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22 वर्षों बाद नैनीताल कांग्रेस में कुछ बदला, क्या ? जिलाध्यक्ष…

May be an image of ‎1 person and ‎text that says "‎श्री राहुल छिमवाल जी( हल्द्धानी महानगर अध्यक्ष) को जिला कांग्रेस कमेटी नैनीताल का जिलाध्यक्ष बनने पर बहुत बहुत बधाई व शुभकामनाएं| उत्तराखण्ड प्रदेश काँग्रेस कमेटी माह्या ក្ដក গरনুর पेगর Mש 100809 m‎"‎‎नवीन समाचार, नैनीताल, 20 नवंबर 2022। नैनीताल जनपद की कांग्रेस पार्टी में तमाम हारों और जिलाध्यक्ष सतीश नैनवाल के कई बार संभवतया ‘जान छुड़ाने’ के निवेदनों के बाद आखिर पार्टी में 22 वर्षों बाद कुछ बदला है। यह भी पढ़ें : सुबह का विचारणीय समाचार : शिक्षक के विरुद्ध बच्चे को सजा के तौर पर दंड बैठक व मैदान के चक्कर लगवाने पर मुकदमा दर्ज

जी हां, उत्तराखंड राज्य बनने के बाद जहां राज्य में कई प्रदेश अध्यक्ष एवं विधायक-सांसद से लेकर अन्य जिलों के अध्यक्ष तथा पदाधिकारी बदल गए, लेकिन जिलाध्यक्ष पद पर नवंबर 2000 यानी उत्तराखंड बनने के बाद से सतीश नैनवाल लगातार बने हुए थे। अब उनकी जगह पार्टी ने नए जिलाध्यक्ष के रूप में हल्द्वानी महानगर के अध्यक्ष राहुल छिम्वाल को यह जिम्मेदारी दे दी है। इस प्रकार छिम्वाल उत्तराखंड गठन के बाद कांग्रेस के दूसरे नैनीताल जिलाध्यक्ष होंगे। यह भी पढ़ें : हल्द्वानी : अभी-अभी पटरी पर दो टुकड़ों में कटी मिली 27 वर्षीय युवक कि लाश, प्रेम प्रसंग कि सम्भावना…

गौरतलब है कि कांग्रेस ने संगठन में फेरबदल करते हुए कई जिलो के नए जिलाध्यक्षों की नियुक्ति कर दी है। सूची में नैनीताल जिले के अध्यक्ष ने सबको चौंकाया है। बहरहाल, नवनियुक्त जिलाध्यक्ष राहुल छिमवाल 1998-99 में एमबी डिग्री कालेज में उपाध्यक्ष, 2002-03 में छात्र संघ अध्यक्ष और 2003-04 में छात्र महासंघ कुमाऊं के अध्यक्ष, 2009-10 में एनएसयूआइ के प्रदेश उपाध्यक्ष व 2006 से 2008 तक एनएसयूआइ के प्रदेश अध्यक्ष भी रहे हैं। आगे देखने वाली बात होगी कि वह नैनीताल कांग्रेस को कितना बदल पाते हैं। यह भी पढ़ें : जीजा ने नाबालिग साली का नहाते हुए वीडिओ बनाया, और….

बहरहाल आज जारी सूची के अनुसार, जिला कांग्रेस कमेटी अल्मोड़ा में भूपेंद्र सिंह भोज, बागेश्वर में भगत सिंह डसीला, डीडीहाट में मनोहर टोलिया, चमोली में मुकेश नेगी, पछवादून में लक्ष्मी अग्रवाल को कार्यकारी अध्यक्ष की जिम्मेदारी सौंपी गई है। इसी तरह से महानगर कांग्रेस कमेटी हरिद्वार में सतपाल ब्रहमचारी, हरिद्वार ग्रामीण में राजीव चौधरी, रुड़की ग्रामीण में विधायक विरेंद्र जाति, पिथौरागढ में अंजु लुंठी, रुद्रप्रयाग में कुंवर सिंह सजवाण, काशीपुर में मुशर्रफ हुसैन, रुद्रपुर में सीपी शर्मा, ऊधमसिंह नगर में हिमांशु गाबा, उत्तरकाशी में मनीष राणा और पुरोला में दिनेश चौहान को कार्यकारी अध्यक्ष बनाया गया है।  (डॉ. नवीन जोशी) आज के अन्य ताजा ‘नवीन समाचार’ पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें।

यह भी पढ़ें : नई पीसीसी के चयन पर सिर मुढ़ाते ही ओले ! कांग्रेस के तीसरी पीढ़ी के एक युवा और एक विधायक ने दिया इस्तीफा..

कांग्रेस में खत्म नहीं हो रही रार! PCC पद से पूर्व नेता प्रतिपक्ष प्रीतम सिंह के बेटे अभिषेक चौहान और पिथौरागढ़ मयूख महर का इस्तीफानवीन समाचार, देहरादून, 20 सितंबर 2022। ऐसा लगता है कि कांग्रेस पार्टी में नई पीसीसी के चयन पर सिर मुढ़ाते ही ओले पड़ने जैसी स्थिति आ गई है। दो सदस्यों ने पीसीसी जैसी महत्वपूर्ण इकाई से त्यागपत्र दे दिया है।उत्तराखंड कांग्रेस के एक तीसरी पीढ़ी के युवा नेता, पूर्व अध्यक्ष व नेता प्रतिपक्ष प्रीतम सिंह के पुत्र अभिषेक सिंह ने राजनीति में अपने एक कदम से एक नया अनुकरणीय उदाहरण पेश किया है। अलबत्ता उनके इस कदम को कांग्रेस पार्टी की आपसी खींचतान व रार से जोड़कर भी देखा जा रहा है।

उल्लेखनीय है कि कांग्रेस पार्टी के नए प्रदेश अध्यक्ष करण माहरा ने गत दिवस पीसीसी यानी प्रदेश कांग्रेस कमेटी के सदस्यों की सूची जारी की है, जिसमें अभिषेक को भी पीसीसी का सदस्य बना गया है। लेकिन अभिषेक ने पीसीसी के सदस्य पद से यह कह कर इस्तीफा दे दिया है, ‘उनकी जगह किसी वरिष्ठ कांग्रेस जन को यह पद दे दिया जाए।’ साथ ही अपने त्यागपत्र में यह भी जिक्र किया है, ‘प्रदेश कांग्रेस कमेटी में कई वरिष्ठ एवं जनाधार वाले कांग्रेसजनों को स्थान नहीं मिल पाया है। इससे कांग्रेसजनों आक्रोश दिखाई दे रहा है।’ साथ ही उन्होंने अपने दादा स्वर्गीय गुलाब सिंह एवं पिता प्रीतम सिंह का जिक्र कर अपनी ओर से कांग्रेस को मजबूत करते रहने की बात भी लिखी है।

इस प्रकार अभिषेक ने जहां एक ओर पीसीसी में आने से छूटे वरिष्ठ नेताओं के लिए अपने पद का त्याग करने की बात कही है, वहीं प्रदेश अध्यक्ष द्वारा की गई घोषणा पर वरिष्ठ नेताओं को छोड़ने का परोक्ष तौर पर आरोप भी लगाया है। साथ ही अपने दादा एवं अपने पिता का नाम लेकर वह किस विरासत को आगे बढ़ा रहे हैं, यह भी बताने का प्रयास किया है। इसके बाद और भी कुछ लोगों के त्यागपत्र देने की अटकलें भी लगाई जा रही हैं।

उनके अलावा पिथौरागढ़ के विधायक मयूख महर ने भी पीसीसी सदस्य पद से इस्तीफा दे दिया है। मयूख का कहना है कि जो लोग अपने बूथ पर ही कांग्रेस को नहीं जिता पाए थे, उन तक को पीसीसी सदस्य का अहम पद दे दिया गया है। कहा कि पीसीसी में सदस्यों के चयन को लेकर वह सहमत नहीं है। कई अपात्रों को भी पीसीसी सदस्य बना दिया गया है। इसी प्रकार विधायकों को पीसीसी सदस्य बनाने की भी जरूरत नहीं थी। विधायक तो नियमानुसार पीसीसी के विशेष आमंत्रित सदस्य होते ही हैं। महर ने कहा कि पीसीसी सदस्य का पद सामान्य पद नहीं होता। यदि किसी जमीनी और योग्य कार्यकर्ता को पीसीसी सदस्य बनाया जाता तो निसंदेह कांग्रेस को ही लाभ होता।(डॉ. नवीन जोशी) आज के अन्य ताजा ‘नवीन समाचार’ पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें।

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द्वारीखाल ब्लॉक प्रमुख महेंद्र राणा ने कांग्रेस को कहा अलविदा, सभी पदों और  प्राथमिक सदस्यता से दिया त्यागपत्र - Devbhoomisamvad.comनवीन समाचार, नैनीताल, 31 अगस्त 2022। राष्ट्रीय स्तर के साथ उत्तराखंड में प्रादेशिक स्तर पर भी क्या कांग्रेस नेताओं को पार्टी का कोई भविष्य नजर नहीं आ रहा है ? यह सवाल इसलिए कि द्वारीखाल के ब्लॉक प्रमुख महेंद्र राणा ने कांग्रेस पार्टी को अलविदा कहते हुए प्राथमिक पदों से इस्तीफा दे दिया है।

पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष सोनिया गाँधी को भेजे त्याग पत्र में राणा ने कहा है कि वह 25 वर्षों से लगातार कांग्रेस पार्टी से जुड़े थे। विगत 15 वर्षों से पार्टी संगठन में विभिन्न पदों पर रहते हुए और इधर वर्तमान में अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के सदस्य तथा प्रदेश महामंत्री के रूप में पार्टी संगठन को अपनी सेवा दे रहे थे।

लेकिन इधर, कांग्रेस द्वारा लगातार की जा रही उपेक्षा एवं 2017 और 2022 के विधानसभा चुनाव में यमकेश्वर विधानसभा क्षेत्र से पार्टी प्रत्याशी बनाए जाने हेतु टिकट की दावेदारी करने के बाद अपेक्षित सहयोग न मिलने के कारण वह अपने आप को उपेक्षित महसूस कर रहे थे। इसलिए उन्होंने अपनी प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दे दिया है। (डॉ. नवीन जोशी) आज के अन्य ताजा ‘नवीन समाचार’ पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें।

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-विधानसभा चुनाव के बाद कांग्रेस पार्टी के कार्यकर्ता पहली बार मुख्यालय में जागृत व एकजुट दिखे।
डॉ. नवीन जोशी @ नवीन समाचार, नैनीताल, 10 अगस्त 2022। विपक्षी कांग्रेस पार्टी ने बुधवार को नैनीताल मुख्यालय में धूम-धड़ाके के साथ ‘भारत जोड़ो तिरंगा यात्रा’ निकाली। यात्रा में नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य व कांग्रेस पार्टी के प्रदेश प्रभारी देवेंद्र यादव, जिलाध्यक्ष सतीश नैनवाल व पूर्व विधायक संजीव आर्य के साथ ही छोलिया दल भी शामिल रहा। इस दौरान नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य ने कहा कि आज देश को बांटने का काम किया जा रहा है। जबकि सभी को एकजुट होने की जरूरत है। इसलिए कांग्रेस पार्टी के द्वारा भारत जोड़ो यात्रा निकाली जा रही है। यात्रा के बहाने विधानसभा चुनाव के बाद कांग्रेस पार्टी के कार्यकर्ता पहली बार मुख्यालय में जागृत व एकजुट दिखे।

भारत जोड़ो तिरंगा यात्रा के तहत कांग्रेसियों ने नगर के मल्लीताल श्रीराम सेवक सभा प्रांगण में एकत्र होकर वहां संक्षिप्त सभा करने के उपरांत मल्लीताल बाजार से नैना देवी मंदिर, मल्लीताल रिक्शा स्टैंड, माल रोड, तल्लीताल बाजार होते हुए धर्मशाला तक तिरंगों के साथ ‘भारत माता जय’ के नारे लगाते हुए यात्रा निकाली। इस दौरान मल्लीताल रिक्शा स्टैंड पर पंडित गोविंद बल्लभ पंत, तल्लीताल में शहीद मेजर राजेश अधिकारी व बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर व महात्मा गांधी की मूर्ति पर माल्यार्पण भी किया गया।

यात्रा में हल्द्वानी के विधायक सुमित हृदयेश, उप नेता प्रतिपक्ष भुवन कापड़ी, पूर्व विधायक दान सिंह भंडारी, पालिका अध्यक्ष सचिन नेगी, पूर्व सांसद महेंद्र पाल, पूर्व विधायक रणजीत रावत, भवाली के पालिका अध्यक्ष संजय वर्मा, ब्लाक प्रमुख डॉ. हरीश बिष्ट, हिमांशु पांडे, गिरीश जोशी, कैलाश मिश्रा, निशांत पपनै, त्रिभुवन फर्त्याल, सूरज पांडे, जीनू पांडे, सुनील मेहरा, संदीप नेगी, गोपाल बिष्ट, भावना भट्ट, मुन्नी तिवारी, खट्टी बिष्ट, जेके शर्मा, पीके शर्मा, राजेंद्र व्यास, पंकज बिष्ट सहित बड़ी संख्या में कार्यकर्ता शामिल थे। आज के अन्य ताजा ‘नवीन समाचार’ पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें।

यह भी पढ़ें : 10 को नैनीताल में निकलेगी कांग्रेस पार्टी की ‘भारत जोड़ो तिरंगा यात्रा’

नगर कांग्रेस कमेटी नैनीताल ने की कुमाऊं विश्वविद्यालय में स्थायी कुलपति की  नियुक्ति की मांग - Naini Liveडॉ. नवीन जोशी @ नवीन समाचार, नैनीताल, 8 अगस्त 2022। आजादी की 75वीं वर्षगाँठ पर कांग्रेस की नैनीताल नगर इकाई के द्वारा राष्ट्रीय व प्रदेश नेतृत्व के आह्वावन पर ‘भारत जोड़ो तिरंगा यात्रा’ निकाली जाएगी। नगर अध्यक्ष अनुपम कबडवाल ने बताया कि इसके लिए रूट तैयार कर लिया है, साथ ही इस यात्रा हेतु वाई-स्तर पर पार्टी पदाधिकारियों को जिम्मेदारी सौंप दी गई है।

यात्रा आगामी 10 अगस्त बुधवार को अपराहन 12 बजे श्रीराम सेवक सभा प्रांगण से शुरू होकर मल्लीताल बाजार, माल रोड, डांठ, तल्लीताल बाजार होते हुए धर्मशाला तल्लीताल में समाप्त होगी। इस दौरान यात्रा मार्ग में आने वाले भारत रत्न पं.गोविन्द बल्लभ पंत, डा. भीमराव अंबेडकर व राष्ट्रपिता महात्मा गाँधी की मूर्तियों में माल्यार्पण कर पुष्प अर्पित किये जायेंगे। यात्रा में नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य, हल्द्वानी विधायक सुमित हृदयेश, पूर्व विधायक संजीव आर्य, पूर्व सांसद डा. महेंद्र पाल, जिलाध्यक्ष सतीश नैनवाल सहित विधानसभा नैनीताल के सभी कॉंग्रेस-जन शामिल होंगे। आज के अन्य ताजा ‘नवीन समाचार’ पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें।

यह भी पढ़ें : उत्तराखंड बनने के बाद से यानी 21 वर्षों से कांग्रेस में एक ही पद पर बने सतीश ने जताई पदत्याग की इच्छा

कांग्रेस जिलाध्यक्ष ने किसानों को मुआवजे के लिए मुख्यमंत्री को लिखा पत्र -  Naini Liveनवीन समाचार, नैनीताल, 4 अगस्त 2022। उत्तराखंड बनने के बाद राज्य में कितनी सरकारें, कितने मुख्यमंत्री, दलों के अध्यक्ष और पदाधिकारी बदल गए यह शायद किसी को ठीक से याद न हो, पर एक बार जरूर याद होगी इतने वर्षों से नैनीताल जिले के अध्यक्ष पर एक ही व्यक्ति सतीश नैनवाल विराजमान हैं।

यह समझना कठिन हैं कि पद पर विराजमान रहने से खुश होंगे या कि पदोन्नति होकर ऊपर के पदों पर न पहुंच पाने से परेशान, या कि पार्टी को इतने बड़े जनपद में उनके पद पर उनका प्रतिस्थानी नहीं मिल पा रहा है, बहरहाल इतना जरूर है कि अब लगता है कि वह एक ही पद पर रहने से उकता गए हैं। उन्होंने दावा किया है कि कई बार पदत्याग करने के लिए पार्टी के वरिष्ठ नेताओं को कह चुके हैं।

बताया गया है कि राज्य बनने के बाद 2001 में सतीश नैनवाल का जया बिष्ट की जगह कांग्रेस पार्टी का नैनीताल जिलाध्यक्ष बनाया गया था। इसके बाद उन्हें 2005, 2010, 2014 और 2018 में 5-5 साल का कार्यकाल पूरा होने के बाद पुनः-पुनः जिलाध्यक्ष बनाया जाता रहा। इस बीच 2002 और 2007 में जिला पंचायत अध्यक्ष और 2014 में ब्लॉक प्रमुख भी रहे। (डॉ. नवीन जोशी) आज के अन्य ताजा ‘नवीन समाचार’ पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें।

यह भी पढ़ें : उत्तराखंड यूथ कांग्रेस का प्रदेश महासचिव जिला बदर, नैनीताल जिले की सीमा से बाहर छोड़ा गया…

नवीन समाचार, हल्द्वानी, 31 जुलाई 2022। नैनीताल जनपद में राजनीति और अपराध के गठजोड़ का एक नया उदाहरण सामने आया है। पुलिस ने जिलाधिकारी धीराज गर्ब्याल की संस्तुति पर यूथ कांग्रेस के पूर्व प्रदेश महासचिव और हिस्ट्रीशीटर हृदयेश कुमार निवासी चौफुला चौराहा दमुवाढूंगा को जिला बदर कर दिया है। शनिवार देर रात काठगोदाम पुलिस ने हृदयेश कुमार को जिले की सीमा से बाहर कर दिया।

उल्लेखनीय है कि यूथ कांग्रेस नेता हृदयेश कुमार पर हत्या और लूट जैसे 14 संगीन मामले दर्ज हैं।हाल ही में हृदयेश कुमार उस वक्त चर्चाओं में आया था जब वार्ड नंबर 37 निवासी मन्नू गोस्वामी ने हृदयेश कुमार पर धमकी देने और जान को खतरा बताकर पुलिस से सुरक्षा की गुहार लगाई थी। इसके बाद पुलिस ने हृदयेश कुमार को गिरफ्तार कर लिया था। हालांकि उसे जमानत मिल गई थी।

शनिवार को जिलाधिकारी की संस्तुति मिलने के बाद एसएसपी पंकज भट्ट ने हृदयेश कुमार को जिला बदर करने के आदेश जारी कर दिए। काठगोदाम पुलिस ने हृदयेश कुमार को नैनीताल जिले से बाहर पंतनगर थाना क्षेत्र की सीमा में छोड़ दिया। अब हृदयेश कुमार छह महीने तक नैनीताल जिले की सीमा में प्रवेश नहीं कर सकेगा। उल्लेखनीय है कि हृदयेश कुमार की स्थानीय कांग्रेस विधायक सुमित हृदयेश से अदावत भी चर्चाओं में रही है। पिछले दिनों उसके परिजनों ने विधायक पर आरोप लगाए थे।

नैनीताल पुलिस द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार हृदयेश कुमार पर दर्ज अभियोग: 1- FIR N0 25/08 धारा 326/506 आईपीसी
2- FIR N0 388/08 धारा 364/395/412 आईपीसी
3- FIR N0 442/08 धारा 2/3 गैंगस्टर एक्ट
4- FIR N0 33/09 धारा 324/504 आईपीसी
5- FIR N0 148/09 धारा ¾ गैंगस्टर एक्ट
6- FIR N0 18/11 धारा 302/34 आईपीसी
7- FIR N0 22/11 धारा 2/3 गैंगस्टर एक्ट
8- FIR N0 314/13 धारा 506 आईपीसी
9- FIR N0 33/14 धारा 147/148/149/504/324/307/427 आईपीसी व 25 आर्म्स एक्ट
10- FIR N0 45/14 धारा 2/3 गैंगस्टर एक्ट
11- FIR N0 521/15 धारा ¾ गुंडा एक्ट
12- FIR NO 64/22 धारा 504/506 भादवि
13- मु0क्रमांक सं0 2601 /13 धारा 110जी दप्रस
14- मु0 क्रमांक स0 3956/13 धारा ¾ गुंडा एक्ट (डॉ. नवीन जोशी) आज के अन्य ताजा ‘नवीन समाचार’ पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें।

यह भी पढ़ें : उत्तराखंड कांग्रेस के 4 विधायकों ने नहीं दिया राष्ट्रपति पद के लिए अपने प्रत्याशी को वोट, कांग्रेस हाईकमान पहचान कर कार्रवाई के मूड में, जानें कौन हो सकते हैं…

नवीन समाचार, देहरादून, 22 जुलाई 2022। उत्तराखंड में कांग्रेस के 19 विधायकों में से क्या 4 विधायक बागी हो गए हैं ? यह प्रश्न इसलिए उठ रहा है कि कांग्रेस के 4 विधायकों ने राष्ट्रपति चुनाव में विपक्ष के प्रत्याशी यशवंत सिन्हा को वोट नहीं दिया है। इनमें से एक पूर्व मंत्री तिलक राज बेहड़ ने स्वास्थ्य कारणों एवं राजेंद्र भंडारी ने मौसम की खराबी का कारण बताकर अपना वोट ही नहीं दिया, जबकि एक कांग्रेस विधायक ने क्रॉस वोटिंग कर सत्ता पक्ष के प्रत्याशी व नवनिर्वाचित राष्ट्रपति द्रोपदी मुर्मू को वोट दिया, जबकि एक कांग्रेस विधायक का मत निरस्त हुआ।

इन स्थितियों को कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष करण महरा ने गंभीरता से लिया है। उन्होंने कहा कि जिस विधायक ने क्रॉस वोटिंग है वह चोर और दगाबाज है। महरा ने चुनौती देते हुए कहा कि क्रॉस वोटिंग करने वाले विधायक को खुलकर सामने आना चाहिए। यदि वो पार्टी में रहने के इच्छुक नहीं हैं तो तत्काल जा सकते हैं। महरा ने दो टूक कहा कि क्रॉस वोटिंग करने वाले विधायक ने निकृष्टता का परिचय दिया है। यदि उनमें जरा भी नैतिकता बची है तो खुलकर सामने आएं। चोरों की तरह छिपकर रहने के बजाए स्वयं ही पार्टी से चले जाएं।

उन्होंने कहा कि यह अनुशासनहीनता का मामला है और क्रॉस वोटिंग के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। वहीं, जिन दो विधायकों ने वोट नहीं दिया है और जिसका वोट खराब हुआ है इस पर भी कमेटी जांच करेगी। पार्टी हाईकमान ने जांच के लिए कमेटी गठित करने के निर्देश भी दिए हैं। हाईकमान के सख्त आदेश के बावजूद जिस तरह क्रॉस वोटिंग हुई और विधायक नदारद रहे हैं, उसे पार्टी के कुछ नेताओं की भाजपा से बढ़ती निकटता के रूप में भी देखा जा रहा है।

बताया जा रहा है कि संदिग्ध विधायकों में क्रॉस वोटिंग करने वाले व वोट खराब करने वाले दोनों विधायक कुमाऊं मंडल के हो सकते हैं। संभवतया इसी कारण कुमाऊं से ही आने वाले प्रदेश अध्यक्ष इसे लेकर अधिक गंभीर नजर आ रहे हैं। बताया जा रहा है कि इनमें से तीनों को पर्वतीय एवं दो को सीमांत जनपदों से बताया जा रहा है। इनमें वे विधायक भी शामिल हो सकते हैं जो विस चुनाव के बाद से ही अपने बयानों से अपनी पार्टी को कटघरे में खड़ा करते रहे हैं। वह यदि अपनी पार्टी की लाइन पर भी वोट देते, तब भी प्रत्याशी का जीतना तो संभव नहीं था, लेकिन उन्होंने ऐसा न करके सत्तारूढ़ दल के प्रति अपनी ओर से समर्पण प्रस्तुत कर दिया है।

उधर, कांग्रेस के क्रॉस वोटिंग से बीजेपी के नेता उत्साहित हैं। उन्होंने क्रॉस वोटिंग करने वाले विधायक का आभार जताया है। कृषि मंत्री गणेश जोशी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने द्रौपदी मुर्मू को जब राष्ट्रपति पद का उम्मीदवार बनाया था उसी वक्त यह तय हो गया था कि विपक्ष की ओर से बड़े स्तर पर क्रॉस वोटिंग की जाएगी। बता दें कि विधानसभा चुनाव में मिली हार की टेंशन से कांग्रेस उबरी नहीं थी कि राष्ट्रपति चुनाव में हुई क्रॉस वोटिंग ने कांग्रेस को एक और टेंशन दे दी है. ऐसे में नए प्रदेश अध्यक्ष उस विधायक की तलाश में जुट गए हैं जिसने कांग्रेस के खिलाफ जाकर वोटिंग की है।

उल्लेखनीय है कि उत्तराखंड में द्रौपदी मुर्मू को 51 जबकि यशवंत सिन्हा को 15 विधायकों विधायकों के वोट मिले हैं। गौरतलब है कि भाजपा विधायक व मंत्री चंदन राम दास भी अस्पताल में भर्ती होने की वजह से वोट नहीं दे पाए थे, जबकि दो निर्दलीय और दो बसपा विधायकों ने भी द्रौपदी मुर्मू को अपना समर्थन दिया। कांग्रेस के 19 विधायकों में से दो मतदान से अनुपस्थित रहे और 17 ने ही मतदान में हिस्सा लिया। (डॉ. नवीन जोशी) आज के अन्य ताजा ‘नवीन समाचार’ पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें।

यह भी पढ़ें : तो उत्तराखंड कांग्रेस ने गांधीगिरी में ढूंढ लिया गुटबाजी-बयानबाजी का इलाज…

नवीन समाचार, देहरादून, 19 जुलाई 2022। क्या बुरी तरह से गुटबाजी और बयानबाजी में उलझी उत्तराखंड कांग्रेस ने अपनी इन सबसे बड़ी समस्याओं का इलाज ढूंढ लिया है ? यह सवाल इसलिए कि कांग्रेस पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष करन महरा ने पार्टी के बुद्धिजीवी प्रकोष्ठ के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. प्रदीप जोशी के इस सुझाव पर मुहर लगा दी है कि कांग्रेस पार्टी को नुकसान पहुंचा रहे गुटबाज और बयानबाज नेताओं को कांग्रेस गांधीगिरी के फार्मूले से सबक सिखाएगी। अब से जिस भी दिन कोई शीर्ष नेता पार्टी लाइन से हटकर बयान देगा, प्रदेश अध्यक्ष करन माहरा या वरिष्ठ पदाधिकारी उसके घर जाकर उसे फूलों को गुलदस्ता देंगे।

कांग्रेस प्रदेश पदाधिकारियों और जिलाध्यक्षों की सोमवार को पूरे दिन चली बैठक में कई मुद्दों के साथ इस मुद्दे पर प्रमुखता से चर्चा की गई। बैठक में बड़े नेताओं के विवाद का विषय छाया रहा। बैठक में डॉ. जोशी ने कहा कि पार्टी के कुछ नेता इतने बड़े हो चुके हैं कि उन पर कार्रवाई तो हो नहीं पाती। इसलिए उन्हें उनके कामों के लिए ग्लानि की भावना जगाने के लिए उनके घर जाकर गांधीवादी तरीके से फूल दिए जाएं और अहसास कराया जाए कि उनकी वजह से पार्टी को कितना नुकसान हो रहा है।

बैठक में इस बात पर भी चर्चा हुई कि कांग्रेस अपने उदयपुर सम्मेलन के संकल्प के तहत नौ अगस्त से सात दिवसीय भारत जोड़ो पदयात्रा शुरू करने जा रही है।। प्रदेश प्रभारी देवेंद्र यादव ने विस्तार से इसकी जानकारी दी। हालांकि कांग्रेस के कुछ नेता इस यात्रा की जिम्मेदारी संगठन पर लादने से खुश नहीं दिखे। दून के महानगर अध्यक्ष लालचंद शर्मा ने कहा कि जिन लोगों को विस चुनाव में टिकट दिया गया था, उन्हें यात्रा की अगुवाई करनी चाहिए। कई नेताओं ने लालचंद की बात का समर्थन किया।

वहीं, पूर्व मंत्री हीरा सिंह बिष्ट ने पार्टी में एकजुटता का मुद्दा उठाया। कहा कि भारत जोड़ों के साथ साथ कांग्रेस जोड़ो अभियान की भी जरूरत है। आज एक सोशल मीडिया पर कुछ कहता तो दूसरा उसका खंडन करने आ जाता है। (डॉ. नवीन जोशी) आज के अन्य ताजा ‘नवीन समाचार’ पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें।

यह भी पढ़ें : बड़ा समाचार: विधायक की कार्यशैली से आहत होकर महिला पार्षद ने दिया पार्टी के दायित्व से इस्तीफा..

Sumit Hridayesh Haldwani Election Result 2022, UK vidhan sabha Chunav Sumit  Hridayesh Result 2022 in hindi | TV9 Bharatvarsh
सुमित हृदयेश

नवीन समाचार, हल्द्वानी, 16 जून 2022। हल्द्वानी में कांग्रेस को झटका लगा है। महानगर कांग्रेस कमेटी की उपाध्यक्ष और डीपीसी मेंबर नैनीताल एवं वार्ड नंबर 37 की पार्षद विद्या देवी ने महानगर कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष को अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। इस बारे में उन्होंने अध्यक्ष को एक पत्र लिखा है, और कहा है कि वह हल्द्वानी विधायक सुमित हृदयेश की कार्यशैली से आहत होकर पार्टी के महानगर उपाध्यक्ष के पद से इस्तीफा दे रहीं हैं।

पत्र में विद्या देवी ने कहा कि वह और उनका पूरा परिवार कांग्रेस पृष्ठभूमि का रहा है। इधर जबसे कांग्रेस विपक्ष में हैं, तब से दमुवाढूंगा के अपने वार्ड नंबर 37 के साथ ही वार्ड 35 व 36 में वह और उनके पुत्र हृदयेश कुमार आर्य के द्वारा भी निरंतर कांग्रेस पार्टी को मजबूत करने का कार्य किया गया। जबकि हल्द्वानी विधायक सुमित द्वारा लगातार उनके वार्ड व क्षेत्र की उपेक्षा की गयी हैं। वहां कोई भी विकास कार्य नहीं किए गए हैं।

यह भी आरोप लगाया है कि विधायक ने उनके पुत्र पर व्यक्तिगत रंजिश के तहत लगातार षड्यंत्र कर फंसाने का कार्य किया गया। इतने समय से पार्टी की सेवा करने के उपरांत उन्हें और उनके परिवार को हल्द्वानी विधायक सुमित द्वारा यह इनाम दिया जा रहा है। इससे उनके परिवार तथा पूरे दमुवाढूंगा क्षेत्र के लोगों की भावनाएं आहत हुई हैं। इसका खामियाजा हल्द्वानी विधायक तथा कांग्रेस पार्टी को आने वाले समय में भुगतना होगा। इस बारे में विधायक सुमित हृदयेश से संपर्क करने का प्रयास किया गया, परंतु उनका मोबाइल स्विच ऑफ मिला। (डॉ. नवीन जोशी) आज के अन्य ताजा ‘नवीन समाचार’ पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें।

यह भी पढ़ें : उत्तराखंड कांग्रेस ने 2024 में केंद्र की सत्ता में लौटने को शुरू किया मंथन, हरीश रावत ने जताया ऐसा भरोसा कि….

गांधी,नेहरू व पटेल की विरासत को बर्बाद नहीं होने देंगे-कांग्रेस - Avikal  Uttarakhandनवीन समाचार, देहरादून, 2 जून 2022। उत्तराखंड में पिछले दो लोकसभा में खाता भी न खोल पाई और दो विधानसभा चुनावों में बुरी हार के बाद अब राज्यसभा से भी बाहर हो रही कांग्रेस पार्टी 2024 की तैयारियों में जुट गई है। इस हेतु राजधानी में दो दिनों से पार्टी मंथन कर रही है। लेकिन जो बात बैठक के बाद बाहर निकल कर आई है वह यह कि हरीश रावत ने पार्टी जनों को पार्टी की 2024 में जीत का यह कहकर भरोसा दिलाया है कि 2004 से पहले भाजपा जीत रही थी। फिर 2004 में कांग्रेस केंद्र की सत्ता में 10 साल रही। 10 साल के बाद 2014 में फिर भाजपा जीती। इसलिए अब 2024 में पासा पलटेगा और कांग्रेस केंद्र की सत्ता में आएगी।

गौरतलब है कि यह कांग्रेस पार्टी की वह उत्तराखंड इकाई है जो 2024 में देश में कांग्रेस की सरकार आने का ख्वाब देख रही है, लेकिन उनकी ही पार्टी ने उन्हें पिछले दिनों राजस्थान के उदयपुर में हुए ‘नव चिंतन शिविर’ के बाद कोई तवज्जो नहीं दी है।बहरहाल, देहरादून में बुधवार 1 जून से शुरू हुए और आज 2 जून तक चलने वाले कांग्रेस के 2 दिवसीय चिंतन शिविर ‘नव संकल्प क्रियान्वयन कार्यशाला’ में कांग्रेसजनों ने देश और उत्तराखंड में पार्टी के चुनाव में प्रदर्शन को सुधारने पर चर्चा हुई।

कार्यशाला में यह बात सभी नेताओं के मन मस्तिष्क पर हावी दिखी कि भाजपा एक बाद फिर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नाम के साथ ही लोकसभा का चुनाव लड़ेगी। और उनके नेतृत्व में 2014 व 2019 के लोकसभा चुनाव के साथ 2017 व 2022 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस पार्टी निःशस्त्र सी दिखाई पड़ी है। बमुश्किल 2017 और 2022 के विधानसभा चुनाव में 70 सीटों वाली विधानसभा में कांग्रेस को पहले 11 और अब 19 विधायकों से संतोष करना पड़ा है। इस बार कांग्रेस ने न केवल अपने राज्यसभा सांसद प्रदीप टम्टा की सीट खोई, बल्कि पार्टी चुनाव लड़ने के लिए अपना प्रत्याशी तक घोषित नहीं कर पाई।

बहरहाल, इस शिविर में पूर्व सीएम हरीश रावत के साथ ही राज्य में नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्या, कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष करण माहरा, कांग्रेस के उत्तराखंड प्रभारी देवेंद्र यादव सहित कई नेता मौजूद रहे। इसके बाद मीडिया प्रभारी राजीव महर्षि ने बताया कि पार्टी ने समाज को बांटने वाली सांप्रदायिक ताकतों के खिलाफ शिद्दत से डटे रहने का स्वर बुलंद किया। पार्टी के वरिष्ठ नेताओं ने संगठन को दोबारा मजबूत करने का संकल्प लिया। तय किया कि न्याय पंचायत स्तर से पार्टी को नये सिरे से संगठित किया जाएगा। समर्पित कार्यकर्ताओं को पार्टी के भीतर पदोन्नति दी जाएगी। आगे 11 से 14 जून के बीच जिला स्तर पर कार्यकर्ताओं के लिए कार्यशालाएं आयोजित की जाएंगी। (डॉ.नवीन जोशी) आज के अन्य ताजा ‘नवीन समाचार’ पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें।

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Imageनवीन समाचार, पिथौरागढ़, 25 मई 2022। एक दशक से अधिक समय से कांग्रेस में सक्रिय, पिछले दिनों भाजपा सरकार के खिलाफ ‘मवेशियों के आगे बीन बजाकर’ और ‘खयाली पुलाव पकाकर’ चर्चा में रहने के साथ ही जोरदार हमला बोलने वाले यूथ कांग्रेस के प्रदेश प्रवक्ता दीपक तिवारी ने कांग्रेस पार्टी के सभी पदों से इस्तीफा दे दिया है।

उन्होंने यूथ कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष सुमित्तर भुल्लर को अपना त्याग पत्र भेज दिया है। उनका कहना है कि कांग्रेस में उन्हें युवाओं का कोई भविष्य नजर नहीं आ रहा है। चर्चा है कि मूल रूप से चंपावत के निवासी दीपक चंपावत उप चुनाव के दौरान मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से मुलाकात कर भाजपा की सदस्यता ग्रहण कर सकते हैं। वह चंपावत रवाना भी हो चुके हैं।

Imageउल्लेखनीय है कि दीपक ने एनएसयूआई यानी भारतीय राष्ट्रीय छात्र संगठन में जिला महासचिव के रूप में छात्र राजनीति की शुरुआत की थी। इसके बाद वह दो बार प्रदेश सचिव व एक बार प्रदेश महासचिव चुने गए। उन्होंने मुख्य कांग्रेस में जिला प्रवक्ता का पद भी संभाला। वर्तमान में वह यूथ कांग्रेस के प्रदेश प्रवक्ता के रूप में सेवाएं दे रहे थे।

दीपक ने कहा कि इतने लंबे समय से उन्होंने संगठन में तमाम पदों की जिम्मेदारी पूरी सक्रियता व ईमानदारी से निभाई, लेकिन आज तक उन्हें इसका कोई फल नहीं मिला। उन्होंने कहा कि कांग्रेस की वर्तमान स्थिति ठीक नहीं चल रही है। एक कार्यकर्ता के लिए यह बहुत ही कठिन होता है कि उनके शीर्ष नेता भारी गुटबाजी से पार्टी को कमजोर कर रहे हैं। इसका खामियाजा अपना सब कुछ छोड़कर पार्टी की सेवा में जुटे जमीनी कार्यकर्ताओं को भुगतना पड़ता है। इसलिए उन्हें मजबूरन पार्टी छोड़नी पड़ रही है। (डॉ. नवीन जोशी) आज के अन्य ताजा ‘नवीन समाचार’ पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें

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नवीन समाचार, देहरादून, 6 मई 2022। कांग्रेस पार्टी से 40 वर्षों से जुड़े रहे वरिष्ठ नेता और निवर्तमान प्रदेश उपाध्यक्ष जोत सिंह बिष्ट ने राज्य में डूबता जहाज बनती जा रही कांग्रेस से नाता तोड़ लिया है। बिष्ट ने विधानसभा चुनाव के दौरान पार्टी के ही कुछ नेताओ पर भितरघात करने का आरोप लगाते हुए कहा है कि अब कांग्रेस पार्टी में सुधार की कोई गुंजाइश नहीं दिखाई देती है, इसलिए किसी पर किसी प्रकार का व्यक्तिगत आरोप न लगाकर तथा कोई व्यक्तिगत दुर्भावना रखे बिना मैं कांग्रेस पार्टी के सभी पदों के साथ पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से त्यागपत्र दे रहा हैं।

दिग्गज कांग्रेस नेता ने फेसबुक पर लिखा, ‘मा. सोनिया गांधी, श्री राहुल गांधी, श्री हरीश रावत, श्री यशपाल आर्य जी, श्री करण महरा जी, श्री प्रीतम सिंह चौहान जी एवं उत्तराखंड कांग्रेस के सभी वरिष्ठ-कनिष्ठ सहयोगी साथियों के संज्ञानार्थ ! आप सबके स्नेह एवं सहयोग से मैंने अपने राजनीतिक जीवन के 40 वर्षों का सफर तय किया है। आज आप सभी साथियों को अत्यंत दुखी मन से सूचित कर रहा हूं कि कांग्रेस पार्टी में लंबे समय से चल रहे अंतर्कलह, अनुशासन हीनता, निष्ठावान कार्यकर्ताओं की अनदेखी व एक तरफा फैसलों के चलते पार्टी का भविष्य अनिश्चितता की ओर जा रहा है।

नेतृत्व की पांत में बैठे लोग लगातार हार के बाद भी सबक लेने के बजाय व्यक्तिगत हितों के लिए संघर्ष कर रहे हैं। इसमें मुझे अब दूर दूर तक सुधार की कोई गुंजाइश नहीं दिखाई देती है, इसलिए किसी पर किसी प्रकार का व्यक्तिगत आरोप न लगाकर तथा कोई व्यक्तिगत दुर्भावना रखे बिना मैं कांग्रेस पार्टी के सभी पदों के साथ पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से त्यागपत्र दे रहा हूं।’

उन्होंने लिखा है, ‘मैं सभी साथियों का आभार प्रकट करता हूं। मेरी कार्यशैली की वजह से मुझे पसंद या नापसंद करने वाले आप सभी साथियों का आभार प्रकट करता हूं। फैसला लेते हुए मन बहुत आहत है। बातें तो बहुत हैं लेकिन अब ज्यादा लिखना सम्भव नहीं है। आप सभी का हार्दिक धन्यवाद। बाबा केदार सबकी रक्षा करें।’ (डॉ. नवीन जोशी) आज के अन्य ताजा ‘नवीन समाचार’ पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें

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कहा-धामी सरकार का पहला माह स्वागत, अभिनंदन और उप चुनाव लड़ने के नाम
रोम जल रहा है और नीरो बांसुरी बजा रहा है की लोकोक्ति उत्तराखंड के लिए फिट
Case filed against two dozen people including former minister Yashpal Arya  in the assault case - मारपीट मामले में पूर्व मंत्री यशपाल आर्य सहित दो  दर्जन लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्जनवीन समाचार, हल्द्वानी, 23 नवंबर 2023। लगता है कांग्रेस पार्टी और खासकर नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य को सरकार का एक माह का कार्यकाल ही बुरी तरह खल गया है, और वह अधीर हो उठे हैं। आर्य ने सरकार से बिजली कटौती, पानी का संकट, बढ़ती महंगाई, बेरोजगारी और जंगलों में बढ़ती आग की घटनाओं को लेकर विधानसभा का विशेष सत्र बुलाने और एक माह के कार्यकाल पर श्वेत पत्र जारी करने की मांग की है।

शनिवार को सर्किट हाउस में राज्य सरकार के एक माह के कार्यकाल को निराशजनक बताने के लिए बुलाई गई पत्रकार वार्ता में श्री आर्य ने कहा कि प्रचंड बहुमत के बावजूद सरकार का एक माह राज्य की दशा एवं दिशा को तय करने के बजाय सीएम को उपचुनाव लड़ाने की रणनीति में ही गंवा दिया है। इससे पूरे राज्य में अराजकता की जैसी स्थिति पैदा हो गई है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस मजबूत विपक्ष के दायित्व का निर्वहन करेगी। सरकार को अच्छे काम पर शाबासी देगी तो जनविरोधी नीतियों का डटकर मुकाबला किया जाएगा। कांग्रेस सड़क से सदन तक सरकार को चैन से नहीं बैठने देगी। सरकार को हर हाल में जन समस्याओं का निस्तारण करना होगा।

आगे उन्होंने कहा, ऊर्जा महकमा सीएम के पास है। उत्तराखंड ऊर्जा प्रदेश है। इसके वाबजूद प्रतिदिन दस करोड़ की बिजली खरीदी जा रही है। इतनी महंगी बिजली कहां जा रही है, किसी को पता नहीं है। बहुत दबाव के बाद सीएम ने ऊर्जा अधिकारियों की बैठक में कटौती को बंद करने का रोडमैप बनाने की बात की है, जबकि इतनी महंगी बिजली खरीदने पर सीएम चुप हैं। चुनाव जीतते ही बिजली के दाम बढ़ाए गए हैं। आठ से दस घंटे बिजली कटौती आखिर क्यों की जा रही है।

उन्होंने कहा कि जंगलों की आग गांवों-कस्बों तक पहुंच गई है। कई रिसॉर्ट, घर और गांव के हिस्से वनाग्नि की चपेट में आ चुके हैं। दुर्लभ वन संपदा और वन्यजीव दावाग्नि की भेट चढ़ रहे हैं। वन मंत्री निजी यात्रा पर मुंबई गये हैं। अब मुंबई से वनाग्नि की समीक्षा की बात भाजपा सरकार के असली चेहरे को साफ दिखा रहा है। उन्होंने कहा जंगलों में आग लगी है और वन मंत्री मुम्बई से आग बुझाने की बात कर रहे हैं। यह उसी तरह है कि रोम जल रहा है और नीरो बांसुरी बजा रहा है।

उन्होंने कहा कि सरकार वनाधिकारियों के तबादले कर रही है और अधिकारी कार्यालय आना ही भूलने लगे हैं। राज्य सरकार भ्रष्टाचार एवं भयमुक्त सरकार का वायदा भूल चुकी है। लोकायुक्त की बात अब राज्यपाल के अभिभाषण का हिस्सा तक नहीं बन पा रही है। करीब 2 हजार 149 राज्य आंदोलनकारियों की नौकरियां खतरे में है, और सरकार हाथ पर हाथ धरे बैठी है।

उन्होंने कहा कि धामी सरकार के 30 दिन राज्य में हत्या, चोरी, डकैती, मासूमों से बलात्कार जैसे जघन्य घटनाओं के नाम रहे हैं। राज्य में लगातार ये घटनाएं गिरती कानून व्यवस्था राज्य की अस्मिता और सम्मान पर चोट पहुंचा रही है। जनता में भय का वातावरण है। राज्य चयन आयोग के खिलाफ बेरोजगारों में भारी गुस्सा देखने को मिल रहा है। इसके बावजूद डबल इंजन सरकार फौज की भर्तियां नहीं करना चाहती है। को-ऑपरेटिव भर्ती भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ चुकी है। सरकार केवल झूठ बोलने का काम कर रही है। पति-पत्नी को वृद्धावस्था पेंशन का नया शासनादेश पूरी तरह से हास्यास्पद जारी किया गया है। इसमें अभी तक संशोधन नहीं किया गया है।

उन्होंने कहा कि कहने को राज्यपाल के पहले अभिभाषण की शुरूआत कोविड काल में अपनी जान की बाजी लगाकर लाखों लोगों को बचाने वालों को धन्यवाद से की है। जबकि वास्तविकता यह है कि कोविड काल में काम करने वाले 750 से अधिक स्वास्थ्य कर्मियों को 31 मार्च को सेवा से निकाल दिया गया है। वह लोग आंदोलन कर रहे हैं। इनकी पीड़ा को देखने वाला कोई भी नहीं है। इस मौके पर विधायक सुमित हृदयेश, पूर्व विधायक संजीव आर्य, प्रदेश महामंत्री महेश शर्मा, जिलाध्यक्ष सतीश नैनवाल, महानगर अध्यक्ष राहुल छिम्वाल समेत तमाम लोग मौजूद रहे। (डॉ. नवीन जोशी) आज के अन्य ताजा ‘नवीन समाचार’ पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें

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नवीन समाचार, देहरादून, 18 अप्रैल 2022। 48 विधायकों के साथ राज्य में सत्ता में लौटने का ख्वाब देख रही कांग्रेस पार्टी पिछले विधानसभा सुनावों में मात्र 19 और पिछले दो विधानसभा चुनावों में मिलाकर भी कुल 30 यानी बहुमत से 6 सीटें कम ला पाई। इन 19 में से भी आधे से अधिक विधायक नए प्रदेश अध्यक्ष के बाद नए नेता प्रतिपक्ष के कार्यभार ग्रहण करने के कार्यक्रम में नहीं पहुंचे। फिर भी कांग्रेस के तेवरों में कोई कमी नहीं दिखाई दे रही है।

Imageसोमवार को कार्यभार ग्रहण करने के बाद नए नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य ने कहा, 19 विधायक ही काफी हैं। सत्तापक्ष को जनता के मुद्दों पर चैन से नहीं बैठने देंगे। उन्हांेने अनपेक्षित तौर पर लोकायुक्त का मुद्दा भी उठा दिया। कहा, कांग्रेस सरकार लोकायुक्त लागू करने वाली थी, लेकिन भाजपा सरकार इस मुद्दे को दबाए बैठी है। लेकिन यशपाल जी से कौन पूछे, कौन सी कांग्रेस सरकार लोकायुक्त को लागू करने वाली थी और कौन ही भाजपा सरकार इसे दबाई बैठी है ? क्योंकि जिन सरकारो की शायद वे बात कर रहे हैं, उन दोनों ही सरकारों में वे शामिल रहे हैं। ऐसे में अंगुलियां तो उनकी ओर भी उठती हैं।

Imageबहरहाल, कार्यभार ग्रहण करने के बाद श्री आर्य राजभवन को रवाना हुए और राज्यपाल से हरिद्वार में हनुमान जयंती पर हुई घटना पर उचित कार्रवाई करने का अनुरोध किया। कहा, कांग्रेस सकारात्मक विपक्ष की भूमिका निभाएगी पर राज्य एवं जनहित के मुद्दों पर सरकार को सदन से लेकर सड़क तक घेरने का काम करेगी। सरकार को जनता के सवालों के जवाब देने ही होंगे।

उनके कार्यभार ग्रहण करने के मौके पर विधायक सुमित हृदयेश, भुवन कापड़ी, मनोज तिवारी, अनुपमा रावत, ममता रावत और गोपाल राणा सहित 9 विधायक तथा पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत, प्रदेश अध्यक्ष करन माहरा आदि ही मौजूद रहे। जबकि सबसे पहले आर्य पूर्व प्रदेश अध्यक्ष व नेता प्रतिपक्ष प्रीतम सिंह के घर गए थे, फिर भी उनके साथ ही हरीश धामी, राजेंद्र भंडारी, मदन बिष्ट व मयूख महर सरीखे वरिष्ठ विधायक मौजूद नहीं रहे। इसके बावजूद यशपाल कहते रहे, पूरी पार्टी एकजुट है, पार्टी में कोई नाराजगी नहीं है। (डॉ. नवीन जोशी) आज के अन्य ताजा ‘नवीन समाचार’ पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें

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Imageनवीन समाचार, देहरादून, 17 अप्रैल 2022। उत्तराखंड कांग्रेस में विधायकों की नाराजगी और गुटबाजी कम होने का नाम नहीं ले रही है। कांग्रेस के नवनियुक्त प्रदेश अध्यक्ष करन माहरा ने रविवार को कार्यभार ग्रहण किया तो सिर्फ 19 विधायकों की पार्टी के आधे से अधिक 11 विधायक उनकी ताजपोषी में शामिल नहीं हुए। इस प्रकार महरा अपनी आधी से भी कम सेना के सेनापति नजर आए।

यहां तक कि पूर्व नेता प्रतिपक्ष प्रीतम सिंह भी गैरहाजिर रहे। यही नहीं, पूर्व प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल कार्यक्रम में मौजूद तो रहे, पर उन्होंने कड़े शब्दों में अपनी नाराजगी व्यक्त की। बोले, क्या हम कंडम हो गए थे जो नया नेतृत्व तलाशना पड़ा। जब इस्तीफा दे रहे थे तो लिया नहीं, बाद में बेइज्जत करके लिया। अपने संबोधन के बाद वह चले गए। इस पर माहरा को उनकी अनुपस्थिति में कार्यभार ग्रहण करने की औपचारिकता पूरी करनी पड़ी। माहरा और हरीश रावत ने फोनकर गोदियाल से आने का अनुरोध किया लेकिन तब तक वो काफी दूर जा चुके थे।

राजीव भवन में दोपहर एक बजे से शाम चार बजे तक चले समारोह में इसके अलावा भी कई बार असहज करने वाले क्षण आए। समारोह में केवल नए पद प्राप्त करने वाले यशपाल आर्य, भुवन कापड़ी, अनुपमा रावत, आदेश चौहान, सुमित हृदयेश, मनोज तिवारी, रवि बहादुर, वीरेंद्र जाति ही शामिल हुए। पूर्व नेता प्रतिपक्ष प्रीतम सिंह, राजेंद्र भंडारी, मदन बिष्ट, मयूख महर व हरीश धामी सहित शेष 11 विधायक नहीं आए।

सूत्रों के अनुसार राजेंद्र भंडारी, मदन बिष्ट व विक्रम सिंह नेगी दून में ही थे, फिर भी वे समारोह में नहीं आए, जबकि हरीश धामी पहले ही अपनी विधानसभा के लिए लौट गए थे। हालांकि प्रदेश प्रभारी देवेंद्र यादव ने कहा कि चकराता क्षेत्र में सड़क हादसे की वजह से प्रीतम सिंह को वहां जाना पड़ा है। इसी प्रकार हरिद्वार में दो समुदाय के बीच हुए विवाद के कारण विधायक नहीं आ पाए। इसे नाराजगी से नहीं जोड़ा जाना चाहिए। (डॉ. नवीन जोशी) आज के अन्य ताजा ‘नवीन समाचार’ पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें।

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भगवा भेष में अपने को सबसे बड़ा देशभक्त बताने वाले ढोंगी बाबाओं से सावधान" |  controversial statement of congress mla harish dhami on baba ramdev

नवीन समाचार, देहरादून, 13 अप्रैल 2022। कांग्रेस से नाराज धारचूला के विधायक हरीश धामी ने अपने अगले कदम के बारे में दो संकेत दिए हैं। हरीश ने दो टूक कहा कि अगर क्षेत्र की जनता कहेगी तो वह मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के लिए सीट छोड़ सकते हैं। साथ ही उन्होंने कहा कि उनके पास अगल दल बनाकर जनता की सेवा करने का भी विकल्प खुला है। लगता है कि यह कदम वह तब उठाएंगे, जब कांग्रेस पार्टी के एक तिहाई से अधिक विधायक उनके साथ पार्टी से बगावत करने को राजी होंगे।

नियमों के अनुसार यदि एक-तिहाई यानी कांग्रेस की मौजूदा विधायक संख्या 19 के सापेक्ष 7 विधायकों से कम यदि पार्टी लाइन के खिलाफ कोई कदम उठाते हैं तो उनकी विधानसभा से सदस्यता समाप्त हो सकती है। यानी कांग्रेस से बगावत का करीब-करीब निर्णय ले चुके हरीश धामी यदि अकेले कांग्रेस पार्टी को छोड़ते हैं तो उनकी विधायकी चली जाएगी। ऐसे में उनकी सीट से मुख्यमंत्री धामी या किसी अन्य का चुनाव लड़ना संभव हो जाएगा।

लेकिन यदि कांग्रेस के 7 से अधिक विधायक पार्टी छोड़ते हैं तो उनके लिए दल-बदल यानी भाजपा में शामिल होने के साथ ही अपना अलग दल बनाने का विकल्प बन जाएगा और उनकी विधायकी भी नहीं जाएगी। लेकिन बताया जा रहा है कि मौजूदा हालातों में विधायक राजनीति का ‘पारस’ पत्थर बन गई भाजपा में शामिल होने का विकल्प चुन सकते हैं। इस बारे में बुधवार शाम तक पार्टी के 10 विधायकों की बैठक होने की चर्चा है। चर्चा यह भी है कि विधायक अनौपचारिक तौर पर भी इसके लिए आपस में बात कर रहे हैं।

कांग्रेस पर लगाए गंभीर आरोप
कांग्रेस पर गंभीर आरोप लगाते हुए हरीश धामी ने बुधवार को कहा कि पार्टी में उनकी अनदेखी हुई है। कांग्रेस ने हमेशा से ही उन्हें नीचे दिखाने का काम किया है, जबकि वह पार्टी के समर्पित कार्यकर्ता रहे हैं। इसलिए उन्होंने कांग्रेस छोड़ने का मन बना लिया है। हरीश ने कहा कि विधानसभा चुनाव में पहली बार जीते विधायक को उप नेता प्रतिपक्ष बनाकर उनके सम्मान को चोट पहुंचाई गई है।

इसके अलावा कांग्रेस के प्रदेश प्रभारी देवेंद्र यादव को निशाने पर लेते हुए धामी ने कहा कि पार्टी की विधानसभा चुनाव में हार के लिए यादव से इस्तीफा लिया जाना चाहिए। कांग्रेस पर पूर्व सैनिकों का सम्मान नहीं करने का आरोप लगाते हुए धामी ने कहा कि ऐसा बार- बार हो रहा है। पार्टी वरिष्ठ और निष्ठावान कार्यकर्त्ताओं की उपेक्षा कर रही है। (डॉ. नवीन जोशी) आज के अन्य ताजा ‘नवीन समाचार’ पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें।

यह भी पढ़ें : तो सही साबित होगी ‘नवीन समाचार’ द्वारा जताई आशंका, कांग्रेसी विधायक सीएम धामी के लिए सीट छोड़ने देहरादून रवाना

नवीन समाचार, धारचूला-पिथौरागढ़, 12 अप्रैल 2022। चुनाव हारने के बाद भी मुख्यमंत्री चुने जाने पर ‘नवीन समाचार’ ने समाचार प्रकाशित किया था कि धामी किसी पूर्व मुख्यमंत्री की विधानसभा सीट से चुनाव लड़ सकते हैं। इशारा था कि यह सीटें पूर्व सीएम कोश्यारी की कपकोट और पूर्व सीएम हरीश रावत की धारचूला हो सकती हैं। यह भी संभावना जताई थी कि हरीश धामी पुष्कर धामी के लिए सीट छोड़ सकते हैं। अब चर्चाओं पर यकीन करें तो बुधवार को हरीश धामी भाजपा का दामन थाम सकते हैं।

बताया जा रहा है कि इसके लिए विधायक धामी हल्द्वानी से देहरादून के लिए निकल गए हैं। यदि अकेले वह इस्तीफा देते हैं तो इससे उनकी विधायकी चली जाएगी, और उनकी सीट पर पुष्कर धामी चुनाव लड़ सकते हैं। इस तरह किसी भाजपा विधायक को धामी के लिए सीट खाली नहीं करनी पड़ेगी और धामी का नाम भी उपचुनाव के लिए दूसरे पार्टी के विधायक से सीट खाली करने वाले एनडी तिवारी, विजय बहुगुणा व भुवन चंद्र खंडूड़ी की सूची में शामिल हो जाएगा।

यह चर्चाएं तब उठी हैं, जबकि धामी के विधानसभा क्षेत्र के धारचूला, गोरीछाल व अन्य ब्लाक अध्यक्षों सहित अनेक पदाधिकारियों ने कांग्रेस की प्राथमिकता सदस्यता और पदों से त्यागपत्र दे दिए हैं। धामी के समर्थन में पीसीसी सदस्य हीरा चिराल ने भी पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से त्याग पत्र दे दिया है। चिराल ने कहा कि ईमानदार और समर्पित कार्यकर्ताओं की अनदेखी की जा रही है। भाजपा में जहां युवा चेहरों को अवसर दिया जा रहा है, वहीं कांग्रेस युवाओं को दरकिनार कर रही है। अब यह बर्दाश्त नहीं होगा। सीमांत की उपेक्षा नहीं सहेंगे।

वहीं विधायक धामी से भाजपा में शामिल होने की बात पूछी गई तो तो उन्होंने स्पष्ट तो कुछ नहीं कहा। पर यह कहते हुए संकेत दिया कि उनको जिताने वाली जनता और पार्टी के पदाधिकारी और कार्यकर्ताओं जो चाहेंगे वही वह करेंगे। इसके अलावा धामी ने कांग्रेस पर अपनी लगातार उपेक्षा का आरोप भी लगाया। उन्होंने कहा कि पूर्व में जब कांग्रेस की प्रदेश कार्यकारिणी का गठन हुआ तो उसमें सबसे नीचे उनका नाम था। बाद में भी उन्हें केवल नाममात्र का पद दिया गया।

कांग्रेस में उनकी लगातार उपेक्षा से सीमांत के कांग्रेस कार्यकर्ता मायूस हैं। इस उपेक्षा से खिन्न होकर सभी ब्लाक अध्यक्षों व अन्य पदाधिकारियों ने त्याग पत्र दे दिए हैं। विधायक धामी ने कहा कि कांग्रेस पूर्व सैनिकों व उनके आश्रितों के प्रति नकारात्मक सोच रखती है। उनकी उपेक्षा करती है। वह स्वयं पूर्व सैनिक परिवार से हैं। उनके स्वर्गीय पिता ने 1971 का भारत पाक युद्ध लड़ा था। धामी ने कहा कि उन्होंने 31 वर्षो बाद धारचूला सीट कांग्रेस के खाते में डाली। अपनी सीट छोड़ कर पूर्व सीएम हरीश रावत को चुनाव लड़ा कर विजयी बनाया। 2017 में जब पूरे देश सहित उत्तराखंड में मोदी लहर चल रही थी उस समय भी जनपद में केवल उन्होंने जीत हासिल की। (डॉ. नवीन जोशी) आज के अन्य ताजा ‘नवीन समाचार’ पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें।

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Madan Singh Bisht (@MadanBishtINC) / Twitterनवीन समाचार, देहरादून, 11 अप्रैल 2022। उत्तराखंड कांग्रेस में नेता व उप नेता प्रतिपक्ष तथा प्रदेश अध्यक्ष के पदों पर एक महीने बाद हुई नियुक्तियों के साथ पार्टी में कलह बढ़ गयी है। नेता प्रतिपक्ष की दौड़ में शामिल द्वाराहाट विधायक व प्रदेश महासचिव मदन बिष्ट के तेवर तल्ख हो गए हैं। उन्होंने कांग्रेस हाईकमान को ही निशाने पर ले लिया। कहा कि गलत फैसलों से कांग्रेस रसातल पर पहुंच गई है।

मदन यही नहीं रुके। उन्होंने शीर्ष नेतृत्व को नौसिखिया करार दे दिया। कहा कि शीर्ष पर बैठे लोग पार्टी को आगे बढ़ाने के बजाय डुबाने पर तुले हैं। मदन ने उत्तराखंड में हरीश रावत और प्रीतम सिंह की गुटबाजी को भी पार्टी के लिए नुकसानदेह बताया। मगर ठीकरा हाईकमान पर फोड़ते हुए दो टूक कहा कि जब तक शीर्ष नेतृत्व में बदलाव नहीं किया जाता कांग्रेस का भला नहीं हो सकता।

प्रदेश महासचिव मदन सिंह बिष्ट को नेताप्रतिपक्ष न बनाए जाने से नाराज प्रदेश सचिव जगत रौतेला, प्रवक्ता नारायण सिंह रावत, जिला उपाध्यक्ष दीपक बिष्ट, युवक कांग्रेस के ब्लॉक अध्यक्ष देवेंद्र भंडारी, सचिव प्रताप रावत, शैलेंद्र रावत, दीपक सिंह बिष्ट ने कांग्रेस की सदस्यता से त्यागपत्र दे दिए हैं।

उन्होंने हाईकमान के फैसले को गलत करार दे कड़ा रोष जताया। कार्यकर्ताओं ने कहा कि जब पार्टी हाशिए पर थी तब मदन सिंह बिष्ट ने जिलापंचायत अध्यक्ष पद की कुर्सी कांग्रेस को दिलाई। खुद की लोकप्रियता से विधायक भी बने। मगर कर्मठ नेता की उपेक्षा की गई। हालांकि विधायक मदन ने त्यागपत्र व नाराजगी को पार्टी कार्यकर्ताओं की भावना बताया। (डॉ. नवीन जोशी) आज के अन्य ताजा ‘नवीन समाचार’ पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें।

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उत्तराखंड कांग्रेस के अध्यक्ष, नेता प्रतिपक्ष और उपनेता प्रतिपक्ष कुमाऊं से, प्रीतम सिंह को बड़ा झटकाडॉ. नवीन जोशी @ नवीन समाचार, नैनीताल, 11 अप्रैल 2022। कांग्रेस हाईकमान ने रविवार शाम चौंकाते हुए करन महरा को प्रदेश अध्यक्ष, यशपाल आर्य को नेता प्रतिपक्ष ओर भुवन कापड़ी को उप नेता प्रतिपक्ष बना दिया। माना जा रहा है कि इससे कांग्रेस ने पार्टी की प्रदेश इकाई और कार्यकर्ताओं को नए संदेश दिए हैं।

तीनों नेताओं में एक कॉमन बात ढूंढी जाए तो यह है कि तीनों जमीनी नेता हैं। इनमें यशपाल जहां राजनीति के साथ संसदीय अनुभव के साथ पूरे प्रदेश में पकड़ रखते हैं, वहीं उन्हें छोड़कर शेष दो युवा हैं। जबकि हरीश रावत और प्रीतम सिंह को रीते हाथ छोड़ दिया है। इससे कांग्रेस ने यह संदेश देने की कोशिश की है कि वह भी काम व मेहनत करने की संभावना वाले नेताओं को आगे लाएगी।

इसके बाद यह भी माना जा रहा है कि कांग्रेस प्रदेश के साथ ही सभी जिलों, ब्लॉकों एवं नगरों की अपनी अन्य इकाइयों में भी इसी तरह से बदलाव करेगी। अब तक पदों को अपनी बपौती मान बरसों-दशकों से बैठे नेता-पदाधिकारी बदले जाएंगे। काम के आधार पर उनका मूल्यांकन होगा। यही वह रास्ता है जिस पर भाजपा भी अपने कार्यकर्ताओं को यह संदेश देते हुए आगे बढ़ रही है कि यदि वह मेहनत करेंगे तो वह किसी भी ऊंचाई पर पहुंच सकते हैं।

कांग्रेस पार्टी ने अभी तीनों पद कुमाऊं मंडल को दे दिए हैं। इसके पीछे भी संदेश यही हो सकता है कि कांग्रेस कुमाऊं मंे मजबूत रही। इसलिए पहली बार पार्टी ने प्रदेश में क्षेत्रीय संतुलन न देखते हुए भी नेताओं को मुख्य जिम्मेदारियां दी हैं, और एक तरह का बोल्ड निर्णय लिया है। आगे देखने वाली बात होगी कि पार्टी और उसके नए पदाधिकारी इन संभावनाओं पर कितने खरे उतर पाते हैं। (डॉ. नवीन जोशी) आज के अन्य ताजा ‘नवीन समाचार’ पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें।

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-करन माहरा को उत्‍तराखंड कांग्रेस की कमान, यशपाल आर्य बने नेता प्रतिपक्ष, उत्तराखंड को पहला दलित मुख्यमंत्री न सही पहला दलित नेता प्रतिपक्ष मिला, सीएम धामी को हराने वाले कापड़ी को भी मिला ईनाम
नवीन समाचार, देहरादून, 10 अप्रैल 2022। उत्तराखंड कांग्रेस का नया प्रदेश अध्यक्ष पूर्व उप नेता प्रतिपक्ष करन माहरा को बनाया गया है। जबकि नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य और उपनेता प्रतिपक्ष मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को हराने वाले भुवन चंद्र कापड़ी को बनाया गया है। रविवार देर शाम को कांग्रेस ने प्रदेश अध्यक्ष, नेता प्रतिपक्ष और उप नेता प्रतिपक्ष की नियुक्ति कर दी है। पार्टी की कमान मिलने पर माहरा ने केंद्रीय नेतृत्व का आभार जताते हुए कहा है कि पार्टी ने उन पर भरोसा जताया है। अब लोगों में कांग्रेस के प्रति विश्वास जगाना और पार्टी को आगे बढ़ाना है।

यह भी है कांग्रेस ने प्रदेश अध्यक्ष, नेता प्रतिपक्ष और उप नेता प्रतिपक्ष तीनों कुमाऊं मंडल से बना दिए हैं। इसे निवर्तमान नेता प्रतिपक्ष प्रीतम सिंह व उनके गुट के साथ ही गढ़वाल मंडल के लिए भी बड़ा झटका भी माना जा रहा है। उल्लेखनीय है कि नवनियुक्त प्रदेश अध्यक्ष करन माहरा पूर्व सीएम हरीश रावत के करीबी रिश्तेदार हैं। माना जा रहा है कि उन्हें विधानसभा चुनाव हारने के बावजूद हरीश रावत का रिश्तेदार होने के कारण ही प्रदेश अध्यक्ष पद का ईनाम मिला है।

जबकि यशपाल आर्य ने विधानसभा चुनाव से पूर्व ही करीब साढ़े चार वर्ष भाजपा में रहने के बाद कांग्रेस में वापसी की थी। हरीश रावत के बयान के बाद माना जा रहा था कि कांग्रेस की जीत पर दलित नेता होने के नाते राज्य में पहली बार दलित मुख्यमंत्री के रूप में यशपाल को सरकार की कमान सोंपी जा सकती है। बहरहाल, कांग्रेस ने एक तरह से उन्हें विधायक दल की कमान सोंपकर हरीश रावत द्वारा किया गया वादा निभाया है, और राज्य को पहला दलित नेता प्रतिपक्ष मिल गया है।

उल्लेखनीय है कि पिछले दो विधानसभा और एक लोकसभा चुनाव में भाजपा से बुरी तरह से हारने के बाद अब कांग्रेस के सामने 2024 में होने वाले लोकसभा चुनाव में प्रदर्शन को सुधारने की चुनौती है। खासकर तब जबकि राज्य के राजनीतिक इतिहास में कांग्रेस पार्टी पहली बार सरकार बदलने का इतिहास नहीं दोहरा पाई है और दोबारा विपक्ष में पहुंच गई है। इस हार के बाद कांग्रेस हाईकमान ने प्रदेश अध्यक्ष पद से गणेश गोदियाल का इस्तीफा ले लिया था। (डॉ.नवीन जोशी) आज के अन्य ताजा ‘नवीन समाचार’ पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें।

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-बोले, कांग्रेस चुनाव जीतना तय मानने की वजह से हारी

डॉ. महेंद्र पाल

डॉ. नवीन जोशी @ नवीन समाचार, नैनीताल, 1 अप्रैल 2022। जनता दल एवं कांग्रेस के टिकट पर दो बार नैनीताल संसदीय सीट से सांसद तथा इधर रामनगर विधानसभा से कांग्रेस पार्टी के प्रत्याशी रहे डॉ. महेंद्र पाल पार्टी में हरीश रावत व प्रीतम गुट के बीच खिंची लकीर के बीच कांग्रेस प्रदेश प्रभारी देवेंद्र यादव के समर्थन में उतर पड़े हैं। देखें डॉ.पाल ने क्या कहा : 

शुक्रवार को नगर के एक होटल में पत्रकार वार्ता करते हुए पाल ने कहा कि चुनाव में संगठन अच्छा काम कर रहा था। खासकर प्रदेश प्रभारी की ओर से पहले से बेहतर, भरपूर सहयोग मिला, इस कारण वह नामांकन के दिन ही अपने गृह क्षेत्र से इतर दूसरे क्षेत्र से टिकट मिलने के बावजूद अच्छा चुनाव लड़े। जहां-जहां वह गए वहां-वहां उन्हें बढ़त मिली। बारिश की वजह से जहां नहीं जा पाए, वहां पिछड़े।

अलबत्ता पार्टी की हार के कारणों पर संयमित तरीके से वह हरीश रावत पर हमला बोलते दिखे। बोले, जब सब कुछ रणजीत सिंह कह चुके हैं, तो उसके बाद कुछ कहने की जरूरत नहीं है। कहा कि कांग्रेस पार्टी चुनाव में अपनी जीत तय और यह मानकर चली कि किसी भी स्थिति में कांग्रेस जीतेगी ही, यही उसकी हार का प्रमुख कारण रहा। उन्होंने माना कि कांग्रेस जनतो के मन को समझ नहीं पाई।

इसके अलावा भाजपा को राशन देने का लाभ मिला। कांग्रेस एकजुटता व एक नेतृत्व नहीं दिखा पाई। रामनगर में संजय नेगी सहित कई जगह निर्दलीयों के लड़ने से भी कांग्रेस को नुकसान हुआ। उन्होंने कहा कि दूसरी पार्टी से दल-बदल कर आए लोगों को शामिल करने और टिकट देने का लाभ भी कांग्रेस को नहीं मिला। इस मौके पर कांग्रेस नेता गोपाल बिष्ट भी मौजूद रहे। आज के अन्य ताजा ‘नवीन समाचार’ पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें।

यह भी पढ़ें : कांग्रेस पार्टी से बुद्धिजीवी प्रकोष्ठ के पूर्व पदाधिकारियों का इस्तीफा, लगाए गंभीर आरोप

डॉ. नवीन जोशी @ नवीन समाचार, नैनीताल, 23 मार्च 2022। कांग्रेस पार्टी के पूर्व प्रदेश प्रवक्ता तथा बुद्धिजीवी प्रकोष्ठ के प्रदेश उपाध्यक्ष रह चुके प्रो.ललित तिवारी व बुद्धिजीवी प्रकोष्ठ के पूर्व जिला अध्यक्ष डॉ. विजय कुमार व बुद्धिजीवी प्रकोष्ठ के प्रदेश पदाधिकारी डॉ. ललित मोहन तथा डॉ.प्रदीप कुमार आदि बुद्धिजीवियों ने कांग्रेस पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा देकर पार्टी छोड़ दी है। डॉ. तिवारी व डॉ. कुमार कुमाऊं विश्वविद्यालय शिक्षक संघ यानी कूटा के अध्यक्ष एवं कोषाध्यक्ष भी हैं।

उन्होंने कहा कि कांग्रेस पार्टी नेतृत्व विहीन हो चुकी है तथा जनमानस के विषय उठाने में असफल रही है। उनके बड़े नेता आपसी आरोप-प्रत्यारोप करते रहे हैं, जिससे संगठन कमजोर हुआ है। पार्टी में कार्यकर्ताओं की कोई अहमियत नहीं है। इससे क्षुब्ध होकर उन्होंने पार्टी छोड़ दी है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि उत्तराखंड में विकास हो, जनमानस को योजनाओं का लाभ मिले, रोजगार मिले, यह सरकार को प्राथमिकता होनी चाहिए जिससे उत्तराखंड की आर्थिकी के विकास के साथ-साथ पलायन पर सकारात्मक पहल हो। साथ ही कहा कि उत्तराखंड के सतत विकास के लिए सक्रिय रहेंगे।

चुनाव अभियान के दौरान कांग्रेस पार्टी में शामिल होने के मौके पर बुद्धिजीवी प्रकोष्ठ के पूर्व पदाधिकारी…

उल्लेखनीय है कि इन सभी बुद्धिजीवियों ने विगत वर्ष कांग्रेस छोड़कर भाजपा की भी सदस्यता ली थी तथा इधर हाल ही में कांग्रेस के वरिष्ठ नेता यशपाल आर्य की मौजूदगी में हल्द्वानी के स्वराज आश्रम में फिर से कांग्रेस पार्टी की सदस्यता ग्रहण की थी। लेकिन लगता है कि कांग्रेस पार्टी की हालिया विधानसभा चुनाव में हुई दुर्गति के बाद उन्हें अपने कांग्रेस पार्टी में शामिल होने निर्णय पर अफसोस हुआ है।आज के अन्य ताजा ‘नवीन समाचार’ पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें।

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One Reply to “22 वर्षों बाद नैनीताल कांग्रेस में कुछ बदला, क्या ? जिलाध्यक्ष…

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