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‘नवीन समाचार’ की खबर पर कुछ ही घंटों में लगी मुहर

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-अनुपम नैनीताल, जमुना सुयालबाड़ी, दुम्का हल्दूचौड़ व कमला कोटाबाग के अध्यक्ष नियुक्त
नवीन समाचार, नैनीताल, 7 मार्च 2019। ‘नवीन समाचार’ द्वारा एक दिन पूर्व ही जताई गयी संभावना सही साबित हुई और कुमाऊं विवि के पूर्व छात्र नेता अनुपम कबडवाल जिला व मंडल मुख्यालय नैनीताल के नगर कांग्रेस अध्यक्ष नियुक्त कर दिये गये हैं। बृहस्पतिवार शाम कांग्रेस पार्टी के जिलाध्यक्ष सतीश नैनवाल ने प्रदेश अध्यक्ष प्रीतम सिंह की संस्तुति पर उनकी नियुक्ति के आदेश जारी कर दिये हैं। उनके अलावा जमुना दत्त कत्यूरा को ब्लॉक कांग्रेस कमेटी सुयालबाड़ी, कैलाश दुम्का को ब्लॉक कांग्रेस कमेटी हल्दूचौड़एवं कमला बधानी को ब्लॉक कांग्रेस कमेटी कोटाबाग का अध्यक्ष नियुक्त करने के आदेश जारी कर दिये हैं।
उल्लेखनीय है कि अनुपम 1999 में डीएसबी परिसर छात्र संघ के उपाध्यक्ष व 2003 में अध्यक्ष रहे हैं तथा 2007 से हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के सदस्य अधिवक्ता हैं। नैनीताल नगर में कांग्रेस नगर अध्यक्ष का पद अक्तूबर माह में तत्कालीन नगर अध्यक्ष मारुति नंदन साह द्वारा पदत्याग करने के बाद से रिक्त चल रहा था।

पूर्व समाचार : ‘इस’ के बाद अनुपम का नैनीताल नगर कांग्रेस अध्यक्ष बनना तय

नवीन समाचार, नई दिल्ली, 7 मार्च 2019। पूर्व छात्र नेता अनुपम कबडवाल का नगर कांग्रेस अध्यक्ष बनना अब तय नजर आ रहा है। उल्लेखनीय है कि वरिष्ठ नेता व पूर्व सभासद जेके शर्मा तथा पूर्व नगर पालिकाध्यक्ष मुकेश जोशी भी अध्यक्ष बनने की सूची में बताये गये थे, लेकिन इधर दो दिन पूर्व उन्हें जिला कार्यकारिणी में क्रमशः उपाध्यक्ष व महामंत्री के दायित्व मिलने के बाद अनुपम का नगर अध्यक्ष बनने का रास्ता साफ हो गया है। अनुपम 1999 में डीएसबी परिसर छात्र संघ के उपाध्यक्ष व 2003 में अध्यक्ष रहे हैं तथा 2007 से हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के सदस्य अधिवक्ता हैं। उल्लेखनीय है कि नगर में कांग्रेस नगर अध्यक्ष का पद अक्तूबर माह में तत्कालीन नगर अध्यक्ष मारुति नंदन साह द्वारा पदत्याग करने के बाद से रिक्त चल रहा है। नये अध्यक्ष की घोषणा प्रदेश अध्यक्ष प्रीतम सिंह की संस्तुति पर शनिवार-रविवार तक घोषणा हो सकती है।

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-पूर्व सीएम हरीश रावत, डा. इंदिरा हृदयेश सहित जिले से पूर्व सांसद व विधायकों को भी दी गयी जगह
नवीन समाचार, नैनीताल, 4 मार्च 2019। कांग्रेस जिलाध्यक्ष सतीश नैनवाल ने सोमवार को जनपद की बहुप्रतीक्षित कार्यकारिणी की घोषणा कर दी है। घोषित की गयी जंबो कार्यकारिणी में चार वरिष्ठ उपाध्यक्ष, 40 उपाध्यक्ष, 30 महामंत्री, एक कोषाध्यक्ष, तीन-तीन मीडिया प्रभारी व प्रवक्ता, 24 सचिव 12 संयुक्त सचिव व 20 संगठन सचिवों के साथ ही संरक्षक मंडल में प्रदेश अध्यक्ष, पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत, नेता प्रतिपक्ष डा. इंदिरा हृदयेश, पूर्व विधायक हरीश दुर्गापाल व सरिता आर्य, प्रकाश जोशी, डा. महेंद्र पाल सहित 101 नेताओं को संरक्षक मंडल में विशेष आमंत्रित सदस्य के रूप में रखा गया है।
कार्यकारिणी में हर्षवर्धन पांडे, जसोद सिंह जीना, कैलाश थुवाल व पृथ्वीपाल आर्या को वरिष्ठ उपाध्यक्ष, राजेंद्र चौहान, यशवंत जलाल, भगवान रौतेला, देवेंद्र बिष्ट, अमीर कम्बोज, डा. बालम बिष्ट, पूरन खनी, रविशंकर तिवारी, हाजी अब्दुल करीम, प्रेमा बिष्ट, सुरेंद्र बिष्ट, मो. युसुफ, खीमानंद दुम्का, बलकार सिंह, भावना भट्ट, सुरजीत कौर, दीवान बिष्ट, गणेश आर्या, नैनीताल के जेके शर्मा, किशन लटवाल, प्रकाश नैनवाल, प्रकाश पपनै, दिनेश लोहनी, गुलाम साबिर, किशन सेठ, हीरा बल्लभ बधानी, हीरा बल्लभ पांडे, वीरेंद्र महरा, बच्चे सिंह बिष्ट, पूरन भट्ट, ओम प्रकाश आर्या, रानीबाग के पूर्व जिपं सदस्य संजय साह को उपाध्यक्ष, अनिल अग्रवाल, नंदन चौहान, बच्चन डांगी, देवेंद्र सिंह डंगवाल को उपाध्यक्ष, उमेश कबडवाल, राजेंद्र नेगी, किरन महरा, रमेश आर्य, प्रमोद कोटलिया, भुवन पांडे, नेत्रबल्लभ जोशी, मनोहर नेगी, अंकित साह, मोहन अधिकारी, सुरेंद्र बिष्ट, राम सिंह नगरकोटी, भुवन दरम्वाल, धमेंद्र शर्मा, मोहन कुणाई, संतोष पांडे, मनोज श्रीवास्तव, पुष्कर बिष्ट, अबू तस्लीम, महेंद्र नेगी, नैनीताल के पूर्व पालिकाध्यक्ष मुकेश जोशी ‘मंटू’, ताईब खान, सरदार दयाल सिंह, मनीश गोयल, नवीन जोशी, हेमंत साह, तारेश बिष्ट, नैनीताल के सुनील मेहरा, संजय बोहरा व मदन नौलिया को महामंत्री, विक्रम सामंत, पवन कुमार, कैलाश पाठक, पंकज आर्या, त्रिभुवन कन्याल, मदन सुयाल, गुलाब नेगी, संजय जोशी, ताहिर हुसैन कादरी, वीेरेंद्र पंत, मनमोहन आर्य, खीमा बिष्ट, प्रदीप ढैला, बीडी खोलिया, मनमोहन कनवाल, थान सिंह, सुरेश आर्या, नवीन तिवारी, नीरज अधिकारी, पूरन रजवार, बालम बर्गली, कमल भट्ट, गोपाल बिष्ट, प्रकाश सती को सचिव राकेश वर्मा, कैलाश बमेठा, रीना आर्या, अंजू बक्शी, भवाली की सभासद नाजमा खान, भगवत प्रसाद आर्य, सतीश आर्य, मनोहर आर्या, मंजू चौहान, पंकज पांडे, राजेंद्र बिष्ट व मो. सुहेल को संयुक्त सचिव तथा रघु कार्की, सुरेश आर्य, राजेद्र छिम्वाल, रमेश पाठक, गोपाल अधिकारी, प्रह्लाद सिंह, संजय शाही, नंदराम आर्या, शेखर जोशी, कुंवर राम, दया किशन बमेठा, पनी राम आर्या, वीरेंद्र बिष्ट, मदन मोहन पलड़िया, रवींद्र जग्गी, नंदन कार्की, विजय तिवारी, टीका जलाल व प्रेम प्रकाश पथिक को संगठन सचिव की जिम्मेदारी दी गयी है। इनके अलावा हल्द्वानी के पूर्व ब्लॉक प्रमुख भोला दत्त भट्ट को कोषाध्यक्ष, जीवन कबडवाल, नैनीताल के राजेश वर्मा व भुवन तिवारी को मीडिया प्रभारी, हेमंत पाठक, ब्रजेश बिष्ट व राजू रावत को प्रवक्ता की जिम्मेदारी दी गयी है।

आभार जताया

नैनीताल। नगर के युवा छात्र नेता सुनील मेहरा को कांग्रेस पार्टी का जिला महामंत्री बनाया गया है। स्वयं को जिला महामंत्री मनोनीत किये जाने पर मेहरा ने जिलाध्यक्ष सतीश नैनवाल, सहकारी समिति के निदेशक गोपाल बिष्ट, सुमित हृदयेश, नगर पालिका अध्यक्ष सचिन नेगी, अनुपम कबडवाल एवं प्रधान संगठन के अध्यक्ष हिमांशु पांडे का आभार जताया है। उनके अलावा रामगढ़ के संजय बोहरा एवं ओखलकांडा के मदन नौलिया को भी महामंत्री बनाया गया है।

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नवीन जोशी, नवीन समाचार, नैनीताल, 23 फरवरी 2019। नैनीताल-ऊधमसिंह नगर संसदीय सीट पर पिछले, वर्ष 2014 के लोक सभा चुनाव में कांग्रेस प्रत्याशी केसी सिंह बाबा भाजपा के प्रत्याशी भगत सिंह कोश्यारी से प्रदेश में सर्वाधिक 2.84 लाख से भी अधिक वोटों से हारे, थे। बावजूद इस सीट पर कांग्रेस पार्टी में टिकट के लिए सर्वाधिक सिर-फुटौव्वल की स्थिति दिखाई दे रही है। और यह सिर-फुटौव्वल कांग्रेसियों को बाहरियों से नहीं घर भीतर से अधिक चोटिल कर सकती है। बावजूद कांग्रेस के नेता नैनीताल को ‘हॉट केक’ की तरह लपकने को लालायित दिख रहे हैं तो इसके पीछे इस सीट का इतिहास रहा है। कांग्रेस इस सीट पर 2014 को छोड़कर अन्य पिछले चुनावों में हमेशा बहुत मजबूत रही है और कुछ मौकों पर कम अंतर से हारने को छोड़कर हमेशा जीतती भी रही है। वहीं नैनीताल के साथ यह मिथक भी जुड़ा है कि जिस पार्टी का प्रत्याशी यहां से जीतता है, उसी पार्टी की देश में सरकार भी बनती है।
यूं नैनीताल-ऊधमसिंह नगर संसदीय सीट के लिए कांग्रेस से नैनीताल जिले से अलग और ऊधमसिंह नगर जिले से अलग, अनेकों उम्मीदवारों ने पार्टी हाईकमान के समक्ष अपनी दावेदारी जताई है। किंतु दावेदार चाहे जितने भी हों, वे मुख्यतया दो-तीन ध्रुवों में बंटे हुए साफ नजर आ जाते हैं। ये ध्रुव हैं कांग्रेस पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव व कांग्रेस वर्किंग कमेटी के सदस्य तथा आसाम के प्रभारी हरीश रावत, उत्तराखंड की नेता प्रतिपक्ष डा. इंदिरा हृदयेश और प्रदेश अध्यक्ष प्रीतम सिंह के। इन तीन ध्रुवों में से दो ध्रुव यानी रावत और इंदिरा स्वयं यहां से टिकट के दावेदार हैं तो पूरे प्रदेश में टिहरी लोक सभा सीट को छोड़कर, (जहां प्रीतम स्वयं दावेदार हैं) केवल नैनीताल में ही उनके एक बड़े समर्थक माने जाने वाले, दो बार के पूर्व सांसद डा. महेंद्र सिंह पाल दावेदार हैं। पाल के समर्थकों का मानना है कि पार्टी का प्रदेश नेतृत्व तो उनके साथ है ही, इंदिरा और रावत की आपसी लड़ाई भी उनके लिये टिकट की राह आसान करने वाली होगी। लेकिन पाल की राह वास्तव में इतनी आसान भी नहीं होने वाली है। कुमाऊं के पुराने क्षत्रिय राज परिवार से आने वाले पाल की राह में सबसे बड़ी बाधा प्रदेश के सबसे बड़े क्षत्रिय वोट बैंक की राजनीति करने के लिए पहचाने जाने वाले हरीश रावत हो सकते हैं। यदि पाल को टिकट मिलता है और वे अब तक कोई भी चुनाव न हारने का अपना रिकार्ड बरकरार रखते हैं, तो वे सबसे बड़ा खतरा हरीश रावत के लिए ही बन सकते हैं। ऐसे में एनडी तिवारी के बाद वर्तमान में कांग्रेस की केंद्र की राजनीति के इकलौते नेता हरीश रावत की सल्तनत कमजोर पड़ सकती है। केंद्र में उनका प्रतिद्वंद्वी खड़ा हो सकता है। पाल की कम उम्र भी भविष्य मंे उन्हें ढलती उम्र के रावत के मुकाबले बड़ा नेता बना सकती है। ऐसे में रावत कभी भी पाल को आगे नहीं कर सकते। पाल को टिकट मिलने ही लगे तो रावत पाल से पुरानी अदावत रखने वाले पूर्व कैबिनेट मंत्री तिलक राज बेहड़ को आगे कर सकते हैं। वहीं रावत को नजदीक से जानने वालों की मानें तो इन स्थितियों में यदि बेहड़ कमतर राजनीतिक कद के कारण मैदान में कमजोर पड़े तो रावत पाल की जगह राज्य में अपनी सबसे बड़ी दुश्मन इंदिरा को टिकट दिलाने का दांव भी चल सकते हैं। इस तीर के साथ रावत की कोशिश होगी कि टिकट दिलाने के बावजूद उनका वही हश्र कर दिया जाये जो अभी हाल में निकाय चुनाव में उनके पुत्र का कर दिया गया। और इस तरह इंदिरा की एक तरह से राजनीतिक हत्या ही हो जाए।

‘वेट एंड वॉच’ की स्थिति में रावत
इन किंतु-परंतु की स्थितियों में प्रश्न उठता है कि रावत स्वयं की नैनीताल से दावेदारी को क्यों खुलकर जाहिर नहीं कर रहे हैं ? उनका नाम उम्मीदवारों के पैनल में नैनीताल नहीं ऊधमसिंह नगर जिले से गया है। सच्चाई यह है कि राजनीतिक तौर पर घाघ राजनीतिज्ञ हरीश रावत नैनीताल की इस असलियत को समझते हैं कि यहां भले निचले स्तर पर उनकी अपनी मजबूत ‘समानांतर हरीश कंाग्रेस’ मौजूद हो, किंतु बड़े कांग्रेस नेताओं में उनके समर्थकों से अधिक विरोधी हैं। रावत नैनीताल से चुनाव लड़ेंगे तो उन्हें न इंदिरा बर्दास्त करेंगी और न ही पाल। साथ ही अन्य स्थानीय छोटे नेता भी भरपूर कोशिश करेंगे कि रावत उनके भविष्य की जमीन पर अपना घर न बना लें। ऐसे में रावत ‘वेट एंड वॉच’ की स्थिति में हैं। उन्होंने हरिद्वार का विकल्प भी तैयार रखा हुआ है। हरिद्वार में रावत के लिए नैनीताल जैसी स्थिति भी नहीं है। वहां भी रावत पर भले पिछले दिनों ‘बाहरी’ का ठप्पा लगाने की कोशिश हुई है लेकिन सांसदी के लिये रावत के बरक्श खड़ा होने लायक कद किसी अन्य कांग्रेसी ने नहीं बनाया है अथवा किसी को बनाने नहीं दिया गया है। साथ ही रावत ने केंद्र की राजनीति में जाकर अपना कद भी बढ़ा लिया है। आगामी चुनाव उनके लिए अपना बर्चस्व बनाये रखने की लड़ाई भी है। इस कोशिश में वे केंद्र के साथ राज्य में भी दोस्त जोड़ने की कोशिश में ‘पार्टियां’ भी करते रहे हैं। दुश्मनों के दुश्मनों को दोस्त बनाने की भी कोशिश चल रही है। पार्टी के राष्ट्रीय सचिव प्रकाश जोशी इसी रणनीति के तहत सध चुके हैं

राज्य बनने से है इंदिरा-रावत की अदावत
रावत के इंदिरा के बरक्श इस हद तक जाने के पीछे के कारण उत्तराखंड राज्य बनने के बाद से दोनों के बीच शुरू हुई और अब तक जारी अदावत है। उत्तराखंड (तब उत्तरांचल) बनने के बाद राज्य का पहला कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष बनने से दोनों की प्रतिद्वंद्विता शुरू हुई थी। तत्कालीन मुख्यमंत्री एनडी तिवारी इंदिरा और यशपाल आर्य (वर्तमान भाजपा नेता) में से किसी को प्रदेश अध्यक्ष बनाना चाहते थे। तब रावत, इंदिरा और यशपाल कमोबेश एक ही धरातल पर थे। इंदिरा उत्तर प्रदेश विधानसभा में एमएलसी थीं तो रावत अपनी अल्मोड़ा लोकसभा तक सीमित थे और यशपाल दो बार के विधायक। ऐसे में प्रदेश अध्यक्ष बनने का अर्थ था-राज्य बनने के शुरू से ही अन्य से आगे निकलकर प्रदेश का बड़ा नेता बन जाना। इंदिरा इसे भली भांति जानती थीं। उन्हें प्रदेश अध्यक्ष बनाने की घोषणा भी हो गयी थी, लेकिन तभी से ‘छीन कर लेने’ में विश्वास रखने वाले रावत ने वही किया जो विजय बहुगुणा के मुख्यमंत्री बनने के समय भी दोहराया। यानी दिल्ली में दबाव बनाया और इंदिरा की जगह उन्हें प्रदेश अध्यक्ष बना दिया गया। इंदिरा की आशंका सही भी साबित हुई। रावत का कद लगातार बढ़ता चला गया। वे मुख्यमंत्री भी बने और वर्तमान में केंद्र की राजनीति में हैं। उनके बाद यशपाल भी प्रदेश अध्यक्ष बनकर पहले विधानसभा अध्यक्ष तो इधर लगातार दो बार से कैबिनेट मंत्री हैं। जबकि इंदिरा कमोबेश वहीं हैं, जहां से चली थीं। इसी कारण वेे एनडी से कुछ हद तक नाराज भी रही थी। जानकार यहां तक भी कहते हैं कि इंदिरा के मन में प्रदेश अध्यक्ष न बन पाने की टीस अब तक है। वर्तमान में वे जिस तरह स्वयं को प्रीतम सिंह के खेमे में दिखाकर हरीश रावत पर हमले बोलती रहती हैं, इससे वे खुद से अधिक प्रीतम का राजनीतिक नुकसान कर रही हैं, और प्रीतम का कद बढ़ने नहीं दे रहीं।

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-कांग्रेस की नई पीसीसी आम चुनाव के बाद ही होगी घोषित

नवीन समाचार, नैनीताल, 21 फरवरी 2019। प्रदेश कांग्रेस की नई पीसीसी का ऐलान अब लोक सभा चुनाव के बाद ही होगा। कांग्रेस के प्रदेश प्रभारी अनुग्रह नारायण सिंह ने इसकी पुष्टि की है। ऐसे में कांग्रेस को बिना पीसीसी के ही लव लोकसभा चुनाव का सामना करना होगा। विधानसभा स्थित नेता प्रतिपक्ष के कक्ष में हुई मुलाकात में प्रदेश प्रभारी अनुग्रह नारायण सिंह ने स्वीकार किया कि फिलहाल पीसीसी की घोषणा नहीं होने जा रही है। उन्होंने बताया कि पीसीसी के लिए 180 लोगों के नाम विभिन्न पदों व कार्यकारिणी सदस्य के लिए दिये गये हैं। उनका कहना है कि इस सूची को राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी ने स्वीकार कर लिया है, लेकिन अभी घोषणा नहीं होगी। उन्होंने कहा कि अभी कर्नाटक, आंध्र प्रदेश व उड़ीसा राज्यों की पीसीसी ही घोषित हुई है अन्य राज्यों मे फिलहाल रोक दी गई है। उल्लेखनीय है कि कांग्रेस के जिलाध्यक्षों की घोषणा के बाद सामने आयी गुटबाजी के बाद कांग्रेस फूंक-फूंक कर कदम रख रही है। पीसीसी की घोषणा के बाद पार्टी के झगड़े न बढ़ें इसलिए इसकी घोषणा रोक दी है। अनुग्रह का कहना है कि प्रदेश अध्यक्ष बदलने के बाद पीसीसी के पुराने सभी साथी पार्टी के लिए काम कर रहे हैं। सभी प्रमुख नेताओं को समितियों में समायोजित किया गया है। उन्होंने कहा कि लोकसभा चुनाव में दिक्कत नहीं आएगी क्योंकि सभी वरिष्ठ नेताओं की जिम्मेदारियां तय की गयी हैं। प्रभारी ने कहा कि भाजपा चुनाव के वक्त धार्मिंक उन्माद फैलाने की कोशिश करती है और इससे कांग्रेस को सजग होकर काम करना होगा।

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-अल्मोड़ा से गीता ठाकुर व आशा टम्टा में से किसी एक व पौड़ी से कैंतुरा, प्रभारी व प्रदेश अध्यक्ष को दिया पत्र

नवीन समाचार, नैनीताल, 21 फरवरी 2019। महिला कांग्रेस ने तीन महिला नेत्रियों के लिए लोकसभा के टिकट मांगे हैं। इसमें अल्मोड़ा से गीता ठाकुर व आशा टम्टा में से किसी एक को व गढ़वाल लोकसभा से सरोजनी कैन्त्यूरा के लिए टिकट की मांग की गयी है। महिला कांग्रेस की अध्यक्ष सरिता आर्य की अध्यक्षता में हुई एक बैठक में 8 मार्च को होने वाले अन्तरराष्ट्रीय महिला दिवस की तैयारियों पर भी र्चचा की गयी। बैठक में सरिता आर्य ने कहा कि आगामी लोकसभा चुनाव को मध्यनजर रखते हुए प्रदेश महिला कांग्रेस ने जनपद एवं ब्लाक स्तर पर प्रियदर्शनीय टीम बनाये जाने, महिला अधिकार रैली निकाले जाने के कार्यक्रमों की तैयारी की है। उन्होंने तीन नेत्रियों को टिकट देने के लिए प्रभारी अनुग्रह नारायण सिंह व प्रदेश अध्यक्ष प्रीतम सिंह को पत्र भी सौंपा। उन्होंने कहा कि लोकसभा चुनाव में महिलायें बढ़चढ़ कर भाग लेंगी और केन्द्र सरकार की असफलता को जन-जन पहुंचाएंगी। उन्होंने कहा कि मोदी सरकार ने इन पॉच वर्षो में देश को ठगा है। आतंकबादी सीमाओं के अन्दर घुसकर हमारे जवानों को मार रहे हैं और सरकार आतंकवाद के खिलाफ कड़ी कार्रवाई नहीं कर पा रही है। उन्होंने कहा कि आज पूरे देश की जनता की एक ही मांग कि पाकिस्तान को सरकार सबक सिखाये, परन्तु मोदी सरकार मौंन बैठी है। आर्य ने कहा कि परवादून महिला कांग्रेस के अध्यक्ष पद पर मधु सेमवाल को फिर से नियुक्त किया गया है। बैठक में उपाध्यक्ष नजमा खान, महानगर कमलेश रमन रमन, प्रवक्ता चन्द्रकला नेगी, विमला मन्हास, मीना रावत, पुष्पा पंवार, सावित्री शर्मा, अनुराधा तिवाडी, जागृति वशिष्ठ, अम्बिका चौहान, रेनू नेगी, जवाखान, पुष्पा पाठक, योगेश खण्डूजा उपस्थित रहीं। 

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नवीन समाचार, नैनीताल, 5 फरवरी 2019। सोमवार को कांग्रेस का प्रदर्शन साढ़े 12 बजे तय था, किंतु कार्यकर्ताओं के न पहुंचने के कारण करीब सवा घंटे की देरी से पौने एक बजे हो पाया। इसके बावजूद भी प्रदर्शन में एक दर्जन लोग ही शामिल हो पाये। इस पर स्वयं पार्टी कार्यकर्ताओं में ही गहरी नाराजगी दिखी। निकटवर्ती बेलुवाखान के ग्राम प्रधान हिमांशु पांडे ने कहा कि देश की सबसे पुरानी कांग्रेस पार्टी मुख्यालय में बीते नवंबर माह में नगर पालिका चुनाव के टिकट वितरण के बाद से बिन ड्राइवर की गाड़ी बन कर रह गयी है। तब टिकट वितरण से नाखुश नगर अध्यक्ष मारुति नंदन साह ने पद से त्यागपत्र दे दिया था। बाद में पार्टी ने उन पर अनुशासनात्मक कार्रवाई भी कर दी, किंतु तब से नगर अध्यक्ष का पद रिक्त पड़ा है। ऐसे में कांग्रेस आगामी लोक सभा चुनाव में बिना मुखिया के कैसे जाएगा, यह यक्ष प्रश्न ही बना हुआ है।

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-हेम आर्य को कांग्रेस में शामिल करने से शुरू हुई थी जिले की दो कांग्रेस नेत्रियों में अदावत
-महिला कांग्रेस अध्यक्ष सरिता आर्य को हरीश रावत गुट से होने का मिल रहा खामियाजा, और रावत भी नहीं दे रहे साथ
-सरिता एक भी महिला कांग्रेस की पदाधिकारी तथा अपने क्षेत्र के भवाली व नैनीताल में नहीं दिला पायीं अपने करीबियों को टिकट, इस तरह उनके आधार पर की गयी है चोट

नामांकन कराते कांग्रेस प्रत्याशी सचिन नेगी और उनके बगल में साथ खड़ी सरिता आर्य व हेम आर्य।

नवीन जोशी, नैनीताल, 23 अक्तूबर 2018। ‘कहीं पर निगाहें-कहीं पर निशाना’ राजनीति का अहम हिस्सा है। यहां दो सामने दिखता है, अक्सर वह नहीं होता। और जो होता है, उसकी जड़ें कहीं और होती हैं। राज्य के पिछले विस चुनावों में विजय हासिल करने के बाद नैनीताल की विधायक बनीं सरिता आर्या सबसे पहले हल्द्वानी में कांग्रेस की वरिष्ठ नेत्री डा. इंदिरा हृदयेश के आवास पर गयी थीं। किंतु कांग्रेस की सरकार बनने और विजय बहुगुणा की सीएम के पद पर ताजपोशी के वक्त से ही हरीश रावत के खेमे की मानी जाने लगीं, और बाद में हरीश रावत के सीएम बनने के बाद काफी मजबूत हुईं। उन्हें महिला कांग्रेस का प्रदेश अध्यक्ष जैसा बड़ा पद मिला और वह पहला विस चुनाव जीतते ही राज्य की शीर्ष महिला नेत्रियों में शुमार हो गयी थीं। लेकिन इधर मौजूदा निकाय चुनावों में उन्हें राजनीतिक तौर पर समाप्त करने की बड़ी साजिश साफ दिखाई दे रही है। वे महिला कांग्रेस की प्रदेश अध्यक्ष होते महिला कांग्रेस की सिटिंग पालिकाध्यक्ष व जीतने की संभावना वाली एक जिलाध्यक्ष के साथ ही अपने क्षेत्र की नैनीताल व भवाली सीटों पर अपने बेहद करीबियों को उनकी जीत की प्रबल संभावनाओं के बावजूद टिकट नहीं दिला पायी हैं। इस तरह उनका राजनीतिक आधार समाप्त करने और हर ओर उनके लिये अपनों को भी दुश्मन बनाने का प्रयास किया गया है। खास बात यह भी है कि उन्हें ऐसे वक्त में हरीश रावत का साथ भी नहीं मिल रहा है।
कांग्रेस पार्टी से जुड़े सूत्र बता रहे हैं कि इस अदावत की शुरुआत पिछले दिनों सरिता के खिलाफ भाजपा से चुनाव लड़े हेम आर्या को कांग्रेस में शामिल करने के प्रयासों से शुरू हुई। सरिता से नाराज नैनीताल विस के ही कुछ नेताओं ने सरिता को नीचा दिखाने के लिए जिले-प्रदेश की बड़ी महिला नेत्री-नेता प्रतिपक्ष डा. इंदिरा हृदयेश से संपर्क साधा। इंदिरा ने हेम को पार्टी में शामिल करने का प्रयास किया तो सरिता ने तीन बार उनकी कोशिशों को नाकाम कर दिया। यहां तक कि वे पार्टी अध्यक्ष राहुल गांधी से मिलकर हेम के पार्टी में शामिल होने पर अपना विरोध दर्ज करा आयीं। लेकिन इंदिरा राहुल से ही हेम को पार्टी में शामिल करने की इजाजत ले आयीं। इस पर हेम का पार्टी में शामिल होना तय हुआ तो सरिता से महिला प्रदेश अध्यक्ष पद से इस्तीफा देने का इशारा कर दिया। इस पर जिले से प्रदेश अध्यक्ष बनाने के लिए सरिता की एक करीबी सहित दो महिला नेत्रियों को तैयार कर सरिता से धमकी की जगह इस्तीफा दे देने को कह दिया गया। कथित तौर पर यहां तक कह दिया गया कि वे एक गृहणी से राजनीति में आयी हैं, उन्हें वापस गृहणी ही बनाकर छोड़ दिया जाएगा। इधर निकाय चुनाव में उन्हें बुरी तरह से शक्तिहीन साबित करना इसी कड़ी में माना जा रहा है। लेकिन ऐसे बुरे वक्त में राजनीतिक आका हरीश रावत का साथ न मिलने पर हतप्रभ सी सरिता का कहना है कि न जाने क्यों रावत ने निकाय चुनावों से स्वयं को अलग कर लिया है। ऐसे में इंदिरा हृदयेश को खुला मैदान मिलना स्वाभाविक है, और वे अपने पुत्र सहित अपने लोगों को टिकट दिलाने में सफल रहीं। और आज सरिता के समक्ष ऐसी स्थिति आ गयीं जब वे पार्टी प्रत्याशी सचिन नेगी के नामांकन के दौरान हेम आर्य के बिल्कुल बगल में खड़ी नजर आयीं।

एक दिन पूर्व कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष प्रीतम की राहुल गांधी से शिकायत करने की बात कह रही सरिता ने अब जताया प्रदेश अध्यक्ष का आभार

नैनीताल। एक दिन पूर्व कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष प्रीतम सिंह की शिकायत राहुल गांधी से करने की बात कह रही महिला कांग्रेस की प्रदेश अध्यक्ष सरिता आर्य ने अब सिंह का आभार जताया है। मंगलवार को जिला कलक्ट्रेट में उन्होंने कहा कि वे युवा नेतृत्व पर विश्वास जताने के लिए शीर्ष नेतृत्व का आभार जताती हैं। ‘नवीन समाचार’ द्वारा पूछे जाने पर कि वे केंद्रीय शीर्ष नेतृत्व की बात कर रही हैं, अथवा राज्य शीर्ष नेतृत्व का, उन्होंने साफ किया कि राज्य नेतृत्व यानी सिंह ने केंद्रीय नेतृत्व यानी राहुल गांधी की मंशा के अनुरूप नैनीताल में युवा प्रत्याशी पर भरोसा जताया है, जिसका वह स्वागत करती हैं। यह पूछे जाने पर कि नाराज नगर अध्यक्ष मारुति साह को टिकट मिलने पर उनकी क्या प्रतिक्रिया होती, उन्होंने कहा कि मारुति भी युवा हैं, उनका नाम पैनल में सबसे ऊपर था। मारुति को टिकट मिलने पर भी वह खुश होतीं।

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नैनीताल, 22 अक्टूबर 2018। निकाय चुनाव में टिकट वितरण से राजनीतिक दलों में उपजा असंतोष नेताओं के पालाबदल, राजनीतिक निष्ठाओं को धता बताने का माध्यम बन गया है। इससे नेताओं की पद लोलुपता की कलई भी खुल रही है कि वे अपनी पार्टी से सिर्फ खुद की सुविधओं-टिकट के लिए चिपके हुए हैं। टिकट कटा नहीं कि उनके पास बगावत करने के सौ बहाने हैं। किसी एक स्थान नहीं पूरे राज्य में इन दिनों जैसे नेताओं के पालाबदल का मौसम आ गया है।
आज की बात करें तो रुद्रपुर में टिकट कटने से नाराज कांग्रेस महानगर कमेटी के महामंत्री चंद्रसेन कोली ने 20 कार्यकर्ताओं के साथ सोमवार को पार्टी से इस्तीफा दे दिया। इस्तीफा देने वालों में प्रदेश संगठन सचिव कोमिल राम कोली भी शामिल हैं। चंद्रसेन ने समर्थकों के साथ महानगर अध्यक्ष को इस्तीफा भेज दिया है। उन्होंने एक स्थानीय नेता पर बाहरी व्यक्ति को टिकट करोड़ों में बेचने का आरोप लगाया है। हालांकि उस नेता का नाम उजागर नहीं किया है। वहीं उक्रांद के पूर्व महानगर अध्यक्ष वीरेंद्र बिष्ट आज कांग्रेस में शामिल हो गए हैं। इधर, बागेश्वर में भारतीय जनता पार्टी को बड़ा झटका लगा। यहां पार्टी के सक्रिय कार्यकर्ता प्रमोद मेहता (डब्बू) ने बगावत कर दी है। नगर पालिका परिषद चुनाव में अध्यक्ष पद के लिये उन्होंने दावेदारी ठोकी है। प्रमोद मेहता सर्व शिक्षा अभियान के तहत शिक्षा विभाग में इंजीनियर के पद पर थे। उन्होंने मुख्य शिक्षा अधिकारी अपना इस्तीफा सौंप दिया है। उधर, ऋषिकेश में भी भाजपा में बगावत के सुर तेज हो रहे हैं। यहां भाजपा मुनिकीरेती मंडल अध्यक्ष राकेश सिंह सेंगर ने कहा कि हमारा ये उद्देश्य था कि हमारे मूल कार्यकर्ताओं से किसी को टिकट दिया जाए, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। पूर्व में विधानसभा के चुनावों में भी ऐसा ही किया गया। उस वक्त हमने पार्टी के इस फैसले का स्वागत किया था। लेकिन इस बार भी हमें उपेक्षा का मुंह देखना पड़ा। अब मुनिकीरेली और डालवा मंडल के कार्यकर्ताओं ने फैसला किया है कि यहां पर हम पार्टी के खिलाफ नए उम्मीदवार को खड़ा करें।

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देहरादून, 19 अक्तूबर 2018। एक ओर ‘सूत न कपास,जुलाहों में लट्ठम-लट्ठा’ की स्थिति में दोफाड़ होने की स्थिति में आई आम आदमी पार्टी को निकाय चुनावों के समय देहरादून में संजीवनी मिलती नज़र आ रही है। देहरादून से दो बार मेयर का निर्दलीय चुनाव लड़ चुकी व पूर्व में कांग्रेस नेत्री रहीं किन्नर रजनी रावत आज औपचारिक तौर पर ‘आप’ का ‘झाडू’ थाम सकती हैं। बताया जा रहा है कि पार्टी के केंद्रीय हाईकमान ने रजनी रावत के पार्टी में शामिल होने पर मुहर लगा दी है। वे आज सुबह 11 बजे आप के उत्तराखंड प्रभारी की मौजूदगी में सदस्यता ले सकती हैं। सूत्रों के अनुसार रजनी रावत आप की देहरादून नगर निगम से मेयर पद की प्रत्याशी होंगी। उल्लेखनीय है कि रजनी 2008 और 2013 में भी देहरादून नगर निगम के मेयर पद का चुनाव लड़ चुकी हैं। वे पूर्व में कांग्रेस पार्टी में भी शामिल हो चुकी हैं। आगे देखने वाली बात होगी कि उनका आप से साथ कितना लंबा रह पाता है।

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देहरादून, 18 अक्तूबर 2018। निकाय चुनाव की तैयारियों के बीच राजनेताओं का पालाबदल-उठापटक का दौर शुरू हो गया है। पौड़ी से 2007 से 2012 तक कांग्रेस से टिकट न मिलने पर विधायक व दो बार नगर पालिका अध्यक्ष तथा कांग्रेस नेता रहे यशपाल बेनाम ने भाजपा का दामन थाम लिया है। भाजपा अध्यक्ष अजय भट्ट ने उन्हें देहरादून में भाजपा की सदस्यता दिलाई। उनका पौड़ी में काफी दबदबा बताया जाता है। यशपाल बेनाम का भाजपा में शामिल होना कांग्रेस की मुश्किलें बढ़ा सकता है।

बेनाम को पौड़ी से नगर पालिका अध्यक्ष पद के लिये भाजपा से टिकट मिलना भी तय है। वहीं पौड़ी भाजपा में उनके शामिल होने के बाद बगावत जैसी स्थिति भी हो सकती है।

लग चुके हैं रेप और वित्तीय अनियमितता के गंभीर आरोप

उल्लेखनीय है कि यशपाल बेनाम पूर्व में एक महिला से छेड़खानी के आरोप में जेल में रह चुके हैं। साथ ही पालिका अध्यक्ष रहते हुए उन पर वित्तीय अनियमितताओं का भी आरोप लग चुका है और वो हाल ही में कोर्ट से बरी हुए हैं।

अजय भट्ट ने दी क्लीन चिट

यशपाल के भाजपा में शामिल होने के बाद भाजपा प्रदेश अध्यक्ष अजय भट्ट ने बयान जारी करते हुए कहा कि यशपाल बेनाम को षडयंत्र के तहत फंसाया गया था और अब न्यायालय ने छेड़छाड़ मामले पर बेनाम को आरोप मुक्त किया है। साथ ही अजय भट्ट ने यशपाल बेनाम पर लगे आरोप को लेकर क्लीन चिट दी। इस दौरान धन सिंह रावत, अजय भट्ट, पौड़ी एमएलए मुकेश कोली सहित कई कार्यकर्ता मौजूद रहे।

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