News

नैनी झील से बरामद हुआ कुमाऊं विश्वविद्यालय के पूर्व निदेशक राणा का शव

  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
प्रो. एनएस राणा

डॉ. नवीन जोशी @ नवीन समाचार, नैनीताल, 15 जुलाई 2021। बृहस्पतिवार सुबह नैनी झील में एक शव मिला है। शव की पहचान कुमाऊं विश्वविद्यालय के वाणिज्य विभाग के सेवानिवृत्त प्राध्यापक एवं डीएसबी परिसर के निदेशक, डीन कोऑडिनेटर, विभागाध्यक्ष व संकायाध्यक्ष सहित विभिन्न प्रशासनिक पदों पर रहे प्रो. एनएस राणा के रूप में हुई। 70 वर्षीय प्रो. राणा वर्ष 2011 में सेवानिवृत्त हुए थे। उनके बड़े पुत्र डॉ. महेंद्र राणा भी कुमाऊं विश्वविद्यालय में प्रोफेसर हैं। जबकि छोटे पुत्र नेवी में एवं पुत्री रामगढ़ में राजकीय इंटर कॉलेज में अतिथि शिक्षक हैं। स्वर्गीय राणा धार्मिक प्रवृत्ति के व्यक्ति भी। वह नगर में अक्सर धार्मिक-आध्यात्मिक कार्यक्रमों व चर्चाओं में भी भाग लेते थे। 

प्राप्त जानकारी के अनुसार बिड़ला रोड निवासी प्रो. राणा रोज की तरह सुबह साढ़े आठ बजे के करीब सुबह की सैर पर घर से निकले थे। वह रोज दोपहर तक लौट आते थे। इसलिए उनके उनके परिजनों को उनके बारे में कोई आशंका नहीं थी। सुबह करीब दस बजे दो छात्राओं ने ठंडी सड़क पर घूमते हुए पाषाण देवी मंदिर के पास नैनी झील में शव तैरता देखा तो पुलिस को सूचना दी। इस पर तल्लीताल थाने के चीता मोबाइल प्रभारी शिवराज राणा व एसआई हरीश पुरी, मल्लीताल कोतवाल अशोक कुमार सिंह, एसआई नितिन बहुगुणा व नरेंद्र कुमार आदि मौके पर पहुंचे और शव को झील से बाहर निकाला और शव को पंचनामा भरकर पोस्टमार्टम के लिए भिजवाया। उनके पास से कुछ रुपए, मास्क व रुमाल आदि सामग्री ही बरामद हुई है। घटना की सूचना मिलते ही उनके परिवार में शोक छा गया है। जबकि अन्य को उनकी इस तरह असाममयिक मृत्यु पर विश्वास नहीं हो रहा है। उनके निधन से कुमाऊं विश्वविद्यालय में शोक की लहर छा गई है।

 

कुमाऊं विश्विद्यालय शिक्षक संघ-कूटा के अध्यक्ष प्रो. ललित तिवारी ने बताया कि प्रो. राणा के निर्देशन में शोध कार्य करने वाले अनके विद्यार्थी देश-दुनिया में ख्याति प्राप्त पदों पर कार्यरत हैं। वह सरल स्वभाव के धनी थे, आध्यात्म में विश्वास करते थे, गायत्री परिवार में मंत्रोचारण करते थे तथा योग किया करते थे। उनका अंतिम संस्कार शुक्रवार 16 जुलाई को प्रातः 10बजे चित्रशिला घाट रानीबाग में किया जाएगा। उन्हें श्रद्धांजलि देने वालो में कुमाऊं विश्विद्यालय के कुलपति, प्रो. एनके जोशी, प्रो. एलएम जोशी, प्रो.संजय पंत, प्रो.अतुल जोशी, प्रो.हरीश बिष्ट, प्रो.सतपाल बिष्ट, डॉ. विजय कुमार, डॉ. सुहेल जावेद, डॉ. दीपिका गोस्वामी, डॉ. दीपक कुमार, डॉ. पैनी जोशी, डॉ. प्रदीप कुमार, डॉ. सीमा चौहान, डॉ. गगन होती व डॉ. रीतेश साह इत्यादि शामिल हैं। आज के अन्य ताजा ‘नवीन समाचार’ पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें।

यह भी पढ़ें : पूर्व लोनिवि कर्मी साह का निधन, रानीबाग-भीमताल रोड के सर्वे में रही थी भूमिका

डॉ. नवीन जोशी @ नवीन समाचार, नैनीताल, 10 जुलाई 2021। नगर के मल्लीताल बाजार निवासी पूर्व लोनिवि कर्मचारी सुंदर लाल साह का शनिवार को 93 वर्ष की आयु में निधन हो गया। सेवानिवृत्त इंजीनियर राजीव गुरुरानी ने बताया कि लोनिवि में वर्क सुपरवाइज के पद पर रहते हुए साह का ज्योलीकोट व आमपड़ाव के पास नालों व अन्य सुरक्षात्मक कार्यों एवं रानीबाग-भीमताल रोड के सर्वे के कार्य में उल्लेखनीय योगदान रहा था। वह 1986 में सेवानिवृत्त हुए थे। पूर्व विधायक डॉ. नारायण सिंह जंतवाल ने बताया कि वह मल्लीताल बाजार के सबसे वरिष्ठजनों में शुमार थे। उनकी अंतिम यात्रा में पूर्व नगर पालिकाध्यक्ष संजय कुमार, साहित्यकार डॉ. लक्ष्मण सिंह बिष्ट ‘बटरोही’, सुरेश लाल साह, प्रकाश पांडे, अंबा दत्त बवाड़ी, इंजीनियर राजीव गुरुरानी, प्रकाश मौलेखी, मनोज जोशी व दिनेश भट्ट सहित कई विशिष्टजन शामिल रहे। आज के अन्य ताजा ‘नवीन समाचार’ पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें।

यह भी पढ़ें : कुमाऊं मंडलायुक्त कार्यालय के 37 वर्षीय कर्मी के निधन से हर कोई अवाक

डॉ. नवीन जोशी @ नवीन समाचार, नैनीताल, 29 जून 2021। मुख्यालय स्थित मंडलाय कार्यालय में मंडलायुक्त के पेशकार के पद पर कार्यरत 37 वर्षीय चंदन थापा का बुधवार को असामयिक निधन हो गया। बुधवार अपराह्न अयारपाटा क्षेत्र में अरविंद आश्रम के पास बच्चों ने एक युवक को रास्ते में पड़ा देखा, उसके मुंह से झाग निकला हुआ था। इसकी सूचना पहले क्षेत्रीय सभासद मनोज साह जगाती को एवं बाद में उनके द्वारा मल्लीताल कोतवाली पुलिस को दी गई। तब तक युवक की मृत्यु हो चुकी थी।

सूचना मिलने पर मौके पर पहुंचे मल्लीताल कोतवाली के उपनिरीक्षक कश्मीर सिंह ने मृतक की तलाशी ली तो मृतक के पास से 2 मोबाइल एवं एक बोतल मिली, जिसमें संभवतया जहर था। मृतक की पहचान तल्लीताल कमिश्नरी कंपाउंड निवासी एवं मंडलायुक्त के पेशकार चंदन थापा के रूप में हुई। मृतक के परिजनों को पुलिस द्वारा सूचना दी गयी, जिन्होंने औपचारिक तौर पर शिनाख्त की। सूचना मिलने पर मंडलायुक्त अरविंद सिंह ह्यांकी भी मौके पर पहुंचे। परिजनों का कहना था की चंदन बीते कुछ दिनों से अवसाद की स्थिति में थे। पिछले दिनों वह अवसाद की स्थिति में रुद्रपुर कोतवाली में बुर्के में देखे गए थे, तब भी लोग उन्हें अचानक ऐसे देखकर हतप्रभ थे, जबकि आज एक बेहद सौम्य, सीमित बोलने वाले व हंसमुख युवा कर्मी की असामयिक मौत की सूचना से भी हर कोई अवाक रह गया है। पुलिस ने उनका शव मोर्चरी में रखवा दिया है। आज के अन्य ताजा ‘नवीन समाचार’ पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें।

शिल्पकार सभा के महेश चंद्रा का निधन

स्वर्गीय महेश चंद्रा।

डॉ. नवीन जोशी @ नवीन समाचार, नैनीताल, 15 जून 2021। भारतीय सेना से ऑनरेरी कैप्टन के पद से सेवानिवृत्त हुए पूर्व सैनिक एवं नगर की शिल्पकार सभा के 6 वर्षों तक उपाध्यक्ष रहे महेश चंद्रा का मंगलवार सुबह हृदय गति रुकने से असामयिक निधन हो गया। वह अपने पीछे पत्नी व पुत्री आदि को रोता-बिलखते छोड़ गए हैं। उनका अंतिम संस्कार बुधवार को स्थाइंस पाइंस स्थित श्मशान घाट में किया जाएगा।
उनके निधन पर शिल्पकार सभा के सदस्यों ने शोक सभा कर उन्हें श्रद्धांजलि दी। अध्यक्ष संजय कुमार ‘संजू’ ने कहा कि उन्होंने शिल्पकार समाज के लिए कार्य करने वाला एक अच्छा हितैषी खो दिया है। इस दौरान उपस्थित महामंत्री रमेश चंद्रा, कैलाश अगरकोटी, राजेश लाल, रमेश चंद्र, देवेंद्र प्रकाश, बच्ची चंद्र, दीवान चंद्र, नवीन टम्टा, केएल आर्य व ललित मोहन आदि ने स्वर्गीय चंद्रा की आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की। आज के अन्य ताजा ‘नवीन समाचार’ पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें।

यह भी पढ़ें : डॉ. हृदयेश के निधन पर शोक संवेदनाओं का सिलसिला जारी….

डॉ. नवीन जोशी @ नवीन समाचार, नैनीताल, 13 जून 2021। कांग्रेस पार्टी की वरिष्ठ नेत्री एवं नेता प्रतिपक्ष डॉ. इंदिरा हृदयेश के रविवार सुबह नई दिल्ली में 80 वर्ष की आयु में असामयिक निधन से हर कोई स्तब्ध रह गया है। उनके निधन पर कांग्रेस के साथ ही विपक्षी दलों व आम लोगों की ओर से भी लगातार शोक संवेदनाएं आ रही हैं। सबसे पहले स्थानीय भाजपा विधायक संजीव आर्य के ट्वीट से लोगों को डॉ. हृदयेश के निधन का समाचार मिला। संजीव ने डॉ. हृदयेश के निधन पर गहरा दुःख जताया। कांग्रेस पार्टी के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी, उत्तराखंड की राज्यपाल बेबी रानी मौर्या, मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत, पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत व हरीश रावत, कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष प्रीतम सिंह, काबीना मंत्री यशपाल आर्या व बंशीधर भगत आदि ने भी डॉ. हृदयेश के निधन पर शोक जताया है। इधर, अभी-अभी प्राप्त जानकारी के अनुसार डॉ. हृदयेश की पार्थिव देह को हल्द्वानी स्थित उनके आवास पर लाया जा रहा है। सोमवार सुबह उनकी देह को प्रातः 10 बजे स्वराज आश्रम में अंतिम दर्शनों के लिए रखा जाएगा, और 11 बजे उनकी अंतिम यात्रा यहां से प्रस्थान करेगी। कांग्रेस पार्टी ने उनके निधन पर अपने अगले एक सप्ताह के कार्यक्रम रद्द कर दिये हैं। वहीं राज्य सरकार की ओर से एक दिन का राजकीय शोक घोषित करने की बात कही गई है।
वहीं, कांग्रेस पार्टी के नगर अध्यक्ष अनुपम कबडवाल ने उनके निधन पर अपने संदेश में कहा कि डॉ. हृदयेश राजनीति एवं संसदीय प्रणाली की गहरी समझ रखने वाली एवं आमजन व कार्यकर्ताओं के लिए हमेशा सुलभ रहने वाले नेत्री थीं। पूर्व दर्जा राज्य मंत्री रईश भाई ने उनके निधन को पूरे उत्तराखंड के लिए अपूर्णीय क्षति बताया। कुमाऊं विवि शिक्षक संघ-कूटा के अध्यक्ष प्रो. ललित तिवारी ने डॉ. हृदयेश के प्रदेश की उच्च शिक्षा मंत्री रहते किए गए कार्यों एवं वर्ष 2000, 2008 व 2010 में संविदा शिक्षकों के नियमितीकरण, राज्य के पर्वतीय एवं अति दुर्गम स्थलों पर महाविद्यालयों की स्थापना एवं महाविद्यालयों में संगत विषयों की स्वीकृति व प्राध्यापकों की नियुक्ति जैसे कार्यों को याद करते हुए उन्हें श्रद्धांजलि दी। उत्तराखंड आशा हेल्थ वर्कर्स यूनियन की प्रदेश अध्यक्ष कमला कुंजवाल, समाजसेवी डॉ. सरस्वती खेतवाल, नैनीताल जिला बार एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष ज्योति प्रकाश, भाजपा के प्रदेश कार्यकारिणी सदस्य गोपाल रावत, अरविंद पडियार, मनोज जोशी, पूर्व सभासद कैलाश अधिकारी, वरिष्ठ कांग्रेस नेत्री मुन्नी तिवारी तथा कुमाऊं विवि के महिला अध्ययन केंद्र की निदेशक एवं आचार्य नरेंद्र देव शोध संस्थान की प्रो. नीता बोरा शर्मा सहित अनेक अन्य लोगों ने भी उनके निधन पर शोक व्यक्त किया है। वहीं मां नयना देवी व्यापार मंडल ने डॉ. हृदयेश के असामयिक निधन पर गहरा शोक व्यक्त करते हुए शोक सभा आयोजित की। शोक सभा में संगठन के संस्थापक अध्यक्ष पुनीत टंडन, उपाध्यक्ष तरुण कांडपाल तथा रोमित, मयंक, तन्मय व देव आदि संस्थापक सदस्य शामिल रहे। वहीं तल्लीताल व्यापार मंडल के द्वारा भी डॉ. हृदयेश के निधन पर शोक सभा आयोजित कर श्रद्धांजलि दी गई। शोक सभा में अध्यक्ष मारुति नंदन साह, महामंत्री अमरदीप सिंह सनी, उपाध्यक्ष नासिर खान व ममता जोशी उप सचिव जयंत उप्रेती व कोषाध्यक्ष हरीश लाल सहित कई अन्य व्यवसायी मौजूद रहे। उधर आम आदमी पार्टी द्वारा आयोजित शोक सभा में प्रदेश प्रवक्ता प्रदीप दुम्का, जिला महामंत्री देवेंद्र लाल, नगर अध्यक्ष शाकिर अली सहित विनोद कुमार, प्रदीप साह, मो. खुर्शीद हुसैन, किशन लाल, सुनील कुमार, महेश चंद्र आर्या, नईम अहमद, विजय साह, विद्या देवी, मनीष लाल व शान बुरहान आदि मौजूद रहे।

डॉ. हृदयेश का संसदीय ज्ञान व कौशल उत्कृष्ट कोटि का था: जंतवाल
नैनीताल। पूर्व विधायक एवं उत्तराखंड क्रांति दल के पूर्व केंद्रीय अध्यक्ष डॉ. नारायण सिंह जंतवाल ने डॉ. हृदयेश के निधन पर दुःख जताते हुए अपने संदेश में कहा कि वह उत्तराखण्ड की राजनीति में सबसे अनुभवी, उत्तरप्रदेश में भी अपने संसदीय कौशल से सम्मान प्राप्त करने वाली नेत्री थीं। उनके निधन से उत्तराखंड के राजनीतिक-सामाजिक जीवन में जो सूनापन पैदा हो गया है, उसकी भरपाई बहुत मुश्किल होगी। वे ऐसी विरली राजनीतिक शख्सियत थी जो अतीत के मूल्यों को वर्तमान से जोड़कर मार्ग प्रशस्त करती रहीं। उत्तराखंड की पहली निर्वाचित विधानसभा में नारायण दत्त तिवारी जी की सरकार में वे सर्वाधिक महत्वपूर्ण मंत्री थी। संसदीय कार्य मंत्री होने के नाते भी सरकार की ओर से अधिकांशतः मोर्चा वही सभालती थीं। उनका संसदीय ज्ञान व कौशल उत्कृष्ट कोटि का था। उस दौर में सदन में जबरदस्त चर्चाएं होती थी, डा. हृदयेश सरकार की उपलब्धियों का प्रस्तुतीकरण व बचाव शालीनता व दृढ़ता के साथ करती थी। साथ ही विपक्षी दलों के विधायकों को भी उनसे स्नेह व हौसला अफजाई मिलती रही। आज के अन्य ताजा ‘नवीन समाचार’ पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें।

यह भी पढ़ें : अभिभाजित यूपी में मंत्री रहे वरिष्ठ भाजपा नेता सहित उनके परिवार में नौ दिन में चार मौतें…

नवीन समाचार, नैनीताल, 11 मई 2021। उत्तराखंड भाजपा के वरिष्ठ नेता एवं अविभाजित उत्तर प्रदेश में 1977 से 1979 तक वन एवं कानून मंत्री वन एवं कानून मंत्री रहे श्रीचंद का गत दिवस देहावसान हो गया। उनके साथ उनके दौर के खांटी राजनीतिज्ञों के एक युग का भी अंत हो गया। पेशे से अधिवक्ता स्वर्गीय श्रीचंद 1977 में जनता पार्टी के टिकट पर चुनाव जीते थे। वर्ष 2001 में वह भाजपा से जुड़ गए थे और वर्ष 2002 तथा 2007 में उन्होंने मुक्तेश्वर विधानसभा से भाजपा प्रत्याशी के रूप में चुनाव लड़ा था।
लेकिन इससे आगे खबर यह है कि बीते एक सप्ताह में ही उनके परिवार ने उनके साथ ही चार पारिवारिक सदस्यों को भी अज्ञात कारणों से खो दिया है। पहले श्रीचंद के बेटे मुकेश का निधन हुआ। इसके दो दिन बाद ही बीते नवंबर माह में अपना 92वां जन्मदिन मनाने वाले श्रीचंद ने इस दुनिया को अलविदा कह दिया। जबकि इसके पांच दिन बाद उनकी दो बेटियां भी इस दुनियां से विदा हो गईं। परिवार में नौ दिन के भीतर चार मौतों के बाद कोई कुछ भी कहने की स्थिति में नहीं है। परिवार में निःश्वास शोक छाया हुआ है।

स्वर्गीय श्रीचंद के सबसे करीबी लोगों में शामिल भाजपा नेता पुनीत टंडन ने बताया कि श्रीचंद के पुत्र मुकेश का बीती 29 अप्रैल को नैनीताल में निधन हो गया था। मुकेश कुमाऊं विवि के बायोटेक विभाग में कार्यरत थे। वह श्वास की बीमारी से भी ग्रस्त थे। उसके दो दिन बाद गत रविवार यानी दो मई को लंबी बीमारी के बाद श्रीचंद का भी हल्द्वानी में निधन हो गया। परिवार पिता-पुत्र के निधन के दुःख में ही था कि इधर सात मई हो नैनीताल के चिड़ियाघर रोड-भाबर हॉल में रहने वाले उनकी दो साठ वर्षीय अविवाहित पुत्रियों मीना और मंजू का भी निधन हो गया है।

7 मई को दोनों बहनों को स्वास्थ्य खराब होने पर परिजन हल्द्वानी लेकर जा रहे थे, तभी एक बहन की बल्दियाखान के पास रास्ते में ही मृत्यु हो गई, जबकि दूसरी बहन का हल्द्वानी के एक अस्पताल में निधन हो गया। स्व. श्रीचंद की पत्नी का पहले ही निधन हो चुका था। इस तरह नौ दिन के भीतर परिवार के चार सदस्यों को खोने के बाद परिवार पर दुःखों की कल्पना भी नहीं की जा सकती। श्री टंडन ने बताया कि उनके परिवार में दो पुत्र संजय व सुनील हैं। दोनों के ही फोन नहीं उठ रहे हैं। उन्होंने खुलासा किया कि मृतक सदस्यों में से संभवतया किसी की भी कोरोना जांच नहीं की गई थी। इधर, सोमवार को नगर पालिका के अधिशासी अधिकारी अशोक कुमार वर्मा ने स्वर्गीय चंद के परिवार में चार मौतें होने की पुष्टि करते हुए नगर के भाबर हॉल क्षेत्र को कंटेनमेंट जोन में तब्दील कर यहां पालिका की ओर से सेनिटाइजेशन कराने की जानकारी दी।

यह भी पढ़ें : स्मृति शेष : नैनीताल से खास लगाव था दिवंगत अभिनेता इरफान खान को

-राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय में साथ एक कमरे में रहकर ही पढ़े तथा कई सीरियल व नाटक करने वाले सिने अभिनेता इदरीश मलिक ने साझा की यादें

एक नाटक में इदरीश व इरफान सबसे बांये व सबसे दांये (फाइल फोटो)।

नवीन समाचार, नैनीताल, 29 अप्रैल 2020। बेहद कम उम्र में लंबी जिंदगी जीकर आज दिवंगत हुए सिने अभिनेता इरफान खान का थियेटर की नगरी नैनीताल से खास लगाव व खासकर अपने एनएसडी यानी राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय के सहपाठी इदरीश मलिक व सुनीता अवस्थी के होने की वजह से खास लगाव था। वह नगर में पिछले डेढ़ दशक से आयोजित हो रहे ग्रीष्म नाट्य महोत्सव की आयोजन समिति में भी थे और पांच-छह बार नैनीताल आये थे। उन्होंने नैनीताल के निकट ही रामगढ़ में करीब डेढ़-दो वर्ष पूर्व एक कॉटेज भी लिया था। आगे उनकी लगातार यहां आते-जाते रहने और बच्चों को कार्यशाला में थियेटर की कक्षाएं देने की योजना भी थी। लेकिन अफसोस कि इससे पहले ही दुनिया से विदा हो गये हैं।
नगर निवासी सिने कलाकार एवं ग्रीष्म नाट्य महोत्सव एवं मंच संस्था के प्रमुख इदरीश मलिक ने बताया कि 1984 से 87 तक एनएसडी में स्नातक की पढ़ाई दौरान तीन साल न केवल साथ वह इरफान के साथ वरन एक कमरे में रूम मेट की तरह रहे। इस दौरान आपस में एक-दूसरे का खर्च में भी हाथ-बंटाते हुए जिंगदी चलती थी। एनएसडी के तीन वर्षों में उन्होंने साथ में उरुभंगम, फुजियामा, इडिपस, फाइटिंग कॉक, लोवर डेप्थ सहित 20 से अधिक नाटक किये। फिर सात-आठ साल मुंबई में भी साथ बना रहा, और इस दौरान दोनों ने बनेगी अपनी बात, हमराही, भारत एक खोज व दिल्लगी सहित कई सीरियलों में साथ काम किया था। इधर उनकी साथ अभिनीत संजय मिश्रा द्वारा निर्देशित फिल्म ‘प्रणाम वालेकुम’ बनकर तैयार है, और शीघ्र रिलीज भी होने जा रही है, लेकिन इससे पहले ही उनके निधन के समाचार से इदरीश सहित पूरी फिल्मी दुनिया हतप्रभ रह गई है। इदरीश ने बताया कि वे अक्सर नैनीताल आते रहने थे और यहां गार्डन हाउस में रहते थे। इधर इरफान पेनक्रियाज व इदरीश की पत्नी कंवलजीत मलिक को आंतों में कैंसर से पीड़ित हुई। इस पर इदरीश ने उन्हें उपचार के लिए खुमानी के बीज भिजवाये थे। ऐसे में इरफान के असमय निधन से बेहद दुःखी इदरीश ने कहा कि यह दुःखद संयोग अथवा दुर्योग ही है कि इरफान को बर्सोवा के कब्रिस्तान में दफनाया गया है, जहां इदरीश का घर है। इदरीश ने इस पर कहा, अलविदा दोस्त, बर्सोवा में हर रोज मिलेंगे।

यह भी पढ़ें : युवा कुमाऊं विवि कर्मी की अज्ञात कारणों से मृत्यु

मृतक कुविवि कर्मी अभिषेक बेदी।

नवीन समाचार, नैनीताल, 28 अप्रैल 2020। कुमाऊं विवि के डिग्री विभाग में कार्यरत कर्मचारी अभिषेक बेदी की मंगलवार सुबह अज्ञात कारणों से संदिग्ध परिस्थितियों में मृत्यु हो गयी। बताया गया कि सुबह नगर के मल्लीताल बेकरी लाइन स्थित आवास में जब परिवार के लोग उनके देर तक न जागने पर उनके कमरे में गये तो वह बिस्तर पर औंधे मुंह पड़े मिले और उनकी मृत्यु हो चुकी थी। इस पर परिजनों ने निकटवर्ती पाइंस स्थित श्मशाम घाट में उनका अंतिम संस्कार कर दिया है।
पारिवारिक सूत्रों ने बताया कि 26 वर्षीय अभिषेक को किसी तरह की स्वास्थ्य संबंधी समस्या नहीं थे। दो भाई व एक बहन में सबसे छोटे अभिषेक सबसे छोटे थे। उनके पिता विनोद कुमार कुमाऊं विवि में ही संगीत विभाग में कार्यरत थे व अच्छे संगीतकार थे। उनका कुछ वर्ष ही असामयिक निधन हो गया था। अभिषेक बीती मध्य रात्रि तक अपने मोबाइल पर ऑनलाइन बताये गये हैं। लेकिन इसके बाद क्या हुआ कि सुबह वह सोते हुए ही मृत मिले। परिजनों ने बताया कि उन्होंने सीने में दर्द की समस्या बताई थी।

यह भी पढ़ें : कर्मचारी नेता का असामयिक निधन, कर्मचारियों-प्रशासनिक अधिकारियों में शोक की लहर

नवीन समाचार, नैनीताल, 16 अप्रैल 2020। नैनीताल जनपद के जिला कलक्ट्रेट मिनिस्टीरियल कर्मचारी संघ के जिलाध्यक्ष, बेहद मिलनसार एवं कर्तव्यनिष्ठ कर्मी गिरीश पांडे का बुधवार मध्य रात्रि असामयिक निधन हो गया। लीवर की समस्याओं एवं पीलिया होने के कारण उन्हें बीती 11 अप्रैल को हल्द्वानी के एक निजी अस्पताल में उपचार के लिए भर्ती कराया गया था। यहां उपचार के दौरान रात्रि 12 बजे उन्होंने दम तोड़ दिये।
50 वर्षीय कर्मचारी नेता पांडे जिला कलक्ट्रेट में अपर जिलाधिकारी के पेशकार के पद पर कार्यरत थे। वे अपने पीछे पत्नी एवं एक 8 वर्षीय पुत्र, पुत्री, भाई राजीव पांडे एवं बड़ी विवाहिता बहन सहित अन्य परिजनों को शोक संतप्त छोड़ गए हैं। बताया गया है कि बीती सात अप्रैल तक वह कार्य पर आये थे, तभी उनका स्वास्थ्य खराब होने लगा था। वे नगर में तल्लीताल रोजविला कंपाउंड में रहते थे और हल्द्वानी में भी उनका पुस्तैनी घर था। यहीं उनके पार्थिव शरीर को रखा गया है। यहां एडीएम केएस टोलिया व एसएस जंगपांगी, नैनीताल के एसडीएम विनोद कुमार, जिलाधिकारी के वैयक्तिक अधिकारी कवींद्र पांडे, गौरव पांडे, राजेंद्र जोशी, धमेंद्र किरौला, अनिल शर्मा, पूरन तिवाड़ी, कमल राणा, महेंद्र बिष्ट व भगवत सिंह आदि अधिकारी-कर्मचारी उनके अंतिम दर्शनों को पहुंचे एवं परिजनों के प्रति शोक संवेदना व्यक्त की। इसके बाद उनके आज ही रानीबाग स्थित चित्रशिला घाट पर अंतिम संस्कार की तैयारी की जा रही है।

यह भी पढ़ें : वरिष्ठ कांग्रेस नेता कर्ण सिंह की फुफेरी बहन का नैनीताल में निधन, लॉक डाउन की वजह से नहीं पहुंच पाए दोनों पुत्र

नवीन समाचार, नैनीताल, 15 अप्रैल 2020। जम्मू कश्मीर रियासत के पूर्व राजा और वरिष्ठ कांग्रेस नेता कर्ण सिंह की फुफेरी बहन एवं कत्यूरी राजवंश के अस्कोट के रजवार परिवार की बहू किरण पाल का मंगलवार की सुबह असामयिक निधन हो गया। वे 92 वर्ष की थीं। मंगलवार को ही पाइंस स्थित श्मशान घाट पर उनका अंतिम संस्कार कर दिया गया। लॉक डाउन के कारण उनके दोनों बेटे-ओमान में कार्यरत डॉ. यतेंद्र सिंह पाल तथा मुंबई में कार्यरत तरुण पाल अंतिम संस्कार के लिए नहीं पहुंच पाये। ऐसे में उनके देवर पूर्व सांसद डा. महेंद्र सिंह पाल एवं पोते अभ्युदय पाल ने उन्हें मुखाग्नि दी। स्वर्गीय किरन अपने पीछे दो पुत्रों तथा विवाहित पुत्री अंजली सिंह का भरा पूरा परिवार छोड़ गई हैं। उनके पति स्वर्गीय कुंवर गजराज सिंह पाल नगर में सेल्स टैक्स विभाग में असिस्टेंट कमिश्नर पद से सेवानिवृत्त हुए थे।

यह भी पढ़ें : अंतर्राष्ट्रीय मामलों के जानकार प्रसिद्ध अर्थशास्त्री प्रो. पांडे का मुंबई में हुआ निधन

प्रो. गिरीश चंद्र पांडे

 

नवीन समाचार, नैनीताल, 1 मार्च 2020। अंतर्राष्ट्रीय व्यापार, आर्थिक विकास, उन्नति एवं आर्थिक योजनाओं के विशेष जानकार रहे कुमाऊं विवि के डीएसबी परिसर में अर्थशास्त्र विभाग के पूर्व आचार्य एवं विभागाध्यक्ष प्रो. गिरीश चंद्र पांडे (82) का रविवार की सुबह मुंबई में देहावसान हो गया। उनकी पुत्री मुंबई में तथा पुत्र अमेरिका में रहते हैं। जबकि वे अपनी पत्नी के साथ प्रो. पांडे नगर में चिड़ियाघर रोड में रहते थे। इधर वे अपनी पुत्री के घर गये थे।

विद्वता के धनी प्रो. पांडे ने लखनऊ विवि से अर्थशास्त्र में पीएचडी की तथा राजस्थान एवं उत्तर प्रदेश के कई महाविद्यालयों में सहायक प्राध्यापक के रूप में सेवाएं दीं। कुमाऊं विवि से वे 1973 में इसकी स्थापना के समय से ही जुड़ गए थे। उन्होंने इकॉलॉजी ऑफ उत्तराखंड-1978 तथा स्टडी मैथल इन इकॉनॉमिक्स तथा इकॉनॉमिक डेवलपमेंट ऑफ प्लानिंग उनकी प्रसिद्ध कृतियां हैं। 1998 में वे डीएसबी परिसर से सेवानिवृत्त हुए थे। उच्च कोटि के वक्ता तथा विचारात्मक आलोचना उनके व्यक्तित्व के अन्य लक्षण रहे। प्रो. पांडे के निधन पर कुमाऊं विवि शिक्षक संघ-कूटा के अध्यक्ष प्रो. ललित तिवारी, डा. सुचेतन साह, डा. विजय कुमार, डा. दीपक, डा. दीपिका, डा. सोहेल जावेद, डा. प्रदीप साह, प्रो. आरएस जलाल, डा. रेनू जलाल, डा. रजनीश पांडे, डा. नंदन बिष्ट, प्रो. बीएल साह, डा. जया तिवारी प्रो. अमित जोशी, डा. गोकुल सनवाल व डा. स्पर्श भट्ट आदि ने गहरा दुःख व्यक्त किया है।

यह भी पढ़ें : कुमाऊं रेंज के पूर्व डीआईजी सलाल का कैंसर से निधन

नवीन समाचार, हल्द्वानी, 16 फरवरी 2020। वर्ष 2015 में उत्तराखंउ के कुमाऊं परिक्षेत्र के पुलिस उप महानिरीक्षक रहे पुष्कर सिंह सलाल का असामयिक निधन हो गया है। शनिवार रात्रि शहर के कलावती कालोनी स्थित आवास पर उन्होंने अंतिम सांस ली। बताया गया है कि पूर्व डीआईजी सलाल जून 206 में सेवानिवृत्त होने के बाद से ही कैंसर से पीड़ित थे। इसका उपचार कराने के लिए वे अपनी पुत्री के पास ऑस्ट्रेलिया भी गए थे। उनके एक पुत्र व दो पुत्रियां हैं। उनका अंतिम संस्कार रविवार को रानीबाग स्थित चित्रशिला घाट में कर दिया गया। पुलिस की गारद के द्वारा उन्हें अंतिम सलामी भी दी गई। कुमाऊं परिक्षेत्र के वर्तमान पुलिस उप महानिरीक्षक जगत राम जोशी व एएसपी अमित श्रीवास्तव भी उनकी अंतिम यात्रा में शामिल हुए।

यह भी पढ़ें : नैना देवी मंदिर ट्रस्ट के न्यासी व राज्य आंदोलनकारी साह का असामयिक निधन

नवीन समाचार, नैनीताल, 6 फरवरी 2020। सरोवरनगरी नैनीताल की आराध्य देवी माता नयना के मंदिर की व्यवस्थाएं संभालने वाले श्री मां नैना देवी मंदिर अमर उदय ट्रस्ट के संस्थापक न्यासी व कोषाध्यक्ष जेपी साह का बृहस्पतिवार शाम असामयिक निधन हो गया है। मंदिर ट्रस्ट से प्राप्त जानकारी के अनुसार 84 वर्षीय साह ने शाम करीब चार बजे अपने कैलाखान स्थित आवास पर हृदयाघात होने के बाद अंतिम सांस ली। स्वर्गीय साह राज्य कर्मचारी महासंघ के अध्यक्ष रहे थे तथा उनकी उत्तराखंड राज्य आंदोलन में भी प्रमुख भूमिका रही थी। उनकी अंतिम यात्रा शुक्रवार सुबह 11 बजे उनके आवास से प्रारंभ होगी। स्वर्गीय साह अपने पीछे एक पुत्र सहित भरा-पूरा परिवार छोड़ गए हैं। वे 1984 में श्री मां नैना देवी मंदिर अमर उदय ट्रस्ट स्थापना से ही न्यास में विभिन्न व्यवस्थाओं से जुड़े हुए थे, तथा धार्मिक परंपराओं के काफी जानकार थे। उनके बड़े भाई विश्वंभर नाथ साह ‘सखा दाज्यू’ भी कर्मचारी नेता एवं रंगकर्मी एवं शिल्पी हैं।

यह भी पढ़ें : वरिष्ठ अधिवक्ता व पूर्व सभासद का देहावसान

नवीन समाचार, नैनीताल, 5 फरवरी 2020। नैनीताल के तल्लीताल इंद्रा काटेज निवासी वरिष्ठ अधिवक्ता डीडी सांगुड़ी का बुधवार की सुबह 86 वर्ष की उम्र में देहावसान हो गया। उन्होंने हल्द्वानी देवलचौड़ स्थित अपने आवास पर अंतिम सांस ली। बताया गया है कि यहीं से बृहस्पतिवार सुबह 9 बजे उनकी अंतिम यात्र चित्रशिला घाट रानीबाग के लिए प्रारंभ होगी। उल्लेखनीय है कि सांगुड़ी जिला बार एसोसिएशन नैनीताल के अध्यक्ष एवं नगर पालिका नैनीताल के सभासद रहे एवं उन्होंने नगर पालिका अध्यक्ष पद का चुनाव भी लड़ा। वह अपने पीछे पत्नी, एक पुत्र-पुत्रवधू, पुत्री-दामाद समेत भरापुरा परिवार छोड़ गए हैं। उनके निधन पर जिला बार एसोसिएशन में बुधवार को शोक सभा आयोजित की गई।

यह भी पढ़ें : कर्मचारी नेता एवं धार्मिक संस्थाध्यक्ष भाइयों को मातृशोक

राम सेवक सभा अध्यक्ष को मातृ शोकनवीन समाचार, नैनीताल, 21 जनवरी 2020। नगर की सुप्रसिद्ध धार्मिक-सांस्कृतिक संस्था श्रीराम सेवक सभा के अध्यक्ष मनोज साह एवं जल संस्थान कर्मचारी संघ के नगर अध्यक्ष तथा पूर्व में इंजॉय म्यूजिक चैनल चलाने वाले विजय साह की माता कला साह का मंगलवार को देहावसान हो गया। वे 90 वर्ष की थीं, और इधर कुछ समय से अस्वस्थ चल रही थीं। वे अपने पीछे दो पुत्र एवं दो पुत्रियों का भरापूरा परिवार रोता-बिलखता छोड़ गई हैं। मंगलवार अपराह्न करीब सवा तीन बजे उन्होंने अपने आवास पर ही अंतिम सांस ली। उनकी अंतिम यात्रा बुधवार सुबह साढ़े 10 बजे पाइंस स्थित श्मशान घाट के लिए निकलेगी। उनके निधन से श्रीराम सेवक सभा के साथ नगर के धार्मिक-सामाजिक एवं कर्मचारी संगठनों में शोक की लहर छा गई है।
 

यह भी पढ़ें : रंगकर्मी एवं राज्य आंदोलनकारी बिष्ट का असामयिक निधन

स्वर्गीय भुवन बिष्ट।

 

नवीन समाचार, नैनीताल, 7 जनवरी 2019। शहर के वरिष्ठ रंगकर्मी, राज्य आंदोलनकारी व ग्राम विकास अधिकारी के पद पर कार्यरत भुवन बिष्ट का सोमवार देर रात्रि असामयिक निधन हो गया है। करीब 55 वर्षीय स्वर्गीय बिष्ट लंबे समय से अभिनय एवं निर्देशन के जरिये रंगमंच, फ़िल्म एवं टीवी से जुड़े थे। इधर करीब 2 माह से वह पेट संबंधी समस्याओं से ग्रस्त से इसका उपचार एम्स दिल्ली में कराने के बाद इधर वह घर आ गए थे। बीती रात्रि पेट में दर्द की शिकायत पर उन्हें मुख्यालय स्थित बीडी पांडे जिला चिकित्सालय ले जाया गया जहां चिकित्सकों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। उनके कला जगत से जुड़े व साथ में करीब तीन दर्जन छोटी-बड़ी फिल्मों व टीवी सीरियल में अभिनय कर चुके मित्र रितेश सागर ने बताया कि भुवन पहले ट्रेवल्स के कारोबार में थे। करीब 45 वर्ष की उम्र में वे राज्य आंदोलनकारी होने के नाते ग्राम विकास अधिकारी के पद पर सरकारी सेवा में आ गए थे व वर्तमान में बेतालघाट में कार्यरत थे। उन्होंने संस्कृत नाटक दशरथ, शैलेष मटियानी की कहानी पर आधारित गोपुली गफूरन, तिल का ताड़ व जिस लाहौर नहीं देख्या आदि नाटको का निर्देशन भी किया था तथा युगमंच, कुटुंब व मंच आदि के साथ अनेकों नाटक व नुक्कड़ नाटक आदि भी किये थे। वे अपने पीछे पत्नी, पुत्र ऋषभ व पुत्री खुशी सहित पूरे परिवार को रोता-बिलखता छोड़ गए हैं। उनके असामयिक निधन से कला जगत में शोक की लहर छा गई है। उनकी अंतिम यात्रा में रितेश सागर, ज़हूर आलम, राजेश आर्य, नवीन बेगाना, भाष्कर बिष्ट, मनोज साह ‘टोनी’, डॉ. मोहित सनवाल व इदरीश मलिक आदि रंगकर्मी शामिल रहे एवं उनके असामयिक निधन पर श्रद्धांजलि व्यक्त की।

यह भी पढ़ें : भवाली में रहने वाले करगिल युद्ध के हीरो, अटल जी के सिपहसालार एडमिरल सुशील कुमार का निधन

नवीन समाचार, नई दिल्ली/नैनीताल, 27 नवंबर 2019। लंबे वक्त से बीमार पूर्व भारतीय नौसेना प्रमुख एडमिरल सुशील कुमार का आज दिल्ली में निधन हो गया। उन्होंने वर्ष 1998-2000 के बीच नौसेना प्रमुख का पदभार संभाला था। वे सेवानिवृत्त होने के बाद से पिछले 15 सालों से नैनीताल जिला मुख्यालय के निकट भवाली गोलूधार में रह रहे  थे। पूर्व एडमिरल सुशील कुमार ने 1965-1971 में पाकिस्तान के खिलाफ जंग भी लड़ा था। बता दें कि वह गोवा मुक्ति संग्राम में भी शामिल थे। उनकी जांबाजी के मद्देनजर उन्हें परम विशिष्ट सेवा मेडल, उत्तम युद्ध मेडल से सम्मानित किया गया था।

गौरतलब है कि जुलाई में प्रकाशित अपनी किताब में उन्होंने खुलासा करते हुए लिखा था कि संसद पर हुए हमले के बाद तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने पाकिस्तान के खिलाफ सर्जिकल स्ट्राइक की तरह PoK में एयर स्ट्राइक की योजना बनाई थी।

एडमिरल सुशील कुमार की ‘ए प्राइममिनिस्टर टू रीमेम्बर’ पुस्तक

“ए प्राइममिनिस्टर टू रीमेम्बर: मेमोरीज ऑफ़ ए मिलिट्री चीफ” नामक पुस्तक का हाल ही में विमोचन किया गया, इस पुस्तक को नौसेना के पूर्व प्रमुख एडमिरल सुशील कुमार द्वारा लिखा गया है। यह पुस्तक पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी जी द्वारा लिए गये प्रमुख रक्षा निर्णयों पर आधारित है। एडमिरल सुशील कुमार 1998 से 2001 के बीच नौसेना प्रमुख रहे।

मुख्य बिंदु

एडमिरल सुशील कुमार द्वारा लिखित पुस्तक के अनुसार 1999 की कारगिल की लड़ाई श्री अटल बिहारी वाजपेयी की सबसे उत्कृष्ठ उपलब्धियों में से एक थी। उन्होंने सामरिक नुकसान को बेहतरीन विजय में परिवर्तित का श्रेय अटल बिहारी वाजपेयी को दिया है। श्री वाजपेयी ने सेना को LoC पार न करने का निर्देश दिया था, उन्होंने पाकिस्तानी घुसपैठियों को अपने क्षेत्र से बाहर करने के लिए कहा था।

इस पुस्तक में कहा गया है कि भारतीय संसद पर हुए हमले (13 दिसम्बर, 2001) के बाद श्री वाजपेयी पाकिस्तानी सेना के कैंप को नष्ट करना चाहते थे, परन्तु बाद में किन्ही कारणों से उन्हें इस योजना को टालना पड़ा। एडमिरल सुशील कुमार के अनुसार तत्कालीन विदेश मंत्री जसवंत सिंह 9/11 हमले के बाद अमेरिका के अफ़ग़ानिस्तान पर युद्ध में अमेरिका को समर्थन देना चाहते थे, परन्तु सैन्य प्रमुख इस पर सहमत नहीं थे, श्री वाजपेयी ने सैन्य प्रमुखों के निर्णय का समर्थन किया था।

यह भी पढ़ें : कांग्रेस पार्टी के प्रदेश सचिव फर्त्याल को पत्नी शोक

नवीन समाचार, नैनीताल, 12 नवंबर 2019। उत्तराखंड कांग्रेस के बड़े नेता, प्रदेश सचिव त्रिभुवन फर्त्याल की धर्मपत्नी सोना फर्त्याल का आकस्मिक निधन हो गया है। पारिवारिक सदस्यों के अनुसार 38 वर्षीया सोना बीते कुछ समय से अस्वस्थ चल रही थीं। दो दिन पूर्व उन्हें हृदयाघात हुआ, जिसके बाद उन्हें दिल्ली के एक अस्पताल में भर्ती कराकर उपचार कराया जा रहा था, किंतु उन्हें बचाया नहीं जा सका। सोमवार शाम करीब साढ़े सात बजे उन्होंने अंतिम सांस ली। त्रिभुवन एवं सोना का विवाह वर्ष 2009 में हुआ था। उनकी एक पुत्री का वर्ष 2010 में अल्पायु में ही निधन हो गया था। इसके बाद उनकी कोई संतान नहीं थी। उल्लेखनीय है त्रिभुवन नगर की सर्वजनिन दुर्गा पूजा कमेटी सहित कई अन्य संगठनों से जुड़े एवं पूर्व में नगर पालिका नैनीताल के मनोनीत सभासद भी रहे हैं। वर्तमान में वे पंगूठ होटल एसोसिएशन के अध्यक्ष एवं व्यापारी नेता भी हैं।

यह भी पढ़ें : उत्तराखंड चिन्हित राज्य आंदोलनकारी समिति के केंद्रीय अध्यक्ष जेपी पांडे का आकस्मिक निधन

नवीन समाचार, हरिद्वार, 11 नवंबर 2019। उत्तराखंड चिन्हित राज्य आंदोलनकारी समिति के केंद्रीय अध्यक्ष जेपी पांडे के दुर्घटना में आकस्मिक निधन का दुखद समाचार है। प्राप्त जानकारी के अनुसार पांडे बीती रात्रि हरिद्वार में एक विवाह समारोह में शामिल होने गए थे। तभी अज्ञात वाहन ने उनके वाहन को टक्कर मार दी, जिसके कारण उनका निधन हो गया। स्वर्गीय पांडे लंबे समय से राज्य आंदोलनकारी के हितों के लिए संघर्षरत थे। उनके निधन से राज्य आंदोलनकारियों के संघर्ष में व्यवधान आना तय है। उनके निधन से राज्य अधिकारियों में शोक की लहर व्याप्त हो गई है। उनका अंतिम संस्कार आज हरिद्वार में किया जाएगा।

यह भी पढ़ें : नैनीताल के राष्ट्रीय हॉकी खिलाड़ी रहे राजेंद्र का असामयिक निधन

नवीन समाचार, नैनीताल, 31 अक्टूबर 2019। नगर के सीआरएसटी इंटर कॉलेज से निकलकर 1980-90 के दौर में इलाहाबाद व जालंधर की टीमों से खेलने वाले राष्ट्रीय हॉकी खिलाड़ी रहे 55 वर्षीय राजेंद्र ठठोला का असामयिक देहावसान हो गया है। बृहस्पतिवार सुबह तड़के तीन बजे के करीब उन्होंने अपने मल्लीताल स्थित आवास पर अंतिक सांस ली। 1999 में इलाहाबाद से हॉकी के कोच के रूप में रामपुर छोड़कर नैनीताल आते वक्त रामपुर रेलवे स्टेशन पर एक दुर्घटना में अपने दोनों पैर गंवाने के बावजूद पूरा जीवन अविवाहित रहे राजेंद्र में गजब की जीवटता थी। उनके निधन से दो माह पूर्व ही अपनी माता की मृत्यु से दुःखी उनके परिवार पर दुःखों का पहाड़ टूट पड़ा है। वे अपने पीछे अपने चार भाई नारायण सिंह ठठोला, दीपक सिंह ठठोला, जगदीश सिंह ठठोला व भुवन सिंह ठठोला ‘गुड्डू’ एवं बहन सरस्वती बिष्ट को रोता-बिलखता छोड़ गए हैं। वे मूल रूप से अल्मोड़ा जनपद के रानीखेत के निकट दौलाघट-हवालबाग के ग्राम मैणी रहने वाले थे।

यह भी पढ़ें : दिवंगत वरिष्ठ पत्रकार दीप जोशी को दी गई श्रद्धांजलि..

नवीन समाचार, नैनीताल, 18 अक्तूबर 2019। बुधवार को दिल्ली में दिवंगत हुए प्रदेश के वरिष्ठ पत्रकार दीप जोशी को शुक्रवार को नगर के पत्रकारों ने शोक सभा कर श्रद्धांजलि दी। जिला सूचना कार्यालय में आयोजित हुई शोक सभा में पत्रकारों ने स्वर्गीय जोशी के साथ मुख्यालय में कार्य के दौरान की यादों को साझा किया। इस मौके पर सहायक सूचना अधिकारी नदीम अहमद, जगदीश जोशी, नवीन जोशी, किशोर जोशी, कमल जगाती, रितेश सागर, भूपेंद्र मोहन रौतेला व रवि पांडे आदि ने कहा कि हिंदी माध्यम के विद्यालयों से पढ़ने के बावजूद जोशी प्रदेश की अंग्रेजी माध्यम की पत्रकारिता के स्तंभ थे। उन्हें विषय की गंभीर समझ थी और उनके लेख विषय पर अलग व गहन दृष्टि लिए हुए होते थे। उन्होंने प्रदेश के सभी तरह के विषयों पर धरातली पत्रकारिता की। प्रदेश की पत्रकारिता में बड़ा कद होने के बावजूद वे जमीन से जुड़े हुए थे और बेहद सहज व सरल व्यवहार वाले थे। वे कनिष्ठों के लेखन की भी प्रशंसा करते थे और उन्हें लेखन की बेहतर दृष्टि भी देते थे। संचालन अफजल हुसैन फौजी ने किया। इस मौके पर नवीन तिवारी, दीपक कुमार, संतोष बोहरा सहित कई अन्य पत्रकार भी मौजूद रहे। बुधवार को दिल्ली में दिवंगत हुए प्रदेश के वरिष्ठ पत्रकार दीप जोशी को शुक्रवार को नगर के पत्रकारों ने शोक सभा कर श्रद्धांजलि दी। जिला सूचना कार्यालय में आयोजित हुई शोक सभा में पत्रकारों ने स्वर्गीय जोशी के साथ मुख्यालय में कार्य के दौरान की यादों को साझा किया।

इस मौके पर सहायक सूचना अधिकारी नदीम अहमद, जगदीश जोशी, नवीन जोशी, किशोर जोशी, कमल जगाती, रितेश सागर, भूपेंद्र मोहन रौतेला व रवि पांडे आदि ने कहा कि हिंदी माध्यम के विद्यालयों से पढ़ने के बावजूद जोशी प्रदेश की अंग्रेजी माध्यम की पत्रकारिता के स्तंभ थे। उन्हें विषय की गंभीर समझ थी और उनके लेख विषय पर अलग व गहन दृष्टि लिए हुए होते थे। उन्होंने प्रदेश के सभी तरह के विषयों पर धरातली पत्रकारिता की। प्रदेश की पत्रकारिता में बड़ा कद होने के बावजूद वे जमीन से जुड़े हुए थे और बेहद सहज व सरल व्यवहार वाले थे। वे कनिष्ठों के लेखन की भी प्रशंसा करते थे और उन्हें लेखन की बेहतर दृष्टि भी देते थे। इस दौरान पत्रकारों ने स्वर्गीय जोशी की आत्मा की शांति के लिए दो मिनट का मौन रखकर उन्हें श्रद्धांजलि दी, तथा उनके परिवार को इस दारुण दुःख को सहने की सामर्थ्य प्रदान करने के लिए ईश्वर से प्रार्थना की। साथ ही आवश्यकता होने पर उनके परिवार को हर स्तर पर मदद करने की बात भी कही गई। संचालन अफजल हुसैन फौजी ने किया। इस मौके पर नवीन तिवारी, दीपक कुमार, संतोष बोहरा सहित कई अन्य पत्रकार भी मौजूद रहे। इधर कूटा यानी कुमाऊं विवि शिक्षक संघ के अध्यक्ष प्रो. ललित तिवारी सहित अन्य सदस्यों ने भी स्वर्गीय जोशी को श्रद्धांजलि अर्पित की है।

यह भी पढ़ें : शोक समाचार : वरिष्ठ पत्रकार दीप जोशी का निधन, पत्रकारिता जगत में शोक की लहर

नवीन समाचार, नैनीताल, 17 अक्टूबर 2019। मुख्यालय में कार्य कर चुके एवं वर्तमान में देहरादून में अंग्रेजी समाचार पत्र-हिंदुस्तान टाइम्स के लिए पत्रकारिता करने वाले दीप जोशी का असामयिक निधन हो गया है। प्राप्त जानकारी के अनुसार वे करीब तीन माह से कैंसर से पीड़ित थे और दिल्ली में उनका उपचार चल रहा था। इसी दौरान बुधवार को उनका असामयिक निधन हो गया। बृहस्पतिवार अपराह्न लोधी रोड स्थित श्मशान घाट में उनका अंतिम संस्कार कर दिया गया। दीप लंबे समय तक नैनीताल में अंग्रेजी समाचार पत्र के लिए पत्रकारिता करते रहे। ऐसे मंे उनके असामयिक निधन का समाचार मिलते ही नगर के पत्रकारों में शोक की लहर छा गई। उल्लेखनीय है कि स्वर्गीय जोशी नैनीताल जनपद के ही हल्द्वानी गौलापार के ग्राम पश्चिमी खेड़ा के निवासी थे। उनके भाई राजेश जोशी भी बीबीसी में पत्रकार हैं।

यह भी पढ़ें : अचानक चला गया ‘कोसी का घटवार’ व ‘मधुली’ का हीरो-जूली

-रंगकर्मी पंकज चौधरी ‘जूली’ का हृदयाघात से निधन

फिल्म मधुली के पोस्टर में टॉम ऑल्टर एवं फिल्म की नायिका के साथ नायक के रूप में स्वर्गीय पंकज चौधरी ‘जूली’।

नवीन समाचार, नैनीताल, 14 अक्टूबर 2019। शेरवुड कॉलेज के जूनियर स्कूल में शिक्षक के पद पर कार्यरत रहे अभिनेता व थियेटर कलाकार पंकज चौधरी ‘जूली’ का सोमवार अपराह्न असामयिक निधन हो गया। उनके निधन का समाचार सुनते ही नगर के कला जगत से जुड़े लोगों को सहसा विश्वास नहीं हुआ, और उनमें शोक की लहर छा गई। प्राप्त जानकारी के अनुसार करीब 49 वर्षीय पंकज शेरवुड कॉलेज में आगामी 23 अक्टूबर को आयोजित होने जा रहे हिंदी नाटक की बच्चों से तैयारी करा रहे थे। इसी बीच सोमवार दोपहर उन्होंने सीने में दर्द व घबराहट की शिकायत बताई, इस पर उन्हें कॉलेज की एंबुलेंस से बीडी पांडे जिला चिकित्सालय लाया गया। वे चिकित्सालय पहुंचने तक भी बात कर रहे थे, किंतु इसी बीच संभवतया दूसरा हृदयाघात होने पर उन्होंने दम तोड़ दिया। वे अपने पीछे पत्नी व पुत्र आदि परिवारजनों को रोता बिलखता छोड़ गए हैं। उनकी अंतिम यात्रा मंगलवार को भोपाल से उनके भाई के पहुंचने के बाद दोपहर 12 बजे निकलेगी।

उल्लेखनीय है पंकज ने दूरदर्शन लखनऊ द्वारा वरिष्ठ साहित्यकार शेखर जोशी द्वारा लिखित प्रसिद्ध कहानी ‘कोसी का घटवार’ पर बनी फिल्म में मुख्य किरदार निभाया था। साथ ही उन्होंने नगर के सुहृद सुदर्शन साह द्वारा टॉम ऑल्टर, गिरीश तिवारी ‘गिर्दा’ आदि को लेकर बनाई हिंदी-कुमाउनी फिल्म मधुली में भी हीरो का किरदार निभाया था। मूलतः युगमंच से जुड़े ने युगमंच के लिए कई नाटक व बच्चों की वर्कशॉप भी कीं। युमगंच के लिए उन्होंने गिरगिट, अजुवा बफौल, जॉर्ज पंचम की नाक, नाटक जारी है, दुलारी बाई, जिन लाहौर नहीं देख्या, तीन कैदी, नारद मोह, श्रवणकुमार, बड़ा साहब आदि नाटकों में अभिनय किया तथा बड़े भाई साहब, गोपुली गफूरन, राम सजीवन की प्रेम कथा व डाकू, में अभिनय करने के साथ इनका निर्देशन भी किया। उनके निधन का समाचार सुनते ही युगमंच के प्रमुख जहूर आलम, सुहृद सुदर्शन साह सहित अनेक लोग उनके रॉयल होटल के पास स्थित आवास की ओर चल पड़े।

यह भी पढ़ें : अभी-अभी नैनीताल के पूर्व कांग्रेस (ति) जिलाध्यक्ष का निधन

नवीन समाचार, नैनीताल, 11 अक्टूबर 2019। संयुक्त नैनीताल जनपद में नारायण दत्त तिवारी द्वारा गठित ‘तिवारी कांग्रेस’ के जिलाध्यक्ष रहे कांग्रेस पार्टी के वयोवृद्ध नेता किशन लाल साह ‘कोनी’ का शुक्रवार सुबह देहावसान हो गया। वे 94 वर्ष के थे। अभी हाल तक पार्टी की गतिविधियों में पूरी तरह से सक्रिय कोनी गत माह तल्लीताल बाजार में गिर गए थे, तब से वे अधिक उम्र के कारण उबर नहीं पा रहे थे। शुक्रवार सुबह 10 बजे उन्होंने अंतिम सांस ली। उनके दो पुत्र थे, जिनमें से एक का निधन हो गया था। वे अपने पीछे पत्नी लक्ष्मी साह, पुत्र आशुतोष साह ‘कन्नू’ व पुत्री विशाखा साह का भरा-पूरा परिवार छोड़ गए हैं। उनके निधन की सूचना से कांग्रेस पार्टी में शोक व्याप्त हो गया है। लोग उनके घर श्रद्धांजलि देने पहुंच रहे हैं। पारिवारिक सूत्रों के अनुसार उनका अंतिम संस्कार आज ही अपराह्न दो बजे पाइंस स्थित श्मशान घाट में किया जाएगा। वे पंडित नारायण दत्त तिवारी के साथ ही पंडित गोविंद बल्लभ पंत के भी साथ रहे। उन्हें राजनीतिक इतिहास की भी अच्छी जानकारी थी।

यह भी पढ़ें : भाजपा नेता हरबोला को भ्रातृ शोक

नवीन समाचार, नैनीताल, 14 सितंबर 2019। भाजपा के प्रदेश कार्यकारिणी सदस्य व पूर्व जिलाध्यक्ष तथा लोकतंत्र सेनानी भुवन चंद्र हरबोला को छः माह के भीतर एक बार पुनः भ्रातृशोक हो गया है। उनके मंझले भाई चंद्रशेखर हरबोला (72) का शुक्रवार को एम्स दिल्ली में देहावसान हो गया। द्वाराहाट के प्रतिष्ठित व्यवसायी चंद्रशेखर लंबे समय से श्वांस संबंधी बीमारी से ग्रस्त थे। वह अपने पीछे दो पुत्र एवं एक पुत्री का भरा पूरा परिवार शोक संतप्त कर गये हैं। उल्लेखनीय है कि करीब छः माह पूर्व ही उनके छोटे भाई तारा दत्त हरबोला का भी निधन हो गया था।

यह भी पढ़ें : स्मृति शेष: नैनीताल में उत्तराखंड का हाईकोर्ट नहीं, राजधानी चाहते थे जेटली, यहां राजभवन गेस्ट हाउस का किराया खुद दिया था…

-कई बार आये थे, नगर में थे उनके निजी मित्र, नगर व यहां के मंदिरों से थे अच्छे वाकिफ

10 सितंबर 2016 को नैनीताल राजभवन आगमन पर उनकी अगवानी करते तत्कालीन राज्यपाल डा. केके पॉल।

नवीन जोशी @ नवीन समाचार, नैनीताल, 24 अगस्त 2019। पूर्व केंद्रीय वित्त, रक्षा मंत्री व सूचना एवं प्रसारण मंत्री एवं भाजपा के रणनीतिकार, चाणक्य कहे जाने वाले देश के बड़े नेता अरुण जेटली का शनिवार को 67 वर्ष की आयु में असामयिक निधन हो गया। उनका पहाड़ों, झीलों व खासकर नैनीताल से खास भावनात्मक संबद्ध रहा। बड़ी बात यह कि वे नैनीताल में उत्तराखंड के उच्च न्यायालय की जगह राज्य की राजधानी बनाने के पक्षधर रहे, और यहां राजधानी न बना पाने की उन्हें टीस भी रही। उनमें स्वभावतगत इमानदारी थी। नैनीताल राजभवन में केंद्रीय मंत्री रहते भी वे आये तो जिन कमरों में रहे, उनका किराया उन्होंने स्वयं दिया। नैनीताल में उनके निजी मित्र भी थे, और वह नगर के रास्तों-मंदिरों आदि से अच्छी तरह वाकिफ थे, और यहां नितांत अकेले भी घूमने निकल जाते थे, और स्वयं यहां आकर आत्मिक शांति प्राप्त करने के साथ ही यहां की समस्याओं से चिंतित भी होते थे।

11 सितंबर 2016 को नैनीताल राजभवन में भाजपा प्रदेश अध्यक्ष अजय भट्ट व काशीपुर विधायक चीमा से वार्ता करते अरुण जेटली, साथ में मनोज जोशी।

उत्तराखंड (तब उत्तरांचल) राज्य का जब जन्म हो रहा था, अरुण जेटली बाजपेयी मंत्रिमंडल में  केंद्रीय कानून मंत्री थे, और नैनीताल में  राज्य का उच्च न्यायालय के बजाय राज्य की राजधानी बनाना चाहते थे। अलबत्ता, अनेक तत्कालीन परिस्थितियों की वजह से ऐसा हो न सका। नैनीताल को राजधानी न बना पाने और यहां राज्य का उच्च न्यायालय होने की बात यहां आने पर अक्सर उनकी जुबान पर आ जाती थी। भाजपा के नगर अध्यक्ष मनोज जोशी बताते हैं कि 2017 में जब वे 10 से 13 सितंबर के बीच, नगर में चल रहे नंदा देवी महोत्सव के दौरान नैनीताल आये थे, तब भी नैनीताल राजभवन में भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष अजय भट्ट व काशीपुर के विधायक हरबंश सिंह चीमा से बात करते हुए उन्होंने यह बात कही थी। उनका मानना था कि नैनीताल जैसे सुंदर प्राकृतिक-पर्यटन नगर में उच्च न्यायालय नहीं होना चाहिए। क्योंकि उच्च न्यायालय के लिए काफी स्थान एवं विस्तार की संभावनाएं जरूरी होती हैं। जोशी भी राजभवन में तब भट्ट के साथ थे। उनका पूर्व से नैनीताल आना जाना था। यहां नैनी रिट्रीट होटल के स्वामियों से उनकी निजी मित्रता थी, इसलिए वे पूर्व में भी कई बार यहां निजी दौरों पर आते रहते थे। 

सितंबर 2016 को नैनीताल में भाजपा नेत्रियों के साथ अरुण जेटली।

वह 9 नवंबर 2000 को उत्तरांचल राज्य के गठन के दिन वे केंद्रीय कानून मंत्री होने के नाते नैनीताल में थे, और उन्होंने ही इस दिन राज्य के उच्च न्यायालय का उद्घाटन किया था। इस दौरान वे नैनीताल राजभवन में रहे थे। भाजपा नेता विवेक साह बताते हैं कि इस दौरान वे नितांत अकेले, बिना किसी सुरक्षा के देर शाम नयना देवी मंदिर से ठंडी सड़क होते हुए पाषाण देवी मंदिर आदि मंदिरों की सैर पर गये थे। पार्टी नेता बताते हैं कि इधर 2017 में नगर में आगमन के दौरान भी वे अकेले ही सुबह नैनी झील के पास टहलने निकले थे, और नगर का अपनी अनुभवी आंखों से गहन निरीक्षण करने के बाद नैनीताल राजभवन में पार्टी नेताओं से बात करते हुए उन्होंने नगर की स्थितियां पूर्व के मुकाबले बुरी होने की बात कही थी। इस बार उनके परिवार के सदस्य चुपचाप नंदा देवी महोत्सव में देवी के दर्शन करने भी पहुंचे थे, जबकि बाद में वे परिवार सहित नौकुचियाताल सहित जिले की अन्य झीलों का भ्रमण करने भी गये थे।

नैनीताल राजभवन के गेस्ट हाउस का किराया स्वयं चुकाया था

नैनीताल। अरुण जेटली वाजपेयी मंत्रिमंडल में मंत्री रहते वर्ष 2000-01 में अपने कुछ दोस्तों के साथ नैनीताल आए थे। यहां उन्हें नैनीताल राजभवन के गेस्ट हाउस में ठहराया गया था। इस दौरान उनके साथ रहे उनके दोस्त सुहेल सेठ ने ‘ओपन’ पत्रिका में ‘माई फ्रेंड अरुण जेटली’ शीर्षक से लिखे लेख में लिखा था, ‘चेक आउट करने से पहले उन्होंने सभी कमरों का किराया अपनी जेब से दिया। वहाँ के कर्मचारियों ने मुझे बताया कि उन्होंने पहले किसी केंद्रीय मंत्री को इस तरह अपना बिल देते नहीं देखा’।

यह भी पढ़ें : सुषमा ने कहा था-मुझ सा ही प्यारा, छोटा सा है नैनीताल..

-वर्ष 2007 में विधानसभा चुनाव के दौरान भाजपा प्रत्याशी स्वर्गीय खड़क सिंह बोहरा के चुनाव प्रचार में आई थीं नैनीताल

नगर की भाजपा नेत्रियों के साथ स्वर्गीय सुषमा स्वराज

नवीन जोशी, नवीन समाचार, नैनीताल, 7 अगस्त 2019। व्यक्ति छोटा या बड़ा अपने बाहरी स्वरूप से नहीं भीतर की गहराई से होता है। जिला व मंडल मुख्यालय नैनीताल भी एक बहुत छोटा सा मात्र 41 हजार जैसी कम जनसंख्या एवं मात्र 17.32 वर्ग किमी क्षेत्रफल में फैला बहुत छोटा सा शहर है, पर इसकी वैश्विक पहचान है। नैनीताल की इस विशिष्टता को शारीरिक कद से बहुत छोटी किंतु देश की पहली स्वतंत्र विदेश मंत्री, सूचना प्रसारण मंत्री, देश में किसी भी राजनीतिक दल की पहली महिला प्रवक्ता, भाजपा की पहली महिला राष्ट्रीय मंत्री दिल्ली की पहली महिला मुख्यमंत्री, देश की संसद में सर्वश्रेष्ठ सांसद का पुरस्कार प्राप्त करने वाली पहली महिला सांसद होने की विशिष्ट उपलब्धियां धारण करने वाली स्वर्गीय सुषमा स्वराज ने अपने इकलौते नैनीताल आगमन पर स्वीकारा था। उन्होंने नगर के मनुमहारानी होटल में जनसभा के बाद शाम को प्रवास के दौरान भाजपा नेत्रियों से बात करते हुए कहा था, ‘नैनीताल मुझ सा ही छोटा व प्यारा सा है।’

स्वर्गीय सुषमा स्वराज फरवरी 2007 में उत्तराखंड विधानसभा के दूसरे चुनाव के दौरान भाजपा प्रत्याशी खड़क सिंह बोहरा के चुनाव प्रचार के लिए नैनीताल आई थीं। उस दिन नगर में मौसम बेहद सर्द होने के साथ ही खराब भी था। बर्फबारी होने की संभावना के साथ आसमान बादलों से घिरा था और बारिश हो रही थी। उनका हेलीकॉप्टर नैनीताल में उतर नहीं पाया, बावजूद उन्होंने नैनीताल आने की पूरी प्रतिबद्धता निभाई और हेलीकॉप्टर से हल्द्वानी में उतरने के बाद कार से नैनीताल पहुंचीं। यहां नगर पालिका कार्यालय के सामने के मैदान में उनकी जनसभा रखी गयी थी। भाजपा के तत्कालीन नगर अध्यक्ष जगदीश बवाड़ी ने बताया कि चुनाव के लिए पार्टी की महिला नेत्रियों ही नहीं नगर की अन्य महिलाओं की ओर से भी उन्हें बुलाने की मांग हुई थी। उनका महिलाओं में खास तौर पर बड़ा आकर्षण था। लोगों ने उनके हल्द्वानी से आने के कारण हुई काफी देरी के बावजूद पूरी संख्या में इंतजार किया और उनकी बात सुनीं। इस चुनाव में खड़क सिंह बोहरा नैनीताल की कांग्रेस का गढ़ मानी जाने वाली सीट पर जीतकर भाजपा के नैनीताल से जीतने वाले पहले भाजपा विधायक भी बने। 

दूध की क्रेट का स्टॉल बनाकर करवाया था भाषण

नैनीताल। सुषमा स्वराज जब नैनीताल आई थीं, तब वे केंद्र की अटल बिहारी बाजपेयी की सरकार में केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्री थीं। जब वे जनसभा में पहुंची, अचानक कार्यकर्ताओं को आभाष हुआ कि वे अपनी कम लंबाई के कारण भाषण देने के लिए पौडियम तक नहीं पहुंच पाएंगी। तत्कालीन भाजपा नगर अध्यक्ष जगदीश बवाड़ी बताते हैं, इस पर आनन-फानन में पास के एक चाय के स्टॉल से दूध की क्रेट लाकर उसे कपड़ा बिछाकर स्टूल के रूप में लगाया गया, जिस पर खड़ी होकर उन्होंने जनसभा को संबोधित किया। भाजपा की प्रदेश कार्यकारिणी सदस्य रही वरिष्ठ नेत्री शांति मेहरा बताती हैं कि संभवतया यह सब भांपकर ही शाम को उन्होंने शाम को कहा था, नैनीताल उनकी तरह ही छोटा व प्यारा सा है।

यह भी पढ़ें : नहीं रहीं दिल में ‘देश’ रखने वाली पूर्व विदेश मंत्री सुषमा स्वराज

नवीन समाचार, नई दिल्ली, 6 अगस्त 2019। पूर्व विदेश मंत्री और दिल्ली की पूर्व मुख्यमंत्री सुषमा स्वराज का मंगलवार को 67 साल की उम्र में निधन हो गया। दिल का दौरा पड़ने के बाद मंगलवार रात करीब सवा 10 बजे उन्हें दिल्ली स्थित ऑल इंडिया इंस्टिट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (AIIMS) में भर्ती कराया गया था। विदेश मंत्री के कार्यकाल के दौरान सोशल मीडिया पर शिकायतों को सुनने और उनके निपटारे के लिए काफी लोकप्रिय रहीं सुषमा अपनी जिंदगी के आखिरी दिन भी सोशल मीडिया पर सक्रिय रहीं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सुषमा स्वराज के निधन पर शोक जताया है। उन्होंने ट्वीट किया, ‘भारतीय राजनीति का एक गौरवशाली अध्याय खत्म हो गया। एक ऐसी नेता जिन्होंने जन सेवा और गरीबों का जीवन संवारने के लिए अपनी जिंदगी समर्पित कर दी, उनके निधन पर भारत दुखी है। सुषमा स्वराज जी अपनी तरह की इकलौती नेता थीं, वह करोड़ों लोगों के लिए प्रेरणा की स्रोत थीं।’ अपनी मौत से कुछ घंटे पहले ही उन्होंने ट्वीट कर प्रधानमंत्री मोदी को जम्मू-कश्मीर का विशेष दर्जा खत्म किए जाने पर बधाई दी थी। उन्होंने अपने आखिरी ट्वीट में लिखा, ‘प्रधानमंत्री जी- आपका हार्दिक अभिनन्दन। मैं अपने जीवन में इस दिन को देखने की प्रतीक्षा कर रही थी।’ संयोग देखिए कि इस ट्वीट के कुछ घंटे बाद ही उनके निधन की खबर आई।

केंद्रीय मंत्री राजनाथ सिंह, नितिन गडकरी, पीयूष गोयल, प्रहलाद सिंह पटेल, हर्षवर्धन समेत बीजेपी के वरिष्ठ नेता AIIMS पहुंचने लगे हैं। प्रखर वक्ता और विदुषी के रूप में पहचान बनाने वाली सुषमा स्वराज मोदी सरकार के पहले कार्यकाल में विदेश मंत्री थीं। वह अटल बिहारी वाजपेयी सरकार में भी मंत्री रही थीं। उससे भी पहले 1977 में केंद्रीय मंत्री बनी थीं और सबसे कम उम्र की कैबिनेट मंत्री का रिकॉर्ड बनाया था। 16वीं लोकसभा में वह मध्य प्रदेश के विदिशा से सांसद चुनी गई थीं। इस बार उन्होंने खराब स्वास्थ्य की वजह से चुनाव नहीं लड़ने का फैसला किया था। विदेश मंत्री रहते हुए वह सोशल मीडिया पर शिकायतों को सुनने और उनके निपटारे के लिए काफी लोकप्रिय थीं। वह दिल्ली की पहली महिला मुख्यमंत्री थीं।

यह भी पढ़ें : प्रांतीय कर्मचारी नेता गोविंद का संदिग्ध परिस्थितियों में असामयिक निधन..

नवीन समाचार, नैनीताल, 23 जुलाई 2019। नगर पालिका के सफाई कर्मचारी संघ के पदाधिकारी मात्र 48 वर्षीय गोविंद टांक पुत्र हरिचरन निवासी सूखाताल का संदिग्ध परिस्थितियों में असामयिक निधन हो गया है। पुलिस के अनुसार वे मंगलवार शाम कालाढुंगी रोड पर धामपुर बैंड के पास पड़े मिले। जिसके बाद 108 सेवा के माध्यम से उन्हें बीडी पांडे जिला चिकित्सालय लाया गया। यहां चिकित्सकों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। टांक को मुख्यालय में वाल्मीकि समाज का बड़ा स्तंभ माना जाता था। उनके निधन को समाज के लिए बहुत बड़ी क्षति बताया जा रहा है। कई लोग उनकी मृत्यु पर बिलखते देखे गये हैं।

स्वर्गीय टांक नगर पालिका नैनीताल में सफाई दरोगा एवं देवभूमि उत्तराखंड सफाई कर्मचारी संघ के प्रदेश महासचिव के पद पर कार्यरत थे। वे अपने पीछे दो बेटे व एक बेटी सहित समाज के अनेक लोगों को भी रोता बिलखता छोड़ गये हैं। वे दो भाइयों में छोटे थे। उनके बड़े भाई राजेश का पहले ही निधन हो चुका है। देवभूमि उत्तराखंड सफाई कर्मचारी संघ के नगर शाखा सचिव सोनू सहदेव ने कहा कि उनके निधन से समाज का एक मजबूत स्तंभ गिर गया है। वे हमेशा समाज के लोगों के उत्थान में जुटे रहते थे। सबसे उनका व्यवहार मित्रवत होता था। वे राज्य की राजधानी में भी नगर के लोगों की आवाज थे।

यह भी पढ़ें : नैनीताल में ताइक्वांडो को स्थापित करने वाले मात्र 36 वर्षीय जिला सचिव का असामयिक निधन​

नवीन समाचार, हल्द्वानी, 21 जुलाई 2019। वर्ष 2004-05 से ताइक्वांडो खेल से जुड़कर इसे नैनीताल जनपद में स्थापित करने वाले, मात्र 36 वर्ष के जिला ताइक्वांडो संघ के सचिव ललित आर्य का रविवार दोपहर हल्द्वानी के सेंट्रल अस्पताल में असामयिक निधन हो गया। किसी को इस बात पर विश्वास नहीं हो रहा है।
हमेशा खेल के प्रति समर्पित रहने वाले ललित पूर्व में नैनीताल मुख्यालय मंे विभिन्न स्कूलों में बच्चों को ताइक्वांडो का प्रशिक्षण देते थे। इधर कुछ वर्ष पूर्व वे हल्द्वानी के गौलापार खेड़ा में रहकर बच्चों को ताइक्वांडो का प्रशिक्षण देते थे। बताया गया है कि उन्हें काफी समय से उच्च रक्तचाप की समस्या थी। उन्हें विश्वास था कि वे दवाइयों की जगह शारीरिक व्यायाम से इस समस्या पर नियंत्रण प्राप्त कर लेंगे। किंतु ऐसा न हुआ। शनिवार सुबह शारीरिक अभ्यास करने के दौरान ही वे बेहोश हुए। उन्हें परिजन सेंट्रल अस्पताल ले गये, जहां रविवार दोपहर उन्होंने दम तोड़ दिया। उनके दो 7 व 4 साल के बेटे हैं। अस्पताल की ओर से परिजनों को बताया गया है कि उनके दिमाग की नशें फट गयी थी। उनके निधन का समाचार सुनते ही उत्तराखंड राज्य ताइक्वांडो संघ के सचिव चंद्रविजय बिष्ट सहित ताइक्वांडो एवं अन्य खेलों से जुटे लोग उनके आवास पर जुटे, जिसके बाद उनका अंतिम संस्कार कर दिया गया।

यह भी पढ़ें : कुमाऊं, नैनीताल और कुमाउनी भोजन से विशेष प्यार था स्वर्गीय शीला दीक्षित को… 

-मुख्यमंत्री रहते भी हर तीसरे वर्ष नैनीताल आती रहती थीं

नवीन समाचार, नैनीताल, 20 जुलाई 2019। शनिवार को दिल्ली की तीन बार मुख्यमंत्री रहीं कांग्रेस नेत्री शीला दीक्षित के निधन के समाचार से सरोवरनगरी नैनीताल में भी लोग दुःखी नजर आये। कारण, स्वर्गीय दीक्षित का कुमाऊं व खासकर कुमाऊं मंडल के मुख्यालय नैनीताल, यहां की अन्य झीलों एवं कुमाउनी भोजन से विशेष लगाव था। उनका यहां से मल्लीताल स्थित स्विस होटल के स्वामी नंदा परिवार से उनके करीब 6 दशक लंबे पारिवारिक संबंध रहे थे।
वर्तमान में होटल को बेच कर नगर से जा चुके स्विस होटल के पूर्व स्वामी कवीश नंदा ने ‘नवीन समाचार’ को बताया कि उनकी मां कुमकुम नंदा और शीला दीक्षित ने पहली कक्षा से स्नातक तक साथ पढ़ाई की थी। दोनों दिल्ली के मथुरा रोड स्थित पब्लिक स्कूल में कक्षा एक से साथ पढ़ी थीं। बाद में दोनों ने ही मिरिंडा हाउस दिल्ली यूनिवर्सिटी से साथ ही ग्रेजुएशन किया। उनका विवाह इंदिरा गांधी मंत्रिमंडल में केंद्रीय गृह मंत्री रहे उमाशंकर दीक्षित के पुत्र यूपी कैडर के आईएएस अधिकारी विनोद दीक्षित से विवाह हुआ। वे कमोबेश हर तीसरे वर्ष मां से मिलने नैनीताल आया करती थीं। उन पर इतनी बड़ी राजनीतिक हस्ती और दिल्ली की मुख्यमंत्री रहते हुए भी कई बार नैनीताल आती रहीं। वे बेहद सादगी से घर पर साथ रहती थीं, और साथ ही खाती थीं। इधर मई 2015 में कवीश के पिता के निधन पर भी वह बिना किसी हो-हल्ले के उनकी मां से मिलने नैनीताल आई थीं, और चार दिन यहां रही थीं। इसके कुछ दिन नंदा परिवार भी नैनीताल छोड़कर गुरुग्राम चला गया। वहीं नगर के पूर्व कांग्रेस नगर अध्यक्ष मारुति नंदन साह ने बताया कि वे बड़ी राजनेता होने के बावजूद बेहद सहज व सरल स्वभाव की थी। उनसे पहले नौकुचियाताल के एक होटल में मुलाकात हुई थी। बाद में से घर पर भी आईं। उन्होंने घर पर कुमाउनी भोजन खासकर कुमाउनी तरीके से घर पर पका मटन एवं आटा घोलकर बनने वाली छोलिया रोटी खाने की इच्छा व्यक्त की थी, जिसे घर पर ही तैयार किया गया था।

यह भी पढ़ें : दिमागी बुखार से पीड़ित नैनीताल की बेटी को मदद की दरकार… 

पूर्व समाचार : उत्तराखंड में एक और नेता-पूर्व मंत्री का निधन, एक सप्ताह में पांचवे नेता का हुआ देहावसान

नवीन समाचार, रुद्रप्रयाग, 12 जून 2019। उत्तराखंड में एक और नेता के असामयिक निधन का दुःखद समाचार है। मध्यप्रदेश के पूर्व मंत्री व कांग्रेस नेता शिवनारायण मीणा का बुधवार को निधन हो गया। मीणा को केदारनाथ मंदिर जाते हुए रुद्रप्रयाग में दिल का दौरा पड़ा, जिसके बाद उनका देहावसान हो गया। बताया गया हे कि बुधवार को ही उनका पार्थिव शरीर उनके मध्य प्रदेश के पैत्रृक स्थान चाचौड़ा ले जाया जाएगा और गुरुवार को अंतिम संस्कार किया जाएगा। मीणा का नाम मध्य प्रदेश में कांग्रेस के कद्दावर नेताओं में शामिल था। वे चार बार चाचौड़ा विधानसभा क्षेत्र से जीत कर विधानसभा पहुंचे। दिग्विजय सिंह के काफी करीबी माने जाने वाले मीणा दिग्विजय के मुख्यमंत्रित्व काल में वे दो बार मंत्री भी रहे। उनके निधन पर ज्योतिरादित्य सिंधिया ने भी शोक संदेश जारी किया है. उन्होंने एक ट्वीट में लिखा, ‘मप्र सरकार के पूर्व मंत्री शिवनारायण मीणा जी की हृदयघात से निधन की खबर बेहद दुःखद है. मेरी गहरी संवेदनाएं. ईश्वर से प्रार्थना है कि वे दिवंगत आत्मा को शान्ति प्रदान करें और शोक संतप्त परिजनों को यह आघात सहने की शक्ति दे।’ उल्लेखनीय है कि इसी सप्ताह उत्तराखंड के वित्त मंत्री प्रकाश पंत का 5 जून को, भाजपा के देहरादून महानगर अध्यक्ष उमेश अग्रवाल एवं उत्तरप्रदेश के पूर्व एमएलसी व पर्यटन विकास परिषद के चेयरमैन रहे रानीखेत निवासी वयोवृद्ध नेता बीडी शर्मा (97) का 9 जून को एवं 10 जून को भाजपा के पूर्व हल्द्वानी नगर अध्यक्ष् भुवन भंडारी का भी निधन हो गया था।

यह भी पढ़ें: अमेरिका से विमान में तिरंगे में लिपटकर भारत के लिए निकला पंत का शव

नवीन समाचार, नैनीताल, 7 जून 2019। उत्तराखंड के दिवंगत वित्त मंत्री प्रकाश पंत का पार्थिव शरीर तिरंगे में लिपटकर अमेरिका के ह्यूस्टन टेक्सास से भारत के लिए निकल गया है, और शनिवार सुबह तक प्रदेश में राजधानी देहरादून और दोपहर तक उनके गृह नगर पिथौरागढ़ पहुंच जाएगा, जहां अपराह्न में उनका अंतिम संस्कार कर दिया जाएगा।

भारतीय समय के अनुसार शुक्रवार दोपहर एवं अमेरिका के अनुसार शुक्रवार रात्रि तिरंगे में लिपटे स्वर्गीय पंत के पर्थिव शरीर को एयरपोर्ट पर सैन्य सम्मान के साथ विदाई दी गई। अमेरिका से आई तस्वीरों में प्रकाश पंत के पार्थिव शरीर को उनके परिवार के सदस्यों के साथ विशेष विमान से भारत लाने की तैयारी नजर आ रही है। इधर देहरादून में एसडीआरएफ मुख्यालय में उनके शव को अंतिम दर्शन के लिए रखे जाने की तैयारी पूरी कर ली गयी है। इसके बाद पिथौरागढ़ स्थित उनके पैतृक आवास ले जाया जाएगा. वहां से शनिवार को ही उनको अंतिम विदाई दी जाएगी। उनकी अंतिम यात्रा में केंद्रीय रक्षामंत्री राजनाथ सिंह, केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री रमेश पोखरियाल निशंक, भाजपा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष श्याम जाजू, मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत, प्रदेश अध्यक्ष अजय भट्ट समेत प्रदेश सरकार के कई मंत्री, पार्टी सांसद, विधायक व पार्टी पदाधिकारी शामिल होंगे।  

यह भी पढ़ें : प्रकाश पंत के निधन पर उत्तराखंड में 3 दिन का राजकीय शोक घोषित, गुरुवार को रहेगी छुट्टी

नवीन समाचार, नैनीताल, 5 जून 2019। उत्तराखंड के पहले विधान सभा अध्यक्ष रहे वित्त तथा संसदीय कार्य, विधायी, भाषा, वित्त, आबकारी, पेयजल एवं स्वच्छता, गन्ना विकास एवं चीनी उद्योग मंत्री रहे प्रकाश पंत का बुधवार को निधन हो गया है। उन्होंने अमेरिका की यूनिवर्सिटी ऑफ टैक्सास के अस्पताल में कैंसर का इलाज चल रहा था, जहां उन्होंने उपचार के दौरान अंतिम सांस ली। सबसे पहले समाचार एजेंसी एएनआई ने यह जानकारी दी है। इधर, उत्तराखंड के वित्त मंत्री रहे प्रकाश पंत के निधन पर 3 दिन का राजकीय शोक घोषित कर दिया गया है। उत्तराखंड शासन के प्रभारी सचिव पंकज पांडे ने इस सम्बन्ध में राज्य सरकार द्वारा 6 जून को एक दिवसीय बैंक/उप कोषागार/कोषागार बंद रखने, 6 जून से लेकर 8 जून तक 3 दिवसीय प्रदेश में राजकीय शोक के तहत समस्त जनपदों के सरकारी कार्यालयों में राष्ट्रीय ध्वज आधे झुके रखने, तथा पिथौरागढ़ जनपद में अंतिम संस्कार पूरे पुलिस सम्मान के साथ संपन्न करने के आदेश जारी कर दिये हैं। वहीं प्रशासनिक जानकारी के अनुसार शनिवार तक दिवंगत प्रकाश पंत का पार्थिव शरीर देहरादून पहुँचेगा और पिथौरागढ़ में पार्थिव शरीर का अंतिम संस्कार किया जाएगा। इधर, नैनीताल के जिलाधिकारी विनोद कुमार सुमन ने बताया कि स्वर्गीय पंत के सम्मान में कल दिनांक 6 जून गुरुवार को जनपद के सभी कार्यालय, विद्यालय, बैंक व कोषागार आदि बंद रहेंगे। जनपद में 6 जून से 8 जून तक 3 दिन का राजकीय शोक भी रहेगा। इस दौरान जनपद के सभी कार्यालयों में राष्ट्रीय ध्वज झुके आधे रहेंगे, तथा शोक की अवधि में किसी भी प्रकार के मनोरंजक कार्यक्रम आदि भी नहीं किए जाएंगे। कुमाऊं विश्वविद्यालय ने भी 6 जून के सभी प्रश्न पत्र स्थगित कर दिये है। इन प्रश्नपत्रों की अगली तिथियां बाद में घोषित की जाएंगी।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, उत्तराखंड की राज्यपाल बेबी रानी मौर्य एवं मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत सहित अनेक लोगों ने भी पंत के असामयिक निधन पर शोक व्यक्त किया है।

विदित हो कि स्वर्गीय पंत पिथौरागढ़ विधानसभा से 2002 से 2007 तक निर्वाचित हुए थे। 2012 के विधानसभा चुनाव में भाजपा की प्रचंड जीत के बाद उनका नाम प्रदेश के मुख्यमंत्री पद के लिए भी आया था। हाल ही में बजट सत्र के दौरान विधानसभा में बजट पेश करते हुए उनकी तबीयत अचानक बिगड़ गई थी, जिस कारण वे पूरा बजट भाषण भी नहीं पढ़ पाए थे, और शेष बजट भाषण मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने पूरा किया था। इधर उनके सभी विभाग मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत संभाल रहे हैं। बीमारी के बाद पंत दिल्ली स्थित राजीव गांधी अस्पताल के आईसीयू में भी कुछ दिन भर्ती रहे थे। हालांकि उनकी बीमारी के बारे में किसी को भी स्पष्ट जानकारी नहीं थी, लेकिन बताया गया है कि उनका अमेरिका में फेफड़े की बीमारी का इलाज चल रहा था। उनके आकस्मिक निधन से पूरे प्रदेश में शोक की लहर दा गयी है। मुख्यालय में चल रहे ग्रीष्मकालीन गीत-संगीत के कार्यक्रम रोक दिये गये हैं। कार्यक्रम संयोजक एडीएम हरबीर सिंह ने बताया कि उनके अंतिम संस्कार तक कार्यक्रम रोक दिये गये हैं।

पूर्व समाचार : नगर के संस्थापक परिवार के दीपक शाह का असामयिक निधन

नवीन समाचार, नैनीताल, 14 अप्रैल 2019। सरोवरगरी नैनीताल के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले व संस्थापकों में शामिल स्वर्गीय मोती राम शाह परिवार से आने वाले, नगर की आराध्य देवी माता नयना देवी मंदिर की व्यवस्था देखने वाले अमर-उदय ट्रस्ट के सदस्य तथा स्नो व्यू स्थित राधा चिल्ड्रन एकेडमी स्कूल के मालिक दीपक शाह का रविवार को अचानक निधन हो गया। प्राप्त जानकारी के अनुसार करीब मात्र 42-43 वर्षीय युवा दीपक पिछले कुछ समय से पेट की आंत में गांठ बनने का एम्स दिल्ली में उपचार चल रहा था। एक-दो दिन में वह फिर एम्स जाने वाले थे। बावजूद वे रविवार को सुबह ठीक थे। किंतु दोपहर में अचानक उन्हें कुछ समस्या हुई। जिसके बाद परिजन उन्हें बीडी पांडे जिला चिकित्सालय में दिखाने के लिये लाये, किंतु इससे पूर्व ही वे दम तोड़ चुके थे। चिकित्सकों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। चिकित्सकों के अनुसार उनका देहांत हृदयाघात की वजह से हुआ। वे अपने पीछे पत्नी रिंकू साह व मात्र 4 वर्ष की बेटी वैष्णवी को रोता-बिलखता छोड़ गये हैं। उल्लेखनीय है दीपक दो भाइयों में छोटे थे। उनके बड़े भाई कंचन शाह का भी नगर में अच्छा कारोबार था, किंतु 2010 के आसपास उनका भी अचानक देहांत हो गया था। देर शाम स्थानीय पाइंस स्थित श्मशान घाट में उनका अंतिम संस्कार कर दिया गया।

यह भी पढ़ें : शौर्य चक्र विजेता बद्री दत्त तिवारी का देहांत

तत्कालीन राष्ट्रपति शंकर दयाल शर्मा से शौर्य चक्र प्राप्त करते बद्री दत्त तिवारी (फाइल फोटो)।

नवीन समाचार, नैनीताल, 7 अप्रैल 2019। जनपद के शौर्य चक्र विजेता वीर सेनानी बद्री दत्त तिवारी (82) का रविवार को हल्द्वानी स्थित उत्तरांचल कॉलोनी कुसुमखेड़ा स्थित आवास पर स्वर्गवास हो गया। उन्होंने अपने आवास पर दिन में एक बजे अंतिम सांस ली। पारिवारिक सूत्रों के अनुसार उनकी अंतिम यात्रा सोमवार को सुबह आठ बजे रानीबाग स्थित चित्रशिला घाट के लिए रवाना होगी। वे अपने पीछे पत्नी पुष्पा तिवारी, दो पुत्र रविंद्र कुमार तिवारी व राहुल तिवारी एवं दो पुत्रियों पूनम व प्रीति तथा उनके भरे-पूरे परिवार को रोता-बिलखता छोड़ गये हैं।

अनादि निधनं देवः शंख चक्र गदाधरः अव्यय पुण्डरीकाक्ष प्रेत मोक्ष प्रदो भवः।💐💐

यह भी पढ़ें : दुःखद समाचार : प्रो. तिवारी की शतायु माता का देहावसान

अमर उजाला के नैनीताल ब्यूरो प्रभारी एवं कुमाऊँ विश्वविद्यालय के पत्रकारिता विभाग के अध्यक्ष प्रो. गिरीश रंजन तिवारी जी की माता जी का कल रात्रि 12 बजे लखनऊ में स्वर्गवास हो गया है। संस्कार आज 8 फरवरी को लखनऊ में गोमती तट पर 4 बजे शाम को होगा। अभी हाल ही में वे शतायु हुई थीं।

ईश्वर उन्हें मोक्ष प्रदान करें एवं शोकाकुल परिवार को इस दुख की घड़ी को सहने की शक्ति प्रदान करें। ॐ शांति।

यह भी पढ़ें : ‘कगार की आग’ के लेखक प्रख्यात हिंदी साहित्यकार हिमांशु जोशी का निधन, श्रद्धांजलि

नई दिल्ली, 23 नवंबर 2018। ‘कगार की आग’ के लेखक प्रख्यात हिंदी साहित्यकार हिमांशु जोशी का निधन हो गया है। 83 वर्षीय हिमांशु जोशी लंबे समय से बीमार थे। गुरुवार रात दिल्ली में उन्होंने आखिरी सांस ली। उनके निधन से पत्रकारिता जगत के साथ ही उनके मूल उत्तराखंड में शोक की लहर है।

हिंमांशु जोशी का जन्म 4 मई 1935 को लोहाघाट से अल्मोड़ा जाने वाली सड़क के किनारे बसे उत्तराखंड के चम्पावत जिले के खेतीखान के निकट जोस्यूडा गांव में हुआ था। उन्होंने दिल्ली में साप्ताहिक हिन्दुस्तान से पत्रकारिता की शुरुआत की थी। उनका उपन्यास ‘कगार की आग’ विश्व प्रसिद्ध है। हिमांशु जोशी के चले जाने से साहित्य जगत को अपूरणीय क्षति हुई है। हिमांशु जोशी के पिता प्रसिद्ध स्वतंत्रता संग्राम सेनानी पूर्णानन्द जोशी थे। इनकी माता का नाम तुलसी देवी था। उनका बालपन जोस्यूड़ा से कही अधिक खेतीखान में बीता। वर्ष 1951 में इनके पिता का निधन हो गया। उनकी कक्षा 8 तक की पढ़ाई हिंदुस्तानी वर्नाकुलर स्कूल खेतीखान में हुई। आगे की पढ़ाई के लिए वह नैनीताल चले गए। पांच साल वह नैनीताल में रहे।उन्होंने वर्ष 1956 से पत्रकारिता में कदम रखा। ‘कादम्बिनी’ (1968-71), वरिष्ठ पत्रकार ‘साप्ताहिक हिन्दुस्तान’(1971-1993)। दूरदर्शन व आकाशवाणी के लिए भी कार्य किया। हिन्दी फिल्मों में भी लेखन कार्य किया। हिमांशु जोशी के तीन पुत्र अमित, सिद्धार्थ और असित हैं। हिमांशु जोशी को हिन्दी, अंग्रेजी और उर्दू का अच्छा ज्ञान था। उनके उपन्यासों में अरण्य, महासागर, छाया मत छूना मन, कगार की आग, समय साक्षी है, तुम्हारे लिए, सु-राज शामिल हैं। उनके कहानी संग्रह-अन्तत: तथा अन्य कहानियाँ, अथचक्र, मनुष्य-चिह्न तथा अन्य कहानियां, जलते हुए डैने तथा अन्य कहानियां,, तपस्या तथा अन्य कहानियां, आंचलिक कहानियां, गंधर्व-गाथा, श्रेष्ठ प्रेम कहानियां आदि हैं। 
कविता संग्रह-नील नदी का वृक्ष, जीवनी तथा खोज-अमर शहीद अशफाक उल्ला खां, यात्रा वृतांत : यातना-शिविर में (अंडमान की अनकही कहानी), रेडियो-नाटक-सु-राज तथा अन्य एकांकी, कागज की आग तथा अन्य एकांकी, समय की शिला पर, बाल साहित्य-अग्नि संतान, विश्व की श्रेष्ठ लोककथाएं, तीन तारे, बचपन की याद रही कहानियां, भारतरत्न : पं. गोविन्द बल्लभ पन्त आदि।

पुरस्कार व सम्मान :
‘छाया मत छूना मन’, ‘मनुष्य चिह्न’, ‘श्रेष्ठ आंचलिक कहानियां’ तथा ‘गंधर्व-गाथा’ को उत्तर प्रदेश हिन्दी संस्थान से पुरस्कार। ‘हिमांशु जोशी की कहानियां’ तथा ‘भारत रत्न: पं. गोबिन्द बल्लभ पन्त’ को हिन्दी अकादमी, दिल्ली का सम्मान। ‘तीन तारे’ राजभाषा विभाग, बिहार द्वारा पुरस्कृत। पत्रकारिता के लिए केन्द्रीय हिन्दी संस्थान द्वारा ‘स्व. गणेश शंकर विद्यार्थी’ पुरस्कार से सम्मानित। 
अनेक उपन्यासों, कहानियों के अधिकतर भारतीय भाषाओं के अलावा अंग्रेजी, नेपाली, बर्मी, चीनी, जापानी, इटालियन, बल्गेरियाई, कोरियाई, नार्वेजियन, स्लाव, चैक आदि भाषाओं में अनुवाद हुए।
विशेष : उपन्यास ‘सु-राज’ पर आधारित फिल्म बनी। ‘तुम्हारे लिए’ पर आधारित दूरदर्शन धारावाहिक। ‘तर्पण’, ‘सूरज की ओर’ आदि पर टीवी फिल्में। शरत चन्द्र के उपन्यास ‘चरित्रहीन’ पर आधारित रेडियो धारावाहिक का निर्देशन। अनेक सरकारी, अर्द्धसरकारी समितियों में हिन्दी सलाहकार रहे। 
वर्तमान में वे नार्वे से प्रकाशित पत्रिका ‘शांतिदूत’ के विशेष सलाहकार तथा हिन्दी अकादमी, दिल्ली की पत्रिका ‘इन्द्रप्रस्थ भारती’ के सम्पादन मंडल के सदस्य थेे।

डीएसबी के संस्थापक ठाकुर दान सिंह की धर्मपत्नी की जम्मू में गुमनामी में मौत

नैनीताल, 9 नवंबर 2018। कुमाऊं विवि के सर्वप्रमुख डीएसबी परिसर के संस्थापक स्वर्गीय ठाकुर दान सिंह बिष्ट की धर्मपत्नी लीलावती बिष्ट शुक्रवार को पंचतत्व में विलीन हो गयीं। जम्मू के शास्त्री नगर में शुक्रवार को उनका अंतिम संस्कार किया गया। उनका बृहस्पतिवार को देहावसान हो गया था।
उल्लेखनीय है कि स्वर्गीया बिष्ट ठाकुर दान सिंह बिष्ट की तीसरी पत्नी थीं। बताया गया है कि पूर्व में वह नगर के वर्तमान सबसे बड़े मन्नू महारानी होटल के स्थान पर स्थित ग्रासमेयर स्टेट में वह रहती थीं। लेकिन 30-35 वर्ष पूर्व पारिवारिक संपत्ति संबंधी विवाद के बाद वह अपनी पुत्री नीलम एवं दामाद डा. अशोक परिहार के साथ जम्मू चली गयीं एवं वहां गांधी नगर क्षेत्र में रह रही थीं। बताया गया है कि नैनीताल में रहते भी उन्हें मिलने योग्य सम्मान नहीं मिल पाया। डीएसबी परिसर में भी उन्हें कभी नहीं बुलाया गया, जो कि उनके पति के नाम पर था। उल्लेखनीय है कि ठाकुर दान सिंह बिष्ट कुमाऊं के प्रसिद्ध मालदार परिवार से थे। कहते हैं आजादी के दौर में ‘टिंबर किंग’ कहे जाने वाले मालदार परिवार देश के शीर्ष 10 पूंजीपतियों में शामिल था। उनका भारत सहित नेपाल तक लकड़ी का कारोबार था। पिथौरागढ़ जिले के चौकोड़ी में इस परिवार का चाय का बागान आज भी प्रसिद्ध है। यहां की चाय कभी विश्वप्रसिद्ध थी। 1919 से चौकोड़ी से लेकर बेरीनाग तक की कई किमी लंबी संपत्ति ठाकुर दान सिंह बिष्ट के पिता ठाकुर देव सिंह बिष्ट व चाचा ठाकुर चंचल सिंह बिष्ट के नाम रही। नैनीताल के दुर्गापुर क्षेत्र में ‘बिष्ट स्टेट’ भी इसी परिवार की कोठी है। इधर उनके निधन के समाचार से डीएसबी परिसर में शोक का माहौल है।

वरिष्ठ पीसीएस अधिकारी श्रीश कुमार की माता के शांति कार्यक्रम 11 नवंबर को

नैनीताल, 1 नवंबर 2018। वरिष्ठ पीसीएस अधिकारी, नैनीताल झील विकास प्राधिकरण एवं जिला विकास प्राधिकरण के सचिव रहे श्रीश कुमार की पूज्य माता शशि सिंह का बृहस्पतिवार शाम देहावसान हो गया है। वह 81 वर्ष की थीं, एवं वह पिछले कुछ समय से बीमार थीं। उनका हल्द्वानी के एक निजी चिकित्सालय में उपचार चल रहा था। इसी दौरान शाम करीब साढ़े पांच बजे उन्हें दिल का दौरा पड़ा, जिसके बाद उन्हें बचाया नहीं जा सका। इसके उपरांत उनके पार्थिव शरीर को उनके काशीपुर स्थित आवास पर लाया गया है। जहां से उनकी अंतिम यात्रा शुक्रवार पूर्वाह्न 11.30 बजे को निकलेगी। स्वर्गीया शशि सिंह अपने पीछे पति जनार्दन सिंह, तीन पुत्र पीयूष, श्रीश एवं अंशुमन तथा नाती-पोतों सहित भरा-पूरा परिवार छोड़कर गयी हैं। नवीन समाचार परिवार दिवंगत आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना तथा शोकाकुल परिवार को इस दुःख की घड़ी में सांत्वना प्रदान करने एवं ईश्वर से उन्हें इस दुःख को सहने की शक्ति प्रदान करने के लिए प्रार्थना करता है।

Leave a Reply