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प्रधानमंत्री के बाद अब पलायन आयोग से लगाई गुहार, प्रशासनिक व न्यायिक प्रक्रिया पर लगाएआरोप

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नैनीताल। प्रशासनिक व्यवस्थाओं से त्रस्त मुख्यालय के टैक्सी वालों ने प्रधानमंत्री के बाद अब पलायन आयोग से गुहार लगाई है। टैक्सी-ट्रेवल एसोसिएशन के अध्यक्ष नीरज जोशी द्वारा पलायन आयोग के अध्यक्ष को लिखे पत्र में कहा गया है कि शिक्षा व पर्यटन के क्षेत्र में विश्व में अग्रणी स्थान रखने के बावजूद नगर के पर्यटन व्यवसायी बेरोजगारी तथा प्रशासनिक व न्यायिक प्रक्रिया के कारण पलायन को मजबूर हो रहे हैं। पत्र में कहा गया है कि नगर में पार्किंग व्यवस्था की कमी का हवाला देकर उच्च न्यायालय के द्वारा वाहनों के परमिट पर नैनीताल प्रतिबंधित की मोहर लगा दी गयी है। जिसके कारण नैनीताल जिले के सभी टैक्सी चालक व संचालक बेरोजगारी की कगार पर आ गये हैं। समस्या का समाधान न हुआ तो सभी पलायन को मजबूर होंगे। बताया कि देश के प्रधानमंत्री व कानून मंत्री तक शिकायत कर चुके हैं। प्रधानमंत्री कार्यालय ने मुख्य सचिव उत्तराखंड को इस समस्या का समाधान करने को कहा था, बावजूद शासन-प्रशासन के स्तर से कोई कार्रवाई नहीं की गयी। ज्ञापन की प्रतियां राज्यपाल, मुख्यमंत्री, परिवहन मंत्री, आरटीओ व डीएम नैनीताल को भी भेजी गयी हैं।
इधर शनिवार को ही टैक्सी-ट्रेवल एसोसिएशन को उनके द्वारा आठ मार्च को केंद्रीय परिवहन मंत्री नितिन गडकरी को भेजे पत्र का जवाब भी आ गया है, जिसमें सड़क, परिवहन व राजमार्ग मंत्रालय के संयुक्त सचिव (परिवहन) से उनके पत्र को कार्रवाई करने को कहा गया है।

प्रधानमंत्री के आदेशों पर भी हरकत में नहीं आ रही उत्तराखंड की भाजपा सरकार

-प्रधानमंत्री के निर्देशों के बावजूद कार्रवाई न होने पर भड़के टैक्सी वाले
-दी लोक सभा चुनावों के बहिस्कार व आमरण अनशन की धमकी, 5 सूत्रीय मांगों पर
नैनीताल। नगर के टैक्सी ट्रैवल्स एसोसिएशन ने आरोप लगाया कि उनके मांग पत्र पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के स्तर से राज्य के मुख्य सचिव को कार्रवाई के आदेश दिये गये, बावजूद उन्हीं की पार्टी की प्रदेश सरकार और प्रदेश का शासन-प्रशासन उनकी मांगों पर आंखें मूंदे बैठा है। ऐसे में वे आगामी अप्रैल माह में तल्लीताल गांधी मूर्ति के नीचे आमरण अनशन करेंगे, तथा इसके बाद भी कार्रवाई न होने पर आगामी लोक सभा चुनावों में आरटीओ को अपने वाहन उपलब्ध नहीं कराएंगे, और चुनाव का बहिस्कार भी कर सकते हैं।


एसोसिएशन ने गुरुवार को नगर में टैक्सी संचालन बंद रख कर तल्लीताल गांधी चौक में एकत्रित हुए, और धरना-प्रदर्शन किया। इस दौरान नैनीताल के लिए टैक्सी के परमिट पर रोक लगाने के प्रशासन के फैसले का पुरजोर विरोध किया। अध्यक्ष नीरज जोशी की अगुवाई में वक्ताओं ने टैक्सी चालकों के लिए टैक्सी के परमिट में नैनीताल को प्रतिबंधित करने का विरोध किया। कहा कि स्थानीय बेरोजगार किसी तरह टैक्सी के माध्यम से रोजगार कर रहे हैं। लेकिन प्रशासन के आदेश पर परमिट में रोक लगाने से वह इस कार्य से वंचित हो रहे हैं। प्रदर्शनकारियों ने उत्तराखंड के टैक्सी वाहनों से नैनीताल शहर में प्रवेश के प्रतिबंधित शब्द को हटाने, प्रत्येक शहर में निःशुल्क स्थाई स्टैंड की व्यवस्था करने, पर्यटक बसों को पूर्व की भांति एसटीए एक्ट के अनुसार शहर में प्रवेश देने की मांग की। इस मौके पर भवाली के नीरज अधिकारी, मनीष बिष्ट, भीमताल के कुर्बान जाफरी, काठगोदाम के विक्रम अधिकारी, रामनगर के एम सूठा, कालाढूंगी के चंदन, केएल आर्या आदि मौजूद रहे। आंदोलन को होटल एसोसिएशन, नाव चालक, नागरिक एकता मंच, फड़ कारोबारियों आदि ने भी समर्थन दिया।

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-सरोवनगरी में नये वर्ष के स्वागत की जगह भारी आक्रोश के साथ निकली जन आक्रोश रैली
नैनीताल। आज पार्किंग नहीं तो गाड़ी रुकवाते हो-कल गेहूं न होगा तो जहर दिलाओगे.., जाम तो एक बहाना है, अंग्रेजी शासन लाना है, रोडवेज बस शहर में आ सकती है तो पर्यटक बस क्यों नहीं, नैनीताल पर्यटन स्थल है-इसे पर्यटन स्थल रहने दो, हड़पो नहीं, नैनीताल में वीवीआईपी जमावड़ा क्यों, टैक्सी से नैनीताल प्रतिबंधित मोहर हटाओ, रोजी-रोटी पर तकरार-यह कैसा मौलिक अधिकार सरीखे नारे लिखी पट्टियों के साथ रविवार को नव वर्ष के स्वागत की जगह सरोवरनगरी ऐसे ही नारों से शाम ढलते गूंज उठी, और अंधेरा घिरने के साथ दिन में भी आंख मूंदे हुक्मरानों को रोशनी दिखाने को हाथों में मोमबत्तियां जल उठीं। लोग कदम से कदम मिलाते हुए गहरी नाराजगी के साथ मल्लीताल रामलीला मैदान से एकत्र होकर तल्लीताल तक आक्रोश के साथ गए और वापस लौटे। नैनीताल नागरिक मंच के तत्वावधान में आयोजित हुए इस प्रदर्शन में मल्लीताल व्यापार मंडल अध्यक्ष किशन सिंह नेगी, टैक्सी-ट्रेवल एसोसिएशन अध्यक्ष नीरज जोशी, होटल एसोसिएशन अध्यक्ष दिनेश साह, तल्लीताल व्यापार मंडल अध्यक्ष भुवन लाल साह, विवेक वर्मा, ओमवीर सिंह, नरेंद्र नैनवाल, महावीर बिष्ट, दर्शन भंडारी, चंदन जोशी, सोनू बिष्ट, जीवंती भट्ट, जीत सिंह आनंद, कैलाश अधिकारी, भाजपा नगर अध्यक्ष मनोज जोशी व त्रिभुवन फर्त्याल सहित बड़ी संख्या में नगर वासी शामिल रहे।

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यह भी पढ़ें : 4 महिलाओं सहित 6 फड़ वालों के खिलाफ बलवा समेत सात संगीन धाराओं में मुकदमा दर्ज

मल्लीताल स्थित पंत पार्क में फड़ लगाने वाली 4 महिलाओं सहित 6 फड़ वालों के खिलाफ के खिलाफ पुलिस ने बलवा सहित अन्य मामलों में भारतीय दंड संहिता की धारा 147, 186, 323, 504, 332, 353 व 309 के तहत मुकदमा दर्ज कर लिया गया है। नगर पालिका के अधिशाषी अधिकारी रोहिताश शर्मा की ओर से दी गई तहरीर पर कार्रवाई करते हुए मल्लीताल पुलिस ने , फड़ व्यवसायी नेता जमीर अहमद, दिनेश कुमार, रीना कश्यप पत्नी धर्मेंद्र, मीना देवी पत्नी करन, शायरा खानम उर्फ़ बबली पत्नी शईद-उल हसन व रूपवती पत्नी राजेंद्र सिंह के खिलाफ यह कार्रवाई की है।

उल्लेखनीय है कि एक दिन पूर्व फड़ वालों ने बृहस्पतिवार को पूरी तरह टकराव के मूड में आकर पालिका-प्रशासन व पुलिस बल की मौजूदगी में आत्मदाह की धमकी देकर फड़ लगाने की कोशिश की, जिसे प्रशासन ने सख्ती से नाकाम कर दिया।इस बीच प्रशासन एवं फड़ वालों के बीच जबर्दस्त धक्का-मुक्की भी हुई।  करीब 11 बजे  के नेता जमीर अहमद के आने के बाद फड़ वाले फड़ लगाने लगे। उन्हें रोकने का प्रयास किया गया तो उन्होंने स्वयं पर केरोसीन उड़ेलने का प्रयास किया। बीच बचाव में काफी मात्रा में केरोसीन एसआई बीसी मासीवाल की वर्दी में भी गिर गया। दैवयोग से आग लगने की घटना नहीं हुई। पुलिस ने जमीर को उठा कर अलग करने की कोशिश की, लेकिन फड़ वालों ने उसे छुड़ा लिया। इस बीच दोनों पक्ष आमने सामने आ गये। खासकर नगर पालिका के ईओ रोहिताश शर्मा फड़ वालों के निशाने पर रहे। महिला पुलिस कर्मियों की कमी के बीच महिला फड़ व्यवसायियों ने ईओ को बुरी तरह से घेर लिया। बाद में एक महिला फड़ व्यवसायी मीना, लीला व बबली आदि ने ईओ रोहिताश शर्मा के खिलाफ पुलिस कोतवाली में तहरीर देकर मारपीट, उनका सामान ले जाने व अभद्र व्यवहार करने के आरोप भी लगाए। मीना द्वारा पेट में चोट लगने की बात कहने पर अस्पताल भी ले जाया गया, हालांकि बाद में वह खुद ही अस्पताल से वापस पहुंचकर दुबारा फड़ लगाने का उद्यत दिखी। दिन भर चले इस ड्रामे-बवाल के बाद पहुंचे एडीएम हरबीर सिंह के पहुंचने और आगामी 26 फरवरी को नगर पालिका में सभी पक्षों की वेंडर जोन गठन के लिए बैठक आयोजित कर इसमें कोई निर्णय ले लिये जाने के आश्वासन के बाद मामला शांत हुआ।  इसके बाद एडीएम हरबीर सिंह के निर्देश पर ईओ रोहिताश शर्मा ने भी देर शाम कोतवाली में फड़ व्यवसायियों के खिलाफ तहरीर दी। इसमें कहा गया कि फड़ कारोबारियों ने पालिकाकर्मियों के साथ गाली-गलौज और धक्का-मुक्की की, तथा सरकारी काम में बाधा डालने, पालिका पर दबाव बनाने के लिए खुद पर मिट्टी तेल उड़ेल कर आत्मदाह का प्रयास भी किया गया।

30-40 को छोड़कर सभी फड़वाले बाहर व एक खास समुदाय के: ईओ
नैनीताल। विवाद से आक्रोशित नगर पालिका के ईओ रोहितोश शर्मा ने कहा कि फड़ व्यवसायी अपने अलग-अलग गुटों के बीच वर्चस्व की लड़ाई लड़ रहे और नगर पालिका को जबर्दस्ती बीच में ला रहे हैं। इनमें से 30-40 को छोड़कर अधिकांश यूपी के और एक खास समुदाय के हैं, कई महिला फड़ व्यवसायी भी बाहर विवाहित हो चुकी हैं। पूर्व में नगर पालिका कई बार फड़ व्यवसायियों को दुकानें देकर पुर्नवासित कर चुकी है, बावजूद कई दुबारा यहीं फड़ लगा रहे हैं। बावजूद नगर पालिका मानवता के नाते उन्हें पुर्नवासित करना चाहती है, इसके लिए नियमानुसार चिन्हीकरण की प्रक्रिया भी चल रही है। लेकिन नगर में इतनी संख्या में लोगों के लिए स्थान नहीं है। वैसे भी 2014 से उनकी अध्यक्षता में गठित समिति की उपसमिति में वेंडर जोन के लिए स्थान का सर्वसम्मति से चयन नगर के फड़ व्यवसायियों व व्यवसायियों को करना है। उच्च न्यायालय के आदेशों के क्रम में पंत पार्क से गुरुद्वारे तक के स्थान में किसी को भी फड़ लगाने की अनुमति नहीं दी जाएगी। भोटिया मार्केट के अतिक्रमण पर उन्होंने कहा कि इस संबंध में व्यवसायियों की ओर से उनके अतिक्रमण को नियोजित करने का प्रत्यावेदन प्राप्त हुआ है। इस नीतिगत मामले में पालिका बोर्ड की बैठक में विचार किया जाएगा।

हाईकोर्ट का आदेश हटाने का नहीं बसाने का: जमीर
नैनीताल। वहीं रेहड़ी पटरी हॉकर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष जमीर अहमद ने दावा किया कि सर्वोच्च न्यायालय के साथ ही उच्च न्यायालय का आदेश फड़ वालों को हटाने नहीं बसाने का है। इसके लिए नगर पालिका में 2014 से चल रही प्रक्रिया में कुछ भी कार्य नहीं हुआ है। इस कारण फड़ वालों के रोजगार का यह अंतिम विकल्प हाथ से जाने के बाद बुरे कार्यों में जाने की स्थितियां उत्पन्न हो गयी हैं, जो ठीक नहीं हैं। इसकी जिम्मेदारी प्रशासन की ही है।

वेंडर जोन में नगर के युवाओं को मिले प्राथमिकता
नैनीताल। शुक्रवार को नगर के युवाओं की तल्लीताल में हुई बैठक में कहा गया कि नगर में प्रस्तावित वेंडर जोन में नगर के स्थायी निवासी रोजगार विहीन युवाओं को प्राथमिकता मिलनी चाहिए। पूर्व छात्र संघ अध्यक्ष दीपक रुबाली ने कहा कि कुछ लोग कागजी खानापूरी के जरिये अपना हक जता रहे हैं। इस संबंध में सोमवार को डीएम से मिलकर अपने हक के लिए आवाज उठायी जाएगी। बैठक में पूर्व छात्र संघ उपाध्यक्ष योगेश बोरा, गौरव कुमार व पवन जाटव आदि ने भी इस बात को उठाया कि कई फड़ वालों के परिजन सरकारी नौकरियों अन्य रोजगार में हैं। कैलाश रौतेला, ललित आर्या, नवीन कुमार, सोनू, मो. गुलरेज, रमेश जोशी, मनोज कुमार, राजेंद्र बिष्ट व संतोष कुमार आदि भी शामिल रहे।

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  • अपराह्न तीन बजे से बाजार बंद किए, दूसरे दिन भी बाजार बंद रखकर सुबह 10 बजे मल्लीताल रामलीला मैदान में एकत्र होकर हाईकोर्ट कूच करने का किया ऐलान
  • हाईकोर्ट के आदेश के बावजूद नगर के मल्लीताल गुरुद्वारे से पंत पार्क तक के प्रतिबंधित क्षेत्र में फड़ लगने को लेकर जताया गया विरोध
घेराव के दौरान पालिका ईओ रोहिताश शर्मा की ओर अंगुली उठाकर बात करता व्यापारी।

नैनीताल। गत दिनों से नगर के व्यवसायियों की प्रशासन के आदेशों के खिलाफ चल रही नाराजगी, नए वर्ष की पूर्व संध्या (31 दिसंबर 2017) पर नैनीताल नागरिक मंच के बैनर तले जनाक्रोश रैली की कड़ी में बुधवार को व्यापार मंडल मल्लीताल व तल्लीताल की नाराजगी नगर पालिका के विरोध-प्रदर्शन के रूप में सामने आई। और आगे कमोबेश पूरे दिन नगर पालिका के सामने चले विरोध-प्रदर्शन के आखिर में मामला 3 जनवरी 2018 को अपराह्न तीन बजे से नगर की बाजारों को बंद करने और 4 जनवरी को सुबह 10 बजे मल्लीताल रामलीला मैदान में एकत्र होकर उच्च न्यायालय का कूच करने का ऐलान किया गया। आंदोलन की अगुवाई कर रहे मल्लीताल व्यापार मंडल अध्यक्ष किशन सिंह नेगी व तल्लीताल व्यापार मंडल अध्यक्ष भुवन लाल साह ने कहा कि प्रशासन उच्च न्यायालय के अतिक्रमण विरोधी अभियान के तहत केवल उन्हें निशाना बना रहा है, और उच्च न्यायालय के आदेशों के बावजूद फड़ वालों को नहीं हटा रहा है। इसलिए उच्च न्यायालय के कूच का निर्णय लिया गया है। उन्होंने पूछे जाने पर आज के आंदोलन का पूर्व के आंदोलनों से संबंध न होने का दावा भी किया।

इससे पूर्व बुधवार (3 जनवरी 2018) सुबह करीब 11 बजे ही नगर के व्यापारी नगर पालिका कार्यालय के सामने नारेबाजी करते हुए धमक आए। इस दौरान उन्होंने पालिका के अधिशासी अधिकारी रोहिताश शर्मा को ज्ञापन सोंपा, और पहले उनका करीब एक घंटे, और बाद में संयुक्त मजिस्ट्रेट अभिषेक रुहेला एएसपी हरीश चंद्र सती आदि का भी काफी देर घेराव किया। ज्ञापन में उनका कहना था कि वह कई वर्षों से और इधर नैनीताल क्लब में हुई बैठक में भी अवैध अतिक्रमणकारी फड़ वालों को हटाने की मांग प्रशासन के साथ कोर्ट कमिश्नर को भी कह चुके हैं। लेकिन इस पर कार्रवाई करने की जगह उल्टे प्रशासन द्वारा व्यवसायियों को रोड से सामान हटाने के लिए भारी जुर्माना लगाने की धमकी दी जा रही है।
इसके बाद ईओ ने पुलिस बल की मौजूदगी में फड़ हटाने निकले, जहां फड़ वालों ने उन पर व्यापारियों के दबाव में कार्य करने का आरोप लगाते हुए विरोध किया, और आगे स्वयं फड़ हटाने की बात कही। वहीं बाद में अपराह्न तीन बजे के बाद संयुक्त मजिस्ट्रेट अभिषेक रुहेला एएसपी हरीश चंद्र सती आदि के साथ व्यापारियों से वार्ता करने पहुंचे, लेकिन व्यापारियों ने प्रशासन पर दबाव में कार्य करने का आरोप लगाते हुए वार्ता नहीं की, और घेराव कर दिया। समाचार लिखे जाने तक व्यापारी कल बाजार बंद व हाई कोर्ट कूच करने के लिए बाजार में लाउड स्पीकर से घोषणा कर रहे हैं। प्रदर्शन करने वालों में व्यापारी नेता कमलेश ढोंडियाल, सोनू बिष्ट, विवेक साह, जीत सिंह आनंद, त्रिभुवन फर्त्याल, विक्की वर्मा, आनंद खम्पा, दिग्विजय बिष्ट, कुंदन बिष्ट सहित अनेक व्यापारी शामिल रहे।

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उत्तराखंड के इतिहास में उत्तराखंड कूच की इस तरह की घटना एक बार पहले भी 1 सितंबर 2003 को हो चुकी है, जोकि देश की अपनी तरह की पहली घटना बताई जाती है, जिसमें नैनीताल के साथ ही पूरे उत्तराखंड वासियों ने संयुक्त संघर्ष समिति के तहत उत्तराखंड उच्च न्यायालय के एक आदेश की खुली मुखालफत की थी, जबकि ऐसा करना न्यायालय की खुली अवमानना माना जाता है। नगर के वरिष्ठ पत्रकार राजीव लोचन साह ने बताया कि तक उत्तराखंड उच्च न्यायालय की न्यायमूर्ति पीसी वर्मा एवं न्यायमूर्ति एमएम घिल्डियाल की खंडपीठ ने उत्तराखंड राज्य आंदोलन के आरोपी अनंत कुमार सिंह को दोषमुक्त करार दे दिया था। यह खबर स्थानीय स्तर पर नहीं, बल्कि स्वयं सिंह ने दिल्ली के समाचार पत्रों में जारी करवाई थी। यह खबर लगने पर संयुक्त संघर्ष समिति ने राज्य आंदोलन के खटीमा कांड की बरसी पर एक सितंबर 2003 को उच्च न्यायालय जाकर वहां इस आदेश की प्रति जलाने का ऐलान किया। इस ऐलान के तीन दिन पहले 29 अगस्त को उच्च न्यायालय ने अपने इस आदेश को वापस ले लिया। बावजूद आंदोलनकारी अपने ऐलान पर अड़े रहे। एक सितंबर को नैनीताल में पुलिस की ओेर से हर ओर से आंदोेलनकारियों का प्रवेश रोकने के प्रबंध किए गए, और नगर को छावनी में तब्दील कर दिया गया। बावजूद आंदोलनकारी तल्लीताल डांठ पर जुटे और सभा की। इस दौरान पुलिस ने आंदोलनकारियों को उच्च न्यायालय तक न जाने व माल रोड से होते हुए मल्लीताल तक शांतिपूर्वक प्रदर्शन करते हुए जाने की शर्त पर मना लिया। इसके बाद मल्लीताल तक जुलूस निकाला गया, और मल्लीताल में भी सभा हुई। आगे देखने वाली बात होगी कि आज के ऐलान की परिणति किस तरह की होती है।

तत्कालीन डीएम दीपक रावत के निर्देशों पर लगे हैं फड़: ईओ
नैनीताल। उच्च न्यायालय से प्रतिबंधित नगर के पंत पार्क से गुरुद्वारा तक के क्षेत्र में फड़ लगने के बाबत पूछे जाने पर नगर पालिका के अधिशासी अधिकारी रोहिताश शर्मा ने कहा कि पूर्व में पालिका लगातार फड़ हटाती थी। लेकिन तत्कालीन डीएम दीपक रावत के निर्देशों पर पेड़ों से पीछे चार फिट की चौड़ाई में स्थानीय फड़ व्यवसायियों को दुकानें लगाने दी गयीं। आज व्यवसायियों ने फड़ हटाने को लेकर ज्ञापन दिया। प्रशासन किसी दबाव में कार्य नहीं करता है। बावजूद पालिका ने चंपावत सहित बाहरी लोगों के आठ फड़ हटवाए गए, जबकि कई स्वयं भाग गये। फड़ वालों को स्थान देने के लिए दो माह पूर्व वेंडर जोन कमेटी की कर निरीक्षक की अध्यक्षता एवं तल्लीताल व मल्लीताल व्यापार मंडल के पदाधिकारियों युक्त उपसमिति से 15 दिन के भीतर वेंडर जोन के लिए स्थल का चयन कर रिपोर्ट देने को कहा था, लेकिन अभी उप समिति ने वेंडर जोन के लिए सर्वेक्षण ही नहीं किया है। उन्होंने विरोध का मोहन-को मार्ग की पैमाइश और व्यापार मंडल के आगामी चुनावों से जुड़ाव होने का भी अंदेशा जताया।

फड़ न लगने देने के आश्वासन के बाद टला हाईकोर्ट कूच, नैनीताल रहा बंद

-इससे पूर्व छावनी में तब्दील रहा शहर, पुलिस ने हाईकोर्ट से पहले ही व्यापारियों का कूच रोकने के लिए किए थे अभेद्य प्रबंध
-एक प्लाटून पीएसी मिलेगी नगर पालिका को, पालिका ईओ सुनिश्चित करेंगे फड़ों का न लगना
-भोटिया व तिब्बती मार्केट में व्यापारी भी हटवाएंगे अपना अतिक्रमण
नैनीताल। गत दिनों से नगर के व्यवसायियों की प्रशासन के आदेशों के खिलाफ चल रही नाराजगी, नए वर्ष की पूर्व संध्या पर नैनीताल नागरिक मंच के बैनर तले जनाक्रोश रैली की कड़ी में बृहस्पतिवार को व्यापार मंडल मल्लीताल व तल्लीताल का हाईकोर्ट कूच का ऐलान नगर पालिका के अधिशासी अधिकारी रोहिताश शर्मा के द्वारा फड़ न लगने देने के आश्वासन के बाद टल गया। अलबत्ता, नगर में दूसरे दिन भी बाजार दवाइयों की दुकानों को छोड़कर पूरी तरह से बंद रहे। पालिका को पुलिस की ओर से फड़ न लगने देने के लिए एएसपी हरीश चंद्र सती ने एक प्लाटून पीएसी उपलब्ध कराने की घोषणा की। इसके साथ ही नगर के भोटिया और तिब्बती बाजार क्षेत्र में दुकानों से बाहर निकले एंगलों को हटाने का व्यवसायियों की ओर से आश्वासन दिया गया।
नगर के व्यापार मंडलों के सुबह 10 बजे मल्लीताल रामलीला मैदान में एकत्र होकर उच्च न्यायालय का कूच करने के ऐलान के मद्देनजर बृहस्पतिवार को मुख्यालय सुबह से ही पुलिस द्वारा पुलिस छावनी में तब्दील कर दिया गया था। खासकर उच्च न्यायालय की ओर व्यापारी कूच न कर पाएं, इस हेतु अभेद्य सुरक्षा प्रबंध और हर तरह की कार्रवाई की तैयारी कर ली गयी थी। उधर सुबह पंत पार्क से गुरुद्वारा तक के प्रतिबंधित क्षेत्र में फड़ नहीं लगने दिए गए। ऐसे में व्यापारियों ने मल्लीताल रामलीला मैदान में सभा की, और यहां से हाईकोर्ट की बजाय वे नगर पालिका की ओर जुलूस की शक्ल में आए, और कार्यालय में एडीएम बीएल फिरमाल की अध्यक्षता में वार्ता हुई। वार्ता में पालिका ईओ व एएसपी के आश्वासनों के बाद व्यापारी संतुष्ट दिखे। इस दौरान व्यापारी नेता किशन सिंह नेगी ने कहा कि व्यापारी हाईकोर्ट के अतिक्रमण विरोधी अभियान का स्वागत करते हैं, पर इसकी आढ़ में केवल व्यापारियों के विरुद्ध एकतरफा कार्रवाई की जा रही थी, और पिछले छह माह से उनके कोर्ट कमिश्नर तक से कहने के बावजूद अवैध फड़ लगाने वाले अतिक्रमणकारियों पर कोई कार्रवाई नहीं की जा रही थी। त्रिभुवन फर्त्याल व सोनू बिष्ट ने बाहरी फड़ वालों के लगातार बढ़ती हिमाकत की ओर इशारा करते हुए भविष्य में किसी बड़ी घटना के प्रति चेताया। बताया गया कि बीती 31 दिसंबर व नव वर्ष पर सैलानियों की भारी भीड़ के बावजूद स्थानीय व्यवसायी निराश रहे। जबकि फड़ वालों ने बड़े पैमाने पर बिक्री की। इससे व्यापारी नाराज थे। प्रदर्शन-वार्ता करने वालों में व्यापारी नेता कमलेश ढोंडियाल, विवेक साह, विक्की राठौर, विवेक वर्मा, जीत सिंह आनंद, जगदीश बवाड़ी, पूरन मेहरा व कुंदन बिष्ट सहित अनेक व्यापारी शामिल रहे।

‘पीआईएल मैन’ डा. रावत के ‘आहत’ होने के निकाले जा रहे हैं निहितार्थ
डा. अजय रावत

नैनीताल। सरोवरनगरी की पारिस्थितिकी को बचाने के लिए सर्वोच्च न्यायालय व उच्च न्यायालय में याचिकाएं दायर करने के लिए ‘पीआईएल मैन’ कहे जाने वाले पर्यावरण प्रेमी डा. अजय रावत द्वारा उच्च न्यायालय से अपनी बहुचर्चित जनहित याचिका वापस लेने की अर्जी दी है। खासकर ऐसे दिन जबकि नव वर्ष की पूर्व संध्या पर नगर वासी एवं नगर के पर्यटन से जुड़े लोग नये वर्ष के स्वागत और यहां हजारों की संख्या में आए सैलानियों का आतिथ्य करने के बजाय अन्य वर्षों के उलट बिना उत्साह, नगर में सजावट व संगीत का प्रबंध किये बगैर ‘कैंडल मार्च’ निकाल रहे हैं। खासकर इसे जनहित याचिका पर आ रहे अनेक ‘प्रतिबंध युक्त’ आदेशों के विरुद्ध जनता के आक्रोश के दबाव का परिणाम बताया जा रहा है तो डा. रावत का कहना है कि उन्होंने पांच वर्षों में अपनी जनहित याचिका के मूल विषयों पर कार्य न होने और इसकी जगह अन्य प्रतिबंध थोपने की स्थितियों में उठाया है। उन्होंने नगर को माथेरन की तरह ‘ईको सेंसिटिव जोन’ घोषित करने की मांग भी की है, जिसके लिए केंद्र सरकार से धनराशि मिलती है, तथा नगर में व्यवसायिक निर्माणों पर रोक लगती है, और नगर वासियों को असुविधा नहीं होती हैं।
डा. अजय रावत का कहना है कि उनकी पीआईएल संख्या 31/2012 के जरिए 2012 से ही झील विकास प्राधिकरण द्वारा हरित क्षेत्र में चिन्हित किये गए अवैध, अनियंत्रित निर्माण पर तुरंत रोक लगाने और साथ ही नैनीताल को ईको सेंसिटिव जोन घोषित करने का अनुरोध किया था था, जिससे नैनीताल झील को 50 फीसद से अधिक जल उपलब्ध कराने वाले सूखाताल झील क्षेत्र को अतिक्रमण मुक्त किया जाए। लेकिन पांच वर्ष बीत जाने के बाद भी आज तक इस दिशा में कोई ठोस कार्यवाही नहीं हुई, अलबत्ता कई बड़े व्यवसायिक निर्माण कार्य बदस्तूर जारी रहे। वहीं नैनी झील को लगातार नुकसान होता रहा. उन्होंने अपनी जनहित याचिका को वापस लेने वाली याचिका में यह स्पष्ट रूप से उल्लेख किया है कि सूखाताल के ईको सेंसिटिव जोन में तत्काल रूप से निर्माण गतिविधियों पर रोक लगायी जाए, जिससे नैनी झील को पुनर्जीवित किया और नैनी झील के अस्तित्व को बचाया जा सके। उन्होंने इस बात पर भी नाराजगी जताई कि उनकी जनहित याचिका पर उच्च न्यायालय में सुनवाई के दौरान कई नए मुद्दे जुड़ते गए और याचिका मूल विषय से दूर हो गयी।

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मेरा जन्म 26 नवंबर 1972 को हुआ था। मैं नैनीताल, भारत में मूलतः एक पत्रकार हूँ। वर्तमान में मार्च 2010 से राष्ट्रीय हिन्दी दैनिक समाचार पत्र-राष्ट्रीय सहारा में ब्यूरो चीफ के रूप में कार्य कर रहा हूँ। इससे पहले मैं पांच साल के लिए दैनिक जागरण के लिए काम कर चुका हूँ। कुमाऊँ विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग से ‘नए मीडिया’ विषय पर शोधरत हूँ। फोटोग्राफ़ी मेरा शौक है। मैं NIKON COOLPIX P530 और अडोब फोटोशॉप 7.0 के साथ फोटोग्राफी कर रहा हूँ। फोटोग्राफी मेरे लिए दुनियां की खूबसूरती को अपनी ओर से चिरस्थाई बनाने का बहुत छोटा सा प्रयास है। एक फोटो पत्रकार के रूप में मेरी तस्वीरों को नैनीताल राजभवन सहित विभिन्न प्रदर्शनियों में प्रस्तुत किया गया, तथा उत्तराखंड की राज्यपाल श्रीमती मार्गरेट अलवा द्वारा सम्मानित किया गया है। कुछ चित्रों को राष्ट्रीय-अंतर्राष्ट्रीय पुरस्कार भी प्राप्त हो चुके हैं। गूगल अर्थ पर चित्र उपलब्ध कराने वाली पैनोरामियो साइट पर मेरी प्रोफाइल को 18.85 Lacs से भी अधिक हिट्स प्राप्त हैं।पत्रकारिता और फोटोग्राफी के अलावा मुझे कवितायेँ लिखना पसंद है। काव्य क्षेत्र में मैंने नवीन जोशी “नवेन्दु” के रूप में अपनी पहचान बनाई है। मैंने बहुत सी कुमाउनी कवितायेँ लिखी हैं, कुमाउनी भाषा में मेरा काव्य संकलन उघड़ी आंखोंक स्वींड़ प्रकाशित हो चुका है, जो कि पुस्तक के के साथ ही डिजिटल (PDF) फार्मेट पर भी उपलब्ध होने वाली कुमाउनी की पहली पुस्तक है। मेरी यह पुस्तक गूगल एप्स पर भी उपलब्ध है। ’ यहां है एक पत्रकार, लेखक, कवि एवं छाया चित्रकार के रूप में मेरी रचनात्मकता, लेख, आलेख, छायाचित्र, कविताएं, हिंदी-कुमाउनी के ब्लॉग आदि कार्यों का पूरा समग्र। मेरी कोशिश है कि यहां नैनीताल, कुमाऊं, उत्तराखंड और वृहद संदर्भ में देश की विरासत, संस्कृति, इतिहास और वर्तमान को समग्र रूप में संग्रहीत करने की….। मेरे दिल में बसता है, मेरा नैनीताल, मेरा कुमाऊं और मेरा उत्तराखंड