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शोक समाचार : उत्तराखंड के ‘हीरा’ लोक गायक एवं साहित्यकार हीरा सिंह राणा के निधन शोक की लहर

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नवीन समाचार, नैनीताल, 13 जून 2020। प्रदेश के सुप्रसिद्ध कुमाउनी लोक गायक एवं साहित्यकार हीरा सिंह राणा जी के आकस्मिक निधन का समाचार प्राप्त होने पर कुमाऊं मंडल के कला एवं साहित्य तथा संस्कृति से जुड़े लोगों में शोक की लहर है। लोग सोशल मीडिया पर स्वर्गीय राणा को याद कर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित कर रहे हैं। इसी कड़ी में उत्तराखंड क्रांति दल के पूर्व केंद्रीय अध्यक्ष एवं पूर्व विधायक डा. नारायण सिंह जंतवाल ने कहा कि राणा का निधन उत्तराखण्डी समाज के लिये अपूरणीय क्षति है। लोक संस्कृति के ध्वजवाहक स्वर्गीय राणा समाज को जागृत करने वाले अपनी थाती पर आधारित रचनाओं को अपने मधुर स्वरों में प्रस्तुत कर लोगों को आल्हादित करते रहे। उत्तराखंडी संस्कृति व समाज को व्यापक पहचान दिलाने में भी उनका अविस्मरणीय योगदान रहा है। ऐसे बहुत से कार्यक्रमों में भी उन्होंने योगदान दिया और उत्तराखंड राज्य के संघर्ष को अग्रगति प्रदान करने में भी उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही। उक्रांद के जसवंत सिंह बिष्ट व विपिनदा आदि संस्थापकों के साथ उनका निकट संबंध रहा। नैनीताल में वे अक्सर पार्टी के नेता अंबादत्त बवाड़ी के घर पर रुकते थे। उनके निधन से एक युग का अंत हो गया है।
वहीं लोक साहित्यकार एवं राज्य की लोक भाषाओं की एकमात्र समग्र पत्रिका ‘कुमगढ़’ के संस्थापक दामोदर जोशी ‘देवांशु’ ने कहा कि स्वर्गीय राणा गढ़-कुमाऊं के रत्न तथा साहित्य व संस्कृति के महान संरक्षक थे। उनके निधन के समाचार से सभी स्तब्ध हैं। उनका निधन राज्य के साहित्य व कला जगत के लिए अपूरणीय क्षति है तथा प्रत्येक साहित्यकार के लिए व्यक्तिगत आघात है। उनके द्वारा गाये गये गीत उत्तराखंडियो के दिल में हमेशा गूंजते रहेंगे।

कुमाऊं के शिखर कवि व गायक थे राणा: जहूर
नैनीताल के वरिष्ठ रंगकर्मी जहूर आलम ने स्वर्गीय हीरा सिंह राणा को याद करते हुए बताया कि वर्तमान में उनका रुतबा कुमाऊं के शिखर कवि व गायक के रूप में था। वे बेहद भले, सीधे व ठेठ पहाड़ी इंसान थे। जीवन भर बहुत संघर्ष कर उन्होंने बड़ा मुकाम हासिल किया। उनके साथ एनडी तिवारी सरकार के दौर में उत्तराखंड कला एवं साहित्य परिषद एवं पिछली हरीश रावत सरकार के दौर में राज्य गीत की समिति में साथ काम करने का मौका मिला। जहूर आलम ने बताया कि नैनीताल शरदोत्सव के मंच पर पहली बार उन्होंने ही राणा को आमंत्रित किया था। इधर राज्य सरकार ने उनकी कद्र नहीं की, अलबत्ता दिल्ली सरकार ने उन्हें गढ़वाली, कुमाउनी व जौनसारी अकादमी का अध्यक्ष बनाया था। श्री आलम ने बताया कि इधर कुछ दिन पूर्व हुई वार्ता में उन्होंने कोरोना काल निपट जाने के बाद प्रदेश की लोक भाषाओं के साहित्य के साथ ही कुमाउनी के नाटकों पर भी कार्य करने की इच्छा जताई थी, लेकिन नियति के कू्रर हाथों ने उन्हें छीन लिया है।

लोक से आये व्यक्ति थे हिरदा: शेखर पाठक
नैनीताल। प्रदेश के संस्कृति कर्मी एवं इतिहासकार डा. शेखर पाठक ने कहा कि स्वर्गीय हीरा सिंह राणा ‘हिरदा’ लोक से आये व्यक्ति थे। वे कविताओं के साथ ही अपने गीत लिखते और उन्हें गाते भी थे। अपने कई गीतों को उन्होंने संगीत भी दिया था। उनके गीतों की शब्दावली में पाली पछाऊं की अलग मिठास थी। उनका गीत ‘लसका कमर बांधा’ उम्मीद का गीत था और जनांदोलनों में काफी गाया गया। उनके ‘आ लीली बाकरी लीली’ व ‘बिंदी घाघरि काई’ जैसे गीत उनके गृह अंचल सल्ट के बाद पूरे कुमाऊं, उत्तराखंड व दिल्ली में प्रवासियों के द्वारा काफी पसंद किये गये। वे अपनी बीमारी के बावजूद भाषा, गीत व संस्कृति के कार्यक्रमों में कभी पीछे नहीं रहते थे। इधर काफी समय से नरेंद्र नेगी व उनकी जुगलबंदी करने की योजना थी, लेकिन पहले नरेंद्र नेगी को आये हृदयाघात और इधर कोरोना की वजह से यह संभव नहीं हो पाया।

आम आदमी पार्टी व कूटा ने भी जताया हिरदा के निधन पर शोक
नैनीताल। आम आदमी पार्टी नैनीताल के कार्यकर्ताओं एवं पदाधिकारियों ने दिल्ली सरकार में कुमाऊनी, गढ़वाली व जौनसारी भाषा अकादमी के उपाध्यक्ष एवं उत्तरांचल भ्रात्रि सेवा संस्थान के मुख्य सलाहकार, महान् कवि और गीतकार के रूप में स्वर्गीय हीरा सिंह राणा को याद किया एवं उनके असमय निधन पर गहरा शोक तथा दुंख व्यक्त किया। पार्टी कार्यकर्ताओं ने उनके निधन को उत्तराखंडी कला और संस्कृति के लिए बहुत बड़ा आघात बताया। उनके निधन पर शोक सभा भी आयोजित की, जिसमें विधानसभा नैनीताल प्रभारी प्रदीप कुमार दुम्का, शाकिर अली, डीएस नेगी, प्रताप पडियार, विजय साह, पीसी जोशी, आरसी पंत, राजेंद्र कुमार, राम नारायण व विजय साह आदि शामिल रहे। कार्यकर्ताओं ने इस मौके पर नैनीताल जिले के ओखलकांडा विकास खंड के ग्राम सभा मीडार के पदमपुर गांव निवासी 6 कुमाऊं रेजिमेंट के सूबेदार यमुना प्रसाद पनेरू के जम्मू-कश्मीर के कुपवाड़ा में रेस्क्यू ऑपरेशन में अपना फर्ज निभाते हुए शहीद होने पर भी गहरा शोक तथा दुंख व्यक्त किया। इधर कूटा यानी कुमाऊं विवि शिक्षक संघ के अध्यक्ष प्रो. ललित तिवारी, डा. दीपक कुमार डा. दीपिका गोस्वामी, डा. सुचेतन साह व डा. सोहेल जावेद आदि ने भी सुर सम्राट एवं कहा व साहित्य जगत की हस्ती के रूप में स्वर्गीय राणा को याद किया और उनके निधन पर शोक-संवेदना व्यक्त की है।

शोक समाचार : सुबह-सुबह उत्तराखंड ने खो दिया अपना एक ‘हीरा’, हीरा सिंह राणा का निधन

नवीन समाचार, नैनीताल, 13 जून 2020। सुबह-सुबह उत्तराखंड के कला एवं साहित्य जगत से के लिए एक बहुत बुरी खबर आ रही है ।उत्तराखंड ने अपना एक ‘हीरा’ हीरा सिंह राणा को खो दिया है। हृदयाघात से आज सुबह ढाई बजे दिल्ली में उनका निधन हो गया। लोक के महान सेवक, संगीत को समर्पित महान व्यक्तित्व, लेखन के धनी, स्वभाव में विनम्र, आडम्बर और अहं से दूर रहने वाले, बीते वर्ष 2019 में गढ़वाली कुमाऊनी व जौनसारी अकादमी दिल्ली के उपाध्यक्ष बने व इसके अतिरिक्त अपनी मिट्टी से जुड़े, अद्वितीय व्यक्ति, कलाकार, लोक गायक हीरा सिंह राणा का अचानक हम सब को छोड़ जाना हृदय विदारक घटना है। वर्तमान में दिल्ली में रह रहे स्वर्गीय राणा के मित्र एवं कला जगत से जुड़े लोग इस पर प्रतिक्रिया व्यक्त कर रहे हैं : “विश्वास से परे इस ख़बर से उत्तराखंड सहित विश्व आहत है। लोक की सेवा करने के लिए में ऐसी शख्सियतें बार )-बार जन्म नही लेती। स्व.चन्द्र सिंह राही जी के बाद ये ऐसी दूसरी क्षति है जिसकी पूर्ति नही हो सकती। बहुत बड़ा आघात। राणा जी को अश्रुपूर्ण श्रद्धांजलि।”

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उल्लेखनीय है कि उत्तराँखण्ड के प्रमुख गायक कलाकारो में हीरा सिंह राणा का नाम प्रथम पंक्ति में आता है जिन्हें लोग हीरदा कुमाऊनी भी कहते है। हीरा सिंह राणा का जन्म 16 सितंबर 1942 को मानिला डंढ़ोली जिला अल्मोड़ा में हुआ उनकी माताजी स्व: नारंगी देवी, पिताजी स्व: मोहन सिंह थे। राणा जी प्राथमिक शिक्षा मानिला में हुई। उन्होंने दिल्ली सेल्समैन की नौकरी की लेकिन इसमें उनका मन नहीं लगा और इस नौकरी को छोड़कर वह संगीत की स्कालरशिप लेकर कलकत्ता चले गए और संगीत के संसार में पहुँच गए।
इसके बाद हीरा सिंह राणा ने उत्तराखंड के कलाकारों का दल नवयुवक केंद्र ताड़ीखेत 1974, हिमांगन कला संगम दिल्ली 1992, पहले ज्योली बुरुंश (1971) , मानिला डांडी 1985, मनख्यु पड़यौव में 1987, के साथ उत्तराखण्ड के लोक संगीत के लिए काम किया। इस बीच राणा जी ने कुमाउनी लोक गीतों के 6- कैसेट ‘रंगीली बिंदी, रंगदार मुखड़ी’, सौमनो की चोरा, ढाई विसी बरस हाई कमाला’, ‘आहा रे ज़माना’ भी निकाले। राणा जी ने कुमाँउ संगीत को नई दिशा दी और ऊचाँई पर पहुँचाया. राणा ने ऐसे गाने बनाये जो उत्तराखण्ड की संस्कृति और रिती रीवाज को बखुबी दर्शाते हैं। यही वजह कि भूमंडलीकरण के इस दौर में हीरा सिंह राणा के गीत खूब गाए बजाए जाते हैं। उनकी एक रचना की कुछ पंक्तियां : त्यर पहाड़, म्यर पहाड़
होय दुःखों को डयर पहाड़
बुजुर्गों ले जोड़ पहाड़
राजनीति ले तोड़ पहाड़
ठेकेदारों ले फोड़ पहाड़
नांतिनों ले छोड़ पहाड़।

श्रमजीवी पत्रकार यूनियन के नैनीताल जिला अध्यक्ष, वरिष्ठ पत्रकार दानिश खान का असामयिक निधन

नवीन समाचार, हल्द्वानी, 12 जून 2020। हल्द्वानी के वरिष्ठ पत्रकार दानिश खान नहीं रहे। हमेशा पत्रकारों के सुख-दुःख में कंधे से कंधा मिलाकर चलने वाले और पत्रकारों को एक माला में पिरोने का प्रयास करने वाले श्रमजीवी पत्रकार यूनियन के नैनीताल जिला अध्यक्ष दानिश खान का असामयिक इंतकाल होने की दुःखद खबर के बाद से प्रदेश में शोक की लहर है।
बताया गया है कि बीती शाम अचानक दानिश खान का स्वास्थ्य बिगड़ने पर उन्हें हल्द्वानी के निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जहां चिकित्सक ने बताया कि उन्हें एक के बाद एक दो हार्ट अटैक आये।
सूचना मिलने के बाद हल्द्वानी के पत्रकार भी अस्पताल पहुँचे और दानिश खान के स्वास्थ्य की चिकित्सकों से जानकारी ली। लेकिन सुबह करीब 6 बजे सूचना मिली की अब पत्रकारों के हितों की लड़ाई करने वाले वरिष्ठ पत्रकार दानिश खान अपनी जिंदगी की जंग हार गए, और उनका इंतकाल हो गया। पारिवारिक सूत्रों के अनुसार दानिश खान का अंतिम संस्कार 12 बजे के करीब किया जाएगा। 

नैनीताल के वरिष्ठ भाजपा नेता गोपाल रावत कांग्रेस नेता मारुति साह की माताएं पंचतत्व में विलीन

-रावत की माता को प्रदेश अध्यक्ष बंशीधर भगत ने दिया कंधा

भाजपा नेता गोपाल रावत की माता के पार्थिव शरीर को अंमित यात्रा के लिए कंधा देते भाजपा प्रदेश अध्यक्ष बंशीधर भगत। इनसेट में स्वर्गीय रेखा साह एवं स्वर्गीय सरला रावत।

नवीन समाचार, नैनीताल, 2 जून 2020। बीती रात्रि नगर के वरिष्ठ कांग्रेस एवं व्यापारी नेता, प्रांतीय उद्योग व्यापार मंडल के कार्यकारी जिलाध्यक्ष, पूर्व नगर कांग्रेस अध्यक्ष एवं सामाजिक कार्यकर्ता मारुति नंदन साह की माता रेखा साह एवं भाजपा के वरिष्ठ नेता, प्रदेश कार्यकारिणी सदस्य एवं पूर्व नगर अध्यक्ष, पूर्व जिला महामंत्री, पूर्व सभासद एवं सामाजिक कार्यकर्ता गोपाल रावत की माता सरला रावत का देहावसान हो गया। मंगलवार को दोनों के आवासों पर शोक संवेदना व्यक्त करने वालों का तांता लगा रहा। नगर के सामाजिक एवं विभिन्न संगठनों से जुड़े लोगों के साथ ही राजनीतिक दलों के नेता, कार्यकर्ता भी दोनों ही जगह राजनीतिक विभेद भुलाकर शोक में शामिल हुए। वहीं भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष बंशीधर भगत ने स्वर्गीय सरला रावत को अंतिम यात्रा में कंधा भी दिया।

बाबा नीब करौरी के साथ स्वर्गीय रेखा साह (फाइल फोटो)

यह संयोग ही है कि 74 वर्षीया स्वर्गीय रेखा साह हनुमान जी के अवतार कहे जाने वाले बाबा नीब करौरी की अनन्य भक्त एवं परिवार से ही बाबा जी के अत्यंत करीब रहीं स्वर्गीय रेखा साह ने बाबा की प्रेरणा से ही अपने पुत्र का नाम हनुमान जी के ही एक नाम पर मारुति रखा था, और हनुमान जी के ही वार कहे जाने वाले मंगलवार की सुबह उनका असामयिक निधन होने का दुःखद समाचार आया। बीते सात-आठ माह से लीवर एवं किडनी की समस्याओं से जूझने के उपरांत उसका बीती रात्रि असामयिक निधन हो गया। उनके पति स्वर्गीय द्वारिका नाथ साह भी नगर के प्रतिष्ठित व्यवसायी रहे हैं, जबकि बड़े पुत्र रामेश्वर साह भी नगर के प्रतिष्ठित व्यवसायी हैं और पिता की विरासत संभालते हैं। एक पुत्री साधना शर्मा देश के प्रतिष्ठित, सर्वोच्च न्यायालय के वरिष्ठतम एवं ख्यातिलब्ध अधिवक्ता फल्ली नारीमन के सहयोगी सुभाष शर्मा की पत्नी हैं, और वर्तमान में विधि की पढ़ाई कर रहे अपने पुत्र के साथ अमेरिका में हैं। श्री साह ने बताया कि उनकी अंतिम यात्रा सुबह 10 बजे रानीबाग स्थित चित्रशिला घाट के लिये प्रारंभ होगी।
वहीं, 80 वर्षीया स्वर्गीय सरला रावत भी धर्म परायण महिला थीं,। रात्रि साढे़ 12 बजे नगर के सुखताल-सूखाताल स्थित आवास पर उनका देहावसान हो गया। वे अपने पीछे राजनेता पुत्र गोपाल रावत के साथ ही उच्च न्यायालय में अधिवक्ता पुत्र डीसीएस रावत,, राजकीय पॉलीटेक्निक टनकपुर में प्रवक्ता के पद पर कार्यरत ध्यान सिंह रावत एवं दिल्ली में रहने वाली पुत्री गौरी के भरे-पूरे परिवार को शोक संतप्त छोड़ गई हैं। श्री रावत ने बताया कि उनकी अंतिम यात्रा सुबह 11 बजे पाइंस स्थित श्मशान घाट के लिये प्रारंभ होगी। शोक संवेदना व्यक्त करने वालों में नगर पालिका अध्यक्ष सचिन नेगी, पूर्व सांसद डा. महेंद्र पाल, भाजपा के नगर अध्यक्ष आनंद बिष्ट, कंाग्रेस के नगर अध्यक्ष अनुपम कबडवाल, व्यापार मंडल अध्यक्ष किसन नेगी व भुवन लाल साह, नीरज जोशी, मनोज जोशी, अरविंद पडियार, डा. ललित तिवारी व पूरन मेहरा सहित बड़ी संख्या में लोग शामिल रहे। वहीं कूटा यानी कुमाऊं विवि शिक्षक संघ तथा आम आदमी पार्टी के प्रदीप दुम्का, शाकिर अली, अभिषेक मुल्तानिया, सूरज कुमार आदि कार्यकर्ताओं ने भी दोनों दिवंगत आत्माओं के प्रति शोक संवेदना व्यक्त की है।

‘नवीन समाचार’ दोनों दिवंगत दिव्य आत्माओं की शांति एवं शोक संतप्त परिवारों को अपार विछोह के इस दुःख को सहने की सामर्थ्य प्रदान करने की ईश्वर से प्रार्थना करता है।

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