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पूर्व विधायक का बीती रात्रि निधन, राजनीतिक जगत में शोक की लहर

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नवीन समचार, चंपावत, 24 सितंबर 2020। अविभाजित उत्तर प्रदेश में अविभाजित पिथौरागढ़ सीट से विधायक रहे लोहाघाट निवासी वरिष्ठ भाजपा नेता कृष्ण चंद्र पुनेठा का बीती रात्रि निधन हो गया। वह लंबे समय से बीमार थे। उन्होंने लोहाघाट के फोर्ती स्थित अपने निवास पर रात्रि 10.40 बजे अंतिम सांस ली। बृहस्पतिवार प्रातः 10 बजे दगडेश्वर घाट (निकट कोली पुल ) लोहाघाट में उनका अंतिम संस्कार किया जाएगा।
वरिष्ठ भाजपा नेता कृष्ण चंद्र पुनेठा का कल रात निधन हो गया।उल्लेखनीय है कि स्वर्गीय पुनेठा वर्ष 1971 से जनसंघ से जुड़े थे। 1990 में वे चंपावत सहित अविभाजित पिथौरागढ़ जिले में भाजपा के जिलाध्यक्ष बने और 1991 में उत्तर प्रदेश विधानसभा के लिए पिथौरागढ़ सीट से सदस्य चुने गए। 1996 में भी वह विधायक निर्वाचित हुए। उत्तराखंड राज्य अलग होने के बाद वह राज्य की पहली मुख्यमंत्री नित्यानंद स्वामी के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार में हिल्ट्रान के अध्यक्ष बने। पूर्व विधायक के निधन की सूचना से राजनीतिक जगत में शोक की लहर दौड़ गई है। उल्लेखनीय है कि बीती एक सितंबर को उनके पुराने साथी व महाराष्ट्र के राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी ने उन्हें उपचार के लिए मुंबई बुलवाया था। वह उत्तराखंड सरकार की ओर से भेजे गए हेलीकाप्टर से देहरादून होते हुए मुंबई गए थे, और इधर करीब एक सप्ताह पहले मुंबई से लौट आए थे। उनके पुत्र मयंक पुनेठा प्राथमिक शिक्षक एवं उत्तराखंड राज्य प्राथमिक संघ की लोहाघाट शाखा के ब्लाक मंत्री हैं। उल्लेखनीय है कि बीती एक सितंबर को उनके पुराने साथी व महाराष्ट्र के राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी ने उन्हें उपचार के लिए मुंबई बुलवाया था। वह उत्तराखंड सरकार की ओर से भेजे गए हेलीकाप्टर से देहरादून होते हुए मुंबई गए थे, और इधर करीब एक सप्ताह पहले मुंबई से लौट आए थे। वह पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह एवं भाजपा के दिग्गज नेता डॉ मुरली मनोहर जोशी, पूर्व केंद्रीय मंत्री बची सिंह रावत के करीबी रहे। बताया जाता है कि उन्होंने ही कुमाऊं मंडल में में जनता दरबार की शुरुआत की थी। प्रशासनिक ज्ञान की वजह से उनके अधिकारियों के साथ बेहतर रिश्ते थे। पूर्व मुख्य सचिव डॉ आरएस टोलिया, रामचन्द्रन, राकेश शर्मा, एसके दास, एसके माहेश्वरी, अमरिंदर सिन्हा सहित अनेक चर्चित अधिकारियों से भी उनकी गहरी मित्रता थी।

यह भी पढ़ें : नैनीताल: दो दिनों में आठ प्रतिष्ठित व्यक्तियों-पारिवारिक सदस्यों की मौत से शहर में शोक का माहौल..

नवीन समाचार, नैनीताल, 22 सितंबर 2020। जिला-मंडल मुख्यालय में बीते दो दिनों में नगर के बाजार क्षेत्र के आठ प्रतिष्ठित लोगों एवं पारिवारिक सदस्यों की अलग-अलग कारणों से मौत की दुःखद सूचना है। इससे नगर में शोक का माहौल है, एवं लोग इतनी बड़ी संख्या में लोगों की मौत पर चिंता व्यक्त कर रहे हैं।

स्वर्गीय अनिल साह।

प्राप्त जानकारी के अनुसार मंगलवार सुबह तड़के नगर के मल्लीताल बड़ा बाजार स्थित प्रतिष्ठान नयना पुस्तक भंडार के स्वामी अनिल साह का असामयिक देहावसान हो गया। वे 67 वर्ष के थे। इनके अलावा आज बड़ा बाजार स्थित प्रतिष्ठान टेक्सटाइल इंपोरियम के स्वामी रजत कपूर की 88 वर्षीया माता का भी निधन हो गया। इसी तरह आज कंसल प्रिंटिंग प्रेस स्वामी अशोक कंसल की पत्नी निशा कंसल (62) का भी लखनऊ में उपचार के दौरान निधन हो गया है। जबकि बीती शाम बड़ा बाजार निवासी नैनीताल बैंक कर्मी रजत साह की 75 वर्षीया माता और तत्कालीन उत्तर प्रदेश की हॉकी टीम के खिलाड़ी रहे बड़ा बाजार निवासी एवं प्रतिष्ठान स्वामी गजेंद्र लाल साह का हल्द्वानी में निधन हो गया। वे यूपी के लिए रंगास्वामी नेशनल हॉकी चैंपियनशिप में भी खेले थे। बताया गया है कि वे अस्वस्थ थीं। उनका डायलिसिस चल रहा था। इनके अलावा आज भी मल्लीताल जय लाल साह बाजार स्थित प्रतिष्ठान पहाड़ी वस्त्र भंडार के स्वामी प्रेम बिष्ट की 90 वर्षीय माता के निधन का भी समाचार है। वहीं बीती शाम तल्लीताल बाजार स्थित हरीश टेलर प्रतिष्ठान स्वामी की 55 वर्षीय पत्नी के दुःखद निधन का भी समाचार है। इनके अलावा भी कुछ अन्य लोगों की मृत्यु के समाचार आज नगर में चर्चा में रहे।

यह भी पढ़ें : बेटे की कोरोना से असामयिक मौत के सदमे में पत्रकार के पिता का भी असामयिक देहांत

नवीन समाचार, हल्द्वानी, 11 सितंबर 2020। जनपद के भवाली में अमर उजाला के पत्रकार कमलेश जोशी, जनपक्ष आजकल पत्रिका के संपादक गिरीश जोशी एवं शिखर ग्रुप के चेयरमैन मनोज जोशी के पिता दामोदर जोशी का असामयिक निधन हो गया। वे 85 वर्ष के थे। शुक्रवार शाम करीब 6 बजे उन्होंने हल्द्वानी के विवेक विहार गैस गोदाम रोड कुसुमखेडा स्थित आवास में अंतिम सांस ली। उल्लेखनीय है कि भवाली स्थित श्यामखेत के मूल निवासी श्री जोशी के एक पुत्र हरीश जोशी का गत दिवस कोरोना से असामयिक निधन हो गया था। बताया गया है कि पुत्र के असामयिक निधन के सदमे के कारण ही उनका भी निधन हो गया।

यह भी पढ़ें : नैनीताल : पत्रकार हरीश का असामयिक निधन, आखिरी स्टेज के मर्ज का पता ही नहीं था

नवीन समाचार, नैनीताल, 10 सितंबर 2020। नगर के पत्रकार हरीश कुमार के असामयिक निधन का दुःखद समाचार है। प्राप्त जानकारी के अनुसार बृहस्पतिवार देर रात्रि हल्द्वानी के निजी चिकित्सालय में उपचार के दौरान उन्होंने दम तोड़ दिया। बेहद मृदुभाषी, मिलनसार एवं दूसरों की मदद के लिए हमेशा तत्पर रहने वाले 40 वर्षीय हरीश साधना न्यूज के साथ नगर के स्थानीय ताल चैनल में कार्य करते थे। बताया गया है कि इधर करीब एक सप्ताह से पे बुखार आदि की समस्या से ग्रस्त थे। इस पर बृहस्पतिवार को दिन में बीडी पांडे जिला चिकित्सालय दिखाने के लिए आए थे। यहां वरिष्ठ फिजीशियन डा. एमएस दुग्ताल ने स्वयं तत्काल उनके अल्ट्रासाउंड, शुगर आदि के टेस्ट कर तत्काल हल्द्वानी जाकर डायलिसिस कराने की सलाह दी थी। इस पर अपराह्न तीन बजे अस्पताल से लौटकर वह शाम 6 बजे से पहले हल्द्वानी के निजी चिकित्सालय में भर्ती हुए थे। डा. दुग्ताल ने बताया कि हरीश को 300 शुगर थी, लेकिन उन्हें इसका पता ही नहीं था। इस कारण उन्होंने कोई ऐहतियात भी नहीं बरती होगी। इस कारण उनकी दोनों किडनी खराब हो गई थी, और उन्हंे आखिरी समय में इसका पता चला। इस कारण उन्हें बचाया नहीं जा सका।
हरीश का मई 2011 में विवाह हुआ था, तथा अभी कोई संतान नहीं है। अभी नंदा देवी महोत्सव के दौरान महोत्सव का ताल चैनल एवं ‘नवीन समाचार’ के माध्यम से लाइव प्रसारण करने में भी उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही थी। उनके निधन से पत्रकारों में गहरा दुःख एवं शोक व्याप्त हो गया है।

यह भी पढ़ें : नगर पालिका सभासद को पितृशोक

नवीन समाचार, नैनीताल, 21 अगस्त 2020। नैनीताल नगर पालिका के आवागढ़ वार्ड के सभासद राजू टांक के पिता यशपाल टांक का बीती रात्रि असामयिक निधन हो गया। करीब 50 वर्षीय यशपाल नगर पालिका में कर्मचारी थे, और इधर गले में गांठ की समस्या से ग्रस्त थे। इधर लॉक डाउन में समस्या और बढ़ गई थी। इस पर रात्रि करीब साढ़े 11 बजे उन्होंने अंतिम सांस ली। उनके राजू सहित दो पुत्र व एक पुत्री हैं। बड़ी पुत्री का विवाह हो चुका है। श्री टांक ने बताया कि अंतिम यात्रा शुक्रवार सुबह साढ़े 10 बजे पाइंस स्थित श्मशान घाट के लिए चलेगी।

यह भी पढ़ें : डीएसए कर्मी ‘लाली दा’ के निधन से खेल जगत में शोक

नवीन समाचार, नैनीताल, 10 अगस्त 2020। डीएसए यानी नैनीताल जीमखाना एवं जिला क्रीड़ा संघ में कार्यरत राजेश बिनवाल उर्फ ‘लाली दा’ का सोमवार सुबह तड़के करीब चार बजे असामयिक निधन हो गया। डीएसए से जुड़े सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार लाली दा शुगर यानी मधुमेह की बीमारी से ग्रस्त थे। इधर लॉक डाउन के बाद से उनका स्वास्थ्य अधिक खराब हो गया था। इधर उनका डायलिसिस से उपचार चल रहा था। वह अपने पीछे पत्नी तथा इंजीनियरिंग कर चुके व कॉलेज में पढ़ाई कर रहे दो पुत्रों सहित परिवार को शोक संतप्त छोड़ गए हैं। उनके निधन से डीएसए सहित खेल जगत में शोक की लहर है। डीएसए मैदान में वर्ष भर होने वाली हर तरह की खेल गतिविधियों के संपादन में लाली दा की सक्रिया भूमिका रहती थी। उनका अंतिम संस्कार रानीबाग में किया जाएगा। अंतिम यात्रा की तैयारी की जा रही है।

इधर रॉयल बास्केटबाल क्लब एवं कुमाऊं विश्वविद्यालय शिक्षक संघ-कूटा ने लाली दा को असामसिक निधन पर शोक सभा आयोजित कर श्रद्धांजलि दी। रॉयल बास्केटबाल क्लब की शोक सभा में राजीव गुप्ता, आंनद खम्पा, भुवन बिष्ट, गिरीश वर्मा, चंद्रा शर्मा, हरीश जोशी, तनवीर, जगजीत सिंह, दिनेश वर्मा, मनोज साह, हरीश चौधरी व नीमा साह तथा कूटा की शोक सभा में कूटा के अध्यक्ष प्रो. ललित तिवारी व अन्य मौजूद रहे।

यह भी पढ़ें : विधायक पुत्र के असामयिक निधन पर श्रद्धांजलि देने में भी राजनीति हावी..

नवीन समाचार, नैनीताल, 08 अगस्त 2020। शुक्रवार को पूर्व भाजपा विधायक खड़क सिंह बोहरा ने युवा पुत्र एवं पूर्व छात्र संघ सचिव अमित मोहन सिंह बोहरा उर्फ आशु बोहरा के असामयिक निधन पर शोक व्यक्त करने में भी राजनीति होती नजर आई। उल्लेखनीय है कि अमित पहले भाजपा में थे लेकिन पिछले विधानसभा चुनाव के दौरान उन्होंने कांग्रेस पार्टी का दामन थाम लिया था। इसलिए उनके निधन पर केवल कांग्रेस पार्टी के कार्यकर्ता भी श्रद्धांजलि व्यक्त करते दिखे। कांग्रेस नेता हेम आर्य ने कांग्रेस कार्यकर्ता के रूप में आशु बोहरा के आकस्मिक निधन पर दुःख व्यक्त किया। इसी तरह नगर कांग्रेस कमेटी की ओर से भी उनके निधन पर शोक व्यक्त किया गया। जबकि अन्य दलों की ओर से इस उदीयमान युवा के निधन पर कोई प्रतिक्रिया सामने नहीं आई। अलबत्ता नगर की जनहित संस्था तथा कूटा यानी कुमाऊं विवि शिक्षक संघ की ओर से आशु बोरा के निधन पर शोक सभा आयोजित करने का समाचार है। शोक सभा में संस्था के अध्यक्ष सुरेंद्र चौधरी, जगमोहन बिष्ट, अशोक साह, महेश आर्य, शाकिर अली, रीता बिष्ट, प्रेमा साह, नजर अली व विजय साह आदि मौजूद रहे। कूटा ने आशु के साथ ही वन विभाग के ललित पांडे की माता मुन्नी पांडे के निधन पर शोक जताया है। कूटा की विज्ञप्ति में डीएसबी परिसर के पूर्व छात्र तथा दिल्ली विश्वविद्यालय के रसायन विज्ञान विभाग के प्रोफेसर काफलीगैर बागेश्वर निवासी दीवान सिंह रावत के दिल्ली विश्वविद्यालय में डीन यानी संकायाध्यक्ष बनने पर हर्ष जताते हुए उन्हें शुभकामनाएं भी हैं।

यह भी पढ़ें : शोक समाचार : दुःखद ब्रेकिंग: पूर्व विधायक के पुत्र का दुर्घटना में असामयिक निधन

नवीन समाचार, नैनीताल, 7 अगस्त 2020। नैनीताल के पूर्व विधायक स्वर्गीय खड़क सिंह बोहरा के छोटे पुत्र एवं पूर्व छात्र संघ सचिव अमित मोहन सिंह बोहरा उर्फ आशु की दुर्घटना में असामयिक मृत्यु हो गई है। वे करीब 40 वर्ष की उम्र के थे। प्राप्त जानकारी के अनुसार अमित का शव मुख्यालय से करीब 50 किमी दूर कोटाबाग-हल्द्वानी रोड पर कोटाबाग से करीब एक-डेढ़ किमी आगे गुरुण़ी नाला के पास उनकी दुर्घटनाग्रस्त अल्टो कार में बरामद हुआ है।

स्वर्गीय अमित मोहन सिंह बोहरा और दुर्घटनाग्रस्त कार में ऐसे मिले अमित।

बताया जा रहा है कि उनकी कार घूमी हुई है। इसका कारण नहीं पता चल पा रहा है कि किसी दूसरे वाहन ने उनकी कार को टक्कर मारी अथवा कार दीवार से टकराई। दुर्घटना के कारणों का ठीक से पता नहीं चल पाया है। कालाढुंगी थाने के प्रभारी दिनेश नाथ महंत अभी-अभी मौके पर पहुंचे हैं। उन्होंने मृत्यु की पुष्टि की है। शव को कोटाबाग सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र लाकर पंचनामा भरने की कार्रवाई की जा रही है। बताया गया है कि अमित कोटाबाग स्थित अपने घर से नैनीताल आ रहे थे, तभी यह हादसा हुआ।
उल्लेखनीय है कि अमित आध्यात्मिक जीवन जी रहे थे। वे वर्ष 2004-05 में डीएसबी परिसर नैनीताल में छात्र संघ सचिव भी निर्वाचित रहे थे। उनके बड़े भाई ललित मोहन सिंह बोहरा तराई बीज विकास निगम में कार्यरत थे।
विस्तृत जानकारी की प्रतीक्षा है। हम इस समाचार पर बने हुए हैं। विस्तृत समाचार के लिए इस पोस्ट के लिंक को रिफ्रेश करते रहें।

यह भी पढ़ें : भूगोलविद् डा. जीएल साह का असामयिक निधन, अकादमिक जगत में शोक की लहर

-नैनी झील पर वृहद अध्ययन एवं टनकपुर-बागेश्वर रेल लाइन का ड्राफ्ट तैयार कर केंद्रीय रेल मंत्रालय व प्रधानमंत्री कार्यालय को भिजवाया था
-कुमाऊं विश्वविद्यालय के डीएसबी परिसर में जीआईएस लैब स्थापित करने के साथ कई अन्य उल्लेखनीय उपलब्धियां भी की थी हासिल, कुमाऊं विश्वविद्यालय में परीक्षा नियंत्रक सहित कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां भी निभाई थीं

नवीन समाचार, नैनीताल, 8 जुलाई 2020। कुमाऊं विश्वविद्यालय के डीएसबी परिसर में भूगोल विभाग में प्रोफेसर तथा विश्वविद्यालय के परीक्षा नियंत्रक सहित कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियों में रहे, नगर के तल्लीताल निवासी डा. गोविंद लाल साह का बुधवार सुबह असामयिक निधन हो गया। वे 68 वर्ष के थे। प्राप्त जानकारी के अनुसार वे इधर कुछ समय से अस्वस्थ थे और बीते तीन-चार दिनों से बीडी पांडे जिला चिकित्सालय में भर्ती थे। चिकित्सकों के अनुसार प्रॉस्टेट का कैंसर उनके शरीर में फैल गया था। इसके कारण ही सुबह पांच बजे अस्पताल में उन्होंने अंतिम सांस ली। इसके बाद पूर्वाह्न साढ़े 11 बजे उनका अंतिम संस्कार पाइंस स्थित श्मशान घाट पर गमगीन माहौल में कर दिया गया।
उल्लेखनीय है कि अपने सरल सौम्य स्वभाव और बुद्धिमत्ता के लिए प्रसिद्ध डा. साह मूल रूप से बागेश्वर के कत्यूर बाजार के निवासी थे। दिसंबर 1976 में डीएसबी राजकीय महाविद्यालय के भूगोल विभाग में मानचित्रकार के पद पर नियुक्त हुए डा. साह वर्ष 2000 से प्रोफेसर बने और वर्ष 2013 में सेवानिवृत्त हुए। इस दौरान उन्हें विभाग में जीआईएस यानी सुदूर संवेदन एवं भौगोलिक प्रणाली की प्रयोगशाला उत्तराखंड सरकार के सहयोग से स्थापित करने का श्रेय भी दिया जाता है। उन्होंने कुमाऊं विश्वविद्यालय में परीक्षा नियंत्रक सहित कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां भी निभाई थीं। 2012-13 में सेवानिवृत्ति के बाद से वह नगर तथा प्रदेश की विभिन्न गतिविधियों में शामिल रहते थे। उन्होंने इन पंक्तियों के लेखक के नैनी झील के जल स्तर संबंधी एक शोध प्रश्न पर नैनी झील पर विस्तृत अध्ययन करते हुए ‘समय का कलेडोस्कोप’ नाम की काफी चर्चित रही पुस्तक लिखी थी, और पुस्तक के प्रथम पृष्ठ पर इसका जिक्र भी किया था।
उनके पास नैनीताल एवं नैनी झील के ऐतिहासिक मानचित्रों का संग्रह मौजूद था, एवं उन्होंने स्वयं भी नैनी झील के गिर्द हो रहे अतिक्रमण, झील में उपलब्ध पानी आदि पर विस्तृत अध्ययन कर मानचित्र तैयार किये थे। उन्हें उत्तराखंड का पर्यटन मानचित्र एवं राज्य की विधानसभाओं के परिसीमन मानचित्र बनाने का श्रेय भी दिया जाता है। उन्होंने टनकपुर से बागेश्वर तक रेललाइन पहुंचाने के लिए ऐसा मानचित्र तैयार किया था, जिसके जरिये केवल चार पुलों से, बिना एक भी सुरंग बनाए केवल 610 मीटर के चढ़ाव के साथ ही रेलगाड़ी बागेश्वर पहुंच सकती है। इस बारे में उन्होंने तत्कालीन रेल मंत्री सुरेश प्रभु एवं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को विस्तृत प्रस्ताव भेजा था। इसके बाद ही रेल मंत्री प्रभु ने इस रेल प्रोजेक्ट को राष्ट्रीय महत्व की परियोजना में शामिल करने की घोषणा की थी।

https://navinsamachar.wordpress.com/2014/08/25/train-in-hills/

इसके अलावा डा. साह चिया यानी सेंट्रल हिमालयन इन्वायरमेंट एसोसिएशन के उपाध्यक्ष एवं इसकी गवर्निंग कौंसिल के सदस्य के साथ साह चौधरी समाज एवं सर्बजनिन दुर्गा पूजा समिति आदि संगठनों में थे। ‘हिल साइड सेफ्टी कमेटी’ के सदस्य के तौर पर नगर की समस्याओं के समाधान पर प्रशासनिक बैठकों में उपयोगी सुझाव देने में भी उनकी भूमिका रहती थी। इधर पिछले लोक सभा चुनाव के दौरान भाजपा के ‘संपर्क फॉर अभियान’ के तहत तत्कालीन भाजपा सांसद एवं मौजूदा महाराष्ट्र के राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी उनके आवास पर समर्थन प्राप्त करने लिए पहुंचे थे।

कोश्यारी ने पूर्व ओलंपियन राजेंद्र रावत, डा. जीएल साह, वेद साह व भानु प्रकाश साह से किया ‘संपर्क फॉर समर्थन’

आइएएस ज्योति साह

डा. साह की धर्मपत्नी अपर निदेशक-माध्यमिक शिक्षा कार्यालय से सेवानिवृत्त हुई हैं। जबकि उनकी पुत्री ज्योति साह का आईएएस में चयन हुआ था। वह वर्तमान में गुजरात में सहायक आयकर आयुक्त के पद पर जबकि पुत्र दिल्ली में पढ़ाता है। कुमाऊं विश्वविद्यालय शिक्षक संघ-कूटा के अध्यक्ष प्रो. ललित तिवारी, महासचिव डा. सुचेतन साह, डा. दीपक कुमार, डा. दीपिका गोस्वामी, डा. विजय कुमार, डा. सोहेल जावेद, डा. प्रदीप, डा. गगन होती, डा. पैनी जोशी, डा. मनोज धुनी एवं डा. सीमा चौहान सहित अकादमिक जगत के कई लोगों ने उनके निधन पर गहरा शोक व्यक्त किया है।

यह भी पढ़ें : उत्तराखंड के ‘हीरा’ लोक गायक एवं साहित्यकार हीरा सिंह राणा के निधन शोक की लहर

नवीन समाचार, नैनीताल, 13 जून 2020। प्रदेश के सुप्रसिद्ध कुमाउनी लोक गायक एवं साहित्यकार हीरा सिंह राणा जी के आकस्मिक निधन का समाचार प्राप्त होने पर कुमाऊं मंडल के कला एवं साहित्य तथा संस्कृति से जुड़े लोगों में शोक की लहर है। लोग सोशल मीडिया पर स्वर्गीय राणा को याद कर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित कर रहे हैं। इसी कड़ी में उत्तराखंड क्रांति दल के पूर्व केंद्रीय अध्यक्ष एवं पूर्व विधायक डा. नारायण सिंह जंतवाल ने कहा कि राणा का निधन उत्तराखण्डी समाज के लिये अपूरणीय क्षति है। लोक संस्कृति के ध्वजवाहक स्वर्गीय राणा समाज को जागृत करने वाले अपनी थाती पर आधारित रचनाओं को अपने मधुर स्वरों में प्रस्तुत कर लोगों को आल्हादित करते रहे। उत्तराखंडी संस्कृति व समाज को व्यापक पहचान दिलाने में भी उनका अविस्मरणीय योगदान रहा है। ऐसे बहुत से कार्यक्रमों में भी उन्होंने योगदान दिया और उत्तराखंड राज्य के संघर्ष को अग्रगति प्रदान करने में भी उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही। उक्रांद के जसवंत सिंह बिष्ट व विपिनदा आदि संस्थापकों के साथ उनका निकट संबंध रहा। नैनीताल में वे अक्सर पार्टी के नेता अंबादत्त बवाड़ी के घर पर रुकते थे। उनके निधन से एक युग का अंत हो गया है।
वहीं लोक साहित्यकार एवं राज्य की लोक भाषाओं की एकमात्र समग्र पत्रिका ‘कुमगढ़’ के संस्थापक दामोदर जोशी ‘देवांशु’ ने कहा कि स्वर्गीय राणा गढ़-कुमाऊं के रत्न तथा साहित्य व संस्कृति के महान संरक्षक थे। उनके निधन के समाचार से सभी स्तब्ध हैं। उनका निधन राज्य के साहित्य व कला जगत के लिए अपूरणीय क्षति है तथा प्रत्येक साहित्यकार के लिए व्यक्तिगत आघात है। उनके द्वारा गाये गये गीत उत्तराखंडियो के दिल में हमेशा गूंजते रहेंगे।

कुमाऊं के शिखर कवि व गायक थे राणा: जहूर
नैनीताल के वरिष्ठ रंगकर्मी जहूर आलम ने स्वर्गीय हीरा सिंह राणा को याद करते हुए बताया कि वर्तमान में उनका रुतबा कुमाऊं के शिखर कवि व गायक के रूप में था। वे बेहद भले, सीधे व ठेठ पहाड़ी इंसान थे। जीवन भर बहुत संघर्ष कर उन्होंने बड़ा मुकाम हासिल किया। उनके साथ एनडी तिवारी सरकार के दौर में उत्तराखंड कला एवं साहित्य परिषद एवं पिछली हरीश रावत सरकार के दौर में राज्य गीत की समिति में साथ काम करने का मौका मिला। जहूर आलम ने बताया कि नैनीताल शरदोत्सव के मंच पर पहली बार उन्होंने ही राणा को आमंत्रित किया था। इधर राज्य सरकार ने उनकी कद्र नहीं की, अलबत्ता दिल्ली सरकार ने उन्हें गढ़वाली, कुमाउनी व जौनसारी अकादमी का अध्यक्ष बनाया था। श्री आलम ने बताया कि इधर कुछ दिन पूर्व हुई वार्ता में उन्होंने कोरोना काल निपट जाने के बाद प्रदेश की लोक भाषाओं के साहित्य के साथ ही कुमाउनी के नाटकों पर भी कार्य करने की इच्छा जताई थी, लेकिन नियति के कू्रर हाथों ने उन्हें छीन लिया है।

लोक से आये व्यक्ति थे हिरदा: शेखर पाठक
नैनीताल। प्रदेश के संस्कृति कर्मी एवं इतिहासकार डा. शेखर पाठक ने कहा कि स्वर्गीय हीरा सिंह राणा ‘हिरदा’ लोक से आये व्यक्ति थे। वे कविताओं के साथ ही अपने गीत लिखते और उन्हें गाते भी थे। अपने कई गीतों को उन्होंने संगीत भी दिया था। उनके गीतों की शब्दावली में पाली पछाऊं की अलग मिठास थी। उनका गीत ‘लसका कमर बांधा’ उम्मीद का गीत था और जनांदोलनों में काफी गाया गया। उनके ‘आ लीली बाकरी लीली’ व ‘बिंदी घाघरि काई’ जैसे गीत उनके गृह अंचल सल्ट के बाद पूरे कुमाऊं, उत्तराखंड व दिल्ली में प्रवासियों के द्वारा काफी पसंद किये गये। वे अपनी बीमारी के बावजूद भाषा, गीत व संस्कृति के कार्यक्रमों में कभी पीछे नहीं रहते थे। इधर काफी समय से नरेंद्र नेगी व उनकी जुगलबंदी करने की योजना थी, लेकिन पहले नरेंद्र नेगी को आये हृदयाघात और इधर कोरोना की वजह से यह संभव नहीं हो पाया।

आम आदमी पार्टी व कूटा ने भी जताया हिरदा के निधन पर शोक
नैनीताल। आम आदमी पार्टी नैनीताल के कार्यकर्ताओं एवं पदाधिकारियों ने दिल्ली सरकार में कुमाऊनी, गढ़वाली व जौनसारी भाषा अकादमी के उपाध्यक्ष एवं उत्तरांचल भ्रात्रि सेवा संस्थान के मुख्य सलाहकार, महान् कवि और गीतकार के रूप में स्वर्गीय हीरा सिंह राणा को याद किया एवं उनके असमय निधन पर गहरा शोक तथा दुंख व्यक्त किया। पार्टी कार्यकर्ताओं ने उनके निधन को उत्तराखंडी कला और संस्कृति के लिए बहुत बड़ा आघात बताया। उनके निधन पर शोक सभा भी आयोजित की, जिसमें विधानसभा नैनीताल प्रभारी प्रदीप कुमार दुम्का, शाकिर अली, डीएस नेगी, प्रताप पडियार, विजय साह, पीसी जोशी, आरसी पंत, राजेंद्र कुमार, राम नारायण व विजय साह आदि शामिल रहे। कार्यकर्ताओं ने इस मौके पर नैनीताल जिले के ओखलकांडा विकास खंड के ग्राम सभा मीडार के पदमपुर गांव निवासी 6 कुमाऊं रेजिमेंट के सूबेदार यमुना प्रसाद पनेरू के जम्मू-कश्मीर के कुपवाड़ा में रेस्क्यू ऑपरेशन में अपना फर्ज निभाते हुए शहीद होने पर भी गहरा शोक तथा दुंख व्यक्त किया। इधर कूटा यानी कुमाऊं विवि शिक्षक संघ के अध्यक्ष प्रो. ललित तिवारी, डा. दीपक कुमार डा. दीपिका गोस्वामी, डा. सुचेतन साह व डा. सोहेल जावेद आदि ने भी सुर सम्राट एवं कहा व साहित्य जगत की हस्ती के रूप में स्वर्गीय राणा को याद किया और उनके निधन पर शोक-संवेदना व्यक्त की है।

शोक समाचार : सुबह-सुबह उत्तराखंड ने खो दिया अपना एक ‘हीरा’, हीरा सिंह राणा का निधन

नवीन समाचार, नैनीताल, 13 जून 2020। सुबह-सुबह उत्तराखंड के कला एवं साहित्य जगत से के लिए एक बहुत बुरी खबर आ रही है ।उत्तराखंड ने अपना एक ‘हीरा’ हीरा सिंह राणा को खो दिया है। हृदयाघात से आज सुबह ढाई बजे दिल्ली में उनका निधन हो गया। लोक के महान सेवक, संगीत को समर्पित महान व्यक्तित्व, लेखन के धनी, स्वभाव में विनम्र, आडम्बर और अहं से दूर रहने वाले, बीते वर्ष 2019 में गढ़वाली कुमाऊनी व जौनसारी अकादमी दिल्ली के उपाध्यक्ष बने व इसके अतिरिक्त अपनी मिट्टी से जुड़े, अद्वितीय व्यक्ति, कलाकार, लोक गायक हीरा सिंह राणा का अचानक हम सब को छोड़ जाना हृदय विदारक घटना है। वर्तमान में दिल्ली में रह रहे स्वर्गीय राणा के मित्र एवं कला जगत से जुड़े लोग इस पर प्रतिक्रिया व्यक्त कर रहे हैं : “विश्वास से परे इस ख़बर से उत्तराखंड सहित विश्व आहत है। लोक की सेवा करने के लिए में ऐसी शख्सियतें बार )-बार जन्म नही लेती। स्व.चन्द्र सिंह राही जी के बाद ये ऐसी दूसरी क्षति है जिसकी पूर्ति नही हो सकती। बहुत बड़ा आघात। राणा जी को अश्रुपूर्ण श्रद्धांजलि।”

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उल्लेखनीय है कि उत्तराँखण्ड के प्रमुख गायक कलाकारो में हीरा सिंह राणा का नाम प्रथम पंक्ति में आता है जिन्हें लोग हीरदा कुमाऊनी भी कहते है। हीरा सिंह राणा का जन्म 16 सितंबर 1942 को मानिला डंढ़ोली जिला अल्मोड़ा में हुआ उनकी माताजी स्व: नारंगी देवी, पिताजी स्व: मोहन सिंह थे। राणा जी प्राथमिक शिक्षा मानिला में हुई। उन्होंने दिल्ली सेल्समैन की नौकरी की लेकिन इसमें उनका मन नहीं लगा और इस नौकरी को छोड़कर वह संगीत की स्कालरशिप लेकर कलकत्ता चले गए और संगीत के संसार में पहुँच गए।
इसके बाद हीरा सिंह राणा ने उत्तराखंड के कलाकारों का दल नवयुवक केंद्र ताड़ीखेत 1974, हिमांगन कला संगम दिल्ली 1992, पहले ज्योली बुरुंश (1971) , मानिला डांडी 1985, मनख्यु पड़यौव में 1987, के साथ उत्तराखण्ड के लोक संगीत के लिए काम किया। इस बीच राणा जी ने कुमाउनी लोक गीतों के 6- कैसेट ‘रंगीली बिंदी, रंगदार मुखड़ी’, सौमनो की चोरा, ढाई विसी बरस हाई कमाला’, ‘आहा रे ज़माना’ भी निकाले। राणा जी ने कुमाँउ संगीत को नई दिशा दी और ऊचाँई पर पहुँचाया. राणा ने ऐसे गाने बनाये जो उत्तराखण्ड की संस्कृति और रिती रीवाज को बखुबी दर्शाते हैं। यही वजह कि भूमंडलीकरण के इस दौर में हीरा सिंह राणा के गीत खूब गाए बजाए जाते हैं। उनकी एक रचना की कुछ पंक्तियां : त्यर पहाड़, म्यर पहाड़
होय दुःखों को डयर पहाड़
बुजुर्गों ले जोड़ पहाड़
राजनीति ले तोड़ पहाड़
ठेकेदारों ले फोड़ पहाड़
नांतिनों ले छोड़ पहाड़।

श्रमजीवी पत्रकार यूनियन के नैनीताल जिला अध्यक्ष, वरिष्ठ पत्रकार दानिश खान का असामयिक निधन

नवीन समाचार, हल्द्वानी, 12 जून 2020। हल्द्वानी के वरिष्ठ पत्रकार दानिश खान नहीं रहे। हमेशा पत्रकारों के सुख-दुःख में कंधे से कंधा मिलाकर चलने वाले और पत्रकारों को एक माला में पिरोने का प्रयास करने वाले श्रमजीवी पत्रकार यूनियन के नैनीताल जिला अध्यक्ष दानिश खान का असामयिक इंतकाल होने की दुःखद खबर के बाद से प्रदेश में शोक की लहर है।
बताया गया है कि बीती शाम अचानक दानिश खान का स्वास्थ्य बिगड़ने पर उन्हें हल्द्वानी के निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जहां चिकित्सक ने बताया कि उन्हें एक के बाद एक दो हार्ट अटैक आये।
सूचना मिलने के बाद हल्द्वानी के पत्रकार भी अस्पताल पहुँचे और दानिश खान के स्वास्थ्य की चिकित्सकों से जानकारी ली। लेकिन सुबह करीब 6 बजे सूचना मिली की अब पत्रकारों के हितों की लड़ाई करने वाले वरिष्ठ पत्रकार दानिश खान अपनी जिंदगी की जंग हार गए, और उनका इंतकाल हो गया। पारिवारिक सूत्रों के अनुसार दानिश खान का अंतिम संस्कार 12 बजे के करीब किया जाएगा। 

नैनीताल के वरिष्ठ भाजपा नेता गोपाल रावत कांग्रेस नेता मारुति साह की माताएं पंचतत्व में विलीन

-रावत की माता को प्रदेश अध्यक्ष बंशीधर भगत ने दिया कंधा

भाजपा नेता गोपाल रावत की माता के पार्थिव शरीर को अंमित यात्रा के लिए कंधा देते भाजपा प्रदेश अध्यक्ष बंशीधर भगत। इनसेट में स्वर्गीय रेखा साह एवं स्वर्गीय सरला रावत।

नवीन समाचार, नैनीताल, 2 जून 2020। बीती रात्रि नगर के वरिष्ठ कांग्रेस एवं व्यापारी नेता, प्रांतीय उद्योग व्यापार मंडल के कार्यकारी जिलाध्यक्ष, पूर्व नगर कांग्रेस अध्यक्ष एवं सामाजिक कार्यकर्ता मारुति नंदन साह की माता रेखा साह एवं भाजपा के वरिष्ठ नेता, प्रदेश कार्यकारिणी सदस्य एवं पूर्व नगर अध्यक्ष, पूर्व जिला महामंत्री, पूर्व सभासद एवं सामाजिक कार्यकर्ता गोपाल रावत की माता सरला रावत का देहावसान हो गया। मंगलवार को दोनों के आवासों पर शोक संवेदना व्यक्त करने वालों का तांता लगा रहा। नगर के सामाजिक एवं विभिन्न संगठनों से जुड़े लोगों के साथ ही राजनीतिक दलों के नेता, कार्यकर्ता भी दोनों ही जगह राजनीतिक विभेद भुलाकर शोक में शामिल हुए। वहीं भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष बंशीधर भगत ने स्वर्गीय सरला रावत को अंतिम यात्रा में कंधा भी दिया।

बाबा नीब करौरी के साथ स्वर्गीय रेखा साह (फाइल फोटो)

यह संयोग ही है कि 74 वर्षीया स्वर्गीय रेखा साह हनुमान जी के अवतार कहे जाने वाले बाबा नीब करौरी की अनन्य भक्त एवं परिवार से ही बाबा जी के अत्यंत करीब रहीं स्वर्गीय रेखा साह ने बाबा की प्रेरणा से ही अपने पुत्र का नाम हनुमान जी के ही एक नाम पर मारुति रखा था, और हनुमान जी के ही वार कहे जाने वाले मंगलवार की सुबह उनका असामयिक निधन होने का दुःखद समाचार आया। बीते सात-आठ माह से लीवर एवं किडनी की समस्याओं से जूझने के उपरांत उसका बीती रात्रि असामयिक निधन हो गया। उनके पति स्वर्गीय द्वारिका नाथ साह भी नगर के प्रतिष्ठित व्यवसायी रहे हैं, जबकि बड़े पुत्र रामेश्वर साह भी नगर के प्रतिष्ठित व्यवसायी हैं और पिता की विरासत संभालते हैं। एक पुत्री साधना शर्मा देश के प्रतिष्ठित, सर्वोच्च न्यायालय के वरिष्ठतम एवं ख्यातिलब्ध अधिवक्ता फल्ली नारीमन के सहयोगी सुभाष शर्मा की पत्नी हैं, और वर्तमान में विधि की पढ़ाई कर रहे अपने पुत्र के साथ अमेरिका में हैं। श्री साह ने बताया कि उनकी अंतिम यात्रा सुबह 10 बजे रानीबाग स्थित चित्रशिला घाट के लिये प्रारंभ होगी।
वहीं, 80 वर्षीया स्वर्गीय सरला रावत भी धर्म परायण महिला थीं,। रात्रि साढे़ 12 बजे नगर के सुखताल-सूखाताल स्थित आवास पर उनका देहावसान हो गया। वे अपने पीछे राजनेता पुत्र गोपाल रावत के साथ ही उच्च न्यायालय में अधिवक्ता पुत्र डीसीएस रावत,, राजकीय पॉलीटेक्निक टनकपुर में प्रवक्ता के पद पर कार्यरत ध्यान सिंह रावत एवं दिल्ली में रहने वाली पुत्री गौरी के भरे-पूरे परिवार को शोक संतप्त छोड़ गई हैं। श्री रावत ने बताया कि उनकी अंतिम यात्रा सुबह 11 बजे पाइंस स्थित श्मशान घाट के लिये प्रारंभ होगी। शोक संवेदना व्यक्त करने वालों में नगर पालिका अध्यक्ष सचिन नेगी, पूर्व सांसद डा. महेंद्र पाल, भाजपा के नगर अध्यक्ष आनंद बिष्ट, कंाग्रेस के नगर अध्यक्ष अनुपम कबडवाल, व्यापार मंडल अध्यक्ष किसन नेगी व भुवन लाल साह, नीरज जोशी, मनोज जोशी, अरविंद पडियार, डा. ललित तिवारी व पूरन मेहरा सहित बड़ी संख्या में लोग शामिल रहे। वहीं कूटा यानी कुमाऊं विवि शिक्षक संघ तथा आम आदमी पार्टी के प्रदीप दुम्का, शाकिर अली, अभिषेक मुल्तानिया, सूरज कुमार आदि कार्यकर्ताओं ने भी दोनों दिवंगत आत्माओं के प्रति शोक संवेदना व्यक्त की है।

‘नवीन समाचार’ दोनों दिवंगत दिव्य आत्माओं की शांति एवं शोक संतप्त परिवारों को अपार विछोह के इस दुःख को सहने की सामर्थ्य प्रदान करने की ईश्वर से प्रार्थना करता है।

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