स्वागत है इसमें ये भी जोड़ा जाए कि ऐसे नीच बेलगाम लडको को फांसी से कम सजा न हो…’ अन्य ने लिखा है, ‘महोदय एकदम सही कहा आपने, और केंद्र को ऐसा कोई प्रावधान बनाना चाहिए। ताकि बड़े बाप अपनी औलादों को इज्जत और आदर (संस्कार) सिखाने को मजबूर हो जाए… सर्वथा उचित मत है। यह कोई प्राकृतिक या आकस्मिक दुर्घटना नहीं थी इसके लिए मुआवजा सरकारी खजाने से दिया जाए। इसका मुआवजा उस संपत्ति को बेच कर वसूल किया जाना चाहिए जहां अंकिता कार्य कर रही थी। इस परिवार की सारी संपति का मूल्यांकन करना चाहिए… अपराधी के हिस्से की सारी संपति बेचकर देनी चाहिये।

यही न्यायोचित होगा कि अपराधियों की सम्पतियो को बेचकर, बैंक बैलेंस को सील कर, वहीं से इस तरह के अनुदान की रीत चलानी चाहिए.. यही उचित है। और ये तोड-फोड़ भी गलत है, जब्त करके सरकारी संपत्ति घोषित कर दो और नीलाम कर दो…. भैया, यह बात एकदम सही कही है आपने। हम सभी टैक्स पेयर को भी जागरूक होना पड़ेगा कि हमारी मेहनत का पैसा सही तरह से इस्तेमाल हो रहा है या नहीं…। श्री विश्वास की पोस्ट पर ऐसी टिप्पणियों की भरमार है। आज के अन्य ताजा ‘नवीन समाचार’ पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें।

यह भी पढ़ें : बेटे की लंबी-चौड़ी पोस्ट पर हरीश रावत बोल पाए केवल 10 शब्द, जानें क्या….?

डॉ. नवीन जोशी @ नवीन समाचार, नैनीताल, 8 मई 2022। अपने पुत्र आनंद रावत की लंबी फेसबुक पोस्ट पर आखिर हरीश रावत ने भी टिप्पणी की है, किंतु दूसरों के लिए लंबी पोस्ट लिखने में माहिर हरीश रावत ने अपने पुत्र को केवल 10 शब्दों में जवाब दिया है। लिखा है : #Wonderful_thinking तुम्हारा पिता भी वक्त का मारा हुआ है। अलबत्ता, अपनी फेसबुक की कवर फोटो पर उन्होंने ऐसी फोटो लगाई है, जिस पर ईष्ट देवताओं के साथ ‘कुलदीपाय नमः’ भी लिखा है।

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यह भी पढ़ें : हरीश रावत पर अब उनके बेटे आनंद रावत ने ही हमला बोला, जानें क्या कहा….

डॉ. नवीन जोशी @ नवीन समाचार, नैनीताल, 7 मई 2022। उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत के साथ इन दिनों जो हो रहा है, उसकी उन्होंने कभी शायद ही कल्पना की हो। आज कल न जाने कौन, कब और कहां से उनको भला-बुरा सुनाके चला जा रहा है। लेकिन परायों के बाद शायद उनके किसी अपने, बल्कि अपने बेटे आनंद रावत ने उन पर हमला बोला है। उनकी स्किल डेवलपमेंट पर कार्य न करने और केवल सोशल मीडिया पर ही बयानबाजी करने और अपने बेटे को भी इस मामले में ‘येड़ा’ यानी पागल-मूर्ख समझने की बात कही है। देखें आनंद रावत ने क्या कहा है:

skill+communication सफलता का मूलमंत्र है। प्रदेश के आईटीआई, पॉलीटेकनिक व सॉफ़्टवेयर इंजीनीयर लड़के और लड़कियाँ, उत्तराखंड के आधूनिक शिल्पकार है, और इनकी दक्षता पूरे विश्व में बुलंदी के झण्डे गाड़ सकती है ।
सवाल है कि “ये कैसे सम्भव हो“ ?
हमारे नेताओं ने प्रदेश में 72 पॉलीटेकनिक व 48 आईटीआई तो खोल दिए, जो पूरे भारत में सबसे अधिक किसी राज्य में है, और प्रति वर्ष 20 हज़ार स्किल्ड (skilled) लड़के और लड़कियाँ बाज़ार में नौकरी के लिए तयार हो भी रहे है। सिडकुल (sidcul) में अनुभवी पॉलीटेकनिक पास युवा को प्रतिमाह रुपे 12974 (बारह हज़ार नौ सौ चौहतर मात्र) और अनुभवी आईटीआई पास युवा को प्रतिमाह रुपे 10340 (दस हज़ार तीन सौ चालीस मात्र) मिलते है।
जबकि केरल में पॉलीटेकनिक की संख्या 42 और आईटीआई 35 के आसपास है और वहाँ की न्यूनतम आय दक्ष कारीगर के लिए 22 हज़ार है । क्योंकि वहाँ का युवा विदेश में नौकरी करने का इच्छुक अधिक होता है, इसीलिए वहाँ माँग अधिक है।
केरल की सरकार skill + communication पर ज़ोर देती है और अपने अनुभवी कारीगरी में दक्ष युवाओं को अन्तरराष्ट्रीय बाज़ार में भी रोज़गार उपलब्ध कराती है । जैसे उत्तराखंड सरकार ने उपनल एजेन्सी सरकारी विभाग में नौकरी देने के लिए बनायी है, ऐसे केरल सरकार ने नोरका रूट्स एजेन्सी बनायी है, जो विदेशों में स्किल्ड (skilled ) युवाओं को रोज़गार दिलाती है ।
कनाडा में स्किल्ड युवा मतलब पॉलीटेकनिक व आईटीआई पास युवा साल के 46800 डॉलर कमाता है जो प्रतिवर्ष बत्तीस लाख के आस पास होता है और इसी अनुपात में जापान, ताइवान व खाड़ी देशों में भी कमाता है ।
अब फिर सवाल वही है कि “करेगा कौन“ आपके नेता तो अपने समर्थकों को उनके जन्मदिन पर बधाई या किसी परिचित के शोक संदेश वाले पोस्ट करने में व्यस्त है, और आप लोग उनके क्रियाकलाप से ख़ुश हो ?
चाहे हरीश रावत जी हो या किशोर उपाध्याय जी या फिर युवा नेता विनोद कंडारी, सुमित हृदेश, रितु खण्डूरी सबके Facebook पर आपको इसी तरह की पोस्ट मिलेगी, लेकिन राज्य चिन्तन पर कुछ नहीं मिलेगा ?
मेरे पिताजी मेरे चिन्तन व विचारों से परेशान रहते है, शायद उन्होंने हमेशा मेरी बातें एक नेता की दृष्टि से सुनी और मुझे येड़ा समझा ।

ऐसी बातें अब तक शायद ही किसी राजनेता के बेटे ने अपने पिता के लिए इस तरह सार्वजनिक तौर पर कही हो। अब आगे देखने वाली बात होगी कि आनंद रावत ने जो बात कही है वह आगे कहां तक जाती है। आज के अन्य ताजा ‘नवीन समाचार’ पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें।

यह भी पढ़ें : एलआईसी में अपने स्वामित्व के हिस्से के शेयरों को बाजार में बेचने का मतलब भारत की आर्थिक सम्प्रभुता को खतरे में डालना : यशपाल आर्य

उत्तराखंड में विवादों के बीच यशपाल आर्य ने संभाला पद, आज होगी कांग्रेस  विधायक की बैठक; करण माहरा के शपथग्रहण में नहीं पहुंचे थे नाराज MLA | TV9 ...डॉ. नवीन जोशी @ नवीन समाचार, नैनीताल, 6 मई 2022। प्रदेश के नेता प्रतिपक्ष एवं भाजपा सरकार में भी केंद्रीय मंत्री रहे यशपाल आर्य ने एलआईसी यानी जीवन बीमा निगम के शेयरों की बिक्री को लेकर केंद्र सरकार की आलोचना की है। आर्य ने कहा, जिस एलआईसी को ‘सभी पूंजियों की जननी’ कहा जाता था, उसका निजीकरण, मोदी सरकार द्वारा चलाये जा रहे निजीकरण अभियान के सबसे बुरे निर्णयों में से एक होने जा रहा है।

उन्होंने कहा कि एलआईसी 1956 से विकास के झंडे को देश के दूरदराज के तबकों से लेकर सम्पूर्ण ग्रामीण भारत के कोने-कोने तक पहुंचाने वाली संस्था रही है। इसके पीछे चलकर ही बाकी अनेक वित्तीय योजनाएं और संस्थाएं दूरस्थ इलाकों तक पहुंची। स्वतंत्रता के पश्चात आत्मनिर्भर भारत के जिस स्वप्न को देखा गया उसे अमली जामा पहनाने में निगम के लाखों कर्मचारियों, अधिकारियों और एजेंटों ने अपना खून पसीना बहाया, उस विश्वास को तोड़कर आज एलआईसी को पॉलिसी धारकों के विश्वास से बदलकर शेयर होल्डर्स के लिए मुनाफे अर्जित करने वाली कंपनी में बदला जा रहा है। उन्होंने कहा कि एलआईसी के निजीकरण का सरकार की ओर से पॉलिसी धारकों को दी जाने वाली सॉवरेन गारंटी पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा।

कहा कि भारतीय जीवन बीमा निगम में आम लोगों के अटूट विश्वास के पीछे यह सॉवरेन गारंटी एक महत्वपूर्ण कारक थी। भारत के अधिकांश हिस्सों में, गरीबों को शायद ही कोई सामाजिक सुरक्षा प्राप्त है। एलआईसी उन्हें कम प्रीमियम पर कई सामाजिक सुरक्षा बीमा कार्यक्रम, आकर्षक सावधि जमा योजनाएं और स्वयं सहायता समूहों के लिए विशेष योजनाएं प्रदान करती रही है।

यह तर्क और भी अधिक हास्यास्पद है कि एलआईसी का आईपीओ लाने से भारतीय जनता को लाभ होगा, क्योंकि शेयर बाजार में खुदरा निवेशक आबादी का लगभग 3 फीसद ही हैं। वास्तव में एलआईसी में अपने स्वामित्व के हिस्से के शेयरों को बाजार में बेचने का मतलब केवल और केवल अमीर, कॉर्पोरेट और विदेशी पूंजी को सस्ती कीमत पर एकत्रित सार्वजनिक संपत्ति-धन को उपलब्ध कराना ही है। आज के अन्य ताजा ‘नवीन समाचार’ पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें।

यह भी पढ़ें : प्रीतम ने इस तरह दी सरकार व पार्टी को चुनौती कि जांच के घेरे में खुद कांग्रेसी… विधायकी से इस्तीफा देने की बात भी कही, बशर्ते…

congress leader pritam singh: गुटबाजी कहां नहीं है, पर हम यह चुनाव कांग्रेस  की नीतियों पर लड़ेंगे और जीतेंगे: प्रीतम सिंह congress leader pritam singh  interview on uttarakhand ...नवीन समाचार, देहरादून, 23 अप्रैल 2022। पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष व नेता प्रतिपक्ष रहे कांग्रेस के वरिष्ठ नेता प्रीतम सिंह ने शनिवार को उनके कांग्रेस छोड़कर भाजपा में जाने की चर्चाओं को पूरी तरह झूठ करार दिया, लेकिन सरकार और पार्टी को इस तरह चुनौती दी कि जांच के घेरे में खुद कांग्रेसी ही नजर आ रहे हैं।

हरिद्वार में हनुमान जयंती पर हुए विवाद के मामले में विधायकों के साथ डीजीपी से मिलने पहुंचे प्रीतम ने शनिवार को डीजीपी कार्यालय में मीडिया से बातचीत के दौरान प्रीतम ने कहा कि राष्ट्रीय महासचिव केसी वेणुगोपाल और प्रदेश प्रभारी देवेंद्र यादव ने कांग्रेस की हार की वजह गुटबाजी बताई है। अब इसकी जांच हो जानी चाहिए कि गुटबाज आखिर है कौन? कहा कि हाईकमान को गुटबाजी की जांच करते हुए देखना चाहिए कि कौन व्यक्ति सोशल मीडिया के जरिए पार्टी को कमजोर करने की कोशिश कर रहा है?

इसके अलावा प्रीतम ने भ्रष्टाचार के मामलों में जांच पर सरकार को खुली चुनौती दी। उन्होंने कहा कि यदि सरकार को लगता है कि भ्रष्टाचार कांग्रेस के कार्यकाल में हुआ है तो जांच कराए। किसने रोका है? उन्होने कहा, भाजपा के एक पूर्व सीएम कहते हैं कि एनएच घोटाले में सफेदपोशों का हाथ है। जब इतना पता है तो नाम बताइये और कार्रवाई भी तो करिए।

साथ ही उन्होंने कहा, सहकारी बैंक घपले को कांग्रेस के कार्यकाल का बताने की कोशिश की जा रही है। यदि ऐसा है तो किसी ने भी कार्रवाई से रोका नहीं है। यदि सरकार वास्तव में ईमानदार है तो निष्पक्ष तरीके से जांच कराए। प्रीतम ने कहा कि आने वाले बजट सत्र के दौरान सरकार से हर सवाल पूछा जाएगा।

खुद पर कांग्रेस में गुटबाजी करने के आरोपों पर प्रीतम ने कहा, उनके पिता आठ बार चकराता मसूरी क्षेत्र से विधायक रहे हैं। छह बार से वह भी विधायक हैं। इतने वर्षों से उनका परिवार कांग्रेस के सिपाही की तरह काम कर रहा है। भला पार्टी छोड़ने की कैसे सोच सकते हैं ? यह एक सुनियोजित साजिश के तहत प्रचारित किया जा रहा है। उन्होने यह भी कहा कि यदि वह जरा भी गुटबाजी के दोषी पाये जाते हैं तो तत्काल विधायकी से इस्तीफा दे देंगे। प्रीतम के इस तरह के बयानों के भी राजनीतिक हलकों में अपनी तरह से निहितार्थ निकाले जा सकते हैं। (डॉ.नवीन जोशी) आज के अन्य ताजा ‘नवीन समाचार’ पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें।

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लोहाघाट के पूर्व विधायक पूरन सिंह फर्त्याल।

डॉ. नवीन जोशी @ नवीन समाचार, नैनीताल, 21 अप्रैल 2022। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की चंपावत विधानसभा सीट से ऐतिहासिक जीत होगी। कांग्रेस सहित अन्य दलों की जमानत जब्त होगी। उपचुनाव में मुख्यमंत्री के उतरने से भाजपा कार्यकर्ताओं में जोश और जनता में भारी उत्साह है। मुख्यमंत्री के आने से पूरे चंपावत जनपद के समग्र विकास के द्वार खुलेंगे।

यह कहना है लोहाघाट के पूर्व विधायक वरिष्ठ भाजपा नेता पूरन सिंह फर्त्याल का। गुरुवार को नैनीताल क्लब में हुई बातचीत में उन्होंने चंपावत सीट मुख्यमंत्री के लिए खाली करने के लिए विधायक कैलाश गहतोड़ी का आभार जताया। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री के खटीमा सीट से पराजय के बाद जनता में पछतावा है। जनता चाहती है कि मुख्यमंत्री बगल की सीट से विधायक बनें। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री धामी के नेतृत्व में प्रदेश विकास के कीर्तिमान स्थापित कर रहा है।

धामी ने कम समय में अनेक कल्याणकारी व विकास कार्यो को मंजूरी देकर व तय समयावधि में पूरा करने का लक्ष्य देकर प्रदेश में नई कार्यसंस्कृति बनाई है। इससे जनता में सरकार व भाजपा के प्रति विश्वास बढ़ा है। साथ ही सरकारी मशीनरी भी काम के प्रति अधिक जवाबदेह बनी है। उन्होंने कहा कि चंपावत में उपचुनाव मात्र औपचारिकता है। चुनाव में अपनी हार पर उन्होंने कहा कि लोहाघाट में उनकी हार नहीं बल्कि धनबल की राजनीति की जीत हुई, जो भविष्य के लिए शुभ संकेत नहीं है। आज के अन्य ताजा ‘नवीन समाचार’ पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें।

यह भी पढ़ें : अब प्रीतम सिंह ने कही विधायकी से इस्तीफा देने की बात

प्रीतम सिंह: आयु, जीवनी, शिक्षा, पत्नी, जाति, संपत्ति, भाषण, राजनीतिक दल -  Oneindia Hindiनवीन समाचार, देहरादून, 11 अप्रैल 2022। उत्तराखंड कांग्रेस में नेता व उप नेता प्रतिपक्ष तथा प्रदेश अध्यक्ष के पदों पर एक महीने बाद हुई नियुक्तियों के साथ पार्टी में एक बार फिर खींचतान शुरू हो गयी है। इस पर एक ओर पूर्व नेता प्रीतम सिंह ने प्रदेश के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से मुलाकात की है, वही बताया जा रहा है कि उन्होंने पार्टी के वरिष्ट नेता केसी वेणुगोपाल, प्रभारी देवेंद्र यादव और अविनाश पांडेय पर हमला भी बोल दिया है।

पूर्व नेता प्रतिपक्ष प्रीतम सिंह ने कहा है कि यदि गुटबाजी के चलते पार्टी को हार मिली, और यदि उस गुटबाजी का हिस्सा वह भी हैं तो वह अपनी विधायकी से इस्तीफा देने को तैयार हैं। अलबत्ता, बाद में उन्होंने कहा, पार्टी गुटबाजी के आरोपों की जांच कराए। जांच में दोषी पाए गए तो विधायकी से इस्तीफा दे देंगे।

प्रीतम ने कहा, अविनाश पांडेय और प्रभारी यादव को वह रिपोर्ट भी सार्वजनिक करनी चाहिए जिसमें कहा गया है की पार्टी गुटबाजी के चलते हारी है। साथ ही कहा कि अब वह तब तक किसी भी पद को लेने के लिए तैयार नहीं है, जब तक पार्टी आरोपों को सिद्ध नहीं कर देती।

वहीं, पार्टी की चमोली जिला कार्यकारिणी ने इस फैसले में गढ़वाल मंडल की उपेक्षा करने पर सामूहिक इस्तीफा दे दिया है। इसके अलावा कई और गढ़वाल के नेता भी अंदर ही अंदर खिन्न हैं और पूरे मंडल की उपेक्षा होने पर नेताओं में उबाल देखने को मिल रहा है। (डॉ.नवीन जोशी) आज के अन्य ताजा ‘नवीन समाचार’ पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें।

यह भी पढ़ें : अब हरीश रावत के लिए एक कांग्रेसी नेता ने लिखा’भस्मासुर #जिल्लेइलाही को यूँ झोला उठा कर भागने नहीं देंगे’

डॉ. नवीन जोशी @ नवीन समाचार, नैनीताल, 28 मार्च 2022। कांग्रेस पार्टी चुनाव क्यों हारी यह जानने के लिए उनके विरोधियों के पास जाने की जरूरत नही, बल्कि पार्टी के कार्यकर्ताओं से ही जान लीजिए। वह भी बिना किसी कनिष्ठ-वरिष्ठ के लिहाज के। यह भी साफ है कि पार्टी में शीर्ष स्तर पर किस स्तर तक की रार मची हुई है। कहना गलत न होगा, पार्टी के नेता कहने भर को एक पार्टी में हैं। चुनाव में भी वह विरोधी पार्टी से नहीं-अपनों से अधिक लड़ रहे थे।

शनिवार को एक कांग्रेस नेता गिरीश चन्द्र ने फेसबुक पोस्ट में हरीश रावत को कांग्रेस को खत्म करने वाला भस्मासुर बता डाला है। इस पोस्ट में ऐसा कहने की कोशिश की गयी है कि मानो इस चुनाव में कांग्रेस का पूरा बंटाधार हरीश रावत ने ही किया हो। गौरतलब है कि खुद को पूर्व प्रदेश सचिव एवं संयोजक-संगठन कार्यक्रम, उत्तराखंड प्रदेश कांग्रेस, पूर्व प्रदेश उपाध्यक्ष (IT) बताने वाले गिरीश पूरे चुनाव के दौरान प्रीतम सिंह के साथ कदम-कदम मिलाकर चलते रहे। कई बार उन्होंने प्रीतम सिंह के साथ हवाई दौरों के फोटो भी फेसबुक पर शेयर किये थे। गिरीश अभी चुनाव में ही नहीं पहले से ही हरीश रावत के विरोध में सोशल मीडिया पर लिखते रहे। अब चुनाव बाद जब झगड़े फिर से सतह पर आ गये हैं तो गिरीश के सोशल मीडिया की पोस्टें कांग्रेस के भीतर ही काफी चर्चाओं में हैं।

शनिवार की पोस्ट में उन्होंने लिखा है। ‘मुख्यमंत्री बनूंगा नहीं तो घर बैठूंगा’, ‘कौन बना मुख्यमंत्री और कौन घर बैठा’, किसने ‘फलानी यूनिवर्सिटी’ का दांव थाली में परोस कर बीजेपी को दिया, किसने टिकटों को बेच डाला, किसने जिताऊ प्रत्याशियों को हरवाने का षड्यंत्र रचा, कौन संघियों और सीबीआई के डंडे के तले कांग्रेस को ही नेस्तनाबूद करने का मंसूबा पाले हुए था, और आखिर में लिखा है कि कौन था कांग्रेस का भस्मासुर। साथ ही चेतावनी दी है, ‘हिम्मत है तो लीपापोती की बज़ाय उपरोक्त प्रकरण पर FIR दर्ज करवाओ।’

पुनेड़ा ने इस पोस्ट में कल की एक फोटो भी शेयर की है, जिसमें मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने हरीश रावत के घर जाकर उनसे मुलाकात की थी। यही नहीं शनिवार को उन्होंने एक और पोस्ट सोशल मीडिया पर डाली थी, जिसमें लिखा था कि बिग ब्रेकिंग, मुख्यमंत्री उत्तराखंड पुष्कर सिंह धामी ने जिल्लेइलाही से भेंट की। बीजेपी की सरकार बनवाने में उनके द्वारा किये गये अथक प्रयासों के लिए आभार प्रकट करते हुए धन्यवाद ज्ञापित किया।

दो दिन पहले की एक पोस्ट में उन्होंने फिर हरीश रावत को निशाने पर लिया है। उस पोस्ट में रणजीत रावत का फोटो लगाते हुए लिखा है कि वह बड़े भाई रणजीत रावत का पूर्ण समर्थन करते हैं। जिसमें रणजीत रावत के टिकट के बदले पैसा लेने की बातों का जिक्र करते हुए लिखा है कि जिताऊ प्रत्याशियों की जीत में रोड़े किसने अटकाये। सल्ट उपचुनाव में भाजपा को वॉकओवर किसने दिया।

उल्लेखनीय है कि दूसरी ओर हरीश रावत के भी खुद के साथ उनकी बेटी को हराने के लिए की गई साजिशों पर सवाल उठाए हैं और उनके द्वारा मुस्लिम युनिवर्सिटी संबंधी बयान छापने वाले समाचार पत्र, जिसकी कटिंग को दिखाकर चुनाव में प्रचार किया गया, के बारे में मुद्रक-प्रकाशक आदि की जानकारी लाने वाले को एक लाख रुपए का ईनाम देने की घोषणा की गई है तो उनके विरोधी नेता प्रतिपक्ष प्रीतम सिंह के करीबी और किशोर उपाध्याय के कार्यकाल में प्रदेश सचिव रहे गिरीश पुनेड़ा ने हरीश रावत के खिलाफ प्रीतम सिंह की ओर से मोर्चा संभाल रखा है।अब देखना यह है कि पार्टी द्वारा सोशल मीडिया से झगड़े न बढ़ाने की चेतावनी के बाद भी जब यह सब चल रहा है तो कांग्रेस अब क्या कदम उठाती है। आज के अन्य ताजा ‘नवीन समाचार’ पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें।

यह भी पढ़ें : पहली बार मोदी व धामी की तारीफ करते नजर आए हरीश रावत, हरक ने भी की साफगोई से भाजपा-कांग्रेस पर बात

Uttarakhand Assembly Election 2022 Harak Singh Rawat Calls Harish Rawat  Bada Bhai What can it mean | उत्तराखंड के सियासी गलियारों में हलचल: क्या  हरीश रावत के आगे सरेंडर हुए हरक? जानें 'नवीन समाचार, देहरादून, 23 मार्च 2022। हमेशा अपने व्यंग्यपूर्ण बयानों से दूसरों का कम अपना अधिक नुकसान करने वाले राज्य के पूर्व सीएम व वरिष्ठ कांग्रेस नेता हरीश रावत मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तारीफ करते नजर आए हैं। वहीं हरक सिंह रावत ने भी भाजपा के प्रति साफगोई से बात की है।

देहरादून स्थित कांग्रेस भवन में भाजपा द्वारा किए जा रहे भव्य आयोजन पर प्रतिक्रिया देते हुए हरीश रावत ने कहा, वह जीते हैं। इसलिए भव्य समारोह का आयोजन कर रहे हैं। इसमें कुछ गलत नहीं है। वहीं पीएम नरेंद्र मोदी को लेकर रावत ने कहा कि उनकी एक चीज बहुत अच्छी है। प्रधानमंत्री को जीतने की भूख है और यह उनकी सबसे अच्छी आदत है। उन्होंने कहा कि चुनाव हारने के बावजूद पुष्कर सिंह धामी को दोबारा मुख्यमंत्री बनाने का फैसला वाकई कठिन और चुनौतीपूर्ण था। लेकिन जिस दृढ़ता और शालीनता के साथ उन्होंने अपने कर्तव्य का निर्वहन किया, वह बहुत ही अच्छा है।

हरीश रावत ने कहा कि पुष्कर सिंह धामी के अंदर जो सबसे अच्छी चीज है, वह यह कि वह दूसरों से कुछ न कुछ हमेशा सीखते हैं। अगर भाजपाई उनकी यह आदत खराब न करें, तो उन्हें एक पूर्व सैनिक के पुत्र के रूप में अपनी दूसरों से सीखने वाली आदत को हमेशा बरकरार रखना चाहिए। हरीश रावत ने कहा, मैंने चुनाव के दौरान पुष्कर सिंह धामी पर बहुत प्रहार किए। अगर मैं उन पर प्रहार नहीं करता तो क्या करता ? लेकिन जिस शालीनता के साथ पुष्कर सिंह धामी ने उन प्रहारों का जवाब दिया, वह वाकई काबिल-ए-तारीफ था।

वहीं कांग्रेस में चल रहे मंथन को लेकर हरीश रावत ने कहा कि पार्टी के नाड़ी वैद्य आए हुए हैं। वह सभी लोगों से पूछ रहे हैं। जल्द ही कुछ अच्छा समाधान पार्टी के लिए निकल कर आएगा। आगे कहा कि चुनाव से पहले टिकट बंटवारा के समय अविनाश पांडे को स्क्रीनिंग कमेटी का प्रमुख बनाया गया था और प्रदेश प्रभारी देवेंद्र यादव की भी अहम भूमिका थी। माना जा रहा है हरीश रावत ने इस तरह कांग्रेस की हार का पूरा ठीकरा अविनाश पांडे और देवेंद्र यादव के सिर मढ़ने की कोशिश की है।
उधर, 2014 मंे कांग्रेस को तोड़ने के बाद भाजपा सरकार में कद्दावर मंत्री रहने के दौरान पार्टी व सरकार को हर रोज परेशान करने वाले डॉ. हरक सिंह रावत ने साफगोई से स्वीकार किया है कि वह भाजपा नहीं छोड़ना चाहते थे लेकिन भाजपा ने ही उन्हें छोड़ दिया। जब हटे तो कुछ तो करना ही था।

चुनाव नतीजों के बाद हरक का भविष्य क्या है? इस सवाल के जवाब में हरक ने कहा कि वह अब कांग्रेस में हैं, तो कांग्रेस कार्यकर्ता की तरह काम करेंगे, और जनता के लिए संघर्ष करते रहेंगे। हरक ने समय पर टिकट घोषित न करने, कमजोर प्रचार रणनीति, जनता तक अपनी बात ले जाने में नाकामी को विस चुनाव में हार का एक अहम कारण बताया है। उल्लेखनीय है कि हरक ने अपनी बहु अनुकृति के चुनाव अभियान से लौटने के दौरान ही राज्य में मोदी लहर होने की भविष्यवाणी कर दी थी।(डॉ.नवीन जोशी) आज के अन्य ताजा ‘नवीन समाचार’ पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें।

यह भी पढ़ें : कांग्रेस नेता ने हरीश रावत की की ‘ओवैशी’ से तुलना व 17 सीटों पर हार के लिए जिम्मेदार, हरक को बताया ‘रंगा शियार’, जानें किसने…

डॉ. नवीन जोशी @ नवीन समाचार, नैनीताल, 15 मार्च 2022। विधानसभा चुनाव के दौरान भाजपा पर हमलावर कांग्रेसी नेता अब चुनाव में करारी हार के बाद खुद निशाने पर हैं। स्वतंत्रता संग्राम सेनानी व कांग्रेस नेता डुंगर सिंह बिष्ट के पुत्र पूर्व जिला पंचायत सदस्य गोपाल बिष्ट ने हरीश रावत पर भाजपा का एजेंट होने और उनके द्वारा उठाए गए मुस्लिम यूनिवर्सिटी के मुद्दे से राज्य में 17 सीटों का नुकसान होने का बड़ा आरोप लगाया है। देखें गोपाल बिष्ट ने क्या कहा :

बिष्ट ने कहा है, प्रीतम सिंह व रणजीत रावत के नेतृत्व में अत्यधिक मेहनत करने व एकजुट होने के बावजूद कांग्रेस की हार के लिए हरीश रावत को जिम्मेदार ठहराया है। उन्होंने कहा, हरीश रावत की वजह से कम से कम 17 सीटों पर पार्टी को हार का मुंह देखना पड़ा। जिस तरह देश में भाजपा ने असदुद्दीन आवैसी को अपने एजेंट के रूप में छोड़ा है, वैसे ही उत्तराखंड में हरीश रावत को अपने एजेंट के तौर पर छोड़ा था। यदि ऐसा न होता तो वह देवभूमि उत्तराखंड में इस्लामिक युनिवर्सिटी जैसी बात न करते। कई जगह पर उन्होंने पिछले 5-10 वर्षों से मेहनत कर रहे और 2017 में बहुत छोटे अंतर से चुनाव हारे प्रत्याशियों को टिकट नहीं दिए। इसका दोष हरीश रावत पर जाता है।

उधर लैंसडाउन विधानसभा सीट से पूर्व कैबिनेट मंत्री डा. हरक सिंह रावत की बहू अनुकृति गुर्साइं को हराने के बाद भाजपा विधायक महंत दिलीप रावत के बोल भी बिगड़े हैं। दिलीप रावत ने अनकृति गुसाईं को 9868 वोटों के अंतर से हराया है। इसके बाद उन्होंने हरक सिंह रावत पर तंज कसते हुए कहा कि वह खुद को ‘शेर ए गढ़वाल’ बताते हैं, लेकिन वास्तव में वह ‘रंगा सियार’ थे। इस बार जनता ने वोटों का पानी डाला तो भेद खुल गया।

दिलीप रावत ने कहा कि हरक सिंह रावत अब तक लहर के साथ चुनाव लड़े हैं, जिसमें उन्हें हमेशा जीत मिली। मौजूदा विधानसभा चुनाव में विपरीत परिस्थितियों में चुनाव लड़ने के बाद हरक सिंह रावत की हकीकत सामने आ गई है। उन्होंने कहा कि हरक सिंह रावत अपनी विश्वसनीयता को खो चुके हैं। राजनीति में ईमानदारी, निष्ठा, चरित्र और समर्पण की भावना होनी चाहिए, जो कि हरक सिंह रावत में नहीं है। इसलिए अब जनता उन पर विश्वास नहीं करने वाली है। आज के अन्य ताजा ‘नवीन समाचार’ पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें।

यह भी पढ़ें : हरीश रावत के 35 वर्ष पुराने साथी ने कहा, वह अफीम सुंघाते हैं… पैंसे लेकर टिकट बांटने का भी लगाया सनसनीखेज आरोप

Uttarakhand Election 2022 Harish Rawat may contest from Ramnagar seatनवीन समाचार, देहरादून, 14 मार्च 2022। चुनाव हारने के बाद प्रीतम सिंह और हरीश रावत के खेमों के बीच पहले से चल रहे आरोप-प्रत्यारोप में अब हरीश रावत के 35 वर्ष पुराने साथी रणजीत रावत भी कूद पड़े हैं। रणजीत ने हरीश रावत पर बहुत बड़ा आरोप लगाते हुए साफ तौर पर कहा कि हरीश रावत ने पैसे लेकर टिकट बांटे है। टिकट नहीं मिलने पर लोग अब हरीश रावत को तलाश रहे हैं, कुछ लोगों के पैसे हरीश रावत के मैनेजर ने उन्हें वापस कर दिए है। लेकिन कुछ अभी भी पैसे मांगते के लिए चक्कर लगा रहे हैं। देखें

रणजीत रावत ने क्या कहा : 

रणजीत रावत ने यह भी कहा, नए नेताओं को हरीश रावत ऐसे अफीम चटा देते हैं कि उनके सम्मोहन से बाहर ही नहीं निकल पाते। उनके अनुसार हरीश रावत के सम्मोहन से निकलने में उन्हें यानी रणजीत को भी खुद 36 साल लग गए। रणजीत रावत ने सीधे तौर पर हरीश रावत पर निशाना साधते हुए कहा कि हरीश रावत कांग्रेस की हार के सबसे बड़े जिम्मेदार हैं।

रणजीत ने हरीश रावत के उस बयान पर जवाब दिया, ‘2017 में हरीश रावत रामनगर से चुनाव लड़ना चाहते थे। ऐसा कतई नहीं है। हरीश रावत ने मुझे कहा था सल्ट में तुमने इतना काम किया, लेकिन सल्ट की जनता ने तुम्हें हरा दिया ऐसे में अब रामनगर से चुनाव लड़ो। 2017 में हरीश रावत के कहने पर ही वह रामनगर से चुनाव लड़े थे। लेकिन इस बार हरीश रावत ने स्वयं रामनगर से दावेदारी कर दी, और मुझे सल्ट शिफ्ट कर दिया गया। जिससे कई सीटों का चुनावी गणित ही बिगड़ गया।’

रणजीत रावत ने कहा, ‘हरीश रावत बहुत ही मासूमियत से झूठ बोलते है। उन्होंने कहा, वे बहुत बातें जानते हैं लेकिन काफी कुछ बाद में कहेंगे। उन्होंने कहा, हरीश रावत सल्ट उपचुनाव में भाजपा को वाकओवर देने की बात कह रहे थे। कांग्रेस मोदी से लड़ रही थी, और हरीश रावत नारा लगा रहे थे, ‘मोदी तुझसे बैर नहीं, धामी तेरी खैर नहीं..’ रणजीत ने कहा ‘हरीश रावत ने मुस्लिम विवि की बात कह भाजपा को मुद्दा थमा दिया। इसे भाजपा ने बहुत भुनाया।

उल्लेखनीय है कि इससे पूर्व, प्रीतम सिंह भी हरीश रावत के ऐन मौके पर रामनगर से चुनाव लड़ने पर यह कहते हुए कटाक्ष किया था कि “बोए कोई और काटे कोई और’ इस बयान के बाद पूर्व सीएम हरीश रावत ने ही सोशल मीडिया पर पोस्ट लिख जवाब दिया। बहरहाल, हरीश रावत के पुराने साथी रणजीत रावत के तीखे बयान के बाद कांग्रेस में अंदरूनी युद्ध के हालात बन गए है। उल्लेखनीय है कि इस बीच चुनाव परिणाम के बाद सह प्रभारी दीपिका पांडेय इस्तीफा दे चुकी हैं। और प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल व हरीश रावत हार की जिमेदारी ले चुके हैं। (डॉ.नवीन जोशी) आज के अन्य ताजा ‘नवीन समाचार’ पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें।

यह भी पढ़ें : यूपी में धार्मिक बयान को लेकर हरीश रावत आये चुनाव आयोग के लपेटे में, नोटिस जारी

नवीन समाचार, वाराणसी, 3 मार्च 2023। चुनाव आयोग ने अपने बयानों के लिए अक्सर चर्चा में रहने वाले वरिष्ठ कांग्रेस नेता व उत्तराखंड के पूर्व सीएम हरीश रावत को नोटिस जारी किया है। बताया गया है कि भाजपा के विधि प्रकोष्ठ के शशांक शेखर त्रिपाठी की शिकायत को संज्ञान में लेकर अपर नगर मजिस्ट्रेट तृतीय गिरीश कुमार द्विवेदी ने उनसे तीन दिन के अंदर जवाब मांगा है।

बताया गया है कि पिछले दिनों कांग्रेस प्रत्याशी के समर्थन में बनारस प्रचार करने आए हरीश रावत ने कहा था, ‘यूपी के लोग कब तक उधार का तिलक लगाएंगे ?’  इस बयान को ही धार्मिक बयान बताते हुए भाजपा के विधि प्रकोष्ठ की ओर से इसकी शिकायत चुनाव आयोग से की गई थी। अब आयोग ने पूर्व सीएम रावत से इसी बयान पर जवाब मांगा है। (डॉ.नवीन जोशी) आज के अन्य ताजा ‘नवीन समाचार’ पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें।

यह भी पढ़ें : सीएम बनने के बयान पर पलटे हरीश रावत, जानें इस बीच भाजपा-कांग्रेस के नेताओं ने क्या-कया कहा…

डॉ. नवीन जोशी @ नवीन समाचार, नैनीताल, 18 फरवरी 2022। पूर्व मुख्यमंत्री एवं कांग्रेस के चुनाव संचालन समिति के अध्यक्ष हरीश रावत ने चुनाव के बाद ‘मुख्यमंत्री बनूंगा या घर बैठूंगा’ वाला बयान दिया था। लेकिन शायद गिने-चुने मौके होंगे जब हरीश रावत अपने बयान से पलट गए हैं।

अब उन्होंने कहा है, कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी तय करेंगी कि कौन मुख्यमंत्री बनेगा। यह कहते हुए भी हरीश रावत भूल गए, नियमानुसार बहुमत वाली पार्टी का विधायक दल अपने नेता का चयन करता है, और वह ही मुख्यमंत्री बनता है। इधर हरीश के एक और पूर्व सहयोगी, भाजपा नेता सुबोध उनियाल ने भी हरीश रावत के बयान पर चुटकी ली कि उन्हें घर ही बैठना चाहिए। देखिए उनियाल ने क्या कहा:

हरीश रावत ने आज अपना बयान बदलते हुए यह भी कहा कि उनका बयान तब चुनाव में चेहरे के नाम पर अधिक वोट मिलने की जरूरत के अनुसार दिया गया। पर हरीश रावत भूल गए कि जब उन्होंने वह बयान दिया था, तब तो मतदान हो चुका था। ऐसे में कैसे उनके बयान से उनके पार्टी को अधिक वोट मिल सकते थे।

उल्लेखनीय है कि हरीश रावत के उस बयान के बाद विपक्षी भाजपा के नेता, मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने जहां कहा कि हरीश रावत मंुगेरीलाल के हसीन सपने देख रहे हैं, वहीं हरीश रावत के पुराने सबसे करीबी, जूनियर रावत कहे जाने वाले रणजीत रावत ने भी कुछ-धामी के ही अंदाज में ‘यदि होता किन्नर नरेश मैं…’ कहकर चुटकी ली, और हरीश को दिवास्वप्न न देखने की नसीहत दी।

और इसी तरह नेता प्रतिपक्ष प्रीतम सिंह ने भी पलटवार करते हुए कहा कि सीएम कौन बनेगा, यह राष्ट्रीय नेतृत्व तय करेगा। उन्होंने कहा, राष्ट्रीय नेतृत्व ने तय किया था कि सामूहिक नेतृत्व में चुनाव लड़ा जाएगा। चुनाव परिणाम के बाद जब सरकार बनेगी तो कांग्रेस विधानमंडल दल व राष्ट्रीय नेतृत्व तय करेगा कि किसे जिम्मेदारी सौंपी जाएगी। आज के अन्य ताजा ‘नवीन समाचार’ पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें।

यह भी पढ़ें : कैसे-कैसे मांगे वोट, दो कांग्रेस प्रत्याशी बोले-हार गये तो 10 को मर जाएंगे

-भाजपा प्रत्याशी ने मोदी के लिए मांगे वोट, तो दो विधायक मांग रहे मांफी…

BJP, Congress worry for bypolls as independents gain upper hand | Jaipur  News - Times of Indiaडॉ. नवीन जोशी @ नवीन समाचार, नैनीताल, 13 फरवरी 2022। सोमवार को जब उत्तराखंड की जनता अपने अगले पांच वर्ष के भाग्यविधाताओं को चुनने के लिए खुद भाग्यविधाता की भूमिका में होंगे, ऐसे में प्रत्याशी अपने काम या मुद्दों की भावनात्मक एवं ब्लैकमेल करने वाले तरीकों से भी जनता के वोट हासिल करने के प्रयास कर रहे हैं।

उल्लेखनीय है कि गत दिनों एक कांग्रेस प्रत्याशी का वायरल हुआ था जिसमें वह मतदाताओं से उन्हें भिखारी की तरह वोट की भीख देने अन्यथा चुनाव परिणाम के बाद उनकी अर्थी पर लकड़ी डालने की मांग कर रहे थे। अब उन्हीं की तर्ज पर टिहरी में कांग्रेस के एक प्रत्याशी अलग ही अंदाज में मतदाताओं से अपील कर रहे हैं। स्थानीय बोली में वह कह रहे हैं, ‘देखो भाई लोगों मैं साफ कह रहा हूं। मैंने आप लोगों का हमेशा साथ दिया है। इस बार वोट दे देना। वर्ना 10 मार्च को चुनाव नतीजे आने हैं। और नतीजा गलत आया तो मैंने मर जाना है। फिर मेरा शोक जताने के लिए घर आ जाना है। उक्त नेता पहले भी दो बार चुनाव लड़ चुके है, लेकिन जीत नहीं मिल सकी।

वहीं भाजपा के कुछ प्रत्याशी चुनाव प्रचार में खुद को भुलाकर केवल पीएम नरेंद्र मोदी के लिए वोट मांग रहे हैं। गढ़वाल में एक वरिष्ठ नेता का भी वीडियो सोशल मीडिया पर खूब देखा जा रहा है। जिसमें वह कह रहे हैं आप लोगों ने मोदी जी का ध्यान में रखना है। मोदी जी का चुनाव चिहन क्या है ? कमल का निशान। अब रोड क्या हवाई जहाज भी गांव में आ जाएगा। जल्दी जल्दी रोड कटवाई जाएगी।

वहीं अपनी गलतबयानी के लिए जाने जाने वाले हरिद्वार के एक चर्चित विधायक एक सार्वजनिक सभा में क्षेत्र विशेष के लोगों से क्षमा मांग रहे हैं। वह कह रहे हैं, ‘देखिए गलती बच्चों से ही होती है। मुझे अपना बेटा, भाई समझ कर माफ कर दीजिए। मेरी दादी पहाड़ से थीं। मेरा आपसे खून का रिश्ता था। उसी खून ने खून को सींचा। मैं आपसे माफी मांगता हूं। मेरे अंदर भी पहाड़ का खून है। जैसे बच्चे को माफी दी जाती है, वैसे ही मुझे माफी दें।

हरिद्वार के ही एक अन्य विधायक संजय गुप्ता जनसभा में बोल़े, ‘देखिए मेरी कोई गलती हुई तो मुझे माफ कर देना। आपने मेरी जय जयकार करी है तो आपको मेरा कालर पकड़ने, कपड़े फाड़ने, गले में जूतों की माला डालने का भी अधिकार है। अगर मेरी किसी गलती पर मेरी पकी पकाई फसल को किसी दूसरे से कटवा दो, तो भगवान भी माफ न करेगा। देख लो अब। दूसरे गांव से आ रहा हूं वहां लोगों ने एक एक कुंतल फूलों की बारिश की है मुझ पर। अब आप लोग देख लेना।’ आज के अन्य ताजा ‘नवीन समाचार’ पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें।

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बोले-यह चुनाव काम बनाम कारनामे का है, प्रधानमंत्री मोदी कहते हैं, न खाऊंगा-न खाने दूंगा, हरीश रावत कहते हैं, आप खाओ-मैं आंखें मूँद लूंगा
नवीन समाचार, बागेश्वर, 31 जनवरी 2022। उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने बागेश्वर में चुनाव प्रचार के दौरान भाजपा व कांग्रेस की कार्य संस्कृति का फर्क समझाया। उन्होंने कहा, ‘यह चुनाव ‘काम बनाम कारनामे’ का है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कई विकास कार्य प्रदेश में करवाए हैं। जहां भी मैं जाता हूं हर कोई यही कहता है कि पांच महीने में मुख्यमंत्री के तौर पर आपने बहुत काम किया है। मैं यह कह सकता हूं कि लोग भाजपा की सरकार बनाने के लिए काफी उत्साहित हैं।’

उन्होंने बताया कि भाजपा के शीर्ष पुरुष नरेंद्र मोदी कहते हैं, ‘ न खाऊंगा-न खाने दूंगा’, जबकि हरीश रावत कहते हैं, ‘आप खाओ-मैं आंखें मूँद लूंगा’। लिहाजा जनता तय कर चुकी कि उन्हें उत्तराखंउ में कैसी राजनीति और कार्य संस्कृति चाहिए। (डॉ.नवीन जोशी) आज के अन्य ताजा ‘नवीन समाचार’ पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें।

यह भी पढ़ें : हरीश रावत ने कहा, पीएम मोदी ही करेंगे गैस सिलेंडर के दाम 500 रुपए से कम… बशर्ते..

उत्तराखंड में 50 हराओ, मोदी जी कर देंगे LPG के दाम ‌‌500 से कम:पूर्व CM हरीश रावतनवीन समाचार, देहरादून, 26 जनवरी 2022। उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री व कांग्रेस पार्टी के चुनाव संचालन समिति के अध्यक्ष हरीश रावत ने कांग्रेस के नारे ‘बनाओ कांग्रेस की सरकार-गैस के दाम नहीं होने देंगे 600 के पार’ पर आज कहा कि जनता यदि उत्तराखंड में भाजपा के 50 विधायकों को हरा देती है तो प्रधानमंत्री खुद गैस सिलेंडर के दाम 500 से कर देंगे। सुनें विडियो में 31वें मिनट के आसपास हरीश रावत ने क्या कहा : 

बुधवार को सल्ट विधानसभा की जनता से ऑनलाइन संवाद करते हुए रावत ने कहा, पहले हमने गैस सिलेंडर पर 200 रुपए अनुदान देने की बात कही थी, अब हम प्रति परिवार गैस सिलेंडर पर एक निश्चित रा़िश का अनुदान बढ़ाएंगे और गैस के दाम 600 रुपए से अधिक नहीं होने देंगे। साथ ही वह यह भी कह गए, ‘हिमांचल ने चार (भाजपा प्रत्याशी) हराए थे तो डीजल-पेट्रोल के दाम 10 रुपए कम हो गए थे। आप उत्तराखंड में 50 हराइए, मैं आपको विश्वास दिलाता हूं, मोदी जी खुद ही गैस के दाम चार सौ रुपए-पांच सौ रुपए कम कर देंगे।’ (डॉ.नवीन जोशी) आज के अन्य ताजा ‘नवीन समाचार’ पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें।

यह भी पढ़ें : निष्काशित होने के बाद आया ‘बेचारे’ हरक का पहला बयान…

Expelled from Uttarakhand Cabinet and BJP, Harak Singh Rawat likely to join  Congress on Monday - India Newsनवीन समाचार, देहरादून, 16 जनवरी 2022। हमेशा चर्चाओं में रहने के अभ्यस्त भाजपा से निष्काशित डॉ. हरक सिंह रावत का भाजपा द्वारा पार्टी एवं मंत्रिमंडल से निष्काशित होने के बाद पहला बयान आया है। इस बयान में हरक ने जहां खुद को ‘बेचारा और भाजपा के प्रति समर्पित’ बताने का प्रयास किया है, वहीं यह कहने का भी प्रयास किया है कि राज्य में भाजपा कमजोर हो रही है, और कांग्रेस चुनाव जीतने जा रही है। इससे उनके इरादे साफ हो जाते हैं। यह भी चर्चा है कि वह आज ही नई दिल्ली में कांग्रेस पार्टी में शामिल हो जाएंगे, परंतु यह भी है कि अब तक कांग्रेस के किसी नेता की ओर से उनके बाबत कोई बयान नहीं आया है।

यह भी है कि कांग्रेस एक परिवार से एक ही व्यक्ति को टिकट देने की बात कह रही है, और हरक ने अभी भी दोहराया है कि वह खुद के साथ अपनी बहु के लिए भी टिकट चाह रहे थे। कांग्रेस उनकी यह मांग करेगी या नहीं ? साथ ही हरीश रावत से माफी मांगने की शर्त पर हरक का क्या रुख होगा ? तथा उनके साथ क्या कुछ और लोग भी भाजपा से कांग्रेस में लौटेंगे ? तथा कांग्रेस में लौटने के बाद हरक कितना सहज और शांत रहेंगे ? यह भी देखने वाली बात होगी।

अलबत्ता, हरक ने अपने पहले बयान में कहा है, ‘मुझे सोशल मीडिया के माध्यम से पता चला कि भाजपा ने मुझे बर्खास्त कर दिया है। मैं लगातार इस बात को पार्टी के अंदर बोलता रहा कि इस बार भाजपा की सरकार नहीं आने वाली है, प्रदेश भर में आम लोग भाजपा की सरकार से बहुत ज्यादा परेशान हैं लेकिन मैंने कभी भी यह नहीं सोचा कि मैं बीजेपी को छोड़कर किसी और दल में चला जाऊं। हां कभी-कभी मजाक में जरूर यह बात कही लेकिन दिल से कभी मैंने भाजपा को छोड़ने की बात नहीं कही। भाजपा ने फर्जी खबरों के आधार पर मुझे बाहर निकाला। मैं ईमानदारी से काम कर रहा था…।’

‘…मैंने कांग्रेस में जाने पर अभी कोई फैसला नहीं लिया है, लेकिन गणेश गोदियाल से मेरी लगातार बात हो रही है। इस बार प्रदेश में कांग्रेस की सरकार बनने जा रही है। युवा, आम लोग, कर्मचारी सभी कांग्रेस को वोट दे रहे हैं। भाजपा में मुझे 5 साल तक काम नहीं करने दिया गया। मैं इस बात से बहुत नाराज था। मैं परिवारवाद के खिलाफ हूं, लेकिन मेरी बहू को टिकट मैंने जरूर मांगा था। मुझे मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से बहुत सहयोग मिला। पर भाजपा न जाने कैसे इतना बड़ा देश चला रही हैं। इनके पास इंटेलिजेंस है, सीबीआई है, सब कुछ है, पूरा तंत्र इनके पास है, फिर भी एक झूठी खबर से इन्होंने मुझे पार्टी से निकाल दिया।’ (डॉ. नवीन जोशी) आज के अन्य ताजा ‘नवीन समाचार’ पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें।

यह भी पढ़ें : विधायक का जोरदार कटाक्ष: मेरे लिए एक पार्टी, एक सीट, एक पत्नी…

नवीन समाचार, देहरादून, 16 जनवरी 2022। उत्तराखंड के एक भाजपा विधायक महंत गोपाल रावत का एक बयान खासा चर्चा में है। रावत ने मीडिया कर्मियों से बात करते हुए कहा- भारतीय जनता पार्टी उनकी अकेली परिवार है। उनके पास पार्टी के रूप में भारतीय जनता पार्टी ही एकमात्र विकल्प है, और सीट के रूप में लैंसडौन ही एकमात्र विकल्प है। इसी कड़ी में वह बोल गए, ‘ऐसे ही उनके पास पत्नी का भी एक ही विकल्प है..’। आगे उन्होंने कटाक्ष भरे अंदाज में कहा, ‘बहुतों के पास बहुत सारे विकल्प हो सकते हैं…’। देखिये वीडियो रावत ने क्या कहा:

अब उनके ऐसे बयान के मायने समझिये। उनके बयान के पीछे उत्तराखंड के काबीना मंत्री डॉ. हरक सिंह रावत हैं। हरक हर बार अपनी सीट बदलते हैं। एक सीट पर टिके नहीं रहते हैं। पिछली बार कोटद्वार सीट पर पूर्व सीएम खंडूड़ी की हार का बदला देने के नाम पर चुनाव लड़े हरक की नजर इस बार लैंसडौन सीट पर हैं। हरक के रंगीन मिजाजी के भी अनेक चर्चे रहे हैं। इसलिए गोपाल रावत को यह बयान देना पड़ा है।

यह भी कहा जा रहा है कि हरक खुद कोटद्वार से इतर दूसरी सीट के साथ ही अपने पुत्रवधु मॉडल-अदाकारा अनुकृति गुसाईं के लिए भी टिकट चाहते हैं। भाजपा उन्हें दूसरी सीट के साथ बहु के लिए एक और सीट देने को तैयार नहीं है। कांग्रेस भी एक परिवार को एक से अधिक वोट नहीं देने की बात कर रही है। इसलिए हरक के पास विकल्प कम होते जा रहे हैं। शनिवार को कोर कमेटी की बैठक में उनके न आने पर भी भाजपा द्वारा तरजीह न दिया जाना इसी का परिणाम बताया जा रहा है। (डॉ. नवीन जोशी) आज के अन्य ताजा ‘नवीन समाचार’ पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें।

यह भी पढ़ें : उत्तराखंड सरकार की मंत्री ने कहा, राहुल मंद बुद्धि, उन्हें कोई गंभीरता से नहीं लेता

Cabinet Minister Rekha Arya said Children who were orphaned during Corona  period will now get love in true senseनवीन समाचार, रुद्रपुर, 15 दिसंबर 2021। पूर्व में कांग्रेस पार्टी में रही उत्तराखंड की महिला एवं बाल विकास मंत्री रेखा आर्य ने कांग्रेस पार्टी के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल को लेकर विवादित बयान दिया है। रेखा ने कहा, राहुल गांधी अब कहीं चले जाएं, उन्हें कोई गंभीरता से नहीं लेता है। उन्हें मंदबुद्धि और पप्पू की संज्ञा दी जाती है। आज भी भी यह संज्ञाएं उन पर लागू हैं।

मंत्री रेखा आर्य ने यह बाद बुधवार को दो वर्षों में तैयार करीब पांच करोड़ रुपए से बन कर तैयार हुए बाल संप्रेक्षण गृह का उद्घाटन करते हुए पत्रकारों द्वारा राहुल गांधी की उत्तराखंड में जनसभा को लेकर पूछे गए प्रश्न के उत्तर में कही। वहीं केजरीवाल की महिलाओं को एक हजार रुपए प्रतिमाह दिए जाने की घोषणा पर पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि केजरीवाल उत्तराखंड में महिलाओं को क्या दे रहे हैं, इससे समझा जा सकता है कि वह उत्तराखंड में महिलाओं को क्या देंगे। आज के अन्य ताजा ‘नवीन समाचार’ पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें।

यह भी पढ़ें : पहली बार भाजपा छोड़ने की खबरों पर बोले हरक, जानें क्या कहा….

नवीन समाचार, देहरादून, 2 दिसंबर 2021। उत्तराखंड सरकार के कैबिनेट मंत्री डॉ. हरक सिंह रावत की भाजपा छोड़कर कांग्रेस में जाने की लंबे समय से चर्चाएं चल रही हैं। इन चर्चाओं और इस संबंध में मीडिया में आ रही खबरों पर डॉ. रावत पहली बार खुलकर बोले हैं। देखें वीडियो कि उन्होंने क्या कहा :

बताया जा रहा है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के देहरादून आगमन से ठीक पहले भाजपा छोड़कर कांग्रेस में जाने की चर्चाओं पर डॉ. हरक सिंह रावत परेशान हैं। उन्होंने इस संबंध में सोशल मीडिया पर वायरल हुई खबरों को कुछ लोगों की शरारत करार दिया। उन्होंने कहा-‘मैं इन खबरों का खंडन करता हूं।

उल्लेखनीय है कि लंबे समय से भाजपा सरकार में मंत्री डॉ. हरक सिंह रावत और रायपुर विस से भाजपा विधायक उमेश शर्मा ‘काऊ’ के कांग्रेस में जाने की अटकलों का बाजार गर्म है। दोनों नेता पूर्व मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा के साथ 2016 में कांग्रेस छोड़कर भाजपा में शामिल हुए थे।विधानसभा चुनाव करीब आते ही उनकी दल-बदल की चर्चाओं ने जोर पकड़ा। लेकिन हरक और काऊ दोनों अब तक उन्हें लेकर दलबदल की चर्चाओं की अनदेखी करते आए हैं। पिछले दिनों उनकी नेता प्रतिपक्ष प्रीतम सिंह से बंद कमरे में हुई मुलाकात के भी सियासी मायने टटोले गए, लेकिन इस पर भी हरक सिंह ने खुद सामने आकर कोई सफाई नहीं दी।

माना जा रहा है कि लेकिन अब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पहले राजनीतिक दौरे पर देहरादून आने से ठीक पहले सोशल मीडिया पर भाजपा छोड़कर कांग्रेस में जाने की संभावना से जुड़ी खबरों ने कैबिनेट मंत्री रावत को असहज कर दिया। इसलिए उन्हें आगे आकर इन खबरों का खंडन करना पड़ा है।

इसीलिए उन्होंने कहा कि उन्हें बहुत दुख है कि सोशल मीडिया और मीडिया में कुछ लोग जानबूझकर शरारत कर रहे हैं। मनगढ़ंत समाचार प्रकाशित कर रहे हैं। विशेष कर प्रधानमंत्री के देहरादून आगमन के मौके पर। उन्होंने कहा वह अगले दो दिन में भाजपा से त्यागपत्र देने की खबरों का खंडन और भर्त्सना करते हैं।

हरक ने कहा, हम सभी लोग प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में चार दिसंबर के कार्यक्रम की तैयारी में लगे हैं। प्रधानमंत्री का यह पहला राजनीतिक कार्यक्रम है। प्रदेश के लोगों में बहुत उत्साह है। उन्होंने कहा कि मोदी के उत्तराखंड में आने के बाद पूरे राज्य में भाजपा के पक्ष में संदेश जाएगा। सकारात्मक वातावरण बनेगा। (डॉ.नवीन जोशी) आज के अन्य ताजा ‘नवीन समाचार’ पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें।

यह भी पढ़ें : हरक ने की प्रीतम सिंह के सामने राहुल गांधी के लिए ऐसी टिप्पणी कि भड़क गए प्रीतम, मोदी, सोनिया पर भी बोले

डॉ. नवीन जोशी @ नवीन समाचार, नैनीताल, 28 नवंबर 2021। भाजपा नेता व कबीना मंत्री हरक सिंह और कांग्रेस नेता व नेता प्रतिपक्ष प्रीतम सिंह कई बार साथ नजर आकर चर्चा बटोर रहे हैं। दोनों नेता पुनः एक समाचार चैनल पर साथ आते और अगल-बगल बैठे नजर आए।

यहां खासकर हरक ने प्रीतम से उनके पिता गुलाब सिंह के दौर से व्यक्तिगत प्रगाढ़ सबंधों से लेकर कांग्रेस सरकार में मंत्री रहते प्रधानमंत्री मोदी से प्रभावित होने के कारण लेकर राहुल गांधी व सोनिया गांधी पर अपने विचार एवं भाजपा के कार्यों पर खुल कर टिप्पणी की। इस दौरान खासकर राहुल गांधी पर रावत ने जो टिप्पणी की उस पर शांत माने जाने वाले प्रीतम भी भड़क उठे। उन्होंने कहा हरक जब कांग्रेस सरकार में मंत्री थे और नेता प्रतिपक्ष रहे, तब उन्हें राहुल गांधी बुरे नहीं लगे। इस पर हरक फिर बोल उठे और ऐसा खुलासा किया कि फिर प्रीतम के पास भी बोलने को कुछ नही बचा। देखें वीडियो:

इस दौरान हरक ने बताया कि कांग्रेस सरकार में मंत्री रहते उन्हें प्रधानमंत्री मोदी की एक चाय वाला यानी बहुत छोटे स्तर से आने के बाद गरीबों के लिए बड़ा कार्य करने की बात पसंद आई, और इसके कारण ही वह भाजपा में आए। इस दौरान उन्होंने टिप्पणी की कि राहुल गांधी में की ‘बॉडी लैंग्वेज’ नेताओं जैसी नहीं है। उन्हें नेता के तौर पर राहुल गांधी से सोनिया गांधी बेहतर लगती हैं। इस पर साथ बैठे प्रीतम सिंह भड़क उठे। उन्होंने कहा कि हरक को राहुल गांधी की ‘बॉडी लैंग्वेज’ तब बुरी नहीं लगी जब वह कांग्रेस पार्टी में मंत्री और नेता प्रतिपक्ष बने। अब उनका भाजपा में जाने में जाने के बाद हृदय परिवर्तन हो गया है, इसलिए ऐसा बोल रहे हैं। इस पर हरक ने जो कहा, उसके बाद प्रीतम इस मुद्दे पर चुप रह गए।

हरक ने कहा जब वे कांग्रेस पार्टी के नेता के रूप में भाजपा सरकार के दौरान नेता प्रतिपक्ष थे, तब राहुल गांधी के उत्तराखंड में एक कार्यक्रम के दौरान जब सभी कांग्रेस नेता राहुल गांधी की जमकर तारीफ कर रहे थे, तब उन्होंने राहुल गांधी के सामने कहा कि उन्हें लाखों देशवासियों के साथ राहुल गांधी का संसद में दिया गया भाषण पसंद नहीं आया। हरक ने कहा, ऐसा कहते हुए पूरी कांग्रेस पार्टी को जैसे सांप सूंघ गया था, और हरक को लगा था कि उन्हें कांग्रेस पार्टी से तत्काल निकाल दिया जाएगा। फिर भी उन्होंने इसकी परवाह नहीं की।

इस दौरान दोनों नेता शुरू में काफी सौहार्दपूर्ण माहौल में साथ बैठे और एक दूसरे की बातें भी सुनीं और अपनी पाटियों के पक्ष भी दोनों ने मजबूती से रखे। प्रीतम सिंह ने खासकर उत्तराखंड की भाजपा सरकार की नहीं, वरन मोदी सरकार की नीतियों की महंगाई, 15 लाख आदि मुद्दों पर कड़ी आलोचना भी की। दोनों नेता दल-बदल के मुद्दे पर भी बोले। हरक ने इस पर कहा कि वह कोई साधु नहीं हैं। यह भी कहा कि राजनीति में खासकर विधानसभा चुनाव के दौरान लोग एक से दूसरे दल में आते-जाते रहते हैं, लेकिन प्रधानमंत्री मोदी से लेकर भाजपा सरकार की राष्ट्रवाद के मुद्दे पर दमदार तरीके से बात करके साथ सोनिया गांधी को राहुल गांधी से बेहतर मानने की बात कहकर उन्होंने अपने राजनीतिक भविष्य का भी कुछ हद तक इशारा भी कर दिया। आज के अन्य ताजा ‘नवीन समाचार’ पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें।

यह भी पढ़ें : विधान परिषद के मुद्दे पर हरीश रावत को उनके ही पूर्व सहयोगी भाजपा सरकार के कबीना मंत्री ने दिया करारा जवाब

नवीन समाचार, देहरादून, 25 नवंबर 2021। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत के उत्तराखंड में विधान परिषद की वकालत करने पर कभी रावत के सहयोगी रहे वरिष्ठ भाजपा नेता और कैबिनेट मंत्री सतपाल महाराज ने जवाब दिया है। उन्होंने कहा है कि देशभर के छोटे राज्यों में विधान परिषद का कोई उदाहरण नहीं है। इसलिए उत्तराखंड में विधान परिषद बनाए जाने की बात कहना सरासर बेईमानी और जनता के पैसों की बर्बादी के सिवाय और कुछ नहीं है।

Satpal Maharaj slams former Chief Minister Harish Rawat demands an apology  | पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत पर भड़के सतपाल महाराज, इस बात के लिए की माफी  की मांगवरिष्ठ भाजपा नेता एवं कैबिनेट मंत्री सतपाल महाराज ने पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत के उत्तराखंड में विधान परिषद बनाए जाने के विषय पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा है कि उत्तराखंड जैसे छोटे राज्य में विधान परिषद का गठन औचित्यहीन और जनता के पैसे की बर्बादी है। उन्होंने कहा कि वह प्रदेश के कांग्रेस नेता को याद दिलाना चाहते हैं कि उन्हीं की पार्टी के एक प्रमुख नेता तत्कालीन चुनाव प्रभारी सुरेश पचौरी के सामने भी जब 2002 में विधान परिषद के गठन का विषय आया था तो उन्होंने स्पष्ट कहा था कि यह व्यवस्था छोटे राज्य में नहीं है इसलिए उत्तराखंड में विधान परिषद का कोई औचित्य नहीं है। तब उन्होंने इस विषय को चुनाव घोषणा पत्र में भी शामिल करने से इंकार कर दिया था।

श्री महाराज ने कहा हिमाचल के साथ-साथ नवगठित छत्तीसगढ़, झारखंड और देश के अन्य किसी भी छोटे राज्य में विधान परिषद नहीं है। आंध्र प्रदेश तक ने अपने यहां विधान परिषद को समाप्त करने का प्रस्ताव पारित किया हुआ है। उत्तराखंड जैसे छोटे राज्य में भी विधान परिषद के गठन की बात कहना सरासर बेईमानी और जनता की गाढी कमाई की लूट के अलावा और कुछ नहीं है। इसके बजाए पूरा पैसा विकास कार्यों में लगने चाहिए ताकि प्रदेश का सर्रवांगीण विकास हो सके।

गौरतलब है कि हरीश रावत की विधान परिषद गठित करने संबंधित पोस्ट पर कई मिली-जुली प्रतिक्रियाएं आईं, जिनमें यह भी कहा गया कि किसी भी राज्य में कुल विधानसभा सीटों की एक तिहाई और कम से कम 40 सीटों वाली विधान परिषद हो सकती है। इस लिहाज से उत्तराखंड में विधानसभा की सीटों को 70 से बढ़ाकर 120 किए जाने पर ही राज्य में 40 सीटों वाली विधान परिषद हो सकती है। साथ ही हरीश रावत से कुछ लोगों ने पूछा कि वह राज्य में राजनेताओं को ‘एडजस्ट’ करने के लिए इतने फिक्रमंद क्यों हैं ? (डॉ.नवीन जोशी) आज के अन्य ताजा ‘नवीन समाचार’ पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें।

यह भी पढ़ें : हरीश रावत को एक कबीना मंत्री से मिला ऐसा जवाब कि आई राजनीति से सन्यास लेने की नौबत

नवीन समाचार, देहरादून, 13 नवंबर 2021। गत दिवस सत्ता में वापसी के लिए हर कोई दांव आजमाने को उद्यत कांग्रेस के वरिष्ठ नेता हरीश रावत ने हल्द्वानी में कहा था कि यदि भाजपा सरकारी नौकरी लगे 3200 लोगों के नाम भी बता दे तो वह राजनीति छोड़ देंगे। उनके इस बयान को भाजपा या भाजपा सरकार ने तो पता नहीं गंभीरता से लिया अथवा नहीं, अलबत्ता प्रदेश के शिक्षा मंत्री अरविंद पांडेय ने बिना हरीश रावत का नाम लिये जो जवाब दिया है, उसके बाद रावत के समक्ष नैतिकता के आधार पर राजनीति छोड़ने जैसी स्थिति जरूर उत्पन्न हो गई है।

Imageश्री पांडे ने आज अपने सोशल मीडिया खाते पर लिखा है, ‘प्रदेश के एक कांग्रेसी नेता, आम जनमानस के उन्नयन के लिए किये गए कार्यों और युवाओं को दिए गए रोजगार के विषय में भाजपा सरकार पर प्रश्न चिन्ह खड़ा कर रहे हैं जो अत्यंत आश्चर्यजनक है। उन महानुभाव को बताना चाहता हूँ कि यदि मैं शिक्षा विभाग की ही बात करूं तो शिक्षा विभाग ने लगभग 10000 लोगों को रोजगार दिया है। जिसके आंकड़े निम्नवत हैं।

प्राथमिक शिक्षा में 1881 पदों पर नियुक्तियां दे दी गयी है तथा 2648 पदों पर नियुक्ति प्रक्रिया गतिमान है। माध्यमिक शिक्षा में सहायक अध्यापक एलटी के पदों पर 1818 पदों पर तैनाती दे दी गयी है तथा 1431 पदों पर नियुक्ति प्रक्रिया गतिमान है। प्रवक्ता पद पर 1414 पदों पर तैनाती दे दी गयी है तथा 571 पदों पर नियुक्ति प्रक्रिया गतिमान है।

साथ ही गेस्ट टीचरों के 4410 पदों पर तैनाती दे दी गयी है। इन आंकड़ों से प्रदेश की जनता के लिए आपका भ्रामक वक्तव्य धूमिल होता है। साथ ही आपको एक सुझाव देना चाहता हूँ कि आप, सन्यास लेने की बात करने के बजाय अपने सूचनाओं के स्रोत, सही और मजबूत करें।’

शिक्षा मंत्री के इस बयान पर टिप्पणियां भी रोचक आ रही हैं। ‘वॉइस ऑफ हिल्स’ नाम के खाते से टिप्पणी की गई है, ‘उस नेता का नाम तो बताये सर। हम भी जानें कितना पढ़ा-लिखा है और फिर मूल उत्तराखण्डी है या नही, कहीं खाली बदनाम करने वाला बाहरी तो नहीं है।’

बहरहाल, अब देखने वाली बात होगी कि अपेक्षित जवाब मिलने के बाद हरीश रावत कोई टिप्पणी करते हैं, या अपनी आदत के अनुसार तीर छोड़कर फिर चुप्पी साध जाते हैं। जैसा उन्होंने राज्य में ‘दलित के बेटे को मुख्यमंत्री देखने की इच्छा’ जताकर किया था। (डॉ.नवीन जोशी) आज के अन्य ताजा ‘नवीन समाचार’ पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें।

यह भी पढ़ें : अब अपने पूर्व अध्यक्ष के बयानों से सांसत में कांग्रेस, केंद्रीय नेतृत्व की प्रतिद्वंद्विता को लेकर अंदरूनी द्वंद्व भी उजागर…

Kishor upadhyay gave big statement at haridwarडॉ. नवीन जोशी @ नवीन समाचार, नैनीताल, 6 नवंबर 2021। कांग्रेस के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष एवं वरिष्ठ नेता किशोर उपाध्याय ने शनिवार को अपने एक बयान से लगता है कि अपनी पार्टी को न केवल सांसत में डाल दिया है, वरन पार्टी के भीतर पार्टी के केंद्रीय नेतृत्व में राहुल-प्रियंका की प्रतिद्वंद्विता को लेकर चल रहे द्वंद्व को भी सतह पर ला दिया है।

श्री उपाध्याय ने उत्तराखंड के कांग्रेस नेताओं के साथ ही प्रदेश के मुख्यमंत्री एवं अन्य राजनीतिक दलों के नाम भी एक अपील जारी की है, जिसमें प्रियंका गांधी द्वारा यूपी में 40 फीसद टिकट महिलाओं को देने और तीन गैस सिलेंडर मुफ्त देने को कहा है। इससे दो बातें साफ होती हैं कि उत्तराखंड कांग्रेस प्रियंका गांधी की यूपी में की गई इस पहल से अलग राय रखता है। यानी उत्तराखंड कांग्रेस के नेता प्रियंका गांधी की इस राय से इत्तेफाक नहीं रखते हैं। इसीलिए किशोर को प्रियंका के फॉर्मूले को उत्तराखंड में भी लागू करने के लिए पहल करनी पड़ी है। देखें किशोर उपाध्याय ने क्या कहा:

दूसरे, ऐसा कहकर उन्होंने उन्होंने उत्तराखंड कांग्रेस के नेताओं के लिए अब प्रियंका के फैसले को मानने के लिए दबाव भी बना दिया है। यदि उत्तराखंड कांग्रेस ऐसा करती है तो वहां न केवल टिकट वरन जीत का गणित भी बिगड़ सकता है। क्योंकि उत्तराखंड की महिला कांग्रेस की नेत्रियां पूर्व में ही प्रियंका की इस मांग पर जोड़ चुकी हैं कि न केवल 40 फीसद टिकट महिलाओं को मिलने चाहिए, बल्कि जिताऊ सीटों पर भी मिलने चाहिए।

गौरतलब है कि प्रियंका गांधी का बयान वास्तव में केवल उत्तर प्रदेश के लिए है, जहां कांग्रेस की जीत और सरकार बनाने की संभावना नां के बराबर बताई जा रही है। वहां प्रियंका गांधी की योजना है कि उनके इस फॉर्मूले से महिला मतदाता कांग्रेस की ओर आएंगी। वैसे भी वहा कांग्रेस के पास न ही हर सीट पर जिताऊ उम्मीदवार हैं, और न ही जिताऊ सीटें ही हैं। जबकि उत्तराखंड में कांग्रेस राज्य के अब तक के हर 5 वर्ष में सरकार बदलने के चुनावी इतिहास के आधार पर सत्ता की उम्मीद लगा रही है। यदि यहां कांग्रेस ने 40 फीसद यानी 28 सीटें महिलाओं को दे दीं तो उसका चुनावी गणित गणबड़ाना तय है। (डॉ.नवीन जोशी) आज के अन्य ताजा ‘नवीन समाचार’ पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें।

यह भी पढ़ें : फिर रावत-रावत भाई-भाई, 24 घंटे के भीतर फिर हुई हरीश व हरक सिंह रावत में बात…

नवीन समाचार, देहरादून, 24 अक्टूबर 2021। उत्तराखंड की राजनीति में पिछले कुछ दिनों से कुछ अजीब हो रहा है। कहने को लोग सत्तारूढ़ दल में हैं, और करीब विरोधी दल के हैं। ऐसे कई उदाहरण इस बीच नजर आ रहे हैं। इसी कड़ी में दो दिन पूर्व तक एक-दूसरे को महापापी-महा अपराधी तक कह रहे हरीश व हरक रावत, अब रावत-रावत भाई-भाई का गीत गाते नजर आ रहे हैं। पहले हरक ने हरीश को अपना भाई बताया। फिर हरीश ने कल सांप-नेवला का जिक्र करते हुए हरक के लिए भाई साहब शब्द का प्रयोग किया।  देखें हरीश व हरक की 24 घंटे में दूसरी बातचीतः

अब आज हरीश रावत फिर हरक से बात करते हुए, पिटकुल के आंदोलित अवर अभियंताओं के मुद्दे पर हरक से फोन करते कैमरे में रिकार्ड हुए हैं। इस दौरान हरीश हरक से इन अभियंताओं की पैरवी करते हुए अपनी ओर से उन्हें आश्वासन देने की बात कर रहे हैं। साफ है कि यदि हरक हरीश के बताए कार्य करते हैं तो भविष्य में दोनों इस बात का श्रेय लेंगे। सुनें हरीश रावत व हरक सिंह रावत का सांप-नेवला वाला चर्चित वार्तालाप :

बातचीत के बीच में हरीश को पिटकुल के आंदोलित अवर अभियंता समझा रहे हैं कि 102 पदों पर नियुक्ति रोकी गई है। हरीश यही बात हरक को समझाते हुए उनके मामले को हल करने और कैबिनेट में इस बारे में प्रस्ताव लाने को कह रहे हैं। आगे देखने वाली बात होगी कि हरक व हरीश की यह बातचीत जनता के हित में साबित होती है, अथवा भविष्य में कोई नया राजनीतिक गुल खिलाती है। (डॉ.नवीन जोशी) आज के अन्य ताजा ‘नवीन समाचार’ पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें।

यह भी पढ़ें : बिग ब्रेकिंग: हरक के एक और भाजपा सरकार विरोधी बयान के बीच हरीश ने हरक से की बात, कहा-आपदा में सांप और नेवला साथ आ जाते हैं…

नवीन समाचार, रामनगर, 24 अक्टूबर 2021। उत्तराखंड के कबीना मंत्री डॉ. हरक सिंह ने रविवार को एक और बयान दिया है, जिसके बाद भाजपा भी मान कर चल रही है कि वह कभी भी कांग्रेस में जा सकते हैं। अलबत्ता, पार्टी की नीति अभी अन्जान कारणों से ‘वेट एंड वॉच’ की ही नजर आ रही है। हरक ने कहा है कि वह भाजपा सरकार के समय में उतना काम नहीं कर पाए, जितना करना चाहते थे। उनके कामों में लगातार अड़ंगे लगते रहे। फिर भी उन्होंने बेहतर कार्य किया है। देखें हरीश रावत ने क्या कहा:

इस बयान के बीच ही एक और खबर यह है कि कांग्रेस नेता हरीश रावत और यशपाल आर्य ने हरक सिंह से फोन पर लंबी बात की है। यह बात हुई तो रामनगर के सुंदरखाल और चुकम में आई दैवीय आपदा को लेकर है, लेकिन इसकी शुरुआत जिन शब्दों से हरीश रावत ने की, उससे इसका चर्चा में आना तय है। हरीश ने फोन उठाते ही हरक से कहा, अभी आपदा आई है, और आपदा में सांप और नेवला साथ आ जाते हैं। यह तो साफ है कि इशारों में अधिक बात करने वाले हरीश रावत अपने और हरक में से ही एक को सांप और नेवला कह रहे हैं, पर किसे सांप और किसे नेवला कह रहे हैं, यह वह ही बेहतर बता सकते हैं।

बहरहाल, वीडियो में दिख रहा है कि कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल किसी को फोन मिलाकर गढ़वाली में कहते हैं कि दोनों भाइयों को मिला देता हूं। फिर वह हरीश को फोन देते हैं। फोन पर पहले बोलते हुए हरीश कहते हैं, ‘आपदा के समय में सांप और नेवला एक साथ आ जाते हैं। अभी चुकम व सुंदरखाल गांव में हमारे लोगों पर आपदा आई है। आप वन मंत्री हैं, मेरी आपसे प्रार्थना व सलाह है कि आप यहां आकर देखें, जिस समय आप और हम एक ही जगह थे, उस समय हमने इनके विस्थापन का कागज चलाया था। इस समय आपके प्रमुख सचिव या सचिव के पास फाइल पड़ी है। उसे जरा धक्का लगवा दो…’ उधर से शायद हरक कहते हैं कि आपने यह काम पूरा क्यों नहीं किया, इस पर हरीश कहते हैं, ‘देखिए भाई साहब यदि हम यह काम कर जाते तो हमें पुण्य मिलता, आप तो कम के कम इस मामले में पुण्य कमा लो… उनकी लाइट का काम भी करवा दो।’ आज के अन्य ताजा ‘नवीन समाचार’ पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें।

यह भी पढ़ें : हरक ने हाथ जोड़कर मांगी हरीश रावत से मांफी, बताया बड़ा भाई, कहा वे पापी बताएं या अपराधी, सब मांफ, कांग्रेस में वापसी के कयास बढ़े…

नवीन समाचार, देहरादून, 22 अक्टूबर 2021। उत्तराखंड के कुछ राजनेताओं के बारे में कोई भी बात दावे से नहीं की जा सकती। यहां जिम्मेदार पदों पर बैठे ऐसे नेता भी हैं, जो कब क्या कह दें-क्या कर लें, शायद वे खुद भी नहीं जानते। अब प्रदेश के कबीना मंत्री डॉ. हरक सिंह रावत ने शुक्रवार को पत्रकारों से बात करते हुए प्रणव सिंह चैंपियन को छोटा और हरीश रावत को बड़ा भाई बताते हुए कहा है कि उनकी किसी बात का वह बुरा नहीं मानते। उन्हें सौ खून भी माफ हैं।

खासकर हरीश रावत के लिए हाथ जोड़ते हुए कहा कि वह उनसे माफी मांगते हैं। अलबत्ता जोड़ा कि वह माफी इसलिए नहीं मांग रहे कि उन्हें कांग्रेस पार्टी में जाना है, बल्कि इसलिए कि वह उनके बड़े भाई हैं। हरीश उन्हें चोर कहें, अपराधी कहें, हरीश के शब्द उनके लिए फूल व आशीर्वाद की तरह हैं। आप भी देखें और सुनें कि हरक ने क्या कहा :

उल्लेखनीय है कि हरीश रावत ने कहा है कि बागी पापी व अपराधी हैं। वे मांफी मांगें, तभी कांग्रेस में वापसी कर सकते हैं। दूसरी ओर डॉ. हरक सिंह रावत की लंबे समय से कांग्रेस में वापसी के कयास लग रहे हैं। हालांकि अब तक भी हरक कांग्रेस में वापसी करने से इंकार कर रहे हैं। वह अगला विधानसभा चुनाव न लड़ने की इच्छा भी जता चुके हैं। अलबत्ता उनके खुद के साथ ही पुत्रवधु के लिए टिकट की जुगत करने की भी चर्चा है। (डॉ.नवीन जोशी) आज के अन्य ताजा ‘नवीन समाचार’ पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें।

यह भी पढ़ें : ‘खामोशी का मतलब लिहाज भी होता है….लोग इसे कमजोरी भी समझ लेते हैं’ संजीव का ट्वीट हो रहा वायरल

डॉ. नवीन जोशी @ नवीन समाचार, नैनीताल, 13 अक्टूबर 2021। भाजपा छोड़कर कांग्रेस पार्टी में घर वापसी करने के साथ नैनीताल के विधायक पद से इस्तीफा देने के बाद संजीव आर्य पांच दिन के बाद सोशल मीडिया पर प्रकट हुए हैं। अपनी प्रोफाइल पर विधायक की जगह पूर्व विधायक संशोधित करने के साथ संजीव ने दो लाइनें लिखी हैं, जो वायरल हो रही हैं। संजीव ने लिखा है, ‘खामोशी का मतलब लिहाज भी होता है….लोग इसे कमजोरी भी समझ लेते हैं’। लोग इसके तरह-तरह के अर्थ लगा रहे हैं, वहीँ इस पर तरह-तरह की टिप्पणियां भी आ रही हैं।

इस पर पहली प्रतिक्रिया के रूप में खुशाल हाल्सी ने कुमार विश्वास की एक वीडियो क्लिपिंग लगाई है, जिसमें कुमार कह रहे हैं, ‘दुनियां की आधी लडाइयां अधैर्यता के कारण होती हैं, बड़ी लड़ाई जीतने के लिए शौर्य के साथ धैर्य की भी आवश्यकता होती है’। वहीं दीपक पांडे ने लिखा है, कुछ तो लोग कहेंगे, लोगों का काम है कहना…। अरुण कुमार ने टिप्पणी की है, ‘नैनीताल और बाजपुर दोनों ही सीट तो आप जीत रहे थे पता नहीं ऐसा कौन सा मंदबुद्धि सलाहकार निकला आपका जिसके कहने पर आपने पार्टी ही बदल ली भैया अपने दो कौड़ी के सलाहकारों को बदलिए नहीं तो आप की राजनीति खत्म करवा कर ही मानेंगे यह लोग’। इसके अलावा भाष्कर जोशी का कहना है, ‘नेता जी के पार्टी बदलने से सबसे ज्यादा समस्या तो चमचों को होती है। बेचारों को नेताजी के साथ-साथ पार्टी बदलनी पड़ती है।’

इससे इतर भी टिप्पणियां आ रही हैं। चंद्रशेखर ने टिप्पणी की है, ‘आप इसी तरह जनता की सेवा करते रहिए जनता आपके साथ है। आप जहां हम वहां’। इसके अलावा ‘जनता का भी लिहाज करना चाहिए’ और ‘बड़ी जल्दी याद आयी बीजेपी छोड़ने की’, तथा ‘जनता अब बेवकूफ नहीं, या तो बीजेपी नहीं तो आप….’ जैसी टिप्पणियां भी आ रही हैं। आज के अन्य ताजा ‘नवीन समाचार’ पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें।

यह भी पढ़ें : इस बार बुरे फंसे हरीश रावत, काबीना मंत्रीं को कहा ‘उज्याड़ू बल्द व बकरियां’ तो मिला करार जवाब, ‘प्यारी भुली-चेली’ पर लौट आए..

रेखा आर्य ने लंबा पोस्‍ट लिखकर हरदा को घेरा, हरदा ने लिखा उज्‍याड़ू बल्‍द, बकरियां मुझसे पूछ रहे सवालडॉ. नवीन जोशी @ नवीन समाचार, नैनीताल, 11 अगस्त 2021। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता व पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत सोशल मीडिया और उससे पहले खुले पत्र लिखने में माहिर जाने जाते हैं। इसका उन्हें दीर्घकालीन अनुभव भी रहा है, और ऐसा कम ही रहा है कि उनके क्षेत्र से ही आने वाले उत्तराखंड परिवर्तन पार्टी के अध्यक्ष पीसी तिवारी के अलावा कभी किसी ने उन्हें उनके पत्रों की भाषा में ही जवाब देने का साहस किया हो। लेकिन इस बार वह कभी अपनी पूर्व सहयोगी रही काबीना मंत्री रेखा आर्या से उलझ पड़े हैं तो उन्हें करार जवाब मिल रहे हैं। इस आरोप-प्रत्यारोप में जैसी फजीहत रावत की हो रही है, ऐसे में उम्मीद की जा रही है कि रावत अब अगला जवाब शायद न देना ही उचित समझें।

गत दिनों भाजपा नेता अनिल बलूनी और त्रिवेंद्र सिंह रावत से उलझने के बाद बैकफुट पर आए हरीश रावत से जुड़े ताजा विवाद की शुरुआत उनके द्वारा महिला सशक्तीकरण विभाग की टेक होम राशन योजना पर टिप्पणी करने से हुई। उन्होंने मुख्यमंत्री को संबोधित करते हुए आरोप लगाया कि ‘सहयोगी की बहुत चहेती कंपनी’ को काम देकर महिलाओं के सपनों को लूट लिया, बरबाद कर दिया। यह टिप्पणी भी की कि ‘आपके दांत भी खाने और दिखाने के और ही हैं’। साथ ही इसी बीच दूसरी ओर रावत ने आगामी विधानसभा चुनाव को उनका (रावत का) आखिरी चुनाव बताकर इमोशनल कार्ड खेलने की भी कोशिश की।

इस बयान पर मुख्यमंत्री ने तो कोई प्रतिक्रिया नहीं दी, पर चूंकि मामला महिला एवं बाल विकास मंत्री रेखा आर्य के विभाग का था, इसलिए उन्होंने मोर्चा संभाला और हरीश रावत के लिए सोशल मीडिया पर ‘सेवानिवृत्तत दाज्यू’ शब्द और हरीश रावत के मुख्यमंत्री रहते उनके पैरों में पड़कर गिड़गिड़ाती महिला के चित्रों का प्रयोग करते हुए लंबी पोस्ट लिखी। लिखा कि हरीश रावत को तो जनता 2017 में ही सेवानिवृत्त कर चुकी है। साथ ही कंपनी को काम देने पर जवाब देते हुए लिखा कि रावत तो ‘टेंडर’ सुनते ही बोल जाते हैं, क्योंकि उनका पूरा कार्यकाल सेवा की बजाय टेंडर दिलाने में ही बीता है। पोस्ट में रेखा ने रावत को ‘डेनिस वाले हरदा’ बोलते हुए लाखों महिलाओं के सपनों को बरबाद करने का आरोप भी जड़ दिया।

देखें रेखा आर्या की पोस्ट:

रेखा आर्य की इस पोस्ट पर हरीश रावत भी कहां चुप रहने वाले थे। उन्होंने रेखा आर्य को नाम लिए बिना लिखा, ‘कुछ उज्याड़ू बल्द और उज्याड़ू बकरियां’ उनसे पूछ रहे हैं कि उनका कौन सा चुनाव आखिरी है। जब-जब उत्तराखंडियत पर आक्रमण होगा व किसानों और दलितों के हितों पर चोट पहुंचेगी, महिलाओं का निवाला छीना जाएगा, वह श्मशान से भी आकर खड़े हो जाएंगे। साथ ही ‘खेला होवे’ शब्द का भी प्रयोग किया।

देखें हरीश रावत की पोस्ट:

रावत की इस पोस्ट पर रेखा आर्य ने फिर लंबी पोस्ट लिखी और जैसे कह दिया कि वह इस बार चुप नहीं बैठेंगी। उन्होंने इस बार रावत के लिए ‘मुनठेपी व मारखुली बल्द’ शब्द का प्रयोग करते हुए लिखा, ‘दाज्यू उज्याड़ू बल्द और बकरियाँ तो एक बार आवाज से वापस भी आ जाते हैं लेकिन हमारे वहां एक और खतरनाक बल्द होता है जिसे कहते हैं ‘मारखूली- मुनठेपी बल्द’ ये बल्द अपने आसपास किसी को फटकने नहीं देता और हमेशा खुद का ही पेट भरने में रहता है जिस की प्रवृत्ति से हार कर सभी उसके इर्द-गिर्द से दूर हो जाते हैं, और अंत में वह अकेला ही रह जाता है।’

यह भी लिखा, ‘अबकी दाज्यू बोले खेल खेला होवे, दाज्यू होवे तो जरूर लेकिन पहले अपनी पार्टी से करो। अभी तो आपकी पहली लड़ाई अपनी पार्टी से है अपना चेहरा बनाने की। अब तक आप स्वयंभू मुख्यमंत्री चेहरा जो ठैरे।’ यह भी लिखा, ‘अब जब उत्तराखंडियत की नही मुख्यमंत्री पद की बात होती है, तब-तब आप जवान हो जाते हो और जब-जब आप जवान होने की कोशिश करते हो तब-तब आप की पार्टी के ही नेता जो आपके टॉप 10 के खास थे वह कह देते हैं कि अब आपके कांपते हाथ सत्ता नहीं संभाल सकते। दाज्यू ये आपकी पार्टी के लोग आपका ऐसा उपहास करते है जिससे हमें भी तकलीफ होती है। दाज्यू आप बुढ़ापे में ऐसी हरकत करते ही क्यों हो, आप का बुढ़ापा और भी खराब होने वाला है। जिस दिन रामपुर तिराहा, मंसूरी, खटीमा जैसे शर्मनाक गोली कांड हुए उस दिन आपके भीतर की उत्तराखंडियत क्यों अवतरित नहीं हुई’
देखें रेखा आर्य की पोस्ट:

इस द्वंद्व की अगली कड़ी में हरीश रावत ठंडे पड़ते नजर आ रहे हैं। उन्होंने अब पूरी पोस्ट कुमाउनी में भावनात्मक तरीके से शायद इमोशनल कार्ड चलते हुए लिखा है, ‘मेरि प्यारी-प्यारी भुली, दल बदलनक हैबेर पैलिक मैं त्वैंकें आपड़ि चेलि मानछी। जदिन विधानसभा में शक्ति परीक्षण छी, मैंकें अन्तिम दमतक यो भरोस छी कि सोमेश्वरक म्यरि चेलि, म्यर बगल में आबेर हाथ ठाड़ करैलि और कैलि कका चिंता नीं करो मैं छौ न…’। इस तरह रावत ‘उज्याड़ू बकरी’ को अब अपनी प्यारी बहन और पूर्व की बेटी कहने लगे हैं। और यह भी कह रहे हैं कि रेखा के उत्तराखंडी वस्त्र आभूषणों की प्रतियोगिता कराने पर उन्होंने उनकी प्रशंषा भी की थी। अब देखने वाली बात होगी कि रेखा उनकी इस भावनात्मक पोस्ट को पढ़ने के बाद शांत हो जाती हैं या और जवाब देती हैं…

देखें हरीश रावत की पोस्ट:

यह भी पढ़ें : ‘चार कंधों’ से ‘जनाजे’ तक पहुंचे भाजपा-कांग्रेस के बयान बहादुरों के बिगड़े बोल

Dushyant Kumar Gautam becomes Uttarakhand incharge of BJPडॉ. नवीन जोशी @ नवीन समाचार, नैनीताल, 30 जुलाई 2021। भाजपा के राष्ट्रीय महामंत्री और उत्तराखंड के प्रदेश प्रभारी दुष्यंत कुमार गौतम ने उत्तराखंड कांग्रेस में एक अध्यक्ष के साथ चार कार्यकारी अध्यक्ष बनाने पर एक समाचार चैनल पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा, ‘किसी भी व्यक्ति को अंतिम जगह ले जाने के लिए चार कंधो की जरूरत पड़ती है। यही हालत कांग्रेस की हो गई है। उसने चार कार्यकारी अध्यक्ष बनाकर पांचवें को ले जाने का इंतजाम कर लिया है। कांग्रेस इतनी कमजोर हो गई है कि उसे अब चार कंधों की जरूरत पड़ने लग गई है।’ उन्होंने आगे कहा, ‘कांग्रेस अब मात्र 25 फीसदी बची है, उत्तराखंड में सल्ट उपचुनाव में उसकी हार इसी का परिणाम है और आगे भी यही होने वाला है।’

भाजपा के सांसदों को इस्तीफा दे देना चाहिए – धीरेंद्र प्रताप सिंह | Khabar  Uttarakhand Newsगौतम ने अपने इस बयान में सब कुछ कहते हुए भी जिस शब्द को किसी तरह कहने से बचा लिया, उत्तराखंड कांग्रेस के वरिष्ठ प्रवक्ता धीरेंद्र प्रताप ने वही शब्द कहकर राजनीति में अपेक्षित शब्दों की मर्यादा लांघ दी। उन्होंने इस बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा, ‘ये खुद को पार्टी विद डिफरेंस कहने वाले, राम के नाम पर सियासत करने वाले लोगों का असल आचरण कैसा है ये उनकी अर्मायादित भाषा से पता लगता है। कांग्रेस का कहना है कि ये जनाजा ले जाने वाले लोग नहीं कांग्रेस के ‘पंच प्यारों’ की टीम है, जो 2022 में भाजपा का ‘जनाजा’ निकालेंगे।’

21 दिसंबर को विधानसभा घेराव के लिए दून पहुंचेंगे कांग्रेस प्रदेश प्रभारी देवेंद्र  यादवगौतम का बयान कांग्रेस को इस कदर चुभा है कि पार्टी के प्रदेश प्रभारी देवेंद्र यादव भी इस पर बोले बिना न रह सके। उन्होंने गौतम के बयान पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा, ‘भाजपा पहले अपनी चिंता करे। भाजपा ने साढ़े चार साल में तीन मुख्यमंत्री बदल दिए और अब एक बार फिर अध्यक्ष को भी बदलने की तैयारी है। कांग्रेस अपने घर और उत्तराखंड की जरूरतों को जानती है। इसी लिहाज से लोगों की राय लेकर कांग्रेस ने (चार कार्यकारी अध्यक्ष) बनाकर ये फेरबदल किया है।’ आज के अन्य ताजा ‘नवीन समाचार’ पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें।

डॉ. नवीन जोशी @ नवीन समाचार
‘नवीन समाचार’ विश्व प्रसिद्ध पर्यटन नगरी नैनीताल से ‘मन कही’ के रूप में जनवरी 2010 से इंटरननेट-वेब मीडिया पर सक्रिय, उत्तराखंड का सबसे पुराना ऑनलाइन पत्रकारिता में सक्रिय समूह है। यह उत्तराखंड शासन से मान्यता प्राप्त, अलेक्सा रैंकिंग के अनुसार उत्तराखंड के समाचार पोर्टलों में अग्रणी, गूगल सर्च पर उत्तराखंड के सर्वश्रेष्ठ, भरोसेमंद समाचार पोर्टल के रूप में अग्रणी, समाचारों को नवीन दृष्टिकोण से प्रस्तुत करने वाला ऑनलाइन समाचार पोर्टल भी है।
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