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हल्द्वानी-नैनीताल राष्ट्रीय राजमार्ग के गड्ढा मुक्त एवं डामरीकरण के लिए 15 करोड़ रुपए अवमुक्त

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नवीन समाचार, नैनीताल, 25 सितंबर 2020। हालिया इतिहास में सर्वाधिक बुरी तरह से क्षतिग्रस्त हल्द्वानी-नैनीताल राष्ट्रीय राजमार्ग के गड्ढा मुक्त एवं डामरीकरण होने की उम्मीद बन गई है। शासन ने रानीबाग से ज्योलीकोट होते हुए नैनीताल तक आने वाले राष्ट्रीय राजमार्ग के जीर्णोद्धार के लिए 15 करोड़ की धनराशि अवमुक्त कर दी है। जल्द ही सड़क के जीर्णोद्धार का काम शुरू हो जाएगा। विधायक संजीव आर्य ने बताया कि यात्रियों और नैनीताल आने वाले सैलानियों की सुविधा को देखते हुए शासन ने सड़क जीर्णोद्धार के लिए 15 करोड़ की धनराशि स्वीकृति कर दी है। ज्योलीकोट से नैनीताल तक सड़क जीर्णोद्धार का निविदा प्रक्रिया कर ली गई है। जल्द ही सड़क सुधारीकरण का काम शुरू करा दिया जाएगा। उन्होंने यह धनराशि स्वीकृत कराने के लिए सांसद अजय भट्ट का आभार भी जताया है।
वहीं विभाग ने ज्योलीकोट से नैनीताल तक सड़क पर जगह-जगह बने गड्ढों की मरम्मत के लिए पैच वर्क का काम शुरू कर दिया है। अधिशासी अभियंता सुनील कुमार ने बताया कि इस हेतु बल्दियाखान में मशीनें और कार्मिक पहुंच चुके है। लगभग एक माह के भीतर काम पूरा हो जाएगा।

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-14 वर्ष से 1.75 करोड़ रुपए की धनराशि भी लोक निर्माण विभाग के पास पड़ी है
नवीन समाचार, नैनीताल, 19 सितंबर 2020। 14 वर्ष के लंबे संघर्ष के बाद आखिर विधानसभा नैनीताल के बेतालघाट विकासखंड में वर्ष 2006 में स्वीकृत जैना-चंद्रकोट-धुरा मोटर मार्ग को केंद्र सरकार के वन मंत्रालय से सैद्धांतिक मिल गई है। क्षेत्रीय विधायक संजीव आर्य ने जानकारी देते हुए बताया कि इस मोटर मार्ग का राज्य योजना के अंतर्गत 1 करोड़ 75 लाख रुपए की धनराशि से शीघ्र ही निर्माण प्रारंभ होगा। जल्द ही वन विभाग को वन भूमि के बदले एनपीवी यानी मौजूदा वास्तविक मूल्य की धनराशि जमा करने सहित वन भूमि प्राप्त करने की प्रक्रिया पूरी कर ली जाएगी। उन्होंने कहा कि मार्ग का निर्माध होने के साथ क्षेत्रवासियों का 14 वर्ष लंबा संघर्ष पूरा होने जा रहा है।
श्री आर्य ने खुलासा किया कि वास्तव में यह सड़क उनके पिता यशपाल आर्य ने विधायक रहते वर्ष 2006 में तत्कालीन मुख्यमंत्री एनडी तिवारी के शासनकाल में 1.75 करोड़ रुपए की धनराशि के साथ स्वीकृत कराई थी। तब से इस मोटर मार्ग के लिए 1.75 करोड़ रुपए की धनराशि भी लोक निर्माण विभाग में स्वीकृत पड़ी हुई है। इस सड़क के लिए केंद्र सरकार से वन भूमि की स्वीकृति लेने में यह समस्या भी थी कि इसके लिए अपेक्षित वन भूमि डीएफओ रानीखेत के अधिकार क्षेत्र में आती है। इसलिए विभाग आपस में समन्वय नहीं कर पाए। इस बीच बीते साढ़े तीन वर्षाें में विधायक संजीव ने इसके लिए प्रयास किए, तब भी इस पर चार बार आपत्तियां लग कर आईं, जिनका समाधान किया गया।

आजादी के बाद से लंबित रौखड़ मोटर मार्ग के लिए भी बनी उम्मीद
नैनीताल। विधायक संजीव आर्य ने बताया कि आजादी के बाद से ही लंबित रौखड़ गांव को जोड़ने वाले मंगोली-खमारी, थापला-रौखड़ मोटर मार्ग की फाइल भी इधर केंद्र सरकार की पांच हैक्टेयर से अधिक वन भूमि स्वीकृत करने वाली आरएसी में चली गई है। आगामी 25 सितंबर की आरएसी की बैठक में यह फाइल रखी जाएगी। अभी भी लोनिवि की इसकी कुछ औपचारिकताएं पूरी करनी हैं। फिर भी उम्मीद है कि यह 25 सितंबर को स्वीकृत हो जाएगी।

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नवीन समाचार, नैनीताल, 12 सितंबर 2020। कुमाऊं मंडल के पर्वतीय क्षेत्रों को मैदानी क्षेत्रों से जोड़ने वाले रानीबाग भीमताल, भवाली राज मार्ग पर खासकर भीमताल से खुटानी के बीच दो किमी के हिस्से में अनगिनत गड्ढे बने हुए हैं। क्षेत्रीय विधायक राम सिंह कैड़ा ने शनिवार को इस मार्ग का निरीक्षण किया और लोनिवि के अधिकारियों को इस मार्ग को शीघ्र गड्ढा मुक्त करने के निर्देश दिए। इस दौरान नगर के सामाजिक कार्यकर्ता पूरन बृजवासी ने विधायक को बताया कि इस मार्ग पर आवागमन काफी कष्टदायी साबित हो रहा है। यहां कई गाड़ियों के टायर फटना एवं नट, स्क्रू गिरना आम है। वे इस मार्ग पर डामरीकरण के लिए कई बार विभाग से मांग कर चुके हैं। इस मौके पर देवेंद्र सिंह फर्त्याल, पंकज उप्रेती, भावना पांडेय, अक्षय कुमार, कमलेश भट्ट, दीपक पनेरू, रवि गोस्वामी व संतोष शर्मा आदि लोग भी मौजूद रहे।

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-पिछले 12 दिनों से कर रहे हैं जंगल में प्रदर्शन

जंगल में पहुंची सड़क के विरोध में नारेबाजी करते ग्रामीण।

नवीन समाचार, नैनीताल, 23 अगस्त 2020। नैनीताल जिला मुख्यालय से 50 किमी दूर क्षेत्रीय विधायक राम सिंह कैड़ा के मूल गांव-कैड़ा गांव के हिस्से पुराने कैड़ागांव के जंगल में एक सड़क पर करीब चार-पांच गांवों के ग्रामीण, महिलाएं, बच्चे व बुजुर्ग प्रदर्शन कर रहे हैं। दूरस्थ क्षेत्र होने की वजह से इतने दिनों तक उनकी आवाज भी वहां से बाहर नहीं आ पा रही है। क्षेत्रीय ग्रामीणों का कहना है कि विधायक के गांव के लिए ढोलीगांव के पास धैना गांव से नदी के इस व उस पार से दो सड़कें कट रही है। एक नौ किमी सड़क नए कैड़ा गांव जा रही है, जहां बस्ती है। वहीं दूसरी करीब चार किमी सड़क पुराने कैड़ागांव जा रही है। पुराने कैड़ागांव में केवल दो परिवार रहते हैं, लेकिन यह सड़क उन दो परिवारों के घरों तक भी नहीं पहुंच पा रही है, बल्कि इन घरों से पहले जंगल में ही समाप्त हो जा रही है। क्षेत्रीय ग्रामीणों का कहना है कि यही 4 किमी सड़क यदि दूसरी ओर मोड़ी गई होती तो इससे पांच गांवों में सैकड़ों लोग लाभांन्वित हो जाते। लेकिन वर्ष 2007 के गलत सर्वे का उन्हें खामियाजा भुगतना पड़ रहा है।

देखें ग्रामीणों का विरोध प्रदर्शन :

क्षेत्रीय लोग इसी स्थान पर जंगल में पिछले 12 दिनों से प्रदर्शन कर रहे हैं। लेकिन गांव के ही विधायक होने के बावजूद न ही विधायक, ना ही कोई अन्य जन प्रतिनिधि मौके पर पहुंचा है। उनका कहना है कि यदि इस सड़क को जंगल की जगह धैना गांव से करीब एक किमी आगे लधियाघाटी के पुल से आगे केवल चार किमी जंगल की जगह जूनियर हाईस्कूल कैड़ागांव लाया जाता तो इससे कुकना, बजवाल गांव, बेतली, काफली व लिंगड़ानी के सैकड़ों ग्रामीण लाभान्वित हो सकते थे। उनका कहना है कि उनके गांवों से 15 किमी दूर चंपावत जिले के रीठासाहिब, 18 किमी दूर ढोलीगांव व 20 किमी दूर देवीधूरा से करीब कोई स्वास्थ्य सुविधा नहीं है। इसी सप्ताह एक महिला को बीमार होने पर कंधों पर डोली में रीठासाहिब ले जाना पड़ा था।
क्षेत्रीय सामाजिक कार्यकर्ता गणेश धौनी का कहना है कि वास्तव में यह सड़क धैना गांव से कुकना-लिंगड़ानी के नाम से है। लेकिन राजनीतिक दबावों के कारण इसे पुराने कैड़ागांव के लिए जंगल की ओर मोड़ कर जंगल में ही समाप्त किया जा रहा है। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि चार दिन के भीतर जनप्रतिनिधि मौके पर न आए तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा। विरोध प्रदर्शन में मदन सिंह नौलिया, नरेश राम, नरेंद्र धौनी, चंदन धौनी, चंचल धौनी, दिलीप धौनी, दीवान धौनी, भगवान नौलिया, ध्यान सिंह नौलिया, दीवान बर्गली, हयात धौनी, डुंगर धौनी, राजेंद्र धौनी, गोपाल नौलिया, दीवान धौनी, पवन वालिया, त्रिलोक नौलिया व गोपाल दत्त जोशी आदि शामिल रहे। इधर विधायक राम सिंह कैड़ा से इस बारे में संपर्क करने का प्रयास किया गया, किंतु उनका फोन नहीं उठा।

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नवीन समाचार, पतलोट (नैनीताल), 17 अगस्त 2020। नैनीताल जनपद के ओखलकांडा विकासखंड के कई गांव आजादी के 74 वर्ष बाद भी मूलभूत सुविधाओं से वंचित हैं। यहां सड़क के साथ स्वास्थ्य सहित सभी तरह की सुविधाओं का नितांत अभाव है। ऐसे में बीती शाम ग्राम पंचायत कुकना निवासी उमा देवी पत्नी दीवान सिंह को अचानक स्वास्थ्य खराब होने पर ग्रामीणों द्वारा कुर्सी के सहारे चार घंटे लगातार चलकर, बीच में लधिया सहित कई नदी-नाले पारकर 15 किलोमीटर दूर चंपावत जिले में स्थित प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र रीठा साहिब पहुंचाया गया। अब वहां महिला का इलाज चल रहा है। ग्रामीणों ने बताया कि ग्राम पंचायत कुकना में प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र की स्वीकृति मिल चुकी थी। इसके लिए ग्रामीणों ने भूमि भी दे दी है, लेकिन स्वास्थ्य केंद्र अब तक नहीं बन पाया है। शासन और विभागीय अधिकारियों को कई बार अवगत करा चुके हैं, लेकिन कोई सुनवाई है। इसका खामियाजा ग्रामीणों को भुगतना पड़ रहा है। यह स्थिति बेहद चिंताजनक है। महिला को स्वास्थ्य केंद्र रीठा साहिब पहुंचाने वालों में पूर्व बीडीसी दीवान सिंह, नवीन धौनी, नरेंद्र सिंह, खीम सिंह, दीवान सिंह, सुरेंद्र, चंचल सिंह, हेम, योगेश, दीपक, नवीन, राजेंद्र आदि शामिल रहे।

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नवीन समाचार, नैनीताल, 09 अगस्त 2020। जिला मुख्यालय को देश से जोड़ने वाले हल्द्वानी-नैनीताल राष्ट्रीय राजमार्ग 109-विस्तार पर ज्योलीकोट बाजार में सड़क के बीचों-बीच दक्षिण भारत के मानचित्र जैसा बड़ा गड्ढा नजर आ रहा है। अचानक दोनों ओर ठीक-ठाक सड़क के बीच ऐसा बड़ा गड्ढा आ जाने के कारण खासकर कई दोपहिया वाहन यहां पर दुर्घटनाग्रस्त हो चुके हैं और बाजार में राहगीरों की  जान भी आफत में रहती है।

ज्योलीकोट बाजार में एनएच के बीचों-बीच गड्ढे में भरा बरसाती पानी।

नगर के पत्रकार कैलाश जोशी ने बताया कि ज्योलीकोट मुख्य बाजार में सड़क के बीचों बीच एक माह से ज्यादा समय से जानलेवा गड्ढा बीते दिनों विभाग ने नजर में आने के बावजूद इसे और खतरनाक बना कर अधूरा छोड़ दिया है, जिससे अब यह सीधे मौत को दावत दे रहा है। इसके आधे हिस्से में ईंट और मिट्टी आदि डाली गई जो अब बह तथा सड़क पर फैल चुकी है।

हल्द्वानी रोड पर आया विशाल पत्थर

रविवार को हल्द्वानी रोड पर आया विशाल पत्थर।

नैनीताल। रविवार को सरोवरनगरी में पूरी रात्रि और फिर दिन में भी बारिश हुई। इस दौरान हल्द्वानी-नैनीताल राष्ट्रीय राजमार्ग 109-विस्तार पर हनुमानगढ़ी मोड़ से थोड़ा पहले दोपहर करीब साढ़े 12 बजे अचानक विशाल पत्थर आ गिरा। गनीमत रही कि इस दौरान सड़क पर गुजरता हुआ कोई वाहन उसकी चपेट में नहीं आया, अन्यथा बड़ा हादसा भी हो सकता था। बाद में लोक निर्माण विभाग के राष्ट्रीय राजमार्ग खंड ने जेसीबी डोजर मशीन से अपराह्न करीब एक बजे पत्थर को मार्ग से किनारे हटवाया गया।

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-1996 से प्रस्तावित सड़क का मामला अब भी वन भूमि हस्तांतरण के लिए फंसा है, ग्रामीणों को सड़क के लिए 7 किमी चलना पड़ता है पैदल
नवीन समाचार, नैनीताल, 01 अगस्त 2020। शायद इसे ही ‘चिराग तले अंधेरा’ कहते हैं, और यह पहाड़ के विकास की असली तस्वीर भी है। जिला व मंडल मुख्यालय के नजदीकी क्षेत्र भी आजादी के सात से अधिक दशक बीत जाने के बावजूद विकास की मुख्य कड़ी कही जाने वाली सड़क से वंचित हैं। हम यहां नगर से मात्र 26 किमी दूर स्थित प्राकृतिक सुंदरता एवं कृषि उपज के लिए प्रसिद्ध रोखड़ ग्राम सभा के लोगों की कर रहे हैं, जिनके लिए 1996 में खमारी-थापला-मंगोली-देचौरी सड़क प्रस्तावित की गई थी, किंतु ढाई दशक बीतने के बावजूद अब भी इस गांव के लोगों को सड़क तक आने के लिए सात किमी का पैदल रास्ता तय करना पड़ता है। इस पर अब ग्रामीणों के सब्र का बांध टूट गया लगता है। वहां के ग्रामीणों के साथ महिलाओं, स्कूली छात्राओं व बच्चों ने भी किताबों की जगह हाथों में गैंठियां, बेलचे, फावड़े आदि हथियार हाथों में उठा लिये हैं और वे इन दिनों बरसात में भी बिना थमे गांव के लिए श्रमदान कर सड़क बनाने में जुट गए हैं।

ग्रामीणों की इस कार्य में अगुवाई कर रहे विक्रम बिष्ट का कहना है कि ग्रामीण करीब आधा किलोमीटर सड़क खोद भी चुके हैं। इस तरह उनकी कोशिश सो चुकी व्यवस्था को नींद से जगाने की है। ग्राम प्रधान योगेश्वर जीना का कहना है कि सड़क की फाइल 1996 से वन भूमि हस्तांतरण के कारण फंसे है। ग्रामीण महिलाएं ममता देवी, हेमा सनवाल व स्कूली छात्र दिव्यांशु आदि भी इस मामले में जनप्रतिनिधियों के प्रति काफी आक्रोशित हैं। वहीं इस बारे में पूछे जाने पर क्षेत्रीय विधायक संजीव आर्य ने कहा कि इतने वर्षों में क्या हुआ, वे कह नहीं सकते, किंतु इतना निश्चित है कि इस सड़क को वे ही रौखड़ गांव पहुंचाएंगे ।

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-ग्रामीणों ने करायल बैंड पर किया डामरीकरण को लेकर प्रदर्शन, पिछले लोकसभा चुनाव का कर चुके हैं ग्रामीण बहिष्कार
दान सिंह लोधियाल @ नवीन समाचार, धानाचूली, 29 जुलाई 2020। जनपद नैनीताल के ओखलकांडा में दूरस्थ गांव टकुरा जमराड़ी में 50 साल बीतने के बावजूद भी 2 किमी डामरीकरण आज तक नहीं हो पाया। इस पर पूर्व छात्रसंघ अध्यक्ष प्रमोद कोटलिया के नेतृत्व में बुधवार को स्थानीय गांव टकुरा, जमराड़ी, पैटना, रमेला गांव, गंगोलीगाड़ व मटियाल के ग्रामीणों ने सरकार के उदासीनता के चलते धरना प्रदर्शन कर अपना विरोध व्यक्त किया। कहा कि अब तक यही पता नहीं चला है कि इस सड़क का लोक निर्माण विभाग और वन विभाग में से मालिक कौन है। इस मुद्दे पर वह लोकसभा चुनावो का बहिष्कार करके अपना विरोध दर्ज कर चुके हैं। उन्होंने कहा कि जल्दी ही इस 2 किलोमीटर सड़क मार्ग पर डामरीकरण नहीं हुआ तो वह बड़ा आंदोलन करेंगे। इस दौरान जमराडी के ग्राम प्रधान बलवीर सिंह बरगली सहित भूपाल सिंह, मनोज नगरकोटी, सतीश भट्ट, भूपाल कुमार, भीमराव, कमल रौतेला, मदन कुमार, कमल बोरा, राहुल बोरा, महिपाल बोरा, भरत बोरा, नरेश बोरा, उमेश बोरा, किशन बर्गली, नीरज बोरा, विनोद बर्गली, रमेश बोरा पुष्कर, जितेंद्र व भुवन महिपाल बर्गली आदि शामिल रहे।

12 वर्ष से सड़क का डामरीकरण न होने पर विधायक को भेजा पत्र
नैनीताल। लगभग 12 वर्ष पूर्व बने लगभगत 6.3 किलोमीटर लंबे श्यामखेत-कूण मोटर मार्ग में आज तक डामरीकरण नहीं किया गया है। इस पर तल्ला कूँण निवासी क्षेत्रीय सामाजिक कार्यकर्ता जितेंद्र भट्ट ने विधायक राम सिंह कैड़ा को पत्र लिखकर कहा है कि इस मोटर मार्ग के डामरीकरण के लिए गांववासियों को पहले भी कई बार अश्वासन दिया गया। विधायक को भी डामरीकरण कराने के लिए पूर्व में एक पत्र पहले भी दिया गया था। इसके बावजूद भी इस मोटर मार्ग का डामरीकरण नही किया गया। अब इस मोटर मार्ग पर बड़े-बड़े गड्ढे हो चुके है जिस कारण हादसे की आशंका बनी रहती है, साथ ही गांव से बीमार एवं गर्भवती महिलाओं को अस्पताल तथा कृषि उपज को बाजार तक पहुंचाने में बहुत मुश्किलों का सामना करना पड़ता है। लिहाजा सड़क का शीघ्र डामरीकरण कराने की मांग की गई है।

यह भी पढ़ें : 30 वर्षों से पक्की नहीं हो पाई दो किमी करायल-टकुरा कच्ची सड़कनवीन समाचार, नैनीताल, 28 जुलाई 2020। राज्य में इन दिनों हो रही बरसात विकास की पोल खोल रही है। हालत यह है कि नैनीताल जनपद के ओखलकांड़ा विकासखंड मुख्यालय से 5 किमी आगे करायल बैंड से टकुरा को जोड़ने के लिए लगभग 25-30 वर्ष पूर्व वन विभाग द्वारा काटी गयी लगभग 2 किमी कच्ची सड़क अब तक पक्की नहीं हुई है। हद तो यह है कि यह सड़क आठ गांवों को जोड़ने वाला लिंक मोटर मार्ग भी है। इन 8 गांवों की जनता 2019 के लोकसभा चुनाव का पूर्ण बहिष्कार भी कर चुकी है।

स्थानीय निवासी एवं शिक्षक सुरेश बिष्ट के अनुसार इससे आगे कई ग्राम सभाओं को जाने के लिए इसी मोटर मार्ग से होकर जाया जाता है। यह क्षेत्र मुख्य रूप से कृषि उत्पादक क्षेत्र भी है। इस कारण इस मार्ग पर भारी वाहनों की आवाजाही भी बहुत अधिक रहती है, इसलिए बरसात में भारी वाहनों से सड़क पर काफी बड़े गड्ढे बन गये हैं। वन विभाग के अधीन होने के कारण इस मार्ग में रोड़ सोलिंग होने के बाद लोकनिर्माण विभाग व वन विभाग के बीच आपसी सामंजस्य न होने के कारण कभी डामरीकरण नहीं हो पाया है। इसका खामियाजा जनता को खासकर बरसात के समय मुसीबतों का सामना करना पड़ता है। कई मोटरसाइकिल सवारों के साथ इस मार्ग पर हादसा हो चुका है, वहीं स्कूली छात्र-छात्राएं कीचड़ में सनकर स्कूल तक पहुंचते हैं। फिर भी जनप्रतिनिधि इस ओर ध्यान नहीं दे रहे हैं।

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कोरड़ गाँव को विधायक निधि से सड़क से जोड़ने के कार्य का हुआ शुभारंभ
नवीन समाचार, नैनीताल, 19 जुलाई 2020। विधायक संजीव आर्य के प्रयासों से नैनीताल विधानसभा केे बेतालघाट विकास खंड के अब तक सड़क से छूटे व विकास की मुख्य धारा से अलग-थलग पड़े गाँव कोरड़ को भुजान-बेतालघाट मुख्य मार्ग से जोडते हुए नैनीचक की ओर मिलान के कार्य का रविवार को शुभारंभ किया गया। भारतीय जनता पार्टी मंडल बेतालघाट के महामंत्री राजेन्द्र सिंह जैडा व पूर्व प्रधान जीवन सिह मेहरा के नेतृत्व में यह कार्य किया जा रहा है। विधायक प्रतिनिधि खुशाल हाल्सी ने बताया कि विधायक संजय आर्य ने कोरड व नैनीचक को मोटरमार्ग से जोड़ने के लिए पहली किस्त के रूप में चार लाख रुपए की धनराशि विकास खंड को अवमुक्त कर दी है। इस मार्ग का निर्माण शुरू होने से क्षेत्र के भाजपा कार्यकर्ताओं तथा ग्राम वासियों में खुशी का माहौल देखा जा रहा है। ग्राम प्रधान देवेंद्र सिह फर्याल, गणेश जैड़ा व पप्पू सिंह आदि भी मार्ग के शुभारंभ के मौके पर मौजूद रहे।

ब्रिटिश कालीन पैदल मार्ग को दुरुस्त कराने की मांग
नैनीताल। ब्रिटिश काल में वीरभट्टी से ग्राम छीड़ा होते हुए रानीबाग के लिए आवागमन का मुख्य मार्ग आज बदहाल स्थित में है। इसके कारण छींड़ा गांव के ग्रामीणों को बहुत परेशानियां हो रही हैं। इस पर ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से मार्ग को ठीक करने की मांग की है। क्षेत्र के ग्रामीणों का कहना है कि हल्द्वानी-अल्मोड़ा राष्ट्रीय राजमार्ग पर वीरभट्टी पड़ाव से छींड़ा गांव जाने वाला पैदल मार्ग ब्रिटिश शासन में सेना के घोड़े, डाक सामग्री लाने समेत कार्यालय और स्कूल जाने वाले विद्यार्थियों का एकमात्र मार्ग था, जो अब बदहाल है। इस तीव्र ढाल वाले मार्ग पर लोग असंतुलित होते हुए गिर रहे हैं। इस संबंध में कई बार जिला प्रशासन और जनप्रतिनिधियों को अवगत कराया गया, लेकिन गरीब ग्रामीणों की कोई सुनने को तैयार नहीं है। क्षेत्र में एक आंगनबाड़ी केंद्र हैं। जहां अक्सर छोटे बच्चे और गर्भवती महिलाएं भी आती हैं। कई बार व्यक्ति गिरकर चोटिल हो चुके हैं। कैलाश पांडे, कैलाश जोशी, किशन दत्त जोशी, बहादुर बिष्ट, पवन बिष्ट, करन बिष्ट, नंदन मनराल, संजय बिष्ट, भुवन जोशी, हरीश वारियाल, मनोज आर्या ने जिलाधिकारी को ज्ञापन देकर मार्ग ठीक करने की मांग की है।

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-32 किमी मार्ग में से 22 किमी के डामरीकरण के लिए 13.5 करोड़ मंजूर
-बीच के 10 किमी की सड़क का वन भूमि का प्रस्ताव केंद्र सरकार में, स्वीकृति मिलते ही नैनीताल-हल्द्वानी के बीच बन जाएगा वैकल्पिक मार्ग
नवीन समाचार, नैनीताल, 10 जुलाई 2020। नैनीताल के विधायक संजीव आर्य के प्रयासों से नैनीताल विधानसभा के अंतर्गत विकासखंड भीमताल के अंतर्गत 10 किमी लंबी फतेहपर-बेल एवं इसी से लगे 12 किमी लंबे देवीधूरा-बोहरा गांव मोटरमार्ग के 13.5 करोड़ रुपए लागत से प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत डामरीकरण की राह प्रशस्त हो गई है। इस हेतु यूआरडीए ने ठेकेदार के अनुबंध को संस्तुति दे दी है। इस धनराशि से बीच में एक पुल भी बनेगा, जबकि दो पुल पहले ही बन रही है। विधायक संजीव आर्य ने बतायाकि इस कार्य के लिए जरूरी 65 लाख रुपए की अतिरिक्त राशि भी राज्य सरकार से स्वीकृत हो गए हैं। उन्होंने कहा कि इस सड़क के बनने से नैनीताल-हल्द्वानी के बीच वैकल्पिक मार्ग के साथ ही स्थानीय लोगों लोगों को रोजगार एवं क्षेत्र में पर्यटन की संभावनाएं भी बढ़ेंगी।
उन्होंने बताया कि यह सड़क हल्द्वानी के पास फतेहपुर से देवीधूरा तक 32 किमी में पहुंचेगी। इन दोनों सड़कों का 22 किमी हिस्सा 8 वर्ष पहले से कट चुका था। जबकि बेल से देवीधूरा के बीच की 10 किमी सड़क के प्रस्ताव की फाइल 11 बार देहरादून व 6 बार भारत सरकार जाने के वापस आ चुकी थी। इसे पुनः आपत्तियों का समाधान कर केंद्र सरकार को भेजा गया है। उन्होंने उम्मीद जताई कि इस सड़क को भी जल्द सैद्धांतिक स्वीकृत मिल जाएगी।
उल्लेखनीय है कि यह सड़क हल्द्वानी तथा जिला व मंडल मुख्यालय तथा पर्यटन नगरी नैनीताल के बीच वैकल्पिक मार्ग के रूप में विकसित की जा रही है। इस रोड के तैयार हो जाने से नैनीताल-हल्द्वानी राजमार्ग के किसी कारण बाधित होने अथवा बड़े जाम आदि लगने की स्थिति में इस मार्ग का वैकल्पिक मार्ग के रूप में प्रयोग किया जा सकेगा।

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12 से ऐसी बनी है देवीधूरा-बोहरागांव सड़क, जनप्रतिनिधि बैठे धरने पर।

कैलाश जोशी @ नवीन समाचार, ज्योलीकोट, नैनीताल, 30 जून 2020। प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत 12 वर्ष से लगभग 18 करोड़ रुपये की लागत से बन रहा देवीधूरा-बोहरागांव मोटर मार्ग आज तक पूरा नहीं हो पाया है। अभी भी यह मार्ग कच्चा है। इस पर डामरीकरण नहीं किया जा सका है। इस कारण खासकर बरसात के मौसम में यह सड़क कीचड़ से सन जाती है। क्षेत्रीय लोगों को तमाम दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। क्षेत्रीय ग्रामीणों का कहना है कि लगातार गुहार के बाद भी उनकी सुनने को कोई तैयार ही नहीं है। अब उपेक्षा से गुस्साए क्षेत्रीय जनप्रतिनिधियों ने पीएमजीएसवाई (सिंचाई खंड) के कार्यालय में हल्ला बोल-धरना प्रदर्शन, नारेबाजी करते हुए विभाग की कार्यप्रणाली पर अपनी नाराजगी जाहिर की और चेतावनी देते हुए कहा कि यदि विभाग का रवैया नहीं बदला तो तालाबंदी व अधिकारियों का घेराव किया जाएगा।
जनप्रतिनिधियों के कहना था कि 12 साल से चल रहे इस सड़क के निर्माण कार्य में विभागीय अधिकारियों की लापरवाही से ग्रामीणों को परेशानी होने के साथ ही इसकी लागत बढ़ने से धन का अपव्यय भी हो रहा है। विरोध प्रदर्शन में ज्येष्ठ ब्लॉक प्रमुख हिमांशु पांडे के साथ ग्राम प्रधान धर्मेन्द्र सिंह, हरगोविंद रावत, पूर्व प्रधान शेखर भट्ट, राम दत्त चनियाल, जीवन चन्द्र, उप प्रधान मनोज चनियाल, सामाजिक कार्यकर्ता राजेंद्र कोटलिया, विजय कुमार, जितेंद्र बिष्ट व कमल बिष्ट आदि लोग शामिल हुए। हालांकि इस दौरान कार्यालय में कोई उच्चाधिकारी मौजूद नहीं था, लेकिन सहायक अभियंता नेहा अमरीन मंसूरी ने उन्हें शीघ्र कार्य करवाने का आश्वासन दिया

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-फौजी किशन सिंह कपकोटी ने किया युवाओं को प्रेरित
नवीन समाचार, नैनीताल, 29 जून 2020। लॉक डाउन के दौरान मिले समय को बहुत से लोग सकारात्मक कार्यों एवं अपनी समस्याओं के समाधान में लगा रहे हैं। इसी कड़ी में जनपद के कोटाबाग विकास खंड के डोला गांव के लोग भी जुड़ गए हैं। यहां गांव के निवासी भारतीय सेना के जवान किशन सिंह कपकोटी के 22 दिन पहले अपने घर छुट्टी पर आए तो वहां के युवाओं को जागरूक कर गांव को सड़क से जोड़ने का बीड़ा उठाया। उनकी प्रेरणा से करीब 20 ग्रामीण युवा श्रमदान कर रोड बनाने में जुट गए। पूरे गांव के ग्रामीणों ने अपनी आर्थिक स्थिति के हिसाब से एक लाख रुपए की सहयोग राशि भी एकत्रित की। इस तरह 22 दिनों में ही उन्होंने श्रमदान कर गांव को सड़क से जोड़ दिया हैं श्रमदान करने वालों में भुवन कपकोटी, योगेश कपकोटी, योगेश मेहरा, दिगंबर मेहरा, हरीश बिष्ट व यतेंद्र मेहरा आदि की भूमिका विशेष उल्लेखनीय बताई गई है। बताया गया है कि डोला गांव मुख्य सड़क से ढाई किलोमीटर लंबी सड़क छः वर्ष पूर्व से बजट के अभाव में अटकी हुई थी। अब गांव तक सड़क पहुंच जाने के बाद ग्रामीणों ने कहा है कि उन्होंने गांव के लिए सड़क तो मिलजुल कर बना दी, लेकिन गांव मे सिचाईं के पानी की बहुत समस्या है। ऐसे में उन्होंने सरकार से सिंचाई के पानी की व्यवस्था करने की मांग की है।
इस पर विधायक संजीव आर्य ने दावा किया ग्रामीणों ने डोला गांव के एक तोक के लिए करीब एक किमी लंबी सड़क ही बनाई है। अलबत्ता कहा कि इसके लिए वह विधायक निधि आदि से भी मदद दिलाएंगे। साथ ही बताया कि डोला से अमोठा गांव तक 6 किलोमीटर की सड़क पहले से ही प्रस्तावित है। सड़क निर्माण के लिए प्रथम चरण में 55 लाख स्वीकृत हो गये हैं। वन भूमि हस्तांतरण के लिए सिविल सोयम भूमि की उपलब्धता करा ली है। वन भूमि हस्तांतरण के बाद सड़क निर्माण शुरू कराया जाएगा। अभी युवाओं ने डोला गांव के एक तोक के लिए सड़क बनाई है। उनके कार्य की सराहना करते हैं।

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नवीन समाचार, नैनीताल, 19 जून 2020। विधायक संजीव आर्य के प्रयास से नैनीताल विधानसभा के दूरस्थ बेतालघाट विकासखंड में कई सड़कों के बाद करीब 42 करोड़ रुपए से पांच पुलों के निर्माण कार्य की शुरुवात भी होने जा रही है। अनुसूचित जाति आयोग के उपाध्यक्ष पीसी गोरखा ने बताया कि नैनीताल विधायक संजीव आर्य के प्रयासों से कोसी नदी के आर-पार के विकास की मुख्य धारा से अछूते रह गये गांवों को पुलों के जरिये विकास की धारा से जोड़ने के शुरू से प्रयास किये गये तथा अपने पिता काबीना मंत्री यशपाल आर्य के सहयोग से विकास खंड के पांच पुलों को स्वीकृति दिला दी है। इनमें से तिवारीगांव-घंघरेटी व घिरोली पुल की निविदा पहले ही प्रकाशित हो चुकी थी। अब यूडीआरपी योजना के अंतर्गत कोसी नदी के ऊपर चापड-रोपा, अमेल-खैराली, तल्लीसेठी-सिमतया गाँव के मध्य करीब 21 करोड के पुलों की निविदा प्रकाशित की गयी है। इस पर क्षेत्र की जनता ने काबीना मंत्री यशपाल आर्य, विधायक संजीव आर्य, मुख्य मंत्री त्रिवेंद्र रावत का आभार प्रकट किया गया है।

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-बेतालघाट रोपा मोटर मार्ग के निर्माण में वन भूमि की आपत्ति हुई दूर
-2.8 करोड़ की लागत से होगा निर्माण, ठेकेदार से अनुबंध भी हो चुका
नवीन समाचार, नैनीताल, 16 जून 2020। उत्तराखंड सरकार में वरिष्ठ काबीना मंत्री यशपाल आर्य व नैनीताल के विधायक संजीव आर्य के प्रयासों से जनपद पर दूरस्थ विकासखंड बेतालघाट मुख्यालय से रोपा गांव को जोड़ने वाले पांच किमी लंबे मोटर रोड की वन भूमि की आपति निस्तारित हो गई है। भारत सरकार के तकनीकी अधिकारी सन्नी गोयल के हस्ताक्षर से रोपा मोटर मार्ग निर्माण में वन भूमि प्रत्यावर्तन के आदेश निर्गत कर दिए गये हैं। इसके साथ इस मोटर मार्ग के निर्माण की सारी बाधाऐ दूर हो गयी हैं। क्षेत्रीय लोगों के अनुसार विधायक संजीव आर्य ने खासकर बेतालघाट क्षेत्र में इतनी सड़कों के निर्माण का मार्ग प्रशस्त कर दिया है कि लोग उन्हें ‘रोड मैन’ और सड़क बनवाने वाले विधायक भी कहने लगे हैं।
अनुसूचित जाति आयोग के उपाध्यक्ष पीसी गोरखा ने यह जानकारी देते हुए बताया कि बेतालघाट मोटर पुल से रोपा तक मोटर मार्ग के निर्माण का प्रधानमंत्री ग्राम सडक योजना के अंतर्गत प्रस्ताव पिछले पांच वर्ष से लंबित था। विधायक बनते ही संजीव आर्य के प्रयासों से इस मोटर मार्ग निर्माण पर शुरुआत में ही दो करोड़ करोड़ 80 लाख रुपये की धनराशि एवं निविदा भी आमंत्रित कर स्वीकृति कर ली गई थी। किंतु वन विभाग की भूमि मामले का निस्तारण नही होने की वजह से निर्माण कार्य लटका हुआ था। इधर पीएमजीएसवाई के अधिशासी अभियंता केएस बिष्ट ने बताया कि रोपा रोड का अनुबंध गठित कर दिया गया है। यह निविदा कुंवर कंस्ट्रक्शन चिलियानौला के नाम स्वीकार हुई है। नैनीताल वन प्रभाग को क्षतिपूरक वृक्षारोपण की धनराशी जमा होते ही निर्माण कार्य आरंभ कर दिया जायेगा। मोटर मार्ग की स्वीकृति से क्षेत्र के जिला पंचायत सदस्य आशा आर्य, मंडल अध्यक्ष प्रताप सिह बोहरा, ग्राम प्रधान पूजा फुलारा, नवीन पंत, चतुर भंडारी, धीरज भंडारी, भुवन भंडारी, तारा, मोहित, गणेश सिह, मुरलीधर, मोहन चंद, ललित रिखाडी, अर्जुन जलाल, भुवन रिखाडी, मोहन चंद, माया बोहरा, कुलवंत जलाल, प्रयाग दत्त, जगमोहन भंडारी, केवल, आनंद बोहरा, इंदर बोहरा, शेर सिह व पुष्कर जलाल आदि लोगों ने खुशी जताई है।

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-बेतालघाट के लिए सबसे करीबी बेतालघाट-रिखोली-नौनिया-विनायक मोटर मार्ग के निर्माण का रास्ता साफ, मार्ग को धनराशि स्वीकृति के बाद ई-निविदा भी स्वीकृत
नवीन समाचार, नैनीताल, 15 जून 2020। क्षेत्रीय विधायक संजीव आर्य के प्रयासों से जनपद की एक और सड़क बेतालघाट-रिखोली-नौनिया-विनायक के लिए 4.17 करोड़ की धनराशि स्वीकृति कर ली गयी है। साथ ही लोनिवि के प्रांतीय खंड ने सड़क के निर्माण के लिए ई-निविदा भी स्वीकृत कर ली है। अब स्वीकृत ठेकेदार के साथ अनुबंध कर सड़क का निर्माण कार्य शुरू होने का मार्ग प्रशस्त हो गया है। विधायक संजीव आर्य शीघ्र ही इस सड़क निर्माण कार्य का शुभारम्भ रिखोली से करेंगे। बताया गया है कि इस सड़क के बनने से नैनीताल के पूर्व विधायक स्वर्गीय खड़क सिह बोहरा का पैत्रिक गाँव चुलिया विडारी भी सड़क से जुड जायेगा। साथ ही यह मार्ग बन जाने के बाद बेतालघाट को नैनीताल जिला मुख्यालय से जोड़ने वाला सबसे करीबी मार्ग भी होगा।
यह जानकारी देते हुए अनुसूचित जाति आयोग के उपाध्यक्ष पीसी गोरखा ने बताया कि नैनीताल विधायक संजीव आर्य चुनाव जीतने के बाद से ही प्राथमिकता के आधार पर अधूरे निर्माण कार्यों के लिए बजट स्वीकृति कराने की कोशिश में जुटे हैं। इस चार किमी सड़क का निर्माण भी कई वर्षों से रुका हुआ था। विधायक आर्य के लगातार प्रयास से वनभूमि के हस्तांतरण के साथ ही शासन से राज्य योजना के अंतर्गत चार करोड़ सत्रह लाख की धनराशि स्वीकृत की गयी है। उन्होंने बताया कि यह मार्ग नैनीताल मुख्यालय को बेतालघाट से जोड़ने के लिए सबसे कम दूरी का मार्ग होगा। साथ ही यह मोटर मार्ग पर्यटन एवं रोजगार की भी अपार संभावनाओं को खोलने वाला साबित होगा। इस मोटर मार्ग के निर्माण से कोटाबाग के सौड, बासी, विनायक, घुघुसिगडी, कुन्जाखडक व बेतालघाट के रिखोली, सूखा हरिनगर, ओड़ावास्कोट, ऊचाकोट, कोश्या, तल्ली पाली व मल्ली पाली आदि गाँवों के लोग भी बधाड बुबु के मंदिर के भी आसानी से दर्शन कर सकेंगे। मोटर मार्ग की स्वीकृति से क्षेत्र के ग्रामीणों भारी उत्साह व खुशी है। जिला पंचायत सदस्य आशा आयर्, मंडल अध्यक्ष प्रताप सिह बोहरा, ग्राम प्रधान गणेश चंद्र, सुशीला देवी, अर्जुन जलाल, प्रताप चन्द्र, शेखर दानी, मोहन चंद, माया बोहरा, सुरेंद्र बोहरा, केशर बोहरा कुलवंत जलाल, यशपाल, कुलदीप कुमार, नवीन चंद्र, किशोर कुमार, कैलाश चंद्र, विजय कुमार, आनंद बोहरा, इंदर बोहरा शेर सिह व पुष्कर जलाल आदि ने भी खुशी जताई है।

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कैलाश जोशी @ नवीन समाचार, ज्योलीकोट (नैनीताल), 10 जून 2020।हल्द्वानी-नैनीताल राष्ट्रीय राजमार्ग की वर्तमान हालत को देख कर लगता है कि आने वाले दिनों में इस मार्ग पर सफर की डगर आसान नहीं होगी। बन्द पड़े कलवर्ट, टूटे पैरापिट, मलबे से भरी पड़ी  नालियां और अधूरे पड़े काम। निर्माण कार्यो की धीमी गति इस राजमार्ग की राह के सबसे बड़े रोड़े हैं।

उल्लेखनीय है कि ब्रिटिश काल में निर्मित यह मार्ग पर्यटन नगरी नैनीताल का सबसे प्रमुख मार्ग है। साथ ही कुमाऊँ की लाइफ लाइन ज्योलीकोट-कर्णप्रयाग एनएच भी इसी मार्ग से जुड़ा हुआ है। यह मार्ग इतना अधिक महत्वपूर्ण है, लेकिन विभागीय उदासीनता, कर्मचारियों व श्रमिकों की कमी और कोरोना की वजह से ठप पड़े सुरक्षा और निर्माण कार्य आगामी महीनों में दिक्कतें खड़ी करेंगे। मार्ग में बने गड्ढो ने इस मार्ग को उबड़-खाबड़ मार्ग में बदल दिया है। एक दो स्थल पर धीमी गति से निर्माण कार्य चल रहा है।भूस्खलन के लिए अत्यंत संवेदनशील भेड़िया पखान में चौड़ीकरण का कार्य पूरा न हो पाने से  बड़े भूस्खलन की आशंका बढ़ रही है, जिससे दिक्कतें बढ़ेंगी।

भेड़िया पखान में निकला मलबा बना मुसीबत
नैनीताल। जिस मार्ग पर प्रतिदिन हर स्तर के वीआईपी लोगों का आना-जाना होता है उसी हल्द्वानी नैनीताल राष्ट्रीय राजमार्ग के लिए सबसे बड़ी मुसीबत भेड़िया पखान में 22 फरवरी से 15 मार्च तक मार्ग चौड़ीकरण में निकला मलवा पत्थर बनने वाला है, जिसका उसी समय उचित निस्तारण न करके मार्ग के दोनों ओर लगभग दस किलोमीटर के दायरे में  एकत्र कर जगह-जगह ढेर लगा दिए गए हैं। इस मलबे से नालियां बन्द हो रही हैं और सुरक्षा दीवारों पर अनावश्यक भार पड़ रहा है। वही आम पड़ाव में भी हालात बदतर होने की आशंका है। इस पर एनएच के सहायक अभियंता एमबी थापा का कहना है कि स्थानीय मजदूरों से दो-तीन स्थलों में सुरक्षा कार्य शुरु करवा दिया गया है। ज्योलीकोट से नैनीताल तक हॉट मिक्स कार्य होना है, जो बाहरी मजदूरों से ही सम्भव है। उसके लिए भी प्रयास किया जा रहा है। भेड़िया पखान पर निकला मलबा-पत्थर मार्ग के लंबित  सुरक्षा कार्यो में उपयोग में लाया जाएगा। आने वाली बरसात में कोई दिक्कत न हो इसके प्रबन्ध सुनिश्चित किये जा रहे हैं।

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नवीन समाचार, नैनीताल, 09 जून 2020। बीते करीब तीन-चार माह से बेमौसमी सर्दियों की बरसात से ध्वस्त हुई हैड़ाखान-ओखलकांडा मार्ग के मुरकुड़िया में क्षतिग्रस्त सड़क मंगलवार को अचानक चर्चा में आ गई है। एक ओर आज ही भीमताल के पूर्व विधायक दान सिंह भंडारी ने इस मामले को लेकर बुधवार को नैनीताल जिला कलक्ट्रेट में धरने पर बैठने का ऐलान किया है, तो दूसरी ओर आज ही भीमताल के ब्लॉक प्रमुख डा. हरीश बिष्ट ने गांव में पहुंचकर इस मामले का समाधान निकाल लेने का दावा किया है।
डा. बिष्ट ने बताया कि क्षेत्रीय ग्रामीणों को क्षतिग्रस्त स्थान पर ही सड़क की मरम्मत के लिए अपनी भूमि देने के लिए मना लिया गया है। इससे मार्ग की मरम्मत का मार्ग प्रशस्त हो गया है। उनका कहना है कि इस सड़क के क्षतिग्रस्त होने के कारण ओखलकांडा के सौ से अधिक गांवों के हजारों लोगों को मौरनौला, शहरफाटक और धानाचूली होते हुए 60-70 किमी का अतिरिक्त चक्कर लगाकर हल्द्वानी आना-जाना पड़ रहा है। इसका अब समाधान हो जाएगा।
वहीं दूसरी ओर भीमताल के पूर्व विधायक ने कल बुधवार को इस मामले पर धरना देने का ऐलान किया है।

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-कैलास, आदि कैलास यात्रा,सेना की गस्त अब सब सड़क से होगी

नवीन समाचार, नैनीताल, 8 मई 2020। चीन सीमा पर सुरक्षा के लिहाज से देश की ताकत और बढ़ने जा रही है। 14 साल के अथक प्रयास के बाद गर्बाधार-लिपुलेख तक बनी सीमांत की सामरिक महत्व वाली पहली सड़क को रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने शुक्रवार को चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल बिपिन रावत और चीफ ऑफ आर्मी स्टाफ जनरल मनोज मुकुंद वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए देश को समर्पित किया। इस सड़क के बनने से भारती सेना और अर्द्धसैनिक बलों के जवान साजो-सामान के साथ चीन सीमा तक 3 दिन के बजाए तीन से चार घंटे में पहुंच जाएंगे। उद्घाटन के साथ ही सेना, आईटीबीमी यानी भारत तिब्बत सीमा पुलिस बल व बीआरओ यानी सीमा सड़क संगठन के वाहन चीन सीमा तक पहुंचने लगेंगे। चीन सीमा तक बनी इस सड़क से आईटीबीपी व सशस्त्र सीमा बल (एसएसबी) कालापानी तक नेपाल सीमा से लगी इस सड़क पर अब सीमा पर वाहन से गश्त लगा सकेंगे। वहीं दोनों बलों की अग्रिम चौकियों तक सामान वाहन से पहुंचेगा और जवान भी चौकियों तक वाहन से पहुंचेंगे।
इस सड़क से कैलास मानसरोवर यात्रा, आदि कैलास यात्रा, भारत-चीन व्यापार की भी राह आसान हो जाएगी। यात्री भी सड़क मार्ग से चीन सीमा तक पहुंच पाएंगे। जिला मुख्यालय पिथौरागढ़ से लिपुलेख तक सड़क मार्ग की दूरी 216 किमी है। मुख्यालय से गर्बाधार तक सड़क पहले से थी, लेकिन गर्बाधार से चीन सीमा पर अंतिम भारतीय पड़ाव लिपुलेख तक 76 किमी लंबी दुरुह सड़क का निर्माण कार्य 2006 में शुरू किया था जो अब पूरा हो गया है। यह हिस्सा काफी कठिन था। यहां 3 किमी सड़क बनने में कई वर्ष लग गए। इसके लिए हेलीकॉप्टर से मशीनें उच्च हिमालयी क्षेत्र में पहुंचाई और असंभव काम संभव कर दिखाया। शुक्रवार को चीन सीमा सहित आदि कैलास के लिए भी सड़क का उद्घाटन हुआ। बीआरओ ने सीमा पर आदि कैलास तक की सड़क भी तैयार कर दी है। आदि कैलास को जाने वाली सड़क और चीन सीमा तक जाने वाली सड़क गुंजी तक एक ही है। गुंजी से आदि कैलास के लिए सड़क कुटी होते हुए जौलिगकोंग तक जाती है। इस सड़क के बनने से व्यास घाटी के सात गांव- बूंदी, गर्ब्याग, गुंजी, नाबी, रौगकोंग, नपलच्यू और कुटी पहली बार सड़क से जुड़ गये हैं।
वहीं प्रसिद्ध कैलास मानसरोवर यात्रा भी वाहनों से हो सकेगी। वाहनों से यात्रा होने पर पैदल पड़ाव नहीं होंगे। आधार शिविर धारचूला से चीन सीमा तक पहुंचने में 5 घंटे के आसपास समय लगेगा। प्रतिवर्ष जून से शुरू होने वाला भारत-चीन व्यापार भी इससे गति पकड़ेगा। अभी तक व्यापारियों को नजंग से आगे सामान घोड़े व खच्चरों से ले जाना पड़ता था। सड़क ने अब ॐ पर्वत और आदि कैलास पहुंचना भी आसान कर दिया है। दिल्ली से अब ॐ पर्वत पहुंचने में मात्र दो दिन का समय लगेगा। दिल्ली से पिथौरागढ़ तक सफर 18 घंटे का है। पिथौरागढ़ से धारचूला साढ़े तीन घंटे और धारचूला से ॐ पर्वत तक लगभग पांच घंटे का सफर रहेगा।

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-आज भी गांव से 20 किमी दूर है सड़क, पलायन कर गए पुरुष, घायल व्यक्ति को महिलाओं ने कंधे पर पहुँचाया अस्पताल
-उच्च हिमालयी क्षेत्र में, सुविधाओं के नाम पर कुछ नहीं होने के कारण जहां पुरुष पलायन कर गए, महिलाएं पुरुष घायलों को भी कंधा दे रही हैं
नवीन समाचार, कपकोट (बागेश्वर), 4 मार्च 2020। केंद्र व राज्य की अनेकों योजनाओं के बीच प्रदेश में आज भी कई गांव सड़क और स्वास्थ्य जैसी तमाम सुविधाओं से 20 किलोमीटर तक दूर हैं। जनपद मुख्यालय से 25 किमी दूर कपकोट से करीब 45 किमी दूर कमोबेश मौत के कुंवे सी कच्ची व बेहद खतरनाक सड़क से होकर एक स्थान आता है बदियाकोट। उससे आगे के गांवों की तो कल्पना भी नहीं की जा सकती है। वहां न तो बाहरी दुनिया की खबरें ही पहुंचती हैं और न वहां की खबरें ही बाहर आ पाती हैं। ऐसा ही एक गांव में बोरबलड़ा। संभवतया पहली बार इस गांव से कोई खबर फोटो सहित बाहरी दुनिया में आई है। फोटो में महिलाएं अपने कंधों पर एक मरीज को ला रही हैं। वहीं खबर के अनुसार यहां पेड़ से गिरने के कारण 38 वर्षीय खिलाफ सिंह का पैर टूट गया। गांव सुविधाओं की कमी से पलायन की बुरी चपेट में है। गांव में पुरुषों की संख्या ही सीमित है। इसलिए कौन घायल खिलाफ सिंह को 20 किमी दूर पैदल बलियाकोट के स्वास्थ्य केंद्र लाये। ऐसे में गांव की प्रीति, चंद्रा, सावित्री व बबीता आदि महिलाएं आगे आईं और घायल को अपने कंधों पर 20 किमी पैदल ढोकर बदियाकोट के अस्पताल लायीं। यहां का अस्पताल भी मात्र फार्मासिस्ट के भरोसे चल रहा है, इसलिए घायल को यहां भी उपचार नहीं मिला। इस पर घायल को वाहन से 70 किमी दूर स्थित बागेश्वर के जिला चिकित्सालय भेजा गया। अंतराष्ट्रीय महिला दिवस पर इन महिलाओं के साहस को सलाम तो बनता है जो गांवों से असुविधाओं के कारण पलायन कर चुके पुरुष समाज को संदेश भी दे रही हैं कि वे हिमालय के करीब 12 माह बर्फ के बीच वे बेहद कठिन परिस्थितियों में बिना किसी सुविधा के बीच भी न केवल जी रही हैं, घर के साथ ही पालतू पशुओं के लिए चारा-पत्ती व ईंधन के लिए लकड़ियों का इंतजाम करती और खुद ही बैलों से खेत भी जोतती हैं, बल्कि पुरुषों को जरूरत पड़ने पर ‘कंधा’ भी दे रही हैं।

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-उपेक्षा को लेकर रौखड़ क्षेत्रवासियों से विधायक को लिखा पत्र, कहा-तीन किमी सड़क न होने के कारण आज भी 19वीं सदी में जीने को हैं मजबूर
नवीन समाचार, नैनीताल, 10 जनवरी 2019। जनपद मुख्यालय के निकटवती मात्र 22 किमी दूर जनपद के कोटाबाग विकास खंड के मंगोली पट्टी के अंतर्गत आने वाले ग्राम रौखड़ व स्यात के ग्रामीणों ने शासन-प्रशासन पर क्षेत्र की उपेक्षा का आरोप लगाया है। क्षेत्रवासियों ने इधर स्थानीय विधायक को पत्र लिखकर क्षेत्र को विकास की मुख्य धारा से जोड़ने का अनुरोध किया है। साथ ही सरकार से उम्मीद जताई है कि जो आजादी के 75 वर्ष से नहीं हो पाया, वह यह सरकार कर पाएगी। वहीं विधायक संजीव आर्य ने इस सड़क पर कहा, उन्होंने क्षेत्रवासियों से यह सड़क बनाने का वादा किया है। सड़क का शासनादेश लेकर ही क्षेत्र में जाएंगे।

रौखड़ क्षेत्रवासियों का कहना है कि उनके गांव जंगल के बीच प्रकृति के अपार सौन्दर्य के बीच बसे हैं। अनेक वन्य जीव एवं खूबसूरत पशु-पक्षियों का भी यह घर है। यहां से वर्ष भर भाभर और तराई क्षेत्र का सूर्यास्त के सुंदर नजारे नजर आते हैं। लिहाजा यहां एक प्रकृति प्रेमियों के लिए पर्यटन की अपार सम्भावनायें हैं। लेकिर गांव के लिए मात्र तीन किलोमीटर लंबी सड़क न होने से आज भी यहां के लोग 19वीं सदी जैसा जीवन जीने को मजबूर हैं। गांव के किसी व्यक्ति का स्वास्थ खराब हो जाये तो उसे डोली के सहारे सड़क तक लाना पड़ता है। क्षेत्रवासियों ने चेतावनी दी है कि यदि उन्हें अब भी विकास की धारा से वंचित रखा जाता है. तो वे आने वाले सभी चुनावों का बहिस्कार करने पर विचार कर सकते हैं। साथ ही सरकार की इस नाकामी का भी प्रचार-प्रसार करंगे।

संजीव आर्य (File Photo)

इस पर पूछे जाने पर क्षेत्रीय विधायक संजीव आर्य ने बताया कि तीन वर्षों में इस सड़क के लिए प्रयासरत हैं। डेढ़ करोड़ रुपए अवमुक्त करा दिए हैं। क्षतिपूरक वृक्षारोपण हेतु भूमि भी मिल चुकी है। सड़क दो वन प्रभागों-रामनगर व नैनीताल में आती है। दोनों डीएफओ से आपत्तियां दूर कराकर फाइल भारत सरकार को भेजी थी। वहां से लगी कुछ आपत्तियों को भी दूर कर वापस भारत सरकार को भेज दिया है। जैसे ही भारत सरकार से स्वीकृति मिलती है, अपने वादे के अनुरूप सड़क का शासनादेश लेकर ही क्षेत्र में जाने का अपना वादा निभाएंगे।

यह भी पढ़ें : नए साल के पहले दिन ही मानवता-ममता शर्मसार: ‘आदर्श’ नगर के कूड़ेदान में मिला मानव भ्रूण

नवीन समाचार, रुद्रपुर, 1 जनवरी 2019। नए वर्ष के पहले दिन ही रुद्रपुर से मानवता एवं ममता को शर्मसार करने वाली खबर सामने आई। यहां आदर्श कॉलोनी क्षेत्र में जनता इंटर कॉलेज मैदान मार्ग पर अंबेडकर द्वार के पास सड़क किनारे रखे कूड़ेदान में मानव भ्रूण बोरे में बंद मिला। इससे आसपास लोगों का जमावड़ा लग गया। बताया गया है कि भ्रूण अर्द्धविकसित एवं मृत था। सूचना मिलने पर पुलिए भी पहुंची और भ्रूण को कब्जे में लेकर उसके परिजनों की तलाश प्रारंभ कर दी है। घटना को लेकर तरह-तरह की अटकलों व चर्चाओं का बाजार गर्म है।

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