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तब पुलिसकर्मी को गोली मारी थी, अब गांव के युवक की कर दी पीटकर हत्या

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नैनीताल, 10 नवंबर 2018। शुक्रवार की देर रात्रि जिले के दूरस्थ, पूर्व सीएम एनडी तिवारी के मूल गांव पदमपुरी क्षेत्र एक 21 वर्षीय युवक पूरन चंद्र पुत्र रमेश राम निवासी ग्राम तल्ला लथुडा की हत्या से दहल उठा। युवक की हत्या के आरोप में निकट के ही ग्राम बुराशी निवासी लाखन सिंह पुत्र घनश्याम सिंह, लालू पुत्र राम सिंह एवं चार अन्य युवक मुकदमा दर्ज होने के बाद गिरफ्तार कर लिए गए हैं। उल्लेखनीय तथ्य यह भी है कि मुख्य आरोपी लाखन की मौजूदगी में उसके एक साथी ने बीते वर्ष 2017 में हल्द्वानी में अपने ही गांव के निवासी एक पुलिसकर्मी को गोली मार दी थी। हालांकि उसकी जान बच गई और अब मामला रफादफा हो चुका है। संभवतया इस घटना से ही हिम्मत बढ़ने के बाद उसने आज हत्या ही कर दी। हत्या का कारण शराब पीकर हुआ आपसी विवाद बताया जा रहा है।

हल्द्वानी के चर्चित पूनम हत्याकांड मामले में एसआईटी ने हाई कोर्ट में हाथ किये खड़े !

मृतका पूनम पांडे

नैनीताल, 29 अक्टूबर 2018। हल्द्वानी के गोरापड़ाव के चर्चित पूनम पांडे हत्याकांड में डीआईजी पुष्पक ज्योति की निगरानी में गठित एसआईटी ने अपनी प्रगति रिपोर्ट हाईकोर्ट को सौंप दी है। चूंकि हाईकोर्ट के आदेशों पर गठित एसआईटी दो माह बाद भी मामले में कुछ भी नहीं कर पायी है। ऐसे में माना जा रहा है की एसआईटी ने हाई कोर्ट में इस मामले के हत्यारों तक पहुँचने से हाथ तो खड़े नहीं कर दिए हैं। कोर्ट ने इस मामले में सुनवाई के लिए 15 नवंबर की तिथि निर्धारित की है।

उल्लेखनीय है कि गोरापड़ाव में 27 अगस्त को बदमाशों ने घर में घुसकर पूनम पांडे की हत्या कर दी थी और उसकी बेटी अर्शी को अधमरा कर दिया था। साथ ही बंदूक की बट से भौंक रहे कुत्ते को भी मार डाला था, और बंदूक व स्कूटी भी लूटकर ले गए थे। इस मामले में पुलिस एक लाख 20 हजार नंबरों को खंगाल चुकी है। रामपुर, बरेली रोड के सीसीटीवी चेक किए गए। फिर भी कोई सफलता के नाम पर सिर्फ स्कूटी हाथ लगी है लेकिन घटना में शामिल कातिलों का दो माह बाद भी पता नहीं चल सका है। हाईकोर्ट ने घटना का खुलासा करने के लिए एसआईटी गठित करने के निर्देश दिए।

मामले में लाइ-डिटेक्टर टेस्ट की तैयारी में पुलिस

नैनीताल, 13  अक्टूबर 2018। हल्द्वानी के गोरापड़ाव के निकट बरेली रोड से सटे गांव हरिपुर पूर्णानंद में 28 अगस्त 2018 की रात हुए चर्चित पूनम पांडे हत्याकांड मामले में एडीजी डा.अशोक कुमार  के आते ही करीब डेढ़ माह बाद आखिर राज खुलते नज़र आ रहे हैं। एडीजी डा. कुमार ने शनिवार को मामले की एकमात्र चश्मदीद, मृतका की पुत्री अर्शी पांडे से पूछताछ की। बताया गया है की अब तक लगातार अपने बयान बदलकर पुलिस को भटका और दूर दौड़ा रही अर्शी टूट गयी है। इसके बाद पुलिस की जांच नजदीकी लोगों और भाड़े के हत्यारों तक सीमित होती बताई जा रही है। आगे माना जा रहा है कि पुलिस जल्द इस मामले का खुलासा कर सकती है। पुलिस इस मामले में लाइ-डिटेक्टर टेस्ट की तैयारी में भी है।

उल्लेखनीय है कि बीती  4 सितंबर को  उत्तराखंड उच्च न्यायालय की कार्यकारी मुख्य न्यायधीश राजीव शर्मा व न्यायमूर्ति मनोज कुमार तिवारी की खंडपीठ ने भी इस हत्याकांड के मामले में राज्य सरकार को एसआईटी गठित कर जांच करने और जांच रिपोर्ट कोर्ट में पेश करने को कहा है। खंडपीठ ने इस बाबत विभिन्न समाचार पत्रो में छपी खबरों से संज्ञान में लेते हुए ‘इन द मैटर ऑफ ब्रूटल मर्डर ऑफ वूमन ब्रूटली विद हर डॉटर एंड डिकोयटी इन हर हाउस’ के रूप में जनहित याचिका दर्ज के रूप में दर्ज कर लिया है।

तो इस बार कोई करीबी कर गया है छैमार जैसी वारदात ! हल्द्वानी में मां-बेटी पर हमला, मां की मौत, बेटी गंभीर

नैनीताल, 28 अगस्त 2018। हल्द्वानी के निकट गोरापड़ाव के निकट बरेली रोड से सटे गांव हरिपुर पूर्णानंद में बीते दिनों हल्द्वानी व रुद्रपुर में दो अलग-अलग घटनाओं में दो महिलाओं की छैमार गिरोह द्वारा हत्या किये जाने की बुरी यादें फिर ताजा हो उठीं। कमोबेश उसी तर्ज पर इस बार घर में अकेले मौजूद मां-बेटी पर गोली मारने सहित भारी वस्तुओं, लात-घूंसों आदि से हमला किया गया है। हमले में मां की मौके पर ही मृत्यु हो गयी है, जबकि बेटी सुशीला तिवारी अस्पताल में जीवन-मृत्यु के बीच संघर्ष कर रही है। निर्दयी हत्यारे घर के कुत्ते को भी मार गए। अलबत्ता पुलिस मामले में छैमार जैसे किसी पेशेवर गिरोह की बजाय किसी गैर पेशेवर द्वारा यह हमला-हत्या किये जाने की बात कर रही है। घटना का यह दुःखद पक्ष भी है घटना के समय मृतका का पति अस्पताल में भर्ती अपनी मां का उपचार करने के लिए घर से बाहर था। यानी परिवार पर एक साथ तीन ओर से आफत बरसी है। पुलिस और एसओजी मौके पर पहुंच गई है। फॉरेंसिक टीम और डॉग स्क्वायड भी घटना की बारीकी से जांच कर रहे हैं। पुलिस और घटना की प्रकृति के आधार पर लग रहा है कि इस बार कोई करीबी, पिछली घटनाओं की ओर जांच को भटकाने के प्रयास करते हुए इस दिल दहला देने वाली घटना को अंजाम दे गया है।

घटना में मृतका मां एवं घायल हुई बेटी की फाइल फोटो

प्राप्त जानकारी के अनुसर मूल रूप से जवाहरनगर पंतनगर निवासी लक्ष्मी दत्त पांडे करीब 20 वर्षों से हल्दूचौड़ में बरेली रोड हाई वे से सटे हरिपुर पूर्णानंद गांव में रहते हैं। उनके दो डंपर गोला नदी में चलते हैं। पांच दिन से उनकी बूढ़ी मां देवकी देवी का हल्द्वानी के नीलकंठ अस्पताल में उपचार चल रहा है। बीती सोमवार की रात्रि करीब नौ बजे पांडे अपनी मां की तीमारदारी के लिए अस्पताल चले गए थे। घर पर उनकी पत्नी पूनम पांडेय और बेटी अर्शी पांडेय थे। इधर मंगलवार सुबह करीब सात बजे पांडे अस्पताल से घर लौटे तो बिस्तर पर पत्नी और बेटी को खून से लथपथ मिलीं। इनमें से पत्नी पूनम (45) की मौत हो चुकी थी, जबकि बेटी गंभीर थी। दोनों के सिर पर भारी हथियार से हमला करने के साथ ही गोली मारने की आशंका भी जताई जा रही है। घर का सामान बिखरा पड़ा था। आशंका है कि डकैत घर के सभी अलमारी बक्से आदि खंगालकर नगदी, जेवर तथा एक दोनाली बंदूक और स्कूटी भी साथ ले गए हैं।
आईजी कुमाऊँ पूरन सिंह रावत ने कहा कि सभी कोणों से घटना की जांच की जा रही है। हमलावर गैर पेशेवर लगते हैं। वे घर में दरवाजा-खिड़की तोड़कर नहीं घुसे हैं, इसलिए कोई करीबी भी लिप्त हो सकता है। फिलहाल सभी कोणों से घटना की जांच की जा रही है। उन्होंने बताया कि अस्पताल में भर्ती बेटी को देखने गये थे। उसे काफी चोटें हैं, लेकिन वह खतरे से बाहर है।

यह भी पढ़ें : हल्द्वानी का पूनम हत्याकांड: जांच के दायरे में आयी 48 में से 32 लड़कियां नशे की आदी, पैसे के लिए कई उम्रदराजों से भी बना चुकी हैं अवैध संबंध

नैनीताल, 4 सितंबर 2018। हल्द्वानी के बहुचर्चित पूनम हत्याकांड में पुलिस ने हजारों मोबाइल नंबरों को सर्विलांस पर लगाकर शक के दायरे में आयी शहर की जिन 48 लड़कियों 50 से अधिक युवकों से पूछताछ की, उनमें से 32 लड़कियों ने पुलिस के समक्ष स्वीकार किया है कि वे शराब और स्मैक की आदी हैं। और नशे के लिए पैसे जुटाने को उन्होंने उम्रदराज लोगों से अवैध संबंध भी बनाए हैं। वहीं 15 लड़कियों ने यहां तक खुलासा किया है कि वे अवैध संबंध बनाते हुए नेपाल, दिल्ली, हरियाणा आदि जगहों पर जाकर पार्टियों में शामिल हो चुकी हैं। संतोष की बात सिर्फ इतनी है कि इन 48 लड़कियों में से केवल 16 ही नशा नहीं करती हैं।
इंटर और डिग्री कॉलेज में पढ़ रही इन रईस घरों की बेटियों और बेटों ने हुक्का बार और बीयर बार में महफिल जमाने की बात भी कही है। इन लड़कियों के पास 20 से लेकर 50 हजार तक के कीमती मोबाइल सेट भी हैं। इनमें से इंटर की एक छात्रा तो स्मैक भी पीती है। वह कुछ दिन पहले अपनी एक सहेली को आवास विकास कॉलोनी से भगाकर दिल्ली ले गई थी। पुलिस की पूछताछ में यह भी सामने आया कि इंटर की यह छात्रा डिग्री कॉलेज की लड़कियों को पैसे का लालच देकर फंसा लेती हैं। पैसे के चक्कर में लड़कियां अन्य राज्यों में जाने के लिए तैयार हो जाती हैं। छात्राओं का व्हाट्सएप नंबर चेक करने पर पता चला कि ये कोड भाषा में एक दूसरे को गाली देती हैं। अपना ग्राहक तोड़ने पर दूसरी छात्राओं से भिड़ जाती हैं। 32 छात्राओं ने माना कि वे दो या चार युवकों से अवैध संबंध बना चुकी हैं। पुलिस अधिकारी भी छात्राओं की करतूत सुनकर दंग हैं।
उल्लेखनीय है कि पूनम हत्याकांड के तत्काल बाद एक वीडियो सामने आया था कि जिसमें मृतका की अस्पताल में गंभीर हालत में भर्ती बेटी अर्शी से मिलती-जुलती शक्ल की एक लड़की एक अन्य लड़की के साथ मिलकर तीसरी लड़की को लात-घूंसों से पीटते हुए मोबाइल मांग रही है। वीडियो में 3 हजार रुपए में सौदे की बात भी की जा रही है।

हाईकोर्ट ने दिये पूनम हत्याकांड की एसआईटी जांच के आदेश

नैनीताल, 4 सितंबर 2018। उत्तराखंड उच्च न्यायालय की कार्यकारी मुख्य न्यायधीश राजीव शर्मा व न्यायमूर्ति मनोज कुमार तिवारी की खंडपीठ ने बीती 28 अगस्त को हल्द्वानी में हुए पूनम पांडे हत्याकांड के मामले में राज्य सरकार को एसआईटी गठित कर जांच करने और जांच रिपोट कोर्ट में पेश करने को कहा है। खंडपीठ ने इस बाबत विभिन्न समाचार पत्रो में छपी खबरों से संज्ञान में लेते हुए ‘इन द मैटर ऑफ ब्रूटल मर्डर ऑफ वूमन ब्रूटली विद हर डॉटर एंड डिकोयटी इन हर हाउस’ के रूप में जनहित याचिका दर्ज के रूप में दर्ज कर लिया है। साथ ही खंडपीठ ने बढ़ती वारदातों को देखते हुए हल्द्वानी में पुलिस फोर्स बढ़ाने के लिए भी कहा है।

हल्द्वानी के चर्चित हत्याकांड कांड मामले में चश्मदीद से दुष्कर्म के आरोपित खोलने लगे राज !

हल्द्वानी, 6 अक्तू्बर 2018। हत्याकांड की एक मात्र चश्मदीद गवाह के साथ हत्याकांड से पहले किए गए गैंगरेप के आज दबोचे गए आरोपियों ने पुलिस के सामने कई राज खोले हैं। उन्होंने पुलिस को बताया कि किस तरह से यह घटनाक्रम हुआ था। इसके अलावा शहर के कई अन्य सफेद पोशों के नाम भी पुलिस के सामने आए हैं जिन्हें पुलिस हत्याकांड की जांच में अपने रडार पर लेने की सोच रही है।

हत्याकांड की एक मात्र चश्मदीद गवाह के साथ हत्याकांड से पहले किए गए गैंगरेप के आज दबोचे गए आरोपियों ने पुलिस के सामने अपना अपराध स्वीकार कर लिया है। उन्होंने पुलिस को बताया कि अमित रावत ने लड़की को पढ़ाई के बहाने घर पर बुलाया था। इसके बाद शीतल पेय में नशे की दवाई खिला कर उन्होंने उसके साथ न सिर्फ रेप किया बल्कि उसकी वीडियो भी बनाई थी। लड़की इस तरह का बयान पहले ही दे चुकी है। अब पुलिस ने दावा किया है कि पूछताछ में दोनों युवक टूट गए और उन्होंने अपना अपराध स्वीरकार कर लिया।

यह भी पढ़ें : हल्द्वानी के हाईप्रोफाइल हत्याकांड की गवाह के साथ गैंगरेप, मुख्य आरोपी गिरफ्तार, 2 और की तलाश

हल्द्वानी, 1 अक्टूबर। हल्द्वानी के बीते माह घटित एक बहुचर्चित हत्याकांड के मामले में एक नया मोड़ आता नजर आ रहा है। मामले की गवाह के साथ करीब साढ़े तीन महीने पहले हल्द्वानी में सामूहिक बलात्कार किये जाने की पीड़िता की तहरीर पर कोतवाली पुलिस ने मामला दर्ज करके तीन में से एक, फ़ौज में जाने की तैयारी कर रहे मुख्य आरोपी को गिरफ्तार भी कर लिया है, जबकि शेष दो आरोपियों की तलाश की जा रही है। मामले की जांच उप निरीक्षक प्रीति सिंह को सोंपी गयी है।
मामले में पीड़िता ने रविवार मध्य रात्रि हल्द्वानी कोतवाली पहुंच कर तहरीर दी है। तहरीर के अनुसार पीड़िता को जज फार्म निवासी अमित रावत नाम के युवक ने फोन करके घर पर दो अन्य लड़कियों के साथ ग्रुप डिस्कशन करने के बहाने बुलाया था। लेकिन जब वह अमित के घर पहुंची तो वहां लड़कियों की जगह दो अन्य लड़के भी अमित के साथ थे। बातचीत के बीच युवकों ने उसे कोल्डड्रिंक में संभवतया नशीला पदार्थ पिला दिया, और उसकी अर्द्धबेहोशी की हालत का लाभ उठाकर तीनों युवकों ने उसके साथ सामूहिक बलात्कार किया। साथ ही इसकी वीडियो भी बनाई, और आगे इस बारे में किसी को बताने पर वीडियो को वायरल करने की धमकी भी दी। इस बीच पीड़िता के घर में हादसा हो गया और इसके तुरंत बाद ही यह वीडियो वायरल कर दिया गया। उल्लेखनीय है कि यह वायरल वीडियो पिछले दिनों हत्याकांड के बाद काफी चर्चा में भी रहा था। इससे पीड़िता के चरित्र पर भी सवाल उठे थे। तहरीर मिलने के बाद पुलिस ने इस मामले में मुकदमा दर्ज करने के बाद तुरंत कार्रवाई करते हुए मुख्य आरोपी अमित रावत को गिरफ्तार कर लिया। जबकि दो अन्य आरोपी मंगलम शर्मा उर्फ मान शर्मा और शिवांश चौहान की गिरफ्तारी के लिए दबिशें दी जा रही हैं। आगे देखने वाली बात यह भी है कि बलात्कार कांड का हत्याकांड से कोई सीधा संबंध है अथवा नहीं।

खुलासा: फुफेरे भाई ने किया था हल्द्वानी में सोते हुए रस्सी से गला घोंटकर कत्ल

पुलिस की गिरफ्त में आरोपित।

हल्द्वानी, 12 सितंबर 2018। हल्द्वानी के नल बाजार क्षेत्र में  10 सितंबर को चाय की दुकान चलाने वाले 23 वर्षीय युवक मनोज कुमार उसके हीरा नगर स्थित आवास पर बिस्तर पर लाश बरामद हुई थी। बृहस्पतिवार को हल्द्वानी पुलिस ने दो दिन में ही मामले का खुलासा करते हुए दावा किया कि मृतक के बुआ के लड़के यानी फुफेरे भाई उमेश कश्यप ने ही सोते हुए सुतली से गला घोंटकर उसकी हत्या की थी। उसे हीरा नगर चौकी प्रभारी निर्मल लटवाल व त्रिभुवन जोशी, पंचानन मंडल, प्रमोद भट्ट, चंदर सिंह व चंदन नेगी आदि आरक्षियों ने सर्विलांस आदि की मदद से गिरफ्तार कर पुलिस ने प्रेस के समक्ष पेश किया। आरोपित ने मृतक का पर्स, आधार कार्ड व बिजली के बिल के अलग से रखे गये 2950 रुपए आदि भी बरामद किये गये हैं। पुलिस के अनुसार हत्या संपत्ति के विवाद में की गयी।

रक्षाबंधन पर ससुराल से गायब मिली विवाहिता, अब जंगल में मिलीं अस्थियां

मृतका

नैनीताल, 1 सितम्बर 2018। उत्तराखंड के ऊधमसिंह नगर जिले के गदरपुर क्षेत्र में एक विवाहिता के साथ रक्षाबंधन के दिन अपने भाइयों व मायकेवालों की राह तक रही एक विवाहिता के साथ उसके पति व सास-ससुर ने जो किया, उसके बाद उन्हें ऊपरवाला भी कभी माफ नहीं करेगा। गदरपुर के ग्राम कुआखेड़ी निवासी नसीब कौर रक्षाबंधन के दिन अपनी पोती अमन कौर से मिलने उसकी प्रेमनगर स्थित ससुराल गयी। वहां अमन तो मिली नहीं, उल्टे उसके ससुरालियों ने कह दिया कि वह 4 तोले सोना और 12 हजार की नगदी लेकर घर से बिना बताए चली गई है। इस पर नसीब कौर को यकीन नहीं हुआ और उसने थाने में तहरीर देकर पुलिस से कार्रवाई की मांग की। लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। इस पर वह परिजनों के साथ जिले के एसएसपी डा. सदानंद दाते से मिली। एसएसपी के निर्देशों पर पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू की, और महिला के पति , सास, ससुर  को हिरासत में लेकर कड़ी पूछताछ की। थानाध्यक्ष ललित मोहन जोशी के अनुसार दो दिन की कड़ी पूछताछ के बाद परिजनों ने अमन की हत्या की बात स्वीकार करते हुए बताया कि उन्होंने उसका शव बन्ना खेड़ा के जंगल में जला दिया है। उनकी निशानदेही पर पुलिस ने शनिवार की सुबह बन्ना खेड़ा के जंगल में मृतक की अस्थियां बरामद कर ली हैं। मृतका का 6 वर्ष पूर्व ही विवाह हुआ था। पति-पत्नी दोनों का नाम अमन है।

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  • पिछले 30 जून से लापता थी मृतका, लाश मिलने से पूरे  पूरे क्षेत्र में फैली सनसनी तहसीलदार सहित राजस्व कर्मी पहुंची मौके पर
  • शव को कब्जे में लेकर पीएम के लिए भेजा हल्द्वानी, पिता की नामजद रिपोर्ट पर एक युवक को किया गिरफ्तार
  • 8 दिन से थी लड़की गायब,  बीते दिवस उपजिलाधिकारी धारी के यहां दर्ज कराई गुमशुदगी की रिपोर्ट
मृतका उर्मिला की फाइल फोटो

दान सिंह लोधियाल, धानाचूली । धारी तहसील के सरना में एक युवती गांव के ही मंदिर में लटकी मिलने से पूरे क्षेत्र में सनसनी फैल गयी है। सूचना मिलने पर तहसीलदार धारी राजस्व टीम के साथ घटना स्थल पर पहुँच कर पंचनामा भर कर शव को कब्जे में लेकर पीएम के लिए हलद्वानी भेज दिया गया। उधर मृतक के पिता ने राजस्व पुलिस में नामजद तहरीर दी, जिसमे गांव के ही एक युवक को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया। मामला प्रेम प्रसंग से जोड़ा जा रहा है। मामले की राजस्व पुलिस ने जांच शुरू कर दी है।

मन्दिर के पास जमा भीड़।

राजस्व पुलिस से मिली जानकारी के अनुसार धारी तहसील के सरना ग्राम पंचायत के तोक कनर्खा के गुरु गोरखनाथ मंदिर में उर्मिला आर्या (24) पुत्री चन्दलाल निवासी सरना मन्दिर की बल्ली से लटकी मिली। उपनिरीक्षक ललित मोहन जैड़ा ने बताया मन्दिर के पास से गुजर रहे गांव के ही नवीन चन्द्र पुत्र प्रेमराम ने मंदिर से आ रही बदबू से खिड़की से झांक कर देखा तो वहां एक लाश लटकी दिखी। जिसकी सूचना गांववालों को दी। राजस्व पुलिस ने उर्मिला के शव को बाहर निकाला, लाश में कीड़े तक पड़ चुके थे और बदबू आ रही थी। लाश करीब एक हप्ता पुरानी बताई जा रही है। उर्मिला पिछले 30 जून से लापता थी। बीते शुक्रवार को उसके पिता चंद्र लाल ने उपजिलाधिकारी रेखा कोहली के यहाँ उसकी गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज की थी। इधर मन्दिर का दरवाजा बाहर से बंद किया गया था। जिससे आत्महत्या है या हत्या यह मामला पेचीदा हो गया है। राजस्व पुलिस दोनों को मान जाँच में जुट गई है।

इस पुराने मंदिर के भीतर मिली लाश, बाहर से बंद था मंदिर

गांव में अलग अलग तरह के कयास लगाए जा रहे है। वही मंदिर की अशुद्धि का भी मामला बन गया है। जिसको लेकर की कई तरह की बाते होने लगी है। वही मृतका के पिता चंद्रलाल ने गांव के ही  विनोद कुमार 26 पुत्र स्व. प्रेमराम के खिलाफ नामजद रिपोर्ट दर्ज की। जिस पर राजस्व पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया है। उसकी गिरफ्तारी को प्रेमप्रसंग से जोड़ कर देखा जा रहा है। तहसीलदार नवाजिश खलीक ने बताया हत्या है या आत्महत्या इसका खुलासा पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही पता चल पाएगा। इस मौके पर उपनिरीक्षक हेम पलडिया, ललित मोहन जैड़ा, चन्द्रा नाथ, अनुसेवक  गंगा दत्त उप्रेती आदि थे।

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राष्ट्रीय सहारा, 20 फ़रवरी 2018

मुख्य आरोपित पहले ही दोषमुक्त घोषित, अब कालाढुंगी कांड में सरकार के 56 लोगों से मुकदमे वापस लेने का शासनादेश हाईकोर्ट ने किया स्वीकार

आठ वर्षों बाद साफ हुआ मुकदमे वापस लेने का रास्ता
-2012 में खंडूड़ी सरकार ने जारी किया था मुकदमे वापस लेने का शासनादेश
नवीन जोशी, नैनीताल। 22 अगस्त 2009 को कालाढूंगी थाने में सत्तारूढ़ भाजपा के नेता, कोटाबाग के तत्कालीन ब्लॉक प्रमुख व ब्लॉक प्रमुख संगठन के तत्कालीन प्रदेश अध्यक्ष बलवंत कन्याल की पुलिस कोतवाली में थाना प्रभारी, इंस्पेक्टर और अन्य पुलिसकर्मियों की मौजूदगी में गोली मार कर हत्या कर दी गयी। कन्याल के गांववालों ने अपनी आँखों से देखा, घटना के तत्काल बाद थाने के पुलिसकर्मी अपने हाथों से कोतवाली के बरामदे में मौजूद कन्याल के खून को धो रहे थे।  तब तक सीओ भी मौके पर पहुँच गए थे। हत्यारे को पुलिसकर्मियों ने दबोच लिया और हत्या में प्रयुक्त हत्यारे की लाइसेंसी रिवाल्वर को कोतवाली के मालखाने में जमा करा दिया। अगले दिन आक्रोशित ग्रामीणों ने थाने पर हमला बोल दिया था। इस दौरान एक पुलिस हेड कांस्टेबल पूरन राम सिलकोटी की भी मौत हो गई थी और 7 पुलिसकर्मी घायल हो गए। सीओ के हमराह पुलिसकर्मी की कार्बाइन छीनने का भी प्रयास हुआ।तत्कालीन डीएम-एसएसपी शुरू में कालाढूंगी जाने की हिम्मत नहीं जुटा पाए थे। मामले में कुल तीन मुकदमों में 15 लोगों की नामजद करते हुए कुल 500 लोगों के खिलाफ मुकदमे दर्ज किये गये थे। इस बीच 24 अगस्त को हत्यारोपी नीरज तिवारी को नैनीताल में जीजीआईसी से कलक्ट्रेट के मार्ग से उसके ही मालखाने में जमा बतायी गयी लाइसेंसी रिवाल्वर के साथ गिरफ्तार किया गया। जबकि पुलिस की पूरी तरह झोलयुक्त झूठी कहानी निचली अदालत में टिक नहीं पाई, और हत्यारोपी सहित थाना प्रभारी बाइज्जत बरी हो गये। जबकि दूसरी ओर इधर मृतक ब्लॉक प्रमुख कन्याल की वृद्ध मां कलावती देवी, ताई खीमा देवी, बहन इंदिरा देवी, खुशाल सिंह व किशोर सिंह सहित 56 लोग दर्ज मुकदमों में गिरतार हुए, और उन्हें उच्च न्यायालय से बमुश्किल जमानत मिली। मुकदमे वापस करने की मांग पर ग्रामीणों का लंबा जनांदोलन चला। मामले में तत्कालीन एडीजी लॉ एंड ऑर्डर सत्यव्रत बंसल ने घटना में पुलिस की चूक स्वीकार की। 2012 में तत्कालीन खंडूड़ी सरकार ने जनहित में इन 56 लोगों से मुकदमे वापस लेने का शासनादेश जारी किया, किंतु निचली अदालत ने सरकार के इस आदेश को खारिज कर दिया। इसे पीड़ितों ने उच्च न्यायालय में चुनौती दी। इधर उच्च न्यायालय की न्यायमूर्ति वीके बिष्ट की एकलपीठ ने मामले के विभिन्न पहलुओं को देखते हुए सरकार के शासनादेश को स्वीकार कर लिया है। इससे पूर्व इसी मामले में 14 गैंगस्टर के आरोपियों से भी मुकदमे वापस हो चुके हैं। इस प्रकार आरोपित सभी ग्रामीण भी निर्भय हो गए हैं। लेकिन इसके साथ ही कालाढूंगी काण्ड ऐसा उदाहरण भी बन गया है, जिसमें सत्तारूढ़ दल के ब्लॉक प्रमुख व ब्लॉक प्रमुख संगठन के तत्कालीन प्रदेश अध्यक्ष की हत्या, प्रदेश में पहली बार एक थाने के फूंके जाने व एक पुलिस हेड कांस्टेबल की भी मौत और 7 पुलिसकर्मियों के घायल होने के बावजूद किसी को सजा नहीं मिली। 

इधर उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने ब्लॉक प्रमुख बलवंत कन्याल की हत्या के बाद गुस्साये ग्रामीणों की भीड़ के द्वारा हमला, आगजनी व प्रमोटी हेड कांस्टेबल की हत्या करने के मामले में 56 लोगों से जनहित में मुकदमा वापस लेने के सरकार के फैसले को स्वीकार कर लिया है। उल्लेखनीय है कि इस मामले में तत्कालीन खंडूड़ी सरकार ने जनहित में इन लोगों से मुकदमे वापस लेने का शासनादेश जारी किया था, किंतु निचली अदालत ने सरकार के इस आदेश को खारिज कर दिया था, जिसे पीड़ितों ने उच्च न्यायालय में चुनौती दी थी। इधर उच्च न्यायालय की न्यायमूर्ति वीके बिष्ट की एकलपीठ ने मामले के विभिन्न पहलुओं को देखते हुए सरकार के शासनादेश को स्वीकार कर लिया है।

उल्लेखनीय है कि 22 अगस्त 2009 को कालाढुंगी थाने के भीतर तत्कालीन कोटाबाग के ब्लॉक प्रमुख की हत्या कर दी गयी थी, जिसकी प्रतिक्रियास्वरूप अगले दिन यानी 23 अगस्त 2009 को ग्रामीणों ने कालाढूंगी थाने पर हमला बोल दिया था। इस दौरान एक पुलिस हेड कांस्टेबल पूरन राम सिलकोटी की भी मौत हो गई थी और 7 पुलिसकर्मी घायल हो गए थे। मामले में परिवहन निगम की ओर से सड़क को जाम कर परिवहन निगम की बस में आग लगाने व तोड़फोड़ के आरोप में धारा 143, 336 व 423 के तहत, दरोगा एसएस रावत की ओर से सड़क जाम करने और पुलिस टीम के साथ मारपीट करने, धारदार हथियार से हमला करने व सीओ की कार्बाइन छीनने तथा कालाढूंगी थाना पुलिस की ओर से थाने में आगजनी, लूटपाट व प्रमोटी हेड कांस्टेबल पूरन राम सिरकोटी की हत्या करने व दजर्नों वाहनों में आग लगाने के आरोप लगाते हुए कुल तीन मुकदमों में 15 लोगों की नामजद करते हुए कुल 500 लोगों के खिलाफ मुकदमे दर्ज किये गये थे। इस पर ग्रामीणों का लंबा जनांदोलन भी चला था। मामले में तत्कालीन एडीजी लॉ एंड ऑर्डर सत्यव्रत बंसल ने घटना में पुलिस की चूक स्वीकार की थी। आगे पुलिस की कमजोर पैरवी से कन्याल की हत्या के आरोपित नीरज तिवारी भी न्यायालय से बाइज्जत बरी हो गये। वहीं मृतक ब्लॉक प्रमुख की वृद्ध मां कलावती देवी व बहन इंदिरा देवी सहित 56 लोग मामले में गिरतार हुए थे, और उन्हें उच्च न्यायालय से बमुश्किल जमानत मिली थी। बहरहाल, आखिर उच्च न्यायालय के आदेशों से ग्रामीणों से मुकदमे वापस लिये जाने का रास्ता साफ होने को मामले की पैरवी कर रहे युवा भाजपा नेता रवि कन्याल ने स्थानीय सांसद भगत सिंह कोश्यारी के प्रयासों का परिणाम बताते हुए खुशी जताई, और कहा कि इससे क्षेत्र में बड़ी राहत के साथ हर्ष का माहौल है।

पूर्व आलेख : तिवारी ने नहीं तो फिर किसने मारा बलवन्त को ?

तिवारी व बलवन्त के बीच पुलिस ही थी मौजूद, तार-तार हुईं पुलिस की झोल युक्त कहानी

नवीन जोशी, नैनीताल। 22 अगस्त 2009 की रात्रि प्रदेश के इतिहास में काले शनवार की  रात्रि के रूप में दर्ज है, जब प्रदेश में पहली बार पुलिस थाने के भीतर सत्तारूढ़ दल के ब्लाक प्रमुख के साथ ही ब्लाक प्रमुख संगठन के प्रदे अध्यक्ष पद पर मौजूद बलवन्त कन्याल की हत्या हो गई। घटना के दौरान आरोपी व मक्तूल के अलावा कोई मौके पर था तो केवल पुलिस ही मौके पर थी। पुलिस ने इस अति महत्वपूर्ण मामले में हत्याकाण्ड के चश्मदीद गवाह व वादी के धारा 164 के तहत मजिस्ट्रेट के समक्ष बयान कराने जैसी सामान्य सावधानी भी नहीं बरती, जिसके परिणामस्वरूप गवाहों के मुकरने व पुलिस की कहानी के झोल से हत्याकाण्ड का मुख्य आरोपी न्यायालय से दोषमुक्त करार दे दिया गया, जबकि इसी मामले में ऊपरी अदालत ने उसे जमानत देने लायक भी नहीं समझा था। ऐसे में सवाल फिर उठ खड़ा हुआ कि तिवारी ने नहीं तो फिर किसने ब्लाक प्रमुख की हत्या की। क्या हत्यारों को कभी सजा मिल पाऐगी ? ऐसे जघन्य हत्याकाण्ड के बाद भी हमारी व्यवस्था में कालाढुंगी थाने की सुरक्षा दीवार काण्टेदार तार से घेरने के अलावा कोई बदलाव नहीं दिखता। घटनाकाण्ड के समय मौजूद अधिकारी पुन: व्यवस्था में लौट आऐ हैं। उनका बाल-बांका भी नहीं हुआ

बलवन्त कन्याल की हत्या से प्रदेश की कानून व्यवस्था की कई तरह से कलई खुलती चली गई है। शुरू से आरोपों को याद करें, तो पता चलता है कि घटना के तुरंत बाद कालाढूंगी के स्थानीय लोगों के सामने पुलिस कर्मी थाने के बरामदे को धो रहे थे, जबकि कन्याल की लाश वहीं पडी थी, यानी पुलिस पर साक्ष्य छुपाने का मुकदमा दर्ज होना चाहिए था, पर हुआ नहीं प्रदे की एसटीएफ द्वारा 22 अगस्त की रात्रि ही देहरादून जेल में बन्द एक अपराधी द्वारा इस घटना की प्रतिक्रिया में कालाढुंगी थाने को फूंकने के निर्देश स्थानीय नेताओं को दिये गऐ, बावजूद पुलिस थाना फूंकने की घटना को नहीं रोक पाई। अब कन्याल हत्याकाण्ड की तफ्तीश व विवेचना में पुलिस कर्मियों की ‘कहानी बनाने की कला’ न्यायालय में तार-तार हो गई है। मामले की विवेचना में कालाढुंगी थाने के तत्कालीन थाना प्रभारी राम कुमार सकलानी का कहना है कि 22 अगस्त की रात्रि करीब साढ़े दस-पौने ग्यारह बजे जब थाने के बरामदे में नीरज ने बलवन्त को अपने लाइसेंसी रिवाल्वर से गोली मारी, उसने (सकलानी ने) नीरज को दबोच लिया व उसका रिवाल्वर जब्त कर माल खाने में जमा करा दिया। वहीं थाने के दरोगा अनिल शाह के अनुसार उसने मुखबीर की सूचना पर नीरज को 24 अगस्त को नैनीताल में जीजीआईसी से कलक्ट्रेट के मार्ग से लाइसेंसी रिवाल्वर के साथ गिरफ्तार किया। यदि यह मान भी लें कि नीरज थाने से पुलिस गिरफ्त से भाग गया था तो भी पुलिस के पास इस विरोधाभास का कोई जवाब नहीं है कि जब एक रिवाल्वर माल खाने में जब्त करा लिया गया था तो फिर वही रिवाल्वर कैसे नीरज के पास से नैनीताल में बरामद किया गया। 

उल्लेखनीय है, मामले में 16 लोगों की गवाही हुई। इस दौरान हत्या की प्राथमिकी दर्ज कराने वाले दिवंगत बलवन्त कन्याल के जीजा वादी शेर सिंह कनवाल सहित पांच गवाह पुलिस की केस डायरी में दर्ज बयानों से पूरी तरह मुकर गऐ। कनवाल ने कमोबे घटना से ही इंकार कर दिया। इस प्रकार गवाहों के ‘होस्टाइल (पक्षद्रोही)’ यानी बयानों से मुकरने व आरोपी की गिरफ्तारी पर विरोधाभास के मद्देनज़र न्यायालय ने तिवारी को उस पर बलवन्त कन्याल की हत्या के आरोप में आईपीसी की धारा 147, 148, 504 व 302 के तहत लगाऐ गऐ आरोपों से मुक्त कर दिया। (हांलांकि यह भी गौरतलब है कि शेष 11 गवाह अपने बयानों से नहीं मुकरे थे, पर न्यायालय ने उनके बयानों पर संज्ञान ……… लिया, यह अदालत ही बेहतर जानती होगी) मामले की विवेचना पुलिस निरीक्षक गंगा सिंह  व महेन्द्र सिंह नेगी द्वारा की गई थी। 

उल्लेखनीय है मामले में थाना प्रभारी सकलानी भी गिरफ्तार किऐ गऐ थे, जमानत मिलने के दौरान उसने तत्कालीन सीओ (वर्तमान एएसपी, नैनीताल) हरीश चन्द्र सती को वास्तविक दोषी ठहराया था, लेकिन सकलानी और सती दोनों वर्तमान में पूर्व की तरह पुलिस की ड्यूटी कर रहे हैं। अन्य अधिकारियों पर भी कोई प्रभाव नहीं पड़ा। जबकि  घटना की प्रतिक्रिया में उत्तेजित भीड़ ने एक पुलिस कर्मी सहित थाने को फूंक डाला। यानी जब थाने में सत्तारूढ़ दल के बड़े नेता की हत्या हो रही थी, पुलिस कर्मी मर रहा था व थाना फुंक रहा था, अफसर स्वयं को बचाने की जुगत में लगे हुऐ थे, और उनका बाल-बांका हुआ भी नहीं। कन्याल की हत्या में ही सहआरोपी बताया गया नीरज तिवारी का दोस्त नीरज हर्बिल अभी जमानत पर है, आरोप मुक्त नहीं हुआ है। 

यह भी गौरतलब है कि बलवन्त की हत्या की प्राथमिकी दर्ज कराने वाला व नीरज के दोषमुक्त होने में ‘होस्टाइल’ होकर प्रमुख भूमिका निभाने वाला उसका जीजा शेर सिंह कनवाल घटना के अगले दिन हुई थाना फूंकने की घटना में स्वयं भी आरोपित था। वह नीरज के साथ ही नैनीताल जेल में रहा, और कमोबेश बलवे के अन्य पांच दर्जन आरोपितों, जिनमें एक दर्जन से अधिक बच्चे भी शामिल थे, से पहले जमानत पर रिहा हुआ। जबकि कई अब भी जेल में हैं, और आरोपों से मुक्ति किसी को नहीं मिल पाई है। चर्चाएँ आम हैं कि जेल में कनवाल का “खर्चा” नीरज ने ही उठाया, उसे जमानत दिलाने में भी सहयोग दिया। नीरज के परिवार द्वारा अभी हाल में करीब एक करोड़ रुपये में जमीन बेचे जाने की चर्चाएँ भी आम हैं। इस प्रकार पूरी कहानी साफ़ हो जाती है। न्यायिक हलकों के लोग तो न्यायपालिका को भी “बेदाग़” नहीं बता रहे।  इस बाबत पुलिस की भूमिका पर पूछे जाने पर एसएसपी मोहन सिंह बनंग्याल का कहना था कि न्यायालय का आदेश पढ़ने के बाद ही वह कोई प्रतिक्रिया करेंगे।

यहाँ यह सवाल भी उठता है कि जब सत्ताधारी दल के एक जनप्रतिनिधि की पुलिस थाने में हत्या होने के बावजूद हत्यारों को सजा दूर, उनकी पहचान भी नहीं हो पाती, ऐसे में आम राज्यवासी का जीवन कितना सुरक्षित है

पुलिस सहित सबके सहयोग से मिली सफलता: नंदिता

नीरज तिवारी को न्यायालय से दोषमुक्ति का आदे मिलने के दौरान उसकी बहन नंदिता भट्ट, बड़े भाई दीपक तिवारी के साथ ही भाई नरे व मयंक, जीजा गणे भट्ट व गोपाल र्मा न्यायालय परिसर में ही मौजूद थे। नंदिता ने भाई की रिहाई को देर से मिली न्याय की जीत करार दिया। उसका कहना था कि पुलिस सहित सभी ओर से मिले सहयोग के कारण यह सम्भव हो पाया। नंदिता पुलिश को सहयोग के लिए आभार ज्ञापित कर रही हैं तो यह गलत भी नहीं है, आखिर पुलिस ने कहानी में कमजोरी छोड़ने सहित कई मोर्चों पर उनकी मदद जो की है ।

यानी कालाढुंगी से विधायकी की फिराक में है नीरज !

ब्लाक प्रमुख बलवन्त कन्याल की हत्या के आरोपों से न्यायालय द्वारा बेदाग करार दे दिऐ गऐ नीरज तिवारी ने आगे गैर राजनीतिक संगठन बनाने तथा कालाढुंगी काण्ड की चपेट में आऐ लोगों की लड़ाई लड़ने का ऐलान किया है। हत्याकाण्ड के आरोपों से पूर्व बसपा के युवा जिलाध्यक्ष रहे (वर्तमान में कांग्रेस नेता) नीरज ने घर पहुँचते ही पत्रकारों से बातचीत में कहा कि उन्हें न्यायपालिका पर शुरू से पूरा विश्वास था, जो आज न्याय की जीत के साथ और पुख्ता हो गया है। कहा कि कालाढुंगी थाना फूंकने के आरोपों में दर्जनों लोग परेशानी झेल रहे हैं। वह गैर राजनीतिक संगठन का गठन कर सरकार पर ऐसे लोगों पर लगे मामले वापस लेने के लिए दबाव बनाएंगे। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार नीरज कालाढूंगी से विधायकी की फिराक में है, और कोई आश्चर्य नहीं वह इसमें सफल भी हो जाए।

फिर खुलेगी कन्याल हत्याकांड की फाइलें, रिकार्ड हाईकोर्ट में तलब

 नैनीताल, 28 अप्रैल। बहुचर्चित बलवंत कन्याल हत्याकांड को लेकर दायर याचिका के आधार पर उच्च न्यायालय ने निचली अदालत से रिकार्ड तलब किए हैं। यह याचिका जिला एवं सत्र न्यायाधीश नैनीताल के फैसले के खिलाफ बलवंत की पत्नी दीपाली ने दाखिल की है। मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति पीसी पंत और न्यायमूर्ति सर्वेश कुमार गुप्ता की पीठ में हो रही है। उल्लेखनीय है कि कालाढूंगी पुलिस थाने में बलवंत कन्याल की हत्या कर दी गई थी। पुलिस ने इस हत्या के लिए बसपा नेता नीरज तिवारी को जिम्मेदार ठहराया था। पुलिस ने नीरज तिवारी के खिलाफ पुख्ता सबूत होने का दावा किया था। गत 11 मार्च को जिला एवं सत्र न्यायालय नैनीताल ने मुख्य आरोपी नीरज तिवारी को बाइज्जत बरी कर दिया था। निचली अदालत के इस फैसले को कन्याल की पत्नी दीपाली ने हाईकोर्ट में चुनौती दी थी।

कन्याल हत्याकांड में थानेदार भी दोषमुक्त

 नैनीताल। ब्लाक प्रमुख संगठन के प्रदेश अध्यक्ष बलवंत सिंह कन्याल की हत्या के मामले में थानेदार राम कुमार सकलानी को जिला न्यायालय ने दोषमुक्त करार दे दिया है। मुख्य आरोपित नीरज तिवारी पहले ही दोषमुक्त करार दिया जा चुका है। 22 अगस्त 2009 की रात को घटित हुए प्रदेश के इस बहुचर्चित हत्याकांड में भाजपा नेता व ब्लाक प्रमुख संगठन के प्रदेश अध्यक्ष बलवंत कन्याल की कालाढूंगी थाने में गोली मार कर हत्या कर दी गई थी। इस घटना के प्रत्युत्तर में अगले दिन कालाढूंगी थाना उत्तेजित लोगों ने फूंक दिया गया था। इस मामले में थानेदार सकलानी पर आरोप था कि उसने कन्याल की हत्या की रिपोर्ट नहीं लिखी। उसने घटनास्थल थाने की बजाय अन्यत्र दिखाने का प्रयास किया व थाने में कन्याल के रक्त को धोकर साक्ष्य छिपाने का प्रयास किया। सकलानी के विरुद्ध मुकदमा दर्ज हुआ था। मामले में थानेदार पूर्व से ही जमानत पर चल रहा था।
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मेरा जन्म 26 नवंबर 1972 को हुआ था। मैं नैनीताल, भारत में मूलतः एक पत्रकार हूँ। वर्तमान में मार्च 2010 से राष्ट्रीय हिन्दी दैनिक समाचार पत्र-राष्ट्रीय सहारा में ब्यूरो चीफ के रूप में कार्य कर रहा हूँ। इससे पहले मैं पांच साल के लिए दैनिक जागरण के लिए काम कर चुका हूँ। कुमाऊँ विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग से ‘नए मीडिया’ विषय पर शोधरत हूँ। फोटोग्राफ़ी मेरा शौक है। मैं NIKON COOLPIX P530 और अडोब फोटोशॉप 7.0 के साथ फोटोग्राफी कर रहा हूँ। फोटोग्राफी मेरे लिए दुनियां की खूबसूरती को अपनी ओर से चिरस्थाई बनाने का बहुत छोटा सा प्रयास है। एक फोटो पत्रकार के रूप में मेरी तस्वीरों को नैनीताल राजभवन सहित विभिन्न प्रदर्शनियों में प्रस्तुत किया गया, तथा उत्तराखंड की राज्यपाल श्रीमती मार्गरेट अलवा द्वारा सम्मानित किया गया है। कुछ चित्रों को राष्ट्रीय-अंतर्राष्ट्रीय पुरस्कार भी प्राप्त हो चुके हैं। गूगल अर्थ पर चित्र उपलब्ध कराने वाली पैनोरामियो साइट पर मेरी प्रोफाइल को 18.85 Lacs से भी अधिक हिट्स प्राप्त हैं।पत्रकारिता और फोटोग्राफी के अलावा मुझे कवितायेँ लिखना पसंद है। काव्य क्षेत्र में मैंने नवीन जोशी “नवेन्दु” के रूप में अपनी पहचान बनाई है। मैंने बहुत सी कुमाउनी कवितायेँ लिखी हैं, कुमाउनी भाषा में मेरा काव्य संकलन उघड़ी आंखोंक स्वींड़ प्रकाशित हो चुका है, जो कि पुस्तक के के साथ ही डिजिटल (PDF) फार्मेट पर भी उपलब्ध होने वाली कुमाउनी की पहली पुस्तक है। मेरी यह पुस्तक गूगल एप्स पर भी उपलब्ध है। ’ यहां है एक पत्रकार, लेखक, कवि एवं छाया चित्रकार के रूप में मेरी रचनात्मकता, लेख, आलेख, छायाचित्र, कविताएं, हिंदी-कुमाउनी के ब्लॉग आदि कार्यों का पूरा समग्र। मेरी कोशिश है कि यहां नैनीताल, कुमाऊं, उत्तराखंड और वृहद संदर्भ में देश की विरासत, संस्कृति, इतिहास और वर्तमान को समग्र रूप में संग्रहीत करने की….। मेरे दिल में बसता है, मेरा नैनीताल, मेरा कुमाऊं और मेरा उत्तराखंड

2 thoughts on “तब पुलिसकर्मी को गोली मारी थी, अब गांव के युवक की कर दी पीटकर हत्या

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