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सर्वोच्च न्यायालय ने लगाई हाईकोर्ट के नजूल भूमि संबंधी आदेश पर रोक

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नई दिल्ली, 10 अक्तूबर 2018। सुप्रीम कोर्ट ने उत्तराखंड हाईकोर्ट के नजूल भूमि के संबंध में दिए गए निर्णय पर रोक लगाते हुए स्थगनादेश जारी कर दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने याचिकाकर्ता सुनीता की अपील पर यह स्थगनादेश जारी करते हुए सरकार से जवाब मांगा है।

हाईकोर्ट ने पूर्व में अपने आदेश में उत्तराखंड सरकार की 2009 की नजूल नीति के उस प्रावधान को निरस्त कर दिया था, जिसके तहत अवैध कब्जेदारों के पक्ष में नजूल भूमि को फ्री होल्ड करने की व्यवस्था थी। हाईकोर्ट ने सरकार की इस नीति को असंवैधानिक व गैर कानूनी मानते हुए सरकार पर पांच लाख का जुर्माना भी लगाया था। यह जुर्माना राष्ट्रीय विधि विवि के खाते में जमा होना था। कोर्ट ने कहा था कि नजूल भूमि सार्वजनिक संपत्ति है, इसको सरकार किसी अतिक्रमणकारी के पक्ष में फ्री होल्ड नहीं कर सकती और यह भूमि सार्वजनिक उपयोग की है।

रुद्रपुर के पूर्व सभासद रामबाबू व उत्तराखंड हाईकोर्ट के अधिवक्ता रवि जोशी ने हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर कर सरकार की एक मार्च 2009 की नजूल नीति के विभिन्न उपबंधों को चुनौती दी थी। याचिकाकर्ताओं की ओर से कहा गया था कि राज्य सरकार नजूल भूमि को अवैध रूप से कब्जा कर रहे लोगों के पक्ष में फ्री होल्ड कर रही है जो कि असंवैधानिक, नियमविरूद्घ व मनमानीपूर्ण है। हाईकोर्ट ने भी इस पर संज्ञान लेते हुए मामले को ‘इन दि मैटर ऑफ रिफ्रेंस ऑफ नजूल पॉलिसी फॉर डिस्पोजिंग एंड मैनेजमेंट नजूल लैंड के नाम से जनहित याचिका के रूप में लिया था।

सुप्रीम कोर्ट के आदेशों के बावजूद 6 वर्ष से नियुक्ति को भटक रहे युवा

नैनीताल, 1 अक्टूबर 2018। उत्तराखंड की नौकरशाही की कार्यप्रणाली का एक अजब मामला प्रकाश में आया है। उत्तराखंड उच्च न्यायालय एवं सर्वोच्च न्यायालय के आदेशों के बावजूद सहायक अभियोजन अधिकारी पद पर चयनित अभ्यर्थी पिछले नौ वर्षों से नियुक्ति के लिए भटक रहे हैं। मामला शासन स्तर पर लटका हुआ है। इधर उन्होंने पुनः मुख्यमंत्री को अपनी नियुक्ति के बाबत अनुस्मारक भेजा है।
विदित हो कि उत्तराखंड लोक सेवा आयोग के द्वारा 19 सितंबर 2009 को जारी विज्ञापन के जरिये सहायक अभियोजन अधिकारी के 71 पदों के लिए 31 अक्टूबर 2010 को प्रारंभिक स्क्रीनिंग परीक्षा आयोजित की गयी, और 4 व 5 जून 2011 को आयोजित साक्षात्कारों के आधार पर 18 फरवरी 2012 को 71 अभ्यर्थियों का गृह विभाग उत्तराखंड शासन के अंतर्गत श्रेष्ठता के क्रम में चयन परिणाम घोषित कर दिया गया। इस परिणाम के विरुद्ध रवि मोहन एवं अन्य अभ्यर्थियों ने उच्च न्यायालय में पूर्व में 38 पदों के लिये विज्ञप्ति जारी करने का हवाला देते हुए याचिका दायर की। इस पर उच्च न्यायालय ने 10 मई 2012 को पूर्व के 38 पदों पर ही नियुक्ति करने एवं 25 फीसद अतिरिक्त पद प्रतीक्षा सूची में रखने एवं शेष पदों के लिए अलग से चयन प्रक्रिया करने के आदेश दिये। इस पर उत्तराखंड लोक सेवा आयोग ने 28 जून 2012 को 37 पदों पर चयनित अभ्यर्थियों की पुनरीक्षित सूची जारी कर दी। इन 37 में से 6 अभ्यर्थियों ने अपना योगदान नहीं दिया, यानी यह पद रिक्त रह गये। इस बीच उच्च न्यायालय के आदेश के खिलाफ नियुक्ति से छूट गये अन्य चयनित 34 पदों के लिये चयनित अभ्यर्थियों ने सर्वोच्च न्यायालय में अपील की, जिस पर सर्वोच्च न्यायालय ने उच्च न्यायालय के आदेश को बरकरार रखा। बावजूद शेष रिक्त पद 25 फीसद अतिरिक्त प्रतीक्षा सूची से अब तक नहीं भरे गये हैं। इस संबंध में 25 फीसद की प्रतीक्षा सूची में शामिल भानु प्रताप सिंह, ललित कुमार व तनवीर आलम तभी से अपनी नियुक्ति के लिए शासन में प्रयास जारी रखे हुए हैं, बावजूद उनकी नियुक्ति चयन के 6 वर्षों के बाद भी लटकी हुई है।

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मेरा जन्म 26 नवंबर 1972 को हुआ था। मैं नैनीताल, भारत में मूलतः एक पत्रकार हूँ। वर्तमान में मार्च 2010 से राष्ट्रीय हिन्दी दैनिक समाचार पत्र-राष्ट्रीय सहारा में ब्यूरो चीफ के रूप में कार्य कर रहा हूँ। इससे पहले मैं पांच साल के लिए दैनिक जागरण के लिए काम कर चुका हूँ। कुमाऊँ विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग से ‘नए मीडिया’ विषय पर शोधरत हूँ। फोटोग्राफ़ी मेरा शौक है। मैं NIKON COOLPIX P530 और अडोब फोटोशॉप 7.0 के साथ फोटोग्राफी कर रहा हूँ। फोटोग्राफी मेरे लिए दुनियां की खूबसूरती को अपनी ओर से चिरस्थाई बनाने का बहुत छोटा सा प्रयास है। एक फोटो पत्रकार के रूप में मेरी तस्वीरों को नैनीताल राजभवन सहित विभिन्न प्रदर्शनियों में प्रस्तुत किया गया, तथा उत्तराखंड की राज्यपाल श्रीमती मार्गरेट अलवा द्वारा सम्मानित किया गया है। कुछ चित्रों को राष्ट्रीय-अंतर्राष्ट्रीय पुरस्कार भी प्राप्त हो चुके हैं। गूगल अर्थ पर चित्र उपलब्ध कराने वाली पैनोरामियो साइट पर मेरी प्रोफाइल को 18.85 Lacs से भी अधिक हिट्स प्राप्त हैं।पत्रकारिता और फोटोग्राफी के अलावा मुझे कवितायेँ लिखना पसंद है। काव्य क्षेत्र में मैंने नवीन जोशी “नवेन्दु” के रूप में अपनी पहचान बनाई है। मैंने बहुत सी कुमाउनी कवितायेँ लिखी हैं, कुमाउनी भाषा में मेरा काव्य संकलन उघड़ी आंखोंक स्वींड़ प्रकाशित हो चुका है, जो कि पुस्तक के के साथ ही डिजिटल (PDF) फार्मेट पर भी उपलब्ध होने वाली कुमाउनी की पहली पुस्तक है। मेरी यह पुस्तक गूगल एप्स पर भी उपलब्ध है। ’ यहां है एक पत्रकार, लेखक, कवि एवं छाया चित्रकार के रूप में मेरी रचनात्मकता, लेख, आलेख, छायाचित्र, कविताएं, हिंदी-कुमाउनी के ब्लॉग आदि कार्यों का पूरा समग्र। मेरी कोशिश है कि यहां नैनीताल, कुमाऊं, उत्तराखंड और वृहद संदर्भ में देश की विरासत, संस्कृति, इतिहास और वर्तमान को समग्र रूप में संग्रहीत करने की….। मेरे दिल में बसता है, मेरा नैनीताल, मेरा कुमाऊं और मेरा उत्तराखंड

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