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मुख्यमंत्री जी, ऐसे ठगों से डरियो…

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डॉ. नवीन जोशी @ नवीन समाचार, नैनीताल, 13 जुलाई 2021। ऋषिकेश में आभूषण विक्रेता से नौ लाख रुपए की ठगी के आरोप में गिरफ्तार योगी प्रियव्रत अनिमेष की आध्यात्म एवं नैतिक आख्यानों पर आधारित पुस्तक ‘मानस मोती’ का शुक्रवार 10 जुलाई को मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने बीजापुर अतिथि गृह में विमोचन किया था। मुख्यमंत्री ने बकायदा इस मौके पर कहा कि योगी प्रियव्रत द्वारा लिखित यह पुस्तक जीवन के प्रत्येक पहलु पर प्रकाश डालने के साथ ही युवाओं को आध्यात्मिक एवं नैतिक ज्ञान की प्रेरणा प्रदान करने में मददगार होगी। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि मानस मोती में लघु कथाओं के माध्यम से दी गई सारगर्भित शिक्षायें समाज को भी प्रेरणा प्रदान करेंगी।

बहरहाल, यह ठग तो पकड़ा गया। उसे मुख्यमंत्री के करीब तक लाने और मुख्यमंत्री से उसकी किताब का विमोचन करवाने वाले की पहचान हेतु जांच के आदेश भी दे दिए गए हैं। मुख्यमंत्री बनते ही ऐसे न जाने कितने ठग मुख्यमंत्री के करीब आ गए होंगे, या आने की कोशिश कर रहे होंगे। मुख्यमंत्री को ऐसे ठगों से बचना सबसे बड़ी चुनौती होगा। उन्हें पहचानना होगा कौन वास्तव में राज्य का भला चाहने वाले लोग हैं, और कौन बुरे।

गौरतलब है कि सरकारें व मुख्यमंत्री चाहे जितने बदल जाएं, ठगों की सरकारों से दूरी नहीं बढ़ती। चाहे कोई सरकार, कोई मुख्यमंत्री आ जाए, सबसे पहले वे ही करीब जा पाते हैं। और वास्तविक लोग अपनी अकड़ में दूर ही शायद इस इंतजार में रह जाते हैं कि सरकार या मुख्यमंत्री स्वयं उनकी प्रतिभा को पहचानेंगे और खुद उन्हें बुलाएंगे। ऐसा कम ही होता है। किंतु जैसा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दौर में हो रहा है। जिस तरह का उनका अपनी मंत्री परिषद के लिए और पद्म पुरस्कारों के लिए चयन का तरीका होता है, उसके बाद ऐसी उम्मीद की जाने लगी है। किंतु जिस तरह उत्तराखंड के मुख्यमंत्री के पास भी सबसे पहले ठगों की पहंुच बनने लगी है, इससे उत्तराखंड वासियों की उम्मीदों को झटका भी लग सकता है।

उल्लेखनीय है कि गढ़वाल ज्वेलर्स के हितेंद्र सिंह पंवार निवासी 45 देहरादून रोड ऋषिकेश ने शनिवार को ऋषिकेश कोतवाली में प्रार्थना पत्र देकर बताया था कि उनकी पत्नी की कुछ मानसिक समस्या है, जिसका फायदा उठाकर महिंद्र रोड उर्फ योगी प्रियव्रत अनिमेष ने, जिसकी पुस्तक का मुख्यमंत्री धामी ने मुख्यमंत्री बनने के सप्ताह भर के भीतर ही विमोचन किया था, आध्यात्मिक इलाज से उपचार के बहाने कई बार उन्हें अपने निवास नेचर विला विल नंबर 21 में बुलाकर खाने की दवाइयां दी और सम्मोहित कर अलग-अलग तिथियों में दिसंबर 2019 से अब तक एक रुद्राक्ष की माला, सोने का ब्रेसलेट, रुद्राक्ष का ब्रेसलेट, सोने की माला, सोने की 4 अंगूठी, तुलसी की माला तथा कुछ रुपए नगद भी लिए। पुलिस ने उसे गिरफ्तार उससे काफी सामग्री बरामद भी कर ली है। आज के अन्य ताजा ‘नवीन समाचार’ पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें।

यह भी पढ़ें : तीन माह में पूर्ण टीकाकरण, कोरोना, कांवड़ व चार धाम यात्रा व पिछली भाजपा सरकारों पर खुलकर व मंझे हुए राजनेता की तरह बोले सीएम धामी..

नवीन समाचार, नई दिल्ली, 11 जुलाई 2021। उत्तराखंड के नवोदित मुख्यमंत्री ने रविवार को नई दिल्ली में एक राष्ट्रीय समाचार चैनल को साक्षात्कार दिया। साक्षात्कार में युवा व कम अनुभवी होने के आरोपों के बावजूद धामी ने एक मंझे हुए राजनेता की तरह टीवी एंकर के सभी सवालों के साफ-साफ जवाब दिये। कहा कि उनकी प्राथमिकता है कि कोरोना से किसी की भी जान न जाए। साथ ही जनभावनाओं का भी सम्मान हो।

उन्होंने राज्य में 50 फीसद लोगों को कोरोना का टीका लग जाने का दावा करते हुए अगले तीन माह में सभी लोगों का टीकाकरण पूरा कर लिए जाने का विश्वास बताया। उत्तराखंड में पार्टी की गुटबाजी को सिरे से नकारते हुए कहा कि उन्हें सभी का सहयोग मिल रहा है। वह उम्र एवं अनुभव में सभी से छोटे हैं, इसलिए सभी के पास जा रहे हैं। कांग्रेस व आप से चुनौती के प्रश्न पर उन्होंने कहा कि अभी कांग्रेस या आप नहीं, बल्कि कार्यों को पूरी करना, युवाओं को रोजगार व स्वरोजगार दिलाना, गरीबों के लिए टीका व अन्य योजनाओं का लाभ दिलाना उनके लिए चुनौती है। राज्य में नेताओं के द्वारा की जाने वाली टांग खिंचाई, दो मुख्यमंत्रियों को बदले जाने व उन्हें कम समय मिलने के सवाल को नकारते हुए बोले, पिछले मुख्यमंत्रियों का कार्यकाल भी उनके कार्यकाल के साथ में ही जुड़ा है। पार्टी व्यक्ति आधारित पार्टी नहीं है। यहां भूमिकाएं बदलती हैं, पर सभी लोग मिलकर कार्य करते हैं। मोदी जी ने उत्तराखंड में जितना काम किया है, देश के इतिहास में उतना कार्य कभी भी नहीं हुआ है।

इसके अलावा पत्रकारों से बात करते हुए उन्होंने कहा कि उत्तराखण्ड में सस्ती और 24 घंटे बिजली उपलब्ध कराने के लिए लगातार कार्य कर रहे हैं। शुरु की गई योजनाओं को पूरा करना, लोगों को रोजगार देने के साथ ही भ्रष्टाचार मुक्त शासन देना उनकी सरकार का एजेंडा है। (डॉ. नवीन जोशी) आज के अन्य ताजा ‘नवीन समाचार’ पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें।

 

यह भी पढ़ें : मोदी, कोविंद, शाह, राजनाथ, पुरी, पांडे, कोश्यारी आदि नेताओं से मिले धामी, राज्य के लिए लिया ‘आर्शीवाद’

डॉ. नवीन जोशी @ नवीन समाचार, नैनीताल, 10 जुलाई 2021। राजनीति क्रिकेट की तरह अनिश्चितताओं व अवसरों पर निर्भर करती है। ठीक एक सप्ताह पहले शनिवार के पूर्वाध तक एक आम विधायक रहे पुष्कर सिंह धामी ने सोचा भी नहीं होगा कि अगले शनिवार को वह उड़कर दिल्ली पहुंचेंगे और प्रधानमंत्री, राष्ट्रपति सहित गृह, रक्षा जैसे मंत्रालयों के कई केंद्रीय मंत्रियों से मिल रहे होंगे।

बहरहाल, आज मुख्यमंत्री के रूप में पुष्कर सिंह धामी ने नई दिल्ली में सबसे पहले प्रधानमंत्री, फिर राष्ट्रपति तथा इसके बाद केंद्रीय मंत्रियों से मुलाकात की। प्रधानमंत्री मोदी ने मुलाकात के दौरान धामी को स्नेह-रूपी आशीर्वाद के साथ मुख्यमंत्री बनने पर बधाई दी और आशा व्यक्त की कि उनके युवा नेतृत्व में राज्य का तेजी से चहुँमुखी विकास होगा। साथ ही मोदी ने धामी को राज्य के विकास, कोरोना की सम्भावित तीसरी लहर, चार धाम यात्रा और कांवड़ यात्रा के विषय पर चर्चा कर मार्गदर्शन दिया, और राज्य के विकास के लिए हर संभव मदद का भरोसा दिया। इसके अलावा धामी ने केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह को शिष्टाचार भेंट करते हुए आज उनके जन्मदिन की शुभकामनाएं दी तथा उनके स्वस्थ एवं दीर्घायु होने की कामना की। इस मौके पर सुरक्षा संबंधित विषयों पर चर्चा हुई।

इसके अलावा केन्द्रीय गृहमंत्री अमित साह से शिष्टाचार भेंट करते हुए मुख्यमंत्री ने राज्य से संबंधित विभिन्न बिंदुओं के साथ ही कोरोना महामारी, कांवड़ यात्रा और चारधाम यात्रा से संबंधित विषयों पर विचार-विमर्श किया। उन्होंने गृहमंत्री से राज्य हेतु 2 एयर एंबुलेंस, गैरसैंण में आपदा प्रबंधन शोध संस्थान की स्थापना, आपदा प्रभावित गांवों का विस्थापन एसडीआरएफ निधि के अन्तर्गत किये जाने का आग्रह किया।

धामी ने केन्द्रीय मंत्री डॉ. एमएन पांडे से भी शिष्टाचार भेंट की और उनसे क्षेत्रीय सम्पर्क योजना के अंतर्गत हरिद्वार से हेलीकॉप्टर के माध्यम से हवाई सेवाएं प्रदान करने हेतु हेलीपोर्ट बनाये जाने के लिए भूमि राज्य सरकार को निःशुल्क उपलब्ध कराने का अनुरोध किया।

साथ ही केंद्रीय मंत्री हरदीप पुरी से मिलकर स्वच्छ भारत मिशन-2 के अन्तर्गत ठोस अपशिष्ट प्रबंधन परियोजनाओं के लिए उत्तराखण्ड राज्य के बजट आवंटन को 89 करोड़ से बढ़ाते हुए 150 करोड करने का अनुरोध किया, और उन्हें बताया कि आवास और शहरी कार्य मंत्रालय, भारत सरकार के मार्गदर्शन एवं सहयोग से उत्तराखंड सरकार द्वारा स्वच्छ भारत मिशन के तहत राज्य के शहरी क्षेत्रों के अंतर्गत निर्धारित लक्ष्यों को गंभीरता से पूर्ण किये जाने के प्रयास किये जा रहे हैं।

इसके अलावा धामी ने केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर से शिष्टाचार भेंट कर उन्हें उत्तराखंड में किसानों की आय में वृद्धि के लिये प्रदेश सरकार द्वारा किए जा रहे प्रयासों की जानकारी दी। साथ ही राजय में सहकारी समितियों को व्यवसायिक इकाई के रूप में स्थापित किए जाने के उद्देश्य से हिमालयी एवं पूर्वोत्तर राज्यों के लिए राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम के ‘सीएसआईएसएसी कंपोनेंट’ में अनुमन्य अनुदान को 20 फीसद के स्थान पर 40 फीसद करवाने का अनुरोध किया।

उल्लेखनीय है कि इससे पूर्व धामी ने शनिवार शाम कई दिनों से दिल्ली में प्रवास कर रहे महाराष्ट्र के राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी से भी शिष्टाचार भेंट की और उनका आशीर्वाद लिया। इससे आगे भी मुख्यमंत्री धामी का अन्य केंद्रीय मंत्रियों से शिष्टाचार भेंट एवं उनसे राज्य के लिए ‘आशीर्वाद’ लिए जाने का सिलसिला जारी है।

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यह भी पढ़ें : धामी सरकार ने किया विभागों का बंटवारा, सीएम ने खुद से हटाए कई विभाग…

नवीन समाचार, देहरादून, 06 जुलाई 2021। उत्तराखंड की नवगठित पुष्कर धामी सरकार के मंत्रियों में विभागों व मंत्रालयों का बंटवारा हो गया है। मुख्यमंत्री धामी ने मंत्रिपरिषद, कार्मिक, सतर्कता, गृह, वित्त, राज्य संपत्ति, न्याय, सूचना, सचिवालय प्रशासन, सामान्य प्रशासन, औद्योगिक विकास, खनन, तकनीकी शिक्षा, नागरिक उड्डयन एवं नियोजन विभाग मिलकर केवल 15 विभाग ही अपने पास रखे हैं। खास बात ये है कि तीरथ सरकार में सीएम के पास गृह, वित्त, लोनिवि व स्वास्थ्य सहित 20 विभाग थे। धामी सरकार में प्रदेश को चार साल बाद स्वास्थ्य मंत्री व लोनिवि मंत्री मिला है। कैबिनेट मंत्री सतपाल महाराज को सिंचाई एवं लघु सिंचाई, जलागम प्रबंधन, संस्कृति, धर्मस्व एवं पर्यटन व लोक निर्माण विभाग तथा डॉ. धन सिंह रावत को सहकारिता, प्रोटोकॉल, आपदा प्रबंधन एवं पुर्नवास, उच्च शिक्षा तथा चिकित्सा स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग दिए गये हैं। भाजपा की सरकार बनने के बाद अब तक प्रदेश में स्वास्थ्य मंत्री का प्रभार सीएम के पास था। अब सीएम के बाद काबीना मंत्री सतपाल महाराज के पास सबसे ज्यादा आठ विभाग हैं। जबकि हरक सिंह रावत और सुबोध उनियाल को सात-सात, यशपाल आर्य और अरविंद पांडे को छह-छह, बंशीधर भगत व डॉ. धन सिंह रावत को पांच-पांच तथा बिशन सिंह चुफाल, रेखा आर्य, गणेश जोशी और स्वामी यतीश्वरानंद को चार-चार विभाग मिले हैं।

वहीं, डॉ. हरक सिंह रावत को वन, पर्यावरण संरक्षण एवं जलवायु परिवर्तन, श्रम, कौशल विकास एवं सेवायोजन, आयुष एवं आयुष शिक्षा तथा ऊर्जा, बंशीधर भगत को विधायी एवं संसदीय कार्य, खाद्य, नागरिक आपूर्ति, उपभोक्ता मामले, शहरी विकास, आवास तथा सूचना एवं विज्ञान प्रौद्योगिकी, यशपाल आर्य को परिवहन, समाज कल्याण, अल्पसंख्यक कल्याण निर्वाचन व आबकारी, बिशन सिंह चुफाल को पेयजल, ग्रामीण निर्माण एवं जनगणना, सुबोध उनियाल को कृषि एवं कृषक कल्याण, अरविंद पांडे को बेसिक व माध्यमिक विद्यालयी शिक्षा, खेल एवं युवा कल्याण, पंयायती राज व संस्कृत शिक्षा, गणेश जोशी को सैनिक कल्याण, औद्योगिक विकास, लघु, सूक्ष्म एवं मध्यम उद्यम, रेखा आर्या को महिला सशक्तीकरण एवं बाल विकास, पशुपालन, दुग्ध विकास एवं मत्स्य पालन तथा यतीश्वरानंद को भाषा, पुर्नगठन, गन्ना विकास एवं चीनी, उद्योग तथा ग्राम्य विकास विभाग दिए गए हैं। इस प्रकार मुख्यमंत्री धामी ने कमोबेश सभी मंत्रियों को उनके पूर्व विभाग दिए हैं, जबकि तीरथ सिंह रावत द्वारा अपने पास रखे लोनिवि व स्वास्थ्य विभाग मंत्रियों को दे दिए हैं। (डॉ.नवीन जोशी) आज के अन्य ताजा ‘नवीन समाचार’ पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें।

 

यह भी पढ़ें : मंत्रियों को बंटे विभागों से पहले जिले, देखें किसे मिला आपके जिले का प्रभार

नवीन समाचार, देहरादून, 06 जुलाई 2021। पुष्कर धामी में मंत्रियों को विभागों के बंटवारे से पहले जिलों का बंटवारा कर दिया गया है। बंटवारे में सर्वाधिक वरिष्ठ मंत्री सतपाल महाराज को दो जिले रुद्रप्रयाग व चमोली, डॉ. हरक सिंह रावत को टिहरी, बंशीधर भगत को देहरादून, यशपाल आर्य को नैनीताल, बिशन सिंह चुफाल को अल्मोड़ा, सुबोध उनियाल को पौड़ी, अरविंद पांडे को दो जिले चंपावत व पिथौरागढ़, गणेश जोशी को उत्तरकाशी, डॉ. धन सिंह रावत को हरिद्वार, रेखा आर्य को बागेश्वर व यतीश्वरानंद को ऊधमसिंह नगर जनपद का प्रभार दिया गया है। प्रदेश के मुख्य सचिव के हस्ताक्षरों से मंगलवार को यह आदेश जारी हुआ है। (डॉ.नवीन जोशी) आज के अन्य ताजा ‘नवीन समाचार’ पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें।

 

यह भी पढ़ें : दिखने लगे पूत के पांव पालने में ! राज्य को आगे ‘पुश’ करने लगी पुष्कर सरकार, लिए सात बड़े निर्णय..

नवीन समाचार, देहरादून, 05 जुलाई 2021। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कार्यभार संभालने के दूसरे दिन ही प्रदेश के मुख्य सचिव को बदलने सहित कई महत्वपूर्ण निर्णय राज्य की सरकारी मशीनरी को कड़ा तथा राज्य की जनता को मीठा संदेश दे दिया है। इसी कड़ी में सोमवार को बीजापुर अतिथि गृह में शासन के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ बैठक कर मुख्यमंत्री ने निर्देश दिये कि राज्य में विभिन्न रिक्त पदों पर भर्ती प्रक्रिया जल्द शुरू की जाये, तथा पूरी भर्ती प्रक्रिया के लिए निश्चित समय सीमा तय की जाये। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेशवासियों को रोजगार एवं स्वरोजगार से जोड़ना राज्य सरकार की शीर्ष प्राथमिकताओं में है। अधिक से अधिक लोगों को स्वरोजगार से जोड़ने के लिए पूरी योजना बनाई जाये। उन्होंने कहा कि कोविड पर प्रभावी नियंत्रण के लिए सभी पुख्ता व्यवस्थाएं रखी जाए।

इसके अलावा भी मुख्यमंत्री ने सोशल मीडिया पर सरकार द्वारा लिए गए सात निर्णयों की जानकारी दी है। बताया है कि राज्य में अतिथि शिक्षकों का वेतन 15 हजार से बढ़ाकर 25 हजार किया जाएगा, तथा उन्हें उनके गृह जनपदों में भी प्राथमिकता के आधार पर तैनाती दी जाएगी। राजकीय पॉलीटेक्निक में सालों से संविदा पर कार्यरत कार्मिकों को सेवा में व्यवधान के बावजूद पूर्व की भांति सुचारू रखा जाएगा। मनरेगा कर्मियों के रिक्त पदों पर बाह्य स्रोत के माध्यम से आउटसोर्सिंग के जरिए भर्ती की जाएगी। उन्हंे हड़ताल की अवधि का वेतन भी दिया जाएगा। पुलिस कर्मियों के ग्रेड वेतन और नियमावली का परीक्षण किया जाएगा। इसके लिए सुबोध उनियाल की अध्यक्षता में मंत्रिमंडल की उप समिति का गठन किया जाएगा। समिति में डॉ. धन सिंह रावत व रेखा आर्य भी होंगे। जिला रोजगार कार्यालय में जनपद की आउटसोर्सिंग एजेंसी का कार्यालय स्थापित किया जाएगा, ताकि बेरोजगारों को अपने जिलों में ही रोजगार मिल सके। विभिन्न विभागों में रिक्त पड़े 20-22 हजार पदों और बैकलॉग की रिक्तियों सहित सभी पदों पर नियुक्तियां की जाएंगी। उपनल कार्मिकों की मांगों को लेकर डॉ. हरक सिंह रावत की अध्यक्षता एवं गणेश जोशी व डॉ. धन सिंह रावत की सदस्यता में उप समिति का गठन किया जाएगा।

यह भी पढ़ें : सफल रहा ‘डैमेज कंट्रोल’, नये-11वें सीएम धामी ने पुरानी ‘टीम-11’ के साथ ली शपथ..

नवीन समाचार, देहरादून, 04 जुलाई 2021। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने राज्य के सबसे कम उम्र के युवा मुख्यमंत्री के रूप में रविवार शाम शपथ ले ली गई है। देहरादून स्थित राजभवन में आयोजित हुए कार्यक्रम में उनके साथ मंत्रियों ने भी शपथ ली। सबसे पहले सर्वाधिक नाराज बताए जा रहे सतपाल महाराज और डॉ. हरक सिंह रावत ने तथा उनके बाद बंशीधर भगत, यशपाल आर्य, सुबोध उनियाल, अरविंद पांडे, बिशन सिंह चुफाल, डॉ. धन सिंह रावत, रेखा आर्य व स्वामी यतीश्वरानंद ने मंत्री पद की शपथ ली। इस तरह तीरथ सरकार के मंत्रिमंडल की पूरी ‘टीम-11’ को ही पुष्कर मंत्रिमंडल में बरकरार रखा गया है। हां, पिछली बार बंशीधर भगत ने मुख्यमंत्री के बाद शपथ ली थी, लेकिन इस बार सतपाल महाराज ने नंबर दो पर शपथ ली।

राज्यपाल बेबी रानी मौर्य ने मुख्यमंत्री एवं सभी मंत्रियों को शपथ दिलाई। इससे पहले युवा पुष्कर सिंह धामी को सीधे विधायक से मुख्यमंत्री बनाये जाने को लेकर कई काबीना मंत्रियों से लेकर विधायकों में नाराजगी की खबरें मीडिया में आम रहीं। इसके बाद प्रदेश के भाजपा अध्यक्ष मदन कौशिक से लेकर राज्य के कई वरिष्ठ नेताओं ने मोर्चा संभाला और नाराज मंत्रियों व विधायकों की नाराजगी को फिलहाल थाम लिया है। आगे यह नाराजगी धामी के कौशल के आगे पूरी तरह मिट जाती है या फिर दबी राख से बाहर निकलती है, यह देखने की बात होगी।

काफी कुछ बयां कर गया शपथ ग्रहण समारोह, वरिष्ठ मंत्रियों की नाराजगी दिखी
देहरादून। शपथ ग्रहण समारोह मंत्रियों की मुख्यमंत्री के प्रति नाराजगी व खुशी को साफ तौर पर बयां कर गया। नाराज बताए जा रहे मंत्रियों ने उस तरह नए मुख्यमंत्री को शपथ लेने के बाद अभिवादन नहीं किया, जिस तरह आम तौर पर मंत्री मुख्यमंत्रियों से अभिवादन किया करते हैं। ऐसा करने वालों में प्रमुख रूप से सतपाल महाराज, डॉ. हरक सिंह रावत शामिल रहे। जबकि बंशीधर भगत व अरविंद पांडे शपथ लेने के बाद बेहद गर्मजोशी से मुस्कुराते हुए मुख्यमंत्री से मिले, और कुछ बातें भी कीं। गणेश जोशी ने बाकायदा नए मुख्यमंत्री को गले भी लगाया और फोटो भी खिंचवाई। डॉ. धन सिंह रावत, रेखा आर्य व स्वामी यतीश्वरानंद भी मुख्यमंत्री को अभिवादन करने पहुंचे। शपथ ग्रहण कार्यक्रम काफी तेजी से किया गया। एक मंत्री शपथ लेते, और उनके पीछे पंजिका में हस्ताक्षर करने से पहले ही दूसरे मंत्री को शपथ दिला दी जाती।

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यह भी पढ़ें : इन कारणों से भी ‘नामी’ नेताओं को छोड़ धामी को मिला ‘ताज’

डॉ. नवीन जोशी @ नवीन समाचार, नैनीताल, 04 जुलाई 2021। उत्तराखंड में नेतृत्व परिवर्तन के साथ पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत, काबीना मंत्री सतपाल महाराज व धन सिंह रावत के नाम मीडिया में चल रहे थे। लेकिन इन ‘नामी’ नेताओं की जगह पुष्कर ‘धामी’ के सिर मुख्यमंत्री पद का ताज आज सजने जा रहा है, तो इसके पीछे भाजपा के केंद्रीय हाईकमान की लंबी व सोची-समझी रणनीति है।

उत्तराखंड में प्रचंड बहुमत के बावजूद तीसरी बार मुख्यमंत्री बदले जाने की अनचाही स्थितियों में आए भाजपा के केंद्रीय नेतृत्व ने इस बार पुष्कर धामी के रूप में यदि चल गई, तो दूर की कौड़ी फेंकी है। दरअसल केंद्रीय नेतृत्व को पता है कि आगामी विधानसभा चुनाव में परोक्ष या अपरोक्ष तौर पर कांग्रेस पार्टी की ओर से हरीश रावत सबसे बड़ी चुनौती हांेगे। हरीश रावत हालांकि प्रदेश और कांग्रेस के बड़े व अनुभवी नेता हैं, वे कुमाऊं मंडल से और क्षत्रिय जाति से आते हैं, जिनका राज्य में करीब 70 फीसद प्रतिनिधित्व है। भाजपा उनके बरक्स राज्य में नेता तैयार करने की कोशिश में दो क्षत्रिय नेताओं त्रिवेंद्र सिंह रावत व तीरथ सिंह रावत को मुख्यमंत्री बना चुकी, लेकिन दोनों इन अपेक्षाओं में खरे नहीं उतर पाए। त्रिवेंद्र तो हरीश के साथ ही कई बार आम-ककड़ी की पार्टी खाने लगे तो शायद तीरथ को इसका मौका ही नहीं मिला।

यही कारण है कि दोनों की विदाई पर हरीश उनकी आलोचना की जगह उन्हें ‘बेचारा’ साबित करने की कोशिश कर रहे हैं। ऐसा इसलिए कि भाजपा के यह दोनों रावत हरीश रावत के प्रतिद्वंद्वी बन ही नहीं सके। ऐसे में भाजपा ने प्रशासनिक तौर पर अनुभवहीन ही सही पर ऐसे 45 वर्षीय युवा नेता को चुना है, जो 70 वर्ष के हो चले हरीश रावत के साथ चुनाव को युवा वर्सेज बुजुर्ग कर सकता है। साथ ही वह हरीश रावत के ही कुमाऊं क्षेत्र से और उनकी ही क्षत्रिय जाति से आता है। उस पर हरीश रावत की तरह ‘ब्राह्मण विरोधी’ होने का दाग भी नहीं है। वह पहाड़ से आते हैं और उस तराई-भाबर के मैदानी क्षेत्र में राजनीति करते हैं, जहां हालिया दिनों में किसान आंदोलन का कुछ प्रभाव बढ़ता बताया जा रहा है।

उल्लेखनीय है कि अब तक राज्य में 9 मुख्यमंत्री बदल चुके हैं। इनमें अंतरिम सरकार के मुख्यमंत्री भगत सिंह कोश्यारी, पहली निर्वाचित सरकार के मुख्यमंत्री नारायण दत्त तिवारी, कांग्रेस की दूसरी सरकार के दोनों मुख्यमंत्री-गढ़वाल से होने के बावजूद कुमाऊं के सितारगंज से चुनाव लड़े विजय बहुगुणा व हरीश रावत यानी चार मुख्यमंत्री कुमाऊं मंडल से मुख्यमंत्री बने, परंतु यह भी उल्लेखनीय तथ्य है कि इनमें से भगत सिंह कोश्यारी के अलावा भाजपा ने कोई भी मुख्यमंत्री कुमाऊं से नहीं बनाया। इसलिए कुमाऊंवासियों में भाजपा के प्रति नाराजगी भी रहती है। इसका प्रभाव चुनाव में भी दिखता है। कुमाऊं मंडल में भाजपा के पास बड़े चेहरे भी गिने-चुने ही हैं। यह तथ्य भी उनकी ताजपोशी को बल प्रदान कर गया है। इसके अलावा चंूकि वह पूर्व सैनिक एवं किसान स्वर्गीय शेर सिंह धामी के बेटे हैं, इसलिए उनके चयन से पूर्व सैनिकों एवं किसानों को भी साधने की कोशिश की गई है।

चुनौतियां भी कम नहीं
2022 के विधानसभा चुनाव की दहलीज पर खड़े उत्तराखंड के 11वें मुख्यमंत्री के रूप में आज रविवार को शपथ ग्रहण करने जा रहे पुष्कर धामी के पास जहां इस दौरान काम करने के लिए कम समय है, लेकिन भविष्य के नेता के रूप में छवि बनाने का मौका जरूर है। वह युवा हैं। कार्य करने के साथ ही सीखने की भी क्षमता रखते हैं। लेकिन उनकी यही युवा वय, एवं कुमाऊं मंडल के क्षत्रिय जाति से होने की विशेषता, जिसके कारण वह यह पद प्राप्त कर पाए हैं, उनके लिए चुनौतियां भी खड़ी करने वाली है। युवा होने के कारण उनके लिए वरिष्ठ नेताओं का नेतृत्व करना आसान नहीं होगा। इसके लिए उन्हें वरिष्ठों को सम्मान देते हुए साथ लेकर एवं उनके अनुभवों का लाभ लेते हुए आगे बढ़ना होगा। साथ ही उन्हें गढ़वाल मंडल और राज्य की दूसरी बड़ी जाति ब्राह्मणों के साथ ही अन्य सभी जातियों व समुदायों के के लिए कार्य करते हुए केवल एक मंडल या जाति के नेता तक सीमित रहने की जगह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘सबका साथ-सबका विकास’ की अवधारणा को सही साबित करना होगा। अपनी पार्टी मंे भी सबको साथ लेकर नेताओं व कार्यकर्ताओं को गुटबाजी में बंटने से बचाना होगा, उनमें नया जोश भरना होगा, तभी वह राज्य व पार्टी के लिए लंबी रेस का घोड़ा साबित हो सकते हैं। आज के अन्य ताजा ‘नवीन समाचार’ पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें।

यह भी पढ़ें : जानें वे कारण, क्यों धामी बने भाजपा नेतृत्व की मुख्यमंत्री के रूप में पसंद

डॉ. नवीन जोशी @ नवीन समाचार, नैनीताल, 03 जुलाई 2021। तमाम उहापोह, करीब चार वर्ष में दो मुख्यमंत्री बदलने के बाद आखिर वह चेहरा तलाश और तय कर लिया है जो 2022 के चुनाव में भाजपा को चुनावी वैतरिणी पार लगाने में नायक की भूमिका निभाएगा। यह चेहरा भाजपा ने युवा विधायक पुष्कर सिंह धामी है, जो न केवल युवा है, वरन राज्य का अब तक का सबसे कम, 47 वर्ष से भी कम उम्र में मुख्यमंत्री बनने का रिकॉर्ड बनाने जा रहा है। धामी के उत्तराखंड के 11वें मुख्यमंत्री के रूप में चयन के पीछे उनके युवा होने के साथ ही कई अन्य क्षेत्रीय, जातीय व राजनीतिक समीकरण भी हैं।

सबसे पहले बात नए सीएम के जीवन संघर्ष की।
देव भूमि उत्तराखंड के सीमान्त जनपद पिथौरागढ की तहसील डीडीहाट वर्तमान तहसील कनालीछीना की ग्राम सभा हरखोला का तोक टुण्डी उनका पैत्रिक गांव है, अलबत्ता, उनका जन्म खटीमा में सूबेदार पद से सेवानिवृत्त हुए एक पूर्व सैनिक के घर में 16 सितंबर 1975 को तीन बहनों के पश्चात हुआ। आर्थिक अभाव में जीवन यापन कर सरकारी स्कूलों से प्राथमिक शिक्षा ग्रहण की। धामी बचपन से ही स्काउट गाइड, एनसीसी, एनएसएस आदि से जुड़े रहे। वह स्नातकोत्तर एवं मानव संसाधन प्रबंधन और औद्योगिक संबंध में मास्टर्स की डिग्री ले चुके हैं। उन्होंने लखनऊ विश्वविद्यालय में छात्रों को एक जुट करके निरन्तर संधर्षशील रहते हुए उनके शैक्षणिक हितों की लडाई लडते हुए उनके अधिकार दिलाये तथा शिक्षा व्यवस्था के संचालन में महत्वपूर्ण भूमिका निभायी। वे रविवार को देहरादून राजभवन में मुख्यमंत्री पद की शपथ लेंगे। उनके साथ संभवतया मामूली बदलाव के साथ तीरथ सरकार के मंत्री भी शपथ ले सकते हैं।

उनके राजनीतिक जीवन की बात करें तो वर्ष 1990 से 1999 तक उन्होंने अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद में जिले से लेकर राज्य एवं राष्ट्रीय स्तर तक विभिन्न पदों में रहकर कार्य किया। प्रदेश मंत्री के पद पर रहते हुए लखनऊ में हुए अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के राष्ट्रीय सम्मेलन में संयोजक एवं संचालक की भूमिका निभाई। उत्तराखण्ड राज्य गठन के उपरांत पूर्व मुख्यमंत्री भगत सिंह कोश्यारी के साथ ओएसडी यानी सलाहकार के रूप में उनके करीब रहकर 2002 तक कार्य किया। 2002 से 2008 तक छः वर्षो तक दो बार भारतीय जनता युवा मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष रहे। वर्तमान में वह खटीमा से वह 2012 से अब तक लगातार दो बार विधायक हैं।

वहीं उन राजनीतिक स्थितियों व समीकरणों की बात करें, जिनकी वजह से वह मुख्यमंत्री की कुर्सी पा गए हैं, तो इसमें निःसंदेह बड़ी भूमिका उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री एवं महाराष्ट्र के राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी की भी रही होगी, जिनके वह करीबी और कृपापात्र रहे हैं। इसके अलावा वह चूंकि क्षत्रिय जाति से कुमाऊं मंडल से आते हैं, इसलिए राज्य में भाजपा के गढ़वाल मंडल के ब्राह्मण प्रदेश अध्यक्ष के साथ वह जातीय संतुलन में सटीक बैठते हैं। गौरतलब है कि वर्तमान में कांग्रेस पार्टी भी यही क्षेत्रीय व जातीय संतुलन न बैठा पाने के कारण अपने नए नेता प्रतिपक्ष का चयन नहीं कर पा रही है। इसके अलावा धामी मूलतः सीमांत पर्वतीय जनपद पिथौरागढ़ के हैं, और तराई की खटीमा विधानसभा उनकी कर्मभूमि रही है, इसलिए वह पहाड़ और मैदान का संतुलन भी साधते हैं। उन पर न ही कोई पर्वतीय न होने का ठप्पा लगा सकता है और न ही मैदानी न होने का। वह किसान आंदोलन के बाद तराई क्षेत्र में भाजपा को आगामी विधानसभा चुनाव में संभावित नुकसान को भी रोकने का माद्दा रखते हैं।

इसके अलावा युवा होने के साथ ही भाजयुमो के दो बार प्रदेश अध्यक्ष रहने के कारण वह पूरे प्रदेश के भाजपा की युवा पीढ़ी के नेताओं में पहचान रखते हैं, साथ ही उन्हें सांगठनिक अनुभव भी है। इस लिहाज से भी वह मुख्यमंत्री पद के लिए केंद्रीय नेतृत्व के पसंदीदा साबित हुए हैं। हां, प्रशासनिक अनुभव के तौर पर उनके पास खास पूंजी नहीं है, किंतु मानव संसाधन प्रबंधन और औद्योगिक संबंध में उनकी मास्टर्स की डिग्री और युवा मस्तिष्क इस कार्य में उनकी मदद कर सकता है। उनके लिए जरूरत होगी तो इतनी कि वह अपने गिर्द उन लोगों को हावी नहीं होने देंगे तो कमोबेश हर मुख्यमंत्री के साथं अपना राजनीतिक डीएनए बदलवाकर करीब आ जाते हैं, और ऐसे सहालकारों को अपने साथ रखेंगे जो उन्हें लंबी राजनीतिक पारी खेलने और राज्य को आगे ले जाने में मददगार साबित होंगे।

संक्षिप्त परिचय :
विधान सभा का नाम: 70, विधान सभा क्षेत्र, खटीमा
माता का नाम: श्रीमती विश्ना देवी
पत्नी का नाम: श्रीमती गीता धामी
शैक्षिक योग्यता: स्नातकोत्तर एवं मानव संसाधन प्रबंधन और औद्योगिक संबंध में मास्टर्स की डिग्री आज के अन्य ताजा ‘नवीन समाचार’ पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें

यह भी पढ़ें : BIG Breaking : युवा विधायक पुष्कर सिंह धामी बने उत्तराखंड के 11वें मुख्यमंत्री

नवीन समाचार, देहरादून, 03 जुलाई 2021।  खटीमा से भाजपा के दूसरी बार विधायक बने पुष्कर सिंह धामी उत्तराखंड के 11वें मुख्यमंत्री होंगे। विधानमंडल दल की बैठक में उनके नाम पर मुहर की औपचारिकता पूरी हो गई है। सबको चौंकाते हुए भाजपा नेतृत्व ने विधायक धामी को नये मुख्यमंत्री के तौर पर चुनकर सबसे बड़ा उलटफेर कर दिया है। इसके साथ यह भी हो गया है कि भाजपा का केंद्रीय नेतृत्व प्रदेश में युवा नेतृत्व को आगे लाकर भविष्य के लिए लंबी रणनीति बनाकर कार्य कर रहा है।

केंद्रीय पर्यवेक्षक नरेंद्र सिंह तोमर ने कहा कि विधायक दल की बैठक में केवल धामी के नाम का ही प्रस्ताव आया, जिसे सर्वसम्मति से उनके नाम का प्रस्ताव पारित कर दिया गया। इसके उपरांत मनोनीत मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि प्रदेश के सीमांत पिथौरागढ़ जिले की कनालीछीना तहसील के एक पूर्व सैनिक के पुत्र और पार्टी के सामान्य कार्यकर्ता पर पार्टी नेतृत्व ने जो विश्वास जताया है, उसे वह स्वीकार करते हैं, और केंद्रीय नेतृत्व का आभार जताते हैं।

उल्लेखनीय है कि धामी प्रदेश के युवा विधायकों में शुमार हैं। वह महाराष्ट्र के राज्यपाल एवं पूर्व मुख्यमंत्री भगत सिंह कोश्यारी के बेहद करीबी माने जाते हैं। पूर्व में भारतीय जनता युवा मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष रहे हैं। माना जा रहा है अब तक मंत्रिमंडल का कोई अनुभव न होने के बावजूद उन्हें मुख्यमंत्री का पद श्री कोश्यारी के कृपापात्र होने की वजह से मिला है। आगे देखना होगा कि वह अपने कार्यकाल में अपनी खुद की कैसी छवि बनाते हैं।

आगे यह भी देखना दिलचस्प होगा कि युवा मुख्यमंत्री अपनी कैसी कैबिनेट बनाते हैं। यदि वह मौजूदा मंत्रिमंडल के वरिष्ठ दिग्गजों सतपाल महाराज, बिशन सिंह चुफाल, हरक सिंह रावत, सुबोध उनियाल, बंशीधर भगत व यशपाल आर्य को मंत्री बनाते हैं तो कैसे उनके साथ सामंजस्य बैठाते हैं और उनसे मुख्यमंत्री पद का सम्मान प्राप्त करते हैं। यह भी देखना होगा कि आगामी विधानसभा चुनाव तक पार्टी और प्रदेश को किस तरह आगे बढ़ाते हैं और आगामी विधानसभा चुनाव में विपक्षी धुरंधरों के खिलाफ किस तरह अपनी पार्टी का नेतृत्व करते हैं। (डॉ.नवीन जोशी) आज के अन्य ताजा ‘नवीन समाचार’ पढ़ने के लिए यहां क्लिक करे

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