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उत्तराखंड सहित पांच राज्यों में चुनाव के लिए चुनाव आयोग सक्रिय, लगाया अधिकारियों की तैनाती पर प्रतिबंध

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नवीन समाचार, नई दिल्ली, 15 अक्टूबर 2021। उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और पंजाब सहित पांच राज्यों में विधानसभा चुनाव भले ही अगले साल मार्च व मई माह में होने हैं, लेकिन चुनाव आयोग अभी से सक्रिय हो गया है। आयोग ने बुधवार यानी 13 अक्टूबर को ही इन सभी राज्यों में अधिकारियों के स्थानांतरण व तैनाती को लेकर दिशा-निर्देश जारी कर दिए हैं।

आदेश में कहा है कि चुनावों में सीधे तौर पर नहीं जुड़ने वाला कोई भी अधिकारी अपने गृह जनपद या उस जनपद में नहीं रहेगा जहां वह लंबे समय से तैनात हो। बताया गया है कि आयोग ने इसके दायरे में आने वाले अधिकारियों का ब्योरा भी जारी किया है। साथ ही इसके अमल की रिपोर्ट आयोग को 31 दिसंबर तक उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं।

चुनाव आयोग ने उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, पंजाब, गोवा और मणिपुर के मुख्य सचिवों को दिए गए निर्देश में बताया है कि गोवा में 15 मार्च, मणीपुर में 19 मार्च, पंजाब में 27 मार्च, उत्तराखंड में 23 मार्च और और उत्तर प्रदेश में 14 मई को मौजूदा विधानसभा का कार्यकाल समाप्त हो रहा है। साथ ही यह भी साफ किया है कि इन तीन वर्षो की गणना कब से की जाएगी। उत्तर प्रदेश में 31 मई, 2022 की अवधि तक इसकी गिनती जाएगी। उत्तराखंड, पंजाब, गोवा और मणिपुर में 31 मार्च, 2022 तक इस अवधि की गणना की जाएगी। चुनाव की घोषणा से पहले राज्यों में अधिकारियों की तैनाती को लेकर उठने वाले सवालों से पहले ही आयोग ने सभी राज्यों को सतर्क कर दिया है।

आयोग ने यह भी साफ किया है कि राज्य के कौन-कौन अफसर और कर्मचारी इस दायरे में नहीं आते हैं। इनमें राज्य मुख्यालयों में तैनात अधिकारी और कर्मचारी के अलावा डॉक्टर, इंजीनियर, प्रिंसिपल, शिक्षक आदि शामिल हैं जो चुनाव कार्य में शामिल नहीं हैं। हालांकि आयोग ने कहा कि इनमें यदि किसी के खिलाफ राजनीतिक आधार पर जुड़ाव रखने की कोई शिकायत मिलती है और जांच में वह सही पाई जाती है तो आयोग के निर्देश पर न सिर्फ स्थानांतरण किया जाएगा, बल्कि उनकी विभागीय स्तर पर कार्रवाई भी प्रस्तावित की जाएगी। (डॉ.नवीन जोशी) आज के अन्य ताजा ‘नवीन समाचार’ पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें।

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नवीन समाचार, नई दिल्ली, 01 जून 2021। देश के मुख्य निर्वाचन आयुक्त-सीईसी सुशील चंद्रा ने कहा है कि चुनाव आयोग को उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, पंजाब समेत पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव अगले साल समय पर करा पाने का भरोसा है। आयोग को कोरोना वायरस महामारी के बीच बिहार, बंगाल और चार अन्य राज्यों के विधानसभा चुनावों से काफी अनुभव मिले हैं। कहा कि गोवा, मणिपुर, पंजाब और उत्तराखंड विधानसभाओं का कार्यकाल मार्च 2022 में समाप्त होगा।

वहीं, उत्तर प्रदेश विधानसभा का कार्यकाल अगले साल मई तक चलेगा। चंद्रा ने एक साक्षात्कार में कहा, निर्वाचन आयोग की यह पहली जिम्मेदारी है कि विधानसभाओं का कार्यकाल समाप्त होने से पहले हम चुनाव कराएं और विजयी उम्मीदवारों की सूची राज्यपाल को सौंप दें। उल्लेखनीय है कि उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, गोवा और मणिपुर में भाजपा की और पंजाब में कांग्रेस की सरकार है। इस तरह कोरोना की महामारी के खासकर महाविनाशकारी रही दूसरी लहर के बाद होने वाले यह पहले चुनाव भाजपा के लिए बड़ी चुनौती साबित हो सकते हैं।

क्या आयोग कोरोना के हालात में चुनाव समय पर करा पाएगा ? उनसे सवाल किया गया था कि क्या आयोग कोरोना के हालात में पांच राज्यों में विधानसभा चुनाव समय पर करा पाएगा जबकि उसने हाल ही में महामारी की दूसरी लहर के कारण लोकसभा और विधानसभा के उप चुनावों को टाल दिया। राज्यसभा की कुछ सीटों के लिए उप चुनाव और विधान परिषद के द्विवार्षिक चुनावों को भी महामारी के चलते टाल दिया गया था। सुशील चंद्रा ने कहा- आयोग को महामारी के दौरान चुनाव कराने का काफी अनुभव है।

चंद्रा ने कहा, जैसा कि आपको पता है कि कोरोना की दूसरी लहर कमजोर हो रही है और संख्या (संक्रमण के मामलों की) काफी कम है। हमने महामारी के दौरान बिहार में चुनाव कराए। हमने चार राज्यों और एक केंद्र शासित प्रदेश में चुनाव कराए हैं। हमें अनुभव है। हमने महामारी में भी चुनाव कराने का काफी अनुभव हासिल किया है। (डॉ.नवीन जोशी) आज के अन्य ताजा ‘नवीन समाचार’ पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें।

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-अगर नोटा सचमुच हजार का आंकड़ा छू गया तो हार-जीत का अंतर भी सिमट सकता है
दिनेश शास्त्री @ नवीन समाचार, देहरादून, 18 अप्रैल 2021। अल्मोड़ा जिले की सल्ट विधानसभा सीट के लिए हुए उपचुनाव में गांव की चौपालों पर हो रही चर्चा में फिलहाल नोटा मुख्य विषय बना हुआ है। इस उपचुनाव में 2017 के विधानसभा चुनाव से भी कम मतदान हुआ है। इसका बड़ा कारण कोरोना भी हो सकता है। कारण यह कि 96241 मतदाताओं वाली इस सीट पर 49193 पुरुष तथा 47048 महिला मतदाता हैं। वर्ष 2017 में जहां 45.74 फीसद मतदाताओं ने अपने मताधिकार का इस्तेमाल किया था, इस बार यह आंकड़ा घट कर 43.28 फीसद पर रहा यानी सीधे तौर पर 2.46 फीसद की कमी।
यह कमी क्या दर्शाती है? निसंदेह सवाल बड़ा है। यह सच है कि पहाड़ के अन्य निर्वाचन क्षेत्रों की तरह यहां भी प्रवास पर रहना लोगों की नियति है। पिछले एक वर्ष के दौरान कोरोना के दौरान दिल्ली तथा अन्य शहरों में रह रहे लोग अपने घरों को लौटे थे। स्थिति कुछ सुधरी तो वे लोग वापस चले गए लेकिन अचानक फिर कोरोना की दूसरी लहर ने उन्हें मताधिकार के लिए आने लायक नहीं बनाया। कम मतदान का यह प्रमुख कारण रहा है।
लगे हाथ यहां से पलायन का कारण भी समझ लिया जाए। रामगंगा घाटी से लगे इलाकों में पेयजल और सिंचाई सुविधा कमोबेश ठीक मानी जा सकती है लेकिन बाकी सल्ट बुरी तरह पानी की समस्या से जूझ रहा है। स्याल्दे से पंपिंग योजना का नाम लोग काफी समय से सुनते आ रहे है, लेकिन हलक लोगों के प्यासे ही हैं। सल्ट का ऊपरी इलाका कभी लखोरिया मिर्च के लिए जाना जाता था। पूरे परिवार की दाल में एक मिर्च पीस ली जाए तो पर्याप्त होता था, किंतु पिछले करीब एक दशक से अनियमित वर्षा के कारण इस इलाके की पहचान लखोरिया मिर्च का उत्पादन अब न्यून हो गया है। यही हाल बाकी फसलों का भी है। मानिला के वन विभाग के बंगले में लगा हैंड पंप पीने योग्य पानी नहीं देता, उसका पानी मटमैला ही निकलता है। ऊंचाई पर होने से रात की ओस पतनाले के जरिए टंकी में जमा की जाती है। तब जाकर बाथरूम का काम चलता है। पीने के लिए तो या तो बोतल बंद पानी ले जाओ या फिर दूर स्रोत से लाना पड़ता है। यह हाल सरकारी सिस्टम का है। आम लोगों की स्थिति आसानी से समझी जा सकती है। प्रकृति की ओर से खूबसूरती के साथ संवारे गए इस इलाके को पानी की गंभीर समस्या से जूझना पड़ रहा है। पारंपरिक स्रोत सूख गए हैं। विनो नदी की क्षमता इतनी नहीं कि लोगों के हलक तर कर सके। कमोबेश ज्यादातर इलाकों का यही हाल है। ऊपरी इलाकों में नागचुलाखाल से लेकर मार्चुला तक सिंचाई तो कल्पनातीत ही है। जैसे तैसे पीने के पानी का इंतजाम हो रहा है। आने वाला कल कैसा होगा, अनुमान आप भी लगा सकते हैं। पलायन की समस्या का बड़ा कारण आप इससे समझ सकते हैं और कम मतदान का कारण भी।
अब आइए मुख्य मुद्दे पर। सराइखेत के ख्यात सिंह रावत बताते हैं कि सल्ट के लोगों ने पहली बार नोटा का सर्वाधिक इस्तेमाल किया है। राजनीतिक दृष्टि से सक्रिय श्री रावत का अपना गणित होगा लेकिन कई अन्य लोगों ने भी इस बात की तस्दीक की। हमें यह नहीं भूलना होगा कि कभी सल्ट के नामी नेता रहे रणजीत सिंह रावत पार्टी की राजनीति में हाशिए पर हैं। वे अपने बेटे को टिकट चाहते थे लेकिन टिकट नहीं मिला तो वे इलाके में सक्रिय नहीं दिखे। अपने समर्थकों को उनका इशारा क्या रहा होगा, यह आसानी से समझा जा सकता है। नोटा की संख्या का अनुमान भी इसी से लगाया जा रहा है। दूसरे 17 अप्रैल को मतदान के दिन भी कई लोगों ने इस बात की ओर इशारा किया था। हालांकि एक अन्य जागरूक व्यक्ति झाकड सिंह नेगी इससे इत्तफाक नहीं रखते लेकिन इतना जरूर मानते हैं की मौजूदा राजनीतिक व्यवस्था से आजिज ं गए लोग नोटा का इस्तेमाल करने लगे है। स्याल्दे में पंकज जोशी ने भी माना कि कई मतदाताओं ने नोटा का बटन दबाने की बात दावे के साथ कही है।
जाहिर है कम मतदान के बीच अगर एक हजार उदासीन मतदाताओं ने भी नोटा का बटन दबाया है तो हार – जीत का अंतर कितना रहेगा, आसानी से समझा जा सकता है। वैसे पिछले चुनाव में भी तो तीन हजार के नीचे ही तो मार्जिन था। इस स्थिति में चुनाव मैदान में उतरे मुख्य दावेदारों और उनके समर्थकों के दिल की धड़कन कैसे नहीं बढ़ेगी? दो मई को जब भिकियासैंण में ईवीएम खुलेंगी, तो पहला सवाल ही यह हो सकता है कि नोटा ने कितना डेंट मारा। एक तरह से कुल 41000 हजार वोटों में से हार – जीत भी तो हजार – दो हजार से ही होने की संभावना जानकार लोग व्यक्त कर रहे हैं। इस स्थिति में नोटा का महत्व समझा जा सकता है। बहरहाल दो मई तक इस तरह की चर्चाएं तो चलती ही रहेंगी।(डॉ.नवीन जोशी) आज के अन्य ताजा ‘नवीन समाचार’ पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें।

यह भी पढ़ें : भावुकता के आखिरी तीर के साथ सल्ट में महेश व गंगा के भाग्य के साथ काफी कुछ दांव पर..

-महेश और गंगा का भाग्य होगा ईवीएम में बंद
दिनेश शास्त्री @ नवीन समाचार, देहरादून, 16 अप्रैल 2021। सल्ट विधानसभा सीट के लिए हो रहा उपचुनाव कई मायनों में प्रदेश की राजनीति की नई इबारत लिख रहा है। चुनाव प्रचार के आखिरी दिन जिस तरह भावुकता का प्रदर्शन हुआ उससे चुनाव का मर्म समझा जा सकता है, जब आपके तरकश के तीर खत्म हो जाते हैं, तब यही एकमात्र साधन रह जाता है।
यह चुनाव मूलतः उन पूर्व सीएम हरीश रावत के लिए नाक का सवाल बन गया है, जिन्होंने पूर्व में सल्ट की सीट को भाजपा के पूर्व दिवंगत विधायक सुरेंद्र सिंह जीना को समर्पित कर देनी चाहिए। नाक का सवाल तो बीजेपी के लिए भी है, लेकिन उससे ज्यादा हरदा की प्रतिष्ठा दांव पर है। तमाम अंतर्विरोधों के बावजूद हरदा गंगा पंचोली को टिकट दिलाने में कामयाब रहे। सल्ट के महारथी रणजीत रावत के बेटे के नाम की कई नेताओं ने सिफारिश की थी। हाई कमान से खतो-किताबत हुई थी लेकिन हाई कमान ने सबको दरकिनार कर हरदा की बात की तबज्जो दी। वैसे तो पार्टी का एक खेमा हरदा से ही मैदान में उतरने का आग्रह कर रहा था। तब यह भी माना जा रहा था कि शायद सीएम तीरथ सिंह रावत इस रिक्त सीट से मैदान में उतरें। इसे हरदा ने यह कह कर खारिज कर दिया था कि यह राज्य हित में नहीं होगा। यानी राज्यहित में उन्हें गंगा ही दिख रही थी और वे आखिरकार मैदान में उतार ही लाए।
जाहिर है कांग्रेस का एक बड़ा वर्ग चुनावी रण में पार्टी के साथ नहीं है। हालांकि प्रचार के आखिरी दिन प्रदेश प्रभारी से लेकर जिले तक के तमाम नेताओं ने सल्ट में हाजिरी दिखाई लेकिन पार्टी की यह एकता तभी तक होती है, जब तक प्रदेश प्रभारी मौजूद रहते हैं। कांग्रेस की यही एक विडंबना है। बहरहाल हरदा ने पूरी शिद्दत से गंगा के लिए मार्मिक अपील की। उनके रूंधे कंठ से साफ लगा कि यह उनके अस्तित्व का सवाल है। सल्ट के लोग उनकी बात को कितना महत्व देते हैं, यह देखना दिलचस्प होगा और यही 2022 के विधानसभा चुनाव की आधार शिला भी होगा।
दूसरी ओर बीजेपी भी कम सक्रिय नहीं है। उसके पास कार्यकर्ताओं का समर्पण, रायबहादुर सोबन सिंह जीना की विरासत, सुरेंद्र सिंह जीना की सहानुभूति और उनके कार्य और खुद सीएम तीरथ सिंह रावत का आखिरी दिन स्याल्दे और अन्य जगहों पर लोगों से महेश जीना के लिए वोट मांगे उससे मुकाबला बराबरी का सा लग रहा है। चुनाव मैदान में एक अंतर जो साफ दिखा, वह यह था कि बीजेपी की तुलना में कांग्रेस संगठित नजर नहीं आई। यही दोनों दलों के बीच मूलभूत अंतर है। इस अंतर का खुलासा कल हो जायेगा। देखना यह होगा कि हरदा की अपील पर सल्ट के लोग कितना कान और ध्यान देते हैं। महेश और गंगा में से चुनाव तो एक का ही होना है, यह अलग बात है कि आध्यात्मिक तौर पर गंगा और महेश एक दूसरे के पूरक माने जाते हैं। इस दृष्टि से यह चुनाव काफी रोचक हो गया है। इसके परिणाम पर सबकी नजर रहेगी क्योंकि 2022 का आधार यही बनने जा रहा है।

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डॉ. नवीन जोशी @ नवीन समाचार, सल्ट, 10 अप्रैल 2021। उत्तराखंड की सल्ट विधानसभा चुनाव में हो रहा चुनाव कहने को तो उप चुनाव है, और मुकाबला भाजपा व कांग्रेस के प्रत्याशियों महेश जीना व गंगा पंचोली के पीछे बताया जा रहा है, लेकिन वास्तविक मुकाबला तो कहीं-किसी और के बीच चल रहा है। चुनाव में विजयी रहने वाले प्रत्याशी को भले छह माह या एक वर्ष से भी कम का ही काम करने को मिलेगा, लेकिन इसका राजनीतिक महत्व कहीं अधिक बढ़ गया है। कारण, क्योंकि इस उपचुनाव को कई राजनेताओं ने अपनी प्रतिष्ठा का प्रश्न बना लिया है।
सबसे पहले यह चुनाव प्रदेश के नए मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत के लिए अग्नि परीक्षा के तौर पर है, जिन्हें इस चुनाव में जीत के साथ एक प्रकार से अपने पक्ष में राज्य की जनता का मत हासिल करने की चुनौती है। वहीं राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने भी इसे अपनी प्रतिष्ठा से जोड़ लिया है। उन्होंने कोरोना से पीड़ित और एम्स दिल्ली के आईसीयू में भर्ती होने के बावजूद सल्ट की जनता के लिए ऐसा भावुक संदेश भेजा है, मानो उनके लिए अपने जीवन से अधिक महत्वपूर्ण सल्ट का उपचुनाव हो। गौरतलब है कि सल्ट में हरीश सरकार के दौरान नंबर दो की भूमिका में रहे और अब हरीश रावत को मानसिक रूप से कमजोर बता चुके रणजीत रावत अपने पुत्र, सल्ट के ब्लॉक प्रमुख विक्रम रावत को चुनाव लड़ाने की कोशिश में थे, और अब टिकट न मिलने के बाद वह न केवल कांग्रेस उम्मीदवार के चुनाव प्रचार से पूरी तरह दूर हैं, बल्कि कांग्रेस से ही जुड़े सूत्रों की मानें उसके खिलाफ या कहें कि भाजपा उम्मीदवार के पक्ष में कार्य कर रहे हैं। यहां तक कयास लगाए जा रहे हैं रावत-रावत यानी हरीश व रणजीत की यह अदावत रणजीत को भाजपा में भी धकेल सकती है। कहा जा रहा है कि यदि गंगा चुनाव जीतती हैं तो 2022 के आम चुनाव में भी वह ही कांग्रेस की उम्मीदवार होंगी। यह भी संभावना जताई जा रही है कि 2022 में हरीश उस रामनगर सीट से चुनाव लड़ सकते हैं, जहां से रणजीत खुद अपने लिए राजनीतिक जमीन तैयार कर रहे हैं। यदि ऐसा हुआ तो रणजीत के लिए कांग्रेस छोड़ने के अलावा और कोई विकल्प नहीं होगा। इन स्थितियों में कंाग्रेस उम्मीदवार गंगा पंचोली भिटौली के लिए जाने जाने वाले चैत्र माह में होने जा रहे चुनाव में अपने मायके व ससुराल सल्ट की जनता से भिटौली मांगकर चुनाव जीतने की उम्मीद लगाए बैठी हैं।
दूसरी ओर भाजपा में भी स्थितियां उतनी सहज नहीं हैं। यहां भी अंदरखाने भाजपा प्रत्याशी महेश जीना को लेकर पार्टी के सल्ट से जुड़े राजनेता अपने भविष्य को लेकर सशंकित हैं। बताया जा रहा है कि वहीं से यह बात निकली कि महेश दिल्ली में रहते हैं। इसी के बाद कांग्रेस ने इस चुनाव को दिल्ली व सल्ट के बीच बनाने की भी कोशिश की है। ऐसे में यह चुनाव मुख्यरूप से सल्ट से लगते गांव के ही रहने वाले पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत, उनके पुराने सबसे बड़े मित्र व अब सबसे बड़े राजनीतिक शत्रु रणजीत रावत, भाजपा के स्थानीय असंतुष्ट नेताओं और भाजपा सरकार व संगठन की ओर से भाजपा प्रत्याशी के पक्ष में चुनाव प्रचार में जुटे काबीना मंत्रियों की मेहनत व राजनीतिक दांव-पेंच का आंकलन करेगा।

यह भी पढ़ें : ..तो कांग्रेस के लिए पांच राज्यों से अधिक महत्वपूर्ण है सल्ट का उपचुनाव

-तीनों गांधी व पूर्व पीएम सहित 30 स्टार प्रचारकों की सूची जारी
नवीन समाचार, देहरादून, 31 मार्च 2021। सल्ट उपचुनाव के लिए मंगलवार को कांग्रेस ने अपने स्टार प्रचारकों की सूची जारी कर दी है। प्रदेश कांग्रेस मुख्यालय में पार्टी के उपाध्यक्ष सूर्यकांत धस्माना ने बताया कि अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गांधी, पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह, पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी, राष्ट्रीय महासचिव प्रियंका गांधी, प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष प्रीतम सिंह, प्रदेश प्रभारी देवेंद्र यादव, नेता प्रतिपक्ष डॉ. इंदिरा हृदयेश, पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत, सह प्रभारी राजेश धर्माणी सहित कुल तीस लोगों को स्टार प्रचारकों की सूची में शामिल किया गया है।
राज्य के एक उपचुनाव के लिए कांग्रेस के स्टार प्रचारकों की ऐसी सूची देखकर ऐसा लग रहा है, मानो यह उपचुनाव नहीं, बल्कि पूरे प्रदेश का आम चुनाव हो। देश के पांच राज्यों में हो रहे आम चुनावों के बीच एक उपचुनाव में इतनी बड़ी स्टार प्रचारकों की सूची को देखकर यह साफ संदेश भी जा रहा है कि कांग्रेस सल्ट के उपचुनाव को वास्तव में उप चुनाव नहीं बल्कि अगले वर्ष होने वाले आम चुनाव से पहले सेमीफाइनल ही नहीं अगले आम चुनाव से अपने अपने लिए मनोवैज्ञानिक लाभ हासिल करने का मौका मानकर सब कुछ झोंक देना चाहती है। ऐसे में इतने सब कुछ के बाद सल्ट उपचुनाव का परिणाम सत्तारूढ़ दल से अधिक कांग्रेस के लिए अग्नि परीक्षा की तरह होने जा रहा है। इस चुनाव में यदि उनकी प्रत्याशी 2017 के चुनाव में भाजपा प्रत्याशी से 2910 वोटों के अंतर को पाट कर चुनाव जीत पाती है तो ठीक है, अन्यथा चुनाव हारने की स्थिति में कांग्रेस पार्टी को राज्य में अपनी कमजोर स्थिति पर फिर से आत्ममंथन करने की जरूरत होगी। हालांकि यह भी देखने वाली बात होगी कि पार्टी 30 स्टार प्रचारकों में से कितने सल्ट पहुंच पाते हैं।

सल्ट के चुनावी रण में इन आठ प्रत्याशियों ने कराया है नामांकन
सल्ट में नामांकन के अंतित दिन भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की उम्मीदवार गंगा पंचोली, भारतीय जनता पार्टी के उम्मीदवार महेश जीना, उत्तराखंड क्रान्तिदल के उम्मीदवार मोहन उपाध्याय, उत्तराखंड परिर्वतन पार्टी के उम्मीदवार जगदीश चन्द्र एवं निर्दलीय उम्मीदवार पान सिहं ने अपना नामांकनकराया। जबकि इससे पूर्व 26 मार्च को निर्दलीय सुरेंद्र सिंह कंडारी, सर्वजन स्वराज पार्टी के शिव सिंह रावत, पीपीआई डेमोक्रेटिक के नंद किशोर ने अपना नामांकन
कराया था। वहीं स्वयं को राज्य में तीसरा विकल्प मान रही आम आदमी पार्टी ने सल्ट में चुनाव लड़ने से पहले ही मानो हार मानते हुए अपना प्रत्याशी ही घोषित नहीं किया। इसके पीछे पार्टी का मानना रहा कि इस चुनाव में उसकी हार तय है। ऐसे में आगामी विधानसभा चुनाव से पहले वह एक हार के साथ चुनाव मैदान में जाना नहीं चाहती थी।

यह भी पढ़ें : आखिर नामांकन की आखिरी तिथि से कुछ घंटे पहले भाजपा-कांग्रेस ने घोषित किए अपने प्रत्याशी

नवीन समाचार, नैनीताल, 28 मार्च 2021। राज्य की चौथी विधानसभा में अल्मोड़ा जिले की सल्ट विधानसभा सीट के लिए आगामी 17 अप्रैल को होने जा रहे लगातर तीसरे उप चुनाव के लिए नामांकन की अंतिम तिथि 30 मार्च से कुछ घंटे पूर्व आखिरी पलों तक भाजपा व कांग्रेस एक-दूसरे का मुंह तांकते रहे। आखिर सत्तारूढ़ भाजपा ने ही पहल की और पूर्व में दिये जा चुके स्पष्ट संकेतों के अनुसार तय बताये जा रहे गत नवंबर में दिवंगत हुए पूर्व विधायक स्वर्गीय सुरेंद्र सिंह जीना के बड़े भाई महेश जीना को अपना प्रत्याशी घोषित किया। इसके कुछ देर बाद कांग्रेस ने 2017 में स्वर्गीय जीना से विधानसभा चुनाव लड़ी और करीब दो हजार मतों से पराजित रहीं गंगा पंचोली को अपना प्रत्याशी घोषित किया। बताया जा रहा है कि कांग्रेस को आशंका थी कि भाजपा पूर्व के स्पष्ट संकेतों के बावजूद आखिरी क्षणों में मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत को भी सल्ट से चुनाव लड़ा सकती है, ऐसे में कांग्रेस ने भी पूर्व विधायक रणजीत सिंह रावत के परिवार से टिकट देने पर विचार किया जा रहा था।
उल्लेखनीय है कि सल्ट सीट का यह उप चुनाव नए मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत के लिए पहली अग्नि परीक्षा बताया जा रहा है, हालांकि अब प्रत्याशियों की घोषणा के बाद अब यह उपचुनाव उतना महत्वपूर्ण नहीं रह जाएगा, क्योंकि चुनाव में चाहे जो भी जीते, वह अगले कुछ माह के लिए ही विधायक रह पाएगा। फिर भी यह कहा जा सकता है कि यह चुनाव भाजपा-कांग्रेस के साथ ही उक्रांद के लिए भी आगामी चुनाव से पूर्व जनता में अपनी शक्ति को भांपने का एक माध्यम हो सकता है। जबकि आम आदमी पार्टी इस उप चुनाव से पहले ही अपने हाथ पीछे खींच चुकी है।

सल्ट उपचुनाव : यह भी पढ़ें : सल्ट में महेश जीना के नामांकन पत्र खरीदने के साथ शुरू हुआ सत्ता का संग्राम

नवीन समाचार, देहरादून, 23 मार्च 2021। सल्ट विधानसभा उपचुनाव के लिए भाजपा ने पूर्व विधायक स्वर्गीय सुरेंद्र जीना के बड़े भाई महेश जीना का नाम आखिर घोषित कर दिया है। इसके बाद उन्होंने नामांकन पत्र भी खरीद लिया है। उनके अलावा संतोषी देवी पत्नी नंदन सिंह व शिव सिंह रावत पुत्र आनंद सिंह रावत ने भी आज नामांकन पत्र खरीदे।
उल्लेखनीय है कि जीना के निधन के बाद सल्ट विधानसभा सीट खाली हुई है। माना जा रहा है कि उन्हें इस चुनाव में सहानुभूति का लाभ मिल सकता है। महेश बीकॉम स्नातक हैं और निजी व्यवसाय करते हैं, तथा पिछले 38 सालों से संघ में कार्य करते रहे हैं, और इधर लंबे समय से भाजपा से भी जुड़े हैं। बताया जा रहा है कि स्वर्गीय सुरेंद्र जीना के चुनाव प्रबंधन में भी उनकी काफी भूमिका रहती थी। महेश को भाजपा से टिकट मिलने के बाद उम्मीद की जा रही है कि कांग्रेस की ओर से पिछली बार स्वर्गीय जीना से करीब दो हजार वोटों से पीछे रहीं हरीश रावत की पसंद गंगा पंचोली प्रत्याशी हो सकती हैं।

यह भी पढ़ें : यह है भाजपा-कांग्रेस की रणनीति

डॉ. नवीन जोशी @ नवीन समाचार, नैनीताल, 22 मार्च 2021। सल्ट उपचुनाव के लिए मंगलवार 23 मार्च से नामांकन की प्रक्रिया शुरू हो गई है, किंतु अभी तक दोनों प्रमुख राजनीतिक दलों ने अपने प्रत्याशियों की घोषणा नहीं की है। ऐसा इसलिए कि सल्ट में चुनावी द्वंद्व केवल एक प्रत्याशी की जीत से अधिक है। सल्ट का इस चुनाव में विजयी रहने वाला विधायक भले ही एक वर्ष से भी कम अवधि के लिए हो, परंतु इस उपचुनाव में जीत के कई अलग-अलग मायने होंगे। जहां यह चुनाव न केवल राज्य के नए मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत व भाजपा के नए प्रदेश अध्यक्ष के लिए, बल्कि सत्ता में लौटने का ख्वाब सजा रही कंाग्रेस पार्टी के लिए भी लिटमस टेस्ट होगा। इसलिए दोनों ही दल यहां मीडिया की 20 मार्च से प्रत्याशी घोषित करने की संभावना जताने के बावजूद नामांकन की प्रक्रिया शुरू होने के बाद भी प्रत्याशी चयन में ‘वेट एंड वॉच’ की रणनीति पर काम कर रहे हैं। दोनों दल इस तरह अपना प्रत्याशी घोषित करना चाहते हैं कि दूसरे दल को उसके अनुरूप रणनीति बनाने का समय न मिले। वहीं राज्य में तीसरे विकल्प होने का दावा करने वाली आम आदमी पार्टी की तो बात ही क्या की जाए जो सल्ट से चुनाव लड़ने से पहले ही तौबा कर चुकी है।
सल्ट के चुनाव की पृष्ठभूमि की बात करें तो भाजपा विधायक सुरेंद्र सिंह जीना के असामयिक निधन से रिक्त हुई इस सीट पर जहां भाजपा में दो तरह से मंथन चल रहा है, वहीं कांग्रेस में भी यह मंथन दो तरह से ही चल रहा है। वर्ष 2002 से 2007 के बीच सल्ट से विधायक रह चुके और हरीश रावत के नेतृत्व वाली कांग्रेस सरकार में ‘शेडो मुख्यमंत्री’ कहे जाने वाले व इधर हरीश रावत को मानसिक संतुलन खो बैठे बुजुर्ग तक कह चुके रणजीत रावत सल्ट से स्वयं या अपने पुत्र विक्रम रावत को चुनाव लड़ाने के इच्छुक हैं, वहीं हरीश रावत कह चुके हैं कि सल्ट की सीट कांग्रेस की ओर से स्वर्गीय जीना को समर्पित कर दी जानी चाहिए। उनकी ओर से पिछली बार जीना से करीब दो हजार वोटों से चुनाव हारी गंगा पंचोली की फिर से उम्मीदवारी है। इधर सत्तारूढ़ भाजपा ने सल्ट से प्रत्याशी चयन के लिए भले स्वर्गीय जीना के भाई महेश जीना सहित छह संभावित प्रत्याशियों के नामों का पैनल केंद्रीय हाइकमान को भेजा है, किंतु कंागेस के सूत्रों की मानें तो अभी भी मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत की इस सीट से चुनाव लड़ने की संभावनाएं पूरी तरह से खारिज नहीं हुई हैं। क्योंकि यदि तीरथ यह चुनाव नहीं लड़ते तो छह माह के भीतर उन्हें चुनाव का सामना करना ही होगा। अन्यथा भाजपा सरकार छह माह बाद ही आम चुनाव की घोषणा भी कर सकती है। कांग्रेस भी इसी कारण प्रत्याशी की घोषणा में समय ले रही है। पार्टी की रणनीति है कि यदि भाजपा से तीरथ सिंह रावत को चुनाव लड़ाने की घोषणा होती है तो रणजीत रावत या उनके पुत्र को चुनाव लड़ाया जाए, अन्यथा गंगा पंचोली कांग्रेस की प्रत्याशी हो सकती हैं। भाजपा भी यह जानती है, इसलिए प्रत्याशी की घोषणा में पूरा समय ले रही है।

यह भी पढ़ें : राज्य में डीपीसी चुनावों पर हाईकोर्ट ने सरकार को दिया सिर्फ कल तक का समय

नवीन समाचार, नैनीताल, 03 मार्च 2021। उत्तराखंड उच्च न्यायालय की खंडपीठ ने डीपीसी यानी जिला योजना समिति चुनाव में हो रही देरी पर सरकार को फटकार लगाई है, और सरकार को गुरुवार 4 मार्च तक मतदान की तिथि बताने के निर्देश दिए हैं।बुधवार को जिला पंचायत संगठन के प्रदेश अध्यक्ष प्रदीप भट्ट की जनहित याचिका पर सुनवाई पर की। इस दौरान याचिका पर सुनवाई के दौरान राज्य सरकार ने उच्च न्यायालय में जवाब दाखिल करते हुए कहा कि हरिद्वार के पंचायत चुनाव सम्पन्न होने के बाद राज्य के सभी 13 जनपदों में एक साथ चुनाव कराए जाएंगे। इस पर न्यायालय ने आपत्ति जताते हुए कहा कि कल गुरुवार 4 मार्च तक मतदान की तिथि बताएं। वहीं राज्य निर्वाचन आयोग ने न्यायालय में कहा कि राज्य निर्वाचन आयोग चुनाव कराने को तैयार है। जबकि याचिकाकर्ता प्रदीप भट्ट की ओर से कहा गया कि संविधान और लोकतंत्र की रक्षा जरूरी है।

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नवीन समाचार, नैनीताल, 7 फरवरी 2021। मुख्यालय में रविवार को हुए वाल्मीकि सभा की कार्यकारिणी के चुनाव में अध्यक्ष पद पर गिरीश भैया, महासचिव पद पर दिनेश कटियार, उपाध्यक्ष पद पर राजू लाल और उपसचिव पद पर रोहित कैसले ने जीत हासिल की। उल्लेखनीय है कि अध्यक्ष पद पर निर्वाचित रहे गिरीश भैया पूर्व मैं भी अध्यक्ष सरपंच रहे हैं जबकि पराजित रहे मनोज कुमार वर्तमान में सरपंच थे।
रविवार देर रात करीब 11 बजे मतगणना के बाद मुख्य चुनाव अधिकारी अमित सहदेव ने परिणामों की घोषणा करते हुए बताया कि अध्यक्ष पद पर गिरीश भैया को 688, मनोज कुमार को 517 व कमल कटियार को 138 मत मिले, जबकि 49 मत निरस्त हुए। वहीं उपाध्यक्ष पद पर राजू लाल को 651, महेश कुमार को 497 व बलवीर वाल्मीकि को 174 मत मिले और 69 मत निरस्त हुए। इसी तरह महासचिव पद पर दिनेश कटियार को 761, राहुल पुजारी को 559 मत मिले, जबकि 72 मत निरस्त हुए। वहीं उपसचिव पद में रोहित कैसले को 421, अभिषेक मुल्तानिया को 366, अश्विनी पारछे को 236, आशीष कटियार को 180 व वीरेंद्र कुमार को 108 मत मिले, जबकि 81 मत निरस्त हुए। परिणाम आने के बाद विजयी प्रत्याशियों के समर्थकों ने एक दूसरे को मिठाई खिलाई और ढोल बजाकर जुलूस निकाला।
इससे पहले रविवार को वाल्मीकि सभा चुनाव कार्यकारिणी के चार पदों के लिए सुबह आठ बजे से पालिका सभागार में मतदान शुरू हुआ। इससे पूर्व सुबह आठ बजे से पालिका सभागार में चुनाव पर्यवेक्षक सुनील खोलिया की देखरेख में मतदान शुरू हुआ। सुबह से ही मतदान को लेकर खासा उत्साह देखा गया। लोग वोट डालने के लिए कतारों में खड़े रहे। वहीं समर्थक प्रचार के दौरान अपने अपने प्रत्याशी की जीत का दावा करते दिखे। शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए चुनाव स्थल पर पुलिसकर्मी भी मुस्तैद रहे। चुनाव प्रक्रिया में महेंद्र सिलेलान, हिमांशु चंद्रा, दीपराज, मनोज कुमार, मोहन चिलवाल, विश्वकेतु वैद्य, हेमंत, जगदीश नेगी, रवि कुमार, मनोज चौहान आदि भी योगदान देते दिखे।

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नवीन समाचार, नैनीताल, 26 जनवरी 2021। नगर की करीब चार हजार मतदाता सदस्यों वाली वाल्मीकि सभा के आगामी सात फरवरी को होने वाले चुनाव के लिए सोमवार को नाम वापसी व चुनाव चिन्ह वितरण की प्रक्रिया हुई। इस दौरान उप सचिव पद के एक प्रत्याशी उमेश कुमार ‘गुड्डू’ ने अपना नामांकन वापस ले लिया।
इस दौरान अध्यक्ष पद प्रत्याशी गिरीश भैया को धनुष बाण, कमल कटियार को गुलाब व मनोज कुमार को किताब, उपाध्यक्ष पद प्रत्याशी महेश कुमार ‘पप्पू’ को तराजू, राजू लाल को सीढ़ी व बलवीर वाल्मीकि को उगता सूरज, सचिव पद के प्रत्याशी दिनेश कटियारको छाता व राहुल पुजारी को पतंग, उपसचिव पद के लिए विरेंद्र कुमार ‘बॉबी’ को घंटी, आशीष कटियार को शंख, रोहित कैशले को लालटेन, अभिषेक वाल्मीकि ‘युवी’ को अल्मारी व अश्विनी पारछे को कार चुनाव चिन्ह मिला। चुनाव संचालन समिति के मुख्य चुनाव अधिकारी महेंद्र सिलेलान व अमित सहदेव के साथ ही मनोज कुमार, मंगू लाल, मनोज चौहान, त्रिलोक टांक, हेमंत बेदी, दीपराज, दिनेश रत्नाकर, जगदीश जग्गी व रवि कुमार ने पूरी प्रक्रिया में योगदान दिया।

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नवीन समाचार, नैनीताल, 25 जनवरी 2021। नगर की करीब चार हजार मतदाता सदस्यों वाली वाल्मीकि सभा के आगामी सात फरवरी को होने वाले चुनाव के लिए रविवार को नामांकन प्रक्रिया शुरू हो गई। अध्यक्ष पद के लिए गिरीश भैया, कमल कटियार व मनोज कुमार, उपाध्यक्ष पद के लिए महेश कुमार ‘पप्पू’, राजू लाल व बलवीर वाल्मीकि, सचिव पद के लिए दिनेश कटियार व राहुल पुजारी, उपसचिव पद के लिए विरेंद्र कुमार ‘बॉबी’, आशीष कटियार, रोहित कैशले, अभिषेक वाल्मीकि ‘युवी’, अश्विनी पारछे व उमेश कुमार ‘गुड्डू’ ने पर्चे भरे। चुनाव संचालन समिति के मुख्य चुनाव अधिकारी महेंद्र सिलेलान व अमित सहदेव के साथ ही मनोज कुमार, मंगू लाल, मनोज चौहान, त्रिलोक टांक, हेमंत बेदी, दीपराज, दिनेश रत्नाकर, जगदीश जग्गी व रवि कुमार ने नामांकन प्रक्रिया पूरी कराने में योगदान दिया। बताया गया कि 26 जनवरी को 10 से 2 बजे तक नाम वापसी व चुनाव चिन्ह वितरण इसी दिन शाम 3 से 5 बजे तक होगा और मतदान सात फरवरी को प्रातः 8 से शाम 4 बजे तक, इसके उपरांत इसी दिन मतगणना शाम 5 बजे से एवं मतगणना के उपरांत परिणाम घोषित किए जाएंगे।

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-चुनाव 7 फरवरी को, चुनाव प्रक्रिया 25 से
नवीन समाचार, नैनीताल, 23 जनवरी 2021। नगर की करीब चार हजार मतदाता सदस्यों वाली वाल्मीकि सभा के चुनाव आगामी सात फरवरी को होंगे। शनिवार को सभा के पदाधिकारियों की बैठक में चुनाव कार्यक्रम एवं चुनाव हेतु चुनाव संचालन समिति की घोषणा कर दी गई। चुनाव संचालन समिति में मुख्य चुनाव अधिकारी महेंद्र सिलेलान व अमित सहदेव तथा मनोज कुमार, मंगू लाल, मनोज चौहान, त्रिलोक टांक, हेमंत बेदी, दीपराज, दिनेश रत्नाकर, जगदीश जग्गी व रवि कुमार सदस्य होंगे। चुनाव हेतु नामांकन 25 जनवरी को सुबह 11 से 4 बजे तक, नाम वापसी 26 को 10 से 2 बजे तक, चुनाव चिन्ह वितरण इसी दिन शाम 3 से 5 बजे तक तथा मतदान सात फरवरी को प्रातः 8 से शाम 4 बजे तक, इसके उपरांत इसी दिन मतगणना शाम 5 बजे से एवं मतगणना के उपरांत परिणाम घोषित किए जाएंगे।

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नवीन समाचार, नैनीताल, 09 जनवरी 2021। नगर की करीब चार हजार मतदाता सदस्यों वाली वाल्मीकि सभा के चुनाव आगामी सात फरवरी को हो सकते हैं। शनिवार को सभा के पदाधिकारियों की नगर पालिका सभागार में सरपंच मनोज कुमार की अध्यक्षता एवं सचिव दिनेश कटियार के संचालन में आयोजित हुई बैठक में सभा के चुनाव कराने की प्रक्रिया पर विचार हुआ। इस दौरान सभी सदस्यों ने 7 फरवरी 2021 को चुनाव कराने की राय दी। यानी चुनाव मौजूदा कार्यकारिणी के तय कार्यकाल से कुछ दिन बाद होंगे। साथ ही चुनाव कमेटी बनाने के लिए भी प्रस्ताव पास किया। चुनाव के लिए महेंद्र सिलेलान, अमित सहदेव, मनोज कुमार, सुनील खोलिया जी और जगदीश गौड़ को चुनाव अधिकारी बनाया गया है। बैठक में सरपंच मनोज कुमार ने कहा कि चुनाव कोरोना की गाइड लाइन का पालन करते हुए कराए जाएंगे। बैठक में कमल कटियार, राजू सरदार, राजकुमार पावर, रनजीत पावर, प्रदीप सहदेव, सोनू सहदेव, विक्की सिलेलान, डीएसए क्रिकेट सचिव मनोज कुमार, अनिल कटियार, राजेश, विक्की आश्रम समिति के सचिव मरदान, राजा राम, विपिन सहदेव, अरविंद, अमन टांक और समाज के वरिष्ठ सदस्य उपस्थित रहे।

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नवीन समाचार, नैनीताल, 08 जनवरी 2020। जिला व मंडल मुख्यालय में कई वर्षों के बाद तल्लीताल व मल्लीताल व्यापार मंडल के चुनाव होने के बाद एक और चुनाव की सुगबुगाहट शुरू हो गई है। जहां चुनावों के लिए सामान्य तौर पर पद पर बैठे व्यक्ति चुनाव कराने को बहुत तैयार नहीं होते, वहीं वाल्मीकि सभा नैनीताल के चुनाव के लिए सरपंच मनोज कुमार एवं महासचिव दिनेश कटियार ने स्वयं चुनाव की पहल करते हुए आगामी 9 जनवरी यानी शनिवार को दोपहर एक बजे से पुनः चुनाव की प्रक्रिया प्रारंभ करने हेतु विचार-विमर्श करने एवं चुनाव कमेटी का गठन करने के लिए वाल्मीकि सभा की आम बैठक बुलाई है। उल्लेखनीय है कि वाल्मीकि सभा में करीब चार हजार मतदाता हैं। इस प्रकार सभा नगर का एक बड़ा सामाजिक संगठन है।
उल्लेखनीय है कि वाल्मीकि सभा के चुनाव इससे पूर्व 24 जनवरी 2016 को हुए थे। इस प्रकार अब सभा का पांच वर्षीय कार्यकाल 24 जनवरी 2021 को समाप्त हो रहा है। इस प्रकार वाल्मीकि सभा की कार्यकाल पूरा से पहले ही चुनाव की प्रक्रिया पूरी कर नई कार्यकारिणी को कार्यभार सोंपने की मंशा साफ नजर आ रही है। चुनाव अध्यक्ष, उपाध्यक्ष, महासचिव व उपसचिव के एक-एक पदों के लिए होंगे। अभी से अध्यक्ष व महासचिव पदों पर तीन-तीन प्रत्याशी तथा उपाध्यक्ष पद पर दो प्रत्याशियों के चुनाव लड़ने की भी संभावना नजर आने लगी है। आगे नवनिर्वाचित पदाधिकारी अपनी 16 सदस्यीय कार्यकारिणी भी गठित करते हैं।

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नवीन समाचार, नैनीताल, 30 अक्टूबर 2020। नगर के तल्लीताल व्यापार मंडल के आगामी चुनावों के लिए बिगुल बच गया है। आगामी चुनावों के लिए नियुक्त समिति की बैठक में व्यापार मंडल की कार्यकारिणी के साथ ही सदस्यता अभियान तथा चुनाव की प्रक्रिया प्रारंभ करने पर नव ज्योति क्लब में बैठक हुई। बैठक में सदस्यों की पात्रता एवं सदस्यता अभियान पर चर्चा करते हुए आगामी 2 नवंबर से सदस्यता अभियान प्रारंभ करने की घोषणा की गई। साथ ही व्यापारियों से सदस्यता अभियान में बढ़-चढ़कर हिस्सा लेने का आह्वान किया गया। बैठक में चुनाव प्रभारी विपिन कांडपाल तथा मो. यूनुस सलमानी, विक्की लाम्बा, राकेश लाम्बा तथा व्यापार मंडल के पदाधिकारी उपस्थित रहे।

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-45 लाख प्रवासी उत्तराखंडियों में से आप ने एक भी उत्तराखंडी को टिकट नहीं दिया तो तीन सीटें गंवाई, पार्टी के नंबर-2 मनीष सिसौदिया की सांसें भी आंखिर तक अटकी रहीं
-भाजपा ने दो उत्तराखंडी मूल के प्रत्याशियों को टिकट दिया, एक ने आआपा उम्मीदवार को हराया, दूसरे सिर्फ 3207 वोटों से हारे, उत्तराखंडी बहुल पांच में से तीन सीटों पर भाजपा जीती
-कांग्रेस ने सिर्फ एक टिकट भाजपा के उत्तराखंडी मूल के उम्मीदवार के खिलाफ आआपा प्रत्याशी को लाभ पहुंचाने के लिए दिया, सिर्फ 2802 वोट लेकर किया शर्मनाक प्रदर्शन, कांग्रेस के 60 प्रत्याशियों पर भारी पड़े तीन उत्तराखंडी उम्मीदवार

नवीन जोशी @ नवीन समाचार, नैनीताल, 13 फरवरी 2020। दिल्ली के विधानसभा चुनाव के परिणाम आ चुके हैं। इन चुनावों ने आम आदमी पार्टी, भाजपा व कांग्रेस को अपनी-अपनी तरह से सबक सिखाए हैं। खास कर यदि दिल्ली के पड़ोसी एवं दिल्ली के बराबर ही 70 विधानसभा सीटों वाले तथा दिल्ली में रहने वाले करीब 45 लाख प्रवासी उत्तराखंडियों के राज्य उत्तराखंड के लिहाज से विश्लेषण करने पर तीनों पार्टियों के लिए चुनाव परिणामों ने साफ-साफ संकेत दिए हैं।
इस चुनाव में निस्संदेह पूरी दिल्ली में लगातार तीसरी बार आम आदमी पार्टी-आआपा या एएपी (पता नहीं क्यों इस पार्टी को आप कहा जाता है) की आंधी चली। अरविंद केजरीवाल की पार्टी जीत का हैट्रिक बनाकर तीसरी बार सरकार बना रही है। लेकिन आआपा के प्रत्याशियों को उत्तराखंडी प्रत्याशियों व मतदाताओं ने कड़ा सबक सिखाया। प्रवासी उत्तराखंडियों की ताकत की वजह से आम आदमी पार्टी को चार सीटों पर हार का सामना करना पड़ा। पटपड़गंज विधानसभा में पार्टी व सरकार के नंबर-2, जिनके शिक्षा विभाग की उपलब्धियों को बताकर ही पार्टी ने प्रचंड जीत की, पार्टी का स्टार चेहरा व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसौदिया को उत्तराखंडी उम्मीदवारों ने जीत के लिए नाकांे चने चबवा दिये। इस उत्तराखंडी बहुल सीट पर मनीष का मुकाबला भाजपा के रवींद्र सिंह नेगी व कांग्रेस के लक्ष्मण रावत से मुकाबला था। दोनों प्रत्याशी उत्तराखंडी मूल के हैं। मनीष सिसोदिया पटपड़गंज सीट की मतगणना में शुरुआती दस राउंड में भारतीय जनता पार्टी के रवि नेगी से पीछे रहे, और अंतिम चुनाव परिणाम में रवि नेगी को 66956 वोट मिले और सिसोदिया को 70163 वोट मिले। इस तरह से सिसोदिया की कुल जीत महज 3207 वोटों से हुई। जबकि कांग्रेस के लक्ष्मण रावत को 2802 वोट मिले। यदि लक्ष्मण ने उत्तराखंडी वोटरों के वोट न काटे होते तो मनीष की जीत का आंकड़ा रवींद्र से केवल 405 वोटों का होता।
ऐसा इसलिए कि आरोपों के अनुसार आम आदमी पार्टी उत्तराखंडियों को हमेशा उपेक्षित करती रही। उत्तराखंड के पिछले विधानसभा चुनाव में पार्टी का ढांचा होने के बावजूद वहां पार्टी ने चुनाव लड़ने की हरी झंडी नहीं दी। इससे पार्टी से कार्यकर्ता दूर हो गए और उन्होंने मजबूरन दूसरे दलों का दामन थाम लिया। दिल्ली विधानसभा चुनाव में एक ओर केजरीवाल की पार्टी ने प्रवासी उत्तराखंडी वोटरों को साधने के लिए अक्टूबर 2019 में गढ़वाली, कुमाऊंनी और जौनसारी भाषा व संस्कृति को अमूल्य बताते हुए एक अकादमी का गठन कर लोक गायक हीरा सिंह बिष्ट को इसका उपाध्यक्ष बनाने, विनोद नगर में उत्तराखंडियों के प्रसिद्ध त्योहार ‘उत्तरायणी’ का आयोजन कर उसमें उत्तराखंड के दिग्गज कलाकारों को बुलाने और गढ़वाली भाषा में अपने प्रचार का गीत बनवाने जैसे ‘लॉलीपॉप’ थमाए, वहीं एक भी उत्तराखंडी को टिकट नहीं दिया।
इसका परिणाम मनीष सिसोदिया ने तो महसूस किया ही होगा, पार्टी के करावल नगर के प्रत्याशी दुर्गेश पाठक तो इसे कभी नहीं भूल पाएंगे कि पूरे प्रदेश में पार्टी की आंधी चलने के बावजूद भाजपा के उत्तराखंडी उम्मीदवार से हार गए। उन्हें भारतीय जनता पार्टी ने उत्तराखंड मूल के पूर्व विधायक मोहन सिंह बिष्ट ने करारी शिकस्त दी। करावल नगर से करीब 2.25 लाख कुल मतदाता हैं, जिनमें से लगभग 66 हजार के आसपास उत्तराखंड मूल के मतदाता हैं।
भाजपा ने उत्तराखंडी बहुल पांच में से तीन सीटें जीतीं
दिल्ली में प्रवासी उत्तराखंडियों की आबादी 45 लाख के करीब हैं। जिसमें से 26 लाख वोटर हैं। इतनी बड़ी संख्या में मतदाता किसी भी पार्टी का समीकरण बदलने का माद्दा रखते हैं। बावजूद तीन पार्टियों ने उत्तराखंडी मूल के केवल तीन प्रत्याशियों (भाजपा ने दो, कांग्रेस ने एक व आआपा ने शून्य) को ही टिकट दिए। इनमें से एक, भाजपा प्रत्याशी चुनाव जीते, जबकि दूसरे उप मुख्यमंत्री से मामूली अंतर से हारे। जबकि कंाग्रेस के एकमात्र प्रत्याशी भी हारे। कांग्रेस ने पटपड़गंज से भाजपा के उत्तराखंडी मूल के प्रत्याशी के खिलाफ संभवतया आआपा प्रत्याशी मनीष सिसौदिया को लाभ पहुंचाने के लिए उत्तराखंडी मूल के अपने एकमात्र प्रत्याशी लक्ष्मण रावत को चुनाव मैदान में उतारा था, जिन्हें सिर्फ 2802 वोट मिले और शर्मनाक हार मिली।
भाजपा ने प्रवासी उत्तराखंडी मतदाताओं और प्रत्याशियों पर विश्वास जताया तो बताया जा रहा है कि हमेशा की तरह इस बार भी प्रवासी उत्तराखंडियों ने भी अपने वोट भाजपा पर जमकर लुटाए। परिणास्वरूप भाजपा ने प्रवासी उत्तराखंड बहुल जनसंख्या वाली पांच सीटों में से तीन पर जीत दर्ज की। जबकि दो पर उसके उम्मीदवार बहुत कम अंतर से दूसरे नंबर पर रहे। इनमें से एक सीट करावल नगर में भारतीय जनता पार्टी के उत्तराखंड मूल के प्रत्याशी पूर्व विधायक मोहन सिंह बिष्ट भी जीते, जबकि पार्टी के दूसरे उत्तराखंडी मूल के उम्मीदवार रवींद्र नेगी ने मनीष सिसोदिया की सांसें आंखिर तक अटकाए रखीं।
कांग्रेस के 60 पर तीन उत्तराखंडी भारी
दिल्ली में कांग्रेस पार्टी को कुल 395924 वोट मिले। जिसमें पटपडगंज से लक्ष्मण रावत को 2802 वोट मिले। यानि प्रवासी उत्तराखंड के प्रत्याशी के वोट हटा दिए जाए तो कांग्रेस पार्टी को 393122 वोट मिले। दो बड़ी पार्टियों से प्रवासी उत्तराखंड के तीन उम्मीदवार मैदान में थे जिनमें से करावल नगर सीट से मोहन सिंह बिष्ट को 96390 व पटपडगंज से रवि नेगी को 66956 वोट मिले तथा यही से लक्ष्मण रावत को 2802 वोट मिले। कुल मिलाकर वोटों की संख्या हुई 166479। कांग्रेस के 60 उम्मीदवारों को मिलाकर कुल डेढ़ लाख के करीब वोट मिले हैं। यानि कि कांग्रेस के 60 उम्मीदवारों पर प्रवासी उत्तराखंड के तीन प्रत्याशी भारी साबित हुए।

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Delhi Election Result 2020 : हल्द्वानी के रवि नेगी ने शिक्षा मंत्री मनीष सिसोदिया को दी कड़ी टक्‍कर nainital news
हल्द्वानी निवासी अपने भाई के साथ पटपड़गंज से भाजपा उम्मीदवार रवींद्र सिंह नेगी।

नवीन समाचार, हल्द्वानी, 11 फरवरी 2020। दिल्ली के विधानसभा चुनाव में शिक्षा व स्वास्थ्य सुविधाओं में सुधार के नाम पर आम आदमी पार्टी के नाम पर ‘क्लीन स्वीप झाड़ू’ लगी। बावजूद पार्टी व उनकी पिछली सरकार में निस्संदेह नंबर-2 की हैसियत रखने वाले शिक्षा मंत्री मनीष सिसौदिया की सांसें 11वें राउंड तक पीछे रहने के साथी अटकी रहीं, तो इसके पीछे उत्तराखंड के पहाड़ का एक लाल रवींद्र सिंह नेगी था। मूलतः अल्मोड़ा जनपद के जैंती क्षेत्र के ग्राम सीम दाड़मी निवासी रवींद्र सिंह नेगी ने बतौर भाजपा उम्मीदवार मनीष सिसौदिया के पिछली बार के 25 हजार से जीत के आंकड़े को भी महज 3207 वोटों का कर दिया।
रवि भाजपा युवा मोर्चा के दिल्ली में जिलाध्यक्ष रह चुके हैं और वर्तमान में पटपड़गंज से लगे लक्ष्मी नगर-विनोद नगर मंडल के मंडल अध्यक्ष हैं। उनके पिता प्रताप सिंह नेगी केंद्रीय गृह मंत्रालय में कार्यरत रहे। इसलिए रवींद्र का बचपन दिल्ली में ही बीता है, परंतु उनका पहाड़ से अब भी संपर्क बना हुआ है। उनके बड़े भाई हरीश नेगी हल्द्वानी के देवलचौड़ बंदोबस्ती में रहते हैं और निर्माण के कारोबार से जुड़े हैं। रवींद्र द्वारा मनीष सिसोदिया को दी गई नाकों चने चबाने जैसी कड़ी टक्कर में पहाड़ के मतदाताओं का भी बड़ा योगदान माना जा रहा है, जो पहाड़ से उनके प्रचार के लिए भी दिल्ली गए थे और दिल्ली में भी बड़ी संख्या में रहते हैं। इसलिए उनके परिणाम पर भी पहाड़वासियों की निगाह लगी हुई थी।
उल्लेखनीय है कि रवींद्र के अलावा दिल्ली के चुनाव में उत्तराखंड के उम्मीदवार बुराड़ी से हरीश बहुगुणा सहित कई अन्य उम्मीदवार भी चुनाव मैदान में थे, और उन्होंने उल्लेखनीय प्रदर्शन भी किया है, लेकिन रवीेंद्र का नाम सभी उत्तराखंडियों की जुबान पर आना तय है।

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नवीन समाचार, देहरादून, 14 जनवरी 2020। लोक सभा चुनाव लड़ चुके जयप्रकाश उपाध्याय समेत तीन प्रत्याशियों पर भारत निर्वाचन आयोग ने तीन साल तक किसी भी तरह का चुनाव लड़ने पर प्रतिबंध लगा दिया है। तीनों प्रत्याशियों ने लोकसभा चुनाव के परिणाम घोषित होने के बाद तय समय पर अपने चुनाव व्यय का ब्योरा निर्वाचन आयोग को उपलब्ध नहीं कराया था।

अपर जिलाधिकारी (एडीएम) प्रशासन रामजीशरण शर्मा ने निर्वाचन आयोग की कार्रवाई के बारे में जानकारी देते हुए बताया कि लोकसभा चुनाव-2019 में टिहरी सीट के प्रत्याशी रहे जयप्रकाश उपाध्याय, मधु शाह और गौतम बिष्ट पर तीन साल का प्रतिबंध भारत निर्वाचन आयोग ने लगाया है। यह जनवरी 2020 से आगामी तीन वर्ष की अवधि में किसी भी प्रकार के चुनाव में भाग नहीं ले सकते। उन्होंने बताया कि पिछले साल टिहरी संसदीय क्षेत्र से लोकसभा चुनाव लड़ चुके उत्तराखंड क्रांति दल के जयप्रकाश उपाध्याय सहित मधु शाह व गौतम बिष्ट ने चुनावी खर्च का ब्योरा उपलब्ध नहीं कराया था। जिला निर्वाचन कार्यालय की तरफ तीनों प्रत्याशियों को कुल छह नोटिस जारी किए गए। जिसमें चुनाव समाप्त होने के बाद पहला नोटिस भेजा गया। इसके बाद हर माह उन्हें नोटिस जारी किए गए। गत दिसंबर को तीनों प्रत्याशी को अंतिम नोटिस जारी किए गया। बार-बार रिमाइंडर भेजने के बाद भी तीन प्रत्याशियों की तरफ से नोटिस का जवाब नहीं दिया गया। इसके बाद जिला निर्वाचन अधिकारी की तरफ से रिपोर्ट मुख्य निर्वाचन आयोग को भेज दी गई। जिस पर भारत निर्वाचन आयोग ने तीनों प्रत्याशियों पर अगले तीन साल तक किसी भी तरह का चुनाव नहीं लड़ पाएंगे।

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-मनोज साह एक बार पुनः श्रीराम सेवक सभा के बने अध्यक्ष, बवाड़ी महासचिव

नवीन समाचार, नैनीताल, 13 नवंबर 2019। नगर की 101 वर्ष पुरानी श्रीराम सेवक सभा की नवनिर्वाचित 15 सदस्यीय कार्यकारिणी ने बुधवार को अपने पदाधिकारी चुनने की प्रक्रिया भी पूरी कर ली। अध्यक्ष पद के लिए हुए मतदान में निवर्तमान अध्यक्ष मनोज साह फिर से अध्यक्ष चुन लिए गए। उन्हें 15 कार्यकारिणी सदस्यों में से 11 ने अपने वोट दिए, जबकि पराजित प्रत्याशी हिमांशु जोशी को केवल 4 मतों से संतोष करना पड़ा। वहीं अन्य पदों पर सभी प्रत्याशी निर्विरोध चुन लिये गये। मनोज जोशी उपाध्यक्ष, जगदीश बवाड़ी महासचिव, विमल चौधरी उप सचिव, विमल साह कोषाध्यक्ष एवं राजेंद्र बजेठा प्रबंधक चुने गए। जिला बार एसोसिएशन ने पूर्व सदस्य आंेकार गोस्वामी, ज्योति प्रकाश व मोहम्मद खुर्शीद हुसैन सहित अनेक अन्य संगठनों ने बधाई दी है।

श्रीराम सेवक सभा के नवनिर्वाचित पदाधिकारी।

उल्लेखनीय है कि इससे पूर्व मंगलवार को15 सदस्यीय कार्यकारिणी के लिए हुए त्रिवार्षिक चुनाव में जगदीश बवाड़ी, विमल कुमार साह, आलोक चौधरी, मुकेश जोशी, आलोक साह, मनोज साह, चंद्र प्रकाश साह, राजेंद्र लाल साह, किशन नेगी, मनोज जोशी, हिमांशु जोशी, भीम सिंह कार्की, विमल चौधरी, किशन गुरुरानी व राजेंद्र बजेठा निर्वाचित हुए थे।

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नवीन समाचार, नैनीताल, 12 नवंबर 2019। नगर की 101 वर्ष पुरानी, 12 अक्टूबर, 1918 को स्थापित श्रीराम सेवक सभा की 15 सदस्यीय कार्यकारिणी के लिए मंगलवार को हुए त्रिवार्षिक चुनाव के लिए मतदान के उपरांत चुनाव परिणामों की घोषणा कर दी गई है। निर्वाचन अधिकारी राजेंद्र लाल साह ने बताया कि सभा की नई कार्यकारिणी के लिए आलोक चौधरी, अशोक साह, किशन गुरुरानी, किशन सिंह नेगी, चंद्र प्रकाश साह, जगदीश चंद्र बवाड़ी, विमल कुमार साह, भीम सिंह कार्की, मुकेश जोशी, मनोज जोशी, मनोज साह, राजेंद्र लाल साह, राजेंद्र बजेठा, विमल चौधरी व हिमांशु जोशी निर्वाचित घोषित हुए हैं। आगे नयी कार्यकारिणी से तीन दिन के भीतर बैठक करने को कहा गया है, जिसमें सभा के अध्यक्ष, महासचिव, उपाध्यक्ष, कोषाध्यक्ष व प्रबंधक आदि पदाधिकारियों का चयन किया जाएगा।

राम सेवक सभा के 15 निर्वाचित सदस्यों की घोषणाचुनाव में जगदीश बवाड़ी व विमल कुमार साह को सर्वाधिक 37-37, आलोक चौधरी को 34, मुकेश जोशी को 33, आलोक साह व निवर्तमान अध्यक्ष मनोज साह को 28-28, चंद्र प्रकाश साह व राजेंद्र लाल साह को 27-27, किशन नेगी व मनोज जोशी को 26-26, हिमांशु जोशी को 25, भीम सिंह कार्की व विमल चौधरी को 24-24, किशन गुरुरानी को 23, राजेंद्र बजेठा को 22, मनोज साह ‘मनदा’ को 21, बालम भंडारी को 18, देवेंद्र लाल साह को 17, अनूप शाही को 10 मत मिले। उल्लेखनीय है कि 15 सदस्यीय कार्यकारिणी के लिए कुल 20 सदस्यों ने नामांकन किये थे। इनमें से मनोज साह मनदा, बालम भंडारी, देवेंद्र लाल साह व अनूप शाही को हार का सामना करना पड़ा है, जबकि ललित साह ने नाम वापस ले लिया था। चुनाव प्रक्रिया में 43 में से 41 सदस्यों ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया। प्रो. ललित तिवारी, हरीश राणा व पुष्कर लाल साह ने सहायक चुनाव अधिकारी के रूप में चुनाव प्रक्रिया में योगदान दिया।

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-श्रीराम सेवक सभा के चुनाव 12 नवंबर को, नामांकन की प्रक्रिया 2 नवंबर से
नवीन समाचार, नैनीताल, 1 नवंबर 2019। सरोवरनगरी की सबसे पुरानी धार्मिक-सामाजिक संस्था श्रीराम सेवक सभा के तीन वर्षों में होने वाले चुनावों का बिगुल बज गया है। चुनाव प्रक्रिया के तहत कार्यकारिणी सदस्यों के 15 पदों के लिए शनिवार दो नवंबर से नामांकन की प्रक्रिया प्रारंभ हो रही है। चुनाव अधिकारी राजेंद्र लाल साह के अनुसार सुबह 10 से अपराह्न दो बजे तक नामांकन पत्रों की बिक्री की जाएगी। पांच नवंबर को प्रातः 11 से दो बजे तक नामांकन पत्र जमा किये जा सकेंगे, जबकि 6 नवंबर को नामांकन पत्र वापसी की जा सकेगी। इसके बाद 12 नवंबर को प्रातः 11 से दो बजे तक सभा के 43 सदस्य मतदान कर सकेंगे, तथा ढाई बजे से मतगणना एवं शाम चार बजे परिणामों की घोषणा की जाएगी और इसी दिन विजेताओं को प्रमाण पत्र जारी कर दिये जाएंगे। आगे निर्वाचित सदस्य स्वयं में से अध्यक्ष, महासचिव, उपाध्यक्ष, कोषाध्यक्ष आदि पदाधिकारियों का चयन करेंगे।

नवीन समाचार
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