News

इसे कहते हैं साम्प्रदायिक सौहार्द की मिसाल, दो हिंदू बहनों ने ईद पर मुस्लिम भाइयों को दी डेढ़ करोड़ रुपए की ‘ईदी’…

समाचार को यहाँ क्लिक करके सुन भी सकते हैं

सरोज रस्तोगी और अनीता रस्तोगीनवीन समाचार, काशीपुर, 2 मई 2022। देश में फैले धार्मिक उन्माद, पत्थरबाजी के बीच उत्तराखंड के काशीपुर में दो हिंदू बहनों ने सांप्रदायिक सौहार्द की मिसाल पेश कर मुस्लिम भाइयों को ईद का बड़ा तोहफा देते हुए एक उदाहरण पेश किया है। कई बार एक धर्म के लोगों के द्वारा दूसरे धर्म के लोगों से संबंधित व्यवसाय किए जाने या आपस में विवाह कर लेने या कोई दोस्ताना संबंध बना लेने को भी साम्प्रदायिक सौहार्द कहने वाले लोगों के लिए भी यह साम्प्रदायिक सौहार्द का एक वास्तविक व अनुकरणीय उदाहरण है।

यहाँ दो विवाहित हिन्दू बहनों ने अपने पारिवारिक सदस्यों की मौजूदगी में अपने दिवंगत पिता की इच्छा के अनुरूप अपनी करीब चार बीघा जमीन का कब्जा ईदगाह के विस्तारीकरण के लिए ईदगाह कमेटी को दान में दे दिया है। इसके बाद कमेटी ने बुनियाद खुदवाकर चारदीवारी का काम भी शुरू कर दिया है। दान की गई जमीन का बाजार भाव डेढ़ करोड़ रुपये से अधिक आंका गया है।

बताया गया है कि काशीपुर के ईदगाह मैदान के पास लाला ब्रजनंदन प्रसाद रस्तोगी के परिवार की कृषि जमीन है। इस जमीन पर खाता संख्या 827 (1) व (2) का करीब चार बीघा रकबा ईदगाह की बाउंड्री से सटा हुआ है। इस हिस्से को शामिल करने की स्थिति में ईदगाह का स्वरूप आयताकार हो जाता है। ब्रजनंदन के ईदगाह कमेटी के ओहदेदारानों से करीबी ताल्लुकात थे। वह हर साल ईदगाह के लिए चंदा देते थे। अन्य माध्यमों से भी ईदगाह कमेटी की मदद करते थे।

ब्रजनंदन इस जमीन को भी ईदगाह के लिए दान करने के इच्छुक थे, लेकिन यह रकबा उनकी दोनों बेटियों सरोज रस्तोगी और अनीता रस्तोगी के नाम पर था। बेटियों के शादीशुदा होने की वजह से वह चाहकर भी जमीन ईदगाह को देने के बारे में नहीं कह सके थे। हालांकि उन्होंने अपनी इस मंशा का जिक्र पूर्व सांसद सत्येंद्र चंद्र गुड़िया से किया था। ब्रजनंदन प्रसाद रस्तोगी 25 जनवरी 2003 को ब्रजनंदन रस्तोगी का निधन हो गया। उनके निधन के बाद यह मामला ठंडे बस्ते में चला गया।

बाद में मेरठ व दिल्ली रहने वाली बेटियों सरोज रस्तोगी और अनीता रस्तोगी को पिता की इच्छा के बारे में जानकारी हुई तो उन्होंने जमीन दान करने की ठानी। भाई राकेश रस्तोगी की मदद से कमेटी के सदर हसीन खान से संपर्क कर ईदगाह से सटी जमीन दान करने की इच्छा जताई। दोनों बहनों की सहमति पर सरोज के पति सुरेंद्रवीर रस्तोगी और बेटे विश्ववीर रस्तोगी के साथ ही अनीता के बेटे अभिषेक रस्तोगी रविवार को काशीपुर पहुंचे, और समाजसेवी पुष्ष अग्रवाल, राकेश रस्तोगी, ईदगाह के सदर हसीन खान की मौजूदगी में हलका लेखपाल को बुलाकर जमीन की पैमाइश कराई गई और ईदगाह से सटी जमीन पर कमेटी को कब्जा दे दिया गया। दोनों बहनों के परिजनों ने कहा कि उन्होंने दिवंगत ब्रजनंदन रस्तोगी की इच्छा का सम्मान किया है।

इस पर ईदगाह कमेटी के सदर हसीन खान ने कहा कि काशीपुर शहर कौमी एकता की मिसाल हैं। यहां हर पर्व मिलजुल कर मनाने की परंपरा है। हमारी बहनों सरोज रस्तोगी और अनीता रस्तोगी ने ईदगाह के विस्तार के लिए चार बीघा जगह दी है जो ईदगाह की बाउंड्री से पश्चिम की ओर जाने वाले रास्ते तक है। मैं पूरी कौम की ओर से उनका तहेदिल से शुक्रिया अदा करता हूं और उम्मीद करता हूं कि आगे भी सभी धर्मों के लोग एक-दूसरे के सुख-दुख में साथ रहेंगे। आज के अन्य ताजा ‘नवीन समाचार’ पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें।

यह भी पढ़ें : नैनीताल: संगीतमय कृष्ण भागवत कथा में उमड़े श्रद्धालु

डॉ. नवीन जोशी @ नवीन समाचार, नैनीताल, 1 मई 2022। नव साँस्कृतिक सत्संग समिति द्वारा शेर का डांडा नैनीताल में आयोजित श्रीमद् भागवत में पंचम दिवस पर व्यास नमन कृष्ण द्वारा रविवार को विश्व शांति हेतु स्नेह पूर्ण व्यवहार पर कथा वाचन करते हुए कहा कि मनुष्य ही नहीं बल्कि पशु भी स्नेह की भाषा समझते हैं। व्यक्तिगत जीवन में स्नेह सिंचित व्यवहार आत्मोन्नति के लिए जरूरी है। उन्होंने विभिन्न आध्यात्मिक कथाओं के माध्यम से व्यक्तित्व के परिष्कार की बात भी कही।

सत्रह यजमानों-खुशहाल रावत, लक्ष्मण बिष्ट, कैलाश जोशी, मोहन जोशी, विपिन पंत, दीपक जोशी, विनोद सनवाल, दिनेश पांडे, कमल बिष्ट, कंचन चंदोला, गोपाल बोरा, हिमांशु भट्ट, दीपक पांडे, चंद्र शेखर जोशी, राजेश जोशी, ललित मोहन पांडे व इंद्र सिंह रावत के यजमानत्व में हुए पूजन अर्चन में मनोज पांडे, बिशन मेहता, केदार सिंह, घनानंद भट्ट, उमेश सनवाल, ध्यान सिंह, राजेश पांडे, प्रकाश पांडे, हिमांशु पांडे, हरीश जोशी, नीरज डालाकोटी, दिव्यांशु रावत, रोहित, राहुल, गौरव, विक्की आदि ने योगदान सहित अनेक गणमान्य जनों की उपस्थिति रही। अन्य नवीन समाचार पढ़ने के लिये यहाँ क्लिक करें।

यह भी पढ़ें : धर्म-आस्था : नैनीताल में बंगाली-कुमाउनी संस्कृतियां हुईं एकाकार

-65वां दुर्गा महोत्सव शुरू

डॉ. नवीन जोशी, नवीन समाचार, नैनीताल, 10 अक्टूबर 2021। सर्वजनिन दुर्गा पूजा कमेटी के तत्वावधान में सोमवार से 65वां पांच दिवसीय दुर्गा महोत्सव शुरू हो गया। महोत्सव की शुरुआत सुबह नयना देवी परिसर में कलश यात्रा के साथ हुई। कलश यात्रा में बंगाली और कुमाउनी संस्कृतियां एकाकार होती दिखीं। कलश यात्रा में माता के स्वरूप में शामिल बालिका और बंगाली ढोलों को बजाते वादक हमेशा की तरह आकर्षण का केंद्र रहे।

इस दौरान पंडित तपन चटर्जी द्वारा अखंड ज्योति प्रज्जवलित करने के उपरांत कलश यात्रा शुरू की गई। नव दुर्गा रूपी नौ कलश सात पवित्र स्थानों का जल एकत्रित कर माता नयना देवी मंदिर की परिक्रमा की गई। कलश यात्रा के उपरांत महिलाओं द्वारा माँ के भजन इत्यादि किये गए। आगे शाम 7 बजे बेलवृक्ष की पूजा, शष्टी पूजा, स्थापना एवं अधिवास श्री चटर्जी एवं उनके सहयोगी देवाशीष चक्रवर्ती द्वारा कमेटी के सदस्यों को संकल्प करते हुए की गईं।

इसके उपरांत माता दुर्गा का दरबार चक्षु दान आरती करते हुए श्रद्धालुओं के लिए खोला गया। कलश यात्रा में तृप्ति गुहा मजूमदार, नंदी चौधरी, रश्मि अधिकारी, सीमा दास, चित्रा शर्मा, कमलेश शर्मा, डॉली भट्टाचार्य, हेमा नेगी, रचना साह, सरस्वती खेतवाल, सुमन साह, मंजू रौतेला, कुसुमलता सनवाल, रश्मि राणा, सीमा गुरुरानी, चंद्रा पंत, रजनी चौधरी, हीरा सिंह अधिकारी, नीरज पंत, देव सिंह, विकास वर्मा, अक्षय चौधरी, प्रमोद साह सहित अन्य सदस्य शामिल रहे। अन्य नवीन समाचार पढ़ने के लिये यहाँ क्लिक करें। 

यह भी पढ़ें : 20वें स्थापना दिवस पर सांई मंदिर ने दिया एक तोहफा, दूसरा देने का किया वादा, मंदिर में पूरे दिन बही श्रद्धा की रसधार
-गुनगुने पानी के आरओ का भी हुआ शुभारंभ, आगे निःशुल्क कम्प्यूटर प्रशिक्षण कक्षाएं चलाने की तैयारी

मंगलवार को सांई मंदिर के स्थापना दिवस के अवसर पर फूलों से सजे सांई मंदिर में दर्शनों के लिए उमड़े श्रद्धालु।

नवीन समाचार, नैनीताल, 27 अगस्त 2019। नगर के मल्लीताल शेरवानी कंपाउंड स्थित सांई मंदिर का मंगलवार को 20वां स्थापना दिवस धार्मिक हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। बताया गया कि आज के ही दिन यूपी के डीजीपी रहे आईपीएस अधिकारी चंद्रभानु सत्पथी की प्रेरणा से ट्रस्टी विनोद अरोड़ा के द्वारा इस सांई मंदिर की स्थापना की गयी। इस दौरान पूरे दिन चले धार्मिक कार्यक्रमों के साथ ही गुनगुने पानी के आरओ का शुभारंभ किया गया। साथ ही पिछले डेढ़ वर्ष से जरूरतमंदों के लिए चल रहे सांई निःशुल्क कक्षा केंद्र की तर्ज पर अगले चार से छह सप्ताह में निःशुल्क कम्प्यूटर प्रशिक्षण केंद्र चलाये जाने की घोषणा भी की गयी।
इधर स्थापना दिवस पर धार्मिक कार्यक्रमों की शुरुआत सुबह तड़के ही फूलों से बेहद आकर्षक तरीके से सजे सांई बाबा की बैठी हुए संगमरमर की बनी खूबसूरत आदमकद मूर्ति की कांकड़ आरती से हुई। इसके बाद श्री गणेश हवन, दत्तात्रेय व सांई हवन, सांई के महाभिषेक, मंगल आरती, मध्याह्न आरती, दिन से महाभंडारा व अपराह्न से नोएडा के आलोक मिश्रा के साथियों के द्वारा सांई संध्या व शाम को धूप आरती तथा सेज आरती के कार्यक्रम चलते रहे। आयोजन में मंदिर के प्रबंधक डीएन जोशी, मुख्य पुजारी, विपिन जोशी, ललित कांडपाल, हेम जोशी, कमलेश, मीनू बुधलाकोटी, विनय चौहान, भुवन जोशी, नवल पंत, रोहित, देवकी जोशी व मनोज पौंडवाल सहित क्षेत्र के अनेकों सांई भक्त जुटे रहे।

यह भी पढ़ें : सर्वधर्म की नगरी में ईद और सावन के आखिरी सोमवार पर रहा ऐसा धार्मिक हर्षोल्लास…

नवीन समाचार, नैनीताल, 12 अगस्त 2019। सर्वधर्म की नगरी सरोवरनगरी में सोमवार को एक ओर ईद-उल-अजहा तो दूसरी ओर श्रावण मास के आखिरी सोमवार के संगम पर शांति, सौहार्द व हर्षोल्लास का माहौल रहा। नगर में सुबह वर्षा होने के कारण यहां जामा मस्जिद मल्लीताल व तल्लीताल मस्जिद के भीतर अलग-अलग नमाज अदा की गई। सुबह नौ बजे मल्लीताल जामा मस्जिद में इमाम मौलाना मोहम्मद तवरेज व मौलाना अब्दुल खलिक ने, तल्लीताल में 9.30 बजे मौलाना मुहम्मद नईम ने तथा 10 बजे कृष्णापुर मोटापानी इमामबाड़ा में शिया समुदाय के लोगों को मुरादाबाद से आये मौलाना सादाब नकवी ने नमाज अता करवाई। इस दौरान मुल्क में अमन व तरक्की की दुआएं की गई।
नमाज के बाद मुस्लिम भाईयों ने एक दूसरे के गले मिलकर ईद-उल-अजहा की बधाईयां दी। इसके उपरांत घरों व बंद कमरों में बकरों की कुर्बानी दी गई तथा इसके बाद दावतों का दौर शुरू हो गया जो दिन भर चलता रहा। बच्चों ने बाजारों से खरीददारी भी की, और पूरे दिन उत्सव का माहौल रहा। मल्लीताल मस्जिद में नमाज अता करने वाले प्रमुख लोगों में अंजुमन के मोहम्मद फारूक, मोहम्मद हामिद, सुहेल शम्सी, मोहम्मद ताजू तल्लीताल मस्जिद में सदर अकरम शाह, मुज्जफर शाह, अफजल फौजी, अजमल हुसैन, मोहम्मद इकबाल, जाकिर हसन, मोहम्मद तैय्यब, मोहम्मद इजाज, मोहम्मद शाह निक्की, कुरबान अली, बशी कुरैशी, जकी कुरैशी तथा मोटापानी इमामबाड़े में सदर एआर खान अमजद खान, मुस्तफा खान, सरवर खान, गुड्डु खान, अमजद खान, हसन रजा, सादिक रजा खान, फरमान खान, एमए खान, रमजानी खान, रजब खान, मुज्जफर अली, मंजूर हुसैन, खालिद खान, एहसान खान, गुलाम खान सहित सैकड़ों नमाजी शामिल रहे। इस दौरान मल्लीताल मस्जिद में मौजूद एसडीएम विनोद कुमार, सीओ विजय थापा, तहसीलदार भगवान सिंह चौहान, कोतवाल सिंह अशोक कुमार, एसएसआई बीसी मासीवाल, पटवारी अमित साह ने भी नमाजियों को ईद-उल-अजहा की बधाईयां दी।

श्रावण मास के अंतिम सोमवार को मंदिरों में पूरे दिन हुआ जल व दुग्ध से रुद्राभिषेक

नयना देवी मंदिर में शिव लिंग पर दुग्धाभिषेक करते श्रद्धालु।

नैनीताल। श्रावण मास के अंतिम व चौथे सोमवार को नयना देवी मंदिर में शिवलिंग पर भक्तों द्वारा जल एवं दुग्धाभिषेक कर महादेव शिव की पूजा अर्चना की गयी। मंदिर में सुबह से ही नगर के श्रद्धालुओं के साथ ही काफी संख्या में सैलानी भी पूजा अर्चना के लिए मंदिर पहुंचे। श्रद्धालुओं के द्वारा शिवलिंग में जलाभिषेक व दुग्धाभिषेक तथा पूजा पाठ कर अपनी मनोकामना की प्रार्थना की गयी। इसके अलावा पाषाण देवी मंदिर, गुफा महादेव, क्वालिटी बोट स्टेंड, गोलू मंदिर, शनि मंदिर सहित वैष्णों देवी मंदिर में भी लोगों ने पूजा अर्चना की गयी। नगर के आसपास के क्षेत्रों में भी मंदिरों में लोगों नीे पूजा अर्चना कर पुण्य अर्जित किया। ईद के त्योहार का अवकाश होने के चलते निकटवर्ती घोड़ाखाल गोलज्यू मंदिर में भी काफी संख्या में भक्त पूजा-अर्चना के लिए पहुंचे।

यह भी पढ़ें : क्या आपको पता है नैनीताल के एक शिवालय में है शिवलिंग युक्त नंदी, नैनी झील से मिला था…

-मंदिर में सर्व धर्म के, हिंदुओं के साथ ही मुस्लिम एवं सिख धर्म के लोग भी करते हैं सेवा

शिवलिंग युक्त नंदी

नवीन समाचार, नैनीताल, 22 जुलाई 2019। जी हां, नैनीताल में जन्म से रहने वाले भी कम ही लोगों को पता होगा कि नगर में एक ऐसा शिवालय है, जहां बनाया हुआ नहीं, बल्कि नैनी झील से मिला एक ऐसा भगवान शिव का वाहन माना जाने वाला ‘नंदी’ स्थित है, जिसकी पीठ पर एक शिव लिंग एवं पुष्प या चक्र जैसी आकृति दिखती है। साथ ही मंदिर में हिंदुओं के साथ ही मुस्लिम एवं सिख धर्म के लोग भी सेवा करते हैं।
हम बात कर रहे हैं नगर के माल रोड पर क्वालिटी बोट स्टेंड स्थित शिवालय के। करीब 16-17 पूर्व नगर के सर्वधर्म के नाविकों द्वारा स्थापित इस शिवालय के बारे में कुछ खास बातें आपको इस सावन के पवित्र माह में यहां जाने को प्रेरित कर सकती हैं। शिवालय के बाहर एक काले पत्थर की नंदी की मूर्ति दिखती है। मंदिर के सेवादार नवीन चंद्र जोशी ने बताया कि यह मूर्ति नाविकों को माल रोड पर पुस्तकालय के पास नैनी झील में मिली थी। इसे यहां स्थापित किया गया है। साथ ही नैनी झील से ही एक पत्थर को उठाकर यहां शिवलिंग के रूप में स्थापित किया गया है। मंदिर की स्थापना की कहानी भी रोचक है। बताया गया है कि इस स्थान पर पूर्व में काफी संख्या में सांप होते थे। कई बार नाविक एवं सैलानी इन सांपो की वजह से असहज होते थे व डरते थे। इसलिए नाविकों ने ही मिलकर इस शिवालय की स्थापना की। तब से यहां सांपों का दिखना बंद हो गया है। शिवालय के सेवादारों में पूरन बोरा, नवीन जोशी, बबलू बोरा, मनोज कुमार, कैलाश पंवार, इंदर रावत, लखन रावत व जगदीश आर्य के साथ ही नूर खान, भूरे खान व आशु खान आदि मुस्लिम धर्मानुयायी भी शामिल हैं, जो मूलतः नाविक हैं, और खासकर इस शिवालय में हर वर्ष सावन माह के पहले सोमवार को आयोजित होने वाले भंडारे में पूरे मनोयोग से जुटते हैं। भूरे खान के बारे में बताया गया कि इस शिवालय के बनने से पूर्व इस स्थान पर एक सांप उनके ऊपर भी चढ़ गया था। इसलिए सभी की इस शिवालय के प्रति अगाध आस्था है। इस सोमवार यहां विशेष रुद्राभिषेक, हवन यज्ञ, सुंदरकांड एवं भंडारे का आयोजन गंगा सिंह चिलवाल व शिवराज नेगी के सपत्नीक यजमानत्व में पंडित जगदीश कांडपाल द्वारा आयोजित करवाया गया।

धर्म-आस्था से संबंधित अन्य समाचारों के लिए यहां या यहां क्लिक करें।

Leave a Reply