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हद है: पिता-पुत्र ने दो सगी बहनों से कर ली शादी, शादी वैध भी करार…!

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नवीन समाचार, रुड़की, 06 जनवरी 2020। लंढौरा क्षेत्र के एक गांव में पिता-पुत्र द्वारा दो सगी बहनों से निकाह करने का मामला प्रकाश में आया है और पूरे क्षेत्र में चर्चा का विषय बना हुआ है। मामले को लेकर बिरादरी के लोगों में रोष व्याप्त है। इस मामले में बीते सोमवार यानी चार जनवरी की रात को बिरादरी के गणमान्य लोगों की पंचायत भी हुई जिसमें धार्मिक गुरु की सहमति मिलने पर पंचायत ने पिता-पुत्र की शादी को वैध करार दे दिया है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार कुछ दिन पहले देवबंद क्षेत्र के निवासी पिता-पुत्र ने सहारनपुर क्षेत्र निवासी दो सगी बहनों से कुछ अंतराल में निकाह कर शादी रचा ली थी। पिता-पुत्र के सगी बहनों से शादी रचाने की जानकारी मिलने पर बिरादरी के लोगों ने इस शादी पर कड़ा विरोध जताया। बिरादरी के लोगों का कहना था कि धर्म के हिसाब से सगी बहनों से पिता-पुत्र की शादी करना जायज नहीं है। इस मामले को लेकर बिरादरी के लोगों में काफी रोष था। मामला बढ़ने पर सोमवार की रात को गांव में बिरादरी के गणमान्य लोगों की महापंचायत हुई। महापंचायत में हरिद्वार, सहारनपुर, मुजफ्फरनगर, मेरठ समेत आधा दर्जन से अधिक जिलों के बिरादरी के जिम्मेदार लोगों ने शिरकत की। पंचायत में पिता-पुत्र के साथ दो सगी बहनों से शादी करने को लेकर तीखी नोकझोंक भी हुई। लेकिन मामला धर्म से जुड़ा होने के कारण धर्म गुरुओं पर छोड़ दिया गया। पंचायत में ही धार्मिक गुरु से पिता-पुत्र द्वारा दो सगी बहनों से शादी कर लेने से संबंधित मसला पूछा गया जिसमें बताया गया कि दो सगी बहनों का पिता-पुत्र से शादी करना जायज है जिसके बाद महापंचायत में शामिल लोगों ने धार्मिक गुरु की बात पर ऐतबार करते हुए पिता-पुत्र द्वारा दो सगी बहनों से निकाह कर लेने के मामले को वैध मान लिया। जिसके बाद पंचायत में शामिल लोग अपने घरों के लिए रवाना हो गए, लेकिन दो सगी बहनों से पिता-पुत्र द्वारा शादी कर लेने का मामला क्षेत्र में चर्चा का विषय बना हुआ है।

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नवीन समाचार, नैनीताल, 28 नवम्बर 2020। कोरोना काल में जहां शादियां एक बार फिर से बढ़ रहे कोरोना संक्रमण का कारण बताई जा रही हैं, ऐसे में नगर निवासी पूर्व रोडवेज कर्मी देवेंद्र लाल साह ने अपनी बेटी उज्वला की शादी देहरादून निवासी मोहित शर्मा के साथ नैनीताल कलेक्ट्रेट में एसडीएम अनुराग आर्या के समक्ष कराकर मिसाल पेश की। बेहद सादगी से हुई इस शादी की लोग प्रशंसा कर रहे हैं। शादी में गिने-चुने पारिवारिक सदस्य ही शामिल हुए। यहां तक कि पांच भाइयों का बड़ा परिवार होने के बावजूद घर में ही बिना किसी को निमंत्रित किए सुवाल-पथाई व महिला संगीत की रश्में हुईं तथा प्रीतिभोज भी नहीं हुआ।

एसडीएम के समक्ष कोर्ट मैरिज करते दूल्हा-दुल्हन।

श्री साह ने बताया कि दूल्हा-दुल्हन दोनों पहले से ही सादगी से विवाह करने के पक्ष में थे। कोरोना काल में उनका सादगी से विवाह करने का संकल्प और भी अधिक मजबूत हुआ। इसलिए विवाह में दूल्हे के पक्ष से 8-10 एवं दुल्हन पक्ष से 6-7 लोग ही शामिल हुए। इस दौरान दूल्हा-दुल्हन ने यह भी कहा कि कोरोना काल में कोरोना के संक्रमण को रोकने के लिए हर पढ़े-लिखे व्यक्ति को अपनी ओर से संक्रमण रोकने के हरसंभव उपाय करने चाहिए व सरकार का साथ देना चाहिए। उल्लेखनीय है कि दूल्हा-दुल्हन दोनों एमबीए करने के उपरांत मुंबई में अलग-अलग कंपनियों में प्रबंधन से संबंधित पदों पर हैं।

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नवीन समाचार, काशीपुर, 05 जनवरी 2020। शहर की एक लड़की के साथ ऐसी घटना हुई कि शादी के दो महीने बाद ही उसकी शादी टूट गई है। हुआ यह कि उसकी शादी दो महीने पहले हरियाणा के सोनीपत के रहने वाले एक लड़के से हुई थी। लड़की जब ससुराल पहुंची तो हर नई दुल्हन की तरह उसे ससुराल में बड़ा महत्व मिल रहा था, लेकिन इसी बीच उसकी तबियत बिगड़ी तो ससुराल वाले उसको अस्पताल ले गए। वहां चिकित्सकों उसे साढ़े 3 माह की गर्भवती बताया। इससे ससुराल वालों के अरमान ध्वस्त हो गए। वे सदमे में आ गए। उसके पति ने तत्काल उसे अपनाने से इनकार कर दिया। इस पर लड़की दिल्ली में रहने वाली अपनी बहन के पास आ गई और वहीं रहने लगी। तभी उसने दिल्ली में नरेला थाने में अपने मायके काशीपुर निवासी जावेद नाम के एक युवक के खिलाफ मुकदमा दर्ज करवा दिया। तहरीर में लड़की ने बताया है कि वह शादी से पहले काशीपुर में रहती थी और सिलाई सीखती थी। इस दौरान उसकी पहचान का जावेद नाम का लड़का उसे काशीपुर के एक होटल में ले गया और वहां उसने उसके साथ शारीरिक संबंध बनाए। जब उसने शादी तय होने की बात कह ऐसा करने से मना किया तो जान से मारने की धमकी दी। इस डर से उसने किसी को कुछ नहीं बताया और शादी कर ली। लेकिन जावेद की हरकत से उसकी शादी टूट गई और जिंदगी तबाह हो गई है। अब नरेला पुलिस इस मामले में कार्रवाई कर सकती है।

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नवीन समाचार, रुद्रपुर, 28 दिसम्बर 2020। रुद्रपुर में एक युवक द्वारा युवती से सगाई करने के बाद विवाह करने से इंकार करने और लड़की को बदनाम करने का मामला प्रकाश में आया है। इस मामले में पीड़ित लड़की के परिजनों ने जिले के एसएसपी दलीप सिंह कुंवर से शिकायत कर कार्रवाई की मांग की। एसएसपी के आदेश पर पुलिस ने आरोपित युवक और उसके परिजनों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया है।
पुलिस को मिली तहरीर के अनुसार ग्राम अर्जुनपुर निवासी दिलीप सिंह पुत्र दयाल सिंह की पुत्री का विवाह वर्ष 2017 में धौराडाम, नजीबाबाद, किच्छा निवासी बिटटू से तय हुआ। इसके बाद दोनों की सगाई भी हुई, जिसमें उसने 80 हजार रुपये खर्च किए। सगाई के बाद उसकी पुत्री और बिटटू को मिलना जुलना बढ़ गया। इसे देख उसने बिटटू के परिजनों ने जल्द विवाह करने को कहा। इस पर उन्होंने उसकी पुत्री पर तरह-तरह के आरोप लगाकर शादी करने से इंकार कर दिया। मामले में पंचायत भी हुई। पंचायत में बिटटू के परिजनों ने अपनी पुत्री के विवाह के बाद ही दोनों की शादी करने का आश्वासन दिया। इसके बाद बिट्टू की बहन की शादी भी हो गई, फिर भी शादी नहीं की, और अब तो शादी से साफ इंकार कर दिया है। कोतवाल एनएन पंत ने बताया कि जांच की जा रही है, इसके बाद आरोपितों की गिरफ्तारी की जाएगी।

यह भी पढ़ें : हैदराबाद में हुई कुमाउनी शादी, अंतराष्ट्रीय बैटमिंटन खिलाड़ी की बहन बनी रंग्वाली-पिछौड़ा पहन कुमाउनी बहू…

नवीन समाचार, रुद्रपुर, 19 दिसम्बर 2020। बीती रात्रि हैदराबाद में हुई एक कुमाउनी शादी राष्ट्रीय-अंतराष्ट्रीय मीडिया की सुर्खियां बन गई है। यहां अंतराष्ट्रीय बैटमिंटन खिलाड़ी ज्वाला गट्टा की बहन इन्सी गुट्टा ने कुमाउनी रंग्वाली पिछौड़ा और सिर पर लक्ष्मी स्वरूप मुकुट पहन कर अल्मोड़ा के सिरोली क्षेत्र के रहने वाले संजय बिष्ट से परंपरागत पहाड़ी रीति-रिवाज के साथ कुमाउनी तरीके से शादी की। शादी चौखुटिया के बौनीगाड़ निवासी आचार्य भानुश्रीप्रकाश जोशी ने हैदराबाद जाकर संपन्न कराई।

संजय व इन्सी गुट्टा कुमाउनी शादी के परिधानों में।

बताया गया कि संजय गूगल कंपनी में नौकरी करते हैं। जबकि इन्सी का हैदराबाद में निजी व्यवसाय है। वहीं संजय के पिता खीम सिंह बिष्ट का दिल्ली में व्यवसाय है, जबकि मां कौशल्या देवी गृहणी हैं। संजय और इन्सी ने यह शादी काफी समय प्रेम संबंध में रहने के उपरांत की है। शांत और सौम्य स्वभाव के संजय पहली नजर में ही इन्सी को भा गए थे। संजय भी इन्सी को पसंद करने लगे थे। पसंद और विचार मिलने पर दोनों ने अपने रिश्ते के बारे में परिजनों को बताया। परिजनों की सहमति मिलने पर दोनों का विवाह तय हुआ। दोनों की शादी की सभी रस्में हैदराबाद में निभाई गईं। विवाह समारोह हैदराबाद में जरूर था, लेकिन पूरा विवाह समारोह पहाड़ी रीति-रिवाज से संपन्न हुआ। दुल्हन इन्सी ने शादी समारोह में परंपरागत कुमाऊंनी रंगवाली पिछौड़ा पहना था। माथे पर लक्ष्मी स्वरूप मुकुट सज रहा था। कुमाऊंनी दुल्हन के रूप में इन्सी बेहद खूबसूरत नजर आ रही थीं। हैदराबाद में संपन्न हुआ यह कुमाउनी विवाह समारोह लोगों के बीच चर्चा के साथ ही उत्सुकता का विषय भी बना रहा। इस तरह अंतरराष्ट्रीय बैडमिंटन खिलाड़ी ज्वाला गट्टा की बहन कुमाऊं की बहू बन गई। अब अल्मोड़ा के लोग संजय के बहू इन्सी संग गांव लौटने का इंतजार कर रहे हैं।

यह भी पढ़ें : शादी के बाद पूर्व महिला ग्राम प्रधान व दूल्हे सहित परिवार के 28 सदस्यों में कोरोना की पुष्टि..

नवीन समाचार, देहरादून, 19 दिसम्बर 2020। उत्तराखंड के मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत के परिवार सहित कोरोना पॉजिटिव पाए जाने के साथ उनके विधानसभा क्षेत्र-डोईवाला के एक गांव में हुई शादी के बाद पूर्व महिला ग्राम प्रधान सहित दूल्हे व उनके परिवार के 28 सदस्यों के कोरोना संक्रमित होने का मामला प्रकाश में आया है। प्राप्त जानकारी के अनुसार डोईवाला के लच्छीवाला गांव की पूर्व प्रधान गीता सावन और दूल्हे सहित उनके परिवार के 28 सदस्य कोरोना संक्रमित हुए हैं। अलबत्ता, दुल्हन की रिपोर्ट नेगेटिव आई है। सभी संक्रमित सदस्यों को होम आइसोलेशन में रखा गया है। वहीं प्रशासन ने एहतियातन पूरे लच्छीवाला वार्ड नंबर एक की दो गलियों को कंटेनमेंट जोन बना दिया है।
डोईवाला के उप जिलाधिकारी लक्ष्मीराज चौहान ने बताया कि गत 10 दिसंबर को लच्छीवाला वार्ड नंबर एक निवासी अनिल सावन के बेटे की शादी थी। पूर्व प्रधान गीता सावन भी उनके परिवार की ही सदस्य हैं। शादी समारोह में पारिवारिक सदस्य और रिश्तेदार शामिल हुए थे। दो दिन पूर्व दूल्हे सहित तीन सदस्यों को कोरोना के लक्षण नजर आए तो उन्होंने कोरोना टेस्ट कराया, जिसमें उनकी रिपोर्ट पॉजीटिव आई। इसके बाद अन्य लोगांे के नमूने भी लिए गए। इस प्रकार अब तक दूल्हे सहित 28 लोग कोरोना संक्रमित मिल चुके हैं। इनमें से 24 संक्रमित इसी वार्ड नंबर एक में रहते हैं और चार अन्य संक्रमित और लच्छीवाला के टोंगिया नयागांव में रहते हैं। एहतियातन वार्ड नंबर एक में पूर्व प्रधान के साथ वाली दोनों गलियों को कंटेनमेंट जोन बना दिया गया है। स्वास्थ्य विभाग की टीम शादी में शामिल हुए अन्य रिश्तेदारों के बारे में भी पूछताछ कर रही है। जल्द उनके भी नमूले लिये जाएंगे।

यह भी पढ़ें : शादियों का सीजन निपटते पुलिस ने अब दर्ज किया बारात में नियमों के उल्लंघन पर दूल्हे के पिता व बारातियों पर मुकदमा…

नवीन समाचार, हल्द्वानी, 12 दिसम्बर 2020। बारातों की छूट मिलने के बाद राज्य में कोरोना की दूसरी लहर लौटने के दावों के बीच दो दिन बाद ही इस वर्ष की बारातों का सीजन पूरा हो रहा है, और आगे चार माह तक बारात के मुहूर्त नहीं है। अब नैनीताल-उत्तराखंड पुलिस ने बारात में नियमों का उल्लंघन करने पर पहला मामला दर्ज किया है। अच्छा होता कि पुलिस पहले कार्रवाई करती तो यह नौबत शायद न आई होती।
हल्द्वानी पुलिस ने सड़क पर बरात निकालने के दौरान जाम लगने पर शनिवार को दूल्हे के पिता सहित 25 अज्ञात लोगों लोगों पर मुकदमा दर्ज किया है। अज्ञात लोगों को फोटो व वीडियोग्राफी की मदद से चिन्हित किया जा रहा है। कोरोना काल में शर्तों के साथ मिली शादी की अनुमति के उल्लंघन पर मुकदमा दर्ज होने का यह पहला मामला है। यह कार्रवाई शुक्रवार को निकली शिवालिक विहार फेस-2 निवासी भोला दत्त के बेटे की शादी के दौरान कैनाल रोड स्थित एक बैंक्वेट हाल में आयोजित विवाह समारोह के दौरान कालटैक्स से 500 मीटर दूर पनचक्की की तरफ बरातियों व बैंडबाजे वालों की वजह से बनी जाम की स्थिति पर की गई है। जाम की सूचना पर दमुवाढूंगा चौकी प्रभारी देवेंद्र बिष्ट पुलिसकर्मियों संग मौके पर पहुंचे थे और सड़क पर यातायात का नियंत्रित करवाया था। इस पर ही मुकदमा दर्ज किया गया है।

यह भी पढ़ें : शादी की तीसरी रात ही पति, सास-ससुर को जहर पिलाकर जेवरात-नगदी सहित भाग गई उत्तराखंडी दुल्हन…

नवीन समाचार, पानीपत (हरियाणा), 10 दिसंबर 2020। अपने यहां बेटियों को कोख में ही मार कर लिंगानुपात कम रखने के लिए अभिशप्त पंजाब-हरियाणा के कई गिरोह उत्तराखंड की बेटियों को बहला-फुसलाकर अपने बेटों के लिए ब्याहते हैं।लेकिन इधर एक ऐसा मामला सामने आया है जिसमें उत्तराखंड से लाई गई ऐसी ही एक दुल्हन दूल्हे सहित सास-ससुर को शादी की तीसरी रात ही दूध में कुछ पिलाकर शादी में मिले आभूषणों के साथ घर छोड़कर भाग आई। अब ससुराली उस पर दूध में कुछ पिलाकर, जेवरात व नगदी लूट कर भाग जाने का आरोप लगा रहे हैं।
मामला निकटवर्ती नौल्था गांव का है। आरोप है कि यहां शादी के तीन दिन बाद उत्तराखंड से आई नई नवेली दुल्हन ने पत्नी, बुजुर्ग सास व ससुर को जहरीला दूध पिला दिया। इसके बाद वह 80 हजार रुपये और करीब सवा दो लाख रुपये के जेवर, कपड़े और अन्य सामान लेकर फरार हो गई। घर में शादी की खुशी गम में तब्दील हो गई। इसराना थाना पुलिस ने आरोपित दुल्हन, उसकी बहन और चार बिचौलियों के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है। नौल्था गांव के अशिक्षित 26 वर्षीय किसान दिनेश के अनुसार उसका बड़ा भाई रमेश शादीशुदा है और उनसे अलग रहता है। बुजुर्ग पिता रामभज और मां कृष्णा हैं। मां को खाना बनाने में दिक्कत होती थी। उनकी हरियाणा से शादी नहीं हो रही थी। इसलिए गुहांड के पलड़ी गांव के कृष्ण पंडित ने दो महीने पहले पिता को बताया था कि जालपहाड़ गांव की कृष्णा नामक महिला उसकी उत्तराखंड के जिला अल्मोड़ा के पावा गांव की सुनीता से शादी करा देगी। सुनीता के स्वजन गरीब है। शादी का खर्च उन्हें ही वहन करना होगा। एक दिसंबर को वह, पिता, कृष्ण, कृष्णा का बेटा दिनेश और दिनेश की पत्नी पावा गांव पहुंचे। 2 दिसंबर को काशीपुर तहसील में उसकी व सुनीता की शादी हो गई। इस मौके पर सुनीता की बहन बिमलेश भी थी। उन्होंने सुनीता के स्वजनों से कोई दान नहीं लिया था। बल्कि सुनीता को उन्होंने सोने का मंगलसूत्र, दो सोने की अंगूठी, एक जोड़ी सोने के टॉप्स, एक चांदी का हथफूल, चांदी की चुटकी और चांदी का टिक्का सोने का पानी चढ़ा हुआ, चार चांदी की चूड़ी, दो जोड़ी पाजेब और 20 हजार रुपये के कपड़े और अन्य सामान दिलाया था। 80 हजार रुपये खान-पान पर भी उन्होंने ही खर्च किए थे। 4 दिसंबर की रात को वह सुनीता को साथ ले कर घर लौट आया। 4 दिसंबर की रात साढे़ आठ बजे सुनीता ने पहले उनके पिता रामभज और फिर मां को जहरीला दूध पिला दिया। इसके बाद उसे भी दूध पिलाया। 5 दिसंबर की सुबह चचेरे भाई की बहू व बुआ उनके घर आई वे तीनों बेसुध थे। स्वजनों ने उन्हें सामान्य अस्पताल में दाखिल कराया। उन्हें सात दिसंबर की शाम को होश आया। डाक्टर ने उन्हें बताया कि मारने की नीयत से तीनों को दूध में जहर मिलाकर पिलाया गया था। उसकी पत्नी सुनीता घर से 80 हजार रुपये की नकदी, जेवरात और अन्य सामान चुराकर भाग गई। इस साजिश में सुनीता व उक्त पांच लोग भी शामिल हैं।

बिचौलिये करवा चुके हैं दस शादियां
बुजुर्ग रामभज ने बताया कि पलड़ी गांव के कृष्ण पंडित से कई साल से पहचान है। कृष्ण ने बताया कि मांडी गांव की कृष्णा की जालपहाड़ में शादी हो रखी है। कृष्ण व उसका बेटा दिनेश उत्तराखंड की युवतियों से शादी कराते हैं। वह भी उनके साथ अपने व अन्य जिलों के दस युवकों की शादी करा चुके हैं। वह उनकी बातों में आ गया। एक लाख रुपये उसने कृष्ण व दिनेश को पावा गांव में दिए। 20 हजार रुपये सुनीता के स्वजनों को दिए थे। कृष्ण उनके साथ नहीं गया था। कृष्ण ने बताया था कि वह 5100 रुपये लेगा। बेटे का घर बसाने के लिए उन्होंने कर्ज लेकर शादी की थी। वह खाना खाकर दूध पीकर कमरे में हुक्का पी रहा था। पुत्रवधू सुनीता ने आधा गिलास दूध पिला दिया। दो मिनट बाद ही वह बेहोश हो गया। उन्हें क्या पता था कि पहाड़ी पुत्रवधू दगा दे जाएगी। पीड़ित रामभज ने बताया कि वह दिनेश, उसकी पत्नी और मां कृष्णा को किराये की गाड़ी से पावा गांव ले गया। रास्ते में उन्हें खाना खिलाया। खरीदारी कराई। किराये व खान-पान पर 20 हजार रुपये खर्च हो गए। शादी करवाने में सहयोग करने वाले वकील ने सात हजार रुपये फीस ली। आशंका है कि गिरोह ने कई युवकों को लूटा है। वहीं इसराना थाना प्रभारी नरेंद्र कुमार ने बताया कि पीड़ित दिनेश की शिकायत पर मामला दर्ज कर लिया है। आरोपित घरों से फरार हैं। आशंका है कि ये अंतरराज्यीय गिरोह है जो युवकों को शादी कराने का झांसा देकर लूटता है। आरोपितों की गिरफ्तारी के बाद ही पता चल पाएगा कि कितने युवकों को शिकार बनाया गया है।

यह भी पढ़ें : रामनगर में एक भाई ने सगे बड़े भाई के साथ जो किया, वह अब तक किसी दुश्मन ने भी न किया था…

नवीन समाचार, रामनगर (नैनीताल), 07 दिसम्बर 2020। रंजिश में लोग क्या-क्या कर डालते हैं, पर नैनीताल के रामनगर में एक भाई ने अपने सगे बड़े भाई से रंजिश निकालने को जो तरीका अपनाया, वैसा अब तक के ज्ञात इतिहास में किसी दुश्मन ने भी न किया होगा। यहां नाथूपुर छोई में दो सगे भाइयों सुरजीत और कुलदीप के बीच काफी समय से विवाद चल रहा है। इसी महीने सुरजीत के बेटे की शादी हुई, जिसमें कुलदीप ने ऐसा खेल रच डाला कि दूसरा भाई कानूनी चक्कर में फंस गया। हुआ कुछ ऐसा कि सुरजीत ने अपने बेटे की शादी के लिए सिर्फ 80 कार्ड ही छपवाकर बांटे थे, लेकिन उसके भाई ने चुपके से सौ कार्ड और छपवाकर असामाजिक तत्वों व श्रमिकों में बांट दिए। यही नहीं खुद भी बिन बुलाए शादी में आ गया और चाकूबाजी की घटना को अंजाम देकर दूल्हे के एक भाई को चाकू मारकर लहूलुहान कर दिया।
हुआ यह कि सुरजीत के पुत्र परविंदर की शादी मूलतः बाजपुर निवासी पर वर्तमान में कनाडा में रहने वाली किरनदीप से बीती तीन दिसंबर को हुई थी। पुलिस के मुताबिक, सुरजीत व उसके भाई कुलदीप मान के बीच पुराना जमीनी विवाद चला आ रहा है। जिस वजह से कुलदीप रंजिश रखता है। सुरजीत के पुत्र की शादी तय हुई तो कुलदीप को भाई से बदला लेने का मौका मिल गया। कोविड के नियमों का पालन करने के लिए सुरजीत ने 80 कार्ड ही छपवाकर बांटे थे, लेकिन उसके भाई कुलदीप ने अपनी ओर से और सौ कार्ड छपवाकर अंजान लोगों, असामाजिक तत्वों व श्रमिकों को बांट दिए। सुरजीत को इसका पता प्रतिभोज के दौरान अंजान लोगों व श्रमिकों को देखकर लगा तो वह आश्चर्य में पड़ गए। इनमें से कई लोग तो बारात से खाना भर-भरकर घर को ले जा रहे थे। इससे मूल बारातियों को ही खाना नहीं मिल पाया। उन्होंने जानकारी ली तो पता चला कि वह कार्ड मिलने पर ही शादी में आए हैं। पूछताछ करने पर मामले का खुलासा हुआ। शादी के आयोजन पूरे होने के बाद सुरजीत ने कोतवाली पहुंचकर भाई कुलदीप के खिलाफ षडयंत्र की तहरीर दी। मामले की जांच कर रहे एसआई वीरेंद्र बिष्ट ने बताया कि ऐसा मामला उनके सामने पहली बार आया है। अभी तक 60 से अधिक कार्ड अंजान लोगों को बंटने की जानकारी सामने आई है। वह मामले की जांच कर रहे हैं। जांच के बाद षडयंत्र रचने के तहत कार्रवाई की जाएगी।

यह भी पढ़ें : दुल्हनों की तो बहुत हुई होंगी, उत्तराखंड के एक दूल्हे की अनूठी फोटो देश भर में इंटरनेट पर हो रही है वायरल

नवीन समाचार, पौड़ी, 28 नवम्बर 2020। बारातों के मौसम में दुल्हनों की तो काफी चर्चा होती है, पर दूल्हों पर अधिक ध्यान नहीं जाता। लेकिन हम यहां एक दूल्हे की बात कर रहे हैं, जिसकी तस्वीर इन दिनों सोशल मीडिया पर वायरल हो रही है। वायरल तस्वीर में दूल्हा सेहरा लगाकर किसी सरकारी कार्यालय में कुछ काम निपटाता नजर आ रहा है।
प्राप्त जानकारी के अनुसर यह फोटो पौड़ी के एक दूल्हे प्रीतम गैरोला की है, जो पौड़ी में होम्योपैथी विभाग में वरिष्ठ सहायक के पद पर कार्यरत है। प्रीतम की शादी 27 नवंबर को नियत थी। इसके लिए उसने बकायदा अवकाश भी लिया था। लेकिन हुआ यह कि 26 नवंबर को विवाह की रस्म के तहत जब प्रीतम का मंगल स्नान हो चुका था और वह सेहरा बांध चुका था, तभी उसके कार्यालय से किसी जरूरी कार्य के लिए उसे फोन आया। उस कार्य के लिए प्रीतम का कार्यालय जाना जरूरी था। इस पर प्रीतम ने एक अनुकरणीय उदाहरण प्रस्तुत करते हुए कार्यालय जाने का निर्णय लिया। चूंकि सेहरा बंध चुका था और इसे उतारना अपशकुन होता, इसलिए वह सेहरा बांधकर ही कार्यालय पहुंच गया और करीब एक घंटे जरूरी विभागीय कार्य निपटाए। इस पर जिला होम्योपैथी अधिकारी डॉ. कमल कुमार भी प्रीतम की तारीफ किए बिना नहीं रह पाए। उन्होंने कहा कि प्रीतम विभागीय कार्यों को बड़ी कुशलता से संपादित करते हैं। उनकी कार्यशैली व सौम्य व्यवहार के चलते वह विभाग में सभी के चहेते हैं। वह पौड़ी में पिछले तीन वर्षों से कार्यरत हैं। इससे पूर्व वह रुद्रप्रयाग जनपद में कार्यरत थे।

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-बिना दान-दहेज, सादे कपड़ों में, मात्र 15 बारातियों के साथ केवल 17 मिनट में हो गई शादी

विवाह रस्म के दौरान दूल्हा पंकज और दुल्हन निर्मला
विवाह रस्म के दौरान दूल्हा पंकज और दुल्हन निर्मला

नवीन समाचार, कपकोट (बागेश्वर), 23 नवम्बर 2020। शादी समारोहों में फिजूलखर्ची और दिखावे की होड़ के बीच उत्तराखंड के दूरस्थ-सीमावर्ती बागेश्वर जनपद के एक दूरस्थ गांव जारती (कपकोट) से सुखद व अनुकरणीय मिसाल का समाचार है। यहां अल्मोड़ा के सल्ट निवासी महेंद्र सुंदरियाल के पुत्र पंकज और जारती गांव के हीरा सिंह की पुत्री निर्मला ने रविवार को एक-दूसरे को जीवन साथी बनाया। दूल्हा पंकज भारतीय स्टेट बैंक की सल्ट शाखा में जबकि दुल्हन निर्मला ग्राम्या बागेश्वर में कार्यरत है। यानी दोनों पेशे से संपन्न हैं, फिर भी उन्होंने जिस तरह शादी की, वह अपने आप में एक मिसाल है।
इस विवाह की खास बात यह रही कि इस शादी में न तो बाराती थे, और न बारात ही निकली। ढोल या बैंड भी नहीं बजा, और न डीजे पर कोई नाचा भी नहीं। विवाह में दूल्हा पक्ष के केवल 15 लोग सादगी से जारती गांव पहुंचे। दूल्हा-दुल्हन ने सादे कपड़ों में विवाह की रस्म निभाई। बारात में समय भी लगा मात्र 17 मिनट। समाज के सामने एक नजीर पेश करने वाले इस विवाह में एक रुपये के दहेज का लेन-देन नहीं हुआ। इस विवाह के पीछे व दूल्हा-दुल्हन व उनके परिवारों को ऐसी शादी कराने का विचार देने व विवाह कराने में भगवत मुक्ति कबीर परमेश्वर ट्रस्ट पीछे से रही, जिसके यह दोनों परिवार अनुयायी हैं और स्वयं को कबीरपंथी कहते हैं। इस विवाह विधि को भी कबीरपंथी विवाह विधि का नाम दिया गया विवाह की रस्म के दौरान संत रामपाल जी महाराज की मूर्ति के समक्ष गुरुवाणी का पाठ किया गया और पंकज व निर्मला परमेश्वर कबीर साहेब और गुरु प्रतिमा को साक्षी मानकर विवाह के पवित्र बंधन में बंध गए। जारती निवासी भूपेंद्र सिंह मेहता का कहना है कि इस विवाह से समाज को सीख लेनी चाहिए और आडंबर से बचना चाहिए।

यह भी पढ़ें : पिया मिलन में कोरोना की बाधा, नई नवेली दुल्हन को होम क्वारन्टाइन में भेजा, पति सहित परिजनों को भी ऐहतियात के निर्देश

नवीन समाचार, रुड़की, 16 मई 2020। कोरोना नई-नई परेशानियां खड़ा कर रहा है। इसकी वजह शादी के तत्काल बाद अपनी ससुराल आई नई नवेली दुल्हन को होम क्वारंटाइन होना पड़ा है। जिस कारण विवाह के बाद मिलन की आस लगाये नवदंपत्ति को एक घर में होते हुए भी अलग रहना पड़ रहा है। प्राप्त जानकारी के अनुसार निकटवर्ती ग्राम जलालपुर में यूपी के मुजफ्फरनगर से ब्याहकर लाई गई नई नवेली दुल्हन की तबीयत खराब होने पर परिजन उसको सिविल अस्पताल लाये, जहां चिकित्सकों ने उसे स्वास्थ्य परीक्षण कर घर में क्वारंटाइन होने के निर्देश दिए हैं। चिकित्सकों नई दुल्हन के साथ ही उसके पति व परिजनों से भी होम क्वारंटाइन के नियमों का पूरी तरह से अनुपालन करने के लिए भी कहा है।

यह भी पढ़ें : जर्मन दूल्हा-कुमाउनी मेम, पारंपरिक कुमाउनी तरीके से हुई पैट्रिक और शिवानी की शादी

नवीन समाचार, हल्द्वानी, 12 मार्च 2020। दुनिया में जब कोरोना वायरस के महामारी बने संक्रमण के बीच लोग एक-दूसरे से हाथ मिलाने से भी डर रहे हैं वहीं ऐसे में उत्तराखंड के कुमाऊं मंडल की संस्कृति व खासकर परंपरागत शादी का जलवा देखने को मिला है। यहां हल्द्वानी की एक युवती व जर्मनी के युवक के बीच न केवल दिल मिले, वरन दोनों ने वैदिक मंत्रोच्चारण के बीच कुमाउनी रीति-रिवाज से सात जन्म तक एक-दूसरे का होने के लिए पवित्र अग्नि को साक्षी मानकर एक साथ सात फेरे लिए हैं। इस मौके पर बाकायदा भगवान गणेश के चित्र युक्त मुकुट पहले जर्मन दूल्हे और कुमाउनी रंग्वाली पिछौड़े में सजी दुल्हन को देखकर हर कुमाउनी ने अपना सीना गर्व से ऊंचा महसूस किया।
इस कहानी की शुरुआत वास्तव में करीब पांच वर्ष पहले हवा में हुई, जब कतर एयरवेज के एक जहाज में पायलट पैट्रिक और एयर हॉस्टेस शिवानी आर्या के बीच साथ काम करते हुए दोस्ती प्यार में बदल गई। पैट्रिक जर्मनी के और शिवानी हल्द्वानी के निकट चौहानपाटा रानीबाग की निवासी है। दोनों ने आपस में शादी करने का निर्णय भी ले लिया। बात शादी की आई तो शिवानी ने डसल को धूलिअर्घ्य, दुल्हन के पिता द्वारा दूल्हे के पैर धोने, कन्यादान, शैया दान व ध्रुव तारे के दर्शन आदि विधि-विधानों युक्त परंपरागत कुमाउनी शादी के बारे में बताया। डसल शादी के इस परंपरागत रीति-निवाज से ऐसे प्रभावित हुए कि उन्होंने शिवानी से कुमाउनी तरीके से ही शादी करने की इच्छा व्यक्त की। इस पर पैट्रिक अपने पूरे परिवार के साथ हल्द्वानी आ गए और उन्होंने पूरे कुमाउनी विधि विधान से शिवानी से शादी कर ली है।

यह भी पढ़ें : छोटी बिलायत में दुहराया गया इतिहास ! एक-दूजे के हुए ‘इंग्लिश बाबू-देशी मेम’

-सात समुंदर पार से आई हल्द्वानी की सिम्पी की बारात

विश्व गुरु बनने को उद्यत भारतीय संस्कृति वैश्विक विमर्श के साथ ही आकर्षण का केंद्र भी बनी
नवीन जोशी, नैनीताल, 13 मार्च 2018 । अंग्रेजी दौर की ‘छोटी बिलायत’ में जो न जाने कितनी बार हुआ हो, वही इतिहास एक नए रूप में मंगलवार को यहाँ फिर लिखा गया। बताया जाता है कि कुमाऊँ के दूसरे कमिश्नर जीडब्लू ट्रेल ने भी यहीं, रानीखेत की युवती से विवाह किया था। कुछ इसी तर्ज पर मंगलवार को यहां एक ‘इंग्लिश बाबू’ न्यू यॉर्क निवासी जे माइकल स्टेहेन पुत्र चार्ल्स स्टेहेनऔर ‘देशी मेम’ हल्द्वानी निवासी सिम्पी वर्मा पुत्री सेंचुरी पेपर मिल लालकुआ के सेवानिवृत्त कर्मी एसके वर्मा भारतीय विवाह पद्धति के जरिये एक-दूसरे के साथ ‘सात फेरे’ लेकर एक-दूजे के हो गये। यहां देशी मेम यानी सिम्पी की मेंहदी की रस्म हुई और वह बेहद सुरुचिपूर्ण तरीके से सजे मंडप में घाघरा-चोली में शरमाती-शकुचाती अपने दूल्हे का इंतजार करती रही। उधर इंग्लिश बाबू माइकल बाकायदा घोड़ी पर चढ़े। उनके करीब तीन दर्जन परिजनों-दोस्तों ने पगड़ियां पहनकर भारतीय नृत्य किये। दोनों का ‘जयमाल’ हुआ, जिसमें दोनों ने एक-दूसरे का फूल माला पहनकर वरण किया और हिंदू रीति रिवाज के तहत पूरे विधि-विधान के साथ यह विवाह संपन्न हुआ।

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मौका था सोमवार को नगर के मनु महारानी होटल में हुए विवाह समारोह का। इस विवाह के लिए अमेरिका से दूल्हे माइकल के परिजनों सहित करीब तीन-दर्जन विदेशी मेहमान यहां दो दिन पहले ही पहुंच गये थे। रविवार को दोनों की मेंहदी की रस्म हुई, जबकि सोमवार को दोनों परिणय सूत्र में बंध गये। यूं यह भी था कि माइकल भारत से अमेरिका जाकर वहीं प्रसिद्ध वार्नर ब्रदर्स फिल्म कम्पनी में कार्य करने वाली सिम्पी से पहले ही पिछले फरवरी माह में न्यूयॉर्क में कोर्ट मैरिज कर चुके थे। लेकिन जब उन्हें सिम्पी से भारतीय समृद्ध संस्कृति और परंपराओं व खासकर विवाह पद्धति के बारे में पता चला तो उन्होंने एक बार फिर भारत आकर भारतीय विवाह पद्धति से विवाह करने का निर्णय लिया। विवाह के बाद सभी बाराती नैनीताल के पर्यटन स्थलों का भी भ्रमण कर रहे हैं। आगे उनका मंगलवार को जिम कार्बेट पार्क रामनगर की सैर करने और बुधवार को वहां से वापस लौटने का कार्यक्रम है। मनुमहारानी होटल के उप महाप्रबंधक प्रमोद बिष्ट ने कहा कि इस तरह भारतीय संस्कृति का प्रसार तो हो ही रहा है, नैनीताल जैसे छोटे भारतीय शहर भी विदेशी दूल्हों के लिए शादी करने के पसंदीदा स्थल यानी ‘वेडिंग डेस्टिनेशन’ के रूप में खासे पसंद किये जा रहे हैं। उल्लेखनीय है कि कि उत्तराखंड के हरिद्वार में इस तरह के कई विवाह अक्सर होते रहते हैं, जबकि नैनीताल में यह अपनी तरह का पहला आयोजन है।

यह भी पढ़ें : इमरान के निकाह में ‘रिद्धि सिद्धि संग निमंत्रित हैं गौरी पुत्र गणेश और ब्रह्मा, विष्णु, महेश’, आप भी आकर दीजिएगा ‘आशीष’

इमरान (मध्य में) अपनी शादी का कार्ड दिखाते हुए।
इमरान (मध्य में) अपनी शादी का कार्ड दिखाते हुए।

नवीन समाचार, किच्छा (ऊधमसिंह नगर), 4 मार्च 2020। दिल्ली में दो धर्मों के लोगों को दंगों की आग में जलाने की कोशिश के बीच किच्छा दोनों धर्मों के दिलों को जोड़ने और देश के धर्मनिरपेक्ष ताने-बाने को मजबूत करने वाला समाचार है। यहां हिंदुओं के घरों में निकटवर्ती ग्राम सैजना निवासी इमरान हुसैन सुपुत्र फरियाद हुसैन के इमराना बी सुपुत्री जान मोहम्मद निवासी गुलहिया मो. हुसैन तहसील बहेड़ी जिला बरेली यूपी परिणय बंधन का निमंत्रण देता कार्ड आया है। कार्ड की शुरुआत में लिखा गया है-रिद्धि सिद्धि सहित पधारो, गौरी पुत्र गणेश। कुटुंब सहित सब देव पधारो ब्रह्मा, विष्णु, महेश।। विघ्न हरण मंगल करण श्री गणपति महाराज, प्रथम निमंत्रण आपको, पूरण कीजै काज।।’ बीच में बाकायदा गणेश जी की फोटो भी बनी है। आगे नवयुगल को सस्नेह आशीष प्रदान करने हेतु आपकी उपस्थिति प्रार्थनीय भी बताई गई है। वहीं बारात के कार्यक्रम के अनुसार पांच मार्च को सुबह 9 बजे सेहराबंदी, 11 बजे बारात प्रस्थान, शाम चार बजे शुभ विवाह एवं शाम पांच बजे बारात वापसी है। ऐसे निमंत्रण के बाद ऐसी खास शादी में जाना तो बनता है।
बताया गया है कि दूल्हे इमरान के पिता कम पढ़े-लिखे हैं, परंतु इस कार्ड के जरिये उन्होंने देश के कथित धर्म निरपेक्ष कहलाकर दोनों धर्मों को लड़ाकर सियासत की रोटी सेंकने वाले सियासतदानों को बड़ा पाठ पढ़ाया है। उनका कहना है उनके चार बेटों-इमरान, उस्मान, जीशान व फैजान में इमरान सबसे बड़ा है। उन्होने इमरान के निकाह के लिए अपने हिंदू मित्रों के लिए यह खास कार्ड छपवाया है। उनका कहना है, हिंदू-मुसलमान आपस में भाई हैं। उनकी इस पहल से यह रिश्ता दोनों कौमों के लिए और मजबूत है, इसी सोच से यह कार्ड छपवाए गए हैं।

यह भी पढ़ें : वट-पीपल बंधे विवाह बंधन में, गांव वाले बने बाराती

  • धूमधाम से हुआ बरगद व पीपल के पेड़ों का विवाह
  • हल्द्वानी रोड चील चक्कर के पास स्थित शिवालय में हुआ आयोजन
  • पुरानी चुंगी से बैंड बाजे के साथ निकली बारात, कुमाउनी परिधानों में ताकुला व रूसी की महिलाओं ने निकाली कलशयात्रा
  • मानव स्वरूप में किये गये विवाह संस्कार के साथ इन्हें कभी न काटे जाने का के संकल्प के साथ यह विवाह पेड़-पौधों के संरक्षण की अनूठी पहल भी है
बरगद एवं पीपल के विवाह समारोह में शगुन आखर, मंगलगान गाती महिलाएं।

नैनीताल। जी हां, धार्मिक मान्यताओं के लिए प्रसिद्ध देवभूमि उत्तराखंड में युवा वट यानी बरगद और पीपल के वृक्षों ने आपस में ब्याह रचा लिया है। नगर के समीपवर्ती हल्द्वानी रोड चील चक्कर के पास स्थित शिवालय में लोग एक अनोखे विवाह समारोह के साक्षी बने। यह विवाह था मंदिर में लगे करीब 6 वर्ष की उम्र के वर के रूप में पीपल एवं करीब 4 वर्ष के कन्या के रूप में बट यानी बरगद के वृक्षों के बीच। 11 फ़रवरी को आयोजित हुए इस अनोखे विवाह में बाराती बने ताकुला और रूसी गांव के लोग, जिन्होंने न केवल बैंड बाजे पर युवक-युवतियों, बच्चों ने कुमाउनी नृत्य के साथ पुरानी चुंगी से मंदिर तक बारात निकाली तथा महिलाओं ने पारंपरिक कुमाउनी परिधानों में कलश यात्रा निकाली, वहीं हल्द्वानी मार्ग से गुजरते लोगों, सैलानियो जिसने भी इस अनूठे विवाह के बारे में सुना, ठिठक गया। इस प्रकार सैकड़ो लोग इस अनूठे विवाह के साक्षी बने। खास बात यह भी है कि इस धार्मिक आयोजन के बाद बरगद व पीपल के मंदिर में लगे धार्मिक आयोजनों, पूजा आदि के योग्य हो गये हैं, तथा इस प्रकार इन्हें मानव स्वरूप में किये गये विवाह संस्कार के साथ कभी न काटे जाने का संकल्प भी लिया गया है, जिसके साथ यह विवाह आयोजन पेड़-पौधों के संरक्षण का भी एक उपक्रम है।

Gamaraयह भी पढ़ें :  गौरा-महेश को बेटी-जवांई के रूप में विवाह-बंधन में बांधने का पर्व: सातूं-आठूं (गंवरा या गमरा) कुछ अंश : गौरा से यहां की पर्वत पुत्रियों ने बेटी का रिश्ता बना लिया हैं, तो देवों के देव जगत्पिता महादेव का उनसे विवाह कराकर वह उनसे जवांई यानी दामाद का रिश्ता बना लेती हैं। यहां बकायदा वर्षाकालीन भाद्रपद मास में अमुक्ताभरण सप्तमी को सातूं, और दूर्बाष्टमी को आठूं का लोकपर्व मना कर (गंवरा या गमरा) गौरा-पार्वती…

बरगद व पीपल के विवाह में नृत्य करती महिलाएं

बारात में बकायदा कुमाउनी विवाहों की धूलिअर्घ्य, शगुन आंखर व मंगलगान गाने, कन्या दान व फेरे सहित विभिन्न धार्मिक अनुष्ठान एवं भोज का आयोजन हुआ। वर पीपल के माता-पिता की भूमिका दीपा जोशी व पूरन जोशी ने, जबकि जबकि कन्या बरगद के माता पिता की भूमिका जानकी जोशी व सतीश जोशी ने निभा। आचार्य कैलाश चंद्र सुयाल ने मंत्रोच्चारण के साथ विवाह की सभी रस्में पूरी कराईं। आयोजन में नीरज जोशी, पान सिंह खनी, कैलाश जोशी, भगवती सुयाल, पान सिंह परिहार, अमन जोशी, गोविंद सिंह, चन्दन सिंह, हितेश, भाष्कर, चेतन, महेंद्र रावत, देवेश मेहरा, नवीन शर्मा, पान सिंह सिजवाली, महेश जोशी, विशाल व चन्दन बिष्ट सहित सैकड़ों ग्रामीणों ने भागीदारी की।

विवाह आयोजन के आचार्य पंडित कैलाश चन्द्र सुयाल ने बताया की उम्र में बड़े वृक्ष को वर एवं छोटे की कन्या के रूप में प्रतिष्ठा की जाती है। इसके बाद एक व्यक्ति वर एवं दूसरे कन्या के पिता के रूप में आयोजन को संपन्न कराते हैं, बाकायदा कन्या के पिता कन्यादान की परम्परा का निर्वाह भी करते हैं। यह पूरा आयोजन प्रकृति के अंगों को मानव स्वरुप में संरक्षित करने की भी पहल है। बरगद और पीपल के पेड़ों को काटे जाने की धार्मिक मनाही भी है।

बरगद व पीपल के विवाह में लिए गए प्रतीकात्मक फेरे.

इस आयोजन के लिए क्षेत्रवासी पखवाड़े भर पूर्व से ही पूर्ण विधि-विधान के साथ इस आयोजन की तैयारियों में उत्साहपूर्वक जुटे थे। नैनीताल के निकटवर्ती गांधी ग्राम ताकुला के युवा सामाजिक कार्यकर्ता नीरज कुमार जोशी ने बताया कि क्षेत्र में इस तरह का आयोजन पहली बार किया गया।  आयोजन की तैयारियों में आदि ग्रामीण जुटे हुए हैं।

बरगद एवं पीपल का धार्मिक महत्व
उल्लेखनीय है कि धार्मिक मान्यताओं के अनुसार बरगद एवं पीपल के वृक्षों का धार्मिक महत्व व पर्यावरण की दृष्टि से विशेष महत्व है। बरगद को ब्रह्मा समान माना जाता है। वट-सावित्री सहित अनेक व्रत व त्यौहारों में वटवृक्ष की पूजा की जाती है। वहीं पीपल के वृक्ष में देवताओं का वास बताया जाता है। गीता में भगवान कृष्ण ने पीपल को स्वयं अपना स्वरूप बताया है। जबकि स्कंदपुराण में पीपल की विशेषता और उसके धार्मिक महत्व का उल्लेख करते हुए इसके मूल में विष्णु, तने में केशव, शाखाओं में नारायण, पत्तों में हरि और फलों में सभी देवताओं के साथ अच्युत देवों का निवास बताया गया है। हिंदू धार्मिक मान्यताओं के अनुसार मनुश्य के अंतिम संस्कार पीपल के वृक्ष के नीचे किए जाते हैं ताकि आत्मा को मुक्ति मिले और वह बिना किसी भटकाव के अपने गंतव्य स्थान तक पहुंच जाए।

नवीन समाचार, हल्द्वानी, 12 मार्च 2020। दुनिया में जब कोरोना वायरस के महामारी बने संक्रमण के बीच लोग एक-दूसरे से हाथ मिलाने से भी डर रहे हैं वहीं ऐसे में उत्तराखंड के कुमाऊं मंडल की संस्कृति व खासकर परंपरागत शादी का जलवा देखने को मिला है। यहां हल्द्वानी की एक युवती व जर्मनी के युवक के बीच न केवल दिल मिले, वरन दोनों ने वैदिक मंत्रोच्चारण के बीच कुमाउनी रीति-रिवाज से सात जन्म तक एक-दूसरे का होने के लिए पवित्र अग्नि को साक्षी मानकर एक साथ सात फेरे लिए हैं। इस मौके पर बाकायदा भगवान गणेश के चित्र युक्त मुकुट पहले जर्मन दूल्हे और कुमाउनी रंग्वाली पिछौड़े में सजी दुल्हन को देखकर हर कुमाउनी ने अपना सीना गर्व से ऊंचा महसूस किया।
इस कहानी की शुरुआत वास्तव में करीब पांच वर्ष पहले हवा में हुई, जब कतर एयरवेज के एक जहाज में पायलट पैट्रिक और एयर हॉस्टेस शिवानी आर्या के बीच साथ काम करते हुए दोस्ती प्यार में बदल गई। पैट्रिक जर्मनी के और शिवानी हल्द्वानी के निकट चौहानपाटा रानीबाग की निवासी है। दोनों ने आपस में शादी करने का निर्णय भी ले लिया। बात शादी की आई तो शिवानी ने डसल को धूलिअर्घ्य, दुल्हन के पिता द्वारा दूल्हे के पैर धोने, कन्यादान, शैया दान व ध्रुव तारे के दर्शन आदि विधि-विधानों युक्त परंपरागत कुमाउनी शादी के बारे में बताया। डसल शादी के इस परंपरागत रीति-निवाज से ऐसे प्रभावित हुए कि उन्होंने शिवानी से कुमाउनी तरीके से ही शादी करने की इच्छा व्यक्त की। इस पर पैट्रिक अपने पूरे परिवार के साथ हल्द्वानी आ गए और उन्होंने पूरे कुमाउनी विधि विधान से शिवानी से शादी कर ली है।

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-सात समुंदर पार से आई हल्द्वानी की सिम्पी की बारात

विश्व गुरु बनने को उद्यत भारतीय संस्कृति वैश्विक विमर्श के साथ ही आकर्षण का केंद्र भी बनी
नवीन जोशी, नैनीताल, 13 मार्च 2018 । अंग्रेजी दौर की ‘छोटी बिलायत’ में जो न जाने कितनी बार हुआ हो, वही इतिहास एक नए रूप में मंगलवार को यहाँ फिर लिखा गया। बताया जाता है कि कुमाऊँ के दूसरे कमिश्नर जीडब्लू ट्रेल ने भी यहीं, रानीखेत की युवती से विवाह किया था। कुछ इसी तर्ज पर मंगलवार को यहां एक ‘इंग्लिश बाबू’ न्यू यॉर्क निवासी जे माइकल स्टेहेन पुत्र चार्ल्स स्टेहेनऔर ‘देशी मेम’ हल्द्वानी निवासी सिम्पी वर्मा पुत्री सेंचुरी पेपर मिल लालकुआ के सेवानिवृत्त कर्मी एसके वर्मा भारतीय विवाह पद्धति के जरिये एक-दूसरे के साथ ‘सात फेरे’ लेकर एक-दूजे के हो गये। यहां देशी मेम यानी सिम्पी की मेंहदी की रस्म हुई और वह बेहद सुरुचिपूर्ण तरीके से सजे मंडप में घाघरा-चोली में शरमाती-शकुचाती अपने दूल्हे का इंतजार करती रही। उधर इंग्लिश बाबू माइकल बाकायदा घोड़ी पर चढ़े। उनके करीब तीन दर्जन परिजनों-दोस्तों ने पगड़ियां पहनकर भारतीय नृत्य किये। दोनों का ‘जयमाल’ हुआ, जिसमें दोनों ने एक-दूसरे का फूल माला पहनकर वरण किया और हिंदू रीति रिवाज के तहत पूरे विधि-विधान के साथ यह विवाह संपन्न हुआ।

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मौका था सोमवार को नगर के मनु महारानी होटल में हुए विवाह समारोह का। इस विवाह के लिए अमेरिका से दूल्हे माइकल के परिजनों सहित करीब तीन-दर्जन विदेशी मेहमान यहां दो दिन पहले ही पहुंच गये थे। रविवार को दोनों की मेंहदी की रस्म हुई, जबकि सोमवार को दोनों परिणय सूत्र में बंध गये। यूं यह भी था कि माइकल भारत से अमेरिका जाकर वहीं प्रसिद्ध वार्नर ब्रदर्स फिल्म कम्पनी में कार्य करने वाली सिम्पी से पहले ही पिछले फरवरी माह में न्यूयॉर्क में कोर्ट मैरिज कर चुके थे। लेकिन जब उन्हें सिम्पी से भारतीय समृद्ध संस्कृति और परंपराओं व खासकर विवाह पद्धति के बारे में पता चला तो उन्होंने एक बार फिर भारत आकर भारतीय विवाह पद्धति से विवाह करने का निर्णय लिया। विवाह के बाद सभी बाराती नैनीताल के पर्यटन स्थलों का भी भ्रमण कर रहे हैं। आगे उनका मंगलवार को जिम कार्बेट पार्क रामनगर की सैर करने और बुधवार को वहां से वापस लौटने का कार्यक्रम है। मनुमहारानी होटल के उप महाप्रबंधक प्रमोद बिष्ट ने कहा कि इस तरह भारतीय संस्कृति का प्रसार तो हो ही रहा है, नैनीताल जैसे छोटे भारतीय शहर भी विदेशी दूल्हों के लिए शादी करने के पसंदीदा स्थल यानी ‘वेडिंग डेस्टिनेशन’ के रूप में खासे पसंद किये जा रहे हैं। उल्लेखनीय है कि कि उत्तराखंड के हरिद्वार में इस तरह के कई विवाह अक्सर होते रहते हैं, जबकि नैनीताल में यह अपनी तरह का पहला आयोजन है।

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इमरान (मध्य में) अपनी शादी का कार्ड दिखाते हुए।
इमरान (मध्य में) अपनी शादी का कार्ड दिखाते हुए।

नवीन समाचार, किच्छा (ऊधमसिंह नगर), 4 मार्च 2020। दिल्ली में दो धर्मों के लोगों को दंगों की आग में जलाने की कोशिश के बीच किच्छा दोनों धर्मों के दिलों को जोड़ने और देश के धर्मनिरपेक्ष ताने-बाने को मजबूत करने वाला समाचार है। यहां हिंदुओं के घरों में निकटवर्ती ग्राम सैजना निवासी इमरान हुसैन सुपुत्र फरियाद हुसैन के इमराना बी सुपुत्री जान मोहम्मद निवासी गुलहिया मो. हुसैन तहसील बहेड़ी जिला बरेली यूपी परिणय बंधन का निमंत्रण देता कार्ड आया है। कार्ड की शुरुआत में लिखा गया है-रिद्धि सिद्धि सहित पधारो, गौरी पुत्र गणेश। कुटुंब सहित सब देव पधारो ब्रह्मा, विष्णु, महेश।। विघ्न हरण मंगल करण श्री गणपति महाराज, प्रथम निमंत्रण आपको, पूरण कीजै काज।।’ बीच में बाकायदा गणेश जी की फोटो भी बनी है। आगे नवयुगल को सस्नेह आशीष प्रदान करने हेतु आपकी उपस्थिति प्रार्थनीय भी बताई गई है। वहीं बारात के कार्यक्रम के अनुसार पांच मार्च को सुबह 9 बजे सेहराबंदी, 11 बजे बारात प्रस्थान, शाम चार बजे शुभ विवाह एवं शाम पांच बजे बारात वापसी है। ऐसे निमंत्रण के बाद ऐसी खास शादी में जाना तो बनता है।
बताया गया है कि दूल्हे इमरान के पिता कम पढ़े-लिखे हैं, परंतु इस कार्ड के जरिये उन्होंने देश के कथित धर्म निरपेक्ष कहलाकर दोनों धर्मों को लड़ाकर सियासत की रोटी सेंकने वाले सियासतदानों को बड़ा पाठ पढ़ाया है। उनका कहना है उनके चार बेटों-इमरान, उस्मान, जीशान व फैजान में इमरान सबसे बड़ा है। उन्होने इमरान के निकाह के लिए अपने हिंदू मित्रों के लिए यह खास कार्ड छपवाया है। उनका कहना है, हिंदू-मुसलमान आपस में भाई हैं। उनकी इस पहल से यह रिश्ता दोनों कौमों के लिए और मजबूत है, इसी सोच से यह कार्ड छपवाए गए हैं।

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  • धूमधाम से हुआ बरगद व पीपल के पेड़ों का विवाह
  • हल्द्वानी रोड चील चक्कर के पास स्थित शिवालय में हुआ आयोजन
  • पुरानी चुंगी से बैंड बाजे के साथ निकली बारात, कुमाउनी परिधानों में ताकुला व रूसी की महिलाओं ने निकाली कलशयात्रा
  • मानव स्वरूप में किये गये विवाह संस्कार के साथ इन्हें कभी न काटे जाने का के संकल्प के साथ यह विवाह पेड़-पौधों के संरक्षण की अनूठी पहल भी है
बरगद एवं पीपल के विवाह समारोह में शगुन आखर, मंगलगान गाती महिलाएं।

नैनीताल। जी हां, धार्मिक मान्यताओं के लिए प्रसिद्ध देवभूमि उत्तराखंड में युवा वट यानी बरगद और पीपल के वृक्षों ने आपस में ब्याह रचा लिया है। नगर के समीपवर्ती हल्द्वानी रोड चील चक्कर के पास स्थित शिवालय में लोग एक अनोखे विवाह समारोह के साक्षी बने। यह विवाह था मंदिर में लगे करीब 6 वर्ष की उम्र के वर के रूप में पीपल एवं करीब 4 वर्ष के कन्या के रूप में बट यानी बरगद के वृक्षों के बीच। 11 फ़रवरी को आयोजित हुए इस अनोखे विवाह में बाराती बने ताकुला और रूसी गांव के लोग, जिन्होंने न केवल बैंड बाजे पर युवक-युवतियों, बच्चों ने कुमाउनी नृत्य के साथ पुरानी चुंगी से मंदिर तक बारात निकाली तथा महिलाओं ने पारंपरिक कुमाउनी परिधानों में कलश यात्रा निकाली, वहीं हल्द्वानी मार्ग से गुजरते लोगों, सैलानियो जिसने भी इस अनूठे विवाह के बारे में सुना, ठिठक गया। इस प्रकार सैकड़ो लोग इस अनूठे विवाह के साक्षी बने। खास बात यह भी है कि इस धार्मिक आयोजन के बाद बरगद व पीपल के मंदिर में लगे धार्मिक आयोजनों, पूजा आदि के योग्य हो गये हैं, तथा इस प्रकार इन्हें मानव स्वरूप में किये गये विवाह संस्कार के साथ कभी न काटे जाने का संकल्प भी लिया गया है, जिसके साथ यह विवाह आयोजन पेड़-पौधों के संरक्षण का भी एक उपक्रम है।

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बरगद व पीपल के विवाह में नृत्य करती महिलाएं

बारात में बकायदा कुमाउनी विवाहों की धूलिअर्घ्य, शगुन आंखर व मंगलगान गाने, कन्या दान व फेरे सहित विभिन्न धार्मिक अनुष्ठान एवं भोज का आयोजन हुआ। वर पीपल के माता-पिता की भूमिका दीपा जोशी व पूरन जोशी ने, जबकि जबकि कन्या बरगद के माता पिता की भूमिका जानकी जोशी व सतीश जोशी ने निभा। आचार्य कैलाश चंद्र सुयाल ने मंत्रोच्चारण के साथ विवाह की सभी रस्में पूरी कराईं। आयोजन में नीरज जोशी, पान सिंह खनी, कैलाश जोशी, भगवती सुयाल, पान सिंह परिहार, अमन जोशी, गोविंद सिंह, चन्दन सिंह, हितेश, भाष्कर, चेतन, महेंद्र रावत, देवेश मेहरा, नवीन शर्मा, पान सिंह सिजवाली, महेश जोशी, विशाल व चन्दन बिष्ट सहित सैकड़ों ग्रामीणों ने भागीदारी की।

विवाह आयोजन के आचार्य पंडित कैलाश चन्द्र सुयाल ने बताया की उम्र में बड़े वृक्ष को वर एवं छोटे की कन्या के रूप में प्रतिष्ठा की जाती है। इसके बाद एक व्यक्ति वर एवं दूसरे कन्या के पिता के रूप में आयोजन को संपन्न कराते हैं, बाकायदा कन्या के पिता कन्यादान की परम्परा का निर्वाह भी करते हैं। यह पूरा आयोजन प्रकृति के अंगों को मानव स्वरुप में संरक्षित करने की भी पहल है। बरगद और पीपल के पेड़ों को काटे जाने की धार्मिक मनाही भी है।

बरगद व पीपल के विवाह में लिए गए प्रतीकात्मक फेरे.

इस आयोजन के लिए क्षेत्रवासी पखवाड़े भर पूर्व से ही पूर्ण विधि-विधान के साथ इस आयोजन की तैयारियों में उत्साहपूर्वक जुटे थे। नैनीताल के निकटवर्ती गांधी ग्राम ताकुला के युवा सामाजिक कार्यकर्ता नीरज कुमार जोशी ने बताया कि क्षेत्र में इस तरह का आयोजन पहली बार किया गया।  आयोजन की तैयारियों में आदि ग्रामीण जुटे हुए हैं।

बरगद एवं पीपल का धार्मिक महत्व
उल्लेखनीय है कि धार्मिक मान्यताओं के अनुसार बरगद एवं पीपल के वृक्षों का धार्मिक महत्व व पर्यावरण की दृष्टि से विशेष महत्व है। बरगद को ब्रह्मा समान माना जाता है। वट-सावित्री सहित अनेक व्रत व त्यौहारों में वटवृक्ष की पूजा की जाती है। वहीं पीपल के वृक्ष में देवताओं का वास बताया जाता है। गीता में भगवान कृष्ण ने पीपल को स्वयं अपना स्वरूप बताया है। जबकि स्कंदपुराण में पीपल की विशेषता और उसके धार्मिक महत्व का उल्लेख करते हुए इसके मूल में विष्णु, तने में केशव, शाखाओं में नारायण, पत्तों में हरि और फलों में सभी देवताओं के साथ अच्युत देवों का निवास बताया गया है। हिंदू धार्मिक मान्यताओं के अनुसार मनुश्य के अंतिम संस्कार पीपल के वृक्ष के नीचे किए जाते हैं ताकि आत्मा को मुक्ति मिले और वह बिना किसी भटकाव के अपने गंतव्य स्थान तक पहुंच जाए।

नवीन समाचार
‘नवीन समाचार’ विश्व प्रसिद्ध पर्यटन नगरी नैनीताल से ‘मन कही’ के रूप में जनवरी 2010 से इंटरननेट-वेब मीडिया पर सक्रिय, उत्तराखंड का सबसे पुराना ऑनलाइन पत्रकारिता में सक्रिय समूह है। यह उत्तराखंड शासन से मान्यता प्राप्त, अलेक्सा रैंकिंग के अनुसार उत्तराखंड के समाचार पोर्टलों में अग्रणी, गूगल सर्च पर उत्तराखंड के सर्वश्रेष्ठ, भरोसेमंद समाचार पोर्टल के रूप में अग्रणी, समाचारों को नवीन दृष्टिकोण से प्रस्तुत करने वाला ऑनलाइन समाचार पोर्टल भी है।
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