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किसानों के नाम पर 50 फीसद से अधिक का मुनाफा कमा रही हैं बीमा कंपनियां

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नवीन समाचार, नैनीताल, 6 जनवरी 2018। केंद्र सरकार की 2022 तक किसानों की आय दोगुनी करने की योजना के विपरीत उत्तराखंड का कृषि महकमा सरकार की योजनाओं को पलीता लगाने पर तुला नजर आ रहा है। खासकर केंद्र सरकार की की फसल बीमा योजना जैसी अति महत्वाकांक्षी योजना को लागू करने में तो विभाग की स्थिति ऐसी ही नजर आ रही है। इस कारण प्रदेश के किसानों को उनकी फसल के बर्बाद होने पर सरकार की ओर से अनुमन्य सहायता नहीं मिल पा रही है।
हल्द्वानी के सूचना अधिकार कार्यकर्ता हेमंत गोनिया को सूचना के अधिकार से मिली जानकारी इन आरोपों को पुष्ट करने वाली है। गौनिया को मिली सूचना के अनुसार प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के अंतर्गत खरीफ में 2 प्रतिशत से अधिक और रवि मौसम में 1.5 प्रतिशत से अधिक प्रीमियम की धनराशि सब्सिडी के तौर पर भारत सरकार व राज्य सरकार द्वारा 50-50 के अनुपात में बीमा कंपनी को भुगतान की जााती है।
जहाँ कृषि उत्तराखंड के लोगों की आजीविका का आज भी सबसे बड़ा साधन है, वहीं पिछले 5 वर्षों में प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के अंतर्गत होने वाले पंजीकरणों में हर वर्ष निरंतर गिरावट आई है। प्राप्त सूचना के अनुसार उत्तराखंड में अभी तक 4,80,607 किसानों को ही 18 सूचीबद्ध कंपनियों के द्वारा चलाई जा रही प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना से जोड़ा गया है, जिनमें से अभी तक 10 फीसद से भी कम, 40,738 किसानों को फसलों के नुकसान होने पर रु. 795.77 लाख की धनराशि बीमा कंपनी द्वारा दी गई है। जबकि राज्य सरकार अपने 50 फीसद हिस्से में से 599.91 लाख रुपए प्रीमियम के रूप में तथा 199.35 लाख रुपए क्रॉप कटिंग योजना के नाम पर दे चुकी है। जाहिर है कि केंद्र सरकार भी अपना 50 फीसद दे चुकी है। इन स्थितियों में यदि किसानों को हुए भुगतान देखने पर यह साफ पता चलता है कि बीमा कंपनियां 50 फीसद से अधिक फायदे में हैं, और इसका लाभ बीमा कंपनियों को नहीं मिल पा रहा है।

कुमाऊं कमिश्नरी में आत्मदाह का हुआ प्रयास, जानें फिर क्या हुआ..

नवीन समाचार, नैनीताल, 2 जनवरी 2019। हल्द्वानी निवासी सामाजिक कार्यकर्ता विजय सिंह रावत ने सोमवार को कुमाऊं कमिश्नरी में आत्मदाह करने का प्रयास किया। रावत ने अचानक कमिश्नरी पहुंचकर पुलिस एवं अभिसूचना इकाइयों की पहले से मौके पर मौजूदगी के बावजूद उनकी आंखों में धूल झोंककर बोतल में लाया हुआ पेट्रोलियम पदार्थ स्वयं पर छिड़क दिया, किंतु जब तक वह खुद पर माचिस जलाकर आग लगाता इससे पूर्व ही अभिसूचना इकाई के एसआई नंदन बिष्ट व आरक्षी अखिलेश सिंह तथा तल्लीताल थाना पुलिस के एसआई मनोज नयाल ने उसे दबोच लिया एवं आत्मदाह के प्रयासों को विफल कर दिया।
उल्लेखनीय है कि हल्द्वानी स्थित आरटीओ यानी संभागीय परिवहन अधिकारी कार्यालय में अनियमितताओं, खासकर वहां से कथित दलालों को बाहर किये जाने एवं हल्द्वानी से अवैध टैक्सी स्टैंड को हटाए जाने की मांग पर रावत ने पहले ही 1 जनवरी तक कार्रवाई न होने पर कमिश्नरी में आत्मदाह करने की धमकी दी थी, इसलिये बुधवार को सुबह 10 बजे से ही अभिसूचना इकाई एवं तल्लीताल थाना पुलिस के कर्मी कमिश्नरी में तैनात हो गये थे। वहीं दोपहर एक बजे आत्मदाह किये जाने की अपुष्ट सूचनाओं पर मुख्यालय के मीडियाकर्मी भी मौके पर पहुंच गये। इस बीच करीब एक बजकर 10 मिनट पर सिर में सरदारों की तरह पगड़ी एवं चेहरे पर प्रदूषण से बचने के लिये बांधा जाने वाला मास्क लगाकर आये रावत ने अचानक ही आयुक्त राजीव रौतेला के कार्यालय के बाहर अपनी जेब में बोतल में लाया हुआ तरल पेट्रोलियम पदार्थ स्वयं पर छिड़क लिया। इतनी देर तक पुलिस व अभिसूचना विभाग के कर्मी उसे पहचान नहीं पाये थे। लेकिन जैसे ही उसने हरकत की, उसे तत्काल दबोच लिया गया। रावत ने बाद में मीडियाकर्मियों को बताया कि उन्होंने हल्द्वानी के आरटीओ कार्यालय में अनियमितताओं को लेकर पूर्व में 8 दिनों तक आमरण अनशन भी किया था, जिसके बाद आयुक्त ने दिशानिर्देश भी जारी किए थे। किंतु कोई कार्रवाई नहीं हुई। इससे आहत होकर उसे यह कदम उठाना पड़ा।
चित्र परिचयः 02एनटीएल-1 व 2ः नैनीताल। बुधवार को कमिश्नरी में आत्मदाह करने आये समाजसेवी विजय रावत को दबोचते पुलिस एवं अभिसूचना विभाग के कर्मी।

सूचना अधिकार कार्यकर्ता हेमंत गौनिया

पूर्व समाचार

: आठ दिन के आमरण अनशन के बावजूद नहीं हिली प्रशासनिक व्यवस्था, आरटीआई से हुआ खुलासा

-केमू पर 6 बिंदुओं पर कार्रवाई किये जाने के मांग पत्र पर आरटीओ ने कोई कार्रवाई करने के बाद केमू से किया महज ‘अनुरोध’
नवीन जोशी @ नवीन समाचार, नैनीताल, 18 दिसंबर 2018। 18 वर्ष की उम्र के बालिग भर हो रहे राज्य की व्यवस्थाएं लगता है समय पूर्व ही बूढ़ी हो गयी हैं। राज्य की प्रशासनिक मशीनरी की बूढ़ी हड्डियों एवं आंखों का सूख चुका पानी शायद एक व्यक्ति के सामाजिक उद्देश्य से आठ दिन आमरण अनशन कर अपनी जान जोखिम में डालने के बावजूद नहीं पिघल रहा है।
उल्लेखनीय है कि हल्द्वानी में विजय रावत नाम के व्यक्ति ने दो माह पूर्व 11 अक्तूबर को अपनी मांगों पर आठ दिन का आमरण अनशन किया था। तब उनकी सभी मांगों को मानने का आश्वासन देकर उनका अनशन तुड़वाया गया, लेकिन इधर दो माह बाद उनकी मांगों पर हुई कार्रवाइयों के बारे में जब इस आंदोलन में साथ रहे सूचना अधिकार कार्यकर्ता हेमंत गौनिया ने सूचना के अधिकार के तहत पूछा तो पता चला है कि किया कुछ भी नहीं गया। विजय ने तब केमू प्रबंधन एवं वाहन स्वामियों पर स्वीकृत सीमा से अधिक किराया वसूले जाने का आरोप लगाते हुए बिना परमिट के वाया गगास रानीखेत से द्वाराहाट जाने वाली तथा फिक्स मार्गों व ‘नो रोड’ की सभी सहित से केमू की करीब 54 से अधिक बस सेवाओं एवं हल्द्वानी शहर में अवैध टैक्सी स्टेंड को हटाने की 6 सूत्रीय मांगें की थीं। इस संबंध में आरटीओ हल्द्वानी ने सभी मांगों को मांगने का समझौता किया था, किंतु अब तक इस संबंध में की गयी जानकारी के बारे में इतना भर बताया है कि इस संबंध में केमू को इन मागों के संबंध में कार्रवाई करने का ‘अनुरोध’ किया गया है। यानी अधिकारपूर्वक कोई कार्रवाई करने के निर्देश तक नहीं दिये हैं। इस पर गौनिया एवं रावत ने फिर से आंदोलन करने का इरादा जाहिर किया है।

पार्किंग शुल्क से ही करोड़ों कमा रहा रोडवेज, पर नहीं दिला रहा स्टेशनों पर सुविधाएं

नैनीताल, 23 नवंबर 2018। उत्तराखंड परिवहन निगम अपने स्टेशनों पर बसों के खड़े होने से वर्ष में लाखों तथा पिछले कुछ वर्षों में ही करोड़ों रुपये कमा रहा है। किंतु स्टेशनों पर सुविधाएं उपलब्ध कराने के नाम पर कुछ भी नहीं किया जा रहा है। जनपद के सूचना अधिकार कार्यकर्ता हेमंत गौनिया को परिवहन विभाग द्वारा उपलब्ध करायी गयी सूचना के अनुसार केवल हल्द्वानी के रोडवेज स्टेशन से ही निगम को वर्ष 2014 में 27.48 लाख, 2015 में 35.24 लाख, 2016 में 43.82 लाख, 2017 में 51.25 लाख एवं इस वर्ष 2018 में अब तक 43.49 लाख यानी पिछले पांच वर्षों में दो करोड़ रुपये से अधिक की आय प्राप्त हो चुका है। यह स्थिति तब है, जबकि हल्द्वानी के रोडवेज स्टेशन पर न तो बसों के खड़े होने के लिये पर्याप्त जगह नहीं है, और दी गयी सूचना में यह स्वीकारोक्ति भी की गयी है। बताया गया है कि स्टेशन पर हर रोज 90-95 बसें आती हैं, और एक घंटे से कम देरी तक खड़े होने वाली बसों से 118 रुपये, रात्रि में रुकने वाली बसों से 236 रुपये एवं यूपी के केसरबाग व राजस्थान के जयपुर डिपो की बसों से 472 रुपये लिये जाते हैं, क्योंकि इन दोनों डिपो में खड़ी होने वाली यहां की बसों को भी वहां इतनी ही धनराशि देनी पड़ती है। गौनिया का कहना है कि इतनी बड़ी धनराशि प्राप्त करने के बाद भी स्टेशन की दशा नहीं सुधारी जा रही है। यही स्थिति प्रदेश के अन्य रोडवेज स्टेशनों की भी है।

यह भी पढ़ें : पांच वर्ष की कवायद और शिलान्यास के एक वर्ष बाद भी मोबाइल टावर अधर में

नैनीताल, 19 नवंबर 2018। जनपद के दूरस्थ ग्राम गौनियारो में करीब पांच वर्ष से चल रही कवायद और एक वर्ष पूर्व क्षेत्रीय विधायक एवं सांसद द्वारा शिलान्यास किये जाने के बावजूद बीएसएनएल के मोबाइल टावर का निर्माण अधर में पड़ा हुआ है। क्षेत्रीय निवासी एवं सूचना अधिकार कार्यकर्ता हेमंत गौनिया ने बताया कि उनके गांव में लोगों को मोबाइल के सिग्नल प्राप्त करने के लिये करीब 5 किमी दूर पैदल जाना पड़ता है। इस समस्या के समाधान के लिए वे पिछले करीब पांच वर्षों से प्रयासरत हैं, और दिल्ली में दूरसंचार मंत्रालय और बीएसएनएल के मुख्यालय तक पत्राचार करने के बाद किसी तरह बीएसएनएल का मोबाइल टॉवर स्वीकृत हुआ। इस पर श्रेय लेने के लिए क्षेत्रीय विधायक राम सिंह कैड़ा व सांसद भगत सिंह कोश्यारी ने करीब एक वर्ष पूर्व टावर का शिलान्यास भी कर दिया। किंतु इधर एक वर्ष बीत जाने के बावजूद बीएसएनएल की ओर से बरती जा रही निष्क्रियता की वजह से अभी भी टॉवर का निर्माण शुरू नहीं हो पाया है। उन्होंने शिलान्यास करने वाले विधायक व सांसद पर टावर के शीघ्र निर्माण के लिए प्रयास भी नहीं करने का आरोप भी लगाया।

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