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विश्लेषण: दिल्ली चुनाव के परिणामों से प्रवासी उत्तराखंडियों ने सिखाए कांग्रेस-आआपा को कड़े सबक, भाजपा को सराहा..

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-45 लाख प्रवासी उत्तराखंडियों में से आप ने एक भी उत्तराखंडी को टिकट नहीं दिया तो तीन सीटें गंवाई, पार्टी के नंबर-2 मनीष सिसौदिया की सांसें भी आंखिर तक अटकी रहीं
-भाजपा ने दो उत्तराखंडी मूल के प्रत्याशियों को टिकट दिया, एक ने आआपा उम्मीदवार को हराया, दूसरे सिर्फ 3207 वोटों से हारे, उत्तराखंडी बहुल पांच में से तीन सीटों पर भाजपा जीती
-कांग्रेस ने सिर्फ एक टिकट भाजपा के उत्तराखंडी मूल के उम्मीदवार के खिलाफ आआपा प्रत्याशी को लाभ पहुंचाने के लिए दिया, सिर्फ 2802 वोट लेकर किया शर्मनाक प्रदर्शन, कांग्रेस के 60 प्रत्याशियों पर भारी पड़े तीन उत्तराखंडी उम्मीदवार

नवीन जोशी @ नवीन समाचार, नैनीताल, 13 फरवरी 2020। दिल्ली के विधानसभा चुनाव के परिणाम आ चुके हैं। इन चुनावों ने आम आदमी पार्टी, भाजपा व कांग्रेस को अपनी-अपनी तरह से सबक सिखाए हैं। खास कर यदि दिल्ली के पड़ोसी एवं दिल्ली के बराबर ही 70 विधानसभा सीटों वाले तथा दिल्ली में रहने वाले करीब 45 लाख प्रवासी उत्तराखंडियों के राज्य उत्तराखंड के लिहाज से विश्लेषण करने पर तीनों पार्टियों के लिए चुनाव परिणामों ने साफ-साफ संकेत दिए हैं।
इस चुनाव में निस्संदेह पूरी दिल्ली में लगातार तीसरी बार आम आदमी पार्टी-आआपा या एएपी (पता नहीं क्यों इस पार्टी को आप कहा जाता है) की आंधी चली। अरविंद केजरीवाल की पार्टी जीत का हैट्रिक बनाकर तीसरी बार सरकार बना रही है। लेकिन आआपा के प्रत्याशियों को उत्तराखंडी प्रत्याशियों व मतदाताओं ने कड़ा सबक सिखाया। प्रवासी उत्तराखंडियों की ताकत की वजह से आम आदमी पार्टी को चार सीटों पर हार का सामना करना पड़ा। पटपड़गंज विधानसभा में पार्टी व सरकार के नंबर-2, जिनके शिक्षा विभाग की उपलब्धियों को बताकर ही पार्टी ने प्रचंड जीत की, पार्टी का स्टार चेहरा व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसौदिया को उत्तराखंडी उम्मीदवारों ने जीत के लिए नाकांे चने चबवा दिये। इस उत्तराखंडी बहुल सीट पर मनीष का मुकाबला भाजपा के रवींद्र सिंह नेगी व कांग्रेस के लक्ष्मण रावत से मुकाबला था। दोनों प्रत्याशी उत्तराखंडी मूल के हैं। मनीष सिसोदिया पटपड़गंज सीट की मतगणना में शुरुआती दस राउंड में भारतीय जनता पार्टी के रवि नेगी से पीछे रहे, और अंतिम चुनाव परिणाम में रवि नेगी को 66956 वोट मिले और सिसोदिया को 70163 वोट मिले। इस तरह से सिसोदिया की कुल जीत महज 3207 वोटों से हुई। जबकि कांग्रेस के लक्ष्मण रावत को 2802 वोट मिले। यदि लक्ष्मण ने उत्तराखंडी वोटरों के वोट न काटे होते तो मनीष की जीत का आंकड़ा रवींद्र से केवल 405 वोटों का होता।
ऐसा इसलिए कि आरोपों के अनुसार आम आदमी पार्टी उत्तराखंडियों को हमेशा उपेक्षित करती रही। उत्तराखंड के पिछले विधानसभा चुनाव में पार्टी का ढांचा होने के बावजूद वहां पार्टी ने चुनाव लड़ने की हरी झंडी नहीं दी। इससे पार्टी से कार्यकर्ता दूर हो गए और उन्होंने मजबूरन दूसरे दलों का दामन थाम लिया। दिल्ली विधानसभा चुनाव में एक ओर केजरीवाल की पार्टी ने प्रवासी उत्तराखंडी वोटरों को साधने के लिए अक्टूबर 2019 में गढ़वाली, कुमाऊंनी और जौनसारी भाषा व संस्कृति को अमूल्य बताते हुए एक अकादमी का गठन कर लोक गायक हीरा सिंह बिष्ट को इसका उपाध्यक्ष बनाने, विनोद नगर में उत्तराखंडियों के प्रसिद्ध त्योहार ‘उत्तरायणी’ का आयोजन कर उसमें उत्तराखंड के दिग्गज कलाकारों को बुलाने और गढ़वाली भाषा में अपने प्रचार का गीत बनवाने जैसे ‘लॉलीपॉप’ थमाए, वहीं एक भी उत्तराखंडी को टिकट नहीं दिया।
इसका परिणाम मनीष सिसोदिया ने तो महसूस किया ही होगा, पार्टी के करावल नगर के प्रत्याशी दुर्गेश पाठक तो इसे कभी नहीं भूल पाएंगे कि पूरे प्रदेश में पार्टी की आंधी चलने के बावजूद भाजपा के उत्तराखंडी उम्मीदवार से हार गए। उन्हें भारतीय जनता पार्टी ने उत्तराखंड मूल के पूर्व विधायक मोहन सिंह बिष्ट ने करारी शिकस्त दी। करावल नगर से करीब 2.25 लाख कुल मतदाता हैं, जिनमें से लगभग 66 हजार के आसपास उत्तराखंड मूल के मतदाता हैं।
भाजपा ने उत्तराखंडी बहुल पांच में से तीन सीटें जीतीं
दिल्ली में प्रवासी उत्तराखंडियों की आबादी 45 लाख के करीब हैं। जिसमें से 26 लाख वोटर हैं। इतनी बड़ी संख्या में मतदाता किसी भी पार्टी का समीकरण बदलने का माद्दा रखते हैं। बावजूद तीन पार्टियों ने उत्तराखंडी मूल के केवल तीन प्रत्याशियों (भाजपा ने दो, कांग्रेस ने एक व आआपा ने शून्य) को ही टिकट दिए। इनमें से एक, भाजपा प्रत्याशी चुनाव जीते, जबकि दूसरे उप मुख्यमंत्री से मामूली अंतर से हारे। जबकि कंाग्रेस के एकमात्र प्रत्याशी भी हारे। कांग्रेस ने पटपड़गंज से भाजपा के उत्तराखंडी मूल के प्रत्याशी के खिलाफ संभवतया आआपा प्रत्याशी मनीष सिसौदिया को लाभ पहुंचाने के लिए उत्तराखंडी मूल के अपने एकमात्र प्रत्याशी लक्ष्मण रावत को चुनाव मैदान में उतारा था, जिन्हें सिर्फ 2802 वोट मिले और शर्मनाक हार मिली।
भाजपा ने प्रवासी उत्तराखंडी मतदाताओं और प्रत्याशियों पर विश्वास जताया तो बताया जा रहा है कि हमेशा की तरह इस बार भी प्रवासी उत्तराखंडियों ने भी अपने वोट भाजपा पर जमकर लुटाए। परिणास्वरूप भाजपा ने प्रवासी उत्तराखंड बहुल जनसंख्या वाली पांच सीटों में से तीन पर जीत दर्ज की। जबकि दो पर उसके उम्मीदवार बहुत कम अंतर से दूसरे नंबर पर रहे। इनमें से एक सीट करावल नगर में भारतीय जनता पार्टी के उत्तराखंड मूल के प्रत्याशी पूर्व विधायक मोहन सिंह बिष्ट भी जीते, जबकि पार्टी के दूसरे उत्तराखंडी मूल के उम्मीदवार रवींद्र नेगी ने मनीष सिसोदिया की सांसें आंखिर तक अटकाए रखीं।
कांग्रेस के 60 पर तीन उत्तराखंडी भारी
दिल्ली में कांग्रेस पार्टी को कुल 395924 वोट मिले। जिसमें पटपडगंज से लक्ष्मण रावत को 2802 वोट मिले। यानि प्रवासी उत्तराखंड के प्रत्याशी के वोट हटा दिए जाए तो कांग्रेस पार्टी को 393122 वोट मिले। दो बड़ी पार्टियों से प्रवासी उत्तराखंड के तीन उम्मीदवार मैदान में थे जिनमें से करावल नगर सीट से मोहन सिंह बिष्ट को 96390 व पटपडगंज से रवि नेगी को 66956 वोट मिले तथा यही से लक्ष्मण रावत को 2802 वोट मिले। कुल मिलाकर वोटों की संख्या हुई 166479। कांग्रेस के 60 उम्मीदवारों को मिलाकर कुल डेढ़ लाख के करीब वोट मिले हैं। यानि कि कांग्रेस के 60 उम्मीदवारों पर प्रवासी उत्तराखंड के तीन प्रत्याशी भारी साबित हुए।

यह भी पढ़ें : शाबास नेगी, दिल्ली में लगातार तीसरी ‘क्लीन स्वीप झाड़ू’ के बावजूद पहाड़ के लाल ने 11वें राउंड तक अटकाए रखीं आप के नंबर-2 की सांसें..

Delhi Election Result 2020 : हल्द्वानी के रवि नेगी ने शिक्षा मंत्री मनीष सिसोदिया को दी कड़ी टक्‍कर nainital news
हल्द्वानी निवासी अपने भाई के साथ पटपड़गंज से भाजपा उम्मीदवार रवींद्र सिंह नेगी।

नवीन समाचार, हल्द्वानी, 11 फरवरी 2020। दिल्ली के विधानसभा चुनाव में शिक्षा व स्वास्थ्य सुविधाओं में सुधार के नाम पर आम आदमी पार्टी के नाम पर ‘क्लीन स्वीप झाड़ू’ लगी। बावजूद पार्टी व उनकी पिछली सरकार में निस्संदेह नंबर-2 की हैसियत रखने वाले शिक्षा मंत्री मनीष सिसौदिया की सांसें 11वें राउंड तक पीछे रहने के साथी अटकी रहीं, तो इसके पीछे उत्तराखंड के पहाड़ का एक लाल रवींद्र सिंह नेगी था। मूलतः अल्मोड़ा जनपद के जैंती क्षेत्र के ग्राम सीम दाड़मी निवासी रवींद्र सिंह नेगी ने बतौर भाजपा उम्मीदवार मनीष सिसौदिया के पिछली बार के 25 हजार से जीत के आंकड़े को भी महज 3207 वोटों का कर दिया।
रवि भाजपा युवा मोर्चा के दिल्ली में जिलाध्यक्ष रह चुके हैं और वर्तमान में पटपड़गंज से लगे लक्ष्मी नगर-विनोद नगर मंडल के मंडल अध्यक्ष हैं। उनके पिता प्रताप सिंह नेगी केंद्रीय गृह मंत्रालय में कार्यरत रहे। इसलिए रवींद्र का बचपन दिल्ली में ही बीता है, परंतु उनका पहाड़ से अब भी संपर्क बना हुआ है। उनके बड़े भाई हरीश नेगी हल्द्वानी के देवलचौड़ बंदोबस्ती में रहते हैं और निर्माण के कारोबार से जुड़े हैं। रवींद्र द्वारा मनीष सिसोदिया को दी गई नाकों चने चबाने जैसी कड़ी टक्कर में पहाड़ के मतदाताओं का भी बड़ा योगदान माना जा रहा है, जो पहाड़ से उनके प्रचार के लिए भी दिल्ली गए थे और दिल्ली में भी बड़ी संख्या में रहते हैं। इसलिए उनके परिणाम पर भी पहाड़वासियों की निगाह लगी हुई थी।
उल्लेखनीय है कि रवींद्र के अलावा दिल्ली के चुनाव में उत्तराखंड के उम्मीदवार बुराड़ी से हरीश बहुगुणा सहित कई अन्य उम्मीदवार भी चुनाव मैदान में थे, और उन्होंने उल्लेखनीय प्रदर्शन भी किया है, लेकिन रवीेंद्र का नाम सभी उत्तराखंडियों की जुबान पर आना तय है।

यह भी पढ़ें : चुनाव आयोग से बड़ा समाचार: लोक सभा चुनाव लड़ चुके तीन प्रत्याशी तीन साल तक नहीं लड़ पाएंगे कोई चुनाव

नवीन समाचार, देहरादून, 14 जनवरी 2020। लोक सभा चुनाव लड़ चुके जयप्रकाश उपाध्याय समेत तीन प्रत्याशियों पर भारत निर्वाचन आयोग ने तीन साल तक किसी भी तरह का चुनाव लड़ने पर प्रतिबंध लगा दिया है। तीनों प्रत्याशियों ने लोकसभा चुनाव के परिणाम घोषित होने के बाद तय समय पर अपने चुनाव व्यय का ब्योरा निर्वाचन आयोग को उपलब्ध नहीं कराया था।

अपर जिलाधिकारी (एडीएम) प्रशासन रामजीशरण शर्मा ने निर्वाचन आयोग की कार्रवाई के बारे में जानकारी देते हुए बताया कि लोकसभा चुनाव-2019 में टिहरी सीट के प्रत्याशी रहे जयप्रकाश उपाध्याय, मधु शाह और गौतम बिष्ट पर तीन साल का प्रतिबंध भारत निर्वाचन आयोग ने लगाया है। यह जनवरी 2020 से आगामी तीन वर्ष की अवधि में किसी भी प्रकार के चुनाव में भाग नहीं ले सकते। उन्होंने बताया कि पिछले साल टिहरी संसदीय क्षेत्र से लोकसभा चुनाव लड़ चुके उत्तराखंड क्रांति दल के जयप्रकाश उपाध्याय सहित मधु शाह व गौतम बिष्ट ने चुनावी खर्च का ब्योरा उपलब्ध नहीं कराया था। जिला निर्वाचन कार्यालय की तरफ तीनों प्रत्याशियों को कुल छह नोटिस जारी किए गए। जिसमें चुनाव समाप्त होने के बाद पहला नोटिस भेजा गया। इसके बाद हर माह उन्हें नोटिस जारी किए गए। गत दिसंबर को तीनों प्रत्याशी को अंतिम नोटिस जारी किए गया। बार-बार रिमाइंडर भेजने के बाद भी तीन प्रत्याशियों की तरफ से नोटिस का जवाब नहीं दिया गया। इसके बाद जिला निर्वाचन अधिकारी की तरफ से रिपोर्ट मुख्य निर्वाचन आयोग को भेज दी गई। जिस पर भारत निर्वाचन आयोग ने तीनों प्रत्याशियों पर अगले तीन साल तक किसी भी तरह का चुनाव नहीं लड़ पाएंगे।

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-मनोज साह एक बार पुनः श्रीराम सेवक सभा के बने अध्यक्ष, बवाड़ी महासचिव

नवीन समाचार, नैनीताल, 13 नवंबर 2019। नगर की 101 वर्ष पुरानी श्रीराम सेवक सभा की नवनिर्वाचित 15 सदस्यीय कार्यकारिणी ने बुधवार को अपने पदाधिकारी चुनने की प्रक्रिया भी पूरी कर ली। अध्यक्ष पद के लिए हुए मतदान में निवर्तमान अध्यक्ष मनोज साह फिर से अध्यक्ष चुन लिए गए। उन्हें 15 कार्यकारिणी सदस्यों में से 11 ने अपने वोट दिए, जबकि पराजित प्रत्याशी हिमांशु जोशी को केवल 4 मतों से संतोष करना पड़ा। वहीं अन्य पदों पर सभी प्रत्याशी निर्विरोध चुन लिये गये। मनोज जोशी उपाध्यक्ष, जगदीश बवाड़ी महासचिव, विमल चौधरी उप सचिव, विमल साह कोषाध्यक्ष एवं राजेंद्र बजेठा प्रबंधक चुने गए। जिला बार एसोसिएशन ने पूर्व सदस्य आंेकार गोस्वामी, ज्योति प्रकाश व मोहम्मद खुर्शीद हुसैन सहित अनेक अन्य संगठनों ने बधाई दी है।

श्रीराम सेवक सभा के नवनिर्वाचित पदाधिकारी।

उल्लेखनीय है कि इससे पूर्व मंगलवार को15 सदस्यीय कार्यकारिणी के लिए हुए त्रिवार्षिक चुनाव में जगदीश बवाड़ी, विमल कुमार साह, आलोक चौधरी, मुकेश जोशी, आलोक साह, मनोज साह, चंद्र प्रकाश साह, राजेंद्र लाल साह, किशन नेगी, मनोज जोशी, हिमांशु जोशी, भीम सिंह कार्की, विमल चौधरी, किशन गुरुरानी व राजेंद्र बजेठा निर्वाचित हुए थे।

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नवीन समाचार, नैनीताल, 12 नवंबर 2019। नगर की 101 वर्ष पुरानी, 12 अक्टूबर, 1918 को स्थापित श्रीराम सेवक सभा की 15 सदस्यीय कार्यकारिणी के लिए मंगलवार को हुए त्रिवार्षिक चुनाव के लिए मतदान के उपरांत चुनाव परिणामों की घोषणा कर दी गई है। निर्वाचन अधिकारी राजेंद्र लाल साह ने बताया कि सभा की नई कार्यकारिणी के लिए आलोक चौधरी, अशोक साह, किशन गुरुरानी, किशन सिंह नेगी, चंद्र प्रकाश साह, जगदीश चंद्र बवाड़ी, विमल कुमार साह, भीम सिंह कार्की, मुकेश जोशी, मनोज जोशी, मनोज साह, राजेंद्र लाल साह, राजेंद्र बजेठा, विमल चौधरी व हिमांशु जोशी निर्वाचित घोषित हुए हैं। आगे नयी कार्यकारिणी से तीन दिन के भीतर बैठक करने को कहा गया है, जिसमें सभा के अध्यक्ष, महासचिव, उपाध्यक्ष, कोषाध्यक्ष व प्रबंधक आदि पदाधिकारियों का चयन किया जाएगा।

राम सेवक सभा के 15 निर्वाचित सदस्यों की घोषणाचुनाव में जगदीश बवाड़ी व विमल कुमार साह को सर्वाधिक 37-37, आलोक चौधरी को 34, मुकेश जोशी को 33, आलोक साह व निवर्तमान अध्यक्ष मनोज साह को 28-28, चंद्र प्रकाश साह व राजेंद्र लाल साह को 27-27, किशन नेगी व मनोज जोशी को 26-26, हिमांशु जोशी को 25, भीम सिंह कार्की व विमल चौधरी को 24-24, किशन गुरुरानी को 23, राजेंद्र बजेठा को 22, मनोज साह ‘मनदा’ को 21, बालम भंडारी को 18, देवेंद्र लाल साह को 17, अनूप शाही को 10 मत मिले। उल्लेखनीय है कि 15 सदस्यीय कार्यकारिणी के लिए कुल 20 सदस्यों ने नामांकन किये थे। इनमें से मनोज साह मनदा, बालम भंडारी, देवेंद्र लाल साह व अनूप शाही को हार का सामना करना पड़ा है, जबकि ललित साह ने नाम वापस ले लिया था। चुनाव प्रक्रिया में 43 में से 41 सदस्यों ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया। प्रो. ललित तिवारी, हरीश राणा व पुष्कर लाल साह ने सहायक चुनाव अधिकारी के रूप में चुनाव प्रक्रिया में योगदान दिया।

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-श्रीराम सेवक सभा के चुनाव 12 नवंबर को, नामांकन की प्रक्रिया 2 नवंबर से
नवीन समाचार, नैनीताल, 1 नवंबर 2019। सरोवरनगरी की सबसे पुरानी धार्मिक-सामाजिक संस्था श्रीराम सेवक सभा के तीन वर्षों में होने वाले चुनावों का बिगुल बज गया है। चुनाव प्रक्रिया के तहत कार्यकारिणी सदस्यों के 15 पदों के लिए शनिवार दो नवंबर से नामांकन की प्रक्रिया प्रारंभ हो रही है। चुनाव अधिकारी राजेंद्र लाल साह के अनुसार सुबह 10 से अपराह्न दो बजे तक नामांकन पत्रों की बिक्री की जाएगी। पांच नवंबर को प्रातः 11 से दो बजे तक नामांकन पत्र जमा किये जा सकेंगे, जबकि 6 नवंबर को नामांकन पत्र वापसी की जा सकेगी। इसके बाद 12 नवंबर को प्रातः 11 से दो बजे तक सभा के 43 सदस्य मतदान कर सकेंगे, तथा ढाई बजे से मतगणना एवं शाम चार बजे परिणामों की घोषणा की जाएगी और इसी दिन विजेताओं को प्रमाण पत्र जारी कर दिये जाएंगे। आगे निर्वाचित सदस्य स्वयं में से अध्यक्ष, महासचिव, उपाध्यक्ष, कोषाध्यक्ष आदि पदाधिकारियों का चयन करेंगे।

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