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वन विभाग ने पकड़ी एक लाख की लकड़ी..

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शाकिर हुसैन @ नवीन समाचार, कालाढूंगी, 8 अक्टूबर 2020। वन विभाग की टीम ने खैर की अवैध लकड़ी ले जाते हुए एक टाटा 407 वाहन को पकड़ लिया है। अपने आपको वन कर्मियों के घेराव में देख खैर तस्कर वाहन को छोड़ मौके का फायदा उठा कर फरार हो गए। मामला पीपलपड़ाव रेंज का है।
वन क्षेत्राधिकारी पीपलपड़ाव रूप नारायण गौतम ने बताया कि वन विभाग की गश्ती टीम को सूचना मिली कि खैर से लदा एक वाहन निकलने वाला है। इस सूचना पर वन क्षेत्राधिकारी गौतम व वन कर्मियों ने हरीपुरा जलाशय के पास अपना जाल फैला दिया। तभी एक वाहन यूपी 22एटी-4676 को वन विभाग की टीम ने रोकने का प्रयास किया तो उसके चालक ने अपने वाहन को तेज दौड़ा कर जलाशय के पास खड़ा किया और गाड़ी से कूद कर फरार हो गया। वन कर्मचारियों ने जब वाहन की तलाशी ली तो उसमें 30 गिल्टे अवैध रूप से खैर के बरामद हुए वन कर्मचारीयों ने वाहन को रेंज परिसर में खड़ा कर भारतीय वन अधिनियम के तहत मामला दर्ज कर फरार लकड़ी तस्करों की तलाश शुरू कर दी है। आरओ गौतम के अनुसार बरामद लकड़ी की कीमत करीब एक लाख रुपए आंकी गई है।

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नवीन समाचार, भवाली, 05 अगस्त 2020। भवाली नगर के पर्यावरण प्रेमी गणेश गयाल की बुधवार को धरना-प्रदर्शन की धमकी के बाद वन विभाग ने एक भाजपा नेता का 25 हजार रुपए का चालान कर दिया है। इसके साथ ही गयाल ने वन क्षेत्राधिकारी से वार्ता के बाद अपना धरना स्थगित कर दिया है।
उल्लेखनीय है कि गयाल ने भवाली नगर पालिका द्वारा समर हाउस में बाँज प्रजाति के वृक्ष को एक दुकान की चहारदीवारी व छत में चिनने का आरोप लगाया था। गयाल ने बताया कि इस पर बुधवार को धरने से पहले वन विभाग ने नगर पालिका के ठेकेदार एवं निवर्तमान भाजपा मंडल अध्यक्ष मुकेश गुरूरानी निवासी दुगई स्टेट भवाली के नाम से वन संपदा को नुकसान पहुंचाने पर भारतीय वन अधिनियम की धारा नगर पालिका बाईलौज 1916 के तहत दोषी पाते हुए रवन्ना व 25 हजार रूपये का चालान कर दिया है। साथ ही वृक्ष को अतिक्रमण से एक मीटर के घेरे में मुक्त करा दिया गया है। वन विभाग से वार्ता में सामाजिक कार्यकर्ता खजान भट्ट भी मौजूद रहे।

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-वन विभाग की टीम ने बरामद की तस्कारों द्वारा काटी 50 हजार की सागौन की लकड़ी व पांच मोटरसाइकिलें
नवीन समाचार, कालाढूंगी, नैनीताल, 23 जुलाई 2020। वन विभाग की टीम ने बृहस्पतिवार को बहुमूल्य सागौन की लकड़ियों के अवैध कटान का भंडाफोड़ किया है। मामले में टीम के हाथ तस्कर तो नहीं लगे, अलबत्ता काटे गए सागौन के दो पेड़ों के पांच लट्ठे एवं तस्करों की 5 मोटरसाइकिलें पकड़ने में सफलता पा ली। लकड़ी तस्कर भागने में कामयाब रहे। तस्करों की मोटर साइकिलों को सीज कर उनके खिलाफ वन अधिनियम के तहत मुकदमा दर्ज कर लिया गया है और उनकी तलाश की जा रही है। पकड़ी गई लकड़ी की कीमत लगभग 50 हजार बताई जा रही है। इस मामले में दिलचस्प बात यह है कि वन तस्कर अपनी मोटरसाइकिलें छोड़ने के बावजूद भी वन कर्मियों के हाथों नहीं पाए। और यह भी कि वे मोटरसाइकिलों पर इतने विशाल सागौन के पेड़ों को लेने आए थे।
प्राप्त जानकारी के अनुसार तराई वन प्रभाग रुद्रपुर की बरहैनी रेंज के वन क्षेत्र अधिकारी रूप नरायण गौतम ने बताया कि उनके नेतृत्व में वन विभाग की टीम ने मुखबिर की सूचना पर गुरुवार को बरहैनी प्लाट संख्या 52 से वन तस्करों द्वारा काटे गए दो सागौन के पेड़ों के पांच हिस्से बरामद किये। फरार वन तस्करों की पहचान राजू सिंह पुत्र बूढ़ा सिंह, कुलदीप सिंह पुत्र पामी सिंह निवासी ग्राम थाना नगला, बिंदा सिंह पुत्र काला सिंह, सुनील सिंह पुत्र गुरनाम सिंह, बीड़ू़ सिंह पुत्र करनैल सिंह, राजू सिंह पुत्र अज्ञात आदि के रूप में हुई है। कार्रवाई में वन दरोगा लक्ष्मी दत्त जोशी, मोहन चन्द्र, राजेन्द्र प्रसाद, हरीश सिंह, लक्ष्मण सिंह जीना, दीपक नेगी, महेंद्र सिंह, नीरज रौतेला व विजेंदर बाबू आदी शामिल रहे।

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-डीएम के प्रयासों से जनपद की सभी वन पंचायतों में हुए चुनाव, वन पंचायतें हुईं सक्रिय, आयोजित हुई सरपंचों के लिए कार्यशाला, भेंट किया गया 17 लाख का चेक

नवीन समाचार, भवाली (नैनीताल), 13 फरवरी 2020। वन एवं वन्य जीवों तथा पर्यावरण के प्रति बेहद संजीदा डीएम सविन बंसल की सक्रियता एवं तत्परता से जनपद में शत-प्रतिशत वन पंचायतों में वन सरपंचों के चुनाव कराने के बाद वन सरपंचों को उनके अधिकार, कर्त्तव्य, दायित्वों एवं वित्तीय जानकारियां देने हेतु बुद्धवार को जिलाधिकारी की अध्यक्षता में कंट्री इन भीमताल में बृहद अभिमुखी कार्यशाला का आयोजन किया। कार्यशाला का शुभारंभ डीएम बंसल तथा वन पंचायत सलाहकार परिषद के अध्यक्ष वीरेंद्र बिष्ट व डीएफओ बीजुलाल टीआर ने संयुक्त रूप से दीप जलाकर किया। कार्यशाला में 30 वन पंचायतों के सरपंचों को 17 लाख रुपये की लीसा रॉयल्टी से प्राप्त धनराशि के चेक वितरित किये गये।
कार्यशाला को सम्बोधित करते हुए वन पंचायत सलाहकार परिषद के अध्यक्ष दर्जा राज्य मंत्री वीरेंद्र बिष्ट कहा कि विगत दस वर्षों से निष्क्रिय पड़ी वन पंचायतों को डीएम सविन बंसल के प्रयासों से सक्रिय किया गया है। इस हेतु उन्होंने डीएम बंसल को बधाई दी, साथ ही कहा कि नैनीताल की ही तर्ज पर प्रदेश के सभी जनपदों में ऐसी ही कार्यशालाऐं आयोजित की जायेंगी व जनपद के मॉडल को भी अपनाया जायेगा। इस कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य नव निर्वाचित वन सरपंचों को उनके कार्यो, दायित्वों के साथ ही वित्तीय प्रबन्धन एवं वन पंचायत के नियमों एवं अधिनियमों से भिज्ञ कराना है ताकि सभी सरपंच सक्रियता से कार्य कर अपनी वन पंचायतों को सक्रिय एवं सुदृढ़ कर सके। उन्होंने कहा कि वन पंचायतों के संरक्षण एवं सुदृढ़ीकरण के साथ ही वनाग्नि सुरक्षा का दायित्व भी वन सरपंचांे का होता है। उन्होंने कहा कि सरपंच अपने गाड़-गधेरों को पुनर्जीवीकरण के साथ ही उनमें सुंदर स्थानों अथवा झरनों को भी चिन्हित करें ताकि उनको पर्यटन की दृष्टि से विकसित कर आय का नियमित स्रोत बनाया जा सके, जिससे पलायन पर भी रोक लगाने में भी मदद मिल सके। उन्होंने कहा कि रेंज अधिकारी प्रत्येक छः माह में वन पंचायतों के साथ अनिवार्य रूप से बैठकें करना सुनिश्चित करें। श्री बंसल ने कहा कि जनपद के ग्रामीण एवं दुर्गम इलाकों में 485 वन सरपंचो एवं समिति का गठन होने से जनहित की योजनाओं को धरातल पर लाने एवं आम जनमानस को जन कल्याणकारी योजनाओं का लाभ दिलाने में भी मदद मिलेगी तथा योजनाओं के धरातलीय क्रियान्वयन करने के लिए वन पंचायत समितियों के लगभग 4500 पदाधिकारी सदस्यों का सहयोग लिया जायेगा। उन्होंने कहा कि वन और वन पंचायतें जीव-जन्तुओं, जैव विविधता एवं पारिस्थितिकी संतुलन के साथ ही हमें शुद्ध हवा व जल उपलब्ध कराते हैं। वन पंचायते कार्यदायी संस्था के रूप में सांसद व विधायक निधि आदि से भी अपनी पंचायतों में भी विकास कार्य करा सकते हैं।
कार्यशाला में विषय विशेषज्ञ डॉ. डीके जोशी ने वन पंचायतों की आवश्यकता एवं इतिहास के बारे में, डॉ.राजेन्द्र सिंह ने वन पंचायतों द्वारा तैयार किये जाने वाले माईक्रो प्लान, जायका एवं कैम्पा से किये जाने वाले कार्यों, वन पंचायतों के सीमांकन व अभिलेखों के बारे में तथा डीएफओ दिनकर तिवारी ने उत्तराखण्ड पंचायती वन नियमावली, पंचायतों के वित्तीय अधिकारों आदि के बारे में विस्तार से जानकारी दी। इसके साथ ही एसडीएम गौरव चटवाल ने वन पंचायतों एवं क्षेत्रीय परामर्शदात्री समितियों के गठन के बारे में, अध्यक्ष क्षेत्रीय परामर्शदात्री समिति प्रदीप कुमार पंत ने वन पंचायतों के विस्तार के बारे, सीडीपीओ रेनू यादव ने बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओं, तूलिका जोशी ने महिलाओं में पोषण के बारे में विस्तार से जानकारी दी। कार्यक्रम का संचालन एआरटीओ विमल पांडे ने किया। कार्यशाला में डीएफओ दिनकर तिवारी, एसडीएम विनोद कुमार, अनुराग आर्य, जिला कार्यक्रम अधिकारी अनुलेखा बिष्ट सहित वन सरपंच मौजूद रहे।

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-नैनीताल चिड़ियाघर में दिया जा रहा है सभी पर्वतीय प्रभागों के दो-दो कर्मियों को ड्रोन उड़ाने का प्रशिक्षण

बुधवार को नैनीताल चिड़ियाघर में कुमाऊं मंडल के सभी वन प्रभागों के चयनित कर्मियों को ड्रोन उड़ाने का प्रशिक्षण देते प्रशिक्षक।

नवीन समाचार, नैनीताल, 22 जनवरी 2020। उत्तराखंड के कुमाऊं मंडल के वनों में वनाग्नि, वन्य जीव संघर्ष एवं मानव-वन्य जीव संघर्ष, वनों के अवैध पातन एवं वन्य जीवों के शिकार आदि पर उड़ते ड्रोन के जरिये हाईटेक तरीके से नजर रखी जाएगी। इस हेतु पहले चरण सभी पर्वतीय वन प्रभागों में ड्रोन खरीदे जा रहे हैं तथा इनके दो-दो चयनित कर्मचारियों को ड्रोन उड़ाने का पांच दिवसीय मुख्यालय स्थित नैनीताल जू यानी गोविंद बल्लभ पंत उच्च स्थलीय प्राणि उद्यान में प्रशिक्षण दिया जा रहा है।

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प्रदेश के मुख्य वन संरक्षक एवं उत्तराखंड ड्रोन फोर्स के समन्वयक डा. पराग मधुकर धकाते के निर्देशन में चल रहे प्रशिक्षण के तहत बुधवार को नैनीताल चिड़ियाघर में मुख्य प्रशिक्षक अतुल भगत एवं ड्रोन उपलब्ध कराने वाली कंपनी-ड्रोनीटेक के करुण कुमार के द्वारा नैनीताल, अल्मोड़ा, बागेश्वर, पिथौरागढ़ व चंपावत वन प्रभाग के दो-दो यानी कुल 10 कर्मियों को ड्रोन को उड़ाने एवं इसके जरिये वनों से संबंधित अपेक्षित जानकारियां प्राप्त करने का प्रशिक्षण दिया गया। आगे बताया गया कि ये कर्मी अपने वन प्रभागों में ड्रोन संचालित कर पाएंगे तथा अगले चरण में अपने वन प्रभागों के अंतर्गत आने वाले वन रेंजों के दो-दो चयनित कर्मियों को भी ड्रोन चलाने का प्रशिक्षण देंगे। इसके बाद ड्रोन के माध्यम से वनों में वनाग्नि लगने, वन्य जीवों के आपस में एवं मानव के साथ होने वाले संघर्ष, वन्य जीवों एवं शिकारियों की सक्रियता आदि वनों में होने वाली सभी तरह की गतिविधियों पर ड्रोन में मौजूद कैमरों से नजर रखी जाएगी। बताया गया कि मैदानी क्षेत्रों के वन प्रभागों में पहले ही इस तरह का ड्रोन संचालन का प्रशिक्षण चयनित कर्मियों को पहले ही दिया जा चुका है।

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नवीन समाचार, गूलरभोज (ऊधमसिंह नगर), 7 दिसंबर 2019। वनकर्मियों ने तस्कर समझ कर पांचवीं कक्षा के छात्र दीपू सिंह सहित उसके भाई पर शुक्रवार रात फायरिंग कर दी। गोली दीपू की जांघ को चीरती हुई पार निकल गई। उसे गंभीर हालत में एसटीएच हल्द्वानी में भर्ती कराया गया, जहां उसकी हालत नाजुक बनी हुई है। हमले से गुस्साए परिजनों और ग्रामीणों ने गुलरभोज चौकी पर पहुंच प्रदर्शन किया। मामला बढ़ता देख देर रात एसओ गदरपुर और एएसपी ने चौकी पहुंचकर दो वनकर्मियों व दो अज्ञात के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया है। इसके बाद लोग शांत हुए।

प्राप्त जानकारी के अनुसार हरिपुरा जलाशय के कटपुलिया गांव निवासी गुरमीत सिंह का बड़ा बेटा हरजीत एक विवाह समारोह में गया था। देर रात वह घर लौट रहा था। कटघाट पहुंचा तो पार जाने के लिए नाव दूसरे छोर पर थी। फोन कर उसने कक्षा पांच में पढने वाले छोटे भाई दीपू सिंह को बुला लिया। दीपू उसे लेकर जैसे ही नाव से उतरा, अचानक दूसरे छोर से वनकर्मियों ने फायरिंग शुरू कर दी। एक गोली दीपू की जांघ के पार निकल गई। यह देख हरजीत ने शोर मचाना शुरू कर दिया। कुछ देर में घटनास्थल पर ग्रामीणों का हुजूम उमड़ पड़ा। गुस्साए ग्रामीण और परिजन दीपू को लेकर देर रात पुलिस चौकी पहुंच गए। प्रदर्शन के साथ विरोध बढ़ता जा रहा था, सूचना पर पहुंचे एएसपी डॉ.जगदीश चंद्रा व एसओ गदरपुर ललित बिष्ट ने किसी तरह ग्रामीणों को शांत कराया। दीपू के पिता की तहरीर पर आरोपित वनकर्मी मोहनदत्त शर्मा, राजू डोगरा व दो अज्ञात के खिलाफ धारा 307 के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है।
वनकर्मियों ने भी फायरिंग का लगाया आरोप
मामले में वनकर्मी इमरान खां ने भी अज्ञात लोगों के खिलाफ फायरिंग की तहरीर दी। उन्होंने बताया कि लकड़ी तस्करी में विफल रहने पर कुछ लोगों ने फायरिंग की थी, जिसके जवाब में उन्हें भी फायरिंग करनी पड़ी। उप प्रभागीय वनाधिकारी यूसी तिवारी ने बताया कि कटपुलिया और ककराला गांव लकड़ी तस्करी के लिए कुख्यात है। यहां से रोजाना तस्करी के मामले सामने आ रहे हैं। शुक्रवार रात तस्करों और वनकर्मियों के बीच क्रॉस फायरिंग में छात्र को गोली लगने की जांच की जाएगी।

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-पुलिस ने पिकप व वाहन चालक को किया गिरफ्तार, वन विभाग की कार्यशैली पर भी उठ रहे सवाल
दान सिंह लोधियाल @ नवीन समाचार, धानाचूली, 22 नवंबर 2019। जनपद की थाना मुक्तेश्वर ने गहना के जंगलों से तस्करी कर ले जाये जा रहे अवैध लीसे के टिनो के जखीरे को वाहन एवं वाहन चालक सहित चेकिंग के दौरान पकड़ा है। आरोपित वाहन चालक के खिलाफ वन अधिनियम के तहत मुकदमा दर्ज कर आगे की कार्यवाही शुरू कर दी है। मामले में वन विभाग की कार्यशैली पर भी सवाल उठ रहे हैं।

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पुलिस से प्राप्त जानकारी के अनुसरा मुक्तेश्वर के थानाध्यक्ष कुलदीप सिंह के नेतृत्व में धानाचूली बैंड के पास चेकिंग अभियान चलाया जा रहा था। इसी दौरान गहना पोखरी से आ रही पिकप संख्या यूके04सीए-1866 को रोकने पर उसमें 140 टिन लीसा पाया गया। वाहन चालक इस लीसे के कागजात मागने पर पुराने कागज दिखाने लगा। वैध कागजात नही दिखा पाने पर वाहन चालक गिरीश चंद्र पुत्र माधोराम निवासी अर्नपा, तहसील धारी को पिकप सहित गिरफ्तार कर लिया गया। एसओ सिह ने बताया लीसे के वैध कागजात नही दिखा पाने पर आगे की जाँच की जा रही है। वही रेंजर उत्तरी गौला पीके आर्या का कहना है यह वैध लीसा है जो जंगल से पहाड़पानी लीसा डिपो को ले जाया जा रहा था। यह पूछे जाने पर कि आज की तिथि का रवन्ना क्यों नही दिया गया तो उनका ढुलमुल जबाब आया। इससे वन विभाग की कार्यशैली पर भी सवाल उठ रहे हैं। पुलिस कार्रवाई में पुलिस आरक्षी त्रिलोक, देवीदत्त पांडे, नरेश परिहार और सुरेंद्र कुमार आदि भी शामिल रहे।

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-पहली बार डीएम के हाथों पुरस्कृत हुए वन्य प्राणी सप्ताह की प्रतियोगिताओं के विजेता

वन्य प्राणी सप्ताह के दौरान हुई प्रतियोगिताओं के विजेताओं को सम्मानित करते डीएम सविन बंसल।

नवीन समाचार, नैनीताल, 14 नवंबर 2019। बाल दिवस के अवसर पर नैनीताल चिड़ियाघर में गत दिनों वन्य प्राणी सप्ताह के अंर्तगत आयोजित प्रतियोगिताओं में विजयी रहे प्रतिभागियों को पहली बार डीएम के हाथों पुरस्कृत किया गया। इस मौके पर डीएम सविन बंसल ने नगर के मोहन लाल साह बाल विद्या मंदिर, को प्रथम, भारतीय शहीद सैनिक विद्यालय को द्वितीय व विशप शॉ इंटर कॉलेज को तृतीय, सेंट स्टीफन स्कूल, सैन्ट जौन्स स्कूल, सरस्वती विद्या मन्दिर, ऑल सेन्टस कॉलेज व राष्ट्रीय शहीद सैनिक स्मारक विद्यापीठ, को सांत्वना पुरस्कार तथा कुंदन लाल साह कन्या इंटर कालेज ऐशडल, संेट जेवियर स्कूल, लौंगव्यू पब्लिक स्कूल, वसंत वैली पब्लिक स्कूल तथा राधा चिल्ड्रन एकेडमी, को प्रतिभाग पुरस्कार प्रदान किये। निदेशक ने ऑल सेंटस कॉलेज व राष्ट्रीय शहीद सैनिक स्मारक विद्यापीठ को विशेष पुरस्कार भी प्रदान किये।
इस अवसर पर चिड़ियाघर के निदेशक बीजू लाल टीआर ने जल्द ही चिड़ियाघर प्रशासन में इंटरप्रिटेशन सेंटर व इंटरप्रिटेशन थियेटर शुरू करने तथा डीएम ने बच्चों के लिए कॅरियर प्रोग्राम भी चलाने की बात कही, जिससे बच्चों को वन्य जीवों के संसार में रोजगार की संभावनाओं के बारे में जानकारी दी जा सकेगी। बताया गया कि इंटरप्रिटेशन थियेटर में पृथ्वी और इस पर रहने वाले प्राणियों के विकास, अलग-अलग ऊंचाइयों पर मिलने वाली जीव-जंतुओं एवं पेड़-पौधों की प्रजातियों आदि प्राकृतिक संपदा के बारे में सरल व रोचक तरीके से जानकारियां दी जाएंगी। कार्यक्रम में नगर के 13 विद्यालयों के 65 छात्र ,छात्राऐं एवं शिक्षकगण उपस्थित रहे। संचालन प्राणी उद्यान की वन क्षेत्राधिकारी ममता चन्द ने किया। इस अवसर पर प्रमोद कुमार तिवारी, सोनल पनेरू, खजान चन्द्र मिश्रा, रेखा सुयाल, विक्रम मेहरा, आनंद सिंह व रमेश सिंह चिड़ियाघर के समस्त कर्मचारी भी मौजूद रहे।

यह भी पढ़ें : धारचूला के युवक को वन तस्कर बताकर महिला अधिकारी की अगुवाई में नैनीताल में थर्ड डिग्री टॉर्चर !

नवीन समाचार, नैनीताल, 8 नवंबर 2019। मुख्यालय के पास कुंजखड़क क्षेत्र में धारचूला के एक युवक के साथ, उसे वन तस्कर बताकर वन विभाग की महिला अधिकारी की अगुवाई में वनाधिकारियों व कर्मचारियों पर थर्ड डिग्री जैसा टॉर्चर किये जाने का आरोप लगाया गया है। वहीं वन विभाग के अधिकारी चोटों को पेड़ से गिरने के कारण और युवक को तस्कर बता रहे हैं। अलबत्ता युवक को क्यों छोड़ा गया, इस प्रश्न का कोई जवाब नहीं है।
शुक्रवार को धारचूला निवासी 31 वर्षीय भाष्कर सिंह बुदियाल पुत्र स्वर्गीय पदम सिंह बुदियाल निवासी ग्राम बुदि तहसील धारचूला जिला पिथौरागढ़ ने मल्लीताल कोतवाली के पास पट्टी पटवारी सौड़ के नाम लिखा शिकायती पत्र स्थानीय पट्टी पटवारी अमित साह को सोंपा और वन विभाग के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने की मांग की। पत्र में भास्कर ने कहा है कि वह बीती 5 नवंबर को पंगूठ क्षेत्र में घूमने गया था। यहां वन विभाग के एक गेस्ट हाउस नुमा भवन में मौजूद चौकीदार से मौखिक अनुमति लेकर वह जंगल में गया। वहां रास्ता समझ नहीं आने पर जब वह वापस आया तो वन विभाग के कर्मी उसे व उसके वाहन चालक को पकड़कर कुंजाखड़क नामक स्थान पर ले गए। दूसरे दिन वन रेंजर तनूजा परिहार के बाद उस पर तस्करी का आरोप कबूल करने को लेकर उसके साथ बेहोश होने तक बर्बरतापूर्वक मारपीट की गई। रेंजर ने उसके चेहरे की बनावट को लेकर एवं जातिसूचक शब्दों के साथ अभद्र शब्दों का प्रयोग भी किया। इसके बाद उसे तीन दिन बाद सात नवंबर की शाम रिहा किया गया किंतु एक लिखित दस्तावेज में 6 नवंबर को रिहा करना तथा कोई शारीरिक मारपीट व अभद्र व्यवहार न होना लिखकर जबर्दस्त दबाव बनाकर हस्ताक्षर करवाए गऐ। अन्यथा रिहाई न करने की बात कही गई। साथ ही जुर्माने के तौर पर 5000 रुपए लेने परंतु इसकी कोई रसीद न देने का भी आरोप लगाया। इधर युवक द्वारा कराये गए मेडिकल परीक्षण में उसे 30 से 39 घंटे पुरानी कठोर व भोथरी वस्तु से 13 सामान्य प्रवृृत्ति की चोटें लगी होने की बात कही गई है। इधर उसके बांये हाथ की छोटी अंगुली का नाखून उखड़े होने की बात भी कही जा रही है और इसके आधार पर ही उसके साथ थर्ड डिग्री टार्चर किये जाने की बात कही जा रही है।
वहीं इस बारे में पूछे जाने पर डीएफओ बीजू लाल टीआर ने इस अवधि में स्वयं के पंचायत चुनाव की ड्यूटी पर अल्मोड़ा जनपद में होने की जानकारी देने के साथ ही बताया कि आरोपित युवक की धारचूला में फैक्टरी है। उसके खिलाफ लंबे समय से मूर्तियां बनाने के लिए मैपल और ओक के पेड़ों की तस्करी करने की मीडिया एवं स्थानीय लोगों से पुख्ता सूचना थी। इस आधार पर ही उसे पकड़ा गया था। अलबत्ता मातहत अधिकारियों से पूरी जानकारी न मिलने की बात कहते हुए वे उसे तस्कर होने के बावजूद छोड़ दिये जाने के कारण का पता न होने की बात कही। उन्होंने मातहत अधिकारियों से मिली जानकारी के आधार पर चोटों को पेड़ से गिरने के कारण बताया, अलबत्ता मामले की पूरी जांच कराने की बात भी कही।

यह भी पढ़ें : सरोवरनगरी में दीपावली की आढ़ में काट डाले पेड़

भोटिया बैंड के पास जंगल में काटे गए पेड़।

नवीन समाचार, नैनीताल, 29 अक्तूबर 2019। सरोवरनगरी में दीपावली के त्योहार की आढ़ में कुछ लोगों ने वन क्षेत्र से लगे इलाके में पेड काट डाले। साथ ही जमीन को चौरस कर ढलान की ओर मिट्टी के कट्टों की दीवार भी बना डाली। सूचना मिलने पर डीएफओ ने क्षेत्रीय वनाधिकारी एवं वन कर्मियों को मौके पर पहुंचकर निर्माण की तैयारी को हटवाया, और अज्ञात निर्माणकर्ता के खिलाफ जुर्माना भी लगवाया।
नगर के सकिय सामाजिक कार्यकर्ता अरुण कुमार साह ने बताया कि सीआरएसटी स्कूल से ऊपर भोटिया बैंड के पास बड़ी मात्रा में हरे पेड़ काटे गये। उन्होंने इसकी शिकायत डीएफओ बीजू लाल टीआर से की। इस पर डीएफओ ने नगर पालिका रेंज के हीरा सिंह शाही आदि वनाधिकारियों व कर्मियों को मौके पर भिजवाकर कब्जा करने के प्रयास को रोका। काटी गई लकड़ी को सीज किया गया तथा पेड़ काटने वालों के खिलाफ जुर्माना लगाया गया है। श्री शाही ने बताया कि जिस भूमि पर पेड़ काटे गए हैं वह निजी भूमि है। उन्होंने स्वीकारा कि इस पर पद्म, हॉली, बांज व पुतली आदि के पेड़ काटे गए हैं। यहां भूस्वामी के द्वार प्लॉटिंग की जा रही है। लेकिन वन कर्मियों को यह पता नहीं लग पाया कि निर्माण किसके द्वारा किया जा रहा है और पेड़ किसके द्वारा काटे जा रहे है। इसके अज्ञात के खिलाफ चालान की कार्रवाई की जा रही है।

यह भी पढ़ें : तस्करों से मुठभेड़ में एक वन कर्मी शहीद..

ललित मोहन बधानी @ नवीन समाचार, नैनीताल, 22 जून 2019। तराई केंद्रीय वन प्रभाग के बरहैनी रेंज में बौर नदी किनारे खैर तस्करों और वनकर्मियों में शुक्रवार रात्रि सवा दो बजे हुई मुठभेड़ में एक बीट वाचर बहादुर सिंंह चौहान की गोली लगने से मौके पर ही शहीद होने की बेहद दुःखद खबर है।
बताया गया है कि महोली के जंगल में बौर नदी के उत्तर में तसजर खैर के पेड़ काट रहे थे, तभी तस्करों ने ललकारने पहुंची वन विभाग की टीम पर ताबड़तोड़ फायरिंग कर दी। गोलीकांड में एक बीट वाचर तस्करों का सामना करते हुए शहीद हो गए, जबकि दूसरा बीट वाचर महेंद्र घायल हो गया। घटना से समूचे वन विभाग में हड़कंप मच गया है। मौके पर 2 बाइक और एक मोबाइल फोन बरामद हुए हैं। उल्लेखनीय है कि प्रदेश के वनों, यहां तक कि नए बन रहे अंतरराष्ट्रीय चिड़ियाघर से खैर और जिम कॉर्बेट के संग्रहालय के पास से चंदन के पेड़ काटे जाने और लापरवाही के चलते अमूल्य और प्रतिबंधित वन संपदा को तस्करों के द्वारा काटे जाने के समाचार लगातार आ रहे हैं। खैर का तस्करी बाजार में ₹6000/-प्रति कुंतल का रेट बताया जाता है। बताया जा रहा है कि उत्तराखंड की अमूल्य वन सम्पदा हरियाणा, यूपी के सुदूर नगरों तक आसानी से पहुंचाई जा रही है।

पूरा मामला:-

वन तस्करों के हौसले इतने बुलंद हो चुके है कि अब वह पेड़ो के साथ साथ वन विभाग के कर्मचारियों पर फायर करने में भी गुरेज नही कर रहे है। ताज़ा मामला तराई केंद्रीय वन प्रभाग के बरहैनी रेंज का है जहाँ पर वन तस्करों ने वन विभाग की टीम पर फायर झोंक दी। जिसमे वचार बहादुर सिंह चौहान की मौके पर ही मौत हो गयी जबकि रोपड़ रक्षक महेंदर सिंह घायल हो गया। मृतक के शव का पंचनामा भर पोस्टमॉर्टम के लिए भेज दिया है जबकि घायल का इलाज अस्पताल में चल रहा है।

आज सुबह सवा दो बजे वन विभाग की टीम को सूचना मिली थी कि कुछ वन तस्कर तराई केंद्रीय वन प्रभाग के बरहैनी रेंज में घुस कर पेड़ो को काट रहे है। हरकत में आई टीम ने वन तस्करों को पकड़ने के लिए जाल बिछाया जैसे ही वन तस्कर वहां पर पहुचे तो वह विभाग की टीम ने तस्करों को घेर लिया। जिसके बाद तस्करों द्वारा वन विभाग की टीम में फायर झोंक दी जिसकी चपेट में आने से वन वचार बहादुर सिंह की मौके पर ही मौत हो गयी जबकि अन्य रोपण रक्षक महेन्दर सिंह घायल हो गया। मौका देख आरोपी वन तस्कर मौके से फरार हो गए। आनन फानन में टीम द्वारा दोनों को अस्पताल ले जाया गया जहाँ पर डॉक्टरों ने बहादुर सिंह को मृत घोषित कर दिया घटना की सूचना पर वन विभाग के अधिकारी भी मौके पर पहुच गए है। वन विभाग के मुताबिक वन तस्कर आधा दर्जन लोग थे जो कि ग्राम थापा नगला थाना केलाखेडा उधम सिंह नगर के रहने वाले है। वन तस्करों में कुछ लोगो को चिह्नित भी किया जा चूका है

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वन पंचायत जुटी जांच में, 15 पेड़ मौके पर बरामद, बाकी मिले कटे ठूंठ

सतबूंगा के जंगलों में कटे बांज व खरशु के पेड़।

दान सिंह लोधियाल @ नवीन समाचार, धानाचूली (नैनीताल), 4 अप्रैल 2019। लोकसभा चुनावों की चहल-पहल के बीच मौके का लाभ उठा कर तस्करों ने बांज और खरसू के करीब तीन दर्जन पेड़ों पर आरी चला दी। शिकायत मिलने पर वन पंचायत ने मौका मुयायना किया तो जंगल मे 15 पेड़ काटे हुए तथा दो दर्जन पेडों के़ के कटे ठूंठ पाये गए। सतबूंगा के सरपंच गंगा सिंह ने बताया कि गांव वालों की सूचना पर वह वन विभाग की टीम के साथ जंगल में गए, जहां पर करीब तीन दर्जन पेड़ काटे मिले। वहीं सरपंच ने बताया कि करीब 15 घरों में जाकर पूछताछ और चेकिंग की गई लेकिन कही कोई सुराग नही मिला। वहीं लोग इस मामले को स्थानीय तस्करों से भी जोड़ कर देख रहे हैं। वही वन पंचायत राजस्व विभाग में रिपोर्ट दर्ज करने का विचार कर रही है।

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-पिकप से लाई जा रही थी अवैध लकड़ी, लकड़ी तस्कर वाहन छोड़ हुए फरार

वन कर्मियों के द्वारा जब्त की गयी इमारती लकड़ी से भरी पिकअप वैन।

दान सिंह लोधियाल @ नवीन समाचार, धानाचूली, नैनीताल, 28 मार्च 2019। जनपद के रामगढ़ विकासखंड के सतखोल में वन विभाग की टीम ने अवैध तरीके से जायी जा रही इमारती लकड़ी से भरी एक पिक-अप वैन को बरामद किया है। अलबत्ता विभागीय कर्मियों को देखकर वाहन चालक वाहन को छोड़कर फरार होने में सफल रहा। वन अधिकारी ने वाहन को अवैध लकड़ी सहित सीज कर वनाधिनियम के तहत कार्यवाही कर उच्चाधिकारियों को सूचित कर दिया है।
उत्तरी वन गोला रेंज के वन क्षेत्राधिकारी ललित मोहन कार्की ने बताया उनकी टीम बृस्पतिवार को गस्त पर थी। इस दौरान सतोली से सतखोल की तरफ आ रही पिकप संख्या यूके04 सीबी-4574 को रोका तो उसमें सवार वाहन चालक व अन्य ने वाहन रोक जंगल की ओर दौड़ लगा दी। वाहन की तलाशी लिए जाने पर अवैध तरीके से तस्करों द्वारा लायी जा रही इमारती लकड़ी की 8 बल्ली व 16 तख्ते पाए गए। श्री कार्की ने बताया वाहन विनय रूवाली के नाम पर दर्ज है। उच्चाधिकारियों को सूचना दे दी गयी है। आगे वाहन मालिक का पता कर आगे की कार्यवाही की जाएगी। कार्रवाई में रणजीत थापा, देवीनाथ गोस्वामी, ललित भौर्याल आदि वन कर्मी शामिल रहे हैं।

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-इनमें भी उथले वनों को हटा दें तो महज 34 फीसद में हैं 40 फीसद से अधिक घनत्व के वन
-इंडिया स्टेट ऑफ फॉरेस्ट रिपोर्ट 2017 से हुआ खुलासा
नवीन जोशी @ नवीन समाचार, नैनीताल, 27 दिसंबर 2018।
उत्तराखंड में देश में सर्वाधिक 66 फीसद भूभाग पर वन होने की बात बहुप्रचारित की जाती है, किंतु भारतीय वन संरक्षण विभाग की जिस ‘इंडिया स्टेट ऑफ फॉरेस्ट रिपोर्ट 2017’ के हवाले से यह बात कही जाती है, उसका बारीकी से अध्ययन करने पर पता चलता है कि वास्तव में उत्तराखंड में केवल 46 फीसद क्षेत्रफल में ही वन हैं। निराशाजनक बात यह भी है कि इस इसमें से 12 फीसद भूभाग में उथले यानी अवनत वन हैं। इस प्रकार सही मायने में उत्तराखंड में महज 34 फीसद क्षेत्रफल में ही 40 फीसद से अधिक घनत्व के वन हैं।

भारतीय वन संरक्षण विभाग की देश के वनों के संबध में जारी ताजा द्विवार्षिक रिर्पोट के अनुसार राज्य के कुल 53483 वर्ग किमी भू भाग में से 4969 वर्ग किमी यानी कुल भू भाग के 9.29 फीसद क्षेत्रफल में अत्यधिक घने वन, 2884 वर्ग किमी यानी 24.08 फीसद भूभाग पर सामान्य घने वन, 6442 वर्ग किमी यानी 12.04 भूभाग में खुले वन, 383 वर्ग किमी यानी 0.71 फीसद में झाड़ी झंकार हैं। इस प्रकार 28805 वर्ग किमी यानी 53.83 फीसद क्षेत्रफल में वन नहीं हैं, एवं कुल 46.17 फीसद क्षेत्रफल में ही वन हैं। इसमें से यदि 12.04 फीसद खुले या अवनत वन क्षेत्र को हटा दें तो राज्य का कुल वन केवल 34.13 फीसद पर ही हैं। राष्ट्रीय वन नीति में भी कुल भूमि के 33 फीसद पर वन होने चाहिये, इस तरह उत्तराखंड ठीक सीमा रेखा पर ही है, जबकि राज्य में 66 फीसद में वन बताये जाते हैं।

23 वर्ग किमी में वन बढ़ने पर भी भ्रमपूर्ण स्थिति
नैनीताल। रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि वन सर्वेक्षण की 2015 की रिपोर्ट के मुकाबले 2017 की रिपोर्ट में अत्यधिक घने वन क्षेत्र में 165 वर्ग किमी, खुले वन में 636 वर्ग किमी, झाड़ी झंकार में 87 वर्ग किमी तथा गैर वन क्षेत्र में 110 वर्ग किमी की वृद्धि हुई है, जबकि सामान्य घने वन क्षेत्र में 778 वर्ग किमी की कमी आई है। इससे साफ पता चलता है कि सामान्य घना वन क्षेत्र 778 वर्ग किमी घट कर 636 किमी खुले वन में बदल गया और इसी तरह झाड़ी झंकार और गैर वन क्षेत्र भी बढ़ गया है। यह स्थिति गंभीर है यानी वनों का बड़ा भाग उथला या अवनत हो रहा है। हालांकि इसी रिर्पोट में एक जगह यह भी बताया गया है कि आरक्षित वन भूमि 49 वर्ग किमी घट गयी है वहीं वनों के बाहरी क्षेत्रों में 72 वर्ग किमी वन बढ़ गये हैं और इसे प्रचारित भी किया गया है कि हमारे यहां इन दोनों का अंतर यानी 23 वर्ग किमी जंगल बढ़ गये हैं। यह भी हो सकता है कि बाहरी क्षेत्र में बढ़ा वन क्षेत्र केवल कृषि आदि की हरियाली भी हो सकती है।

यह है सर्वेक्षण रिपोर्ट में वनों की परिभाषा
नैनीताल। सर्वेक्षण रिपोर्ट के अनुसार किसी क्षेत्र में 70 फीसद से अधिक वृक्ष होने पर उसे अत्यधिक घना वन, 40 फीसद से 70 फीसद के मध्य वृक्ष होने पर सामान्य घना वन, 10 फीसद से 40 फीसद के मध्य वृक्ष होने पर खुला वन एवं 10 फीसद से कम वृक्ष होने परगैर वन कहे जाते हैं। इसके साथ ही रिपोर्ट में यह भी साफ किया गया है कि यह रिपोर्ट धरातल के अध्ययन के बजाय उपग्रह से प्राप्त चित्रों के आधार पर तैयार की जाती है। जिसके कारण इसके संकलन व व्याख्या में कई त्रुटियां रह जाती हैं। रिपोर्ट की प्रस्तावना में भी यह स्पष्टीकरण दिया गया है कि घने बादलों के कारण पड़ने वाली परछायियां वनों की सघनता का आभास दे सकती हैं, तो वृक्षारोपण, गन्ने के खेत, फलों के बगीचे, लैंटाना जैसी झाड़ियां व खरपतवार आदि की लंबे क्षेत्र में फैली हरीतिमा भी वनों के रूप में ही चित्रित हो सकती हैं। लिहाजा यह रिर्पोट पूर्णतः जमीनी सच्चाई के बजाय एक अनुमान ही है।

पौड़ी में सर्वाधिक बढ़े-नैनीताल में सर्वाधिक घटे वन क्षेत्र
नैनीताल। रिपोर्ट का उत्तराखंड के जिले वार अध्ययन करने पर पता चलता है कि वर्ष 2015 से 2017 के बीच पौड़ी जिले में सर्वाधिक 76 वर्ग किमी में वन बढ़े हैं, जबकि नैनीताल में सर्वाधिक 35 वर्ग किमी वन क्षेत्र में कमी आई है। इन जिलों के अतिरिक्त रुद्रप्रयाग में 37, अल्मोड़ा में 17, टिहरी गढ़वाल में 7 व देहरादून में 5 वर्ग किमी में वन क्षेत्र बढ़े हैं, जबकि हरिद्वार में 3, पिथौरागढ़ में 5, बागेश्वर में 10, चंपावत में 11, ऊधमसिंह नगर में 14 चमोली में 15 व उत्तरकाशी में 26 वर्ग किमी में वन क्षेत्र की कमी आई है। इस प्रकार राज्य में 23 वर्ग किमी में वन क्षेत्र की नेट वृद्धि बतायी गयी है। इस संबंध में वन निगम के पूर्व अधिकारी एवं वन विशेषज्ञ विनोद पांडे का कहना है कि जिस पौड़ी जिले में वन क्षेत्र में सर्वाधिक वृद्धि बतायी गयी है, वहां अधिकांशतया चीड़ जैसी पर्यावरण के लिए प्रतिकूल बताई जाने वाली प्रजाति के वनों की अधिकता है, यानी वनों में वृद्धि भी पर्यावरण प्रतिकूल वनों की हो सकती है, जबकि मिश्रित वनों के लिए पहचान रखने वाले नैनीताल जिले में सर्वाधिक 35 वर्ग किमी की कमी भी चिंताजनक है।

वन विभाग में अफसरों व फील्ड कर्मचारियों की कमी
वन सांख्यिकी उत्तराखण्ड की वर्ष 2015-16 की रिपोर्ट के अनुसार उत्तराखंड वन विभाग में उच्चाधिकारियों के पदों पर जहां स्वीकृत पदों से भी अधिक अधिकारी कार्यरत हैं, वहीं नीचे के स्तर पर कर्मचारियों की भारी कमी है। बताया गया है कि राज्य में 3 स्वीकृत पदों के सापेक्ष 11 प्रमुख वन संरक्षक के, 4 के सापेक्ष 15 अतिरिक्त प्रमुख वन संरक्षक, 14 के सापेक्ष 24 मुख्य वन संरक्षक और 12 के सापेक्षे 18 वन संरक्षक हैं, जबकि फील्ड स्तर पर 33 के सापेक्ष 24 उप वन संरक्षक, 90 के सापेक्ष सहायक वन संरक्षक, 2445 के सापेक्ष 1987 राजि अधिकारी, उपराजिक व वन दरोगा तथा 3650 के सापेक्ष 2634 वन आरक्षी ही कार्यरत हैं। इससे वनों के संरक्षण के प्रति विभागीय प्रतिबद्धता भी साफ नजर आती है।

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