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उत्तराखंड के एक गांव से बाहर आई पहली खबर, ‘अंतराष्ट्रीय महिला दिवस’ मना रहे लोग इसे जरूर पढ़ें..

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आज भी गांव से 20 किमी दूर है सड़क, पलायन कर गए पुरुष, घायल व्यक्ति को महिलाओं ने कंधे पर पहुँचाया अस्पताल
उच्च हिमालयी क्षेत्र में, सुविधाओं के नाम पर कुछ नहीं होने के कारण जहां पुरुष पलायन कर गए, महिलाएं पुरुष घायलों को भी कंधा दे रही हैं
नवीन समाचार, कपकोट (बागेश्वर), 4 मार्च 2020। केंद्र व राज्य की अनेकों योजनाओं के बीच प्रदेश में आज भी कई गांव सड़क और स्वास्थ्य जैसी तमाम सुविधाओं से 20 किलोमीटर तक दूर हैं। जनपद मुख्यालय से 25 किमी दूर कपकोट से करीब 45 किमी दूर कमोबेश मौत के कुंवे सी कच्ची व बेहद खतरनाक सड़क से होकर एक स्थान आता है बदियाकोट। उससे आगे के गांवों की तो कल्पना भी नहीं की जा सकती है। वहां न तो बाहरी दुनिया की खबरें ही पहुंचती हैं और न वहां की खबरें ही बाहर आ पाती हैं। ऐसा ही एक गांव में बोरबलड़ा। संभवतया पहली बार इस गांव से कोई खबर फोटो सहित बाहरी दुनिया में आई है। फोटो में महिलाएं अपने कंधों पर एक मरीज को ला रही हैं। वहीं खबर के अनुसार यहां पेड़ से गिरने के कारण 38 वर्षीय खिलाफ सिंह का पैर टूट गया। गांव सुविधाओं की कमी से पलायन की बुरी चपेट में है। गांव में पुरुषों की संख्या ही सीमित है। इसलिए कौन घायल खिलाफ सिंह को 20 किमी दूर पैदल बलियाकोट के स्वास्थ्य केंद्र लाये। ऐसे में गांव की प्रीति, चंद्रा, सावित्री व बबीता आदि महिलाएं आगे आईं और घायल को अपने कंधों पर 20 किमी पैदल ढोकर बदियाकोट के अस्पताल लायीं। यहां का अस्पताल भी मात्र फार्मासिस्ट के भरोसे चल रहा है, इसलिए घायल को यहां भी उपचार नहीं मिला। इस पर घायल को वाहन से 70 किमी दूर स्थित बागेश्वर के जिला चिकित्सालय भेजा गया। अंतराष्ट्रीय महिला दिवस पर इन महिलाओं के साहस को सलाम तो बनता है जो गांवों से असुविधाओं के कारण पलायन कर चुके पुरुष समाज को संदेश भी दे रही हैं कि वे हिमालय के करीब 12 माह बर्फ के बीच वे बेहद कठिन परिस्थितियों में बिना किसी सुविधा के बीच भी न केवल जी रही हैं, घर के साथ ही पालतू पशुओं के लिए चारा-पत्ती व ईंधन के लिए लकड़ियों का इंतजाम करती और खुद ही बैलों से खेत भी जोतती हैं, बल्कि पुरुषों को जरूरत पड़ने पर ‘कंधा’ भी दे रही हैं।

यह भी पढ़ें : तीन किमी सड़क के लिए दी चुनाव बहिस्कार की धमकी, विधायक ने कहा, जीओ लेकर ही जाएंगे क्षेत्र में…

-उपेक्षा को लेकर रौखड़ क्षेत्रवासियों से विधायक को लिखा पत्र, कहा-तीन किमी सड़क न होने के कारण आज भी 19वीं सदी में जीने को हैं मजबूर
नवीन समाचार, नैनीताल, 10 जनवरी 2019। जनपद मुख्यालय के निकटवती मात्र 22 किमी दूर जनपद के कोटाबाग विकास खंड के मंगोली पट्टी के अंतर्गत आने वाले ग्राम रौखड़ व स्यात के ग्रामीणों ने शासन-प्रशासन पर क्षेत्र की उपेक्षा का आरोप लगाया है। क्षेत्रवासियों ने इधर स्थानीय विधायक को पत्र लिखकर क्षेत्र को विकास की मुख्य धारा से जोड़ने का अनुरोध किया है। साथ ही सरकार से उम्मीद जताई है कि जो आजादी के 75 वर्ष से नहीं हो पाया, वह यह सरकार कर पाएगी। वहीं विधायक संजीव आर्य ने इस सड़क पर कहा, उन्होंने क्षेत्रवासियों से यह सड़क बनाने का वादा किया है। सड़क का शासनादेश लेकर ही क्षेत्र में जाएंगे।

रौखड़ क्षेत्रवासियों का कहना है कि उनके गांव जंगल के बीच प्रकृति के अपार सौन्दर्य के बीच बसे हैं। अनेक वन्य जीव एवं खूबसूरत पशु-पक्षियों का भी यह घर है। यहां से वर्ष भर भाभर और तराई क्षेत्र का सूर्यास्त के सुंदर नजारे नजर आते हैं। लिहाजा यहां एक प्रकृति प्रेमियों के लिए पर्यटन की अपार सम्भावनायें हैं। लेकिर गांव के लिए मात्र तीन किलोमीटर लंबी सड़क न होने से आज भी यहां के लोग 19वीं सदी जैसा जीवन जीने को मजबूर हैं। गांव के किसी व्यक्ति का स्वास्थ खराब हो जाये तो उसे डोली के सहारे सड़क तक लाना पड़ता है। क्षेत्रवासियों ने चेतावनी दी है कि यदि उन्हें अब भी विकास की धारा से वंचित रखा जाता है. तो वे आने वाले सभी चुनावों का बहिस्कार करने पर विचार कर सकते हैं। साथ ही सरकार की इस नाकामी का भी प्रचार-प्रसार करंगे।

संजीव आर्य (File Photo)

इस पर पूछे जाने पर क्षेत्रीय विधायक संजीव आर्य ने बताया कि तीन वर्षों में इस सड़क के लिए प्रयासरत हैं। डेढ़ करोड़ रुपए अवमुक्त करा दिए हैं। क्षतिपूरक वृक्षारोपण हेतु भूमि भी मिल चुकी है। सड़क दो वन प्रभागों-रामनगर व नैनीताल में आती है। दोनों डीएफओ से आपत्तियां दूर कराकर फाइल भारत सरकार को भेजी थी। वहां से लगी कुछ आपत्तियों को भी दूर कर वापस भारत सरकार को भेज दिया है। जैसे ही भारत सरकार से स्वीकृति मिलती है, अपने वादे के अनुरूप सड़क का शासनादेश लेकर ही क्षेत्र में जाने का अपना वादा निभाएंगे।

यह भी पढ़ें : नए साल के पहले दिन ही मानवता-ममता शर्मसार: ‘आदर्श’ नगर के कूड़ेदान में मिला मानव भ्रूण

नवीन समाचार, रुद्रपुर, 1 जनवरी 2019। नए वर्ष के पहले दिन ही रुद्रपुर से मानवता एवं ममता को शर्मसार करने वाली खबर सामने आई। यहां आदर्श कॉलोनी क्षेत्र में जनता इंटर कॉलेज मैदान मार्ग पर अंबेडकर द्वार के पास सड़क किनारे रखे कूड़ेदान में मानव भ्रूण बोरे में बंद मिला। इससे आसपास लोगों का जमावड़ा लग गया। बताया गया है कि भ्रूण अर्द्धविकसित एवं मृत था। सूचना मिलने पर पुलिए भी पहुंची और भ्रूण को कब्जे में लेकर उसके परिजनों की तलाश प्रारंभ कर दी है। घटना को लेकर तरह-तरह की अटकलों व चर्चाओं का बाजार गर्म है।

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यह भी पढ़ें : चुनाव बहिस्कार और स्वीकृति के बावजूद नहीं मिली नैनीताल के एक गाँव को सड़क….

नवीन समाचार, नैनीताल, 28 दिसंबर 2019। जनपद के दूरस्थ धारी विकासखंड के बबियाड ग्राम का तोक बिरसिंग्याँ आजादी के 70 वर्षों के बाद भी विकास की मुख्य धुरी सड़क से पांच किमी दूर है। खास बात यह भी है कि आजादी के बाद से ही अनुसचित जाति के लोगों के उत्थान के लिए तमाम सरकारों द्वारा किये जा रहे दावों के बावजूद इस अनुसूचित जाति बहुल जनसंख्या वाले गांव के लोग बीते लोक सभा चुनाव का बहिष्कार करने की हद तक जा चुके हैं, बावजूद सड़क निर्माण की आस दूर-दूर तक नजर नहीं आ रही है।

क्षेत्रीय सामाजिक कार्यकर्ता रमेश चंद्र टम्टा ने बताया कि ग्रामीणों का सड़क के लिए संघर्ष आजादी के बाद से ही जारी है। बीते चुनाव में ग्रामीणों ने सड़क को चुनावी मुद्दा भी बना दिया। बावजूद शासन-प्रशासन के कानों में जूं तक नहीं रेंगी। कोई अधिकारी ग्रामीणों को चुनाव में में मतदान के लिए समझाने तक नहीं पहुंचा। इससे पहले भी ठीक चुनाव के समय इस सड़क का सर्वे मात्र किया जाता रहा है, और बाद में कभी वन अधिनियम तो कभी धन स्वीकृत नहीं होने की दुहाई देकर निर्माण शुरू नहीं किया जाता। ऐसे में गांव के बीमारों, गर्भवती महिलाओं को जान हथेली में रख कर, जीते-जी चार कंधों पर ढोकर मुख्य मार्ग तक लाया जाता है। सड़क न होने से गांव की साग-सब्जियां खेतों में ही सड़ जाती हैं, और स्कूल दूर होने की वजह से बच्चों की पढ़ाई छूट जाती है। बैठक में कांग्रेस नेता मनोज शर्मा क्षेत्रीय सामाजिक कार्यकर्ता रमेश चंद्र टम्टा, युवा नेता प्रमोद कुमार, धरम पाल, पूर्व प्रधान जयराम दुदुली के ग्राम प्रधान कुमारी ललिता व समस्त ग्रामवासी मौजूद रहे। 

यह भी पढ़ें : 84 वर्ष की वृद्धा को दो किमी कंधों पर डोली में लाकर डलवाया वोट, गांव की सरकार चुनने शहर से भी पहुंचे क्षेत्रीय लोग

नवीन समाचार, नैनीताल, 16 अक्तूबर 2019। गांवों की सरकार चुनने के दौर में गांवों में अलग-अलग तरीके की तस्वीरें भी दिखाई दीं। जहां वयोवृद्धों की आंखों में भी अपने गांव में विकास की बयार बहती देखने के सपने उन्हें वोट देने को प्रेरित कर रहे हैं, वहीं प्रत्याशी व उनके समर्थक भी एक-एक वोट को बूथ तक लाने में अपनी ताकत लगाते दिखे। साथ ही इन चुनावों में शहरों से गांव की राजनीति कर रहे लोग भी चुनाव में ही सही, गांव से जुड़ रहे हैं। कई खुद तो कई चुनाव लड़ रहे अपने करीबी रिश्तेदारों को जिताने के लिए इन दिनों गांव की यात्रा पर हैं। ऐसा ही एक नजारा बुधवार को त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव के दौरान जनपद के दूरस्थ एवं सुविधाविहीन ओखलकांडा विकासखंड के मुख्यालय से करीब 6 किमी की पैदल दूरी पर स्थित टांडा बूथ पर दिखाई दी। यहां राजेंद्र परगांई, जगदीश परगांई, अजय परगांई, संजय परगांई, ललित मोहन, मदन परगांई व माया परगांई आदि ग्रामीण 84 वर्षीया कमला देवी पत्नी त्रिलोचन को करीब दो किमी दूर स्थित गांव से बूध पर लेकर पहुंचे।
क्षेत्रवासी मदन परगांई का कहना है कि ओखलकांडा विकास ख्ंाड के अनेकों गांव आज भी सड़क विहीन हैं, और यहां की राजनीति हल्द्वानी व नैनीताल में स्थापित हो चुके लोग व राजनेता कर रहे हैं। जिनका ध्यान गांवों का विकास करना नहीं, बल्कि वोट लेना है। बहरहाल, इधर क्षेत्र में कुछ सड़कों के बनने की उम्मीद जग रही है। इसके बाद शहरों में गये क्षेत्रीय लोगों के गांव लौटने की उम्मीद की जा रही है।

यह भी पढ़ें : जिले से निकले मुख्यमंत्री व प्रधानमंत्री, पर आज भी पक्के पैदल मार्ग भी नहीं गांवों में, कंधों पर नदी पार कर लाने पड़ रहे मरीज

-नैनीताल जिले के ओखलकांडा ब्लॉक की स्याली नदी में पुल व पक्का पैदल मार्ग न होने से पश्यां गांव के बेड़ूखेत तोकवासी हैं परेशान

बीमार बुजुर्ग को नदी के रास्ते इस तरह कुर्सी के सहारे सड़क तक लाया गया।

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p style=”text-align: justify;”>नवीन समाचार, नैनीताल, 3 अक्तूबर 2019। आजादी के सात दशक बाद भी वीआईपी माने जाने वाले व उत्तराखंड तथा पूर्ववर्ती उत्तर प्रदेश को एनडी तिवारी के रूप में मुख्यमंत्री देने वाले जनपद के कई क्षेत्रों में लोग आज भी आदम युग सा ही जीवन जीने को अभिशप्त हैं। उल्लेखनीय है कि उत्तर प्रांत के प्रधानमंत्री रहे पंडित गोविंद बल्लभ पंत का भी इस जनपद से घर व कर्म का रिश्ता रहा। बावजूद जनपद के दूरस्थ ओखलकांडा विकासखंड से अक्सर बीमारों व गर्भवती महिलाआंे को जीते जी चार कंधों पर डोली के सहारे उपचार के लिए सड़क तक लाने की तस्वीरें और समाचार आते रहते हैं। बरसात में यह परेशानी और बढ़ जाती है। ताजा तस्वीर एक बीमार व्यक्ति को डोली में कंधों पर लाते हुए स्याली नदी पार करते ग्रामीणों की है। बरसात में उफनाई नदी में ग्रामीण घुटनों तक पैंट संभालकर एक मरीज को बमुश्किल नदी पार करा रहे हैं।
क्षेत्र के सामाजिक कार्यकर्ता मदन परगाई ने बताया कि स्याली नदी पर पुल न होने के कारण ग्राम सभा पश्यां के तोक बेड़ूखेत के एक बुजुर्ग को अचानक तबियत बिगड़ने पर कुर्सी के सहारे पंकज सुयाल चंद्रशेखर सुयाल, ललित, नवीन, हिमांशु व कमल आदि लोगों को नदी के रास्ते 4 किमी पैदल चलकर काफी परेशानी झेलते हुए सड़क तक लाना पड़ा। बताया कि अब तक नदी पर पुल व मोटरमार्ग अथवा पैदल चलने को भी पक्का रास्ता न होने से तीन ग्रामीण अभी हाल के समय में अपनी जान गंवा चुके हैं।

यह भी पढ़ें : ‘उड़ान’ के दौर में पैदल रास्ते के लिए मुख्यालय में फिर प्रदर्शन, सुबह 11 बजे तक कानून तोड़ने का अल्टीमेटम

नवीन समाचार, नैनीताल, 25 अगस्त 2019। देश के प्रधानमंत्री हर नागरिक को उड़ने की सुविधा देने के लिए ‘उड़ान’ यानी ‘उड़े देश का आम नागरिक’ योजना चला रहे हैं और इधर जिला व मंडल मुख्यालय में नगर के भूस्खलन प्रभावित बलियानाला क्षेत्र से गुजरने वाले पैदल मार्ग को कांटेदार तार की बैरीकेटिंग लगाने के खिलाफ कृष्णापुर के लोग फिर से आंदोलित हो गये हैं। क्षेत्रीय लोगों ने रविवार को रोके गये पैदल मार्ग के हिस्से पर भाजपा के क्षेत्रीय सभासद कैलाश रौतेला की अगुवाई में फिर से बड़ा प्रदर्शन किया। वे लोग ’जिला प्रशासन मुर्दाबाद व जिला प्रशासन होश में आओ’ के नारे लगा रहे थे। आखिर सभासद रौतेला ने विधायक संजीव आर्य से बात की, और उनके द्वारा सोमवार को सुबह 11 बजे डीएम से मिलकर समस्या का समाधान करेंगे। इस पर सहमति जताते हुए सभासद ने कहा कि कल समाधान न होने पर वह स्वयं कानून तोड़कर बैरीकेटिंग हटा देंगे।
इस दौरान राजस्व उप निरीक्षक अमित साह ने उन्हें उनकी सुरक्षा का हवाला देकर समझाने का प्रयास किया। कहा कि क्षेत्रीय लोगों की सुरक्षा प्रशासन की जिम्मेदारी है, इसलिए मार्ग को बंद करना पड़ा है। मार्ग पर दरारें भी आ गई हैं। वहीं क्षेत्रीय लोगों का कहना था कि प्रशासन ने मार्ग तो रोक दिया, परंतु वैकल्पिक मार्ग उपलब्ध नहीं कराया। इससे उन्हें अत्यधिक परेशनी का सामना करना पड़ रहा है। खासकर बीमारों को पैदल आने में बहुत दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। वे अपनी जिम्मेदारी पर इस खतरनाक मार्ग पर गुजरने को तैयार हैं। या तो प्रशासन उन्हें करीब से वैकल्पिक मार्ग उपलब्ध कराये, अन्यथा इसी मार्ग पर जान-जोखिम में डालकर गुजरने दे। इस मौके पर भाजपा के पूर्व जिला महामंत्री दया किशन पोखरिया, पूर्व सभासद सरवर अली व फरमान अली सहित करीब तीन-चार दर्जन लोग मौजूद रहे।

यह भी पढ़ें : मनुष्य चांद पर पहुंचा, लेकिन जिला-मंडल मुख्यालय की हजारों की आबादी मात्र कुछ मीटर पैदल रास्ते के लिए कर रही संघर्ष…

-पैदल मार्ग के लिए नगर के कृष्णापुर वार्ड के क्षेत्रीय लोगों व पुलिस-प्रशासन में हुई झड़प
-सुरक्षा के मद्देनगर प्रशासन द्वारा मार्ग को रोकने के लिए बनाई गई दीवार अज्ञात लोगों द्वारा तोड़े जाने के बाद क्षेत्रीय लोगों ने शुरू कर दिया था आवागमन
-प्रशासन दुबारा से दीवार निर्माण करने पहुंचा था, क्षेत्रीय लोगों ने किया विरोध, कहा अधिक दूर नहीं-पास से बनाएं वैकल्पिक मार्ग
नवीन समाचार, नैनीताल, 22 अगस्त 2019। नैनीताल। नगर के भूस्खलन प्रभावित बलियानाला के रईश होटल क्षेत्र में बृहस्पतिवार को क्षेत्रीय लोगों एवं पुलिस-प्रशासन में झड़प हो गई। हुआ यह कि क्षेत्र से बीरभट्टी को जाने वाले भूस्खलन के खतरे के कारण प्रशासन द्वारा बंद करवाये गये मुख्य मार्ग की दीवार को अज्ञात लोगों द्वारा तोड़ दिये जाने के बाद लोगों की आवाजाही पुन शुरू कर दी थी। बृहस्पतिवार को इसकी सूचना मिलने पर सुबह एसडीएम विनोद कुमार, पुलिस क्षेत्राधिकारी विजय थापा व तहसीलदार भगवान सिंह चौहान दल बल के साथ मौके पर पहुंच गये, और मार्ग को पुनः बंद करने की कोशिश की। इस पर मोटापानी, कृष्णापुर, दुर्गापुर व बीरभट्टी के लोगों ने पहुंचकर हंगामा शुरू कर दिया। प्रशासन की ओर से लोगों से जेल परिसर से सिपाहीधारा मार्ग आवाजाही करने को कहा गया, लेकिन क्षेत्रीय लोगों ने अधिक दूरी होने के कारण इस मार्ग से आवाजाही करने पर मना कर दिया। लोगों का कहना है कि मुख्य मार्ग से 10 मीटर की दूरी पर विकल्प के रूप में मार्ग खोला जाय।
उल्लेखनीय है कि इस स्थान पर गिरने से पूर्व में एक व्यक्ति की मौत व दो लोग घायल हो चुके हैं। इस कारण खतरे को देखते हुए प्रशासन ने दीवार लगा कर मार्ग बंद कर दिया था। इससे मोटापानी, कृष्णापुर, दुर्गापुर व बीरभट्टी व अन्य रिहायशी क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को घूमकर जेल परिसर से सिपाही धारा मार्ग से जाने को कहा गया था। लेकिन अधिक दूरी होने की वजह से लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। इस मौके पर सिंचाई विभाग के ईई हरीश चंद्र सिंह भारती, एई डीसी सती, वीरेंद्र कुमार, डीसी पंत, हरीश भट्ट, संजय कुमार, एसआई मनोज नयाल, सभासद कैलाश रौतेला, ममता जोशी, एहसान खान, संजय जोशी, हर्षित बिष्ट, जमन रावत, सुमन बिष्ट, सरिया बेगम, रेखा जोशी, निर्मला रावत, शोभा भंडारी, कांता गोस्वामी, भुवन जोशी, प्रकाश राम, दीवान राम सहित क्षेत्र के दर्जनों लोग शामिल रहे।

दो पहिया और चार पहिया वाहनों के लिए भी लंबे समय से कर रहे हैं सड़क की मांग

नैनीताल। उल्लेखनीय है कि नगर का कृष्णापुर वार्ड हल्द्वानी एनएच से मात्र कुछ मीटर की दूरी पर स्थित है। किंतु यहां से वाशिंदों को इस सड़क तक अपने वाहनों से आने के लिए बीरभट्टी-ज्योलीकोट, बल्दियाखान होते हुए या गेठिया, भूमियाधार होते हुए करीब 25 किलोमीटर की दूरी तय करनी पड़ती है। स्थानीय लोग वर्षों से मनोरा-एरीज व कूड़ा खड्ड की ओर से दो पहिया व चार पहिया वाहनों के लिए हल्के मोटर मार्ग की मांग कर रहे हैं। मांग मुख्यमंत्री के स्तर तक भी जा चुकी है, किंतु कुछ मीटर या किलोमीटर के इन मार्गों के लिए प्रशासन के स्तर पर कोई पहल आगे नहीं बढ़ाई गई है। उल्टे अब स्थिति यह हो गयी है कि क्षेत्रवासियों को पैदल हल्द्वानी एनएच तक आने के लिए भी संघर्ष करना पड़ रहा है।

 

यह भी पढ़ें : जिला मुख्यालय के इस नजदीकी गांव वालों का ‘जीते जी चार कंधों पर’ कटता है परेशानी में सफर…

नवीन समाचार, नैनीताल, 1 अगस्त 2019। देश की चहुंमुखी प्रगति के बीच जिला व मंडल मुख्यालय का निकटवर्ती जमीरा गांव दीपक तले अधेरा की कहावत को साकार कर रहा है। प्राकृतिक सुंदरता एवं संसाधनों से परिपूर्ण यह गांव आजादी के 70 वर्ष बाद भी, कई बार सर्वेक्षण होने के बावजूद केवल 5 किमी सड़क के लिए तरस रहा है। गांव के नरेंद्र सिंह रावत, केशर सिंह रावत, पूरन सिंह, जगत सिंह, महेंद्र सिंह, चंदन सिंह, बसंती देवी, अनीता देवी व भवानी देवी आदि का कहना है कि सड़क न होने की वजह से उनके बच्चों केा स्कूल जाने के लिए भी पांच किमी पैदल चलना पड़ता है। वहीं गर्भवती महिलाओं, बीमारों को अस्पताल लाने के लिए डोली या चारपाइयों पर जीते जी चार कंधों पर लाना पड़ता है। इस बाबत कई बार डीएम को ज्ञापन देने, मिलने के बावजूद उनकी सड़क की समस्या का समाधान नहीं हो पा रहा है।

यह भी पढ़ें : बाप ने खुद अपने छह साल के मासूम बेटे को पिला दी शराब, बच्चे की जान पर बन आई, वजह जानकर डॉक्टर भी रह गये स्तब्ध…

नवीन समाचार, नैनीताल। 8 सितंबर 2019। नगर के एक पिता ने अपने ही मात्र छह साल के मासूम बेटे को जबरन शराब पिला दी। बच्चा नशा चढ़ने पर बेहोश हुआ तो परिजन उसे बीडी पांडे जिला चिकित्सक ले गये। यहां बच्चे की हालत और उसे पिता द्वारा ही जबरन शराब पिलाने की बात सुन चिकित्सक भी स्तब्ध रह गये।
प्राप्त जानकारी के अनुसार नगर के संेट मेरीज कॉन्वेंट कॉलेज के पास रहने वाला हरीश नाम का व्यक्ति जबर्दस्त शराबी है और अक्सर शराब पीकर अपनी बीवी-बच्चों से मार पिटाई करता रहता है। इसी कारण वह कई बार स्कूलों की नौकरी से भी निकाला जा चुका हैं। इधर दो दिन से वह लगातार नशे में बताया गया है। इसी नशे में उसने रविवार को पहले पत्नी की पिटाई की और फिर नर्सरी कक्षा में पढ़ने वाले अपने 6 साल के मासूम बेटे को शराब पिला दी। चिकित्सकों ने पेट में नली डालकर बमुश्किल शराब बाहर निकाली, तब जाकर बच्चे को होश आया। पुलिस भी मामले की जांच कर रही है, और शराबी पिता के खिलाफ कार्रवाई करने की तैयारी कर रही है।

यह भी पढ़ें : मानवता शर्मशार: बेटे के साथ मर गयी मानवता तो मां ने भी तोड़ दिया दम…

-मां पांवों में पड़ी बावजूद मकान मालिक ने किराये के कमरे में नहंी आने दिया पार्थिव शरीर
-दो माह पूर्व ही हुआ था मृतक जल संस्थान कर्मी का विवाह, घर में अब केवल नवविवाहिता पत्नी और बिकलांग बहन

नवीन समाचार, नैनीताल, 21 जून 2019। सरोवरनगरी में मानवता को शर्मशार करने वाली एक घटना को जो भी सुन रहा है, मानवता पर शर्म कर रहा है। मुख्यालय में जल संस्थान के पंप हाउस में चतुर्थ श्रेणी के पद पर कार्यरत मात्र 28 वर्षीय योगेश कुंवर का दो माह पूर्व ही विवाह हुआ था, किंतु इसी बीच वह पीलिया की चपेट में आ गये। बीमारी बढ़ने पर साथी उसे एम्स दिल्ली उपचार के लिए ले गये, किंतु चार दिन तक वहां उपचार करने के बावजूद उन्हें बचाया नहीं जा सका। इस पर साथी उन्हें उनके मल्लीताल रामलीला मैदान के पीछे की ओर स्थित माल्डन कॉटेज क्षेत्र के किराये के कक्ष की ओर लाने लगे। यहां उनकी मां खिमुली देवी व पत्नी रहते थे। मृत्यु की सूचना मिलने पर मकान मालिक ने शव को उसके घर में आने देने से इंकार कर दिया। मां खिमुली देवी मकान मालिक के पैरों में पड़ गयी, बावजूद मकान मालिक का दिल नहीं पसीजा। इस पर साथी उसकी मां व पत्नी तथा योगेश के शव को उसके मूल गांव-ग्राम पपोली पोस्ट दन्या जिला अल्मोड़ा लेकर गये। वहां बूढ़ी मां खिमुली बेटे के शव से लिपटकर रोती रही। साथी एवं ग्रामीण योगेश के शव को लेकर अंतिम संस्कार के लिए लेकर चले, जबकि बूढ़ी मां वहीं पड़ी रही। थोड़ी देर बाद पता चला कि बेटे के दुःख में उसका शरीर भी निष्चेत हो गया था, जांच की गयी तो वह मृत मिली। इसके बाद ग्रामीण उसका शव भी अंतिम संस्कार के लिए लेकर निकले। बताया गया है कि मृतक के पिता का पहले ही निधन हो चुका था। अब उसके घर में केवल उसकी नवविवाहिता पत्नी के अलावा एक अविवाहित भाई और एक बिकलांग बहन ही बची है। पालिका कर्मी शिवराज ने बताया कि पूरी घटना को देखकर मानवता पर शर्मशार हैं।

सीजन में अपना रोजगार छोड़कर चार दिन उपचार कराता रहा नौका चालक

नैनीताल। इस घटना में जहां एक ओर मानवता को शर्मशार करने वाला चेहरा दिखाई दिया, वहीं दूसरी ओर योगेश के साथी व परिचित अंतिम क्षणों तक बिना कोई रिस्ता होते हुए भी उसके साथ लगे रहे। बताया गया कि एक पड़ोसी नौका चालक तो उसके साथी कर्मियों के साथ चार दिन दिल्ली के एम्स में उसकी सुश्रुसा में लगा रहा, जबकि गर्मियों के ये कुछ दिन ही उसे पूरे वर्ष के लिए रोजगार जुटाने के होते हैं। उसके जल संस्थान के साथियों के साथ ही नगर पालिका के कर्मी भी उसके उपचार से लेकर अंतिम संस्कार तक साथ रहे। आगे साथी उसके परिवार की मदद के लिए धनराशि भी एकत्र कर रहे हैं।

यह भी पढ़ें : फिर जीते-जी चार कंधों पर गर्भवती को डोली में लाना पड़ा अस्पताल.. नवजात गंभीर

-कब तक डोली का सहारा लगे सड़क तक आने में ओखलकांडावासी, आज भी सड़क से महरूम हैं कई गांव, पूर्व सरकार की सड़क योजनाएं अधर पर लटकाने का आरोप
दान सिंह लोधियाल @ नवीन समाचार, धानाचूली (नैनीताल), 8 मई 2019। आज के दौर में हर घर मे इंटरनेट, बिजली, व पानी की व्यवस्था सरकार ने करीब-करीब पूरी कर दी है, पर आज भी ओखलकांडा के कई गांव दशको से सड़क सुविधा से महरूम है। जिससे किसी भी बीमार व्यक्ति को सड़क मार्ग तक लाने के लिए चार कंधों का सहारा लेने को मजबूर हैं। स्थिति यहां तक दयनीय है कि गांवों में 108 डोली की कई वर्षों पूर्व हुई घोषणा के बावजूद गांवों में डोली भी उपलब्ध नहीं है, और ग्रामीणों को कुर्सी में डंडे बांधकर डोली बनानी पड़ रही है।

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बुधवार को ओखलकांडा के दूरस्थ गांव धैना गांव की कमला देवी (28) पत्नी रमेश सिह सिग्वाल को प्रसव की पीड़ा हुई तो गांव के जगदीश जोशी, नरेन्द्र सिंह, देव सिंह, योगेश सिंह, रघुवर सिंह, खीम सिंह, शेर सिंह व हरीश सिंह आदि युवा उसे कुर्सी की डोली बना कर करीव 6 किमी सड़क मार्ग तक लाये। जहाँ से उसे वाहन से पाटी चंपावत प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया। वहां उसने एक पुत्र को जन्म दिया। स्थानीय जनप्रतिनिधि मदन नौलिया व गणेश सिंह धौनी ने बताया कि माँ स्वस्थ है जबकि बच्चे को साँस लेने में दिक्कत हो रही है। जिसे हायर सेंटर भेजने की तैयारी की जा रही है। नौलिया ने बताया कि कैड़ागाँव, कूकना व सुनकोट गांव आज भी सड़क ना होने से कई परेशानियां उठानी पड़ रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि पिछली हरीश सरकार ने वर्ष 2015 में यहाँ सड़क मार्ग निमार्ण के लिए टोकन मनी जारी कर दी थी, पर आज तक फाइल कहीं दबी है, किसी को पता नहीं है। उनका कहना है कि 6 से 17 किमी तक सड़क तक आज दूरी है। आये दिन स्थानीय बीमार लोगो को कुर्सी की डोली में लाने को मजबूर है। पर आज भी समस्या जस की तस बनी हुई है। वही स्थानीय भीमताल के विधायक राम सिंह कैड़ा का कहना है ढोलीगाव से कैड़ागाँव और पैजना से कूकना तक कि सड़क मार्ग के टेंडर हो चुके है। देहरादून में नोडल अधिकारी व आरओ की स्वीकृति मिलनी है। जैसे ही स्वीकृति मिलती है कार्य शुरू हो जाएगा। अभी करीब तीन महीने लग सकते हैं। उधर पीएमजीएसवाई की अधिशासी अभियंता बीना भट्ट का कहना है दोनों सड़क मार्गों के टेन्डर हो चुके है। वन विभाग द्वारा पहले चार-पाँच आपत्तियां लगाई थीं, जिसे हमने ठीक कर नए सिरे से फिर भेज दिया है। जैसे ही वन विभाग से स्वीकृति मिलती है सड़क निर्माण कार्य शुरू कर दिया जायेगा। कहा कि स्वीकृति मिलने में देर हुई तो टेंडर बॉन्ड को बढ़ा दिया जाएगा।

 

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-पीड़िता को बिना एम्बुलेंस के किया रेफर, बस ड्राइवर ने भी आधे रास्ते में छोड़ा, जिला अस्पताल रुद्रप्रयाग में चल रहा है महिला का इलाज
-स्वास्य सेवा का बदसूरत चेहरा सामने आया, इंसानियत को शर्मसार करने वाली घटना से लोग हैरत में
नवीन समाचार, रुद्रप्रयाग, 4 दिसंबर 2018 । घाट ब्लॉक के घूनी गांव की एक गर्भवती महिला ने एंबुलेंस न मिलने के कारण सड़क पर ही मृत बच्चे को जन्म दे दिया। इस घटना से स्वास्य सेवाओं का बदसूरत चेहरा एक बार फिर सामने आया है।दरअसल घाट ब्लॉक के दूरस्थ घूनी गांव की नंदी देवी (32) गर्भवती थी। इसके चलते वह जिला चिकित्सालय गोपेश्वर में प्रसव के लिए भर्ती थी। बताया जा रहा है कि गर्भवती महिला का अल्ट्रासाउंड कराया गया। अल्ट्रासाउंड में रिपोर्ट में बच्चे की धड़कन तेज होने की बात सामने आई। इसके साथ ही डाक्टरों ने सर्जन न होने की बात कह कर प्रसव गोपेश्वर में ही करवाने से हाथ खड़े कर दिए।

महिला के पति मोहन सिंह ने बताया कि मंगलवार को शाम चार बजे उन्हें बताया गया कि प्रसव के लिए नंदा देवी को हायर सेंटर श्रीनगर बेस अस्पताल ले जाना होगा। इसके चलते उनकी पत्नी को श्रीनगर के लिए रेफर कर दिया। उनका कहना है कि गर्भवती महिला को हायर सेंटर रेफर तो कर दिया गया किंतु एंबुलेंस उपलब्ध नहीं कराई गई। उन्होंने एंबुलेंस उपलब्ध न होने की बात कह कर बहानेबाजी की। इसके चलते गर्भवती महिला को रात गोपेश्वर में ही रखा गया और बुधवार सुबह जीएमओयूलि की बस (यूके 15 टीए-0117) से पति पत्नी श्रीनगर बेस अस्पताल को रवाना हुए। इस बीच रुद्रप्रयाग के समीप तिलणी के निकट गर्भवती महिला की तबीयत बिगड़ने लगी। मोहन सिंह का कहना है कि उन्होंने बस चालक से पत्नी को शौच आदि की बात कह कर बस रूकवाई। इतने भर में पत्नी को भारी दर्द होने लगा।उन्होंने इस तरह की स्थिति के चलते बस ड्राइवर से कुछ इंतजार करने की गुहार लगाई किंतु ड्राइवर ने उनकी एक न सुनी और बस को लेकर रुद्रप्रयाग की ओर तेजी से चल दिया। इसी बीच दर्द से क राहती महिला ने तिलणी में ही सड़क पर बच्चे को जन्म दे दिया, दुर्भाग्य से बच्चा मृत पैदा हुआ। हालांकि इससे पूर्व बस चालक से रुद्रप्रयाग से श्रीनगर तक के किराए को वापस करने की भी मांग की गई, लेकिन उसकी एक न सुनी गई।मोहन सिंह के अनुसार फिर 108 को रिंग किया गया। 108 सेवा भी करीब 2 किमी दूर डेढ़ घंटे विलंब से पहुंची। इस कारण प्रसूता सड़क पर ही तड़पती रही। जब एंबुलेंस पहुंची तो प्रसूता को लेकर जिला अस्पताल रुद्रप्रयाग ले कर गई। प्रसूता को रुद्रप्रयाग जिला चिकित्सालय में भर्ती कराया गया, वहां उसकी हालत सामान्य बताई जा रही है। इस तरह की घटना से उत्तराखंड में एक बार फिर लचर स्वास्य सेवा जानलेवा साबित हुई है। इंसानियत को शर्मशार करने वाली इस घटना से सभी लोग दंग हैं, वैसे भी जिला चिकित्सालय गोपेश्वर से गर्भवती महिलाओं को हायर सेंटर रेफर करने की यह पहली घटना नहीं है। इससे पहले भी कई प्रसव कालीन महिलाओं को अंतिम समय में रेफर किया जाता रहा है। इस कारण प्रसवकालीन महिलाओं के लिए जिला चिकित्सालय की यह कार्रवाई जानलेवा साबित होती रही है। इससे स्वास्य सेवा का बदसूरत चेहरा भी उभर कर सामने आ गया है। 

महिला को डंडी के सहारे पहुंचाया अस्पताल

अगस्त्यमुनि के पौड़ीखाल न्याय पंचायत के बंगोली ग्राम पंचायत का पणधारा गांव की शाकुंवरी देवी (80) को सुबह दिल का दौरा पड़ा। परिजनों की सूचना पर ग्रामीणों ने महिला को डंडी के सहारे सड़क मार्ग तक लाए, जहां से उसे श्रीनगर बेस अस्पताल पहुंचाया गया, जहां महिला का इलाज चल रहा है।जानकारी के अनुसार अगस्त्यमुनि के पौड़ीखाल न्याय पंचायत के बंगोली ग्राम पंचायत का पणधारा गांव सड़क से चार किमी दूर है। सुबह आठ बजे के करीब शाकुंवरी देवी को दिल का दौरा पड़ा। आनन-फानन में ग्रामीणों ने डंडी से उबड़-खाबड़ रास्ते से साढ़े तीन किमी पैदल चलते हुए महिला को फतेहपुर बैंड लाये, यहां से वाहन बुक कर उन्हें बेस अस्पताल श्रीनगर पहुंचाया गया। पीड़िता के पुत्र भरत सिंह रौथाण, ग्रामीण कृपाल सिंह रौथाण, पुष्कर सिंह बिष्ट आदि का कहना है कि यातायात सुविधा के अभाव में ग्रामीण आज भी मीलों पैदल नापने को मजबूर हैं। दैजीमांडा-पौड़ीखाल मोटर मार्ग निर्माण की मांग तीन दशक से की जा रही है, लेकिन 5 किमी स्वीकृत मार्ग आज तक नहीं बन पाया है। सड़क के अभाव में बीमार व गर्भवती को दंडी से अस्पताल पहुंचाना पड़ रहा है। लेकिन सुध लेने वाला कोई नहीं है।उन्होंने जनप्रतिनिधियों पर क्षेत्र की उपेक्षा का आरोप भी लगाया। इधर, लोक निर्माण विभाग के ईई इंद्रजीत बोस ने बताया कि दैजीमांडा-पौड़ीखाल मोटर मार्ग का 1.65 किमी निर्माण होना है, जो प्रगति पर है। शेष के लिए दोबारा वित्तीय स्वीकृति को प्रस्ताव शासन को भेजा जाएगा।

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