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बड़ा समाचार : घटा बस्ते के साथ ही पढ़ाई का बोझ, अब तक गृह कार्य न करने पर बच्चों को मिलती थी अब गृह कार्य देने पर स्कूलों को मिलेगी सजा…

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नवीन समाचार, नैनीताल, 25 अप्रैल 2019। उत्तराखंड के सरकारी और निजी स्कूलों में कक्षा एक से दो तक बच्चों को कोई गृह कार्य नहीं दिया जाए जबकि कक्षा तीन से ऊपर के बच्चों को प्रति सप्ताह दो घंटे का गृह कार्य दिया जा सकता है। वहीँ कक्षा एक से लेकर दो तक के बच्चों को शिक्षकों की ओर से गृह कार्य दिया गया तो ऐसे स्कूलों का पंजीकरण निरस्त किया जाएगा। इसे सुनिश्चित कराने के लिए विभागीय स्तर पर सचल दल का गठन किया जाएगा। सचिव शिक्षा डॉ. आर. मीनाक्षी सुंदरम की ओर से इस संबंध में निदेशक प्रारंभिक शिक्षा को आदेश जारी कर दिए हैं।

सचिव शिक्षा डॉ. सुंदरम की ओर से जारी आदेश में कहा गया है कि स्कूलों में यह सुनिश्चित कराया जाए कि विद्यार्थियों को अतिरिक्त गृह कार्य तो नहीं दिया जा रहा है। पाठ्यक्रम एवं विषय को लेकर भी आदेश जारी किए हैं। इसमें कहा गया है कि कक्षा एक से दो तक के बच्चों को भाषा एवं गणित के अलावा कोई विषय न पढ़ाया जाए। जबकि कक्षा तीन से लेकर पांच तक के बच्चों को भाषा, गणित एवं पर्यावरण विज्ञान के अलावा अन्य विषय न पढ़ाए जाएं। सचिव का कहना है कि यह सुनिश्चित किया जाए कि स्कूलों में सीबीएसई द्वारा लागू एनसीईआरटी की पुस्तकें उपयोग में लाई जा रही हैं। बच्चों के स्कूूली बैग वजन को लेकर भी आदेश जारी किए गए हैं।कक्षा एक से दो तक के बच्चों के बैग का वजन डेढ़ किलोग्राम से अधिक न हो। तीसरी से पांचवीं तक के बच्चों के बैग का वजन दो से तीन किलोग्राम। छठी से आठवीं तक के बच्चों के बैग का वजन चार किलोग्राम तक होना चाहिए। आठवीं और नौंवी कक्षा के बच्चों के बैग का वजन साढ़े चार किलोग्राम तक हो और दसवीं के बच्चों के बैग का वजन पांच किलोग्राम तक हो सकता है। सचिव शिक्षा ने निदेशक प्रारंभिक शिक्षा को निर्देशित किया है कि विद्यालयों की औचक जांच के लिए सचल दल का गठन किया जाए। यह स्कूलों में इस बात की जांच करें कि आदेशों का पालन किया जा रहा है या नहीं? यदि किसी स्कूल में आदेशों का पालन नहीं किया जा रहा है तो ऐसे स्कूलों का पंजीकरण निरस्त किया जाए।

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-एनएसएसओ की वार्षिक श्रम बल रिपोर्ट के मुताबिक उत्तराखंड देश में बेरोजगारी के मामले में सातवें स्थान पर पहुंचा

-प्रदेश में 2011-12 में बेरोजगारी दर 3.2 प्रतिशत थी, 2017-18 में दोगुने से अधिक बढ़कर 7.60 प्रतिशत हुई

नवीन समाचार, नैनीताल, 14 अप्रैल 2019। उत्तराखंड भी देश के उन राज्यों में शुमार होगया है, जहां बेरोजगारी सबसे ज्यादा है। राष्ट्रीय नमूना सव्रेक्षण संगठन (एनएसएसओ) की वार्षिक श्रम बल रिपोर्ट के मुताबिक देश के 11 राज्यों में 2011-12 की तुलना में 2017-18 में बेरोजगारी दर बहुत बढ़ गई है। उत्तराखंड की बात करें तो उत्तराखंड देश में बेरोजगारी के मामले सातवें स्थान पर है। उत्तराखंड में जहां 2011-12 में बेरोजगारी दर 3.2 प्रतिशत थी, वह 22017-18 में दोगुने से अधिक बढ़कर 7.60 प्रतिशत हो गई। वैसे भी हाल में प्रदेश सरकार की ह्यूमन डेवलपमेंट इंडेक्स रिपोर्ट के 15 से 29 साल के युवाओं में बेरोजगारी के आंकड़े देखें तो 2004-05 में युवाओं में बेरोजगारी दर छह फीसद तो पढ़े-लिखे युवाओं में 9.8 फीसद थी। 2011-12 में यह बढ़कर युवाओं के लिए 10.2 व पढ़े लिखे युवाओं के लिए 17.2 प्रतिशत हो गई। जबकि 2017 के आंकड़ों के मुताबिक यह अब बढ़कर युवाओं के लिए 13.2 व पढ़े लिखे युवाओं के लिए 17.4 प्रतिशत हो गई है। मानव विकास सूचकांक रिपोर्ट के मुताबिक प्रदेश के मैदानी और शहरी इलाकों में युवकों में बेरोजगारी की दर अधिक है। युवतियों की बेरोजगारी दर देखें तो उनकी बेरोजगारी दर पहाड़ी जिलों में युवकों की चार गुना व शहरी व मैदानी क्षेत्रो व ग्रामीण क्षेत्रों में युवकों की बेरोजगारी दर से दोगुने से अधिक है। साफ है कि प्रदेश में बेरोजगारी भीषण रूप ले चुकी है। देश सरकार के विभागों, निगमों, उपक्रमों आदि में 53 624 पद ही खाली हैं। 36539 रिक्त पद केवल राजकीय विभागों के हैं। कुल खाली पदों में इसमें से 43624 समूह ‘‘ग’ के पद हैं। लगभग 9 लाख 33 हजार सेवायोजन कार्यालयों में पंजीकृत हैं। नौकरियों की स्थिति बहुत ही भयावह है। सेवायोजन विभाग के आंकड़ों पर गौर किया जाए तो यह स्थिति निश्चित रूप से निराश करने वाली है। राज्य गठन के बाद अब तक 23 सेवायोजन कार्यालयों से 24056 लोगों को ही इन कार्यालयों के माध्यम से नौकरियों मिली हैं। गैरपंजीकृत बेरोजगारों की भी फौज लगातार बढ़ती जा रही है। बहरहाल, एनएसएसओ की सव्रे रिपोर्ट के मुताबिक 2011-12 में जहां देश में बेरोजगारी दर 2.2 फीसद थी जबकि अब यह 6.1 प्रतिशत है। देश में हरियाणा, केरल, उत्तराखंड, बिहार, असम, झारखंड और उड़ीसा में बेरोजगारी दर बहुत बढ़ गई है जबकि 2011-12 में पंजाब, तमिलनाडु, उड़ीसा, उत्तराखंड और बिहार देश के सबसे अधिक बेरोजगारी वाले राज्यों की श्रेणी में शामिल हुए थे। 19 राज्यों हरियाणा, असम, झारखंड, केरल, उड़ीसा, उत्तराखंड, पंजाब, तमिलनाडु, बिहार, उत्तर प्रदेश, हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर, राजस्थान, महाराष्ट्र, गुजरात, कर्नाटक पश्चिमी बंगाल, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ शामिल हैं। देश में केरल उन राज्यों में है जहां सबसे ज्यादा यानी बेरोजगारी दर 11.4 फीसद है। जबकि 20111-12 में यह 6.1 प्रतिशत थी। इसके बाद हरियाणा में 8.6 प्रतिशत बेरोजगारी दर है जबकि 2011-12 में यह 2.8 फीसद ही थी। छत्तीसगढ़ में सबसे कम 3.3 प्रतिशत बेरोजगारी है। मध्य प्रदेश में 4.5, पश्चिमी बंगाल में 4.6 प्रतिशत बेरोजगारी दर है। गुजरात के हालात सबसे भयानक हुए हैं। 2011-12 में जहां बेरोजगारी दर0.5 प्रतिशत थी वहीं 2017-18 में बढ़कर 4.8 प्रतिशत हो गई। बता दें कि प्रदेश में 9 लाख 36 हजार पंजीकृत बेरोजगार हैं। (साभार : राष्ट्रीय सहारा)

देश में सबसे ज्यादा बेरोजगारी दर (प्रतिशत में) वाले 10 राज्य

राज्य वर्ष 2011-12 वर्ष 2017-18

केरल       6.1        11.40

हरियाणा 2.8          08.60

असम 4.7             08.10

पंजाब 2.2             07.80

झारखंड 2.5            07.70

तमिलनाडु 2.2          07.60

उत्तराखंड 3.2          07.60

बिहार 3.5             07.20

उड़ीसा 2.4            07.10

उप्र 1.5                06.40

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-लिंग व जाति आधारित समानता के लिए ‘कॉमन सिविल कोड’ ही विकल्प: गुहा
नवीन समाचार, नैनीताल, 26 मार्च 2019। उत्तराखंड के देहरादून में ही जन्मे प्रसिद्ध इतिहासकार व लेखक रामचन्द्र गुहा ने देश के विकास के लिए दलितों व महिलाओं के खिलाफ समाज में व्याप्त भेदभाव को खत्म करने के लिये ‘कॉमन सिविल कोड’ लागू किये जाने की जरूरत बताई है। उन्होंने कहा कि देश में आज भी दलितों को अछूत मानने व महिलाओं को मंदिरों में जाने से रोकने जैसी सदियों पुरानी कुप्रथाएं विद्यमान हैं। इनके उन्मूलन के लिए प्रयास किये जाने की जरूरत है। लिंग व जाति आधारित समानता के लिए ‘कॉमन सिविल कोड’ ही एक विकल्प है।
मंगलवार को हाईकोर्ट बार एसोसियशन की ओर से ‘इंडियाज रोड टू इक्विटी’ विषय पर आयोजित व्याख्यान को सम्बोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि दलित व महिलाओं के साथ पक्षपात केवल हिंदुओं द्वारा नहीं होता वरन यह परंपरा इस्लाम, ईसाई, सिक्ख धर्म के अनुयायियों में भी है। यह शर्मनाक है कि हम जानवर को अछूत नहीं मानते लेकिन दलितों को अछूत मानकर उनका स्पर्श नहीं करते। कहा कि गोपाल कृष्ण गोखले, महात्मा गांधी, बीआर अम्बेडकर व जवाहर लाल नेहरू सहित अनेक नेताओं ने अंग्रेजों से देश को मुक्त कराने के साथ साथ इन बुराइयों के खिलाफ भी समाज में अलख जगाई लेकिन सौ साल बाद भी दलितों व महिलाओं के साथ धार्मिक स्थलों, कानून के समक्ष व समाज में भेदभाव हो रहा है। केरल के शबरीमाला मंदिर में महिलाओं के प्रवेश की सुप्रीम कोर्ट को अनुमति देनी पड़ी लेकिन समाज के कुछ लोंगों को यह नागवार लगा तो इस फैसले के खिलाफ शबरीमाला मंदिर परिसर में हिंसा हुई। मुस्लिम पुरुष बहुविवाह कर सकता है लेकिन महिला को दो पति रखने का अधिकार नहीं है। इसके अलावा लड़का-लड़की में भेदभाव भी सामान्य बात है। विदेशों में ईसाई महिला पादरी रखने लगे हैं लेकिन हमारे देश में अभी महिला पादरी नहीं हैं। व्याख्यान की अध्यक्षता करते हुए प्रो. शेखर पाठक ने कहा कि समाज प्राकृतिक संसाधनों के उपयोग में भी पक्षपात कर रहा है। उन्होंने देश में अमीर व गरीब के बीच बढ़ रही खाई को भी एक नई चुनौती बताया। उन्होंने कुमाऊं में गोरखा शासन की दास प्रथा में दलितों को बेचे जाने, दलितों की शादी में वर-बधू को पालकी व घोड़े में बैठने की इजाजत न होने को खराब दौर बताया तथा कहा कि उत्तराखंड में अब स्थिति काफी बेहतर है और नई पीढ़ी सामाजिक भेदभाव के खिलाफ है। व्याख्यान का संचालन बार एसोसिएशन के सचिव नरेंद्र बाली ने किया। इस अवसर पर न्यायमूर्ति लोकपाल सिंह, न्यायमूर्ति मनोज तिवारी, न्यायमूर्ति शरद शर्मा, बार एसोसिएशन के उपाध्यक्ष चन्द्रशेखर जोशी, पूर्व सांसद डा. महेंद्र पाल, अवतार सिंह रावत, मोहन चंद्र पांडे, डीके शर्मा, डा. उमा भट्ट, डा. शीला रजवार, सैय्यद नदीम मून, विनय साह, एनएस कन्याल, योगेश पचौलिया व गौरा देवी देव आदि वरिष्ठ अधिवक्ता मौजूद रहे।

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-आचार संहिता लागू से फंसी दायित्वधारियों की नियुक्ति

नवीन समाचार, नैनीताल, 12 मार्च 2019। उत्तराखंड की त्रिवेंद्र रावत सरकार ने पिछले दिनों करीब तीन चरणों में 6 दर्जन पार्टी नेताओं को कैबिनेट व राज्य मंत्री स्तर के दायित्व दिये थे। लेकिन कार्यभार ग्रहण करने को ‘शुभ मुहूर्त’ देखकर भव्य बनाने के फेर में घोषित दायित्वधारी बड़े लाभ से वंचित रह गये हैं। यहां कुमाऊं मंडल विकास निगम में उपाध्यक्ष पद पर रेनू अधिकारी एवं निदेशक पद पर नगर के कुंदन बिष्ट सहित सभी घोषित निदेशकों की सोमवार को कार्यभार ग्रहण करने की तैयारी थी। इस हेतु नगर को होर्डिंगों से पाटने की भी तैयारी थी। होर्डिंग तैयार भी कर लिये थे। लेकिन लोक सभा चुनाव की आदर्श आचार संहिता लागू होने के कारण कोई भी कार्यभार ग्रहण नहीं कर पाये। बताया गया है कि रविवार की शाम को भी कार्यभार ग्रहण करने के बारे में विधिक राय मांगी गयी थी लेकिन इसे आदर्श आचार संहिता का उल्लंघन माना जाता। यही स्थिति सभी घोषित दायित्वधारियों के साथ है। अब उन्हें कार्यभार ग्रहण करने के लिए 23 मई को मतगणना के बाद चुनाव परिणाम घोषित होने तक का इंतजार करना पड़ेगा। साथ ही इस दौरान उन्हें कैबिनेट व राज्य मंत्री स्तर की सुविधाओं व मानदेय आदि का भी नुकसान उठाना होगा। इधर जनपद में आचार संहिता की वजह से आबकारी विभाग में सिपाही के पदों पर नियुक्ति प्रक्रिया भी रोक दी गयी है।

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नवीन समाचार, देहरादून, 7 मार्च 2019। उत्तराखंड की त्रिवेंद्र रावत सरकार ने आखिर लोक सभा चुनाव से पूर्व बहुप्रतीक्षित दायित्वों का वितरण कर दिया है। पार्टी के दो वरिष्ठ नेताओं को कैबिनेट मंत्री का स्तर दिया गया है, जबकि 52 अन्य को दायित्व दिये गये हैं। उद्योगपति मुुुकेश अंबानी के पुत्र भी दायित्वधारियों की सूची में शामिल हैं। पिछले निकाय चुनाव में पार्टी प्रत्याशियों के समर्थन में चुनाव से हटने वालों को भी दायित्वों के रूप में ईनाम दिया गया है।
दायित्व निम्न प्रकार दिये गये हैं:

दायित्व धारियों की दूसरी लिस्ट भी हुई जारी : 
1. राजेन्द्र अंथवाल, उपाध्यक्ष गौ सेवा आयोग।
2. रिपुदमन सिंह रावत, उपाध्यक्ष राज्य स्तरीय पेयजल अनुश्रवण समिति।
3. वीरेन्द्र सिंह बिष्ट, अध्यक्ष उत्तराखण्ड वन पंचायत सलाहकार समिति।
4. राजकुमार पुरोहित, अध्यक्ष उत्तराखण्ड राज्य खनिज विकास परिषद।
5. सुरेश परिहार, अध्यक्ष उत्तराखण्ड वन विकास निगम
6. विश्वास डाबर, अध्यक्ष राज्य अवस्थापना एवं औद्योगिक विकास परिषद।

कैबिनेट मंत्री स्तर :
1-बलराज पासी-उपाध्यक्ष प्रथम राज्य स्तरीय जलागम पारिषद
2-ज्योति प्रसाद गैरोला-उपाध्यक्ष द्वितीय राज्य स्तरीय जलागम परिषद
राज्य मंत्री स्तर :
1-जितेंद्र रावत मोनी उपाध्यक्ष, राज्य युवा कल्याण परिषद
2-डा. कल्पना सैनी-उपाध्यक्ष, अन्य पिछड़ा आयोग
3-लेफ्टि. कर्नल अवकाश प्राप्त केडी भोटिया अध्यक्ष, गोरखा कल्याण परिषद
4-कर्नल कर्नल अवकाश प्राप्त सीएम नौटियाल उपाध्यक्ष, राज्य सैनिक कल्याण परिषद
5-आचार्य शिव प्रसाद मंमगाई उपाध्यक्ष, चार धाम विकास परिषद
6-अब्वल सिंह बिष्ट उपाध्यक्ष, भागीरथी घाटी विकास परिषद
7-रामकृष्ण रावत उपाध्यक्ष, उत्तराखंड अनुसूचित जनजाति कल्याण परिषद
8-मूरत राम शर्मा- उपाध्यक्ष, उत्तराखंड अनुसूचित जनजाति कल्याण परिषद
9-एसपी चमोली-उपाध्यक्ष, अर्ध सैनिक कल्याण परिषद
10-भगत राम कोठारी-अध्यक्ष गन्ना एव चीनी विकास उद्योग बोर्ड
11-रविंद्र कटारिया-उपाध्यक्ष द्वितीय पशु कल्याण बोर्ड
12-अमी चंद बाल्मीकि अध्यक्ष, सफाई कर्मचारी आयोग
13-अजय राजौर-उपाध्यक्ष, सफाई कर्मचारी आयोग
14-मजहर नईम नवाब-उपाध्यक्ष, अल्पसंख्यक आयोग
15-कृष्ण कुमार सिंघल-उपाध्यक्ष जीएमवीएन
16-रेनू अधिकारी-उपाध्यक्ष, केएमवीएन
17-अशोक खत्री उपाध्यक्ष श्री बदरी नाथ केदारनाथ मंदिर समिति
इनके अतिरिक्त असगर अली, राव कालेखां, अब्दुल हफीज, हेमंत जोजफ, मास्टर शकील, संतोष नागपाल, तसलीम व गुलाम मुस्तफा को अल्पसंख्यक आयोग के सदस्य, जयपाल बाल्मीकि, साकेत बाल्मीकि, विपिन चंचल व विनोद कुमार को सफाई आयोग के सदस्य, लोकेंद्र सिंह बिष्ट, अंजली खंडेलवाल, आशुतोष वर्मा, चंद्रप्रकाश, राजेश कुमार, रोहित व पुष्पा बड़थ्वाल को गढ़वाल मंडल विकास निगम लिमिटेट के निदेशक मंडल में सदस्य तथा कमल जिंदल, तारादत्त पांडेय, नैनीताल के कुंदन बिष्ट व राम सिंह कोरंगा को कुमाऊं मंडल विकास निगम के निदेशक मंडल में सदस्य एवं अनंत अंबानी-(पुत्र मुकेश अंबानी), इंद्रमणी गैरोला, चंद्र कला ध्यानी, अनिल कंसल, रामसूरत नौटियाल, ऋषि सती, अरुण मैठाणी, धीरज पंचभैयामोनू व राजपाल सिंह पुंडीर को श्री बदरीनाथ केदारनाथ मंदिर समिति में सदस्य बनाया गया है।

यह भी पढ़ें : कैबिनेट के फैसले से सरकारी कर्मचारियों की बल्ले-बल्ले, अब 12 फीसद मिलेगा महंगाई भत्ता

नवीन समाचार, देहरादून, 22 फरवरी 2019। कैबिनेट के इस फैसले से सरकारी कर्मचारियों की बल्ले-बल्ले हो गई है। लोकसभा चुनाव के लिए आचार संहिता लागू होने से पहले त्रिवेंद्र कैबिनेट ने आखिरी बैठक में कई महत्वपूर्ण मामलों पर चर्चा की। इस दौरान सीएम त्रिवेंद्र सिंह रावत ने केंद्र सरकार की तर्ज पर प्रदेश के सरकारी कर्मचारियों को 3 फीसदी महंगाई भत्ता बढ़ाए जाने के फैसले पर मुहर लगाई। अभी तक कर्मचारियों को यह भत्ता 9 फीसदी मिलता था। अब इसे बढ़ाकर 12 फीसदी कर दिया गया है।

कैबिनेट के फैसले : 

    • ऊधमसिंहनगर के हरिपुरा, तुमड़िया व बौर जलाशयों में पीपीपी मोड पर फ्लोटिंग सोलर प्लांट लगाने को मंजूरी दी गई। केंद्र द्वारा प्लांट पर किया जाएगा खर्च। जलाशयों में 100, 100 और 300 मेगा वाट के प्लांट लगाए जाएंगे, 25 साल का होगा कॉन्ट्रेक्ट।
    • उत्तराखंड परिवहन में संविदा के माध्यम से 367 परिचालकों को रखे जाने की मंजूरी
    • वन सेवा नियमावली में संसोधन को मंजूरी
    • चिकित्सा शिक्षा में नर्सिंग संस्थान में 37 पदों के लिए आउट सोर्सिंग से भर्ती को मंजूरी।
    • मेडिकल सलेक्शन बोर्ड में आने वाले विशेषज्ञ का मानदेय तय
    • अल्मोड़ा में सेंटर ऑफ एक्सीलेंस के लिए 0.4 हेक्टेयर भूमि को भारत सरकार को निशुल्क देने का निर्णय
    • टिहरी विस्थापितों से पानी और सीवरेज बिल पर नही लेगी सरकार। भविष्य के बिल के लिए बनाई गई कमेटी। 70 करोड़ का बिल होगा माफ, 10000 लोगों को मिलेगा फायदा। नई टिहरी में रह रहे विस्थापितों को मिलेगा लाभ।
    • विधानसभा सत्र के सत्रावसान को मंजूरी।
    • खाद्य नागरिक आपूर्ति विभाग में नियमावली में संसोधन।
    • जीबी पंत विवि, भरसार विवि के कर्मचारियों को 1 जनवरी 2016 से 7वें वेतनमान का लाभ देने का निर्णय।
    • यूपी परिवहन से उत्तराखंड परिवहन को 300 बसों की खरीद को मिली मंजूरी।
    • आल वेदर रोड़ के वन भूमि को लेकर प्रीमियम नही लेने का मामला।
  • 8 अरब 47 करोड़ 98 लाख 70 हज़ार की रकम केंद्र से नही लेने का लिया फैसला।

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वीन समाचार, देहरादून, 22 फरवरी 2019। उत्तराखंड के श्रमिकों के लिए अब न्यूनतम वेतन 8300 रुपये मासिक होगा। अभी तक प्रदेश में न्यूनतम वेतन 6710 रुपये मासिक है। मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने देहरादून में शुक्रवार को आयोजित कार्यक्रम में न्यूनतम वेतन में 1590 रुपये की बढ़ोतरी का ऐलान किया। नया न्यूनतम वेतन एक अप्रैल से लागू होगा। इससे प्रदेश के करीब आठ लाख श्रमिकों को फायदा होगा। होटल, अस्पतालों, फैक्ट्रियों में कार्यरत श्रमिक एवं उपनल के माध्यम से लगे कर्मचारियों को इसका लाभ होगा।

सेवायोजन कार्यालय में आईसीआईसीआई फाउंडेशन की एकेडमी फॉर स्किल के केंद्र के शुभारंभ कार्यक्रम में श्रम एवं कौशल विकास मंत्री डा. हरक सिंह रावत ने बताया कि पिछले पांच साल से प्रदेश में न्यूनतम वेतन में कोई बढ़ोतरी नहीं की गई थी। श्रमिकों की लगातार मांग को देखते हुए मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में अधिकारियों और उत्तराखंड इंडस्ट्री एसोसिएशन के अध्यक्ष पंकज गुप्ता की एक कमेटी बनाई गई थी। इसने पूरा अध्ययन कर फैसला लिया। इसके बाद मुख्यमंत्री ने न्यूनतम वेतन 8300 रुपये किये जाने का ऐलान किया। बताया कि अप्रैल से नया न्यूनतम वेतन लागू होगा। वेतन में 23 फीसदी की बढ़ोतरी की गई है।

11.21 लाख कर्मचारियों को सीधा फायदा 

उत्तराखंड के 13 जिलों में करीब तीन लाख श्रमिक पंजीकृत हैं। जबकि 8 लाख के करीब श्रमिक विभिन्न कंपनियों, फैक्ट्रियों, होटलों और अस्पतालों में काम करते हैं। इन सबको नए न्यूनतम वेतन का लाभ मिलेगा। वहीं, उपनल के माध्यम से विभिन्न विभागों में कार्यरत 21 हजार कर्मचारियों को भी इसका फायदा मिलेगा।

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नवीन समाचार, देहरादून, 18 फरवरी 2019। उत्तराखंड के साथ ही यूपी को गत दिनों जहरीली शराब कांड ने हिलाकर रख दिया था। अब उत्तराखंड मंत्रिमंडल ने संयुक्त प्रांत अधिनियम 1910 में परिवर्तन कर प्रदेश में अवैध शराब की बिक्री के मामले को गैर जमानती बनाने के साथ ही इसमें सजा के प्राविधान को दो साल से बढ़ाकर सात साल कर दिया गया है। इसमें अहम संशोधन यह है कि तीसरी बार पकड़े जाने पर गैर जमानती धाराओं में मुकदमा दर्ज किया जाएगा, और आरोपित को कम से कम सात साल की सजा होगी। वहीँ अवैध शराब पीकर मौत होने के मामले में यह सजा 10 साल तक की होगी। जहरीली शराब के मामले में पांच से दस लाख रुपये तक के जुर्माने का भी प्रावधान कैबिनेट ने प्रस्तावित किया है। इसके अलावा मंत्रिमंडल द्वारा लालकुआं के अवैध कब्जाधारकों को भूमिधरी का अधिकार दिए जाने का भी फैसला लिया गया। भूमि विनियमितीकरण के लिए फरवरी 2018 के शासनादेश में समय वृद्धि का प्रावधान कर दिया गया।साथ ही देहरादून से मसूरी तक रोप वे का रास्ता साफ: पर्यटन विभाग ने देहरादून के पुरुकुल ग्राम से मसूरी लाइब्रेरी चौक तक रोप वे निर्माण के लिए स्वीकृति दे दी है। परियोजना का निर्माण पीपीपी मोड पर एकल निविदा से मैसर्स एफआईएल इंडस्ट्रीयल के द्वारा किया जाएगा।
मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत की अध्यक्षता में सोमवार को विधानसभा में हुई मंत्रिमंडल की बैठक में पेश 16 प्रस्तावों में से 13 पारित हो गये। इनमें से मंत्रिमंडल ने सर्वोच्च न्यायालय से निर्णय के बाद उत्तराखंड वेस्ट इनर्जी पॉलिसी 2019 को प्रख्यापित करने का निर्णय लिया है। इसके तहत ठोस कचरा प्रबंधन संयंत्र स्थापित करने के लिए निकायों को एक रुपये प्रति मीटर की दर से 20 वर्ष या परियोजना अवधि तक भूमि उपलब्ध करानी होगी। इसके अलावा उत्तराखंड नगर निगम संशोधन विधेयक 2019 को पटल पर रखने का निर्णय लिया गया। जिसके तहत पांच लाख की आबादी वाले नगर निकायों में नगर आयुक्त को पांच लाख रुपये, महापौर को छह लाख रुपये, कार्यकारिणी समिति को 15 लाख रुपये और बोर्ड को 15 लाख रुपये से अधिक राशि व्यय करने का अधिकार मिलेगा। इसी तरह पांच लाख से अधिक जनसंख्या वाले निकायों में आयुक्त को 10 लाख रुपये, महापौर को 12 लाख, कार्यकारिणी समिति को 25 लाख रुपये और बोर्ड के पास 25 लाख रुपये से अधिक के कार्यों को अपने स्तर से निस्तारित करने का वित्तीय अधिकार मिल जाएगा। साथ ही कैबिनेट ने महिला सशक्तीकरण एवं बाल विकास विभाग की नंदा गौरी योजना में पात्रों को बड़ी सौगात दी है। योजना के तहत लाभार्थी बालिका के जन्म पर 11 हजार रुपये और 12वीं पास करने पर 51 हजार रुपये देने का प्रावधान किया गया है। यह सुविधा परिवार की अधिकतम दो बालिकाओं के लिए मान्य रहेगी।
इसके अलावा त्रिवेंद्र मंत्रिमंडल ने गुजरात की साबरमती योजना की तर्ज पर बिंदाल-रिस्पना रिवर फ्रंट डेवलपमेंट योजना के तहत एमडीडीए को श्रेणी छह ए (जलमग्न क्षेत्र) का भू उपयोग परिवर्तन करने का अधिकार दिया है। अब एमडीडीए भू परिवर्तन कर योजना के विकास के लिए भूमि स्थानांतरित कर सकेगा। इस हेतु मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में एक कमेटी का गठन होगा। इसमें राजस्व, शहरी विकास, आवास, वित्त विभाग के सचिव सदस्य रहेंगे। यह कमेटी योजना की रिपोर्ट तैयार कर उसे मुख्यमंत्री को सौंपेगी।
अन्य प्रमुख फैसले:
-पंचायती राज विभाग में 2 पद स्वीकृत किए गए।
-उत्तराखंड अधीनस्थ सेवा चयन आयोग का संयुक्त वार्षिक प्रतिवेदन विधानसभा पटल पर रखा जाएगा।
-उत्तराखंड लोक सेवा में आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के लिए आरक्षण विधेयक 2019 विधान सभा के पटल पर लाया जाएगा।
-पंचायतीराज विभाग के पूर्व स्वीकृत ढांचे में उपनिदेशक और लेखाकार का एक-एक पद स्वीकृत किया गया है।
-सरस्वती शिशु मंदिर दन्या अल्मोड़ा का इंटरमीडिएट में उच्चीकरण किया गया।
-लघु सूक्ष्म एवं मध्यम उद्योगों से संबंधित क्रय वरीयता नीति 2019 प्रख्यापित करने को मंजूरी दे दी गयी।
-पूर्व सैनिक, सैनिक विधवा एवं आश्रितों के लिए वर्ष 2014-15 में हिल्ट्रान कैल्क केंद्र कोटद्वार में संचालित कोर्स की बकाया राशि 88560 रुपये के भुगतान को मंजूरी।
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पत्रकार वार्ता करते काबीना मंत्री प्रकाश पंत।

नवीन समाचार, देहरादून, 13 फ़रवरी 2019। नियम 310 की ग्राह्यता के लिए जब जहरीली शराब प्रकरण पर चर्चा चल रही थी, तो विपक्ष के सदस्यों ने आबकारी मंत्री प्रकाश पंत पर इस्तीफा देने के लिए कई बार इमोशनल अटैक किये। इसको देखते हुए एक बार लगा पंत इस्तीफा दे ही देंगे। चर्चा में भाग लेते हुए कांग्रेस विधायक दल के उपनेता करन माहरा ने कहा कि वे प्रकाश पंत का बहुत सम्मान करते हैं और आज तक उनके दामन पर कोई दाग नहीं है। उन्होंने उनसे बहुत कुछ सीखा है। उनके संसदीय ज्ञान व बेदाग छवि के वे कायल हैं, लेकिन इस घटना से उनकी छवि को बट्टा लगा है। वे समझते हैं कि जहरीली शराब से इतने लोगों की मौत के बाद निश्चित रूप से वे एक आदर्श प्रस्तुत करते हुए अपना इस्तीफा दे देंगे।

विधायक मनोज रावत, हरीश धामी व राजकुमार ने भी उन पर इमोशनल प्रहार किये। रावत ने लाल बहादुर शास्त्री का उदाहरण देते हुए उम्मीद जतायी कि पंत अपने स्वभाव के अनुरूप अपनी बेदाग छवि को बचाने के लिए आबकारी मंत्री का पद छोड़ देंगे। कांग्रेस विधायकों ने पंत को विचलित करने के लिए परोक्ष रूप से ये आरोप भी लगाये कि शराब के इस अवैध कारोबार का पैसा ऊपर तक (यानि उन तक) भी पहुंचता है। विपक्ष के प्रहारों को पंत खामोशी से सुनते रहे। अपने जवाब से पहले वे काफी विचलित भी नजर आये। वे सदन से बाहर निकलते हुए मुख्य सचिव उत्पल कुमार सिंह व डीजीपी अनिल रतूड़ी को अपने साथ ले गये। लौटने के बाद पंत ने बताया कि जिस दिन यह मामला सामने आया था, उन्होंने मुख्यमंत्री के सामने पेशकश की थी, लेकिन सीएम ने मना कर दिया। बाद में पंत ने पत्रकारों के सामने भी इस बात को स्वीकार किया वे इस्तीफा देने का मन बना चुके थे, लेकिन पीठ सहित मंत्रिमंडल के अन्य साथियों ने ऐसा करने से मना किया। मुख्य सचिव व डीजीपी ने भी उन्हें ऐसा करने से रोका।

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नवीन समाचार, नैनीताल, 9 फरवरी 2019। लोकसभा चुनावों को जहां केवल दो माह का समय शेष है वहीं अभी तक सांसद निधि का 38 फीसद बजट जारी नहीं हो सका है। यहीं नहीं स्वीकृत 3790 कार्यों मेें सिर्फ 2625 कार्य ही पूर्ण हुए हैं। वहीं कई सांसद ऐसे हैं जो पूरा बजट भी खर्च नहीं कर पाए हैं।
काशीपुर निवासी सूचना अधिकार कार्यकर्ता व वरिष्ठ अधिवक्ता नदीम उद्दीन को सूचना के अधिकार के तहत ग्राम्य विकास आयुुक्त उत्तराखंड कार्यालय से दिसंबर 2018 तक की उपलब्ध कराई गई सूचना के अनुसार सांसदों को हर साल पांच करोड़ रुपये सांसद निधि में मिलते हैं। इस हिसाब से राज्य के पांच सांसदों को 125 करोड़ में दिसंबर 2018 तक सिर्फ 77.5 करोड़ जारी हुए हैं और 47.50 करोड़ मिलने अभी बाकी है। जबकि इसमें से दिसंबर 2018 तक सांसदों को ब्याज सहित उपलब्ध 81.34 करोड़ में 58.90 करोड़ रुपये खर्च हो चुके हैं।

सांसदों द्वारा खर्च की गयी सांसद निधि के ब्यौरे:

अल्मोड़ा सांसद तथा केंद्रीय मंत्री अजय टम्टा की कुल सांसद निधि 2632.74 लाख है, इसमें केवल 839.20 लाख खर्च हुए हैं। हरिद्वार सांसद डॉ. रमेेश पोखरियाल निशंक की सांसद निधि कुल 2590.88 लाख में 1327.48 लाख, पौड़ी सांसद बीसी खंडूरी की सांसद निधि 2521.45 लाख में 1271.45 लाख, टिहरी सांसद राजलक्ष्मी की सांसद निधि में 2596.50 लाख में 1340.99 लाख और नैनीताल-ऊधमङ्क्षसह नगर सांसद भगत सिंह कोश्यारी की सांसद निधि 2542.88 लाख में 1646.42 लाख खर्च हुए। सांसद निधि सेे स्वीकृत 3790 कार्य में 2625 कार्य हुए। 720 कार्य चालू हैं। जबकि 445 कार्य शुरू नहीं हो पाए हैं।

संसदीय सीटों में स्वीकृत कार्यों के ब्यौरे:

अल्मोड़ा संसदीय क्षे़त्र में 750 स्वीकृत कार्यों के सापेक्ष 567, हरिद्वार में 507 स्वीकृत कार्यों के सापेक्ष 470, टिहरी में 1209 स्वीकृत कार्यों के सापेक्ष 501, पौड़ी में 462 स्वीकृत कार्यों के सापेक्ष 339 व नैैनीताल में 862 स्वीकृत कार्यों के सापेक्ष 748 कार्य ही हो पाए हैं।

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नवीन समाचार, नैनीताल, 6 फरवरी 2019। प्रदेश मंत्रिमंडल की बैठक बुधवार को मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत की अध्यक्षता में आयोजित हुई। बैठक में 17 मुद्दों पर चर्चा की गई। इसके साथ ही निम्न फैसले भी लिए गए :

  1. -आबकारी नीति 2019-20 को मंजूरी मिल गई है। इसके अंतर्गत सरकार ने निर्णय लिया कि जो दुकानें फायदे में चल रही हैं वह दुकानें उनको ही 20% फीस बढ़ा कर दे दी जाएगी। सरकार का आबकारी का राजस्व का लक्ष्य तीन हजार करोड़ रुपए के लगभग रखा गया है। लाभ के अलावा वाली दुकानों की नीलामी की जाएगी।
  2. -समूह ग की भर्ती में वही अभ्यर्थी मान्य होगा जिसने राज्य में 10वीं और 12वीं मान्यता प्राप्त संस्थान की हो। अप्रवासी राज्यवासियों को भी लाभ मिलेगा।
  3. -उत्तराखंड में 450 से 500 करोड़ रुपए हर वर्ष किसानों के कल्याण पर खर्च होगा। केंद्रीय बजट की किसान सम्मान निधि को राज्य में भी लागू किया जाएगा। इसके लिए सभी जिला अधिकारियों को जल्दी से जल्दी रिपोर्ट देने के लिए कहा गया है। सरकार का निर्णय है कि राज्य में गोल खाते या संयुक्त खाते के जितने भी दावेदार होंगे सभी को ₹6000 दिए जाएंगे।
  4. -31 जनवरी को सामूहिक अवकाश पर रहने वाले कर्मचारियों को वेतन नहीं मिलेगा। साथ ही जिन्होंने काम किया है, उन्हें वेतन दिया जाएगा। मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने कहा कि जिन्होंने काम नहीं किया उनके लिए नियमानुसार निर्णय लिया जाएगा। अर्थात नो वर्क नो पे लागू किया जाएगा।
  5. – पिछड़ा वर्ग आयोग का प्रतिवेदन अगले सत्र में पटल पर रखा जाएगा।
  6. – सोसायटी रजिस्ट्रेशन ऑन लाइन होगा।
  7. – आबकारी नीति 2019-20 को मंजूरी मिली।
  8. – पीडब्ल्यूडी के तहत नेशनल हाईवे में होने होने लाइन शॉफ्टिंग यूटिलिटी वर्क का चार्ज 15 % से घटाकर ढाई प्रतिशत किया गया।
  9. – विद्युत जल निगम के प्रत्यावेदन को मंजूरी मिली।
  10. – हिमालयी विवि की देहरादून में स्थापना होगी।
  11. – मूल्य वर्धित कर के मामलों को निपटाने के लिए 3 माह का समय दिया गया।
  12. – वार्षिक विवरण अगले 6 माह में लाया जाएगा, व्यापारियों को लाभ मिलेगा।
  13. -हिमालय विश्वविद्यालय देहरादून की स्थापना करने का निर्णय लिया गया है।

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नवीन समाचार, नैनीताल, 1 फरवरी 2019। प्रदेश की मानव विकास सूचकांक ( हेल्थ इंडेक्स रैंकिंग 2018) रिपोर्ट में नैनीताल जनपद के लिए उल्लासपूर्ण खबर आई है। नैनीताल जनपद इस रिपोर्ट में सबसे सेहतमंद जिला बताया गया है। वहीं चमोली जिला सबसे पीछे है, जबकि पहले चार स्थानों पर नैनीताल के बाद अल्मोड़ा, चंपावत, बागेश्वर हैं, और राज्य मुख्यालय देहरादून का सातवां नंबर है।
बताया गया है कि यह सूचकांक तैयार करने में सरकारी अस्पतालों में होने वाले प्रसव का प्रतिशत, बच्चों का टीकाकरण, आंगनबाड़ी में पहुंचे बच्चे, सरकारी स्वास्थ्य योजनाओं के लाभार्थी, सरकारी अस्पतालों में गंभीर बीमारी के इलाज और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों की स्थिति के कुल छह मानकों को आधार बनाया गया है। इन सभी बिंदुओं पर कुमाऊं का प्रदर्शन गढ़वाल के मुकाबले काफी बेहतर नजर आ रहा है। हालांकि रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि प्रदेश की 49 फीसदी आबादी सरकारी स्वास्थ्य बीमा योजना के दायरे में है, जबकि इनमें से केवल 2 फीसदी लोग ही निजी स्वास्थ्य बीमा योजनाओं का लाभ ले रहे हैं, और ढाई फीसदी लोगों के पास ही सरकारी कंपनी का स्वास्थ्य बीमा है तथा 15 फीसदी से अधिक लोग ईसीएच और सीजीएचएस के दायरे में हैं। प्रदेश में हर व्यक्ति सालाना 3740 रुपए यानी अपनी सालाना आमदनी का 9.4 फीसदी हिस्सा सेहत पर खर्च कर रहा है, और पहाड़ों में अच्छी स्वास्थ्य सुविधाएं अब भी नहीं मिल पा रही है। सरकारी आंकड़े स्वयं कह रहे हैं कि प्रदेश में एक लाख की आबादी पर केवल 13 चिकित्सक, 38 सहायक कर्मी एवं 1032 बिस्तर ही उपलब्ध हैं। पूरे प्रदेश में फिजिशियन के 93, सर्जन के 92 और बालरोग विशेषज्ञ के 82 फीसदी पद खाली हैं।

यह भी पढ़ें : सबसे बड़ा नहीं रहेगा शिक्षा विभाग, सवा 100 दफ्तर व करीब 600 स्कूल-कॉलेज होंगे बंद, सरकार के बचेंगे करीब 16 सौ करोड़

नवीन समाचार, नैनीताल, 9 जनवरी 2019। राज्य के सबसे बड़े शिक्षा विभाग के ऑपरेशन की तैयारी शुरू हो गई है। सरकार ने वित्त विभाग के वेतन समिति की रिपोर्ट पर शिक्षा विभाग से अनुपयुक्त कार्यालय, स्कूलों के विलय, और अफसर-शिक्षक-कर्मचारियों की संख्या में कटौती के आधार पर विभागीय एकीकरण का प्रस्ताव मांगा है।  इसमें शिक्षा विभाग के ब्लॉक से राज्यस्तर तक के 126 दफ्तरों को बंद करने लायक माना गया है। इन दफ्तरों के बंद होने से सीधा-सीधा 125 सीनियर अफसर कम हो जाएंगे और बाकी स्टॉफ भी बड़ी संख्या में घटेगा। यही नहीं 400 के करीब इंटर कालेज बंद करने और जूनियर और हाईस्कूलों का विलय करने की सिफारिश भी है। इस फार्मूले से जहां शिक्षा विभाग का भारीभरकम ढांचा हल्का होगा। वहीं  सरकार का कम से कम 1600 करोड़ रुपये का खर्च भी बचेगा। अशासकीय स्कूलों के 488 करोड़ के अनुदान व 400 इंटर कॉलेज बंद करके 1196 करोड़ रुपये बचेंगे। वहीं जूनियर और हाईस्कूल एकीकरण से  662 करोड़ और वरिष्ठ अफसरों के पद घटाने से 50 करोड़ रुपये का बोझ कम होगा। इस बारे  में शिक्षा निदेशक आरके कुंवर का कहना है कि वित्त विभाग से शिक्षा विभाग के पुनर्गठन को लेकर एक प्रस्ताव मिला है। अभी इसका परीक्षण हो रहा है। सभी निदेशालय अनुपयोगी दफ्तरों को समाप्त करने के मुद्दे पर  पर काफी समय से मंथन कर रहे हैं। जल्द ही एक संयुक्त प्रस्ताव सरकार को दे दिया जाएगा।

यह है वित्त विभाग की सिफारिश
123 दफ्तर बंद करने लायक:
 प्रदेश के विकास खंडों में बीईओ व उपशिक्षा अधिकारी के दो कार्यालय हैं। जिलास्तर पर सीईओ, डीईओ-बेसिक,डीईओ-माध्यमिक के तीन दफ्तर हैं। मंडल स्तर पर एडी बेसिक और एडी माध्यमिक के दो तथा राज्य स्तर पर बेसिक व माध्यमिक के दो निदेशकों की जगह ब्लॉक, जिला मंडल व राज्यस्तर पर एक-एक पद रखने की सिफारिश की गई है। इसके अलावा वित्त विभाग ने निदेशक अनुसंधान एवं शोध कार्यालय और राज्य शैक्षिक प्रबंधन एवं प्रशिक्षण (सीमेट) के साथ विद्यालयी शिक्षा बोर्ड-रामनगर को भी भंग करने की सिफारिश की है। वित्त विभाग ने इन तीनों को अनुपयोगी माना है।

यह भी पढ़ें : उत्तराखंड कैबिनेट के नए साल पर एक दर्जन तोहफ़े, डेढ़ लाख कर्मचारियों की वेतन निर्धारण विसंगति दूर, जानें सभी प्रस्ताव

नवीन समाचार, देहरादून, 31 दिसंबर 2018 । कैबिनेट बैठक में नौ प्रस्तावों पर चर्चा की गई। इनमें से एक प्रस्ताव को वापस ले लिया गया है। बैठक में फैसला लिया गया कि उत्तराखंड पुलिस के 33 प्रतिशत पद पदोन्नति से भरे जाएंगे। इसमे सशस्त्र बलों को भी शामिल किया गया है। वेतन निर्धारण विसंगति भी दूर की गई है। इससे करीब डेढ़ लाख कर्मचारी लाभांवित होंगे। इसके साथ ही एकल आवास व्यवसायिक भवन में अवैध को वैध करने के लिए वन टाइम सेटलमेंट योजना लाने पर भी मुहर लगाई गई है। 

मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत की अध्यक्षता में सचिवालय में कैबिनेट बैठक का आयोजन किया गया। इस दौरान लोक सेवा आयोग के व्यवस्थाधिकारी एवं व्यस्थापक पदों की सेवा नियमावली में संशोधन हुआ।

कैबिनेट के अहम फैसले 

गन्ने के समर्थन मूल्य में बदलाव। गन्ने की अगेती प्रजाति के लिए समर्थन मूल्य 327 और सामान्य प्रजाति के लिए 317 रुपये प्रति कुन्तल किया गया।  

  • उत्तराखंड भवन निर्माण और विकास उपविधि विनियम के मानकों में संशोधन, भवन निर्माण नीति में संसोधन किया गया। वहीं, पहाड़ों और मैदान के बीच वाले भाग में फुट हिल नीति बनाई जाएगी। प्राधिकरणों को इसमें कार्य करने के लिए कहा गया है। देहरादून, नैनीताल, अल्मोड़ा, पौड़ी, टिहरी, चंपावत जिलों में काम करेंगे प्राधिकरण। फुट हिल नीति में भवनों की ऊंचाई 21 मीटर से ज्यादा नहीं होगी। सड़क की चौड़ाई नौ मीटर से घटाकर 6.75 मीटर कर दिया गया है। 
  • पहाड़ में ग्रुप हाउसिंग और अफोर्डेबल हाउस के लिए सड़क की चौड़ाई छह मीटर की गई। हाउसिंग के लिए पहाड़ों में 1000 मी ऊंचाई तय की गई है, जबकि 25 वर्ग मी. भूमि पर व्यवसायिक ऑफिस निर्माण को मंजूरी दी गई, जिसमें सड़क की चौड़ाई दो मीटर तय की गई है। 
  • पहाड़ में ‘मॉल विद मल्टीपेक्स’ में हुआ संशोधन। वेडिंग प्वाइंट पर भी 1000 वर्ग मी. के साथ 500 वर्ग मी. की दी गई  सहूलियत। 
  • नगर निगम अधिनियम 1965 की धारा 135 और 136 में किया गया बदलाव, बजट में की गई बढ़ोतरी। नगर आयुक्त को 50 हजार से 10 लाख। देहरादून के महापौर के लिए बजट एक लाख से 12 लाख, जबकि बाकी महापौरों के लिए छह लाख तक की मंजूरी। कार्यसमति के लिए बजट होगा 25 लाख।  
  • उत्तराखंड पुलिस के 33 प्रतिशत पद पदोन्नति से भरे जाएंगे। इसमे आर्म्ड फोर्स को भी शामिल किया गया है। वेतन निर्धारण विसंगति दूर की गई दूर। सीधी भर्ती ओर पदोन्नति के गेप को भी किया दूर। करीब ढेड़ लाख कर्मचारी लाभांवित होंगे।

यह भी पढ़ें : सूचना अधिकार से खुला राज, उत्तराखंड में हर माह 300 करोड़ कर्ज लेकर कौन पी रहा है ‘घी’ !

-राज्य के शीर्ष आईएएस अधिकारियों जितने वेतन-भत्ते लेते हैं हर माह 300 करोड़ का कर्ज ले रहे उत्तराखंड के माननीय
-सूचना के अधिकार के तहत मुख्यमंत्री कार्यालय से सूचना अधिकार कार्यकर्ता हेमंत गौनिया को प्राप्त सूचना से हुआ खुलासा
नवीन जोशी, नवीन समाचार, नैनीताल, 7 दिसंबर 2018। अक्सर हम प्रदेश के कर्मचारियों, उन्हें सातवें वेतनमान देने पर बढ़ने वाले खर्च को वहन करने के लिए हर माह करीब 300 करोड़ और बीते नवंबर माह में 600 करोड़ रुपये बाजार के ‘कर्ज लेकर घी पीने’ जैसी समाचार पढ़ते रहते हैं। लेकिन आज जो ‘नवीन समाचार’ है वह राज्यवासियों की आंखें खुली की खुली रख देगा, और इस राज का भी पर्दाफाश करेगा कि आखिर हमारे जनप्रतिनिधि समाजसेवा के नाम पर राज्य विधानसभा या संसद पहुंचने के लिए इतना जोर क्यों लगाते हैं, और साथ में यह सवाल भी आपके मन में जरूर उठेगा कि यदि इतनी आय वे प्राप्त कर ही लेते हैं तो फिर खनन के पट्टों, नौकरियों-स्थानांतरणों के लिए क्यों मोटी धनराशि की मांग करते हैं, या ऐसे आरोप उन पर लगते हैं। जनपद के सूचना अधिकार कार्यकर्ता हेमंत गौनिया को मुख्यमंत्री कार्यालय से सूचना के अधिकार के तहत प्राप्त जानकारी से इस राज से काफी हद तक परदा उठ जाता है। इससे साफ हो जाता है कि वास्तव में राज्य में ‘ऋण लेकर घी’ कौन पी जा रहे हैं।

दिखाने के दांत अलग, और खाने को अलग

वैसे विधायकों के वेतन की बात करें तो यह ‘हाथी के दांत’ की तरह लगता है, यानी दिखाने के दांत अलग, और खाने को अलग। कहने को विधायकों का मासिक वेतन मात्र 30 हजार रुपये है, पर इसमें भत्तों की बात करेंगे तो असल खाने वाले दांत दिखाई देंगे। एक विधायक को हर माह डेढ़ लाख रुपये निर्वाचन क्षेत्र में मिलने आने वाली जनता के नाम पर निर्वाचन क्षेत्र भत्ता, 12 हजार रुपये प्रतिमाह चालक भत्ता, 12 हजार रुपये ही साथ में रखने के लिए सचिवीय भत्ता, दो हजार रुपए प्रतिदिन यानी 60 हजार रुपये महीना उनके द्वारा की जाने वाली ‘जनसेवा’ के लिए जनसेवा भत्ता यानी कुल करीब 2 लाख 64 हजार रुपये के भत्ते मिलते हैं। इसके अलावा प्रति वर्ष तीन लाख 55 हजार रुपये के रेलवे के कूपन भी मिलते हैं, जिनमें से विधायकों द्वारा मांग किये जाने पर 27,083 रुपये प्रतिमाह डीजल-पेट्रोल व्यय के रूप में भुगतान किया जाता है। साथ ही हर माह 6 हजार रुपये प्रतिमाह तक मोबाइल-टेलीफोन का बिल भी दिया जाता है। इसे भी मिला दें तो एक विधायक हर माह करीब 3 लाख्रुपये से अधिक की धनराशि होती है। साथ ही रेलवे कूपनों के अतिरिक्त हवाई यात्रा करने पर टिकटों की एक सीमा तक प्रतिपूर्ति भी की जाती है। इस प्रकार एक विधायक को पांच वर्ष के उनके कार्यकाल में राज्य के शीर्ष आईएएस अधिकारियों के बराबर वेतन-भत्ते मिलते हैं। इस प्रकार एक विधायक से पांच वर्ष के कार्यकाल में राज्य पर करीब 1.8 करोड़ एवं 70 विधायकों को मिलाकर देखें तो 126 करोड़ का भार केवल वेतन-भत्तों के जरिये पड़ रहा है।

अन्य सुविधाएं भी अलग

विधायकों को उपरोक्त वेतन-भत्तों के साथ ही निर्वाचन क्षेत्र तथा मुख्यालय में एक-एक टेलीफोन, एक मोबाइल सिम, स्वयं तथा परिवार के सदस्यों के लिए चिकित्सा प्रतिपूर्ति की सुविधा, कार्यकाल में एक लेपटॉप, प्रतिवर्ष 2000 पृष्ठों के छपे हुआ लेटरपैड एवं 1000 मुद्रित लिफाफे भी मिलते हैं। वहीं किसी सदस्य की पद के दौरान मृत्यु होने की दशा में उसके आश्रित को उसकी पेंशन की 50 फीसद पारिवारिक पेंशन उसके सदस्यता काल में दी जाती है, तथा कार्यकाल पूरा होने के बाद भी पेंशन दी जाती है।

उत्तराखंड के मुख्य सचिव ने कहा प्रदेश की आर्थिक स्थिति ‘अच्छी’, जानिये क्या दी दलील…..

-कहा-राज्य की आर्थिक स्थिति अच्छी होने की वजह से ही मिले 1.24 लाख करोड़ के निवेश प्रस्ताव
-बलियानाला व माल रोड का स्थायी समाधान तलाश रहे, नारायणनगर पार्किंग पर सवाल टाल गये
-हल्द्वानी में इंडोर स्टेडियम का कार्य मार्च 19 तक पूरा करेंगे, आईएसबीटी पर शीघ्र निर्णय
नैनीताल, 29 नवंबर 2019। उत्तराखंड के मुख्य सचिव उत्पल कुमार सिंह ने प्रदेश सरकार द्वारा इस माह दो बार तीन-तीन सौ करोड़ रुपये कर्ज लिये जाने से प्रदेश की आर्थिक स्थिति पर उठ रहे सवालों पर कहा कि कर्ज भारत सरकार एवं भारतीय रिजर्व बैंक के अधिनियमों व सीमा के अंतर्गत ही लिये जा रहे हैं। साथ ही राज्य की आर्थिक स्थिति को ‘अच्छी’ बताते हुए कहा कि इसे देखते हुए ही गत दिनों आयोजित हुए निवेशक सम्मेलन में राज्य को 1.24 लाख करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव मिले हैं। इससे राज्य की आर्थिक स्थिति और भी बेहतर हो जाएगी। निवेश प्रस्तावों को धरातल पर लाने के लिए सभी संबंधित विभाग निवेशकों से संपर्क कर कार्य कर रहे हैं।
श्री सिंह बृहस्पतिवार को अल्मोड़ा जाते हुए संक्षिप्त विश्राम के लिए राज्य अतिथि गृह पहुंचे थे। इस दौरान उन्होंने पत्रकारों से वार्ता की। राज्य की खराब आर्थिक स्थिति के कारण नैनीताल के आधार बलियानाले का उपचार न हो पाने के प्रश्न को नकारते हुए श्री सिंह ने कहा कि उपचार धन की कमी नहीं, बल्कि स्थायी उपचार की उपयुक्त तकनीक न मिल पाने के कारण नहीं हो पा रहा है। इस हेतु अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर भी उपयुक्त स्थायी उपचार की तकनीकी का भी अध्ययन किया जा रहा है। कहा कि बलियानाला व माल रोड दोनों का स्थायी उपचार किया जाएगा। अलबत्ता नारायण नगर में 50 करोड़ रुपये से प्रस्तावित पार्किंग पर खासकर वन विभाग से अनुमति न मिल पाने के सवाल को मुख्य सचिव टाल गये। बोले कि वन विभाग से अन्य योजनाओं में सहयोग मिल रहा है। हल्द्वानी स्थित अंतराष्ट्रीय स्टेडियम पर उन्होंने कहा कि इसके इंडोर स्टेडियम का निर्माण मार्च 19 तक पूरा करने की समय सीमा दी गयी है। आईएसबीटी पर बोले कि संबंधित स्थल का निरीक्षण कर लिया गया है। अब जल्द ही निर्णय ले लिया जाएगा। वहीं पलायन के प्रश्न पर बोले की पलायन आयोग ने अभी प्रारंभिक रिपोर्ट दी है। आगे आयोग विस्तृत अध्ययन कर अपनी अंतिम रिपोर्ट देगा, जिसके आधार पर समस्या का लक्षित समाधान किया जाएगा। कहा कि पर्यावरण सामान्य प्रक्रिया है, और पूरे देश-दुनिया में आर्थिक स्थिति बढ़ने के साथ बढ़ रहा है। लोग आ भी रहे हैं और जा भी रहे हैं। अलबत्ता कुछ जिलों में जरूर दिक्कत है। इस अवसर पर डीएम विनोद कुमार सुमन, एडीएम हरबीर सिंह व उप निदेशक सूचना योगेश मिश्रा भी मौजूद रहे।

पूर्व समाचार : उत्तराखंड में सरकार की फिर 3 अरब का ऋण लेकर कर्मचारियों को ‘घी पिलाने’ की तैयारी

-भत्तों से साढ़े तीन सौ करोड़ रु. के अतिरिक्त बोझ का अनुमान, सरकार की 300 करोड़ कर्ज लेने की तैयारी 

नैनीताल, 27 दिसंबर 2018। किसी भी राज्य की आर्थिकी में ‘ऋणं लित्वा घृतम् पीवेत्’ की स्थिति सर्वाधिक बुरी मानी जाती है। लेकिन उत्तराखंड सरकार सूबे की खराब माली हालत के बीच कर्मचारियों के बढ़ते दबाव के चलते उन्हें सातवें वेतन आयोग की सिफारिशों के मुताबिक भत्ते देने और इस माह दूसरी बार 300 करोड़ रुपये कर्ज लेने की तैयारी में है। इसके साथ ही सिर्फ बाजार से कर्ज का आंकड़ा 4750 करोड़ तक पहुंच रहा है, तथा दिसंबर माह से पहले ही तय सीमा से ज्यादा कर्ज लेने की नौबत आ गयी है। इस वजह से सातवें वेतनमान के भत्ते देने का साहस सरकार जुटा नहीं पा रही है। उधर, केंद्र ने राहत देते हुए बाजार से लिए जाने वाले कर्ज की सीमा बढ़ा दी है। राज्य सरकार चालू वित्तीय वर्ष के आखिरी माह यानी मार्च तक 2400 करोड़ और कर्ज ले सकेगी। 

सेवारत और सेवानिवृत्त कार्मिकों की पगार बांटने में ही राज्य सरकार के दम फूल रहे हैं। इसी माह दोबारा बाजार से कर्ज लिया जा रहा है। सरकार 300 करोड़ का कर्ज उठाएगी। इधर नवंबर में बीती 13 तारीख को 300 करोड़ का कर्ज लिया जा चुका है। अब फिर 300 करोड़ कर्ज लिया जा रहा है। इस माह कुल 600 कर्ज लेने के साथ ही बाजार से कर्ज बढ़कर 4750 करोड़ हो जाएगा। गौरतलब है कि केंद्र सरकार की ओर से पहले 4500 करोड़ तक ही बाजार से कर्ज लेने की अनुमति दी गई थी। केंद्र ने राज्य को राहत देते हुए वित्तीय वर्ष के अंत तक 2400 करोड़ कर्ज बाजार से उठाने पर हामी भर दी है। 

प्रदेश सरकार अगर सातवें वेतन आयोग की सिफारिशों के मुताबिक कर्मचारियों को भत्ते देती है तो राज्य पर करीब 350 करोड़ रुपये का अतिरिक्त बोझ पड़ेगा। प्रदेश सरकार सातवें वेतन आयोग की सिफारिशें लागू कर पहले से वित्तीय बोझ सहन कर रही है। प्रदेश सरकार ने राज्य कर्मियों का महंगाई भत्ता भी बढ़ा दिया है जिससे सरकार पर 60 करोड़ का अतिरिक्त बोझ पड़ना तय है। गौरतलब है कि प्रदेश के बजट का 31.55 फीसद हिस्सा कर्मचारियों के वेतन भत्तों पर खर्च होता है जबकि 12.29 फीसद पेंशन व आनुतोषिक पर जाता है। 10.67 हिस्सा ब्याज व लाभांश पर खर्च होता है और 7.81 फीसद हिस्सा निवेश ऋणों पर खर्च होता है।

दरअसल प्रदेश के कर्मचारी लंबे समय से उन्हें सातवें वेतन आयोग की सिफारिशों के मुताबिक भत्ते देने की मांग कर रहे है। इसके लिए प्रदेश सरकार ने इंदु कुमार पांडे की अध्यक्षता वाली वेतन विसंगति समिति से रिपोर्ट मांगी थी जिसने काफी समय पहले सरकार को सिफारिशें सौंप दी थीं। बढ़ते दबाव के बीच बुधवार व बृहस्पतिवार को इस मुद्दे को लेकर मुख्य सचिव उत्पल कुमार सिंह की वित्त विभाग के साथ बैठक हुई जिसमें सैद्धांतिक तौर पर यह फैसला लिया गया है कि सरकार कर्मचारियों को भत्ते देगी। बैठक में इस बाबत भी विचार विमर्श हुआ कि कर्मचारियों को ये भत्ते किस तरह दिए जाएं। सचिव वित्त अमित सिंह नेगी ने भी सातवें वेतन के भत्तों को लेकर हुई बैठकों की पुष्टि की है।

यह भी पढ़ें : अपने स्टॉक बेचकर लगातार चौथे माह 250 करोड़ का कर्ज लेगा उत्तराखंड, 50 हजार करोड़ रुपये तक पहुंच गयी उधारी

  • इस वित्तीय वर्ष में अप्रैल माह से लगातार कर्ज ले रही है सरकार, इस वर्ष अब तक 1400 करोड़ रुपये कर्ज ले चुका है उत्तराखंड
नैनीताल, 8 अगस्त  2018। प्रदेश सरकार फिर से ₹ 250 करोड़ का कर्ज ले रही है। अगस्त के महीने में ऊर्जा, कृषि, सिंचाई और उद्योग क्षेत्र की योजनाओं के वित्त पोषण के नाम पर नया कर्ज लिया जा रहा है। सचिव वित्त अमित नेगी के मुताबिक सरकार भारतीय रिजर्व बैंक के जरिए अपना स्टॉक बेच कर यह कर्ज लेगी। सफल निविदाकर्ता को न्यूनतम ब्याज दर पर आठ अगस्त तक धनराशि मुहैया करानी होगी। उल्लेखनीय हैं कि प्रदेश सरकार इस साल ₹ 7300 करोड़ तक का कर्ज ले सकती है। बताते चलें कि पिछले महीने यानी जुलाई में ही सरकार ने 300 करोड़ रुपये का कर्ज लिया था। इसी तरह मई और जून में भी 300-300 करोड़ कर्ज सरकार ले चुकी है जबकि अप्रैल तक सरकार 500 करोड़ का कर्ज ले चुकी थी। इस तरह देखा जाए तो सरकार हर महीने कर्ज ले रही है, और इस वित्तीय वर्ष में अब तक 1400 करोड़ रुपये कर्ज ले चुकी है। जबकि 31 मार्च 2017 तक प्रदेश पर 35209.59 करोड़ का कर्ज था, अब 1400 करोड़ रुपये मिलाकर यह राशि 50,000 करोड़ के स्तर तक पहुँच गई है।
विदित हो कि  31 मार्च 2017 तक प्रदेश पर 35209.59 करोड़ का कर्ज था, जिसमें से 10212.85 करोड़ नेशनल स्माल सेविंग फंड की सिक्योरिटीज के रूप में, 20832.29 करोड़ राज्य विकास ऋण, 3509.13 करोड़ नेशनल बैंक ऑफ एग्रीकल्चर एंड रूरल डेवलपेंट के ऋण और शेष भारत सरकार के कर्ज के रूप में है। सरकार के इस कदम से प्रदेश सरकार पर कर्ज करीब 50 हजार करोड़ रुपये पार कर जाएगा। इस वक्त प्रदेश पर 41721.1152 करोड़ रुपये का कर्ज है जो कि अगले साल 31 मार्च तक 47580.4252 करोड़ पहुंचने की उम्मीद है। गौरतलब है कि प्रदेश के बजट का 31.55 फीसद हिस्सा कर्मचारियों के वेतन भत्तों पर खर्च होता है जबकि 12.29 फीसद पेंशन व आनुतोषिक पर जाता है। इसके अलावा 10.67 हिस्सा ब्याज व लाभांश पर खर्च होता है और 7.81 फीसद हिस्सा निवेश ऋणों पर खर्च होता है। 
गौरतलब है कि सूबे की खराब माली हालत के बीच कर्मचारियों के बढ़ते दबाव के चलते प्रदेश सरकार भारी दबाव में है। अब प्रदेश सरकार अगर सातवें वेतन आयोग की सिफारिशों के मुताबिक कर्मचारियों को भत्ते देती है तो राज्य पर करीब साढ़े तीन सौ करोड़ रुपये का अतिरिक्त बोझ पड़ेगा। प्रदेश सरकार सातवें वेतन आयोग की सिफारिशें लागू कर पहले से वित्तीय बोझ सहन कर रही है। प्रदेश सरकार ने राज्यकर्मियों का महंगाई भत्ता भी बढ़ा दिया है जिससे सरकार पर 60 करोड़ का अतिरिक्त बोझ पड़ना तय है। यही नहीं सरकार पर वेतन भत्तों के भुगतान का भी दबाव है। बहरहाल, सरकार के इस कदम से प्रदेश सरकार पर कर्ज करीब 50 हजार करोड़ रुपये पार कर जाएगा। वहीं एक रिपोर्ट के अनुसार इस वक्त प्रदेश पर 41721.1152 करोड़ रुपये का कर्ज है जो कि अगले साल 31 मार्च तक 47580.4252 करोड़ पहुंचने की उम्मीद है। गौरतलब है कि प्रदेश के बजट का 31.55 फीसद हिस्सा कर्मचारियों के वेतन भत्तों पर खर्च होता है जबकि 12.29 फीसद पेंशन व आनुतोषिक पर जाता है। 10.67 हिस्सा ब्याज व लाभांश पर खर्च होता है और 7.81 फीसद हिस्सा निवेश ऋणों पर खर्च होता है। 

अवैध कब्जे हटाने वाले 4 डीएम सहित 6 आईएएस खुद निकले अवैध कब्जेदार, हाईकोर्ट ने दिखाया आईना

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p style=”text-align: justify;”>-हाईकोर्ट ने 19 अफसरों-कर्मचारियों के दून में आवंटित आवास दो माह के भीतर खाली करने, बाजार दर से किराया वसूलने, जुर्माना लगाने और कब्जे की अनुमति देने वाले अफसरों के खिलाफ भी कार्रवाई करने के दिये आदेश
नैनीताल, 1 नवम्बर 2018। जिन अधिकारियों पर प्रदेश में अवैध कब्जे हटाने की जिम्मेदारी होती है, वे ही अवैध कब्जेदार माने गये हैं। उत्तराखंड हाईकोर्ट ने देहरादून से स्थानांतरण के बाद भी 6 आईएएस अफसरों सहित 19 अधिकारियों व कर्मचारियों द्वारा देहरादून में आवंटित आवासों में अनाधिकृत कब्जा जमाए रखने पर कड़ा रुख अपनाते हुए मुख्य सचिव से दो माह के भीतर अनाधिकृत आवास खाली कराने, कब्जेदारों से कब्जे वाले भवन का बाजार दर पर कब्जा वसूल करने, अवैध कब्जे के आरोप में जुर्माना लगाने व कब्जे की अनुमति देने वाले अफसर के खिलाफ नियमानुसार कार्यवाही करने के आदेश दिए हैं। इन अफसरों में बागेश्वर की डीएम रंजना, टिहरी की डीएम सोनिया, पिथौरागढ़ के डीएम सी रविशंकर व चमोली की डीएम स्वाति भदौरिया सहित हरिद्वार के सीडीओ विनीत तोमर व अपर सचिव विनोद चंद्र रावत शामिल हैं।
मामले के अनुसार रमेश चन्द्र लोहनी ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर देहरादून से स्थानांतरित कई अधिकारियों व कर्मचारियों ने सरकारी आवासों का कब्जा न छोड़ने से अन्य कार्मिकों को हो रही असुविधा का उल्लेख किया था। बीती 16 अगस्त 2018 को एकलपीठ ने याचिका को जनहित का मानते हुए इसे कार्यवाहक मुख्य न्यायधीश की खंडपीठ को भेज दिया था, और खंडपीठ ने इस मामले में विस्तृत शपथ पत्र पेश करने के आदेश सरकार को दिए थे। सरकार की जांच में 19 अफसरों व कर्मचारियों द्वारा अनाधिकृत कब्जा किये जाने की पुष्टि हुई है। गुरुवार को कार्यवाहक मुख्य न्यायधीश न्यायमूर्ति राजीव शर्मा की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने इन कब्जों को दो माह के भीतर खाली करवाने व दोषियों के खिलाफ कार्यवाही के आदेश मुख्य सचिव को दिए हैं।

यह भी पढ़ें : उत्तराखंड आईएएस एसोसिएशन में दो-फाड़ के आसार !

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p style=”text-align: justify;”>-प्रमोटी व मूल आईएएस में बढ़ी रार
-मामला अदालत के दरवाजे तक जाता है तो इससे प्रदेश की प्रचंड बहुमत की सरकार की छवि पर बट्टा लगना तय 

देहरादून। यूं तो प्रमोटी आईएएस व मूल आईएएस अफसरों का झगड़ा सनातन है, मगर प्रदेश के गठन के बाद पहली बार दोनों में तकरार इतनी बढ़ी है कि एक आईएस अधिकारी दूसरे प्रमोटी आईएस के खिलाफ अदालत जाने तक की धमकी दे रहीं हैं। अगर यह मामला अदालत के दरवाजे तक जाता है तो इससे प्रदेश की प्रचंड बहुमत की सरकार की छवि पर बट्टा लगना तय है, क्योंकि माना जाएगा कि उसने समय रहते भीतर-भीतर सुलग रही इस चिंगारी को शांत करने की कोशिश नहीं की और सारा मामला वरिष्ठ नौकरशाहों पर छोड़ दिया।

आईएएस एसोसिएशन की बैठक टली 

नौकरशाहों के बीच इस शीत युद्ध का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि मुख्यमंत्री व आईएएस एसोसिएशन के अध्यक्ष के समक्ष अपनी नाराजगी दर्ज करने के बाद सचिव पद पर तैनात प्रमोटी आईएएस अफसर हरबंस सिंह चुघ लंबी छुट्टी पर चले गए हैं। हालांकि उन्होंने अपनी छुट्टी के इस प्रकरण से जुड़े होने से इनकार किया है। आलम यह है कि आईएएस एसोसिशन में दोफाड़ की नौबत आ गई है। वहीं प्रमोटी आईएएस ने अलग एसोसिएशन बनाने की बात कही है, जिसके चलते 13 यानी शुक्रवार को होने वाली आईएएस एसोसिएशन की बैठक टाल दी गई। माना जा रहा है कि अब यह बैठक 17 अप्रैल को होगी। आईएएस अफसर एसोसिएशन के सचिव आनंद बर्धन ने भी अपरिहार्य कारणों से बैठक टलने की पुष्टि की, हालांकि उन्होंने कहा कि बैठक जल्द होगी।

यह है झगड़े की मूल जड़ 

प्रदेश में भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) के अफसरों और प्रमोटी आईएएस अफसरों में सारे झगड़े की जड़ तबादले और तैनाती मानी जा रही है। प्रमोटी आईएएस का आरोप है कि प्रदेश में नई सरकार के गठन के बाद से ही प्रमोटी आईएएस अफसरों को महत्वपूर्ण पोस्टिंग से वंचित रखा गया है। अहम पदों पर सीधे आईएएस अफसरों का ही कब्जा है। प्रमोशन से आईएएस बने अफसर अहम जिम्मेदारियों के लिए तरस गए हैं। पिछले एक साल से सचिवालय में तैनात प्रमोटी आईएएस अफसरों को तो सामान्य प्रशासन, सचिवालय प्रशासन, अल्पसंख्यक कल्याण, पुनर्गठन, प्रोटोकाल, संस्कृत शिक्षा जैसे विभाग सौंपे गए। पोस्टिंग को लेकर पीसीएस अधिकारियों में भी नाराजगी जगजाहिर हो चुकी है।

प्रमोटी आईएएस अधिकारियों में भी पोस्टिंग को लेकर नाराजगी

वर्तमान में प्रमोटी आईएएस अधिकारियों में भी पोस्टिंग को लेकर नाराजगी है। सचिव हरबंस सिंह चुघ उनसे लगातार अहम विभाग हटाए जाने से नाराज हैं। चुघ से पहले खेल विभाग हटाया गया और उसके बाद राजस्व विभाग भी वापस ले लिया गया। अब उनके पास श्रम, कौशल विकास एवं सेवायोजन विभाग ही रह गया है। इसके बाद वे लंबी छुट्टी पर चले गए हैं। इसे उनकी कथित नाराजगी से जोड़कर देखा जा रहा है। प्रमोटी आईएएस अफसर इसे खुद के साथ भेदभाव की कार्रवाई के तौर पर देख रहे हैं। उनका कहना है कि अहम पदों पर सीधी भर्ती के आईएएस अफसरों का कब्जा है। खुद के साथ अन्याय महसूस कर रहे प्रमोटी अफसरों ने दबाव बनाना शुरू कर दिया। पिछले दिनों उन्होंने मुख्य सचिव उत्पल कुमार सिंह और अपर मुख्य सचिव डॉ. रणवीर सिंह से ही नहीं बल्कि मुख्यमंत्री से शिकायत की। सूत्रों के मुताबिक एक प्रमोटी आईएएस ने यहां तक कहा कि मुख्यमंत्री की सचिव ही सारे ट्रांसफर पोस्टिंग के काम कर रही हैं। जिसके बाद मुख्यमंत्री की सचिव भड़क गई और इसे अपना अपमान बता कर प्रमोटी आईएएस को अदालत में घसीटने की चेतावनी दे डाली। उसके बाद बहरहाल दोनों के झगड़े के बाद प्रमोटी आईएएस के खिलाफ मूल आईएएस लामबंद होने लगे हैं। सूत्रों के अनुसार आईएएस एसोसिएशन की बैठक टलना सरकार पर उनकी तरफ से अब दबाव बनाने की ही मुहिम का हिस्सा है। बहरहाल अगर यह विवाद बढ़ा तो प्रदेश में विकास कायरे पर असर भी तय है।

पोस्टिंग को लेकर पीसीएस अफसरों में भी नाराजगी 

उल्लेखनीय है कि विगत दिनों किए गए तबादलों को लेकर पीसीएस अफसरों द्वारा वरिष्ठता को नजरअंदाज कर पोस्टिंग दिए जाने पर सवाल उठाए जाने पर सरकार को अपना फैसला वापस लेना पड़ा था, जबकि एक अधिकारी श्रीश कुमार की ओर से मामले में हाईकोर्ट में चुनौती देनी पड़ी थी। 

सुखद समाचार : राष्ट्रीय स्तर से ‘इतनी’ अधिक हो गयी उत्तराखंड में प्रति व्यक्ति आय, जीडीपी में भी 11.54 फीसद का उछाल

  • केंद्रीय सांख्यिकी कार्यालय-सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय ने जारी किये आंकड़े : देवभूमि में प्रति व्यक्ति आय 1,73,820 रुपये तक पहुंची, राज्य निवल घरेलू उत्पाद में भी 11.75 फीसद की बढ़ोतरी
  • राष्ट्रीय स्तर से 50 हजार अधिक हो गयी राज्य में प्रति व्यक्ति आय

नैनीताल, 10 अगस्त 2018। उत्तराखंडवासी चाहे विश्वास करें अथवा नहीं, राज्य की आर्थिकी के सम्बन्ध में जीडीपी व प्रति व्यक्ति आय के आंकड़े तो गर्व करने वाले और उत्साहजनक दिख रहे हैं। भले राज्य एक ओर अपने कर्मचारियों को वेतन भत्ते देने पर ही अपनी जीडीपी का 80 खर्च करने को मजबूर हो और लगातार हर माह, बिना नागा किये ऋण लेने को मजबूर हो, किन्तु अर्थ एवं संख्या निदेशालय नियोजन विभाग द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार उत्तराखंड राज्य के सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में 2016-17 की तुलना में 11.54 फीसद बढ़ोतरी का अनुमान है। यही नहीं निवल घरेलू उत्पाद में भी 11.75 फीसद की आशातीत वृद्धि की उम्मीद है। इसके साथ ही राज्य में प्रति व्यक्ति आय बढ़कर 1,73,820 रुपये हो गयी है जो राष्ट्रीय स्तर से 50 हजार अधिक है।

आम लोग इन आंकड़ों को शंका की दृष्टि से देख सकते हैं, किन्तु यहाँ बता दें कि यह आंकड़े मुख्यतया 4 प्रकार के अनुमान से तैयार किये जाते हैं। 1. प्रचलित भाव पर राज्य सकल घरेलू उत्पाद (अर्थव्यवस्था का आकार), 2. स्थायी भाव पर राज्य सकल घरेलू उत्पाद (आर्थिक वृद्धि दर), 3. प्रचलित भाव पर राज्य निवल घरेलू उत्पाद ( प्रतिवर्ष प्रतिव्यक्ति आय), 4. स्थायी भाव पर राज्य निवल घरेलू उत्पाद इसके मुख्य विंदु होते हैं। 

केन्द्रीय सांख्यिकी कार्यालय, सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय द्वारा जारी किये गये ताज़ा आंकड़ों के अनुसार राष्ट्रीय स्तर पर वर्ष 2017-18 में देश की आर्थिक विकास दर में 10 फीसद बढ़ोतरी का अनन्तिम अनुमान लगाया गया है। आंकड़ों के अनुसार 2016-17 में जहां देश की विकास दर 7 फीसद थी जो 2017-18 में 6.7 फीसद हो गयी। इसके विपरीत उत्तराखंड में यह दर 2016-17 में 6 फीसद थी जो 2017-18 में 6.79 फीसद हो गयी। इसी तरह प्रति व्यक्ति आय में भी उत्तराखंड राष्ट्रीय परिप्रेक्ष्य में भी अव्वल है। वर्ष 2017-18 में जहां देश की प्रति व्यक्ति आय 1,12,835 रुपये है वहीं उत्तराखंड में यह आंकड़ा 1,73,820 रुपये प्रति व्यक्ति है।

आंकड़े बताते हैं कि प्रचलित भाव के आधार पर वर्ष 2017-18 में राज्य का सकल घरेलू उत्पाद (अनन्तिम अनुमान) 2,14,033 करोड़ अनुमानित है (अर्थव्यवस्था का आकार) जो वर्ष 2016-17 की तुलना में 11.54 प्रतिशत की वृद्धि दर्शा रहा है। वर्ष 2017-18 में राज्य निवल घरेलू उत्पाद (अनन्तिम अनुमान) 1,91,480 करोड़ अनुमानित है जो वर्ष 2016-17 की तुलना में 11.75 फीसद की वृद्धि दिखा रहा है। वर्ष 2016-17 में राज्य निवल घरेलू उत्पाद (पुनरीक्षित) अनुमान 1,71,342 करोड़ अनुमानित है। स्थायी भाव के आधार पर वर्ष 2017-18 में राज्य सकल घरेलू उत्पाद (अनन्तिम अनुमान) 172849 करोड़ अनुमानित है, यह वर्ष 2016-17 की तुलना में 6.79 प्रतिशत की वृद्धि है, जो राज्य की विकास दर को परिलक्षित करता है। वर्ष 2016-17 में राज्य सकल घरेलू उत्पाद (पुनरीक्षित) अनुमान 1,61,865 करोड़ अनुमानित है। राज्य की आय का अनुमान मुख्य रूप से वित्तीय वर्ष में राज्य के भौगोलिक क्षेत्रफल के अन्दर वर्ष में उत्पादित कुल वस्तुओं एवं सेवाओं का सकल मूल्य होता है। इसका आंकलन आधार वर्ष के आधार पर आगामी वर्षों में राज्य आय अनुमान आगणित किया जाता है। 

उत्तराखंड में पर्यटन को उद्योग का दर्जा मिला, टिहरी झील में कैबिनेट ने तैरते हुए लिए जमीनी फैसले

टिहरी झील में मरीना फ्लोटिंग बोट पर 16 मई 2018 को आयोजित हुई ऐतिहासिक कैबिनेट बैठक में कई ऐतिहासिक निर्णय लिए गए। इनमें प्रमुख हैं :
    1. पर्यटन को उद्योग का दर्जा मिला। पर्यटन से जुड़े कायाकल्प रिज़ॉर्ट, आयुर्वेद,  योगा, पंचकर्म, बंजी जंपिंग, जॉय राइडिंग, सर्फिंग, कैंपिंग, राफ्टिंग जैसे उद्यम भी एमएसएमई नीति के अंतर्गत आएंगे
    1. मेगा इंडस्ट्री इन्वेस्टमेंट नीति के अंतर्गत आयुष और वेलनेस सेक्टर सहित होटल, रिज़ॉर्ट, क्याकिंग, सी-प्लेन,आयुर्वेद, योग जैसी 22 गतिविधियां विभिन्न लाभों के लिए अनुमन्य होंगी।
    2. सूक्ष्म, लघु, मध्यम उद्योग क्रय-विक्रय नियमावली में पर्यटन को उद्योग का दर्जा देने हेतु संशोधन किया गया।
    1. 13 डिस्ट्रिक्ट 13 न्यू टूरिस्ट डेस्टिनेशन योजना को मंजूरी : प्रत्येक जनपद में 13 नये पर्यटक स्थल घोषित, अल्मोड़ा में धार्मिक पर्यटन के रूप में सूर्य मन्दिर। नैनीताल में हिमालय दर्शन के लिए मुक्तेश्वर। पौड़ी में वाटर स्पोर्टस के लिए सतपुली, खैरगढ़। चमोली में प्रस्तावित ग्रीष्मकालीन राजधानी भराड़ीसैण, गैरसैंण। देहरादून में महाभारत सर्किट, लाखामण्डल। हरिद्वार में पावन शान्ति पीठ। उत्तरकाशी में हैरिटेज रूप में मोरी, हरकी दून। टिहरी में टिहरी झील। रूद्रप्रयाग में चिरबिटिया। ऊधमसिंह नगर में गूलरभोज। बागेश्वर में गरूड़ घाटी। चम्पावत में देवीधूरा और पिथौरागढ़ में ईको टूरिज्म के रूप में मोस्टमानू।
    1. वीर चंद्र सिंह गढ़वाली योजना में क्याकिंग, टेरेन बाइकिंग, कैरावैन, ऐंग्लिंग, स्टार गेसिंग, बर्ड वाचिंग आदि 11 नई गतिविधियां भी शामिल
    1. वर्ष 2018 को रोजगार वर्ष के रूप मनाया जायेगा।
    1. पिरूल नीति के तहत14  मीट्रिक टन पिरूल से 150 मेगावाट बिजली बनाने तथा साठ हज़ार लोगों को हर माह 8 से 10000 रुपये तक का रोजगार देने की  योजना। कहा गया कि 25 किलो वाट बिजली के उत्पादन के लिए लगभग ढाई नाली जमीन (500 वर्ग मीटर) से लगभग 10 लोगों को प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष रोजगार प्राप्त होगा।
    1.  पण्डित दीनदयाल उपाध्याय सामाजिक सुरक्षा योजना के तहत 50 लाख का फण्ड बनाकर तलाक शुदा/परित्याक्ता/एकल महिलाओं तथा किन्नरों को सुरक्षा प्रदान करने के लिए 1 प्रतिशत की दर से 1 लाख का सहकारिता लोन।Image result for फ्लोटिंग बोट पर कैबिनेट बैठक
    1. एससी/एसटी व ओबीसी की आरक्षण गणना 1.5 के ऊपर होने पर संख्या 2 मानी जायेगी।
    1. उत्तराखण्ड राज्य के अधीन वैयक्तिक सहायक पदोन्नत पदोन्नती नियमावली को मंजूरी।
    1. अधीनस्थ सेवा सीधी भर्ती वैयक्तिक सेवा नियमावली को मंजूरी।
    1. मेंथा प्रजाति के उत्पादों के लिए मंडी शुल्क माफ कर दिया गया।
    1. एमसीआई यानी भारतीय चिकित्सा परिषद में उत्तराखंड के  पूर्व के 7 पदों को बढ़ाकर 15 किया गया
    1. वीर चन्द्रसिंह गढ़वाली योजना का दायरा बढ़ाकर इसमें कायाकल्पिंग फ्लोटिंग होटल निर्माण आदि को शामिल किया गया।
    1. मेगा इन्वेस्टमेंट इण्डस्ट्री नीति 2015 में संशोधन कर सूची बढायी गयी।
  1. रुद्रप्रयाग में वेला कोटेश्वर में ज्योतिष पीठाधीश्वर शंकराचार्य जगदगुरू धर्मार्थ चिकित्सालय का संचालन सरकार स्वयं करेगी।

यह भी पढ़ें : उत्तराखंड में आयकर से 11000 करोड़ व कुमाऊं में 75 फीसद अधिक लक्ष्य प्राप्त

मुख्य आयकर आयुक्त प्रमोद कुमार गुप्ता

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p style=”text-align: justify;”>-उत्तराखंड में नये करदाताओं की संख्या में 1.35 लाख की वृद्धि, बढ़कर 5.85 लाख हुए करदाता
नैनीताल। आयकर विभाग के द्वारा बुधवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के अधिकारियों को जनता के बीच जाकर उनकी समस्या सुनीं। इस दौरान प्रदेश के मुख्य आयकर आयुक्त प्रमोद कुमार गुप्ता ने बताया कि इस वर्ष उत्तराखंड में विभाग ने आयकर के रूप में 11 हजार करोड़ रुपए का राजस्व प्राप्त किया है। कुमाऊं में लक्ष्य 202 करोड़ का था, जिसमें से 352 करोड़ यानी पिछले वर्ष के मुकाबले 75 फीसद अधिक लक्ष्य प्राप्त कर लिया गया है। उन्होंने नाम लिये बिना बताया कि अनेक बोगस कंपनियां उत्तराखंड में पकड़ी गयी हैं, और उनके खिलाफ कार्रवाई की जा रही है। उन्होंने कहा कि इस कार्यक्रम का उद्देश्य करदाताओं का आधार बढ़ाना भी है। उन्होंने बताया कि पिछले वर्ष उत्तराखंड में नये करदाताओं की संख्या में 1.35 लाख की वृद्धि हुई है। पिछले वित्तीय वर्ष में एक अप्रैल को राज्य में करदाताओं की संख्या 4.5 लाख थी, जो इस वर्ष बढ़कर 5.85 हो गया है। बताया कि आउटरीच कार्यक्रम के तहत करदाताओं को आश्वस्त कर रहे हैं कि करदाताओं के अधिनियमों के तहत अपने दायित्वों का पालन करने तक विभाग का रवैया गैर विरोधात्मक है।

यह भी पढ़ें : ग्राम विकास विभाग के लिए अल्मोड़ा व टिहरी जिले सुगम

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p style=”text-align: justify;”>नैनीताल। ग्राम विकास विभाग के लिए वार्षिक स्थानांतरण अधिनियम-2018 के तहत सुगम व दुर्गम स्थलों का चिन्हीकरण कर दिया गया है। खास बात यह है कि प्रदेश के देहरादून, हरिद्वार, ऊधमसिंह नगर व नैनीताल के साथ ही अल्मोड़ा व टिहरी जिलों को सुगम में तथा शेष रुद्रप्रयाग, चमोली, उत्तरकाशी, पौड़ी, पिथौरागढ़, चंपावत एवं बागेश्वर जिलों को दुर्गम की श्रेणी में रखा गया है। इनके अतिरिक्त सुगम प्रसार प्रशिक्षण केंद्र शंकरपुर देहरादून, हरिद्वार, रुद्रपुर, हल्द्वानी, हवालबाग व पौड़ी के केंद्रों को भी सुगम में जबकि गोपेश्वर व धरकोट को दुर्गम की श्रेणी में रखा गया है।
उल्लेखनीय है कि बीते सप्ताह सूचना विभाग का भी दुर्गम व सुगम का निर्धारण किया गया है, जिसमें प्रदेश के चार मैदानी जिलों देहरादून, हरिद्वार, ऊधमसिंह नगर व नैनीताल के अलावा अल्मोड़ा व टिहरी सहित शेष सभी 9 पर्वतीय जिलों को दुर्गम की श्रेणी में रखा गया है।

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मेरा जन्म 26 नवंबर 1972 को हुआ था। मैं नैनीताल, भारत में मूलतः एक पत्रकार हूँ। वर्तमान में मार्च 2010 से राष्ट्रीय हिन्दी दैनिक समाचार पत्र-राष्ट्रीय सहारा में ब्यूरो चीफ के रूप में कार्य कर रहा हूँ। इससे पहले मैं पांच साल के लिए दैनिक जागरण के लिए काम कर चुका हूँ। कुमाऊँ विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग से ‘नए मीडिया’ विषय पर शोधरत हूँ। फोटोग्राफ़ी मेरा शौक है। मैं NIKON COOLPIX P530 और अडोब फोटोशॉप 7.0 के साथ फोटोग्राफी कर रहा हूँ। फोटोग्राफी मेरे लिए दुनियां की खूबसूरती को अपनी ओर से चिरस्थाई बनाने का बहुत छोटा सा प्रयास है। एक फोटो पत्रकार के रूप में मेरी तस्वीरों को नैनीताल राजभवन सहित विभिन्न प्रदर्शनियों में प्रस्तुत किया गया, तथा उत्तराखंड की राज्यपाल श्रीमती मार्गरेट अलवा द्वारा सम्मानित किया गया है। कुछ चित्रों को राष्ट्रीय-अंतर्राष्ट्रीय पुरस्कार भी प्राप्त हो चुके हैं। गूगल अर्थ पर चित्र उपलब्ध कराने वाली पैनोरामियो साइट पर मेरी प्रोफाइल को 18.85 Lacs से भी अधिक हिट्स प्राप्त हैं।पत्रकारिता और फोटोग्राफी के अलावा मुझे कवितायेँ लिखना पसंद है। काव्य क्षेत्र में मैंने नवीन जोशी “नवेन्दु” के रूप में अपनी पहचान बनाई है। मैंने बहुत सी कुमाउनी कवितायेँ लिखी हैं, कुमाउनी भाषा में मेरा काव्य संकलन उघड़ी आंखोंक स्वींड़ प्रकाशित हो चुका है, जो कि पुस्तक के के साथ ही डिजिटल (PDF) फार्मेट पर भी उपलब्ध होने वाली कुमाउनी की पहली पुस्तक है। मेरी यह पुस्तक गूगल एप्स पर भी उपलब्ध है। ’ यहां है एक पत्रकार, लेखक, कवि एवं छाया चित्रकार के रूप में मेरी रचनात्मकता, लेख, आलेख, छायाचित्र, कविताएं, हिंदी-कुमाउनी के ब्लॉग आदि कार्यों का पूरा समग्र। मेरी कोशिश है कि यहां नैनीताल, कुमाऊं, उत्तराखंड और वृहद संदर्भ में देश की विरासत, संस्कृति, इतिहास और वर्तमान को समग्र रूप में संग्रहीत करने की….।मेरे दिल में बसता है, मेरा नैनीताल, मेरा कुमाऊं और मेरा उत्तराखंड

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