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यहां शिक्षक को सस्पेंड करने से भड़के बच्चों ने खुद को कक्षा में किया बंद, पढ़ें पूरा मामला…

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नवीन समाचार, रामनगर, 9 दिसंबर। पीरुमदारा के सेंट जोजफ स्कूल में एक शिक्षक को निलंबित करने से भड़के बच्चों ने खुद को क्लास में बंद कर जमकर हंगामा किया।

काशीपुर वैशाली कॉलोनी निवासी मनप्रीत सिंह पीरुमदारा के सेंट जोजफ स्कूल में गणित के शिक्षक हैं। शुक्रवार को स्कूल की प्रिंसिपल सिस्टर थेरेसा ने यूनियनबाजी करने, स्कूल में शिक्षक का बर्थडे मनाने जैसी बातों से नाराज होकर मनप्रीत सिंह को 15 दिन के लिए निलंबित कर दिया। शनिवार सुबह जब मनप्रीत स्कूल पहुंचे तो प्रिंसिपल ने उन्हें स्कूल से चले जाने को कहा। इसकी भनक लगते ही कुछ स्कूली बच्चों ने अपने आप को क्लास में बंद कर लिया। किसी तरह से बच्चों को क्लास से बाहर निकाला गया लेकिन बच्चे शिक्षक  का निलंबन रद्द करने की मांग पर अड़े रहे। इस दौरान उन्होंने मुख्य गेट को तोड़ने का प्रयास भी किया।  सूचना पर पीरुमदारा पुलिस चौकी इंचार्ज विपिन जोशी, महिला दरोगा सीमा आर्या मौके पर पहुंचे और मामले को शांत कराने का प्रयास किया। छात्रों ने स्कूल प्रबंधन के खिलाफ नारेबाजी करते हुए धरना प्रदर्शन जारी रखा। पुलिस और संभ्रांत नागरिकों के हस्तक्षेप के बाद निर्णय लिया गया कि सोमवार को स्कूल के शिक्षक और कमेटी के लोग मिलकर बच्चों की बात को सुनेंगे और मामले को निपटाने का प्रयास करेंगे। 

जुलाई में भी स्कूल के एक शिक्षक और अभिभावक का विवाद हुआ था। इस मामले में स्कूल के सभी शिक्षकों ने मिलकर साथ दिया। उसी दिन से स्कूल की प्रिंसिपल उनसे नाराज थीं और उसके चलते उनको सस्पेंड कर दिया गया।
– मनप्रीत, निलंबित शिक्षक

शिक्षक मनप्रीत स्कूल में यूनियनबाजी कर रहे थे और स्कूल में बिना अनुमति के अपना बर्थ डे सेलीब्रेट कर रहे थे। इससे अन्य शिक्षकों में गलत भावनाएं पैदा हो रहीं थीं, इसके लिए उनको कई बार चेतावनी भी दी जा चुकी थी। वह अपनी हरकतों से बाज नहीं आ रहे थे, इसलिए उनको 15 दिन के लिए निलंबित किया गया है।
– सिस्टर थेरेसा, प्रिंसिपल

कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने कर दिया घरेलू गैस सिलेंडरों का ‘अंतिम सस्कार’, जानें क्यों और कहाँ ?

हल्द्वानी, 4 अक्टूबर 2018। रसोई गैस की बढ़ती कीमतों के विरोध में काग्रेस कार्यकर्ताओं ने बृहस्पतिवार को अनूठे तरह से विरोध प्रदर्शन किया। काग्रेस नेता हेमंत साहू के नेतृत्व में कार्यकर्ता आंदोलन स्थल बुद्ध पार्क पहुंचे, और अनोखे अंदाज में रसोई गैस सिलेंडरों को माला पहनाकर उनके सामने अगरबत्ती व दिया जलाकर उन्हें मृतकों की तरह श्रद्धांजलि दी, साथ ही दो मिनट का मौन भी रखा, और लकड़ी वाले पुराने चूल्हे का भी उपयोग किया, और इस तरह संदेश दिया कि मानो घरेलू गैस सिलेंडर (सब्सिडी सहित) 900 रुपये का होने से आम जनता का जीना मुश्किल हो गया है। ऐसे में भाजपा की तानाशाह सरकार को जनता आगामी दिवंगत हो गये हों।
इस दौरान आयोजित सभा को सम्बोधित करते हुऐ काग्रेस नेता हेमन्त साहू ने कहा मोदी सरकार अच्छे दिनों की बात करती है, जबकि अच्छे दिन भाजपा की सरकार के आने के साथ ही खत्म हो गये थे। मोदी राज में जनता बुरे दिनों से जूझ रही है। 350 रुपये वाला सिलेंडर (सब्सिडी सहित) 900 रुपये का होने से आम जनता का जीना मुश्किल हो गया है। ऐसे में भाजपा की तानाशाह सरकार को जनता आगामी चुनावों में सबक सिखाने को बेसब्री इन्तजार कर रही है। पूर्व पार्षद राजेन्द्र बिष्ट व हृदयेश कुमार, सचिन राठौर, सलीम सिद्दीकी आदि ने भी विचार रखे। प्रदर्शन में सतीश पाल, जमील कुरैशी, ममता गौड़, देवकी देवी, तलत एहतेशाम, रईस मसूदी, हिमांशु गाँधी, योगेश कबडवाल, मो. असलम, चम्पा सक्सेना, विनोद कांडपाल, रवि सागर, प्रेमा देवी, संजय आर्या, जीत सिंह, मो. इमरान, हरीश आर्या, नजीम अंसारी, नीलम वर्मा, उमा बिष्ट, शांति देवी, नत्थो देवी, मंजू देवी, राहुल राठौर, गोपाल सिंह, आशा देवी, अंजलि आर्या, गुडूडी कश्यप, नवीन आर्या, जगदीश राम आर्या व अतुल कुमार आदि कार्यकर्ता भी मौजूद रहे।

इस बारे में नीचे कमेंट कर यह भी बताएं कि कांग्रेस कार्यकर्ताओं के इस प्रदर्शन को आप कितना सही या गलत या औचित्यपूर्ण मानते हैं।

यह भी पढ़ें : नैनीताल में हुआ केंद्र सरकार के ख़िलाफ़ ऐलान-ए-जंग, 15 नवंबर को राष्ट्रव्यापी हड़ताल कर दिल्ली में गरजेंगे देश भर के राज्य कर्मचारी

नैनीताल, 22 सितंबर 2018। पुरानी पेंशन बहाली, सातवें वेतनमान के भत्तों का भुगतान व आउट सोर्सिंग की व्यवस्था को समाप्त करने की मांग पर अखिल भारतीय स्टेट गवर्नमेंट फेडरेशन आगामी 15 नवंबर को राष्ट्रव्यापी हड़ताल कर दिल्ली में विशाल रैली का आयोजन करेगा। शनिवार को महासंघ के बैनर तले कर्मचारियों की कई लंबित समस्याओं के संबंध में मुख्यालय स्थित श्री राम सेवक सभा भवन मल्लीताल में हुई फेडरेशन की पूर्व निर्धारित बैठक में यह निर्णय लिया गया।
बैठक में अखिल भारतीय सरकारी राज्य कर्मचारी महासंघ के केंद्रीय अध्यक्ष सुभाष लांबा ने सरकार से मांग की कि बैंकों से ऋण लेने वो बड़े बकायेदारों के नाम सार्वजनिक करें। उनसे 50 फीसद धनराशि भी वसूल हो जाये तो देश की जनता को निःशुल्क शिक्षा व चिकित्सा सुविधाएं दी जा सकती हैं। विभागों में कार्यरत आउटसोर्स कर्मचारियों को नियमित किये जाने की मांग भी की गयी। वरिष्ठ कर्मचारी नेता प्रेम सिंह ने वर्ष 1966 से लेकर अब तक के कर्मचारी संगठनों का इतिहास रखा। फेडरेशन के ज्योति प्रकाश पांडेय व डा. बृजलाल तिवारी व एसपी सिंह आदि ने संगठन की एकता पर जोर देते हुए मांगों को दोहराया। बैठक में फेडरेशन के उपाध्यक्ष एसपी सिंह, राज्य कर्मचारी महासंघ के प्रांतीय संरक्षक गिरीश चंद्र उप्रेती और उत्तराखंड फैडरेशन आफ मिनिस्ट्रीयल सर्विसेज एसोसिएशन के जिला मंत्री भगोत सिंह जंतवाल, लोनिवि कर्मचारी संघ के प्रांतीय संरक्षक डा. बृज लाल तिवारी व सुरेंद्र प्रताप सिंह, प्रदेश महामंत्री ज्योति प्रकाश पांडे, बरेली जोन के क्षेत्रीय अध्यक्ष सुशील कुमार भसीन, महामंत्री अजय गुप्ता, बरेली जिलाध्यक्ष अभिषेक अग्रवाल, जिला मंत्री विकास सक्सेना, ज्योति प्रकाश पांडे, भसर प्रेम सिंह बिष्ट, बीडी नौलिया, चंद्रमणि भट्ट, श्याम सिंह रावत, पुष्कर सिंह, प्रवीण साह, रमेश लाल, ललित पांडे, मंजूर हुसैन सहित अल्मोड़ा, बागेश्वर, यूएसनगर आदि से आये कर्मचारी नेता शामिल हुए। कई विभागीय कर्मचारियों को इस बैठक में न आने देने पर संबंधित विभागों की निंदा भी की गयी।

शायद इतिहास में पहली बार यहाँ ‘शोक सभा’ को लेकर हुई हड़ताल

-बाद में हाईकोर्ट के आदेश पर ‘आहत’ हो लौटे कार्य पर

हड़ताल के दौरान नारेबाजी करते कुविवि कर्मचारी।

-विवि प्रशासन पर पहली बार ‘एस्मा’ लगाने और उच्च न्यायालय में सुनियोजित तरीके से जनहित याचिका दायर करवाने का लगाया आरोप
नैनीताल। देश-दुनिया में हड़तालें अनेकानेक कारणों से होती रहती है, किन्तु संभवतया इतिहास में पहली बार ‘शोक सभा’ को लेकर कर्मचारियों ने कहीं हड़ताल की है। कुमाऊं विवि के डीएसबी व भीमताल तथा अल्मोड़ा परिसरों के कर्मचारी शिक्षणेत्तर कर्मचारी संघ के बैनर तले विवि प्रशासनिक भवन, शुक्रवार को गत दिवस ‘शोक सभा’ को लेकर विवि प्रशासन से हुए विवाद के बाद छह सूत्रीय मांगों को लेकर हड़ताल पर चले गए। लेकिन दिन में ही इस मामले में उच्च न्यायालय में दायर हुई एक जनहित याचिका पर उच्च न्यायालय की ओर से कर्मचारियों से हड़ताल समाप्त करने और विवि प्रशासन से कर्मचारियों की मांगों पर 16 तक कार्रवाई करने के आदेश देते हुए अगली सुनवाई की तिथि 16 तक घोषित की गयी। इसके बाद कर्मचारी हड़ताल से वापस आ गए, अलबत्ता उन्होंने विवि प्रशासन पर विवि के इतिहास में पहली बार कर्मचारी आंदोलन के विरुद्ध ‘नो वर्क-नो पे’ व एस्मा लगाने तथा ‘सुनियोजित तरीके से उच्च न्यायालय में जनहित याचिका दायर करवाने’ के आरोप लगाते हुए स्वयं को बेहद ‘आहत’ बताया।
बताया गया है कि विवि में कर्मचारियों व उनके परिजनों की मृत्यु पर आयोजित होने वाली शोक सभा को लेकर बीते कुछ समय से विवाद की स्थिति बन गयी थी। विवि प्रशासन का आरोप था कि किसी कर्मचारी के रिश्तेदारों व माता-पिता की मृत्यु होने पर भी सुबह 11 बजे ही शोक सभा आयोजित करते थे, और इसके बाद अवकाश हो जाता था। इससे विवि के काम-काज प्रभावित हो जाते थे। संघ के अध्यक्ष दीपक बिष्ट ने बताया कि कुलपति से इस विषय पर उनकी वार्ता हुई थी, और कर्मचारी भी रिश्तेदारों व परिजनों की मृत्यु होने पर शोक सभा कर छुट्टी न करने को राजी हो गए थे। अलबत्ता किसी कार्यरत कर्मचारी की मृत्यु होने पर कुलपति ने सुबह 11 बजे ही शोक सभा करने की बात कही थी, जबकि कुलपति ने 11 की बजाय शाम चार बजे शोक सभा आयोजित करने को कहा। गत दिवस यह विवाद तब और अधिक बढ़ा जब इस भावनात्मक विषय को विवि की कार्य समिति की बैठक में रखकर कार्यरत कर्मचारियों की मृत्यु पर शाम साढ़े तीन बजे शोक सभा कराने का नियम पारित कर दिया गया। इससे कर्मचारी आक्रोशित हो गये। इधर शुक्रवार को कर्मचारी इसके साथ ही अपनी पूर्व से चली आ रही अन्य 5 मांगों को लेकर हड़ताल पर चले गए, अलबत्ता जनहित याचिका पर उच्च न्यायालय के फैसले के बाद उन्हें हड़ताल स्थगित करनी पड़ गयी। हड़ताल के दौरान प्रदर्शन में मुख्य रूप से दीपक बिष्ट के साथ ही लोकेश शर्मा, पार्वती आर्या, नवल किशोर, हर सिंह ढैला, संजीत राम, जितेंद्र प्रसाद, नवीन जोशी, राजेंद्र प्रसाद, चंद्रशेखर भट्ट आदि कर्मचारी प्रमुख रूप से उपस्थित रहे।

कुमाऊं विवि के कुलपति प्रो. डी.के. नौड़ियाल

वहीं, कुलपति प्रो. डी.के. नौड़ियाल ने कहा कि कर्मचारी सुबह 11 बजे शोक सभा करें, इस पर उन्हें कोई आपत्ति नहीं, बल्कि शोक सभा के बाद छुट्टी करने पर आपत्ति है। छुट्टी करने से दूर दराज से आने वाले विद्यार्थियों को दिक्कत आती है। इसके अलावा उन्होंने बताया कि कर्मचारियों को 23 रिक्त पदों पर अधीनस्थ चयन आयोग से नियमानुसार नियुक्तियां करने के निर्णय पर भी आपत्ति है। वे अपनी और से मनमाने तरीके से नियुक्तियां करने का दबाव बना रहे हैं, इसे भी स्वीकार नहीं किया जाएगा। 

एनएसयूआई कार्यकर्ताओं ने फिर लांघी सीमाएं, गेट फांदकर किया कुमाऊं विवि में हंगामा

मंगलवार को पुलिस से भिड़कर गेट फांदकर विवि प्रशासनिक भवन के भीतर प्रवेश करते एनएसयूआई कार्यकर्ता।

-गेट फांदकर और पुलिस के घेरे तोड़कर किया अंदर प्रवेश
-विवि प्रशासन परीक्षाओं की समय सारणी में बदलाव न करने पर अड़ी
नैनीताल, 13 मार्च 2018। गत दिवस के हंगामे व तोड़फोड़ के बाद मुकदमे झेलने के बाद एक बार फिर एनएसयूआई कार्यकर्ताओं ने मंगलवार को कुमाऊं विवि में फिर सीमाएं लांघ कर हंगामा किया। कार्यकर्ता विवि के मुख्य बाहरी फांदकर और पुलिस के घेरे तोड़कर जबरन विवि प्रशासनिक भवन में घुसे और जमकर हंगामा किया, तथा कुलपति एवं प्रदेश के उच्च शिक्षा मंत्री के विरुद्ध जमकर नारेबाजी की। आखिर पुलिस ने उनकी वार्ता एसडीएम की मौजूदगी में विवि के कुलपति एवं अन्य अधिकारियों से कराई, जहां उन्होंने एनएसयूआई व अभाविप कार्यकर्ताओं के बीच भेदभाव बरतने का आरोप लगाया, और परीक्षाओं की समय सारणी में बदलाव करने के साथ ही लगाये गए मुकदमे हटाने की मांगें कीं। अलबत्ता, विवि प्रशासन समय सारणी में बदलाव न करने की मांग पर अड़ा रहा। मुकदमों के बाबत एक कमेटी बनाकर विचार करने की बात कही गयी। उल्लेखनीय है कि एनएसयूआई के कार्यकर्ताओं की ओर से भी विवि के तीन शीर्ष अधिकारियों के खिलाफ जातिसूचक शब्दों का प्रयोग करने के आरोप में पुलिस में तहरीर दी गयी है।

विवि प्रशासनिक भवन के भीतर गेट पर एनएसयूआई कार्यकर्ताओं को रोकती पुलिस।
मंगलवार को विवि प्रशासनिक भवन में एनएसयूआई कार्यकर्ता एसडीएम व कुलपति के समक्ष अंगुली दिखाकर बात करते एनएसयूआई के राष्ट्रीय सचिव सुमित्तर भुल्लर।

मंगलवार पूर्वाह्न साढ़े 11 बजे के करीब एनएसयूआई के स्थानीय कार्यकर्ता हल्द्वानी निवासी राष्ट्रीय सचिव राष्ट्रीय सचिव सुमित्तर भुल्लर, पूर्व छात्र संघ अध्यक्ष सचिन नेगी, सुनील मेहरा, खटीमा छात्र संघ अध्यक्ष नीरज कन्याल, डीएसबी नैनीताल के पूर्व अध्यक्ष दिग्विजय मेहरा आदि के साथ विवि प्रशासनिक भवन पहुंचे, जहां पुलिस ने उन्हें बाहरी गेट पर ही रोकने की रणनीति बनाई थी, किंतु जोर-जबर्दस्ती कर वे गेट फांदकर अंदर पहुंच गये। अंदर प्रशासनिक भवन के दो गेटों पर भी उन्हें रोका गया, व पुलिस के साथ धक्का-मुक्की हुई। आखिर एसडीएम अभिषेक रुहेला की मौजूदगी में कुलपति प्रो. डीके नौडियाल व परीक्षा नियंत्रक प्रो. वाईएस रावत आदि से वार्ता करवाई गयी। वार्ता में उन्होंने आरोप लगाया कि अभाविप के कार्यकर्ताओं द्वारा कई बार विवि के अधिकारियों से अभद्र टिप्पणियां करने के बावजूद कोई कार्रवाई नहीं की गयी, व उनकी मांग पर परीक्षा की तिथियां बदली जाती रही हैं। उन्होंने बढ़ी फीस और ऑनलाइन परीक्षा फार्म भरने की व्यवस्था पर भी सवाल उठाए। साथ ही उनकी कुलपति से तमाम सवालों पर गरमागरम बहस हुई। घंटांे तक वार्ता के बीच हो-हल्ला होता रहा, मगर कुलपति ने परीक्षा कार्यक्रम में बदलाव व मुकदमे वापसी से इन्कार कर दिया। इस मौके पर एसडीएम अभिषेक रुहेला, सीओ विजय थापा, कोतवाली प्रभारी विपिन पंत सहित भारी मात्रा में पुलिस बल एवं एनएसयूआई के गजेंद्र शाही, शार्दूल नेगी, नितिन जाटव, विशाल भोजक, सुंदर मेहरा, अजय शर्मा सहित बड़ी संख्या में एनएसयूआई कार्यकर्ता मौजूद रहे।

यह भी पढ़ें : एनएसयूआई-कांग्रेस का नया पैंतरा: कुविवि के तीन कर्मियों पर लगाया जाति सूचक शब्दों के प्रयोग का आरोप

महिला कांग्रेस की अध्यक्ष सरिता आर्य की अगुवाई में मल्लीताल कोतवाली में ज्ञापन देने पहुंचे कांग्रेस कार्यकर्ता।

-कांग्रेस पार्टी खुलकर आई एनएसयूआई कार्यकर्ताओं के समर्थन में
नैनीताल,12 मार्च 2018। एनएसयूआई कार्यकर्ताओं पर कुमाऊं विवि प्रशासनिक भवन में गत दिवस कथित तौर पर की गयी तोड़फोड़ के आरोपों में शासकीय कार्य में बाधा पहुंचाने व बलवा करने के आरोपों में मुकदमा दर्ज होने के बाद कांग्रेस पार्टी खुलकर आरोपित छात्र इकाई एनएसयूआई के कार्यकर्ताओं के समर्थन में आ गयी है। सोमवार को महिला कांग्रेस अध्यक्ष सरिता आर्य की अगुवाई में कांग्रेस कार्यकर्ता मल्लीताल कोतवाली पहुंचे और मामले में आरोपित अविनाश जाटव व चंदन कुमार की ओर से थाना प्रभारी को तहरीर सोंपी। तहरीर के माध्यम से पूर्व छात्रसंघ अध्यक्ष दिग्विजय मेहरा, प्रकाश जोशी व गौरव जोशी को मामले में गवाह बनाते हुए विवि के परीक्षा नियंत्रक वाईएस रावत, विधान चौधरी व संजय पंत के खिलाफ बदसलूकी व जाति सूचक शब्दों का प्रयोग करने का आरोप लगाया गया।अलबत्ता, तहरीर में प्रयोग किये गए कथित ‘जाति सूचक शब्दों’ का जिक्र नहीं किया गया है, अलबत्ता कहा गया है कि ‘वे दो शब्द पढ़ के विवि को अपनी बपौती समझते हैं, वे विवि से जाएं, अन्यथा उनका भविष्य खराब कर दिया जाएगा, उन्हें कहीं भी नौकरी नहीं मिलेगी।’ इस मौके पर रईश भाई, गोपाल बिष्ट, त्रिभुवन फर्त्याल के साथ ही नितिन जाटव व अविनाश जाटव आदि कार्यकर्ता भी मौजूद रहे।
वहीं दूसरी ओर भूपेंद्र कोहली, अविनाश जाटव व चंदन कुमार आदि एनएसयूआई कार्यकर्ताओं ने डीएसबी परिसर में क्रमिक अनशन शुरू कर दिया है। अनशन स्थल पर झूठे मुकदमे वापस लो, वी वांट जस्टिस जैसे नारे लिखे पोस्टर लगाये गए थे। अलबत्ता कहा गया कि परीक्षा कार्यक्रम में समय अंतराल बढ़ाने के जिस मुद्दे पर उन्हांेने विवि प्रशासनिक भवन में आंदोलन किया था, वह भी उनकी मांगों में शामिल है।

पूर्व आलेख : एनएसयूआई के 22 नामजद सहित करीब 40 कार्यकर्ताओं पर मुकदमा दर्ज, जानें क्यों और कहाँ ?

डीएसबी परिसर के बाहर गेट पर कुलपति का पुतला दहन करते एनएसयूआई कार्यकर्ता।

– कुमाऊं विवि प्रशासनिक भवन में बीती आठ मार्च को की थी तोड़फोड़
नैनीताल, 10 मार्च 2018। कुमाऊं विवि प्रशासनिक भवन में गत बृहस्पतिवार यानी आठ मार्च को परीक्षा कार्यक्रम आगे न बढ़ाने की मांग पर काफी हंगामा व तोड़फोड़ करने के मामले में मल्लीताल कोतवाली पुलिस ने पूर्व छात्र संघ अध्यक्ष दिग्विजय बिष्ट, पूर्व उपाध्यक्ष प्रकाश जोशी व हिमांशु जोशी सहित एनएसयूआई के नगर अध्यक्ष नितिन जाटव, अविनाश जाटव व करन दनाई सहित 22 कार्यकर्ताओं के खिलाफ नामजद एवं 15-20 अन्य कार्यकर्ताओं के खिलाफ मुकदमे दर्ज कर लिये हैं। मुकदमे भारतीय दंड संहिता की धारा 147 व 186 के तहत यानी राजकीय कार्य में बाधा पहुंचाने व बलवा करने के आरोप में दर्ज किये गऐ हैं। मल्लीताल कोतवाली में उप निरीक्षक पूरन सिंह मर्तोलिया द्वारा मामले की प्राथमिक जांच में आरोपों की पुष्टि होने के बाद उपरोक्त के अलावा शार्दुल नेगी, दीपक दास, राजकमल, सुरेंद्र, गौरव जोशी, चंदन कुमार, कमल राज, अनीश कुमार, सौरभ कुमार विश्वकर्मा, संजय, सुनील, पूरन, राहुल मेहरा, चयनित कुमार, कमल किशोर व करन कुमार के खिलाफ शनिवार को मुकदमा दर्ज कर दिया गया है। मामले की जांच उप निरीक्षक दीपक बिष्ट को सोंपी गयी है।

एनएसयूआई कार्यकर्ताओं ने फूंका कुलपति का पुतला
नैनीताल। मुकदमे दर्ज होने की पृष्ठभूमि में एनएसयूआई कार्यकर्ताओं ने शनिवार को डीएसबी परिसर के गेट के सामने कुमाऊं विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. डीके नौड़ियाल का पुतला दहन किया। छात्रों का कहना था कि कुलपति के द्वारा प्रॉक्टर बोर्ड को छात्रों के विरुद्ध अनुशासनात्मक कार्रवाई करने के संबंध में नोटिस दिया गया है। कहा कि यदि अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाती है तो परिसर में किसी भी अप्रिय घटना की जिम्मेदारी परिसर प्रशासन की होगी। उल्लेखनीय है कि पुतला दहन तक मुकदमे दर्ज नहीं हुए थे। पुतला दहन में नितिन जाटव, करन दनाई, अविनाश जाटव आदि प्रमुख थे।

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मेरा जन्म 26 नवंबर 1972 को हुआ था। मैं नैनीताल, भारत में मूलतः एक पत्रकार हूँ। वर्तमान में मार्च 2010 से राष्ट्रीय हिन्दी दैनिक समाचार पत्र-राष्ट्रीय सहारा में ब्यूरो चीफ के रूप में कार्य कर रहा हूँ। इससे पहले मैं पांच साल के लिए दैनिक जागरण के लिए काम कर चुका हूँ। कुमाऊँ विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग से ‘नए मीडिया’ विषय पर शोधरत हूँ। फोटोग्राफ़ी मेरा शौक है। मैं NIKON COOLPIX P530 और अडोब फोटोशॉप 7.0 के साथ फोटोग्राफी कर रहा हूँ। फोटोग्राफी मेरे लिए दुनियां की खूबसूरती को अपनी ओर से चिरस्थाई बनाने का बहुत छोटा सा प्रयास है। एक फोटो पत्रकार के रूप में मेरी तस्वीरों को नैनीताल राजभवन सहित विभिन्न प्रदर्शनियों में प्रस्तुत किया गया, तथा उत्तराखंड की राज्यपाल श्रीमती मार्गरेट अलवा द्वारा सम्मानित किया गया है। कुछ चित्रों को राष्ट्रीय-अंतर्राष्ट्रीय पुरस्कार भी प्राप्त हो चुके हैं। गूगल अर्थ पर चित्र उपलब्ध कराने वाली पैनोरामियो साइट पर मेरी प्रोफाइल को 18.85 Lacs से भी अधिक हिट्स प्राप्त हैं।पत्रकारिता और फोटोग्राफी के अलावा मुझे कवितायेँ लिखना पसंद है। काव्य क्षेत्र में मैंने नवीन जोशी “नवेन्दु” के रूप में अपनी पहचान बनाई है। मैंने बहुत सी कुमाउनी कवितायेँ लिखी हैं, कुमाउनी भाषा में मेरा काव्य संकलन उघड़ी आंखोंक स्वींड़ प्रकाशित हो चुका है, जो कि पुस्तक के के साथ ही डिजिटल (PDF) फार्मेट पर भी उपलब्ध होने वाली कुमाउनी की पहली पुस्तक है। मेरी यह पुस्तक गूगल एप्स पर भी उपलब्ध है। ’ यहां है एक पत्रकार, लेखक, कवि एवं छाया चित्रकार के रूप में मेरी रचनात्मकता, लेख, आलेख, छायाचित्र, कविताएं, हिंदी-कुमाउनी के ब्लॉग आदि कार्यों का पूरा समग्र। मेरी कोशिश है कि यहां नैनीताल, कुमाऊं, उत्तराखंड और वृहद संदर्भ में देश की विरासत, संस्कृति, इतिहास और वर्तमान को समग्र रूप में संग्रहीत करने की….। मेरे दिल में बसता है, मेरा नैनीताल, मेरा कुमाऊं और मेरा उत्तराखंड

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