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शोक सूचना : नगर के संस्थापक परिवार के दीपक शाह का असामयिक निधन

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दीपक शाह

नवीन समाचार, नैनीताल, 14 अप्रैल 2019। सरोवरगरी नैनीताल के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले व संस्थापकों में शामिल स्वर्गीय मोती राम शाह परिवार से आने वाले, नगर की आराध्य देवी माता नयना देवी मंदिर की व्यवस्था देखने वाले अमर-उदय ट्रस्ट के सदस्य तथा स्नो व्यू स्थित राधा चिल्ड्रन एकेडमी स्कूल के मालिक दीपक शाह का रविवार को अचानक निधन हो गया। प्राप्त जानकारी के अनुसार करीब मात्र 42-43 वर्षीय युवा दीपक पिछले कुछ समय से पेट की आंत में गांठ बनने का एम्स दिल्ली में उपचार चल रहा था। एक-दो दिन में वह फिर एम्स जाने वाले थे। बावजूद वे रविवार को सुबह ठीक थे। किंतु दोपहर में अचानक उन्हें कुछ समस्या हुई। जिसके बाद परिजन उन्हें बीडी पांडे जिला चिकित्सालय में दिखाने के लिये लाये, किंतु इससे पूर्व ही वे दम तोड़ चुके थे। चिकित्सकों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। चिकित्सकों के अनुसार उनका देहांत हृदयाघात की वजह से हुआ। वे अपने पीछे पत्नी रिंकू साह व मात्र 4 वर्ष की बेटी वैष्णवी को रोता-बिलखता छोड़ गये हैं। उल्लेखनीय है दीपक दो भाइयों में छोटे थे। उनके बड़े भाई कंचन शाह का भी नगर में अच्छा कारोबार था, किंतु 2010 के आसपास उनका भी अचानक देहांत हो गया था। देर शाम स्थानीय पाइंस स्थित श्मशान घाट में उनका अंतिम संस्कार कर दिया गया।

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तत्कालीन राष्ट्रपति शंकर दयाल शर्मा से शौर्य चक्र प्राप्त करते बद्री दत्त तिवारी (फाइल फोटो)।

नवीन समाचार, नैनीताल, 7 अप्रैल 2019। जनपद के शौर्य चक्र विजेता वीर सेनानी बद्री दत्त तिवारी (82) का रविवार को हल्द्वानी स्थित उत्तरांचल कॉलोनी कुसुमखेड़ा स्थित आवास पर स्वर्गवास हो गया। उन्होंने अपने आवास पर दिन में एक बजे अंतिम सांस ली। पारिवारिक सूत्रों के अनुसार उनकी अंतिम यात्रा सोमवार को सुबह आठ बजे रानीबाग स्थित चित्रशिला घाट के लिए रवाना होगी। वे अपने पीछे पत्नी पुष्पा तिवारी, दो पुत्र रविंद्र कुमार तिवारी व राहुल तिवारी एवं दो पुत्रियों पूनम व प्रीति तथा उनके भरे-पूरे परिवार को रोता-बिलखता छोड़ गये हैं।

अनादि निधनं देवः शंख चक्र गदाधरः अव्यय पुण्डरीकाक्ष प्रेत मोक्ष प्रदो भवः।💐💐

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अमर उजाला के नैनीताल ब्यूरो प्रभारी एवं कुमाऊँ विश्वविद्यालय के पत्रकारिता विभाग के अध्यक्ष प्रो. गिरीश रंजन तिवारी जी की माता जी का कल रात्रि 12 बजे लखनऊ में स्वर्गवास हो गया है। संस्कार आज 8 फरवरी को लखनऊ में गोमती तट पर 4 बजे शाम को होगा। अभी हाल ही में वे शतायु हुई थीं।

ईश्वर उन्हें मोक्ष प्रदान करें एवं शोकाकुल परिवार को इस दुख की घड़ी को सहने की शक्ति प्रदान करें। ॐ शांति।

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नई दिल्ली, 23 नवंबर 2018। ‘कगार की आग’ के लेखक प्रख्यात हिंदी साहित्यकार हिमांशु जोशी का निधन हो गया है। 83 वर्षीय हिमांशु जोशी लंबे समय से बीमार थे। गुरुवार रात दिल्ली में उन्होंने आखिरी सांस ली। उनके निधन से पत्रकारिता जगत के साथ ही उनके मूल उत्तराखंड में शोक की लहर है।

हिंमांशु जोशी का जन्म 4 मई 1935 को लोहाघाट से अल्मोड़ा जाने वाली सड़क के किनारे बसे उत्तराखंड के चम्पावत जिले के खेतीखान के निकट जोस्यूडा गांव में हुआ था। उन्होंने दिल्ली में साप्ताहिक हिन्दुस्तान से पत्रकारिता की शुरुआत की थी। उनका उपन्यास ‘कगार की आग’ विश्व प्रसिद्ध है। हिमांशु जोशी के चले जाने से साहित्य जगत को अपूरणीय क्षति हुई है। हिमांशु जोशी के पिता प्रसिद्ध स्वतंत्रता संग्राम सेनानी पूर्णानन्द जोशी थे। इनकी माता का नाम तुलसी देवी था। उनका बालपन जोस्यूड़ा से कही अधिक खेतीखान में बीता। वर्ष 1951 में इनके पिता का निधन हो गया। उनकी कक्षा 8 तक की पढ़ाई हिंदुस्तानी वर्नाकुलर स्कूल खेतीखान में हुई। आगे की पढ़ाई के लिए वह नैनीताल चले गए। पांच साल वह नैनीताल में रहे।उन्होंने वर्ष 1956 से पत्रकारिता में कदम रखा। ‘कादम्बिनी’ (1968-71), वरिष्ठ पत्रकार ‘साप्ताहिक हिन्दुस्तान’(1971-1993)। दूरदर्शन व आकाशवाणी के लिए भी कार्य किया। हिन्दी फिल्मों में भी लेखन कार्य किया। हिमांशु जोशी के तीन पुत्र अमित, सिद्धार्थ और असित हैं। हिमांशु जोशी को हिन्दी, अंग्रेजी और उर्दू का अच्छा ज्ञान था। उनके उपन्यासों में अरण्य, महासागर, छाया मत छूना मन, कगार की आग, समय साक्षी है, तुम्हारे लिए, सु-राज शामिल हैं। उनके कहानी संग्रह-अन्तत: तथा अन्य कहानियाँ, अथचक्र, मनुष्य-चिह्न तथा अन्य कहानियां, जलते हुए डैने तथा अन्य कहानियां,, तपस्या तथा अन्य कहानियां, आंचलिक कहानियां, गंधर्व-गाथा, श्रेष्ठ प्रेम कहानियां आदि हैं। 
कविता संग्रह-नील नदी का वृक्ष, जीवनी तथा खोज-अमर शहीद अशफाक उल्ला खां, यात्रा वृतांत : यातना-शिविर में (अंडमान की अनकही कहानी), रेडियो-नाटक-सु-राज तथा अन्य एकांकी, कागज की आग तथा अन्य एकांकी, समय की शिला पर, बाल साहित्य-अग्नि संतान, विश्व की श्रेष्ठ लोककथाएं, तीन तारे, बचपन की याद रही कहानियां, भारतरत्न : पं. गोविन्द बल्लभ पन्त आदि।

पुरस्कार व सम्मान :
‘छाया मत छूना मन’, ‘मनुष्य चिह्न’, ‘श्रेष्ठ आंचलिक कहानियां’ तथा ‘गंधर्व-गाथा’ को उत्तर प्रदेश हिन्दी संस्थान से पुरस्कार। ‘हिमांशु जोशी की कहानियां’ तथा ‘भारत रत्न: पं. गोबिन्द बल्लभ पन्त’ को हिन्दी अकादमी, दिल्ली का सम्मान। ‘तीन तारे’ राजभाषा विभाग, बिहार द्वारा पुरस्कृत। पत्रकारिता के लिए केन्द्रीय हिन्दी संस्थान द्वारा ‘स्व. गणेश शंकर विद्यार्थी’ पुरस्कार से सम्मानित। 
अनेक उपन्यासों, कहानियों के अधिकतर भारतीय भाषाओं के अलावा अंग्रेजी, नेपाली, बर्मी, चीनी, जापानी, इटालियन, बल्गेरियाई, कोरियाई, नार्वेजियन, स्लाव, चैक आदि भाषाओं में अनुवाद हुए।
विशेष : उपन्यास ‘सु-राज’ पर आधारित फिल्म बनी। ‘तुम्हारे लिए’ पर आधारित दूरदर्शन धारावाहिक। ‘तर्पण’, ‘सूरज की ओर’ आदि पर टीवी फिल्में। शरत चन्द्र के उपन्यास ‘चरित्रहीन’ पर आधारित रेडियो धारावाहिक का निर्देशन। अनेक सरकारी, अर्द्धसरकारी समितियों में हिन्दी सलाहकार रहे। 
वर्तमान में वे नार्वे से प्रकाशित पत्रिका ‘शांतिदूत’ के विशेष सलाहकार तथा हिन्दी अकादमी, दिल्ली की पत्रिका ‘इन्द्रप्रस्थ भारती’ के सम्पादन मंडल के सदस्य थेे।

डीएसबी के संस्थापक ठाकुर दान सिंह की धर्मपत्नी की जम्मू में गुमनामी में मौत

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p style=”text-align: justify;”>नैनीताल, 9 नवंबर 2018। कुमाऊं विवि के सर्वप्रमुख डीएसबी परिसर के संस्थापक स्वर्गीय ठाकुर दान सिंह बिष्ट की धर्मपत्नी लीलावती बिष्ट शुक्रवार को पंचतत्व में विलीन हो गयीं। जम्मू के शास्त्री नगर में शुक्रवार को उनका अंतिम संस्कार किया गया। उनका बृहस्पतिवार को देहावसान हो गया था।
उल्लेखनीय है कि स्वर्गीया बिष्ट ठाकुर दान सिंह बिष्ट की तीसरी पत्नी थीं। बताया गया है कि पूर्व में वह नगर के वर्तमान सबसे बड़े मन्नू महारानी होटल के स्थान पर स्थित ग्रासमेयर स्टेट में वह रहती थीं। लेकिन 30-35 वर्ष पूर्व पारिवारिक संपत्ति संबंधी विवाद के बाद वह अपनी पुत्री नीलम एवं दामाद डा. अशोक परिहार के साथ जम्मू चली गयीं एवं वहां गांधी नगर क्षेत्र में रह रही थीं। बताया गया है कि नैनीताल में रहते भी उन्हें मिलने योग्य सम्मान नहीं मिल पाया। डीएसबी परिसर में भी उन्हें कभी नहीं बुलाया गया, जो कि उनके पति के नाम पर था। उल्लेखनीय है कि ठाकुर दान सिंह बिष्ट कुमाऊं के प्रसिद्ध मालदार परिवार से थे। कहते हैं आजादी के दौर में ‘टिंबर किंग’ कहे जाने वाले मालदार परिवार देश के शीर्ष 10 पूंजीपतियों में शामिल था। उनका भारत सहित नेपाल तक लकड़ी का कारोबार था। पिथौरागढ़ जिले के चौकोड़ी में इस परिवार का चाय का बागान आज भी प्रसिद्ध है। यहां की चाय कभी विश्वप्रसिद्ध थी। 1919 से चौकोड़ी से लेकर बेरीनाग तक की कई किमी लंबी संपत्ति ठाकुर दान सिंह बिष्ट के पिता ठाकुर देव सिंह बिष्ट व चाचा ठाकुर चंचल सिंह बिष्ट के नाम रही। नैनीताल के दुर्गापुर क्षेत्र में ‘बिष्ट स्टेट’ भी इसी परिवार की कोठी है। इधर उनके निधन के समाचार से डीएसबी परिसर में शोक का माहौल है।

वरिष्ठ पीसीएस अधिकारी श्रीश कुमार की माता के शांति कार्यक्रम 11 नवंबर को

नैनीताल, 1 नवंबर 2018। वरिष्ठ पीसीएस अधिकारी, नैनीताल झील विकास प्राधिकरण एवं जिला विकास प्राधिकरण के सचिव रहे श्रीश कुमार की पूज्य माता शशि सिंह का बृहस्पतिवार शाम देहावसान हो गया है। वह 81 वर्ष की थीं, एवं वह पिछले कुछ समय से बीमार थीं। उनका हल्द्वानी के एक निजी चिकित्सालय में उपचार चल रहा था। इसी दौरान शाम करीब साढ़े पांच बजे उन्हें दिल का दौरा पड़ा, जिसके बाद उन्हें बचाया नहीं जा सका। इसके उपरांत उनके पार्थिव शरीर को उनके काशीपुर स्थित आवास पर लाया गया है। जहां से उनकी अंतिम यात्रा शुक्रवार पूर्वाह्न 11.30 बजे को निकलेगी। स्वर्गीया शशि सिंह अपने पीछे पति जनार्दन सिंह, तीन पुत्र पीयूष, श्रीश एवं अंशुमन तथा नाती-पोतों सहित भरा-पूरा परिवार छोड़कर गयी हैं। नवीन समाचार परिवार दिवंगत आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना तथा शोकाकुल परिवार को इस दुःख की घड़ी में सांत्वना प्रदान करने एवं ईश्वर से उन्हें इस दुःख को सहने की शक्ति प्रदान करने के लिए प्रार्थना करता है।

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