एनएच-74 मुआवजा घोटाला: 35 आरोपित पकड़ से बाहर, इनमें से एक दर्जन के विदेश भागने की खबर

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नवीन समाचार, नैनीताल, 22 नवंबर 2019। करीब 500 करोड़ रुपए के बताये जा रहे एनएच-74 भूमि मुआवजा घोटाले के 35 आरोपित किसानों को अब तक एसआईटी पकड़ नहीं पाई है। इनमें से 12 आरोपितों के खिलाफ गैर जमानती वारंट तक जारी हो चुके हैं। बताया जाता है कि फरार आरोपियों में से आधा दर्जन से अधिक आरोपी तो गिरफ्तारी से बचने के लिए विदेश भाग चुके हैं, जबकि 18 आरोपी अपने पते पर नहीं मिल रहे हैं।

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वहीँ, मामले में पूर्व में गिरफ्तार 25 आरोपितों में से एक की मृत्यु हो चुकी है, तथा शेष 24 आरोपितों को न्यायालय से आरोपित किया जा चुका है, तथा अभियोजन साक्ष्यों हेतु 5 दिसंबर की तिथि नियत है। वहीं 6 किसानों व बिचौलियों के विरुद्ध आरोप पत्र न्यायालय में भेज दिये गये हैं। जेल से बाहर इन लोगों के लिए भी न्यायालय में उपस्थित होने के लिए 5 दिसंबर को उपस्थित होने के लिए सम्मन एवं वारंट जारी किये गये हैं। जबकि हाल में 5 अन्य किसानों को जेल भेजा है। इनके खिलाफ अभी विवेचना जारी है। आरोप पत्र न्यायालय में प्रेषित नहीं किये गए हैं।
उल्लेखनीय है कि ऊधमसिंह नगर के एनएच-74 भूमि मुआवजा घोटाले में ऊधमसिंह नगर के तत्कालीन एडीएम (वित्त) प्रताप शाह ने 10 मार्च 2017 को पंतनगर थाने में मुकदमा दर्ज कराया था। इसके बाद जांच के लिए शासन स्तर पर एसआईटी गठित की गई थी। एसआईटी ने घोटाले में पीसीएस अधिकारी, राजस्व कर्मियों एवं किसानों समेत 27 लोगों को गिरफ्तार किया था। इस पर जिला शासकीय अधिवक्ता फौजदारी सुशील कुमार शर्मा का कहना है कि फरार आरोपियों की जल्द गिरफ्तारी हो जाए तो आरोपियों के खिलाफ एक साथ गवाहों के बयान कराए जा सकते हैं। इससे गवाहों को बार-बार नैनीताल के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे। इससे न्यायालय में मामले की सुनवाई में भी तेजी आ पाएगी।
ये हैं फरार आरोपी
नैनीताल। अजमेर सिंह भरतपुर, बलवंत सिंह गिन्नीखेड़ा, गगनदीप कौर बघेलेवाला, लक्ष्मी देवी आलापुर, अंजू जैन आलापुर तथा बरा पुलभट्टा निवासी दलजीत कौर बिचपुरी, मीरा अग्रवाल सुभाषनगर, संतोष गुप्ता सुभाषनगर, सुखजिंदर कौर ताली फार्म, हरप्रीत कौर ताली फार्म, हरजिंदर कौर ताली फार्म, जरनैल सिंह मुकंदपुर, रामनारायण, तरुण शर्मा, उदित, परिणिता निझावन, जसपाल, महिपाल, वीरपाल, सुरेश कुमार, ईश्वरी प्रसाद।
इनके खिलाफ जारी हुए हैं गैर जमानती वारंट
नैनीताल। बलजीत कौर लालपुर, दलविंदर सिंह लालपुर, जसवंत सिंह महेशपुरा, मोहित अग्रवाल सुभाषनगर, भाग सिंह किशनपुर, अवतार सिंह मुड़ियानी, रमिंदर मुड़ियानी, दिलशेर सिंह मुड़ियानी, प्रभसरन केलाखेड़ा, नरेंद्र पाल टांडा आजम, अरविंद सिंह टांडा आजम, मोहन लाल टांडा आजम।
ये आरोपी अभी हाल में हुए हैं गिरफ्तार
नैनीताल। घोटाले में एसआईटी ने अभी हाल में पांच किसानों रायदिया चौधरी, सुवेग सिंह, कुलदीप सिंह, मोहम्मद आरिफ, मोहम्मद आसिफ को गिरफ्तार किया है।
इनके खिलाफ दाखिल हो चुके हैं आरोप पत्र
नैनीताल। बल्देव सिंह, बरिंदर सिंह, नन्हें, दिनेश कुमार, मोहम्मद अशरफ और जगदीश अरोरा के खिलाफ अभियोजन पक्ष की ओर से न्यायालय में आरोप पत्र दाखिल किया जा चुका है। आरोपियों की न्यायालय में हाजिरी के लिए सम्मन भेजे जा चुके हैं।
ये हो चुके हैं न्यायालय से आरोपित
नैनीताल। न्यायालय से अब तक तत्कालीन विशेष भूमि अध्याप्ति अधिकारी पीसीएस अधिकारी दिनेश प्रताप सिंह, भगत सिंह फौनिया, संजय कुमार चौहान, रायसपुरा, अनिल कुमार, मदन मोहन पडलिया, भोले लाल, विकास कुमार चौहान, चंदन सिंह, जीशान, ओम प्रकाश, अर्पण प्रसाद, अनिल कुमार, नंदन सिंह, मोहन बिष्ट, संत राम, अमर सिंह, गणेश प्रसाद, विक्रम जीत, मनदीप सिंह, तीरथपाल सिंह, हरजिंदर सिंह, हीरा लाल व दिलबाग सिंह आरोपित हो चुके हैं, जबकि एक आरोपित रघुवीर की मृत्यु हो गई है।

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-अगली तिथि पर होंगे आरोप तय, व्यक्तिगत होना होगा कोर्ट में पेश, 22 अन्य आरोपितों के खिलाफ गवाही 16 से होगी शुरू
नवीन समाचार, नैनीताल, 14 नवंबर 2019। विशेष न्यायाधीश भ्रष्टाचार निवारण-जिला एवं शस्त्र न्यायाधीश राजीव खुल्बे की अदालत ने प्रदेश के बहुचर्चित करीब 200 करोड़ रुपए के बजाये जा रहे एनएच-74 भूमि मुआवजा घोटाला मामले में आरोपित एडीएम तीरथपाल पर आरोप तय कर दिए हैं। जबकि मुख्य आरोपित तत्कालीन विशेष भूमि अध्याप्ति अधिकारी डीपी सिंह पर आरोप तय करने के लिए आगामी 16 नवंबर की तिथि नियत कर दी है। साथ ही सिंह को 16 नवंबर को व्यक्तिगत रूप से पेश होने के आदेश दिये हैं। वहीं मामले के अन्य पूर्व से आरोपित हो चुके 22 अन्य के मामले में न्यायालय ने पांच दिसंबर को अभियोजन साक्ष्य हेतु तिथि नियत कर दी है।
उल्लेखनीय है कि भ्रष्टाचार न्यायालय ने पिछली तिथि पर डीपी सिंह, अनिल कुमार, विक्र्रमजीत सिंह व तीरथपाल सहित कुल 23 में से 21 आरोपितों के मामले की सुनवाई कर उन पर आरोप तय कर दिये थे। जबकि डीपी सिंह व तीरथपाल के उपस्थित न होने के कारण उनके विरुद्ध एनवीडब्लू यानी गैर जमानती वारंट जारी कर दिये थे। इस बीच दोनों ने आज न्यायालय में उपस्थित होने का प्रार्थना पत्र दिया था। इधर आज तीरथपाल तो न्यायालय में उपस्थित हुए और उन्हें भी न्यायालय ने आरोपित कर दिया गया। किंतु डीपी सिंह आज भी उपस्थित नहीं हुए। उनकी ओर से अधिवक्ता ने इस बीच उच्च न्यायालय में एक मामले में चल रही सुनवाई के पत्र पेश कर आज की तिथि पर व्यक्तिगत तौर पर हाजिरी माफी और आज की कार्रवाई हेतु स्थगन प्रार्थना पत्र तथा अन्य मामले में पांच नवंबर को उच्च न्यायालय में सुनवाई की तिथि के बाद की तिथि मांगी। किंतु कोर्ट में उनका पैंतरा नहीं चल पाया, और उन्हें 16 नवंबर को व्यक्तिगत तौर पर न्यायालय में पेश होने के आदेश दिये गये।
चार किसानों की जमानत अर्जी खारिज
नैनीताल। विशेष न्यायाधीश भ्रष्टाचार निवारण-जिला एवं शस्त्र न्यायाधीश राजीव खुल्बे की अदालत ने एनएच-74 भूमि मुआवजा घोटाले के ही अन्य मामले में चार आरोपित किसानों- रामदिया चौधरी पुत्र स्वर्गीय सौचंद चौधरी व कुलदीप सिंह पुत्र रामदिया चौधरी निवासी मुड़ियाअनी तथा आरिफ व आसिफ पुत्र नन्हे व व शुबेक सिंह पुत्र कश्मीर सिंह निवासी मढैया की जमानत अर्जी खारिज कर दी।

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नवीन समाचार, नैनीताल, 7 नवंबर 2019। जिला एवं सत्र न्यायाधीश तथा विशेष न्यायाधीश भ्रष्टाचार निवारण राजीव कुमार खुल्बे के न्यायालय में प्रदेश के बहुचर्चित करीब 200 करोड़ के बताये जा रहे एनएच-74 घोटाला प्रकरण में तीन किसानों को 14 दिन के लिए न्यायिक हिरासत में हल्द्वानी जेल भेज दिया है। उल्लेखनीय है कि बुधवार को इस मामले के लिए गठित एसआईटी यानी विशेष जांच दल ने रुद्रपुर में स्थानीय थाना पुलिस की मदद से ग्राम मुड़ियाअनी तहसील बाजपुर जिला ऊधमसिंह नगर निवासी तीन किसानों-78 वर्षीय राम दिया चौधरी पुत्र स्वर्गीय शौचंद्र, उनके पुत्र 35 वर्षीय कुलदीप चौधरी व सुवेक सिंह पुत्र कश्मीर सिंह को गिरफ्तार किया था। बृहस्पतिवार को तीनों को न्यायालय में पेश किया गया। जिला शासकीय अधिवक्ता सुशील कुमार शर्मा ने बताया कि तीनों पर अपनी कृषि भूमि को फर्जी तरीके से तत्कालीन विशेष भूमि अध्याप्ति अधिकारी, एसडीएम व तहसीलदार से करीब 40 लाख रुपए का मुआवजा गलत तरीके से हड़पने का आरोप है। तथा इस आरोप में उनके विरुद्ध वर्ष 2017 में पंतनगर थाने में भारतीय दंड संहिता की धारा 420, 465, 467, 468, 471, 474, 120बी/34 एवं 8/9 भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मामला पंजीकृत है।

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नवीन समाचार, नैनीताल, 1 नवंबर 2019। जिला एवं सत्र न्यायाधीश तथा विशेष न्यायाधीश भ्रष्टाचार निवारण राजीव कुमार खुल्बे की न्यायालय में शुक्रवार को एनएच-74 घोटाला प्रकरण में सुनवाई करते हुए दोनों आरोपियों के खिलाफ गैर जमानती वारंट (एनबीडब्लू) जारी करने के आदेश दिए। वहीं, न्यायालय में मौजूद अन्य सभी 22 आरोपियों को संबंधित धाराओं से आरोपित किया गया। अभियोजन पक्ष की ओर से डीजीसी सुशील कुमार शर्मा न्यायालय में उपस्थित रहे। मामले की अगली सुनवाई 14 नवंबर को होगी, इस दिन आरोपियों के खिलाफ साक्ष्य प्रस्तुत किए जाएंगे। न्यायालय ने आरोपी डीपी सिंह और तीरथ पाल सिंह के अधिवक्ता की ओर से दी गई हाजिरी माफी को निरस्त कर दिया।

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-आरोप तय होने के बाद सुनवाई पर उपस्थित न होने व हाजिरी माफी प्रार्थना पत्र भी न लगाने पर अदालत ने की कड़ी कार्रवाई
नवीन समाचार, नैनीताल, 10 अक्टूबर 2019। जिला एवं सत्र न्यायाधीश तथा विशेष न्यायाधीश भ्रष्टाचार निवारण राजीव कुमार खुल्बे की अदालत ने प्रदेश के बहुचर्चित एनएच-74 के मुआवजा घोटाला मामले में चार आरोपितों की अनुपस्थिति व हाजिरी माफी प्रार्थना पत्र तक न देने पर उनके खिलाफ गैर जमानती वारंट (एनबीडब्ल्यू) जारी करने के आदेश दे दिए हैं। जिन आरोपितों के खिलाफ एनबीडब्लू जारी हुआ है, उनमें काश्तकार चरन सिंह, ओम प्रकाश, मनदीप सिंह व एक अन्य आरोपित शामिल है।

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उल्लेखनीय है कि मामले में जिला न्यायालय ने पिछली तिथि पर आरोपितों के खिलाफ आरोप तय कर दिये थे। इसके बाद बृहस्पतिवार को मामले की सुनवाई तय थी। इस दौरान मामले में आरोपित 24 में से 15 आरोपी न्यायालय में उपस्थित हुए। जबकि पांच आरोपियों ने अधिवक्ता के माध्यम से हाजिरी माफी का प्रार्थना पत्र दिया। वहीं चार न तो अदालत में उपस्थित हुए, न ही उन्होंने उपस्थित न हो पाने का कोई प्रार्थना पत्र ही दिया। इस पर न्यायालय ने कड़ा रुख दिखाते हुए उनके खिलाफ एनबीडब्लू जारी करने के आदेश दिये। अभियोजन पक्ष की ओर से डीजीसी सुशील कुमार शर्मा न्यायालय में उपस्थित रहे।

यह हैं मामले में आरोपित व उन पर लगी धाराएं :

तत्कालीन विशेष भूमि अध्याप्ति अधिकारी-पीसीएस अधिकारी दिनेश प्रताप सिंह, एसडीएम भगत सिंह फौनिया, पेशकार संजय कुमार चौहान व विकास कुमार अनुसेवक राम अनुज, संग्रह अमीन अनिल कुमार, तहसीलदार मदन मोहन पलड़िया व भोले लाल के साथ ही एसडीएम अनिल कुमार व नंदन सिंह नगन्याल, तहसीलदार मोहन सिंह, पेशकार संत राम, चकबंदी अधिकारी अमर सिंह व गणेश तथा तीरथ पाल सिंह के विरुद्ध भारतीय दंड संहिता की धारा 167, 218, 219, 409, 420, 465, 466, 471, 120बी, 34 तथा 13(1)(घ) पीसी एक्ट व 13(2) के अंतर्गत तथा कास्तकार चरन सिंह, दलाल जीशान, ओम प्रकाश, डाटा इंट्री ऑपरेटर अर्पण कुमार, विक्रमजीत सिंह, मनदीप सिंह, हरजिंदर सिंह, दिलबाग व हीरा लाल के विरुद्ध भारतीय दंड संहिता की धारा 420, 465, 466, 471, 474, 120बी, 34 व 8/9 पीसी एक्ट के तहत आरोप तय किये गये हैं।

यह भी पढ़ें : 15 सरकारी अधिकारियों व 9 दलालों-कास्तकारों पर आरोप तय

नवीन समाचार, नैनीताल, 25 सितंबर 2019। जिला एवं सत्र न्यायाधीश तथा विशेष न्यायाधीश भ्रष्टाचार निवारण राजीव कुमार खुल्बे की अदालत ने प्रदेश के करीब 200 करोड़ रुपए के बहुचर्चित एनएच-74 मुआवजा घोटाला मामले में 15 अधिकारियों सहित 24 लोगों पर आरोप तय कर दिये हैं।  उल्लेखनीय है कि पिछली सुनवाई पर आरोपितों की ओर से कहा गया कि एसआईटी के द्वारा उनके विरुद्ध दायर आरोप पत्र में लगाये गये आरोप निराधार हैं। वहीं जिला शासकीय अधिवक्ता सुशील कुमार शर्मा ने इसका विरोध करते हुए कहा कि आरोपित अधिकारियों ने पुरानी तिथियों पर कृषि भूमि को अकृषि दिखाकर कास्तकारों को लाभ पहुंचाकर राजकीय कोष को करोड़ों रुपए का नुकसान पहुंचाया।

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नवीन समाचार, नैनीताल, 3 जून 2019। जिला जज एवं विशेष न्यायाधीश भ्रष्टाचार निवारण नरेंद्र दत्त की अदालत ने सोमवार को एसआइटी द्वारा रविवार को गिरफ्तार किये गये दो किसानों को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया। जिला शासकीय अधिवक्ता-फौजदारी ने अदालत को बताया कि इनमें से एक आरोपित के खाते में एक करोड़ एवं दूसरे के खाते में करीब 35 करोड़ रुपये का लेन-देन हुआ है। बताया कि मामले में अब तक 26 आरोपित गिरफ्तार हुए हैं, जिसमें से एक की मौत हो चुकी है, जबकि अब भी करीब तीन दर्जन आरोपितों की गिरफ्तारी होनी है। कई के खिलाफ न्यायालय से वारंट भी जारी हो चुके हैं।
मालूम हो कि रविवार को मामले में किसान बलविंदर सिंह पुत्र दलजीत सिंह ग्राम पिन्नी खेड़ा ऊधमसिंह नगर व नन्हे पुत्र फकीरा निवासी केलाखेड़ा ऊधमसिंह नगर को गिरफ्तार कर रिमांड मजिस्ट्रेट अभय सिंह की अदालत में पेश किया था। आरोप है कि बलविंदर ने एनएच चौड़ीकरण में अपने दादा की भूमि को पुरानी तिथि में अकृषि कराकर दादा के खाते में करीब 34 करोड़ रुपये प्राप्त किये थे और दूसरे दिन ही 10 लाख डाटा इंट्री ऑपरेटर अर्पण कुमार के बैंक खाते में जमा कराये थे, जबकि एक फरार आरोपित जगदीश अरोड़ा ने 22 लाख रुपये इसके खाते में डाले थे। वहीं नन्हे पर 89 लाख प्राप्त करने के आरोप हैं। न्यायालय से कई बार गैर जमानती वारंट जारी होने के बाद भी बलविंदर की गिरफ्तारी नहीं होने पर न्यायालय ने सख्त रवैया अपनाया था।

यह भी पढ़ें: एनएच-74 घोटाले में एसआईटी ने दबोचा 1.31 करोड़ रुपये के लेनदेन का आरोपित, कोर्ट ने जेल भेजा

नवीन समाचार, नैनीताल, 15 मई 2019। एनएच-74 के बहुचर्चित मुआवजा घोटाले में बुधवार को एसआईटी ने एक और आरोपित बलदेव सिंह को गिरफ्तार कर विशेष न्यायाधीश भ्रष्टाचार निवारण-जिला एवं सत्र न्यायाधीश नरेंद्र दत्त की अदालत में पेश किया। अदालत ने आरोपित को 27 मई तक के लिए न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया है। आरोपित पर इस घोटाले के मुख्य आरोपित तत्कालीन विशेष भूमि अध्याप्ति अधिकारी से करीब 1.31 करोड़ के लेने और उसके बदले में दो ब्लेंक चेक देने का आरोप है।
मामले में अभियोजन पक्ष की ओर से जिला शासकीय अधिवक्ता-फौजदारी सुशील कुमार शर्मा ने अदालत को बताया कि एनएच-74 घोटाले में ग्राम चीकाघाट जिला ऊधमसिंह नगर के 40 वर्ष पूर्व दिवंगत हो चुके थारू जनजाति के मुरली सिंह की खसरा संख्या 54 की जमीन धारा 143 की कार्रवाई तत्कालीन एसडीएम भगत सिंह फोनिया से कराई गयी, और इसका मुआवजा एक करोड़ 30 लाख 97 हजार 700 रुपये दिखाए गये। इस धनराशि को तत्कालीन विशेष भूमि अध्याप्ति अधिकारी दिनेश प्रताप सिंह ने इसी गांव के निवासी आरोपित आरोपित बलदेव सिंह पुत्र प्रीतम सिंह से 2 ब्लेंक चेक लेकर उसके खाते में डलवा दिये, और बाद में उन चेकों से 36 लाख 20 हजार व 72 लाख 40 हजार यानी कुल एक करोड 9 लाख रुपये वापस निकाल लिये। आरोपित बलदेव सिंह ने न्यायिक रिमांड के दौरान बताया कि उसे डरा धमकाकर यह कार्य कराया गया।

यह भी पढ़ें : जेल से बाहर निकले डीपी सिंह के अनुरोध पर आगे बढ़ी आरोप तय होने की तिथि

नवीन समाचार, नैनीताल, 8 मार्च 2019। जिला एवं सत्र न्यायाधीश एवं विशेष न्यायाधीश भ्रष्टाचार निवारण नरेंद्र दत्त की अदालत में एनएच-74 मुआवजा घोटाला मामले में शुक्रवार को मुख्य आरोपित डीपी सिंह समेत अन्य आरोपितों पर आरोप तय नहीं हो सके। शुक्रवार की ओर से डीपी सिंह के द्वारा अदालत से कहा गया कि वह हाल ही में जेल से बाहर निकला है, इसलिए अपने अधिवक्ताओं से बात नहीं कर पाया है। इसलिए सुनवाई की तिथि आगे बढ़ा दी जाए। अदालत ने अगली सुनवाई दो-तीन अप्रैल नियत की है।
उल्लेखनीय है कि एसआइटी ने दस मार्च 2017 को एनएच घोटाला मामले में तत्कालीन विशेष भूमि अध्याप्ति अधिकारी डीपी सिंह, एसडीएम अनिल शुक्ला समेत अन्य आरोपितों के खिलाफ पंतनगर थाने में मुकदमा दर्ज किया था। आरोप था कि इन अधिकारियों ने दलालों व बिचौलियों से मिलीभगत कर मुआवजा निर्धारण में वित्तीय अनियमितताएं की। भूमि अभिलेखों में हेराफेरी की। राजस्व हानि तथा सरकारी धन का दुरुपयोग किया। भूमि का स्वरूप बदलकर मुआवजा आठ दस गुना अधिक दिया गया। इस मामले में जेल में बंद अधिकांश आरोपितों की हाई कोर्ट से जमानत मंजूर हो चुकी है। शुक्रवार को इस घोटाले में मुख्य आरोपित डीपी सिंह समेत 12, अनिल शुक्ला समेत छह, विक्रमजीत सिंह दो, पीसीएस तीर्थपाल समेत पांच आरोपितों के खिलाफ आरोप तय होने थे। सुनवाई के दौरान डीपी सिंह ने अदालत से समय देने की गुजारिश की। कहा कि वह हाल ही में जमानत मंजूर होने के बाद जेल से रिहा हुए हैं, लिहाजा समय दिया जाए। डीजीसी फौजदारी सुशील कुमार शर्मा के अनुसार कोर्ट ने अगली सुनवाई दो-तीन अप्रैल नियत कर दी है। इसके अलावा कोर्ट ने एनएच घोटाला मामले में फरार किसान हरजिंदर सिंह के खिलाफ जमानती वारंट जारी किया है। कोर्ट ने अगली पेशी में कुछ आरोपितों को हाजिरी माफी दे दी है।

यह भी पढ़ें : 200 करोड़ के एनएच-74 मुआवजा घोटाले में तत्कालीन प्रभारी तहसीलदार की जमानत भी मंजूर

नवीन समाचार, नैनीताल, 6 मार्च 2019। 200 करोड़ के एनएच-74 मुआवजा घोटाले में आरोपितों को जमानत मिलने का सिलसिला अब चल पड़ा लगता है। अब बुधवार को उत्तराखंड हाई कोर्ट ने घोटाले के एक और आरोपित तत्कालीन प्रभारी तहसीलदार काशीपुर  मनमोहन पडलिया के प्रार्थना पत्र पर सुनवाई करते हुए उनकी जमानत भी मंजूर कर ली है। मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति लोकपाल सिंह की एकलपीठ में हुई।

उल्लेखनीय है कि एसआईटी के सीओ स्वतंत्र कुमार द्वारा 10 मार्च 2017 को  डीपी सिंह सहित सभी आरोपियों के खिलाफ पंतनगर थाने में एफआईआर  लिखाई गयी थी। जिसमें मुआवजा निर्धारण में वित्तीय अनियमितता, भूमि अभिलेखों में हेराफेरी, राजस्व हानि और सरकारी धन का दुरुपयोग करने का आरोप लगाया गया था। प्राथमिकी में यह भी कहा गया था कि अकृषि प्रयोजन की भूमि के एवज में भूमि का स्वरूप बदलकर उसका मुआवजा आठ से दस गुना अधिक दिया गया । जांच करने पर तहसीलदार नायब तहसीलदार कानूनगो पथरी के लेखपाल चकबन्दी अधिकारी सहायक चकबन्दी अधिकारी और लेखपाल आदि अधिकारी दोषी पाये गए थे । इधर घोटाले में लिप्त अधिकांश लोगो की जमानत हो चुकी है।

यह भी पढ़ें : 11 माह से जेल में बंद प्रिया शर्मा को हाई कोर्ट से भी मिली जमानत

नवीन समाचार, नैनीताल, 1 मार्च 2019। सर्वोच्च न्यायालय द्वारा गत 21 फरवरी को जमानत देने के बाद शुक्रवार को उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने भी मार्च 2018 से जेल में बंद एनएच 74 घोटाले की आरोपी प्रिया शर्मा को एक अन्य मामले में जमानत पर रिहा करने का आदेश दिया है। सुप्रीम कोर्ट से भी जमानत मिल चुकी है। इसके बाद प्रिया की रिहाई का रास्ता साफ हो गया है। मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति मनोज कुमार तिवारी की एकलपीठ में हुई।

उल्लेखनीय है कि इससे पूर्व शीर्ष अदालत ने कहा कि आरोपी प्रिया शर्मा महिला है और मार्च 2018 से पुलिस की कस्टडी में है। उसके खिलाफ चार्ज शीट दाखिल की जा चुकी है और 16 फरवरी 2019 को उसके खिलाफ ट्रायल कोर्ट आरोप भी तय कर चुकी है।

बिल्डर प्रिया शर्मा

उल्लेखनीय है कि एलाइड इंफ़्रा प्राइवेट लिमिटेड की एमडी प्रिया शर्मा के खिलाफ 26 जनवरी 2018 को रुद्रपुर थाने में एफआईआर दर्ज कराई गई थी। अग्रिम जमानत याचिका उत्तराखंड हाईकोर्ट ने खारिज होने के बाद प्रिया शर्मा ने हाईकोर्ट के आदेश के खिलाफ सर्वोच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया था। प्रिया शर्मा को बीते वर्ष गुड़गांव के सेक्टर 29 स्थित डीएलएफ मॉल से गिरफ्तार किया गया था। इस दौरान पुलिस ने कंपनी के ही डायरेक्टर सुधीर चावला को भी गिरफ्तार किया था। गिरफ्तारी के बाद प्रिया ने हाईकोर्ट में भी जमानत याचिका दाखिल की थी। हाईकोर्ट से राहत न मिलने प्रिया शर्मा ने सुप्रीम कोर्ट की शरण ली। गुरुवार को प्रिया की याचिका पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने प्रिया को जमानत दी है।

यह भी पढ़ें : पिछले 15 माह से जेल में बंद डीपी सिंह को मिली जमानत

डीपी सिंह को न्यायालय में पेश करने ले जाती पुलिस (फाइल फोटो)

नवीन समाचार, नैनीताल, 21 फरवरी 2019। करीब 200 करोड़ के एनएच-74 मुआवजा घोटाला मामले में मुख्य आरोपित डीपी सिंह को जमानत  मिल गई है उत्तराखंड उच्च न्यायालय की न्यायाधीश न्यायमूर्ति मनोज तिवारी की अदालत ने 24 नवंबर 2017 से जेल में बंद नैनीताल-उधम सिंह नगर जनपद के तत्कालीन विशेष भूमि अध्यापित अधिकारी डीपी सिंह की जमानत अर्जी बृहस्पतिवार को स्वीकार कर ली है। वहीं इस मामले में अन्य आरोपित बिल्डर सुधीर चावला को आज जमानत नहीं मिल पाई। उसकी जमानत अर्जी पर सुनवाई अब 1 मार्च को होगी। उल्लेखनीय है कि डीपी सिंह पर भ्रष्टाचार निवारण अदालत को आगामी 8 मार्च को आरोप तय करते हैं।

उल्लेखनीय है कि एनएच 74 भूमि घोटाले के सम्बन्ध में तत्कालीन कुमाऊँ आयुक्त डी सेंथिल पांडियन के निर्देश पर ऊधम सिंह नगर के अपर जिला अधिकारी प्रताप साह ने तत्कालीन राजस्व व चकबन्दी अधिकारियो के खिलाफ 10 मार्च 2017 में पंत नगर थाने में दर्ज करायी थी। इस एफआईआर के आधार पर 23 नवम्बर 2017 को डीपी सिंह ने एसएसपी/एसआईटी के समक्ष आत्म समर्पण किया था और 24 नवम्बर 2017 को नैनीताल के जिला एवं सत्र न्यायाधीश व विशेष न्यायाधीश भ्रष्टाचार निवारण की अदालत में पेश कर जेल भेज दिया। जिला सत्र न्यायाधीश ने 15 जनवरी 2018 को उनकी जमानत याचिका निरस्त कर दी थी। इस आदेश के खिलाफ डीपी सिंह ने हाई कोर्ट में जमानत प्रार्थरना पत्र पेश किया था जिसमे उसने कहा है कि एफआईआर में उनका नाम नही है। इसके अलावा भूमि मुआवजा का निर्धारण विशेष भूमि अध्यप्ति अधिकारी कार्यालय ने किया। उसके खिलाफ कास्तकारों ने उच्च अधिकारी के समक्ष अपील की तो कास्तकारों को बढ़ी हुई दर से मुआवजा दिया गया। गुरुवार को याचिका कर्ता को और उनके अधिवक्ता द्वारा कोर्ट को अवगत कराया कि आरोपी पिछले 15 माह से जेल में है और इस मामले में उनसे वरिष्ठ अधिकारीयों के नाम इस घोटाले में आये हैं।

यह भी पढ़ें : डीपी सिंह पर नहीं हो पाये आरोप तय, अब आठ मार्च को होंगे

नवीन समाचार, नैनीताल, 18 फरवरी 2019। 200 करोड़ से अधिक धनराशि के प्रदेश के बहुचर्चित एनएच 74 मुआवजा घोटाला मामले में मुख्य आरोपित नैनीताल व ऊधमसिंह नगर जिले के तत्कालीन विशेष भूमि अध्याप्ति अधिकारी पीसीएस अधिकारी डीपी सिंह पर सोमवार को विशेष न्यायाधीश भ्रष्टाचार निवारण जिला एवं सत्र न्यायाधीश नरेंद्र दत्त की अदालत में आरोप तय होने थे, किंतु बचाव पक्ष की ओर से समय मांगने के बाद आज आरोप तय नहीं हो पाये। इस पर अभियोजन पक्ष की ओर से भी मामले के अन्य आरोपितों के साथ आगामी 8 मार्च को यह मामला सुने जाने का अनुरोध किया गया, ताकि सभी के मामले साथ सुने जा सकें। जिसे न्यायालय ने मान लिया। मामले की अगली सुनवाई अब 8 मार्च को होगी।
मामले के अनुसार 10 मार्च 2017 को डीपी सिंह सहित अन्य आरोपियों के खिलाफ पंतनगर थाने में मुआवजा निर्धारण में वित्तीय अनियमितता, भूमि के अभिलेखों में हेराफेरी कर पुरानी तिथि में कृषि भूमि का अकृषक दिखाकर अधिक मुआवजा दिलाकर राजस्व को हानि और सरकारी धन का दुरुपयोग करने के आरोप में प्राथमिकी दर्ज की गई थी। इसके बाद डीपी सिंह ने काफी दिन पुलिस को छकाने के बाद 23 नवंबर 2017 को तत्कालीन एसएसपी ऊधम सिंह नगर डा. सदानन्द दाते के कार्यालय में आत्मसमर्पण किया था। जिसके बाद 24 नवंबर को उसे न्यायालय के आदेश पर जेल भेजा गया था। मामले में अभियोजन पक्ष सिंह सहित निलंबित एसडीएम भगत सिंह फोनिया, तत्कालीन प्रभारी तहसीलदार मदन मोहन पड़लिया, सेवानिवृत्त प्रभारी तहसीलदार भूरे लाल, पेशकार विकास चौहान, संग्रह अमीन अनिल कुमार, डाटा इंट्री ऑपरेटर अर्पण कुमार, स्टांप वेंडर जीशान, अनुसेवक राम समझ, राजस्व अहलमद संजय कुमार तथा काश्तकार ओम प्रकाश व चरण सिंह के विरुद्ध भारतीय दंड संहिता की धारा 167, 218 व अन्य के तहत आरोप पत्र दाखिल कर चुकी है। इनमें से सिंह को छोड़कर अन्य अनेक आरोपितों को उच्च न्यायालय से जमानत मिल चुकी है।

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डीपी सिंह को न्यायालय में पेश करने ले जाती पुलिस (फाइल फोटो)
बिल्डर प्रिया शर्मा व सुधीर चावला।

नवीन समाचार, नैनीताल, 16 फरवरी 2019। विशेष न्यायाधीश भ्रष्टाचार निवारण जिला एवं सत्र न्यायाधीश नरेंद्र दत्त की अदालत ने प्रदेश के बहुचर्चित 200 करोड़ से अधिक रुपये के एनएच-74 मुआवजा घोटाला मामले में आरोपित बिल्डर प्रिया शर्मा और सुधीर चावला के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा-420, 467, 471, 120 बी तथा भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत आरोप तय किए गए हैं। आरोप तय कर दिए हैं। अदालत ने दोनों की मौजूदगी में आरोप तय किए। अब दो मार्च से दोनों आरोपितों के खिलाफ अदालत में अभियोजन पक्ष के द्वारा साक्ष्य पेश किए जाएंगे। दोनों आरोपितों पर आपराधिक साजिश रचकर फर्जी एवं कूटरचित दस्तावेज को असली रूप में पेश कर सरकार को राजस्व का नुकसान पहुंचाने के आरोप तय हुए हैं।
शनिवार को हुई सुनवाई में आरोपित प्रिया व सुधीर पर आरोप तय हुआ है कि उन्होंने 25 जून 2016 को काशीपुर ऊधमसिंह नगर के कुंडा थाना क्षेत्र में एनएच-74 चौड़ीकरण में सरकार से अधिक मुआवजा हासिल करने के लिए राजस्व अधिकारी-कर्मचारी, किसानों, बिचौलियों व दलालों से मिलकर पुरानी तिथियों में धारा-143 के आधार पर कृषि भूमि को अकृषि घोषित कर कई गुना अधिक मुआवजा प्राप्त कर सरकार को हानि पहुंचाई। साथ ही मुआवजे से प्राप्त कमीशन की धनराशि को सही दर्शाने के मकसद से गलत इकरारनामे बनाए। आरोपितों पर यह भी आरोप लगा है कि उन्होंने जीशान नाम के अर्जनवीश के साथ सौ रुपये के स्टांप पर फाजलपुर महरौला स्थित खेत नंबर-94 को उसके स्वामी जगशरन सिंह व मुख्तारेराम गुरुप्रीत सिंह की जगह प्रिया शर्मा के नाम पर अभिलेख में दर्शाते हुए 1450 वर्ग मीटर प्लॉट का सौदा 3.62 करोड़ रुपये में करने का लिखित समझौता किया, और इसके ऐवज में डेढ़ करोड़ रुपये अग्रिम प्राप्त किये। यही नहीं प्रिया की कंपनी एलाइड इन्फ्रा एंड आदर्श द्वारा गुरुप्रीत के मध्य गुरुप्रीत के फर्जी हस्ताक्षर करके फर्जी अनुबंध किया। इसके अलावा दोनों पर यह आरोप भी लगा हैं कि उन्होंने ग्राम कुंडा के किसान अजमेर सिंह, सुखदेव सिंह आदि पांच भाइयों की कृषि भूमि को आपराधिक षड्यंत्र कर पुरानी तिथियों में कृषि से अकृषि के रूप में परिवर्तित कर 23 करोड़ रुपये के मुआवजे का भुगतान कराया और इसका 40 फीसद कमीशन बिचौलिए जीशान के खाते में तथा 21 जून को किसान सुखदेव द्वारा एक करोड़ 35 लाख 57 हजार रुपये, गुरुवेल द्वारा एक करोड़ 35 लाख 57 हजार अपने खाते में हस्तांतरित कराए। जीशान द्वारा 24 जून को एलाइड प्लस इन्फ्रा के खाते में 50 लाख आरटीजीएस द्वारा ट्रांसफर किए, और शेष धनराशि नगद ली। इसके अलावा भी आरोपितों के द्वारा लोक सेवक पर भ्रष्ट साधनों का असर डालने के लिए कमीशन लेकर राजस्व अधिकारियों को दिया गया।

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-विशेष न्यायाधीश भ्रष्टाचार निवारण नरेंद्र दत्त की अदालत ने खारिज की जमानत अर्जी
नवीन समाचार, नैनीताल, 23 जनवरी 2019। जिला एवं सत्र न्यायाधीश तथा विशेष न्यायाधीश भ्रष्टाचार निवारण नरेंद्र दत्त की अदालत ने बुधवार को एनएच-74 से जुड़े दो बड़े किसानों की जमानत याचिका खारिज कर दी है। दोनों किसानों पर कृषि भूमि को अकृषि दिखाकर शासन को 10 करोड़ रुपये का नुकसान पहुंचाने का आरोप है। उल्लेखनीय है कि अब तक जिला न्यायालय से एनएच-74 मुआवजा घोटाला मामले में किसी भी आरोपित को जमानत नहीं मिली है।
उल्लेखनीय है कि विशेष न्यायाधीश भ्रष्टाचार निवारण नरेंद्र दत्त की अदालत में बुधवार को दो आरोपित किसानों विक्रमजीत सिंह और मनदीप सिंह निवासी ग्राम गिन्नीखेड़ा आईटीआई काशीपुर की ओर से जमानत प्रार्थनापत्र पेश किया गया था। दोनों आरोपितों के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 167, 218, 219, 409, 420, 465, 466, 467, 468, 471, 474, 120 बी व 134 तथा 13 एक घ 8/9 भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया था। आरोप है कि एनएच में शामिल जमीन में आरोपियों की बसखेड़ा में मौजूद कृषि भूमि भी शामिल है। वाद में तत्कालीन एसडीएम पीसी दुम्का ने जांच कर रिपोर्ट दी। 28 फरवरी 2013 की रिपोर्ट में कहा है कि एनएच में गई संबंधित की जमीन कृषि भूमि है। जबकि खसरा नम्बर 165 में अधिग्रहित भूमि से इतर शीड प्लांट भी स्थित है। उधर एसएलएओ दिनेश प्रताप सिंह की ओर से 11 मई 2016 को दिए निर्णय में कृषि दर से उक्त भूमि का 14 लाख 17 हजार 831 रुपये का भुगतान का निर्णय दिया गया। जबकि 15 जुलाई 2016 को संशोधित निर्णय में 0.7806 हैक्टेयर का अकृषि दर से 10 करोड़ 14 लाख 24 हजार 962 रुपये भुगतान की संस्तुति की। इसके बाद उन्हें भुगतान कर दिया गया। अभियोजन पक्ष ने जांच रिपोर्ट का हवाला देते हुए बताया कि शीड प्लांट प्रस्तावित एनएच से 108 मीटर दूर है। ऐसे में काश्तकारों ने अधिकारियों के साथ मिलकर धोखे से अतिरिक्त धनराशि प्राप्त की। विशेष न्यायाधीश भ्रष्टाचार निवारण नरेंद्र दत्त की अदालत ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद आरोपितों की जमानत अर्जी खारिज कर दी।

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भ्रष्टाचार निवारण अदालत के बाहर पुलिस की मौजूदगी में बिना हथकड़ी अपनी पत्नी के साथ आरोपित बिल्डर सुधीर चावला।

 

 

नवीन समाचार नैनीताल, 8 जनवरी 2019।  एनएच-74 मुआवजा घोटाले के आरोपी, खुद पत्नी सहित ऐश कर दो पुलिसकर्मियों को निलंबित करा चुका बिल्डर सुधीर चावला को नैनीताल से पौड़ी जेल शिफ्ट कर दिया है। जेलर रमेश भारती की शिकायत पर डीएम वीके सुमन के आदेश पर यह कार्रवाई हुई। एनएच-74 घोटाले में बिल्डर प्रिया शर्मा और उसके साझेदार सुधीर चावला को गुड़गांव के एक मॉल से गिरफ्तार किया था। इसके बाद से वह नैनीताल जेल में बंद था। 27 जनवरी 2018 को प्रिया तथा सुधीर के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया। जिसके बाद उनके खिलाफ लगातार पांच मुकदमे दर्ज किए गए। इस बीच नैनीताल जेल के बंदी सुधीर से परेशान थे। इस संबंध में जेलर ने डीएम को शिकायत भी की थी। बीते दिनों कोर्ट में पेशी के दौरान सुधीर की तबीयत अचानक बिगड़ गई। इसके बाद उसे अस्पताल ले जाया गया। इस दौरान शाम को एक वीडियो वायरल हुआ, जिसमें सुधीर एक महिला के साथ पुलिसकर्मियों की मौजूदगी में खाना खा रहा था। इस मसले में दो पुलिसकर्मियों को सस्पेंड भी किया जा चुका है। इधर मंगलवार शाम 7:35 बजे डीएम वीके सुमन के निर्देश पर सुधीर चावला को नैनीताल जेल से निकाला गया। जेलर भारती के अनुसार उसे पौड़ी जेल शिफ्ट कर दिया है।

पूर्व समाचार : बिल्डर को पुलिस कस्टडी में मौज कराने वाले 2 पुलिस कर्मी निलंबित

नवीन समाचार नैनीताल, 5 जनवरी 2019।  एनएच 74 घोटाले के आरोपी सुधीर चावला का पुलिस कस्टडी के वाबजूद नैनीताल रोड के एक रेस्टोरेंट में अपनी पत्नी साथ लंच करना ओर इसमे पुलिस के सिपाहियों द्वारा मदद करना ओर इसका सोशल मीडिया ओर मीडिया में ये बात फेलते ही जिले के कप्तान ने तुरंत एक्शन लिया है l सुनील कुमार वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक नैनीताल द्वारा कानि0 तालिब हुसैन थाना वनभूलपुरा व कानि0 ललित मोहन पुलिस लाईन नैनीताल को मुल्जिम ड्यूटी के दौरान एनएच-74 घोटाले के मुख्य आरोपी सुधीर चावला को एक रेस्टोरेंट में खाना खिलाने का दोषी पाते हुए तत्काल प्रभाव से निलम्बित किया गया। विदित रहे कि इस केस की दूसरी अभियुक्त प्रिया भी जेल में बंद हैं।

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नवीन समाचार, नैनीताल 5 जनवरी 2019। जिला जज एवं विशेष न्यायाधीश भ्रष्टाचार निवारण नरेंद्र दत्त की कोर्ट ने एनएच घोटाला मामले में आरोपित बिल्डर सुधीर चावला को पेशी में वीआइपी ट्रीटमेंट मिलने तथा रेस्टोरेंट में पुलिस कर्मियों के साथ दावत उड़ाने के वायरल वीडियो मामले का स्वत: संज्ञान लिया है। कोर्ट ने इसे बेहद गंभीर मानते हुए डीजीपी, डीआइजी कुमाऊं व एसएसपी नैनीताल को पत्र भेजकर मामले में शामिल पुलिस कर्मियों पर अनुशासनात्मक कार्रवाई नहीं बल्कि सुसंगत धाराओं में मुकदमा दर्ज करने के निर्देश दिए हैं। पुलिस अफसरों को भेजे कड़े पत्र में कोर्ट ने इसे अदालत की अवमानना करार दिया है। साथ ही कहा है कि मुजरिम पुलिस की नहीं बल्कि न्यायिक हिरासत में था। इस तरह की लापरवाही व कानून के साथ मखौल कोर्ट बर्दास्त नहीं करेगी। डेढ़ पेज के आदेश में अदालत ने वीडियो में शामिल पुलिस कर्मियों पर सिर्फ अनुशासनात्मक कार्रवाई कर इतिश्री न करने को कहा है। कोर्ट ने कहा है कि मामले में सुसंगत धाराओं में मुकदमा दर्ज किया जाए। इस प्रकार सख्त कार्रवाई की जाए, कि भविष्य में ऐसे मामलों की पुनरावृत्ति ना हो।

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नवीन समाचार, नैनीताल 4 जनवरी 2019। लगता है कानून सबके लिए अलग अलग है। 211.85 करोड़ के बहुचर्चितएनएच-74 भूमि मुआवजा घोटाले के मुख्य आरोपी बिल्डर सुधीर चावला को पुलिसकर्मियों ने हल्द्वानी के नैनीताल रोड स्थित वुडपीकर रेस्टोरेंट में वीआईपी ट्रीटमेंट देते हुए उसकी पत्नी के साथ खाना खाने की पूरी छूट दी। पुलिसकर्मी खुद भी होटल में खाना खाते दिखाई दिए हैंं। इस मामले का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने पर एसएसपी सुनील कुमार मीणा ने एसपी सिटी को जांच के निर्देश दिए। इधर, रात में पुलिसकर्मियों ने आरोपी को इलाज के लिए एसटीएच में भर्ती कराया।
आरोपी सुधीर नैनीताल जेल में बंद है। आरोप है कि नैनीताल से रुद्रपुर कोर्ट में पेशी के दौरान पुलिसकर्मी उसे वीआईपी जैसी सुविधा प्रदान करते हैं। उसकी देखरेख के लिए पत्नी भी आती है। बृहस्पतिवार को नैनीताल जिला कोर्ट में पेशी के दौरान भी उसकी पत्नी उसके साथ थी । बिल्डर के मामले में सोशल मीडिया पर दो-तीन वीडियो बृहस्पतिवार को वायरल हुए हैं, जिनमें सुधीर अपनी पत्नी के साथ नैनीताल रोड स्थित वुडपीकर रेस्टोरेंट में खाना खाता दिखाई दे रहा है। वहीं उसके साथ अन्य टेबल पर पुलिसकर्मी भी लजीज व्यंजन का आनंद ले रहे हैं। यह वीडियो दो जनवरी के बताए जा रहे हैं। नैनीताल में भ्रष्टाचार निवारण के मामले में बृहस्पतिवार को अदालत में सुधीर को पेशी के लिए लाया गया। पेशी के दौरान अनियमितता की शिकायत भी पुलिस अधिकारियों को मिली है। नैनीताल में भ्रष्टाचार निवारण अदालत में पेशी के दौरान जब अन्य कैदी कोर्ट के लॉकअप में सर्दी में ठिठुर रहे थे, सुधीर अपनी पत्नी के साथ बिना हथकड़ी के धूप सेंक रहा था और कोर्ट में पेश होते ही बीमारी का दावा कर कोर्ट की अनुमति से अस्पताल चला गया और आरोप तय होने से फिर छूट मांग ली। सूत्रों के अनुसार  जेल में मोबाइल से लेकर हर सुविधा उसे उपलब्ध है। उसका रेस्टोरेंट में भोजन करना जेल मैनुअल और पुलिस मैनुअल का उल्लंघन है। जबकि आम कैदी जेल की रोटी और दाल खाने को मजबूर हैं वहीं सुधीर को जेल मे भी लजीज व्यंजन उपलब्ध हैं। एसएसपी सुनील कुमार मीणा ने बताया कि अभियुक्त को होटल में खाना खिलाने का वीडियो वायरल होने का मामला संज्ञान में आया है। अभियुक्त के साथ दो पुलिस कर्मियों की ड्यूटी लगी थी। इस मामले में लापरवाही की जांच एसपी सिटी अमित श्रीवास्तव को सौंपी गई है। एसपी सिटी की रिपोर्ट के आधार पर कार्रवाई की जाएगी।
 
 

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जिला न्यायालय में पेशी के दौरान बैठा एनएच-74 मुआवजा घोटाले का आरोपित बिल्डर सुधीर चावला।

नवीन समाचार, नैनीताल, 3 जनवरी 2018। प्रदेश के बहुचर्चित 211.85 करोड़ रुपये के एनएच-74 भूमि मुआवजा घोटाले में बृहस्पतिवार को दो आरोपितों-बिल्डर प्रिया शर्मा व सुधीर चावला को विशेष न्यायाधीश भ्रष्टाचार निवारण की अदालत द्वारा उन पर लगे आरोप सुनाये जाने थे। दोनों की अदालत में पेशी भी हुई, परंतु आरोप सुनाए नहीं जा सके। कारण, सुनवाई के दौरान ही एक आरोपित बिल्डर सुधीर चावला संभवतया सुनाये जाने वाले आरोपों के तनाव में आ गया और उसे अदालत में पेशी के दौरान ही सीने में दर्द एवं उल्टी हो गई, साथ ही रक्तचाप भी बढ़ गया। इस पर अदालत के आदेश पर पुलिस सुरक्षा में सुधीर को मुख्यालय स्थित बीडी पांडे जिला चिकित्सालय ले जाया गया। जहां पर वरिष्ठ फिजीशियन डा. एमएस दुग्ताल ने उसकी जांच एवं प्राथमिक उपचार किया, और हृदय रोग विशेषज्ञ को दिखाने की सलाह देते हुए उसे हायर सेंटर के लिए रेफर कर दिया। लेकिन प्राथमिक उपचार के बाद स्वास्थ्य सामान्य होने पर उसे फिर से अदालत में पेश किया गया। जिला शासकीय अधिवक्ता फौजदारी सुशील कुमार शर्मा ने बताया कि इसके बाद विशेष न्यायाधीश भ्रष्टाचार निवारण-जिला एवं सत्र न्यायाधीश नरेंद्र दत्त की अदालत ने नैनीताल जिला कारागार के जेलर को सुधीर का नियमानुसार उपचार कराने के आदेश दिए। साथ ही मामले की अगली सुनवाई के लिए 25 जनवरी की तिथि नियत कर दी। इस तरह आज सुधीर एवं प्रिया शर्मा पर लगे आरोपों को आरोपित नहीं किया जा सका। वहीं डा. दुग्ताल ने बताया कि अस्पताल लाये जाने के दौरान सुधीर का रक्तचाप भी बढ़ा हुआ था, तथा सीने का ईको व ईसीजी कराने की जरूरत थी, किंतु चिकित्सालय में हृदय रोग विशेषज्ञ न होने के कारण उच्च केंद्र के लिए रेफर किया गया। इसके बाद पुलिस नैनीताल से रात में रेफर कराने के बाद उसे लेकर एसटीएच हल्द्वानी आई। अस्पताल के एमएस डॉ. अरुण जोशी ने बताया कि मरीज स्टेबल है। पहला ईसीजी सामान्य आया है। उसे मेडिसिन वार्ड में भर्ती कराया गया है। पहले भी उसे ब्लड प्रेशर, थायराइड, हार्ट की परेशानी रही है।

यह भी पढ़ें : निलंबित IAS अधिकारी पांडे जमानत के लिए फिर पहुंचे हाई कोर्ट

नवीन समाचार, नैनीताल, 8 जनवरी 2019। देश के बहुचर्चित राष्ट्रीय राजमार्ग-74 के मुआवजा घोटाला मामले में आरोपित आईएएस अधिकारी डा. पंकज कुमार पांडेय अग्रिम जमानत के लिए फिर से हाई कोर्ट पहुंच गए हैं । मालूम हो कि उनकी अंतरिम जमानत अर्जी शनिवार को विशेष न्यायाधीश भ्रष्टाचार निवारण एवं जिला एवं सत्र न्यायाधीश नरेंद्र दत्त की अदालत से खारिज हो गयी थी। इसके बाद डाॅ. पांडे पर गिरफ्तारी की तलवार लटक गई थी। उन पर आरोप है उधमसिंह नगर जनपद में जिलाधिकारी व बतौर आर्बिट्रेटर रहते हुए सरकारी स्कूल व पंचायत घर के अवैध कब्जेदारों के पक्ष में आदेश पारित किया।

 

पूर्व समाचारः आईएएस डा. पंकज पांडे की अग्रिम जमानत अर्जी खारिज, कभी भी हो सकती है गिरफ्तारी

नवीन समाचार नैनीताल, 5 जनवरी 2019। प्रदेश के बहुचर्चित राष्ट्रीय राजमार्ग-74 के मुआवजा घोटाला मामले में आरोपित आईएएस अधिकारी डा. पंकज कुमार पांडेय को विशेष न्यायाधीश भ्रष्टाचार निवारण एवं जिला एवं सत्र न्यायाधीश नरेंद्र दत्त की अदालत से राहत नहीं मिल पायी है। अदालत ने अब तक करीब 211.85 करोड़ रुपये के इस घोटाले में ऊधमसिंह नगर जिले के तत्कालीन डीएम डा. पांडेय की जमानत अर्जी को अभियोजन पक्ष की मजबूत पैरवी के बाद आधारहीन पाते हुए खारिज कर दिया। अभियोजन पक्ष की ओर से जिला शासकीय अधिवक्ता सुशील कुमार शर्मा ने जमानत अर्जी का पुरजोर विरोध करते हुए याची आईएएस अधिकारी डा. पांडेय की जमानत की दलीलों को आधारहीन एवं उनकी मामले में बड़े स्तर पर संलिप्तता बताई।

अब कभी भी हो सकती है गिरफ्तारी

नैनीताल। विदित हो कि निलंबित आईएएस डा. पांडेय ने पहले अपनी संभावित गिरफ्तारी पर रोक लगाने के लिए उत्तराखंड उच्च न्यायालय में अग्रिम जमानत के लिए प्रार्थना पत्र दिया था, जिस पर शुरू करते हुए उच्च न्यायालय ने उन्हें 30 अक्तूबर तक निचली अदालत में जमानत अर्जी दाखिल करने का समय देते हुए उनकी गिरफ्तारी पर रोक लगा दी थी। इसके बाद पांडेय ने 27 अक्तूबर को विशेष न्यायाधीश भ्रष्टाचार निवारण की अदालत में भारतीय दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 439 के तहत अपनी संभावित गिरफ्तारी पर रोक लगाने के लिए अग्रिम जमानत अर्जी दाखिल की थी। तब से यह मामला जिला न्यायालय-विशेष न्यायालय में चल रहा था और स्वाभाविक तौर पर उनकी गिरफ्तारी पर भी रोक लगी हुई थी। जमानत अर्जी खारिज होने के बाद माना जा रहा है कि अब कभी भी उनकी गिरफ्तारी हो सकती है।

शासन से भी चल रही है प्रशासनिक जांच, एसआईटी को भी मिल चुकी है अभियोग चलाने की अनुमति

नैनीताल। शासन की ओर से 17 अक्तूबर 2018 को मामले की जांच कर रही एसआईटी को पांडेय के खिलाफ अभियोग चलाने की अनुमति दी जा चुकी है, और 11 दिसंबर को पांडेय के खिलाफ प्रशासनिक जांच भी शुरू कर दी गयी है। जांच की जिम्मेदारी सचिव डा. भूपिंदर कौर औलख को दी गई है जिन्हें अगले माह यानी फरवरी माह के पहले पखवाड़े तक ही अपनी जांच रिपोर्ट देनी है।

अब तक जिला न्यायालय से किसी भी आरोपित को नहीं मिली जमानत

नैनीताल। 211.85 करोड़ रुपये के एनएच-74 मुआवजा घोटाला मामले में हालांकि कई आरोपितों को उच्च न्यायालय से जमानत मिल चुकी है, परंतु यह भी उल्लेखनीय तथ्य है कि जिला न्यायालय एवं विशेष न्यायाधीश भ्रष्टाचार निवारण की अदालत से अब तक एक भी आरोपित को जमानत नहीं मिली है। इसे अभियोजन पक्ष, खासकर जिला शासकीय अधिवक्ता सुशील कुमार शर्मा की मजबूत पैरवी का सुखद परिणाम माना जा रहा है।

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-मुख्य आरोपी डीपी सिंह, प्रिया शर्मा व सुधीर चावला सहित अन्य आरोपियों की जमानत याचिका में सुनवाई 11 फरवरी को 
नवीन समाचार, नैनीताल, 7 जनवरी 2019। उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने एनएच 74 घोटाले में लिप्त तीन आरोपी एसडीएम अनिल शुक्ला, स्टाम्प वेंडर जीशान व नायब तहसीलदार मोहन सिंह को न्यायमूर्ति मनोज कुमार तिवारी की एकलपीठ से जमानत दे दी है । मालूम हो कि 10 मार्च 2017 को डीपी सिंह सहित सभी आरोपियों के खिलाफ पंतनगर थाने में एफआईआर लिखाई गयी थी । मुआवजा निर्धारण में वित्तीय अनियमितता, भूमि के अभिलेखों में हेराफेरी, राजस्व हानि और सरकारी धन का दुरुपयोग करने तथा अकृषि प्रयोजन की भूमि के एवज में भूमि का स्वरूप बदलकर उसका मुआवजा आठ से दस गुना अधिक  देने का आरोप लगाया गया था। जाँच करने पर तहसीलदार नयाब तहसीलदार कानूनगो पथरी लेखपाल चकबन्दी अधिकारी सहायक चकबन्दी अधिकारी और लेखपाल और किसान आदि दोषी पाये गए थे। मालूम हो कि इस मामले में मुख्य आरोपी डीपी सिंह, प्रिया शर्मा व सुधीर चावला सहित अन्य आरोपियों की जमानत याचिका में सुनवाई 11 फरवरी की तिथि नियत की है।

 

आईएएस पंकज पांडे की अग्रिम जमानत पर सुनवाई पूरी, फैसला कल

नैनीताल। एनएच-74 मुआवजा घोटाला मामले में ही आरोपित आईएएस अधिकारी ऊधमसिंह नगर जिले के तत्कालीन डीएम डा. पंकज कुमार पांडे की अग्रिम जमानत पर सुनवाई बृहस्पतिवार को विशेष न्यायाधीश भ्रष्टाचार निवारण की अदालत में पूरी हो गयी। जिला शासकीय अधिवक्ता फौजदारी सुशील कुमार शर्मा ने बताया कि अब अदालत अग्रिम सुनवाई पर फैसला 5 जनवरी को सुना सकती है। विदित हो कि तत्कालीन कुमाऊं आयुक्त डी सेंथिल पांडियन के द्वारा की गयी जांच के उपरांत तत्कालीन एडीएम प्रताप साह के द्वारा पंतनगर चौकी सिडकुल में लिखित शिकायत दर्ज कराई थी।

प्रभारी तहसीलदार भोले लाल की जमानत अर्जी खारिज

नैनीताल। बृहस्पतिवार को एनएच-74 मुआवजा घोटाले के ही एक अन्य आरोपित, तत्कालीन प्रभारी तहसीलदार भोले लाल की जमानत अर्जी विशेष न्यायाधीश भ्रष्टाचार निवारण नरेंद्र दत्त की अदालत ने खारिज कर दी है। भोले लाल पर आरोप है कि उसने कृषक चरन सिंह की भूमि राजस्व कर्मियों से मिलकर गलत तथ्य प्रस्तुत कर अकृषक घोषित करने तथा कृषक दिलबाग सिंह की कृषि भूमि संस्तुति की थी।

पूर्व समाचार : सशर्त जमानत की अवधि पूरी होने के बाद प्रिया शर्मा ने किया जिला न्यायालय में आत्म समर्पण

बिल्डर प्रिया शर्मा व सुधीर चावला।

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p style=”text-align: justify;”>नवीन समाचार, नैनीताल, 15 दिसंबर 2018। उत्तराखंड उच्च न्यायालय से एक माह की सशर्त जमानत की अवधि पूरी होने के बाद एनएच-74 मुआवजा घोटाले में आरोपित बिल्डर प्रिया शर्मा ने जिला न्यायालय में आत्म समर्पण कर दिया है, जहां से उन्हें तीन जनवरी तक हल्द्वानी जेल भेज दिया गया है। पिछले दिनों हाई कोर्ट ने जमानत अवधि बढ़ाने से इन्कार कर दिया था। इसके बाद शनिवार को प्रिया शर्मा अपने अधिवक्ता के साथ जिला न्यायालय पहुंचीं और प्रभारी जिला एवं सत्र न्यायाधीश विनोद कुमार की अदालत में आत्मसमर्पण का प्रार्थना पत्र दिया। वहीं इसी मामले में जेल में बंद उनके साथी आरोपित सुधीर चावला की भी अदालत में पेशी हुई, जिसके बाद दोनों को जेल भेज दिया गया। बताया कि अब तीन जनवरी को दोनों के खिलाफ अदालत में आरोप तय किए जाएंगे, जिसके बाद गवाही शुरू होगी।
उल्लेखनीय है कि गत 12 नवंबर को उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने स्वास्थ्य संबंधी कारणों से प्रिया शर्मा को एक माह की सशर्त जमानत दे दी थी। यह अवधि बीतने पर प्रिया शर्मा ने उच्च न्यायालय में जमानत अवधि बढ़ाने का प्रार्थना पत्र दिया था। साथ ही जमानत के लिए भी उच्च न्यायालय में प्रार्थना पत्र दाखिल किया है। जिस पर न्यायमूर्ति सुधांशु धूलिया की एकलपीठ ने सुनवाई करते हुए अगली तिथि अगले सप्ताह बुधवार को एवं मुख्य आरोपित निलंबित पीसीएस अधिकारी डीपी सिंह की जमानत अर्जी पर सुनवाई भी अगले सप्ताह होगी।

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p style=”text-align: justify;”>आईएएस पंकज पांडेय की अंतरिम जमानत अर्जी पर सुनवाई 21 को
नैनीताल। एनएच मुआवजा घोटाला मामले में निलंबित ऊधमसिंह नगर के तत्कालीन डीएम आइएएस पंकज कुमार पांडेय की अंतरिम जमानत अर्जी पर विशेष न्यायाधीश भ्रष्टाचार निवारण की अदालत में सुनवाई आगामी 21 दिसंबर को होगी।

पूर्व समाचार : बिल्डर प्रिया शर्मा व सुधीर चावला मामले की सुनवाई अब 1 दिसंबर को

नैनीताल, 19 नवंबर 2018। प्रदेश के बहुचर्चित 211.85 करोड़ रुपए के एनएच-74 भूमि मुआवजा घोटाला मामले में आरोपित बिल्डर प्रिया शर्मा व उनके साथी सुधीर चावला के मामले में सोमवार को विशेष न्यायालय भ्रष्टाचार निवारण, जिला एवं सत्र न्यायाधीश नरेंद्र दत्त की अदालत में सुनवाई हुई। जिला शासकीय अधिवक्ता-फौजदारी सुशील कुमार शर्मा ने बताया कि इस दौरान दोनों पर आरोप नियत होने थे, किंतु आरोपितों की ओर से समय मांगा गया। इस पर न्यायालय ने सुनवाई की अगली तिथि एक दिसंबर तय कर दी। उल्लेखनीय है कि प्रिया शर्मा को गत 12 नवंबर को उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने स्वास्थ्य संबंधी कारणों से उपचार करने के लिए एक माह की सशर्त जमानत दी हुई है। इसलिये आज अदालत में प्रिया शर्मा स्वयं आकर पेश हुई, जबकि सुधीर चावला जेल से पेशी पर लाया गया।

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नैनीताल, 12 नवंबर 2018। एनएच 74 मुआवजा घोटाला मामले में बिल्डर प्रिया शर्मा को हाइकोर्ट ने स्वास्थ्य कारणों से 1 माह के लिये (शॉर्ट टर्म बेल) सीमित अवधि की जमानत दे दी है। बताया गया है कि उनकी मेरुदंड में समस्या की शिकायत पर सुशीला तिवारी मेडिकल कॉलेज के चिकित्सकों के पैनल की रिपोर्ट के आधार पर उन्हें जमानत मिली है।

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दो पीसीएस अधिकारी सशर्त बहाल, दोनों आईएएस के खिलाफ जांच अधिकारी नियुक्त और एक पीसीएस सहित तीन को मिली हाईकोर्ट से जमानत

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p style=”text-align: justify;”>नवीन समाचार, नैनीताल, 11 दिसंबर 2018। उत्तराखंड उच्च न्यायालय की न्यायमूर्ति मनोज कुमार तिवारी ने प्रदेश के बहुचर्चित एनएच 74 के भूमि घोटाले में आरोपित एसडीएम भगत सिंह फोनिया, उनके पेशकार विकास कुमार व किसान चरण सिंह को जमानत दे दी है। उल्लेखनीय है कि पूर्व में निचली अदालत ने सभी आरोपितों के जमानत प्रार्थना पत्र निरस्त कर दिए थे।
वहीं शासन ने इसी मामले में आरोपित पीसीएस अधिकारी सुरेंद्र सिंह जंगपांगी और जगदीश लाल को सशर्त बहाल कर दिया है। हालांकि, इनकी बहाली इनके विरुद्ध चल रही प्रशासनिक जांच के अंतिम निर्णय के अधीन रहेगी। इसके अलावा शासन ने मामले में आरोपित दोनों आइएएस अधिकारियों के जवाब से संतुष्ट न होने पर जांच आगे बढ़ाते हुए जांच अधिकारियों की नियुक्ति कर दी है। आइएएस डा. पंकज कुमार पांडेय की जांच सचिव डा. भूपिंदर कौर औलख को और चंद्रेश यादव के मामले की जांच शैलेश बगौली को सौंपी गयी है। दोनों जांच अधिकारियों से दो माह के भीतर रिपोर्ट शासन में देने की अपेक्षा की गई है।

पूर्व समाचार : एनएच-74 घोटाले में निलंबित इनमें से एक आईएएस अधिकारी हुए बहाल

देहरादून, 28 नवंबर 2018। उत्तराखंड सरकार ने प्रदेश के बहुचर्चित एनएच-74 घोटाले के आरोप में निलंबित किये गए आईएएस अधिकारी चंद्रेश यादव को बहाल कर दिया है। अपर मुख्य सचिव कार्मिक राधा रतूड़ी ने बुधवार को यादव के निलंबन बहाली के आदेश जारी किए। गौरतलब है कि एनएच-74 घोटाले में निलंबित आईएएस अफसर चंद्रेश यादव ने बहाली के लिए राज्य सरकार को पत्र लिखकर अनुरोध किया था। अनुरोध के पीछे तर्क दिया था कि अखिल भारतीय सेवा नियमावली के प्रावधान के मुताबिक इस सेवा के किसी अफसर को राज्य सरकार 30 दिन तक ही निलंबित रख सकती है। इसके बाद ही सरकार ने उनकी बहाली के आदेश जारी कर दिये।

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p style=”text-align: justify;”>नैनीताल, 16 नवंबर  2018। प्रदेश के बहुचर्चित एनएच-74 के भूमि मुआवजा घोटाला मामले में आरोपितों को जमानत मिलने की राह खुल गयी लगती है। उत्तराखंड उच्च न्यायालय की न्यायमूर्ति मनोज तिवारी की एकलपीठ ने मामले के एक आरोपित डाटा इंट्री ऑपरेटर अर्पण कुमार की जमानत याचिका स्वीकार कर ली है। अर्पण पर कृषि भूमि को अकृषि दर्शाने के लिये 1.16 करोड़ रुपये काश्तकारों से कमीशन लेकर काश्तकारों को 41 लाख के स्थान पर करीब 94 करोड़ का मुआवजा दिलाने का आरोप है। आरोप है कि वह किसानों और अधिकारियों के बीच बिचौलिये की भूमिका निभाता था। अर्पण को मिली जमानत इस मामले में मिली पहली जमानत है।
उल्लेखनीय है कि घोटाले की जांच के लिए बनी एसआईटी की गिरफ्तारी के बाद अर्पण कुमार नवंबर 2017 से जेल में बंद है। मालूम हो कि उधमसिंह नगर के एडीएम प्रताप शाह की ओर से मार्च 2017 में इस मामले में एफआईआर दर्ज की गई थी। इसमें काशीपुर निवासी डाटा इंट्री आपरेटर अर्पण कुमार तथा तत्कालीन विशेष भूमि अध्याप्ति अधिकारी डीपी सिंह सहित कई आरोपी गिरफ्तार किए गए थे।

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p style=”text-align: justify;”>-विशेष न्यायाधीश भ्रष्टाचार निवारण की अदालत से अग्रिम जमानत अर्जी पर नहीं मिली फौरी राहत
नैनीताल, 14 नवंबर 2018। उत्तराखंड के बहुचर्चित चर्चित करीब 211.85 करोड़ रुपए के एनएच 74 मुआवजा घोटाला मामले में निलंबित आईएएस, ऊधमसिंह नगर के तत्कालीन डीएम डा. पंकज कुमार पांडेय को विशेष न्यायाधीश भ्रष्टाचार निवारण की अदालत से दूसरी बार में भी राहत नहीं मिल सकी है। अदालत ने उनकी अग्रिम जमानत अर्जी पर सुनवाई करते हुए एक बार फिर तिथि को आगे बढ़ाकर 28 नवम्बर को अगली तिथि नियत कर दी है।
उल्लेखनीय है कि पिछले दिनों उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने डा. पांडे की अग्रिम जमानत अर्जी पर सुनवाई करते हुए 30 अक्तूबर तक निचली कोर्ट में अर्जी दाखिल करने के आदेश पारित करते हुए अग्रिम जमानत अर्जी के निस्तारण तक गिरफ्तारी पर रोक लगाने के आदेश दिए थे। उच्च न्यायालय के आदेशों पर डा. पांडेय ने 27 अक्तूबर को विशेष न्यायाधीश भ्रष्टाचार निवारण की अदालत में अग्रिम जमानत अर्जी दाखिल की थी, जिस पर अभियोजन पक्ष की ओर से घोटाले की जांच कर रही एसआईटी से साक्ष्य मांगे गये थे। 30 अक्तूबर को हुई सुनवाई में जिला जज व विशेष न्यायाधीश भ्रष्टाचार निवारण नरेंद्र दत्त की अदालत ने मामले पर सुनवाई करते हुए अगली सुनवाई 14 नवम्बर नियत की थी, और बुधवार को आंशिक सुनवाई कर तिथि को 28 नवंबर तक बढ़ा दिया है।

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p style=”text-align: justify;”>नैनीताल, 24 अक्तूबर 2018। करीब 211 करोड़ रुपए के प्रदेश के बहुचर्चित एनएच-74 के भूमि मुआवजा घोटाले में शामिल 14 आरोपितों में से बुधवार को पहली बार पांच आरोपितों को हाईकोर्ट से जमानत मिल गई है। बुधवार को न्यायमूर्ति मनोज कुमार तिवारी की एकलपीठ में 11 आरोपितों की जमानत पर सुनवाई हुई। सुनवाई के बाद एकलपीठ ने पांच आरोपितों संग्रह अमीन अनिल कुमार, चौकीदार राम समुझ, अहलमद संतराम, पेशकार संजय चौहान और चकबंदी अधिकारी अमर सिंह को जमानत दे दी। याची के वरिष्ठ अधिवक्ता राजेंद्र डोभाल ने कोर्ट को बताया कि आरोपित एक साल से एनएच घोटाले के मामले में जेल में बंद है। प्रकरण के सभी आरोपियों ने जमानत को लेकर प्रार्थना पत्र दाखिल किया है। इसमें डीपी सिंह समेत अन्य आरोपियों की जमानत फिलहाल नहीं हुई है। मामले में अगली सुनवाई एक नवंबर को होगी।
मामले के अनुसार 10 मार्च 2017 को डीपी सिंह सहित अन्य आरोपियों के खिलाफ पंतनगर थाने में एफआईआर दर्ज की गई थी। आरोपितों पर मुआवजा निर्धारण में वित्तीय अनियमितता, भूमि के अभिलेखों में हेराफेरी कर पुरानी तिथि में कृषि भूमि का अकृषक दिखाकर अधिक मुआवजा दिलाकर राजस्व को हानि और सरकारी धन का दुरुपयोग करने का आरोप लगाया गया था। जांच में तहसीलदार, नायब तहसीलदार, कानूनगो, लेखपाल, चकबंदी अधिकारी, सहायक चकबंदी अधिकारी आदि अधिकारी दोषी पाए गए थे। इसके बाद निचली अदालत ने सभी आरोपियों की जमानत अर्जी खारिज कर दी।

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नैनीताल, 17 अक्तूबर 2018। उत्तराखंड के चर्चित एनएच 74 घोटाले में निलंबित आईएएस पंकज पांडेय की मुसीबत बढ़ती जा रही है। आज शासन ने एसआईटी को अभियोग चलाने की अनुमति दे दी है। शासन ने जांच की संस्तुति कर रिपोर्ट कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग को भेज दी है। अब केंद्र सरकार की संस्तुति के बाद ही इस आदेश पर अंतिम मुहर लगेगी। बता दें कि, 400 करोड़ का घोटाला सामने आने के बाद एसआईटी ने आईएएस पंकज पांडेय के खिलाफ बीती 12 सितंबर को अभियोग चलाने की अनुमति शासन से मांग थी। रिपोर्ट का अध्ययन कर शासन ने बुधवार को इसकी अनुमति दे दी।

एनएच-74 घोटाले की जांच कर रहे एसएसपी दाते सीबीआई को कार्यमुक्त, जानें कितना आश्वस्त हैं वे आगे की जांच के लिये

देहरादून। उत्तराखंड के बहुचर्चित एनएच 74 घोटाले की जांच कर रहे तेजतर्रार आईपीएस अधिकारी ऊधमसिंह नगर जिले के एसएसपी सदानंद दाते को केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) में प्रतियुक्ति के लिए कार्यमुक्त करने के आदेश शनिवार को जारी हो गए हैं। इसके फलस्वरूप प्रदेश में चार वरिष्ठ पुलिस अधीक्षकों के तबादले कर दिये गये हैं। कृष्ण कुमार वीके ऊधमसिंह नगर के नए एसएसपी होंगे। रिद्धिम अग्रवाल को हरिद्वार एसएसपी के पद पर तैनाती दे दी गई है। जबकि बरिंदर सिंह एसएसपी एसटीएफ बनाये गये हैं। इधर तीन अन्य छोटे जिलों के लिए भी एसएसपी बदले जाने की सुगबुगाहट शुरू हो गई है। ज्ञात रहे कि एसएसपी उधम सिंह नगर दाते एनएच 74 घोटाले एसआईटी टीम के इंचार्ज भी हैं। सीबीआई में प्रतिनियुक्ति पर उनकी नई पोस्टिंग हुई है।

अपने जाने के बाद भी जांच के प्रभावित न होने के प्रति आश्वस्त हैं डा. दाते

नैनीताल। ऊधमसिंह नगर जनपद के एसएसपी डा. सदानंद के केंद्रीय जांच ब्यूरो में प्रतिनियुक्ति पर जाने के लिए एक-दो दिन में ही कार्यमुक्त होने की संभावना है। अलबत्ता डा. दाते आश्वस्त नजर आ रहे हैं कि उनके जाने के बाद भी एनएच-74 मुआवजा घोटाले की एसआईटी द्वारा की जा रही जांच प्रभावित नहीं होगी। इसके पीछे एसआईटी जांच को सरकार की ओर से मिल रहे समर्थन को बताया जा रहा है। उल्लेखनीय है कि दाते का हालांकि केंद्र में प्रतिनियुक्ति पर जाना पहले से ही तय था, किंतु बताया जा रहा है कि आईएएस अधिकारियों के मामले में नाम आने के बाद उन्हें केंद्र में भेजे जाने की फाइलें अधिक तेजी से चलायी गयीं। साथ ही इधर परिक्षेत्रीय पुलिस मुख्यालय में चर्चा है कि आईएएस में चयन के बावजूद अपने शौक से आईपीएस कैडर लेने वाले अधिकारी को ऊधमसिंह नगर का एसएसपी बनाया जा सकता है। इन आईपीएस अधिकारी के घर में पहले से ही कई आईएएस अधिकारी भी बताये जा रहे हैं। लिहाजा उम्मीद की जा रही है कि वे बिना दबाव से मामले की जांच करेंगे।

ऐसा रहा है आईपीएस दाते का कैरियर

आईपीएस सदानंद दाते 1990 बैच के अधिकारी हैं। उन्होंने आईपीएस के दोनों राज्यों और राष्ट्रीय स्तरों पर कई महत्वपूर्ण पदों पर रहे हैं, जिनमें केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) में पुलिस महानिरीक्षक के रूप में कार्य करना शामिल है। दाते ने पुणे विश्वविद्यालय से डॉक्टरेट की उपाधि प्राप्त की। वाणिज्य में पहले स्नातकोत्तर कार्य किए। दाते ने एक योग्य लागत और प्रबंधन एकाउंटेंट है उन्होंने हंफ्री फेलोशिप कार्यक्रम के तहत मिनेसोटा विश्वविद्यालय में भाग लिया। जहां उन्होंने संयुक्तराज्य अमेरिका में सफेद कॉलर और संगठित अपराध को नियंत्रित करने के सैद्धांतिक और व्यावहारिक पहलुओं का अध्ययन किया। भारत लौटने पर उन्हें पुलिस के अतिरिक्त आयुक्त (आर्थिक अपराध विभाग) के रूप में तैनात किया गया था। वर्ष 2007 में उन्हें राष्ट्रपति पदक से सम्मानित किया गया। इसके अलावा दाते कई जिलों में कप्तान के पद पर रहे। उन्होंने अपनी पुलिसिंग से बड़े-बड़े बदमाशों को कारागार तक डाला, इसके अलावा कई बड़े गैंगों के खुलासे किये।

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p style=”text-align: justify;”>नैनीताल, 10 अक्तूबर 2018। उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने प्रदेश के बहुचर्चित एनएच-74 भूमि घोटाले के आरोपी आईएएस अधिकारी डा. पंकज पांडेय की गिरफ्तारी पर आगामी 30 अक्टूबर तक के लिए रोक लगा दी है। उच्च न्यायालय की न्यायमूर्ति मनोज कुमार तिवारी की एकलपीठ ने पांडेय की गिरफ्तारी पर रोक लगाते हुए याची से अंतरिम जमानत के लिए निचले सेशन कोर्ट में प्रार्थना पत्र दायर करने को कहा है। इस आधार पर पांडेय ने अपने अंतरिम जमानत प्रार्थना पत्र को वापस ले लिया है।
उल्लेखनीय है कि डॉक्टर पंकज पांडेय ने उच्च न्यायालय में अपनी गिरफ्तारी से बचने के लिए अग्रिम जमानत प्रार्थना पत्र दिया था। सरकारी अधिवक्ता ने इसका विरोध करते हुए कहा कि पिछले दिनों उच्च न्यायालय की एकलपीठ ने अपने आदेश में अंतरिम जमानत का प्रार्थना पत्र सेशन कोर्ट में ही दाखिल करने की व्यवस्था दी है। एकलपीठ ने सरकारी अधिवक्ता के तर्को के आधार पर पांडेय को निचली अदालत में अंतरिम जमानत अर्जी पेश करनी होगी जबकि उनके अधिक्वता ने सर्वोच्च न्यायालय के आदेश का हवाला देते हुए कहा कि अंतरिम जमानत अर्जी पर सुनवाई का अधिकार सम्बंधित उच्च न्यायालय को भी है। इस दौरान शासकीय अधिक्वता ने कोर्ट को आश्वासन दिया कि 30 अक्टूबर तक पुलिस उनको गिरफ्तार नही करेगी। इसके साथ ही बुधवार को एनएच 74 भूमि घोटाले के मुख्य आरोपी सहित 15 अन्य आरोपितों की जमानत प्रार्थना पत्र पर सुनवाई हुई जिस पर न्यायमूर्ति मनोज कुमार तिवारी की एकलपीठ ने सुनवाई करते हुए अगली सुनवाई की तिथि 24 अक्टूबर की तिथि नियत की है।

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p style=”text-align: justify;”>नैनीताल, 27 सितंबर 2018। एनएच-74 मुआवजा घोटाले मामले में आईएएस पंकज पांडे ने अपनी गर्दन नपती देख एक नया खुलासा किया है। उनका कहना है कि उन्होंने मुआवजा वितरण से पहले पूरी प्रक्रिया अपनायी, तथा उच्चाधिकारियों से भी मुआवजे के वितरण के लिए अनुमोदन लिखित में लिया था। हालांकि पांडे जो बात कह रहे हैं वह थारू समुदाय की जमीनों पर काबिज लोगों को मुआवजा देने तक सीमित है।
पांडे ने बृहस्पतिवार को कुछ दस्तावेज सामने रखे हैं, जिनके मुताबिक थारु जनजाति को मिली जमीनों को सौ रुपए के स्टांप पेपर पर अन्य लोगों को कब्जा दे दिया गया था, पर मूल अभिलेखों में मूल मालिक का नाम चलता रहा। जबकि काबिज हुए लोगों ने इस जमीन पर दुकानें भी बनवा ली थीं। इधर जब जमीन अधिग्रहण की बात आई तो मुआवजा मूल अभिलेखों में दर्ज मालिक को ही मिलना था। ऐसे में तत्कालीन डीएम पंकज पांडेय ने 24 फरवरी 2015 को मुख्य सचिव को एक पत्र लिखकर मार्गदर्शन मांगा था। साथ ही आशंका जताई थी कि यदि जमीन पर काबिज लोगों को मुआवजा नहीं दिया गया तो शांति भंग हो सकती है। इस संबंध में 30 अप्रैल 2015 को अधिकारियों की एक बैठक भी हुई थी। इस बैठक में तत्कालीन प्रमुख सचिव नियोजन एस रामास्वामी सहित राज्य एवं एनएचएआई के कई अन्य अधिकारी मौजूद थे। इस बैठक की नोटिंग में भी इस बात का जिक्र है कि यदि जमीन पर काबिज लोगों को मुआवजा नहीं मिला तो व्यवहारिक परेशानी सामने आएगी। साथ ही बिंदु चार में दर्ज किया गया है कि काबिज किसानों की अनदेखी भी नहीं हो सकती। लिहाजा इस मामले को कैबिनेट के सामने रखा जाए। इस दस्तावेजों के सामने आने के बाद इस आशंका को बल मिलता है कि मुआवजे में हो रहे खेल के बारे में उच्च अधिकारियों से लेकर नेताओं तक जानकारी थी। ऐसे में इस बात की पूरी आशंका है कि एनएच 74 घोटाले के छींटे अब कई अन्य अधिकारियों और नेताओं पर भी पड़ सकते हैं।

आईएएस पंकज पांडे को आज इस कारण हाईकोर्ट से नहीं मिल पायी गिरफ्तारी से बचने की राहत

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p style=”text-align: justify;”>नैनीताल, 27 सितंबर 2018। उत्तराखण्ड उच्च न्यायालय से एनएच-74 मुआवजा घोटाले के आरोपी आईएएस अधिकारी डा. पंकज कुमार पांडेय को राहत नहीं मिल पायी है। उच्च न्यायालय में आज पांडे की अग्रिम जमानत के लिये दायर याचिका दायर पर सुनवाई न्यायमूर्ति शरद कुमार शर्मा की अदालत में होनी थी, किंतु न्यायमूर्ति शर्मा ने इस मामले को दूसरी बेंच को स्थानांतरित करने को कह दिया। अब कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश राजीव शर्मा इस मामले में नयी बेंच का गठन करेंगे। इसके बाद ही नयी बेंच उनके मामले की सुनवाई करेगी। इसमें समय लग सकता है।
उल्लेखनीय है कि डा. पांडेय ऊधमसिंहनगर के राष्ट्रीय राजमार्ग घोटाले में निलंबित चल रहे हैं। उन पर आरोप है कि ऊधमसिंहनगर जनपद में डीएम रहते हुए उनके कार्यकाल में दस्तावेजों में हेराफेरी करके राजमार्ग के लिये अधिग्रहीत भूमि का भू उपयोग बदला गया है। लगभग 211 करोड़ के इस घोटाले की जांच कर रही विशेष जांच दल (एसआईटी) अभी तक इस मामले में पांच निलंबित पीसीएस अधिकारियों, राजस्व विभाग के अधिकारियों-कर्मचारियों व कुछ काश्तकारों सहित 23 आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेज चुकी है, और किसी को अब तक जमानत भी नहीं मिल पायी है। एसआईटी ने इस मामले में दो आईएएस अधिकारियों डा. पंकज पांडेय व चंद्रेश यादव की भूमिका भी संदिग्ध मानी है। जिसके बाद सरकार ने इन दोनों अधिकारियों को निलंबित कर दिया है। इधर एसआईटी ने सरकार से पंकज पाण्डे के खिलाफ अभियोजन दर्ज करने की स्वीकृति मांगी थी। ऐसे में अगर सरकार इजाजत दे दे तो तत्काल उनकी गिरफ्तारी हो सकती है। इसलिए उन्होंने पहले ही गिरफ्तारी से बचने के लिए 26  सितंबर को अग्रिम जमानत याचिका हाईकोर्ट में दायर की थी। 

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-ऊधमसिंह नगर जिले के डीएम रहते ऑर्बिट्रेटर की भूमिका पर उठाये गये हैं सवाल

नैनीताल, 11 सितंबर 2017। उत्तराखंड सरकार ने अपनी अपनी ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति पर चलते हुए अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई करते हुए दो आईएएस अधिकारियों को निलंबित कर दिया है। मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने देहरादून में इसकी घोषणा करते हुए बताया कि प्रदेश के बहुचर्चित करीब 211.85 करोड़ रुपए के एनएच-74 चौड़ीकरण से संबंधित मुआवजा घोटाला मामले में दो आईएएस अधिकारी, ऊधमसिंह नगर जिले के डीएम रहे पंकज कुमार पांडेय व चंद्रेश यादव को निलंबित कर दिया है। बताया जा रहा है कि उत्तराखंड राज्य के इतिहास में इस तरह की कार्रवाई एनडी तिवारी सरकार में की गई थी, जब आईएएस अधिकारी एसके लाम्बा को पौड़ी जिले में पटवारी भर्ती घोटाले में लापरवाही के आरोपों के बाद निलंबित कर दिया गया था।

आईएएस अधिकारियों का निलंबन आदेश

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p style=”text-align: justify;”>सरकार की इस कार्रवाई से इन दोनों अधिकारियों के लिए मुश्किलें बढ़नी तय मानी जा रही है। हालांकि सरकार की इस कार्रवाई को एक वर्ग इन दोनों अधिकारियों को बचाने के प्रयास के तौर पर भी देख रहा है। इस वर्ग का कहना है कि सरकारी अधिकारियों-कर्मचारियों की निलंबन की कार्रवाई कोई दंड नहीं होता है। यह उन्हें जेल जाने से बचाने का उपक्रम भी हो सकता है। वैसे आगे देखने वाली बात यह होगी कि सरकार उनके खिलाफ विभागीय कार्रवाई की पुष्टि करती है, अथवा उनके मामले को इस मामले की जांच कर रही एसआईटी को सोंपती है। 

ऊधम सिंह नगर में जिलाधिकारी रहे चंद्रेश यादव और पंकज कुमार पांडेय पर आरोप है कि उन्होंने मुआवजे की बंदरबांट में अनुचित लाभ लेने वाले किसानों, बिचौलियों और तहसील स्तर के अधिकारियों का साथ दिया। सड़क निर्माण के लिए अधिग्रहीत की गई जमीन का मुआवजा मूल्य से दस से बीस गुना अधिक दिया गया और दोनों अधिकारी अपने-अपने कार्यकाल में इससे बेखबर रहे। इतना ही नहीं बतौर आर्बिट्रेटर इनकी अदालत में जो भी मामले आए, उनमें उन्होंने गलत तरीके से आरोपियों के पक्ष में फैसला लिया। दोनों आईएएस अफसरों पर आरोप है कि आर्बिट्रेटर की हैसियित से इन्होंने कुल 13 फैसले दिए, जो किसानों या मुआवजे के तौर पर अनुचित लाभ लेने वाले लोगों के पक्ष में गए। इन्हीं आरोपों के मद्देनजर एसआईटी को इनसे पूछताछ करनी थी। इसके लिए शासन से भी अनुमति मिल गई थी, लेकिन दोनों अफसर 17 अक्टूबर तक की छुट्टी पर चले गए। उनके छुट्टी पर जाने से नाराज सीएम ने उन्हें जांच में सहयोग करने का आदेश दिया।

उल्लेखनीय है कि तत्कालीन कुमाऊं आयुक्त डी सेंथिल पांडियन द्वारा की गयी जांचों के उपरांत पंतनगर थाने में ऊधमसिंह नगर जिले के एडीएम प्रताप शाह द्वारा पूर्व तिथियों में कृषि भूमि को गलत तरीके से धारा 143 के तहत अकृषक दिखाकर किसानों को अधिक मुआवजा दिलाकर राजकोष को नुकसान पहुंचाने के आरोप में 10 मार्च 2014 को मुकदमा दर्ज कराया गया था। इस मामले में अब तक तत्कालीन विशेष भूमि अध्याप्ति अधिकारी दिनेश प्रताप सिंह, तत्कालीन एसडीएम भगत सिंह फौनिया, अनिल शुक्ला व एनएस नगन्याल, तत्कालीन प्रभारी तहसीलदार मदन मोहन पडलिया व भोले लाल व मोहन सिंह सहित संग्रह अमीन अनिल कुमार, डाटा इंट्री ऑपरेटर अर्पण कुमार, पेशकार संत राम व विकास चौहान, चकबंदी अधिकारी अमर सिंह व गणेश प्रसाद निरंजन, अनुसेवक रासमुज, स्टांप वेंडर जिशान, किसान चरन सिंह व ओम प्रकाश सहित कुल 22 लोग पहले से जेल में बंद हैं।

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-पिछली तिथियों में कृषि भूमि का अकृषि दिखाकर इनके खातों में आये से 11.5 करोड़

जिला शासकीय अधिवक्ता-फौजदारी सुशील कुमार शर्मा

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p style=”text-align: justify;”>नैनीताल, 18 सितंबर 2018 प्रदेश के बहुचर्चित 211.85 करोड़ रुपए एनएच-74 घोटाले मे फिर से बार दो किसानों को एसआईटी ने गिरफ्तार कर लिया है। गिरफ्तार किये गये आरोपित किसानों दिलबाग सिंह पुत्र कश्मीर सिंह निवासी ग्राम गुड़ियाअनी थाना बाजपुर व हीरा लाल पुत्र बनारसी दास निवासी ग्राम महेश पुर को मंगलवार को मामले में मामले के विवेचनाधिकारी सीओ स्वतंत्र कुमार के द्वारा विशेष न्यायाधीश भ्रष्टाचार निवारण एवं जिला एवं सत्र न्यायाधीश नरेंद्र दत्त की अदालत में पेश किया गया, जहां से दोनों को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में 1 अक्टूबर तक के लिए नैनीताल जिला जेल भेज दिया गया। बताया गया है कि इस मामले में अब तक दो किसानों सहित 24 लोग जेल जा चुके हैं।
मामले में पैरवी करते हुए जिला शासकीय अधिवक्ता-फौजदारी सुशील कुमार शर्मा ने अदालत को बताया कि थाना पंतनगर में मुकदमा अपराध संख्या 32/17 के तहत भारतीय दंड संहिता की धारा 167, 218, 219, 419, 420, 466, 467, 468, 471, 474, 420 बी एवं 13/1 घ एवं 8/9 भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम में दर्ज मामले में आरोपित इन दोनों किसानों ने विशेष भूमि अध्याप्ति अधिकारी से मिलकर पिछली तिथियों में अपनी कृषि भूमि को अकृषक दिखाया और दिलबाग सिंह की खतौनी से उसके खाते में डेढ़ करोड़ और हीरा लाल के खाते में 10 करोड़ रुपए जमा हुए हैं।
उल्लेखनीय रही है कि इस मामले में जिला शासकीय अधिवक्ता-फौजदारी सुशील कुमार शर्मा की बेहद उल्लेखनीय भूमिका रही है। उनकी कड़ी पैरवी के कारण अब तक मामले में एक भी आरोपित को जमानत तक नहीं मिल पायी है।

3 अन्य काश्तकारों की संपत्ति कुर्क करने के आदेश

नैनीताल। मंगलवार को विशेष भ्रष्टाचार निवारण न्यायालय में विवेचनाधिकारी स्वतंत्र कुमार की ओर से एक प्रार्थना पत्र देकर कहा गया कि इसी मामले में तीन काश्तकार दिलबाग सिंह पुत्र रतन सिंह निवासी ग्राम लालपुर थाना कुंडा, विक्रमजीत सिंह पुत्र शक्तर सिंह निवासी ग्राम गिन्नी खेड़ा व मंदीप सिंह पुत्र जयपाल सिंह काफी समय से फरार चल रहे हैं। इधर पता चला है कि वे अपनी संपत्तियों को खुर्दबुर्द करने की फिराक में हैं। इस आधार पर उन्होंने इनके खिलाफ कुर्की की अनुमति मांगी, जिसे न्यायालय ने स्वीकार कर कुर्की के आदेश जारी कर दिये।

18 अन्य काश्तकारों के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी

नैनीताल। विवेचनाधिकारी स्वतंत्र कुमार ने इसके अलावा सोमवार को विशेष भ्रष्टाचार निवारण न्यायालय को यह भी बताया कि 18 अन्य किसानों के नाम भी इस मामले में प्रकाश में आये हैं। लिहाजा उन्होंने इन 18 किसानों‘दलविंदर सिंह पुत्र प्रताप सिंह निवासी ग्राम लालपुर, मोहन लाल, बलजीत कौर, नरेंद्र पाल, अरविंद सिंह, दिनेश कुमार, भाग सिंह, जसवंत सिंह, रवींदर सिंह, सुहेग सिंह, अवतार सिंह, रामींदर सिंह, मोहित, दिलशेर, कुलदीप के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी करने की मांग की, जिसे न्यायालय ने स्वीकार कर लिया है।

प्रिया शर्मा व सुधीर चावला को आज सुनाये जाएंगे आरोप

नैनीताल। पंतनगर थाने में दर्ज इसी मामले में बुधवार को विशेष भ्रष्टाचार निवारण न्यायालय में मुख्य आरोपित बिल्डर प्रिया शर्मा व उसके सहयोगी सुधीर चावला को जेल से लाकर आरोपित किये जाने से पूर्व उन पर लगे आरोप सुनाये जाएंगे। उल्लेखनीय है कि दोनों पर जांच अधिकारी ने भारतीय दंड संहिता की धारा 167, 218, 219, 419, 420, 466, 467, 468, 471, 474, 420 बी एवं 13/1 घ एवं 8/9 भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत आरोप लगे हैं।

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p style=”text-align: justify;”>नैनीताल। प्रदेश के बहुचर्चित करीब 211.85 करोड़ रुपए के एनएच-74 चौड़ीकरण सेे संबंधित मुआवजा घोटाला मामले में निलंबित एडीएम व तत्कालीन एसडीएम तीरथ पाल सिंह 14 दिन की न्यायिक हिरासत में जेल जाने के दो दिन बाद ही ‘बीमार’ पड़ गये हैं। नैनीताल जिला कारागार में बंद निलंबित एडीएम तीरथपाल सिंह ने बुधवार को कई शारीरिक परेशानियां बताईं, जिसके बाद जेल प्रशासन उन्हें एहतियात के तौर पर बीडी पांडे जिला चिकित्सालय में दिखाने के लिए लाया। हालांकि एडीएम इस दौरान खुद ही अपने पैरों पर चल कर अस्पताल आये और ऐसे ही लौटे भी, लेकिन उन्होंने चिकित्सकों के समक्ष भी कई समस्याएं बताईं। उन्हें अस्पताल के वरिष्ठ फिजीशियन डा. एमएस दुग्ताल एवं डा. विजय सिंह पंवार को दिखाया गया। डा. पवार ने एहतियात के तौर उनका ईसीजी और एक्स-रे परीक्षण भी कराया। डा. पंवार ने बताया कि दोनों परीक्षणों की रिपोर्ट सामान्य आयी। अलबत्ता उन्होंने पूर्व में मई माह में हृदयाघात आने तथा इधर कोलस्ट्रॉल व रक्तचाप बढ़े होने की बात भी बतायी। डा. पवार ने कहा कि संभवतया बीच में दवाइयां छोड़ने के कारण कोई समस्या आई हो। इसके बाद से पुलिस सुरक्षा में जेल के लिए वापस लौट गये। इस दौरान पुलिस कर्मियों ने उन्हें किसी तरह से पकड़ा नहीं था, तथा उन्हें हथकड़ी आदि भी नहीं लगी थी।
उल्लेखनीय है कि तीरथपाल सिंह पर बाजपुर व गदरपुर में बतौर एसडीएम तैनाती के दौरान ग्राम मढ़िया रतना के किसान भगवान दास व मीना अग्रवाल को इसी तरह गलत तरीके से 2 करोड़ 15 लाख 97,156 रुपए का मुआवजा तत्कालीन एसएलएओ डीपी सिंह से दिलाने का आरोप है।

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-निलंबित एडीएम व नायब तहसीलदार पर करीब 4.55 करोड़ का मुआवजा 5 किसानों को गलत तरीके से दिलाने का है आरोप

सोमवार को पुलिस की गिरफ्त में विशेष न्यायाधीश भ्रष्टाचार निवारण की अदालत में पेश होने जाते निलंबित नायब तहसीलदार व एडीएम ।

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p style=”text-align: justify;”>नैनीताल, 9 जुलाई 2018। जिला एवं सत्र न्यायाधीश एवं विशेष न्यायाधीश सीपी बिजल्वाण की अदालत ने प्रदेश के बहुचर्चित करीब 211.85 करोड़ रुपए के एनएच-74 चौड़ीकरण सेे संबंधित मुआवजा घोटाला मामले में वर्तमान में निलंबित एडीएम व तत्कालीन एसडीएम तीरथ पाल सिंह व वर्तमान नायब तहसीलदार तथा तत्कालीन रजिस्ट्रार कानूनगो रघुवीर सिंह को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया है। खास बात यह रही कि जेल भेजे जाने के दौरान आरोपित निलंबित एडीएम व तत्कालीन एसडीएम तीरथ पाल मुस्कुराते दिखे। बकायदा छायाकारों को उन्होंन मुस्कुराते हुए पोज दिये, अलबत्ता नायब तहसीलदार तथा तत्कालीन रजिस्ट्रार कानूनगो रघुवीर सिंह गंभीर व गमगीन दिखे। उल्लेखनीय है कि रघुवीर सिंह पर 2.39 करोड़ व तीरथपाल सिंह पर 2.15 करोड़ रुपए से अधिक का राजकोष को नुकसान पहुंचाने का आरोप है।
उल्लेखनीय है कि तत्कालीन कुमाऊं आयुक्त डी सेंथिल पांडियन द्वारा की गयी जांचों के उपरांत पंतनगर थाने में ऊधमसिंह नगर जिले के एडीएम प्रताप शाह द्वारा पूर्व तिथियों में कृषि भूमि का अकृषक दिखाकर किसानों को अधिक मुआवजा दिलाकर राजकोष को नुकसान पहुंचाने के आरोप में 10 मार्च 2014 को मुकदमा दर्ज कराया गया था। इस मामले में इस मामले में तत्कालीन विशेष भूमि अध्याप्ति अधिकारी दिनेश प्रताप सिंह, तत्कालीन एसडीएम भगत सिंह फौनिया, अनिल शुक्ला व एनएस नगन्याल, तत्कालीन प्रभारी तहसीलदार मदन मोहन पडलिया व भोले लाल व मोहन सिंह सहित संग्रह अमीन अनिल कुमार, डाटा इंट्री ऑपरेटर अर्पण कुमार, पेशकार संत राम व विकास चौहान, चकबंदी अधिकारी अमर सिंह व गणेश प्रसाद निरंजन, अनुसेवक रासमुज, स्टांप वेंडर जिशान, किसान चरन सिंह व ओम प्रकाश सहित कुल 18 लोग पहले से जेल में बंद हैं, और अब यह संख्या 20 हो गयी है।
सोमवार को जिला शासकीय अधिवक्ता सुशील कुमार शर्मा ने न्यायालय को आरोपित तत्कालीन रजिस्ट्रार कानूनगो के बाबत बताया कि गदरपुर तहसील में तैनात रहने के दौरान उसके द्वारा ग्राम बरीराई के किसान जरनल सिंह, करनैल सिंह व परमजीत सिंह की भूमि से संबंधित 3 मामलों में धारा 143 जेडएएलआर की कार्रवाई कर कृषि भूमि का अकृषि करने की रिपोर्ट दी थी, जबकि अभी इस जगह पर किसी सड़क का निर्माण नहीं हुआ, बावजूद किसानों को 2 करोड़ 39 लाख 38,200 रुपए का मुआवजा वर्तमान में जेल में बंद तत्कालीन एसएलएओ डीपी सिंह से दिलाया गया। वहीं आरोपित तीरथपाल सिंह ने बाजपुर व गदरपुर में बतौर एसडीएम तैनाती के दौरान ग्राम मढ़िया रतना के किसान भगवान दास व मीना अग्रवाल को इसी तरह गलत तरीके से 2 करोड़ 15 लाख 97,156 रुपए का मुआवजा तत्कालीन एसएलएओ डीपी सिंह से दिलाया।

मामले के 8 आरोपित गायब, विदेश भागने की आशंका

  • रेड कॉर्नर व लुक आउट नोटिस कराने की कोशिश में पुलिस
  • जरूरत पड़ने पर इंटरपोल की मदद भी लेंगे, पर कोई भी दोषी बख्शा नहीं जाएगा: एसएसपी

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p style=”text-align: justify;”>नवीन जोशी, नैनीताल। उत्तराखंड के बहुचर्चित, पिछली सरकार के दौर में हुए और नयी सरकार के लिए चुनौतीपूर्ण साबित हो रहे राष्ट्रीय राजमार्ग-74 के चौड़ीकरण मामले में अवैधानिक तरीके से किसानों को अधिक मुआवजा देने के अब तक 200 करोड़ रुपए से अधिक के प्रकाश में आ चुके घोटाले में बड़ी खबर आ रही है। राज्य सरकार जहां इस मामले में अब तक मामले के मुख्य आरोपित बताये जा रहे तत्कालीन विशेष भूमि अध्याप्ति अधिकारी डीपी सिंह तथा एक अन्य विशेष भूमि अध्याप्ति अधिकारी सहित कुल छह पीसीएस अधिकारी निलंबित, और इनमें से तीन को गिरफ्तार करने तथा एक अन्य के विरुद्ध गैर जमानती वारंट जारी कर संतोष जता रही है, वहीं मामले में आठ गैर जमानती वारंट जारी हो चुके आरोपितों के गायब होने और इनमें से कम से कम एक के विदेश भागने की खबर है। उत्तराखंड पुलिस भी आठ के गायब होने की पुष्टि कर रही है, जबकि एक के विदेश भागने की खबर पर फिलहाल पुलिस पुष्ट सूचना न होने की बात कहते हुए बच रही है। बहरहाल, अभी देश में कहीं भूमिगत चल रहे आरोपित विदेश न भाग जाएं, इस हेतु उनकी धरपकड़ के लिए मामले की जांच कर रहे पुलिस के विशेष जांच दल-एसआईटी ने ‘रेड कॉर्नर नोटिस’ और जिनके गैर जमानती वारंट जारी हो चुके हैं, उन्हें दबोचने के लिए ‘लुक आउट नोटिस’ जारी करने के प्रयास शुरू कर दिये गये हैं।
मामले की जांच में पल-पल की नजर रख रहे ऊधमसिंह नगर जनपद के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक डा. सदानंद दाते ने कहा कि आठ आरोपितों के विदेश भागने की आशंका है। ये गैर जमानती वारंट यानी एनवीडब्लू जारी होने के बाद यहां नहीं हैं। संभवतया अपने मूल पंजाब अथवा कहीं अन्य चले गये हैं। एक के विदेश भागने की सूचना पर उन्होंने कहा कि अभी यह पुष्ट नहीं है। जब तक पता नहीं चल जाता है कि वह कहां पर है, तब तक यह कहना सही नहीं होगा। विदेश न जाएं इसके लिए उनके ‘रेड कॉर्नर नोटिस’ और जिनके एनवीडब्लू जारी हो चुके हैं, उनके ‘लुक आउट नोटिस’ जारी करने की कोशिश में हैं। लेकिन फिर भी यदि कोई विदेश चला गया हो तो उसकी गिरफ्तारी के लिए इंटरपोल से भी मदद ली जा सकती है। किंतु दोषियों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा। वहीं डीआईजी पूरन सिंह रावत ने कहा कि इस मामले में आरोपित सैकड़ों किसानों के सत्यापन कराये जा रहे हैं, एक संदिग्ध शायद के विदेश भागने की बात उनके संज्ञान में भी आई है, किंतु प्रामाणिक तौर पर भागने की जानकारी नहीं है।

यह भी पढ़ें : मामले में आरोपित डीपी बोले-लुटाए नहीं 400 करोड़ बचाए, नाम बताऊं तो छाप नहीं पाएगा मीडिया

नैनीताल, 2 अप्रैल 2018। प्रदेश के बहुचर्चित एनएच-74 मुआवजा घोटाला मामले में प्रमुख आरोपित बताए जा रहे नैनीताल जिला कारागार में बंद पूर्व विशेष भूमि अध्याप्ति अधिकारी डीपी सिंह को रविवार शाम साढ़े सात बजे बीडी पांडे जिला चिकित्सालय में उपचार के लिए लाया गया, और प्राथमिक उपचार के बाद भर्ती कर लिया गया। जिला चिकित्सालय की प्रमुख चिकित्सा अधीक्षक डा. तारा आर्या ने बताया कि उन्हें सीने व पेट में दर्द व उच्च रक्तचाप की समस्या बताई गयी। प्राथमिक जांच के उपरांत उनके पेट का अल्ट्रासाउंड भी कराया गया और बाद में चिकित्सालय के वरिष्ठ फिजीशियन डा. एमएस दुग्ताल व हृदय रोग विशेषज्ञ ने उनका स्वास्थ्य परीक्षण कर अस्पताल में उपचार कराने की सलाह दी। डा. पवार ने बताया कि उन्हें सिर दर्द, डी हाई टेन्सन व हाइपर टेंसन की समस्याएं भी हैं। उनकी हृदय रोग संबंधी ईसीजी आदि जांचें भी की गयी हैं। एनएच मुआवजा घोटाला में जेल में बंद होने के कारण उन्हें अनुमन्य सुरक्षा भी उपलब्ध करायी गयी है।

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p style=”text-align: justify;”>लुटाए नहीं सरकार के 400 करोड़ बचाए, नाम बता दूं तो छाप नहीं पाएगा मीडिया: डीपी
नैनीताल। बीडी पांडे जिला चिकित्सालय में उपचार के दौरान एनएच मुआवजा घोटाले के आरोपित डीपी सिंह ने कहा कि उन्होंने सरकार के करीब 400 करोड़ रुपए बचाए हैं, इसके सबूत दे सकते हैं। इसके लिए पूरी व्यवस्था से लड़े हैं। मौके पर मौजूद उनकी पत्नी भी बोलीं, सरकार जीरो टॉलरेंस की बात कर रही है तो मंत्री व आईएएस अधिकारी क्यों नहीं जांच के दायरे में आ रहे हैं। इस मामले में खुली बहस कर सकते हैं। उलाहना दी कि यदि असली गुनाहगारों के नाम बताएंगे तो मीडिया छाप नहीं पाएगा। लेकिन वह मीडिया के बहुत कुरेदने के बावजूद खुद ही नाम बताने की हिम्मत नहीं जुटा पाए। अलबत्ता सीबीआई जांच न होने पर भी सवाल उठाए।

यह भी पढ़ें : एनएच-74 घोटाले में प्रिया शर्मा व सुधीर चावला के खिलाफ कोर्ट में चार्जशीट पेश

-न्यायालय ने चार्जशीट पर संज्ञान लेकर दोनों को मंगलवार को जेल से न्यायालय में किया तलब, 21 मार्च से दोनों हैं जेल में

बुधवार को विशेष न्यायाधीष भ्रष्टाचार निवारण की अदालत में पेश होने जाते बिल्डर प्रिया शर्मा व सुधीर चावला।

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p style=”text-align: justify;”>नैनीताल। करीब 300 करोड़ के बहुचर्चित एनएच-74 के चौड़ीकरण के अधिक मुआवजा लेने के घोटाले के मामले में विवेचना अधिकारी ने प्रिया शर्मा व सुधीर चावला के खिलाफ चार्ज शीट जिला एवं सत्र न्यायाधीश-विशेष न्यायाधीश भ्रष्टाचार निवारण सीपी बिजल्वाण की अदालत में पेश कर दी है। वहीं अदालत ने चार्जशीट पर संज्ञान लेते हुए दोनों आरोपितों को मंगलवार को सुनवाई के लिए जेल से न्यायालय में तलब कर दिया है। अब दोनों मंगलवार को सुनवाई के दौरान न्यायालय में उपस्थित रहेंगे।
उल्लेखनीय है कि प्रिया शर्मा व सुधीर चावला इस मामले के मुख्य आरोपित पीसीएस अधिकारी व पूर्व विशेष भूमि अध्याप्ति अधिकारी डीपी सिंह के करीबी हैं। दोनों के खिलाफ विवेचनाधिकारी ने भारतीय दंड संहिता की धारा 420, 467, 468 व 471 के साथ ही 8/9 भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत आरोप पत्र अदालत में दाखिल किये गये हैं। दोनों इस मामले में 21 मार्च को गिरफ्तार होने के बाद से जेल में बंद हैं।

300 करोड़ के एनएच-74 घोटाले में डीपी की करीबी प्रिया शर्मा की जमानत अर्जी खारिज

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p style=”text-align: justify;”>नैनीताल। प्रदेश के बहुचर्चित करीब 300 करोड़ रुपए के राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या 74 के चौड़ीकरण में किसानों की कृषि भूमि का अकृषक दिखाकर सरकार को करोड़ों रुपए के प्रतिकर का नुकसान पहुंचाने से संबंधित एक मामले में बहुचर्चित बिल्डर प्रिया शर्मा की जमानत अर्जी को जिला जिला एवं सत्र न्यायाधीश सीपी बिजल्वाण की अदालत ने खारिज कर दिया है। उल्लेखनीय है कि प्रिया करोड़ों रुपए के इस घोटाले के मुख्य आरोपित तत्कालीन विशेष भूमि अध्याप्ति अधिकारी डीपी सिंह की करीबी है। प्रिया पर आरोप है कि उसने इस घोटाले में सरकार से किसानों को दिलायी करोड़ों की अतिरिक्त धनराशि में से 30 से 40 फीसद का कमीशन लेकर उसका एक हिस्सा संबंधित अधिकारियों को पहुंचाया। इस कमीशन की धनराशि को सही दर्शाने के लिए उसने बिचौलिये के साथ एक प्लॉट का सौदा दिखाया। यह मामला उच्च न्यायालय भी पहुंचा था, जहां प्लॉट का सौदा करने वाले मुख्तारे आम के हस्ताक्षर फर्जी पाये गये। उच्च न्यायालय के आदेशों पर ही उसे 20 मार्च 2018 को पुलिस की टीम ने दबिश देकर गुरुग्राम हरियाणा से उसकी कंपनी के साथी सुधीर चावला के साथ गिरफ्तार किया गया था। तभी से दोनों जेल में बंद हैं। दोनों पर धोखाधड़ी, मनीट्रेल एवं बिजली चोरी के आरोपों में भारतीय दंड संहिता की धारा 167, 218, 219, 409, 465, 467, 463, 471, 474, 120 बी व 34 के तहत मुकदमा दर्ज हैं। सुधीर चावला की जमानत अर्जी पहले ही खारिज हो चुकी है, जिसके बाद इधर प्रिया शर्मा ने जमानत अर्जी लगाकर जेल से बाहर निकलने का प्रयास किया था।
उल्लेखनीय है कि प्रिया शर्मा व सुधीर चावला के खिलाफ एनएच 74 मुआवजा घोटाले की जांच कर रहे पुलिस क्षेत्राधिकारी स्वतंत्र कुमार सिंह ने 26 जनवरी 2018 को रुद्रपुर थाने में एफआईआर दर्ज कराई थी। उन पर आरोप है कि उन्होंने एनएच घोटाले में शामिल काशीपुर के डाटा एंट्री आपरेटर जीशान के बयानों के अनुसार जीशान से कंपनी के खाते में डेढ़ करोड़ रुपये संबंधित अधिकारी को कमीशन पहुंचाने के लिए लिये थे। हालांकि प्रिया शर्मा ने यह कहा कि यह रकम उन्होंने एक भूखंड के बयाने के तौर पर ली थी। हालांकि यह दावा सम्बंधित मुख्तारेआम के बयानों व हस्ताक्षर फर्जी पाए जाने के साथ झूठा साबित हो गया है।

मामले में खुलते जा रहे हैं कई नए राज

नैनीताल। जिला एवं सत्र न्यायालय में जमानत याचिका का जिला शासकीय अधिवक्ता-फ़ौजदारी सुशील कुमार शर्मा ने विरोध करते हुए कहा कि प्रिया शर्मा करोड़ों रुपए के एनएच-74 घोटाले में करोड़ों की धनराशि कमीशन के रूप में प्राप्त कर संबंधित अधिकारियों तक पहुंचाने की सूत्रधार रही है। उसके द्वारा एनएच-74 के चौड़ीकरण में सरकार से अधिक मुआवजा प्राप्त करने हेतु पिछली तिथियों में धारा 143 के तहत कृषि भूमि का अकृषक घोषित कर कई गुना प्रतिकर प्राप्त कर सरकार को भारी धन की हानि पहुंचाई गयी, और इस कार्य में बिचौलिये दलालों की मदद से 30 से 40 फीसद तक कमीशन किया गया। ग्राम कुंडा के किसान अजमेर सिंह, सुखदेव सिंह आदि पांच भाइयों को ही 23 करोड़ का प्रतिकर दिलाया व इसका 40 फीसद कमीशन बिचौलिये जीशान से प्राप्त किया। इसमें से 1 करोड़ की धनराशि उसकी कंपनी एलाइड प्लस इंफ्रा एंड अदर्स के खाते में आरटीजीएस से संबंधित अधिकारियों को पहुंचाने के लिए आये, तथा 40 लाख रुपए नगद कमीशन भी प्रिया शर्मा को मिली। यही नहीं उसने जीशान से प्राप्त इस कमीशन को सही दर्शाने के लिए जीशान के साथ ग्राम फाजलपुर मैहरौला में खेत नंबर 94 का 3.62 करोड़ में सौदा भी दर्शाया, जबकि यह खेत किसी जगशरण सिंह के नाम दर्ज मिला। उल्लेखनीय है कि इस खेत के मुख्तारेआम गुरप्रीत सिंह संधू के हस्ताक्षर भी फर्जी पाये गये। यह मामला भी अलग से उच्च न्यायालय तक पहुंचा था।

एनएच 74 घोटाले में आरोपी एलाइड इंफ्रा प्लस की एमडी प्रिया शर्मा और उनके पार्टनर सुधीर चावला को पुलिस ने किया गिरफ्तार

बिल्डर प्रिया शर्मा

गुरुग्राम 20 मार्च 2018। एनएच 74 घोटाले में शामिल एलाइड इंफ्रा प्लस एंड अदर्स की एमडी प्रिया शर्मा एवं उनके पार्टनर सुधीर चावला को काशीपुर पुलिस ने गुरुग्राम के सेक्टर 29 से गिरफ्तार कर लिया गया है। प्रिया शर्मा पर धोखाधड़ी, मनीट्रेल एवं बिजली चोरी के कई मुकदमे दर्ज हैं। लंबे समय से फरार चल रहीं प्रिया व सुधीर के घर की पुलिस कोर्ट के आदेश पर पुलिस कुर्की कर चुकी है। उधमसिंह नगर के एसएसपी डा. सदानंद शंकर राव दाते ने गिरफ्तारी की पुष्टि करते हुए बताया कि दोनों को कल कोर्ट में पेश किया जाएगा।

लंबे समय से फरार चल रही प्रिया शर्मा एवं सुधीर चावला तक काशीपुर पुलिस सर्विलांस के जरिए पहुंच पाई। सूत्र बताते हैं कि दोनों ने अपने पुराने मोबाइल नंबरों को बंद कर दिया था तथा एक नए मोबाइल नंबर से वह कुछ खास लोगों से फोन पर बातचीत कर रहे थे। पुलिस ने लोकेशन खंगाली तो उनकी लोकेशन गुरुग्राम में मिली। जिस पर पुलिस गुरुग्राम पहुंच गई। बताया जाता है कि दोनों को गुरुग्राम के डीएलएफ मॉल से गिरफ्तार किया गया।

यहां बता दें प्रिया शर्मा व सुधीर चावला के खिलाफ एनएच 74 मुआवजा घोटाले की जांच कर रहे पुलिस क्षेत्राधिकारी स्वतंत्र कुमार सिंह ने 26 जनवरी को रुद्रपुर थाने में एफआईआर दर्ज कराई थी। उन पर आरोप था कि उन्होंने एनएच घोटाले में शामिल काशीपुर के डाटा एंट्री आपरेटर जीशान के बयानों के अनुसार जीशान से कंपनी के खाते में डेढ़ करोड़ रुपये संबंधित अधिकारी को कमीशन पहुंचाने के लिए लिये थे। हालांकि प्रिया शर्मा ने यह कहा कि यह रकम उन्होंने एक भूखंड के बयाने के तौर पर ली थी। एफआईआर की विवेचना सीओ काशीपुर राजेश भट्ट को सौंपी गई थी। सीओ ने विवेचना में पाया कि प्रिया जिस भूखंड का इकरारनामा करने की बात कह रही हैं वह उनके नाम ही नहीं था। जिस पर जमीन के स्वामी से पूछताछ की गई। जमीन के स्वामी ने प्रिया से उस जमीन का इकरारनामा करने की बात से इंकार कर दिया। उसके बाद से प्रिया शर्मा व सुधीर चावला फरार हो गए। इस दौरान प्रिया के खिलाफ अन्य मुकदमे भी दर्ज किए गए। कोर्ट ने उनका गैरजमानती वारंट जारी किया, मगर उन्होंने न्यायालय में समर्पण नहीं किया। इसके बाद पुलिस ने न्यायालय से कुर्की वारंट हासिल किया। दोनों के घरों की कुर्की भी पुलिस ने की, मगर दोनों का कुछ पता नहीं चला। कल ही कोर्ट से प्रिया शर्मा की पुलिस के खिलाफ दायर याचिका खारिज हो गई थी।

बिल्डर प्रिया व चावला के खिलाफ ‘एनवीडब्लू’ जारी

नैनीताल, 28 फरवरी, 2018। उत्तराखंड उच्च न्यायाल के बुधवार के आदेशों के क्रम में विशेष न्यायाधीश भ्रष्टाचार निवारण, जिला एवं सत्र न्यायाधीश कुमकुम रानी की अदालत ने एनएच 74 भूमि घोटाले से सम्बंधित एक अन्य मामले में लिप्त बताई गयी आरोपित एलाइड इंफ्रा प्राइवेट लिमिटेड की एमडी-बिल्डर प्रिया शर्मा व निदेशक सुधीर चावला के खिलाफ गैर जमानती वारंट जारी कर दिये हैं। इससे पूर्व उच्च न्यायालय का आदेश आने के बाद मामले के विवेचक सीओ काशीपुर राजेश भट्ट की ओर से न्यायालय में गैर जमानती वारंट जारी करने हेतु प्रार्थना पत्र देते हुए कहा गया कि रुद्रपुर में इनके आवासों पर दबिश देने के बावजूद ये नहीं मिले, और फरार चल रहे हैं। इस पर न्यायालय ने गैर जमानती वारंट जारी कर दिये। उल्लेखनीय है कि इस मामले में एनएच 74 भूमि घोटाले के विवेचनाधिकारी स्वतंत्र कुमार ने एलाइड इंफ्रा प्राइवेट लिमिटेड नाम की कंपनी की एमडी प्रिया शर्मा व निदेशक सुधीर चावला के खिलाफ भूमि मुआवजा घोटाले से सम्बंधित मामले में भारतीय दंड संहिता की धारा 420, 467, 468 व 471 के तहत बीती 26 जनवरी को रुद्रपुर कोतवाली में एफआईआर दर्ज कराई है।

उल्लेखनीय है कि इससे पूर्व उत्तराखंड उच्च न्यायालय की न्यायमूर्ति लोकपाल सिंह की एकलपीठ में मामले की आरोपी प्रिया शर्मा व सुधीर चावला केस में सुनवाई के दौरान कुछ दस्तावेजो में फर्जी हस्ताक्षर पाये गए, इस पर न्यायालय ने शपथकर्ता व याची के अधिवक्ता से इकरारनामे  की मूल कॉपी को कोर्ट में पेश करने को कहा। कहा-यदि मूल कॉपी पेश नही की जाती है तो रजिस्ट्रार जनरल इस सम्बन्ध में  जाँच करें और कोर्ट की ओर से मुकदमा दर्ज किया जाये। गौरतलब है कि न्यायमूर्ति लोकपाल सिंह की एकलपीठ ने आरोपी सुधीर चावला को 28 फरवरी को कोर्ट में व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने के निर्देश दिए थे परन्तु वे उपस्थित नही हुए। कोर्ट ने न्यायालय के आदेश की अवहेलना मानते हुए उनके खिलाफ गैर जमानती वारंट जारी करने, और साथ में सुधीर चावला को 8 मार्च को गिरफ्तार कर कोर्ट में पेश करने, नही मिलने पर उनकी सम्पति जब्त करने के साथ ही कहा कि यदि एसआईटी चाहे तो प्रिया शर्मा को भी गिरफ्तार कर सकती है। साथ ही न्यायालय ने  याचिकर्ताओ की गिरफ्तारी से बचने सम्बंधित प्रार्थना पत्र को निरस्त कर अगली सुनवाई को 8 मार्च की तिथि नियत की।

₹ 211.85 करोड़ के एनएच मुआवजा मामले में आरोपित पीसीएस अधिकारी शुक्ला की जमानत अर्जी 2 हफ्ते लटकी

नैनीताल। प्रदेश के बहुचर्चित एनएच-74 भूमि मुआवजा घोटाले के एक और आरोपित पीसीएस अधिकारी अनिल शुक्ला ने नैनीताल उच्च न्यायालय में जमानत के लिये प्रार्थना पत्र दाखिल किया है। उच्च न्यायालय की न्यायमूर्ति वीके बिष्ठ की एकलपीठ ने पूरे मामले को सुनने के बाद राज्य सरकार को जवाब दाखिल करने के लिए 2 हफ्तों का समय दिया। इस प्रकार आरोपित की जमानत अर्जी पर सुनवाई दो सप्ताह के लिए टल गयी है। न्यायालय अब शुक्ला की जमानत याचिका पर 2 अप्रैल को सुनवाई करेगा। उल्लेखनीय है कि एनएच घोटाले की जांच कर रही एसआईटी ने अनिल शुक्ला को आरोपी बनाया है। शुक्ला पर आरोप है कि उसने पुरानी तिथियों पर जमीनों के कागज तैयार कर भूमि का मुआवजा कई गुना बढा दिया। निचली अदालत से याचिका खारिज होने के बाद अब अनिल शुक्ला ने उच्च न्यायालय की शरण ली है। इससे पूर्व एक अन्य पीसीएस अधिकारी डीपी शुक्ला भी उच्च न्यायालय में जमानत अर्जी दाखिल कर चुका है, उस पर भी न्यायालय से सरकार से जवाब मांगा हुआ है।

कांग्रेस की गर्दन तक पहुंची घोटाले की जांच

उत्तराखंड में राष्ट्रीय राजमार्ग 74 के चौड़ीकरण में उजागर 211.85 करोड़ रुपये के भूमि मुआवजा घोटाले की जांच में किसानों व नौकरशाहों पर लग रहे आरोपों पर सवाल उठ रहे थे कि राजनेताओं तक जांच कब पहुंचेगी। इस मामले में बुधवार 21 फरवरी को विशेष जांच दल (एसआईटी) की दो सदस्यीय टीम ने कांग्रेस के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष किशोर उपाध्याय से उनके आवास पर करीब एक घंटे तक पूछताछ की। सूत्रों के मुताबिक उपाध्याय से घोटाले की राशि का चुनाव प्रचार-प्रसार में खर्च के संबंध में पूछताछ हुई। इस प्रकार जांच राजनेताओं तक पहुँच गयी है। इसके बाद आगे शीघ्र ही एसआईटी तत्कालीन मुख्यमंत्री हरीश रावत व मौजूदा कांग्रेस अध्यक्ष प्रीतम सिंह के साथ ही कांग्रेस के बैंक खातों से जुड़े लोगों से भी पूछताछ कर सकती है।

विदित हो कि पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में हुए इस घोटाले के संबंध में शुरू से ऐसे आरोप सामने आये थे कि भूमि मुआवजा के तौर पर बंटी राशि में से कांग्रेस पार्टी के चुनावी खाते में 5.54 करोड़ सहित अन्य खातों में भी बड़ी धनराशि जमा हुई थी, और इस का इस्तेमाल 2017 में प्रदेश में हुए विधानसभा चुनावों के दौरान कांग्रेस पार्टी के द्वारा चुनाव प्रचार के लिए भी किया गया था। इसके लिए चुनाव से पहले कांग्रेस ने बैंक खाते खुलवाये थे। वर्ष 2017 विधानसभा चुनावों के समय उपाध्याय प्रदेश पार्टी की कमान संभाल रहे थे और एसआईटी ने उनसे इसी के मद्देनजर पूछताछ की। उपाध्याय ने एसआईटी की टीम द्वारा उनसे पूछताछ किये जाने की पुष्टि की और कहा कि उन्होंने एसआईटी से कहा है कि वह उन्हें इस संबंध में कानूनी नोटिस दे, जिसके बाद वह सभी प्रश्नों का जवाब देने को तैयार हैं।

एनएच-74 मुआवजा घोटाला मामले में मुख्य आरोपित डीपी पहुंचा हाईकोर्ट व निलंबित घूसखोर ‘आरके’ दूसरे मामले में पहुंचा जेल

नैनीताल। एनएच 74 मुआवजा घोटाले का मुख्य आरोपित तत्कालीन भूमि अध्यापित अधिकारी डीपी सिंह निचली अदालत से कई जमानत खारिज होने के बाद जमानत के लिए उत्तराखंड उच्च न्यायालय की शरण में पहुंच गया है। डीपी ने उच्च न्यायालय में प्रार्थना पत्र लगाया है, जिस पर सोमवार को न्यायाधीश वीके बिष्ट की एकलपीठ में सुनवाई होगी। उल्लेखनीय है कि अब तक 211.85 करोड़ के इस घोटाले में 15 मार्च को ऊधमसिंह नगर जिले के एडीएम प्रताप सिंह साह की ओर से मुकदमा दर्ज कराया गया था। मामले में एसआइटी की ओर से अब तक 12 लोगों के खिलाफ 5804 पन्नों के आरोप पत्र भी न्यायालय में दाखिल कर दिए गए हैं। मुख्य आरोपित डीपी सिंह ने 23 नवंबर को एसएसपी ऊधम सिंह नगर डॉ. सदानन्द दाते के दफ्तर में आत्मसमर्पण किया था। जिसके बाद 24 नवंबर को उसे न्यायालय के आदेश पर जेल भेजा गया था।

वहीं विशेष न्यायाधीश भ्रष्टाचार निवारण जिला एवं सत्र न्यायाधीश कुमकुम रानी की अदालत ने एनएच मुआवजा घोटाला मामले में गत दिनों निलंबित गदरपुर के रजिस्ट्रार कानूनगो हेमराज सिंह चौहान को एक अन्य मामले में घूसखोरी का दोष साबित होने पर साढ़े चार साल की जेल और 20 हजार रुपए के जुर्माना की सजा सुना दी है। आरके हेमराज पर आरोप है कि उसने गदरपुर निवासी ताहिर हुसैन को उसकी जमीन का सीलिंग प्रमाण पत्र करने की प्रक्रिया में जमीन को उसकी माता खूबी बेगम की ओर से पुत्रों के नाम हस्तांतरित करने की रिपोर्ट लगाने के ऐवज में दो हजार रुपये की रिश्वत की मांग की। इसकी शिकायत ताहिर ने विजिलेंस से की, जिस पर 23 जून 2012 को विजिलेंस की टीम द्वारा कानूनगो हेमराज चौहान को दो हजार की रिश्वत लेते रंगे हाथों गिरफ्तार किया गया। मामले में अभियोजन की ओर से आरोप साबित करने के लिए नौ जबकि बचाव पक्ष की ओर से तीन गवाह पेश किए गए। आरोपित को बीती 12 फरवरी को विशेष न्यायाधीश भ्रष्टाचार निवारण की अदालत ने दोषी करार दिया था।

एनएच-74 मुआवजा घोटाला मामले में सहायक चकबंदी अधिकारी गिरफ्तार, जेल भेजा

शुक्रवार को चकबंदी अधिकारी निरंजन को गिरफ्तार कर अदालत ले जाते एसआईटी कर्मी।

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p style=”text-align: justify;”>-चकबंदी अधिकारी गणेश प्रसाद निरंजन को न्यायालय ने पेशी के बाद 14 दिन की न्यायिक हिरासत में जेल भेजा, एसआईटी ले सकती है रिमांड में
नैनीताल। प्रदेश के बहुचर्चित 211.85 करोड़ रुपए के एनएच-74 मुआवजा घोटाला में शुक्रवार को एसआईटी ने एक और चकबंदी अधिकारी गणेश प्रसाद निरंजन को गिरफ्तार कर विशेष न्यायाधीश भ्रष्टाचार निवारण कुमकुम रानी की अदालत में पेश किया। जहां से उसे 14 दिन की न्यायिक हिरासत में जेल भेजने के आदेशों के बाद जेल भेज दिया गया। बताया गया है कि निरंजन को बृहस्पतिवार को एसआईटी ने गिरफ्तार किया था। एसआईटी उसे जल्द ही आगे की पूछताछ के लिए रिमांड पर ले सकती है। उल्लेखनीय है कि इससे पूर्व बृहस्पतिवार को ही एसआईटी ने एक और चकबंदी अधिकारी अमर सिंह तथा पीसीएस अधिकारी नंदन सिंह नगन्यालय को गिरफ्तार विशेष न्यायाधीश भ्रष्टाचार निवारण अरविंद कुमार की अदालत में पेश किया गया। जहां से दोनों को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में जेल भेजने के आदेशों के बाद देर शाम जेल भेज दिया गया। अब सभी आरोपितों के मामले में अगली सुनवाई 16 फरवरी को होगी। निरंजन की गिरफ्तारी के साथ इस मामले में तीन पीसीएस अधिकारियों सहित कुल 18 लोग गिरफ्तार किये जा चुके हैं।

एनएच-74 मुआवजा घोटाला मामले में पीसीएस अधिकारी नगन्याल सहित दो गिरफ्तार

08 फ़रवरी 2018 को एसडीएम नगन्याल (लाल घेरे में) को न्यायालय लाते एसआईटी के जवान।

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p style=”text-align: justify;”>-चकबंदी अधिकारी अमर सिंह भी गिरफ्त में, न्यायालय ने पेशी के बाद 14 दिन की न्यायिक हिरासत में जेल भेजा
नैनीताल/एसएनबी। प्रदेश के बहुचर्चित 211.85 करोड़ रुपए के एनएच-74 मुआवजा घोटाला में बृहस्पतिवार को एसआईटी ने एक और बड़ी उपलब्धि हासिल करते हुए मामले में वांछित पीसीएस अधिकारी नंदन सिंह नगन्याल एवं चकबंदी अधिकारी अमर सिंह को गिरफ्तार करने में सफलता प्राप्त कर ली। दोनों को विशेष प्रभारी न्यायाधीश भ्रष्टाचार निवारण अरविंद कुमार की अदालत में पेश किया गया। जहां से दोनों को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में जेल भेजने के आदेशों के बाद देर शाम जेल भेज दिया गया। उल्लेखनीय है कि इस प्रकार मामले में कुल 3 पीसीएस अधिकारियों सहित 17 लोग सींखचों के पीछे आ गये हैं। मामले की अगली सुनवाई 16 फरवरी को होगी।
बृहस्पतिवार को इस मामले की विवेचना कर रहे विशेष जांच दल यानी एसआईटी की टीम के सदस्य अपराह्न में एसडीएम रहे पीसीएस अधिकारी नगन्याल व चकबंदी अधिकारी अमर सिंह को गिरफ्तार कर विशेष प्रभारी न्यायाधीश भ्रष्टाचार निवारण अरविंद कुमार की अदालत में पेश करने के लिए लाई। इस दौरान मुख्यालय में मौजूद ऊधम सिंह नगर जिले के एसएसपी डा. सदानंद दाते ने बताया कि एफएसए की रिपोर्ट आने के बाद नगन्याल को रुद्रपुर से गिरफ्तार किया गया। नगन्याल पर आरोप है कि बाजपुर तहसील में एक ही दिन में पुरानी तिथियों पर जेडएलआरए अधिनियम की धारा 143 के तहत बहुत सारे मामलों में कृषि भूमि को अकृषक कर किसानों को करोड़ों रुपए का अतिरिक्त मुआवजा दिलाया गया था, और इसके ऐवज में अधिकारियों ने कमीशन भी लिया था। इनमें वह भी शामिल हैं। आगे अन्य कार्रवाइयां भी की जा सकती हैं। उल्लेखनीय है कि नगन्याल के खिलाफ कुर्की वारंट भी न्यायालय से जारी होकर उसके घर पर चस्पा कर दिया गया था। बताया गया है कि इसके बाद नगन्याल बृहस्पतिवार को खुद ही जांच कर रही पंतनगर पुलिस चौकी चला गया था, जहां से पूछताछ के बाद उसे गिरफ्तार कर लिया गया।

पूरा मामला जानने को यह भी पढ़ें : एनएच-74 घोटाला मामले में 12 को सुनाये आरोप, तीन की रिमांड 14 दिन बढ़ी, जमानत अर्जी खारिज

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p style=”text-align: justify;”>-अगली सुनवाई के लिए 28 फरवरी की तिथि तय
नैनीताल। प्रदेश के बहुचर्चित एनएच-74 मुआवजा घोटाला मामले में हल्द्वानी व नैनीताल की जेलों में बंद 15 में से 12 आरोपितों को शनिवार को विशेष न्यायाधीश भ्रष्टाचार निवारण, जिला एवं सत्र न्यायाधीश कुमकुम रानी की अदालत में पेश किया गया। अदालत ने उन्हें बताया कि उनके विरुद्ध जांच एजेंसी ने आरोप पत्र पेश कर दिये हैं, और अदालत उन पर लगे आरोपों का संज्ञान ले रही है। इस पर आरोपितों की ओर से उनके अधिवक्ता ने कहा कि उनके विरुद्ध जांच एजेंसी ने गलत साक्ष्य प्रस्तुत किये हैं, जबकि उनके ऊपर कोई आरोप नहीं बनते हैं, वहीं अभियोजन पक्ष की ओर से जिला शासकीय अधिवक्ता-फौजदारी सुशील कुमार शर्मा ने आरोपों को पूरी तरह सही बताया। इसके साथ आरोपितों के विरुद्ध नियमित सुनवाई शुरू हो गयी, तथा अदालत ने अगली सुनवाई की तिथि 28 फरवरी नियत कर दी। बताया कि 28 को इन्हें मामले से संबंधित प्रपत्रों की नकलें दी जाएंगी।

उल्लेखनीय है कि मुख्य आरोपित नैनीताल व ऊधमसिंह नगर जिले के तत्कालीन विशेष भूमि अध्याप्ति अधिकारी पीसीएस अधिकारी डीपी सिंह व निलंबित एसडीएम भगत सिंह फोनिया, तत्कालीन प्रभारी तहसीलदार मदन मोहन पड़लिया, सेवानिवृत्त प्रभारी तहसीलदार भूरे लाल, पेशकार विकास चौहान, संग्रह अमीन अनिल कुमार, डाटा इंट्री ऑपरेटर अर्पण कुमार, स्टांप वेंडर जीशान, अनुसेवक राम समझ, राजस्व अहलमद संजय कुमार तथा काश्तकार ओम प्रकाश व चरण सिंह के विरुद्ध भारतीय दंड संहिता की धारा 167, 218 व अन्य के तहत आरोप पत्र दाखिल कर दिये गये हैं।

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p style=”text-align: justify;”>तीन आरोपितों की न्यायिक हिरासत 14 दिन बढ़ी, जमानत अर्जी खारिज
नैनीताल। उपरोक्त आरोप पत्र पेश हुए 12 आरोपितों के अतिरिक्त इसी मामले में जेल में बंद तीन आरोपित एसडीएम अनिल शुक्ला, तहसीलदार मोहन सिंह व पेशकार संत राम के खिलाफ विवेचना अभी जारी है। शनिवार को अदालत ने जेल से ही वीडियो कांफ्रेंस के माध्यम से इनकी सुनवाई की, और इनकी न्यायिक हिरासत की अवधि को 14 दिन के लिए आगे बढ़ा दिया। इसके अलावा शनिवार को एसडीएम अनिल शुक्ला, तहसीलदार मोहन सिंह के द्वारा न्यायालय में पेश जमानत प्रार्थना पत्र पर भी सुनवाई हुई। अदालत ने अभियोजन पक्ष के प्रबल विरोध के बाद जमानत अर्जी खारिज कर दी।

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p style=”text-align: justify;”>मामले से संबंधित सील युक्त सामग्री भी अदालत में पेश
नैनीताल। शनिवार को न्यायालय में मामले की सुनवाई के दौरान एसआईटी द्वारा विवेचना के दौरान कब्जे में ली गयी सामग्री को भी सील-मोहर हालत में न्यायालय के समक्ष पेश किया गया। न्यायालय ने सील का अवलोकन कर व सील को सही पाते हुए अपनी सील लगा कर कब्जे में ले लिया।

यह भी पढ़ें : 211.85 करोड़ के एनएच-74 घोटाला मामले में दो पीसीएस अधिकारियों सहित 12 आरोपितों के खिलाफ चार्जशीट

नैनीताल। प्रदेश के बहुचर्चित एनएच-74 मुआवजा घोटाला मामले में हल्द्वानी व नैनीताल की जेलों में बंद 15 में से 12 आरोपितों के विरुद्ध विशेष जांच दल यानी एसआईटी ने शुक्रवार 2 फ़रवरी 2018 को विशेष न्यायाधीश भ्रष्टाचार निवारण जिला एवं सत्र न्यायाधीश कुमकुम रानी की अदालत में आरोप पत्र दाखिल कर दिये हैं। गौरतलब है कि आरोप पत्र आरोपितों को जेल में 89 दिन होने पर दाखिल किये गये हैं, जबकि एक दिन बाद ही यानी 90 दिन के भीतर आरोपितों के विरुद्ध जांच एजेंसी के चार्जशीट न्यायालय में दाखिल नहीं करने की स्थिति में जमानत मिले बिना हाी आरोपितों के बॉंड के जरिये न्यायालय से बाहर आने का प्राविधान है। इस तरह जांच एजेंसी की देर से की गयी इस कार्रवाई से जेल में बंद आरोपितों की जेल से बाहर आने की उम्मीदों को झटका लगा है। इसके साथ ही अदालत ने शनिवार को सभी आरोपितों को न्यायालय में पेशी के लिए तलब कर लिया है।

जिला शासकीय अधिवक्ता फौजदारी सुशील कुमार शर्मा ने बताया कि शुक्रवार को तय अवधि के भीतर ही एसआईटी ने मामले के मुख्य आरोपित नैनीताल व ऊधमसिंह नगर जिले के तत्कालीन विशेष भूमि अध्याप्ति अधिकारी, पीसीएस अधिकारी डीपी सिंह व भगत सिंह फोनिया, प्रभारी तहसीलदार मदन मोहन पड़लिया, सेवानिवृत्त प्रभारी तहसीलदार भूरे लाल, करन सिंह, विकास चौहान, अनिल कुमार, अनुपम कुमार, ओम प्रकाश, जीशान, राम समझ व संजय कुमार के विरुद्ध भारतीय दंड संहिता की धारा 167 व 218 के तहत आरोप पत्र दाखिल कर दिये हैं। जबकि जेल में बंद शेष बचे तीन आरोपित एसडीएम अनिल शुक्ला, तहसीलदार मोहन सिंह व पेशकार संत राम के खिलाफ विवेचना जारी है। इनमें से छह आरोपित नैनीताल और नौ हल्द्वानी जेल में बंद हैं। इसके साथ ही उन्होंने बताया कि जेल में बंद सभी आरोपितों की न्यायिक हिरासत की अवधि शनिवार को खत्म हो रही है, लिहाजा न्यायालय ने शनिवार को सभी आरोपितों को न्यायालय में पेश होने के लिए तलब कर लिया है। साथ ही एसडीएम अनिल शुक्ला, तहसीलदार मोहन सिंह के द्वारा न्यायालय में जमानत का प्रार्थना पत्र भी दिया गया है। इस पर भी शनिवार को न्यायालय में सुनवाई होगी।

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p style=”text-align: justify;”>211 करोड़ 85 लाख का घोटाला अब तक साबित
नैनीताल। जिला शासकीय अधिवक्ता शर्मा ने बताया कि अभी तक 211 करोड़ 85 लाख का घोटाला साबित हो चुका है, जबकि मामले में विवेचना अभी जारी है। वहीं कई आरोपित फरार चल रहे हैं, जबकि कई के खिलाफ वारंट जारी किये गये हैं, वे भी अभी एसआईटी के कब्जे में नहीं आये हैं।

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p style=”text-align: justify;”>एनएच-74 घोटाला एक नजर में
उल्लेखनीय है कि करीब 211.85 करोड़ रुपए के बताये जा रहे 17 वर्ष की उम्र के उत्तराखंड राज्य का यह सब से बड़ा घोटाला पिछली सरकार के दौर में ही प्रकाश में आ गया था। इस घोटाले के लिए सड़क किनारे की भूमि को योजनाबद्ध तरीके से साजिश के तहत कृषि भूमि से पिछली तिथियों में धारा 143 के तहत अकृषक करा कर राजकीय कोष से कई गुना अधिक मुआवजा किसानों को बांटा गया। पिछली सरकार भी इस मामले में तब निशाने पर आ गयी थी, जबकि घोटाले का पैंसा सत्तारूढ़ दल के खाते में जाने की बात प्रकाश में आई थी। बाद में सत्ता परिवर्तन के बाद तत्कालीन कुमाऊं आयुक्त डी सेंथिल पांडियन के निर्देश पर हुई जांच के बाद एनएच मुआवजा घोटाला सार्वजनिक हुआ था, और मामले में एडीएम प्रताप शाह की ओर से 10 मार्च 2017 को थाना पंतनगर में इस बाबत मुकदमा दर्ज कराया गया था। किंतु तभी पांडियन के स्थानांतरण और फिर मुख्यमंत्री की सीबीआई जांच कराने की घोषणा पर केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी के यह कहते हुए ‘वीटो’ लगाने पर कि इससे उत्तराखंड में कार्य कर रहे अधिकारियों का मनोबल गिरेगा और राज्य में अन्य राष्ट्रीय राजमार्गों के चौड़ीकरण के कार्यों में भी शिथिलता आयेगी, सरकार को जांच अपनी एसआईटी से करानी पड़ी। लेकिन इसके बाद राज्य की एसआईटी इस मामले में अपेक्षित से भी बेहतर कार्य करती दिखाई दी है। मामले में अब तक मुख्य आरोपित बताये जा रहे तत्कालीन विशेष भूमि अध्याप्ति अधिकारी डीपी सिंह तथा एक अन्य विशेष भूमि अध्याप्ति अधिकारी सहित कुल छह पीसीएस अधिकारी निलंबित, और तीन गिरफ्तार तथा एक अन्य के विरुद्ध गैर जमानती वारंट जारी हो चुका है, वहीं मामले में आठ गैर जमानती वारंट जारी हो चुके आरोपितों के गायब होने और इनमें से कम से कम एक के विदेश भागने की खबर भी है।

 

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