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सबसे बड़ा नहीं रहेगा शिक्षा विभाग, सवा 100 दफ्तर व करीब 600 स्कूल-कॉलेज होंगे बंद, सरकार के बचेंगे करीब 16 सौ करोड़

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राज्य के सबसे बड़े शिक्षा विभाग के ऑपरेशन की तैयारी शुरू हो गई है। सरकार ने वित्त विभाग के वेतन समिति की रिपोर्ट पर शिक्षा विभाग से अनुपयुक्त कार्यालय, स्कूलों के विलय, और अफसर-शिक्षक-कर्मचारियों की संख्या में कटौती के आधार पर विभागीय एकीकरण का प्रस्ताव मांगा है।  इसमें शिक्षा विभाग के ब्लॉक से राज्यस्तर तक के 126 दफ्तरों को बंद करने लायक माना गया है। इन दफ्तरों के बंद होने से सीधा-सीधा 125 सीनियर अफसर कम हो जाएंगे और बाकी स्टॉफ भी बड़ी संख्या में घटेगा। यही नहीं 400 के करीब इंटर कालेज बंद करने और जूनियर और हाईस्कूलों का विलय करने की सिफारिश भी है। इस फार्मूले से जहां शिक्षा विभाग का भारीभरकम ढांचा हल्का होगा। वहीं  सरकार का कम से कम 1600 करोड़ रुपये का खर्च भी बचेगा। अशासकीय स्कूलों के 488 करोड़ के अनुदान व 400 इंटर कॉलेज बंद करके 1196 करोड़ रुपये बचेंगे। वहीं जूनियर और हाईस्कूल एकीकरण से  662 करोड़ और वरिष्ठ अफसरों के पद घटाने से 50 करोड़ रुपये का बोझ कम होगा।

इस बारे  में शिक्षा निदेशक आरके कुंवर का कहना है कि वित्त विभाग से शिक्षा विभाग के पुनर्गठन को लेकर एक प्रस्ताव मिला है। अभी इसका परीक्षण हो रहा है। सभी निदेशालय अनुपयोगी दफ्तरों को समाप्त करने के मुद्दे पर  पर काफी समय से मंथन कर रहे हैं। जल्द ही एक संयुक्त प्रस्ताव सरकार को दे दिया जाएगा।

यह है वित्त विभाग की सिफारिश
123 दफ्तर बंद करने लायक:
 प्रदेश के विकास खंडों में बीईओ व उपशिक्षा अधिकारी के दो कार्यालय हैं। जिलास्तर पर सीईओ, डीईओ-बेसिक,डीईओ-माध्यमिक के तीन दफ्तर हैं। मंडल स्तर पर एडी बेसिक और एडी माध्यमिक के दो तथा राज्य स्तर पर बेसिक व माध्यमिक के दो निदेशकों की जगह ब्लॉक, जिला मंडल व राज्यस्तर पर एक-एक पद रखने की सिफारिश की गई है। इसके अलावा वित्त विभाग ने निदेशक अनुसंधान एवं शोध कार्यालय और राज्य शैक्षिक प्रबंधन एवं प्रशिक्षण (सीमेट) के साथ विद्यालयी शिक्षा बोर्ड-रामनगर को भी भंग करने की सिफारिश की है। वित्त विभाग ने इन तीनों को अनुपयोगी माना है।

यह भी पढ़ें : उत्तराखंड कैबिनेट के नए साल पर एक दर्जन तोहफ़े, डेढ़ लाख कर्मचारियों की वेतन निर्धारण विसंगति दूर, जानें सभी प्रस्ताव

नवीन समाचार, देहरादून, 31 दिसंबर 2018 । कैबिनेट बैठक में नौ प्रस्तावों पर चर्चा की गई। इनमें से एक प्रस्ताव को वापस ले लिया गया है। बैठक में फैसला लिया गया कि उत्तराखंड पुलिस के 33 प्रतिशत पद पदोन्नति से भरे जाएंगे। इसमे सशस्त्र बलों को भी शामिल किया गया है। वेतन निर्धारण विसंगति भी दूर की गई है। इससे करीब डेढ़ लाख कर्मचारी लाभांवित होंगे। इसके साथ ही एकल आवास व्यवसायिक भवन में अवैध को वैध करने के लिए वन टाइम सेटलमेंट योजना लाने पर भी मुहर लगाई गई है। 

मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत की अध्यक्षता में सचिवालय में कैबिनेट बैठक का आयोजन किया गया। इस दौरान लोक सेवा आयोग के व्यवस्थाधिकारी एवं व्यस्थापक पदों की सेवा नियमावली में संशोधन हुआ।

कैबिनेट के अहम फैसले 

  • गन्ने के समर्थन मूल्य में बदलाव। गन्ने की अगेती प्रजाति के लिए समर्थन मूल्य 327 और सामान्य प्रजाति के लिए 317 रुपये प्रति कुन्तल किया गया।  
  • उत्तराखंड भवन निर्माण और विकास उपविधि विनियम के मानकों में संशोधन, भवन निर्माण नीति में संसोधन किया गया। वहीं, पहाड़ों और मैदान के बीच वाले भाग में फुट हिल नीति बनाई जाएगी। प्राधिकरणों को इसमें कार्य करने के लिए कहा गया है। देहरादून, नैनीताल, अल्मोड़ा, पौड़ी, टिहरी, चंपावत जिलों में काम करेंगे प्राधिकरण। फुट हिल नीति में भवनों की ऊंचाई 21 मीटर से ज्यादा नहीं होगी। सड़क की चौड़ाई नौ मीटर से घटाकर 6.75 मीटर कर दिया गया है। 
  • पहाड़ में ग्रुप हाउसिंग और अफोर्डेबल हाउस के लिए सड़क की चौड़ाई छह मीटर की गई। हाउसिंग के लिए पहाड़ों में 1000 मी ऊंचाई तय की गई है, जबकि 25 वर्ग मी. भूमि पर व्यवसायिक ऑफिस निर्माण को मंजूरी दी गई, जिसमें सड़क की चौड़ाई दो मीटर तय की गई है। 
  • पहाड़ में ‘मॉल विद मल्टीपेक्स’ में हुआ संशोधन। वेडिंग प्वाइंट पर भी 1000 वर्ग मी. के साथ 500 वर्ग मी. की दी गई  सहूलियत। 
  • नगर निगम अधिनियम 1965 की धारा 135 और 136 में किया गया बदलाव, बजट में की गई बढ़ोतरी। नगर आयुक्त को 50 हजार से 10 लाख। देहरादून के महापौर के लिए बजट एक लाख से 12 लाख, जबकि बाकी महापौरों के लिए छह लाख तक की मंजूरी। कार्यसमति के लिए बजट होगा 25 लाख।  
  • उत्तराखंड पुलिस के 33 प्रतिशत पद पदोन्नति से भरे जाएंगे। इसमे आर्म्ड फोर्स को भी शामिल किया गया है। वेतन निर्धारण विसंगति दूर की गई दूर। सीधी भर्ती ओर पदोन्नति के गेप को भी किया दूर। करीब ढेड़ लाख कर्मचारी लाभांवित होंगे।

यह भी पढ़ें : सूचना अधिकार से खुला राज, उत्तराखंड में हर माह 300 करोड़ कर्ज लेकर कौन पी रहा है ‘घी’ !

-राज्य के शीर्ष आईएएस अधिकारियों जितने वेतन-भत्ते लेते हैं हर माह 300 करोड़ का कर्ज ले रहे उत्तराखंड के माननीय
-सूचना के अधिकार के तहत मुख्यमंत्री कार्यालय से सूचना अधिकार कार्यकर्ता हेमंत गौनिया को प्राप्त सूचना से हुआ खुलासा
नवीन जोशी, नवीन समाचार, नैनीताल, 7 दिसंबर 2018। अक्सर हम प्रदेश के कर्मचारियों, उन्हें सातवें वेतनमान देने पर बढ़ने वाले खर्च को वहन करने के लिए हर माह करीब 300 करोड़ और बीते नवंबर माह में 600 करोड़ रुपये बाजार के ‘कर्ज लेकर घी पीने’ जैसी समाचार पढ़ते रहते हैं। लेकिन आज जो ‘नवीन समाचार’ है वह राज्यवासियों की आंखें खुली की खुली रख देगा, और इस राज का भी पर्दाफाश करेगा कि आखिर हमारे जनप्रतिनिधि समाजसेवा के नाम पर राज्य विधानसभा या संसद पहुंचने के लिए इतना जोर क्यों लगाते हैं, और साथ में यह सवाल भी आपके मन में जरूर उठेगा कि यदि इतनी आय वे प्राप्त कर ही लेते हैं तो फिर खनन के पट्टों, नौकरियों-स्थानांतरणों के लिए क्यों मोटी धनराशि की मांग करते हैं, या ऐसे आरोप उन पर लगते हैं। जनपद के सूचना अधिकार कार्यकर्ता हेमंत गौनिया को मुख्यमंत्री कार्यालय से सूचना के अधिकार के तहत प्राप्त जानकारी से इस राज से काफी हद तक परदा उठ जाता है। इससे साफ हो जाता है कि वास्तव में राज्य में ‘ऋण लेकर घी’ कौन पी जा रहे हैं।

दिखाने के दांत अलग, और खाने को अलग

वैसे विधायकों के वेतन की बात करें तो यह ‘हाथी के दांत’ की तरह लगता है, यानी दिखाने के दांत अलग, और खाने को अलग। कहने को विधायकों का मासिक वेतन मात्र 30 हजार रुपये है, पर इसमें भत्तों की बात करेंगे तो असल खाने वाले दांत दिखाई देंगे। एक विधायक को हर माह डेढ़ लाख रुपये निर्वाचन क्षेत्र में मिलने आने वाली जनता के नाम पर निर्वाचन क्षेत्र भत्ता, 12 हजार रुपये प्रतिमाह चालक भत्ता, 12 हजार रुपये ही साथ में रखने के लिए सचिवीय भत्ता, दो हजार रुपए प्रतिदिन यानी 60 हजार रुपये महीना उनके द्वारा की जाने वाली ‘जनसेवा’ के लिए जनसेवा भत्ता यानी कुल करीब 2 लाख 64 हजार रुपये के भत्ते मिलते हैं। इसके अलावा प्रति वर्ष तीन लाख 55 हजार रुपये के रेलवे के कूपन भी मिलते हैं, जिनमें से विधायकों द्वारा मांग किये जाने पर 27,083 रुपये प्रतिमाह डीजल-पेट्रोल व्यय के रूप में भुगतान किया जाता है। साथ ही हर माह 6 हजार रुपये प्रतिमाह तक मोबाइल-टेलीफोन का बिल भी दिया जाता है। इसे भी मिला दें तो एक विधायक हर माह करीब 3 लाख्रुपये से अधिक की धनराशि होती है। साथ ही रेलवे कूपनों के अतिरिक्त हवाई यात्रा करने पर टिकटों की एक सीमा तक प्रतिपूर्ति भी की जाती है। इस प्रकार एक विधायक को पांच वर्ष के उनके कार्यकाल में राज्य के शीर्ष आईएएस अधिकारियों के बराबर वेतन-भत्ते मिलते हैं। इस प्रकार एक विधायक से पांच वर्ष के कार्यकाल में राज्य पर करीब 1.8 करोड़ एवं 70 विधायकों को मिलाकर देखें तो 126 करोड़ का भार केवल वेतन-भत्तों के जरिये पड़ रहा है।

अन्य सुविधाएं भी अलग

विधायकों को उपरोक्त वेतन-भत्तों के साथ ही निर्वाचन क्षेत्र तथा मुख्यालय में एक-एक टेलीफोन, एक मोबाइल सिम, स्वयं तथा परिवार के सदस्यों के लिए चिकित्सा प्रतिपूर्ति की सुविधा, कार्यकाल में एक लेपटॉप, प्रतिवर्ष 2000 पृष्ठों के छपे हुआ लेटरपैड एवं 1000 मुद्रित लिफाफे भी मिलते हैं। वहीं किसी सदस्य की पद के दौरान मृत्यु होने की दशा में उसके आश्रित को उसकी पेंशन की 50 फीसद पारिवारिक पेंशन उसके सदस्यता काल में दी जाती है, तथा कार्यकाल पूरा होने के बाद भी पेंशन दी जाती है।

उत्तराखंड के मुख्य सचिव ने कहा प्रदेश की आर्थिक स्थिति ‘अच्छी’, जानिये क्या दी दलील…..

-कहा-राज्य की आर्थिक स्थिति अच्छी होने की वजह से ही मिले 1.24 लाख करोड़ के निवेश प्रस्ताव
-बलियानाला व माल रोड का स्थायी समाधान तलाश रहे, नारायणनगर पार्किंग पर सवाल टाल गये
-हल्द्वानी में इंडोर स्टेडियम का कार्य मार्च 19 तक पूरा करेंगे, आईएसबीटी पर शीघ्र निर्णय
नैनीताल, 29 नवंबर 2019। उत्तराखंड के मुख्य सचिव उत्पल कुमार सिंह ने प्रदेश सरकार द्वारा इस माह दो बार तीन-तीन सौ करोड़ रुपये कर्ज लिये जाने से प्रदेश की आर्थिक स्थिति पर उठ रहे सवालों पर कहा कि कर्ज भारत सरकार एवं भारतीय रिजर्व बैंक के अधिनियमों व सीमा के अंतर्गत ही लिये जा रहे हैं। साथ ही राज्य की आर्थिक स्थिति को ‘अच्छी’ बताते हुए कहा कि इसे देखते हुए ही गत दिनों आयोजित हुए निवेशक सम्मेलन में राज्य को 1.24 लाख करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव मिले हैं। इससे राज्य की आर्थिक स्थिति और भी बेहतर हो जाएगी। निवेश प्रस्तावों को धरातल पर लाने के लिए सभी संबंधित विभाग निवेशकों से संपर्क कर कार्य कर रहे हैं।
श्री सिंह बृहस्पतिवार को अल्मोड़ा जाते हुए संक्षिप्त विश्राम के लिए राज्य अतिथि गृह पहुंचे थे। इस दौरान उन्होंने पत्रकारों से वार्ता की। राज्य की खराब आर्थिक स्थिति के कारण नैनीताल के आधार बलियानाले का उपचार न हो पाने के प्रश्न को नकारते हुए श्री सिंह ने कहा कि उपचार धन की कमी नहीं, बल्कि स्थायी उपचार की उपयुक्त तकनीक न मिल पाने के कारण नहीं हो पा रहा है। इस हेतु अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर भी उपयुक्त स्थायी उपचार की तकनीकी का भी अध्ययन किया जा रहा है। कहा कि बलियानाला व माल रोड दोनों का स्थायी उपचार किया जाएगा। अलबत्ता नारायण नगर में 50 करोड़ रुपये से प्रस्तावित पार्किंग पर खासकर वन विभाग से अनुमति न मिल पाने के सवाल को मुख्य सचिव टाल गये। बोले कि वन विभाग से अन्य योजनाओं में सहयोग मिल रहा है। हल्द्वानी स्थित अंतराष्ट्रीय स्टेडियम पर उन्होंने कहा कि इसके इंडोर स्टेडियम का निर्माण मार्च 19 तक पूरा करने की समय सीमा दी गयी है। आईएसबीटी पर बोले कि संबंधित स्थल का निरीक्षण कर लिया गया है। अब जल्द ही निर्णय ले लिया जाएगा। वहीं पलायन के प्रश्न पर बोले की पलायन आयोग ने अभी प्रारंभिक रिपोर्ट दी है। आगे आयोग विस्तृत अध्ययन कर अपनी अंतिम रिपोर्ट देगा, जिसके आधार पर समस्या का लक्षित समाधान किया जाएगा। कहा कि पर्यावरण सामान्य प्रक्रिया है, और पूरे देश-दुनिया में आर्थिक स्थिति बढ़ने के साथ बढ़ रहा है। लोग आ भी रहे हैं और जा भी रहे हैं। अलबत्ता कुछ जिलों में जरूर दिक्कत है। इस अवसर पर डीएम विनोद कुमार सुमन, एडीएम हरबीर सिंह व उप निदेशक सूचना योगेश मिश्रा भी मौजूद रहे।

पूर्व समाचार : उत्तराखंड में सरकार की फिर 3 अरब का ऋण लेकर कर्मचारियों को ‘घी पिलाने’ की तैयारी

-भत्तों से साढ़े तीन सौ करोड़ रु. के अतिरिक्त बोझ का अनुमान, सरकार की 300 करोड़ कर्ज लेने की तैयारी 

नैनीताल, 27 दिसंबर 2018। किसी भी राज्य की आर्थिकी में ‘ऋणं लित्वा घृतम् पीवेत्’ की स्थिति सर्वाधिक बुरी मानी जाती है। लेकिन उत्तराखंड सरकार सूबे की खराब माली हालत के बीच कर्मचारियों के बढ़ते दबाव के चलते उन्हें सातवें वेतन आयोग की सिफारिशों के मुताबिक भत्ते देने और इस माह दूसरी बार 300 करोड़ रुपये कर्ज लेने की तैयारी में है। इसके साथ ही सिर्फ बाजार से कर्ज का आंकड़ा 4750 करोड़ तक पहुंच रहा है, तथा दिसंबर माह से पहले ही तय सीमा से ज्यादा कर्ज लेने की नौबत आ गयी है। इस वजह से सातवें वेतनमान के भत्ते देने का साहस सरकार जुटा नहीं पा रही है। उधर, केंद्र ने राहत देते हुए बाजार से लिए जाने वाले कर्ज की सीमा बढ़ा दी है। राज्य सरकार चालू वित्तीय वर्ष के आखिरी माह यानी मार्च तक 2400 करोड़ और कर्ज ले सकेगी। 

सेवारत और सेवानिवृत्त कार्मिकों की पगार बांटने में ही राज्य सरकार के दम फूल रहे हैं। इसी माह दोबारा बाजार से कर्ज लिया जा रहा है। सरकार 300 करोड़ का कर्ज उठाएगी। इधर नवंबर में बीती 13 तारीख को 300 करोड़ का कर्ज लिया जा चुका है। अब फिर 300 करोड़ कर्ज लिया जा रहा है। इस माह कुल 600 कर्ज लेने के साथ ही बाजार से कर्ज बढ़कर 4750 करोड़ हो जाएगा। गौरतलब है कि केंद्र सरकार की ओर से पहले 4500 करोड़ तक ही बाजार से कर्ज लेने की अनुमति दी गई थी। केंद्र ने राज्य को राहत देते हुए वित्तीय वर्ष के अंत तक 2400 करोड़ कर्ज बाजार से उठाने पर हामी भर दी है। 

प्रदेश सरकार अगर सातवें वेतन आयोग की सिफारिशों के मुताबिक कर्मचारियों को भत्ते देती है तो राज्य पर करीब 350 करोड़ रुपये का अतिरिक्त बोझ पड़ेगा। प्रदेश सरकार सातवें वेतन आयोग की सिफारिशें लागू कर पहले से वित्तीय बोझ सहन कर रही है। प्रदेश सरकार ने राज्य कर्मियों का महंगाई भत्ता भी बढ़ा दिया है जिससे सरकार पर 60 करोड़ का अतिरिक्त बोझ पड़ना तय है। गौरतलब है कि प्रदेश के बजट का 31.55 फीसद हिस्सा कर्मचारियों के वेतन भत्तों पर खर्च होता है जबकि 12.29 फीसद पेंशन व आनुतोषिक पर जाता है। 10.67 हिस्सा ब्याज व लाभांश पर खर्च होता है और 7.81 फीसद हिस्सा निवेश ऋणों पर खर्च होता है।

दरअसल प्रदेश के कर्मचारी लंबे समय से उन्हें सातवें वेतन आयोग की सिफारिशों के मुताबिक भत्ते देने की मांग कर रहे है। इसके लिए प्रदेश सरकार ने इंदु कुमार पांडे की अध्यक्षता वाली वेतन विसंगति समिति से रिपोर्ट मांगी थी जिसने काफी समय पहले सरकार को सिफारिशें सौंप दी थीं। बढ़ते दबाव के बीच बुधवार व बृहस्पतिवार को इस मुद्दे को लेकर मुख्य सचिव उत्पल कुमार सिंह की वित्त विभाग के साथ बैठक हुई जिसमें सैद्धांतिक तौर पर यह फैसला लिया गया है कि सरकार कर्मचारियों को भत्ते देगी। बैठक में इस बाबत भी विचार विमर्श हुआ कि कर्मचारियों को ये भत्ते किस तरह दिए जाएं। सचिव वित्त अमित सिंह नेगी ने भी सातवें वेतन के भत्तों को लेकर हुई बैठकों की पुष्टि की है।

यह भी पढ़ें : अपने स्टॉक बेचकर लगातार चौथे माह 250 करोड़ का कर्ज लेगा उत्तराखंड, 50 हजार करोड़ रुपये तक पहुंच गयी उधारी

  • इस वित्तीय वर्ष में अप्रैल माह से लगातार कर्ज ले रही है सरकार, इस वर्ष अब तक 1400 करोड़ रुपये कर्ज ले चुका है उत्तराखंड
नैनीताल, 8 अगस्त  2018। प्रदेश सरकार फिर से ₹ 250 करोड़ का कर्ज ले रही है। अगस्त के महीने में ऊर्जा, कृषि, सिंचाई और उद्योग क्षेत्र की योजनाओं के वित्त पोषण के नाम पर नया कर्ज लिया जा रहा है। सचिव वित्त अमित नेगी के मुताबिक सरकार भारतीय रिजर्व बैंक के जरिए अपना स्टॉक बेच कर यह कर्ज लेगी। सफल निविदाकर्ता को न्यूनतम ब्याज दर पर आठ अगस्त तक धनराशि मुहैया करानी होगी। उल्लेखनीय हैं कि प्रदेश सरकार इस साल ₹ 7300 करोड़ तक का कर्ज ले सकती है। बताते चलें कि पिछले महीने यानी जुलाई में ही सरकार ने 300 करोड़ रुपये का कर्ज लिया था। इसी तरह मई और जून में भी 300-300 करोड़ कर्ज सरकार ले चुकी है जबकि अप्रैल तक सरकार 500 करोड़ का कर्ज ले चुकी थी। इस तरह देखा जाए तो सरकार हर महीने कर्ज ले रही है, और इस वित्तीय वर्ष में अब तक 1400 करोड़ रुपये कर्ज ले चुकी है। जबकि 31 मार्च 2017 तक प्रदेश पर 35209.59 करोड़ का कर्ज था, अब 1400 करोड़ रुपये मिलाकर यह राशि 50,000 करोड़ के स्तर तक पहुँच गई है।
विदित हो कि  31 मार्च 2017 तक प्रदेश पर 35209.59 करोड़ का कर्ज था, जिसमें से 10212.85 करोड़ नेशनल स्माल सेविंग फंड की सिक्योरिटीज के रूप में, 20832.29 करोड़ राज्य विकास ऋण, 3509.13 करोड़ नेशनल बैंक ऑफ एग्रीकल्चर एंड रूरल डेवलपेंट के ऋण और शेष भारत सरकार के कर्ज के रूप में है। सरकार के इस कदम से प्रदेश सरकार पर कर्ज करीब 50 हजार करोड़ रुपये पार कर जाएगा। इस वक्त प्रदेश पर 41721.1152 करोड़ रुपये का कर्ज है जो कि अगले साल 31 मार्च तक 47580.4252 करोड़ पहुंचने की उम्मीद है। गौरतलब है कि प्रदेश के बजट का 31.55 फीसद हिस्सा कर्मचारियों के वेतन भत्तों पर खर्च होता है जबकि 12.29 फीसद पेंशन व आनुतोषिक पर जाता है। इसके अलावा 10.67 हिस्सा ब्याज व लाभांश पर खर्च होता है और 7.81 फीसद हिस्सा निवेश ऋणों पर खर्च होता है। 
गौरतलब है कि सूबे की खराब माली हालत के बीच कर्मचारियों के बढ़ते दबाव के चलते प्रदेश सरकार भारी दबाव में है। अब प्रदेश सरकार अगर सातवें वेतन आयोग की सिफारिशों के मुताबिक कर्मचारियों को भत्ते देती है तो राज्य पर करीब साढ़े तीन सौ करोड़ रुपये का अतिरिक्त बोझ पड़ेगा। प्रदेश सरकार सातवें वेतन आयोग की सिफारिशें लागू कर पहले से वित्तीय बोझ सहन कर रही है। प्रदेश सरकार ने राज्यकर्मियों का महंगाई भत्ता भी बढ़ा दिया है जिससे सरकार पर 60 करोड़ का अतिरिक्त बोझ पड़ना तय है। यही नहीं सरकार पर वेतन भत्तों के भुगतान का भी दबाव है। बहरहाल, सरकार के इस कदम से प्रदेश सरकार पर कर्ज करीब 50 हजार करोड़ रुपये पार कर जाएगा। वहीं एक रिपोर्ट के अनुसार इस वक्त प्रदेश पर 41721.1152 करोड़ रुपये का कर्ज है जो कि अगले साल 31 मार्च तक 47580.4252 करोड़ पहुंचने की उम्मीद है। गौरतलब है कि प्रदेश के बजट का 31.55 फीसद हिस्सा कर्मचारियों के वेतन भत्तों पर खर्च होता है जबकि 12.29 फीसद पेंशन व आनुतोषिक पर जाता है। 10.67 हिस्सा ब्याज व लाभांश पर खर्च होता है और 7.81 फीसद हिस्सा निवेश ऋणों पर खर्च होता है। 

अवैध कब्जे हटाने वाले 4 डीएम सहित 6 आईएएस खुद निकले अवैध कब्जेदार, हाईकोर्ट ने दिखाया आईना

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p style=”text-align: justify;”>-हाईकोर्ट ने 19 अफसरों-कर्मचारियों के दून में आवंटित आवास दो माह के भीतर खाली करने, बाजार दर से किराया वसूलने, जुर्माना लगाने और कब्जे की अनुमति देने वाले अफसरों के खिलाफ भी कार्रवाई करने के दिये आदेश
नैनीताल, 1 नवम्बर 2018। जिन अधिकारियों पर प्रदेश में अवैध कब्जे हटाने की जिम्मेदारी होती है, वे ही अवैध कब्जेदार माने गये हैं। उत्तराखंड हाईकोर्ट ने देहरादून से स्थानांतरण के बाद भी 6 आईएएस अफसरों सहित 19 अधिकारियों व कर्मचारियों द्वारा देहरादून में आवंटित आवासों में अनाधिकृत कब्जा जमाए रखने पर कड़ा रुख अपनाते हुए मुख्य सचिव से दो माह के भीतर अनाधिकृत आवास खाली कराने, कब्जेदारों से कब्जे वाले भवन का बाजार दर पर कब्जा वसूल करने, अवैध कब्जे के आरोप में जुर्माना लगाने व कब्जे की अनुमति देने वाले अफसर के खिलाफ नियमानुसार कार्यवाही करने के आदेश दिए हैं। इन अफसरों में बागेश्वर की डीएम रंजना, टिहरी की डीएम सोनिया, पिथौरागढ़ के डीएम सी रविशंकर व चमोली की डीएम स्वाति भदौरिया सहित हरिद्वार के सीडीओ विनीत तोमर व अपर सचिव विनोद चंद्र रावत शामिल हैं।
मामले के अनुसार रमेश चन्द्र लोहनी ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर देहरादून से स्थानांतरित कई अधिकारियों व कर्मचारियों ने सरकारी आवासों का कब्जा न छोड़ने से अन्य कार्मिकों को हो रही असुविधा का उल्लेख किया था। बीती 16 अगस्त 2018 को एकलपीठ ने याचिका को जनहित का मानते हुए इसे कार्यवाहक मुख्य न्यायधीश की खंडपीठ को भेज दिया था, और खंडपीठ ने इस मामले में विस्तृत शपथ पत्र पेश करने के आदेश सरकार को दिए थे। सरकार की जांच में 19 अफसरों व कर्मचारियों द्वारा अनाधिकृत कब्जा किये जाने की पुष्टि हुई है। गुरुवार को कार्यवाहक मुख्य न्यायधीश न्यायमूर्ति राजीव शर्मा की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने इन कब्जों को दो माह के भीतर खाली करवाने व दोषियों के खिलाफ कार्यवाही के आदेश मुख्य सचिव को दिए हैं।

यह भी पढ़ें : उत्तराखंड आईएएस एसोसिएशन में दो-फाड़ के आसार !

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p style=”text-align: justify;”>-प्रमोटी व मूल आईएएस में बढ़ी रार
-मामला अदालत के दरवाजे तक जाता है तो इससे प्रदेश की प्रचंड बहुमत की सरकार की छवि पर बट्टा लगना तय 

देहरादून। यूं तो प्रमोटी आईएएस व मूल आईएएस अफसरों का झगड़ा सनातन है, मगर प्रदेश के गठन के बाद पहली बार दोनों में तकरार इतनी बढ़ी है कि एक आईएस अधिकारी दूसरे प्रमोटी आईएस के खिलाफ अदालत जाने तक की धमकी दे रहीं हैं। अगर यह मामला अदालत के दरवाजे तक जाता है तो इससे प्रदेश की प्रचंड बहुमत की सरकार की छवि पर बट्टा लगना तय है, क्योंकि माना जाएगा कि उसने समय रहते भीतर-भीतर सुलग रही इस चिंगारी को शांत करने की कोशिश नहीं की और सारा मामला वरिष्ठ नौकरशाहों पर छोड़ दिया।

आईएएस एसोसिएशन की बैठक टली 

नौकरशाहों के बीच इस शीत युद्ध का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि मुख्यमंत्री व आईएएस एसोसिएशन के अध्यक्ष के समक्ष अपनी नाराजगी दर्ज करने के बाद सचिव पद पर तैनात प्रमोटी आईएएस अफसर हरबंस सिंह चुघ लंबी छुट्टी पर चले गए हैं। हालांकि उन्होंने अपनी छुट्टी के इस प्रकरण से जुड़े होने से इनकार किया है। आलम यह है कि आईएएस एसोसिशन में दोफाड़ की नौबत आ गई है। वहीं प्रमोटी आईएएस ने अलग एसोसिएशन बनाने की बात कही है, जिसके चलते 13 यानी शुक्रवार को होने वाली आईएएस एसोसिएशन की बैठक टाल दी गई। माना जा रहा है कि अब यह बैठक 17 अप्रैल को होगी। आईएएस अफसर एसोसिएशन के सचिव आनंद बर्धन ने भी अपरिहार्य कारणों से बैठक टलने की पुष्टि की, हालांकि उन्होंने कहा कि बैठक जल्द होगी।

यह है झगड़े की मूल जड़ 

प्रदेश में भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) के अफसरों और प्रमोटी आईएएस अफसरों में सारे झगड़े की जड़ तबादले और तैनाती मानी जा रही है। प्रमोटी आईएएस का आरोप है कि प्रदेश में नई सरकार के गठन के बाद से ही प्रमोटी आईएएस अफसरों को महत्वपूर्ण पोस्टिंग से वंचित रखा गया है। अहम पदों पर सीधे आईएएस अफसरों का ही कब्जा है। प्रमोशन से आईएएस बने अफसर अहम जिम्मेदारियों के लिए तरस गए हैं। पिछले एक साल से सचिवालय में तैनात प्रमोटी आईएएस अफसरों को तो सामान्य प्रशासन, सचिवालय प्रशासन, अल्पसंख्यक कल्याण, पुनर्गठन, प्रोटोकाल, संस्कृत शिक्षा जैसे विभाग सौंपे गए। पोस्टिंग को लेकर पीसीएस अधिकारियों में भी नाराजगी जगजाहिर हो चुकी है।

प्रमोटी आईएएस अधिकारियों में भी पोस्टिंग को लेकर नाराजगी

वर्तमान में प्रमोटी आईएएस अधिकारियों में भी पोस्टिंग को लेकर नाराजगी है। सचिव हरबंस सिंह चुघ उनसे लगातार अहम विभाग हटाए जाने से नाराज हैं। चुघ से पहले खेल विभाग हटाया गया और उसके बाद राजस्व विभाग भी वापस ले लिया गया। अब उनके पास श्रम, कौशल विकास एवं सेवायोजन विभाग ही रह गया है। इसके बाद वे लंबी छुट्टी पर चले गए हैं। इसे उनकी कथित नाराजगी से जोड़कर देखा जा रहा है। प्रमोटी आईएएस अफसर इसे खुद के साथ भेदभाव की कार्रवाई के तौर पर देख रहे हैं। उनका कहना है कि अहम पदों पर सीधी भर्ती के आईएएस अफसरों का कब्जा है। खुद के साथ अन्याय महसूस कर रहे प्रमोटी अफसरों ने दबाव बनाना शुरू कर दिया। पिछले दिनों उन्होंने मुख्य सचिव उत्पल कुमार सिंह और अपर मुख्य सचिव डॉ. रणवीर सिंह से ही नहीं बल्कि मुख्यमंत्री से शिकायत की। सूत्रों के मुताबिक एक प्रमोटी आईएएस ने यहां तक कहा कि मुख्यमंत्री की सचिव ही सारे ट्रांसफर पोस्टिंग के काम कर रही हैं। जिसके बाद मुख्यमंत्री की सचिव भड़क गई और इसे अपना अपमान बता कर प्रमोटी आईएएस को अदालत में घसीटने की चेतावनी दे डाली। उसके बाद बहरहाल दोनों के झगड़े के बाद प्रमोटी आईएएस के खिलाफ मूल आईएएस लामबंद होने लगे हैं। सूत्रों के अनुसार आईएएस एसोसिएशन की बैठक टलना सरकार पर उनकी तरफ से अब दबाव बनाने की ही मुहिम का हिस्सा है। बहरहाल अगर यह विवाद बढ़ा तो प्रदेश में विकास कायरे पर असर भी तय है।

पोस्टिंग को लेकर पीसीएस अफसरों में भी नाराजगी 

उल्लेखनीय है कि विगत दिनों किए गए तबादलों को लेकर पीसीएस अफसरों द्वारा वरिष्ठता को नजरअंदाज कर पोस्टिंग दिए जाने पर सवाल उठाए जाने पर सरकार को अपना फैसला वापस लेना पड़ा था, जबकि एक अधिकारी श्रीश कुमार की ओर से मामले में हाईकोर्ट में चुनौती देनी पड़ी थी। 

सुखद समाचार : राष्ट्रीय स्तर से ‘इतनी’ अधिक हो गयी उत्तराखंड में प्रति व्यक्ति आय, जीडीपी में भी 11.54 फीसद का उछाल

  • केंद्रीय सांख्यिकी कार्यालय-सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय ने जारी किये आंकड़े : देवभूमि में प्रति व्यक्ति आय 1,73,820 रुपये तक पहुंची, राज्य निवल घरेलू उत्पाद में भी 11.75 फीसद की बढ़ोतरी
  • राष्ट्रीय स्तर से 50 हजार अधिक हो गयी राज्य में प्रति व्यक्ति आय

नैनीताल, 10 अगस्त 2018। उत्तराखंडवासी चाहे विश्वास करें अथवा नहीं, राज्य की आर्थिकी के सम्बन्ध में जीडीपी व प्रति व्यक्ति आय के आंकड़े तो गर्व करने वाले और उत्साहजनक दिख रहे हैं। भले राज्य एक ओर अपने कर्मचारियों को वेतन भत्ते देने पर ही अपनी जीडीपी का 80 खर्च करने को मजबूर हो और लगातार हर माह, बिना नागा किये ऋण लेने को मजबूर हो, किन्तु अर्थ एवं संख्या निदेशालय नियोजन विभाग द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार उत्तराखंड राज्य के सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में 2016-17 की तुलना में 11.54 फीसद बढ़ोतरी का अनुमान है। यही नहीं निवल घरेलू उत्पाद में भी 11.75 फीसद की आशातीत वृद्धि की उम्मीद है। इसके साथ ही राज्य में प्रति व्यक्ति आय बढ़कर 1,73,820 रुपये हो गयी है जो राष्ट्रीय स्तर से 50 हजार अधिक है।

आम लोग इन आंकड़ों को शंका की दृष्टि से देख सकते हैं, किन्तु यहाँ बता दें कि यह आंकड़े मुख्यतया 4 प्रकार के अनुमान से तैयार किये जाते हैं। 1. प्रचलित भाव पर राज्य सकल घरेलू उत्पाद (अर्थव्यवस्था का आकार), 2. स्थायी भाव पर राज्य सकल घरेलू उत्पाद (आर्थिक वृद्धि दर), 3. प्रचलित भाव पर राज्य निवल घरेलू उत्पाद ( प्रतिवर्ष प्रतिव्यक्ति आय), 4. स्थायी भाव पर राज्य निवल घरेलू उत्पाद इसके मुख्य विंदु होते हैं। 

केन्द्रीय सांख्यिकी कार्यालय, सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय द्वारा जारी किये गये ताज़ा आंकड़ों के अनुसार राष्ट्रीय स्तर पर वर्ष 2017-18 में देश की आर्थिक विकास दर में 10 फीसद बढ़ोतरी का अनन्तिम अनुमान लगाया गया है। आंकड़ों के अनुसार 2016-17 में जहां देश की विकास दर 7 फीसद थी जो 2017-18 में 6.7 फीसद हो गयी। इसके विपरीत उत्तराखंड में यह दर 2016-17 में 6 फीसद थी जो 2017-18 में 6.79 फीसद हो गयी। इसी तरह प्रति व्यक्ति आय में भी उत्तराखंड राष्ट्रीय परिप्रेक्ष्य में भी अव्वल है। वर्ष 2017-18 में जहां देश की प्रति व्यक्ति आय 1,12,835 रुपये है वहीं उत्तराखंड में यह आंकड़ा 1,73,820 रुपये प्रति व्यक्ति है।

आंकड़े बताते हैं कि प्रचलित भाव के आधार पर वर्ष 2017-18 में राज्य का सकल घरेलू उत्पाद (अनन्तिम अनुमान) 2,14,033 करोड़ अनुमानित है (अर्थव्यवस्था का आकार) जो वर्ष 2016-17 की तुलना में 11.54 प्रतिशत की वृद्धि दर्शा रहा है। वर्ष 2017-18 में राज्य निवल घरेलू उत्पाद (अनन्तिम अनुमान) 1,91,480 करोड़ अनुमानित है जो वर्ष 2016-17 की तुलना में 11.75 फीसद की वृद्धि दिखा रहा है। वर्ष 2016-17 में राज्य निवल घरेलू उत्पाद (पुनरीक्षित) अनुमान 1,71,342 करोड़ अनुमानित है। स्थायी भाव के आधार पर वर्ष 2017-18 में राज्य सकल घरेलू उत्पाद (अनन्तिम अनुमान) 172849 करोड़ अनुमानित है, यह वर्ष 2016-17 की तुलना में 6.79 प्रतिशत की वृद्धि है, जो राज्य की विकास दर को परिलक्षित करता है। वर्ष 2016-17 में राज्य सकल घरेलू उत्पाद (पुनरीक्षित) अनुमान 1,61,865 करोड़ अनुमानित है। राज्य की आय का अनुमान मुख्य रूप से वित्तीय वर्ष में राज्य के भौगोलिक क्षेत्रफल के अन्दर वर्ष में उत्पादित कुल वस्तुओं एवं सेवाओं का सकल मूल्य होता है। इसका आंकलन आधार वर्ष के आधार पर आगामी वर्षों में राज्य आय अनुमान आगणित किया जाता है। 

उत्तराखंड में पर्यटन को उद्योग का दर्जा मिला, टिहरी झील में कैबिनेट ने तैरते हुए लिए जमीनी फैसले

टिहरी झील में मरीना फ्लोटिंग बोट पर 16 मई 2018 को आयोजित हुई ऐतिहासिक कैबिनेट बैठक में कई ऐतिहासिक निर्णय लिए गए। इनमें प्रमुख हैं :
    1. पर्यटन को उद्योग का दर्जा मिला। पर्यटन से जुड़े कायाकल्प रिज़ॉर्ट, आयुर्वेद,  योगा, पंचकर्म, बंजी जंपिंग, जॉय राइडिंग, सर्फिंग, कैंपिंग, राफ्टिंग जैसे उद्यम भी एमएसएमई नीति के अंतर्गत आएंगे
    1. मेगा इंडस्ट्री इन्वेस्टमेंट नीति के अंतर्गत आयुष और वेलनेस सेक्टर सहित होटल, रिज़ॉर्ट, क्याकिंग, सी-प्लेन,आयुर्वेद, योग जैसी 22 गतिविधियां विभिन्न लाभों के लिए अनुमन्य होंगी।
    2. सूक्ष्म, लघु, मध्यम उद्योग क्रय-विक्रय नियमावली में पर्यटन को उद्योग का दर्जा देने हेतु संशोधन किया गया।
    1. 13 डिस्ट्रिक्ट 13 न्यू टूरिस्ट डेस्टिनेशन योजना को मंजूरी : प्रत्येक जनपद में 13 नये पर्यटक स्थल घोषित, अल्मोड़ा में धार्मिक पर्यटन के रूप में सूर्य मन्दिर। नैनीताल में हिमालय दर्शन के लिए मुक्तेश्वर। पौड़ी में वाटर स्पोर्टस के लिए सतपुली, खैरगढ़। चमोली में प्रस्तावित ग्रीष्मकालीन राजधानी भराड़ीसैण, गैरसैंण। देहरादून में महाभारत सर्किट, लाखामण्डल। हरिद्वार में पावन शान्ति पीठ। उत्तरकाशी में हैरिटेज रूप में मोरी, हरकी दून। टिहरी में टिहरी झील। रूद्रप्रयाग में चिरबिटिया। ऊधमसिंह नगर में गूलरभोज। बागेश्वर में गरूड़ घाटी। चम्पावत में देवीधूरा और पिथौरागढ़ में ईको टूरिज्म के रूप में मोस्टमानू।
    1. वीर चंद्र सिंह गढ़वाली योजना में क्याकिंग, टेरेन बाइकिंग, कैरावैन, ऐंग्लिंग, स्टार गेसिंग, बर्ड वाचिंग आदि 11 नई गतिविधियां भी शामिल
    1. वर्ष 2018 को रोजगार वर्ष के रूप मनाया जायेगा।
    1. पिरूल नीति के तहत14  मीट्रिक टन पिरूल से 150 मेगावाट बिजली बनाने तथा साठ हज़ार लोगों को हर माह 8 से 10000 रुपये तक का रोजगार देने की  योजना। कहा गया कि 25 किलो वाट बिजली के उत्पादन के लिए लगभग ढाई नाली जमीन (500 वर्ग मीटर) से लगभग 10 लोगों को प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष रोजगार प्राप्त होगा।
    1.  पण्डित दीनदयाल उपाध्याय सामाजिक सुरक्षा योजना के तहत 50 लाख का फण्ड बनाकर तलाक शुदा/परित्याक्ता/एकल महिलाओं तथा किन्नरों को सुरक्षा प्रदान करने के लिए 1 प्रतिशत की दर से 1 लाख का सहकारिता लोन।Image result for फ्लोटिंग बोट पर कैबिनेट बैठक
    1. एससी/एसटी व ओबीसी की आरक्षण गणना 1.5 के ऊपर होने पर संख्या 2 मानी जायेगी।
    1. उत्तराखण्ड राज्य के अधीन वैयक्तिक सहायक पदोन्नत पदोन्नती नियमावली को मंजूरी।
    1. अधीनस्थ सेवा सीधी भर्ती वैयक्तिक सेवा नियमावली को मंजूरी।
    1. मेंथा प्रजाति के उत्पादों के लिए मंडी शुल्क माफ कर दिया गया।
    1. एमसीआई यानी भारतीय चिकित्सा परिषद में उत्तराखंड के  पूर्व के 7 पदों को बढ़ाकर 15 किया गया
    1. वीर चन्द्रसिंह गढ़वाली योजना का दायरा बढ़ाकर इसमें कायाकल्पिंग फ्लोटिंग होटल निर्माण आदि को शामिल किया गया।
    1. मेगा इन्वेस्टमेंट इण्डस्ट्री नीति 2015 में संशोधन कर सूची बढायी गयी।
  1. रुद्रप्रयाग में वेला कोटेश्वर में ज्योतिष पीठाधीश्वर शंकराचार्य जगदगुरू धर्मार्थ चिकित्सालय का संचालन सरकार स्वयं करेगी।

यह भी पढ़ें : उत्तराखंड में आयकर से 11000 करोड़ व कुमाऊं में 75 फीसद अधिक लक्ष्य प्राप्त

मुख्य आयकर आयुक्त प्रमोद कुमार गुप्ता

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p style=”text-align: justify;”>-उत्तराखंड में नये करदाताओं की संख्या में 1.35 लाख की वृद्धि, बढ़कर 5.85 लाख हुए करदाता
नैनीताल। आयकर विभाग के द्वारा बुधवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के अधिकारियों को जनता के बीच जाकर उनकी समस्या सुनीं। इस दौरान प्रदेश के मुख्य आयकर आयुक्त प्रमोद कुमार गुप्ता ने बताया कि इस वर्ष उत्तराखंड में विभाग ने आयकर के रूप में 11 हजार करोड़ रुपए का राजस्व प्राप्त किया है। कुमाऊं में लक्ष्य 202 करोड़ का था, जिसमें से 352 करोड़ यानी पिछले वर्ष के मुकाबले 75 फीसद अधिक लक्ष्य प्राप्त कर लिया गया है। उन्होंने नाम लिये बिना बताया कि अनेक बोगस कंपनियां उत्तराखंड में पकड़ी गयी हैं, और उनके खिलाफ कार्रवाई की जा रही है। उन्होंने कहा कि इस कार्यक्रम का उद्देश्य करदाताओं का आधार बढ़ाना भी है। उन्होंने बताया कि पिछले वर्ष उत्तराखंड में नये करदाताओं की संख्या में 1.35 लाख की वृद्धि हुई है। पिछले वित्तीय वर्ष में एक अप्रैल को राज्य में करदाताओं की संख्या 4.5 लाख थी, जो इस वर्ष बढ़कर 5.85 हो गया है। बताया कि आउटरीच कार्यक्रम के तहत करदाताओं को आश्वस्त कर रहे हैं कि करदाताओं के अधिनियमों के तहत अपने दायित्वों का पालन करने तक विभाग का रवैया गैर विरोधात्मक है।

यह भी पढ़ें : ग्राम विकास विभाग के लिए अल्मोड़ा व टिहरी जिले सुगम

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p style=”text-align: justify;”>नैनीताल। ग्राम विकास विभाग के लिए वार्षिक स्थानांतरण अधिनियम-2018 के तहत सुगम व दुर्गम स्थलों का चिन्हीकरण कर दिया गया है। खास बात यह है कि प्रदेश के देहरादून, हरिद्वार, ऊधमसिंह नगर व नैनीताल के साथ ही अल्मोड़ा व टिहरी जिलों को सुगम में तथा शेष रुद्रप्रयाग, चमोली, उत्तरकाशी, पौड़ी, पिथौरागढ़, चंपावत एवं बागेश्वर जिलों को दुर्गम की श्रेणी में रखा गया है। इनके अतिरिक्त सुगम प्रसार प्रशिक्षण केंद्र शंकरपुर देहरादून, हरिद्वार, रुद्रपुर, हल्द्वानी, हवालबाग व पौड़ी के केंद्रों को भी सुगम में जबकि गोपेश्वर व धरकोट को दुर्गम की श्रेणी में राा गया है।
उल्लेखनीय है कि बीते सप्ताह सूचना विभाग का भी दुर्गम व सुगम का निर्धारण किया गया है, जिसमें प्रदेश के चार मैदानी जिलों देहरादून, हरिद्वार, ऊधमसिंह नगर व नैनीताल के अलावा अल्मोड़ा व टिहरी सहित शेष सभी 9 पर्वतीय जिलों को दुर्गम की श्रेणी में रखा गया है।

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मेरा जन्म 26 नवंबर 1972 को हुआ था। मैं नैनीताल, भारत में मूलतः एक पत्रकार हूँ। वर्तमान में मार्च 2010 से राष्ट्रीय हिन्दी दैनिक समाचार पत्र-राष्ट्रीय सहारा में ब्यूरो चीफ के रूप में कार्य कर रहा हूँ। इससे पहले मैं पांच साल के लिए दैनिक जागरण के लिए काम कर चुका हूँ। कुमाऊँ विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग से ‘नए मीडिया’ विषय पर शोधरत हूँ। फोटोग्राफ़ी मेरा शौक है। मैं NIKON COOLPIX P530 और अडोब फोटोशॉप 7.0 के साथ फोटोग्राफी कर रहा हूँ। फोटोग्राफी मेरे लिए दुनियां की खूबसूरती को अपनी ओर से चिरस्थाई बनाने का बहुत छोटा सा प्रयास है। एक फोटो पत्रकार के रूप में मेरी तस्वीरों को नैनीताल राजभवन सहित विभिन्न प्रदर्शनियों में प्रस्तुत किया गया, तथा उत्तराखंड की राज्यपाल श्रीमती मार्गरेट अलवा द्वारा सम्मानित किया गया है। कुछ चित्रों को राष्ट्रीय-अंतर्राष्ट्रीय पुरस्कार भी प्राप्त हो चुके हैं। गूगल अर्थ पर चित्र उपलब्ध कराने वाली पैनोरामियो साइट पर मेरी प्रोफाइल को 18.85 Lacs से भी अधिक हिट्स प्राप्त हैं।पत्रकारिता और फोटोग्राफी के अलावा मुझे कवितायेँ लिखना पसंद है। काव्य क्षेत्र में मैंने नवीन जोशी “नवेन्दु” के रूप में अपनी पहचान बनाई है। मैंने बहुत सी कुमाउनी कवितायेँ लिखी हैं, कुमाउनी भाषा में मेरा काव्य संकलन उघड़ी आंखोंक स्वींड़ प्रकाशित हो चुका है, जो कि पुस्तक के के साथ ही डिजिटल (PDF) फार्मेट पर भी उपलब्ध होने वाली कुमाउनी की पहली पुस्तक है। मेरी यह पुस्तक गूगल एप्स पर भी उपलब्ध है। ’ यहां है एक पत्रकार, लेखक, कवि एवं छाया चित्रकार के रूप में मेरी रचनात्मकता, लेख, आलेख, छायाचित्र, कविताएं, हिंदी-कुमाउनी के ब्लॉग आदि कार्यों का पूरा समग्र। मेरी कोशिश है कि यहां नैनीताल, कुमाऊं, उत्तराखंड और वृहद संदर्भ में देश की विरासत, संस्कृति, इतिहास और वर्तमान को समग्र रूप में संग्रहीत करने की….। मेरे दिल में बसता है, मेरा नैनीताल, मेरा कुमाऊं और मेरा उत्तराखंड

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