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पुलिस-वन विभाग आमने सामने: पुलिस विभाग ने ‘अवैध’ बताकर पकड़ा वन विभाग का 140 टिन ‘वैध’ लीसा

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-पुलिस ने पिकप व वाहन चालक को किया गिरफ्तार, वन विभाग की कार्यशैली पर भी उठ रहे सवाल
दान सिंह लोधियाल @ नवीन समाचार, धानाचूली, 22 नवंबर 2019। जनपद की थाना मुक्तेश्वर ने गहना के जंगलों से तस्करी कर ले जाये जा रहे अवैध लीसे के टिनो के जखीरे को वाहन एवं वाहन चालक सहित चेकिंग के दौरान पकड़ा है। आरोपित वाहन चालक के खिलाफ वन अधिनियम के तहत मुकदमा दर्ज कर आगे की कार्यवाही शुरू कर दी है। मामले में वन विभाग की कार्यशैली पर भी सवाल उठ रहे हैं।

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पुलिस से प्राप्त जानकारी के अनुसरा मुक्तेश्वर के थानाध्यक्ष कुलदीप सिंह के नेतृत्व में धानाचूली बैंड के पास चेकिंग अभियान चलाया जा रहा था। इसी दौरान गहना पोखरी से आ रही पिकप संख्या यूके04सीए-1866 को रोकने पर उसमें 140 टिन लीसा पाया गया। वाहन चालक इस लीसे के कागजात मागने पर पुराने कागज दिखाने लगा। वैध कागजात नही दिखा पाने पर वाहन चालक गिरीश चंद्र पुत्र माधोराम निवासी अर्नपा, तहसील धारी को पिकप सहित गिरफ्तार कर लिया गया। एसओ सिह ने बताया लीसे के वैध कागजात नही दिखा पाने पर आगे की जाँच की जा रही है। वही रेंजर उत्तरी गौला पीके आर्या का कहना है यह वैध लीसा है जो जंगल से पहाड़पानी लीसा डिपो को ले जाया जा रहा था। यह पूछे जाने पर कि आज की तिथि का रवन्ना क्यों नही दिया गया तो उनका ढुलमुल जबाब आया। इससे वन विभाग की कार्यशैली पर भी सवाल उठ रहे हैं। पुलिस कार्रवाई में पुलिस आरक्षी त्रिलोक, देवीदत्त पांडे, नरेश परिहार और सुरेंद्र कुमार आदि भी शामिल रहे।

यह भी पढ़ें : एक्सक्लूसिव : नैनीताल चिड़ियाघर में इंटरप्रिटेशन सेंटर, थियेटर व कॅरियर प्रोग्राम शीघ्र होंगे उपलब्ध

-पहली बार डीएम के हाथों पुरस्कृत हुए वन्य प्राणी सप्ताह की प्रतियोगिताओं के विजेता

वन्य प्राणी सप्ताह के दौरान हुई प्रतियोगिताओं के विजेताओं को सम्मानित करते डीएम सविन बंसल।

नवीन समाचार, नैनीताल, 14 नवंबर 2019। बाल दिवस के अवसर पर नैनीताल चिड़ियाघर में गत दिनों वन्य प्राणी सप्ताह के अंर्तगत आयोजित प्रतियोगिताओं में विजयी रहे प्रतिभागियों को पहली बार डीएम के हाथों पुरस्कृत किया गया। इस मौके पर डीएम सविन बंसल ने नगर के मोहन लाल साह बाल विद्या मंदिर, को प्रथम, भारतीय शहीद सैनिक विद्यालय को द्वितीय व विशप शॉ इंटर कॉलेज को तृतीय, सेंट स्टीफन स्कूल, सैन्ट जौन्स स्कूल, सरस्वती विद्या मन्दिर, ऑल सेन्टस कॉलेज व राष्ट्रीय शहीद सैनिक स्मारक विद्यापीठ, को सांत्वना पुरस्कार तथा कुंदन लाल साह कन्या इंटर कालेज ऐशडल, संेट जेवियर स्कूल, लौंगव्यू पब्लिक स्कूल, वसंत वैली पब्लिक स्कूल तथा राधा चिल्ड्रन एकेडमी, को प्रतिभाग पुरस्कार प्रदान किये। निदेशक ने ऑल सेंटस कॉलेज व राष्ट्रीय शहीद सैनिक स्मारक विद्यापीठ को विशेष पुरस्कार भी प्रदान किये।
इस अवसर पर चिड़ियाघर के निदेशक बीजू लाल टीआर ने जल्द ही चिड़ियाघर प्रशासन में इंटरप्रिटेशन सेंटर व इंटरप्रिटेशन थियेटर शुरू करने तथा डीएम ने बच्चों के लिए कॅरियर प्रोग्राम भी चलाने की बात कही, जिससे बच्चों को वन्य जीवों के संसार में रोजगार की संभावनाओं के बारे में जानकारी दी जा सकेगी। बताया गया कि इंटरप्रिटेशन थियेटर में पृथ्वी और इस पर रहने वाले प्राणियों के विकास, अलग-अलग ऊंचाइयों पर मिलने वाली जीव-जंतुओं एवं पेड़-पौधों की प्रजातियों आदि प्राकृतिक संपदा के बारे में सरल व रोचक तरीके से जानकारियां दी जाएंगी। कार्यक्रम में नगर के 13 विद्यालयों के 65 छात्र ,छात्राऐं एवं शिक्षकगण उपस्थित रहे। संचालन प्राणी उद्यान की वन क्षेत्राधिकारी ममता चन्द ने किया। इस अवसर पर प्रमोद कुमार तिवारी, सोनल पनेरू, खजान चन्द्र मिश्रा, रेखा सुयाल, विक्रम मेहरा, आनंद सिंह व रमेश सिंह चिड़ियाघर के समस्त कर्मचारी भी मौजूद रहे।

यह भी पढ़ें : धारचूला के युवक को वन तस्कर बताकर महिला अधिकारी की अगुवाई में नैनीताल में थर्ड डिग्री टॉर्चर !

नवीन समाचार, नैनीताल, 8 नवंबर 2019। मुख्यालय के पास कुंजखड़क क्षेत्र में धारचूला के एक युवक के साथ, उसे वन तस्कर बताकर वन विभाग की महिला अधिकारी की अगुवाई में वनाधिकारियों व कर्मचारियों पर थर्ड डिग्री जैसा टॉर्चर किये जाने का आरोप लगाया गया है। वहीं वन विभाग के अधिकारी चोटों को पेड़ से गिरने के कारण और युवक को तस्कर बता रहे हैं। अलबत्ता युवक को क्यों छोड़ा गया, इस प्रश्न का कोई जवाब नहीं है।
शुक्रवार को धारचूला निवासी 31 वर्षीय भाष्कर सिंह बुदियाल पुत्र स्वर्गीय पदम सिंह बुदियाल निवासी ग्राम बुदि तहसील धारचूला जिला पिथौरागढ़ ने मल्लीताल कोतवाली के पास पट्टी पटवारी सौड़ के नाम लिखा शिकायती पत्र स्थानीय पट्टी पटवारी अमित साह को सोंपा और वन विभाग के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने की मांग की। पत्र में भास्कर ने कहा है कि वह बीती 5 नवंबर को पंगूठ क्षेत्र में घूमने गया था। यहां वन विभाग के एक गेस्ट हाउस नुमा भवन में मौजूद चौकीदार से मौखिक अनुमति लेकर वह जंगल में गया। वहां रास्ता समझ नहीं आने पर जब वह वापस आया तो वन विभाग के कर्मी उसे व उसके वाहन चालक को पकड़कर कुंजाखड़क नामक स्थान पर ले गए। दूसरे दिन वन रेंजर तनूजा परिहार के बाद उस पर तस्करी का आरोप कबूल करने को लेकर उसके साथ बेहोश होने तक बर्बरतापूर्वक मारपीट की गई। रेंजर ने उसके चेहरे की बनावट को लेकर एवं जातिसूचक शब्दों के साथ अभद्र शब्दों का प्रयोग भी किया। इसके बाद उसे तीन दिन बाद सात नवंबर की शाम रिहा किया गया किंतु एक लिखित दस्तावेज में 6 नवंबर को रिहा करना तथा कोई शारीरिक मारपीट व अभद्र व्यवहार न होना लिखकर जबर्दस्त दबाव बनाकर हस्ताक्षर करवाए गऐ। अन्यथा रिहाई न करने की बात कही गई। साथ ही जुर्माने के तौर पर 5000 रुपए लेने परंतु इसकी कोई रसीद न देने का भी आरोप लगाया। इधर युवक द्वारा कराये गए मेडिकल परीक्षण में उसे 30 से 39 घंटे पुरानी कठोर व भोथरी वस्तु से 13 सामान्य प्रवृृत्ति की चोटें लगी होने की बात कही गई है। इधर उसके बांये हाथ की छोटी अंगुली का नाखून उखड़े होने की बात भी कही जा रही है और इसके आधार पर ही उसके साथ थर्ड डिग्री टार्चर किये जाने की बात कही जा रही है।
वहीं इस बारे में पूछे जाने पर डीएफओ बीजू लाल टीआर ने इस अवधि में स्वयं के पंचायत चुनाव की ड्यूटी पर अल्मोड़ा जनपद में होने की जानकारी देने के साथ ही बताया कि आरोपित युवक की धारचूला में फैक्टरी है। उसके खिलाफ लंबे समय से मूर्तियां बनाने के लिए मैपल और ओक के पेड़ों की तस्करी करने की मीडिया एवं स्थानीय लोगों से पुख्ता सूचना थी। इस आधार पर ही उसे पकड़ा गया था। अलबत्ता मातहत अधिकारियों से पूरी जानकारी न मिलने की बात कहते हुए वे उसे तस्कर होने के बावजूद छोड़ दिये जाने के कारण का पता न होने की बात कही। उन्होंने मातहत अधिकारियों से मिली जानकारी के आधार पर चोटों को पेड़ से गिरने के कारण बताया, अलबत्ता मामले की पूरी जांच कराने की बात भी कही।

यह भी पढ़ें : सरोवरनगरी में दीपावली की आढ़ में काट डाले पेड़

भोटिया बैंड के पास जंगल में काटे गए पेड़।

नवीन समाचार, नैनीताल, 29 अक्तूबर 2019। सरोवरनगरी में दीपावली के त्योहार की आढ़ में कुछ लोगों ने वन क्षेत्र से लगे इलाके में पेड काट डाले। साथ ही जमीन को चौरस कर ढलान की ओर मिट्टी के कट्टों की दीवार भी बना डाली। सूचना मिलने पर डीएफओ ने क्षेत्रीय वनाधिकारी एवं वन कर्मियों को मौके पर पहुंचकर निर्माण की तैयारी को हटवाया, और अज्ञात निर्माणकर्ता के खिलाफ जुर्माना भी लगवाया।
नगर के सकिय सामाजिक कार्यकर्ता अरुण कुमार साह ने बताया कि सीआरएसटी स्कूल से ऊपर भोटिया बैंड के पास बड़ी मात्रा में हरे पेड़ काटे गये। उन्होंने इसकी शिकायत डीएफओ बीजू लाल टीआर से की। इस पर डीएफओ ने नगर पालिका रेंज के हीरा सिंह शाही आदि वनाधिकारियों व कर्मियों को मौके पर भिजवाकर कब्जा करने के प्रयास को रोका। काटी गई लकड़ी को सीज किया गया तथा पेड़ काटने वालों के खिलाफ जुर्माना लगाया गया है। श्री शाही ने बताया कि जिस भूमि पर पेड़ काटे गए हैं वह निजी भूमि है। उन्होंने स्वीकारा कि इस पर पद्म, हॉली, बांज व पुतली आदि के पेड़ काटे गए हैं। यहां भूस्वामी के द्वार प्लॉटिंग की जा रही है। लेकिन वन कर्मियों को यह पता नहीं लग पाया कि निर्माण किसके द्वारा किया जा रहा है और पेड़ किसके द्वारा काटे जा रहे है। इसके अज्ञात के खिलाफ चालान की कार्रवाई की जा रही है।

यह भी पढ़ें : तस्करों से मुठभेड़ में एक वन कर्मी शहीद..

ललित मोहन बधानी @ नवीन समाचार, नैनीताल, 22 जून 2019। तराई केंद्रीय वन प्रभाग के बरहैनी रेंज में बौर नदी किनारे खैर तस्करों और वनकर्मियों में शुक्रवार रात्रि सवा दो बजे हुई मुठभेड़ में एक बीट वाचर बहादुर सिंंह चौहान की गोली लगने से मौके पर ही शहीद होने की बेहद दुःखद खबर है।
बताया गया है कि महोली के जंगल में बौर नदी के उत्तर में तसजर खैर के पेड़ काट रहे थे, तभी तस्करों ने ललकारने पहुंची वन विभाग की टीम पर ताबड़तोड़ फायरिंग कर दी। गोलीकांड में एक बीट वाचर तस्करों का सामना करते हुए शहीद हो गए, जबकि दूसरा बीट वाचर महेंद्र घायल हो गया। घटना से समूचे वन विभाग में हड़कंप मच गया है। मौके पर 2 बाइक और एक मोबाइल फोन बरामद हुए हैं। उल्लेखनीय है कि प्रदेश के वनों, यहां तक कि नए बन रहे अंतरराष्ट्रीय चिड़ियाघर से खैर और जिम कॉर्बेट के संग्रहालय के पास से चंदन के पेड़ काटे जाने और लापरवाही के चलते अमूल्य और प्रतिबंधित वन संपदा को तस्करों के द्वारा काटे जाने के समाचार लगातार आ रहे हैं। खैर का तस्करी बाजार में ₹6000/-प्रति कुंतल का रेट बताया जाता है। बताया जा रहा है कि उत्तराखंड की अमूल्य वन सम्पदा हरियाणा, यूपी के सुदूर नगरों तक आसानी से पहुंचाई जा रही है।

पूरा मामला:-

वन तस्करों के हौसले इतने बुलंद हो चुके है कि अब वह पेड़ो के साथ साथ वन विभाग के कर्मचारियों पर फायर करने में भी गुरेज नही कर रहे है। ताज़ा मामला तराई केंद्रीय वन प्रभाग के बरहैनी रेंज का है जहाँ पर वन तस्करों ने वन विभाग की टीम पर फायर झोंक दी। जिसमे वचार बहादुर सिंह चौहान की मौके पर ही मौत हो गयी जबकि रोपड़ रक्षक महेंदर सिंह घायल हो गया। मृतक के शव का पंचनामा भर पोस्टमॉर्टम के लिए भेज दिया है जबकि घायल का इलाज अस्पताल में चल रहा है।

आज सुबह सवा दो बजे वन विभाग की टीम को सूचना मिली थी कि कुछ वन तस्कर तराई केंद्रीय वन प्रभाग के बरहैनी रेंज में घुस कर पेड़ो को काट रहे है। हरकत में आई टीम ने वन तस्करों को पकड़ने के लिए जाल बिछाया जैसे ही वन तस्कर वहां पर पहुचे तो वह विभाग की टीम ने तस्करों को घेर लिया। जिसके बाद तस्करों द्वारा वन विभाग की टीम में फायर झोंक दी जिसकी चपेट में आने से वन वचार बहादुर सिंह की मौके पर ही मौत हो गयी जबकि अन्य रोपण रक्षक महेन्दर सिंह घायल हो गया। मौका देख आरोपी वन तस्कर मौके से फरार हो गए। आनन फानन में टीम द्वारा दोनों को अस्पताल ले जाया गया जहाँ पर डॉक्टरों ने बहादुर सिंह को मृत घोषित कर दिया घटना की सूचना पर वन विभाग के अधिकारी भी मौके पर पहुच गए है। वन विभाग के मुताबिक वन तस्कर आधा दर्जन लोग थे जो कि ग्राम थापा नगला थाना केलाखेडा उधम सिंह नगर के रहने वाले है। वन तस्करों में कुछ लोगो को चिह्नित भी किया जा चूका है

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वन पंचायत जुटी जांच में, 15 पेड़ मौके पर बरामद, बाकी मिले कटे ठूंठ

सतबूंगा के जंगलों में कटे बांज व खरशु के पेड़।

दान सिंह लोधियाल @ नवीन समाचार, धानाचूली (नैनीताल), 4 अप्रैल 2019। लोकसभा चुनावों की चहल-पहल के बीच मौके का लाभ उठा कर तस्करों ने बांज और खरसू के करीब तीन दर्जन पेड़ों पर आरी चला दी। शिकायत मिलने पर वन पंचायत ने मौका मुयायना किया तो जंगल मे 15 पेड़ काटे हुए तथा दो दर्जन पेडों के़ के कटे ठूंठ पाये गए। सतबूंगा के सरपंच गंगा सिंह ने बताया कि गांव वालों की सूचना पर वह वन विभाग की टीम के साथ जंगल में गए, जहां पर करीब तीन दर्जन पेड़ काटे मिले। वहीं सरपंच ने बताया कि करीब 15 घरों में जाकर पूछताछ और चेकिंग की गई लेकिन कही कोई सुराग नही मिला। वहीं लोग इस मामले को स्थानीय तस्करों से भी जोड़ कर देख रहे हैं। वही वन पंचायत राजस्व विभाग में रिपोर्ट दर्ज करने का विचार कर रही है।

यह भी पढ़ें : वन विभाग ने रामगढ़ के सतखोल में पकड़ी अवैध इमारती लकड़ी

-पिकप से लाई जा रही थी अवैध लकड़ी, लकड़ी तस्कर वाहन छोड़ हुए फरार

वन कर्मियों के द्वारा जब्त की गयी इमारती लकड़ी से भरी पिकअप वैन।

दान सिंह लोधियाल @ नवीन समाचार, धानाचूली, नैनीताल, 28 मार्च 2019। जनपद के रामगढ़ विकासखंड के सतखोल में वन विभाग की टीम ने अवैध तरीके से जायी जा रही इमारती लकड़ी से भरी एक पिक-अप वैन को बरामद किया है। अलबत्ता विभागीय कर्मियों को देखकर वाहन चालक वाहन को छोड़कर फरार होने में सफल रहा। वन अधिकारी ने वाहन को अवैध लकड़ी सहित सीज कर वनाधिनियम के तहत कार्यवाही कर उच्चाधिकारियों को सूचित कर दिया है।
उत्तरी वन गोला रेंज के वन क्षेत्राधिकारी ललित मोहन कार्की ने बताया उनकी टीम बृस्पतिवार को गस्त पर थी। इस दौरान सतोली से सतखोल की तरफ आ रही पिकप संख्या यूके04 सीबी-4574 को रोका तो उसमें सवार वाहन चालक व अन्य ने वाहन रोक जंगल की ओर दौड़ लगा दी। वाहन की तलाशी लिए जाने पर अवैध तरीके से तस्करों द्वारा लायी जा रही इमारती लकड़ी की 8 बल्ली व 16 तख्ते पाए गए। श्री कार्की ने बताया वाहन विनय रूवाली के नाम पर दर्ज है। उच्चाधिकारियों को सूचना दे दी गयी है। आगे वाहन मालिक का पता कर आगे की कार्यवाही की जाएगी। कार्रवाई में रणजीत थापा, देवीनाथ गोस्वामी, ललित भौर्याल आदि वन कर्मी शामिल रहे हैं।

यह भी पढ़ें : बड़ा चिंताजनक खुलासा: उत्तराखंड में 66 नहीं महज 46 फीसद हैं वन

-इनमें भी उथले वनों को हटा दें तो महज 34 फीसद में हैं 40 फीसद से अधिक घनत्व के वन
-इंडिया स्टेट ऑफ फॉरेस्ट रिपोर्ट 2017 से हुआ खुलासा
नवीन जोशी @ नवीन समाचार, नैनीताल, 27 दिसंबर 2018।
उत्तराखंड में देश में सर्वाधिक 66 फीसद भूभाग पर वन होने की बात बहुप्रचारित की जाती है, किंतु भारतीय वन संरक्षण विभाग की जिस ‘इंडिया स्टेट ऑफ फॉरेस्ट रिपोर्ट 2017’ के हवाले से यह बात कही जाती है, उसका बारीकी से अध्ययन करने पर पता चलता है कि वास्तव में उत्तराखंड में केवल 46 फीसद क्षेत्रफल में ही वन हैं। निराशाजनक बात यह भी है कि इस इसमें से 12 फीसद भूभाग में उथले यानी अवनत वन हैं। इस प्रकार सही मायने में उत्तराखंड में महज 34 फीसद क्षेत्रफल में ही 40 फीसद से अधिक घनत्व के वन हैं।

भारतीय वन संरक्षण विभाग की देश के वनों के संबध में जारी ताजा द्विवार्षिक रिर्पोट के अनुसार राज्य के कुल 53483 वर्ग किमी भू भाग में से 4969 वर्ग किमी यानी कुल भू भाग के 9.29 फीसद क्षेत्रफल में अत्यधिक घने वन, 2884 वर्ग किमी यानी 24.08 फीसद भूभाग पर सामान्य घने वन, 6442 वर्ग किमी यानी 12.04 भूभाग में खुले वन, 383 वर्ग किमी यानी 0.71 फीसद में झाड़ी झंकार हैं। इस प्रकार 28805 वर्ग किमी यानी 53.83 फीसद क्षेत्रफल में वन नहीं हैं, एवं कुल 46.17 फीसद क्षेत्रफल में ही वन हैं। इसमें से यदि 12.04 फीसद खुले या अवनत वन क्षेत्र को हटा दें तो राज्य का कुल वन केवल 34.13 फीसद पर ही हैं। राष्ट्रीय वन नीति में भी कुल भूमि के 33 फीसद पर वन होने चाहिये, इस तरह उत्तराखंड ठीक सीमा रेखा पर ही है, जबकि राज्य में 66 फीसद में वन बताये जाते हैं।

23 वर्ग किमी में वन बढ़ने पर भी भ्रमपूर्ण स्थिति
नैनीताल। रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि वन सर्वेक्षण की 2015 की रिपोर्ट के मुकाबले 2017 की रिपोर्ट में अत्यधिक घने वन क्षेत्र में 165 वर्ग किमी, खुले वन में 636 वर्ग किमी, झाड़ी झंकार में 87 वर्ग किमी तथा गैर वन क्षेत्र में 110 वर्ग किमी की वृद्धि हुई है, जबकि सामान्य घने वन क्षेत्र में 778 वर्ग किमी की कमी आई है। इससे साफ पता चलता है कि सामान्य घना वन क्षेत्र 778 वर्ग किमी घट कर 636 किमी खुले वन में बदल गया और इसी तरह झाड़ी झंकार और गैर वन क्षेत्र भी बढ़ गया है। यह स्थिति गंभीर है यानी वनों का बड़ा भाग उथला या अवनत हो रहा है। हालांकि इसी रिर्पोट में एक जगह यह भी बताया गया है कि आरक्षित वन भूमि 49 वर्ग किमी घट गयी है वहीं वनों के बाहरी क्षेत्रों में 72 वर्ग किमी वन बढ़ गये हैं और इसे प्रचारित भी किया गया है कि हमारे यहां इन दोनों का अंतर यानी 23 वर्ग किमी जंगल बढ़ गये हैं। यह भी हो सकता है कि बाहरी क्षेत्र में बढ़ा वन क्षेत्र केवल कृषि आदि की हरियाली भी हो सकती है।

यह है सर्वेक्षण रिपोर्ट में वनों की परिभाषा
नैनीताल। सर्वेक्षण रिपोर्ट के अनुसार किसी क्षेत्र में 70 फीसद से अधिक वृक्ष होने पर उसे अत्यधिक घना वन, 40 फीसद से 70 फीसद के मध्य वृक्ष होने पर सामान्य घना वन, 10 फीसद से 40 फीसद के मध्य वृक्ष होने पर खुला वन एवं 10 फीसद से कम वृक्ष होने परगैर वन कहे जाते हैं। इसके साथ ही रिपोर्ट में यह भी साफ किया गया है कि यह रिपोर्ट धरातल के अध्ययन के बजाय उपग्रह से प्राप्त चित्रों के आधार पर तैयार की जाती है। जिसके कारण इसके संकलन व व्याख्या में कई त्रुटियां रह जाती हैं। रिपोर्ट की प्रस्तावना में भी यह स्पष्टीकरण दिया गया है कि घने बादलों के कारण पड़ने वाली परछायियां वनों की सघनता का आभास दे सकती हैं, तो वृक्षारोपण, गन्ने के खेत, फलों के बगीचे, लैंटाना जैसी झाड़ियां व खरपतवार आदि की लंबे क्षेत्र में फैली हरीतिमा भी वनों के रूप में ही चित्रित हो सकती हैं। लिहाजा यह रिर्पोट पूर्णतः जमीनी सच्चाई के बजाय एक अनुमान ही है।

पौड़ी में सर्वाधिक बढ़े-नैनीताल में सर्वाधिक घटे वन क्षेत्र
नैनीताल। रिपोर्ट का उत्तराखंड के जिले वार अध्ययन करने पर पता चलता है कि वर्ष 2015 से 2017 के बीच पौड़ी जिले में सर्वाधिक 76 वर्ग किमी में वन बढ़े हैं, जबकि नैनीताल में सर्वाधिक 35 वर्ग किमी वन क्षेत्र में कमी आई है। इन जिलों के अतिरिक्त रुद्रप्रयाग में 37, अल्मोड़ा में 17, टिहरी गढ़वाल में 7 व देहरादून में 5 वर्ग किमी में वन क्षेत्र बढ़े हैं, जबकि हरिद्वार में 3, पिथौरागढ़ में 5, बागेश्वर में 10, चंपावत में 11, ऊधमसिंह नगर में 14 चमोली में 15 व उत्तरकाशी में 26 वर्ग किमी में वन क्षेत्र की कमी आई है। इस प्रकार राज्य में 23 वर्ग किमी में वन क्षेत्र की नेट वृद्धि बतायी गयी है। इस संबंध में वन निगम के पूर्व अधिकारी एवं वन विशेषज्ञ विनोद पांडे का कहना है कि जिस पौड़ी जिले में वन क्षेत्र में सर्वाधिक वृद्धि बतायी गयी है, वहां अधिकांशतया चीड़ जैसी पर्यावरण के लिए प्रतिकूल बताई जाने वाली प्रजाति के वनों की अधिकता है, यानी वनों में वृद्धि भी पर्यावरण प्रतिकूल वनों की हो सकती है, जबकि मिश्रित वनों के लिए पहचान रखने वाले नैनीताल जिले में सर्वाधिक 35 वर्ग किमी की कमी भी चिंताजनक है।

वन विभाग में अफसरों व फील्ड कर्मचारियों की कमी
वन सांख्यिकी उत्तराखण्ड की वर्ष 2015-16 की रिपोर्ट के अनुसार उत्तराखंड वन विभाग में उच्चाधिकारियों के पदों पर जहां स्वीकृत पदों से भी अधिक अधिकारी कार्यरत हैं, वहीं नीचे के स्तर पर कर्मचारियों की भारी कमी है। बताया गया है कि राज्य में 3 स्वीकृत पदों के सापेक्ष 11 प्रमुख वन संरक्षक के, 4 के सापेक्ष 15 अतिरिक्त प्रमुख वन संरक्षक, 14 के सापेक्ष 24 मुख्य वन संरक्षक और 12 के सापेक्षे 18 वन संरक्षक हैं, जबकि फील्ड स्तर पर 33 के सापेक्ष 24 उप वन संरक्षक, 90 के सापेक्ष सहायक वन संरक्षक, 2445 के सापेक्ष 1987 राजि अधिकारी, उपराजिक व वन दरोगा तथा 3650 के सापेक्ष 2634 वन आरक्षी ही कार्यरत हैं। इससे वनों के संरक्षण के प्रति विभागीय प्रतिबद्धता भी साफ नजर आती है।

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