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कांग्रेस भाजपा के दो दिन बाद भी घोषित नही कर पाई टिकटों की घोषणा, जानिए वजह

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डॉ. नवीन जोशी @ नवीन समाचार, नैनीताल, 21 जनवरी, 2021। प्रदेश में भाजपा सरकार को उखाड़ फेंकने के दावे के साथ पिछले कुछ माह से सक्रिय हुई कांग्रेस पार्टी दो दिन बाद भी टिकटों की घोषणा नहीं कर पाई है, जबकि दिसंबर माह से ही कभी 50, कभी 55 तो कभी 60 टिकट तय कर लिए जाने के पार्टी की ओर से दावे किए जा रहे थे। पार्टी सूत्रों और राजनीतिक विश्लेषकों की मानें तो पार्टी अभी भी टिकटों के लिए बुरी तरह से फंसी हुई है। इसके पीछे कारण हरीश रावत और प्रीतम सिंह गुटों के बीच अपने गुट के प्रत्याशी को टिकट दिए जाने को लेकर चल रही खींचतान कारण है।

बताया जा रहा है दोनों गुट मान कर चल रहे हैं कि भले उन्होंने पिछले पांच वर्षों में विपक्ष में रहते कोई मेहनत न की हो, लेकिन हर सरकार से पांच वर्ष में परेशान हो जाने वाली राज्य की जनता उनके पिछले कार्यकाल के क्रियाकलापों को भूलकर सत्ता को प्लेट में सजाकर सी उनके हवाले कर देगी। पार्टी को बहुमत मिलेगा तो खुद के मुख्यमंत्री बनने के लिए अपने पक्ष के विधायक होने चाहिए। इस कारण पार्टी ने कई सीटों पर पार्टी प्रत्याशी की जीत सुनिश्चत होने के बावजूद पार्टी प्रत्याशी को नियत नही कर पा रही है।

एक दुविधा यह भी है कि यदि नैनीताल, जागेश्वर, पिथौरागढ़ जैसी कुछ सीटों पर दोनों गुटों के बीच टिकट को लेकर एका है भी तो ऐसी सीटें भाजपा के घोषित टिकटों की संख्या 59 से काफी कम है। इसलिए भी पार्टी का केंद्रीय नेतृत्व टिकटों की घोषणा करने से ठिठक रहा है। पार्टी में टिकटों की घोषणा में हो रही देरी के बाद एक दावेदार ने कहा, टिकटों की घोषणा का इंतजार करते-करते थक गए हैं। अब तो यदि पार्टी रविवार को भी घोषणा नहीं करती तो चलेगा, क्योंकि सोमवार से पहले तो नामांकन नहीं हो सकते। अलबत्ता यह भी माना कि टिकटों की घोषणा में हो रही देरी का निश्चित ही चुनाव पर प्रभाव पड़ेगा। आज के अन्य ताजा ‘नवीन समाचार’ पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें।

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नवीन समाचार, देहरादून, 19 जनवरी 2022। राज्य की सत्ता में लौटने के दावे के साथ कांग्रेस पार्टी दिसंबर माह से कभी 45 तो कभी 15 को छोड़कर शेष सभी यानी 55 सीटों पर टिकट फाइनल होने का दावा कर रही थी। फिर कहा गया कि उत्तरायण लागू होते ही 15 जनवरी तक तो टिकट घोषित कर ही दिए जाएंगे। आज 19 जनवरी को भी टिकट घोषित करने की बात कही जा रही थी, किंतु कांग्रेस के टिकट घोषित करने के कदम अभी भी ठिठके हुए हैं। यहां तक कि अपने पूरी तरह से निर्विवाद टिकट भी पार्टी 21 जनवरी को चुनाव की अधिसूचना घोषित होने के कुछ घंटे पूर्व तक नहीं कर पाई है।

बुधवार को देर शाम बताया गया है कि कांग्रेस नेतृत्व ने उत्तराखंड के उम्मीदवारों को लेकर आज प्रस्तावित केंद्रीय चुनाव समिति की बैठक को टाल दिया। उम्मीद की जा रही है अब यह बैठक कल होगी। इस बैठक में पहली लिस्ट जारी की जा सकती है। कांग्रेस के एक वरिष्ठ नेता ने यह बैठक टलने की पुष्टि करते हुए माना कि आज ही दिल्ली में भाजपा का संसदीय बोर्ड भी उत्तराखंड के प्रत्याशियों के पैनल पर चर्चा कर रहा है।

भाजपा इस बैठक के बाद ही अपनी लिस्ट जारी कर सकती है। क्योंकि कांग्रेस भाजपा की लिस्ट का इंतजार कर रही है। यह भी बताया जा रहा है कांग्रेस में 40 सीटों पर पूर्व सीएम हरीश रावत और नेता प्रतिपक्ष प्रीतम सिंह कैंप के बीच सहमति है। लेकिन 30 सीटों पर दोनों कैंप अपने अपने प्रत्याशियों के लिए भिडे हुए हैं। आगे माना जा रहा है कि गुरुवार 20 जनवरी को दोनों पार्टियों की ओर से टिकटों की पहली सूची जारी की जा सकती है। जबकि कुछ सीटों के लिए 28 जनवरी की नामांकन की आखिरी तिथि तक का भी इंतजार किया जा सकता है। (डॉ.नवीन जोशी) आज के अन्य ताजा ‘नवीन समाचार’ पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें।

यह भी पढ़ें : हल्द्वानी, रामनगर, लालकुआं, भीमताल, अल्मोड़ा, सोमेश्वर, सितारगंज सहित अनेक सीटों पर फंसे कांग्रेस के टिकट, टकराई हरीश व प्रीतम की अदावत

डॉ. नवीन जोशी @ नवीन समाचार, नैनीताल, 17 जनवरी 2022। कांग्रेस पार्टी में हरीश रावत और प्रीतम सिंह गुटों के बीच टिकटों के बंटवारे को लेकर एक बार फिर तलवारें खिंच गई हैं। सच्चाई यह है कि दोनों गुट राज्य की सभी सीटों पर अपनी पसंद के उम्मीदवार चाहते हैं, ताकि चुनाव बाद यदि पार्टी सरकार बनाने की स्थिति में आती है तो उनके द्वारा दिये गए टिकटों पर जीते प्रत्याशी मुख्यमंत्री पद के लिए उनके पक्ष में खड़े हों। इस कारण विभिन्न सीटों पर कांग्रेस में प्रत्याशियों का चयन अटक गया है।

पार्टी के उच्च पदस्थ सूत्रों के अनुसार नैनीताल जनपद की हल्द्वानी सीट पर जहां प्रीतम गुट शुरू से पूर्व नेता प्रतिपक्ष डॉ. इंदिरा हृदयेश के पुत्र सुमित हृदयेश के पक्ष में है, वहीं रावत गुट ने पूर्व सीएम एनडी तिवारी के परिवार से आने वाले प्रदेश प्रवक्ता दीपक बल्यूटिया का नाम आगे किया है। रावत गुट सुमित को लालकुआं से टिकट देकर भी उनका राजनीतिक कॅरियर चौपट करना चाहता है। वहीं लालकुआं सीट पर जहां रावत पूर्व मंत्री हरीश चंद्र दुगार्पाल को टिकट दिलाना चाहते हैं, जबकि प्रीतम संध्या डालाकोटी के नाम पर आगे बढ़ रहे हैं। इसी तरह भीमताल के हरीश पूर्व विधायक दान सिंह भंडारी को तो प्रीतम स्वतंत्रता संग्राम सेनानी के पुत्र गोपाल बिष्ट को टिकट देने की कोशिश में हैं।

वहीं जनपद की रामनगर सीट पर रावत जहां खुद या संजय नेगी को टिकट दिलाना चाहते है। जबकि प्रीतम रणजीत सिंह रावत के लिए अड़े है। सूत्रों के अनुसार रामनगर सीट पर रणजीत के पक्ष में कुछ नेताओं ने आज राष्ट्रीय महामंत्री केसी वेणुगोपाल से भी मुलाकात की है। इसी तरह रावत अल्मोड़ा सीट पर पूर्व विधायक मनोज तिवारी को और प्रीतम पूर्व दायित्वधारी बिट्टू कर्नाटक को, जबकि सोमेश्वर सीट पर रावत पूर्व सांसद प्रदीप टम्टा को और प्रीतम पिछले चुनाव में मात्र 700 वोट से चूक गए राजेंद्र बाराकोटी को और ऊधमसिंह नगर जिले की सितारगंज सीट पर प्रीतम मालती विश्वास को हरीश रावत और नारायण पाल को टिकट दिलाना चाहते हैं।

इसी तरह यमकेश्वर सीट पर प्रीतम ब्लॉक प्रमुख महेंद्र राणा के पक्ष में है। जबकि रावत कैंप इस पर सहमत नहीं हैं। इसी तरह धनोल्टी सीट पर प्रीतम जोत सिंह बिष्ट की जगह डॉ. वीरेंद्र सिंह के पक्ष में है। जबकि सहसपुर और कैंट सीट पर रावत के कड़े विरोध के बावजूद प्रीतम आर्येद्र शर्मा और सूर्यकांत धस्माना के नाम पर अड़े हैं। यही स्थित रुड़की में मनोहर लाल शर्मा व यशपाल राणा के बीच अटकी है। जबकि यमकेश्वर में रावत शैलेंद्र रावत तो प्रीतम ब्लॉक प्रमुख महेंद्र सिंह राणा के पक्ष में, पुरोला सीट पर प्रीतम भाजपा से आए मालचंद तो रावत दुगेश्वर लाल, यमुनोत्री में प्रीतम संजय डोभाल तो रावत अभी हाल में पार्टी में शामिल हुए जिला पंचायत सदस्य दीपक बिजल्वाण की पैरवी कर रहे हैं। यही स्थिति कई अन्य सीटों पर भी बताई जा रही है।  आज के अन्य ताजा ‘नवीन समाचार’ पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें।

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-कांग्रेस के लिए कठिन होगा इन सीटों पर बगावत पर लगाम लगाना
डॉ. नवीन जोशी @ नवीन समाचार, नैनीताल, 14 जनवरी 2022। चुनाव में पार्टी प्रत्याशियों का मुकाबला प्रतिद्वंद्वी पार्टियों के प्रत्याशियों से होता है, लेकिन वैचारिक तौर पर लगातार कमजोर हो रही कांग्रेस के उम्मीदवारों के लिए मुकाबला विरोधियों की जगह अपनों से अधिक होता जा रहा है। खासकर इस बार जहां पार्टी और उसके प्रत्याशियों को लगता है कि राज्य में हर पांच वर्ष में सत्ता के हस्तांतरण की परिपाटी के तहत उन्हें बिना कुछ किए प्लेट में सजी हुई सी सत्ता मिल जाएगी, इसलिए उन्होंनें विपक्ष में रहते पिछले पांच वर्षों में कोई मेहनत नहीं की।

चुनाव में भी अब तक भविष्य के राज्य के लिए कोई वैकल्पिक-बेहतर तस्वीर, लक्ष्य प्रस्तुत नहीं किया। कुछ दावेदार तो पिछले करीब पौने पांच साल अपने क्षेत्र से भी गायब रहे और इधर करीब एक माह में ही क्षेत्र में नजर आ रहे हैं। फिर भी उन्हें लगता है कि वे ही सबसे मजबूत प्रत्याशी हैं, और पहले तो वह किसी अन्य को टिकट लेने नहीं देंगे और किसी को मिल भी गया तो वह प्रत्याशी को खुद से आगे बढ़ने नहीं देंगे। ऐसे में खासकर नैनीताल जनपद में पिछले 2012 के चुनाव में जनपद की छह में से केवल एक जनपद में ही कांग्रेस को जीत मिलने का इतिहास दोहराया जाये तो आश्चर्य न होगा।

कांग्रेस के लिए यह स्थिति कुमाऊं के प्रवेश द्वार हल्द्वानी से लेकर जनपद की कमोबेस सभी सीटों पर है। हल्द्वानी में जहां सुमित हृदयेश अपनी मां स्वर्गीय डॉ. इंदिरा हृदयेश की विरासत के स्वाभाविक दावेदार हैं, वहीं दीपक बल्यूटिया डॉ. इंदिरा के साथ राज्य गठन के बाद से ही पीसीसी अध्यक्ष व मुख्यमंत्री पदों के लिए अदावत रखने वाले हरीश रावत के भरोसे टिकट की उम्मीद में हैं। व्यापारी नेता हुकुम सिंह कुंवर एवं राज्य आंदोलनकारी ललित जोशी भी खुद को सबसे सशक्त दावेदार बता रहे हैं। यहां सुमित को हल्द्वानी की जगह लालकुआं से लड़ाकर राजनीतिक कॅरियर खत्म करने की चर्चाओं के बीच यह भी है कि यदि टिकट मिलने पर सुमित चुनाव जीत जाते हैं तो वह लंबे समय तक हल्द्वानी में जम सकते हैं। हालांकि सुमित को पिछले नगर निगम के मेयर के चुनाव में विरोधी अपनी ताकत का अहसास करा भी चुके हैं। इसकी उल्टी स्थिति सुमित की जगह किसी और को टिकट मिलने पर भी हो सकती है।

जनपद की रामनगर सीट पर भी कांग्रेस के लिए कमोबेश ऐसी ही स्थिति है। पूर्व ब्लॉक प्रमुख संजय नेगी रामनगर के स्थानीय व स्वाभाविक उम्मीदवार हैं, परंतु पिछले चुनाव में भितरघात से हार चुके कार्यकारी अध्यक्ष रणजीत रावत को फिर से टिकट मिलने की अधिक चर्चा है। ऐसे में फिर यहां भितरघात के साथ कांग्रेस को हार का परिणाम दोहराया जाए तो आश्चर्य न होगा। यहाँ पिछले दो चुनावों से भाजपा प्रत्याशी दीवान बिष्ट की जीत का राज भी कांग्रेस का यही भितरघात बताया जाता है।

ऐसी ही स्थिति कालाढुंगी में भी है। यहां पिछले दो चुनावों में महेश शर्मा के बगावत कर निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में अच्छा प्रदर्शन करने के बावजूद कांग्रेस पूरे पांच वर्ष गायब रहे प्रकाश जोशी को टिकट देती है तो चुनाव परिणाम तीसरी बार समान यानी भाजपा प्रत्याशी बंशीधर भगत के पक्ष में हो सकता है, और यदि महेश शर्मा को टिकट मिलता है तो यह जोशी के लिए पिछले दो चुनावों की हार का बदला लेने का मौका होगा।

लालकुआं सीट पर भी स्थिति इससे भी अधिक दिलचस्प है। यहां पूर्व मंत्री हरीश दुर्गापाल 2012 में कांग्रेस से बागी होकर व निर्दलीय लड़कर कांग्रेस प्रत्याशी हरेंद्र बोरा को हराकर चुनाव जीते और कांग्रेस सरकार में मंत्री बने और वापस कांग्रेस में शामिल हो गए। 2017 में उन्हें कांग्रेस से टिकट मिला तो हरेंद्र बोरा ने निर्दलीय लड़कर और उन्हें हराकर बदला चुकाया। अब इस चुनाव में कौन-किससे कौन सा बदला लेगा यह आने वाले कुछ दिनों में साफ हो जाएगा।

वहीँ, नैनीताल सीट पर कांग्रेस राज्य बनने के बाद केवल एक बार जीत पाई है। यहां 2002 में उक्रांद के डॉ. नारायण सिंह जंतवाल जीते तथा 2007 में भाजपा प्रत्याशी खड़क सिंह बोहरा कांग्रेस के बागी डॉ. हरीश बिष्ट के एनसीपी से लड़ने से बने त्रिकोणीय संघर्ष के बाद 400 से कम वोटों से जीते थे। जबकि पिछली बार कांग्रेस से भाजपा में आए संजीव आर्य ने कांग्रेस की तत्कालीन विधायक सरिता आर्य से यह सीट छीनी। अब संजीव कांग्रेस में ‘घर वापसी’ कर चुके हैं तो उसी दिन से ‘मलाई खाने’ जैसे दिल को गहरे चुभोने वाले बयान देने वाले एक कांग्रेसी दावेदार हेम आर्य भाजपा में आकर कांग्रेस का नुकसान कर चुके हैं। अलबत्ता, सरिता के सुर फिलहाल जरूर नरम पड़ गए हैं।

जबकि, भीमताल सीट पर जहां 2012 के पिछले चुनाव में कांग्रेस प्रत्याशी दान सिंह भंडारी कांग्रेस के बागी निर्दलीय राम सिंह कैड़ा की वजह से तीसरे नंबर पर ऐसे धकेल दिए गए, कि अब तक यहां कांग्रेस मुकाबले में नजर नहीं आ रही है। कमोबेश यही स्थिति कुमाऊं मंडल की बाजपुर, काशीपुर, गदरपुर, किच्छा, सितारगंज, सल्ट, अल्मोड़ा, डीडीहाट, गंगोलीहाट व चम्पावत से लेकर सोमेश्वर तक भी नजर आती है। आज के अन्य ताजा ‘नवीन समाचार’ पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें।

यह भी पढ़ें : उत्तराखंड की 31 महिलाओं ने कहा, ‘लड़की हूं-लड़ सकती हूं’, प्रियंका गांधी की साख दांव पर….

-उत्तराखंड में 78 महिलाओं ने प्रदेश कांग्रेस कमेटी के समक्ष आवेदन किए, महिला कांग्रेस ने 31 महिलाओं को टिकट देने की संस्तुति की

डॉ. नवीन जोशी @ नवीन समाचार, नैनीताल, 12 जनवरी 2022। राजनीति और राजनीतिज्ञों की छवि समाज में अच्छी नहीं है। इसलिए कि वे कहते कुछ, और करते कुछ हैं। उनके बातों के मायने देश, काल व परिस्थितियों के अनुसार बदलते रहते हैं। इसलिए उन पर गिरगिट की तरह रंग बदलने और हाथी के दांत दिखाने के और खाने के और, जैसी कहावतों को लेकर कटाक्ष भी किए जाते हैं।

बहरहाल, आज यह संदर्भ इसलिए कि कांग्रेस पार्टी की राष्ट्रीय महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा ने यूपी में ‘लड़की हूं-लड़ सकती हूं’ का नारा देते हुए 40 फीसद टिकट महिलाओं को देने की घोषणा की है। सोनिया गांधी के बाद कांग्रेस पार्टी की नंबर दो महिला नेत्री होने के नाते पूरे देश की महिलाओं में प्रियंका की घोषणा से नई उम्मीद जगी है। इसी उम्मीद पर उत्तराखंड में उन्हीं की पार्टी कांग्रेस की 78 महिलाओं ने प्रदेश कांग्रेस कमेटी के समक्ष आवेदन किए, जबकि महिला कंाग्रेस ने राज्य की 70 सीटों में से 31 यानी करीब 40 फीसद सीटों पर महिलाओं को टिकट के लिए संस्तुति की है।

उत्तराखंड में महिला दावेदारों की बात करें तो यहां महिला कांग्रेस की राष्ट्रीय महासचिव और पूर्व सीएम हरीश रावत की बेटी अनुपमा रावत तथा महिला कांग्रेस की प्रदेश अध्यक्ष सरिता आर्य प्रमुख दावेदारों में हैं। किंतु बताया जा रहा है कि इन दोनों ही नेत्रियों को टिकट मिलने मुश्किल हैं। अनुपमा ने हरिद्वार जिले की लक्सर, खानपुर और हरिद्वार ग्रामीण में से किसी एक सीट पर टिकट देने की मांग की है। किंतु अनुपमा को इसलिए टिकट नहीं मिल सकता कि उनके पिता हरीश रावत मुख्यमंत्री पद के दावेदार हैं। अभी अथवा कांग्रेस के बहुमत पाने पर वह उपचुनाव लड़ेंगे, और राहुल गांधी के फॉर्मूले के अनुसार एक परिवार से दो व्यक्तियों को टिकट नहीं मिल सकता।

राहुल गांधी के फॉर्मूले के लागू होने पर सरिता आर्य की टिकट मिलने की उम्मीदें बढ़ी थीं लेकिन बताया जा रहा है कि पिता यशपाल आर्य के साथ स्वयं भी निवर्तमान विधायक होने के कारण उनकी नैनीताल सीट से संजीव आर्य को टिकट मिलना निश्चित है। महिला कांग्रेस का नेतृत्व करते हुए सरिता किसी अन्य सीट पर अपना जनाधार बनाने लायक समय नहीं निकाल पाई हैं। इसलिए उन्हें भी टिकट मिलना मुश्किल है। उन पर दोहरा दबाव भी है कि यदि वह स्वयं टिकट नहीं पा सकतीं तो अपनी टीम की अन्य महिलाओं की टिकट के लिए कितनी पैरवी कर सकती हैं।

सरिता आर्य

सरिता के अनुसार प्रियंका गांधी की बात से जगी उम्मीद पर उत्तराखंड में भी सामान्य वर्ग की 64 व अनुसूचित जाति की 14 यानी कुल मिलाकर 78 महिलाओं ने टिकट के लिए दावेदारी की है। जबकि उत्तराखंड महिला कांग्रेस की ओर से भी पार्टी हाइकमान को करीब 40 फीसद सीटों पर 31 महिलाओं के नाम सौंपे गए हैं। उन्होने कहा कि उत्तराखंड छोटा राज्य है तो यहां कम से कम 20 फीसद यानी 14 सीटों पर टिकट तो महिलाओं को मिलने ही चाहिए।

उत्तराखंड महिला कांग्रेस ने इस महिला नेत्रियों के लिए टिकट की की है पैरवी

नैनीताल। महिला कांग्रेस की प्रदेश अध्यक्ष सरिता आर्य ने बताया कि उत्तराखंड महिला कांग्रेस की ओर से उन्होंने स्वयं तथा अनुपमा रावत के साथ राज्य महिला आयोग की पूर्व अध्यक्ष सरोजिनी कैंत्यूरा की बहू और दुगड्डा ब्लॉक की प्रधान रुचि कैंत्यूरा, रुड़की सीट से रश्मि चौधरी, पिथौरागढ़ से अंजु लुंठी, लैंसडौन से ज्योति रौतेला व रंजना रावत, राजपुर से वैजयंती माला उर्फ कमलेश रमन व आशा टम्टा, लोहाघाट से निर्मला गहतोड़ी, बाजपुर से सुनीता बाजवा टम्टा, गदरपुर से रीना कपूर, सुरेशी शर्मा उर्फ कोमल, शिल्पी अरोड़ा व ममता हलधर, सहसपुर से नजमा खान, रुद्रपुर से मीना शर्मा, रानीपुर से विमला पांडेय और लालकुआं से संध्या डालाकोटी व बीना जोशी, काशीपुर से मुक्ता सिंह, इंदु मान, अल्का पाल, भीमताल से जया बिष्ट, मसूरी से गोदावरी थापली, प्रदेश प्रवक्ता गरिमा दसौनी व जसवीर कौर, सल्ट से गंगा पंचोली, रुद्रप्रयाग लक्ष्मी राणा व सितारगंज से मंजू तिवारी व ममता विश्वास आदि के लिए टिकट की मांग की गई है। आज के अन्य ताजा ‘नवीन समाचार’ पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें।

यह भी पढ़ें : उत्तराखंड में लगातार कमजोर होती रही है पंत, बहुगुणा, तिवारी जैसे दिग्गज नेताओं की कांग्रेस पार्टी…

डॉ. नवीन जोशी @ नवीन समाचार, नैनीताल, 11 जनवरी 2022। पंडित गोविंद वल्लभ पंत, हेमवंती नंदन बहुगुणा व नारायण दत्त तिवारी जैसे दिग्गज नेताओं की समृद्ध विरासत वाली कांग्रेस के लिए उत्तराखंड हमेसा से राजनीतिक तौर पर उपजाऊ जमीन रही है। लेकिन इसे पार्टी के बाद के नेताओं की उदासीनता कहें कि पार्टी के मूल्यों में आई गिरावट, यह पार्टी उत्तराखंड में लगातार हाशिये पर जाती रही है।

पिछले विधानसभा व लोकसभा चुनाव में तो पार्टी का ऐसा हाल हुआ, जिसकी कोई कल्पना भी नहीं कर सकता था। पार्टी 70 सदस्यीय विधानसभा में बमुश्किल दहाई का आंकड़ा छू पाई। कुछ नेता कुछ सौ वोटों से जीत पाए, जबकि पार्टी की पूर्व सरकार के मुख्यमंत्री व भविष्य के लिए मुख्यमंत्री पद के दावेदार दो-दो सीटों से हारने का ऐतिहासिक रिकॉर्ड बना बैठे। यही नहीं आगे लोकसभा चुनाव में भी कांग्रेस पांच सीटों में खाता भी नहीं खोल पाई।

कांग्रेस को हालांकि आपातकाल में पूरे देश के साथ उत्तराखंड में भी तात्कालिक नुकसान हुआ था, परंतु बाद में पार्टी देश के साथ यहां भी संभल गई थी। यहां कांग्रेस की गिरावट का सिलसिला वास्तव में उत्तराखंड राज्य आंदोलन के दौर से शुरू हुआ। एनडी तिवारी से लेकर हरीश रावत तक पार्टी के अधिकांश नेता राज्य विरोधी रहे। तिवारी ने उत्तराखंड मेरी लाश पर बनेगा वाला बयान दिया तो हरीश रावत केंद्र शासित प्रदेश की बात करते रहे। 1994 में उत्तराखंड आंदोलन के चरम के दौर में दिल्ली में काबिज कांग्रेस आंदोलन को दबाती रही। ऐसे में उत्तराखंड राज्य आंदोलन के दौरान कांग्रेस की स्थिति कुछ ऐसी थी कि इसके नेता उत्तराखंड संयुक्त संघर्ष समिति का नेतृत्व कर रहे रणजीत सिंह वर्मा सरीखे गैर कांग्रेसी नेता के साथ चलने को मजबूर थे।

1999 में जब उत्तर प्रदेश की भाजपा नीत सरकार विधानसभा में उत्तराखंड राज्य निर्माण के लिए संकल्प व बिल लाई, तब पृथक प्रस्तावित राज्य में कांग्रेस उत्तराखंड की सत्ता में काबिज होने के लिए लालायित हुई। नौ नवंबर 2000 को राज्य गठन के दौरान उत्तराखंड में अंतरिम विधानसभा में 30 सदस्य थे। इनमें यूपी के समय चुने हुए 22 विधायक और आठ विधान परिषद सदस्य थे। 22 विधायकों में 17 भाजपा के, एक तिवारी कांग्रेस का, एक बसपा और तीन समाजवादी पार्टी के थे। जबकि कांग्रेस का एक भी विधायक नहीं था।

राज्य में 14 फरवरी 2002 में हुए पहले विधानसभा चुनावों में परिणाम जब आने शुरू हुए तो शुरुआती रुझान भाजपा के पक्ष में आते देखे। तत्कालीन कांग्रेस अध्यक्ष हरीश रावत ने प्रेस के समक्ष हार स्वीकारते हुए हार की जिम्मेदारी भी ले ली। लेकिन किसी तरह कांग्रेस के 36 विधायक जीत गए। भाजपा 19 सीटों पर सिमट गई। बसपा ने सात सीटें जीतीं, जबकि क्षेत्रीय दल यूकेडी भी चार सीटें जीतने में कामयाब रही। इसके बाद हरीश रावत के पक्ष में विधायकों का एक हस्ताक्षर अभियान चलाया गया। लेकिन बाद में कुछ विधायकों ने कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के समक्ष पेश होकर अपने हस्ताक्षर नकली होने की बात कह दी। इसके बाद मुख्यमंत्री की कुर्सी पर एनडी तिवारी विराजमान हो गए।
एनडी ने पूरे पांच साल सरकार चलाई। पार्टी ने हरीश रावत को राज्यसभा भेज दिया। तिवारी सरकार सरकारी धन की बंदरबांट, भ्रष्टाचार और ऐरे-गैरे नेताओं को लाल बत्तियां बांटने के लिए बदनाम रही और 2007 में उसे सत्ता से हटना पड़ा। 2007 के चुनाव में कांग्रेस को वर्ष 2002 के 26.91 प्रतिशत वोट के मुकाबले 2.68 प्रतिशत अधिक 29.59 प्रतिशत वोट मिले। लेकिन वह 36 सीटों के मुकाबले 21 सीटों पर सिमट गई। इस चुनाव में किसी भी दल को स्पष्ट बहुमत नहीं मिला। भाजपा 34 सीट लेकर सबसे बड़े दल के रूप में उभरी।

आगे 2012 के विधानसभा चुनाव में भी किसी भी दल को स्पष्ट बहुमत नहीं मिला। भाजपा 31 सीटों पर सिमट गई तो कांग्रेस 32 सीटें लेकर सबसे बड़े दल के रूप उभरी। शुरुआत में विजय बहुगुणा मुख्यमंत्री बने। हरीश रावत दिल्ली में एक महीने तक खुद को मुख्यमंत्री बनवाने के लिए अड़ गए। तत्काल तो नहीं अगले वर्ष 2013 में केदारनाथ आपदा के बाद राज्य में सत्ता की बागडोर हरीश रावत को मिल गई। अंतर्कलह से जूझ रही पार्टी में वर्ष 2016 में नौ विधायकों ने बगावत कर दी और वह भाजपा में शामिल हो गए। रावत ने किसी तरह से न्यायालय की शरण लेकर सरकार बचाई।
वर्ष 2017 के विधानसभा चुनाव में हरीश रावत न्यायालय से सरकार बचने के बाद सीधे मोदी से मुकाबला करते दिखे, लेकिन मोदी की आंधी में कांग्रेस को डूबा बैठे। जहां भाजपा ने 57 सीटों के साथ प्रचंड बहुमत के साथ सरकार बनाई, वहीं कांग्रेस महज 11 सीटों पर सिमट गई। यह उसका अब तक का सबसे खराब प्रदर्शन था। हालांकि उसके वोट प्रतिशत में बहुत ज्यादा अंतर नहीं पड़ा। इस बार भी पार्टी का वोट प्रतिशत वर्ष 2012 में 34.03 के मुकाबले दशमलव 54 की कमी के साथ 33.49 प्रतिशत रहा।

इस चुनाव में कांग्रेस ने सबकी चाहत, हरीश रावत नारा दिया था। लेकिन मुख्यमंत्री का चेहरा होने के बावजूद वह दो-दो सीटों से चुनाव हार गए। देशभर की यह पहली राजनीतिक घटना थी, जब कोई मुख्यमंत्री ही दो-दो सीटों से हार गया। इस बार भी कांग्रेस उसी पूर्व में आजमाये व फेल हो चुके नारे ‘सबकी चाहत-हरीश रावत’ के नारे के साथ और राज्य में एक बार भाजपा-एक बार कांग्रेस के आने के पूर्व अनुभव के भरोसे चुनाव मैदान में नजर आ रही है। पार्टी में नेताओं से अधिक गुटों के साथ अंर्तकलह भी खूब नजर आ रही है, ऐसे में देखने वाली बात होगी कि पार्टी इस चुनाव में कैसा प्रदर्शन करती है।

उत्तर प्रदेश विधानसभा में कांग्रेस का प्रदर्शन
उत्तर प्रदेश के दौर में उत्तराखंड के हिस्से में करीब 22 सीटें थीं। इनमें से 1969 में कांग्रेस को 14, 1974 में 15, 1977 में 1, 1980 में 13, 1985 में 16, 1989 में 12, 1991 में 3, 1993 में 5 व 1996 में शून्य सीटें मिली थीं। आज के अन्य ताजा ‘नवीन समाचार’ पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें।

यह भी पढ़ें : राहुल गांधी के नए फरमान से उत्तराखंड कांग्रेस के बड़े नेताओं को बड़ा झटका, परिवारवाद का दाग धोएगी कांग्रेस

नवीन समाचार, देहरादून, 10 जनवरी 2022। पूर्व में राहुल गांधी के नेतृत्व में चुनाव लड़ने के ऐलान के बाद कांग्रेस हाईकमान ने खुद के साथ अपने पुत्र-पुत्रियों के लिए भी टिकट मांग रहे उत्तराखंड कांग्रेस के नेताओं को बड़ा झटका दे दिया है। पार्टी के पूर्व केंद्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी ने पंजाब के साथ उत्तराखंड में भी एक परिवार से एक ही व्यक्ति को विधानसभा चुनाव में टिकट देने की घोषणा की गई है। इससे राज्य चुनाव संचालन समिति के अध्यक्ष हरीश रावत सहित कई नेताओं को जोर का झटका लगने की उम्मीद है। बताया जा रहा है कि राहुल गांधी इस तरह पार्टी से परिवारवाद का दाग धोना चाहते हैं।

उल्लेखनीय है कि पूर्व में चुनाव संचालन समिति के अध्यक्ष हरीश रावत के करीबी कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने एक परिवार के लोगों को एक से अधिक टिकट देने की वकालत की थी। जबकि गांधी परिवार के करीबी माने जाने वाले व पूर्व में करीबी होने के बावजूद इन दिनो हरीश रावत पर जमकर आंखें तरेर रहे पूर्व प्रदेश अध्यक्ष किशोर उपाध्याय ने इसका खुलकर विरोध किया था। उन्होंने साफ कहा था कि परिवारवाद लगातार पार्टी कार्यकर्ताओं की भावनाओं को नुकसान पहुंचा रहा है।

गौरतलब है कि उत्तराखंड में स्वयं चुनाव संचालन समिति के अध्यक्ष हरीश रावत पर खुद के साथ बेटे या बेटी के लिए टिकट मांगने के साथ नेता प्रतिपक्ष प्रीतम सिंह व कार्यकारी अध्यक्ष रणजीत रावत के अपने बेटे के लिए टिकट मांगने की बात मीडिया में सार्वजनिक हुई है। अब बताया जा रहा है कि इनके बेटे-बेटियों को टिकट नहीं मिलेंगे, जबकि स्वर्गीय डॉ. इंदिरा हृदयेश के पुत्र सुमित हृदयेश तथा हाल में कांग्रेस में वापस लौटे यशपाल आर्य के साथ उनके विधायक पुत्र संजीव आर्य को टिकट मिलना तय माना जा रहा है, क्योंकि दोनों हालिया विधानसभा में विधायक रहे हैं।

यह भी बताया जा रहा है कि कांग्रेस के साथ ही भाजपा भी मकर संक्रांति के बाद उत्तरायण के शुभ मुहूर्त में टिकटों की घोषणा करेगी। पहले चरण में मौजूदा विधायकों एवं दूसरे स्थान पर रहे नेताओं के नाम तय माने जा रहे हैं। गौरतलब है कि कांग्रेस नेता पूर्व से ही 45 सीटों पर नाम तय होने की बात कहते रहे हैं। (डॉ.नवीन जोशी) आज के अन्य ताजा ‘नवीन समाचार’ पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें।

यह भी पढ़ें : कांग्रेस से आई टिकटों की एक और सूची, हरीश-रणजीत, सुमित हृदयेश व किशोर पर रोचक स्थिति….

नवीन समाचार, देहरादून, 5 जनवरी 2022। उत्तराखंड कांग्रेस की सोमवार को हुई स्क्रीनिंग कमेटी की दूसरी बैठक के बाद भी करीब 40 टिकट फाइनल होने की बात कही गई। इसके बाद कांग्रेस के संभावित प्रत्याशियों की दो सूचियां सामने आ गई हैं। पहली सूची में 34 सीटों पर नाम सामने आए। इनमें सभी विधायक या पूर्व विधायक हैं। इधर एक और सूची सोशल मीडिया पर वायरल हो रही है। इस सूची में कुछ सीटों पर बेहद रोचक बदलाव नजर आ रहे हैं। हम इन दोनों सूचियों में से किसी के भी सही होने का दावा नहीं कर रहे हैं, केवल अपने पाठकों की जानकारी के लिए इन्हें यहां साझा कर रहे हैं।

दूसरी सूची के अनुसार 39 सीटों पर टिकट तय हो गए हैं। इसमें सहसपुर से आर्येंद्र शर्मा, लालकुआं में हरीश दुर्गापाल की जगह सुमित हृदयेश, रामनगर से रणजीत रावत की जगह हरीश रावत, हल्द्वानी से सुमित हृदयेश की जगह दीपक बल्यूटिया तथा रणजीत रावत को सल्ट से टिकट पक्का बताया गया है। इसके अलावा भीमताल से दान सिंह भंडारी व कालाढूंगी भोलादत्त भट्ट के नाम बताए गए हैं। इस सूची में अल्मोड़ा से हरीश रावत के करीबी पूर्व विधायक मनोज तिवारी की जगह पहली बार बिट्टू कर्नाटक का नाम दिया गया है। बड़ी बात यह भी है कि दोनों ही अपुष्ट सूचियों में किशोर उपाध्याय का नाम नहीं है। सुमित हृदयेश को हल्द्वानी की जगह लालकुआं से टिकट देना भी एक तरह से उन्हें टिकट भी देना और उनकी राजनीतिक हत्या किया जाना माना जा रहा है, क्योंकि वह लालकुआं क्षेत्र में सक्रिय नहीं रहे हैं।

उल्लेखनीय है कि इससे पहले पार्टी की ओर से संभावित नामों की जो सूची सामने आई थी उसमें नैनीताल से संजीव आर्य, हल्द्वानी से सुमित हृदयेश, जागेश्वर से गोविंद सिंह कुंजवाल, रानीखेत से करन महरा, केदारनाथ से मनोज रावत, मंगलौर से काजी निजामुद्दीन, लक्सर से हाजी तस्लीम, कलियर से फुरकान अहमद, भगवानपुर से ममता राकेश, श्रीनगर गढ़वाल से गणेश गोदियाल, बाजपुर से यशपाल आर्य, थराली से डॉ. जीत राम, प्रतापनगर से विक्रम नेगी, चकराता से प्रीतम सिंह, गंगोत्री से विजयपाल सजवाण, विकासनगर से नवप्रभात, बद्रीनाथ से राजेन्द्र भंडारी, सहसपुर से राकेश नेगी, धर्मपुर से दिनेश अग्रवाल, डोईवाला से हीरा सिंह बिष्ट,

पौड़ी गढ़वाल से नवल किशोर, कोटद्वार से सुरेंद्र नेगी, पिथौरागढ़ से मयूख महर, डीडीहाट से प्रदीप पाल, कपकोट से ललित फर्स्वाण, गंगोलीहाट से नारायण राम आर्य, द्वाराहाट से मदन बिष्ट, अल्मोड़ा से मनोज तिवारी, लोहाघाट से कुशाल सिंह अधिकारी, चंपावत से हेमेश खर्कवाल, रामनगर से रणजीत रावत, जसपुर से आदेश चौहान, किच्छा से तिलक राज बेहड़, नानकमत्ता से गोपाल राणा और खटीमा से भुवन कापड़ी के नाम सामने आए हैं। पार्टी अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने कहा कि 40 नाम तय कर लिये गए हैं, किंतु नामों की घोषणा चुनाव आचार संहिता लगने के बाद ही की जाएगी। (डॉ.नवीन जोशी) आज के अन्य ताजा ‘नवीन समाचार’ पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें।

यह भी पढ़ें : उत्तराखंड कांग्रेस ने तय किए आधे से अधिक टिकट, इन नेताओं, नेता पुत्र-पुत्रियों के टिकट पक्के !

नवीन समाचार, देहरादून, 31 दिसंबर 2021। उत्तराखंड कांग्रेस ने आधे से अधिक टिकट तय कर दिए हैं। जिन लोगों को टिकट दिए जाने पर सहमति बन चुकी है उनमें कांग्रेस के सभी पूर्व व वर्तमान बड़े चेहरे, सभी कार्यकारी प्रदेश अध्यक्ष व मौजूदा विधायकों के साथ ही कई नेता पुत्र व नेता पुत्रियों के साथ पार्टी के चार बड़े चेहरों के परिवार को भी टिकट दिए जाने की बात प्रकाश में आ रही है। बताया जा रहा है कि सोमवार को उच्च न्यायालय के चुनाव संबंधी याचिका पर कोई प्रतिकूल निर्णय न आने पर सोमवार को ही पार्टी इन टिकटों की घोषणा कर सकती है।

कांग्रेस की पहली सूची में जिन नामों के शामिल होने की संभावना जताई जा रही है, उसमें चुनाव अभियान समिति के प्रमुख हरीश रावत व उनकी पुत्री अनुपमा रावत, नेता प्रतिपक्ष प्रीतम सिंह व उनके पुत्र अभिषेक सिंह, उप नेता करन मेहरा, प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल, कार्यकारी प्रदेश अध्यक्ष रणजीत रावत व उनके पुत्र विक्रम रावत, तिलक राज बेहड़, प्रो. जीतराम, भुवन कापड़ी, वर्तमान विधायक गोविंद सिंह कुंजवाल, आदेश चौहान, हरीश धामी, काजी निजामुद्दीन, ममता राकेश, फुरकान अहमद, राजकुमार, मनोज रावत,

भाजपा छोड़कर कांग्रेस में शामिल हुए यशपाल आर्य व उनके विधायक पुत्र संजीव आर्य, इंदिरा हृृदयेश के पुत्र सुमित हृदयेश के अलावा आर्यन शर्मा, मयूख महर, पूर्व विधायक ललित फर्सवाण, मदन बिष्ट, महेश शर्मा, हेमेश खर्कवाल, यशपाल राणा, सुरेंद्र सिंह नेगी, किशोर उपाध्याय, शूरवीर सिंह सजवाण, विजयपाल सिंह नेगी, राजेंद्र भंडारी, दिनेश अग्रवाल, नवप्रभात, मंत्री प्रसाद नैथानी, ब्रह्मस्वरूप ब्रह्मचारी आदि के नाम बताए जा रहे हैं। (डॉ.नवीन जोशी) आज के अन्य ताजा ‘नवीन समाचार’ पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें।

यह भी पढ़ें : तो कांग्रेस पार्टी ने कर लिया ‘अपनों’ को टिकट देने का निर्णय ! पंजाब के फॉर्मूले को उत्तराखंड में नहीं अपनाएगी कांग्रेस…

नवीन समाचार, नई दिल्ली, 30 दिसंबर 2021। कांग्रेस पार्टी ने आसन्न विधानसभा चुनाव के लिए टिकटों के वितरण के लिए करीब-करीब फैसला कर लिया है। बृहस्पतिवार की रात्रि साढ़े 12 बजे तक नई दिल्ली में कांग्रेस स्क्रीनिंग कमेटी की बैठक चली। बैठक के बाद करीब पौने एक बजे बाहर निकले उत्तराखंड चुनाव संचालन समिति के अध्यक्ष एवं पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत एवं अन्य नेताओं ने इसका इशारा किया।

इस बीच कांग्रेसी खेमे से छन कर आ रही चर्चाओं में यह भी बताया जा रहा है कि पार्टी एक परिवार से एक से अधिक लोगों को टिकट दे सकती है। प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल के अनुसार, उत्तराखंड में अभी ऐसा कोई नियम नहीं हुआ है और न ही अभी कोई फैसला लिया गया है कि एक परिवार से एक ही को व्यक्ति को टिकट मिलेगा। उल्लेखनीय है कि पंजाब विधानसभा चुनाव में प्रत्याशियों के लिए कांग्रेस स्क्रीनिंग कमिटी ने यह फैसला लिया था कि एक परिवार से एक ही व्यक्ति को टिकट दिया जाएगा।

बताया गया है कि उत्तराखंड में स्वयं चुनाव संचालन समिति के अध्यक्ष हरीश रावत अपने अलावा अपनी बेटी व बेटे के लिए भी विधानसभा का टिकट चाहते हैं। इसी तरह प्रदेश के नेता विपक्ष प्रीतम सिंह व उत्तराखंड कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष यशपाल आर्य भी अपने साथ अपने बेटे के लिए टिकट की मांग कर रहे हैं। इसके अलावा कांग्रेस पार्टी के लिए इस बार केवल जिताऊ उम्मीदवार ढूंढना ही महत्वपूर्ण नहीं है बल्कि उम्मीदवार की विश्वसनीयता को भी परखा जा रहा है, कि कहीं वह चुनाव जीतने के बाद अन्य दलों में न शामिल हो जाएं। इसके लिए पार्टी ने उम्मीदवारों के चयन में यूथ कांग्रेस, एनएसयूआई, महिला कांग्रेस, सेवा दल और अन्य जैसे फ्रंटल संगठनों से भी सहयोग लेने की रणनीति बनाई है। स्क्रीनिंग कमेटी की बैठक में इन संगठनों केे प्रमुख को बुलाकर उनसे चर्चा की गई।

हालांकि बताया जा रहा है कि आगामी 4 जनवरी को भी चुनाव संचालन समिति की एक बैठक हो सकती है। बताया गया है कि कांग्रेस पार्टी आचार संहिता लागू होते ही सभी 70 सीटों के लिए टिकटों की घोषणा कर देगी। बैठक में स्क्रीनिंग कमेटी के प्रभारी अविनाश पांडे, चुनाव संचालन समिति के अध्यक्ष व पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत, उत्तराखंड के प्रभारी देवेंद्र यादव, प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल, नेता प्रतिपक्ष प्रीतम सिंह, प्रभारी दीपिका पांडे सिंह समेत कई अन्य वरिष्ठ नेता मौजूद रहे। (डॉ.नवीन जोशी) आज के अन्य ताजा ‘नवीन समाचार’ पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें।

यह भी पढ़ें : यशपाल आर्य ने 18 ग्राम प्रधानों, पूर्व जिपं अध्यक्ष व ब्लॉक प्रमुख को दिलाई कांग्रेस की सदस्यता

डॉ. नवीन जोशी @ नवीन समाचार, नैनीताल, 26 दिसंबर 2021। पूर्व कबीना मंत्री व कांग्रेस के वरिष्ठ नेता यशपाल आर्य ने रविवार को जनपद के कोटाबाग में थे, इस दौरान उन्होंने क्षेत्र के 18 ग्राम प्रधानों सहित पूर्व जिला पंचायत सदस्य, पूर्व ब्लॉक प्रमुख कोटाबाग सहित कई जनप्रतिनिधियों व युवाओं ने भाजपा छोड़कर कांग्रेस की सदस्यता ग्रहण की।

इस मौके पर जनसभा को संबोधित करते हुए श्री आर्य ने कहा कि आगामी साल 2022 में होने वाले विधानसभा चुनाव में प्रदेश में बड़ा परिवर्तन होगा और कांग्रेस की पूर्ण बहुमत के साथ सरकार बनेगी। इस अवसर पर जिला कांग्रेस अध्यक्ष सतीश नैनवाल व निवर्तमान विधायक नैनीताल संजीव आर्य ने भी मिशन 2022 को फतेह करने का आह्वान किया।

इस अवसर पर नगरपालिका अध्यक्ष नैनीताल सचिन नेगी, भवाली संजय वर्मा, ब्लॉक प्रमुख भीमताल डॉ. हरीश बिष्ट ग्राम प्रधान संगठन के अध्यक्ष हीरा बुधानी, प्रदेश महासचिव महेश शर्मा आदि लोग उपस्थित रहे। आज के अन्य ताजा ‘नवीन समाचार’ पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें।

यह भी पढ़ें : उत्तराखंड कांग्रेस में एक और सह प्रभारी की नियुक्ति, हरीश रावत की नाराजगी के बाद निकाले जा रहे मायने

बीकानेर संभाग के कूलदीप इंदौरा को कांग्रेस ने राष्ट्रीय सचिव नियुक्त -  सत्यकेतन समाचारनवीन समाचार, देहरादून, 25 दिसंबर 2021। पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत की नाराजगी और इसके बाद उत्तराखंड कांग्रेस के नेताओं की पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी से मुलाकात के एक दिन बाद शनिवार को प्रदेश में सह प्रभारी के तौर पर मध्य प्रदेश के नेता कुलदीप इंदौरा की नियुक्ति की गई है। प्रचारित किया जा रहा है कि इस तरह कांग्रेस ने देवेंद्र यादव की शक्ति को कम किया है और यह हरीश रावत की मांग माने जाने जैसा है। बताया गया है कि इंदौरा यादव को ही रिपोर्ट करेंगे। अलबत्ता उनके नियुक्ति के वक्त के लिहाज से इसके मायने निकाले जा रहे हैं।

आगे सूत्रों की मानें तो आने वाले दिनों में उत्तराखंड के लिए एक पर्यवेक्षक की नियुक्ति भी की जा सकती है, जो यादव के ऊपर होगा। बताया गया है कि इंदौरा मध्य प्रदेश कांग्रेस के महासचिव हैं। उत्तराखंड में देवेंद्र यादव के साथ अभी झारखंड की विधायक दीपिका पांडे सह प्रभारी हैं। इसलिए इंदौरा की नियुक्ति को लेकर यह भी कयास लगाए जा रहे हैं कि रावत की नाराजगी को दूर करने की प्रक्रिया के तहत ही यह कदम भी उठाया गया है। खबर यह भी है कि रावत ने किसी वरिष्ठ नेता को पर्यवेक्षक नियुक्त किए जाने का अनुरोध भी आलाकमान से किया है, जिस पर अगले कुछ दिनों में फैसला हो सकता है। (डॉ.नवीन जोशी) आज के अन्य ताजा ‘नवीन समाचार’ पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें।

यह भी पढ़ें : कांग्रेस हाई कमान ने किसी की नहीं मानी… बड़ा सवाल, आग बुझा दी गई या राख के नीचे सरका दी गई….?

Imageनवीन समाचार, नई दिल्ली, 24 दिसंबर 2021। दिल्ली में राहुल गांधी के साथ हुई बैठक के बाद कांग्रेस के वरिष्ठ नेता हरीश रावत ने कहा कि आगामी विधानसभा चुनाव का नेतृत्व चुनाव संचालन समिति के अध्यक्ष के रूप में वह ही करेंगे। सभी लोग इसमें उनका सहयोग करेंगे। अलबत्ता मुख्यमंत्री कौन होगा, यह चुनाव के बाद ही तय होगा। हरीश रावत ने बताया कि पार्टी में चुनाव के बाद विधायक दल के निर्वाचित सदस्य अपने नेता का चयन करते हैं, और कांग्रेस अध्यक्ष विधायक दल के नेता को तय करते हैं। उत्तराखंड में भी इसी का पालन किया जाएगा। देखें हरीश रावत ने बैठक के बाद क्या कहा :

शुक्रवार को नई दिल्ली में पार्टी नेताओं की हाइकमान के साथ हुई बैठक के बाद माना जा रहा है कि हरीश रावत के ट्वीट के बाद उत्तराखंड कांग्रेस में मचा घमासान फिलहाल शांत हो जाएगा। अलबत्ता यह देखने वाली बात होगी कि कांग्रेस में मची घमासान की यह आग हाईकमान ने किसी फॉर्मूले से बुझा ली है या फौरी तौर पर राख के नीचे दबा दी है। यह प्रश्न इसलिए उठ रहा है कि तात्कालिक तौर पर एक तरह से यथास्थिति रखी गई है।

न हरीश रावत की बात मानकर उन्हें मुख्यमंत्री पद का दावेदार घोषित किया गया है, न उनकी मांग पर प्रदेश प्रभारी देवेंद्र यादव के खिलाफ कोई कार्रवाई की गई है। पार्टी के कार्यकारी अध्यक्षों को चुनाव की बागडोर संभालने वाले हरीश रावत से मिलकर आगे बढ़ने को कहा गया है अथवा नहीं, और यदि हां तो वह मानेंगे या नहीं, यह भविष्य के गर्भ में छुपा है। (डॉ.नवीन जोशी) आज के अन्य ताजा ‘नवीन समाचार’ पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें।

यह भी पढ़ें : हरीश रावत की नाराजगी के बाद दिल्ली से आया बुलावा…

डॉ. नवीन जोशी @ नवीन समाचार, नैनीताल, 23 दिसंबर 2021। उत्तराखंड कांग्रेस में बुधवार को हरीश रावत के ट्वीट के बाद मची घमासान के बाद कांग्रेस हाइकमान ने संज्ञान ले लिया है। समाचार एजेंसी एएनआई के हवाले से आई जानकारी के अनुसार कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं, नेता प्रतिपक्ष प्रीतम सिंह, प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल, यशपाल आर्य व हरीश रावत को दिल्ली बुला लिया गया है, जहां शुक्रवार को इन नेताओं की पार्टी हाइकमान के शीर्ष नेताओं से वार्ता हो सकती है।

बताया जा रहा है कि बृहस्पतिवार शाम तक उत्तराखंड कांग्रेस के यह सभी नेता दिल्ली पहुंच जाएंगे और शुक्रवार को पार्टी के शीर्ष नेताओं से मुलाकात कर सकते हैं। माना जा रहा है कि इस दौरान हरीश रावत खेमा टिकट वितरण में उनकी सुने जाने के साथ पार्टी के प्रदेश प्रभारी देवेंद्र यादव को हटाने की मांग कर सकता है।

यह भी पढ़ें : भाजपा के हाथों में खेल रहा है कांग्रेस हाईकमान-राहुल गांधी ? हरीश रावत खेमे से आए आरोप तो यही इशारा कर रहे हैं…

-उत्तराखंड आकर भी राहुल गांधी कर गए कांग्रेस का बंटाधार….?

नवीन समाचार, नैनीताल, 22 दिसंबर 2021। पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत के बदले सुरों के बीच कांग्रेस नेताओं को जैसे सांप सूंघ गया है। कोई इस बारे में कोई टिप्पणी नहीं कर रहा। अलबत्ता हरीश रावत के सलाहकार सुरेंद्र कुमार इस मामले में रावत के पीछे से आगे आए हैं। उन्होंने इस मामले में पार्टी के प्रदेश प्रभारी देवेंद्र यादव पर भाजपा के हाथों में खेलने का आरोप लगाया है। सवाल यह है कि देवेंद्र यादव की नियुक्ति कांग्रेस के हाईकमान ने की है, तो क्या कांग्रेस का हाईकमान या राहुल गांधी भाजपा के हाथों में खेल रहे हैं, जैसा कि कई बार आरोप भी लगते हैं कि रावत जहां-जहां जाते हैं, कांग्रेस की जगह भाजपा की ही मदद करते हैं, और इस बार भी उत्तराखंड आकर उन्होंने यही किया है। देखें वीडियो सुरेंद्र कुमार ने क्या कहा:

उत्तराखंड में हरीश रावत का कोई विकल्प नहीं हैं। वह राज्य के सबसे लोकप्रिय नेता हैं। राज्य निर्माण से लेकर कांग्रेस को सत्ता में लाने में उनका योगदान है, साथ ही कांग्रेस के हर कार्यकर्ता से उनका सीधा संवाद है। हरीश रावत उत्तराखंड की चाहत हैं। परंतु कुछ दिनों से ऐसा लग रहा है कि कोई अदृश्य ताकत भाजपा के इशारे पर, भाजपा के हाथों में खेलते हुए उत्तराखंड कांग्रेस के कार्यकर्ताओं की भावनाओं से खेल रही है। और भाजपा के इशारे पर कांग्रेस के कार्यकर्ताओं के हाथ बांधने और कदमों तथा कांग्रेस की वापसी की संभावनाओं को रोकने का शडयंत्र कर रही है।

यह भी पढ़ें : कांग्रेस के राहुल के नेतृत्व में चुनाव लड़ने के ऐलान के बाद हरीश रावत हताश-निराश….

यहां तक तो सुरेंद्र कुमार ने किसी का नाम नहीं लिया किंतु कांग्रेस के प्रदेश प्रभारी देवेंद्र यादव के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा, देवेंद्र यादव पार्टी के प्रभारी हैं। उनका काम पंचायत के प्रमुख की तरह हैं, लेकिन यदि पंचायती प्रमुख पार्टी बनता हुआ, कांग्रेस कार्यकर्ताओं के हाथों को बांधता और पार्टी की वापसी की संभावनाओं को रोकता हुआ दिखता है तो हाईकमान को इसका संज्ञान लेना चाहिए। वह इसका जल्द पर्दाफास करेंगे।  (डॉ.नवीन जोशी) आज के अन्य ताजा ‘नवीन समाचार’ पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें।

यह भी पढ़ें : राहुल गांधी ने उत्तराखंड आकर स्वागत में कसीदे पढ़ रहे हरीश रावत को दिया ‘धीरे से जोर का झटका’….

Imageडॉ. नवीन जोशी @ नवीन समाचार, नैनीताल, 19 दिसंबर 2021। कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी के उत्तराखंड आगमन पर जहां संचालन समिति के अध्यक्ष व पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत कसीदे पढ़ते रहे, वहीं राहुल गांधी ने रावत को ‘धीरे से जोर का झटका’ दे दिया है।

चुनाव में सीएम घोषित करने के लिए दबाव बनाने वाले हरीश रावत और उनके समर्थकों की मांग को पार्टी ने दरकिनार करते हुए कांग्रेस स्क्रीनिंग कमेटी के अध्यक्ष अविनाश पांडेय ने साफ कर दिया है कि उत्तराखड में आगामी विधानसभा चुनाव राहुल गांधी के नेतृत्व में लड़ा जाएगा। यह भी दावा किया कि राहुल गांधी के नेतृत्व में कांग्रेस पार्टी 50 से ज्यादा सीटें जीतकर सरकार बनाएगी। माना जा रहा है कि राज्य में पार्टी के भीतर गुटबाजी को देखते हुए यह फैसला लिया गया है, ताकि कोई नेता इसका विरोध ना कर सके।

उल्लेखनीय है कि पांडेय इन दिनों कुमाऊं के चार जिलों-अल्मोड़ा, बागेश्वर, पिथौरागढ़ व चंपावत के 14 विधानसभा क्षेत्रों के दावेदारों की नब्ज टटोलने के लिए आए हुए हैं। इस दौरान हरीश रावत के ही गृह क्षेत्र अल्मोड़ा में पांडेय ने यह बात कही। साथ ही बताया कि स्क्रीनिंग का कार्य 21 दिसंबर तक चलेगा और दावेदारों की अंतिम सूची 22 दिसंबर को केंद्रीय चुनाव समिति को सौंपी जाएगी। इसके बाद प्रत्याशी के नाम पर अंतिम मुहर लगा दी जाएगी। उन्होंने कहा कि अब तक नौ जिलों की 26 विधानसभा सीटों पर 180 दावेदारों से बातचीत हो चुकी है।

हरीश रावत की सीएम दावेदारी को नकारा
इस दौरान पूर्व सीएम हरीश रावत के नेतृत्व में चुनाव लड़ने की बात पर उन्होंने कहा कि पूरा संगठन एकजुट होकर चुनाव लड़ेगा, और चुनाव के बाद नेतृत्व तय करेंगा कि कौन राज्य का सीएम होगा। इसके लिए चुनाव परिणाम का इंतजार करना होगा। उन्होंने कहा कि संगठन में टिकट वितरण के लिए किसी भी तरह का कोई फार्मूला नहीं है। जिसकी जनता में मजबूत पकड़ होगी और संगठन हित में काम किया है। पार्टी उसे टिकट देने में प्राथमिकता देगी। यह बात वर्तमान और पूर्व विधायकों पर भी लागू होगी।

उल्लेखनीय है कि हरीश रावत अब तक स्वयंभू तरीके से स्वयं को कांग्रेस पार्टी से मुख्यमंत्री पद का चेहरा बताकर ‘सबकी चाहत-हरीश रावत’ व ‘हरदा आला…’ की थीम पर उत्तराखंड में कांग्रेस पार्टी का प्रचार करवा रहे थे। अब उम्मीद की जा रही है कि पार्टी की प्रचार की थीम भी बदलेगी। साथ ही हरीश रावत जिस जोश के साथ चुनाव में आगे बढ़ रहे थे, उस में भी कमी आ सकती है। क्योंकि इसके बाद पार्टी के जीतने के बाद भी हरीश रावत का मुख्यमंत्री पद पर स्वाभाविक हक नहीं रहेगा, हालांकि इसकी कोशिश वह जरूर करेंगे। आज के अन्य ताजा ‘नवीन समाचार’ पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें।

यह भी पढ़ें : उत्तराखंड के लिए एक भी घोषणा, कोई रोडमैप बताकर नहीं गए राहुल गांधी

नवीन समाचार, देहरादून, 16 दिसंबर 2021। कांग्रेस के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी गुरुवार को परेड ग्राउंड में एक बड़ी जनसभा को संबोधित करने देहरादून पहुंचे। यहां उन्होंने जनरल बिपिन रावत को पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि दी। इसके बाद पूर्व सैनिकों को स्मृति चिन्ह देकर उनका सम्मान किया। इस दौरान प्रीतम सिंह व हरीश रावत आदि राज्य के नेताओं ने राहुल गांधी की शान में जमकर कसीदे पढ़े। प्रीतम सिंह ने उत्तराखंड में सरकार आने पर लोकायुक्त की नियुक्ति करने की बात कही। पर राहुल गांधी अपने संबोधन में जहां पूरे समय भाजपा सरकार को निशाने पर लिए रहे, लेकिन उन्होंने उत्तराखंड के लिए एक भी घोषणा नहीं की। प्रदेश के लिए पार्टी की किसी भावी रोडमैप पर बात नहीं की। राज्य के कांग्रेस नेताओं को किसी तरह का आपस में मिलकर कार्य करने का मंत्र भी वह नहीं दे गए। इस दौरान पार्टी के प्रदेश भर से आए कार्यकर्ताओं को उन्होंने तालियां बजाने का मौका भी नहीं ही दिया।

देखें राहुल गांधी की देहरादून में ‘विजय सम्मान रैली’ का ‘नवीन समाचार’ पर लाइव प्रसारण

आगे अपने संबोधन में राहुल गांधी ने सबसे पहले सीडीएस जनरल बिपिन रावत को श्रद्धांजलि अर्पित की। उन्होंने बिपिन रावत, उनकी पत्नी और सेना के जवानों की मृत्यु पर शोक व्यक्त किया। राहुल ने अपनी यादें साझा करते हुए कहा कि जब मैं छोटा था, देहरादून के दून स्कूल में पढ़ा करता था। मैं यहां आपके साथ दो तीन साल रहा। आपने उस समय मुझे बहुत प्यार दिया। उन्होंने कहा शायद मेरे परिवार का और उत्तराखंड का गहरा रिश्ता है। मुझे वो दिन याद आया जब 31 अक्टूबर को मेरी दादी इस देश के लिए शहीद हुईं थी। फिर मुझे 21 मई का दिन याद आया, जिस दिन मेरे पिता इस देश के लिए शहीद हो गए। मेरा और आपका कुर्बानी का रिश्ता है। जो कुर्बानी के उत्तराखंड के हजारों परिवारों ने दी है। वही कुर्बानी मेरे परिवार ने दी है। जिन लोगों ने अपनों को खोया है, वह इस रिश्ते को अच्छी तरह समझेंगे। जो सेना में हैं उन्हें यह बात गहराई से समझ आएगी।

कहा कि आज देश को बांटा जा रहा है, कमजोर किया जा रहा है। एक भाई को दूसरे भाई से लड़ाया जा रहा है। पूरी सरकार दो तीन पूंजीपतियों के लिए चलाई जा रही है। काले कानून, किसानों के खिलाफ उनकी मदद नहीं उन्हें खत्म करने को बनाए गए थे। किसान न डरे और न पीछे हटे। जिसके एक साल बाद प्रधानमंत्री हाथ जोड़कर कहते दिखे कि गलती हो गई, माफी मांगता हूं। जो 700 किसान शहीद हुए, उनके बारे में भाजपा के नेता सदन में कहते हैं कि किसी की मृत्यु नहीं हुई। पंजाब सरकार ने 400 किसानों को मुआवजा दिया, लेकिन केंद्र सरकार ने नहीं दिया। हिंदुस्तान के किसानों की आमदनी उनसे छीनी जा रही थी।

नोटबंदी के बाद गलत जीएसटी, उसके बाद कोरोना के समय हिंदुस्तान के सबसे बड़े उद्योगपति को टैक्स माफ, लेकिन मजदूरों को बस या ट्रेन का टिकट नहीं दिया। चाहे नोटबंदी हो या जीएसटी या कोरोना में सरकार के एक्शन… ये तीनों काम हिंदुस्तान के किसानों, छोटे कारोबारियों पर कुछ बड़े पूंजीपतियों के आक्रमण हैं। जो लोग आपको रोजगार दे सकते हैं, उन छोटे कारोबारियों, व्यापारियों को भाजपा ने खत्म कर दिया। कहा कि मोदी केवल पूंजीपतियों की नीतियों को चला रहे हैं। जब तक केंद्र से भाजपा की सरकार नहीं हटेगी, तब तक रोजगार नहीं मिलेगा। देश की आर्थिक शक्ति को भाजपा नष्ट कर रही है।

कहा कि ये मत सोचिए कि हिंदुस्तान मजबूत हो रहा है। हेलीकॉप्टर, हवाई जहाज, तोप से देश मजबूत नहीं होता। देश मजबूत तब होता है, जब देश का नागरिक मजबूत होता है। जब देश में जनता बिना डरे बोल सके, तब मजबूत होता है। बांग्लादेश लड़ाई के समय देश मजबूत था। सेना और सरकार के बीच मे मजबूत रिश्ता था। हिंदुस्तान की अर्थव्यवस्था मजबूत थी। इसीलिए पाकिस्तान को 13 दिन में हराया। आज वह समय नहीं है। मीडिया वाले जितना भी कह लें। हवाई जहाज, टैंक से देश मजबूत नहीं होता। मैं वो दिन कभी नहीं भूल सकता जब मुझे स्कूल में बताया गया कि इंदिरा गांधी को 32 गोलियां लगी हैं। ऐसे ही बताया कि आपके पापा शहीद हो गए।

आज दिल्ली में विजय दिवस कार्यक्रम में इंदिरा गांधी का नाम तक नहीं है। जिस महिला ने देश के लिए 32 गोलियां खाई…क्योंकि सच्चाई से मोदी सरकार डरती है। आपके सामने सबसे बड़ी समस्या बेरोजगारी की है। आपके लोग पलायन करते हैं। दूसरी मुश्किल महंगाई है। यह क्यों है? इंटरनेशनल मार्किट में तेल के दाम गिरते जा रहे हैं। दुनिया में सबसे ज्यादा टैक्स हिंदुस्तान में है। नरेंद्र मोदी ने 10 लाख करोड़ रुपए आपसे छीनकर करोड़पतियों का कर्ज माफ किया है। आपकी जेब से जो पैसा निकल रहा है, वह देश के चंद अरबपतियों की जेब में जा रहा है, क्योंकि वो नरेंद्र मोदी की मार्केटिंग करते हैं।

प्रधानमंत्री मोदी पर हमला करते हुए राहुल गांधी ने कहा कि गंगा में बहुत लोगों ने स्नान किया, लेकिन ऐसा लगता है कि हिंदुस्तान में केवल एक ही व्यक्ति ने गंगा स्नान किया है। वहां योगीजी को परमिशन नहीं दी, बाकी का तो छोड़ो। नरेंद्र मोदी एक ही हिंदुस्तानी हैं जो गंगा में स्नान कर सकते हैं। रोजगार उत्तराखंड में तब आएगा जब छोटे व्यापारियों की मदद होगी। दो-तीन पूंजीपतियों को पूरा धन देने से उत्तराखंड आगे नहीं जा सकता। कहा कि जब हमारी सरकार आएगी तो किसानों की मदद होगी, रोजगार देगी, कानून बनाएगी लेकिन किसानों के लिए बनाएगी। इतना कहकर राहुल गांधी ने अपना संबोधन समाप्त कर दिया। आज के अन्य ताजा ‘नवीन समाचार’ पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें।

यह भी पढ़ें : ‘और कितना गिरेगी कांग्रेस…’ विवादों में आई राहुल गांधी की आज देहरादून में रैली

Imageनवीन समाचार, हल्द्वानी, 16 दिसंबर 2021। कांग्रेस पार्टी के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी की देहरादून में आज होने जा रही ‘उत्तराखंड विजय सम्मान रैली’ होने से पहले ही विवादों में फंस गई है। विवाद रैली के पोस्टरों में दिवंगत सेनाध्यक्ष जनरल बिपिन रावत के चित्र का कांग्रेस के पोस्टरों में प्रयोग करने को लेकर है। इसका तरह-तरह से विरोध किया जा रहा है।

देहरादून की शहरों में पोस्टर लगाकर पूछा जा रहा है सर्जिकल स्ट्राइक पर सवाल उठाने वाली, सेना को बलात्कारी कहने वाली और भारत तेरे टुकड़े होंगे के नारे लगाने वाले कन्हैया कुमार को पार्टी में शामिल करने वाली कांग्रेस कैसे भारतीय सेना व सैनिकों का सम्मान कर सकती है।

इसके अलावा भाजपा-युवा के राष्ट्रीय सचिव तेजिंदर पाल सिंह बग्गा ने एक ट्वीट किया है, जो काफी चर्चा में है। बग्गा ने लिखा है, ‘कितना नीचे गिरेगी कांग्रेस ? जिन बिपिन रावत जी का जीते जी कांग्रेस के नेता अपमान करते रहे, उन्हें सड़क का गुंडा कहते रहे, उनके निधन को 1 सप्ताह नही बीता और वोट बटोरने के लिए कांग्रेस की रैली में उनकी तस्वीरें लगाने लगे। धिक्कार है कांग्रेस पे’

बताया जा रहा है कि वर्ष 2017 में दिल्ली की पूर्व मुख्यमंत्री शीला दीक्षित के पुत्र वरिष्ठ कांग्रेस नेता व पूर्व सांसद संदीप दीक्षित ने पाकिस्तानी सेना के अध्यक्ष कमर जावेद बाजवा की सीमा पर बयानबाजी के संदर्भ में पूछे गए सवाल के जवाब में जनरल बिपिन रावत को ‘सड़क का गुंडा’ कहा था। ऐसे में कांग्रेस पार्टी द्वारा जनरल रावत के चित्रों को कांग्रेस पार्टी के पोस्टरों में लगाने की आलोचना हो रही है।

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यह भी पढ़ें : राहुल गांधी की रैली की तैयारी बैठक में फिर बगावती स्वर मुखर…

डॉ. नवीन जोशी @ नवीन समाचार, नैनीताल, 13 दिसंबर 2021। आगामी 16 दिसंबर को देहरादून कांग्रेस के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी की रैली की तैयारियों के लिए आयोजित बैठक में तैयारियों की जगह बगावती सुर अधिक चर्चा में रहे। संजीव आर्य का नैनीताल सीट से कांग्रेस का टिकट पक्का होने की चर्चाओं के बीच महिला कांग्रेस की प्रदेश अध्यक्ष व पूर्व विधायक सरिता आर्य व हेम आर्य के बगावती सुर मुखर रहे।

सरिता आर्य ने दोहराया कि वह महिला कांग्रेस की प्रदेश अध्यक्ष हैं और प्रियंका गांधी द्वारा यूपी में की गई घोषणा के अनुरूप उत्तराखंड में भी महिलाओं को 40 फीसद टिकट दिए जाने की मांग कर रही हैं। लेकिन स्थिति यह है कि संजीव आर्य के भाजपा छोड़ कांग्रेस में आ जाने के बाद प्रदेश भर की महिला कांग्रेस कार्यकत्रियां उनसे प्रश्न कर रही हैं कि जब प्रदेश अध्यक्ष का टिकट ही तय नहीं है तो वह अन्य महिला कार्यकत्रियों का क्या टिकट दिला पाएंगी।

वहीं हेम आर्य ने दावा किया कि संजीव आर्य चूंकि निवर्तमान विधायक हैं, इसलिए जनता में उनके खिलाफ माहौल है। जबकि वह स्वयं नैनीताल सीट से जिताऊं प्रत्याशी हैं। इसलिए उन्हें ही टिकट मिलना चाहिए। उन्होंने पार्टी छोड़ने की धमकी के अंदाज में कहा कि उन्हें भाजपा, आम आदमी पार्टी, उक्रांद व बसपा आदि से टिकट के लिए फोन आ रहे हैं।

ऐसे सुरों के बीच कांग्रेस पार्टी के जिलाध्यक्ष सतीश नैनवाल ने दोनों नेताओं को पार्टी फोरम से इतर मीडिया व अन्य फोरम पर अपनी बात न रखने की नसीहत दी। कहा कि अभी टिकट द्वितियक विषय है। प्राथमिकता में राहुल गांधी की रैली है। वहीं संजीव आर्य ने कहा कि चुनाव में टिकट मांगना पार्टी के हर कार्यकर्ता का लोकतांत्रित अधिकार है। टिकट पर पार्टी हाईकमान का निर्णय सर्वोपरि होगा। आज के अन्य ताजा ‘नवीन समाचार’ पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें।

यह भी पढ़ें : कांग्रेस भी चली भाजपा की राह, चलाया ‘मेरा बूथ-मेरा गौरव’ अभियान

डॉ. नवीन जोशी @ नवीन समाचार, नैनीताल, 19 नवंबर 2021। कांग्रेस पार्टी भी भाजपा की राह पर बूथ स्तर तक पार्टी को मजबूत करने और बूथ स्तर के कार्यकर्ताओं को प्रशिक्षित करने की राह पर नजर आ रही है। मुख्यालय स्थित नैनीताल क्लब में जिला व नगर कांग्रेस कमेटी के तत्वावधान में नैनीताल विधानसभा के बूथ से जुड़े कांग्रेस जनों के लिए ‘मेरा बूथ-मेरा गौरव’ अभियान के तहत प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित हुआ।

जिलाध्यक्ष सतीश नैनवाल की अध्यक्षता व नगराध्यक्ष अनुपम कबड्वाल के संचालन में आयोजित हुए इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में प्रशिक्षण कमेटी उत्तराखंड की संयोजक इंदु मान, प्रशिक्षक अरुण श्राफ व निवर्तमान विधायक संजीव आर्या ने बूथ कार्यकर्ताओं को ‘मेरा गौरव-मेरा गौरव’ मानते हुए अपना बूथ जीतने और आगामी विधानसभा चुनाव के लिए एकजुटता के साथ पार्टी की मजबूती के लिए कार्य करने का संकल्प दिलाया। कार्यक्रम में पूर्व सांसद डॉ. महेंद्र पाल, पूर्व विधायक सरिता आर्या, हेम आर्या सहित पूरे विधानसभा के अन्तर्गत के नगर व ब्लॉक कांग्रेस कमेटी के पदाधिकारी उपस्थित रहे। आज के अन्य ताजा ‘नवीन समाचार’ पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें।

यह भी पढ़ें : कंगना रनौत से ‘पद्मश्री’ वापस लेने को कांग्रेसियों ने गृहमंत्री को भेजा ज्ञापन

डॉ. नवीन जोशी @ नवीन समाचार, नैनीताल, 17 नवंबर 2021। कांग्रेस पार्टी की ओर से बुधवार को देश के गृह मंत्री अमित शाह को कुमाऊं मंडल के आयुक्त सुशील कुमार के माध्यम से एक ज्ञापन भेजा गया है। ज्ञापन में बॉलीवुड अभिनेत्री कंगना रनौत पर देश की स्वाधीनता एवं महात्मा गांधी जी पर निम्न स्तर के बयान देने का आरोप लगाया गया है। खासकर कंगना के द्वारा महात्मा गांधी को ‘सत्ता के लालची’ एवं ‘देश की स्वतंत्रता को भीख में मिली आजादी कह कर’ संबोधित करने पर कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की गई है।

ज्ञापन में कहा गया है कि कंगना रनौत जैसी मानसिकता न केवल वैश्विक स्तर पर भारत देश एवं देश के स्वाधीनता संग्राम सेनानियों की आत्माओं पर कुठाराघात हैं, बल्कि हिंदुस्तान की छवि को विश्व पटल पर सुनियोजित षड़यंत्र के तहत धूमिल किया जा रहा हैं। ऐसी मानसिकता वाली शख्सियत को पूर्व में ‘पद्मश्री’ जैसे प्रतिष्ठित सम्मान से नवाजा गया हैं। जबकि उनका यह कृत्य ‘पद्मश्री सम्मान’ का भी अपमान हैं।

ज्ञापन में इस आधार पर कंगना रनौत पर देशद्रोह सहित सुसंगत धाराओं में कड़ी कार्यवाही करने तथा ‘पद्मश्री सम्मान’ को वापस लेने की मांग की गई है। ज्ञापन देने वालों में कांग्रेस पार्टी के पूर्व प्रदेश सचिव त्रिभुवन फर्त्याल, सूरज पांडे, अंकित चंद्रा, नितिन जाटव, सुंदर राठौर, रवि बिष्ट, पवन बिष्ट, मयंक, जीनू पांडे, कृष्णा कुमार व कुंगा खम्पा आदि शामिल रहे। आज के अन्य ताजा ‘नवीन समाचार’ पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें।

यह भी पढ़ें : कांग्रेस में घर वापसी के बाद पहली बार नैनीताल पहुंचे संजीव आर्य, हुआ भव्य स्वागत

डॉ. नवीन जोशी @ नवीन समाचार, नैनीताल, 13 नवंबर 2021। निवर्तमान विधायक संजीव आर्य कांग्रेस में घर वापसी करने के बाद रविवार को पहली बार नैनीताल मुख्यालय पहुंचे। इस पर नैनीताल क्लब में कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने विधानसभा पर्यवेक्षक नागौर राजस्थान के विधायक चेतन चौधरी की मौजूदगी में उनका फूल मालाओं से जोरदार स्वागत किया। इस दौरान संजीव ने कहा कि भाजपा 2017 में जनता से किए वादे पूरे नहीं कर पाई है, इसलिए जनता कांग्रेस को सत्ता में लौटते देखना चाहती है।

कांग्रेस की बैठक में मौजूद विधानसभा पर्यवेक्षक तथा निवर्तमान विधायक सहित वरिष्ठ नेता।

इस दौरान विधानसभा पर्यवेक्षक चेतन चौधरी ने कांग्रेस कार्यकर्ताओं के साथ बैठक कर महंगाई, महिला अपराध व किसान कानून आदि विभिन्न मुद्दों पर भाजपा को घेरने की बात कही। उन्होंने कहा कि प्रदेश में भाजपा विरोधी माहौल होने के साथ ही कांग्रेस को जनता का समर्थन मिल रहा है। आगामी चुनाव को लेकर उन्होंने कार्यकर्ता से गांव-गांव जाकर लोगों को कांग्रेस की रीति-नीतियों से अवगत कराने का आह्वान किया।

इस मौके पर कांग्रेस जिलाध्यक्ष सतीश नैनवाल, पालिकाध्यक्ष सचिन नेगी, पूर्व विधायक सरिता आर्य, नगर अध्यक्ष अनुपम कबडवाल, हेम आर्य, वीबीएस नेगी, मंजू बिष्ट, मुन्नी तिवारी, हिमांशु पांडे, सभासद पुष्कर बोरा निर्मला चंद्रा व रेखा आर्य, मारुति नंदन साह, धीरज बिष्ट, त्रिभुवन फर्त्याल, राजेंद्र व्यास, जेके शर्मा, कमलेश तिवारी, रमेश पांडे, रवैल आनंद, सूरज पांडे व संजय कुमार आदि मौजूद रहे। अन्य नवीन समाचार पढ़ने को यहां क्लिक करें।

यह भी पढ़ें : कांग्रेस के प्रदेश स्तरीय नेता ने अपनी ही पार्टी के दो वरिष्ठ नेताओं के खिलाफ पुलिस के साथ सीएम हेल्प लाइन में की शिकायत, हाईकोर्ट जाने की भी धमकी

नवीन समाचार, चंपावत, 13 नवंबर 2021। युवा कांग्रेस के संयुक्त प्रदेश सचिव ने अपने ही दो नेताओं पर गाली-गलौच करने और जान से मारने की धमकी देने का आरोप लगाते हुए लोहाघाट थाने में नामजद तहरीर दी है। साथ ही मुख्यमंत्री पोर्टल में भी मामला दर्ज कर आरोपितों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की गई है। इसके अलावा न्याय नहीं मिलने पर सोमवार को हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाने की बात भी कही है।

यूथ कांग्रेस के प्रदेश संयुक्त सचिव चिराग फर्त्याल ने लोहाघाट थाने में अपनी ही पार्टी के एक बड़े नेता और एक पूर्व पदाधिकारी के खिलाफ नामजद तहरीर देकर कहा है कि गत 11 नवंबर की रात वह कांग्रेस प्रदेश प्रभारी के स्वागत में शामिल होने के लिए होटल के बाहर प्रदेश प्रभारी का इंतजार कर रहा था। तभी कांग्रेस के एक बड़े नेता और एक पूर्व पदाधिकारी उनके पास आए और गाली गलौच कर अभद्रता शुरू कर दी। उन्होंने कहा कि यदि उसने किसी दूसरे व्यक्ति के समर्थन में नारेबाजी की तो उसे जान से मार दिया जाएगा।

बताया गया है कि यहां दो दावेदारों के बर्चस्व की लड़ाई में प्रदेश प्रभारी को दोनों के साथ अलग-अलग बैठक करनी पड़ी। इसी दौरान एक दावेदार की ओर से दूसरे दावेदार के समर्थकों के साथ यह घटना हुई। (डॉ. नवीन जोशी) अन्य नवीन समाचार पढ़ने को यहां क्लिक करें।

यह भी पढ़ें : कांग्रेस में टिकट के इच्छुक नेताओं को पूरी करनी पड़ सकती है यह शर्त….

नवीन समाचार, हल्द्वानी़, 6 नवंबर 2021। कांग्रेस से विधानसभा चुनाव का टिकट पाने के इच्छुक नेताओं को सप्ताह में 3 दिन पार्टी दफ्तर में बैठना पड़ सकता है। नैनीताल जिला कांग्रेस कमेटी और हल्द्वानी महानगर कांग्रेस कमेटी ने प्रदेश संगठन को ऐसा प्रस्ताव भेजा है। शनिवार को स्वराज आश्रम में महानगर अध्यक्ष राहुल छिमवाल ने पत्रकारों को यह जानकारी दी।

उन्होंने भेजे गए प्रस्ताव के बारे में बताया कि जो नेता विधानसभा चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहे हैं, उनको जिला, नगर या न्याय पंचायत स्तर के पार्टी दफ्तर में बैठें और पार्टी कार्यालय में आने वाले कार्यकर्ताओं और आम जनता की समस्याओं को सुनें। साथ ही समस्याओं का समाधान भी करवाएं। वे अपनी सुविधा के अनुसार अपने नजदीकी कार्यालय पर बैठ सकते हैं।

इससे दावेदार जनता की समस्याओं से अच्छे से वाकिफ हो पाएंगे। संगठन से इस योजना का फायदा टिकट निर्धारण के समय दिए जाने का सुझाव दिया गया है। हालांकि इस पर फैसला प्रदेश संगठन को लेना है। (डॉ. नवीन जोशी) अन्य नवीन समाचार पढ़ने को यहां क्लिक करें।

यह भी पढ़ें : आज साफ हो सकती है कांग्रेस में शामिल होने वाले भाजपा विधायकों पर स्थिति…

-आज नई दिल्ली में उत्तराखंड कांग्रेस के नेताओं से मिल सकती हैं कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी
नवीन समाचार, नई दिल्ली, 26 अक्टूबर 2021। देश की राजधानी से उत्तराखंड की राजनीति के लिए आज बड़ी खबर या भविष्य की राजनीति के बड़े संकेत आ सकते हैं। आज साफ हो सकता है कि उत्तराखंड में कौन से व कितने भाजपा नेता कांग्रेस में शामिल हो सकते हैं। ऐसा इसलिए कि आज नई दिल्ली में कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी उत्तराखंड के पार्टी नेताओं से बैठक कर सकती हैं। इस बैठक में उत्तराखंड में पार्टी के आगामी विधानसभा चुनाव की तैयारियों पर बात होनी है।

Who will compete with Narendra Modi in 2024 Sonia Gandhi called a meeting  of opposition leaders today - India Hindi News - 2024 में कौन करेगा नरेंद्र  मोदी से मुकाबला? सोनिया गांधीसोनिया उत्तराखंड में भी यूपी में प्रियंका गांधी द्वारा सुझाए गए फॉर्मूले के तहत बेहतर लिंगानुपात वाले उत्तराखंड राज्य में भी महिलाओं को 40 फीसद टिकट देने पर भी निर्णय हो सकता है। इसके अलावा राज्य में दलित चेहरे या किसी एक चेहरे को आगे कर चुनाव लड़ने पर भी बात होने की संभावना है, लेकिन तय माना जा रहा है कि इस मामले में पार्टी कोई निर्णय नहीं लेने जा रही है।

उल्लेखनीय है कि उत्तराखंड में प्रीतम सिंह खेमा भाजपा से अपने पुराने बागी नेताओं को कांग्रेस में लाने को ऐड़ी-चोटी का जोर लगा रही है, जबकि डॉ. हरक सिंह के कथित तौर पर माफी मांगने के बाद हरीश रावत का रुख भी साफ तौर पर नरम पड़ता और इधर पिछले दो दिनों में हरीश व हरक के बीच दो बार वार्ता हुई है। उधर हरीश खेमे के गोविंद सिंह कुंजवाल छह भाजपा नेताओं के संपर्क में होने तो प्रीतम घाघ राजनीतिज्ञ की तरह एक भी भाजपा विधायक के संपर्क में न होने की बात कर रहे हैं।

उधर कांग्रेस हाईकमान ने राजस्थान, दिल्ली और बिहार के नेताओं को उत्तराखंड में चुनाव पर्यवेक्षक की जिम्मेदारी देकर एक नया प्रयोग किया है। देखने वाली बात होगी कि उत्तराखंड की परिस्थितियों व राजनीति से पूरी तरह से अन्जान यह नेता गुटों में बंटी उत्तराखंड कांग्रेस का निरपेक्ष भाव से कितना भला करेंगे। आज के अन्य ताजा ‘नवीन समाचार’ पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें।

यह भी पढ़ें : बिग ब्रेकिंग: हरक के एक और भाजपा सरकार विरोधी बयान के बीच हरीश ने हरक से की बात, कहा-आपदा में सांप और नेवला साथ आ जाते हैं…

नवीन समाचार, रामनगर, 24 अक्टूबर 2021। उत्तराखंड के कबीना मंत्री डॉ. हरक सिंह ने रविवार को एक और बयान दिया है, जिसके बाद भाजपा भी मान कर चल रही है कि वह कभी भी कांग्रेस में जा सकते हैं। अलबत्ता, पार्टी की नीति अभी अन्जान कारणों से ‘वेट एंड वॉच’ की ही नजर आ रही है। हरक ने कहा है कि वह भाजपा सरकार के समय में उतना काम नहीं कर पाए, जितना करना चाहते थे। उनके कामों में लगातार अड़ंगे लगते रहे। फिर भी उन्होंने बेहतर कार्य किया है। देखें हरीश रावत ने क्या कहा:

Uttarakhand Assembly Election 2022 Harak Singh Rawat Calls Harish Rawat  Bada Bhai What can it mean | उत्तराखंड के सियासी गलियारों में हलचल: क्या  हरीश रावत के आगे सरेंडर हुए हरक? जानें 'इस बयान के बीच ही एक और खबर यह है कि कांग्रेस नेता हरीश रावत और यशपाल आर्य ने हरक सिंह से फोन पर लंबी बात की है। यह बात हुई तो रामनगर के सुंदरखाल और चुकम में आई दैवीय आपदा को लेकर है, लेकिन इसकी शुरुआत जिन शब्दों से हरीश रावत ने की, उससे इसका चर्चा में आना तय है। हरीश ने फोन उठाते ही हरक से कहा, अभी आपदा आई है, और आपदा में सांप और नेवला साथ आ जाते हैं। यह तो साफ है कि इशारों में अधिक बात करने वाले हरीश रावत अपने और हरक में से ही एक को सांप और नेवला कह रहे हैं, पर किसे सांप और किसे नेवला कह रहे हैं, यह वह ही बेहतर बता सकते हैं।

बहरहाल, वीडियो में दिख रहा है कि कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल किसी को फोन मिलाकर गढ़वाली में कहते हैं कि दोनों भाइयों को मिला देता हूं। फिर वह हरीश को फोन देते हैं। फोन पर पहले बोलते हुए हरीश कहते हैं, ‘आपदा के समय में सांप और नेवला एक साथ आ जाते हैं। अभी चुकम व सुंदरखाल गांव में हमारे लोगों पर आपदा आई है। आप वन मंत्री हैं, मेरी आपसे प्रार्थना व सलाह है कि आप यहां आकर देखें, जिस समय आप और हम एक ही जगह थे, उस समय हमने इनके विस्थापन का कागज चलाया था। इस समय आपके प्रमुख सचिव या सचिव के पास फाइल पड़ी है। उसे जरा धक्का लगवा दो…’ उधर से शायद हरक कहते हैं कि आपने यह काम पूरा क्यों नहीं किया, इस पर हरीश कहते हैं, ‘देखिए भाई साहब यदि हम यह काम कर जाते तो हमें पुण्य मिलता, आप तो कम के कम इस मामले में पुण्य कमा लो… उनकी लाइट का काम भी करवा दो।’आज के अन्य ताजा ‘नवीन समाचार’ पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें।

यह भी पढ़ें : नेता प्रतिपक्ष ने कांग्रेस में शामिल होने वाले नेताओं के बहाने अपने ही पार्टी जनों को सवालों के घेरे में खड़ा किया…

कहा-कांग्रेस में शामिल होने के लिए कोई उनके संपर्क में नहीं, किसी की उन्हें जानकारी भी नहीं

पत्रकार वार्ता करते नेता प्रतिपक्ष प्रीतम सिंह।

डॉ. नवीन जोशी @ नवीन समाचार, नैनीताल, 23 अक्टूबर 2021। राजनेता आजकल क्या कहते हैं, उसके अर्थ नहीं निहितार्थ निकालने पड़ते हैं। राज्य में कांग्रेस के बागी नेताओं के भाजपा से कांग्रेस में घर वापसी की चर्चाओं, गत दिनों पूर्व विधानसभा अध्यक्ष गोविंद सिंह कुंजवाल के छह बागी नेताओं के उनके संपर्क में होने के दावे और डॉ. हरक सिंह रावत द्वारा हरीश रावत की माफी मांगने की शर्त के बाद माफी मांगने के हालातों पर प्रदेश के नेता प्रतिपक्ष व वरिष्ठ कांग्रेस नेता प्रीतम सिंह ने साफ तौर पर कहा कि कोई भी भाजपा नेता कांग्रेस पार्टी में शामिल होने के लिए उनके संपर्क में नहीं है, और उन्हें किसी भी बागी नेता के कांग्रेस में शामिल होने की जानकारी भी नहीं है। अलबत्ता उन्होंने यह भी कहा कि राजनीति में कोई किसी के भी संपर्क में हो सकते हैं, पर उनके संपर्क में कोई नहीं है।

उल्लेखनीय है कि गत दिवस यशपाल आर्य व संजीव आर्य की भाजपा से कांग्रेस में वापसी के दौरान प्रीतम सिंह सबसे आगे रहे थे, बल्कि यह भी चर्चा थी कि उन्हीं के प्रयासों से यशपाल आर्य ने पुत्र सहित कांग्रेस में घर वापसी की है। इसके बाद प्रीतम कबीना मंत्री डॉ. हरक सिंह रावत के घर पर भाजपा नेता उमेश शर्मा काऊ व कांग्रेस नेता ब्रह्मस्वरूप ब्रह्मचारी की मौजूदगी में मिलने और साथ दिल्ली जाने के लिए भी चर्चा में आए थे। लेकिन अब उनका किसी के कांग्रेस में शामिल होने से इंकार करने को 6 भाजपा विधायकों के संपर्क में होने की बात कहने वाले हरीश रावत गुट के गोविंद सिंह कुंजवाल को जवाब माना जा रहा है।

आज पत्रकार वार्ता के दौरान उन्होंने 2013 की आपदा में बेहतर तरीके से निपटने के लिए कांग्रेस हाईकमान का नाम लिया पर वह हरीश रावत का नाम लेने से बचते दिखे। उनके साथ मौजूद कांग्रेस के चार में से एक कार्यकारी अध्यक्ष रणजीत रावत ने भी पूरी वार्ता में एक बार भी हरीश रावत का नाम नहीं लिया। उन्होंने यह भी कहा कि राजनीति में सभी दलों के दरवाजे हमेशा खुले रहते हैं। संसदीय लोकतंत्र में सभी दलों के इन खुले दरवाजों से लोग आते भी और जाते भी रहते हैं। बहरहाल, किसी को कांग्रेस में शामिल करने पर राष्ट्रीय नेतृत्व निर्णय लेगा, और जो भी निर्णय लिया जाएगा वह सभी को मान्य होगा।

केंद्र तत्काल राहत के लिए आर्थिक पैकेज जारी करे: प्रीतम
नैनीताल। नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि राज्य में गत 17 से 19 अक्टूबर के बीच आई दैवीय आपदा का पहले से मौसम विभाग ने रेड अलर्ट घोषित किया था। इसके बावजूद सरकार नालों के पास रहने वाले लोगों को बचाने के लिए कुछ भी नहीं कर पाई। सरकार इसके बावजूद बचाव कार्य शुरू करने में भी नदारद रही। उन्होंने कहा कि देश के गृह मंत्री भी उत्तराखंड आ चुके हैं, इसके बाद भी राज्य को कोई राहत पैकेज नहीं दिया। इसमें विलंब क्यों हो रहा है। यह पूछे जाने पर कि क्या 2013 की आपदा में पांच दिनों में तत्कालीन केंद्र सरकार ने राहत पैकेज जारी कर दिया था, प्रीतम इसका प्रश्न हां में देने की कोशिश करते नजर आया। उन्होंने इस आपदा में करीब छह से सात हजार करोड़ रुपए की क्षति का अनुमान बताते हुए केंद्र सरकार से तत्काल राहत पैकेज देने की मांग की।

उन्होंने कहा कि 2013 की आपदा में तत्कालीन कांग्रेस सरकार ने आपदा के मानकों में बदलाव किया था। अब इतने वर्षों के बाद स्थितियां बदल गई हैं, इसलिए दैवीय आपदा के मानकों में केंद्र सरकार तत्काल परिवर्तन करे। कहा कि आपदा से प्रभावित परिवार को कम से कम 10 लाख रुपए की मदद मिलनी चाहिए, साथ ही संपत्ति को हुई क्षति की भी सरकार को क्षतिपूर्ति करनी चाहिए। इस दौरान कार्यकारी अध्यक्ष रणजीत सिंह रावत ने पर्वतीय एवं मैदानी क्षेत्रों में खेती को पहुंचे नुकसान को लेकर चिंता जताई। पत्रकार वार्ता में नगर पालिका अध्यक्ष सचिन नेगी, पूर्व सांसद डॉ. महेंद्र पाल, महिला कांग्रेस की प्रदेश अध्यक्ष सरिता आर्य, त्रिभुवन फर्त्याल, मुन्नी तिवारी, सूरज पांडे, सुनील मेहरा व राजेंद्र व्यास आदि प्रमुख रूप से मौजूद रहे। आज के अन्य ताजा ‘नवीन समाचार’ पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें।

यह भी पढ़ें : कांग्रेस की दलित राजनीति: हाथी के दांत खाने के और-दिखाने के कुछ और…?

डॉ. नवीन जोशी @ नवीन समाचार, नैनीताल, 22 अक्टूबर 2021। उत्तराखंड में सत्ता में वापसी के प्रयासों में लगी कांग्रेस पार्टी को इस बार सबसे ज्यादा उम्मीद दलित वोटों के अपने पक्ष में आने की है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत 2017 की हार के बाद से ही चिंतित थे कि उत्तराखंड में करीब 17 फीसद दलित जो कभी कांग्रेस की झोली में हुआ करते थे, उनके हाथ से चले गए। बकौल हरीश रावत, ऐसा इसलिए हुआ कि कांग्रेस में सबसे बड़ा दलित चेहरा यशपाल आर्य पुत्र संजीव आर्य के साथ चुनाव से ठीक पहले भाजपा में चले गए। इस पर तब हरीश रावत ने अपनी टीस व्यक्त भी की थी कि यदि यशपाल उनके साथ होते तो कांग्रेस पार्टी 11 की जगह कम अंतर से हारी करीब 22 सीटें और जीतती।

इधर पंजाब में परिस्थितिजन्य कारणों से एक दलित चरणजीत सिंह चन्नी मुख्यमंत्री बने तो पंजाब के प्रभारी हरीश रावत की वही टीस फिर उभर आई। बोले, वह उत्तराखंड में भी किसी दलित के बेटे को सीएम देखना चाहते हैं। उनकी यह बात यशपाल आर्य के कानों में पड़ी तो उनके भीतर दबी-छुपी सीएम बनने की इच्छा हिलारें मारने लगी। हरीश रावत की सरकार के दौर से रूठने की उनकी बीमारी एक बार फिर बाहर आई तो सीएम पुष्कर धामी उन्हें चाय पर मनाने पहुंच गए। लेकिन यशपाल सिर्फ चाय से मानने वाले नहीं थे। ऐसा उन्होंने कुछ ही दिन बाद भाजपा छोड़ कांग्रेस में लौटकर बता दिया। उनकी घर वापसी के माध्यम बने नेता प्रीतम सिंह, जिन्होंने ही सबसे पहले हरीश रावत के दलित के बेटे को मुख्यमंत्री देखने के बयान का विरोध किया था। क्योकि वह अपने पुराने बागी नेताओं को वापस लौटाकर हरीश रावत के बरक्स खड़ा होना चाहते थे। सो उन्होंने भी यशपाल को माध्यम बनाया। हरीश रावत कहां पीछे रहते। उन्होंने भी तत्काल मोर्चा संभाला और यशपाल व संजीव को अपने घर ले जाकर अनचाहे भी पत्नी से उनकी आरती करवाकर दिखाने की कोशिश की कि वह यशपाल के कांग्रेस में आने से खुश हैं।

टीवी कार्यक्रम में मुख्यमंत्री बनने के प्रश्न पर मुस्कुराते हुए ‘हां’ की तख्ती दिखाते हरीश रावत।

लेकिन खुद को स्वयंभू तरीके से भावी मुख्यमंत्री के रूप में पहले से ही आगे कर रहे हरीश रावत की मन के भीतर की वास्तविक इच्छा जल्द ही तब सामने आ गई, जब एक टीवी कार्यक्रम में वह मुख्यमंत्री बनने की इच्छा के प्रश्न पर ‘लपेटे’ गए। यहाँ उन्होंने हाथ में तख्ती लेकर कहा, ‘हां’। यानी वह मुख्यमंत्री बनना चाहते हैं। साफ है, यदि वह मुख्यमंत्री बनना चाहते हैं तो कैसे किसी दलित को मुख्यमंत्री बनते देख सकते हैं। इसका जवाब यशपाल के एक करीबी सवर्ण कांग्रेस नेता ने भी यह कहकर दिया कि हरीश रावत किसी दलित को मुख्यमंत्री बनाने के बारे में अकेले निर्णय नहीं ले सकते।

सो, असल बात यह है कि कांग्रेस व हरीश रावत वास्तव में नहीं चाहते हैं कि कोई दलित मुख्यमंत्री बने। वरन केवल इतना चाहते हैं कि ऐसा कहकर वह कांग्रेस पार्टी से अलग हुए दलित वोटों को अपने पक्ष में आकर्षित करें। उन्हें सिर्फ झांसा दें कि उनका बेटा भी मुख्यमंत्री बन सकता है। क्योंकि यदि वह वास्तव में किसी दलित के बेटे को मुख्यमंत्री के चेहरे के रूप में आगे करते हैं तो उन्हें राज्य की करीब 70 फीसद सवर्ण आबादी के नाराज होने का भी खतरा है। ऐसे में इशारे साफ हैं कि कि कांग्रेस किसी दलित को राज्य का अगला मुख्यमंत्री बनाना चाहती है, या केवल दलितों के वोट हासिल करना चाहती है। आगे देखने वाली बात होगी कि दलितों को कितना यह बात समझ में आती है, अथवा कितना वह इस झांसे में आते हैं। इस पर ही कांग्रेस और उत्तराखंड की राजनीति 2022 के बाद आगे बढ़ेगी। आज के अन्य ताजा ‘नवीन समाचार’ पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें।

यह भी पढ़ें : प्रीतम-हरक-काऊ की बंद कमरे में बैठक व साथ दिल्ली यात्रा तथा हरीश रावत को घुड़की के इशारे समझिए…

डॉ. नवीन जोशी @ नवीन समाचार, नैनीताल, 20 अक्टूबर 2021। बीते 24 घंटों में राज्य में मौसम के इतर राजनीति के फिर बदलने की दो तस्वीरें आईं। इनमें नेता प्रतिपक्ष व वरिष्ठ कांग्रेस नेता प्रीतम सिंह के साथ लंबे समय से भाजपा से कांग्रेस में वापसी करने के लिए चर्चित कबीना मंत्री डॉ. हरक सिंह रावत व भाजपा नेता उमेश शर्मा ‘काऊ’ बंद कमरे में मुलाकात व साथ दिल्ली यात्रा करते दिखे। वहीं हरक हरीश रावत को घुड़की देते सुनाई दिए कि हरीश चाहें भी तो उन्हें कांग्रेस में आने से रोक नहीं सकते, या कांग्रेस में नहीं ले जा सकते…।उत्तराखंड में प्रीतम, हरक और काऊ की मुलाकात ने बढ़ाया सियासी पारा, कहीं कुछ  खिचड़ी तो नहीं पक रही | In Uttarakhand, the meeting of Pritam, Harak and  Kau increased the political

हम इस पूरी कहानी के आपको इशारे समझाने की कोशिश करेंगे। इस कहानी के तीन प्रमुख पात्र हैं, प्रीतम, हरक व काऊ यानी कथित बागी तथा हरीश रावत। बात यह है कि मार्च 2016 में कांग्रेस से भाजपा में शामिल हुए कांग्रेसियों द्वारा ही कहे गए ‘बागियों’ को कांग्रेस में शामिल कराने को लेकर कांग्रेस में गुटीय संघर्ष चल रहा है। एक ओर अपनी सरकार चलाने के दौर से कांग्रेस को ‘हरीश कांग्रेस’ बनाने पर तुले हरीश रावत हैं, जो कांग्रेस पार्टी में खुद से ऊपर किसी को नहीं चाहते। पूर्व मुख्यमंत्री एनडी तिवारी व विजय बहुगुणा के दौर से हरीश रावत की यही प्रवृत्ति व प्रकृत्ति नजर आती है। इसलिए वह उनका विरोध कर भाजपा में गए कांग्रेसी नेताओं की किसी कीमत पर कांग्रेस में वापसी नहीं चाहते हैं। अब भी उन्होंने बागियों की घर वापसी के लिए ‘माफी मागने’ का विकल्प रखा है, जिसे शायद ही कोई बागी मानेगा।

दूसरी ओर देखें तो डॉ. इंदिरा हृदयेश के देहावसान के बाद कांग्रेस पार्टी में कोई ऐसा दमदार नेता नहीं बचा है जो हरीश रावत को उनकी ही तरह से चुनौती दे सके। ऐसे में नेता प्रतिपक्ष प्रीतम सिंह आगे आए हैं। उनकी कोशिश है कि बागियों की घर वापसी कराकर वह अपना गुट मजबूत कर हरीश रावत को चुनौती दे सकंे। इस कोशिश में वह सभी बागियों की कांग्रेस में वापसी कराने के प्रयास में हैं। गत दिनों यशपाल आर्य एवं संजीव आर्य की कांग्रेस में वापसी भी प्रीतम के ही प्रयासों का परिणाम बताई जा रही है। और यह भी कहा जा रहा है कि कांग्रेस हाइकमान ने यशपाल आर्य व संजीव आर्य की घर वापसी कराकर हरीश रावत को संदेश दे दिया है कि किसी भी नेता की वापसी हरीश रावत की शर्तों पर नहीं होगी।

यह भी बताया जाता है कि यशपाल जब कांग्रेस से भाजपा में गए थे तो इस कारण कि हरीश रावत ने अपने घर से, अपने पुत्रों व पुत्रियों के टिकट की अभिलाषा से उठने जा रहे विवाद का मार्ग बंद करने के लिए ‘एक परिवार से एक टिकट’ देने का फॉर्मूला घोषित कर दिया था। इससे एक बार पहले भी अपने पुत्र संजीव को टिकट न दिला पाए यशपाल आर्य को यह विश्वास हो गया था कि पूरी ताकत दिखाने के बावजूद इस बार भी नैनीताल से कांग्रेस का टिकट उनके पुत्र को नहीं मिलेगा।

कहा जाता है कि इस प्रमुख कारण से ही यशपाल ठीक भाजपा के टिकट बंटवारे के दिन पुत्र सहित भाजपा में शामिल हो गए थे, और खुद व पुत्र दोनों के लिए टिकट प्राप्त कर लिया था। इधर उनकी घर वापसी पर हरीश का दलित को सीएम बनाने वाला बयान भी खुद अपने गले की हड्डी बन गया था। इसलिए वह पिता-पुत्र की वापसी का चाहकर भी विरोध नहीं कर पाए और अब खुद को इस घर वापसी से खुश दिखाना भी उनकी मजबूरी बना हुआ है। जबकि भविष्य बताएगा कि वह यशपाल या किसी भी दलित को सीएम के रूप में देखने के लिए कितने प्रयास करेंगे और कितना खुश होंगे। एक पक्ष यह भी है कि प्रीतम सिंह ने ही सबसे पहले हरीश रावत के ‘दलित के बेटे को सीएम देखने’ वाले बयान की आलोचना की थी, और वह ही यशपाल व संजीव आर्य की कांग्रेस में घर वापसी के सूत्रधार बने हैं।

इस कहानी का तीसरा कोण ‘बागी’ कहे जाने वाले कांग्रेस से भाजपा में गए नेता हैं, जिनके लिए अनुशासन होना पार्टी में लोकतंत्र न होना व अनुशासनहीनता लोकतंत्र होना है। क्योंकि वह कांग्रेस पार्टी में सोनिया-राहुल के दौर में राजनीति करने वाले नेता हैं, इंदिरा गांधी के दौर के नहीं, जब ‘इंदिरा इज इंडिया’ और ‘इंडिया इज इंदिरा’ कहा जाता था और जरा सी नाफरमानी पर मुख्यमंत्री और राज्यपाल रातों-रात बदल दिए जाते थे। यह अलग बात है कि ‘कांग्रेस मुक्त’ करते-करते ‘कांग्रेस युक्त’ हुई खासकर उत्तराखंड भाजपा में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का गुजरात की पूरी सरकार को एक झटके में बदल देने वाला अनुशासन न जाने किन कारणों से नहीं दिखता।

तो भी बागियों को युवा पुष्कर सिंह धामी के मुख्यमंत्री बनने और प्रधानमंत्री मोदी द्वारा उनकी पीठ थपथपाने के बाद अपने मुख्यमंत्री बनने के ख्याब भी पूरे होते नजर नहीं आ रहे हैं। इसलिए बकौल महिला कांग्रेस की प्रदेश अध्यक्ष सरिता आर्या, बागियों का इस और उस, दोनों ओर से सत्ता की मलाई खाने के लिए घर वापसी के बहाने ढूंढना लाजिमी है, और वह ऐसा करते भी नजर आ रहे हैं…..। आज के अन्य ताजा ‘नवीन समाचार’ पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें।

यह भी पढ़ें : तो कुंजवाल नेे ताजा बयान से हरीश रावत को छोड़ा अलग-थलग, साथ ही सोनिया से इतर राहुल को बताया कांग्रेस का हाइकमान

pbs.twimg.com/profile_images/550936243781906432...नवीन समाचार, हल्द्वानी, 16 अक्टूबर 2021। उत्तराखंड में विधानसभा चुनावों के लिए 6 माह से कम का समय शेष रहते राजनीतिक दलों में दूसरों से बढ़त लेने की होड़ मची हुई है। बढ़त लेने का मानक दूसरे दलों से अपनी पार्टी में शामिल होने वाले नेताओं की गिनती माना जा रहा है। यानी जिस पार्टी में दूसरे दल के जितने अधिक नेता शामिल होंगे, उसे आगामी विधानसभा चुनाव में उतना ही अधिक जीतता हुआ माना जाएगा। ऐसी मनोवैज्ञानिक बढ़त लेने के लिए नेता बार-बार दूसरे दलों के नेताओं के संपर्क में होने के दावे-शिगूफे भी छोड़ रहे हैं।

रविवार को पूर्व विधानसभा अध्यक्ष गोविंद सिंह कुंजवाल भी ऐसे शिगूफे छोड़ने वाले नेताओं की जमात में शामिल हो गए। उन्होंने दावा किया कि भाजपा के 6 नेता कांग्रेस के संपर्क में हैं। राहुल गांधी जिन्हें चाहेंगे, वह कांग्रेस पार्टी में शामिल होंगे। देखें कुंजवाल ने क्या कहा:

खास बात कुंजवाल के बयान के निहितार्थ में भी है। कुंजवाल ने कहा, ‘कौन लोग कांग्रेस पार्टी की सदस्यता लेने वाले हैं, वापसी करने वाले हैं, यह पार्टी का केंद्रीय नेतृत्व तय करेगा। यशपाल आर्य को भी राहुल गांधी ही कांग्रेस पार्टी में लाए हैं। और केंद्रीय नेतृत्व जिनको चाहेगा, उन सबको वापसी कराएगा। कांग्रेस के बढ़ते ग्राफ और पार्टी के सरकार में आने की संभावना को देखकर बहुत से लोग कांग्रेस पार्टी में आना चाहते हैं। करीब 6 विधायक कांग्रेस पार्टी के संपर्क में हैं, जो कांग्रेस पार्टी की सदस्यता ग्रहण करना चाहते हैं।’

ध्यान देने योग्य बात यह है कि हरीश रावत समर्थक माने जाने वाले कुंजवाल ने कांग्रेस में 6 विधायकों की वापसी की बात कही है। यानी वह कांग्रेस से भाजपा में शामिल हुए विधायकों की बात कह रहे हैं। यानी ऐसा कोई विधायक कांग्रेस के संपर्क में नहीं है, जो कांग्रेस से भाजपा में नहीं गया है।

साथ ही उनका यह बयान एक तरह से हरीश रावत को अलग-थलग करने वाला भी है, जो अपने ‘वीटो’, अपनी ‘माफी मांगने’ की शर्त पर ही कांग्रेस से भाजपा में गए विधायकों की घर वापसी चाहते हैं। जबकि कुंजवाल ने एक तरह से कहा है कि हरीश रावत की शर्त कोई मायने नहीं रखती। वे भाजपा विधायक ही वापसी करेंगे, जिन्हें केंद्रीय हाईकमान चाहेगा व राहुल गांधी चाहेंगे।

गौरतलब है कि शनिवार को सोनिया गांधी ने कांग्रेस के असंतुष्ट ‘जी-23’ समूह के नेताओं को बताना पड़ा है कि वह कांग्रेस की हाईकमान हैं, जबकि कांग्रेस के अधिकांश नेता अब भी राहुल गांधी को ही कांग्रेस का भविष्य और मौजूदा हाईकमान माने हुए हैं। कुंजवाल जैसे वरिष्ठ नेता के शब्दों के यह निहितार्थ तो निकलते ही हैं। ऐसा नहीं हो सकता कि वह यूं ही कुछ नासमझी में कह रहे हों। (डॉ.नवीन जोशी) आज के अन्य ताजा ‘नवीन समाचार’ पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें।

यह भी पढ़ें : यशपाल समर्थक गोपाल बिष्ट ने खुशी जताई पर सीएम बनने पर कहा-हरीश रावत यह निर्णय नहीं ले सकते…

डॉ. नवीन जोशी, नवीन समाचार, नैनीताल, 12 अक्टूबर 2021। पूर्व काबीना मंत्री यशपाल आर्य के पूर्व से बेहद करीबी रहे एवं भीमताल सीट से दावेदार कांग्रेस नेता गोपाल बिष्ट ने पत्रकार वार्ता आयोजित कर यह उम्मीद तो जताई कि यशपाल आर्य के पार्टी का वरिष्ठतम नेता होने के नाते कांग्रेस पार्टी को लाभ मिलेगा, अलबत्ता इस प्रश्न पर कि वह हरीश रावत के कहे अनुसार दलित नेता के तौर पर कांग्रेस से दावेदार होंगे, इस पर बिष्ट ने कुछ भी कहने से इंकार करते हुए कहा कि पार्टी में प्रदेश अध्यक्ष व चार कार्यकारी अध्यक्षों के होते इस मामले में हरीश रावत कोई निर्णय नहीं ले सकते।

नैनीताल विधायक संजीव आर्य पर टिप्पणी करते हुए उन्होंने कहा कि संजीव ने जो विकास कार्य किए हैं, वह उनके स्वयं के प्रयासों से हैं। इसमें सरकार का कोई योगदान नहीं है। भाजपा में शामिल हुए भीमताल विधायक कैड़ा के पूर्व से कट्टर विरोधी रहे बिष्ट ने कहा कि भाजपा ने उन्हें शामिल कर अपने पैरों पर कुल्हाड़ी मारी है। वह चाहे निर्दलीद लड़ें या भाजपा से, उनकी हार तय है।

उन्होंने कहा कि पिछली त्रिवेंद्र सरकार ने राज्य में कृषि भूमि की खसरा-खतौनियों में परिवार के पुरुष के साथ महिलाओं का नाम भी शामिल करने एवं उन्हें भी मुआवजा देने का गजट नोटिफिकेशन जारी किया था, लेकिन यह आज तक लागू नहीं हो पाया है। इस पर वह आगामी 18 अक्टूबर क्षेत्रीय महिलाओं के साथ मुख्यालय में जुलूस निकालेंगे और आगे इस मुद्दे पर गांव से सड़क तक आंदोलन करेंगे। इस मौके पर उनके साथ अधिवक्ता प्रशांत जोशी व प्रभात बोरा तथा अजय कुमार, कैलाश कुमार व मो. सलीम आदि लोग मौजूद रहे। बाद में गोपाल बिष्ट की मौजूदगी में कांग्रेसियों ने यशपाल आर्य व संजीव आर्य के कांग्रेस में शामिल होने पर आतिषबाजी करके भी खुशी जताई। आज के अन्य ताजा ‘नवीन समाचार’ पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें।

यह भी पढ़ें : भारत बंद बेअसर, कांग्रेसियों ने फूका केंद्र का पुतला, ‘पाकिस्तान का पिल्ला’ कहे जाने पर मुकदमा दर्ज करने की मांग

डॉ. नवीन जोशी @ नवीन समाचार, नैनीताल, 27 सितंबर 2021। सोमवार को भारत बंद को जिला व मंडल मुख्यालय में कोई असर नहीं रहा। यहां समस्य व्यापारिक व अन्य गतिविधियां रोज की तरह सामान्य रहीं। अलबत्ता कांग्रेस पार्टी की नगर इकाई की ओर से इस मौके पर मल्लीताल में पंत मूर्ति के नीचे किसानों के समर्थन मल्लीताल पंत पार्क में एकत्र होकर केंद्र की भाजपा सरकार का पुतला फूका गया, तथा प्रदर्शन किया गया।

मल्लीताल में केंद्र का पुतला फूकते कांग्रेस कार्यकर्ता।

प्रदर्शन में नगर अध्यक्ष अनुपम कबडवाल, महिला कांग्रेस की प्रदेश अध्यक्ष सरिता आर्य, डॉ. रमेश पांडे, मुकेश जोशी, कैलाश अधिकारी, पवन व्यास व विमल चौधरी सहित कई अन्य कांग्रेसी शामिल रहे। आज के अन्य ताजा ‘नवीन समाचार’ पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें।

आपत्तिजनक बयान पर भाजपा प्रदेश प्रभारी के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने की मांग
नैनीताल। कांग्रेस पार्टी के कार्यकर्ताओं ने भाजपा के प्रदेश प्रभारी दुष्यंत गौतम के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने की मांग पर मल्लीताल कोतवाली में प्रार्थना पत्र दिया है। पत्र में आरोप लगाया गया है कि श्री गौतम ने कथित तौर पर रविवार को देहरादून में आयोजित महिला मोर्चा के कार्यक्रम में कांग्रेस सांसद राहुल गांधी के विरुद्ध आपत्तिजनक टिप्पणी करते हुए उन्हें ‘पाकिस्तान का पिल्ला’ कहा है। इससे पार्टी के समर्पित कार्यकर्ताओं को अत्यंत ठेस पहुंची है तथा देश में राहुल गांधी की छवि को धूमिल करने का एवं आपराधिक षडयंत्र कर उनके खिलाफ देश के सौहार्दपूर्ण वातावरण को क्षति पहुंचाने का प्रयास किया गया है।

पूर्व से प्रकाशित पत्र में पूर्व विधायक सरिता आर्य, नगर अध्यक्ष अनुपम कबडवाल, डॉ. रमेश पांडे, मुकेश जोशी, भुवन बिष्ट, प्रेम शर्मा, राजेंद्र व्यास, मो. जुनैद व मसरूर अहमद खान आदि ने हस्ताक्षर किए हैं। आज के अन्य ताजा ‘नवीन समाचार’ पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें।

यह भी पढ़ें : सीएम के आगमन से दो घंटे पूर्व कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने किसे दिखाए काले झंडे ?

डॉ. नवीन जोशी, नवीन समाचार, नैनीताल, 8 सितंबर 2021। मंहगाई, बेरोजगारी, पलायन, भू कानून, भ्रष्टाचार, आदि मुद्दों पर कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने बुधवार को भी हमेशा की तरह मुख्यमंत्री के आगमन पर विरोध प्रदर्शन किया। उन्होंने इतनी जल्दी विरोध प्रदर्शन क्यों किया, और सीधे मुख्यमंत्री के आगमन के दौरान उन्हे काले झंडे दिखाने की हिम्मत क्यों नहीं दिखाई, यह हर किसी की समझ से परे रहा। कई लोग यह चुहल करते भी सुने गए कि सीएम के आगमन से दो घंटे पूर्व कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने किसे काले झंडे दिखाए ?

कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने महिला कांग्रेस की प्रदेश अध्यक्ष व पूर्व विधायक सरिता आर्य की अगुवाई में मुख्यमंत्री के तय कार्यक्रम से करीब एक घंटा पहले सुबह करीब 11 बजे तल्लीताल डांठ पर जुटे और उन्होंने काले झंडे लहराते व काले गुब्बारे उड़ाते हुए मुख्यमंत्री वापस जाओ के नारे लगाए। थोड़ी दूर आगे आने पर तल्लीताल थाना प्रभारी विजय मेहता की अगुवाई में सभी कार्यकर्ताओं को पहले से तैयार वाहन में डालकर पुलिस लाइन ले जाया गया। कई लोग खुद भी पुलिस की गाड़ी में चढ़ते देखे गए। जहां से उन्हें शाम चार बजे के बाद छोड़ा गया।

तल्लीताल थाना प्रभारी विजय मेहता ने बताया कि करीब 40 कांग्रेस कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिया गया। इनमें सरिता आर्य, खष्टी बिष्ट, सूरज पांडे, पवन जाटव, संजय कुमार, सभासद पुष्कर बोरा, परवेज आलम, नितिन जाटव, निखिल कुमार, गौरव चौहान, भास्कर भट्ट, भास्कर आर्या, गोपी शर्मा, अमन सैफी, मौ. मोहसिन, आकाश कुमार, आदित्य चंद्रवंशी, एमडी साजिद, इमरान हुसैन, मोबिन खान व उवैश अली आदि शामिल रहे।

हालांकि मुख्यमंत्री अपने तय कार्यक्रम से भी करीब एक घंटे देरी से करीब 1 बजे नगर में पहुंचे और उन्हें भाजपा कार्यकर्ता मोटरसाइकिलों की रैली के साथ खुली जीप में मॉल रोड होते हुए मल्लीताल पंत पार्क के कार्यक्रम स्थल तक लेकर आए। आज के अन्य ताजा ‘नवीन समाचार’ पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें।

यह भी पढ़ें : कांग्रेस की परिवर्तन यात्रा में लहराई गई पिस्टल, मामला दर्ज, एक गिरफ्तार

पिस्टल के साथ बैठा युवक चकरपुर, बाजपुर निवासी फहीम उर्फ समर पुत्र कादिर के रूप में पहचान हुई।नवीन समाचार, दिनेशपुर, 7 सितंबर 2021। कांग्रेस की परिवर्तन यात्रा के दौरान कार से पिस्टल लहराने का मामला प्रकाश में आया है। मामले में एक कांग्रेस कार्यकर्ता को महंगा पड़ गया। मामले का वीडियो कुमाऊं परिक्षेत्र के नवागत डीआईजी नीलेश आनंद भरने तक पहुंचने के बाद मामले की जांच के आदेश दिये गए। जांच में पुष्टि होने पर पुलिस ने पिस्टल के स्वामी और उसे लहराने वाले उसके आरोपित भाई के खिलाफ केस दर्ज कर लिया है। साथ ही लाइसेंसी पिस्टल व कार को सीज कर आरोपित को गिरफ्तार कर लिया है, साथ ही पुलिस पिस्टल के स्वामी की तलाश कर रही है।

बताया गया है कि सोमवार को कांग्रेस की तीन दिवसीय परिवर्तन यात्रा के आखरी दिन दोपहर में गदरपुर में रैली के दौरान एक युवक पिस्टल लेकर कार के ऊपर बैठ कर पिस्टल लहरा रहा था। इस दौरान किसी ने उसकी वीडियो बनाकर वायरल कर दी। साथ ही वीडियो के साथ मामले की शिकायत डीआईजी नीलेश आनंद भरणे से की गई। मामला संज्ञान में आते ही डीआईजी ने थानाध्यक्ष गदरपुर सतीश कापड़ी को जांच कर कार्रवाई के निर्देश दिए। गदरपुर पुलिस ने सीसीटीवी फुटेज की जांच की तो कार के ऊपर पिस्टल के साथ बैठे युवक की पहचान चकरपुर, बाजपुर निवासी फहीम उर्फ समर पुत्र कादिर के रूप में हुई।

इसके बाद बुधवार को गदरपुर पुलिस ने मुद्रा फाइनेंस बाजपुर से उसे पकड़ लिया। उसके पास से पिस्टल भी बरामद हुई। थानाध्यक्ष सतीश चंद कापड़ी ने बताया कि पूछताछ में आरोपित फहीम ने बताया कि बरामद शस्त्र उसके भाई अब्दुल अहमद के नाम दर्ज है। इस पर पुलिस ने दोनों भाई फहीम और अब्दुल अहमद के विरुद्ध आर्म्स एक्ट धारा 29/30 के तहत मुकदमा दर्ज कर लिया है। थानाध्यक्ष सतीश कापड़ी ने बताया कि फरार आरोपित अब्दुल अहमद को भी जल्द गिरफ्तार कर लिया जाएगा। (डॉ.नवीन जोशी) आज के अन्य ताजा ‘नवीन समाचार’ पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें।

यह भी पढ़ें : कांग्रेस में ‘माई का लाल’ को लेकर बवाल

नवीन समाचार, हल्द्वानी, 20 अगस्त 2021। एक लोकतांत्रिक पार्टी के रूप में प्रचारित की जाने वाली देश की पुरानी राजनीतिक पार्टी कांग्रेस में ‘माई का लाल’ यानी ‘माई’ और उनके बाद ‘लाल’ यानी माता-पिता और उनके बाद उनके बच्चों को राजनीतिक विरासत सौंपने का लंबा सिलसिला है। निर्विवाद तौर पर इस पार्टी में टिकट या तो ‘माई के लालों’ को मिलते हैं या उनको, जिनका शीर्ष स्तर पर कोई ‘माई-बाप’ होता है। थोड़ा बहुत उनको भी जो माई या लालों के गुणगान में लगे रहते हैं। जनता का चाहे जितना समर्थन किसी नेता के साथ हो, लेकिन यदि वह इन दो में से किसी एक शर्त का पालन करता है, तभी उसे चुनाव लड़ने या राजनीति में आगे बढ़ने का मौका मिलता है। कांग्रेस की देखा-देखी पैदा हुए कई राजनीतिक दलों ने भी यह फॉर्मूला अपनाया है।

राजीव गांधी श्रद्धांजलि सभा में हल्‍द्वानी सीट के टिकट को लेकर हंगामा, जानिए क्‍या है मामलायूं तो बिन ‘माई-बाप’ का कोई लाल पैदा ही नहीं होता, परंतु राजनीति में आगे बढ़ने के लिए खास ‘माई-बापों’ की जरूरत होती है। ऐसे में यदि किसी को कोई ‘माई का लाल’ होने की चुनौती दे तो मजबूत रीढ़ के लोग ही जवाब दे पाते हैं, अन्य मन मसोस कर चुप बैठे रहते हैं।

लेकिन आज इस मुद्दे की इसलिए कि हल्द्वानी में देश के पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की जयंती पर इसी शब्द ‘माई का लाल’ को लेकर हंगामा हो गया। हुआ यह कि पार्टी के स्वराज आश्रम कार्यालय में स्व. राजीव गांधी को श्रद्धांजलि दिए जाने के मौके पर माइक हाथ में लिए पूर्व दर्जाधारी राज्यमंत्री इकबाल भारती ने कह दिया, नेता प्रतिपक्ष रहीं इंदिरा हृदयेश के निधन के बाद हल्द्वानी से उनके बेटे सुमित हृदयेश चुनाव लड़ेंगे। उन्होंने आगे कहा, ‘कोई माई का लाल नहीं जो सुमित हृदयेश की दावेदारी को चुनौती दे।’

फिर क्या था मंच पर उनसे कुछ दूर बैठे कांग्रेस के प्रदेश प्रवक्ता व व्यापारी नेता व पूर्व में छात्र नेता रहे हुकुम सिंह कुंवर को गुस्सा धधक उठे। कुंवर बीच में ही खड़े हो गए और खुद को ‘माई का लाल’ विधानसभा चुनाव के लिए अपनी दावेदारी जताने लगे। कुंवर ने तेज आवाज में कहा, ‘मैं हूं माई का लाल-मैं हूं माई का लाल’। यही नहीं, कांग्रेस नेत्री प्रदेश महामंत्री पुष्पा नेगी व शोभा बिष्ट और शशि वर्मा ने भी इकबाल भारती के शब्दों का जमकर विरोध किया और खुद को 2022 के लिए दावेदार करार दिया।

हंगामा बढ़ने पर कांग्रेस के अन्य कार्यकर्ताओं ने राजीव गांधी के जय के नारा लगाते हुए मामले को शांत करने की कोशिश भी की। लेकिन कुंवर पूरे गुस्से में दिखे, और जोर-जोर से चिल्लाने लगे। हंगामा इतना बढ़ा कि कांग्रेस जिलाध्यक्ष सतीष नैनवाल सहित पूर्व मंत्री हरीश चंद्र दुर्गापाल को दखल देना पड़ा। लेकिन इसके बावजूद मामला नहीं संभला, और सोशल मीडिया व मीडिया की सुर्खियों में आ गया। आज के अन्य ताजा ‘नवीन समाचार’ पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें।

यह भी पढ़ें : काबीना मंत्री के पति ने कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष को भेजा पांच करोड़ रुपए का मानहानि का नोटिस

नवीन समाचार, नैनीताल, 15 अगस्त 2021। हरीश रावत पर उत्तराखंड की महिला सशक्तीकरण एवं बाल विकास मंत्री रेखा आर्य के हमले के बाद अब उनके पति गिरधारी लाल साहू ने कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल को पांच करोड़ रुपए की मानहानि का नोटिस भेजा है। उन्होंने अपने अधिवक्ता के माध्यम से यह नोटिस कोर्ट में समर्पण करने के मीडिया में दिए बयान को लेकर भेजा है। कैबिनेट मंत्री रेखा आर्य ने अपने फेसबुक पर भी ये जानकारी दी है। देखें रेखा आर्य की पोस्ट:

 

कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष को भेजे गए नोटिस में कहा गया है, आप न्यायाधीश नहीं और आपको किसी व्यक्ति को अदालत में पेश होने एवं आत्मसमर्पण करने का निर्देश देने का कोई अधिकार नहीं है। यह एक कानूनी प्रक्रिया है जिसे अपनाया जा रहा है। जिस तरह से आप और आपकी पार्टी के सदस्य अपने बयान अखबारों में प्रकाशित करवा रहे हैं। इससे ऐसा प्रतीत होता है कि आप और आपकी पार्टी के सदस्य मीडिया ट्रायल की रणनीति का सहारा लेकर मुकदमे से पहले ही उनके मुवक्किल को दोषी मान रहे हैं। विभिन्न स्थानों पर आपके कहने पर आंदोलन और समाचार पत्रों में बयान प्रकाशित हुए हैं।

नोटिस में उन्होंने लिखा है उनकी पत्नी कैबिनेट मंत्री हैं। आपके झूठे बयान से आप उनकी और उनकी पत्नी की छवि खराब कर रहे हैं। प्रकरण कोर्ट में विचाराधीन है। ऐसे में आरोपी को तब तक निर्दोष माना जाता है जब तक अदालत में दोष साबित नहीं हो जाता। किसी को भी अपने मामले में पूर्व निर्णय या पूर्वाग्रह के लिए अनुमति नहीं दी जा सकती। (डॉ.नवीन जोशी) आज के अन्य ताजा ‘नवीन समाचार’ पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें।

यह भी पढ़ें : कांग्रेस में गढ़वाल-कुमाऊं की विभाजनकारी राजनीति को लेकर बवाल

नवीन समाचार, देहरादून, 29 जुलाई 2021। कांग्रेस पार्टी ने गत दिवस नए प्रदेश अध्यक्ष, नेता प्रतिपक्ष, चार कार्यकारी अध्यक्ष तथा चुनाव संचालन समिति सहित कई समितियों के गठन के साथ गढ़वाल व कुमाऊं के लिए दो अलग-अलग प्रवक्ताओं की तैनाती की थी। इन दो नियुक्तियों को लेकर पार्टी में गहरा असंतोष उभर कर आ गया है। पार्टी की प्रदेश प्रवक्ता प्रतिमा सिंह ने इस पर फेसबुक पर एक पोस्ट लिखकर आग में घी ही डाल दिया है। उन्होंने लिखा है, ‘कुमाऊं भी कुमाऊं के व्यक्ति को, गड़वाल (गढ़वाल) भी कुमाऊं के व्यक्ति को, अरे गड़वाल (गढ़वाल) वालो तुम्हें बोलना या चाटुकारिता नहीं आती क्या’

कांग्रेस प्रवक्ता प्रतिमा सिंह की बवाल होने के बाद हटा दी गई फेसबुक पोस्ट

पार्टी की प्रदेश प्रवक्ता होने के साथ ही देहरादून के डीएवी कॉलेज में प्रोफेसर के रूप में कार्यरत प्रतिमा की कुल मिलाकर 23 शब्दों की इस पोस्ट में शब्दों व व्याकरण की आधा दर्जन से अधिक अशुद्धियां तो हैं ही, इससे पार्टी के भीतर गढ़वाल व कुमाऊं के बीच विभाजनकारी राजनीति का चेहरा भी बेनकाब हो गया है। इस पोस्ट में कुमाऊं वासियों पर ‘चाटुकारिता’ और गढ़वाल वालों को ‘बोलना नहीं आने’ का तंज भी नजर आता है। इस पोस्ट पर इतना बवाल हुआ है कि प्रतिमा को अपनी यह पोस्ट हटानी पड़ी है। उन्होंने इस पोस्ट के जरिये खास तौर पर गढ़वाल मंडल की प्रवक्ता बनाई गई गरिमा मेहरा दसौनी पर तंज कसा है कि कैसे उन्हें कुमाऊं मंडल के रानीखेत से होने के बावजूद हरीश रावत व करन महरा का करीबी होने के नाते गढ़वाल मंडल का प्रवक्ता बना दिया गया है। वहीं इस पोस्ट के बाद मूलतः गाजियाबाद की रहने वाली प्रतिमा सिंह को उत्तराखंड का प्रदेश प्रवक्ता बनने पर भी सवाल उठ गए हैं।

इसके अलावा गरिमा की नियुक्ति पर पार्टी के एक अन्य नेता गिरीश चंद्र ने भी यह लिखकर तंज कसा है, ‘काबिलियत पर मुखबिरी भारी-साढ़े चार साल की मुखबिरी, और फिर रिश्तेदारी… ईनाम में मिल गई एक मंडल की ओहदेदारी’। बहरहाल कांग्रेस पार्टी में गढ़वाल-कुमाऊं को लेकर इस तरह बरते जा रहे भेदभाव से पार्टी द्वारा चार कार्यकारी अध्यक्ष व पार्टी के अधिकांश नेताओं को पद थमाकर राजनीतिक बढ़त लेने का प्रयास भी खटाई में पड़ सकता है। (डॉ.नवीन जोशी) आज के अन्य ताजा ‘नवीन समाचार’ पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें।

यह भी पढ़ें : एक गाड़ी में समाई ‘प्रीतम कांग्रेस’! और जोश में हरीश, बोले कांग्रेस जीती तो 400 यूनिट बिजली मुफ्त देंगे

नवीन समाचार, देहरादून, 28 जुलाई 2021। कांग्रेस में नए अध्यक्ष, चार कांग्रेस अध्यक्ष, नेता प्रतिपक्ष, चुनाव संचालन समिति, चुनाव प्रचार समिति सहित विभिन्न समतियों में चाहे जितने पार्टी नेताओं को ‘एडजस्ट’ कर दिया गया हो, लेकिन कांग्रेसी गुटबाजी में बंटने के अपने चरित्र से बाहर नहीं निकल पाए हैं। भले स्थिति ऐसी हो कि एक गुट सिर्फ एक ‘गाड़ी में एडजस्ट’ हुआ-सिमटा हुआ नजर आ रहा है, और घुड़कियां भी दिए जा रहा है। अलबत्ता घोषित न होते हुए पार्टी के चेहरे हरीश रावत जोश में नजर आ रहे हैं।

इसी जोश में मंगलवार को पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव हरीश रावत ने नवनियुक्त प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल की ताजपोशी के मौके पर कहा कि कांग्रेस सरकार में आई तो 100 नहीं 400 यूनिट बिजली निशुल्क दी जाएगी। राजपुर रोड स्थित पार्टी मुख्यालय में नवनियुक्त प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल और चार कार्यकारी अध्यक्षों के साथ नेता प्रतिपक्ष के स्वागत कार्यक्रम में कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए हरीश रावत ने केजरीवाल का नाम लिए बिना कहा कि अब गुजरात मॉडल के बाद दिल्ली कनॉट प्लेस का डुगडुगीबाज राज्य में सत्ता की चाहत में झांसा दे रहा है। दिल्ली मॉडल की झूठी कहानी के बहाने यहां के लोगों को गुमराह किया जा रहा है। साढ़े सात साल से अधिक के शासन में एक भी मेडिकल कॉलेज, इंजीनियरिंग कॉलेज दिल्ली मॉडल नहीं खोल पाई।

यहीं नहीं दिल्ली में आज तक लोगों को पानी जो सरकार उपलब्ध नहीं करा पाई वह दिल्ली मॉडल राज्य में कैसे लागू कर पाएगी। यह समझ से परे है। हरीश रावत ने अपने तीन साल के कार्यकाल की उपलब्धियों को गिनाते हुए कहा कि एक नहीं कई मेडिकल कॉलेज और इंजीनियरिंग कॉलेज के साथ 35 हजार से अधिक नौजवानों को सरकारी नौकरी दी। अगर कांग्रेस की सरकार आती है तो राज्य में बिजली की व्यवस्था चुस्त कर दी जाएगी। पहले साल में 100 यूनिट बिजली और दूसरे साल में 200 यूनिट और इसी तरह चार सौ यूनिट से अधिक बिजली निशुल्क दी जाएगी। उन्होंने कहा कि दिल्ली में बिजली महंगी है फिर भी मॉडल की बात कही जा रही है। राज्य की जनता इनके झूठे बहकावे में नहीं आने वाली है। (डॉ.नवीन जोशी)  आज के अन्य ताजा ‘नवीन समाचार’ पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें।

यह भी पढ़ें : कांग्रेस की कलह : धामी माने ! किशोर रूठे !! ‘चेहरे’ पर भी दोहरा रुख

नवीन समाचार, देहरादून, 24 जुलाई 2021। प्रदेश कांग्रेस में पंजाब की तर्ज पर हुए ताजा बदलाव से पार्टी के भीतर असंतोष सतह पर भी दिखने लगा है। खासतौर पर पांच अध्यक्षों के फार्मूले को लेकर कई पार्टी नेताओं में रोष है। धारचूला विधायक हरीश धामी व पूर्व काबीना मंत्री नवप्रभात के बाद अब पूर्व प्रदेश अध्यक्ष किशोर उपाध्याय के रूठने की खबर है। बताया जा रहा है कि वह भी बदलाव के इस फार्मूले, खासकर पांच अध्यक्ष बनाने के फार्मूले से सहज नहीं हैं। इस मामले में उन्होंने नई दिल्ली में प्रदेश प्रभारी देवेंद्र यादव से शुक्रवार को मुलाकात भी की, और इस फार्मूले से पेश आने वाली दिक्कतों के बारे में उन्हें जानकारी दी।

उधर एक दिन पर्वू कार्यकारी अध्यक्ष पद पर कुछ नाम और कोषाध्यक्ष की नियुक्ति पर नाराजगी जताते हुए इस्तीफे की चेतावनी देने वाले धारचूला विधायक हरीश रावत का रुख कुछ बदला नजर आने लगा है। धामी इस्तीफा देने की चेतावनी को लेकर पलट गए हैं। उन्होंने कहा कि विधानसभा चुनाव में चेहरा घोषित करने की उनकी मांग पार्टी ने पूरी कर दी है। उन्हें कोई नाराजगी नहीं है। हालांकि कार्यकारी अध्यक्ष पद पर कुछ नाम और कोषाध्यक्ष की नियुक्ति को लेकर अपनी आपत्ति को उन्होंने फिर दोहराया।

‘चेहरे’ पर दोहरा रुख
नैनीताल। कांग्रेस पार्टी में आगामी विधान सभा चुनाव में पार्टी के चेहरे को लेकर भी अभी अस्पष्टता बरकरार है। शुक्रवार को जहां नए प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने कहा कि हरीश रावत ही विधान सभा चुनाव में पार्टी का चेहरा होंगे, वहीं पूर्व प्रदेश अध्यक्ष प्रीतम सिंह ने कहा, कहां लिखा है कि हरीश रावत चेहरा होंगे। उन्होंने दोहराया पार्टी सामूहिक नेतृत्व में ही उत्तराखंड में चुनाव लड़ेगी। गौरतलब है कि हरीश रावत के समर्थक धामी उनके चेहरे पर चुनाव लड़ने की बात पर भी शांत पड़े बताये जा रहे हैं। (डॉ.नवीन जोशी) आज के अन्य ताजा ‘नवीन समाचार’ पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें। 

यह भी पढ़ें : उत्तराखंड में पंजाब फॉर्मूले के बाद विरोध के सुरों से भी उत्तराखंड में पंजाब !

नवीन समाचार, नैनीताल, 23 जुलाई 2021। कांग्रेस हाइकमान ने आगामी विधानसभा चुनावों को देखते हुए उत्तराखंड कांग्रेस में ‘किसी एक को चॉकलेट की जगह बहुतों को टॉफियां’ बांटने जैसा प्रयोग कर सबको खुश करने की पूरी कोशिश की है, लेकिन फिर भी विरोध से सुर उठने शुरू हो गए हैं। हरीश रावत खेमा इस प्रयोग से खुश नजर नहीं आ रहा है। मीडिया में आ रही खबरों के अनुसार धारचूला विधायक हरीश धामी ने चुनाव कमेटी की कुछ नई नियुक्तियों पर सवाल उठाते हुए पार्टी छोड़ने की धमकी दे दी है। धारचूला विधायक हरीश धामी ने कुछ नई नियुक्तियों पर सवाल उठाते हुए पार्टी छोड़ने की धमकी दे डाली। पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने दूरभाष पर उन्हें समझाने का प्रयास किया है। बताया जा रहा है कि धामी की नाराजगी बरकरार है।

जबकि पूर्व मंत्री नवप्रभात ने भी इस फेरबदल पर विरोध जताया है, और कांग्रेस घोषणा पत्र समिति का अध्यक्ष पद ठुकरा दिया है। नवप्रभात ने कहा कि वह कोर कमेटी का सदस्य नहीं बनना चाहते हैं। प्रदेश में जिसके नेतृत्व में चुनाव लड़ा जाना है, मेनिफेस्टो कमेटी की जिम्मेदारी तय करने का अधिकार भी उन्हें ही होना चाहिए। उन्होंने अपने फैसले की जानकारी प्रदेश प्रभारी देवेंद्र यादव को भी दूरभाष पर दी। वरिष्ठ कांग्रेस नेता नवप्रभात छोटे राज्य में पांच अध्यक्ष बनाने के फैसले से नाखुश नजर आ रहे हैं। उनके नजदीकी सूत्रों की मानें तो पार्टी के इस फैसले को वह खींचतान बढ़ने के तौर पर देख रहे हैं।

वहीं धारचूला विधायक हरीश धामी ने कुछ नई नियुक्तियों पर सवाल उठाते हुए पार्टी छोड़ने की धमकी दे डाली। बताया जा रहा है कि धामी की नाराजगी बरकरार है। बताया गया कि उन्हें पिछले विधानसभा चुनाव में पार्टी का टिकट नहीं मिलने पर निर्दलीय चुनाव लड़ने वाले और फिर छह साल के लिए पार्टी से निष्कासित किए गए हरीश रावत के विरोधी खेमे के आर्येंद्र शर्मा को कोषाध्यक्ष पद की जिम्मेदारी दिए जाने को लेकर घोर आपत्ति है। धामी का कहना है कि ऐसे व्यक्ति को कोषाध्यक्ष जैसा महत्वपूर्ण पद नहीं सौंपा जाना चाहिए। यही नहीं उन्हें कार्यकारी अध्यक्ष अधिक बनाए जाने को लेकर भी आपत्ति है। मीडिया से बातचीत में धामी ने अपनी आपत्ति को सही बताया। सूत्रों की मानें तो धामी से पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने दूरभाष पर संपर्क कर मनाने की कोशिश की। फिलहाल धामी ने अपने रुख पर कायम रहने के संकेत दिए हैं।

उल्लेखनीय है कई बैठकों के बाद आखिरकार कांग्रेस आलाकमान ने 2022 के विधानसभा चुनाव अभियान के लिए पंजाब कांग्रेस के एक प्रदेश अध्यक्ष व चार कार्यकारी अध्यक्ष बनाने के फार्मूले को उत्तराखंड में भी लागू किया है। राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत को चुनाव कमेटी की कमान सौंपकर पार्टी ने भविष्य की संभावनाओं की ओर भी इशारा किया है। जबकि पूर्व विधायक गणेश गोदियाल को प्रदेश अध्यक्ष बनाकर जहां हरीश रावत को खुश किया गया तो कुमाऊं से भुवन कापड़ी और तिलक राज बेहड़ को कार्यकारी अध्यक्ष बनाकर कांग्रेस अध्यक्ष पद से विदा हुए प्रीतम सिंह को संतुष्ट करने की कोशिश की गई है।

साथ ही कुमाऊं, गढ़वाल व तराई के साथ ब्राह्मण, क्षत्रिय, अनुसूचित जाति व पंजाबी वर्ग को भी प्रतिनिधित्व दिया है। गढ़वाल से पूर्व विधायक प्रो. जीत राम को कार्यकारी अध्यक्ष बनाया गया है तो वहीं रंजीत रावत को भी यह अहम जिम्मेदारी मिली। पूर्व प्रदेश अध्यक्ष किशोर उपाध्याय कांग्रेस समन्वय समिति की कमान सौंपी गई। इसी तरह नव प्रभात, प्रदीप टम्टा, नेता प्रतिपक्ष स्व. इंदिरा हृदयेश के बेटे सुमित हृदयेश को भी महत्व दिया गया है। (डॉ.नवीन जोशी) आज के अन्य ताजा ‘नवीन समाचार’ पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें। 

यह भी पढ़ें : कांग्रेस का विवाद सुलझा, नए अध्यक्ष, नेता प्रतिपक्ष और चुनाव संचालन समिति की हुई घोषणा

नवीन समाचार, देहरादून, 22 जुलाई 2021। आखिरकार नेता प्रतिपक्ष डॉ. इंदिरा हृदयेश के बीती 13 जून को असामयिक निधन के करीब पांच सप्ताह के इंतजार के बाद कांग्रेस हाईकमान ने पंजाब की तर्ज पर उत्तराखंड में भी प्रदेश संगठन में बड़े बदलाव पर मुहर लगा दी है।

Uttarakhand Politics: गणेश गोदियाल बने उत्तराखंड कांग्रेस के अध्यक्ष, प्रीतम सिंह नेता प्रतिपक्ष।बृहस्पतिवार देर शाम कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव संगठन केसी वेणुगोपाल ने नई नियुक्तियों के संबंध में पार्टी हाईकमान का आदेश जारी किया। कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष प्रीतम सिंह को नेता प्रतिपक्ष बना दिया गया है, जबकि पूर्व विधायक गणेश गोदियाल को प्रदेश कांग्रेस का नया मुखिया बनाया गया है। पूर्व विधायक प्रो जीत राम व रंजीत रावत, पूर्व काबीना मंत्री तिलकराज बेहड़ व तथा उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के खिलाफ खटीमा से चुनाव लड़े भुवन कापड़ी कांग्रेस पार्टी के कार्यकारी अध्यक्ष बनाए गए हैं। वहीं पार्टी ने तीन सदस्यीय चुनाव प्रचार कमेटी की कमान पूर्व मुख्यमंत्री व कांग्रेस महासचिव हरीश रावत को सौंपी है। राज्यसभा सदस्य प्रदीप टम्टा इस कमेटी के उपाध्यक्ष ओर और पूर्व काबीना मंत्री दिनेश अग्रवाल इसके संयोजक बनाए गए हैं। वहीं आर्येंद्र शर्मा पार्टी के कोषाध्यक्ष बनाए गए हैं। (डॉ.नवीन जोशी) आज के अन्य ताजा ‘नवीन समाचार’ पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें। 

यह भी पढ़ें : शुभम बने एनएसयूआई के विधानसभा अध्यक्ष

डॉ. नवीन जोशी @ नवीन समाचार, नैनीताल, 12 जुलाई 2021। नगर के छात्र शुभम बिष्ट को कांग्रेस पार्टी के छात्र संघठन एनएसयूआई का विधानसभा अध्यक्ष मनोनीत किया गया है। शुभम के अध्यक्ष बनने पर छात्रों और क्षेत्रवासियो में खुशी की लहर है। उल्लेखनीय है कि शुभम पूर्व ब्लॉक प्रमुख स्वर्गीय फकीर सिंह बिष्ट के पौत्र हैं। उनके अध्यक्ष बनने पर नगर पालिकाध्यक्ष सचिन नेगी, जिला महासचिव सुनील महरा, एनएसयूआई के पूर्व प्रदेश सचिव सूरज पांडे, कांग्रेस नगर अध्यक्ष अनुपम कबडवाल, पंकज बिष्ट व संजय कुमार ने उन्हें बधाई दी। वहीं शुभम ने अध्यक्ष बनने पर शीर्ष नेतृत्व और आभार जताया है। उन्होंने कहा कि नैनीताल विधानसभा के अन्तर्गत सभी छात्रांे की हर तरह की समस्याओं को दूर किया जाएगा, और सरकार के झूठे वादों को लेकर जनता के बीच जाकर पर्दाफाश किया जाएगा। उन्होंने विश्वास जताया कि 2022 में सभी युवा एक होकर कांग्रेस के लिऐ मेहनत करेंगे। आज के अन्य ताजा ‘नवीन समाचार’ पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें। 

यह भी पढ़ें : भाजपा की ‘ट्रंप चाल’ पर ‘काउंटर’ और ‘शह-मात’ के बाद कांग्रेस में ‘मेंढकों के तुलने’ का सा इंतजार…

डॉ. नवीन जोशी @ नवीन समाचार, नैनीताल, 10 जुलाई 2021। कांग्रेस भाजपा पर मुख्यमंत्री बदलने के आरोप ही लगाते रह गई और भाजपा ने मुख्यमंत्री के साथ प्रदेश से केंद्र में मंत्री को भी बदल डाला। लेकिन आरोप लगाने वाली कांग्रेस के ‘जुलाहों में बिन सूत-कपास हो रही लट्ठम लट्ठ’ देखिए कि नेता प्रतिपक्ष डॉ. इंदिरा हृदयेश की असामयिक मृत्यु के करीब चार सप्ताह बाद भी कांग्रेस अपना नेता प्रतिपक्ष नहीं घोषित कर पा रही है। उल्टे उन्होंने पार्टी अध्यक्ष का पद भी फंसा दिया है। चुनाव संचालन समिति का अध्यक्ष बनाना भी बाकी ही है। जो हल्की-फुल्की तैयारी मंथन किया भी गया था, वह भी भाजपा ने अपनी ‘दोहरी’ चाल से कांग्रेसिसों द्वारा इन पदों के लिए रेत पर बनाए महलों पर भी पानी फेर दिया है।

जी हां, कांग्रेस पार्टी प्रदेश की नेता प्रतिपक्ष डॉ. इंदिरा हृदयेश के गत 13 जून को हुए आकस्मिक निधन के बाद नया नेता प्रतिपक्ष चुनने निकली थी, लेकिन इस फेर में पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष पद को भी ठिकाने पर तुल गए। खुद चुनाव संचालन समिति के अध्यक्ष बनने के साथ ही अध्यक्ष पद भी हथियाने की कोशिश में पूर्व सीएम हरीश रावत की ओर से पहले प्रदेश अध्यक्ष प्रीतम सिंह को नेता प्रतिपक्ष बनाने की ‘ब्लाइंड चाल’ चली गई। इसलिए कि नेता प्रतिपक्ष तो अगले 6-7 माह ही रहेगा, इस बहाने अपने आदमी को अगले, पार्टी की अनिश्चित परंपरा के तहत अनंत काल के लिए प्रदेश अध्यक्ष बना लिया जाए। इस कड़ी में कहा गया कि गढ़वाल के किसी ब्राह्मण या कुमाऊं के किसी क्षत्रिय को प्रदेश अध्यक्ष बनाया जाएगा। दूसरी ओर से तराई के किसी नेता को प्रदेश अध्यक्ष बनाने का काउंटर मारा गया, लेकिन जब भाजपा की ओर से पहले पुष्कर धामी के रूप में ‘ट्रंप चाल’ चली तो फिर दो दिन बाद ही अजय भट्ट को केंद्र में मंत्री बनाते हुए ‘काउंटर’ चाल चल दी है।

ऐसे अब कांग्रेस के लिए अपने पत्ते ‘शो’ करने और भी मुश्किल होने तय हैं। क्योंकि जिस तरह कांग्रेस में पूर्व सीएम व अब वरिष्ठ के साथ बुजुर्ग होते जा रहे हरीश रावत गोटियां अपने हिसाब से सेट करने की कोशिश कर रहे थे, लेकिन भाजपा ने उन्हें कोई जिम्मेदारी मिलने से पहले ही युवा मुख्यमंत्री उनकी जाति व क्षेत्र से तो उनके मुकाबले युवा अजय भट्ट को केंद्रीय मंत्री उनके घर रानीखेत से बनाकर उन्हें उनके घर में ही ‘चेक’ देने का दांव चल दिया है। बताया जा रहा है कि ऐसे में कांग्रेस पार्टी भी बुजुर्ग हरीश की जगह युवा नेतृत्व को आगे लाने पर सोचने लगी है। ऐसे में कांग्रेसी भले पंजाब व दूसरे प्रांतों में केंद्रीय नेतृत्व के व्यस्त होने का हवाला देते हुए और कुछ दिन लगने की बात कह और सत्तारूढ़ दल पर भोथरे हमले कर अपनी झेंप मिटाने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन उन्हें पता है कि कमजोर हो चले कांग्रेस नेतृत्व के लिए उत्तराखंड के लिए कोई सटीक निर्णय कर पाना मेंढकों को किसी तुला पर तोलने जैसा मुश्किल होने वाला है। आज के अन्य ताजा ‘नवीन समाचार’ पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें। 

यह भी पढ़ें : सूत न कपास, कांग्रेसी जुलाहों में लट्ठम लट्ठ, नेता प्रतिपक्ष चुन नहीं पाए-पार्टी अध्यक्ष की कुर्सी भी फंसा दी..

डॉ. नवीन जोशी @ नवीन समाचार, नैनीताल, 29 जून 2021। सत्तारूढ़ दल में रूठना-मनाना, मान-मनौव्वल चलता है, पर शायद वह कांग्रेस पार्टी ही होगी जिसमें विपक्ष में रहते हुए भी और राज्य बनने के बाद से पूरे 20-21 वर्षों में सर्वाधिक गुटबाजी रही है। कभी एनडी तिवारी-हरीश रावत, तो कभी विजय बहुगुणा-हरीश रावत, कभी किशोर उपाध्याय-हरीश रावत तो अभी हाल तक डॉ. इंदिरा हृदयेश-हरीश रावत, हमेशा कांग्रेसी छत्रप व खासकर हरीश रावत हमेशा किसी न किसी से तलवारें भांजते ही नजर आए हैं। इधर बीते चार-साढ़े चार वर्षों में भी कांग्रेसी ‘जुलाहे बिना सूत-कपास के आपस में लट्ठम-लट्ठम’ होती ही रही है। शायद ही कोई दिन हो जब किसी कांग्रेसी छत्रप ने अपनी तलवार म्यान में डाली हो। इन दिनों तो हद ही हो गई है। सत्तारूढ़ दल जहां रामनगर में पिछले तीन दिनों से आगामी 2022 के चुनाव के लिए अपनी तैयारियों को अंतिम रूप देने के लिए गहन मंथन में जुटा हुआ है, और किसी तरह के विभेद की खबरें नहीं आ रही हैं, बल्कि पूर्व में खुद को ‘अभिमन्यु’ बताने वाले पूर्व सीएम त्रिवेंद्र सिंह रावत को खुद को भीष्म पितामह की तरह थका बताते हुए युवा नेतृत्व को सत्ता सोंपने पर सकारात्मक प्रतिक्रिया देते देखे गए हैं, वहीं दूसरी ओर एक पखवाड़े पूर्व ही अपनी नेता प्रतिपक्ष डॉ. इंदिरा हृदयेश को खोने के कारण कांग्रेस पार्टी शोक भी भूल, इन्हीं तीन दिनों में नया नेता प्रतिपक्ष ढूंढने निकली कांग्रेस नेता प्रतिपक्ष तो ढूंढ नहीं पाई है, उल्टे उसने अपने पार्टी अध्यक्ष प्रीतम सिंह की कुर्सी भी हिला दी है।

कांग्रेस के अंदरूनी सूत्रों की मानें तो बमुश्किल दहाई विधायकों की बची-खुची यह पार्टी अपने पैर खुद कुल्हाड़ी पर दे मारने को उतारू नजर आ रही है। पार्टी क्षत्रप हरीश रावत ने नेता प्रतिपक्ष की जगह पार्टी अध्यक्ष को बदलने की मांग कर डाली है। बताया जा रहा है कि रावत की कोशिश प्रदेश अध्यक्ष पद पर अपने किसी व्यक्ति को अध्यक्ष बनाने की है। इसके साथ रावत अपने मूल संसदीय क्षेत्र अल्मोड़ा-पिथौरागढ़ में हमेशा उनकी हार का कारण बनने वाले खुद के ‘ब्रह्मद्रोही’ होने के दाग को धोने की कोशिश में किसी ब्राह्मण को प्रदेश अध्यक्ष बनाना चाहते हैं। ऐसे में राज्य आंदोलन के दौर में राज्य विरोधी घोषित हो चुके रावत को राज्य समर्थक की भूमिका में लाने वाले किशोर उपाध्याय फिर प्रदेश अध्यक्ष के चेहरे के रूप में नजर आ रहे हैं। हालांकि भूलना न होगा कि हरीश रावत के मुख्य मंत्री रहते भी किशोर प्रदेश अध्यक्ष थे, और तभी उनके रिश्तों में खटाई पड़ गई थी। ऐसे में मंगलवार को पार्टी अध्यक्ष प्रीतम सिंह को हटाकर उन्हें नेता प्रतिपक्ष बनाने और किशोर अथवा गणेश गोदियाल को प्रदेश अध्यक्ष बनाने की खबरें भी मीडिया के एक वर्ग में आने लगी थीं। लेकिन इस स्थिति में भी पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष और नेता प्रतिपक्ष दोनों गढ़वाल मंडल से हो जा रहे हैं। ऐसे में क्षेत्रीय संतुलन को साधने के तौर पर इससे पहले भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष के मैदानी क्षेत्र से होने के तोड़ के तौर पर तिलक राज बेहड़ को प्रदेश अध्यक्ष बनाने और गोविंद सिंह कुंजवाल व करण महरा को नेता प्रतिपक्ष बनाने की खबरें भी आ चुकी हैं। बहरहाल, यह कहना भी गलत न होगा कि यदि कांग्रेस अभी अपने प्रदेश अध्यक्ष को बदलती है तो वह सत्तारूढ़ दल से मुख्यमंत्री बदलने का कारण पूछने या इल्जाम लगाने का मनोवैज्ञानिक तौर पर अधिकार खो देगी। आज के अन्य ताजा ‘नवीन समाचार’ पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें। 

यह भी पढ़ें : तिरछाखेत-नगारीगांव सड़क के विरोध में उतरे कांग्रेसी…

-बाहरी व्यक्ति को लाभ पहुंचाने के लिए वन भूमि में बिना अनुमति सड़क काटने का आरोप लगाते हुए मंडलायुक्त से मिले
डॉ. नवीन जोशी @ नवीन समाचार, नैनीताल, 16 जून 2021। जनपद मुख्यालय के निकट तिरछाखेत-नगारी गांव में जंगलात की जमीन में बिना अनुमति के मोटर रोड काटने के मामले में कांग्रेस के वरिष्ठ नेता हेम चंद्र आर्य व पूर्व विधायक सरिता आर्या के नेतृत्व में बुधवार को ग्राम तिरछाखेत नगारी गांव के ग्रामीण मंडलायुक्त अरविंद ह्यांकी से मिले और ज्ञापन सौंपा। इस दौरान वरिष्ठ कांग्रेसी नेता हेम ने आरोप लगाया कि बाहरी व्यक्ति ने गांव में इंस्टीट्यूट बनाने के लिए लगभग 400 नाली जमीन का एग्रीमेंट किया है और उसमें से 22 नाली जमीन की रजिस्ट्री करवा ली है। जिसमें तेजी से काम चल रहा है। लगभग 350 नाली जमीन स्व. पूरन सुयाल आदि ग्रामीणों की है। उन्होंने बताया इस परिवार ने पिछले कई वर्षों से रोड काटने को लेकर प्रशासन और जंगलात के चक्कर काटे लेकिन 40 वर्षों से यह रोड नहीं बन पाई लेकिन गांव में इंस्टीट्यूट बनाने आए बाहरी लोगों ने अवैध तरीके से रातों-रात जमीन काटकर रोड बना दी है जबकि जमीन जंगलात की है। उन्होंने मंडलायुक्त ह्यांकी से जांच कराकर तत्काल कार्रवाई की मांग की। उन्होंने कहा कि अगर तत्काल कार्रवाई नहीं हुई तो कांग्रेसी आंदोलन शुरू करने को बाध्य होंगे। मंडलायुक्त से मिलने वालों में पीसीसी सदस्य पुष्कर मेहरा, जेके शर्मा, रईस भाई, मनमोहन कनवाल, खष्टी बिष्ट, ललित मोहन आर्य, मोहन कांडपाल, सतीश आर्य, कौशल साह व धीरज आर्य आदि शामिल रहे।

नाव चालकों को मास्क व सेनिटाइजर बांटे
नैनीताल। कांग्रेस नेता हेम आर्य ने बुधवार को मुख्यालन में चार दर्जन से अधिक नाव चालकों को मास्क और सेनेनटाइजर वितरित किए। उन्होंने कहा कि वह पूरे कोरोना काल में इसी तरह जरूरतमंदों की हरसंभव मदद कर रहे हैं। आज के अन्य ताजा ‘नवीन समाचार’ पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें। 

यह भी पढ़ें : डीजल-पेट्रोल के बढ़ते दामों के बहाने जनता से मोदी सरकार को बदलने की मांग….

-राष्ट्रव्यापी प्रदर्शन में शामिल हुए नैनीताल के कांग्रेसी भी…

तल्लीताल पेट्रोल पंप पर केंद्र की मोदी सरकार के विरोधी तख्तियों के साथ प्रदर्शन करते कांग्रेस कार्यकर्ता।

डॉ. नवीन जोशी @ नवीन समाचार, नैनीताल, 11 जून 2021। कांग्रेस पार्टी के केंद्रीय हाइकमान के निर्देशों पर नगर के कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने भी शुक्रवार को नगर के तल्लीताल स्थित पेट्रोल पंप पर सांकेतिक प्रदर्शन किया और देश में डीजल-पेट्रोल के दामों में बेतहाशा वृद्धि होने का आरोप लगाया। इस दौरान महिला कांग्रेस की प्रदेश अध्यक्ष व पूर्व विधायक सरिता आर्या व नगर अध्यक्ष अनुपम कबडवाल सहित अन्य कांग्रेसी हाथों में तख्तियां लेकर डीजल-पेट्रोल के बढ़ते दामों के बहाने केंद्र की मोदी सरकार पर निशाना साधते और जनता से मोदी सरकार को बदलने की मांग करते नजर आए। प्रदर्शन में पूर्व दर्जा राज्य मंत्री रईश भाई, राजेंद्र व्यास, पूर्व सभासद जोगेंद्र शर्मा आदि भी शामिल रहे। 

यह भी पढ़ें : कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने स्वास्थ्य सुविधाओं में विस्तार व आपदा का मुआवजा देने की मांग

नवीन समाचार, नैनीताल, 13 मई 2021। महिला प्रदेश कांग्रेस की अध्यक्ष व पूर्व विधायक सरिता आर्य के नेतृत्व में कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने बृहस्पतिवार को जनपद के ग्रामीण क्षेत्रों में कोविड केयर सेंटर खोले जाने की मांग को लेकर संयुक्त मजिस्ट्रेट प्रतीक जैन के माध्यम से मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत व प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को ज्ञापन भेजा।
ज्ञापन में कहा गया कि जनपद में कोविड की दूसरी लहर को देखते हुए सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र खैरना गरमपानी एवं भवाली में स्वास्थ्य सुविधाओं का विस्तार किए जाने, यहां फिजीशियन, सर्जन एवं स्त्री रोग विशेषज्ञ की तैनाती किए जाने एवं बीडी पांडे जिला चिकित्सालय में सीटी स्कैन मशीन की सुविधा वांछनीय है। उन्होंने लगातार हो रही बारिश व ओलावृष्टि से पर्वतीय क्षेत्रों के काश्तकारों को भी पहुंचे नुकसान का पीड़ित काश्तकारों को उचित मुआवजा देने की भी मांग की। ज्ञापन देने वालों में खष्टी बिष्ट, मनमोहन कनवाल व भवाली पूर्व पालिकाध्यक्ष दयाल आर्य आदि मौजूद रहे।

यह भी पढ़ें : फोन पर महिला से अश्लील बातें कर होटल में बुलाने वाला कांग्रेस नेता गिरफ्तार

-महिला ने पॉलिसी के लिए की थी कॉल, आरोपित ने की होटल आने की पेशकश
नवीन समाचार, देहरादून, 22 मार्च 2021। पॉलिसी के लिए फोन करने वाली महिला से फोन पर अश्लील बातें कर उसे होटल बुलाने की ख्वाहिश करने वाले कांग्रेस नेता आजाद अली को कोतवाली पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज कर कांग्रेस नेता को जेल भेज दिया गया है।
जानकारी के अनुसार आरोपित कांग्रेस नेता आजाद अली भुड्डी गांव में रहने वाला है, और पूर्व में सहसपुर विधानसभा क्षेत्र से कांग्रेस का प्रदेश सचिव रह चुका हैं। कुछ समय पहले एक निजी कंपनी में कार्यरत राजपुर रोड निवासी महिला ने उन्हें पॉलिसी के लिए फोन किया। आरोप है कि आरोपित कांग्रेस नेता आजाद अली ने फोन करने वाली महिला से फोन पर ही अश्लील बातें करनी शुरू कर दी और उसे होटल में आने की पेशकश कर दी। परेशान महिला ने आरोपित के खिलाफ कोतवाली पुलिस को शिकायत दी। शिकायत के बाद मुकदमा दर्ज कर कोतवाली पुलिस ने आरोपित को सोमवार को गिरफ्तार कर लिया। देर शाम आरोपित को कोर्ट में पेश किया गया। शहर कोतवाल शिशुपाल नेगी ने जानकारी देते हुए बताया कि व्हाट्सएप कॉल पर यह बातचीत की गई थी।

कांग्रेस ने किया पार्टी से निष्कासित

महिला की ओर से लगाए गए आरोपों का संज्ञान लेते हुए प्रदेश कांग्रेस कमेटी अध्यक्ष प्रीतम सिंह ने आजाद अली को पार्टी से निष्कासित कर दिया है। आजाद अली कांग्रेस में पूर्व प्रदेश सचिव व विशेष आमंत्रित सदस्य थे। प्रदेश कांग्रेस महामंत्री संगठन विजय सारस्वत ने बताया कि आजाद अली पर लगे गंभीर आरोप और पुलिस की कार्रवाई को देखते हुए पार्टी नेतृत्व ने स्वत: संज्ञान लिया है।

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नवीन समाचार, नैनीताल, 13 जनवरी 2020। उत्तराखंड में अगले वर्ष 2022 में होने वाले विधानसभा चुनाव में कांग्रेस का चेहरा कौन होगा, इस पर बहस छिड़ गई है। पूर्व मुख्यमंत्री व कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव हरीश रावत ने इस बहस को चिंगारी दी है। रावत ने कांग्रेस पार्टी की ऐसी नब्ज को छुवा है जिससे बचना कांग्रेस के लिए नामुमकिन साबित हो सकता है। यह मुद्दा कांग्रेस के लिए ‘न उगलते-न निगलते’ बनता साबित हो सकता है। क्योंकि कांग्रेस पिछले 2017 के विधानसभा चुनाव में इसी मुद्दे पर तत्कालीन विपक्षी भाजपा को कोसती रही है। इसलिए रावत के बयान के बाद कांग्रेस के लिए मुख्यमंत्री पद का चेहरा घोषित करना मजबूरी भी साबित हो सकता है, क्योंकि ऐसा न करने पर सत्तारूढ़ भाजपा उसे लगातार मुंह चिढ़ाएगी, वहीं कांग्रेस पार्टी का उत्तराखंड में इतिहास रहा है कि उसने एक बार को छोड़कर कभी चेहरा घोषित नहीं किया, और जब एक बार किया तो पार्टी बमुश्किल दहाई का आंकड़ा छू पाई। वह भी हरीश रावत की अगुवाई में, जो खुद मुख्यमंत्री रहते दो सीटों से चुनाव हारने का रिकॉर्ड ही बना गए।
2017 के विधानसभा चुनाव से पहले 2016 में सियासी संग्राम और कांग्रेस में बगावत के बाद जिस तरह से भाजपा से कांग्रेस की आरपार की लड़ाई छिड़ गई थी, उसमें हरीश रावत ने ही पूरी कांग्रेस का नेतृत्व किया था। कांग्रेस हाईकमान ने पूरी लड़ाई हरीश रावत के जिम्मे छोड़ दी थी। चुनाव में भले ही कांग्रेस हारी, लेकिन उससे पहले बर्खास्त हुई सरकार की जिस तरह से हरीश रावत ने बहाली कराई, उसमें स्वाभाविक तौर पर 2017 का चुनाव उनके नेतृत्व में ही लड़ा जाना था। इस चुनाव में भाजपा ने सीएम प्रत्याशी घोषित नहीं किया था और इसे लेकर कांग्रेस भाजपा पर खासी हमलावर भी रही। 2017 के इस चुनाव से इतर राज्य बनने के बाद हुए सभी चुनाव में कांग्रहेस चेहरे के मामले में खुलकर सामने नहीं आई। सबसे पहले, राज्य के पहले चुनाव की बात करें। 2002 में जब चुनाव हुए, तब हरीश रावत कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष थे, लेकिन पार्टी किसी एक नेता को आगे करते हुए चुनाव में जाती नहीं दिखी। यही वजह थी कि संगठन के लिए खासी मेहनत करने वाले रावत सत्ता में आने पर सीएम नहीं बन पाए और दिल्ली से एनडी तिवारी को देहरादून भेजकर हाईकमान ने उनकी ताजपोशी करा दी। इसके बाद 2007 और 2012 के चुनाव हुए, जिसमें कांग्रेस को एक चुनाव में हार और दूसरे में जीत मिली, लेकिन सीएम कैंडिडेट किसी में भी घोषित नहीं किया गया। कांग्रेस इन चुनावों में अपने क्षत्रपों हरीश रावत, विजय बहुगुणा, सतपाल महाराज, डॉ इंदिरा ह्रदयेश, हरक सिंह रावत की खींचतान से ही सहमी रही।
सीएम कैंडिडेट पर कांग्रेस की उलझन को इस रूप में समझा जा सकता है कि जब 2012 में पार्टी सरकार में आई, तो अप्रत्याशित तौर पर विजय बहुगुणा सीएम बन गए। हालांकि 2013 की आपदा के बाद पार्टी ने उन्हें हटाकर हरीश रावत को सीएम की गद्दी पर बैठा दिया। अब हरीश रावत ने जिस वक्त चेहरा घोषित करने की राय सामने रखी है, उस वक्त भी कांग्रेस के हालात कुछ बदले नहीं हैं। कांग्रेस में हरीश रावत की अगुवाई में एक मजबूत धड़ा मौजूद है तो दूसरी ओर प्रदेश अध्यक्ष प्रीतम सिंह और नेता प्रतिपक्ष डॉ इंदिरा की जुगलबंदी है। दोनों धड़ों की एक दूसरे को हाशिये पर धकेलने की कोशिश है। ऐसे में हाईकमान पर चेहरा घोषित करने की मांग का कितना प्रभाव पड़ता है, ये देखने वाली बात है। वैसे, कांग्रेस के प्रदेश उपाध्यक्ष सूर्यकांत धस्माना का कहना है कि पार्टी का ध्यान वर्तमान में संगठन की मजबूती का है। चुनाव किस तरह से लड़ा जाना है, यह हाईकमान तय करेगा।

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नवीन समाचार, नैनीताल, 06 जनवरी 2020। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष बंशीधर भगत के द्वारा उत्तराखंड की वरिष्ठ नेत्री व नेता प्रतिपक्ष डॉ. इंदिरा हृदयेश पर की गई अमर्यादित और अभद्र भाषा के प्रयोग बुधवार को युकां के बाद नगर कांग्रेस कमेटी नैनीताल सहित राज्य में अनेक स्थानों पर कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने भगत का पुतला दहन किया। इस दौरान भगत को भाजपा पर ‘बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ’ को लेकर तंज कसते हुए प्रदेश अध्यक्ष पद से बर्खास्त करने तक की मांग भी उठाई गई। उधर भगत ने एक वीडियो संदेश भेजकर ‘दिल की गहराइयों से’ माफी मांगी। अपने संदेश में उन्होंने कहा कि उन्होंने एक अमर्यादित शब्द सामान्य तरीके से बोला था। उन्हें पता चला है कि उनके एक शब्द से नेता प्रतिपक्ष डा. इंदिरा हृदयेश आहत हुई हैं। इंदिरा हृदयेश वरिष्ठ नेत्री हैं। वह व उनकी पार्टी हमेशा नारियों का सम्मान करते हैं। उनका किसी को आहत करने का इरादा बिल्कुल नहीं था। इसके लिए वह दिल की गहराइयों से खेद प्रकट करते हुए अपने शब्दों को वापस लेते हैं। 

देखें भगत ने क्या कहा:

इधर मुख्यालय में कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने नगर अध्यक्ष अनुपम कबडवाल के नेतृत्व में गांधी चौक में एकत्र कर भगत का पुतला दहन किया। इस दौरान महिला कांग्रेस की प्रदेश अध्यक्ष सरिता आर्या ने कहा कि भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष द्वारा इस तरह का भाषा का प्रयोग करना निंदनीय व देश की महिलाओं का अपमान है। इससे पूरा समाज शर्मसार है। इसके लिए उन्हें माफी मांगनी चाहिए। नगर कांग्रेस अध्यक्ष कबडवाल ने कहा कि डा. हृदयेश के प्रति इस तरह की भाषा का प्रयोग करना नारी शक्ति का अपमान है। उन्होंने ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ का नारा देने वाली पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा से बंशीधर भगत को तुरंत बर्खास्त करने की मांग की। कार्यक्रम में मुख्य रूप से प्रदेश सचिव खष्टी बिष्ट, डा. भावना भट्ट, मोहन कांडपाल, नगर महामंत्री कैलाश अधिकारी, मनोज साह, जिला अध्यक्ष विधि प्रकोष्ठ कमलेश तिवारी, पप्पू कर्नाटक, सुखदीप आनंद, सभासद पुष्कर बोरा, नगर यूथ कांग्रेस अध्यक्ष संजय कुमार, नरेश दुर्गापाल, कमल कुमार, भय्यू सती, यामीन, ललित कुमार व नरेंद्र बगडवाल सहित कई कांग्रेसी उपस्थित रहे।

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नवीन समाचार, नैनीताल, 27 अक्टूबर 2020। जिला मंडल मुख्यालय में एक और अल्पसंख्यक वर्ग से आने वाले पदाधिकारी ने कांग्रेस पार्टी से ‘हाथ’ छुड़ा लिया है। मंगलवार को युवा कांग्रेस के विधानसभा महासचिव मोहम्मद जुनैद ने पद के साथ ही पार्टी से भी इस्तीफा दे दिया। उल्लेखनीय है कि गत दिवस महिला कांग्रेस की प्रदेश उपाध्यक्ष व सभासद गजाला कमाल ने कांग्रेस पार्टी को छोड़कर भारतीय जनता पार्टी की सदस्यता ग्रहण कर ली थी। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि क्या नगर में अल्पसंख्यक वर्ग का कांग्रेस पार्टी से मोहभंग हो रहा है?
इस्तीफा देते हुए मोहम्मद जुनैद ने कहा कि वह 7 वर्षों से पार्टी के सक्रिय कार्यकर्ता और 2017 में अल्पसंख्यक प्रकोष्ठ के नगर अध्यक्ष के पद पर रहे और वर्तमान में युवा कांग्रेस के विधानसभा महासचिव पद पर थे। लेकिन पार्टी में कार्यकर्ताओं की अनदेखी को देखते हुए अपने पद से व कांग्रेस पार्टी से इस्तीफा दे रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि यदि ऐसा ही होता रहा तो आने वाले समय में और भी बड़ी संख्या में कार्यकर्ता कांग्रेस पार्टी छोड़ देंगे।

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नवीन समाचार, नैनीताल, 23 अक्टूबर 2020। नगर कांग्रेस अध्यक्ष अनुपम कबडवाल ने अपनी तैनाती के करीब एक वर्ष के बाद अपनी कार्यकारिणी का गठन किया है। नई कार्यकारिणी ने नए चेहरों को स्थान दिया गया है। श्री कबडवाल ने बताया कि दिनेश कर्नाटक को वरिष्ठ उपाध्यक्ष, प्रेम कुमार शर्मा, भुवन बिष्ट, विमल चौधरी, जितेंद्र साह, पूर्व सभासद बच्ची कुमार व मौजूदा सभासद पुष्कर बोरा को उपाध्यक्ष, पूर्व सभासद कैलाश अधिकारी व पूर्व व्यापार मंडल तल्लीताल के सचिव मनोज साह को महामंत्री, कैलाश मिश्रा को मीडिया प्रभारी, छात्र संघ के पूर्व उप सचिव गौरव कुमार को संगठन सचिव व सोशल मीडिया प्रमुख, राशिद आरिफ सिद्दीकी, कैलाश बिष्ट व घोड़ा चालक सेवा समिति के पूर्व अध्यक्ष लियाकत अली को सचिव, छात्र संघ के पूर्व महासचिव अंकित चंद्रा, अजय बिष्ट, अविनाश कुमार व नफीस अहमद को सचिव, ललित चन्याल व बंटू आर्या को संयुक्त सचिव तथा सुखदीप सिंह आनंद को कोषाध्यक्ष नियुक्त किया गया है। पार्टी के प्रदेशाध्यक्ष प्रीतम सिंह, पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत, नेता प्रतिपक्ष डा. इंदिरा हृदयेश, पूर्व विधायक सरिता आर्य, जिलाध्यक्ष सतीश नैनवाल, पूर्व सांसद डा. महेंद्र पाल व नगर पालिका अध्यक्ष सचिन नेगी ने नवनियुक्त पदाधिकारियों को बधाई दी है।

यह भी पढ़ें : कांग्रेस छोड़कर समर्थकों सहित कल भाजपा में शामिल होंगी 14 वर्ष से कांग्रेस से जुड़ी कांग्रेस की प्रदेश पदाधिकारी व नगर पालिका सभासद

नवीन समाचार, नैनीताल, 13 अक्टूबर 2020। बुधवार को 14 वर्षों से कांग्रेस पार्टी से जुड़ी, महिला कांग्रेस की प्रदेश उपाध्यक्ष व नगर पालिका सभासद गजाला कमाल कांग्रेस पार्टी को छोड़कर भारतीय जनता पार्टी की सदस्यता लेने जा रही हैं। बुधवार को वह भाजपा के जिला अध्यक्ष प्रदीप बिष्ट के समक्ष अपने करीब 50 समर्थक परिवार प्रमुखों के साथ भाजपा की सदस्यता ग्रहण करेंगी। उल्लेखनीय है कि आपका प्रिय एवं भरोसेमंद समाचार पोर्टल ‘नवीन समाचार’ एक वर्ष पूर्व ही इसकी संभावना व्यक्त कर चुका था। श्रीमती कमाल ने यह बात स्वीकार की है।
उल्लेखनीय है कि गजाला वर्ष 2006 में यूथ कांग्रेस की नगर उपाध्यक्ष के रूप में कांग्रेस से जुड़ी थीं। इसके बाद वह महिला कांग्रेस और कांग्रेस अल्पसंख्यक प्रकोष्ठ की नगर अध्यक्ष, महिला कांग्रेस की जिला महामंत्री रहीं, तथा वर्तमान में प्रदेश उपाध्यक्ष महिला कांग्रेस थीं। यह भी उल्लेखनीय है कि गजाला महिला कांग्रेस की प्रदेश अध्यक्ष सरिता आर्य की भी काफी करीबी रही हैं, जो नैनीताल से ही हैं। इस प्रकार गजाला के पार्टी छोड़ने से सीधे तौर पर श्रीमती आर्य से भी सवाल पूछे जाएंगे। उन्होंने कहा कि उन्होंने कांग्रेस पार्टी में रहते हुए पूरी निष्ठा से कार्य किया है। लेकिन जब उन्हें पार्टी की जरूरत पड़ी तब उन्हें साथ नहीं मिला। उन्होंने कहा कि कोविद की वजह से अभी सीमित लोगों को कार्यक्रम में बुलाया गया है। आगे अल्पसंख्यकों को भाजपा से जोड़ेंगी और अल्पसंख्यकों के लिए काम करेंगी।

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पुष्कर सिंह मेहरा

नवीन समाचार, देहरादून, 12 सितंबर 2020। तीन दशक से कांग्रेस पार्टी में जिला व प्रदेश स्तर के पदों पर रहे वरिष्ठ नेता पुष्कर मेहरा ने श्राद्ध पक्ष में कांग्रेस पार्टी को तिलाजलि’ दे दी है। अब नवरात्र के ब्रतों के बाद वे अगले कदम का ऐलान करेंगे। ऐसा उन्होंने स्वयं अपनी फेसबुक पोस्ट में लिखा है।
देखें पुष्कर मेहरा की पोस्ट :

पुष्कर ने लिखा है: अलविदा कांग्रेस, श्राद्धपक्ष है, इससे बेहतर समय ‘तिलांजलि’ देने का शायद ही कोई दूसरा हो, इसलिए आज मैं कांग्रेस के साथ व्यतीत अपने जीवन के समयकाल को पूर्णरूपेण तिलांजली दे रहा हूं। कांग्रेस के साथ व्यतीत तीन दशकों का बेहद लंबा समय बहुत सारे खट्टे-मीठे अनुभवों का रहा। जहां इतना समय बीता हो वहां छोडने का दुःख जरूर होता है, क्योंकि पीछे छूटती हैं पार्टी की सुदृढ़ता के लिए किये गये संघर्ष की यादें, स्नेही साथियों का प्यार और सम्मानं पर जीवन यात्रा में ऐसे ‘निर्णायक’ क्षण भी आते हैं जब न चाहते हुए भी बेहद महत्वपूर्ण निर्णय लेना पडता है, क्योंकि ‘गतिमयता’ को दीर्घकालिक विराम देना शेष जीवन को जड बना देता है। आज 11 सितम्बर है। आज से मैं स्वयं को कांग्रेस से पूर्णतया मुक्त कर रहा हूं। स्नेही साथियो मैं अपना अगला कदम शारदीय नवरात्र के व्रतों और यज्ञ के समापन के बाद और उत्तराखंड राज्य निर्माण की 20वीं वर्षगांठ 9 नवंबर 2020 से पूर्व उठाऊंगा कि भविष्य की राजनीति के लिए मेरा बैनर क्या रहेगा और आज से उस दिन के बीच के समय काल में मैं राजनैतिक विश्राम की अवस्था में रहूंगा। हां सोशल मीडिया में आप सबसे केवल सामाजिक विषयों के साथ निरंतर जुड़ा रहूंगा। कांग्रेस के साथ व्यतीत अपने इस जीवनकाल में जाने अनजाने में मेरे से किसी की प्रतिष्ठा को आघात पहुंचा हो उसके लिए मैं क्षमा प्रार्थी हूँ।

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नवीन समाचार, नैनीताल, 26 जून 2020। पिछले विधानसभा चुनाव में आम आदमी पार्टी की नगर इकाई के आधा दर्जन से अधिक लोगों ने अपनी पार्टी छोड़ कांग्रेस पार्टी की घेराबंदी के बाद ‘हाथ’ थाम लिया था। लेकिन शुक्रवार को इन सभी लोगों ने कांग्रेस पार्टी को अलविदा कह दिया है। आम आदमी पार्टी में नगर अध्यक्ष सहित अन्य जिम्मेदारियों पर रहे देवेंद्र लाल ने शुक्रवार को कांग्रेस पार्टी के नगर अध्यक्ष को लिखे एवं प्रेस को जारी किये गये पत्र में कहा है कि वे आम आदमी पार्टी छोड़कर कांग्रेस पार्टी में शामिल हुए थे, लेकिन तब से उन्हें कांग्रेस पार्टी के किसी भी पदाधिकारी या वरिष्ठ सदस्य ने किसी भी स्थानीय बैठक या कार्यक्रम की सूचना भी नहीं दी। ऐसे में वे कांग्रेस पार्टी में अपनी उपेक्षा से क्षुब्ध हैं और कांग्रेस पार्टी के कार्यकर्ताओं की उपेक्षा एवं कांग्रेस पार्टी के राजनीतिक भविष्य व उसकी कार्यशैली को दृष्टि में रखते हुए पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से त्याग पत्र देते हैं। त्यागपत्र देने वालों में देवेंद्र लाल के साथ ही महेश आर्य, आरसी पंत, विपिन सैनी, श्रीकांत घिल्डियाल, प्रकाश पांडे, बीपी लोहनी व डी चौधरी शामिल हैं। आगे चर्चा है कि ये सभी लोग वापस आम आदमी पार्टी में आ सकते हैं। आम आदमी पार्टी के विधान सभा प्रभारी प्रदीप दुम्का ने कहा कि अगले तीन-चार दिनों में ही इन सभी लोगों की भव्य तरीके से पार्टी में ‘घर वापसी’ करवाई जाएगी। तब पार्टी की गतिविधियां मंद होने की वजह से वे गए थे। उन्होंने कहा कि सुबह का भूला शाम को घर आता है तो उसे भूला नहीं कहते।

यह भी पढ़ें : गैरसेंण में पहले दिन ही बुझ गई कांग्रेस की हल्द्वानी में जली ‘लालटेन’ !

नवीन समाचार, गैरसेंण, 4 मार्च 2020। हल्द्वानी में जली कांग्रेस की लालटेन गैरसेंण पहुंचते बुझती नजर आ रही है। ऐसा इसलिए कि हल्द्वानी में लालटेन के साथ कांग्रेसी क्षत्रपों ने जो एकता के कसीदे पढ़े थे, वे तार-तार होते नजर आ रहे हैं। बजट सत्र से ठीक पहले कांग्रेस के आपसी झगड़े फिर सतह पर आ गये लगते हैं। भराड़ीसैंण में हुई कांग्रेस विधायक दल की बैठक में कांग्रेस के मात्र छह विधायक शामिल हुए जबकि धारचूला के कंाग्रेस विधायक हरीश धामी को बैठक में बुलाया ही नहीं गया।
सोमवार को भराड़ीसैंण में बजट सत्र से पहले कांग्रेस विधायक दल की बैठक होनी थी। धारचूला विधायक हरीश धामी यहां 12 बजे के आसपास पहुंच गये थे। धामी को विधायकों से पता चला कि बैठक दो बजे है। इसके बाद धामी अपने कमरे में चले गये। बाद में विधायकों से ही उन्हें जानकारी हुई कि बैठक का समय चार बजे कर दिया गया है। धामी बैठक में बुलावे का इंतजार करते रहे, लेकिन उन्हें बैठक की आधिकारिक जानकारी नेता प्रतिपक्ष की ओर से नहीं दी गयी। विधायकों के न पहुंच पाने के कारण बैठक का समय बदला गया था, लेकिन उसके बाद भी बैठक में नेता प्रतिपक्ष डा. इंदिरा हृदयेश के साथ पांच ही विधायक शामिल हुए। बैठक में कांग्रेस विधायक दल के उपनेता करन माहरा, गोविंद सिंह कुंजवाल, आदेश सिंह चौहान, राजकुमार, काजी निजामुद्दीन ही बैठक में रहे। बताया जा रहा है कि करन माहरा भी बैठक में थोड़ी देर रहे। सूत्रों का कहना है कि कांग्रेस के भीतर आपसी झगड़े लगातार बढ़ रहे हैं। पिछले दिनों हल्द्वानी में हुई लालटेन यात्रा के दौरान कांग्रेस नेताओं के बीच अच्छी कैमिस्ट्री दिखी थी। हरीश रावत ने इंदिरा हृदयेश व प्रीतम सिंह के साथ कंधे से कंधा मिलाकर हल्द्वानी की लालटेन यात्रा से सरकार के बाद कांग्रेस के कार्यकर्ता भी खुश थे कि तीनों नेताओं के बीच समय रहते सुलह हो गयी, लेकिन मात्र पांच दिन के भीतर कांग्रेसी एकता रेत के महल की तरह भरभरा कर गिर गयी। इंदिरा हृदयेश ने अपने गृहनगर में लालटेन यात्रा को सफल बनाने के लिए पूर्व सीएम हरीश रावत को इस आयोजन में शामिल कराने का प्रयास किया, ताकि उनके गृहनगर में लंबे समय बाद हो रहे कांग्रेस का कार्यक्रम सफल हो सके, लेकिन लालटेन यात्रा का श्रेय हरीश रावत ले उड़े। ऐसे में एक बार फिर कांग्रेस के भीतर तलवारें खिंचनी तय नजर आ रही हैं।

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कांग्रेस विधायक हरीश धामी

नवीन समाचार, देहरादून, 26 जनवरी 2020। धारचूला से कांग्रेस के दबंग कांग्रेस विधायक हरीश धामी ने शनिवार को कांग्रेस कार्यकारिणी की घोषणा होते ही प्रदेश सचिव पद की जिम्मेदारी से इस्तीफा देने का ऐलान कर दिया। धामी ने पूर्व में कांग्रेस पार्टी छोड़ निर्दलीय के तौर पर दम भरने की भी बात कही है। धामी ने इस ऐलान के साथ ही नेता प्रतिपक्ष इंदिरा हृदयेश और प्रदेश अध्यक्ष प्रीतम सिंह पर जमकर हल्ला बोला।
हरीश धामी की मानें तो एकमात्र विधायक वे ही हैं जिनको सचिव बनाया गया है, जबकि बाकी पूर्व विधायक और वर्तमान विधायकों को दूसरी बड़ी जिम्मेदारियां दी गई हैं। इसके अलावा उनका कहना है कि उत्तराखंड प्रदेश कार्यकारिणी की जो लिस्ट जारी की गई थी उसमें उनका नंबर 96 वां था। धामी ने पत्रकारों से बात करते हुए कहा कि विधानसभा में भी उनको हमेशा नीचा दिखाने की कोशिश की गई है। ऐसे हालात में वह प्रदेश सचिव पद से सोमवार को इस्तीफा दे देंगे। यह भी पढ़ें : उत्तराखंड कांग्रेस के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष के भाई धोखाधड़ी के मामले में गिरफ्तार, यह हैं आरोप….

नवीन समाचार, देहरादून, 19 जनवरी 2020। उत्तराखंड कांग्रेस के कद्दावर नेता और पूर्व प्रदेश अध्यक्ष किशोर उपाध्याय के छोटे भाई सचिन उपाध्याय को दून पुलिस ने 2 साल पुराने जालसाजी के मामले में गिरफ्तार कर लिया है। एसओ राजपुर अशोक राठोड ने बताया कि राजपुर थाने में भारतीय दंड संहिता की धारा धारा 420 467 468 471 504 120 के तहत दर्ज मुकदमा अपराध संख्या 24/17 के तहत जाँच चल रही थी। जून 2019 में मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने इस मामले में जांच के लिए एसआईटी का गठन भी किया था। इस मामले में आरोपित सचिन उपाध्याय पुत्र पीडी उपाध्याय निवासी एसएन विला ग्राम चालांग थाना राजपुर देहरादून के विरुद्ध पर्याप्त साक्ष्य मिलने के बाद न्यायालय से गैर जमानती वारंट प्राप्त किया गया था। इसी क्रम में गैर जमानती वारंट की तामील कर सचिन उपाध्याय को थाना राजपुर पुलिस ने गिरफ्तार किया है। आगे उन्हें न्यायालय में पेश कर जेल भेजा जा रहा है। सचिन पर आरोप है कि उन्होंने अपने बिजनेस पार्टनर के 50 फीसद शेयर जाली हस्ताक्षर करके अपनी पत्नी के नाम करा लिये हैं। साथ ही सचिन के भाई किशोर उपाध्याय की राजनीतिक हैसियत को देखते हुए शिकायतकर्ता ने अपनी जान को भी खतरा बताया है। 

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उल्लेखनीय है कि मुकेश जोशी नाम के व्यक्ति ने मुख्यमंत्री को शिकायती पत्र लिख कर आरोप लगाया था कि उसके पूर्व बिजनेस पाटर्नर सचिन ने ‘एसएम हॉस्पिटैलिटी प्राइवेट लिमिटेड’ नाम के संयुक्त उपक्रम में से उसके हिस्से के 50 फीसदी शेयर उसके जाली दस्तखत कर अपनी पत्नी के नाम कर दिए। इस पत्र के आधार पर मुख्यमंत्री रावत ने एसआईटी जांच के आदेश दिए हैं। जोशी ने सचिन पर ब्लैकमेलिंग करने का आरोप लगाते हुए उसके भाई किशोर की राजनीतिक हैसियत को देखते हुए अपनी जान का खतरा भी बताया है। अपनी शिकायत में जोशी ने खुद को निवेशक बताते हुए कहा कि वह वर्तमान में देहरादून के चालंग गांव में प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत दुर्बल आय वर्ग के लोगों के लिए 2180 फलैट बना रहा है। इस प्रकरण में जोशी ने मुख्यमंत्री से निष्पक्ष जांच की मांग की थी।

यह भी पढ़ें : उत्तराखंड कांग्रेस के लिए बड़ा नवीन समाचार: बदले जा सकते हैं प्रदेश अध्यक्ष व नेता प्रतिपक्ष

नवीन समाचार, नैनीताल, 5 नवंबर 2019। उत्तराखंड कांग्रेस के लिए बहुत बड़ा नवीन समाचार है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष प्रीतम सिंह व नेता प्रतिपक्ष इंदिरा हृदयेश को उनके पदों से हटाया जा सकता है। न्यूज एजेंसी आईएएन के अनुसार ‘उत्तराखंड में पार्टी का आधार खोने के प्रतिफल में कांग्रेस पार्टी अपने प्रदेश अध्यक्ष प्रीतम सिंह को किसी ब्राह्मण नेता से बदल सकती है। इसके साथ ही नेता प्रतिपक्ष इंदिरा हृदयेश को भी बदले जाने की योजना है।’

देखें आईएएनएस का ट्वीट :

इस आधार पर माना जा रहा है कि कांग्रेस पार्टी की त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव में ऐतिहासिक तौर पर हुई बुरी गत के बाद कांग्रेस हाईकमान राज्य के अपने दोनों नेताओं को बदलने जा रहा है। पंचायत चुनाव में पार्टी कई जिलों में जिला पंचायत अध्यक्ष पद के और विकास खंडों में ब्लॉक प्रमुख के दावेदार तक खड़े नहीं कर पाई। राज्य की भाजपा सरकार की तमाम खामियों के बावजूद राज्य कांग्रेस के नेता उन मुद्दों को उठाने के बावजूद अपने गुटों में ही बंटे नजर आ रहे हैं। ऐसे में पार्टी सत्तारूढ़ दल के जातीय समीकरणों के उलट गढ़वाल मंडल के किसी ब्राह्मण नेता को पार्टी अध्यक्ष एवं कुमाऊं मंडल के किसी क्षेत्रीय नेता को नेता प्रतिपक्ष बना सकती है। अध्यक्ष पद के लिए पार्टी यदि अपने पूर्व अध्यक्ष किशोर उपाध्याय पर भी भरोसा कर ले तो कोई आश्चर्य नहीं होगा। वहीं नेता प्रतिपक्ष के तौर पर पूर्व विधानसभा अध्यक्ष गोविंद सिंह कुंजवाल पहली और करन महरा दूसरी पसंद हो सकते हैं। यदि ऐसा होता है इसे कांग्रेस का फिर से पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत के हाथों में लौटना होगा, क्योंकि तीनों ही नेता हरीश रावत के हमेशा से करीबी रहे हैं। किशोर जहां हरीश के मुख्यमंत्री रहते प्रदेश अध्यक्ष थे तो कुंजवाल विधानसभा अध्यक्ष। वहीं करन मेहरा हरीश रावत के साले हैं। आगे देखने वाली बात होगी कि निर्णय घोषित होने से पहले ही छन कर आ गई इस खबर के बाद दोनों गुटों के नेता किस तरह इन स्थितियों से निपटते हैं। बहरहाल, आने वाले दिनों में कांग्रेस पार्टी में अंदरूनी गर्मी जरूर बढ़ने वाली है।

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-सुमित्तर भुल्लर की नियुक्ति से युवा कांग्रेस में आक्रोश, वर्तमान अध्यक्ष पूर्व सीएम के निकटस्थ करीबी रणजीत रावत के पुत्र विक्रम रावत, सुमित्तर भुल्लर को बनाया गया है कार्यकारी अध्यक्ष, हरीश-रणजीत के बीच की खाई बढ़ने के भी हैं संकेत

नवीन समाचार, देहरादून, 17 जून 2019। लोकसभा चुनावों में करारी शिकस्त झेलने के बाद भी कांग्रेस में अंदरूनी लड़ाई खत्म होने का नाम नहीं ले रही। युवा कांग्रेस में कार्यकारी अध्यक्ष नियुक्त किये गये सुमित्तर भुल्लर की नियुक्ति का भी विरोध शुरू हो गया है। भुल्लर की नियुक्ति से हरीश रावत व रणजीत रावत के बीच की दूरियां बढ़ने के संकेत भी मिल रहे हैं। युवा कांग्रेस के नेता विकास नेगी ने इस नियुक्ति को कांग्रेस के लिए दुर्भाग्यपूर्ण करार देते हुए राष्ट्रीय महासचिव हरीश रावत को निशाने पर लिया है। नेगी ने रावत के नाम से एक पत्र लिखकर सोशल मीडिया पर वायरल किया है। हरीश रावत को संबोधित पत्र में लिखा गया है ‘‘आपके द्वारा उत्तराखंड कांग्रेस को खत्म करने के बाद आपका एक और मास्टर स्ट्रोक अब युवा कांग्रेस को खत्म करने के लिए है। नेगी ने लिखा है कि युवा कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष विक्रम रावत राहुल गांधी के द्वारा चलाई जा रही चुनाव प्रणाली से चुनाव जीत कर आये हैं। जो उस चुनाव प्रणाली में हार गया हो और हार भी तब जब उसके साथ आप जैसे बड़े नेता का साथ व आशीर्वाद एवं मार्गदर्शन रहा हो। उन्होंने कहा है कि उत्तराखंड का युवा आपको अपना प्रेरणास्रेत समझता था। आप उन युवाओं के लिए आइडियल थे जो गरीब परिवार से उच्च राजनीति में आने के सपने देखते थे। आपके द्वारा सुमित्तर भुल्लर को उत्तराखंड में बनाया गए कार्यकारी अध्यक्ष से साफ हो गया है कि आप भी उन्हीं लोगों को आगे बढ़ाने में बढ़ावा देंगे जो सिर्फ बड़े नेताओं की आवभगत करेगा। उन्होंने लिखा है कि प्रदेश अध्यक्ष विक्रम रावत ने उत्तराखंड में पलायन को रोकने के लिए अच्छी पहल की है, लेकिन उनको वो सम्मान नहीं मिला जो मिलना चाहिए था। हम अपने अध्यक्ष विक्रम रावत के साथ है जिन्होंने अपनी मेहनत और आप सबके आशीर्वाद से खुद को साबित किया है। वह जो चुनाव जीत के आया है। बहरहाल रावत पर यह निशाना किसी के इशारे पर साधा गया है या फिर युवा कांग्रेस के भीतर की ही आवाज है अभी नहीं कहा जा सकता है। मगर इतना साफ है कि सुमित्तर भुल्लर की नियुक्ति यदि हरीश रावत की पैरवी से हुई है तो हरीश रावत के सबसे खास रणजीत रावत और हरीश रावत के बीच की खाई बढ़ गयी है। विक्रम रावत रणजीत रावत के ही पुत्र हैं और रणजीत रावत के बारे में यह कौन नहीं जानता कि वे हरीश रावत की सरकार में औद्यौगिक सलाहकार के रूप में सबसे पावरफुल व्यक्ति थे।

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नवीन समाचार, नैनीताल, 13 अप्रैल 2019। उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने अपने लोक सभा चुनाव लड़ने की वजह पर खुलासा किया है। एक समाचार चैनल से बात करते हुए हरीश रावत ने कहा कि वह पिछला विधानसभा दो सीटों से हारने का कारण जानने के उद्देश्य से खुद की जांच करना चाहते थे। इसलिये उन्होंने 2019 का लोक सभा चुनाव लड़ा। वे जानना चाहते हैं कि प्रदेश में ‘उत्तराखंडियत’ की दिशा में कार्य करने के बावजूद वे दो सीटों से चुनाव क्यों हारे। उनकी वह हार ‘एक्सीडेंटल’ यानी दुर्घटनावश थी, अथवा जनता ने उन्हें जान-बूझकर हराया था। इस प्रश्न का उत्तर जानने के लिए वे 2022 के विधानसभा चुनाव तक का इंतजार नहीं कर सकते थे, इसलिये उन्होंने यह लोक सभा चुनाव लड़ा। इसके साथ ही न केवल उन्होंने 2022 को विधानसभा चुनाव लड़ने का इशारा किया, साथ ही साफ तौर पर कहा कि यदि वे यह लोक सभा चुनाव हार भी गये तो वे इससे बहुत निराश होने वाले नहीं हैं। उन्होंने कहा, वे जीत के साथ बहुत उत्साहित और हार से बहुत निराश होने वाले नहीं हैं। यदि वे नैनीताल से चुनाव हारे तो दूसरे संघर्ष की ओर बढ़ जाएंगे।
इसके अलावा उन्होंने प्रदेश में टिहरी से कांग्रेस प्रत्याशी प्रीतम सिंह की जीत को जरूरी बताया। कहा, पार्टी उनमें लंबा नेतृत्व देख रही है। इसलिये पार्टी के लिए उनका जीतना जरूरी है।

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नवीन समाचार, नैनीताल, 4 अप्रैल 2019। कांग्रेस के घोषणापत्र में अफस्पा यानी आर्म्ड फोर्सेस स्पेशल पावर एक्ट (एएफपीएसए) यानी सशस्त्र बल विशेष शक्तियां अधिनियम में बदलाव की बात से सैनिक बाहुल्य प्रदेश उत्तराखंड में जबर्दस्त गुस्सा नजर आ रहा है। कांग्रेस द्वारा अपने घोषणापत्र में इसमें बदलाव करने और राष्ट्रद्रोह की धाराओं में संशोधन की बात को लेकर देश भर में तो बहस छिड़ ही गई है। उत्तराखंड में रहने वाले यहां तक कि कांग्रेस को पसंद करने वाले सेवानिवृत्त सैन्य अधिकारी व कर्मी भी इन दोनों बिंदुओं को लेकर बेहद नाराज हैं। उनका मानना है कि घाटी से अफस्पा में बदलाव करने से कश्मीर में सीमा पर तैनात सैनिकों के हाथ बंध जाएंगे और इससे उनका मनोबल भी प्रभावित होगा। वोटरों को लुभाने के लिए भी इस तरह की इस तरह की बात नहीं कही जानी चाहिऐ।

यह भी पढ़ें : अब फेक न्यूज़ पर सबसे बड़ी सर्जिकल स्ट्राइक : फेसबुक ने कांग्रेस पार्टी से जुड़े 687, भाजपा से जुड़े 15 और पाकिस्तानी सेना से जुड़े 103 पेज, ग्रुप और अकाउंट किये बंद

नवीन समाचार, नई दिल्ली (पीटीआई) 1 अप्रैल 2019। दुनिया की दिग्गज सोशल मीडिया साइट फेसबुक ने सोमवार को बताया कि उसने कांग्रेस पार्टी से जुड़े 687 पेज और अकाउंट तथा पाकिस्तानी सेना के जनसंपर्क शाखा के अधिकारियों से जुड़े 103 पेजों, ग्रुप्स और अकाउंट को हटा दिया है, क्योंकि वह गलत तरीके से ऑपरेट किये जा रहे थे, उन्हें कांग्रेस के आईटी सेल से जुड़े लोग अपनी पहचान छिपाकर चला रहे थे। इनके अलावा फेसबुक ने भाजपा का समर्थन करने वाली आईटी फर्म सिल्वर टच से जुड़े 15 पेज, ग्रुप व अकाउंट हटाने की बात भी कही है। इनमें भी संचालित करने वालों ने अपनी पहचान छिपाने की कोशिश की थी। यह कंपनी नमो ऐप का सहारा लेकर भाजपा का प्रमोशन करती थी। फर्जी तरीके से इस तरह की गतिविधियों को संचालित करने वाले सभी अकाउंट को फेसबुक की स्वचालित प्रणाली ने हटाया है। यह इत्तेफाक ही है कि कुछ और कि कांग्रेस और पाकिस्तान के इतनी बड़ी संख्या में खाते व पेज बंद करने की जानकारी एक ही दिन आई है। आने वाले दिनों में खासकर कांग्रेस के लिए इस सवाल पर जवाब देना भारी पड़ सकता है।

कांग्रेस से जुड़े 687 पेजेज को रिमूव करने की जानकारी फेसबुक साइबर सिक्योरिटी के हेड नाथनील ग्लीचर ने दी। उन्होंने कहा, ‘हमने कांग्रेस से जुड़े 687 पेज को हटाया है। कहा कि कांग्रेस की आईटी सेल से संबद्ध 138 पेज और 549 अकाउंट हटाये गये हैं। इन अकाउंट को दो लाख 6000 लोग फॉलो कर रहे थे। इन अकाउंट को व्यक्तिगत रुप से संचालित किया जा रहा था। उन्हें हटाए जाने का कारण उनका ‘अनुचित  व्यवहार’ है, कांग्रेस आईटी सेल से जुड़े हुए कुछ लोग उन्हें ऑपरेट कर रहे थे, वे अपनी पहचान छिपाने के लिए फर्जी अकाउंट के नेटवर्क का भी उपयोग कर रहे थे। हम लगातार अपने साइट पर गलत गतिविधियों का पता लगाने और उन्हें रोकने पर काम कर रहे हैं क्योंकि हम नहीं चाहते हैं कि हमारे प्लेटफॉर्म का उपयोग लोगों को हेरफेर करने के लिए किया जाए। उन्होंने यह भी कहा कि फेसबुक पर विज्ञापन के लिए करीब 39 हजार डॉलर खर्च किये गये हैं। फेसबुक पर पहला विज्ञापन 2014 में दिया गया था और उसके बाद जितने विज्ञापन इस माध्यम से जारी किए गए उनमें अधिकांश 2019 के हैं। 

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-अनुपम नैनीताल, जमुना सुयालबाड़ी, दुम्का हल्दूचौड़ व कमला कोटाबाग के अध्यक्ष नियुक्त
नवीन समाचार, नैनीताल, 7 मार्च 2019। ‘नवीन समाचार’ द्वारा एक दिन पूर्व ही जताई गयी संभावना सही साबित हुई और कुमाऊं विवि के पूर्व छात्र नेता अनुपम कबडवाल जिला व मंडल मुख्यालय नैनीताल के नगर कांग्रेस अध्यक्ष नियुक्त कर दिये गये हैं। बृहस्पतिवार शाम कांग्रेस पार्टी के जिलाध्यक्ष सतीश नैनवाल ने प्रदेश अध्यक्ष प्रीतम सिंह की संस्तुति पर उनकी नियुक्ति के आदेश जारी कर दिये हैं। उनके अलावा जमुना दत्त कत्यूरा को ब्लॉक कांग्रेस कमेटी सुयालबाड़ी, कैलाश दुम्का को ब्लॉक कांग्रेस कमेटी हल्दूचौड़एवं कमला बधानी को ब्लॉक कांग्रेस कमेटी कोटाबाग का अध्यक्ष नियुक्त करने के आदेश जारी कर दिये हैं।
उल्लेखनीय है कि अनुपम 1999 में डीएसबी परिसर छात्र संघ के उपाध्यक्ष व 2003 में अध्यक्ष रहे हैं तथा 2007 से हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के सदस्य अधिवक्ता हैं। नैनीताल नगर में कांग्रेस नगर अध्यक्ष का पद अक्तूबर माह में तत्कालीन नगर अध्यक्ष मारुति नंदन साह द्वारा पदत्याग करने के बाद से रिक्त चल रहा था।

पूर्व समाचार : ‘इस’ के बाद अनुपम का नैनीताल नगर कांग्रेस अध्यक्ष बनना तय

नवीन समाचार, नई दिल्ली, 7 मार्च 2019। पूर्व छात्र नेता अनुपम कबडवाल का नगर कांग्रेस अध्यक्ष बनना अब तय नजर आ रहा है। उल्लेखनीय है कि वरिष्ठ नेता व पूर्व सभासद जेके शर्मा तथा पूर्व नगर पालिकाध्यक्ष मुकेश जोशी भी अध्यक्ष बनने की सूची में बताये गये थे, लेकिन इधर दो दिन पूर्व उन्हें जिला कार्यकारिणी में क्रमशः उपाध्यक्ष व महामंत्री के दायित्व मिलने के बाद अनुपम का नगर अध्यक्ष बनने का रास्ता साफ हो गया है। अनुपम 1999 में डीएसबी परिसर छात्र संघ के उपाध्यक्ष व 2003 में अध्यक्ष रहे हैं तथा 2007 से हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के सदस्य अधिवक्ता हैं। उल्लेखनीय है कि नगर में कांग्रेस नगर अध्यक्ष का पद अक्तूबर माह में तत्कालीन नगर अध्यक्ष मारुति नंदन साह द्वारा पदत्याग करने के बाद से रिक्त चल रहा है। नये अध्यक्ष की घोषणा प्रदेश अध्यक्ष प्रीतम सिंह की संस्तुति पर शनिवार-रविवार तक घोषणा हो सकती है।

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-हेम आर्य को कांग्रेस में शामिल करने से शुरू हुई थी जिले की दो कांग्रेस नेत्रियों में अदावत
-महिला कांग्रेस अध्यक्ष सरिता आर्य को हरीश रावत गुट से होने का मिल रहा खामियाजा, और रावत भी नहीं दे रहे साथ
-सरिता एक भी महिला कांग्रेस की पदाधिकारी तथा अपने क्षेत्र के भवाली व नैनीताल में नहीं दिला पायीं अपने करीबियों को टिकट, इस तरह उनके आधार पर की गयी है चोट

नवीन जोशी, नैनीताल, 23 अक्तूबर 2018। ‘कहीं पर निगाहें-कहीं पर निशाना’ राजनीति का अहम हिस्सा है। यहां दो सामने दिखता है, अक्सर वह नहीं होता। और जो होता है, उसकी जड़ें कहीं और होती हैं। राज्य के पिछले विस चुनावों में विजय हासिल करने के बाद नैनीताल की विधायक बनीं सरिता आर्या सबसे पहले हल्द्वानी में कांग्रेस की वरिष्ठ नेत्री डा. इंदिरा हृदयेश के आवास पर गयी थीं। किंतु कांग्रेस की सरकार बनने और विजय बहुगुणा की सीएम के पद पर ताजपोशी के वक्त से ही हरीश रावत के खेमे की मानी जाने लगीं, और बाद में हरीश रावत के सीएम बनने के बाद काफी मजबूत हुईं। उन्हें महिला कांग्रेस का प्रदेश अध्यक्ष जैसा बड़ा पद मिला और वह पहला विस चुनाव जीतते ही राज्य की शीर्ष महिला नेत्रियों में शुमार हो गयी थीं। लेकिन इधर मौजूदा निकाय चुनावों में उन्हें राजनीतिक तौर पर समाप्त करने की बड़ी साजिश साफ दिखाई दे रही है। वे महिला कांग्रेस की प्रदेश अध्यक्ष होते महिला कांग्रेस की सिटिंग पालिकाध्यक्ष व जीतने की संभावना वाली एक जिलाध्यक्ष के साथ ही अपने क्षेत्र की नैनीताल व भवाली सीटों पर अपने बेहद करीबियों को उनकी जीत की प्रबल संभावनाओं के बावजूद टिकट नहीं दिला पायी हैं। इस तरह उनका राजनीतिक आधार समाप्त करने और हर ओर उनके लिये अपनों को भी दुश्मन बनाने का प्रयास किया गया है। खास बात यह भी है कि उन्हें ऐसे वक्त में हरीश रावत का साथ भी नहीं मिल रहा है।
कांग्रेस पार्टी से जुड़े सूत्र बता रहे हैं कि इस अदावत की शुरुआत पिछले दिनों सरिता के खिलाफ भाजपा से चुनाव लड़े हेम आर्या को कांग्रेस में शामिल करने के प्रयासों से शुरू हुई। सरिता से नाराज नैनीताल विस के ही कुछ नेताओं ने सरिता को नीचा दिखाने के लिए जिले-प्रदेश की बड़ी महिला नेत्री-नेता प्रतिपक्ष डा. इंदिरा हृदयेश से संपर्क साधा। इंदिरा ने हेम को पार्टी में शामिल करने का प्रयास किया तो सरिता ने तीन बार उनकी कोशिशों को नाकाम कर दिया। यहां तक कि वे पार्टी अध्यक्ष राहुल गांधी से मिलकर हेम के पार्टी में शामिल होने पर अपना विरोध दर्ज करा आयीं। लेकिन इंदिरा राहुल से ही हेम को पार्टी में शामिल करने की इजाजत ले आयीं। इस पर हेम का पार्टी में शामिल होना तय हुआ तो सरिता से महिला प्रदेश अध्यक्ष पद से इस्तीफा देने का इशारा कर दिया। इस पर जिले से प्रदेश अध्यक्ष बनाने के लिए सरिता की एक करीबी सहित दो महिला नेत्रियों को तैयार कर सरिता से धमकी की जगह इस्तीफा दे देने को कह दिया गया। कथित तौर पर यहां तक कह दिया गया कि वे एक गृहणी से राजनीति में आयी हैं, उन्हें वापस गृहणी ही बनाकर छोड़ दिया जाएगा। इधर निकाय चुनाव में उन्हें बुरी तरह से शक्तिहीन साबित करना इसी कड़ी में माना जा रहा है। लेकिन ऐसे बुरे वक्त में राजनीतिक आका हरीश रावत का साथ न मिलने पर हतप्रभ सी सरिता का कहना है कि न जाने क्यों रावत ने निकाय चुनावों से स्वयं को अलग कर लिया है। ऐसे में इंदिरा हृदयेश को खुला मैदान मिलना स्वाभाविक है, और वे अपने पुत्र सहित अपने लोगों को टिकट दिलाने में सफल रहीं। और आज सरिता के समक्ष ऐसी स्थिति आ गयीं जब वे पार्टी प्रत्याशी सचिन नेगी के नामांकन के दौरान हेम आर्य के बिल्कुल बगल में खड़ी नजर आयीं।

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