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अधिवक्ता-पत्रकार की कार का टायर रिम सहित चोरी

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नवीन समाचार, नैनीताल, 16 अगस्त 2019। उत्तराखंड उच्च न्यायालय में कार्यरत अधिवक्ता एवं अमर उजाला समाचार पत्र की विधिक संवाददाता लता नेगी के साथ स्वतंत्रता दिवस यानी 15 अगस्त की रात्रि कार के टायर चोरी की जैसी घटना सामने आयी है, वैसी शायद किसी ने सुनी भी न हो। वहीं नैनीताल पुलिस के लिए भी यह घटना बड़ी चुनौती की तरह है। लता नेगी ने अपनी अल्टो 100 कार संख्या यूके04यू-8783 स्वतंत्रता दिवस की रात्रि 9 बजे अपने आवास-ओल्ड ग्रोव के पास बिड़ला रोड पर खड़ी की थी। लेकिन शुक्रवार की सुबह देखा तो कार का पिछला पहिया रिम सहित गायब मिला। उन्होने थाना तल्लीताल में मामले की प्राथमिकी दे दी है। पुलिस ने मौका मुआयना कर लिया है, किंतु चुनौती देने वाले चोर अभी पुलिस की पहुंच से दूर हैं।

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यह भी पढ़ें : पत्रकारों के 4.7 अरब डॉलर खा चुका है गूगल, उत्तराखंड सरकार भी है गूगल पर मेहरबान

-उत्तराखंड सरकार भी गूगल पर दिख रही है मेहरबान, इसीलिए यहां खूब चल रहा है ‘गूगल को ऐड-वेरी बैड, वेरी बैड’ नारा  
-उत्तराखंड वेब एसोसिएशन ने स्वास्थ्य सचिव को दिया ज्ञापन, स्वास्थ्य विभाग के विज्ञापन गूगल को देने के बजाय सीधे न्यूज पोर्टल को दिए जाने की उठाई मांग
नवीन समाचार, देहरादून, 08 अगस्त 2019। अपनी जवानी, पानी और वाणी को बाहर जाने से रोकने में विफल उत्तराखंड सरकार अपने पैंसे को बेवजह डॉलर बनाकर अमेरिका भेजने और इस कड़ी में देश के रुपए को भी कमजोर करने का काम कर रही है। राज्य में सैकड़ों की संख्या में समाचार पोर्टल हैं। सरकार उन्हें सीधे विज्ञापन देने की जगह गूगल के माध्यम से विज्ञापन दे रही है, जो कि अन्ततः राज्य के समाचार पोर्टलों व वेबसाइटों में ही राज्य सरकार के विज्ञापन चलाता है। बताया जा रहा है कि गूगल को डॉलर में भुगतान करना पड़ता है। इसीलिए यहां ‘गूगल को ऐड-वेरी बैड, वेरी बैड’ नारा भी खूब चल रहा है।
इसी मुद्दे पर उत्तराखंड वेब मीडिया एसोसिएशन ने सचिवालय में प्रदेश के स्वास्थ्य सचिव डा. पंकज कुमार पांडे से मुलाकात करके उन्हें एक ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में एसोसिएशन ने मांग की कि स्वास्थ्य विभाग के विज्ञापन सीधे गूगल को देने के बजाय उत्तराखंड के न्यूज पोर्टलों को दिये जाएं। इस पर डा. पांडे ने अपनी सहमति जताई, तथा शिकायत का शीघ्र निस्तारण करने का आश्वासन दिया। उन्होंने माना कि किसी भी विभाग को सीधे तो विज्ञापन देना ही नहीं चाहिए, इसके लिए सूचना विभाग बना हुआ है। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य विभाग को चाहिए कि वह जो भी विज्ञापन जारी करें उन्हें सूचना एवं लोक संपर्क विभाग को सौंप दें और उसके बाद सूचना एवं लोक संपर्क विभाग उस पर निर्णय कर सकता है। गौरतलब है कि स्वास्थ्य विभाग अपने विज्ञापन सीधे गूगल को जारी कर देता है तथा गूगल उन विज्ञापनों को उत्तराखंड के न्यूज पोर्टल की साइट पर चला रहा है। इससे सरकार तथा न्यूज पोर्टल दोनों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है। साथ ही ऐसा करना न्यूज पोर्टल विज्ञापन नियमावली का भी उल्लंघन है। उल्लेखनीय है कि स्वास्थ्य सचिव डा. पांडे इससे पहले सूचना एवं लोक संपर्क विभाग के महानिदेशक भी रह चुके हैं। विज्ञापनों की रीति-नीति के विषय में उन्हें पूरी जानकारी है। उल्लेखनीय है कि चंद दिनों पहले ही उत्तराखंड वेब मीडिया एसोसिएशन ने सूचना निदेशालय पर इसी तरह की मांगों को लेकर लंबा आंदोलन किया था। आखिरकार सूचना निदेशालय ने भी माना था कि गूगल को कोई विज्ञापन नहीं दिया जाएगा। न्यूज पोर्टल एसोसिएशन की पहली आपत्ति है कि जब उत्तराखंड के सुदूर इलाकों तक की स्वास्थ्य समस्याओं को पत्रकार अपने न्यूज पोर्टल के माध्यम से जनता और सरकार के सामने रखते हैं तो फिर विज्ञापन गूगल को क्यों दिए जाते हैं ? सीधे न्यूज पोर्टल को क्यों नहीं दिए जाते ? दूसरी आपत्ति यह भी है कि जब न्यूज पोर्टल के लिए बनी विज्ञापन नियमावली में यह साफ लिखा है कि न्यूज पोर्टल पर सूचना विभाग द्वारा जारी की गई दरों से कम दर पर विज्ञापन नहीं चलाया जाएगा तो फिर गूगल उनके न्यूज पोर्टल पर बेहद कम दरों पर विज्ञापन कैसे चला सकता है ? एसोसिएशन की तीसरी आपत्ति यह है कि जब स्पष्ट नियमावली बनी हुई है कि कोई भी विभाग सीधे विज्ञापन नहीं जारी करेगा और सभी विभाग केवल सूचना विभाग के माध्यम से ही अपने विज्ञापन जारी करेंगे तो फिर स्वास्थ्य विभाग कैसे सीधे गूगल को विज्ञापन दे रहा है ? ज्ञापन देने वालों में उत्तराखंड वेब मीडिया एसोसिएशन के अध्यक्ष शिव प्रसाद सेमवाल, महासचिव संजीव पंत सहित विनोद कोठियाल, मनीष व्यास, मामचंद शाह आदि प्रमुख रहे।

पिछले वर्ष ही पत्रकारों के 4.7 अरब डॉलर खा चुका है गूगल

गूगल समाचार पत्रों व स्थानीय समाचार पोर्टलों की आय हजम कर जाने का माध्यम बन गया है। 2000 से भी अधिक अखबारों का प्रतिनिधित्व करने वाली संस्था न्यूज मीडिया अलायंस-एनएमए की 10 जून 2019 को जारी एक रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2018 में गूगल ने गूगल न्यूज व गूगल सर्च के माध्यम से 4.7 अरब डॉलर की कमाई की है। इस आय में गूगल की उस आय का मूल्य नहीं जोड़ा गया है जो उसे किसी उपभोक्ता के किसी एक लेख को पसंद करने या क्लिक करने से होती है। रिपोर्ट में कहा गया है कि गूगल ने यह कमाई पत्रकारों के काम से प्राप्त की है। इससे मीडिया घरानों की आय के प्रमुख स्रोत-ऑनलाइन विज्ञापनों से होने वाली कमाई में भारी कटौती हुई है। इसके चलते कई मीडिया घरानांे का परिचालन सीमित हुआ है, या वे बंद हो गए हैं। रिपोर्ट के अनुसार गूगल के कारोबार में समाचारों का अहम योगदान है। न्यूयार्क टाइम्स ने एनएमए के अध्यक्ष एवं सीईओ के अध्यक्ष डोविड शेवर्न के हवाले से कहा है कि जिन पत्रकारों ने यह लेख एवं वीडियो तैचार किये हैं, उन्हें इस 4.7 अरब डॉलर का कुछ हिस्सा मिलना चाहिए। ऐसे परिदृश्य में उत्तराखंड के पत्रकारों को गूगल को विज्ञापन न देने की मांग पर राज्य सरकार के खिलाफ किये गये सप्ताह भर के आंदोलन के बाद सरकार को 2 अगस्त 2019 को आगे से गूगल को विज्ञापन न देने का आश्वासन देना पड़ा है।

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-राज्य के पत्रकारों की एकता से झुका उत्तराखंड का सत्ता प्रतिष्ठान 

नवीन समाचार, देहरादून, 2 अगस्त 2019। उत्तराखंड के पत्रकारों ने उत्तराखंड में गूगल के बढ़ते कदमों को थामने जैसी बड़ी सफलता अर्जित की है। वहीं कलयुग में सबसे बड़ी कही गयी अपनी ‘संघे शक्ति’ से राज्य के सूचना विभाग मुख्यालय को भी झुका दिया है। उनकी सभी 11 मांगें मान ली गयी हैं, और उन पर एक माह के भीतर कार्रवाई पूरी करने का आश्वासन मिला है। जबकि कुछ मांगों पर आज से ही कार्रवाई शुरू होती भी नजर आ रही है। वहीं आंदोलन की बड़ी उपलब्धि इस रूप में भी सामने आई है कि राज्य में वेब पोर्टलों के लिए रास्ते सरल होने जा रहे हैं। करीब दो वर्ष बाद उन्हें इम्पैनल करने की राह खोल दी गयी है, और वेब पत्रकारों को मान्यता देने के लिए भी राज्य सरकार ने सकारात्मक रुख दिखाया है। साथ ही राज्य सरकार ने वेब पत्रकारों की मांग पर गूगल को आगे से कोई विद्यापन न देने बल्कि वेब पोर्टलों को विज्ञापन देने पर सहमति जताई है। निश्चित ही इसमें बड़ा हिस्सा राज्य के समाचार पोर्टलों का होगा। उल्लेखनीय है कि अब तक राज्य सरकार के विज्ञापन गूगल के माध्यम से राज्य में प्रसारित समाचार पोर्टलों में प्रकाशित होते थे, परंतु उन्हें इसका लाभ नहीं मिलता था। इस प्रकार आज के दिन को राज्य के सभी एवं खासकर वेब पत्रकारिता के लिए ‘बड़ा दिन’ कहना गलत न होगा। इस आंदोलन से राज्य के पत्रकारों को वरिष्ठ पत्रकार शिव प्रसाद सेमवाल के रूप में सफल नेतृत्व भी मिला है। यह स्वीकारने में भी किसी को गुरेज नहीं होना चाहिए।
उल्लेखनीय है कि अपनी 11 सूत्रीय मांगों पर राज्य के पत्रकारों ने राज्य बनने के बाद पहली राज्य सूचना विभाग के खिलाफ खुली जंग का एलान करते हुए पिछले करीब एक सप्ताह से राज्य मुख्यालय में वरिष्ठ वेब पत्रकार शिव प्रसाद सेमवाल की अगुवाई में उत्तराखंड पत्रकार संयुक्त संघर्ष मोर्चा के बैनर तले प्रिंट, इलेक्ट्रॉनिक और वेब मीडिया के पत्रकारों ने आंदोलन छेड़ा हुआ था। शुरू में धरना-प्रदर्शन एवं फिर सूचना निदेशालय में तालाबंदी व मशाल जुलूस के साथ शुक्रवार 2 अगस्त को वरिष्ठ पत्रकार संजीव पंत के आमरण अनशन और वरिष्ठ पत्रकार जीतमणि पैन्यूली के क्रमिक अनशन तथा मौन व्रत पर बैठने की हद तक पहुंचे आंदोलन ने राज्य के सत्ता प्रतिष्ठान को ऐसा हिलाया कि उन्हें
पत्रकारों की सभी मांगें माननी पड़ी हैं।
शुक्रवार को दिन में लगभग डेढ़ बजे उत्तराखंड सूचना एवं लोक संपर्क विभाग के संयुक्त निदेशक अनिल चंदोला तथा अपर निदेशक राजेश कुमार पत्रकारों के धरना स्थल पर आए तथा संयुक्त संघर्ष मोर्चा के पत्रकारों को आश्वस्त कराया और डा. चंदोला ने ज्ञापन में लिखी एक-एक मांग पत्रकारों के सामने पढ़कर सुनाते हुए प्रत्येक पर अपनी सहमति व्यक्त की। साथ ही कहा कि इनमें से अधिकांश पर आज सुबह से ही कार्यवाही भी शुरू कर दी गई है। उन्होंने सबसे पहले अमर शहीद श्रीदेव सुमन की जयंती के अवसर पर श्रद्धांजलि व्यक्त करने वाला विज्ञापन स्थानीय लघु समाचार पत्रों को न दिए जाने पर खेद व्यक्त किया और इसे एक चूक मानते हुए इसकी प्रतिपूर्ति शीघ्र कराने का आश्वासन दिया। साथ ही आश्वस्त किया कि पत्रकारों के सम्मान से कोई समझौता नहीं किया जाएगा तथा पत्रकारों को विश्वास में लिए बिना नियमावली में कोई बदलाव नहीं किया जाएगा। आश्वस्त किया कि नई नियमावली को भी फिलहाल रोक दिया गया है। डा. चंदोला ने बताया कि न्यूज पोर्टलों की पिछले करीब दो वर्ष से रुकी एंपैनलमेंट की कार्यवाही तत्काल प्रभाव से शुरू कर दी गई है, तथा आज ही एंपैनलमेंट के लिए अखबारों में विज्ञापन दिए जा रहे हैं। इस के अलावा उन्होंने यह भी बताया कि वेब पोर्टलों के पत्रकारों को भी मान्यता की दायरे में लाने के लिए फाइल चला दी गई है। साथ ही सबसे बड़ी बात, उन्होंने इस बात पर भी सहमति व्यक्त की कि गूगल को कोई विज्ञापन नहीं दिए जाएंगे, बलिक केवल वेब पोर्टलों को ही विज्ञापन जारी किए जाएंगे। साथ ही यह भी जानकारी दी कि कल ही पत्रकारों के लंबित पेंशन प्रकरणों और कल्याण योजनाओं पर कार्यवाही शुरू कर दी गई है। कहा कि 1 महीने के अंदर अंदर सभी मांगें मूर्त रूप धारण कर लेंगी। मांगे मान लिए जाने पर राज्य के पत्रकारों ने खुशी जताई है और सूचना विभाग के अधिकारियों का आभार व्यक्त किया है। साथ ही कहा है कि 1 महीने बाद इन मांगों पर हुए कार्यों का विश्लेषण किया जाएगा और उसके बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।

यह भी पढ़ें : पत्रकार को गोली मारने की धमकी देने वाले ‘बेकाबू’ विधायक पर भाजपा ने चलाई ‘चाबुक’

नवीन समाचार, देहरादून, 22 जून 2019। भाजपा के खानपुर विधायक कुंवर प्रणव सिंह चैंपियन को पार्टी ने तीन महीने के लिए प्राथमिक सदस्यता से निलंबित कर दिया है। वे विधानमंडल दल और पार्टी की बैठकों में भाग नहीं ले पाएंगे। पत्रकार को गोली मारने की धमकी देने पर अनुशासनहीनता को लेकर चैंपियन पर ये गाज गिरी है। यह निर्णय प्रदेश अध्यक्ष अजय भट्ट ने तात्कालिक तौर पर लिया है। प्रदेश महामंत्री नरेश बंसल ने इसकी जानकारी दी।
पार्टी ने अपने ‘बेकाबू’ माने जाने वाले विधायक चैंपियन पर यह ‘चाबुक’ चलाने जैसी कार्रवाई कुछ दिन पूर्व एक मीडियाकर्मी को धमकी देने के मामले में की है। पहले से ही अनुशासनहीनता की जांच में फंसे चैंपियन का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था, जिसमें वे एक मीडियाकर्मी को धमका रहे थे। इस वीडियो के वायरल होने के बाद भाजपा के अनुशासन को लेकर भी कई तरह के प्रश्न खड़े हुए थे।
चैंपियन के प्रकरण पर चर्चा हुई
ऋषिकेश के परमार्थ निकेतन में भाजपा की प्रदेश पदाधिकारियों की बैठक में चैंपियन के प्रकरण पर भी चर्चा हुई। शीर्ष नेतृत्व ने अब तक आए तथ्यों के आलोक में चैंपियन के आचरण को अनुशासनहीनता के दायरे में मानते हुए उनकी प्राथमिक सदस्यता को तीन महीने के लिए निलंबित कर दिया है। आचरण में सुधार न आने पर पार्टी और सख्त फैसला ले सकती है।

मैं पार्टी का अनुशासित सिपाही हूं। पार्टी का निर्णय सिर माथे पर है। कोई दिक्कत नहीं है। अवसर मिलेगा तो मैं भी अपना पक्ष रखूंगा।
– कुंवर प्रणव सिंह चैंपियन, भाजपा विधायक

यह भी पढ़ें : अवैध खनन की खबरों पर बागेश्वर के एक चैनल व समाचार पत्र के पत्रकारों के खिलाफ डीएम से की गयी है शिकायत

नवीन समाचार, बागेश्वर, 17 जून 2019। बागेश्वर जनपद में खनन संबंधी समाचारों पर नवीन परिहार, रमेश चंद्र सिंह गढ़िया व विक्रम सिंह शाह ने सोमवार को डीएम को एक शिकायती पत्र सोंपकर दो पत्रकारों पर आरोप लगाए हैं। शिकायती पत्र में कहा गया है कि वे जनपद में रीवर ट्रेनिंग के कार्य हेतु स्वीकृत लॉटों के सफल निविदादाता हैं, और पूर्ण रॉयल्टी जमा करने के उपरांत प्रस्तावित स्थलों में विभाग के निर्देशों पर विधिवत चैनलाइज करने का कार्य कर रहे हैं। किंतु समाचार प्लस चैनल के स्थानीय संवाददाता और दैनिक जागरण के स्थानीय संपादक के द्वारा अवैध खनन के समाचार प्रकाशित किये जा रहे हैं, और सोशल मीडिया में भी अफवाह फैलाई जा रही है। इससे सफल निविदादाताओं एवं प्रशासन की छवि धूमिल हो रही है और जनहित के कार्यों में व्यवधान उत्पन्न हो रहा है। लिहाजा डीएम से स्थलीय निरीक्षण कर ऐसे गलत समाचारों पर अंकुश लगाने व असामाजिक तत्वों की हरकतों पर अंकुश लगाते हुए आवश्यक कदम उठाने की मांग की गयी है।
इधर बताया गया है कि उपरोक्त चैनल एवं समाचार पत्र ने संबंधित ग्रामीणों की शिकायत के आधार पर अवैध खनन के समाचार प्रसारित प्रकाशित किये थे। परंतु संभवतया समाचार के साथ संबंधित अधिकारी का पक्ष नहीं लिया गया था। वहीं जनपद में ग्रामीणों में खनन के प्रति नाराजगी की खबरें आने का सिलसिला जारी है। जनपद के कपकोट क्षेत्र की ग्राम पंचायत खर्ककानातोली से भी आयी है। यहां के दरपान सिंह व बचे सिंह आदि ग्रामीणों ने गांव केा भूकंप एवं भूस्खलनक के दृष्टिकोण से जोन-5 का बताते हुए यहां खीरगंगा में जेसीबी मशीनों से अवैध खनन होने का आरोप लगाते हुए इससे गांव को खतरा बताया है और तत्काल प्रभाव से अवैध खनन पर रोक लगाने की मांग की है, तथा ऐसा न होने पर उग्र आंदोलन की चेतावनी भी दी है। वहीं एसडीएम प्रमोद कुमार के हवाले से बताया गया है कि प्रकरण की जांच कराई जाएगी और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

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नवीन समाचार, नैनीताल, 14 जून 2019। निकटवर्ती भवाली स्थित पंचामृतम धाम में आयोजित साहित्यिक तथा धार्मिक कार्यक्रम में नगर के युवा पत्रकार नवीन पालीवाल को प्रख्यात साहित्यकार डॉ. कमला पांडेय तथा पंचामृतम धाम के प्रबंधक महेश चंद्र पांडेय के हाथों बेहतर पत्रकारिता के लिए युवा प्रतिभा सम्मान से सम्मानित किया गया है। पुरस्कार स्वरूप आयोजकों ने उन्हें शॉल भेंट कर स्मृति चिन्ह प्रदान किया। उल्लेखनीय है कि कार्यक्रम के तहत आयोजित तीन दिवसीय साहित्य संगोष्ठी तथा साहित्य पर मंथन के दौरान सयाजीराव विश्वविद्यालय की सहायक प्रोफेसर डॉ. स्मृति बाघेल के निर्देशन में भरतनाट्यम कलाकारों ने मनोहारी प्रस्तुति दी। कार्यक्रम में संस्कृत साहित्य की विद्वान प्रो. कमला पांडेय की बीते दिनो प्रकाशित कृति ‘बांसुरी: अनहद से बहती रसधार’ की समालोचना कई विद्वानों ने की।

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पत्रकारिता दिवस पर कार्यक्रम न कर पाने की जानकारी देते समिति के संयोजक।

नवीन समाचार, नैनीताल, 29 मई 2019 । जिला व मंडल मुख्यालय में हिंदी पत्रकारिता दिवस 30 मई को 1988 से 2018 तक यानी 32 वर्षों से उर्दू पत्रकार एवं कलमकार समिति द्वारा लगातार जारी कार्यक्रम इस वर्ष से नहीं होगा। बुधवार को समिति के केंद्रीय संयोजक सैयद आबाद जाफरी ने पत्रकार वार्ता में इसकी घोषणा की। बिना कोई कारण बताये उन्होंने कहा कि इस कार्यक्रम को आगे जारी रखने में स्वयं को असहाय पा रहे हैं। इसलिये इसे आगे जारी रखना संभव नहीं है। वहीं सह संयोजक सैयद कासिफ जाफरी ने बताया कि आर्थिक कारणों से कार्यक्रम को आगे जारी रखना संभव नहीं है।
नगर के एक रेस्टोरेंट में आयोजित पत्रकार वार्ता में श्री जाफरी ने बताया कि इस कार्यकम के तहत पत्रकारिता, संस्कृति, साहित्य, संसदीय प्रणाली, राष्ट्रीय एकता, पंत जयंती, एकात्म मानववाद आदि पर गोष्ठी, संगोष्ठी, कवि सम्मेलन व मुशायरा आदि के 45 कार्यक्रम आयोजित किये गये। साथ ही इस दौरान शिक्षा व पत्रकारिता के क्षेत्र में 16-16, समाज सेवा में 45, संस्कृति के क्षेत्र में 8 तथा पर्यावरण में एक सहित कुल 86 हस्तियों को सम्मानित किया गया।

यह भी पढ़ें : पत्रकार के हमलावर की जमानत अर्जी खारिज

नवीन समाचार, नैनीताल, 25 अप्रैल 2019। हल्द्वानी में बीती 26 मार्च को ‘द संडे पोस्ट’ साप्ताहिक समाचार पत्र के पत्रकार मनोज बोरा पर पता पूछने के बहाने आये दो मोटरसाइकिल सवार युवकों ने जानलेवा हमला करते हुए गोली चला दी थी। हालांकि मनोज इस घटना में गोली उनके पैर में लगी थी। वहीं घटना के बाद गिरफ्तार होने के बाद से जेल में बंद दो आरोपितों में से एक नीरज जोशी निवासी बमनपुरी सितारगंज ने इधर जिला एवं सत्र न्यायाधीश नरेंद्र दत्त की अदालत में जमानत अर्जी दी थी। जिला शासकीय अधिवक्ता-फौजदारी सुशील कुमार शर्मा ने बताया कि आरोपित की निशानदेही पर गोलीबारी की घटना में प्रयुक्त पिस्टल को बरामद किया गया था, तथा उसकी शिनाख्त-पहचान भी हो चुकी है। हमला के समय बोरा अपनेे मित्र दिव्य प्रकाश रावत की स्कॉर्पियो गाड़ी से उतरे थे, लिहाजा रावत के धोखे में रावत को जान से मारने की नीयत से पुरानी रंजिश के तहत बोरा पर हमला किया गया था। इसलिए उसे जमानत दिया जाना उचित नहीं होगा, इस पर न्यायालय ने उसकी जमानत अर्जी खारिज कर दी।

यह भी पढ़ें : दो पत्रकारों पर गोली चलाने वाले तीन हिस्ट्रीशीटरों सहित चार हमलावर गिरफ्तार

पुलिस की गिरफ्त में पत्रकार के हमलावर

नवीन समाचार, हल्द्वानी, 26 मार्च 2019। बीते पांच दिनों में हल्द्वानी में दो पत्रकारों पर गोली चलने की घटना हुई थी। पहली घटना में दो बदमाशों ने हाइडिल गेट पर पत्रकार मोहन भट्ट पर तमंचा तानकर अभद्रता की थी और इसके बाद एक होटल कारोबारी हिमांशु तिवाड़ी से पैर छूने को कहा था और ऐसा न करने पर उस पर दो गोलियां चला दी थीं। मामला मुख्यमंत्री व डीजीपी तक पहुंचने के बाद एसएसपी ने दोनों हिस्ट्रीशीटर बदमाशों आरटीओ रोड निवासी वीरेंद्र बोरा व गायत्री कॉलोनी निवासी भारत भूषण उर्फ भानु पर एक-एक हजार रुपये के ईनाम की घोषणा भी की थी। दोनों को गिरफ्तार कर लिया है।
वहीं पुलिस के हाथ दूसरी बड़ी कामयाबी सोमवार को ‘द संडे पोस्ट’ साप्ताहिक समाचार पत्र के पत्रकार मनोज बोरा पर हुई गोली चलाने की घटना के मामले में भी मिली है। पुलिस ने इस मामले में दोनों हमलावरों-राहुल श्रीवास्तव (29) निवासी वार्ड नंबर 1 मीना बाजार बिज्टी सितारगंज व नीरज जोशी (22) निवासी बमनपुरी सितारगंज को गिरफ्तार किया है। उनके कब्जे से घटना में प्रयुक्त पिस्टल, दो जिंदा कारतूस व मोटरसाइकिल संख्या यूके06एएस-0061 भी बरामद कर लिये गये हैं। हमलावरों के अनुसार वे भतरौंजखान निवासी सतीश नैनवाल के लिए काम करते हैं, जिससे गत दिवस पत्रकार मनोज बोरा व उसके साथी दिव्य प्रकाश रावत का विवाद हल्द्वानी थाने तक भी पहुंचा था। राहुल के खिलाफ पहले से आधा दर्जन मामले होने की बात भी प्रकाश में आई है। वहीं पुलिस मामले में खनन को लेकर विवाद की बात भी कह रही है।

पूर्व समाचार : हल्द्वानी में पत्रकार को दिन दहाड़े गोली मारी, हालत गंभीर, चार दिनों में अपनी तरह की दूसरी घटना

नवीन समाचार, हल्द्वानी, 25 मार्च 2019। हल्द्वानी के बिठौरिया नंबर एक क्षेत्र की शिव विहार कॉलोनी में रहने वाले चर्चित ‘संडे पोस्ट’ साप्ताहिक समाचार पत्र के पत्रकार मनोज बोरा को उनके घर से बाहर बहाने से बुलाकर गोली मार दी गयी। गनीमत रही कि गोली मनोज को पांव को पांव में लगे, जिसके बाद वे मूर्छित होकर गिर पड़े। उन्हें हल्द्वानी के निजी-कृष्णा अस्पताल में भर्ती कराया गया है। बोरा का कहना है कि बाइक पर आये दो युवकों ने उन्हें कॉलोनी में किराये के लिए खाली कमरे बताने का झांसा देकर घर से बाहर बुलाया, और इधर-उधर की बात करते हुए एक युवक ने गोली मार दी। बोरा का कहना है कि वह गोली मारने वाले युवकों को जानते नहीं हैं, लेकिन सामने आने पर पहचान लेंगे। फिलहाल यह पता नहीं चल पाया है कि गोली पत्रकारिता के संदर्भ में किसी रिपोर्ट को छापने को लेकर मारी गयी अथवा किसी अन्य कारण। सर्वाधिक चिंता का विषय यह भी है कि लोक सभा चुनाव की आचार संहिता के दौरान चुनाव से केवल एक पखवाड़े पूर्व यह घटना हुई है। जबकि इस दौरान पुलिस लाइसेंसी हथियारों को भी जब्त कराने की बात करती हैै।
इस घटना से पत्रकारों में पुलिस की सुरक्षा व कानून व्यवस्था को लेकर गहरा आक्रोश है। आम लोग भी पूछ रहे हैं कि जब समाज में पत्रकार ही सुरक्षित नहीं हैं तो आम लोगों की सुरक्षा भगवान भरोसे ही है। उल्लेखनीय है कि इससे पूर्व हल्द्वानी में होली के दिन हिंदुस्तान समाचार पत्र के पत्रकार मोहन भट्ट पर भी हवाई फायर करते हुए हमला किये जाने की घटना हुई थी और उधर अल्मोड़ा में एक समाचार पोर्टल के पत्रकार को स्वयं जिले के एसएसपी द्वारा बुलाकर प्रताड़ित किये जाने से भी पत्रकार पहले ही आक्रोशित हैं। हल्द्वानी प्रेस क्लब के अध्यक्ष संजय तलवाड़ ने ऐसी घटनाओं की निंदा करते हुए शीघ्र उच्चाधिकारियों से मिलकर पुलिस-प्रशासन से हमलावरों की गिरफ्तारी करने की बात कही है। नेशनल यूनियन ऑफ जर्नलिस्ट के प्रदेश अध्यक्ष त्रिलोक चंद्र भट्ट व महासचिव सुरेश पाठक सहित अन्य पत्रकारों ने घायल पत्रकार से अस्पताल में मुलाकात करने के बाद घटना को मीडिया पर हमला बताते हुए उनके शीघ्र स्वास्थ्य लाभ की कामना की है।
उधर पुलिस के द्वारा अब सांप के निकल जाने के बाद लकीर पीटने की तर्ज पर आसपास के सीसीटीवी कैमरों की जांच करने की बात कही जा रही है।

यह भी पढ़ें : वरिष्ठ पत्रकार डा. विपिन चन्द्रा सहित चार पत्रकार बने पत्रकार कल्याण कोष के सदस्य, सीएम ने लगाई मुहर

डा. विपिन चन्द्रा

नवीन समाचार, नैनीताल, 22 फरवरी 2019। वरिष्ठ पत्रकार डा. विपिन चन्द्रा को पत्रकार कल्याण कोष का सदस्य नियुक्त किया गया है। सूचना विभाग देहरादून से से  जारी पत्र के अनुसार प्रदेश के चार पत्रकारों-कुमाऊँ से एकमात्र उत्तराखंड श्रमजीवी पत्रकार यूनियन के नैनीताल जिला अध्यक्ष डा. विपिन चन्द्रा, देवभूमि पत्रकार यूनियन देहरादून के डा. डीवी शर्मा, उत्तराखंड पत्रकार यूनियन देहरादून से चेतन गुरूंग व राष्ट्रीय पत्रकार यूनियन देहरादून से नरेश मनोचा को जिम्मेदारी सौंपते हुए पत्रकार कल्याण कोष का सदस्य बनाया गया है। बता दें कि सूचना विभाग के द्वारा पत्रकार कल्याण कोष में उत्तराखंड बयोवृद्ध पत्रकार पेंशन योजना के लिए पत्रकार संगठनों के सदस्यों को गैर सरकारी सदस्य के रूप में नामित किया गया है, और मुख्यमंत्री के आदेश के बाद ही इनकी नियुिक्त होती है।

कुमाऊं से पहले पत्रकार कल्याण कोष के बने सदस्य
गौरतलब है कि डा. विपिन चन्द्रा लम्बे समय से हल्द्वानी में सहारा समय न्यूज चैनल के संवाददाता के रूप में कार्यरत हैं, और लंबे समय से पत्रकारिता से जुड़े हैं। उनकी गिनती एक जुझारू कलमकार के रूप में होती है। पत्रकार कल्याण कोष में सदस्य बनने वाले डा. चन्द्रा कुमाऊं से एक मात्र पत्रकार हैं। डा. चन्द्रा ने पत्रकार कल्याण कोष का सदस्य बनाये जाने पर सीएम त्रिवेन्द्र सिंह रावत,  सूचना विभाग और यूनियन का धन्यवाद ज्ञापित किया है। उन्होंने कहा कि यहां तक पहुंचने में यूनियन के प्रदेश महामंत्री प्रयाग पाण्डे और राष्ट्रीय सहारा के कुमाऊं ब्यूरो चीफ गणेश पाठक का बड़ा सहयोग रहा। उन्होंने कहा कि वह पत्रकारों की पेंशन संबंधित समस्याओं को सुलझाने सहित पत्रकारों की हरसंभव मदद करने सहित पत्रकारों के हितों के लिए कार्य करेंगे।
डा. चन्द्रा को मिल चुकी है डॉक्टरेट की उपाधि
इससे पहले सहारा समय चैनल के वरिष्ठ पत्रकार और उत्तराखंड श्रमजीवी पत्रकार यूनियन के जिला अध्यक्ष डा. विपिन चंद्रा को राज्यपाल बेबी रानी मौर्य और उच्च शिक्षा मंत्री डा. धन सिंह रावत ने पत्रकारिता के क्षेत्र में पीएचडी करने के उपरांत उत्तराखंड मुक्त विश्वविद्यालय के चौथे दीक्षांत समारोह में डॉक्टरेट की उपाधि से सम्मानित किया जा चुका है। वह कुमाऊं से पत्रकारिता में पीएचडी की उपाधि पाने वाले पहले पत्रकार बने हैं।

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देहरादून 17  नवम्बर 2018 । उत्तरांचल प्रेस क्लब के पूर्व अध्यक्ष और वरिष्ठ पत्रकार अनूप गैराला का दिल्ली के फोर्टिस अस्पताल में उपचार के दौरान निधन हो गया। मृत्यु का कारण हृदयाघात बताया जा रहा है। अनूप गैरोला के असामयिक निधन से उत्तराखंड का पत्रकारिता जगत स्तब्ध है। अनूप गैरोला के साथ कुछ दिनों पूर्व दुर्घटना हो गयी थी, इसमें उनके पांवों में चोट लगी थी। इस दुर्घटना के बाद उनके पांवों में गैंगरीन का संक्रमण हो गया था। इसका देहरादून में काफी इलाज कराया गया और संक्रमण रोकने के लिए उनका पांव भी काटना पड़ा था। इसके बाद उनकी स्थिति में सुधार हुआ था।

बताया जा रहा है कि दो दिनों पूर्व उनकी स्थिति फिर बिगड़ी और परिवारजन उन्हें दिल्ली ले गए। दिल्ली में उनका उपचार चल रहा था लेकिन डाक्टर उन्हें बचा नहीं पाए। अनूप गैरोला उत्तराखंड के वरिष्ठ एवं हरफनमौला पत्रकार थे। वे दैनिक जागरण, अमर उजाला, राष्ट्रीय सहारा और दैनिक भाष्कर जैसे समाचार पत्रों के साथ ही टाइम टीवी, समाचार प्लस और साधना प्लस जैसे टीवी चैनलों को अपनी सेवाएं को अपनी सेवाएं दे चुके थे। वे अपने सरल और सहृदयी स्वभाव से सभी के प्रिय थे। वे अपने पीछे अपना भरा पूरा परिवार छोड़ गए हैं। उनके परिवार में उनकी मां, पत्नी और दो बच्चे हैं। उनकी पत्नी शिक्षिका हैं।

यह भी पढ़ें : जाते-जाते पत्रकारों के लिए बड़े आदेश दे गये न्यायूर्ति राजीव शर्मा

नैनीताल, 12 नवंबर 2018। उत्तराखण्ड हाई कोर्ट से सोमवार को स्थानांतरित होकर गये वरिष्ठ न्यायाधीश न्यायमूर्ति राजीव शर्मा जाते-जाते राज्य के पत्रकारों को भी बड़ा तोहफा दे गये हैं। सोमवार को न्यायमूर्ति राजीव शर्मा व न्यायमूर्ति शरद कुमार शर्मा की खंडपीठ ने नैनीताल के वरिष्ठ पत्रकार रवींद्र देवलियाल के एक पत्र पर जनहित याचिका के रूप में लेते हुए राज्य सरकार को राज्य के श्रमजीवी पत्रकारो को आंध्र प्रदेश व उड़ीसा आदि राज्यों की तरह की सुविधाए दिए जाने के आदेश दिए हैं। साथ ही पत्रकारो को दी जा रही 5 हजार रुपया प्रतिमाह की पेंशन में बढ़ोतरी करने के आडेश दिए है।
उल्लेखनीय है कि वरिष्ठ पत्रकार रवींद्र देवलियाल ने इसी माह हाई कोर्ट के तत्कालीन कार्यवाहक मुख्य न्यायधीश राजीव शर्मा को पत्र लिखकर पत्रकारों की खराब आर्थिक स्थिति व उनकी सेवानिवृत्ति के बाद सामाजिक सुुरक्षा न होने की जानकारी दी थी। उन्होंने अपने पत्र में यह भी कहा था कई राज्यो में पत्रकारो को सामाजिक आर्थिक सुरक्षा दी जा रही हैं। इस पत्र का स्वतः संज्ञान लेते हुए खंडपीठ ने सोमवार को राज्य सरकार को निर्देश दिए है कि पत्रकारो को दी जा रही पेंशन में बढ़ोतरी करें और पत्रकारो के कल्याण के लिए आंध्र प्रदेश व उड़ीसा राज्यों की तरह ‘वेलफेयर फंड्स रूल्स’ बनायें। साथ ही खंडपीठ ने पत्रकारों की पेंशन व स्वाथ्य योजना को राज्य के अपर मुख्य सचिव तथा लोक सूचना व जन सम्पर्क विभाग के निदेशक से उत्तर प्रदेश सरकार की भांति तैयार कराने, सरकार की हाउसिंग योजना में पत्रकारो के लिए कुछ हाउसिंग प्लाट व फ्लैट आरक्षित रखने को भी कहा। सुनवाई के दौरान सरकार की ओर से खंडपीठ को अवगत कराया गया कि पत्रकारों के हितो को देखते हुए सरकार कई योजनाएं चला रही है, और पत्रकारों के हितों के लिए पूरी तरह से प्रतिबद्ध है।

नैनीताल में (केवल या सिर्फ नहीं)‘सात’ पत्रकारों ने दी शहीद पत्रकार अच्युतानंद साहू को श्रद्धांजलि

जिला सूचना कार्यालय में दिवंगत पत्रकार अच्युतानंद साहू को मौन रखकर श्रद्धांजलि अर्पित करते पत्रकार।

नैनीताल, 2 नवंबर 2018। गत दिवस छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा में विधानसभा चुनाव की कवरेज के दौरान माओवादी नक्सलियों के हमले में हमले में शहीद हुए डीडी न्यूज के पत्रकार अच्युतानंद साहू को शुक्रवार को मुख्यालय में दो मिनट का मौन रखकर श्रद्धांजलि दी गयी। जिला सूचना कार्यालय में सुबह 11 बजे आयोजित हुई शोक सभा में वरिष्ठ पत्रकार डा. गिरीश रंजन तिवारी, नवीन जोशी, कमल जगाती, तेज सिंह बिष्ट, नवीन तिवारी, सुनील बोरा व कांता पाल यानी (केवल या सिर्फ नहीं) सात पत्रकार मौजूद रहे।
Image result for अच्युतानंद साहूइस अवसर पर डा. तिवारी ने देश के ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ यानी कारोबार करने के मामले में नित ऊपर चढ़ने और पत्रकारों पर होने वाले हमलों के मामले में नित नीचे गिरने की स्थितियों पर चिंता जताई, एवं दिवंगत पत्रकार साहू को ‘शहीद’ का दर्जा एवं उनके परिवार को सभी अनुमन्य सुविधाएं देने की मांग की। कहा, यह स्थितियां भी तब हैं जब पत्रकार स्वयं भी लिखने में सावधानी बरतते हैं। नवीन जोशी ने कहा कि पत्रकारों पर हुए हमले में भी संवेदना का बंटना पत्रकारिता जगत के लिए शुभ संकेत नहीं है। कमल जगाती ने पर्वतीय क्षेत्रों में हिसक वन्य जीवों से संबंधित कवरेज के दौरान पत्रकारों पर खतरे को रेखांकित किया।

उल्लेखनीय है कि नैनीताल ही वह नगर है, जहां से 1868 में ‘समय विनोद’ के जरिये उत्तराखंड में ‘भाषाई पत्रकारिता’ की शुरुआत हुई थी, और यहीं से प्रदेश का पहला हिंदी दैनिक समाचार पत्र ‘पर्वतीय’ 1953 से निकला था। सूचना विभाग की सूची के अनुसार वर्तमान में मुख्यालय में 34 पत्रकारिता के एवं 18 इलेक्ट्रानिक मीडिया के, यानी कुल मिलाकर 52 हैं, और इतने ही पत्रकार नगर के पत्रकारों के सबसे बड़े, दुःख-सुख बांटने के लिए बने ह्वाट्सएप ग्रुप-‘नैनीताल पत्रकार संघ’ में भी हैं। यह संयोग ही है कि आज उपरोक्त प्रिंट पत्रकारिता के 34 एवं कुल 52 पत्रकारों की दोनों संख्याओं 3 व 4 तथा 5 व 2 का जोड़ भी सात ही होता है, और इतने ही पत्रकार इस शोक सभा में उपस्थित रहे। ऐसे एक तरह से सभी पत्रकारों का प्रतिनिधित्व भी रहा। अलबत्ता, ‘कुछ’ अन्य पत्रकारों ने भी इस शोक से स्वयं को संबद्ध बताया। अन्य अपनी व्यस्तताओं के कारण नहीं पहुंच पाये।

12 नवंबर को छत्तीसगढ़ में विधानसभा चुनाव होने वाले हैं। 30 अक्टूबर को वहां दूरदर्शन के एक कैमरामैन की मौत हो गई। अच्युतानंद साहू माओवादी हमले में मारे गए। सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हो रहा है। वीडियो शेयर करने वाले लिख रहे हैं कि मरने से कुछ मिनट पहले साहू ने ये वीडियो रिकॉर्ड किया था। सुनें : अच्युतानंद साहू के शहादत स्थल से उनके साथी छायाकार मोर मुकुट शर्मा के मार्मिक शब्द-‘मौत से डर नहीं लग रहा है…’

इस विडिओ में शर्मा कह रहे हैं : आतंकवादी हमला हो गया है. हम दंतेवाड़ा में आए थे इलेक्शन कवरेज पर. एक रास्ते से जा रहे थे. आर्मी हमारे साथ थी. अचानक घेर लिया है नक्सलियों ने. मम्मी, अगर मैं जीवित बचा तो गनीमत है. मम्मी मैं तुझे बहुत प्यार करता हूं. हो सकता है इस हमले में मैं मारा जाऊं. परिस्थिति सही नहीं है. पता नहीं क्यों, मौत को सामने देखते हुए डर नहीं लग रहा है. बचना मुश्किल है यहां पर. छह-सात जवान हैं साथ में. चारों तरफ से घेर लिए हैं. फिर भी मैं यही कहूंगा…

उल्लेखनीय है कि दूरदर्शन की एक टीम नक्सल प्रभावित इलाकों में हुए विकास कार्यों की रिपोर्ट बनाने गई थी. इसमें अच्युतानंद, धीरज और असिस्टेंट कैमरामैन मोर मुकुट शर्मा थे. यहां के नीलावया इलाके में सुरक्षाबलों की टीम सर्च ऑपरेशन कर रही थी. नक्सलियों ने सिक्यॉरिटी फोर्सेज़ को निशाना बनाने के लिए घात लगाया. दूरदर्शन की टीम फंस गई. मोर मुकुट ने इस घटना के बारे में बताया- जिस जगह से हमें एक गांव में घुसना था, वहां हमें पांच बाइक्स दी गईं. तीन बाइक के पीछे हम तीन पत्रकार (मोर मुकुट, अच्युतानंद और धीरज) बैठ गए. बाइक चला रहे थे जवान. बाकी की दो बाइक्स पर फोर्स के जवान थे. कुल मिलाकर हम 10 लोग उस गांव में जा रहे थे. रास्ते में हम सड़क के आस-पास लगे पोस्टर्स की रिकॉर्डिंग लेने लगे. रास्ता बहुत खतरनाक था. सड़क की बाईं तरफ एक खेत था. उसमें फसल लगी थी. हमने बाइक रोककर वहां वीडियो शूट किया. फिर जैसे ही हम लोग बाइक पर वापस बैठे, खेत में छुपे नक्सलियों ने गोलीबारी शुरू कर दी. कैमरामैन अच्युतानंद साहू की बाइक सबसे आगे थी. नक्सलियों के हमले से उनकी बाइक गिर गई. फिर गोलीबारी और तेज हो गई. हम लोग किसी तरह सड़क के दाहिनी तरफ एक खड्ड में चले गए. अब नक्सलियों और हमारे बीच 25-30 फुट की एक सड़क थी.

मोर मुकुट ने आगे बताया: वीडियो बनाने से पहले मुझे बहुत प्यास लग रही थी. मैंने साथ के लोगों से पानी मांगा. उन्होंने कहा, अभी कुछ नहीं मिलेगा. मेरा गला बुरी तरह सूख रहा था. लग रहा था मौत बिल्कुल सामने है. कैमरामैन अच्युतानंद मारे जा चुके थे. मैंने सोचा, मेरे पास बहुत कम वक्त बचा है. जितना बचा है, उसे कैमरे में कैद कर लूं. यही सोचकर मैं मोबाइल पर वीडियो शूट करने लगा. मुझे मां याद आ रही थी. मैं ईश्वर को याद कर रहा था. मैं जहां लेटा था, वहां लाल चींटियों का झुंड था. वो मेरे शरीर पर रेंगने लगी. इसीलिए मुझे अचानक बीच में ही वीडियो बंद करना पड़ा. अगर चींटियों से बचने के लिए मैं हिलता-डुलता, तो नक्सली गोली चला देते. जिस पेड़ के नीचे हम लेटे थे, वो नक्सलियों की गोली से छलनी हो चुका था. मोर मुकुट ने बताया कि करीब 40 मिनट तक फायरिंग होती रही. पूरा जंगल गोलियों की आवाज से गूंज रहा था. जो फोर्स गांव की मुख्य सड़क तक साथ आई थी, वो मौके पर पहुंची. उन्होंने मोर्चा संभाला. इसके बाद नक्सली वहां से भाग गए.

यह भी पढ़ें : नैनीताल में पत्रकार-छायाकार हुए सम्मानित

शुक्रवार को देवभूमि उत्तराखंड सफाई कर्मचारी संघ की बैठक में सम्मानित होते पत्रकार।

नैनीताल, 20 जुलाई 2018। देवभूमि उत्तराखंड सफाई कर्मचारी संघ की नवनिर्वाचित शाखा कार्यकारिणी ने शुक्रवार को जिला व मंडल मुख्यालय सरोवरनगरी में कार्यरत पत्रकारों-छायाकारों को सम्मानित किया। इस मौके पर नगर पालिका के अधिशासी अधिकारी रोहिताश शर्मा व लेखाधिकारी राहुल सिंह के साथ ही संघ के प्रदेश उपाध्यक्ष ओम प्रकाश चौटाला, प्रदेश सचिव दिनेश कटियार, प्रदेश सदस्य महेंद्र लाल, प्रदेश महासचिव गोविंद टांक आदि के हाथों नवीन जोशी, अफजल हुसैन फौजी, भूपेंद्र मोहन रौतेला, नवीन पालीवाल, सुमित जोशी, रितेश सागर, दामोदर लोहनी, कमल बिष्ट व दीपक कुमार आदि को माला पहनाकर तथा प्रतीक चिन्ह भेंटकर सम्मानित किया गया।
नगर पालिका के सभागार में आयोजित हुए सम्मान समारोह में संघ की ओर से दिनेश कटियार ने मुख्यालय में सफाई कर्मचारियों के तमाम पद खाली होने तथा उन पर काम का भारी दबाव होने जैसी समस्याओं का उल्लेख करते हुए पत्रकारों से सफाई कर्मचारियों के हितों तथा नगर हित के माल रोड के शाम को अधिक घंटों के लिए बिना किसी लिखित आदेशों के बंद होने व नैनी झील की सफाई जैसे मुद्दों को अधिक प्रखरता से उठाने की अपील की। इस मौके पर संघ के शाखा अध्यक्ष महेश कुमार व उपाध्यक्ष धीरज कटियार, महासचिव सोनू सहदेव, उपसचिव कमल कुमार सहित बड़ी संख्या में पदाधिकारी मौजूद रहे।

यह भी पढ़ें : नैनीताल के पत्रकारों ने पेश की अनूठी मिसाल

नैनीताल। जिला व मंडल मुख्यालय के पत्रकारों ने सोमवार को अनूठी मिसाल पेश की। यह मिसाल थी अद्भुत एकता के साथ ही एक-दूसरे को यथोचित सम्मान देने की। यहां नगर पालिका सभागार की लंबी परवलयाकार मेज के एक सिरे पर वरिष्ठतम (उम्र व अनुभव के आधार पर) सदस्यों को आमंत्रित कर बैठाया गया तो दूसरे छोर तक स्वतः ही कनिष्ठतम सदस्य बैठते चले गए। यहां हर कोई बोला और करीब-करीब एक सुर में बोला। कनिष्ठों ने जहां शासन-प्रशासन से मिल रही उपेक्षा पर व्यथा सुनाई, वहीं वरिष्ठों ने नसीहत देते हुए कि पत्रकार भी अपनी सीमाओं को समझें, भरोसा दिया कि यदि समाज के इस बुद्धिजीवी वर्ग की कहीं उपेक्षा होती है तो फिर बर्दास्त नहीं किया जाएगा।
यह मिसाल अनूठी इसलिए भी थी कि जहां एक छोटे से परिवार में भी मतभिन्नता देखी जाती है, हर वर्ग के अनेक संगठन होते हैं। यहां भी कतिपय पत्रकार कुछ संगठनों द्वारा अपने साथ जोड़ लिए गए हैं। बावजूद नगर के पत्रकारों ने ‘संघे शक्तिः’ पर बल दिया, और एक स्वर में तय किया कि वे हमेशा एक इकाई के रूप में रहे हैं और आगे भी रहेंगे।बैठक में उपस्थित पत्रकार :

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नगर के समस्त पत्रकार सोमवार को मुख्यालय में लंबे समय के बाद एकजुट हुए, और आपस में एकता का परिचय देते हुए शासन-प्रशासन की ओर से हालिया समय में पत्रकारों के बाबत बरती जा रही उपेक्षा पर गहरी नाराजगी व्यक्त की गयी। नगर पालिका के सभागार में हुई बैठक में राज्य अतिथि गृह में पत्रकारों के लिए कक्ष आरक्षण हेतु सूचना निदेशालय के जरिये आवेदन करने की व्यवस्था एवं खासकर नैनीताल पुलिस के द्वारा हालिया दौर में नये पत्रकारों के साथ किये गए उपेक्षापूर्ण रवैये के प्रति नाराजगी व्यक्त की गयी। इस संबंध में शीघ्र ही पत्रकार एसएसपी से भी मिलेंगे। इसके अलावा पूर्व में प्रेस क्लब को नये ब्रिज-बाइपास में आवंटित कक्ष का प्रेस क्लब को हस्तांतरण किये जाने आदि पर नगर पालिका के अधिशासी अधिकारी से मिलने सहित अन्य सभी बिंदुओं पर आगे बढ़ने व सगठन को मजबूत बनाये जाने पर बल दिया गया। पत्रकारों ने एक राय होकर तय किया कि किसी भी पत्रकार के ऊपर हो रहे उत्पीड़न को किसी भी कीमत में बर्दाश्त नहीं किया जायेगा। बैठक की अध्यक्षता जगदीश जोशी ने की। बैठक में डा. गिरीश रंजन तिवारी, नवीन जोशी, कमल जगाती, किशोर जोशी, रविन्द्र देवलियाल, ललित जोशी, कांता पाल, हेमंत रावत, सुनील बोरा, अफजल फौजी, विनोद कुमार, राजू पांडेय, रवि पांडे, आँचल पंत, कंचन वर्मा, प्रशांत दीक्षित, भूपेंद्र मोहन रौतेला, विनीत उपाध्याय, नवीन पालीवाल, समीर साह, अजमल हुसैन, नीरज जोशी, सुरेश कांडपाल, नवीन तिवारी, कांता पाल, विनोद कुमार, रितेश सागर, दामोदर लोहनी, एसएम इमाम, मुनीर आलम, दीपक आर्या व सुमित जोशी सहित बड़ी संख्या में पत्रकार मौजूद रहे। संचालन गौरव जोशी व वीरेंद्र बिष्ट ने सयुक्त रूप से किया।

यह भी पढ़ें : डीएसबी के पत्रकारिता विभाग ने फ्रेशर्स पार्टी के रूप में मनाया 12 वर्ष पूरे होने का उत्सव

संगीता बुधलाकोटी मिस फ्रेशर एवं मोहम्मद सुहेल मिस्टर फ्रेशर चुने गए

डीएसबी परिसर के पत्रकारिता विभाग में आयोजित कार्यक्रम में मंचासीन परिसर निदेशक, डीएसडब्लू व अन्य।
पूर्व में कुमाऊँ विवि के पत्रकारिता विभाग के मिस फ्रेशर-2018 के पुरस्कार के साथ संगीता बुधलाकोटी

नैनीताल, 6 अक्टूबर। कुमाऊं विवि के मुख्यालय स्थित सर्वप्रमुख डीएसबी परिसर में शनिवार को पत्रकारिता एवं जनसंपर्क विभाग की स्थापना के 12 वर्ष पूरे होने के अवसर पर ‘फ्रेशर्स पार्टी’ के रूप में उत्सव मनाया गया। इस मौके के लिए दूसरे वर्ष यानी तीसरे सेमेस्टर के छात्र-छात्राओं ने अपने जेब खर्च से धनराशि एकत्र पर पत्रकारिता विभाग को सुंदर तरीके से सजाया एवं गीत, संगीत एवं नृत्य के साथ ही अपनी रचनात्मक प्रतिभा का सुंदर प्रस्तुतीकरण दिया। कार्यक्रमों में प्रस्तुति के आधार पर 2017 में मिसेज इंडिया की  द्वितीय रनर अप रही संगीता बुधलाकोटी मिस फ्रेशर एवं मोहम्मद सुहेल मिस्टर फ्रेशर चुने गए। उषा पांडे को सर्वश्रेष्ठ नृत्य के लिये पुरस्कृत किया गया।

कार्यक्रम का शुभारंभ परिसर निदेशक प्रो. एलएम जोशी ने अधिष्ठाता छात्र कल्याण प्रो. पद्म सिंह बिष्ट, विभाग की संस्थापक प्रो. नीरजा टंडन एवं विभागाध्यक्ष डा. गिरीश रंजन तिवारी के साथ दीप प्रज्वलित करके किया, तथा छात्र-छात्राओं को भावी पत्रकार बताते हुए शुभकामनाएं दीं। उनसे पत्रकारिता के चौथे स्तंभ की भूमिका को और अधिक समृद्ध करने का आह्वान भी किया गया। इस मौके पर हिमानी, नीतू, गुंजन, प्रियंका, रश्मि, संगीता, आसमां, नेहा के साथ ही छात्र संघ उपसचिव सोनी कनवाल आदि छात्राओं तथा पंकज, संदीप, रोहित, गणेश, पूर्व छात्र संघ उपाध्यक्ष प्रकाश जोशी व चंदन कुमार आदि ने विभिन्न कार्यक्रमों, उनके संचालन एवं अन्य व्यवस्थाओं में योगदान दिया।

नवीन समाचार

मेरा जन्म 26 नवंबर 1972 को हुआ था। मैं नैनीताल, भारत में मूलतः एक पत्रकार हूँ। वर्तमान में मार्च 2010 से राष्ट्रीय हिन्दी दैनिक समाचार पत्र-राष्ट्रीय सहारा में ब्यूरो चीफ के रूप में कार्य कर रहा हूँ। इससे पहले मैं पांच साल के लिए दैनिक जागरण के लिए काम कर चुका हूँ। कुमाऊँ विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग से ‘नए मीडिया’ विषय पर शोधरत हूँ। फोटोग्राफ़ी मेरा शौक है। मैं NIKON COOLPIX P530 और अडोब फोटोशॉप 7.0 के साथ फोटोग्राफी कर रहा हूँ। फोटोग्राफी मेरे लिए दुनियां की खूबसूरती को अपनी ओर से चिरस्थाई बनाने का बहुत छोटा सा प्रयास है। एक फोटो पत्रकार के रूप में मेरी तस्वीरों को नैनीताल राजभवन सहित विभिन्न प्रदर्शनियों में प्रस्तुत किया गया, तथा उत्तराखंड की राज्यपाल श्रीमती मार्गरेट अलवा द्वारा सम्मानित किया गया है। कुछ चित्रों को राष्ट्रीय-अंतर्राष्ट्रीय पुरस्कार भी प्राप्त हो चुके हैं। गूगल अर्थ पर चित्र उपलब्ध कराने वाली पैनोरामियो साइट पर मेरी प्रोफाइल को 18.85 Lacs से भी अधिक हिट्स प्राप्त हैं।पत्रकारिता और फोटोग्राफी के अलावा मुझे कवितायेँ लिखना पसंद है। काव्य क्षेत्र में मैंने नवीन जोशी “नवेन्दु” के रूप में अपनी पहचान बनाई है। मैंने बहुत सी कुमाउनी कवितायेँ लिखी हैं, कुमाउनी भाषा में मेरा काव्य संकलन उघड़ी आंखोंक स्वींड़ प्रकाशित हो चुका है, जो कि पुस्तक के के साथ ही डिजिटल (PDF) फार्मेट पर भी उपलब्ध होने वाली कुमाउनी की पहली पुस्तक है। मेरी यह पुस्तक गूगल एप्स पर भी उपलब्ध है। ’ यहां है एक पत्रकार, लेखक, कवि एवं छाया चित्रकार के रूप में मेरी रचनात्मकता, लेख, आलेख, छायाचित्र, कविताएं, हिंदी-कुमाउनी के ब्लॉग आदि कार्यों का पूरा समग्र। मेरी कोशिश है कि यहां नैनीताल, कुमाऊं, उत्तराखंड और वृहद संदर्भ में देश की विरासत, संस्कृति, इतिहास और वर्तमान को समग्र रूप में संग्रहीत करने की….। मेरे दिल में बसता है, मेरा नैनीताल, मेरा कुमाऊं और मेरा उत्तराखंड

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