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साक्षात्कार : एक सूत्रीय एजेंडा-कुमाऊं विश्वविद्यालय को ‘अपस्केल’ करना है: प्रो. जोशी

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-’इनोवेशन एंड इनक्यूबेशन सेंटर’ व ‘कॉम्पिटीटिव एग्जामिनेशन सेंटर’ के बाद अब ‘कार्पोरेट रिसोर्स सेंटर’ के गठन की योजना
-नैक के मूल्यांकन में कुमाऊंँ विश्वविद्यालय को ए-प्लस ग्रेड व राष्ट्रीय संस्थागत रैंकिंग फ्रेमवर्क में शीर्ष स्थान दिलवाना प्राथमिकता

कुमाऊं विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. एनके जोशी।

डॉ. नवीन जोशी @ नवीन समाचार, नैनीताल, 27 जुलाई 2021। आज जब पूरी दुनिया कोविड-19 महामारी से जूझ रही है और लंबे समय से पूरी तरह से एक तरह ‘लॉकडाउन’ की स्थिति में हैं। ऐसे कठिन दौर में भी कुमाऊं विश्वविद्यालय सोशल मीडिया, गूगल क्लासरूम एवं वेबसाइट आदि ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स के जनिए देश के भविष्य को तैयार करने के लिए शिक्षण एवं शोध के साथ ही युवाओं को उनके भविष्य के लिए दिशा देने के लिए काउंसलिंग के कार्य अपने कार्य में जुटा रहा है। विश्वविद्यालय के प्राध्यापकों एवं अधिकारियों ने कुलपति प्रो. एनके जोशी के दिशानिर्देशन में इस प्रक्रिया को मूर्त रूप देने में अहम भूमिका निभाई है। लॉकडाउन के दौरान छात्रों एवं शिक्षक को शिक्षा के आदान-प्रदान में कोई दिक्कत न हो इसके लिए विश्वविद्यालय प्रशासन ने प्रशिक्षण कार्यक्रम भी आयोजित किये।

इन सफल प्रयासों के पीछे रहे कुमाऊं विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. एनके जोशी से हमने इन्हीं विषयों, विश्वविद्यालय में उपलब्ध पाठ्यक्रमों, नई योजनाओं और विद्यार्थियों को दी जाने वाली सुविधाओं, कोरोना काल में ऑनलाइन पढ़ाई और विश्वविद्यालय के विस्तार की योजनाओं पर एक्सक्लुसिव बातचीत की। प्रस्तुत हैं बातचीत के प्रमुख अंश-

प्रश्नः आपको कोरोना काल शुरू होने के कठिन समय में कुमाऊं विश्वविद्यालय के कुलपति पद का कार्यभार संभालने का आदेश मिला। कोरोना काल में विश्वविद्यालय की शिक्षण व्यवस्था को पटरी पर लाना एक बड़ी जिम्मेदारी थी, इसको आपने कैसे संभाला ?
उत्तर: मुझे पहले लॉकडाउन के तुरंत बाद ही कुमाऊं विश्वविद्यालय के कुलपति का कार्यभार संभालने का आदेश प्राप्त हुआ। मैंने तुरंत ही विश्वविद्यालय की स्थिति का आंकलन करके वरिष्ठ अधिकारियों व प्राध्यापकों की टीमों का गठन किया एवं शैक्षणिक, सांस्कृतिक एवं सामाजिक गतिविधियों को ऑनलाइन माध्यमों से कराने की योजना बनाई। कोरोना काल में विश्वविद्यालय के सामने सबसे बड़ी चुनौती थी विद्यार्थियों की शिक्षा में बाधा न आने देना, साथ ही उसके बाद परीक्षाओं को सही से सम्पादित करना। इसके लिए हमने तुरंत प्रभाव से आनलाइन माध्यमों के द्वारा छात्रों का पाठ्यक्रम पूरा करवाया एवं परीक्षाओं को भारत सरकार की कोविड गाइडलाइन्स के अनुरूप सही से सम्पादित करवाने हेतु विशेष टीम का गठन किया। विश्वविद्यालय के विभिन्न विभागों द्वारा इस अंतराल में 100 के करीब ऑनलाइन व्याख्यान एवं वेबिनार भी आयोजित किए गए। लॉकडाउन के दौरान हमारे प्राध्यापकों ने 100 से अधिक विविध विषयों पर लघु कौशल विकास पाठ्यक्रम तैयार करने जैसे बहुत शानदार काम किये हैं, जो बड़ी उपलब्धि है।

प्रश्न: विश्वविद्यालय को सफलता के सोपान की ओर अग्रसर करने हेतु आपकी स्ट्रेटजी या क्लियर कट विजन क्या है?
उत्तर: मेरा एक सूत्रीय एजेंडा विश्वविद्यालय को ‘अपस्केल’ करना है। यह दौर ‘ह्यूमन पोटेंशियल मैनेजमेंट’ का है। उसी को लागू करना है। इसके लिए कुलपति हो या चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी, सभी को दायित्वों का निर्वहन करना होगा। विश्वविद्यालय की कार्यप्रणाली को बेहतर करते हुए पूर्णतः कंप्यूटरीकृत करना है ताकि पारदर्शिता एवं गुणवत्ता के साथ कार्यों का क्रियान्वयन हो। मेरा मानना है कि उच्च शिक्षा के लिए देश में संसाधनों की उतनी कमी नहीं है जितनी की अच्छे प्रबंधन की है। अनुभव बताता है कि महाविद्यालयों व विश्वविद्यालयों के पास संसाधन होने पर भी अपेक्षित परिणाम नहीं प्राप्त हुये हैं। अतः सुधार हेतु अच्छे प्रबंधन पर जोर देना आवश्यक है।

प्रश्न: विश्वविद्यालय में शैक्षणिक गुणवत्ता के लिए आपकी क्या कार्य योजना है ?
उत्तर: किसी भी शैक्षणिक संस्थान के विद्यार्थियों की सफलता ही उसकी प्रगति का पैमाना होती है। कुमाऊंँ विश्वविद्यालय का नाम देश-विदेश में जाना जाए, इसके लिए शैक्षणिक गुणवत्ता के प्रयास शुरू कर दिए गए हैं। शीघ्र ही फैकेल्टी को अपग्रेड किया जाएगा,। छात्र अनुभव को बेहतर करेंगे, विद्यार्थियों को आधुनिक व पारंपरिक दोनों प्रकार से शिक्षण व प्रायोगिक प्रशिक्षण दिया जाएगा। शोध और प्रकाशन कार्यों के साथ ही ‘मॉड्यूल डेवलपमेंट’ पर जोर दिया जाएगा। ऑनलाइन कक्षाओं को आकर्षक और रोचक बनाजा जाएगा। उद्योगों की जरूरतों को देखते हुए पाठ्यक्रम इस तरह तैयार किए जायेंगे कि विद्यार्थी रोजगार लेने वाले ही नहीं देने वाले भी बन सकेंगे। साथ ही इंडस्ट्री की जरूरतों के हिसाब से पाठ्यक्रमों के स्वरूप में नियमित तौर पर बदलाव भी होता रहेगा, ताकि विद्यार्थियों की दक्षता बरकरार रहे। पाठ्यक्रम को रुचिकर भी बनाया जाएगा।

प्रश्न: विद्यार्थियों के कौशल विकास के लिए विश्वविद्यालय ने क्या कदम उठाए हैं?
उत्तर: देशभर में कौशल विकास व उद्यमशीलता विकास की दिशा में चल रही पहल से कुमाऊंँ विश्वविद्यालय खुद को जोड़ने में सफल रहा है। कुमाऊंँ विश्वविद्यालय से शिक्षा ग्रहण करने वाले विद्यार्थी उद्यमशील व व्यवसायी बनें, इसके लिए विश्वविद्यालय में ’इनोवेशन एंड इनक्यूबेशन सेंटर’ को स्थापित कर विद्यार्थियों को स्टार्टअप प्रोजेक्ट्स बनाने हेतु प्रेरित किया जा रहा है साथ ही ‘कॉम्पिटीटिव एग्जामिनेशन सेंटर’ के माध्यम से यूपीएससी, यूकेपीएससी, नेट, बैंकिंग, सीडीएस आदि प्रतियोगी परीक्षाओं के बारे में विस्तृत जानकारी और संबंधित पाठ्य सामग्री उपलब्ध कराई जा रही है। शीघ्र ही ‘कार्पोरेट रिसोर्स सेंटर’ के गठन की भी योजना है जिससे इंडस्ट्री की जरूरत के हिसाब से पाठ्यक्रम तैयार कर विद्यार्थियों को अधिक से अधिक प्लेसमेंट प्रदान किया जा सके। इसके अलावा विश्वविद्यालय ने कौशल विकास, उद्यमिता विकास व शोध की दिशा में भी महत्वपूर्ण कदम उठाये हैं।

प्रश्न: विगत एक वर्ष में कुविवि का समाज के लिए क्या योगदान रहा है ?
उत्तर: कुमाऊं विश्वविद्यालय अपना सामाजिक दायित्व बखूबी समझता है। विश्वविद्यालय द्वारा कोविड-19 महामारी के कारण लागू हुए लॉकडाउन में भी पर्यावरण जागरूकता, स्वच्छ परिसर-हरित परिसर, फिट इंडिया साइकिलिंग कम्पेनिंग, थ्रो आउट कोरोना एवं दस दिवसीय योग जागरण जैसे कार्यक्रमों का आयोजन किया। प्राध्यापकों द्वारा लघु कौशल विकास पाठ्यक्रमों के माध्यम से लोगों का ऑनलाइन मार्गदर्शन कर स्वरोजगार हेतु प्रेरित किया गया।

प्रश्न: ‘इंडिया टुडे’ ग्रुप के सर्वे में विश्वविद्यालय का 27वां स्थान, ‘क्यूएस एशिया रैंकिंग’ में 551 से 600 के बीच स्थान तथा फार्मेसी विभाग को एनआईआरएफ में 75वां स्थान प्राप्त हुआ है। इस रैंकिंग को और बेहतर करने की कोई योजना है ?
उत्तर: विश्वविद्यालय की रैंकिंग तय करने के कई मानक ‘स्टैंडर्ड’ है। इसमें संकायों की संख्या, प्रकाशनों की संख्या, उद्धरण, अनुसंधान निधि, अनुसंधान संकाय, अनुसंधान केंद्र, अंतराष्ट्रीय संस्थाओं से संबंध एवं सहयोग इत्यादि के बारे में जानकारी शामिल है। हम फिलहाल सभी को ध्यान में रखते हुए सर्वश्रेष्ठ करने का प्रयास कर रहे हैं।

प्रश्न: नई शिक्षा नीति युवाओं के लिए किस तरह फायदेमंद होगी ?
उत्तर: नई शिक्षा नीति में स्कूली पढ़ाई के साथ-साथ वोकेशनल ट्रेनिंग और ‘एक्स्ट्रा करीकुलर एक्टिविटीज’ को भी अहमियत दी जाएगी, जिससे छात्रों के पूर्ण विकास में मदद मिलेगी और रोजगार के नए अवसर भी खुलेंगे। इसके अलावा स्कूलों में कला, वाणिज्य, विज्ञान स्ट्रीम का कोई कठोर पालन नहीं होगा, छात्र अब जो भी पाठ्यक्रम चाहें, वो ले सकते हैं। उच्च शिक्षा में विद्यार्थी को विषयों के चयन की छूट और ‘मल्टीपल एग्जिट सिस्टम’ विद्यार्थियों को आत्मनिर्भर बनाएगा। ‘प्रेक्टिकल एप्लीकेशंस ऑफ नॉलेज’ और ‘वर्कशॉप ट्रेनिग’ विद्यार्थियों के कौशल विकास में सहायक सिद्ध होगी।

प्रश्न: भविष्य में विश्वविद्यालय के लिए आपका क्या विजन हैं?
उत्तर: नैक के मूल्यांकन में कुमाऊंँ विश्वविद्यालय को ए-प्लस ग्रेड एवं राष्ट्रीय संस्थागत रैंकिंग फ्रेमवर्क (एनआईआरएफ) में शीर्ष स्थान दिलवाने के साथ ही विश्वविद्यालय शोध, शिक्षण, प्रशिक्षण व संस्कृति के क्षेत्र में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई उंचाइयों को छुए यह मेरी पहली प्राथमिकता है। आज के अन्य ताजा ‘नवीन समाचार’ पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें

यह भी पढ़ें : गांव के ‘हिंदी मीडियम’ औसत दर्जे के छात्र की सिविल जज बनने की कहानी-उनकी ही जुबानी…

नवीन समाचार, नैनीताल,4 जनवरी 2021। नैनीताल के छोटे से गांव भूमियाधार में एक मध्यम वर्गीय परिवार के श्री आनंद सिंह बिष्ट व श्रीमती शारदा बिष्ट के घर में जन्मे नवल सिंह बिष्ट ने औसत दर्जे के छात्र होने के बावजूद वर्ष 2019 की पीसीएस-जे की परीक्षा पास की और बन गये हैं युवाओं के प्रेरणास्रोत सिविल जज नवल सिंह बिष्ट। नवल अपनी दो बहनों रंजीता व दीपिका में सबसे छोटे हैं। नवल के पिताजी गांव में ही एक दुकान चलाते हैं, जबकि माता गृहणी हैं। हिंदी माध्यम के छात्र रहे नवल ने प्रारम्भिक व माध्यमिक शिक्षा भवाली में ग्रहण की। उसके पश्चात डीएसबी कॉलेज से बीए में स्नातक किया तथा एसएसजे परिसर अल्मोड़ा से एल.एल बी. किया। श्री नवल सिंह बिष्ट से ख़ास बातचीत की हमारे संवाददाता मो. खुर्शीद हुसैन (आज़ाद ) ने :-

आज़ाद सवाल (01) :- क्या बचपन से ही आपका जज बनने का सपना था?

नवल बिष्ट

जवाब सिविल जज :- जी, बिल्कुल बचपन से ही सपना था लेकिन हाँ वकालत की पढ़ाई के बाद ज्युडिशियल परीक्षा पास करना तो लक्ष्य ही बन गया…

आज़ाद सवाल (02) :- तो किस तरह से आपने ज्यूडिशियल परीक्षा की तैयारी की और क्या – क्या मुश्किलें आपके सामने आयीं?

जवाब सिविल जज :- जैसा कि मेरी हिंदी माध्यम में ही शिक्षा – दीक्षा हुई, इस कारण इंग्लिश लॉ बुक्स पढ़ने में समझने में बहुत ज़्यादा परेशानियों का सामना किया, दिल्ली जाने के पश्चात् ही मैंने राहुल्स आईएएस में जाकर इंग्लिश माध्यम से लॉ को पढ़ा, जिसमें राहुल सर और राहुल्स की टीम ने मुझे तराशा और लंबे समय तक पूरे-पूरे दिन, बिना रुके-बिना थके, कड़ी मेहनत मेहनत की। परिणाम आप सबके सामने है…

आज़ाद सवाल (03) :- एक मध्यम वर्गीय परिवार के लिये दिल्ली में कोचिंग लेना आसान नहीं होता, आपने किस तरह मैनेज किया?

जवाब सिविल जज :- जी, एक मध्यमवर्गीय परिवार के लिये कोचिंग लेना बजट से बाहर हो जाता है, लेकिन जब इरादे बुलंद हो तो हर मुश्किल आसान होने लगती है, यही मेरे भी साथ हुआ, यार – दोस्त परिवार सबने मिलकर मेरा सहयोग किया…

आज़ाद सवाल (04) :- तो क्या न्यायिक परीक्षा पास करने के लिये सिर्फ़ कोचिंग ही पर्याप्त होती है?

जवाब सिविल जज :- नहीं, केवल कोचिंग के सहारे तो नहीं कहा जा सकता, मुझे यहाँ डिस्ट्रिक्ट कोर्ट नैनीताल में प्रैक्टिस करने का बड़ा लाभ परीक्षा में मिला…थ्यौरी के साथ प्रैक्टिकल नॉलेज बहुत मायने रखती है…

आज़ाद सवाल (05):- अपनी सफ़लता का श्रेय किसे देना चाहते हैं?

जवाब सिविल जज :- अपनी सफ़लता का श्रेय सबसे पहले मेरे माता – पिता, राहुल्स कोचिंग सेंटर दिल्ली के राहुल सर को जिन्होंने हर क़दम मेरा हौसला बढ़ाया उनके साथ ही नैनीताल डिस्ट्रिक्ट कोर्ट के अधिवक्ता पंकज बिष्ट, भरत भट्ट, अखिलेश साह, बलवंत सिंह भौर्याल, पंकज चौहान, राजेश रौतेला, सिद्धार्थ सिंह के साथ कई अन्य अधिवक्ता मित्रों ने मेरा साथ दिया, जिसके लिये मैं उन सबका शुक्रगुज़ार हूं…

आज़ाद सवाल (06):- न्यायिक परीक्षा की तैयारी कर रहे छात्रों के लिये क्या संदेश देना चाहेंगे?

जवाब सिविल जज:- संदेश यही है कि कभी भी किसी भी प्रकार की असफ़लता से न डरें, निराश न हों, गिरें, फिर उठें और एक नयी ऊर्जा के साथ आगे बढ़ें, कामयाबी आपको ज़रूर मिलेगी, मेहनत करते रहें, अथक परिश्रम ही सफ़लता की कुंजी है…

नवीन समाचार
‘नवीन समाचार’ विश्व प्रसिद्ध पर्यटन नगरी नैनीताल से ‘मन कही’ के रूप में जनवरी 2010 से इंटरननेट-वेब मीडिया पर सक्रिय, उत्तराखंड का सबसे पुराना ऑनलाइन पत्रकारिता में सक्रिय समूह है। यह उत्तराखंड शासन से मान्यता प्राप्त, अलेक्सा रैंकिंग के अनुसार उत्तराखंड के समाचार पोर्टलों में अग्रणी, गूगल सर्च पर उत्तराखंड के सर्वश्रेष्ठ, भरोसेमंद समाचार पोर्टल के रूप में अग्रणी, समाचारों को नवीन दृष्टिकोण से प्रस्तुत करने वाला ऑनलाइन समाचार पोर्टल भी है।
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