बुरे फंसे 23 : बहुचर्चित एनएच घोटाले में मंगलवार को आयी इतनी सारी खबरें….

जिला शासकीय अधिवक्ता-फौजदारी सुशील कुमार शर्मा

-2 किसान गिरफ्तार, भेजे जेल, 3 की कुर्की और 18 की गिरफ्तारी वारंट जारी
-पिछली तिथियों में कृषि भूमि का अकृषि दिखाकर इनके खातों में आये से 11.5 करोड़
नैनीताल, 18 सितंबर 2018 प्रदेश के बहुचर्चित 211.85 करोड़ रुपए एनएच-74 घोटाले मे फिर से बार दो किसानों को एसआईटी ने गिरफ्तार कर लिया है। गिरफ्तार किये गये आरोपित किसानों दिलबाग सिंह पुत्र कश्मीर सिंह निवासी ग्राम गुड़ियाअनी थाना बाजपुर व हीरा लाल पुत्र बनारसी दास निवासी ग्राम महेश पुर को मंगलवार को मामले में मामले के विवेचनाधिकारी सीओ स्वतंत्र कुमार के द्वारा विशेष न्यायाधीश भ्रष्टाचार निवारण एवं जिला एवं सत्र न्यायाधीश नरेंद्र दत्त की अदालत में पेश किया गया, जहां से दोनों को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में 1 अक्टूबर तक के लिए नैनीताल जिला जेल भेज दिया गया। बताया गया है कि इस मामले में अब तक दो किसानों सहित 24 लोग जेल जा चुके हैं।
मामले में पैरवी करते हुए जिला शासकीय अधिवक्ता-फौजदारी सुशील कुमार शर्मा ने अदालत को बताया कि थाना पंतनगर में मुकदमा अपराध संख्या 32/17 के तहत भारतीय दंड संहिता की धारा 167, 218, 219, 419, 420, 466, 467, 468, 471, 474, 420 बी एवं 13/1 घ एवं 8/9 भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम में दर्ज मामले में आरोपित इन दोनों किसानों ने विशेष भूमि अध्याप्ति अधिकारी से मिलकर पिछली तिथियों में अपनी कृषि भूमि को अकृषक दिखाया और दिलबाग सिंह की खतौनी से उसके खाते में डेढ़ करोड़ और हीरा लाल के खाते में 10 करोड़ रुपए जमा हुए हैं।
उल्लेखनीय रही है कि इस मामले में जिला शासकीय अधिवक्ता-फौजदारी सुशील कुमार शर्मा की बेहद उल्लेखनीय भूमिका रही है। उनकी कड़ी पैरवी के कारण अब तक मामले में एक भी आरोपित को जमानत तक नहीं मिल पायी है।

3 अन्य काश्तकारों की संपत्ति कुर्क करने के आदेश

नैनीताल। मंगलवार को विशेष भ्रष्टाचार निवारण न्यायालय में विवेचनाधिकारी स्वतंत्र कुमार की ओर से एक प्रार्थना पत्र देकर कहा गया कि इसी मामले में तीन काश्तकार दिलबाग सिंह पुत्र रतन सिंह निवासी ग्राम लालपुर थाना कुंडा, विक्रमजीत सिंह पुत्र शक्तर सिंह निवासी ग्राम गिन्नी खेड़ा व मंदीप सिंह पुत्र जयपाल सिंह काफी समय से फरार चल रहे हैं। इधर पता चला है कि वे अपनी संपत्तियों को खुर्दबुर्द करने की फिराक में हैं। इस आधार पर उन्होंने इनके खिलाफ कुर्की की अनुमति मांगी, जिसे न्यायालय ने स्वीकार कर कुर्की के आदेश जारी कर दिये।

18 अन्य काश्तकारों के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी

नैनीताल। विवेचनाधिकारी स्वतंत्र कुमार ने इसके अलावा सोमवार को विशेष भ्रष्टाचार निवारण न्यायालय को यह भी बताया कि 18 अन्य किसानों के नाम भी इस मामले में प्रकाश में आये हैं। लिहाजा उन्होंने इन 18 किसानों‘दलविंदर सिंह पुत्र प्रताप सिंह निवासी ग्राम लालपुर, मोहन लाल, बलजीत कौर, नरेंद्र पाल, अरविंद सिंह, दिनेश कुमार, भाग सिंह, जसवंत सिंह, रवींदर सिंह, सुहेग सिंह, अवतार सिंह, रामींदर सिंह, मोहित, दिलशेर, कुलदीप के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी करने की मांग की, जिसे न्यायालय ने स्वीकार कर लिया है।

प्रिया शर्मा व सुधीर चावला को आज सुनाये जाएंगे आरोप

नैनीताल। पंतनगर थाने में दर्ज इसी मामले में बुधवार को विशेष भ्रष्टाचार निवारण न्यायालय में मुख्य आरोपित बिल्डर प्रिया शर्मा व उसके सहयोगी सुधीर चावला को जेल से लाकर आरोपित किये जाने से पूर्व उन पर लगे आरोप सुनाये जाएंगे। उल्लेखनीय है कि दोनों पर जांच अधिकारी ने भारतीय दंड संहिता की धारा 167, 218, 219, 419, 420, 466, 467, 468, 471, 474, 420 बी एवं 13/1 घ एवं 8/9 भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत आरोप लगे हैं।

यह भी पढ़ें: ‘जीरो टॉलरेंस’ पर उत्तराखंड सरकार की अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई, इतिहास में पहली बार दो आईएएस अधिकारी निलंबित

-ऊधमसिंह नगर जिले के डीएम रहते ऑर्बिट्रेटर की भूमिका पर उठाये गये हैं सवाल

नैनीताल, 11 सितंबर 2017। उत्तराखंड सरकार ने अपनी अपनी ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति पर चलते हुए अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई करते हुए दो आईएएस अधिकारियों को निलंबित कर दिया है। मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने देहरादून में इसकी घोषणा करते हुए बताया कि प्रदेश के बहुचर्चित करीब 211.85 करोड़ रुपए के एनएच-74 चौड़ीकरण से संबंधित मुआवजा घोटाला मामले में दो आईएएस अधिकारी, ऊधमसिंह नगर जिले के डीएम रहे पंकज कुमार पांडेय व चंद्रेश यादव को निलंबित कर दिया है। बताया जा रहा है कि उत्तराखंड राज्य के इतिहास में इस तरह की कार्रवाई एनडी तिवारी सरकार में की गई थी, जब आईएएस अधिकारी एसके लाम्बा को पौड़ी जिले में पटवारी भर्ती घोटाले में लापरवाही के आरोपों के बाद निलंबित कर दिया गया था।

आईएएस अधिकारियों का निलंबन आदेश

सरकार की इस कार्रवाई से इन दोनों अधिकारियों के लिए मुश्किलें बढ़नी तय मानी जा रही है। हालांकि सरकार की इस कार्रवाई को एक वर्ग इन दोनों अधिकारियों को बचाने के प्रयास के तौर पर भी देख रहा है। इस वर्ग का कहना है कि सरकारी अधिकारियों-कर्मचारियों की निलंबन की कार्रवाई कोई दंड नहीं होता है। यह उन्हें जेल जाने से बचाने का उपक्रम भी हो सकता है। वैसे आगे देखने वाली बात यह होगी कि सरकार उनके खिलाफ विभागीय कार्रवाई की पुष्टि करती है, अथवा उनके मामले को इस मामले की जांच कर रही एसआईटी को सोंपती है। 

ऊधम सिंह नगर में जिलाधिकारी रहे चंद्रेश यादव और पंकज कुमार पांडेय पर आरोप है कि उन्होंने मुआवजे की बंदरबांट में अनुचित लाभ लेने वाले किसानों, बिचौलियों और तहसील स्तर के अधिकारियों का साथ दिया। सड़क निर्माण के लिए अधिग्रहीत की गई जमीन का मुआवजा मूल्य से दस से बीस गुना अधिक दिया गया और दोनों अधिकारी अपने-अपने कार्यकाल में इससे बेखबर रहे। इतना ही नहीं बतौर आर्बिट्रेटर इनकी अदालत में जो भी मामले आए, उनमें उन्होंने गलत तरीके से आरोपियों के पक्ष में फैसला लिया। दोनों आईएएस अफसरों पर आरोप है कि आर्बिट्रेटर की हैसियित से इन्होंने कुल 13 फैसले दिए, जो किसानों या मुआवजे के तौर पर अनुचित लाभ लेने वाले लोगों के पक्ष में गए। इन्हीं आरोपों के मद्देनजर एसआईटी को इनसे पूछताछ करनी थी। इसके लिए शासन से भी अनुमति मिल गई थी, लेकिन दोनों अफसर 17 अक्टूबर तक की छुट्टी पर चले गए। उनके छुट्टी पर जाने से नाराज सीएम ने उन्हें जांच में सहयोग करने का आदेश दिया।

उल्लेखनीय है कि तत्कालीन कुमाऊं आयुक्त डी सेंथिल पांडियन द्वारा की गयी जांचों के उपरांत पंतनगर थाने में ऊधमसिंह नगर जिले के एडीएम प्रताप शाह द्वारा पूर्व तिथियों में कृषि भूमि को गलत तरीके से धारा 143 के तहत अकृषक दिखाकर किसानों को अधिक मुआवजा दिलाकर राजकोष को नुकसान पहुंचाने के आरोप में 10 मार्च 2014 को मुकदमा दर्ज कराया गया था। इस मामले में अब तक तत्कालीन विशेष भूमि अध्याप्ति अधिकारी दिनेश प्रताप सिंह, तत्कालीन एसडीएम भगत सिंह फौनिया, अनिल शुक्ला व एनएस नगन्याल, तत्कालीन प्रभारी तहसीलदार मदन मोहन पडलिया व भोले लाल व मोहन सिंह सहित संग्रह अमीन अनिल कुमार, डाटा इंट्री ऑपरेटर अर्पण कुमार, पेशकार संत राम व विकास चौहान, चकबंदी अधिकारी अमर सिंह व गणेश प्रसाद निरंजन, अनुसेवक रासमुज, स्टांप वेंडर जिशान, किसान चरन सिंह व ओम प्रकाश सहित कुल 22 लोग पहले से जेल में बंद हैं।

अपने जाने के बाद भी जांच के प्रभावित न होने के प्रति आश्वस्त हैं डा. दाते

नैनीताल। ऊधमसिंह नगर जनपद के एसएसपी डा. सदानंद के केंद्रीय जांच ब्यूरो में प्रतिनियुक्ति पर जाने के लिए एक-दो दिन में ही कार्यमुक्त होने की संभावना है। अलबत्ता डा. दाते आश्वस्त नजर आ रहे हैं कि उनके जाने के बाद भी एनएच-74 मुआवजा घोटाले की एसआईटी द्वारा की जा रही जांच प्रभावित नहीं होगी। इसके पीछे एसआईटी जांच को सरकार की ओर से मिल रहे समर्थन को बताया जा रहा है। उल्लेखनीय है कि दाते का हालांकि केंद्र में प्रतिनियुक्ति पर जाना पहले से ही तय था, किंतु बताया जा रहा है कि आईएएस अधिकारियों के मामले में नाम आने के बाद उन्हें केंद्र में भेजे जाने की फाइलें अधिक तेजी से चलायी गयीं। साथ ही इधर परिक्षेत्रीय पुलिस मुख्यालय में चर्चा है कि आईएएस में चयन के बावजूद अपने शौक से आईपीएस कैडर लेने वाले अधिकारी को ऊधमसिंह नगर का एसएसपी बनाया जा सकता है। इन आईपीएस अधिकारी के घर में पहले से ही कई आईएएस अधिकारी भी बताये जा रहे हैं। लिहाजा उम्मीद की जा रही है कि वे बिना दबाव से मामले की जांच करेंगे।

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नैनीताल। प्रदेश के बहुचर्चित करीब 211.85 करोड़ रुपए के एनएच-74 चौड़ीकरण सेे संबंधित मुआवजा घोटाला मामले में निलंबित एडीएम व तत्कालीन एसडीएम तीरथ पाल सिंह 14 दिन की न्यायिक हिरासत में जेल जाने के दो दिन बाद ही ‘बीमार’ पड़ गये हैं। नैनीताल जिला कारागार में बंद निलंबित एडीएम तीरथपाल सिंह ने बुधवार को कई शारीरिक परेशानियां बताईं, जिसके बाद जेल प्रशासन उन्हें एहतियात के तौर पर बीडी पांडे जिला चिकित्सालय में दिखाने के लिए लाया। हालांकि एडीएम इस दौरान खुद ही अपने पैरों पर चल कर अस्पताल आये और ऐसे ही लौटे भी, लेकिन उन्होंने चिकित्सकों के समक्ष भी कई समस्याएं बताईं। उन्हें अस्पताल के वरिष्ठ फिजीशियन डा. एमएस दुग्ताल एवं डा. विजय सिंह पंवार को दिखाया गया। डा. पवार ने एहतियात के तौर उनका ईसीजी और एक्स-रे परीक्षण भी कराया। डा. पंवार ने बताया कि दोनों परीक्षणों की रिपोर्ट सामान्य आयी। अलबत्ता उन्होंने पूर्व में मई माह में हृदयाघात आने तथा इधर कोलस्ट्रॉल व रक्तचाप बढ़े होने की बात भी बतायी। डा. पवार ने कहा कि संभवतया बीच में दवाइयां छोड़ने के कारण कोई समस्या आई हो। इसके बाद से पुलिस सुरक्षा में जेल के लिए वापस लौट गये। इस दौरान पुलिस कर्मियों ने उन्हें किसी तरह से पकड़ा नहीं था, तथा उन्हें हथकड़ी आदि भी नहीं लगी थी।
उल्लेखनीय है कि तीरथपाल सिंह पर बाजपुर व गदरपुर में बतौर एसडीएम तैनाती के दौरान ग्राम मढ़िया रतना के किसान भगवान दास व मीना अग्रवाल को इसी तरह गलत तरीके से 2 करोड़ 15 लाख 97,156 रुपए का मुआवजा तत्कालीन एसएलएओ डीपी सिंह से दिलाने का आरोप है।

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-निलंबित एडीएम व नायब तहसीलदार पर करीब 4.55 करोड़ का मुआवजा 5 किसानों को गलत तरीके से दिलाने का है आरोप

सोमवार को पुलिस की गिरफ्त में विशेष न्यायाधीश भ्रष्टाचार निवारण की अदालत में पेश होने जाते निलंबित नायब तहसीलदार व एडीएम ।

नैनीताल, 9 जुलाई 2018। जिला एवं सत्र न्यायाधीश एवं विशेष न्यायाधीश सीपी बिजल्वाण की अदालत ने प्रदेश के बहुचर्चित करीब 211.85 करोड़ रुपए के एनएच-74 चौड़ीकरण सेे संबंधित मुआवजा घोटाला मामले में वर्तमान में निलंबित एडीएम व तत्कालीन एसडीएम तीरथ पाल सिंह व वर्तमान नायब तहसीलदार तथा तत्कालीन रजिस्ट्रार कानूनगो रघुवीर सिंह को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया है। खास बात यह रही कि जेल भेजे जाने के दौरान आरोपित निलंबित एडीएम व तत्कालीन एसडीएम तीरथ पाल मुस्कुराते दिखे। बकायदा छायाकारों को उन्होंन मुस्कुराते हुए पोज दिये, अलबत्ता नायब तहसीलदार तथा तत्कालीन रजिस्ट्रार कानूनगो रघुवीर सिंह गंभीर व गमगीन दिखे। उल्लेखनीय है कि रघुवीर सिंह पर 2.39 करोड़ व तीरथपाल सिंह पर 2.15 करोड़ रुपए से अधिक का राजकोष को नुकसान पहुंचाने का आरोप है।
उल्लेखनीय है कि तत्कालीन कुमाऊं आयुक्त डी सेंथिल पांडियन द्वारा की गयी जांचों के उपरांत पंतनगर थाने में ऊधमसिंह नगर जिले के एडीएम प्रताप शाह द्वारा पूर्व तिथियों में कृषि भूमि का अकृषक दिखाकर किसानों को अधिक मुआवजा दिलाकर राजकोष को नुकसान पहुंचाने के आरोप में 10 मार्च 2014 को मुकदमा दर्ज कराया गया था। इस मामले में इस मामले में तत्कालीन विशेष भूमि अध्याप्ति अधिकारी दिनेश प्रताप सिंह, तत्कालीन एसडीएम भगत सिंह फौनिया, अनिल शुक्ला व एनएस नगन्याल, तत्कालीन प्रभारी तहसीलदार मदन मोहन पडलिया व भोले लाल व मोहन सिंह सहित संग्रह अमीन अनिल कुमार, डाटा इंट्री ऑपरेटर अर्पण कुमार, पेशकार संत राम व विकास चौहान, चकबंदी अधिकारी अमर सिंह व गणेश प्रसाद निरंजन, अनुसेवक रासमुज, स्टांप वेंडर जिशान, किसान चरन सिंह व ओम प्रकाश सहित कुल 18 लोग पहले से जेल में बंद हैं, और अब यह संख्या 20 हो गयी है।
सोमवार को जिला शासकीय अधिवक्ता सुशील कुमार शर्मा ने न्यायालय को आरोपित तत्कालीन रजिस्ट्रार कानूनगो के बाबत बताया कि गदरपुर तहसील में तैनात रहने के दौरान उसके द्वारा ग्राम बरीराई के किसान जरनल सिंह, करनैल सिंह व परमजीत सिंह की भूमि से संबंधित 3 मामलों में धारा 143 जेडएएलआर की कार्रवाई कर कृषि भूमि का अकृषि करने की रिपोर्ट दी थी, जबकि अभी इस जगह पर किसी सड़क का निर्माण नहीं हुआ, बावजूद किसानों को 2 करोड़ 39 लाख 38,200 रुपए का मुआवजा वर्तमान में जेल में बंद तत्कालीन एसएलएओ डीपी सिंह से दिलाया गया। वहीं आरोपित तीरथपाल सिंह ने बाजपुर व गदरपुर में बतौर एसडीएम तैनाती के दौरान ग्राम मढ़िया रतना के किसान भगवान दास व मीना अग्रवाल को इसी तरह गलत तरीके से 2 करोड़ 15 लाख 97,156 रुपए का मुआवजा तत्कालीन एसएलएओ डीपी सिंह से दिलाया।

मामले के 8 आरोपित गायब, विदेश भागने की आशंका

  • रेड कॉर्नर व लुक आउट नोटिस कराने की कोशिश में पुलिस
  • जरूरत पड़ने पर इंटरपोल की मदद भी लेंगे, पर कोई भी दोषी बख्शा नहीं जाएगा: एसएसपी

नवीन जोशी, नैनीताल। उत्तराखंड के बहुचर्चित, पिछली सरकार के दौर में हुए और नयी सरकार के लिए चुनौतीपूर्ण साबित हो रहे राष्ट्रीय राजमार्ग-74 के चौड़ीकरण मामले में अवैधानिक तरीके से किसानों को अधिक मुआवजा देने के अब तक 200 करोड़ रुपए से अधिक के प्रकाश में आ चुके घोटाले में बड़ी खबर आ रही है। राज्य सरकार जहां इस मामले में अब तक मामले के मुख्य आरोपित बताये जा रहे तत्कालीन विशेष भूमि अध्याप्ति अधिकारी डीपी सिंह तथा एक अन्य विशेष भूमि अध्याप्ति अधिकारी सहित कुल छह पीसीएस अधिकारी निलंबित, और इनमें से तीन को गिरफ्तार करने तथा एक अन्य के विरुद्ध गैर जमानती वारंट जारी कर संतोष जता रही है, वहीं मामले में आठ गैर जमानती वारंट जारी हो चुके आरोपितों के गायब होने और इनमें से कम से कम एक के विदेश भागने की खबर है। उत्तराखंड पुलिस भी आठ के गायब होने की पुष्टि कर रही है, जबकि एक के विदेश भागने की खबर पर फिलहाल पुलिस पुष्ट सूचना न होने की बात कहते हुए बच रही है। बहरहाल, अभी देश में कहीं भूमिगत चल रहे आरोपित विदेश न भाग जाएं, इस हेतु उनकी धरपकड़ के लिए मामले की जांच कर रहे पुलिस के विशेष जांच दल-एसआईटी ने ‘रेड कॉर्नर नोटिस’ और जिनके गैर जमानती वारंट जारी हो चुके हैं, उन्हें दबोचने के लिए ‘लुक आउट नोटिस’ जारी करने के प्रयास शुरू कर दिये गये हैं।
मामले की जांच में पल-पल की नजर रख रहे ऊधमसिंह नगर जनपद के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक डा. सदानंद दाते ने कहा कि आठ आरोपितों के विदेश भागने की आशंका है। ये गैर जमानती वारंट यानी एनवीडब्लू जारी होने के बाद यहां नहीं हैं। संभवतया अपने मूल पंजाब अथवा कहीं अन्य चले गये हैं। एक के विदेश भागने की सूचना पर उन्होंने कहा कि अभी यह पुष्ट नहीं है। जब तक पता नहीं चल जाता है कि वह कहां पर है, तब तक यह कहना सही नहीं होगा। विदेश न जाएं इसके लिए उनके ‘रेड कॉर्नर नोटिस’ और जिनके एनवीडब्लू जारी हो चुके हैं, उनके ‘लुक आउट नोटिस’ जारी करने की कोशिश में हैं। लेकिन फिर भी यदि कोई विदेश चला गया हो तो उसकी गिरफ्तारी के लिए इंटरपोल से भी मदद ली जा सकती है। किंतु दोषियों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा। वहीं डीआईजी पूरन सिंह रावत ने कहा कि इस मामले में आरोपित सैकड़ों किसानों के सत्यापन कराये जा रहे हैं, एक संदिग्ध शायद के विदेश भागने की बात उनके संज्ञान में भी आई है, किंतु प्रामाणिक तौर पर भागने की जानकारी नहीं है।

यह भी पढ़ें : मामले में आरोपित डीपी बोले-लुटाए नहीं 400 करोड़ बचाए, नाम बताऊं तो छाप नहीं पाएगा मीडिया

नैनीताल, 2 अप्रैल 2018। प्रदेश के बहुचर्चित एनएच-74 मुआवजा घोटाला मामले में प्रमुख आरोपित बताए जा रहे नैनीताल जिला कारागार में बंद पूर्व विशेष भूमि अध्याप्ति अधिकारी डीपी सिंह को रविवार शाम साढ़े सात बजे बीडी पांडे जिला चिकित्सालय में उपचार के लिए लाया गया, और प्राथमिक उपचार के बाद भर्ती कर लिया गया। जिला चिकित्सालय की प्रमुख चिकित्सा अधीक्षक डा. तारा आर्या ने बताया कि उन्हें सीने व पेट में दर्द व उच्च रक्तचाप की समस्या बताई गयी। प्राथमिक जांच के उपरांत उनके पेट का अल्ट्रासाउंड भी कराया गया और बाद में चिकित्सालय के वरिष्ठ फिजीशियन डा. एमएस दुग्ताल व हृदय रोग विशेषज्ञ ने उनका स्वास्थ्य परीक्षण कर अस्पताल में उपचार कराने की सलाह दी। डा. पवार ने बताया कि उन्हें सिर दर्द, डी हाई टेन्सन व हाइपर टेंसन की समस्याएं भी हैं। उनकी हृदय रोग संबंधी ईसीजी आदि जांचें भी की गयी हैं। एनएच मुआवजा घोटाला में जेल में बंद होने के कारण उन्हें अनुमन्य सुरक्षा भी उपलब्ध करायी गयी है।

लुटाए नहीं सरकार के 400 करोड़ बचाए, नाम बता दूं तो छाप नहीं पाएगा मीडिया: डीपी
नैनीताल। बीडी पांडे जिला चिकित्सालय में उपचार के दौरान एनएच मुआवजा घोटाले के आरोपित डीपी सिंह ने कहा कि उन्होंने सरकार के करीब 400 करोड़ रुपए बचाए हैं, इसके सबूत दे सकते हैं। इसके लिए पूरी व्यवस्था से लड़े हैं। मौके पर मौजूद उनकी पत्नी भी बोलीं, सरकार जीरो टॉलरेंस की बात कर रही है तो मंत्री व आईएएस अधिकारी क्यों नहीं जांच के दायरे में आ रहे हैं। इस मामले में खुली बहस कर सकते हैं। उलाहना दी कि यदि असली गुनाहगारों के नाम बताएंगे तो मीडिया छाप नहीं पाएगा। लेकिन वह मीडिया के बहुत कुरेदने के बावजूद खुद ही नाम बताने की हिम्मत नहीं जुटा पाए। अलबत्ता सीबीआई जांच न होने पर भी सवाल उठाए।

यह भी पढ़ें : एनएच-74 घोटाले में प्रिया शर्मा व सुधीर चावला के खिलाफ कोर्ट में चार्जशीट पेश

-न्यायालय ने चार्जशीट पर संज्ञान लेकर दोनों को मंगलवार को जेल से न्यायालय में किया तलब, 21 मार्च से दोनों हैं जेल में

बुधवार को विशेष न्यायाधीष भ्रष्टाचार निवारण की अदालत में पेश होने जाते बिल्डर प्रिया शर्मा व सुधीर चावला।

नैनीताल। करीब 300 करोड़ के बहुचर्चित एनएच-74 के चौड़ीकरण के अधिक मुआवजा लेने के घोटाले के मामले में विवेचना अधिकारी ने प्रिया शर्मा व सुधीर चावला के खिलाफ चार्ज शीट जिला एवं सत्र न्यायाधीश-विशेष न्यायाधीश भ्रष्टाचार निवारण सीपी बिजल्वाण की अदालत में पेश कर दी है। वहीं अदालत ने चार्जशीट पर संज्ञान लेते हुए दोनों आरोपितों को मंगलवार को सुनवाई के लिए जेल से न्यायालय में तलब कर दिया है। अब दोनों मंगलवार को सुनवाई के दौरान न्यायालय में उपस्थित रहेंगे।
उल्लेखनीय है कि प्रिया शर्मा व सुधीर चावला इस मामले के मुख्य आरोपित पीसीएस अधिकारी व पूर्व विशेष भूमि अध्याप्ति अधिकारी डीपी सिंह के करीबी हैं। दोनों के खिलाफ विवेचनाधिकारी ने भारतीय दंड संहिता की धारा 420, 467, 468 व 471 के साथ ही 8/9 भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत आरोप पत्र अदालत में दाखिल किये गये हैं। दोनों इस मामले में 21 मार्च को गिरफ्तार होने के बाद से जेल में बंद हैं।

300 करोड़ के एनएच-74 घोटाले में डीपी की करीबी प्रिया शर्मा की जमानत अर्जी खारिज

नैनीताल। प्रदेश के बहुचर्चित करीब 300 करोड़ रुपए के राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या 74 के चौड़ीकरण में किसानों की कृषि भूमि का अकृषक दिखाकर सरकार को करोड़ों रुपए के प्रतिकर का नुकसान पहुंचाने से संबंधित एक मामले में बहुचर्चित बिल्डर प्रिया शर्मा की जमानत अर्जी को जिला जिला एवं सत्र न्यायाधीश सीपी बिजल्वाण की अदालत ने खारिज कर दिया है। उल्लेखनीय है कि प्रिया करोड़ों रुपए के इस घोटाले के मुख्य आरोपित तत्कालीन विशेष भूमि अध्याप्ति अधिकारी डीपी सिंह की करीबी है। प्रिया पर आरोप है कि उसने इस घोटाले में सरकार से किसानों को दिलायी करोड़ों की अतिरिक्त धनराशि में से 30 से 40 फीसद का कमीशन लेकर उसका एक हिस्सा संबंधित अधिकारियों को पहुंचाया। इस कमीशन की धनराशि को सही दर्शाने के लिए उसने बिचौलिये के साथ एक प्लॉट का सौदा दिखाया। यह मामला उच्च न्यायालय भी पहुंचा था, जहां प्लॉट का सौदा करने वाले मुख्तारे आम के हस्ताक्षर फर्जी पाये गये। उच्च न्यायालय के आदेशों पर ही उसे 20 मार्च 2018 को पुलिस की टीम ने दबिश देकर गुरुग्राम हरियाणा से उसकी कंपनी के साथी सुधीर चावला के साथ गिरफ्तार किया गया था। तभी से दोनों जेल में बंद हैं। दोनों पर धोखाधड़ी, मनीट्रेल एवं बिजली चोरी के आरोपों में भारतीय दंड संहिता की धारा 167, 218, 219, 409, 465, 467, 463, 471, 474, 120 बी व 34 के तहत मुकदमा दर्ज हैं। सुधीर चावला की जमानत अर्जी पहले ही खारिज हो चुकी है, जिसके बाद इधर प्रिया शर्मा ने जमानत अर्जी लगाकर जेल से बाहर निकलने का प्रयास किया था।
उल्लेखनीय है कि प्रिया शर्मा व सुधीर चावला के खिलाफ एनएच 74 मुआवजा घोटाले की जांच कर रहे पुलिस क्षेत्राधिकारी स्वतंत्र कुमार सिंह ने 26 जनवरी 2018 को रुद्रपुर थाने में एफआईआर दर्ज कराई थी। उन पर आरोप है कि उन्होंने एनएच घोटाले में शामिल काशीपुर के डाटा एंट्री आपरेटर जीशान के बयानों के अनुसार जीशान से कंपनी के खाते में डेढ़ करोड़ रुपये संबंधित अधिकारी को कमीशन पहुंचाने के लिए लिये थे। हालांकि प्रिया शर्मा ने यह कहा कि यह रकम उन्होंने एक भूखंड के बयाने के तौर पर ली थी। हालांकि यह दावा सम्बंधित मुख्तारेआम के बयानों व हस्ताक्षर फर्जी पाए जाने के साथ झूठा साबित हो गया है।

मामले में खुलते जा रहे हैं कई नए राज

नैनीताल। जिला एवं सत्र न्यायालय में जमानत याचिका का जिला शासकीय अधिवक्ता-फ़ौजदारी सुशील कुमार शर्मा ने विरोध करते हुए कहा कि प्रिया शर्मा करोड़ों रुपए के एनएच-74 घोटाले में करोड़ों की धनराशि कमीशन के रूप में प्राप्त कर संबंधित अधिकारियों तक पहुंचाने की सूत्रधार रही है। उसके द्वारा एनएच-74 के चौड़ीकरण में सरकार से अधिक मुआवजा प्राप्त करने हेतु पिछली तिथियों में धारा 143 के तहत कृषि भूमि का अकृषक घोषित कर कई गुना प्रतिकर प्राप्त कर सरकार को भारी धन की हानि पहुंचाई गयी, और इस कार्य में बिचौलिये दलालों की मदद से 30 से 40 फीसद तक कमीशन किया गया। ग्राम कुंडा के किसान अजमेर सिंह, सुखदेव सिंह आदि पांच भाइयों को ही 23 करोड़ का प्रतिकर दिलाया व इसका 40 फीसद कमीशन बिचौलिये जीशान से प्राप्त किया। इसमें से 1 करोड़ की धनराशि उसकी कंपनी एलाइड प्लस इंफ्रा एंड अदर्स के खाते में आरटीजीएस से संबंधित अधिकारियों को पहुंचाने के लिए आये, तथा 40 लाख रुपए नगद कमीशन भी प्रिया शर्मा को मिली। यही नहीं उसने जीशान से प्राप्त इस कमीशन को सही दर्शाने के लिए जीशान के साथ ग्राम फाजलपुर मैहरौला में खेत नंबर 94 का 3.62 करोड़ में सौदा भी दर्शाया, जबकि यह खेत किसी जगशरण सिंह के नाम दर्ज मिला। उल्लेखनीय है कि इस खेत के मुख्तारेआम गुरप्रीत सिंह संधू के हस्ताक्षर भी फर्जी पाये गये। यह मामला भी अलग से उच्च न्यायालय तक पहुंचा था।

एनएच 74 घोटाले में आरोपी एलाइड इंफ्रा प्लस की एमडी प्रिया शर्मा और उनके पार्टनर सुधीर चावला को पुलिस ने किया गिरफ्तार

बिल्डर प्रिया शर्मा

गुरुग्राम 20 मार्च 2018। एनएच 74 घोटाले में शामिल एलाइड इंफ्रा प्लस एंड अदर्स की एमडी प्रिया शर्मा एवं उनके पार्टनर सुधीर चावला को काशीपुर पुलिस ने गुरुग्राम के सेक्टर 29 से गिरफ्तार कर लिया गया है। प्रिया शर्मा पर धोखाधड़ी, मनीट्रेल एवं बिजली चोरी के कई मुकदमे दर्ज हैं। लंबे समय से फरार चल रहीं प्रिया व सुधीर के घर की पुलिस कोर्ट के आदेश पर पुलिस कुर्की कर चुकी है। उधमसिंह नगर के एसएसपी डा. सदानंद शंकर राव दाते ने गिरफ्तारी की पुष्टि करते हुए बताया कि दोनों को कल कोर्ट में पेश किया जाएगा।

लंबे समय से फरार चल रही प्रिया शर्मा एवं सुधीर चावला तक काशीपुर पुलिस सर्विलांस के जरिए पहुंच पाई। सूत्र बताते हैं कि दोनों ने अपने पुराने मोबाइल नंबरों को बंद कर दिया था तथा एक नए मोबाइल नंबर से वह कुछ खास लोगों से फोन पर बातचीत कर रहे थे। पुलिस ने लोकेशन खंगाली तो उनकी लोकेशन गुरुग्राम में मिली। जिस पर पुलिस गुरुग्राम पहुंच गई। बताया जाता है कि दोनों को गुरुग्राम के डीएलएफ मॉल से गिरफ्तार किया गया।

यहां बता दें प्रिया शर्मा व सुधीर चावला के खिलाफ एनएच 74 मुआवजा घोटाले की जांच कर रहे पुलिस क्षेत्राधिकारी स्वतंत्र कुमार सिंह ने 26 जनवरी को रुद्रपुर थाने में एफआईआर दर्ज कराई थी। उन पर आरोप था कि उन्होंने एनएच घोटाले में शामिल काशीपुर के डाटा एंट्री आपरेटर जीशान के बयानों के अनुसार जीशान से कंपनी के खाते में डेढ़ करोड़ रुपये संबंधित अधिकारी को कमीशन पहुंचाने के लिए लिये थे। हालांकि प्रिया शर्मा ने यह कहा कि यह रकम उन्होंने एक भूखंड के बयाने के तौर पर ली थी। एफआईआर की विवेचना सीओ काशीपुर राजेश भट्ट को सौंपी गई थी। सीओ ने विवेचना में पाया कि प्रिया जिस भूखंड का इकरारनामा करने की बात कह रही हैं वह उनके नाम ही नहीं था। जिस पर जमीन के स्वामी से पूछताछ की गई। जमीन के स्वामी ने प्रिया से उस जमीन का इकरारनामा करने की बात से इंकार कर दिया। उसके बाद से प्रिया शर्मा व सुधीर चावला फरार हो गए। इस दौरान प्रिया के खिलाफ अन्य मुकदमे भी दर्ज किए गए। कोर्ट ने उनका गैरजमानती वारंट जारी किया, मगर उन्होंने न्यायालय में समर्पण नहीं किया। इसके बाद पुलिस ने न्यायालय से कुर्की वारंट हासिल किया। दोनों के घरों की कुर्की भी पुलिस ने की, मगर दोनों का कुछ पता नहीं चला। कल ही कोर्ट से प्रिया शर्मा की पुलिस के खिलाफ दायर याचिका खारिज हो गई थी।

बिल्डर प्रिया व चावला के खिलाफ ‘एनवीडब्लू’ जारी

नैनीताल, 28 फरवरी, 2018। उत्तराखंड उच्च न्यायाल के बुधवार के आदेशों के क्रम में विशेष न्यायाधीश भ्रष्टाचार निवारण, जिला एवं सत्र न्यायाधीश कुमकुम रानी की अदालत ने एनएच 74 भूमि घोटाले से सम्बंधित एक अन्य मामले में लिप्त बताई गयी आरोपित एलाइड इंफ्रा प्राइवेट लिमिटेड की एमडी-बिल्डर प्रिया शर्मा व निदेशक सुधीर चावला के खिलाफ गैर जमानती वारंट जारी कर दिये हैं। इससे पूर्व उच्च न्यायालय का आदेश आने के बाद मामले के विवेचक सीओ काशीपुर राजेश भट्ट की ओर से न्यायालय में गैर जमानती वारंट जारी करने हेतु प्रार्थना पत्र देते हुए कहा गया कि रुद्रपुर में इनके आवासों पर दबिश देने के बावजूद ये नहीं मिले, और फरार चल रहे हैं। इस पर न्यायालय ने गैर जमानती वारंट जारी कर दिये। उल्लेखनीय है कि इस मामले में एनएच 74 भूमि घोटाले के विवेचनाधिकारी स्वतंत्र कुमार ने एलाइड इंफ्रा प्राइवेट लिमिटेड नाम की कंपनी की एमडी प्रिया शर्मा व निदेशक सुधीर चावला के खिलाफ भूमि मुआवजा घोटाले से सम्बंधित मामले में भारतीय दंड संहिता की धारा 420, 467, 468 व 471 के तहत बीती 26 जनवरी को रुद्रपुर कोतवाली में एफआईआर दर्ज कराई है।

उल्लेखनीय है कि इससे पूर्व उत्तराखंड उच्च न्यायालय की न्यायमूर्ति लोकपाल सिंह की एकलपीठ में मामले की आरोपी प्रिया शर्मा व सुधीर चावला केस में सुनवाई के दौरान कुछ दस्तावेजो में फर्जी हस्ताक्षर पाये गए, इस पर न्यायालय ने शपथकर्ता व याची के अधिवक्ता से इकरारनामे  की मूल कॉपी को कोर्ट में पेश करने को कहा। कहा-यदि मूल कॉपी पेश नही की जाती है तो रजिस्ट्रार जनरल इस सम्बन्ध में  जाँच करें और कोर्ट की ओर से मुकदमा दर्ज किया जाये। गौरतलब है कि न्यायमूर्ति लोकपाल सिंह की एकलपीठ ने आरोपी सुधीर चावला को 28 फरवरी को कोर्ट में व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने के निर्देश दिए थे परन्तु वे उपस्थित नही हुए। कोर्ट ने न्यायालय के आदेश की अवहेलना मानते हुए उनके खिलाफ गैर जमानती वारंट जारी करने, और साथ में सुधीर चावला को 8 मार्च को गिरफ्तार कर कोर्ट में पेश करने, नही मिलने पर उनकी सम्पति जब्त करने के साथ ही कहा कि यदि एसआईटी चाहे तो प्रिया शर्मा को भी गिरफ्तार कर सकती है। साथ ही न्यायालय ने  याचिकर्ताओ की गिरफ्तारी से बचने सम्बंधित प्रार्थना पत्र को निरस्त कर अगली सुनवाई को 8 मार्च की तिथि नियत की।

₹ 211.85 करोड़ के एनएच मुआवजा मामले में आरोपित पीसीएस अधिकारी शुक्ला की जमानत अर्जी 2 हफ्ते लटकी

नैनीताल। प्रदेश के बहुचर्चित एनएच-74 भूमि मुआवजा घोटाले के एक और आरोपित पीसीएस अधिकारी अनिल शुक्ला ने नैनीताल उच्च न्यायालय में जमानत के लिये प्रार्थना पत्र दाखिल किया है। उच्च न्यायालय की न्यायमूर्ति वीके बिष्ठ की एकलपीठ ने पूरे मामले को सुनने के बाद राज्य सरकार को जवाब दाखिल करने के लिए 2 हफ्तों का समय दिया। इस प्रकार आरोपित की जमानत अर्जी पर सुनवाई दो सप्ताह के लिए टल गयी है। न्यायालय अब शुक्ला की जमानत याचिका पर 2 अप्रैल को सुनवाई करेगा। उल्लेखनीय है कि एनएच घोटाले की जांच कर रही एसआईटी ने अनिल शुक्ला को आरोपी बनाया है। शुक्ला पर आरोप है कि उसने पुरानी तिथियों पर जमीनों के कागज तैयार कर भूमि का मुआवजा कई गुना बढा दिया। निचली अदालत से याचिका खारिज होने के बाद अब अनिल शुक्ला ने उच्च न्यायालय की शरण ली है। इससे पूर्व एक अन्य पीसीएस अधिकारी डीपी शुक्ला भी उच्च न्यायालय में जमानत अर्जी दाखिल कर चुका है, उस पर भी न्यायालय से सरकार से जवाब मांगा हुआ है।

कांग्रेस की गर्दन तक पहुंची घोटाले की जांच

उत्तराखंड में राष्ट्रीय राजमार्ग 74 के चौड़ीकरण में उजागर 211.85 करोड़ रुपये के भूमि मुआवजा घोटाले की जांच में किसानों व नौकरशाहों पर लग रहे आरोपों पर सवाल उठ रहे थे कि राजनेताओं तक जांच कब पहुंचेगी। इस मामले में बुधवार 21 फरवरी को विशेष जांच दल (एसआईटी) की दो सदस्यीय टीम ने कांग्रेस के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष किशोर उपाध्याय से उनके आवास पर करीब एक घंटे तक पूछताछ की। सूत्रों के मुताबिक उपाध्याय से घोटाले की राशि का चुनाव प्रचार-प्रसार में खर्च के संबंध में पूछताछ हुई। इस प्रकार जांच राजनेताओं तक पहुँच गयी है। इसके बाद आगे शीघ्र ही एसआईटी तत्कालीन मुख्यमंत्री हरीश रावत व मौजूदा कांग्रेस अध्यक्ष प्रीतम सिंह के साथ ही कांग्रेस के बैंक खातों से जुड़े लोगों से भी पूछताछ कर सकती है।

विदित हो कि पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में हुए इस घोटाले के संबंध में शुरू से ऐसे आरोप सामने आये थे कि भूमि मुआवजा के तौर पर बंटी राशि में से कांग्रेस पार्टी के चुनावी खाते में 5.54 करोड़ सहित अन्य खातों में भी बड़ी धनराशि जमा हुई थी, और इस का इस्तेमाल 2017 में प्रदेश में हुए विधानसभा चुनावों के दौरान कांग्रेस पार्टी के द्वारा चुनाव प्रचार के लिए भी किया गया था। इसके लिए चुनाव से पहले कांग्रेस ने बैंक खाते खुलवाये थे। वर्ष 2017 विधानसभा चुनावों के समय उपाध्याय प्रदेश पार्टी की कमान संभाल रहे थे और एसआईटी ने उनसे इसी के मद्देनजर पूछताछ की। उपाध्याय ने एसआईटी की टीम द्वारा उनसे पूछताछ किये जाने की पुष्टि की और कहा कि उन्होंने एसआईटी से कहा है कि वह उन्हें इस संबंध में कानूनी नोटिस दे, जिसके बाद वह सभी प्रश्नों का जवाब देने को तैयार हैं।

एनएच-74 मुआवजा घोटाला मामले में मुख्य आरोपित डीपी पहुंचा हाईकोर्ट व निलंबित घूसखोर ‘आरके’ दूसरे मामले में पहुंचा जेल

नैनीताल। एनएच 74 मुआवजा घोटाले का मुख्य आरोपित तत्कालीन भूमि अध्यापित अधिकारी डीपी सिंह निचली अदालत से कई जमानत खारिज होने के बाद जमानत के लिए उत्तराखंड उच्च न्यायालय की शरण में पहुंच गया है। डीपी ने उच्च न्यायालय में प्रार्थना पत्र लगाया है, जिस पर सोमवार को न्यायाधीश वीके बिष्ट की एकलपीठ में सुनवाई होगी। उल्लेखनीय है कि अब तक 211.85 करोड़ के इस घोटाले में 15 मार्च को ऊधमसिंह नगर जिले के एडीएम प्रताप सिंह साह की ओर से मुकदमा दर्ज कराया गया था। मामले में एसआइटी की ओर से अब तक 12 लोगों के खिलाफ 5804 पन्नों के आरोप पत्र भी न्यायालय में दाखिल कर दिए गए हैं। मुख्य आरोपित डीपी सिंह ने 23 नवंबर को एसएसपी ऊधम सिंह नगर डॉ. सदानन्द दाते के दफ्तर में आत्मसमर्पण किया था। जिसके बाद 24 नवंबर को उसे न्यायालय के आदेश पर जेल भेजा गया था।

वहीं विशेष न्यायाधीश भ्रष्टाचार निवारण जिला एवं सत्र न्यायाधीश कुमकुम रानी की अदालत ने एनएच मुआवजा घोटाला मामले में गत दिनों निलंबित गदरपुर के रजिस्ट्रार कानूनगो हेमराज सिंह चौहान को एक अन्य मामले में घूसखोरी का दोष साबित होने पर साढ़े चार साल की जेल और 20 हजार रुपए के जुर्माना की सजा सुना दी है। आरके हेमराज पर आरोप है कि उसने गदरपुर निवासी ताहिर हुसैन को उसकी जमीन का सीलिंग प्रमाण पत्र करने की प्रक्रिया में जमीन को उसकी माता खूबी बेगम की ओर से पुत्रों के नाम हस्तांतरित करने की रिपोर्ट लगाने के ऐवज में दो हजार रुपये की रिश्वत की मांग की। इसकी शिकायत ताहिर ने विजिलेंस से की, जिस पर 23 जून 2012 को विजिलेंस की टीम द्वारा कानूनगो हेमराज चौहान को दो हजार की रिश्वत लेते रंगे हाथों गिरफ्तार किया गया। मामले में अभियोजन की ओर से आरोप साबित करने के लिए नौ जबकि बचाव पक्ष की ओर से तीन गवाह पेश किए गए। आरोपित को बीती 12 फरवरी को विशेष न्यायाधीश भ्रष्टाचार निवारण की अदालत ने दोषी करार दिया था।

एनएच-74 मुआवजा घोटाला मामले में सहायक चकबंदी अधिकारी गिरफ्तार, जेल भेजा

शुक्रवार को चकबंदी अधिकारी निरंजन को गिरफ्तार कर अदालत ले जाते एसआईटी कर्मी।

-चकबंदी अधिकारी गणेश प्रसाद निरंजन को न्यायालय ने पेशी के बाद 14 दिन की न्यायिक हिरासत में जेल भेजा, एसआईटी ले सकती है रिमांड में
नैनीताल। प्रदेश के बहुचर्चित 211.85 करोड़ रुपए के एनएच-74 मुआवजा घोटाला में शुक्रवार को एसआईटी ने एक और चकबंदी अधिकारी गणेश प्रसाद निरंजन को गिरफ्तार कर विशेष न्यायाधीश भ्रष्टाचार निवारण कुमकुम रानी की अदालत में पेश किया। जहां से उसे 14 दिन की न्यायिक हिरासत में जेल भेजने के आदेशों के बाद जेल भेज दिया गया। बताया गया है कि निरंजन को बृहस्पतिवार को एसआईटी ने गिरफ्तार किया था। एसआईटी उसे जल्द ही आगे की पूछताछ के लिए रिमांड पर ले सकती है। उल्लेखनीय है कि इससे पूर्व बृहस्पतिवार को ही एसआईटी ने एक और चकबंदी अधिकारी अमर सिंह तथा पीसीएस अधिकारी नंदन सिंह नगन्यालय को गिरफ्तार विशेष न्यायाधीश भ्रष्टाचार निवारण अरविंद कुमार की अदालत में पेश किया गया। जहां से दोनों को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में जेल भेजने के आदेशों के बाद देर शाम जेल भेज दिया गया। अब सभी आरोपितों के मामले में अगली सुनवाई 16 फरवरी को होगी। निरंजन की गिरफ्तारी के साथ इस मामले में तीन पीसीएस अधिकारियों सहित कुल 18 लोग गिरफ्तार किये जा चुके हैं।

एनएच-74 मुआवजा घोटाला मामले में पीसीएस अधिकारी नगन्याल सहित दो गिरफ्तार
08 फ़रवरी 2018 को एसडीएम नगन्याल (लाल घेरे में) को न्यायालय लाते एसआईटी के जवान।

-चकबंदी अधिकारी अमर सिंह भी गिरफ्त में, न्यायालय ने पेशी के बाद 14 दिन की न्यायिक हिरासत में जेल भेजा
नैनीताल/एसएनबी। प्रदेश के बहुचर्चित 211.85 करोड़ रुपए के एनएच-74 मुआवजा घोटाला में बृहस्पतिवार को एसआईटी ने एक और बड़ी उपलब्धि हासिल करते हुए मामले में वांछित पीसीएस अधिकारी नंदन सिंह नगन्याल एवं चकबंदी अधिकारी अमर सिंह को गिरफ्तार करने में सफलता प्राप्त कर ली। दोनों को विशेष प्रभारी न्यायाधीश भ्रष्टाचार निवारण अरविंद कुमार की अदालत में पेश किया गया। जहां से दोनों को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में जेल भेजने के आदेशों के बाद देर शाम जेल भेज दिया गया। उल्लेखनीय है कि इस प्रकार मामले में कुल 3 पीसीएस अधिकारियों सहित 17 लोग सींखचों के पीछे आ गये हैं। मामले की अगली सुनवाई 16 फरवरी को होगी।
बृहस्पतिवार को इस मामले की विवेचना कर रहे विशेष जांच दल यानी एसआईटी की टीम के सदस्य अपराह्न में एसडीएम रहे पीसीएस अधिकारी नगन्याल व चकबंदी अधिकारी अमर सिंह को गिरफ्तार कर विशेष प्रभारी न्यायाधीश भ्रष्टाचार निवारण अरविंद कुमार की अदालत में पेश करने के लिए लाई। इस दौरान मुख्यालय में मौजूद ऊधम सिंह नगर जिले के एसएसपी डा. सदानंद दाते ने बताया कि एफएसए की रिपोर्ट आने के बाद नगन्याल को रुद्रपुर से गिरफ्तार किया गया। नगन्याल पर आरोप है कि बाजपुर तहसील में एक ही दिन में पुरानी तिथियों पर जेडएलआरए अधिनियम की धारा 143 के तहत बहुत सारे मामलों में कृषि भूमि को अकृषक कर किसानों को करोड़ों रुपए का अतिरिक्त मुआवजा दिलाया गया था, और इसके ऐवज में अधिकारियों ने कमीशन भी लिया था। इनमें वह भी शामिल हैं। आगे अन्य कार्रवाइयां भी की जा सकती हैं। उल्लेखनीय है कि नगन्याल के खिलाफ कुर्की वारंट भी न्यायालय से जारी होकर उसके घर पर चस्पा कर दिया गया था। बताया गया है कि इसके बाद नगन्याल बृहस्पतिवार को खुद ही जांच कर रही पंतनगर पुलिस चौकी चला गया था, जहां से पूछताछ के बाद उसे गिरफ्तार कर लिया गया।

पूरा मामला जानने को यह भी पढ़ें : एनएच-74 घोटाला मामले में 12 को सुनाये आरोप, तीन की रिमांड 14 दिन बढ़ी, जमानत अर्जी खारिज

-अगली सुनवाई के लिए 28 फरवरी की तिथि तय
नैनीताल। प्रदेश के बहुचर्चित एनएच-74 मुआवजा घोटाला मामले में हल्द्वानी व नैनीताल की जेलों में बंद 15 में से 12 आरोपितों को शनिवार को विशेष न्यायाधीश भ्रष्टाचार निवारण, जिला एवं सत्र न्यायाधीश कुमकुम रानी की अदालत में पेश किया गया। अदालत ने उन्हें बताया कि उनके विरुद्ध जांच एजेंसी ने आरोप पत्र पेश कर दिये हैं, और अदालत उन पर लगे आरोपों का संज्ञान ले रही है। इस पर आरोपितों की ओर से उनके अधिवक्ता ने कहा कि उनके विरुद्ध जांच एजेंसी ने गलत साक्ष्य प्रस्तुत किये हैं, जबकि उनके ऊपर कोई आरोप नहीं बनते हैं, वहीं अभियोजन पक्ष की ओर से जिला शासकीय अधिवक्ता-फौजदारी सुशील कुमार शर्मा ने आरोपों को पूरी तरह सही बताया। इसके साथ आरोपितों के विरुद्ध नियमित सुनवाई शुरू हो गयी, तथा अदालत ने अगली सुनवाई की तिथि 28 फरवरी नियत कर दी। बताया कि 28 को इन्हें मामले से संबंधित प्रपत्रों की नकलें दी जाएंगी।

उल्लेखनीय है कि मुख्य आरोपित नैनीताल व ऊधमसिंह नगर जिले के तत्कालीन विशेष भूमि अध्याप्ति अधिकारी पीसीएस अधिकारी डीपी सिंह व निलंबित एसडीएम भगत सिंह फोनिया, तत्कालीन प्रभारी तहसीलदार मदन मोहन पड़लिया, सेवानिवृत्त प्रभारी तहसीलदार भूरे लाल, पेशकार विकास चौहान, संग्रह अमीन अनिल कुमार, डाटा इंट्री ऑपरेटर अर्पण कुमार, स्टांप वेंडर जीशान, अनुसेवक राम समझ, राजस्व अहलमद संजय कुमार तथा काश्तकार ओम प्रकाश व चरण सिंह के विरुद्ध भारतीय दंड संहिता की धारा 167, 218 व अन्य के तहत आरोप पत्र दाखिल कर दिये गये हैं।

तीन आरोपितों की न्यायिक हिरासत 14 दिन बढ़ी, जमानत अर्जी खारिज
नैनीताल। उपरोक्त आरोप पत्र पेश हुए 12 आरोपितों के अतिरिक्त इसी मामले में जेल में बंद तीन आरोपित एसडीएम अनिल शुक्ला, तहसीलदार मोहन सिंह व पेशकार संत राम के खिलाफ विवेचना अभी जारी है। शनिवार को अदालत ने जेल से ही वीडियो कांफ्रेंस के माध्यम से इनकी सुनवाई की, और इनकी न्यायिक हिरासत की अवधि को 14 दिन के लिए आगे बढ़ा दिया। इसके अलावा शनिवार को एसडीएम अनिल शुक्ला, तहसीलदार मोहन सिंह के द्वारा न्यायालय में पेश जमानत प्रार्थना पत्र पर भी सुनवाई हुई। अदालत ने अभियोजन पक्ष के प्रबल विरोध के बाद जमानत अर्जी खारिज कर दी।

मामले से संबंधित सील युक्त सामग्री भी अदालत में पेश
नैनीताल। शनिवार को न्यायालय में मामले की सुनवाई के दौरान एसआईटी द्वारा विवेचना के दौरान कब्जे में ली गयी सामग्री को भी सील-मोहर हालत में न्यायालय के समक्ष पेश किया गया। न्यायालय ने सील का अवलोकन कर व सील को सही पाते हुए अपनी सील लगा कर कब्जे में ले लिया।

यह भी पढ़ें : 211.85 करोड़ के एनएच-74 घोटाला मामले में दो पीसीएस अधिकारियों सहित 12 आरोपितों के खिलाफ चार्जशीट

नैनीताल। प्रदेश के बहुचर्चित एनएच-74 मुआवजा घोटाला मामले में हल्द्वानी व नैनीताल की जेलों में बंद 15 में से 12 आरोपितों के विरुद्ध विशेष जांच दल यानी एसआईटी ने शुक्रवार 2 फ़रवरी 2018 को विशेष न्यायाधीश भ्रष्टाचार निवारण जिला एवं सत्र न्यायाधीश कुमकुम रानी की अदालत में आरोप पत्र दाखिल कर दिये हैं। गौरतलब है कि आरोप पत्र आरोपितों को जेल में 89 दिन होने पर दाखिल किये गये हैं, जबकि एक दिन बाद ही यानी 90 दिन के भीतर आरोपितों के विरुद्ध जांच एजेंसी के चार्जशीट न्यायालय में दाखिल नहीं करने की स्थिति में जमानत मिले बिना हाी आरोपितों के बॉंड के जरिये न्यायालय से बाहर आने का प्राविधान है। इस तरह जांच एजेंसी की देर से की गयी इस कार्रवाई से जेल में बंद आरोपितों की जेल से बाहर आने की उम्मीदों को झटका लगा है। इसके साथ ही अदालत ने शनिवार को सभी आरोपितों को न्यायालय में पेशी के लिए तलब कर लिया है।

जिला शासकीय अधिवक्ता फौजदारी सुशील कुमार शर्मा ने बताया कि शुक्रवार को तय अवधि के भीतर ही एसआईटी ने मामले के मुख्य आरोपित नैनीताल व ऊधमसिंह नगर जिले के तत्कालीन विशेष भूमि अध्याप्ति अधिकारी, पीसीएस अधिकारी डीपी सिंह व भगत सिंह फोनिया, प्रभारी तहसीलदार मदन मोहन पड़लिया, सेवानिवृत्त प्रभारी तहसीलदार भूरे लाल, करन सिंह, विकास चौहान, अनिल कुमार, अनुपम कुमार, ओम प्रकाश, जीशान, राम समझ व संजय कुमार के विरुद्ध भारतीय दंड संहिता की धारा 167 व 218 के तहत आरोप पत्र दाखिल कर दिये हैं। जबकि जेल में बंद शेष बचे तीन आरोपित एसडीएम अनिल शुक्ला, तहसीलदार मोहन सिंह व पेशकार संत राम के खिलाफ विवेचना जारी है। इनमें से छह आरोपित नैनीताल और नौ हल्द्वानी जेल में बंद हैं। इसके साथ ही उन्होंने बताया कि जेल में बंद सभी आरोपितों की न्यायिक हिरासत की अवधि शनिवार को खत्म हो रही है, लिहाजा न्यायालय ने शनिवार को सभी आरोपितों को न्यायालय में पेश होने के लिए तलब कर लिया है। साथ ही एसडीएम अनिल शुक्ला, तहसीलदार मोहन सिंह के द्वारा न्यायालय में जमानत का प्रार्थना पत्र भी दिया गया है। इस पर भी शनिवार को न्यायालय में सुनवाई होगी।

211 करोड़ 85 लाख का घोटाला अब तक साबित
नैनीताल। जिला शासकीय अधिवक्ता शर्मा ने बताया कि अभी तक 211 करोड़ 85 लाख का घोटाला साबित हो चुका है, जबकि मामले में विवेचना अभी जारी है। वहीं कई आरोपित फरार चल रहे हैं, जबकि कई के खिलाफ वारंट जारी किये गये हैं, वे भी अभी एसआईटी के कब्जे में नहीं आये हैं।

एनएच-74 घोटाला एक नजर में
उल्लेखनीय है कि करीब 211.85 करोड़ रुपए के बताये जा रहे 17 वर्ष की उम्र के उत्तराखंड राज्य का यह सब से बड़ा घोटाला पिछली सरकार के दौर में ही प्रकाश में आ गया था। इस घोटाले के लिए सड़क किनारे की भूमि को योजनाबद्ध तरीके से साजिश के तहत कृषि भूमि से पिछली तिथियों में धारा 143 के तहत अकृषक करा कर राजकीय कोष से कई गुना अधिक मुआवजा किसानों को बांटा गया। पिछली सरकार भी इस मामले में तब निशाने पर आ गयी थी, जबकि घोटाले का पैंसा सत्तारूढ़ दल के खाते में जाने की बात प्रकाश में आई थी। बाद में सत्ता परिवर्तन के बाद तत्कालीन कुमाऊं आयुक्त डी सेंथिल पांडियन के निर्देश पर हुई जांच के बाद एनएच मुआवजा घोटाला सार्वजनिक हुआ था, और मामले में एडीएम प्रताप शाह की ओर से 10 मार्च 2017 को थाना पंतनगर में इस बाबत मुकदमा दर्ज कराया गया था। किंतु तभी पांडियन के स्थानांतरण और फिर मुख्यमंत्री की सीबीआई जांच कराने की घोषणा पर केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी के यह कहते हुए ‘वीटो’ लगाने पर कि इससे उत्तराखंड में कार्य कर रहे अधिकारियों का मनोबल गिरेगा और राज्य में अन्य राष्ट्रीय राजमार्गों के चौड़ीकरण के कार्यों में भी शिथिलता आयेगी, सरकार को जांच अपनी एसआईटी से करानी पड़ी। लेकिन इसके बाद राज्य की एसआईटी इस मामले में अपेक्षित से भी बेहतर कार्य करती दिखाई दी है। मामले में अब तक मुख्य आरोपित बताये जा रहे तत्कालीन विशेष भूमि अध्याप्ति अधिकारी डीपी सिंह तथा एक अन्य विशेष भूमि अध्याप्ति अधिकारी सहित कुल छह पीसीएस अधिकारी निलंबित, और तीन गिरफ्तार तथा एक अन्य के विरुद्ध गैर जमानती वारंट जारी हो चुका है, वहीं मामले में आठ गैर जमानती वारंट जारी हो चुके आरोपितों के गायब होने और इनमें से कम से कम एक के विदेश भागने की खबर भी है।

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मेरा जन्म 26 नवंबर 1972 को हुआ था। मैं नैनीताल, भारत में मूलतः एक पत्रकार हूँ। वर्तमान में मार्च 2010 से राष्ट्रीय हिन्दी दैनिक समाचार पत्र-राष्ट्रीय सहारा में ब्यूरो चीफ के रूप में कार्य कर रहा हूँ। इससे पहले मैं पांच साल के लिए दैनिक जागरण के लिए काम कर चुका हूँ। कुमाऊँ विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग से ‘नए मीडिया’ विषय पर शोधरत हूँ। फोटोग्राफ़ी मेरा शौक है। मैं NIKON COOLPIX P530 और अडोब फोटोशॉप 7.0 के साथ फोटोग्राफी कर रहा हूँ। फोटोग्राफी मेरे लिए दुनियां की खूबसूरती को अपनी ओर से चिरस्थाई बनाने का बहुत छोटा सा प्रयास है। एक फोटो पत्रकार के रूप में मेरी तस्वीरों को नैनीताल राजभवन सहित विभिन्न प्रदर्शनियों में प्रस्तुत किया गया, तथा उत्तराखंड की राज्यपाल श्रीमती मार्गरेट अलवा द्वारा सम्मानित किया गया है। कुछ चित्रों को राष्ट्रीय-अंतर्राष्ट्रीय पुरस्कार भी प्राप्त हो चुके हैं। गूगल अर्थ पर चित्र उपलब्ध कराने वाली पैनोरामियो साइट पर मेरी प्रोफाइल को 18.85 Lacs से भी अधिक हिट्स प्राप्त हैं।पत्रकारिता और फोटोग्राफी के अलावा मुझे कवितायेँ लिखना पसंद है। काव्य क्षेत्र में मैंने नवीन जोशी “नवेन्दु” के रूप में अपनी पहचान बनाई है। मैंने बहुत सी कुमाउनी कवितायेँ लिखी हैं, कुमाउनी भाषा में मेरा काव्य संकलन उघड़ी आंखोंक स्वींड़ प्रकाशित हो चुका है, जो कि पुस्तक के के साथ ही डिजिटल (PDF) फार्मेट पर भी उपलब्ध होने वाली कुमाउनी की पहली पुस्तक है। मेरी यह पुस्तक गूगल एप्स पर भी उपलब्ध है। ’ यहां है एक पत्रकार, लेखक, कवि एवं छाया चित्रकार के रूप में मेरी रचनात्मकता, लेख, आलेख, छायाचित्र, कविताएं, हिंदी-कुमाउनी के ब्लॉग आदि कार्यों का पूरा समग्र। मेरी कोशिश है कि यहां नैनीताल, कुमाऊं, उत्तराखंड और वृहद संदर्भ में देश की विरासत, संस्कृति, इतिहास और वर्तमान को समग्र रूप में संग्रहीत करने की….। मेरे दिल में बसता है, मेरा नैनीताल, मेरा कुमाऊं और मेरा उत्तराखंड

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