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2022 के लिए नैनीताल कांग्रेस ने अभी से कसी कमर, संभावित प्रत्याशी एक मंच पर आये, आगे यह है रणनीति

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-आगे विधानसभा को तीन जोन में बांटकर बूथ स्तर तक पार्टी को मजबूत करने का लिया संकल्प
नवीन समाचार, नैनीताल, 22 नवंबर 2019। वर्ष 2022 के विधानसभा चुनावों के लिए अभी काफी समय शेष है, किंतु कांग्रेस पार्टी ने नैनीताल विधानसभा के लिए अभी से तैयारी प्रारंभ करने की ठान ली है। पार्टी के दो संभावित प्र्रत्याशी-पूर्व विधायक व महिला कांग्रेस की प्रदेश अध्यक्ष सरिता आर्य व भाजपा से कांग्रेस में शामिल होकर स्थापित हो गए हेम आर्य एक मंच पर आ गए हैं, और दोनों ने साथ मिलकर चुनाव की तैयारी में जुटने और दोनों में से किसी को भी टिकट मिलने पर उसकी जीत के लिए कार्य करने का संकल्प जताया है। साथ ही पार्टी ने नैनीताल विधानसभा को तीन जोन में बांटकर बूथ स्तर तक पार्टी को मजबूत करने का संकल्प जताया है। इसकी शुरुआत आगामी 25 नवंबर को हेम आर्य के घोड़ाखाल स्थित आवास पर पार्टी की नैनीताल विधानसभा इकाई की बैठक के साथ होगी। इसके बाद कोश्याकुटौली-बेतालघाट और कोटाबाग मे भी ऐसी ही दो अन्य बैठकें होनी तय हुई हैं।

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शुक्रवार को नैनीताल क्लब में आयोजित पत्रकार वार्ता में दोनों नेताआंे ने एक मंच पर आकर अपने एका और भावी कार्यक्रमों की जानकारी दी। कहा कि आगे की रणनीति 25 नवंबर की बैठक में तय करेंगे। खासकर जल्द ही कोश्याकुटौली तहसील के बेतालघाट में गत दिनों प्रकाश में आये अवैध खनन से संबंधित वीडियो एवं ऑडियो का जिक्र करते हुए वहां प्रदर्शन करने और एसडीएम को ज्ञापन सोंपने का कार्यक्रम तय किया जाएगा। इस मौके पर सरिता आर्य ने अवैध खनन के मामले में नाम आने वाले विधायक का नाम सार्वजनिक करने की मांग की साथ ही बेतालघाट पुलिस पर सत्ता के दबाव में चापड़ निवासी एक कांग्रेस कार्यकर्ता को अवैध खनन के नाम पर प्रताणित करने का आरोप लगाया। हेम आर्य ने गैस, टमाटर, प्याज के दाम बढ़ने का आरोप लगाते हुए प्रदेश में सरकार के निष्क्रिय होने का आरोप लगाया। पार्टी के प्र्रदेश उपाध्यक्ष डा. रमेश पांडे ने कहा कि पार्टी इन कार्यक्रमों के माध्यम से राज्य के साथ ही केंद्र सरकार की नीतियों, महंगाई, रोजगार व आर्थिक मोर्चे पर विफलता को भी जनता के बीच ले जाया जाएगा। इस मौके पर मुन्नी तिवाड़ी, सैयद नदीम मून, जेके शर्मा, धीरज बिष्ट, कैलाश अधिकारी, कृष्ण कौशल साह व बबीता उप्रेती आदि कार्यकर्ता मौजूद रहे।

File Photo

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नवीन समाचार, नैनीताल, 5 नवंबर 2019। उत्तराखंड कांग्रेस के लिए बहुत बड़ा नवीन समाचार है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष प्रीतम सिंह व नेता प्रतिपक्ष इंदिरा हृदयेश को उनके पदों से हटाया जा सकता है। न्यूज एजेंसी आईएएन के अनुसार ‘उत्तराखंड में पार्टी का आधार खोने के प्रतिफल में कांग्रेस पार्टी अपने प्रदेश अध्यक्ष प्रीतम सिंह को किसी ब्राह्मण नेता से बदल सकती है। इसके साथ ही नेता प्रतिपक्ष इंदिरा हृदयेश को भी बदले जाने की योजना है।’

देखें आईएएनएस का ट्वीट :

इस आधार पर माना जा रहा है कि कांग्रेस पार्टी की त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव में ऐतिहासिक तौर पर हुई बुरी गत के बाद कांग्रेस हाईकमान राज्य के अपने दोनों नेताओं को बदलने जा रहा है। पंचायत चुनाव में पार्टी कई जिलों में जिला पंचायत अध्यक्ष पद के और विकास खंडों में ब्लॉक प्रमुख के दावेदार तक खड़े नहीं कर पाई। राज्य की भाजपा सरकार की तमाम खामियों के बावजूद राज्य कांग्रेस के नेता उन मुद्दों को उठाने के बावजूद अपने गुटों में ही बंटे नजर आ रहे हैं। ऐसे में पार्टी सत्तारूढ़ दल के जातीय समीकरणों के उलट गढ़वाल मंडल के किसी ब्राह्मण नेता को पार्टी अध्यक्ष एवं कुमाऊं मंडल के किसी क्षेत्रीय नेता को नेता प्रतिपक्ष बना सकती है। अध्यक्ष पद के लिए पार्टी यदि अपने पूर्व अध्यक्ष किशोर उपाध्याय पर भी भरोसा कर ले तो कोई आश्चर्य नहीं होगा। वहीं नेता प्रतिपक्ष के तौर पर पूर्व विधानसभा अध्यक्ष गोविंद सिंह कुंजवाल पहली और करन महरा दूसरी पसंद हो सकते हैं। यदि ऐसा होता है इसे कांग्रेस का फिर से पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत के हाथों में लौटना होगा, क्योंकि तीनों ही नेता हरीश रावत के हमेशा से करीबी रहे हैं। किशोर जहां हरीश के मुख्यमंत्री रहते प्रदेश अध्यक्ष थे तो कुंजवाल विधानसभा अध्यक्ष। वहीं करन मेहरा हरीश रावत के साले हैं। आगे देखने वाली बात होगी कि निर्णय घोषित होने से पहले ही छन कर आ गई इस खबर के बाद दोनों गुटों के नेता किस तरह इन स्थितियों से निपटते हैं। बहरहाल, आने वाले दिनों में कांग्रेस पार्टी में अंदरूनी गर्मी जरूर बढ़ने वाली है।

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-जिला पंचायत के लिए अपने उम्मीदवारों की घोषणा करने में चूकी
-हाईकोर्ट से अनिर्णय की स्थिति में ज्यादातर दावेदारों ने किये नामांकनअब नाम वापसी के जरिये कांग्रेस टकराव कम करने की कोशिश करेगी
नवीन समाचार, देहरादून, 26 सितंबर 2019। पंचायत चुनावों में दो से अधिक बच्चे वालों के चुनाव न लड़ने के झमेले ने कांग्रेस की चुनावी रणनीति गड़बड़ा दी है। पार्टी आखिरी समय तक इस मामले को लेकर गफलत में रही। यही वजह रही कि कांग्रेस अपनी ओर से इस मामले में कोई स्टैण्ड नहीं ले पाई। इस गफलत का अंजाम यह हुआ कि ज्यादातर जनपदों में कांग्रेस जिला पंचायत के उम्मीदवारों की सूची नामांकन की अंतिम तिथि तक भी जारी नहीं कर पाई। ऐसे में कांग्रेस बैकग्राउंड के कई-कई दावेदार एक ही सीट से चुनावी मैदान में कूद गये हैं। पार्टी को इससे नुकसान भी हो सकता है। इस बारे में पार्टी के प्रदेश उपाध्यक्ष सूर्यकांत धस्माना का कहना है कि कांग्रेस के पास अभी भी समय है, नाम वापसी का समय शेष है। पार्टी इससे पहले अपने समर्थित दावेदारों का नाम घोषित कर देगी, जिससे स्थिति साफ हो जाएगी।

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दो बच्चों को लेकर कांग्रेस की गफलत इस बात को लेकर हुई कि हाईकोर्ट ने कांग्रेस नेता जोत सिंह बिष्ट व अन्य की याचिका पर निर्णय देते हुए दो बच्चों के लिए समय सीमा तय करते हुए 25 जुलाई 2019 कर दी थी। यानि उस तिथि के बाद जिनके तीन बच्चे हुए वही चुनाव में भाग नहीं ले सकते, अन्य सभी चुनाव लड़ सकते हैं। इस आदेश की आधी व्याख्या करते हुए कांग्रेस ने पहले अपनी जीत मानते हुए मान लिया कि ग्राम पंचायत, क्षेत्र पंचायत व जिला पंचायत सभी में यह आदेश लागू होगा। किंतु पहले सरकार और फिर हाईकोर्ट ने साफ कर दिया कि हाईकोर्ट ने धारा 8(1) आर में जो व्यवस्था दी, वह केवल ग्राम प्रधान, उप प्रधान व ग्राम सभा के वार्ड मेंबरों पर लागू होता है। इसका अंदाजा कांग्रेस को नहीं था। पंचायत जनाधिकार मंच व अन्य कई लोगों की याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए मंच ने जिला पंचायत सदस्यों व बीडीसी मेंबरों के लिए फिर से याचिका लगायी, लेकिन नाउम्मीदी ही हाथ लगी। कोर्ट का आदेश आने के बावजूद सत्ताधारी पार्टी भाजपा अपने स्टैण्ड पर कायम रही और पार्टी संगठन ने एक साथ पूरे प्रदेशभर के लिए समर्थित जिला पंचायत सदस्यों के दावेदारों की सूची जारी कर दी। जबकि कांग्रेस ऊहापोह की स्थिति में रह गयी। सूची जारी होते ही भाजपा का पूरा संगठन उनके प्रचार में जुट गया। कांग्रेस हाईकोर्ट के आदेश के स्पष्ट होने का इंतजार करती रही और उसने अधिकांश जिलों में समर्थित दावेदारों की सूची भी जारी नहीं सकी। इसकी वजह से प्रत्येक सीट पर चुनाव लड़ने के इच्छुक कई-कई कांग्रेसियों ने अपना नामांकन कर लिया है। अब जबकि कोर्ट से इस मामले में कोई राहत नहीं मिली है, कांग्रेस में जिला पंचायत सदस्य की एक ही सीट के लिए कई दावेदार हो गए हैं। कांग्रेस के सामने अब इन दावेदारों को मनाने की कड़ी चुनौती खड़ी हो गयी है।

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नवीन समाचार, देहरादून, 15 अगस्त 2019। देहरादून की एक अदालत ने चेक बाउंस के एक मामले में कांग्रेस के एक वरिष्ठ नेता के छोटे भाई के खिलाफ बुधवार को गिरफ्तारी वॉरंट जारी किया। अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मैजिस्ट्रेट (तृतीय), देहरादून विभा यादव की अदालत ने उत्तराखंड कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष किशोर उपाध्याय के छोटे भाई सचिन उपाध्याय द्वारा मामले में पेश होने के अदालती समन का कोई जवाब न देने के बाद उनके खिलाफ यह वॉरंट जारी किया।

अदालत ने अधिकारियों को उपाध्याय को गिरफ्तार करने और उन्हें 16 सितंबर तक अदालत में पेश करने के आदेश दिए। उपाध्याय पर आरोप है कि उन्होंने ‘पाइन एंड पीक डिवेलपर्स’ नाम की कंपनी से ऋण लिया था जिसे चुकाने के लिए उन्होंने नवंबर, 2017 में फर्म को तीन करोड़ रुपये का चेक जारी किया, लेकिन बैंक ने इस चेक को यह कहते हुए लौटा दिया कि यह बैंक खाता पहले ही बंद हो चुका है। इस पर कंपनी ने अपने वकील के माध्यम से उपाध्याय को नोटिस भेज उन्हें चेक बाउंस के बारे में सूचना दी लेकिन उनके द्वारा फर्म को ऋण का भुगतान नहीं किया गया।
इसके बाद उसे अदालत का दरवाजा खटखटाने के लिए मजबूर होना पड़ा। मामले से जुड़े तथ्यों और दस्तावेजों को देखने के बाद अदालत ने उपाध्याय को पेश होने का समन भेजा, लेकिन उन्होंने इसका भी जवाब नहीं दिया। इसके बाद अदालत ने उनके खिलाफ गिरफ्तारी वॉरंट जारी कर दिया।

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-महिला कांग्रेस प्रदेश उपाध्यक्ष ने जाटव को जिम्मेदार बताकर दी आत्महत्या की धमकी
-जिम्मेदार बताये जा रहे युवा कांग्रेस के विधानसभा अध्यक्ष पवन जाटव ने एसएसपी को पत्र लिखकर की कार्रवाई की मांग
नवीन समाचार, नैनीताल, 26 जून 2019। पहले नगर के एक शौचालय और फिर एक स्कूल को लेकर महिला कांग्रेस की प्रदेश उपाध्यक्ष गजाला कमाल एवं युवा कांग्रेस के विधानसभा अध्यक्ष के बीच विवाद बढ़ता ही जा रहा है। गजाला ने इस मामले में व्हाट्सएप के नैनीताल कांग्रेस ग्रुप में लिखा है कि उन्हें जिस तरह पवन जाटव के द्वारा सोशल मीडिया तथा व्हाट्सएप के नैनीताल कांग्रेस व शहर के अन्य ग्रुपों में बदनाम किया जा रहा है, उससे वे मानसिक रूप से प्रताणित हो रही हैं। उन्हें लगने लगा हैं कि वे ज्यादा समय यह सब झेल नहीं पाएंगी। इसलिए किसी दिन भी परेशान होकर जहर खाकर या फांसी लगाकर आत्महत्या कर लेंगी, और इसकी जिम्मेदारी पवन जाटव की होगी।
वहीं इसके बाद पवन जाटव ने गजाला के इस संदेश को लेकर ही जनपद के एसएसपी को एक ज्ञापन सोंपा है। ज्ञापन में कहा गया है कि गजाला के द्वारा एक सोसायटी के सचिव के रूप में एक विद्यालय का बिना किसी विधिक अनुमति के संचालन किया जा रहा है। इस विषय पर उन्होंने गत 18 जून को पत्रकार वार्ता की थी। इसके बाद गजाला के द्वारा सोशल मीडिया पर आत्महत्या की धमकी दी जा रही है, जो कि भारतीय दंड संहिता के अंतर्गत जघन्य अपराध है। लिहाजा उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाए।

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-स्कूल को लेकर युवा कांग्रेस नेता ने महिला कांग्रेस की अध्यक्ष व अन्य पर लगाये आरोप

पत्रकार वार्ता करते युवा कांग्रेस के विधानसभा अध्यक्ष पवन जाटव।

नवीन समाचार, नैनीताल, 18 जून 2019। नगर का एक प्राथमिक विद्यालय कांग्रेस पार्टी के दो धड़ों के बीच का जंग का मैदान बनता नजर आ रहा है। युवा कांग्रेस के विधानसभा अध्यक्ष पवन जाटव ने नगर के मल्लीताल में अयारपाटा वार्ड स्थित एक प्राथमिक स्कूल को लेकर महिला कांग्रेस की प्रदेश अध्यक्ष, नगर पालिका की सभासद, नगर पालिका, शिक्षा विभाग आदि पर निशाना साधा है। जाटव का आरोप है कि स्कूल तत्कालीन स्थानीय विधायक व महिला कांग्रेस की प्रदेश अध्यक्ष सरिता आर्य की शह पर उनकी अध्यक्षता वाली एक सोसायटी के नाम से नगर पालिका की भूमि पर अवैध तरीके से कब्जा करके बनाया गया है।
सोसायटी की सचिव नगर पालिका की सभासद व वरिष्ठ कांग्रेस नेत्री गजाला कमाल हैं, लिहाजा नगर पालिका सूचना के अधिकार के तहत मांगी गयी सूचनाएं छुपा रही है, अलबत्ता पालिका के जवाब से इतना साफ हो गया हैं कि विद्यालय के लिए भूमि नगर पालिका की ओर से आवंटित नहीं की गयी है। विद्यालय के लिए सीवर व बिजली के संयोजन एक पूर्व सभासद के नाम पर अब भी चल रहे हैं, जो आजन्म कुंवारी थीं और जिनकी 29 सितंबर 2014 की मृत्यु हो गयी है, और विद्यालय उनकी मृत्यु के बाद 29 जनवरी 2016 से संचालित किया जा रहा है। वहीं शिक्षा विभाग से सूचना के अधिकार के तहत प्राप्त जानकारी के अनुसार स्कूल का पंजीकरण भी नहीं कराया गया है।
मंगलवार को एक होटल में आयोजित पत्रकार वार्ता में जाटव ने बताया कि उन्होंने पूरे प्रकरण की शिकायत प्रदेश के मुख्य मंत्री, शिक्षा सचिव, प्राथमिक शिक्षा निदेशक, जनपद के डीएम, सीईओ, सोसायटी पंजीकरण के रजिस्ट्रार, नगर पालिका के अध्यक्ष व अधिशासी अधिकारी आदि से कर दी है। यदि शीघ्र ही मामले में कार्रवाई नहीं की जाती है तो स्कूल संचालकों के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 420, 431, 432, 406, 467, 468, 471 व 120 बी के तहत कार्रवाई करने की मांग को लेकर न्यायालय की शरण में जाएंगे।
वहीं विद्यालय से जुड़ी पालिका सभासद गजाला कमाल का कहना है कि विद्यालय पूरी तरह से गैर लाभकारी एवं कम आय वर्ग के बच्चों को अंग्रेजी माध्यम से बेहतर शिक्षा देने के लिए समिति के माध्यम से चलाया जा रहा है। पूर्व में समिति के माध्यम से ही विद्यालय चलाये जा सकते थे। इधर दो वर्षों से ही शिक्षा विभाग में पंजीकरण का नियम आया है। इसके लिए कई बार फाइल तैयार की जा चुकी है। उम्मीद जताई कि कुछ औपचारिकताएं पूरी हो जाने के बाद विद्यालय का शिक्षा विभाग में पंजीकरण हो जाएगा। उन्होंने खुद के द्वारा पालिका की किसी भी संपत्ति पर कब्जा किये जाने से भी इंकार किया। उन्होंने बताया कि इस संबंध में उन्होंने आरोप लगा रहे युकां नेता के करीब पार्टी के एक नेता से भी इस संबंध में बात की, लेकिन अपेक्षित सहयोग नहीं मिला। ऐसे में कहा जा रहा है कि यह मामला तूल पकड़ने के साथ ही कांग्रेस पार्टी के दो गुटों के बीच की दूरी को और बढ़ाना वाला साबित हो सकता है।

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-सुमित्तर भुल्लर की नियुक्ति से युवा कांग्रेस में आक्रोश, वर्तमान अध्यक्ष पूर्व सीएम के निकटस्थ करीबी रणजीत रावत के पुत्र विक्रम रावत, सुमित्तर भुल्लर को बनाया गया है कार्यकारी अध्यक्ष, हरीश-रणजीत के बीच की खाई बढ़ने के भी हैं संकेत

नवीन समाचार, देहरादून, 17 जून 2019। लोकसभा चुनावों में करारी शिकस्त झेलने के बाद भी कांग्रेस में अंदरूनी लड़ाई खत्म होने का नाम नहीं ले रही। युवा कांग्रेस में कार्यकारी अध्यक्ष नियुक्त किये गये सुमित्तर भुल्लर की नियुक्ति का भी विरोध शुरू हो गया है। भुल्लर की नियुक्ति से हरीश रावत व रणजीत रावत के बीच की दूरियां बढ़ने के संकेत भी मिल रहे हैं। युवा कांग्रेस के नेता विकास नेगी ने इस नियुक्ति को कांग्रेस के लिए दुर्भाग्यपूर्ण करार देते हुए राष्ट्रीय महासचिव हरीश रावत को निशाने पर लिया है। नेगी ने रावत के नाम से एक पत्र लिखकर सोशल मीडिया पर वायरल किया है। हरीश रावत को संबोधित पत्र में लिखा गया है ‘‘आपके द्वारा उत्तराखंड कांग्रेस को खत्म करने के बाद आपका एक और मास्टर स्ट्रोक अब युवा कांग्रेस को खत्म करने के लिए है। नेगी ने लिखा है कि युवा कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष विक्रम रावत राहुल गांधी के द्वारा चलाई जा रही चुनाव प्रणाली से चुनाव जीत कर आये हैं। जो उस चुनाव प्रणाली में हार गया हो और हार भी तब जब उसके साथ आप जैसे बड़े नेता का साथ व आशीर्वाद एवं मार्गदर्शन रहा हो। उन्होंने कहा है कि उत्तराखंड का युवा आपको अपना प्रेरणास्रेत समझता था। आप उन युवाओं के लिए आइडियल थे जो गरीब परिवार से उच्च राजनीति में आने के सपने देखते थे। आपके द्वारा सुमित्तर भुल्लर को उत्तराखंड में बनाया गए कार्यकारी अध्यक्ष से साफ हो गया है कि आप भी उन्हीं लोगों को आगे बढ़ाने में बढ़ावा देंगे जो सिर्फ बड़े नेताओं की आवभगत करेगा। उन्होंने लिखा है कि प्रदेश अध्यक्ष विक्रम रावत ने उत्तराखंड में पलायन को रोकने के लिए अच्छी पहल की है, लेकिन उनको वो सम्मान नहीं मिला जो मिलना चाहिए था। हम अपने अध्यक्ष विक्रम रावत के साथ है जिन्होंने अपनी मेहनत और आप सबके आशीर्वाद से खुद को साबित किया है। वह जो चुनाव जीत के आया है। बहरहाल रावत पर यह निशाना किसी के इशारे पर साधा गया है या फिर युवा कांग्रेस के भीतर की ही आवाज है अभी नहीं कहा जा सकता है। मगर इतना साफ है कि सुमित्तर भुल्लर की नियुक्ति यदि हरीश रावत की पैरवी से हुई है तो हरीश रावत के सबसे खास रणजीत रावत और हरीश रावत के बीच की खाई बढ़ गयी है। विक्रम रावत रणजीत रावत के ही पुत्र हैं और रणजीत रावत के बारे में यह कौन नहीं जानता कि वे हरीश रावत की सरकार में औद्यौगिक सलाहकार के रूप में सबसे पावरफुल व्यक्ति थे।

यह भी पढ़ें : पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष के भाई पर ब्लेकमेलिंग व धोखाधड़ी के आरोप, सीएम ने दिये एसआईटी से जांच कराने के आदेश

नवीन समाचार, देहरादून, 15 जून 2019। उत्तराखंड के मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने कांग्रेस पार्टी के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष किशोर उपाध्याय के छोटे भाई सचिन उपाध्याय के खिलाफ ब्लैकमेलिंग और धोखाधड़ी के आरोपों की छानबीन विशेष जांच दल (एसआईटी) से कराने के आदेश दिए हैं। सचिन पर आरोप है कि उन्होंने अपने बिजनेस पार्टनर के 50 फीसद शेयर जाली हस्ताक्षर करके अपनी पत्नी के नाम करा लिये हैं। साथ ही सचिन के भाई किशोर उपाध्याय की राजनीतिक हैसियत को देखते हु शिकायतकर्ता ने अपनी जान को भी खतरा बताया है। इस पर मुख्यमंत्री ने राज्य के गृह सचिव को लिखे नोट में कहा है कि आरोप गंभीर प्रकृति के प्रतीत होने के कारण इनकी जांच एसआईटी से कराई जाए। नोट में कहा गया, ‘‘प्रकरण अत्यंत ही गंभीर प्रकृति का प्रतीत होता है। अतरू एसआईटी जांच हेतु संबंधित अधिकारी को निर्देशित करें।’’
उल्लेखनीय है कि मुकेश जोशी नाम के व्यक्ति ने मुख्यमंत्री को शिकायती पत्र लिख कर आरोप लगाया था कि उसके पूर्व बिजनेस पाटर्नर सचिन ने ‘एसएम हॉस्पिटैलिटी प्राइवेट लिमिटेड’ नाम के संयुक्त उपक्रम में से उसके हिस्से के 50 फीसदी शेयर उसके जाली दस्तखत कर अपनी पत्नी के नाम कर दिए। इस पत्र के आधार पर मुख्यमंत्री रावत ने एसआईटी जांच के आदेश दिए हैं। जोशी ने सचिन पर ब्लैकमेलिंग करने का आरोप लगाते हुए उसके भाई किशोर की राजनीतिक हैसियत को देखते हुए अपनी जान का खतरा भी बताया है। अपनी शिकायत में जोशी ने खुद को निवेशक बताते हुए कहा कि वह वर्तमान में देहरादून के चालंग गांव में प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत दुर्बल आय वर्ग के लोगों के लिए 2180 फलैट बना रहा है। इस प्रकरण में जोशी ने मुख्यमंत्री से निष्पक्ष जांच की मांग की थी।

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नवीन समाचार, नैनीताल, 9 मई 2019। नगर के मल्लीताल स्थित शत्रु संपत्ति-मेट्रोपोल होटल के निचले आबादी वाले क्षेत्र में टिन शेड के रूप में बन रहा एक कच्चा शौचालय क्षेत्र के दो कांग्रेसी नेताओं, सभासद गजाला कमाल व युवा कांग्रेस नेता पवन जाटव के बीच जंग का कारण व प्रतिष्ठा का प्रश्न बन गया है। जाटव शौचालय के पक्ष में हैं। वहीं उन्होंने सभासद गजाला के मामले के बीच में आने पर उनके खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। सभासद द्वारा संचालित किये जा रहे एक प्रिपरेटरी स्कूल के बारे में जाटव ने सूचना के अधिकार के तहत सभी संबंधित विभागों से जानकारियां मांग ली हैं। आगे आने वाले दिनों में इस मामले के और तूल पकड़ने और दोनों के बीच जंग के और बढ़ने के पूरे आसार दिख रहे हैं। यहां तक कि मामला आगामी विधानसभा चुनाव के लिये कांग्रेस के विधायक प्रत्याशियों की नाक की लड़ाई भी बन जाए तो आश्चर्य न होगा।
इस शौचालय का मामला बृहस्पतिवार को एक बार फिर पुलिस कोतवाली पहुंच गया। क्षेत्र की सभासद गजाला कमाल की अगुवाई में आये क्षेत्रीय लोगों का कहना था कि गत दिनों शिकायत पर रीना पवार नाम की महिला के द्वारा टिनशेड के रूप में बनाये जा रहे शौचालय को जिला विकास प्राधिकरण की टीम ने ध्वस्त कर दिया था, इसे फिर से बनाया जाने लगा है। उनका कहना था कि या तो सभी लोगों को शौचालय बनाने की स्वीकृति मिलनी चाहिये। वहीं महिला युवा कांग्रेस नेता पवन जाटव व अन्य का कहना था कि महिला और उसकी बच्चियां आज के दौर में भी शौचालय न होने के कारण जंगल में जाने का मजबूर हैं।

यह भी पढ़ें : हरीश रावत ने बताया लोक सभा चुनाव लड़ने की वजह, यह भी बताया कि नैनीताल से हारने के बाद क्या करेंगे…

नवीन समाचार, नैनीताल, 13 अप्रैल 2019। उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने अपने लोक सभा चुनाव लड़ने की वजह पर खुलासा किया है। एक समाचार चैनल से बात करते हुए हरीश रावत ने कहा कि वह पिछला विधानसभा दो सीटों से हारने का कारण जानने के उद्देश्य से खुद की जांच करना चाहते थे। इसलिये उन्होंने 2019 का लोक सभा चुनाव लड़ा। वे जानना चाहते हैं कि प्रदेश में ‘उत्तराखंडियत’ की दिशा में कार्य करने के बावजूद वे दो सीटों से चुनाव क्यों हारे। उनकी वह हार ‘एक्सीडेंटल’ यानी दुर्घटनावश थी, अथवा जनता ने उन्हें जान-बूझकर हराया था। इस प्रश्न का उत्तर जानने के लिए वे 2022 के विधानसभा चुनाव तक का इंतजार नहीं कर सकते थे, इसलिये उन्होंने यह लोक सभा चुनाव लड़ा। इसके साथ ही न केवल उन्होंने 2022 को विधानसभा चुनाव लड़ने का इशारा किया, साथ ही साफ तौर पर कहा कि यदि वे यह लोक सभा चुनाव हार भी गये तो वे इससे बहुत निराश होने वाले नहीं हैं। उन्होंने कहा, वे जीत के साथ बहुत उत्साहित और हार से बहुत निराश होने वाले नहीं हैं। यदि वे नैनीताल से चुनाव हारे तो दूसरे संघर्ष की ओर बढ़ जाएंगे।
इसके अलावा उन्होंने प्रदेश में टिहरी से कांग्रेस प्रत्याशी प्रीतम सिंह की जीत को जरूरी बताया। कहा, पार्टी उनमें लंबा नेतृत्व देख रही है। इसलिये पार्टी के लिए उनका जीतना जरूरी है।

यह भी पढ़ें : कांग्रेस प्रत्याशी हरीश रावत को चुनाव के दिन भी आयोग का नोटिस

-प्रचार बंद होने के बाद भी सोशल मीडिया पर प्रचार करने का है आरोप

नवीन समाचार, नैनीताल, 11 अप्रैल 2019। नामांकन के बाद से ही चुनाव आयोग से आचार संहिता के उल्लंघन कर रहे नैनीताल-ऊधमसिंह नगर लोक सभा क्षेत्र के कांग्रेस प्रत्याशी हरीश रावत व उनके समर्थक मतदान तक भी ऐसा करने से नहीं रुक रहे। उन्हें ज्योलीकोट में बिना इजाजत के जनसभा करने के बाद भी चुनाव आयोग से नोटिस मिला था, और अब चुनाव आयोग के ऐप-सी-विजिल पर आई शिकायत के आधार पर उन्हें मतदान के दिन भी चुनाव आयोग ने नोटिस भेजा गया है। बृहस्पतिवार सुबह साढ़े 10 बजे रावत के अभिकर्ता पुष्कर राज जैन को भेजे गये नोटिस में कहा गया है कि उनके समर्थकों के द्वारा फेसबुक आदि सोशल मीडिया व अन्य प्रचार माध्यमों पर प्रचार बंद होने की समय सीमा के बाद भी अपने पक्ष में मतदान करने के लिये प्रचार किया गया। उन्हें निर्धारित समय सीमा के भीतर हल्द्वानी विधानसभा में अपना जवाब दाखिल करने को कहा गया है।

यह भी पढ़ें : कांग्रेस के घोषणापत्र में अफस्पा में बदलाव की बात से उत्तराखंड के पूर्व सैनिकों में जबर्दस्त गुस्सा
नवीन समाचार, नैनीताल, 4 अप्रैल 2019। कांग्रेस के घोषणापत्र में अफस्पा यानी आर्म्ड फोर्सेस स्पेशल पावर एक्ट (एएफपीएसए) यानी सशस्त्र बल विशेष शक्तियां अधिनियम में बदलाव की बात से सैनिक बाहुल्य प्रदेश उत्तराखंड में जबर्दस्त गुस्सा नजर आ रहा है। कांग्रेस द्वारा अपने घोषणापत्र में इसमें बदलाव करने और राष्ट्रद्रोह की धाराओं में संशोधन की बात को लेकर देश भर में तो बहस छिड़ ही गई है। उत्तराखंड में रहने वाले यहां तक कि कांग्रेस को पसंद करने वाले सेवानिवृत्त सैन्य अधिकारी व कर्मी भी इन दोनों बिंदुओं को लेकर बेहद नाराज हैं। उनका मानना है कि घाटी से अफस्पा में बदलाव करने से कश्मीर में सीमा पर तैनात सैनिकों के हाथ बंध जाएंगे और इससे उनका मनोबल भी प्रभावित होगा। वोटरों को लुभाने के लिए भी इस तरह की इस तरह की बात नहीं कही जानी चाहिऐ।
इस बारे में सेवानिवृत्त लेफ्टिनेंट जनरल एमसी भंडारी का कहना है कि हालांकि उन्होंने किसी पार्टी का घोषणा पत्र नहीं पढ़ा है। परंतु यदि कांग्रेस पार्टी के घोषणा पत्र में राष्ट्रद्रोह और अफस्पा को हटाने की बातें लिखीं हैं तो यह राष्ट्र का अपमान है। यह राष्ट्र के हित में नहीं है और नीति विहीन है। उन्होंने कहा कि भारतीय सेना किसी राजनीतिक दल के प्रभाव में नहीं वरन देश के यह राष्ट्रपति के अधीन होती हैं, और वे अपनी मर्जी से नहीं बल्कि विशेष परिस्थितियों में जब स्थितियां पुलिस एवं अन्य केंद्रीय सुरक्षा बलों के नियंत्रण से बाहर हो जाती हैं, तब गजट नोटिफिकेशन के माध्यम से केंद्र एवं राज्य सरकार के बुलावे पर जम्मू-कश्मीर, नागालेंड जैसे क्षेत्रों में कार्य करती हैं। यहां कार्य करने के लिए उन्हें अपनी निजी एवं कानूनी सुरक्षा के लिए अफस्पा जैसे कानून की आवश्यकता पड़ती है। उन्होंने कहा कि देश में संसदीय प्रजातंत्र है, सब स्वतंत्र हैं लेकिन स्वच्छंद नहीं। अनुशासित व मर्यादित संसदीय परंपरा इसकी मूलभावना है। इसलिए हमें इसी दायरे में रहकर काम करना होगा। जम्मू-कश्मीर में सेना अपनी मर्जी से नहीं है और न ही सैनिक राजनीति से प्रेरित हैं। अगर सैनिक को सुरक्षा नहीं मिलेगी तो काम कैसे होगा। जहां तक राष्ट्रद्रोह की धारा खत्म करने की बात है तो ऐसा सोचना राष्ट्र का अपमान करने जैसा है। यह भी कहा कि अफस्पा को हटाना लगभग असंभव है।
वहीं आम लोगों में भी इन दोनों प्राविधानों के प्रति खासा गुस्सा नजर आ रहा है। लोग कह रहे हैं, देश की सबसे पुरानी पार्टी से इस तरह के चुनावी वायदे की उम्मीद नहीं थी। अल्पसंख्यक वर्ग में भी इस पर नाराजगी नजर आ रही है। उनका कहना है कि देशद्रोह की धारा हटाने से यह संदेश भी जा रहा है कि उनकी हितैशी बनने वाली कांग्रेस पार्टी पूरे अल्पसंख्यक वर्ग को देशद्रोही मानती है, और देशद्रोह कानून को हटाकर उन्हें कानूनी कवच दिलाना चाहती है।

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नवीन समाचार, नई दिल्ली (पीटीआई) 1 अप्रैल 2019। दुनिया की दिग्गज सोशल मीडिया साइट फेसबुक ने सोमवार को बताया कि उसने कांग्रेस पार्टी से जुड़े 687 पेज और अकाउंट तथा पाकिस्तानी सेना के जनसंपर्क शाखा के अधिकारियों से जुड़े 103 पेजों, ग्रुप्स और अकाउंट को हटा दिया है, क्योंकि वह गलत तरीके से ऑपरेट किये जा रहे थे, उन्हें कांग्रेस के आईटी सेल से जुड़े लोग अपनी पहचान छिपाकर चला रहे थे। इनके अलावा फेसबुक ने भाजपा का समर्थन करने वाली आईटी फर्म सिल्वर टच से जुड़े 15 पेज, ग्रुप व अकाउंट हटाने की बात भी कही है। इनमें भी संचालित करने वालों ने अपनी पहचान छिपाने की कोशिश की थी। यह कंपनी नमो ऐप का सहारा लेकर भाजपा का प्रमोशन करती थी। फर्जी तरीके से इस तरह की गतिविधियों को संचालित करने वाले सभी अकाउंट को फेसबुक की स्वचालित प्रणाली ने हटाया है। यह इत्तेफाक ही है कि कुछ और कि कांग्रेस और पाकिस्तान के इतनी बड़ी संख्या में खाते व पेज बंद करने की जानकारी एक ही दिन आई है। आने वाले दिनों में खासकर कांग्रेस के लिए इस सवाल पर जवाब देना भारी पड़ सकता है।

कांग्रेस से जुड़े 687 पेजेज को रिमूव करने की जानकारी फेसबुक साइबर सिक्योरिटी के हेड नाथनील ग्लीचर ने दी। उन्होंने कहा, ‘हमने कांग्रेस से जुड़े 687 पेज को हटाया है। कहा कि कांग्रेस की आईटी सेल से संबद्ध 138 पेज और 549 अकाउंट हटाये गये हैं। इन अकाउंट को दो लाख 6000 लोग फॉलो कर रहे थे। इन अकाउंट को व्यक्तिगत रुप से संचालित किया जा रहा था। उन्हें हटाए जाने का कारण उनका ‘अनुचित  व्यवहार’ है, कांग्रेस आईटी सेल से जुड़े हुए कुछ लोग उन्हें ऑपरेट कर रहे थे, वे अपनी पहचान छिपाने के लिए फर्जी अकाउंट के नेटवर्क का भी उपयोग कर रहे थे। हम लगातार अपने साइट पर गलत गतिविधियों का पता लगाने और उन्हें रोकने पर काम कर रहे हैं क्योंकि हम नहीं चाहते हैं कि हमारे प्लेटफॉर्म का उपयोग लोगों को हेरफेर करने के लिए किया जाए।
उन्होंने कहा कि पेज के एडमिन्स और अकाउंट ओनर आमतौर पर स्थानीय समाचारों और राजनीतिक मुद्दों के बारे में पोस्ट करते थे, जिसमें आगामी चुनाव, उम्मीदवार के विचार, भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) सहित राजनीतिक विरोधियों की आलोचना हैं। इस गतिविधि के पीछे के लोगों ने अपनी पहचान छिपाने की कोशिश की लेकिन हमारी समीक्षा में पाया गया कि यह एक कांग्रेस सेल से जुड़े व्यक्तियों काम है। बता दें कि फेसबुक इस तरह का कदम उठाकर यह सुनिश्चित कर रहा है कि लोकसभा चुनाव 2019 में इसके प्लेटफॉर्म का गलत इस्तेमाल नहीं किया जायेगा। भारत सरकार ने भी चुनाव में किसी प्रकार का हस्तक्षेप ना हो, इसके लिए कुछ दिनों पहले फेसबुक को चेतावनी दी थी। गौरतलब है कि फेसबुक पर भारत को लेकर गलत जानकारी देने के लिए कंपनी ने पाकिस्तानी सेना के जनसंपर्क शाखा के अधिकारियों से जुड़े 103 पेजों, ग्रुप्स और अकाउंट को भी रिमूव कर दिया है। हालांकि, पाकिस्तान की ओर से भी इसको लेकर कोई टिप्पणी नहीं की गई है।

कांग्रेस ने इस मामले में टिप्पणी करते हुए कहा है कि उनके किसी ऑफिसियल पेज को नहीं हटाया गया है। उधर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने फेसबुक द्वारा कांग्रेस पार्टी से जुड़े 687 अकाउंट बंद किये जाने का स्वागत करते हुए सोमवार को कहा कि इनके माध्यम से मोदी सरकार के विरुद्ध दुष्प्रचार किया जा रहा था। भाजपा के वरिष्ठ नेता एवं केन्द्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद ने संवाददाताओं से कहा कि आज एक बहुत ऐतिहासिक घटना हुई है। फेसबुक ने 687 अकाउंट हटा दिये हैं। ये फर्जी अकाउंट थे जिन्हें बनाने वालों का कोई पता नहीं था। ये सब अकाउंट नरेन्द्र मोदी सरकार के विरुद्ध दुष्प्रचार करने में लिप्त थे।

उन्होंने यह भी कहा कि फेसबुक पर विज्ञापन के लिए करीब 39 हजार डॉलर खर्च किये गये हैं। फेसबुक पर पहला विज्ञापन 2014 में दिया गया था और उसके बाद जितने विज्ञापन इस माध्यम से जारी किए गए उनमें अधिकांश 2019 के हैं। 

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p style=”text-align: justify;”>-अनुपम नैनीताल, जमुना सुयालबाड़ी, दुम्का हल्दूचौड़ व कमला कोटाबाग के अध्यक्ष नियुक्त
नवीन समाचार, नैनीताल, 7 मार्च 2019। ‘नवीन समाचार’ द्वारा एक दिन पूर्व ही जताई गयी संभावना सही साबित हुई और कुमाऊं विवि के पूर्व छात्र नेता अनुपम कबडवाल जिला व मंडल मुख्यालय नैनीताल के नगर कांग्रेस अध्यक्ष नियुक्त कर दिये गये हैं। बृहस्पतिवार शाम कांग्रेस पार्टी के जिलाध्यक्ष सतीश नैनवाल ने प्रदेश अध्यक्ष प्रीतम सिंह की संस्तुति पर उनकी नियुक्ति के आदेश जारी कर दिये हैं। उनके अलावा जमुना दत्त कत्यूरा को ब्लॉक कांग्रेस कमेटी सुयालबाड़ी, कैलाश दुम्का को ब्लॉक कांग्रेस कमेटी हल्दूचौड़एवं कमला बधानी को ब्लॉक कांग्रेस कमेटी कोटाबाग का अध्यक्ष नियुक्त करने के आदेश जारी कर दिये हैं।
उल्लेखनीय है कि अनुपम 1999 में डीएसबी परिसर छात्र संघ के उपाध्यक्ष व 2003 में अध्यक्ष रहे हैं तथा 2007 से हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के सदस्य अधिवक्ता हैं। नैनीताल नगर में कांग्रेस नगर अध्यक्ष का पद अक्तूबर माह में तत्कालीन नगर अध्यक्ष मारुति नंदन साह द्वारा पदत्याग करने के बाद से रिक्त चल रहा था।

पूर्व समाचार : ‘इस’ के बाद अनुपम का नैनीताल नगर कांग्रेस अध्यक्ष बनना तय

नवीन समाचार, नई दिल्ली, 7 मार्च 2019। पूर्व छात्र नेता अनुपम कबडवाल का नगर कांग्रेस अध्यक्ष बनना अब तय नजर आ रहा है। उल्लेखनीय है कि वरिष्ठ नेता व पूर्व सभासद जेके शर्मा तथा पूर्व नगर पालिकाध्यक्ष मुकेश जोशी भी अध्यक्ष बनने की सूची में बताये गये थे, लेकिन इधर दो दिन पूर्व उन्हें जिला कार्यकारिणी में क्रमशः उपाध्यक्ष व महामंत्री के दायित्व मिलने के बाद अनुपम का नगर अध्यक्ष बनने का रास्ता साफ हो गया है। अनुपम 1999 में डीएसबी परिसर छात्र संघ के उपाध्यक्ष व 2003 में अध्यक्ष रहे हैं तथा 2007 से हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के सदस्य अधिवक्ता हैं। उल्लेखनीय है कि नगर में कांग्रेस नगर अध्यक्ष का पद अक्तूबर माह में तत्कालीन नगर अध्यक्ष मारुति नंदन साह द्वारा पदत्याग करने के बाद से रिक्त चल रहा है। नये अध्यक्ष की घोषणा प्रदेश अध्यक्ष प्रीतम सिंह की संस्तुति पर शनिवार-रविवार तक घोषणा हो सकती है।

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p style=”text-align: justify;”>-पूर्व सीएम हरीश रावत, डा. इंदिरा हृदयेश सहित जिले से पूर्व सांसद व विधायकों को भी दी गयी जगह
नवीन समाचार, नैनीताल, 4 मार्च 2019। कांग्रेस जिलाध्यक्ष सतीश नैनवाल ने सोमवार को जनपद की बहुप्रतीक्षित कार्यकारिणी की घोषणा कर दी है। घोषित की गयी जंबो कार्यकारिणी में चार वरिष्ठ उपाध्यक्ष, 40 उपाध्यक्ष, 30 महामंत्री, एक कोषाध्यक्ष, तीन-तीन मीडिया प्रभारी व प्रवक्ता, 24 सचिव 12 संयुक्त सचिव व 20 संगठन सचिवों के साथ ही संरक्षक मंडल में प्रदेश अध्यक्ष, पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत, नेता प्रतिपक्ष डा. इंदिरा हृदयेश, पूर्व विधायक हरीश दुर्गापाल व सरिता आर्य, प्रकाश जोशी, डा. महेंद्र पाल सहित 101 नेताओं को संरक्षक मंडल में विशेष आमंत्रित सदस्य के रूप में रखा गया है।
कार्यकारिणी में हर्षवर्धन पांडे, जसोद सिंह जीना, कैलाश थुवाल व पृथ्वीपाल आर्या को वरिष्ठ उपाध्यक्ष, राजेंद्र चौहान, यशवंत जलाल, भगवान रौतेला, देवेंद्र बिष्ट, अमीर कम्बोज, डा. बालम बिष्ट, पूरन खनी, रविशंकर तिवारी, हाजी अब्दुल करीम, प्रेमा बिष्ट, सुरेंद्र बिष्ट, मो. युसुफ, खीमानंद दुम्का, बलकार सिंह, भावना भट्ट, सुरजीत कौर, दीवान बिष्ट, गणेश आर्या, नैनीताल के जेके शर्मा, किशन लटवाल, प्रकाश नैनवाल, प्रकाश पपनै, दिनेश लोहनी, गुलाम साबिर, किशन सेठ, हीरा बल्लभ बधानी, हीरा बल्लभ पांडे, वीरेंद्र महरा, बच्चे सिंह बिष्ट, पूरन भट्ट, ओम प्रकाश आर्या, रानीबाग के पूर्व जिपं सदस्य संजय साह को उपाध्यक्ष, अनिल अग्रवाल, नंदन चौहान, बच्चन डांगी, देवेंद्र सिंह डंगवाल को उपाध्यक्ष, उमेश कबडवाल, राजेंद्र नेगी, किरन महरा, रमेश आर्य, प्रमोद कोटलिया, भुवन पांडे, नेत्रबल्लभ जोशी, मनोहर नेगी, अंकित साह, मोहन अधिकारी, सुरेंद्र बिष्ट, राम सिंह नगरकोटी, भुवन दरम्वाल, धमेंद्र शर्मा, मोहन कुणाई, संतोष पांडे, मनोज श्रीवास्तव, पुष्कर बिष्ट, अबू तस्लीम, महेंद्र नेगी, नैनीताल के पूर्व पालिकाध्यक्ष मुकेश जोशी ‘मंटू’, ताईब खान, सरदार दयाल सिंह, मनीश गोयल, नवीन जोशी, हेमंत साह, तारेश बिष्ट, नैनीताल के सुनील मेहरा, संजय बोहरा व मदन नौलिया को महामंत्री, विक्रम सामंत, पवन कुमार, कैलाश पाठक, पंकज आर्या, त्रिभुवन कन्याल, मदन सुयाल, गुलाब नेगी, संजय जोशी, ताहिर हुसैन कादरी, वीेरेंद्र पंत, मनमोहन आर्य, खीमा बिष्ट, प्रदीप ढैला, बीडी खोलिया, मनमोहन कनवाल, थान सिंह, सुरेश आर्या, नवीन तिवारी, नीरज अधिकारी, पूरन रजवार, बालम बर्गली, कमल भट्ट, गोपाल बिष्ट, प्रकाश सती को सचिव राकेश वर्मा, कैलाश बमेठा, रीना आर्या, अंजू बक्शी, भवाली की सभासद नाजमा खान, भगवत प्रसाद आर्य, सतीश आर्य, मनोहर आर्या, मंजू चौहान, पंकज पांडे, राजेंद्र बिष्ट व मो. सुहेल को संयुक्त सचिव तथा रघु कार्की, सुरेश आर्य, राजेद्र छिम्वाल, रमेश पाठक, गोपाल अधिकारी, प्रह्लाद सिंह, संजय शाही, नंदराम आर्या, शेखर जोशी, कुंवर राम, दया किशन बमेठा, पनी राम आर्या, वीरेंद्र बिष्ट, मदन मोहन पलड़िया, रवींद्र जग्गी, नंदन कार्की, विजय तिवारी, टीका जलाल व प्रेम प्रकाश पथिक को संगठन सचिव की जिम्मेदारी दी गयी है। इनके अलावा हल्द्वानी के पूर्व ब्लॉक प्रमुख भोला दत्त भट्ट को कोषाध्यक्ष, जीवन कबडवाल, नैनीताल के राजेश वर्मा व भुवन तिवारी को मीडिया प्रभारी, हेमंत पाठक, ब्रजेश बिष्ट व राजू रावत को प्रवक्ता की जिम्मेदारी दी गयी है।

आभार जताया

नैनीताल। नगर के युवा छात्र नेता सुनील मेहरा को कांग्रेस पार्टी का जिला महामंत्री बनाया गया है। स्वयं को जिला महामंत्री मनोनीत किये जाने पर मेहरा ने जिलाध्यक्ष सतीश नैनवाल, सहकारी समिति के निदेशक गोपाल बिष्ट, सुमित हृदयेश, नगर पालिका अध्यक्ष सचिन नेगी, अनुपम कबडवाल एवं प्रधान संगठन के अध्यक्ष हिमांशु पांडे का आभार जताया है। उनके अलावा रामगढ़ के संजय बोहरा एवं ओखलकांडा के मदन नौलिया को भी महामंत्री बनाया गया है।

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p style=”text-align: justify;”>नवीन जोशी, नवीन समाचार, नैनीताल, 23 फरवरी 2019। नैनीताल-ऊधमसिंह नगर संसदीय सीट पर पिछले, वर्ष 2014 के लोक सभा चुनाव में कांग्रेस प्रत्याशी केसी सिंह बाबा भाजपा के प्रत्याशी भगत सिंह कोश्यारी से प्रदेश में सर्वाधिक 2.84 लाख से भी अधिक वोटों से हारे, थे। बावजूद इस सीट पर कांग्रेस पार्टी में टिकट के लिए सर्वाधिक सिर-फुटौव्वल की स्थिति दिखाई दे रही है। और यह सिर-फुटौव्वल कांग्रेसियों को बाहरियों से नहीं घर भीतर से अधिक चोटिल कर सकती है। बावजूद कांग्रेस के नेता नैनीताल को ‘हॉट केक’ की तरह लपकने को लालायित दिख रहे हैं तो इसके पीछे इस सीट का इतिहास रहा है। कांग्रेस इस सीट पर 2014 को छोड़कर अन्य पिछले चुनावों में हमेशा बहुत मजबूत रही है और कुछ मौकों पर कम अंतर से हारने को छोड़कर हमेशा जीतती भी रही है। वहीं नैनीताल के साथ यह मिथक भी जुड़ा है कि जिस पार्टी का प्रत्याशी यहां से जीतता है, उसी पार्टी की देश में सरकार भी बनती है।
यूं नैनीताल-ऊधमसिंह नगर संसदीय सीट के लिए कांग्रेस से नैनीताल जिले से अलग और ऊधमसिंह नगर जिले से अलग, अनेकों उम्मीदवारों ने पार्टी हाईकमान के समक्ष अपनी दावेदारी जताई है। किंतु दावेदार चाहे जितने भी हों, वे मुख्यतया दो-तीन ध्रुवों में बंटे हुए साफ नजर आ जाते हैं। ये ध्रुव हैं कांग्रेस पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव व कांग्रेस वर्किंग कमेटी के सदस्य तथा आसाम के प्रभारी हरीश रावत, उत्तराखंड की नेता प्रतिपक्ष डा. इंदिरा हृदयेश और प्रदेश अध्यक्ष प्रीतम सिंह के। इन तीन ध्रुवों में से दो ध्रुव यानी रावत और इंदिरा स्वयं यहां से टिकट के दावेदार हैं तो पूरे प्रदेश में टिहरी लोक सभा सीट को छोड़कर, (जहां प्रीतम स्वयं दावेदार हैं) केवल नैनीताल में ही उनके एक बड़े समर्थक माने जाने वाले, दो बार के पूर्व सांसद डा. महेंद्र सिंह पाल दावेदार हैं। पाल के समर्थकों का मानना है कि पार्टी का प्रदेश नेतृत्व तो उनके साथ है ही, इंदिरा और रावत की आपसी लड़ाई भी उनके लिये टिकट की राह आसान करने वाली होगी। लेकिन पाल की राह वास्तव में इतनी आसान भी नहीं होने वाली है। कुमाऊं के पुराने क्षत्रिय राज परिवार से आने वाले पाल की राह में सबसे बड़ी बाधा प्रदेश के सबसे बड़े क्षत्रिय वोट बैंक की राजनीति करने के लिए पहचाने जाने वाले हरीश रावत हो सकते हैं। यदि पाल को टिकट मिलता है और वे अब तक कोई भी चुनाव न हारने का अपना रिकार्ड बरकरार रखते हैं, तो वे सबसे बड़ा खतरा हरीश रावत के लिए ही बन सकते हैं। ऐसे में एनडी तिवारी के बाद वर्तमान में कांग्रेस की केंद्र की राजनीति के इकलौते नेता हरीश रावत की सल्तनत कमजोर पड़ सकती है। केंद्र में उनका प्रतिद्वंद्वी खड़ा हो सकता है। पाल की कम उम्र भी भविष्य मंे उन्हें ढलती उम्र के रावत के मुकाबले बड़ा नेता बना सकती है। ऐसे में रावत कभी भी पाल को आगे नहीं कर सकते। पाल को टिकट मिलने ही लगे तो रावत पाल से पुरानी अदावत रखने वाले पूर्व कैबिनेट मंत्री तिलक राज बेहड़ को आगे कर सकते हैं। वहीं रावत को नजदीक से जानने वालों की मानें तो इन स्थितियों में यदि बेहड़ कमतर राजनीतिक कद के कारण मैदान में कमजोर पड़े तो रावत पाल की जगह राज्य में अपनी सबसे बड़ी दुश्मन इंदिरा को टिकट दिलाने का दांव भी चल सकते हैं। इस तीर के साथ रावत की कोशिश होगी कि टिकट दिलाने के बावजूद उनका वही हश्र कर दिया जाये जो अभी हाल में निकाय चुनाव में उनके पुत्र का कर दिया गया। और इस तरह इंदिरा की एक तरह से राजनीतिक हत्या ही हो जाए।

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p style=”text-align: justify;”>‘वेट एंड वॉच’ की स्थिति में रावत
इन किंतु-परंतु की स्थितियों में प्रश्न उठता है कि रावत स्वयं की नैनीताल से दावेदारी को क्यों खुलकर जाहिर नहीं कर रहे हैं ? उनका नाम उम्मीदवारों के पैनल में नैनीताल नहीं ऊधमसिंह नगर जिले से गया है। सच्चाई यह है कि राजनीतिक तौर पर घाघ राजनीतिज्ञ हरीश रावत नैनीताल की इस असलियत को समझते हैं कि यहां भले निचले स्तर पर उनकी अपनी मजबूत ‘समानांतर हरीश कंाग्रेस’ मौजूद हो, किंतु बड़े कांग्रेस नेताओं में उनके समर्थकों से अधिक विरोधी हैं। रावत नैनीताल से चुनाव लड़ेंगे तो उन्हें न इंदिरा बर्दास्त करेंगी और न ही पाल। साथ ही अन्य स्थानीय छोटे नेता भी भरपूर कोशिश करेंगे कि रावत उनके भविष्य की जमीन पर अपना घर न बना लें। ऐसे में रावत ‘वेट एंड वॉच’ की स्थिति में हैं। उन्होंने हरिद्वार का विकल्प भी तैयार रखा हुआ है। हरिद्वार में रावत के लिए नैनीताल जैसी स्थिति भी नहीं है। वहां भी रावत पर भले पिछले दिनों ‘बाहरी’ का ठप्पा लगाने की कोशिश हुई है लेकिन सांसदी के लिये रावत के बरक्श खड़ा होने लायक कद किसी अन्य कांग्रेसी ने नहीं बनाया है अथवा किसी को बनाने नहीं दिया गया है। साथ ही रावत ने केंद्र की राजनीति में जाकर अपना कद भी बढ़ा लिया है। आगामी चुनाव उनके लिए अपना बर्चस्व बनाये रखने की लड़ाई भी है। इस कोशिश में वे केंद्र के साथ राज्य में भी दोस्त जोड़ने की कोशिश में ‘पार्टियां’ भी करते रहे हैं। दुश्मनों के दुश्मनों को दोस्त बनाने की भी कोशिश चल रही है। पार्टी के राष्ट्रीय सचिव प्रकाश जोशी इसी रणनीति के तहत सध चुके हैं

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p style=”text-align: justify;”>राज्य बनने से है इंदिरा-रावत की अदावत
रावत के इंदिरा के बरक्श इस हद तक जाने के पीछे के कारण उत्तराखंड राज्य बनने के बाद से दोनों के बीच शुरू हुई और अब तक जारी अदावत है। उत्तराखंड (तब उत्तरांचल) बनने के बाद राज्य का पहला कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष बनने से दोनों की प्रतिद्वंद्विता शुरू हुई थी। तत्कालीन मुख्यमंत्री एनडी तिवारी इंदिरा और यशपाल आर्य (वर्तमान भाजपा नेता) में से किसी को प्रदेश अध्यक्ष बनाना चाहते थे। तब रावत, इंदिरा और यशपाल कमोबेश एक ही धरातल पर थे। इंदिरा उत्तर प्रदेश विधानसभा में एमएलसी थीं तो रावत अपनी अल्मोड़ा लोकसभा तक सीमित थे और यशपाल दो बार के विधायक। ऐसे में प्रदेश अध्यक्ष बनने का अर्थ था-राज्य बनने के शुरू से ही अन्य से आगे निकलकर प्रदेश का बड़ा नेता बन जाना। इंदिरा इसे भली भांति जानती थीं। उन्हें प्रदेश अध्यक्ष बनाने की घोषणा भी हो गयी थी, लेकिन तभी से ‘छीन कर लेने’ में विश्वास रखने वाले रावत ने वही किया जो विजय बहुगुणा के मुख्यमंत्री बनने के समय भी दोहराया। यानी दिल्ली में दबाव बनाया और इंदिरा की जगह उन्हें प्रदेश अध्यक्ष बना दिया गया। इंदिरा की आशंका सही भी साबित हुई। रावत का कद लगातार बढ़ता चला गया। वे मुख्यमंत्री भी बने और वर्तमान में केंद्र की राजनीति में हैं। उनके बाद यशपाल भी प्रदेश अध्यक्ष बनकर पहले विधानसभा अध्यक्ष तो इधर लगातार दो बार से कैबिनेट मंत्री हैं। जबकि इंदिरा कमोबेश वहीं हैं, जहां से चली थीं। इसी कारण वेे एनडी से कुछ हद तक नाराज भी रही थी। जानकार यहां तक भी कहते हैं कि इंदिरा के मन में प्रदेश अध्यक्ष न बन पाने की टीस अब तक है। वर्तमान में वे जिस तरह स्वयं को प्रीतम सिंह के खेमे में दिखाकर हरीश रावत पर हमले बोलती रहती हैं, इससे वे खुद से अधिक प्रीतम का राजनीतिक नुकसान कर रही हैं, और प्रीतम का कद बढ़ने नहीं दे रहीं।

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-कांग्रेस की नई पीसीसी आम चुनाव के बाद ही होगी घोषित

नवीन समाचार, नैनीताल, 21 फरवरी 2019। प्रदेश कांग्रेस की नई पीसीसी का ऐलान अब लोक सभा चुनाव के बाद ही होगा। कांग्रेस के प्रदेश प्रभारी अनुग्रह नारायण सिंह ने इसकी पुष्टि की है। ऐसे में कांग्रेस को बिना पीसीसी के ही लव लोकसभा चुनाव का सामना करना होगा। विधानसभा स्थित नेता प्रतिपक्ष के कक्ष में हुई मुलाकात में प्रदेश प्रभारी अनुग्रह नारायण सिंह ने स्वीकार किया कि फिलहाल पीसीसी की घोषणा नहीं होने जा रही है। उन्होंने बताया कि पीसीसी के लिए 180 लोगों के नाम विभिन्न पदों व कार्यकारिणी सदस्य के लिए दिये गये हैं। उनका कहना है कि इस सूची को राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी ने स्वीकार कर लिया है, लेकिन अभी घोषणा नहीं होगी। उन्होंने कहा कि अभी कर्नाटक, आंध्र प्रदेश व उड़ीसा राज्यों की पीसीसी ही घोषित हुई है अन्य राज्यों मे फिलहाल रोक दी गई है। उल्लेखनीय है कि कांग्रेस के जिलाध्यक्षों की घोषणा के बाद सामने आयी गुटबाजी के बाद कांग्रेस फूंक-फूंक कर कदम रख रही है। पीसीसी की घोषणा के बाद पार्टी के झगड़े न बढ़ें इसलिए इसकी घोषणा रोक दी है। अनुग्रह का कहना है कि प्रदेश अध्यक्ष बदलने के बाद पीसीसी के पुराने सभी साथी पार्टी के लिए काम कर रहे हैं। सभी प्रमुख नेताओं को समितियों में समायोजित किया गया है। उन्होंने कहा कि लोकसभा चुनाव में दिक्कत नहीं आएगी क्योंकि सभी वरिष्ठ नेताओं की जिम्मेदारियां तय की गयी हैं। प्रभारी ने कहा कि भाजपा चुनाव के वक्त धार्मिंक उन्माद फैलाने की कोशिश करती है और इससे कांग्रेस को सजग होकर काम करना होगा।

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-अल्मोड़ा से गीता ठाकुर व आशा टम्टा में से किसी एक व पौड़ी से कैंतुरा, प्रभारी व प्रदेश अध्यक्ष को दिया पत्र

नवीन समाचार, नैनीताल, 21 फरवरी 2019। महिला कांग्रेस ने तीन महिला नेत्रियों के लिए लोकसभा के टिकट मांगे हैं। इसमें अल्मोड़ा से गीता ठाकुर व आशा टम्टा में से किसी एक को व गढ़वाल लोकसभा से सरोजनी कैन्त्यूरा के लिए टिकट की मांग की गयी है। महिला कांग्रेस की अध्यक्ष सरिता आर्य की अध्यक्षता में हुई एक बैठक में 8 मार्च को होने वाले अन्तरराष्ट्रीय महिला दिवस की तैयारियों पर भी र्चचा की गयी। बैठक में सरिता आर्य ने कहा कि आगामी लोकसभा चुनाव को मध्यनजर रखते हुए प्रदेश महिला कांग्रेस ने जनपद एवं ब्लाक स्तर पर प्रियदर्शनीय टीम बनाये जाने, महिला अधिकार रैली निकाले जाने के कार्यक्रमों की तैयारी की है। उन्होंने तीन नेत्रियों को टिकट देने के लिए प्रभारी अनुग्रह नारायण सिंह व प्रदेश अध्यक्ष प्रीतम सिंह को पत्र भी सौंपा। उन्होंने कहा कि लोकसभा चुनाव में महिलायें बढ़चढ़ कर भाग लेंगी और केन्द्र सरकार की असफलता को जन-जन पहुंचाएंगी। उन्होंने कहा कि मोदी सरकार ने इन पॉच वर्षो में देश को ठगा है। आतंकबादी सीमाओं के अन्दर घुसकर हमारे जवानों को मार रहे हैं और सरकार आतंकवाद के खिलाफ कड़ी कार्रवाई नहीं कर पा रही है। उन्होंने कहा कि आज पूरे देश की जनता की एक ही मांग कि पाकिस्तान को सरकार सबक सिखाये, परन्तु मोदी सरकार मौंन बैठी है। आर्य ने कहा कि परवादून महिला कांग्रेस के अध्यक्ष पद पर मधु सेमवाल को फिर से नियुक्त किया गया है। बैठक में उपाध्यक्ष नजमा खान, महानगर कमलेश रमन रमन, प्रवक्ता चन्द्रकला नेगी, विमला मन्हास, मीना रावत, पुष्पा पंवार, सावित्री शर्मा, अनुराधा तिवाडी, जागृति वशिष्ठ, अम्बिका चौहान, रेनू नेगी, जवाखान, पुष्पा पाठक, योगेश खण्डूजा उपस्थित रहीं। 

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नवीन समाचार, नैनीताल, 5 फरवरी 2019। सोमवार को कांग्रेस का प्रदर्शन साढ़े 12 बजे तय था, किंतु कार्यकर्ताओं के न पहुंचने के कारण करीब सवा घंटे की देरी से पौने एक बजे हो पाया। इसके बावजूद भी प्रदर्शन में एक दर्जन लोग ही शामिल हो पाये। इस पर स्वयं पार्टी कार्यकर्ताओं में ही गहरी नाराजगी दिखी। निकटवर्ती बेलुवाखान के ग्राम प्रधान हिमांशु पांडे ने कहा कि देश की सबसे पुरानी कांग्रेस पार्टी मुख्यालय में बीते नवंबर माह में नगर पालिका चुनाव के टिकट वितरण के बाद से बिन ड्राइवर की गाड़ी बन कर रह गयी है। तब टिकट वितरण से नाखुश नगर अध्यक्ष मारुति नंदन साह ने पद से त्यागपत्र दे दिया था। बाद में पार्टी ने उन पर अनुशासनात्मक कार्रवाई भी कर दी, किंतु तब से नगर अध्यक्ष का पद रिक्त पड़ा है। ऐसे में कांग्रेस आगामी लोक सभा चुनाव में बिना मुखिया के कैसे जाएगा, यह यक्ष प्रश्न ही बना हुआ है।

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p style=”text-align: justify;”>-हेम आर्य को कांग्रेस में शामिल करने से शुरू हुई थी जिले की दो कांग्रेस नेत्रियों में अदावत
-महिला कांग्रेस अध्यक्ष सरिता आर्य को हरीश रावत गुट से होने का मिल रहा खामियाजा, और रावत भी नहीं दे रहे साथ
-सरिता एक भी महिला कांग्रेस की पदाधिकारी तथा अपने क्षेत्र के भवाली व नैनीताल में नहीं दिला पायीं अपने करीबियों को टिकट, इस तरह उनके आधार पर की गयी है चोट

नामांकन कराते कांग्रेस प्रत्याशी सचिन नेगी और उनके बगल में साथ खड़ी सरिता आर्य व हेम आर्य।

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p style=”text-align: justify;”>नवीन जोशी, नैनीताल, 23 अक्तूबर 2018। ‘कहीं पर निगाहें-कहीं पर निशाना’ राजनीति का अहम हिस्सा है। यहां दो सामने दिखता है, अक्सर वह नहीं होता। और जो होता है, उसकी जड़ें कहीं और होती हैं। राज्य के पिछले विस चुनावों में विजय हासिल करने के बाद नैनीताल की विधायक बनीं सरिता आर्या सबसे पहले हल्द्वानी में कांग्रेस की वरिष्ठ नेत्री डा. इंदिरा हृदयेश के आवास पर गयी थीं। किंतु कांग्रेस की सरकार बनने और विजय बहुगुणा की सीएम के पद पर ताजपोशी के वक्त से ही हरीश रावत के खेमे की मानी जाने लगीं, और बाद में हरीश रावत के सीएम बनने के बाद काफी मजबूत हुईं। उन्हें महिला कांग्रेस का प्रदेश अध्यक्ष जैसा बड़ा पद मिला और वह पहला विस चुनाव जीतते ही राज्य की शीर्ष महिला नेत्रियों में शुमार हो गयी थीं। लेकिन इधर मौजूदा निकाय चुनावों में उन्हें राजनीतिक तौर पर समाप्त करने की बड़ी साजिश साफ दिखाई दे रही है। वे महिला कांग्रेस की प्रदेश अध्यक्ष होते महिला कांग्रेस की सिटिंग पालिकाध्यक्ष व जीतने की संभावना वाली एक जिलाध्यक्ष के साथ ही अपने क्षेत्र की नैनीताल व भवाली सीटों पर अपने बेहद करीबियों को उनकी जीत की प्रबल संभावनाओं के बावजूद टिकट नहीं दिला पायी हैं। इस तरह उनका राजनीतिक आधार समाप्त करने और हर ओर उनके लिये अपनों को भी दुश्मन बनाने का प्रयास किया गया है। खास बात यह भी है कि उन्हें ऐसे वक्त में हरीश रावत का साथ भी नहीं मिल रहा है।
कांग्रेस पार्टी से जुड़े सूत्र बता रहे हैं कि इस अदावत की शुरुआत पिछले दिनों सरिता के खिलाफ भाजपा से चुनाव लड़े हेम आर्या को कांग्रेस में शामिल करने के प्रयासों से शुरू हुई। सरिता से नाराज नैनीताल विस के ही कुछ नेताओं ने सरिता को नीचा दिखाने के लिए जिले-प्रदेश की बड़ी महिला नेत्री-नेता प्रतिपक्ष डा. इंदिरा हृदयेश से संपर्क साधा। इंदिरा ने हेम को पार्टी में शामिल करने का प्रयास किया तो सरिता ने तीन बार उनकी कोशिशों को नाकाम कर दिया। यहां तक कि वे पार्टी अध्यक्ष राहुल गांधी से मिलकर हेम के पार्टी में शामिल होने पर अपना विरोध दर्ज करा आयीं। लेकिन इंदिरा राहुल से ही हेम को पार्टी में शामिल करने की इजाजत ले आयीं। इस पर हेम का पार्टी में शामिल होना तय हुआ तो सरिता से महिला प्रदेश अध्यक्ष पद से इस्तीफा देने का इशारा कर दिया। इस पर जिले से प्रदेश अध्यक्ष बनाने के लिए सरिता की एक करीबी सहित दो महिला नेत्रियों को तैयार कर सरिता से धमकी की जगह इस्तीफा दे देने को कह दिया गया। कथित तौर पर यहां तक कह दिया गया कि वे एक गृहणी से राजनीति में आयी हैं, उन्हें वापस गृहणी ही बनाकर छोड़ दिया जाएगा। इधर निकाय चुनाव में उन्हें बुरी तरह से शक्तिहीन साबित करना इसी कड़ी में माना जा रहा है। लेकिन ऐसे बुरे वक्त में राजनीतिक आका हरीश रावत का साथ न मिलने पर हतप्रभ सी सरिता का कहना है कि न जाने क्यों रावत ने निकाय चुनावों से स्वयं को अलग कर लिया है। ऐसे में इंदिरा हृदयेश को खुला मैदान मिलना स्वाभाविक है, और वे अपने पुत्र सहित अपने लोगों को टिकट दिलाने में सफल रहीं। और आज सरिता के समक्ष ऐसी स्थिति आ गयीं जब वे पार्टी प्रत्याशी सचिन नेगी के नामांकन के दौरान हेम आर्य के बिल्कुल बगल में खड़ी नजर आयीं।

एक दिन पूर्व कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष प्रीतम की राहुल गांधी से शिकायत करने की बात कह रही सरिता ने अब जताया प्रदेश अध्यक्ष का आभार

नैनीताल। एक दिन पूर्व कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष प्रीतम सिंह की शिकायत राहुल गांधी से करने की बात कह रही महिला कांग्रेस की प्रदेश अध्यक्ष सरिता आर्य ने अब सिंह का आभार जताया है। मंगलवार को जिला कलक्ट्रेट में उन्होंने कहा कि वे युवा नेतृत्व पर विश्वास जताने के लिए शीर्ष नेतृत्व का आभार जताती हैं। ‘नवीन समाचार’ द्वारा पूछे जाने पर कि वे केंद्रीय शीर्ष नेतृत्व की बात कर रही हैं, अथवा राज्य शीर्ष नेतृत्व का, उन्होंने साफ किया कि राज्य नेतृत्व यानी सिंह ने केंद्रीय नेतृत्व यानी राहुल गांधी की मंशा के अनुरूप नैनीताल में युवा प्रत्याशी पर भरोसा जताया है, जिसका वह स्वागत करती हैं। यह पूछे जाने पर कि नाराज नगर अध्यक्ष मारुति साह को टिकट मिलने पर उनकी क्या प्रतिक्रिया होती, उन्होंने कहा कि मारुति भी युवा हैं, उनका नाम पैनल में सबसे ऊपर था। मारुति को टिकट मिलने पर भी वह खुश होतीं।

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p style=”text-align: justify;”>नैनीताल, 22 अक्टूबर 2018। निकाय चुनाव में टिकट वितरण से राजनीतिक दलों में उपजा असंतोष नेताओं के पालाबदल, राजनीतिक निष्ठाओं को धता बताने का माध्यम बन गया है। इससे नेताओं की पद लोलुपता की कलई भी खुल रही है कि वे अपनी पार्टी से सिर्फ खुद की सुविधओं-टिकट के लिए चिपके हुए हैं। टिकट कटा नहीं कि उनके पास बगावत करने के सौ बहाने हैं। किसी एक स्थान नहीं पूरे राज्य में इन दिनों जैसे नेताओं के पालाबदल का मौसम आ गया है।
आज की बात करें तो रुद्रपुर में टिकट कटने से नाराज कांग्रेस महानगर कमेटी के महामंत्री चंद्रसेन कोली ने 20 कार्यकर्ताओं के साथ सोमवार को पार्टी से इस्तीफा दे दिया। इस्तीफा देने वालों में प्रदेश संगठन सचिव कोमिल राम कोली भी शामिल हैं। चंद्रसेन ने समर्थकों के साथ महानगर अध्यक्ष को इस्तीफा भेज दिया है। उन्होंने एक स्थानीय नेता पर बाहरी व्यक्ति को टिकट करोड़ों में बेचने का आरोप लगाया है। हालांकि उस नेता का नाम उजागर नहीं किया है। वहीं उक्रांद के पूर्व महानगर अध्यक्ष वीरेंद्र बिष्ट आज कांग्रेस में शामिल हो गए हैं। इधर, बागेश्वर में भारतीय जनता पार्टी को बड़ा झटका लगा। यहां पार्टी के सक्रिय कार्यकर्ता प्रमोद मेहता (डब्बू) ने बगावत कर दी है। नगर पालिका परिषद चुनाव में अध्यक्ष पद के लिये उन्होंने दावेदारी ठोकी है। प्रमोद मेहता सर्व शिक्षा अभियान के तहत शिक्षा विभाग में इंजीनियर के पद पर थे। उन्होंने मुख्य शिक्षा अधिकारी अपना इस्तीफा सौंप दिया है। उधर, ऋषिकेश में भी भाजपा में बगावत के सुर तेज हो रहे हैं। यहां भाजपा मुनिकीरेती मंडल अध्यक्ष राकेश सिंह सेंगर ने कहा कि हमारा ये उद्देश्य था कि हमारे मूल कार्यकर्ताओं से किसी को टिकट दिया जाए, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। पूर्व में विधानसभा के चुनावों में भी ऐसा ही किया गया। उस वक्त हमने पार्टी के इस फैसले का स्वागत किया था। लेकिन इस बार भी हमें उपेक्षा का मुंह देखना पड़ा। अब मुनिकीरेली और डालवा मंडल के कार्यकर्ताओं ने फैसला किया है कि यहां पर हम पार्टी के खिलाफ नए उम्मीदवार को खड़ा करें।

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देहरादून, 19 अक्तूबर 2018। एक ओर ‘सूत न कपास,जुलाहों में लट्ठम-लट्ठा’ की स्थिति में दोफाड़ होने की स्थिति में आई आम आदमी पार्टी को निकाय चुनावों के समय देहरादून में संजीवनी मिलती नज़र आ रही है। देहरादून से दो बार मेयर का निर्दलीय चुनाव लड़ चुकी व पूर्व में कांग्रेस नेत्री रहीं किन्नर रजनी रावत आज औपचारिक तौर पर ‘आप’ का ‘झाडू’ थाम सकती हैं। बताया जा रहा है कि पार्टी के केंद्रीय हाईकमान ने रजनी रावत के पार्टी में शामिल होने पर मुहर लगा दी है। वे आज सुबह 11 बजे आप के उत्तराखंड प्रभारी की मौजूदगी में सदस्यता ले सकती हैं। सूत्रों के अनुसार रजनी रावत आप की देहरादून नगर निगम से मेयर पद की प्रत्याशी होंगी। उल्लेखनीय है कि रजनी 2008 और 2013 में भी देहरादून नगर निगम के मेयर पद का चुनाव लड़ चुकी हैं। वे पूर्व में कांग्रेस पार्टी में भी शामिल हो चुकी हैं। आगे देखने वाली बात होगी कि उनका आप से साथ कितना लंबा रह पाता है।

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देहरादून, 18 अक्तूबर 2018। निकाय चुनाव की तैयारियों के बीच राजनेताओं का पालाबदल-उठापटक का दौर शुरू हो गया है। पौड़ी से 2007 से 2012 तक कांग्रेस से टिकट न मिलने पर विधायक व दो बार नगर पालिका अध्यक्ष तथा कांग्रेस नेता रहे यशपाल बेनाम ने भाजपा का दामन थाम लिया है। भाजपा अध्यक्ष अजय भट्ट ने उन्हें देहरादून में भाजपा की सदस्यता दिलाई। उनका पौड़ी में काफी दबदबा बताया जाता है। यशपाल बेनाम का भाजपा में शामिल होना कांग्रेस की मुश्किलें बढ़ा सकता है।

बेनाम को पौड़ी से नगर पालिका अध्यक्ष पद के लिये भाजपा से टिकट मिलना भी तय है। वहीं पौड़ी भाजपा में उनके शामिल होने के बाद बगावत जैसी स्थिति भी हो सकती है।

लग चुके हैं रेप और वित्तीय अनियमितता के गंभीर आरोप

उल्लेखनीय है कि यशपाल बेनाम पूर्व में एक महिला से छेड़खानी के आरोप में जेल में रह चुके हैं। साथ ही पालिका अध्यक्ष रहते हुए उन पर वित्तीय अनियमितताओं का भी आरोप लग चुका है और वो हाल ही में कोर्ट से बरी हुए हैं।

अजय भट्ट ने दी क्लीन चिट

यशपाल के भाजपा में शामिल होने के बाद भाजपा प्रदेश अध्यक्ष अजय भट्ट ने बयान जारी करते हुए कहा कि यशपाल बेनाम को षडयंत्र के तहत फंसाया गया था और अब न्यायालय ने छेड़छाड़ मामले पर बेनाम को आरोप मुक्त किया है। साथ ही अजय भट्ट ने यशपाल बेनाम पर लगे आरोप को लेकर क्लीन चिट दी। इस दौरान धन सिंह रावत, अजय भट्ट, पौड़ी एमएलए मुकेश कोली सहित कई कार्यकर्ता मौजूद रहे।

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