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बड़ा निर्णय: भवन निर्माण के मानचित्र स्वीकृत कराने की प्रक्रिया हुई सरल, व्यवसायिक मानचित्र स्वीकृत होने का रास्ता भी साफ

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-भवन निर्माण के लिए अब विभागों से अनापत्ति लेना जरूरी नहीं
नवीन समाचार, नैनीताल, 22 सितंबर 2020। जिला विकास प्राधिकरणों से भवन निर्माण के लिए मानचित्र स्वीकृत कराने में राजस्व, वन, लोक निर्माण विभाग व अग्निशमन सहित करीब 10 विभागों से अनापत्ति लेना अब तक जरूरी है। लेकिन अब इन सभी विभागों से अनापत्ति लेना जरूरी नहीं होगा। केवल उन्हीं विभागों से अनापत्ति लेनी होगी, निर्माणाधीन भवन में जिससे संबंधित कोई समस्या होगी। वहीं अब व्यवसायिक निर्माणों के मानचित्र भी स्वीकृत हो सकेंगे। व्यवसायिक निर्माणों के मानचित्र स्वीकृत करने पर अब तक लगी रोक भी हट गई है।
मंगलवार को जिला विकास प्राधिकरण सभागार में कुमाऊं मंडल के सभी जिलों के प्राधिकरणों के अध्यक्ष, मंडलायुक्त अरविंद सिंह ह्यांकी ने वीडियो कांफ्रेंस के माध्यम से बैठक लेकर इस बारे में निर्देश दिये। बताया गया कि मानचित्रों को स्वीकृत कराने में करीब 10 विभागों से अनापत्ति लेने में आम जनों को आ रही दिक्कतों की शिकायत शासन तक पहुंची थी। इस पर शासन से निर्देश प्राप्त होने के बाद मंडलायुक्त ने अनापत्ति लेने की प्रक्रिया का सरलीकरण करने के आदेश दिये। उन्होंने कहा कि केवल जिन विभागों से अनापत्ति लेना अत्यावश्यक होगा, उन्हीं से अनापत्ति मांगी जाएगी। बैठक में प्राधिकरण के उपाध्यक्ष रोहित मीणा, सचिव पंकज उपाध्याय के साथ ही नैनीताल डीएम सविन बंसल, मुख्य नगर नियोजक सहित अनेक अधिकारी वीडियो कांफं्रेंस के माध्यम से शामिल रहे।

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नवीन समाचार, नैनीताल, 21 सितंबर 2020। जिला-मंडल मुख्यालय नैनीताल में लॉक डाउन लागू होने के दौर से ही अवैध निर्माणकर्ताओं की पौ-बारह है। वे बेरोकटोक अवैध निर्माण एवं अबाध तरीके से निर्माण सामग्री का आना जारी हैं। अवैध निर्माण में सबसे आगे बताए जाने वाले सात नंबर क्षेत्र में स्थिति यह है कि नगर पालिका के कूड़े के डिब्बे के सामने भी अवैध निर्माण सामग्री रख दी गई है। इस कारण लोग कूड़ेदान में कूड़ा नहीं डाल पा रहे हैं और नगर पालिका कर्मी कूड़ेदान खाली नहीं कर पा रहे हैं।

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एक अक्टूकर से केवल ऑनलाइन नक्शे ही पास होंगे
नवीन समाचार, नैनीताल, 31 जुलाई 2020। जिला स्तरीय विकास प्रधिकरण के द्वारा आगामी 1 अक्टूबर से केवल ऑनलाईन नक्शे ही पास किये जायेंगे। शुक्रवार को नैनीताल जिला स्तरीय विकास प्राधिकरण की एनडीडीए सभागार में आयोजित हुई नौवीं बोर्ड बैठक की अध्यक्षता करते हुए प्राधिकरण के अध्यक्ष एवं मंडलायुक्त अरविंद सिंह ह्यांकी ने इस बाबत निर्देश देते हुए सरल ऑनलाईन प्रक्रिया को अपनाने के निर्देश दिये। उन्होंने कहा कि ऑफ लाइन प्रक्रिया को 30 सितम्बर तक ही जारी रखा जाये।
उन्होंने निर्देश दिए कि मानचित्र स्वीकृति हेतु ऑनलाईन प्राप्त होने वाले नक्शों में किसी भी प्रकार की कमी न हो, इसके लिए जनपद के आर्किटैक्टों यानी वास्तुकारों को जागरूक करते हुए सम्पूर्ण प्रक्रिया एवं नियमों के बारे में जानकारी दी जाये। यह सुनिश्चित किया जाए कि बस्तियों की बसावट एवं विकास सुनियोजित तरीके से हो। उन्होंने केएमवीएन के प्रबंध निदेशक रोहित मीणा को मुख्यालय में फांसी गधेरा क्षेत्र में में सरकारी भूमि पर पार्किंग एवं भवन निर्माण हेतु लोक निर्माण विभाग के अधिकारियो से समन्वय कर आकर्षक प्रस्ताव तैयार करने के निर्देश भी दिए। बैठक में समिति द्वारा रामनगर स्थित पुरानी तहसील की खाली भूमि पर मल्टीलेवल पार्किंग कम शॉपिंग कॉम्लैक्स का नक्शा अनुमोदन करने को शुल्क से मुक्त रखने, कोश्या-कुटौली तहसील के अंतर्गत पार्किंग कम कॉमर्शियल कॉम्पलैक्स के निर्माण कार्य को जल्दी कराने, कुमाऊं विश्व विद्यालय के आणू गॉव भीमताल स्थित बायोटैक्नोलॉजी परिसर में अनुसंधान प्रयोगशाला भवन मानचित्र अनुमोदन करने, तथा भीमताल निवासी डौली वर्मा के मानचित्र को प्राकृतिक जलाशय-झील की सतह से 30 मीटर की परिधि में होने के कारण अस्वीकार करने के निर्णय भी लिये गए तथा खुर्पाताल स्थित भूमि पर सैटेलाईट टाउनशिप योजना विकसित करने या व्यवसायिक उद्देश्य से भूखंड को उपविभाजित किये जाने के विभिन्न पहलुओं पर भी विचार विमर्श किया गया। बैठक में टाउन प्लानर एसएम श्रीवास्तव ने बताया कि महायोजना भीमताल का अगले वर्ष जून तक पुनरीक्षण कार्य पूरा किया जायेगा। बैठक में नगर आयुक्त हल्द्वानी सीएस मर्तोलिया, मुख्य कोषाधिकारी अनिता आर्या, बंशीधर तिवारी, एसडीएम विनोद कुमार व सभासद दीपक आदि सदस्य भी उपस्थित रहे।

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-सौंदर्यीकरण एवं व्यवस्थाओं को सुव्यवस्थित करने के दिए सिचाई एवं प्राधिकरण के अधिकारियों को निर्देश
नवीन समाचार, नैनीताल, 28 जुलाई 2020। कुमाऊं मंडल के आयुक्त अरविन्द सिंह ह्यांकी ने मंगलवार को निर्धारित कार्यक्रमानुसार प्रशासनिक अमले के साथ मुख्यालय स्थित सूखाताल सहित भीमताल, सातताल, नलदमयंतीताल, कमलताल तथा नौकुचियाताल का मौका मुआयना किया और अधिकारियों को महत्वपूर्ण दिशा निर्देश दिए। इस मौके पर श्री ह्यांकी ने सातताल झील के निरीक्षण के दौरान केएमवीएन के कंसल्टेंट एवं आर्किटेक्ट दीपक मौर्य को एलडीए द्वारा पूर्व में बनाये गये रेस्टोरेन्ट व दुकानों के जीर्णोद्धार एवं सौंदर्यीकरण, ओपन फूड कोर्ट, झील क्षेत्र के विकास हेतु 15 दिन के भीतर डिजाइन तैयार कर प्रस्तुत करने तथा निर्माण कार्य हेतु 30 दिन के भीतर निविदा प्रक्रिया पूरी करने के निर्देश दिये। उन्होंने झील के पास लटकते बिजली के तारों को अन्य स्थान पर व्यवस्थित ढंग से लगाने को भी कहा। साथ ही उन्होंने जिला स्तरीय विकास प्राधिकरण के अधिकारियों को रेस्टोरेंट एवं दुकानों का काम पूरा होते ही दुकानदारों को एक ही स्थान पर शिफ्ट करने तथा खाली स्थान पर आकर्षक पार्क का निर्माण करने को कहा। उन्होंने झील क्षेत्र में सुंदर व सुव्यवस्थित पैदल मार्ग बनाने, पुराने बने पैदल मार्ग को सही करने तथा झील के चारों ओर प्रकाश तथा पर्यटकों के बैठने के लिए सुव्यवस्थित व्यवस्था करने, झील के एक ओर से दूसरी ओर जाने के लिए झूला पुल बनाने के भी लोनिवि व सिचाई विभाग के अधिकारियों को निर्देश दिए।
वहीं कमलताल झील के निरीक्षण के दौरान आयुक्त ने सिंचाई विभाग के अधिकारियों को झील में गिरे वृक्ष का नियमानुसार निस्तारण करने, झील में उत्पन्न घास को बरसात के तुरंत बाद साफ करने तथा कमलताल में कमल के पौधों को नुकसान पहुंचाने वाली मछलियों को आने से रोकने के लिए एक सप्ताह के भीतर जाली लगाने के निर्देश दिए। जबकि नौकुचियाताल के निरीक्षण के दौरान क्षेत्र में समुचित पैदल मार्ग बनाने तथा पूर्व में सिंचाई विभाग द्वारा तैयार की गयी पैदल मार्ग की डीपीआर शीघ्रता से प्रस्तुत करने के निर्देश भी दिए। वहीं भीमताल झील के निरीक्षण के दौरान उन्होंने पार्क को सुव्यवस्थित तरीके से विकसित करने के निर्देश सिचाई विभाग के अधिकारियों को, बांध में आयी दीवार का सेफ्टी ऑडिट कराने, झील किनारे बने दीन दयाल उपाध्याय पार्क को पुनः विकसित करने के निर्देश जिला स्तरीय विकास प्राधिकरण के अधिकारियों को दिए। इसके साथ ही श्री ह्यांकी ने भीमताल में पार्किंग की संभावनाओं की विस्तार से धरातलीय जानकारी लेते हुए महत्वपूर्ण दिशा निर्देश दिए। वहीं मुख्यालय में उन्होंने सूखाताल का निरीक्षण करते हुए उन्होंने इस झील को नैनी झील की सर्वाधिक जल प्रदाता झील के पुराने स्वरूप में लौटाने एवं वैकल्पिक पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने के निर्देश दिए। निरीक्षण के दौरान केएमवीएन के एमडी एवं जिला स्तरीय विकास प्राधिकरण के उपाध्यक्ष रोहित कुमार मीणा, प्राधिकरण के सचिव पंकज उपाध्याय, एसडीएम विनोद कुमार, अधिशासी अभियंता सिंचाई एचसी सिंह भारती, अधिशासी अभियंता जल संस्थान संतोष कुमार उपाध्याय, पुलिस उपाधीक्षक विजय थापा आदि मौजूद रहे।

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नवीन समाचार, नैनीताल, 20 जुलाई 2020। मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत के निर्देशों पर नैनीताल जिला विकास प्राधिकरण ने नैनीताल शहर एवं इसके आस-पास के क्षेत्रों में सौन्दर्यीकरण, स्ट्रीट लाइट लगाने एवं पार्किंग स्थलों के विकास के लिए 4 करोड़ 3 लाख 18 हजार रुपए आवंटित कर दिये है। जानकारी देते हुए क्षेत्रीय विधायक संजीव आर्य ने इस हेतु मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत का विशेष आभार व्यक्त करते हुए उम्मीद जताई कि उत्तराखंड के प्रमुख पर्यटन स्थल नैनीताल के सौन्दर्यीकरण एवं पार्किंग की समस्या के समाधान से शहर एवं आस-पास के क्षेत्रों के व्यवसाय को प्रत्यक्ष एवं रोजगार के क्षेत्र को बड़े पैमाने पर अप्रत्यक्ष रुप से बढ़ावा मिलेगा।
इसके साथ ही उन्होंने बताया कि नारायण नगर में पार्किंग के निर्माण को शीघ्र प्रारंभ करने की दिशा में भी वे निरंतर प्रयत्न कर रहे हैं। पार्किंग के लिए क्षतिपूरक वृक्षारोपण हेतु पस्तोला में जमीन का चयन किया जा चुका है, एवं इस जमीन को वन विभाग को हस्तांतरित करने की कार्यवाही प्रगति पर है। उन्होंने यह भी जानकारी दी कि जिला विकास प्राधिकरण द्वारा स्वीकृत रु. 403.18 लाख के कार्य लोक निर्माण विभाग द्वारा किये जाएंगे। इनमें 35.23 लाख की लागत से भवाली नैनीताल मोटर मार्ग का सौन्दर्यीकरण 28.12 लाख की लागत से नैनीताल-भवाली मोटर मार्ग में नैनीताल चौराहे से कैलाखान चौराहे तक मार्ग के दोनों ओर स्ट्रीट लाइट लगाने, 44.58 लाख की लागत से हनुमानगढ़ से डांठ तल्ली ताल तक सौन्दर्यीकरण, 35.76 लाख की लागत से डांठ तल्ली ताल से अल्का डोटल एवं मालरोड तक सौन्दर्यीकरण किया जाना, 23 लाख की लागत से आल्प्स होटल मल्लीताल के निकट सौन्दर्यीकरण, 122.16 लाख की लागत से डांठ तल्ली ताल से हनुमानगढ़ी से नीचे हेयरपिन बैंड तक स्ट्रीट लाइट एवं रु 61.72 लाख की लागत से नैनीताल-कालाढूंगी मोटर मार्ग पर केएमवीएन पार्किंग से केएमवीएन बारातघर एवं देवदार लाज के सामने पार्किंग स्थल विकसित किया जाएगा, साथ ही नैनीताल शहर के समस्त सार्वजनिक शौचालय को सुसज्जित एवं व्यवस्थित किया जाएगा।

अभियंता पर दूसरों की जमीन कब्जा कर अवैध निर्माण करने की मंडलायुक्त से की गई शिकायत

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-जनपद के तीनों पर्वतीय निकायों ने मांगा भवन मानचित्र स्वीकृत करने का अधिकार
नवीन समाचार, नैनीताल, 13 जुलाई 2020। प्राधिकरण से परेशानी महसूस कर रहे आम जन के मूक स्वरों को अपना स्वर देने के लिए जनपद के पर्वतीय क्षेत्र के तीनों निकायों-नैनीताल, भीमताल एवं भवाली के निकाय अध्यक्ष आपसी राजनीतिक विभेद भुलाकर एक मंच पर आ गए हैं। उन्होंने सोमवार को कुमाऊं मंडल के आयुक्त एवं झील प्राधिकरण के अध्यक्ष अरविंद सिंह ह्यांकी से उनके कार्यालय में मुलाकात की, और उनसे नगर निकायों को उनकी सीमा के अंतर्गत पूर्व की भांति भवन मानचित्रों की स्वीकृति देने के लिए अधिकृत करने की मांग की। नैनीताल नगर पालिका अध्यक्ष सचिन नेगी, भवाली नगर पालिका अध्यक्ष संजय वर्मा एवं भीमताल नगर पंचायत अध्यक्ष देवेंद्र सिंह चनौतिया ने कहा कि पूर्व में इन निकायों को भवन मानचित्र स्वीकृत करने का अधिकार प्राप्त था, और निकाय सरलता से यह कार्य करा लेते थे। लेकिन अब जिला विकास प्राधिकरण से भवन मानचित्र स्वीकृत कराने में अत्यधिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। इसलिए फिर से निकायों को ही भवन मानचित्र स्वीकृत करने का अधिकार दिया जाए।

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-मंडलायुक्त ने ठंडी सड़क-फांसी गधेरा क्षेत्र के विस्तार की संभावनाएं तलाशीं
-फांसी गधेरा क्षेत्र में ओपन फूड पार्क, गेस्ट हाउस व पार्किंग एवं माल रोड की भीड़भाड़ को ठंडी सड़क की ओर लाने के लिए अधिकारियों को पर्यावरण अनुकूल प्रस्ताव तैयार करने को कहा
नवीन समाचार, नैनीताल, 17 जून 2020। कुमाऊं मंडल के आयुक्त एवं जिला विकास प्राधिकरण के अध्यक्ष अरविंद सिंह ह्यांकी मुख्यालय में मुख्यालय में फांसी गधेरा एवं ठंडी सड़क क्षेत्र में पर्यावरण अनुकूल विकास की संभावनाएं तलाशी हैं, ताकि माल रोड की ओर होने वाली सैलानियों की भीड़भाड़ को झील के इस दूसरी ओर भी लाया जाए। इस हेतु उन्होंने फांसी गधेरा के पास नैनी झील से 30 मीटर की दूरी पर भूतल में पार्किंग, प्रथम तल पर गेस्ट हाउस व प्रथम तल की छत पर ओपन फूड कोर्ट निर्माण व प्राकृतिक सौंदर्यकरण की दिशा में कार्य किया जाएगा। इस संबंध में ने बुधवार को जिला स्तरीय विकास प्राधिकरण द्वारा किये जा रहे अवस्थापना विकास कार्यो एवं प्रस्तावित कार्यों के साथ ही एडीबी तथा स्वदेश दर्शन कार्यक्रम के अन्तर्गत संचालित कार्यों की प्राधिकरण कार्यालय में समीक्षा करते हुए निर्देश दिये। साथ ही आयुक्त ने सिंचाई विभाग के स्वामित्व वाले नैनी झील के नालों की सफाई नगर पालिका से कराने के लिए प्रस्ताव बनाने के निर्देश भी दिये हैं।
बैठक में श्री ह्यांकी ने फांसी गधेरा क्षेत्र के विकास को सामाजिक एवं पर्यावर्णीय दृष्टि से महत्वपूर्ण बताते हुए यहां तीन मंजिला ओपन फूड पार्क, पार्किंग व गेस्ट हाउस के निर्माण के लिए लोनिवि, नगर पालिका, जल संस्थान, केएमवीएन, जिला स्तरीय प्राधिकरण एक-एक अधिकारी को नियुक्त कर एक सप्ताह के भीतर संयुक्त जॉच रिपोर्ट उपलब्ध कराने के निर्देश दिए। वहीं प्राधिकरण के अधिशासी अभियंता को डीएसबी परिसर, राजभवन रोड की ओर भू-स्खलन प्रभावित क्षेत्र के सुदृढ़ीकरण के लिए प्रस्ताव तैयार करने को कहा। इसके साथ ही उन्होंने नैनी झील की धमनियॉ कहे जाने वाले नालों की नियमित साफ-सफाई नगर पालिका से कराने के लिए अधिशासी अभियंता सिंचाई विभाग को निर्देश दिए। उन्होंने माल रोड पर पर्यटकों की आवाजाही कम करने हेतु ठंडी सड़क पर पर्यटकों की आवाजाही बढ़ाने के लिए सड़क का सुरक्षा एवं पर्यावरणीय दृष्टिकोण से अध्ययन करते हुए पर्यावरण अनुकूल ढांचागत सुविधाओं की संभावनाए तलाशने के निर्देश भी दिए। उन्होंने नैनीताल में उपलब्ध निजी भूमि में छोटी-छोटी पार्किंग स्थल विकसित करने के लिए शासनादेशों एवं न्यायालय द्वारा जारी आदेशों का गहनता से अध्ययन करने के निर्देश भी प्राधिकरण के अधिकारियों को दिए। उन्होंने मस्जिद-हाईकोर्ट रोड पर पम्प हाउस क्षेत्र के कुछ हिस्से के साथ ही मेट्रोपोल के सामने नाले को पाटकर रोड चौड़ीकरण हेतु कार्यवाही करने तथा अंडा मार्केट के पास पार्किंग स्थल विकसित करने के सुझाव भी दिये।
बैठक में अवस्थापना विकास हेतु विभिन्न कार्यों के लिए 248 लाख रुपये की योजनाओं को सशर्त सैद्धांतिक स्वीकृति दी गयी। बैठक में प्राधिकरण के सचिव पंकज उपाध्याय, नगर पालिका के ईओ अशोक कुमार वर्मा, प्राधिकरण के उपाध्यक्ष एवं केएमवीएन के एवं प्रबंध निदेशक रोहित कुमार मीणा सहित डीएस कुटियाल, एचएस शुक्ला, दीपक गुप्ता, संतोष कुमार उपाध्याय व अरविंद गौड़ आदि अधिकारी भी उपस्थित रहेे।

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-काशीपुर का बस अड्डा होगा स्थानांतरित, जिला विकास प्राधिकरण की बैठक में मिली अनुमति
नवीन समाचार, नैनीताल, 05 जून 2020। जिला विकास प्राधिकरण गठन से पूर्व बनी ऐसी कॉलोनियों, जिनके विक्रय पत्र निष्पादित हो चुके हैं, उन कालोनियों में 5 प्रतिशत सब डिविजन चार्ज लेते हुए मानचित्रों की स्वीकृति प्रदान की जायेगी। यह निर्णय शुक्रवार को जिला स्तरीय विकास प्राधिकरण के अध्यक्ष एवं मंडलायुक्त एवं अध्यक्ष अरविंद ह्यांकी की अध्यक्षता में आयोजित हुई ऊधमसिंह नगर जिला विकास प्राधिकरण की बैठक में लिया गया। बैठक में श्री ह्यांकी ने नगर निगम परिसर काशीपुर की भूमि पर दो बेसमेंट पार्किंग एवं इसके ऊपर भूतल, प्रथम तल, द्वितीय तल तथा तृतीय तल पर व्यवसायिक निर्माण हेतु सैद्धान्तिक स्वीकृति देते हुए कंसलटेण्ट को विस्तृत प्रोजेक्ट सहित उपस्थित होने के निर्देश दिए।

उन्होंने जिला स्तरीय विकास प्राधिकरण के सचिव पंकज उपाध्याय को लेबर सेस लगाने हेतु न्यूनतल निर्माण लागत दस लाख रूपये से ज्यादा करने का उचित प्रस्ताव प्रस्तुत करने के निर्देश भी दिए। गौरतलब है कि दस लाख रूपये या इससे अधिक के निर्माण कार्यों पर 1 प्रतिशत लेबर सेस वसूल किया जाता है। बैठक में यह भी निर्णय लिया गया कि आवेदकों को लेबर सेस जमा करने में किसी भी प्रकार की परेशानी न हो इसलिए पूर्व की भॉति नक्शा पास करते समय लेबर सेस जिला स्तरीय विकास प्राधिकरण द्वारा ही वसूल किया जायेगा। बैठक में सचिव जिला स्तरीय विकास प्राधिकरण पंकज उपाध्याय ने पिछली बैठक में लिए गए निर्णय एवं उन पर की गई कार्यवाही, वित्तीय वर्ष 219-22 में प्राधिकरण के आय-व्यय का लेखा-जोखा भी प्रस्तुत किया। बैठक में केएमवीएन के एमडी एवं जिला विकास प्राधिकरण नैनीताल के उपाध्यक्ष रोहित कुमार मीणा, बंशीधर तिवारी, प्रकाश चन्द्र, जय भारत साह, सीएस मर्तोलिया, विनोद कुमार, प्रमोद तोलिया, सागर आर्य व पुष्कर बोरा आदि सदस्य मौजूद रहे।

इन्हें भी मिली स्वीकृति 

श्री ह्यांकी ने काशीपुर बस अड्डा प्राधिकरण को उपलब्ध कराये जाने तथा इसके बदले अन्यत्र बस अड्डे के निर्माण किये जाने हेतु सैद्धांतिक स्वीकृति देते हुए महत्वपूर्ण दिशा निर्देश सचिव जिला स्तरीय विकास प्राधिकरण को दिए। उन्होंने सुपरटेक लिमिटेड को आवास निर्माण से सम्बन्धित प्रस्ताव शासन को भेजने तथा प्राधिकरण में सृजित पदों के सापेक्ष प्रतिनियुक्ति एवं शासनादेश के अनुसार भरने के निर्देश भी दिए। बोर्ड द्वारा उपाध्यक्ष प्राधिकरण व सचिव प्राधिकरण के लिए एक-एक वाहन की व्यवस्था करने की भी अनुमति प्रदान की गयी। इसके साथ ही उत्तराखंड कृषि उत्पादन समिति की ग्राम भूरारानी में भूमि के भू-उपयोग परिवर्तन सुखविंदर सिंह मैनेजिंग डायरेक्टर मैसर्स गौरायास्ट्रा बोर्ड मिल्स प्राइवेट लिमिटेज बीपीसीएल रिटेल आउटलेट सहित विभिन्न बिन्दुओं पर विस्तार से चर्चा हुई।

जनता के हित मे लिए गए अन्य  निर्णय :
  • गैर आवासीय मानचित्र के निस्तारण मे आ रही समस्या का किया गया निराकरण,
  • उपविभाजन शुल्क के निर्धारण की प्रक्रिया को जन उपयोगी एवं व्यावहारिक किया गया,
  • जिला विकास प्राधिकरण ऊधम सिंह नगर एवं नैनीताल का वार्षिक बजट स्वीकृत किया गया. दोनों प्राधिकरण मे शासनादेश के अनुसार कार्मिको की व्यवस्था करने का निर्णय, दोनों प्राधिकरण मे शासनादेश के अनुसार उपाध्यक्ष एवं सचिव के उपयोग हेतु वाहन क्रय करने की सैद्धान्ति सहमति दी गयी
  • बोर्ड बैठक मे अध्यक्ष  द्वारा जनता की समस्याओं के निस्तारण को प्राथमिकता देने एवं मानचित्र स्वीकृति की प्रक्रिया को सरल करने के निर्देश दिए गए
  • विभिन्न विभागों से अनापत्ति प्राप्त करने के सम्बन्ध मे राज्य प्राधिकरण के निर्देशानुसार करवाई के निर्देश दिए गए।

यह भी पढ़ें : नैनीताल समाचार : जिला विकास प्राधिकरण ने सील किये चार अवैध निर्माण

नवीन समाचार, नैनीताल, 25 अक्तूबर 2019। जिला विकास प्राधिकरण की टीम ने शुक्रवार को नगर में अवैध अतिक्रमण के खिलाफ अभियान चलाया। इस दौरान चार भवनों को सील किया, तथा अवैध निर्माण के कुछ हिस्से ध्वस्त भी किये।

अभियान के तहत नगर के कालाढुंगी रोड स्थित धामपुर बैंड के करीब अल्समेर कम्पाउंड क्षेत्र में में महेश वाल्मीकि के भूतल में 300 वर्ग फिट क्षेत्रफल, दिनेश भट्ट के 350 वर्ग फिट व जयंती भट्ट के भूतल और प्रथम तल में 400 वर्ग फिट क्षेत्रफल में किए जा रहे निर्माणों को सील किया गया। इसके अलावा तल्लीताल में भूस्खलन की जद में आने जा रहे जोन-2 के क्षेत्र में टिन शेड के अंदर गैराज निर्माण के लिए छः कालम खड़े कर होते स्थाई निर्माण को पकड़ा गया।  टीम ने सभी पीलरों को ध्वस्त कर निर्माण को सील करने का दावा किया। अभियान में प्राधिकरण के परियोजना प्रबंधक सीएम साह, अवर अभियंता बलबीर सिंह, चंदन सिंह, हीरा बल्लभ जोशी, खुशाल सिंह व इरशाद हुसैन आदि शामिल रहे।

यह भी पढ़ें : नैनीताल में टिन शेडों की आढ़ में अवैध निर्माणों की बाढ़…

नवीन समाचार, नैनीताल, 30 जुलाई 2019। नैनीताल जिला व मंडल मुख्यालय में टिन शेड अवैध निर्माण कर्ताओं के लिए बड़ी आढ़ बन गये हैं। इनकी आढ़ में नगर में अवैध निर्माणों की बाढ़ आ गयी है। नगर के कमोबेश हर क्षेत्र में लोग पहले अवैध रूप से टिन शेड बनाते हैं, और धीरे-धीरे टिन शेड की आढ़ में पक्का अवैध निर्माण कर डालते हैं। इस मामले में कमजोर तबके के लोग भी पीछे नहीं हैं जो पहले कहीं भी कच्ची-पक्की, सरकारी राजस्व, नगर पालिका की नजूल अथवा किसी के द्वारा पूर्व में कब्जाई हुई जमीनों को मामूली कीमत पर 10 रुपए के स्टांप पेपर पर लेकर उस पर पहले टिन शेड और बाद में धीरे-धीरे लिंटर वाला भवन खड़ा कर देते हैं। यह प्रवृत्ति उच्च-मध्यम वर्ग में भी दिखती है, जो अपने पूर्व के निर्माणों को टिनों से छुपाकर अपना निर्माण बढ़ाते जाते हैं। नगर के भूगर्भीय दृष्टिकोण से सर्वाधिक संवेदनशील सात नंबर, चार्टन लांज, रुकुट कंपाउंड, पिटरिया, सूखाताल, बंगाली कॉलोनी, राजपुरा व मंगावली क्षेत्रों में यह प्रवृत्ति कुछ अधिक ही नजर आ रही है। टिन शेडों की आढ़ में रातों-रात जल्दबाजी में निर्माण किये जाते हैं, जिस कारण इनकी गुणवत्ता भी बेहद खराब होती है, और इनमें आगे दुर्घटना की संभावना बनी रहती है। लेकिन इन अवैध निर्माणों में प्राधिकरण की भूमिका आंख मूंदने अथवा किसी को बेवजह परेशान करने वाली ही बताई जा रही है।

प्राधिकरण की नाक के नीचे बड़े होटलों, कॉलोनियों का निर्माण भी बेरोकटोक जारी

नैनीताल। नगर में ही पूर्व में झील विकास प्राधिकरण एवं वर्तमान में जिला विकास प्राधिकरण का मुख्यालय स्थित है। बावजूद नगर में अवैध निर्माणकर्ताओं के होंसले बुलंद हैं। नगर में कहने को सर्वोच्च न्यायालय के आदेशों पर हर तरह के व्यवसायिक निर्माणों पर रोक लगा चुका है, और सरकार इन आदेशों की आढ़ में पार्किंग जैसे जनोपयोगी निर्माण भी नहीं करा पा रही है, किंतु सूखाताल झील के जल भराव क्षेत्र से लेकर उच्च न्यायालय के करीब भी हाल के दौर में बडे़ होटलों के निर्माण किसी से छुपे नहीं हैं। उच्च न्यायालय व सर्वोच्च न्यायालय में नगर में निर्माणों पर रोक लगाने वाली जनहित याचिका दायर करने वाले डा. अजय रावत ने सोमवार को एक सार्वजनिक कार्यक्रम में सूखाताल में एक भवन व उच्च न्यायालय के पास फ्लैटों के निर्माण पर प्रश्न भी उठाए।

यह भी पढ़ें : रामनगर-नैनीताल में होटल के निर्माण पर हाईकोर्ट ने लगाई रोक…

नवीन समाचार, नैनीताल, 25 जुलाई 2019। उत्तराखंड उच्च न्यायालय की मुख्य न्यायधीश रमेश रंगनाथन व न्यायमूर्ति आलोक कुमार वर्मा की खंडपीठ ने नैनीताल के रामनगर में राष्ट्रीय राजमार्ग पर गुल्लरघट्टी में नगर पालिका की भूमि पर अवैध रूप से बन रहे होटल के निर्माण पर रोक लगा दी है। न्यायालय ने मामले में जिला विकास प्राधिकरण व अतिक्रमणकारी को नोटिस जारी कर जवाब पेश करने को कहा है। साथ ही कहा है कि अगर इसके बाद भी यहां कोई निर्माण कार्य होता है उसकी जिमेदारी जिला अधिकारी व नगर पालिका की होगी। साथ में एसएसपी को निर्देश दिए है कि अगर वहां पर पुलिस बल की जरूरत पड़ती है तो नगर पालिका को पुलिस बल उपलब्ध कराएं।
मामले के अनुसार रामनगर निवासी कुलदीप माहेश्वरी ने उत्तराखंड उच्च न्यायालय में जनहित याचिका दायर कर कहा है कि रामनगर के गुल्लरघट्टी नेशनल हाइवे के पास नगर पालिका की भूमि पर अवैध रूप से होटल का निर्माण कार्य किया जा रहा है नगर पालिका ने होटल मालिक को मार्च में नोटिस जारी किया था इसके बाद भी होटल की दूसरी मंजिल पर निर्माण किया गया। पूर्व में जिला विकास प्राधिकरण द्वारा होटल के प्रथम तल को सील कर दिया था। इसके बाद नगर पालिका द्वारा कोई कार्यवाही नही की। याचिकाकर्ता ने कई बार इसकी शिकायत भी की परन्तु उस पर कोई कार्यवाही नही हुई।

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नवीन समाचार, नैनीताल, 17 जुलाई 2019। उत्तराखंड में सभी कोटियों यानि कृषि, अकृषि और व्यावसायिक भूमि के भूमि के सर्किल रेट में एकरूपता लाने के लिए सरकार 25 से 30 फीसदी बढ़ोतरी करने जा रही है। इसके लिए स्टांप एवं रजिस्ट्रीकरण विभाग ने नई दरों का प्रस्ताव तैयार कर लिया है। पूरी संभावना है कि मंत्रिमंडल की आगामी बैठक में सरकार नए रेट पर मुहर लगा देगी। प्रदेश के जिन क्षेत्रों में तेजी से आवासीय व अन्य विकास कार्यों की गतिविधियां बढ़ रही हैं, वहां सर्वाधिक बढ़ोतरी होगी।
राजधानी देहरादून की बात करें तो यहाँ रायपुर स्थित स्टेडियम के आसपास में तेजी से आवासीय और व्यावसायिक गतिविधियां बढ़ रही हैं। वर्तमान में इस क्षेत्र में कृषि भूमि का सर्किल रेट 75 लाख प्रति हेक्टेयर है। इसे बढ़ा कर एक करोड़ तक किया जा सकता है। वहीँ बिहारीगढ़-बुग्गा वाला और भगवानपुर-बहादराबाद मार्ग के आसपास के क्षेत्रों में भी कृषि भूमि के सर्किल रेट बढ़ सकते हैं। अधिकारिक सूत्रों के मुताबिक प्रदेश में कई ऐसे क्षेत्र हैं, जहां कृषि, अकृषि और व्यावसायिक भूमि के सर्किल रेट में भारी अंतर है। ऐसे क्षेत्रों में सर्किल रेट में समानता लाने के लिए विभाग ने दरें बढ़ाने का प्रस्ताव तैयार किया है। आगामी कैबिनेट में सर्किल रेट बढ़ाने के प्रस्ताव पर मुहर लग सकती है। उल्लेखनीय है कि यदि कोई व्यक्ति जमीन खरीदता है तो उसे स्टांप शुल्क के रूप में जमीन की कीमत का पांच प्रतिशत देना होता है। साथ ही दो प्रतिशत या अधिकतम 25 हजार रुपये रजिस्ट्रेशन फीस अलग से देनी होती है। वर्ष 2018-19 में सरकार को स्टांप व रजिस्ट्री शुल्क से 1135 करोड़ की आय प्राप्त हुई है। सर्किल रेट बढ़ने से सरकार का राजस्व भी बढ़ेगा।

प्रमुख क्षेत्र जहां बढ़ेंगे सर्किल रेट

  • देहरादून जिले के रायपुर क्षेत्र में भड़ासी ग्रांट, भोपालपानी, सोडा सरोली, मंजरी वाला, जगातखाना, मकरैली, रखौली में कृषि भूमि के सर्किल रेट बढ़ेंगे।
  • हरर्बटपुर क्षेत्र में अकृषि भूमि के सर्किल रेट बढ़ेंगे।
  • रुद्रपुर में गंगापुर-नगला रोड स्थित फुलसंगी में कृषि, किच्छा-महाराणा प्रताप रोड पर अकृषि भूमि के रेट बढ़ेंगे।
  • हल्द्वानी में सहकारी बैंक से नवीन मंडी तक कृषि भूमि के सर्किल रेट में बढ़ोतरी की जाएगी।
  • हरिद्वार और रुड़की के बीच सीमा पर और आसपास के कुछ क्षेत्रों में।
  • टिहरी जनपद के चंबा-चोपड़ियाल सड़क में कृषि, गजा-राणाकोट सड़क पर अकृषि भूमि के रेट बढ़ेंगे।
  • उत्तरकाशी में चिन्यालीसौड़, चमोली जिला में गडोरा, बाटला, रुद्रप्रयाग में मल्यासू मल्ला, तल्ला में भी सर्किल रेट बढ़ सकते हैं।
  • अल्मोड़ा में सल्ट, भौंणखाल, मसरौंण, बागेश्वर में घटबगड़, मतरौला, सैंज, पिथौरागढ़ में डीडीघाट, कुमल्टा, टिकोट, मलान पिपली गांव।
  • चंपावत, मल्ली, मंदाली, मांज गांव में कृषि, अकृषि व व्यावसायिक भूमि का सर्किल रेट बढ़ाए जा सकते हैं।

किसी भी क्षेत्र का देख सकेंगे सर्किल रेट

इसके लिए स्टांप एवं रजिस्ट्रेशन विभाग की वेबसाइट www.eregistration.uk.gov.in पर लॉग इन करना होगा। जिसके बाद सर्किट रेट ऑन जीआईएस पर क्लिक कर जिले का चयनकरना होगा। फिर तहसील के विकल्प का चयन कर संबंधित क्षेत्र व गांव के नाम पर क्लिक कर सर्किल रेट देखा जा सकेगा। इस वेबसाइट को राष्ट्रीय सूचना केंद्र (एनआईसी) ने तैयार किया है। जिसमें प्रदेश के सभी जिलों का जीआईसी मैपिंग के जरिये डाटा फीड किया गया है। अलग-अलग रंगों के सूचकांक से कोई भी व्यक्ति आसानी से प्रदेश के किसी भी क्षेत्र का सर्किल रेट आसानी से जान सकेगा।

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-कुमाऊं के सभी जिला विकास प्राधिकरणों को एक सप्ताह का अल्टीमेटम
-मंडलायुक्त ने कार्यों पर जताया असंतोष, नक्शे स्वीकृत-अस्वीकृत करने की व्यवस्था को ऑनलाइन करने के भी दिये निर्देश
-एसडीएम होंगे अपने क्षेत्र में अनियोजित विकास के लिए उत्तरदायी
नवीन समाचार, नैनीताल, 8 मई 2019। कुमाऊं मंडल के आयुक्त राजीव रौतेला ने कहा कि जिला विकास प्राधिकरणों का मुख्य कार्य सुनियोजित विकास के लिए भवन निर्माण हेतु नक्शे पास करना तथा अनियोजित विकास को रोकना है। सभी प्राधिकरण गंभीरता अपना यह मूल कार्य करें। यह निर्देश आयुक्त ने जिला स्तरीय विकास प्राधिकरणोें की आयुक्त कार्यालय स्थित एनआईसी से वीसी के माध्यम से समीक्षा करते हुए दिए। उन्होंने जिला प्राधिकरणों की कार्य प्रणाली पर असंतोष व्यक्त करते हुए कहा कि कुमाऊं सभी छः बोर्ड, बैठकों में दिए गए दिशा-निर्देशों का एक सप्ताह के भीतर शत-प्रतिशत अनुपालन कराना तथा अनुपालन आख्या आयुक्त कार्यालय को 17 मई तक उपलब्ध कराना सुनिश्चित करें। साथ ही सभी विकास प्राधिकरणों को अपनी कार्य प्रणाली में सुधार लाते हुए लम्बित नक्शो को नियमानुसार एवं निश्चित समय सीमा के भीतर स्वीकृत एवं अस्वीकृत करें। नक्शों को अनावश्यक लम्बित न रखा जाए। यदि नक्शे को अस्वीकृत किया जा रहा है तो अस्वीकृति का स्पष्ट कारण भी जरूर लिखा जाए। साथ ही स्वीकृत-अस्वीकृत किए जा रहे नक्शों की जानकारी सम्बन्धित व्यक्तियों को तत्काल दी जाए। उन्होंने नक्शे पास कराने हेतु सभी प्राधिकरणों को ऑनलाईन सेवा को प्रभावी करने के निर्देश दिए। उन्होंने सभी अधिकारियों को विकास प्राधिकरण एक्ट का गहनता से अध्ययन कर एक्ट के अनुसार ही गतिविधियॉ संचलित करने तथा व्यक्तिगत हित त्यागकर जनहित में प्रभावशाली ढंग से कार्य करने के निर्देश भी दिए। प्राधिकरण के अभियंताओं एवं कर्मचारियों की दैनिक डायरी बनवाने तथा प्राधिकरण की भ्रमण पंजिका बनाने के निर्देश देते हुए कहा कि प्राधिरण के सचिव द्वारा नियमित रूप से कार्मिकों की दैनिक डायरी तथा भ्रमण पंजिका की जॉच करने एवं प्राधिकरण दिवस आयोजित करने तथा जिलाधिकारियों को प्राधिकरण दिवस में प्रतिभाग करने को भी कहा। उन्होंने अनियोजित विकास पर जवाबदेही सुनिश्चित करते हुए कहा कि अपने क्षेत्र के लिए उप जिलाधिकारी उत्तरदायी होंगे। उन्होंने अवैध निर्माण रोकने के लिए पटवारी, लेखपालों, कानूनगो को अपने क्षेत्रों में होने वाले अवैध निर्माण की तत्काल उप जिलाधिकारियों को उपलब्ध कराने तथा अवैध निर्माण को तत्काल रोकने की कार्यवाही करने के निर्देश दिए। उन्होंने निर्देशित करते हुए कहा कि अवैध तरीके से एकल आवास का निर्माण को रोकते हुए प्राधिकरण निर्माण करने वाले भवन स्वामी को सुविधाएं प्रदान करते हुए उसका नक्शा पास कराने में पूरी मदद करे। उन्होंने निर्देशित करते हुए कहा कि भविष्य में अवैध निर्माण की सूचना प्राप्त होने पर सम्बन्धित क्षेत्र के उप जिलाधिकारी को अवैध निर्माण की सूचना देने के साथ ही नोटिस भी जारी किया जाएगा तथा उनके खिलाफ नियमानुसार कार्यवाही अमल में लाई जाएगी। श्री रौतेला ने भवन निर्माण सामग्री बैचने वाले व्यक्तियों को नोटिस जारी करते हुए नक्शा पास न कराने वाले व्यक्तियों को सामान न बैचने तथा भवन निर्माण सामग्री बैचने वाले दुकानदारों के रजिस्टर चैक करने के साथ ही बिना नक्शा पास कराने वाले भवन स्वामी को सामान बैचने पर उनके खिलाफ कार्यवाही करने के निर्देश दिए। श्री रौतेला ने निर्देशित करते हुए कहा कि किसी भी सरकारी विभाग को अधिकार नहीं है कि बिना नक्शा पास कराए भवन एवं बिल्डिंग बनाए। उन्होंने विभिन्न विभागों द्वारा बिना नक्शा पास कराए बनाए जा रहे भवन निर्माण कार्य को भी रोकने के निर्देश दिए। उन्होंने प्राधिकरण के सचिव/अपर जिलाधिकारियों को कम्पाउंडिंग के कैसों की प्राथमिकता से सुनवाई करते हुए निस्तारित करने के निर्देश दिए। उन्होंने सभी विकास प्राधिकरणों को हिदायत देते हुए कहा कि प्राधिकरण जनता को सुविधाएं उपलब्ध कराना सुनिश्चित करें, प्राधिकरण गठन का उद्देश्य जतना को परेशान करना नहीं है बल्कि जनता को सुनियोजित विकास के माध्यम से सुविधाए प्रदान करना तथा अनियोजित विकास पर अंकुश लगाना है। वीसी में अपर आयुक्त संजय खेतवाल, सचिव जिला विकास अधिकारण हरबीर सिंह, के अलावा अन्य अधिकारी मौजूद रहे।

मंडल के छह जिलों में से हल्द्वानी में सर्वाधिक नक्शे लंबित

नैनीताल। समीक्षा के दौरान एसोसिएट टाउन प्लानर शशि मोहन श्रीवास्तव ने बताया कि जिला विकास प्राधिकरण अल्मोड़ा में 66 नक्शे, उधम सिंह नगर में 407, बागेश्वर में 60, चम्पावत में 37, पिथौरागढ़ में 8 तथा नैनीताल में 267 नक्शे जिसमें से 225 नक्शे हल्द्वानी के शामिल हैं लम्बित हैं।

यह भी पढ़ें : सरोवरनगरी में अवैध निर्माण कर्ताओं के लिए ‘आदर्श स्थिति’ बनी चुनाव आचार संहिता

नवीन समाचार, नैनीताल, 7 अप्रैल 2019। सरोवरनगरी में लोक सभा चुनाव की आदर्श आचार संहिता अवैध निर्माण कर्ताओं के लिए मानो आदर्श बन गयी है। प्रशासनिक मशीनरी के चुनाव प्रक्रिया में व्यस्तता में अवैध निर्माणकर्ताओं की मानो ‘पौ-बारह’ है। नगर के इन दिनों अवैध निर्माणों की बाढ़ आई हुई है। नगर में कमोबेश हर क्षेत्र में अवैध निर्माणों जोरों पर चल रहे हैं। मजदूर और निर्माण सामग्री ढोने वाले वाहन ढूंढ़े नहीं मिल रहे हैं। पूर्व में ऐसे कार्य रात में हुआ करते थे, अब दिन में भी खुलेआम ऐसे निर्माण हो रहे हैं। नगर में हर ओर निर्माण सामग्री ढोते वाहन और नेपाली मजदूर देखे जा रहे हैं, परंतु संभवतया जिला विकास प्राधिकरण कर्मचारियों को वे नजर नहीं आ पा रहे हैं। वहीं प्राधिकरण कर्मी भी अपनी ओर से कार्रवाई करने की बात तो कर रहे हैं, परंतु उनकी कार्रवाई का असर कहीं होता नजर नहीं आ रहा है। उन्होंने इस बीच कुछ मामले पकड़े भी हैं, इससे पुष्टि होती है कि नगर में अवैध निर्माण हो रहे हैं, परंतु अवैध निर्माण जितने बड़े स्तर पर हो रहे हैं और उनके खिलाफ जो प्राधिकरण की कार्रवाइयां हो रही हैं उन्हें नगण्य ही कहा जाएगा।

यह भी पढ़ें : झीलों के दो किमी के दायरे में निर्माण व पेड़ों के कटान संबंधी आदेश पर हाईकोर्ट से राहत नहीं

नवीन समाचार, नैनीताल, 8 मार्च 2019। उत्तराखंड हाई कोर्ट ने झीलों के किनारे से दो किलोमीटर के दायरे में किसी भी प्रकार का निर्माण कार्य व पेड़ो के कटान पर रोक सम्बन्धी पूर्व के आदेश में संशोधन करने से सम्बंधित विभिन्न प्रार्थना पत्रो पर सुनवाई करते हुए उन्हें निरस्त कर दिया है।
इस मामले में याचिकाकर्ता के अधिवक्ता द्वारा कोर्ट को अवगत कराया गया था कि इससे संबंधित एसएलपी सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन है, इसलिए यह प्रार्थना पत्र निरस्त करने योग्य हैं। मामले की सुनवाई मुख्य न्यायधीश रमेश रंगनाथन व न्यायमूर्ति आलोक सिंह की खंडपीठ में हुई।
उल्लेखनीय है कि पूर्व में सोशल आर्गेनाइजेशन यूनिटी एंड नेचर डेवलपमेंटश् के सेक्रेटरी तारा सिंह राजपूत ने हाईकोर्ट में मुख्य न्यायाधीश को लिखित पत्र भेजकर कहा था कि भीमताल, खुटानी पदमपुरी, विनायक आदि स्थानों पर बड़ी संख्या में पेड़ों का अवैध कटान करके उस स्थान पर भवन निर्माण किया जा रहा है। जिसको रोकने के लिए वन विभाग और प्रशासन द्वारा कोई कार्यवाही नहीं की जा रही है। कहा गया है कि पहाड़ो व वनों की जैव विविधताओं को नुकसान हो रहा है। मामले का संज्ञान लेते हुए पूर्व की खंडपीठ ने झीलो के दो किलोमीटर के दायरे में निर्माण के साथ ही कोर्ट ने पांच किलोमीटर के दायरे पर पेड़ों के कटान भी पर रोक लगा दी थी।

यह भी पढ़ें : ठंड का फायदा उठा कर किया जा रहा था अवैध निर्माण कर प्राधिकरण की आंखों में धूल झोंकने का प्रयास, ऐसे हुआ विफल…

बुधवार को पिटरिया क्षेत्र में सील किया गया अवैध निर्माण।

नवीन समाचार, नैनीताल, 23 जनवरी 2019। नगर के अवैध निर्माणकर्ता हर ऐसे समय की फिराक में रहते हैं जब प्राधिकरण के कर्मियों की आंखों में धूल झोंकी जा सके, और बाद में अवैध निर्माण करने के बाद कहा जाये कि यह निर्माण तो बरसों पुराना है। जब अवैध निर्माण हुआ, तब क्यों प्राधिकरण आंखें मूंदें सोया था। ऐसा ही कुछ बुधवार को कड़ाके की ठंड के दिन, जबकि पूरे दिन नगर में बारिश होती रही और कोहरा छाया रहा, अवैध निर्माणकर्ता खासे सक्रिय रहे। किंतु जिला विकास प्राधिकरण की सक्रियता भी काबिले तारीफ रही।
पहली घटना राजकीय पॉलीटेक्निक के पास पिटरिया क्षेत्र की है, जहां में नगर में हो रही बारिश-बर्फबारी के बीच हो रही कड़ाके की ठंड का फायदा उठा कर अवैध निर्माण में तीसरी छत डालने का प्रयास किया जा रहा था। जिला विकास प्राधिकरण के अधिकारियेां को इसकी सूचना मिली तो ठंड की परवाह किये बिना टीम मौके पर धमक आई और अवैध निर्माण को सील कर लिया। प्राधिकरण के प्रोजेक्ट इंजीनियर चंद्रमौलि साह ने बताया कि यहां बुधवार को ठंड के बीच मनोज बिष्ट नाम के व्यक्ति द्वारा दूसरे तल की छत डालने का प्रयास चल रहा था। इस अवैध निर्माण का पहले भी चालान किया गया था, जबकि आज निर्माण रुकवाकर इसे सील कर दिया गया। प्राधिकरण की टीम में अधिशासी अभियंता विजय माथुर, अवर अभियंता दलबीर सिंह व सुपरवाइजर हीराबल्लभ व इरशाद अहमद आदि भी शामिल रहे। इसी तरह मंगावली में नारायण सिंह सांगा और सैनिक स्कूल मल्लीताल के पास विद्या उप्रेती द्वारा किये जा रहे अवैध निर्माणों को भी जिला विकास प्राधिकरण के दल ने अपराह्न में सील कर दिया।

यह भी पढ़ें : खुशखबरी : नए वर्ष में उत्तराखंड में घर-व्यावसायिक भवन बनाना होगा आसान, नियमों में होगा बड़ा बदलाव

  • एक ही भवन में दुकान और मकान संचालित करना वैध हो जाएगा
  • अवैध भवनों के नियमितीकरण के लिए एकमुश्त समाधान योजना लाकर उन्हें वैध बनाने का मौका देगी सरकार
  • व्यावसायिक श्रेणी में मल्टीप्लेक्स, मॉल, स्कूल, नर्सिंग होम और अस्पताल के निर्माण में कई तरह की छूट भी मिलेंगी 
नवीन समाचार, देहरादून, 25 दिसंबर 2018। नए वर्ष में उत्तराखंड में आवासीय और व्यावसायिक भवन निर्माण की राह आसान होने जा रही है। इसके लिए आवास विभाग छह नीतियों में बड़े बदलाव करने जा रहा है। इन्हें मंत्रिमंडल की अगली बैठक में मंजूरी के लिए लाया जाएगा। नीतियां पास होने के बाद व्यावसायिक और आवासीय के साथ ही एक नई ‘मिश्रित भवन’ की श्रेणी के तहत भी नक्शे पास होंगे। इस श्रेणी के अस्तित्व में आने से जनता को बड़ी राहत मिलेगी। इससे एक ही भवन में दुकान और मकान संचालित करना वैध हो जाएगा। मतलब यह कि आवासीय परिसरों में व्यावसायिक कामकाज करने की राह खुल जाएगी। साथ ही सरकार नीतियों में बदलाव करके अवैध भवनों के नियमितीकरण के लिए एकमुश्त समाधान योजना (वन टाइम सेटलमेंट स्कीम) लाकर उन्हें वैध बनाने का मौका देगी। इसके अलावा व्यावसायिक श्रेणी में मल्टीप्लेक्स, मॉल, स्कूल, नर्सिंग होम और अस्पताल के निर्माण में कई तरह की छूट भी दी जाएगी। नीतिगत बदलावों से पर्वतीय क्षेत्रों में व्यावसायिक निर्माण के लिए बड़े भूमि क्षेत्रफल की अनिवार्यता खत्म होगी।
बताया गया है कि सरकार की उत्तर प्रदेश के समय के नियमों में बदलाव करने की भी तैयारी है। दरअसल, यूपी के समय के इन नियमों में सिनेमा हॉल, मॉल, अस्पताल, नर्सिंग होम आदि के नक्शे पास करने के लिए भूमि का बड़ा क्षेत्रफल अनिवार्य है। नई नीति में घटती भूमि को ध्यान में रख कर कम जगह पर भी ऐेसे व्यावसायिक निर्माण हो सकेंगे। व्यावसायिक भवनों और कॉलोनियों के निर्माण में चौड़ी सड़कों की बाध्यता को तर्कसंगत बनाया जा रहा है।
लंबे समय से मंदी के दौर में चल रहे रियल एस्टेट में छह नीतियों में होने वाले संशोधनों से बड़ा उछाल आएगा। व्यवसायिक परिसर निर्माण के लिए पर्वतीय क्षेत्रों में दी जाने वाली छूट से वहां भी निर्माण आसान होगा। वहीं प्रदेश में छोटे मॉल और मल्टीप्लेक्स सिनेमाघरों के निर्माण में भी तेजी आएगी। सरकार अवैध निर्मित परिसरों को वैध बनाने के लिए एक मुश्त समाधान योजना ला रही है। इससे शहरी क्षेत्रों में अवैध भवन मालिकों से होने वाली वसूली रुकेगी। इस योजना के तहत भवन मालिक कभी भी आवेदन कर कंपाउंडिंग करवा सकेंगे।

यह भी पढ़ें : कुमाऊं के पर्वतीय क्षेत्रों में एकल घर बनाने वालों के लिए बड़ी राहत, 5 की जगह केवल 1 फीसद देना होगा शुल्क

  • राष्ट्रीय व राज्य मार्गों के केवल 200 मीटर के दायरे ही आयेंगे प्राधिकरण के दायरे में
  • 200 मीटर के अंतर्गत भी एकल आवासीय भवन बनाने के लिए नक्शा स्वीकृत कराने की जरूरत नहीं होगी
  • सरकार की घोषणा के अनुरूप विकास शुल्क में 70 फीसद तक की कटौती होगी
जिला प्राधिकरण बोर्डों की बैठक की जानकारी देते मंडलायुक्त राजीव रौतेला।

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p style=”text-align: justify;”>नैनीताल, 7 अगस्त 2018। कुमाऊं मंडल के पर्वतीय क्षेत्रों में अपने लिये नये एकल आवासीय घर बनाने के इच्छुक लोगों के लिए बड़ी खुशखबरी है। अब वे पूर्व में तय 5 फीसद की जगह अब 200 वर्ग मीटर तक केवल 1 प्रतिशत तथा 200 वर्ग मीटर से अधिक के भूखण्डों पर 2 प्रतिशत सबडिवीजन शुल्क देकर बेखौफ होकर घर बना सकेंगे। वहीं जिला विकास प्राधिकरणों का दायरा राष्ट्रीय व राज्य मार्गों के केवल 200 मीटर के दायर में सीमित होगा। इसके बाहर के क्षेत्र में निर्माण पूर्व की तरह हो सकेंगे। 200 मीटर के अंतर्गत क्षेत्र में भी एकल आवासीय भवन बनाने के लिए नक्शा स्वीकृत कराने की जरूरत नहीं होगी। केवल भवन निर्माणकर्ता को प्राधिकरण से अधिकृत आर्किटेक्टों से भूकंपरोधी नक्शे बनाने होंगे एवं उन्हें अधिकृत आर्किटेक्टों से भूकंपरोधी होने का प्रमाणपत्र प्राधिकरण में जमा कराना होगा। इसके अलावा सरकार की घोषणा के अनुरूप विकास शुल्क में 70 फीसद तक की कटौती करने का निर्णय भी प्राधिकरण बोर्ड ने ले लिया है। सभी जिलों में प्राधिकरण संबंधी समस्याओं-शिकायतों के निस्तारण के लिए माह में एक दिन ‘प्राधिकरण दिवस’ आयोजित होंगे, जिसमें टाउन प्लानर एवं अन्य अधिकारी पहुंचकर समस्याओं का समाधान करेंगे। अधिकारियों को नक्शे निर्धारित समय सीमा में पास करने होंगे।
मंगलवार को जिला विकास प्राधिकरण सभागार में नैनीताल अल्मोड़ा एवं ऊधमसिंह नगर जिलों के प्राधिकरणों की प्राधिकरण बोर्डों की अध्यक्ष कुमाऊं मंडलायुक्त राजीव रौतेला की अध्यक्षता में हुई दूसरी बैठक में यह निर्णय लिये गये। निर्णयों की जानकारी देते हुए आयुक्त श्री रौतेला ने बताया कि पहले पर्वतीय क्षेत्र के नगरों के लिए शुल्क 2 एवं ग्रामीण क्षेत्रों के लिए 5 फीसद था, जिसे 1 फीसद कर दिया गया है, ताकि लोग स्वेच्छा से संबंधित प्राधिकरणों में आयें। सिटीजन चार्टर के अनुसार प्राधिकरण द्वारा आवासीय भवन का मानचित्र आवेदन प्राप्त होने के 15 दिन के भीतर तथा व्यवसायिक भूखण्डों के मानचित्र 30 दिनों के भीतर स्वीकृत कर दिये जायेंगे। आयुक्त ने कहा कि प्राधिकरणों का उद्देश्य प्राप्त शुल्क से संबंधित क्षेत्रों में मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराना है, न कि लोगों को परेशान करना। प्राधिकरणों के कार्यों को सुचारू तरीके से चलाने के लिए शासन के प्राविधानों के अनुसार शासन से आउटसोर्सिंग के जरिये नियुक्तियां करने के लिए आवेदन करने का निर्णय भी लिया गया। आगे बुधवार को पिथौरागढ़, बागेश्वर एवं चंपावत जिलों के प्राधिकरण बोर्डों की बैठक होगी, और उनमें भी यही निर्णय होने की संभावना जतायी जा रही है। इस मौके पर नैनीताल डीएम विनोद कुमार सुमन, एडीएम हरबीर सिंह, आरडी पालीवाल, उप निदेशक सूचना योगेश मिश्रा सहित अन्य अधिकारी मौजूद रहे।

नैनीताल आने वाले तीनों मार्गों पर निर्माण पूरी तरह से प्रतिबंधित

नैनीताल। कुमाऊं मंडलायुक्त राजीव रौतेला ने बताया कि पर्यटन नगरी नैनीताल को काठगोदाम, कालाढुंगी व भवाली से आने वाले तीनों मार्गों पर हर तरह के निर्माणों को प्रतिबंधित कर दिया गया है। साथ ही पूर्व में हुए निर्माणों की जांच करने तथा नियमविरुद्ध बने आवासों के खिलाफ कार्रवाई करने आदेश भी दे दिये गये हैं। केवल किसी क्षेत्र को बहुत बेहतर तरीके से विकसित करने वाले प्रस्तावों पर ही आगे विचार किया जा सकेगा। बताया कि काठगोदाम-नैनीताल मार्ग पर वर्ष 2019 के उत्तरार्ध से टू-लेन किये जाने के कार्य शुरू होने जा रहे हैं। इसलिए हर तरह के निर्माण सड़क चौड़ीकरण में बाधक बन सकते हैं।

एकमुस्त पांच वर्ष के लिए मिलेगी जिला विकास प्राधिकरणों से भवन निर्माण की स्वीकृति

नैनीताल, 7 मार्च, 2018। जिला विकास प्राधिकरणों के द्वारा भवन निर्माण हेतु मानचित्रों की स्वीकृति पांच वर्ष के लिये एक साथ ही दे दी जायेगी, परन्तु भवन निर्माण प्राधिकरण नियमावली व मानकों के अनुसार ही बनाये जायेंगे। जिला प्राधिकरणों के तहत सभी क्षेत्रीय कार्यालय की स्थापना यथाशीघ्र की जाएगी। वहीं नैनीताल जिला प्राधिकरण के संयुक्त सचिव हल्द्वानी क्षेत्रीय कार्यालय के साथ ही सप्ताह में एक दिन क्षेत्रीय कार्यालय रामनगर में भी बैठेंगे। नैनीताल नगर क्षेत्र में व्यवसायिक भवनों के निर्माण पूर्णतया प्रतिबंधित होने के मद्देजर गृह-आवास यानी होम स्टे आदि के अनुमन्यता प्रकरण शासन को संदर्भित किये जाएंगे।

बुधवार को जिला विकास प्राधिकरण बोर्ड की द्वितीय बैठक लेते हुये मंडलायुक्त एवं प्राधिकरणों के अध्यक्ष प्राधिकरण चन्द्र शेखर भट्ट ने गत बैठक मे लिये गये निर्णयों की समीक्षा करते हुये प्राधिकरण के नियमों एवं मानकों के अनुसार कार्य करने के निर्देश अधिकारियों को दिये। बोर्ड बैठक में निर्णय लिया गया कि सभी क्षेत्रीय कार्यालय की स्थापना कर कार्य प्रारम्भ किया जाय। क्षेत्रीय कार्यालय हल्द्वानी हेतु भूमि तलाशने के साथ ही बोर्ड के समक्ष प्रस्ताव प्रस्तुत करने को कहा। तहसील रामनगर के ग्राम शिवलालपुर पान्डे में प्रस्तावित जलपान गृह निर्माण, नैनीताल नगर पालिका क्षेत्र में गृह आवास, होम स्टे की अनुमन्यता के संबंध में भी चर्चा की गयी। बैठक में प्राधिकरण उपाध्यक्ष डीएम दीपेन्द्र कुमार चौधरी, सचिव श्रीश कुमार, सदस्य एसके पंत, मुख्य नगर एवं ग्राम नियोजक एसके पंत, कोषाधिकारी मामूर जहां, सहायक नगर आयुक्त विजेन्द्र सिंह चौहान, धीरेन्द्र रावत, राजेन्द्र कुमार अग्रवाल, टाउन प्लानर एसएम श्रीवास्तव, अभियंता सीएम साह आदि मौजूद रहे।

पूर्व आलेख : कुमाऊं के सभी परगनों में खुलेंगे जिला विकास प्राधिकरण के कार्यालय

    • 350 वर्ग मीटर के प्लॉटों पर निर्माण की स्वीकृति प्राधिकरण सचिव एवं इससे ऊपर डीएम देंगे
    • राष्ट्रीय एवं राज्य मार्गों के मध्य से 200 मीटर की परिधि के राजस्व गांवों में 200 वर्ग मीटर के आवासीय भवन एवं 30 वर्ग मीटर की स्वयं की व्यवसायिक दुकानों को मानचित्र स्वीकृत कराने से मिली छूट
  • नैनीताल शहर के जोन-1 व 2 के साथ ग्रीन बेल्ट क्षेत्र में निर्माण पूर्व की तरह प्रतिबंधित

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p style=”text-align: justify;”>नैनीताल। जनता को सही समय पर प्राधिकरण के नियमों आदि की जानकारियां प्राप्त हों व अनावश्यक परेशानियों का सामना ना करना पड़े इसके लिये कुमाऊं मंडल के सभी परगनों में संबंधित जिले के जिला विकास प्राधिकरणों के क्षेत्रीय कार्यालय खोले जाएंगे। बुधवार को कुमाऊं मंडल के जिला प्राधिकरणों के अध्यक्ष, कुमाऊं आयुक्त चंद्रशेखर भट्ट की अध्यक्षता में हुई बोर्ड बैठक में इसकी स्वीकृति दे दी गयी। साथ ही बोर्ड बैठक में निर्माण कार्यों को नियमों के तहत स्वीकृति देते हुये व्यवसायिक भवनों में वर्षा जल संग्रहण के प्रबंध करने और उन्हें भूकम्परोधी बनाने का प्राविधान रखा गया। अवस्थापना, पद सृजन एवं सम्बद्धता तथा वित्तीय अधिकारों के साथ ही जिला प्राधिकरण के त्रैमासिक बजट को भी स्वीकृति दी गयी।
इसके अलावा प्राधिकरण बनने से पूर्व बने ग्रुप हाउसिंग व बहुमंजिला भवनों, वाणिज्यिक भवनों के निरीक्षण हेतु सचिव की अध्यक्षता में कमेटी कठित की गयी, जो अपनी निरीक्षण रिपोर्ट एक माह में प्राधिकरण के उपाध्यक्षा यानी डीएम को देंगे। बैठक में निर्णय लिया गया कि 350 वर्गमीटर प्लाट तक की स्वीकृति सचिव व संयुक्त स्तर पर दी जायेगी तथा इससे ऊपर के प्लाटों की स्वीकृति उपाध्यक्ष यानी डीएम के स्तर पर दी जायेगी। जनपद के सभी राष्ट्रीय राज्यमार्गों एवं राज्य मार्गों के मध्य से 200 मीटर की परिधि में आने वाले राजस्व गांवों में 200 वर्ग मीटर आकार तक के आवासीय एवं 30 वर्ग मीटर तक की स्वयं की व्यवसायिक दुकानों के निर्माण में मानचित्र स्वीकृत कराने की छूट बैठक में दी गयी। ऑनलाइन सिस्टम से भी प्राधिकरण एवं मानचित्र की स्वीकृति की जानकारियां दी जायेंगी। प्राधिकरणों के द्वारा समय-समय पर अपने विकास क्षेत्र के अन्तर्गत आने वाले शहरों एवं गांवों में अवस्थापना विकास कार्य तथा आवासीय सुविधाएं उपलब्ध कराने की योजनाएं भी चलाई जाएंगी। वहीं प्राधिकरण की बिना अनुमति प्राप्त किये अवैध निर्माण किये जाने पर निर्माण को यथावत रोकने हेतु सील बंद करने के प्राविधानों को भी मंजूरी दी गयी। बैठक में प्राधिकरण के उपाध्यक्ष, नैनीताल डीएम दीपेन्द्र कुमार चौधरी ने नैनीताल शहर में जनता की सुरक्षा को देखते हुये शहर के पुराने जीर्णक्षीर्ण भवनों की मरम्मत की स्वीकृति का प्रस्ताव रखा जिस बोर्ड द्वारा शासन को भेजा गया। आयुक्त ने कहा कि नैनीताल शहर के चिन्हित जोन-1 व 2 के साथ ही ग्रीन बेल्ट क्षेत्र में निर्माण कार्य पूर्णतः प्रतिबंधित रहेंगे। बैठक में ऊधमसिंह नगर के डीएम डा. नीरज खैरवाल, आवास विकास परिषद के संयुक्त सचिव राजेंद्र सिंह, उत्तराखण्ड पेयजल निगम के मुख्य अभियंता राजेन्द्र प्रसाद, मुख्य ग्राम व नगर नियोजक एसके पंत, सचिव श्रीश कुमार, प्रताप साह, वित्त सचिव अनीता आर्य, एसडीएम प्रमोद कुमार, पारितोष वर्मा, एपी वाजपेयी, विजेद्र चौहान, केके गुप्ता, सीएम साह, जेपी डबराल सहित अनेक अधिकारी मौजूद रहे।

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राष्ट्रीय सहारा, 16 नवम्बर 2017
राष्ट्रीय सहारा, 16 नवम्बर 2017

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p style=”text-align: justify;”>-1984 में यूपी के तत्कालीन मुख्यमंत्री एनडी तिवारी की पहल पर वृहत्तर नैनीताल विकास प्राधिकरण से हुई थी शुरुआत, 1989 में तिवारी ने ही दिया एनएलआएसएडीए का स्वरूप
नवीन जोशी, नैनीताल। 1984 में पूर्ववर्ती उत्तर प्रदेश के तत्कालीन मुख्यमंत्री पं. नारायण दत्त तिवाड़ी की पहल पर ‘वृहत्तर नैनीताल विकास प्राधिकरण’ (जीएनडीए) के प्रारंभिक स्वरूप में स्थापित हुए और 1989 में तिवाड़ी द्वारा ही एक तरह से प्रोन्नत कर ‘नैनीताल झील परिक्षेत्र विशेष क्षेत्र विकास प्राधिकरण (एनएलआएसएडीए) अपना वजूद खोकर एक बार पुनः ‘नैनीताल जिला विकास प्राधिकरण’ के रूप में प्रोन्नत होने जा रहा है। इस पर नगर वासियों की आम प्रतिक्रिया यह है कि अपने मौजूदा स्वरूप में काम से अधिक नाकामियों के लिए पहचाना जाने वाला यह प्राधिकरण अपने प्रोन्नत स्वरूप में जनपद का कितना भला कर पाएगा।

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नैनीताल। कैबिनेट निर्णय के अनुपालन में 12 जिला विकास प्राधिकरणों के गठन के आदेश जारी हो गए हैं। नैनीताल झील विकास प्राधिकरण के गठन से जुड़ी अधिसूचना को खारिज कर दिया गया है। इसके बाद, झील विकास प्राधिकरण का वजूद खत्म हो गया है। इसकी जगह नैनीताल जिला विकास प्राधिकरण अब काम करेगा। शासन ने देहरादून के मामले में अभी कोई फैसला नहीं किया है। माना जा रहा है कि यहां पर एमडीडीए और साडा के विलय के बाद इस संबंध में आदेश जारी हो पाएंगे। जिला विकास प्राधिकरणों के गठन के संबंध में सरकार पूर्व में उलझी रही। पहले सिर्फ चार मैदानी जिलों में जिला विकास प्राधिकरण गठन का कैबिनेट निर्णय हुआ। बाद में पर्वतीय जिलों में भी जिला विकास प्राधिकरण के गठन को मंजूरी दे दी गई। तय किया गया कि राष्ट्रीय और राज्य मार्ग से दो सौ मीटर के अंतर्गत इलाके विकास प्राधिकरण का हिस्सा होंगे। कैबिनेट के निर्णय के अनुपालन में मंगलवार को आवास विभाग ने 12 जिलों से संबंधित 12 शासनादेश जारी कर दिए। आयुक्त को प्राधिकरण में पदेन अध्यक्ष और एडीएम को सचिव बनाया गया है। हरिद्वार को छोड़कर बाकी सभी जगहों में डीएम प्राधिकरण के उपाध्यक्ष होंगे। हरिद्वार में किसी भी आईएएस अफसर को उपाध्यक्ष बनाए जाने की व्यवस्था दी गई है।

जिले भर में विकास और निर्माण गतिविधियों को योजनाबद्ध करने के उद्देश्य से सरकार ने यह निर्णय लिया है। अब प्राधिकरण के दायरे में केवल पर्वतीय क्षेत्र ही नहीं बल्कि हल्द्वानी, कालाढूंगी, रामनगर सहित पूरे जिले का मैदानी क्षेत्र और अब तक छूटा हुआ पर्वतीय क्षेत्र भी इसमें शामिल कर दिया गया है। – श्रीष कुमार, नैनीताल झील प्राधिकरण

इस प्राधिकरण को यूं अपनी स्थापना से ही लगातार प्रोन्नतियां, कार्य विस्तार मिलता रहा है। 29 अक्टूबर 1984 को उत्तर प्रदेश के नगर नियोजन एवं विकास अधिनियम 1973 के तहत अस्तित्व में आया ‘वृहत्तर नैनीताल विकास प्राधिकरण’ केवल नैनीताल की झीलों के परिक्षेत्र में विकास को नियोजित करने के उद्देश्य से अस्तित्व में आया था। लेकिन पांच वर्ष के भीतर ही इसके खिलाफ आवाजें उठनी शुरू हो गयीं। अनेक स्थानीय लोग इसके विरुद्ध सीएम तिवाड़ी के पास लखनऊ मिलने गए। लोगों की मंशा थी कि यह प्राधिकरण नैनीताल नगर की जनसंख्या को बाहरी क्षेत्रों में नियोजित तरीके से विस्तारित करे। नैनीताल नगर में ही निर्माण न बढ़ें। जिसके फलस्वरूप 21 अक्टूबर 1989 को इसके निर्माण की अधिसूचना को निरस्त कर इसी दिन इसे विशेष क्षेत्र विकास प्राधिकरण अधिनियम 1986 के तहत ‘नैनीताल झील परिक्षेत्र विशेष क्षेत्र विकास प्राधिकरण (एनएलआएसएडीए) का स्वरूप प्रदान कर दिया गया। अब इसके अंतर्गत जनपद की भीमताल, सातताल, नौकुचियाताल व खुर्पाताल झीलें और इन्हें आपस में जोड़ने वाली सड़कों के दोनों ओर से 220 गज का क्षेत्र भी आ गया, अलबत्ता इस क्षेत्र में आने वाले गांवों को अलग रखा गया। 1994 में पुनः संशोधन कर 220 गज की जगह 220 मीटर के भीतर आने वाले गांवों को भी इसके अधीन कर दिया गया। वहीं 1999 में जनपद के रामगढ़ व मुक्तेश्वर क्षेत्र भी इसके अधीन कर दिए गए। किंतु इतनी शक्तियां मिलने के बावजूद प्राधिकरण न तो इन क्षेत्रों में किसी तरह का नियोजित विकास ही करवा पाया, न अपनी ओर से लोगों को कोई बेहतर आवासीय सुविधा ही दे पाया, और इस तरह लगातार शक्तिहीन भी होता चला गया। मौजूदा स्थिति यह है कि नैनीताल नगर में नियोजित विकास के लिए नाम भर को 1995 में बनी महायोजना छह वर्ष पूर्व 2011 में कालातीत हो चुकी है, और तब से नयी महायोजना नहीं बन पायी है। प्राधिकरण की नगर में आम छवि रही कि नगर के लोग अपने परिवारों के बढ़ने के साथ एक-दो कमरे भी नहीं बना सकते, किंतु बिल्डर महायोजना के अंतर्गत ‘ग्रीन बेल्ट’ यानी हरित क्षेत्रों में भी दशकों से निर्माण जारी रखे यहे। यह भी कहा जाता है कि प्राधिकरण के आने के बाद ही नगर में बिल्डरों का आगमन हुआ। वहीं मार्च 2002 में केंद्र में एनडीए सरकार के दौर में प्रधानमंत्री अटल बिहारी बाजपेई के नैनीताल आगमन पर प्राधिकरण को 300 करोड़ की घोषणा के सापेक्ष अवमुक्त 67 करोड़ रुपए की झील संरक्षण परियोजना मिली, लेकिन इसका लाभ भी केवल नैनी झील में हो रहे एयरेशन व तल्लीताल में ‘न्यू ब्रिज कम बाइपास निर्माण’ जैसे गिने-चुने कार्यों में ही दिखाई देता है। भीमताल टापू में स्थापित एक्वेरियम जैसे अन्य कार्य भी अपना अस्तित्व खोते जा रहे हैं। प्राधिकरण में नगर नियोजक और अभियंताओं के साथ ही अन्य कार्मिकों की कमी भी हमेशा से समस्या रही। अपनी नयी आवासीय योजनाएं न लाने, पूर्व निर्मित आवासों की कंपाउंडिंग न करने आदि कारणों से आर्थिक रूप से दिन-प्रति-दिन निशक्त होती चली गयी है। प्राधिकरण की स्थापना के दौर से नजर रखे सुदर्शन साह ने कहा कि प्राधिकरण जब नैनीताल नगर को नहीं बचा पाया है तो वह जनपद को कैसे बचाएगा, यह बड़ा सवाल है। बेहतर होता कि इसमें स्थानीय जिम्मेदार लोगों-जनप्रतिनिधियों की भूमिका बढ़ाई जाती।

भूकंपरोधी बनाने होंगे सभी व्यवसायिक निर्माण, वर्षा जल संग्रहण के भी करने होंगे प्रबंध

-नैनीताल जनपद के पहाड़ों पर निर्माण होंगे प्रतिबंधित, नैनीताल के साथ ही पूरे पर्वतीय क्षेत्र की बन रही है एकीकृत महायोजना

-जून माह तक हो जाएगी तैयार, पुरानी 1995 में बनी महायोजना 2011 में हो चुकी है कालातीत-जून माह तक हो जाएगी तैयार, पुरानी 1995 में बनी महायोजना 2011 में हो चुकी है कालातीत

नवीन जोशी, नैनीताल। सरोवरनगरी नैनीताल के साथ ही जनपद के पूरे पर्वतीय क्षेत्र, जहां व्यवसायिक निर्माण बड़े स्तर पर चल रहे हैं, व्यवस्थित निर्माणों के लिये एकीकृत महायोजना बनाने का कार्य इन दिनों चल रहा है। नैनीताल विशेष क्षेत्र झील विकास प्राधिकरण के सचिव श्रीश कुमार ने बताया कि पुरानी 1995 में बनी महायोजना 2011 में कालातीत हो गयी है। इधर छह वर्ष से लंबित नयी महायोजना बनाने का कार्य आरईपीएल नाम की कंपनी को दिया गया है। इस कंपनी को पूरे क्षेत्र का उपग्रह आधारित सर्वे के माध्यम से बाउंड्री युक्त डिजिटल नक्शे बनाकर नगर नियोजक को आगामी 15 दिसंबर तक सोंपना है। इस संबंध में काफी कार्य हो चुका है। उम्मीद है कि इसके बाद नगर नियोजक अगले छह माह में यानी जून 2018 तक महायोजना को तैयार कर लेगा। महायोजना में प्राधिकरण के क्षेत्रांतर्गत आने वाले नैनीताल के साथ ही मुक्तेश्वर, धानाचूली, श्यामखेत, नथुवाखान, धारी, हरतोला, मौना, ल्वेशाल आदि का मुख्य सड़क से 500 मीटर की दूरी तक का क्षेत्र शामिल है। बताया कि नैनीताल की तरह ही पूरे प्राधिकरण क्षेत्र का जीएसआई के माध्यम से डिजिटलाइज्ड सर्वे कराने की भी योजना है, ताकि भूवैज्ञानिकों की रिपोर्ट पर निर्भर न रहना पड़े, बल्कि नक्शे ही पारदर्शी तरीके से बता दें कि कौन सा क्षेत्र निर्माणों के लिये किस हद तक सुरक्षित अथवा असुरक्षित है। साथ ही महायोजना से पता चलेगा कि किस तरह से पूरे क्षेत्र में सड़क, खुले स्थान व आवासीय व वाणिज्यिक भवन बनाए जाएंगे।

नगर में निर्माणों पर जल्द न्यायालय से राहत की उम्मीद

नैनीताल। प्राधिकरण सचिव श्रीश कुमार ने बताया कि उत्तराखंड उच्च न्यायालय के आदेशों पर नीरी यानी राष्ट्रीय पर्यावरण अभियांत्रिकी संस्थान के द्वारा नगर के विभिन्न क्षेत्रों की ‘बियरिंग कैपेसिटी’ यानी भार धारण क्षमता और नैनी झील सहित जनपद की सात प्रमुख झीलों में पानी के आने व खर्च होने, खासकर नैनीताल झील में पानी के जल्द खत्म होने व पानी की गुणवत्ता तथा स्रोतों के सूखने व रिसाव आदि का आंकलन किया जा रहा है। इस संबंध में नीरी के निदेशक भी जल्द अक्टूबर माह की शुरुआत में नैनीताल आने जा रहे हैं। झीलों के सर्वेक्षण में तो अधिक समय लगना है। किंतु नैनी झील व मुख्यालय की भार धारण क्षमता के मानक कमोबेश वे ही हैं, जिनके आधार पर नगर में जोन एक, दो, तीन व चार का निर्धारण किया गया है। इस संबंध में जल्द नीरी द्वारा उच्च न्यायालय में तथ्यात्मक पक्ष रखे जाने के बाद उम्मीद है कि नगर में नये निर्माणों पर लगी रोक हटा ली जाएगी। बताया कि प्राधिकरण अभी भी नगर के जीर्ण-शीर्ण भवनों की मरम्मत और ध्वस्त भवनों के पुर्ननिर्माण की नियमानुसार स्वीकृतियां दे रहा है।

अब तक नगर में 445 भवन स्वामी विस्थापन के लिये चिन्हित

नैनीताल। प्राधिकरण सचिव श्रीश कुमार ने बताया कि नगर में केवल जोन 2 में वर्ष 2001 से 2016 तक 74 निर्माणों की स्वीकृति दी गयी है। इनमें से 40 पूरी तरह एवं शेष आंशिक तौर पर जोन-2 में हैं। इस तरह पूर्व के सात नंबर क्षेत्र के 361 एवं सूखाताल क्षेत्र के 44 तथा जोन-2 के इन 40 भवनों में रहने वाले कुल 445 परिवारों को विस्थापन हेतु चिन्हित किया गया है। इनकी सूची डीएम एव ंकेएमवीएन के एमडी की अध्यक्षता वाली दोनों विस्थापन समितियों को दे दी गयी है। इन परिवारों को विस्थापित किये जाने के लिये बेलुवाखान ग्राम पंचायत के अंतर्गत नैनीताल बाइपास के पास का स्थान चिन्हित किया गया था, किंतु इस स्थान पर घना जंगल होने सहित कई समस्याएं आने के कारण अन्य स्थान की तलाश भी की जा रही है। बताया कि नगर में घरेलू आवास की निर्माण की अनुमति लेकर बनाए भवनों का होटल, पेइंग गेस्ट हाउस और मल्टी हाउसिंग कॉम्प्लेक्स के रूप में वाणिज्यिक उपयोग किया जा रहा है। धामपुर बैंड स्थित स्थित ऐसे दो होटल रियो ग्रांड और काफल को सीज कर दिया गया है। आगे भी ऐसे वाणिज्यिक भवनों को चिन्हित कर कार्रवाई की जाएगी।

नैनीताल को कमजोर नगर बताना सच्चाई है या कोई साजिश !

(श्री नंदा स्मारिका 2015 में प्रकाशित पूर्व आलेख) भूगर्भीय दृष्टिकोण से जोन-चार में रखे गए नैनीताल नगर की भूगर्भीय व भूसतहीय कमजोरी के बात खूब बढ़-चढ़ कर कही जाती है, लेकिन इसके उलट इस बड़े तथ्य को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता है कि नगर के बचाव के लिए अंग्रेजी दौर से किए गए मजबूत प्रबंधों की वजह से नगर के भीतरी, नैनी झील के जलागम क्षेत्र में 1880 के बाद से और पूरे नगर के समग्र पर भी बीती पूरी और मौजूदा सदी के करीब सवा सौ वर्षों में एक भी व्यक्ति की मौत नहीं हुई है। इस तथ्य से क्या नगर की मजबूती का भरोसा नहीं मिलता है ? निस्संदेह इस भरोसे को नजर अंदाज नहीं किया जा सकता है। मृत्यु शैया पर पड़े लाइलाज बीमारी से ग्रस्त रोगी को कोई कम बुद्धि और कम संसाधनों वाला चिकित्सक भी कभी नहीं कहता कि उसका बेहतर इलाज उसका जीवन समाप्त कर देेना है। लेकिन प्रकृति द्वारा दोनों हाथों से अपनी नेमतें लुटाए प्रकृति के स्वर्ग कही जाने वाली सरोवरनगरी के लिए मानो उसका उपचार करने की जिम्मेदारी वाले चिकित्सक, शासन-प्रशासन, बिना उसके उपचार के प्राथमिक प्रयास किए ही मानो निर्लज्जता के साथ कह रहे हैं, उसे बचाने का एक ही और आखिरी उपाय है-उसके कमजोर हिस्सों को काट दिया जाए। वह अपने दर्द से मरें ना मरें, पहले ही उसकी जान ले ली जाए। नगर भले ‘श्मशान’ में बदल जाए, पर यदि वह इसमें सफल रहे तो उन पर पूर्व में किए गए उनके, अतीत से लेकर वर्तमान तक अपनी जेबें भरकर नगर को कुरूप कर देने के ‘पापों’ से मुक्ति मिल जाएगी। उनके कुकृत्यों को लोग भूल जाएंगे और उन पर लगातार उठने वाली अंगुलियां आगे नहीं उठ पाएंगी।

इस तथ्य से कोई इंकार नहीं कर सकता कि ‘अपना’ शासन-प्रशासन नैनीताल नगर का उपचार करना दूर, ‘पराए’ अंग्रेज नियंताओं द्वारा किए गए मजबूत प्रबंधों की देखभाल-मरम्मत करने में ही पूरी तरह से विफल रहा है।  उल्टे वह महज नगर के दो दशक पुराने हल्के-गहरे रंगों में रंगे नक्शे के जरिए नगर को कमजोर और अधिक व अत्यधिक कमजोर बताकर यह साबित करने की कोशिष करने में अधिक गंभीर नजर आ रहा है कि नगर बेहद जर्जर है, और मानो नगर में अधिसंख्य इलाके का ध्वस्तीकरण ही सारी समस्याओं का इलाज है।

नगर की कमजोरी की बातों में अनेकों स्तरों पर अजब और परले दर्जे का विरोधाभाष नजर आता है।

1- नैनीताल कथित तौर पर बेहद कमजोर नगर है। इसका सबसे कमजोर हिस्सा रोप-वे स्टेशन के बिलकुल करीब से लेकर ऊपर की ओर सात नंबर तक का स्थान बताया जाता है, और यहीं 1985 में करीब 12 व्यक्तियों को एक साथ लेकर चलने वाले 825 किग्रा भार वहन क्षमता के भारी-भरकम ढांचे युक्त रोप वे का निर्माण किया गया, जो कि इतने वर्षों से बिना किसी समस्या के सीजन के कई दिनों में हजार सैलानियों को भी नीचे से ऊपर और ऊपर से नीचे की सैर कराता है।

2- नैनीताल की दूसरी सबसे कमजोर नब्ज है नगर का आधार-बलियानाला, जिसके ऊपर प्रशासन ने तल्लीताल में ‘न्यू ब्रिज कम बाईपास’ का निर्माण करा डाला है, और पुराने बस अड्डे को खाली कराकर इस पर ही रोडवेज की भारी-भरकम बसों को खड़ा करने की ‘जिद’ भी पूरी कर डाली है।

3- नगर की तीसरी कमजोर दुःखती रग प्रदेश के नैनीताल राजभवन को निहाल नाले की ओर से खोखला कर रही है।

4- चौथा और सबसे ताजा भूस्खलन के स्थान पर प्रदेश का उच्च न्यायालय स्थित है।

इसी तरह मल्लीताल रिक्शा स्टेंड हजारों रुपए से बने ढांचे को तोड़कर ठीक नाला नंबर 21 के ऊपर फिर लाखों रुपए खर्च कर बनाया जा रहा है। यानी नगर की कमजोरी का उपयोग अपनी पसंद के साथ हो रहा है। जहां काम बनाना हो, जनहित की बात कह दी जाए, अन्यथा जनता की जान का डर दिखा दिया जाए।

बावजूद हम पूरी गंभीरता के साथ दोहरा रहे हैं-नैनीताल कमजोर नहीं मजबूत स्थान है। हमारे इस बात को कहने का आधार फिर वही है, और हमारे विश्वास को मजबूत करने वाला तथ्य यह है कि नगर में पिछले करीब सवा सौ वर्षों में एक भी व्यक्ति की मौत नगर की कमजोरी या भूस्खलनों की वजह से नहीं हुई है।अब पड़ताल करते हैं उन कारणों की जिनकी वजह से नगर की ऊपर बताई गई इतनी कमजोरी के बावजूद नगर सवा सौ वर्षों से पूरी तरह सुरक्षित है। यह आधार 18 सितंबर 1880 को आए नगर के महाविनाशकारी, उस दौर के केवल करीब ढाई हजार की जनसंख्या वाले नगर में 108 भारतीयों व 43 ब्रितानी नागरिकों सहित कुल 151 लोगों की जान लीलने वाले भयानक भूस्खलन के बाद नगर के अंग्रेज नियंताओं द्वारा बनाए गए कैचपिट युक्त 100 शाखाओं युक्त 50 नाले हैं, जिन्हें नगर की आराध्य देवी माता नयना और प्रदेश की कुल देवी नंदा-सुनंदा का स्वरूप और नगर का हृदय कही जाने वाली नैनी झील की धमनियां कहा जाता है। निर्विवाद तौर पर माता नयना तथा नंदा-सुनंदा तथा यह नाले ही नैनीताल को इतने वर्षों में हुई हजारों सेंटीमीटर-मीटर वर्षा की अकल्पनीय विभिषिका से बचाए हुए हैं। इनकी ताकत और कृपा को शब्दों में व्यक्त करना मुश्किल है। लेकिन इनकी ताकत-क्षमता के बारे में इतना दावे के साथ कहा जा सकता है कि नैनीताल नगर में इन नालों का सफल व सही प्रयोग ‘नैनीताल मॉडल’ के रूप आगे भी न केवल नैनीताल को हमेशा के लिए ही नहीं, वरन देश-दुनिया के किसी भी अन्य पर्वतीय शहर को बारिश की वजह से होने वाले भूस्खलन के खतरों से बचा सकता है। पिछले वर्षों में भूस्खलन की जद में आए अल्मोड़ा व वरुणावत पर्वत के खतरे से घिरे उत्तरकाशी और केदारनाथ में ‘नैनीताल मॉडल’ को लागू कर बचाया जा सकता है।

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वर्ष 1880 के भूस्खलन ने बदल दिया था सरोवरनगरी का नक्शा, तभी बने नालों की वजह से बचा है कमजोर भूगर्भीय संरचना का यह शहर 
इसी तरह से अन्यत्र भी हों प्रबंध तो बच सकते हैं दैवीय आपदाओं से 
पहाड़ का परंपरागत मॉडल भी उपयोगी 
नवीन जोशी, नैनीताल। कहते हैं कि आपदा और कष्ट मनुष्य की परीक्षा लेते हैं और समझदार मनुष्य उनसे सबक लेकर भावी और बड़े कष्टों से स्वयं को बचाने की तैयारी कर लेते हैं। ऐसी ही एक बड़ी आपदा नैनीताल में 18 सितंबर 1880 को आई थी, जिसने तब केवल ढाई हजार की जनसंख्या वाले इस शहर के 151 लोगों और नगर के प्राचीन नयना देवी मंदिर को लीलने के साथ नगर का नक्शा ही बदल दिया था, लेकिन उस समय उठाए गए कदमों का ही असर है कि यह बेहद कमजोर भौगोलिक संरचना का नगर आज तक सुरक्षित है। इसी तरह पहाड़ के ऊंचाई के अन्य गांव भी बारिश की आपदा से सुरक्षित रहते हैं। वैज्ञानिकों का मानना है कि नैनीताल और पहाड़ के परंपरागत मॉडल केदारघाटी व चारधाम यात्रा क्षेत्र से भी भविष्य की आपदाओं की आशंका को कम कर सकते हैं।
1841 में स्थापित नैनीताल में वर्ष 1867 में बड़ा भूस्खलन हुआ था, और भी कई भूस्खलन आते रहते थे, इसी कारण यहाँ राजभवन को कई जगह स्थानांतरित करना पढ़ा था। लेकिन 18 सितम्बर 1880 की तिथि नगर के लिए कभी न भुलाने वाली तिथि है। तब 16 से 18 सितम्बर तक 40 घंटों में 20 से 25 इंच तक बारिश हुई थी। इसके कारण आई आपदा को लिखते हुए अंग्रेज लेखक एटकिंसन भी सिहर उठे थे। लेकिन उसी आपदा के बाद लिये गये सबक से सरोवर नगरी आज तक बची है और तब से नगर में कोई बड़ा भूस्खलन भी नहीं हुआ है। उस दुर्घटना से सबक लेते हुए तत्कालीन अंग्रेज नियंताओं ने पहले चरण में नगर के सबसे खतरनाक शेर-का-डंडा, चीना (वर्तमान नैना), अयारपाटा, लेक बेसिन व बड़ा नाला (बलिया नाला) में नालों का निर्माण कराया। बाद में 1890 में नगर पालिका ने रुपये से अन्य नाले बनवाए। 23 सितम्बर 1898 को इंजीनियर वाइल्ड ब्लड्स द्वारा बनाए नक्शों के आधार पर 35 से अधिक नाले बनाए गए। वर्ष 1901 तक कैचपिट युक्त 50 नालों (लम्बाई 77,292 फीट) और 100 शाखाओं का निर्माण (लंबाई 1,06,499 फीट) कर लिया गया। बारिश में कैच पिटों में भरा मलबा हटा लिया जाता था। अंग्रेजों ने ही नगर के आधार बलिया नाले में भी सुरक्षा कार्य करवाए जो आज भी बिना एक इंच हिले नगर को थामे हुए हैं। यह अलग बात है कि इधर कुछ वर्ष पूर्व ही हमारे इंजीनियरों द्वारा बलिया नाला में कराये गए कार्य कमोबेश पूरी तरह दरक गये हैं। बहरहाल, बाद के वर्षो में और खासकर इधर 1984 में अल्मोड़ा से लेकर हल्द्वानी और 2010 में पूरा अल्मोड़ा एनएच कोसी की बाढ़ में बहने के साथ ही बेतालघाट और ओखलकांडा क्षेत्रों में जल-प्रलय जैसे ही नजारे रहे, लेकिन नैनीताल कमोबेश पूरी तरह सुरक्षित रहा। ऐसे में भूवैज्ञानिकों का मानना है ऐसी भौगोलिक संरचना में बसे प्रदेश के शहरों को “नैनीताल मॉडल” का उपयोग कर आपदा से बचाया जा सकता है। कुमाऊं विवि के विज्ञान संकायाध्यक्ष एवं भू-वैज्ञानिक प्रो. सीसी पंत एवं यूजीसी वैज्ञानिक प्रो. बीएस कोटलिया का कहना है कि नैनीताल मॉडल के सुरक्षित ‘ड्रेनेज सिस्टम’ के साथ ही पहाड़ के परंपरागत सिस्टम का उपयोग कर प्रदेश को आपदा से काफी हद तक बचाया जा सकता है। इसके लिए पहाड़ के परंपरागत गांवों की तरह नदियों के किनारे की भूमि पर खेतों (सेरों) और उसके ऊपर ही मकान बनाने का मॉडल कड़ाई से पालन करना जरूरी है। प्रो. कोटलिया का कहना है कि मानसून में नदियों के अधिकतम स्तर से 60 फीट की ऊंचाई तक किसी भी प्रकार के निर्माण की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए।
इधर आपदा प्रबंधन एवं न्यूनीकरण केंद्र (डीएमएमसी) के अध्ययन “स्लोप इनस्टेबिलिटी एंड जियो-एन्वायरमेंटल इश्यूज ऑफ द एरिया अराउंड नैनीताल” के मुताबिक नैनीताल को 1880 से लेकर 1893, 1898, 1924, 1989, 1998 में भूस्खलन का दंश झेलना पड़ा। 18 सितम्बर 1880 में हुए भूस्खलन में 151 व 17 अगस्त 1898 में 28 लोगों की जान गई थी। इन भयावह प्राकृतिक आपदाओं से सबक लेते हुए अंग्रेजों ने शहर के आसपास की पहाड़ियों के ढलानों पर होने वाले भूधंसाव, बारिश और झील से होने वाले जल रिसाव और उसके जल स्तर के साथ ही कई धारों (प्राकृतिक जलस्रेत) के जलस्रव की दर आदि की नियमित मॉनीटरिंग करने व आंकड़े जमा करने की व्यवस्था की थी। यही नहीं प्राकृतिक रूप से संवेदनशील स्थानों को मानवीय हस्तक्षेप से मुक्त रखने के लिए कई कड़े नियम कानून बनाए थे। मगर आजादी के बाद यह सब ठंडे बस्ते में चला गया। शहर कंक्रीट का जंगल होने लगा। पिछले पांच वर्षो में ही झील व आस-पास के वन क्षेत्रों में खूब भू-उपयोग परिवर्तन हुआ है और इंसानी दखल बढ़ा है। नैनीझील के आसपास की संवेदनशील पहाड़ियों के ढालों से आपदा के मानकों की धज्जियां उड़ाते हुए गंभीर छेड़छाड़ की जा रही है। पहाड़ के मलबों को पहाड़ी ढालों से निकलने वाले पानी की निकासी करने वाले प्राकृतिक नालों को मलबे से पाटा जा रहा है। नैनी झील के जल संग्रहण क्षेत्रों तक में अवैध कब्जे हो रहे हैं। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बावजूद सरोवरनगरी में अवैध निर्माण कार्य अबाध गति से जारी है। रिपोर्ट में कहा गया है कि इन क्षेत्रों में हुए सूक्ष्म बदलाव भी नैनी झील के वजूद के लिए खतरा बन सकते हैं।

इस दावे को सच मानने पर जरूर सवाल उठेगा कि नैनीताल नगर के लिए जीवन-मरण जितने महत्वपूर्ण इन नालों में इतनी ही ताकत है तो फिर नगर में पिछले वर्षों में नैनीताल नगर में कई भूस्खलन क्यों हुए। विश्लेषण करने पर इन सवालों का जवाब भी आसानी से मिल जाता है। चलिए, इस बात की पड़ताल करते हैं कि 1880 से पहले और बाद में नैनीताल में कितने भूस्खलन आए और उनसे क्या नुकसान हुआ। पहले बात नैनीताल नगर की स्थापना के बाद आए भूस्खलनों की। नगर के अंग्रेज नियंता नगर की कमजोर प्रकृति से सर्वप्रथम 1866 और फिर 1869 व 1879 में रूबरू हुए। नगर की आल्मा पहाड़ी पर हुए इन भूस्खलनों की वजह से तत्कालीन गवर्नर हाउसों में भी दरारें आ गई थी। अंग्रेजों ने इससे बचाव के तरीके खोजने ही प्रारंभ किए थे कि 18 सितंबर 1880 को वर्तमान रोप-वे के पास पुनः आल्मा पहाड़ी पर आए भूस्खलन ने 151 लोगों को जिंदा दफन करने के साथ नगर का नक्शा भी बदल दिया। नगर की आराध्य देवी माता नयना को भी नहीं बक्शा। नयना देवी का वर्तमान बोट स्टेंड के पास स्थित मंदिर भी झील में समा गया, जिसके बाद मंदिर को वर्तमान स्थान पर बनाया गया।

नैनीताल से हाईकोर्ट हटाओ : कोश्यारी (राष्ट्रीय सहारा, देहरादून संस्करण, 3 अगस्त 2015 , पेज-2)

बीती आधी सदी में नैनीताल में आए भूस्खलनों की बात करें तो सब से बड़ा भूस्खलन 1988 में नैना पीक की तलहटी के क्षेत्रों में हुआ था, जिसमें भूस्खलन का मलबा हंस निवास, मेलरोज कंपाउंड और सैनिक स्कूल से होते हुए तत्कालीन ब्रुक हिल छात्रावास (वर्तमान उत्तराखंड उच्च न्यायालय के आउट हाउस) के कक्षों में भर गया था। लेकिन इस भूस्खलन का कारण जान लीजिए। अंग्रेजी दौर में बने नाला नंबर 26 पर इन प्रभावित क्षेत्रों के ऊपर किलवरी रोड के पास स्थित तीन नौ गुणा नौ वर्ग मीटर आकार के कैचपिटों की सफाई नहीं की गई थी। फलस्वरूप बारिश के दौरान गिरा एक सुरई का विशाल पेड़ नाले में फंस गया था, जिस कारण मलबा नाले में बहने की बजाय फंसे पेड़ की वजह से आवासीय क्षेत्रों की ओर आ गया था। कई लोगों को कुछ समय के लिए घर भी छोड़ने पड़े, पर कोई जनहानि नहीं हुई। गौरतलब है कि यह कैचपिट अभी भी भरे हुए हैं। उनकी सफाई नहीं की जा रही। अभी हाल में जून माह में नैनीताल क्लब में मुख्यमंत्री हरीश रावत के जनता दरबार में स्थानीय लोगों ने इस समस्या को रखते हुए बताया था कि उनके घरों में मलबा घुस गया है, और अफसोसजनक स्थिति थी कि संबंधित अधिकारी इस समस्या को समझ ही नहीं पाए, और कैचपिटों की सफाई इसके बाद भी नहीं हुई।

दूसरा बड़ा भूस्खलन 10 वर्ष बाद 1998 में ठंडी सड़क के ऊपर डीएसबी कॉलेज के गेट के पास के क्षेत्र में कई दिनों तक भूस्खलन होता रहा। इसकी चर्चा रेडियो के उस दौर में बीबीसी लंदन से भी हुई थी। इस क्षेत्र में पूर्व से नाले के प्रबंध ही नहीं किए गए थे। शायद इसलिए कि यहां अंग्रेजी दौर में घर ही नहीं थे। इस भूस्खलन के दौर में भी यहां गिने-चुने ही मकान थे। एक मकान हवा में लटक सा गया था, लेकिन इस बार भी कोई जनहानि नहीं हुई।

अब बात नैनीताल के सर्वाधिक संवेदनशील व नगर के आधार बलियानाला की। बलियानाला में 1898 से भूस्खलनों का लंबा इतिहास रहा है, जिसमें 28 लोगों ने जान गंवाई थी इस क्षेत्र में सबसे बड़ा भूस्खलन 17 अगस्त 1898 को हुआ था। इसे नगर के इतिहास की दूसरी सबसे बड़ी दुर्घटना भी कहा जाता है। इस दुर्घटना में 27 भारतीय व एक अंग्रेज सहित कुल 28 लोग मारे गए थे। लेकिन याद रखना होगा कि यह वह दौर था, जब नालों का निर्माण चल ही रहा था, और इस क्षेत्र में इसके बाद भी 1901 तक नालों तक नालों का निर्माण होता रहा था, और यह क्षेत्र नैनी झील के जलागम क्षेत्र के बाहर आता है। गौरतलब है कि इसके बाद भी इस क्षेत्र में 1935, 1972 और 2004 में भी बड़े भूस्खलन हुए, बड़ा क्षेत्र बलियानाले में समाया, लेकिन गनीमत रही कि कोई जनहानि नहीं हुई। 2004 के भूस्खलन के बाद 2005 में तत्कालीन मुख्यमंत्री नारायण दत्त तिवारी सरकार ने बलियानाले के सुधार कार्यों के लिए 15 करोड़ रुपए की भारी-भरकम धनराशि दी। बताया जाता है कि इससे बलियानाला में आठ ‘बेड-बार’ बनाए गए, परंतु कार्यों की गुणवत्ता कैसी थी, यह बताने के लिए इतना ही कहना काफी है कि इन ‘बेड-बार’ के भग्नावशेष भी आज देख पाने कठिन हैं। इधर पिछले वर्ष यानी 2014 में यहां 10 जुलाई को और इस वर्ष 11 जुलाई को भी यहां बड़े भूस्खलन हुए। इन भूस्खलनों में क्षेत्र का काफी हिस्सा बलियानाले में समा गया, और समाता जा रहा है। अनेक परिवारों को विस्थापित भी करना पड़ा है लेकिन यह भी सच्चाई है कि इन घटनाओं में भी कोई जनहानि नहीं हुई। इधर 2014 में बलियानाले को फिर से चैनलाइज करने के लिए 44.52 करोड़ रुपए के प्रस्ताव शासन को भेजे गए हैं, लेकिन इस प्रस्ताव पर भी शासन अब तक एक रुपया भी देने को तैयार नहीं दिख रहा।

नैनीताल राजभवन के नीचे हो रहा अवैध खनन : प्रत्यक्ष को प्रमाण की जरूरत नहीं 

वहीं बात नगर के दूसरे आधार निहाल नाले की करें तो इस क्षेत्र में पिछली सदी से ही लगातार भूस्खलन जारी हैं, फलस्वरूप 1960 से इस क्षेत्र में खनन प्रतिबंधित है। लेकिन सच्चाई यह है कि इस प्रतिबंध का कोई अर्थ नहीं है। निहाल नाले में भूस्खलन करीब 10 मीटर प्रति वर्ष की दर से जारी है, और दिन-दहाड़े धड़ल्ले से जारी अवैध खनन की गति भी इससे कुछ कम नहीं है।

‘बुद्धिमान’ नियंताओं ने क्षेत्र में दूसरों को खनन से रोकना दूर, स्वयं 1960 के प्रतिबंध को धता बताकर ‘अवैध खनन’ करते हुए इस क्षेत्र से ही नैनीताल बाई-पास का निर्माण करने का ‘दुस्साहस’ कर दिखाया है। बाई पास से नगर की यातायात व्यवस्था को कुछ लाभ हुआ है अथवा नहीं, पता नहीं, अलबत्ता इसने अवैध खनन कर्ताओं को जरूर आसान रास्ता उपलब्ध करा दिया है। गौरतलब है कि निहाल नाले के शीर्ष पर उत्तराखंड राज्य का नैनीताल राजभवन स्थित है। राजभवन के गोल्फ कोर्स का पूर्व राज्यपाल रोमेश भंडारी के नाम पर बना भंडारी स्टेडियम इस भूस्खलन की जद में आ चुका है। निहाल नाले का प्लम कंक्रीट, वायर क्रेट नाला निर्माण, साट क्रीटिंग व रॉक नेलिंग आदि आधुनिक तकनीकों से क्षरण रोकने के लिए वर्ष 2012 में 38.7 करोड़ रुपए सहित पूरे नैनीताल नगर की सुरक्षा के लिए 58.02 करोड़ रुपए की बड़ी योजनाओं का प्रस्ताव तैयार कर शासन को भेजा गया था। इन प्रस्तावों पर भी ‘धन की कमी आढ़े नहीं आने दी जाएगी’ की तोता रटंत करने वाला शासन अब तक एक रुपया भी स्वीकार नहीं कर पाया है।

अब बात हालिया बीती पांच जुलाई 2015 को आए बड़े भूस्खलन की, जिसकी वजह से नगर की कमजोरी पर बोलने के लिए प्रशासन को बड़ा मौका मिला। इस घटना का पहला मूल कारण तो बिड़ला रोड पर हुआ भूस्खलन रहा, जिसका मूल कारण इस बेहद संकरे, बीते दौर में घोड़ों के लिए बने बेहद तीक्ष्ण चढ़ाई वाले मार्ग में स्नो-व्यू, किलवरी जाने के लिए ‘शॉर्ट कट’ के रूप में प्रयोग करने वाले नए जमाने के अत्यधिक क्षमता वाले भारी-भरकम वाहनों का बेधड़क-बेरोकटोक गुजरना भी रहा, जिस कारण स्तुति गेस्ट हाउस के पास का पहले से ही वाहनों के बोझ से ढहता नाला तेज बारिश के दौरान दरक गया। लेकिन इस बात से भी इंकार नहीं किया जा सकता कि घटना की विभीषिका इस मलबे को लेकर आने वाले नाला नंबर-6 के जीर्ण-शीर्ण होने की वजह से बढ़ी। नाला जीर्ण-शीर्ण होने से मलबा नाले की कमजोर दीवारों को तोड़कर पास के मकानों को खोखला करते हुए निकला। इसी तरह मल्लीताल पालिका गार्डन में नुकसान नाला नंबर 20 के पाइप लाइनों से बुरी तरह पटे रहने, इस कारण मलबा फंसने और नाले की कमजोर दीवारों के टूटकर पास के घरों को खोखला करने के कारण काफी नुकसान हुआ। नालों के ऊपर डाली गई सीमेंट की पटालों व लोहे की जालियों ने भी पानी को रोकने का काम किया। फलस्वरूप मल्लीताल बाजार में रामलीला मैदान के पास दो जगह सड़क ही फट गई। जबकि नारायणनगर वार्ड के लोगों को खतरनाक पहाड़ की तलहटी में बसने और नाले न होने का खामियाजा भुगतना पड़ा।

मर्ज बढ़ता गया, ज्यों-ज्यों दवा की

नैनीताल नगर का जो हाल हुआ है, उसके लिए निर्विवाद तौर पर केवल यहां अवैध तरीके से घर बनाने वाले ही नहीं, वरन शासन-प्रशासन भी बराबर का जिम्मेदार हैं। 1841 में स्थापित हुए इस नगर पर ‘ज्यों-ज्यों दवा की-मर्ज बढ़ता ही गया’ की उक्ति साकार बैठती है। नगर वासियों के अनुसार नगर को व्यवस्थित करने के नाम पर 1984 में की गई झील विकास प्राधिकरण की व्यवस्था ने नगर को पहले के मुकाबले कहीं अधिक अव्यवस्थित करने का कार्य किया है। प्राधिकरण की ओर से नगर को बढ़ते जन दबाव से बाहर निकालने के लिए कोई प्रयास नहीं किये गए। प्राधिकरण तथा शासन-प्रशासन की उदासीनता और भविष्य की रणनीति बनाने में पूरी तरह अक्षमता परखने के लिए एक उदाहरण ही काफी होगा कि एक ओर पर्यटन नगरी में हर वर्ष पर्यटन बढ़ाने की बात कही गई, और दूसरी ओर 1984 से 21 वर्षों में एक भी नया होटल, यहां तक कि एक भी नया कक्ष बढ़ाने का औपचारिक और नियमों के अंतर्गत कोई प्रयास किया गया, जबकि अनाधिकृत तौर पर वह सब कुछ हुआ, जिसे करने की मनाही बताई गई। दूसरी ओर आवासीय घरों के नवनिर्माण क्या मरम्मत की भी बेहद कठिन की गई प्रक्रिया का परिणाम रहा कि लोग चोरी-छुपे, रात-रात में बेहद कच्चे घरों का निर्माण करने लगे। इस प्रकार इस कठोरता ने नगर को और अधिक कमजोर करने का ही कार्य किया।

मृतप्राय महायोजना से चल रही व्यवस्थाएं, 21 करोड़ के दो प्रस्तावों पर नहीं मिला ढेला भी

दूसरी ओर प्रशासनिक अक्षमता की ही बानगी है कि नगर को ‘बचाने’ के नाम पर नगर के कमजोर, असुरक्षित घरों को ध्वस्त करने का मंसूबा बना रहा नगर की व्यवस्थाओं के लिए जिम्मेदार प्रशासन 1995 में बनी और 2011 में पूरी हो चुकी मृतप्राय ‘नैनीताल महायोजना’ को अभी भी नगर पर थोपे हुए है, और पिछले चार वर्षों से नई महायोजना नहीं बना पाया है। सवाल उठता है कि क्या महायोजना के पूरा होने से पूर्व ही नई महायोजना बनाने के प्रयास नहीं शुरू हो जाने चाहिए थे। और जो व्यवस्था समय पर अपने प्रबंध और स्वयं को समयानुसार ‘अपडेट’ न कर पाए, क्या वह नगर की अन्य मायनों में बेहतर देखरेख के काबिल है। वहीं राज्य बनने से भी पूर्व 1998 से नगर की पर्यावरणीय व भूगर्भीय सुरक्षा में सबसे बड़ी भूमिका निभाने वाली नैनीताल झील विशेषज्ञ समिति एवं हिल साइड सेफ्टी कमेटी की केवल एक बैठक हुई है। 1990 के दशक में नगर की सुरक्षा पर विस्तृत अध्ययन करने वाली ब्रजेंद्र सहाय समिति की संस्तुतियां का कहीं अता-पता नहीं है। वहीं शासन स्तर पर अक्षमता देखनी हो तो यह उदाहरण पर्याप्त होगा कि वर्ष 2011 में लोनिवि प्रांतीय खंड के अधिकारियों ने नगर की धमनियां कहे जाने वाले नालों की मरम्मत के लिए जेएलएनयूआरएम को 20.80 करोड़ और राज्य योजना को 20.67 करोड़ के दो अलग-अलग प्रस्ताव भिजवाए, लेकिन यह दोनों प्रस्ताव शासन में धूल फांक रहे हैं। जबकि नगरवासियों के लिए जीवन-मरण का प्रश्न और नगर की धमनियां कहे जाने वाले नाले उत्तराखंड सरकार की प्राथमिकता में कहीं नहीं हैं। इसीलिए दशकों से नगर के नालों की मरम्मत के लिए एक रुपया नहीं मिला है, और मरम्मत की जगह सफाई के लिए मिलने वाली धनराशि से खानापूरी की जा रही है। पूर्व में लोनिवि ने भी इस हेतु 80 लाख रुपए शासन से मांगे थे, वह भी नहीं मिले। अब लोनिवि की जरूरत 3.6 करोड़ रुपए तक पहुंच गई है। इसका प्रस्ताव भी शासन में लंबित है, लेकिन नतीजा ढाक के वही तीन पात। नगर के नाले बुरी तरह से उखड़ गए हैं। उनकी दोनों ओर की दीवारें अनेक स्थानों पर टूट चुकी हैं। कैच पिट पूरी तरह मलबे से पट चुके हैं, और जालियों में पत्थर अटके हुए हैं। ऐसे में वह अपनी दिशा बदलकर किनारे चोट कर बड़ी तबाही का कारण बनने की मानो पूरी तैयारी कर चुके हैं, लेकिन सरकार की आंखें नहीं खुल रही हैं। नाले गंदगी-मलबे से भी बुरी तरह पटे हैं, और इनकी सफाई के लिए नगर पालिका और लोक निर्माण विभाग के कर्मियों की मलबे और गंदगी को लेकर होने वाला विवाद निपटाने तक में भी प्रशासन की ओर से आज तक कोई सफल प्रयास नहीं किया जा सका है।

इन्हीं कारणों से गत पांच जुलाई को नाला नंबर तीन, छह व 20 ने अपनी हिम्मत के टूट जाने का इशारा कर भयावह रूप दिखा दिया है। नाला नंबर तीन ने चांदनी चौक रेस्टोरेंट के भीतर से बहकर तथा नाला नंबर छह से इंडिया व एवरेस्ट होटलों के बीच बहते हुए करीब 15 हजार क्यूसेक मलबा माल रोड पर लाकर पहाड़ खड़ा कर दिया। वहीं नाला नंबर 20 मल्लीताल रिक्शा स्टेंड वाला नाला स्टाफ हाउस तक अनेक घरों के लिए खतरा बन गया। इसके अपने पत्थर और मलबे से नगर का खूबसूरत कंपनी गार्डन पट गया है। यही हाल मस्जिल तिराहे से डीएसबी की ओर जाने के मार्ग पर सबसे पहले पड़ने वाले नाला नंबर 24 के भी हैं। इस नाले ने भी किनारे मार करनी शुरू कर दी है। नाला नंबर 23 के भी यही हाल हैं, लेकिन सरकार के पास इन नालों की मरम्मत के लिए पैंसा नहीं है। मजबूर होकर डीएम के समक्ष झील विकास प्राधिकरण से नालों की तात्कालिक मरम्मत के लिए 10 लाख रुपए ‘मांगने’ जैसी नौबत आ गई है।

इस सबसे सबक लेने के बजाय अब प्रशासन अपनी गलतियों पर परदा जनता पर कार्रवाई के जरिए डालने की तैयारी कर रहा है। यानी 18 सितंबर 1880 को आई आपदा के बाद नगर के अंग्रेज निर्माताओं द्वारा दीर्घकालीन सोच के तहत बनाए गए नालों की स्थिति नगर को करीब सवा सौ वर्ष बिना मरम्मत सुरक्षित रखने के बाद अब दम तोड़ने की स्थिति में पहुंच गए है। बताने की जरूरत नहीं कि इन वर्षों में आई बारिश से नैनीताल को बचाने और अपनी उपस्थिति वाले स्थानों पर एक भी जनहानि न होने देने वाली नगर की इन धमनियों की दुर्दशा के लिए कौन बड़ा जिम्मेदार है। क्या नालों में गंदगी, मलबे के कट्टे डालने वालों को जिम्मेदार बताकर प्रशासन अपनी जिम्मेदारी से बच सकता है ? जबकि वह नालों में गंदगी-मलबा डालने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने की अपनी जिम्मेदारी भी पूरी नहीं कर पाया है। जबकि एक तथ्य यह भी है कि प्रशासन के पास नगर के कमजोर घरों का कोई सर्वेक्षण भी नहीं है, और वह हवा में कार्रवाई करने का मन बना रहा है। नगर के ‘कमजोर’ होने का भ्रम फैला कर कहा जा रहा है कि यह कार्रवाई नगर को ‘बचाने’ के लिए की जा रही है, लेकिन जिस तरह प्राधिकरण करीब 900 लोगों को पहले ही ध्वस्तीकरण नोटिस देने की बात कर रहा है, और दबी जुबान 10 हजार घरों को आदेश की जद में बता रहा है, उससे अंदाजा लगाना कठिन नहीं कि शहर बचेगा, या उजड़ जाएगा।

नालों को बचाना होगा तभी बचेगा नैनीताल

सरोवरनगरी नैनीताल में सितंबर 1880 में 18 सितंबर को आए महाविनाशकारी भूस्खलन के बाद वर्ष 1901 तक बने नालों की स्थिति बहुत ही दयनीय है। नगर की धमनियां कहे जाने वाले इन नालों को हर किसी ने अपनी ओर से मनमाना इस्तेमाल किया है। नगर वासियों ने इन्हें कूड़ा व मलवा निस्तारण का कूड़ा खड्ड तथा इनके ऊपर तक अतिक्रमण कर अपने घर बनाने का स्थान बनाया है तो जल संस्थान ने इन्हें पानी की पाइप लाइनें गुजारने का स्थान, जबकि इसकी सफाई का जिम्मा उठाने वाली नगर पालिका और लोक निर्माण विभाग ने इनमें आने वाले कूड़े व गंदगी को उठाने के नाम पर जिम्मेदारी एक-दूसरे पर डालने और सफाई के नाम पर पैंसे बनाने का माध्यम बनाया है। यदि ऐसा न होता तो आज नाले अपना मूल कार्य, नैनी झील में इसके जलागम क्षेत्र का पूरा पानी बिना किसी रोकटोक के ला रहे होते, और नगर को कैसी भी भयानक जल प्रलय या आपदा न डिगा पाती। गनीमत रही कि उत्तराखंड उच्च न्यायालय के आदेशों पर नगर के होटलों द्वारा अभी हाल ही में उसी स्थान से छह कमरे हटा दिए गए थे, जहां से रविवार की रात्रि दो हजार टन मलवा माल रोड पर आया है, यह कमरे न हटे होते तो रात्रि में इन कमरों में सोए लोगों के साथ हुई दुर्घटना का अंदाजा लगाना अधिक कठिन नहीं है।

इस तरह बने नाले

नगर के अंग्रेज नियंता नगर की कमजोर प्रकृति से सर्वप्रथम 1866 और फिर 1869 व 1879 में रूबरू हुए। इस दौरान जब तत्कालीन राजभवन की दीवारों में भी दरारें आने लगीं तो उन्होंने इस समस्या के स्थाई समाधान व नगर की सुरक्षा के लिए प्रयास शुरू कर दिए थे। लेकिन इससे पहले ही 18 सितंबर 1880 को महाविनाशकारी भूस्खलन हो गया। इस दुर्घटना से सबक लेते हुऐ पहले चरण में नगर के सबसे खतरनाक शेर-का-डंडा, चीना (वर्तमान नैना), अयारपाटा, लेक बेसिन व बड़ा नाला (बलिया नाला) में दो लाख रुपये से नालों का निर्माण कराया। बाद में 80 के अंतिम व 90 के शुरुआती दशक में नगर पालिका ने तीन लाख रुपये से अन्य नाले बनवाए। आगे 23 सितम्बर 1898 को इंजीनियर वाइल्ड ब्लड्स द्वारा बनाए नक्शों से 35 से अधिक नाले बनाए गए। 1901 तक कैचपिट युक्त 50 नालों (लम्बाई 77,292 फीट) व 100 शाखाओं का निर्माण (कुल लम्बाई 1,06,499 फीट यानी 324.45 किमी) किया। नालों में कैचपिटों यानी गहरे गड्ढों की व्यवस्था थी, जिन्हें बारिश में भरते ही कैच पिटों में भरा मलवा हटा लिया जाता था। अंग्रेजों ने नगर के आधार बलियानाले में भी सुरक्षा कार्य करवाऐ, जो आज भी बिना एक इंच हिले नगर को थामे हुऐ हैं। यह अलग बात है कि इधर कुछ वर्ष पूर्व ही हमारे इंजीनियरों द्वारा बलियानाला में कराये गए कार्य कमोबेश पूरी तरह दरक गये हैं। इधर भी नालों में जो-जो कार्य हाल के दौर में हुए हैं, वह इस वर्ष रविवार पांच जुलाई की बारिश में बह गए हैं।

यह किए जाने की है जरूरत:
    • नालों से सटाकर किए निर्माणों को संभव हो तो हटाया अथवा मजबूत किया जाए।
    • नालों से पानी की लाइनें पूरी तरह से हटाई जाएं, इनमें मलवा फंसने से होता है नुकसान।
    • मरम्मत के कार्यों में हो उच्च गुणवता मानकों का पालन।
    • नालों की सफाई सर्वोच्च प्राथमिकता में हो।
    • नालों में कूड़ा डालने पर कड़े व बड़े जुर्माने लगें।
    • नालों में कैचपिटों की व्यवस्था बहाल हो, सभी नालों में बनें कैचपिट और हर बारिश के बाद हो इनकी सफाई।
  • नालों की सफाई के लिए पूर्व में बने अमेरिकी मशीन ऑगर लगाने जैसे प्रस्ताव लागू हों।

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एक अक्टूकर से केवल ऑनलाइन नक्शे ही पास होंगे
नवीन समाचार, नैनीताल, 31 जुलाई 2020। जिला स्तरीय विकास प्रधिकरण के द्वारा आगामी 1 अक्टूबर से केवल ऑनलाईन नक्शे ही पास किये जायेंगे। शुक्रवार को नैनीताल जिला स्तरीय विकास प्राधिकरण की एनडीडीए सभागार में आयोजित हुई नौवीं बोर्ड बैठक की अध्यक्षता करते हुए प्राधिकरण के अध्यक्ष एवं मंडलायुक्त अरविंद सिंह ह्यांकी ने इस बाबत निर्देश देते हुए सरल ऑनलाईन प्रक्रिया को अपनाने के निर्देश दिये। उन्होंने कहा कि ऑफ लाइन प्रक्रिया को 30 सितम्बर तक ही जारी रखा जाये।
उन्होंने निर्देश दिए कि मानचित्र स्वीकृति हेतु ऑनलाईन प्राप्त होने वाले नक्शों में किसी भी प्रकार की कमी न हो, इसके लिए जनपद के आर्किटैक्टों यानी वास्तुकारों को जागरूक करते हुए सम्पूर्ण प्रक्रिया एवं नियमों के बारे में जानकारी दी जाये। यह सुनिश्चित किया जाए कि बस्तियों की बसावट एवं विकास सुनियोजित तरीके से हो। उन्होंने केएमवीएन के प्रबंध निदेशक रोहित मीणा को मुख्यालय में फांसी गधेरा क्षेत्र में में सरकारी भूमि पर पार्किंग एवं भवन निर्माण हेतु लोक निर्माण विभाग के अधिकारियो से समन्वय कर आकर्षक प्रस्ताव तैयार करने के निर्देश भी दिए। बैठक में समिति द्वारा रामनगर स्थित पुरानी तहसील की खाली भूमि पर मल्टीलेवल पार्किंग कम शॉपिंग कॉम्लैक्स का नक्शा अनुमोदन करने को शुल्क से मुक्त रखने, कोश्या-कुटौली तहसील के अंतर्गत पार्किंग कम कॉमर्शियल कॉम्पलैक्स के निर्माण कार्य को जल्दी कराने, कुमाऊं विश्व विद्यालय के आणू गॉव भीमताल स्थित बायोटैक्नोलॉजी परिसर में अनुसंधान प्रयोगशाला भवन मानचित्र अनुमोदन करने, तथा भीमताल निवासी डौली वर्मा के मानचित्र को प्राकृतिक जलाशय-झील की सतह से 30 मीटर की परिधि में होने के कारण अस्वीकार करने के निर्णय भी लिये गए तथा खुर्पाताल स्थित भूमि पर सैटेलाईट टाउनशिप योजना विकसित करने या व्यवसायिक उद्देश्य से भूखंड को उपविभाजित किये जाने के विभिन्न पहलुओं पर भी विचार विमर्श किया गया। बैठक में टाउन प्लानर एसएम श्रीवास्तव ने बताया कि महायोजना भीमताल का अगले वर्ष जून तक पुनरीक्षण कार्य पूरा किया जायेगा। बैठक में नगर आयुक्त हल्द्वानी सीएस मर्तोलिया, मुख्य कोषाधिकारी अनिता आर्या, बंशीधर तिवारी, एसडीएम विनोद कुमार व सभासद दीपक आदि सदस्य भी उपस्थित रहे।

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-सौंदर्यीकरण एवं व्यवस्थाओं को सुव्यवस्थित करने के दिए सिचाई एवं प्राधिकरण के अधिकारियों को निर्देश
नवीन समाचार, नैनीताल, 28 जुलाई 2020। कुमाऊं मंडल के आयुक्त अरविन्द सिंह ह्यांकी ने मंगलवार को निर्धारित कार्यक्रमानुसार प्रशासनिक अमले के साथ मुख्यालय स्थित सूखाताल सहित भीमताल, सातताल, नलदमयंतीताल, कमलताल तथा नौकुचियाताल का मौका मुआयना किया और अधिकारियों को महत्वपूर्ण दिशा निर्देश दिए। इस मौके पर श्री ह्यांकी ने सातताल झील के निरीक्षण के दौरान केएमवीएन के कंसल्टेंट एवं आर्किटेक्ट दीपक मौर्य को एलडीए द्वारा पूर्व में बनाये गये रेस्टोरेन्ट व दुकानों के जीर्णोद्धार एवं सौंदर्यीकरण, ओपन फूड कोर्ट, झील क्षेत्र के विकास हेतु 15 दिन के भीतर डिजाइन तैयार कर प्रस्तुत करने तथा निर्माण कार्य हेतु 30 दिन के भीतर निविदा प्रक्रिया पूरी करने के निर्देश दिये। उन्होंने झील के पास लटकते बिजली के तारों को अन्य स्थान पर व्यवस्थित ढंग से लगाने को भी कहा। साथ ही उन्होंने जिला स्तरीय विकास प्राधिकरण के अधिकारियों को रेस्टोरेंट एवं दुकानों का काम पूरा होते ही दुकानदारों को एक ही स्थान पर शिफ्ट करने तथा खाली स्थान पर आकर्षक पार्क का निर्माण करने को कहा। उन्होंने झील क्षेत्र में सुंदर व सुव्यवस्थित पैदल मार्ग बनाने, पुराने बने पैदल मार्ग को सही करने तथा झील के चारों ओर प्रकाश तथा पर्यटकों के बैठने के लिए सुव्यवस्थित व्यवस्था करने, झील के एक ओर से दूसरी ओर जाने के लिए झूला पुल बनाने के भी लोनिवि व सिचाई विभाग के अधिकारियों को निर्देश दिए।
वहीं कमलताल झील के निरीक्षण के दौरान आयुक्त ने सिंचाई विभाग के अधिकारियों को झील में गिरे वृक्ष का नियमानुसार निस्तारण करने, झील में उत्पन्न घास को बरसात के तुरंत बाद साफ करने तथा कमलताल में कमल के पौधों को नुकसान पहुंचाने वाली मछलियों को आने से रोकने के लिए एक सप्ताह के भीतर जाली लगाने के निर्देश दिए। जबकि नौकुचियाताल के निरीक्षण के दौरान क्षेत्र में समुचित पैदल मार्ग बनाने तथा पूर्व में सिंचाई विभाग द्वारा तैयार की गयी पैदल मार्ग की डीपीआर शीघ्रता से प्रस्तुत करने के निर्देश भी दिए। वहीं भीमताल झील के निरीक्षण के दौरान उन्होंने पार्क को सुव्यवस्थित तरीके से विकसित करने के निर्देश सिचाई विभाग के अधिकारियों को, बांध में आयी दीवार का सेफ्टी ऑडिट कराने, झील किनारे बने दीन दयाल उपाध्याय पार्क को पुनः विकसित करने के निर्देश जिला स्तरीय विकास प्राधिकरण के अधिकारियों को दिए। इसके साथ ही श्री ह्यांकी ने भीमताल में पार्किंग की संभावनाओं की विस्तार से धरातलीय जानकारी लेते हुए महत्वपूर्ण दिशा निर्देश दिए। वहीं मुख्यालय में उन्होंने सूखाताल का निरीक्षण करते हुए उन्होंने इस झील को नैनी झील की सर्वाधिक जल प्रदाता झील के पुराने स्वरूप में लौटाने एवं वैकल्पिक पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने के निर्देश दिए। निरीक्षण के दौरान केएमवीएन के एमडी एवं जिला स्तरीय विकास प्राधिकरण के उपाध्यक्ष रोहित कुमार मीणा, प्राधिकरण के सचिव पंकज उपाध्याय, एसडीएम विनोद कुमार, अधिशासी अभियंता सिंचाई एचसी सिंह भारती, अधिशासी अभियंता जल संस्थान संतोष कुमार उपाध्याय, पुलिस उपाधीक्षक विजय थापा आदि मौजूद रहे।

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नवीन समाचार, नैनीताल, 20 जुलाई 2020। मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत के निर्देशों पर नैनीताल जिला विकास प्राधिकरण ने नैनीताल शहर एवं इसके आस-पास के क्षेत्रों में सौन्दर्यीकरण, स्ट्रीट लाइट लगाने एवं पार्किंग स्थलों के विकास के लिए 4 करोड़ 3 लाख 18 हजार रुपए आवंटित कर दिये है। जानकारी देते हुए क्षेत्रीय विधायक संजीव आर्य ने इस हेतु मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत का विशेष आभार व्यक्त करते हुए उम्मीद जताई कि उत्तराखंड के प्रमुख पर्यटन स्थल नैनीताल के सौन्दर्यीकरण एवं पार्किंग की समस्या के समाधान से शहर एवं आस-पास के क्षेत्रों के व्यवसाय को प्रत्यक्ष एवं रोजगार के क्षेत्र को बड़े पैमाने पर अप्रत्यक्ष रुप से बढ़ावा मिलेगा।
इसके साथ ही उन्होंने बताया कि नारायण नगर में पार्किंग के निर्माण को शीघ्र प्रारंभ करने की दिशा में भी वे निरंतर प्रयत्न कर रहे हैं। पार्किंग के लिए क्षतिपूरक वृक्षारोपण हेतु पस्तोला में जमीन का चयन किया जा चुका है, एवं इस जमीन को वन विभाग को हस्तांतरित करने की कार्यवाही प्रगति पर है। उन्होंने यह भी जानकारी दी कि जिला विकास प्राधिकरण द्वारा स्वीकृत रु. 403.18 लाख के कार्य लोक निर्माण विभाग द्वारा किये जाएंगे। इनमें 35.23 लाख की लागत से भवाली नैनीताल मोटर मार्ग का सौन्दर्यीकरण 28.12 लाख की लागत से नैनीताल-भवाली मोटर मार्ग में नैनीताल चौराहे से कैलाखान चौराहे तक मार्ग के दोनों ओर स्ट्रीट लाइट लगाने, 44.58 लाख की लागत से हनुमानगढ़ से डांठ तल्ली ताल तक सौन्दर्यीकरण, 35.76 लाख की लागत से डांठ तल्ली ताल से अल्का डोटल एवं मालरोड तक सौन्दर्यीकरण किया जाना, 23 लाख की लागत से आल्प्स होटल मल्लीताल के निकट सौन्दर्यीकरण, 122.16 लाख की लागत से डांठ तल्ली ताल से हनुमानगढ़ी से नीचे हेयरपिन बैंड तक स्ट्रीट लाइट एवं रु 61.72 लाख की लागत से नैनीताल-कालाढूंगी मोटर मार्ग पर केएमवीएन पार्किंग से केएमवीएन बारातघर एवं देवदार लाज के सामने पार्किंग स्थल विकसित किया जाएगा, साथ ही नैनीताल शहर के समस्त सार्वजनिक शौचालय को सुसज्जित एवं व्यवस्थित किया जाएगा।

अभियंता पर दूसरों की जमीन कब्जा कर अवैध निर्माण करने की मंडलायुक्त से की गई शिकायत

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-जनपद के तीनों पर्वतीय निकायों ने मांगा भवन मानचित्र स्वीकृत करने का अधिकार
नवीन समाचार, नैनीताल, 13 जुलाई 2020। प्राधिकरण से परेशानी महसूस कर रहे आम जन के मूक स्वरों को अपना स्वर देने के लिए जनपद के पर्वतीय क्षेत्र के तीनों निकायों-नैनीताल, भीमताल एवं भवाली के निकाय अध्यक्ष आपसी राजनीतिक विभेद भुलाकर एक मंच पर आ गए हैं। उन्होंने सोमवार को कुमाऊं मंडल के आयुक्त एवं झील प्राधिकरण के अध्यक्ष अरविंद सिंह ह्यांकी से उनके कार्यालय में मुलाकात की, और उनसे नगर निकायों को उनकी सीमा के अंतर्गत पूर्व की भांति भवन मानचित्रों की स्वीकृति देने के लिए अधिकृत करने की मांग की। नैनीताल नगर पालिका अध्यक्ष सचिन नेगी, भवाली नगर पालिका अध्यक्ष संजय वर्मा एवं भीमताल नगर पंचायत अध्यक्ष देवेंद्र सिंह चनौतिया ने कहा कि पूर्व में इन निकायों को भवन मानचित्र स्वीकृत करने का अधिकार प्राप्त था, और निकाय सरलता से यह कार्य करा लेते थे। लेकिन अब जिला विकास प्राधिकरण से भवन मानचित्र स्वीकृत कराने में अत्यधिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। इसलिए फिर से निकायों को ही भवन मानचित्र स्वीकृत करने का अधिकार दिया जाए।

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-मंडलायुक्त ने ठंडी सड़क-फांसी गधेरा क्षेत्र के विस्तार की संभावनाएं तलाशीं
-फांसी गधेरा क्षेत्र में ओपन फूड पार्क, गेस्ट हाउस व पार्किंग एवं माल रोड की भीड़भाड़ को ठंडी सड़क की ओर लाने के लिए अधिकारियों को पर्यावरण अनुकूल प्रस्ताव तैयार करने को कहा
नवीन समाचार, नैनीताल, 17 जून 2020। कुमाऊं मंडल के आयुक्त एवं जिला विकास प्राधिकरण के अध्यक्ष अरविंद सिंह ह्यांकी मुख्यालय में मुख्यालय में फांसी गधेरा एवं ठंडी सड़क क्षेत्र में पर्यावरण अनुकूल विकास की संभावनाएं तलाशी हैं, ताकि माल रोड की ओर होने वाली सैलानियों की भीड़भाड़ को झील के इस दूसरी ओर भी लाया जाए। इस हेतु उन्होंने फांसी गधेरा के पास नैनी झील से 30 मीटर की दूरी पर भूतल में पार्किंग, प्रथम तल पर गेस्ट हाउस व प्रथम तल की छत पर ओपन फूड कोर्ट निर्माण व प्राकृतिक सौंदर्यकरण की दिशा में कार्य किया जाएगा। इस संबंध में ने बुधवार को जिला स्तरीय विकास प्राधिकरण द्वारा किये जा रहे अवस्थापना विकास कार्यो एवं प्रस्तावित कार्यों के साथ ही एडीबी तथा स्वदेश दर्शन कार्यक्रम के अन्तर्गत संचालित कार्यों की प्राधिकरण कार्यालय में समीक्षा करते हुए निर्देश दिये। साथ ही आयुक्त ने सिंचाई विभाग के स्वामित्व वाले नैनी झील के नालों की सफाई नगर पालिका से कराने के लिए प्रस्ताव बनाने के निर्देश भी दिये हैं।
बैठक में श्री ह्यांकी ने फांसी गधेरा क्षेत्र के विकास को सामाजिक एवं पर्यावर्णीय दृष्टि से महत्वपूर्ण बताते हुए यहां तीन मंजिला ओपन फूड पार्क, पार्किंग व गेस्ट हाउस के निर्माण के लिए लोनिवि, नगर पालिका, जल संस्थान, केएमवीएन, जिला स्तरीय प्राधिकरण एक-एक अधिकारी को नियुक्त कर एक सप्ताह के भीतर संयुक्त जॉच रिपोर्ट उपलब्ध कराने के निर्देश दिए। वहीं प्राधिकरण के अधिशासी अभियंता को डीएसबी परिसर, राजभवन रोड की ओर भू-स्खलन प्रभावित क्षेत्र के सुदृढ़ीकरण के लिए प्रस्ताव तैयार करने को कहा। इसके साथ ही उन्होंने नैनी झील की धमनियॉ कहे जाने वाले नालों की नियमित साफ-सफाई नगर पालिका से कराने के लिए अधिशासी अभियंता सिंचाई विभाग को निर्देश दिए। उन्होंने माल रोड पर पर्यटकों की आवाजाही कम करने हेतु ठंडी सड़क पर पर्यटकों की आवाजाही बढ़ाने के लिए सड़क का सुरक्षा एवं पर्यावरणीय दृष्टिकोण से अध्ययन करते हुए पर्यावरण अनुकूल ढांचागत सुविधाओं की संभावनाए तलाशने के निर्देश भी दिए। उन्होंने नैनीताल में उपलब्ध निजी भूमि में छोटी-छोटी पार्किंग स्थल विकसित करने के लिए शासनादेशों एवं न्यायालय द्वारा जारी आदेशों का गहनता से अध्ययन करने के निर्देश भी प्राधिकरण के अधिकारियों को दिए। उन्होंने मस्जिद-हाईकोर्ट रोड पर पम्प हाउस क्षेत्र के कुछ हिस्से के साथ ही मेट्रोपोल के सामने नाले को पाटकर रोड चौड़ीकरण हेतु कार्यवाही करने तथा अंडा मार्केट के पास पार्किंग स्थल विकसित करने के सुझाव भी दिये।
बैठक में अवस्थापना विकास हेतु विभिन्न कार्यों के लिए 248 लाख रुपये की योजनाओं को सशर्त सैद्धांतिक स्वीकृति दी गयी। बैठक में प्राधिकरण के सचिव पंकज उपाध्याय, नगर पालिका के ईओ अशोक कुमार वर्मा, प्राधिकरण के उपाध्यक्ष एवं केएमवीएन के एवं प्रबंध निदेशक रोहित कुमार मीणा सहित डीएस कुटियाल, एचएस शुक्ला, दीपक गुप्ता, संतोष कुमार उपाध्याय व अरविंद गौड़ आदि अधिकारी भी उपस्थित रहेे।

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-काशीपुर का बस अड्डा होगा स्थानांतरित, जिला विकास प्राधिकरण की बैठक में मिली अनुमति
नवीन समाचार, नैनीताल, 05 जून 2020। जिला विकास प्राधिकरण गठन से पूर्व बनी ऐसी कॉलोनियों, जिनके विक्रय पत्र निष्पादित हो चुके हैं, उन कालोनियों में 5 प्रतिशत सब डिविजन चार्ज लेते हुए मानचित्रों की स्वीकृति प्रदान की जायेगी। यह निर्णय शुक्रवार को जिला स्तरीय विकास प्राधिकरण के अध्यक्ष एवं मंडलायुक्त एवं अध्यक्ष अरविंद ह्यांकी की अध्यक्षता में आयोजित हुई ऊधमसिंह नगर जिला विकास प्राधिकरण की बैठक में लिया गया। बैठक में श्री ह्यांकी ने नगर निगम परिसर काशीपुर की भूमि पर दो बेसमेंट पार्किंग एवं इसके ऊपर भूतल, प्रथम तल, द्वितीय तल तथा तृतीय तल पर व्यवसायिक निर्माण हेतु सैद्धान्तिक स्वीकृति देते हुए कंसलटेण्ट को विस्तृत प्रोजेक्ट सहित उपस्थित होने के निर्देश दिए।

उन्होंने जिला स्तरीय विकास प्राधिकरण के सचिव पंकज उपाध्याय को लेबर सेस लगाने हेतु न्यूनतल निर्माण लागत दस लाख रूपये से ज्यादा करने का उचित प्रस्ताव प्रस्तुत करने के निर्देश भी दिए। गौरतलब है कि दस लाख रूपये या इससे अधिक के निर्माण कार्यों पर 1 प्रतिशत लेबर सेस वसूल किया जाता है। बैठक में यह भी निर्णय लिया गया कि आवेदकों को लेबर सेस जमा करने में किसी भी प्रकार की परेशानी न हो इसलिए पूर्व की भॉति नक्शा पास करते समय लेबर सेस जिला स्तरीय विकास प्राधिकरण द्वारा ही वसूल किया जायेगा। बैठक में सचिव जिला स्तरीय विकास प्राधिकरण पंकज उपाध्याय ने पिछली बैठक में लिए गए निर्णय एवं उन पर की गई कार्यवाही, वित्तीय वर्ष 219-22 में प्राधिकरण के आय-व्यय का लेखा-जोखा भी प्रस्तुत किया। बैठक में केएमवीएन के एमडी एवं जिला विकास प्राधिकरण नैनीताल के उपाध्यक्ष रोहित कुमार मीणा, बंशीधर तिवारी, प्रकाश चन्द्र, जय भारत साह, सीएस मर्तोलिया, विनोद कुमार, प्रमोद तोलिया, सागर आर्य व पुष्कर बोरा आदि सदस्य मौजूद रहे।

इन्हें भी मिली स्वीकृति 

श्री ह्यांकी ने काशीपुर बस अड्डा प्राधिकरण को उपलब्ध कराये जाने तथा इसके बदले अन्यत्र बस अड्डे के निर्माण किये जाने हेतु सैद्धांतिक स्वीकृति देते हुए महत्वपूर्ण दिशा निर्देश सचिव जिला स्तरीय विकास प्राधिकरण को दिए। उन्होंने सुपरटेक लिमिटेड को आवास निर्माण से सम्बन्धित प्रस्ताव शासन को भेजने तथा प्राधिकरण में सृजित पदों के सापेक्ष प्रतिनियुक्ति एवं शासनादेश के अनुसार भरने के निर्देश भी दिए। बोर्ड द्वारा उपाध्यक्ष प्राधिकरण व सचिव प्राधिकरण के लिए एक-एक वाहन की व्यवस्था करने की भी अनुमति प्रदान की गयी। इसके साथ ही उत्तराखंड कृषि उत्पादन समिति की ग्राम भूरारानी में भूमि के भू-उपयोग परिवर्तन सुखविंदर सिंह मैनेजिंग डायरेक्टर मैसर्स गौरायास्ट्रा बोर्ड मिल्स प्राइवेट लिमिटेज बीपीसीएल रिटेल आउटलेट सहित विभिन्न बिन्दुओं पर विस्तार से चर्चा हुई। 

जनता के हित मे लिए गए अन्य  निर्णय :
  • गैर आवासीय मानचित्र के निस्तारण मे आ रही समस्या का किया गया निराकरण,
  • उपविभाजन शुल्क के निर्धारण की प्रक्रिया को जन उपयोगी एवं व्यावहारिक किया गया,  
  • जिला विकास प्राधिकरण ऊधम सिंह नगर एवं नैनीताल का वार्षिक बजट स्वीकृत किया गया. दोनों प्राधिकरण मे शासनादेश के अनुसार कार्मिको की व्यवस्था करने का निर्णय, दोनों प्राधिकरण मे शासनादेश के अनुसार उपाध्यक्ष एवं सचिव के उपयोग हेतु वाहन क्रय करने की सैद्धान्ति सहमति दी गयी
  • बोर्ड बैठक मे अध्यक्ष  द्वारा जनता की समस्याओं के निस्तारण को प्राथमिकता देने एवं मानचित्र स्वीकृति की प्रक्रिया को सरल करने के निर्देश दिए गए
  • विभिन्न विभागों से अनापत्ति प्राप्त करने के सम्बन्ध मे राज्य प्राधिकरण के निर्देशानुसार करवाई के निर्देश दिए गए। 

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नवीन समाचार, नैनीताल, 25 अक्तूबर 2019। जिला विकास प्राधिकरण की टीम ने शुक्रवार को नगर में अवैध अतिक्रमण के खिलाफ अभियान चलाया। इस दौरान चार भवनों को सील किया, तथा अवैध निर्माण के कुछ हिस्से ध्वस्त भी किये।

अभियान के तहत नगर के कालाढुंगी रोड स्थित धामपुर बैंड के करीब अल्समेर कम्पाउंड क्षेत्र में में महेश वाल्मीकि के भूतल में 300 वर्ग फिट क्षेत्रफल, दिनेश भट्ट के 350 वर्ग फिट व जयंती भट्ट के भूतल और प्रथम तल में 400 वर्ग फिट क्षेत्रफल में किए जा रहे निर्माणों को सील किया गया। इसके अलावा तल्लीताल में भूस्खलन की जद में आने जा रहे जोन-2 के क्षेत्र में टिन शेड के अंदर गैराज निर्माण के लिए छः कालम खड़े कर होते स्थाई निर्माण को पकड़ा गया।  टीम ने सभी पीलरों को ध्वस्त कर निर्माण को सील करने का दावा किया। अभियान में प्राधिकरण के परियोजना प्रबंधक सीएम साह, अवर अभियंता बलबीर सिंह, चंदन सिंह, हीरा बल्लभ जोशी, खुशाल सिंह व इरशाद हुसैन आदि शामिल रहे।

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नवीन समाचार, नैनीताल, 30 जुलाई 2019। नैनीताल जिला व मंडल मुख्यालय में टिन शेड अवैध निर्माण कर्ताओं के लिए बड़ी आढ़ बन गये हैं। इनकी आढ़ में नगर में अवैध निर्माणों की बाढ़ आ गयी है। नगर के कमोबेश हर क्षेत्र में लोग पहले अवैध रूप से टिन शेड बनाते हैं, और धीरे-धीरे टिन शेड की आढ़ में पक्का अवैध निर्माण कर डालते हैं। इस मामले में कमजोर तबके के लोग भी पीछे नहीं हैं जो पहले कहीं भी कच्ची-पक्की, सरकारी राजस्व, नगर पालिका की नजूल अथवा किसी के द्वारा पूर्व में कब्जाई हुई जमीनों को मामूली कीमत पर 10 रुपए के स्टांप पेपर पर लेकर उस पर पहले टिन शेड और बाद में धीरे-धीरे लिंटर वाला भवन खड़ा कर देते हैं। यह प्रवृत्ति उच्च-मध्यम वर्ग में भी दिखती है, जो अपने पूर्व के निर्माणों को टिनों से छुपाकर अपना निर्माण बढ़ाते जाते हैं। नगर के भूगर्भीय दृष्टिकोण से सर्वाधिक संवेदनशील सात नंबर, चार्टन लांज, रुकुट कंपाउंड, पिटरिया, सूखाताल, बंगाली कॉलोनी, राजपुरा व मंगावली क्षेत्रों में यह प्रवृत्ति कुछ अधिक ही नजर आ रही है। टिन शेडों की आढ़ में रातों-रात जल्दबाजी में निर्माण किये जाते हैं, जिस कारण इनकी गुणवत्ता भी बेहद खराब होती है, और इनमें आगे दुर्घटना की संभावना बनी रहती है। लेकिन इन अवैध निर्माणों में प्राधिकरण की भूमिका आंख मूंदने अथवा किसी को बेवजह परेशान करने वाली ही बताई जा रही है।

प्राधिकरण की नाक के नीचे बड़े होटलों, कॉलोनियों का निर्माण भी बेरोकटोक जारी

नैनीताल। नगर में ही पूर्व में झील विकास प्राधिकरण एवं वर्तमान में जिला विकास प्राधिकरण का मुख्यालय स्थित है। बावजूद नगर में अवैध निर्माणकर्ताओं के होंसले बुलंद हैं। नगर में कहने को सर्वोच्च न्यायालय के आदेशों पर हर तरह के व्यवसायिक निर्माणों पर रोक लगा चुका है, और सरकार इन आदेशों की आढ़ में पार्किंग जैसे जनोपयोगी निर्माण भी नहीं करा पा रही है, किंतु सूखाताल झील के जल भराव क्षेत्र से लेकर उच्च न्यायालय के करीब भी हाल के दौर में बडे़ होटलों के निर्माण किसी से छुपे नहीं हैं। उच्च न्यायालय व सर्वोच्च न्यायालय में नगर में निर्माणों पर रोक लगाने वाली जनहित याचिका दायर करने वाले डा. अजय रावत ने सोमवार को एक सार्वजनिक कार्यक्रम में सूखाताल में एक भवन व उच्च न्यायालय के पास फ्लैटों के निर्माण पर प्रश्न भी उठाए।

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नवीन समाचार, नैनीताल, 25 जुलाई 2019। उत्तराखंड उच्च न्यायालय की मुख्य न्यायधीश रमेश रंगनाथन व न्यायमूर्ति आलोक कुमार वर्मा की खंडपीठ ने नैनीताल के रामनगर में राष्ट्रीय राजमार्ग पर गुल्लरघट्टी में नगर पालिका की भूमि पर अवैध रूप से बन रहे होटल के निर्माण पर रोक लगा दी है। न्यायालय ने मामले में जिला विकास प्राधिकरण व अतिक्रमणकारी को नोटिस जारी कर जवाब पेश करने को कहा है। साथ ही कहा है कि अगर इसके बाद भी यहां कोई निर्माण कार्य होता है उसकी जिमेदारी जिला अधिकारी व नगर पालिका की होगी। साथ में एसएसपी को निर्देश दिए है कि अगर वहां पर पुलिस बल की जरूरत पड़ती है तो नगर पालिका को पुलिस बल उपलब्ध कराएं।
मामले के अनुसार रामनगर निवासी कुलदीप माहेश्वरी ने उत्तराखंड उच्च न्यायालय में जनहित याचिका दायर कर कहा है कि रामनगर के गुल्लरघट्टी नेशनल हाइवे के पास नगर पालिका की भूमि पर अवैध रूप से होटल का निर्माण कार्य किया जा रहा है नगर पालिका ने होटल मालिक को मार्च में नोटिस जारी किया था इसके बाद भी होटल की दूसरी मंजिल पर निर्माण किया गया। पूर्व में जिला विकास प्राधिकरण द्वारा होटल के प्रथम तल को सील कर दिया था। इसके बाद नगर पालिका द्वारा कोई कार्यवाही नही की। याचिकाकर्ता ने कई बार इसकी शिकायत भी की परन्तु उस पर कोई कार्यवाही नही हुई।

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नवीन समाचार, नैनीताल, 17 जुलाई 2019। उत्तराखंड में सभी कोटियों यानि कृषि, अकृषि और व्यावसायिक भूमि के भूमि के सर्किल रेट में एकरूपता लाने के लिए सरकार 25 से 30 फीसदी बढ़ोतरी करने जा रही है। इसके लिए स्टांप एवं रजिस्ट्रीकरण विभाग ने नई दरों का प्रस्ताव तैयार कर लिया है। पूरी संभावना है कि मंत्रिमंडल की आगामी बैठक में सरकार नए रेट पर मुहर लगा देगी। प्रदेश के जिन क्षेत्रों में तेजी से आवासीय व अन्य विकास कार्यों की गतिविधियां बढ़ रही हैं, वहां सर्वाधिक बढ़ोतरी होगी।
राजधानी देहरादून की बात करें तो यहाँ रायपुर स्थित स्टेडियम के आसपास में तेजी से आवासीय और व्यावसायिक गतिविधियां बढ़ रही हैं। वर्तमान में इस क्षेत्र में कृषि भूमि का सर्किल रेट 75 लाख प्रति हेक्टेयर है। इसे बढ़ा कर एक करोड़ तक किया जा सकता है। वहीँ बिहारीगढ़-बुग्गा वाला और भगवानपुर-बहादराबाद मार्ग के आसपास के क्षेत्रों में भी कृषि भूमि के सर्किल रेट बढ़ सकते हैं। अधिकारिक सूत्रों के मुताबिक प्रदेश में कई ऐसे क्षेत्र हैं, जहां कृषि, अकृषि और व्यावसायिक भूमि के सर्किल रेट में भारी अंतर है। ऐसे क्षेत्रों में सर्किल रेट में समानता लाने के लिए विभाग ने दरें बढ़ाने का प्रस्ताव तैयार किया है। आगामी कैबिनेट में सर्किल रेट बढ़ाने के प्रस्ताव पर मुहर लग सकती है। उल्लेखनीय है कि यदि कोई व्यक्ति जमीन खरीदता है तो उसे स्टांप शुल्क के रूप में जमीन की कीमत का पांच प्रतिशत देना होता है। साथ ही दो प्रतिशत या अधिकतम 25 हजार रुपये रजिस्ट्रेशन फीस अलग से देनी होती है। वर्ष 2018-19 में सरकार को स्टांप व रजिस्ट्री शुल्क से 1135 करोड़ की आय प्राप्त हुई है। सर्किल रेट बढ़ने से सरकार का राजस्व भी बढ़ेगा।

प्रमुख क्षेत्र जहां बढ़ेंगे सर्किल रेट

– देहरादून जिले के रायपुर क्षेत्र में भड़ासी ग्रांट, भोपालपानी, सोडा सरोली, मंजरी वाला, जगातखाना, मकरैली, रखौली में कृषि भूमि के सर्किल रेट बढ़ेंगे।
– हरर्बटपुर क्षेत्र में अकृषि भूमि के सर्किल रेट बढ़ेंगे।
– रुद्रपुर में गंगापुर-नगला रोड स्थित फुलसंगी में कृषि, किच्छा-महाराणा प्रताप रोड पर अकृषि भूमि के रेट बढ़ेंगे।
– हल्द्वानी में सहकारी बैंक से नवीन मंडी तक कृषि भूमि के सर्किल रेट में बढ़ोतरी की जाएगी।
– हरिद्वार और रुड़की के बीच सीमा पर और आसपास के कुछ क्षेत्रों में।
– टिहरी जनपद के चंबा-चोपड़ियाल सड़क में कृषि, गजा-राणाकोट सड़क पर अकृषि भूमि के रेट बढ़ेंगे।
– उत्तरकाशी में चिन्यालीसौड़, चमोली जिला में गडोरा, बाटला, रुद्रप्रयाग में मल्यासू मल्ला, तल्ला में भी सर्किल रेट बढ़ सकते हैं।
– अल्मोड़ा में सल्ट, भौंणखाल, मसरौंण, बागेश्वर में घटबगड़, मतरौला, सैंज, पिथौरागढ़ में डीडीघाट, कुमल्टा, टिकोट, मलान पिपली गांव।
– चंपावत, मल्ली, मंदाली, मांज गांव में कृषि, अकृषि व व्यावसायिक भूमि का सर्किल रेट बढ़ाए जा सकते हैं।

किसी भी क्षेत्र का देख सकेंगे सर्किल रेट

इसके लिए स्टांप एवं रजिस्ट्रेशन विभाग की वेबसाइट www.eregistration.uk.gov.in पर लॉग इन करना होगा। जिसके बाद सर्किट रेट ऑन जीआईएस पर क्लिक कर जिले का चयनकरना होगा। फिर तहसील के विकल्प का चयन कर संबंधित क्षेत्र व गांव के नाम पर क्लिक कर सर्किल रेट देखा जा सकेगा। इस वेबसाइट को राष्ट्रीय सूचना केंद्र (एनआईसी) ने तैयार किया है। जिसमें प्रदेश के सभी जिलों का जीआईसी मैपिंग के जरिये डाटा फीड किया गया है। अलग-अलग रंगों के सूचकांक से कोई भी व्यक्ति आसानी से प्रदेश के किसी भी क्षेत्र का सर्किल रेट आसानी से जान सकेगा।

यह भी पढ़ें : कुमाऊं के सभी जिला विकास प्राधिकरणों के लिए मंडलायुक्त ने दिए कई महत्वपूर्ण निर्देश…

-कुमाऊं के सभी जिला विकास प्राधिकरणों को एक सप्ताह का अल्टीमेटम
-मंडलायुक्त ने कार्यों पर जताया असंतोष, नक्शे स्वीकृत-अस्वीकृत करने की व्यवस्था को ऑनलाइन करने के भी दिये निर्देश
-एसडीएम होंगे अपने क्षेत्र में अनियोजित विकास के लिए उत्तरदायी
नवीन समाचार, नैनीताल, 8 मई 2019। कुमाऊं मंडल के आयुक्त राजीव रौतेला ने कहा कि जिला विकास प्राधिकरणों का मुख्य कार्य सुनियोजित विकास के लिए भवन निर्माण हेतु नक्शे पास करना तथा अनियोजित विकास को रोकना है। सभी प्राधिकरण गंभीरता अपना यह मूल कार्य करें। यह निर्देश आयुक्त ने जिला स्तरीय विकास प्राधिकरणोें की आयुक्त कार्यालय स्थित एनआईसी से वीसी के माध्यम से समीक्षा करते हुए दिए। उन्होंने जिला प्राधिकरणों की कार्य प्रणाली पर असंतोष व्यक्त करते हुए कहा कि कुमाऊं सभी छः बोर्ड, बैठकों में दिए गए दिशा-निर्देशों का एक सप्ताह के भीतर शत-प्रतिशत अनुपालन कराना तथा अनुपालन आख्या आयुक्त कार्यालय को 17 मई तक उपलब्ध कराना सुनिश्चित करें। साथ ही सभी विकास प्राधिकरणों को अपनी कार्य प्रणाली में सुधार लाते हुए लम्बित नक्शो को नियमानुसार एवं निश्चित समय सीमा के भीतर स्वीकृत एवं अस्वीकृत करें। नक्शों को अनावश्यक लम्बित न रखा जाए। यदि नक्शे को अस्वीकृत किया जा रहा है तो अस्वीकृति का स्पष्ट कारण भी जरूर लिखा जाए। साथ ही स्वीकृत-अस्वीकृत किए जा रहे नक्शों की जानकारी सम्बन्धित व्यक्तियों को तत्काल दी जाए। उन्होंने नक्शे पास कराने हेतु सभी प्राधिकरणों को ऑनलाईन सेवा को प्रभावी करने के निर्देश दिए। उन्होंने सभी अधिकारियों को विकास प्राधिकरण एक्ट का गहनता से अध्ययन कर एक्ट के अनुसार ही गतिविधियॉ संचलित करने तथा व्यक्तिगत हित त्यागकर जनहित में प्रभावशाली ढंग से कार्य करने के निर्देश भी दिए। प्राधिकरण के अभियंताओं एवं कर्मचारियों की दैनिक डायरी बनवाने तथा प्राधिकरण की भ्रमण पंजिका बनाने के निर्देश देते हुए कहा कि प्राधिरण के सचिव द्वारा नियमित रूप से कार्मिकों की दैनिक डायरी तथा भ्रमण पंजिका की जॉच करने एवं प्राधिकरण दिवस आयोजित करने तथा जिलाधिकारियों को प्राधिकरण दिवस में प्रतिभाग करने को भी कहा। उन्होंने अनियोजित विकास पर जवाबदेही सुनिश्चित करते हुए कहा कि अपने क्षेत्र के लिए उप जिलाधिकारी उत्तरदायी होंगे। उन्होंने अवैध निर्माण रोकने के लिए पटवारी, लेखपालों, कानूनगो को अपने क्षेत्रों में होने वाले अवैध निर्माण की तत्काल उप जिलाधिकारियों को उपलब्ध कराने तथा अवैध निर्माण को तत्काल रोकने की कार्यवाही करने के निर्देश दिए। उन्होंने निर्देशित करते हुए कहा कि अवैध तरीके से एकल आवास का निर्माण को रोकते हुए प्राधिकरण निर्माण करने वाले भवन स्वामी को सुविधाएं प्रदान करते हुए उसका नक्शा पास कराने में पूरी मदद करे। उन्होंने निर्देशित करते हुए कहा कि भविष्य में अवैध निर्माण की सूचना प्राप्त होने पर सम्बन्धित क्षेत्र के उप जिलाधिकारी को अवैध निर्माण की सूचना देने के साथ ही नोटिस भी जारी किया जाएगा तथा उनके खिलाफ नियमानुसार कार्यवाही अमल में लाई जाएगी। श्री रौतेला ने भवन निर्माण सामग्री बैचने वाले व्यक्तियों को नोटिस जारी करते हुए नक्शा पास न कराने वाले व्यक्तियों को सामान न बैचने तथा भवन निर्माण सामग्री बैचने वाले दुकानदारों के रजिस्टर चैक करने के साथ ही बिना नक्शा पास कराने वाले भवन स्वामी को सामान बैचने पर उनके खिलाफ कार्यवाही करने के निर्देश दिए। श्री रौतेला ने निर्देशित करते हुए कहा कि किसी भी सरकारी विभाग को अधिकार नहीं है कि बिना नक्शा पास कराए भवन एवं बिल्डिंग बनाए। उन्होंने विभिन्न विभागों द्वारा बिना नक्शा पास कराए बनाए जा रहे भवन निर्माण कार्य को भी रोकने के निर्देश दिए। उन्होंने प्राधिकरण के सचिव/अपर जिलाधिकारियों को कम्पाउंडिंग के कैसों की प्राथमिकता से सुनवाई करते हुए निस्तारित करने के निर्देश दिए। उन्होंने सभी विकास प्राधिकरणों को हिदायत देते हुए कहा कि प्राधिकरण जनता को सुविधाएं उपलब्ध कराना सुनिश्चित करें, प्राधिकरण गठन का उद्देश्य जतना को परेशान करना नहीं है बल्कि जनता को सुनियोजित विकास के माध्यम से सुविधाए प्रदान करना तथा अनियोजित विकास पर अंकुश लगाना है। वीसी में अपर आयुक्त संजय खेतवाल, सचिव जिला विकास अधिकारण हरबीर सिंह, के अलावा अन्य अधिकारी मौजूद रहे।

मंडल के छह जिलों में से हल्द्वानी में सर्वाधिक नक्शे लंबित

नैनीताल। समीक्षा के दौरान एसोसिएट टाउन प्लानर शशि मोहन श्रीवास्तव ने बताया कि जिला विकास प्राधिकरण अल्मोड़ा में 66 नक्शे, उधम सिंह नगर में 407, बागेश्वर में 60, चम्पावत में 37, पिथौरागढ़ में 8 तथा नैनीताल में 267 नक्शे जिसमें से 225 नक्शे हल्द्वानी के शामिल हैं लम्बित हैं।

यह भी पढ़ें : सरोवरनगरी में अवैध निर्माण कर्ताओं के लिए ‘आदर्श स्थिति’ बनी चुनाव आचार संहिता

नवीन समाचार, नैनीताल, 7 अप्रैल 2019। सरोवरनगरी में लोक सभा चुनाव की आदर्श आचार संहिता अवैध निर्माण कर्ताओं के लिए मानो आदर्श बन गयी है। प्रशासनिक मशीनरी के चुनाव प्रक्रिया में व्यस्तता में अवैध निर्माणकर्ताओं की मानो ‘पौ-बारह’ है। नगर के इन दिनों अवैध निर्माणों की बाढ़ आई हुई है। नगर में कमोबेश हर क्षेत्र में अवैध निर्माणों जोरों पर चल रहे हैं। मजदूर और निर्माण सामग्री ढोने वाले वाहन ढूंढ़े नहीं मिल रहे हैं। पूर्व में ऐसे कार्य रात में हुआ करते थे, अब दिन में भी खुलेआम ऐसे निर्माण हो रहे हैं। नगर में हर ओर निर्माण सामग्री ढोते वाहन और नेपाली मजदूर देखे जा रहे हैं, परंतु संभवतया जिला विकास प्राधिकरण कर्मचारियों को वे नजर नहीं आ पा रहे हैं। वहीं प्राधिकरण कर्मी भी अपनी ओर से कार्रवाई करने की बात तो कर रहे हैं, परंतु उनकी कार्रवाई का असर कहीं होता नजर नहीं आ रहा है। उन्होंने इस बीच कुछ मामले पकड़े भी हैं, इससे पुष्टि होती है कि नगर में अवैध निर्माण हो रहे हैं, परंतु अवैध निर्माण जितने बड़े स्तर पर हो रहे हैं और उनके खिलाफ जो प्राधिकरण की कार्रवाइयां हो रही हैं उन्हें नगण्य ही कहा जाएगा।

यह भी पढ़ें : झीलों के दो किमी के दायरे में निर्माण व पेड़ों के कटान संबंधी आदेश पर हाईकोर्ट से राहत नहीं

नवीन समाचार, नैनीताल, 8 मार्च 2019। उत्तराखंड हाई कोर्ट ने झीलों के किनारे से दो किलोमीटर के दायरे में किसी भी प्रकार का निर्माण कार्य व पेड़ो के कटान पर रोक सम्बन्धी पूर्व के आदेश में संशोधन करने से सम्बंधित विभिन्न प्रार्थना पत्रो पर सुनवाई करते हुए उन्हें निरस्त कर दिया है।
इस मामले में याचिकाकर्ता के अधिवक्ता द्वारा कोर्ट को अवगत कराया गया था कि इससे संबंधित एसएलपी सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन है, इसलिए यह प्रार्थना पत्र निरस्त करने योग्य हैं। मामले की सुनवाई मुख्य न्यायधीश रमेश रंगनाथन व न्यायमूर्ति आलोक सिंह की खंडपीठ में हुई।
उल्लेखनीय है कि पूर्व में सोशल आर्गेनाइजेशन यूनिटी एंड नेचर डेवलपमेंटश् के सेक्रेटरी तारा सिंह राजपूत ने हाईकोर्ट में मुख्य न्यायाधीश को लिखित पत्र भेजकर कहा था कि भीमताल, खुटानी पदमपुरी, विनायक आदि स्थानों पर बड़ी संख्या में पेड़ों का अवैध कटान करके उस स्थान पर भवन निर्माण किया जा रहा है। जिसको रोकने के लिए वन विभाग और प्रशासन द्वारा कोई कार्यवाही नहीं की जा रही है। कहा गया है कि पहाड़ो व वनों की जैव विविधताओं को नुकसान हो रहा है। मामले का संज्ञान लेते हुए पूर्व की खंडपीठ ने झीलो के दो किलोमीटर के दायरे में निर्माण के साथ ही कोर्ट ने पांच किलोमीटर के दायरे पर पेड़ों के कटान भी पर रोक लगा दी थी।

यह भी पढ़ें : ठंड का फायदा उठा कर किया जा रहा था अवैध निर्माण कर प्राधिकरण की आंखों में धूल झोंकने का प्रयास, ऐसे हुआ विफल…

बुधवार को पिटरिया क्षेत्र में सील किया गया अवैध निर्माण।

नवीन समाचार, नैनीताल, 23 जनवरी 2019। नगर के अवैध निर्माणकर्ता हर ऐसे समय की फिराक में रहते हैं जब प्राधिकरण के कर्मियों की आंखों में धूल झोंकी जा सके, और बाद में अवैध निर्माण करने के बाद कहा जाये कि यह निर्माण तो बरसों पुराना है। जब अवैध निर्माण हुआ, तब क्यों प्राधिकरण आंखें मूंदें सोया था। ऐसा ही कुछ बुधवार को कड़ाके की ठंड के दिन, जबकि पूरे दिन नगर में बारिश होती रही और कोहरा छाया रहा, अवैध निर्माणकर्ता खासे सक्रिय रहे। किंतु जिला विकास प्राधिकरण की सक्रियता भी काबिले तारीफ रही।
पहली घटना राजकीय पॉलीटेक्निक के पास पिटरिया क्षेत्र की है, जहां में नगर में हो रही बारिश-बर्फबारी के बीच हो रही कड़ाके की ठंड का फायदा उठा कर अवैध निर्माण में तीसरी छत डालने का प्रयास किया जा रहा था। जिला विकास प्राधिकरण के अधिकारियेां को इसकी सूचना मिली तो ठंड की परवाह किये बिना टीम मौके पर धमक आई और अवैध निर्माण को सील कर लिया। प्राधिकरण के प्रोजेक्ट इंजीनियर चंद्रमौलि साह ने बताया कि यहां बुधवार को ठंड के बीच मनोज बिष्ट नाम के व्यक्ति द्वारा दूसरे तल की छत डालने का प्रयास चल रहा था। इस अवैध निर्माण का पहले भी चालान किया गया था, जबकि आज निर्माण रुकवाकर इसे सील कर दिया गया। प्राधिकरण की टीम में अधिशासी अभियंता विजय माथुर, अवर अभियंता दलबीर सिंह व सुपरवाइजर हीराबल्लभ व इरशाद अहमद आदि भी शामिल रहे। इसी तरह मंगावली में नारायण सिंह सांगा और सैनिक स्कूल मल्लीताल के पास विद्या उप्रेती द्वारा किये जा रहे अवैध निर्माणों को भी जिला विकास प्राधिकरण के दल ने अपराह्न में सील कर दिया।

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  • एक ही भवन में दुकान और मकान संचालित करना वैध हो जाएगा
  • अवैध भवनों के नियमितीकरण के लिए एकमुश्त समाधान योजना लाकर उन्हें वैध बनाने का मौका देगी सरकार
  • व्यावसायिक श्रेणी में मल्टीप्लेक्स, मॉल, स्कूल, नर्सिंग होम और अस्पताल के निर्माण में कई तरह की छूट भी मिलेंगी 
नवीन समाचार, देहरादून, 25 दिसंबर 2018। नए वर्ष में उत्तराखंड में आवासीय और व्यावसायिक भवन निर्माण की राह आसान होने जा रही है। इसके लिए आवास विभाग छह नीतियों में बड़े बदलाव करने जा रहा है। इन्हें मंत्रिमंडल की अगली बैठक में मंजूरी के लिए लाया जाएगा। नीतियां पास होने के बाद व्यावसायिक और आवासीय के साथ ही एक नई ‘मिश्रित भवन’ की श्रेणी के तहत भी नक्शे पास होंगे। इस श्रेणी के अस्तित्व में आने से जनता को बड़ी राहत मिलेगी। इससे एक ही भवन में दुकान और मकान संचालित करना वैध हो जाएगा। मतलब यह कि आवासीय परिसरों में व्यावसायिक कामकाज करने की राह खुल जाएगी। साथ ही सरकार नीतियों में बदलाव करके अवैध भवनों के नियमितीकरण के लिए एकमुश्त समाधान योजना (वन टाइम सेटलमेंट स्कीम) लाकर उन्हें वैध बनाने का मौका देगी। इसके अलावा व्यावसायिक श्रेणी में मल्टीप्लेक्स, मॉल, स्कूल, नर्सिंग होम और अस्पताल के निर्माण में कई तरह की छूट भी दी जाएगी। नीतिगत बदलावों से पर्वतीय क्षेत्रों में व्यावसायिक निर्माण के लिए बड़े भूमि क्षेत्रफल की अनिवार्यता खत्म होगी।
बताया गया है कि सरकार की उत्तर प्रदेश के समय के नियमों में बदलाव करने की भी तैयारी है। दरअसल, यूपी के समय के इन नियमों में सिनेमा हॉल, मॉल, अस्पताल, नर्सिंग होम आदि के नक्शे पास करने के लिए भूमि का बड़ा क्षेत्रफल अनिवार्य है। नई नीति में घटती भूमि को ध्यान में रख कर कम जगह पर भी ऐेसे व्यावसायिक निर्माण हो सकेंगे। व्यावसायिक भवनों और कॉलोनियों के निर्माण में चौड़ी सड़कों की बाध्यता को तर्कसंगत बनाया जा रहा है।
लंबे समय से मंदी के दौर में चल रहे रियल एस्टेट में छह नीतियों में होने वाले संशोधनों से बड़ा उछाल आएगा। व्यवसायिक परिसर निर्माण के लिए पर्वतीय क्षेत्रों में दी जाने वाली छूट से वहां भी निर्माण आसान होगा। वहीं प्रदेश में छोटे मॉल और मल्टीप्लेक्स सिनेमाघरों के निर्माण में भी तेजी आएगी। सरकार अवैध निर्मित परिसरों को वैध बनाने के लिए एक मुश्त समाधान योजना ला रही है। इससे शहरी क्षेत्रों में अवैध भवन मालिकों से होने वाली वसूली रुकेगी। इस योजना के तहत भवन मालिक कभी भी आवेदन कर कंपाउंडिंग करवा सकेंगे।

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  • राष्ट्रीय व राज्य मार्गों के केवल 200 मीटर के दायरे ही आयेंगे प्राधिकरण के दायरे में
  • 200 मीटर के अंतर्गत भी एकल आवासीय भवन बनाने के लिए नक्शा स्वीकृत कराने की जरूरत नहीं होगी
  • सरकार की घोषणा के अनुरूप विकास शुल्क में 70 फीसद तक की कटौती होगी
जिला प्राधिकरण बोर्डों की बैठक की जानकारी देते मंडलायुक्त राजीव रौतेला।

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p style=”text-align: justify;”>नैनीताल, 7 अगस्त 2018। कुमाऊं मंडल के पर्वतीय क्षेत्रों में अपने लिये नये एकल आवासीय घर बनाने के इच्छुक लोगों के लिए बड़ी खुशखबरी है। अब वे पूर्व में तय 5 फीसद की जगह अब 200 वर्ग मीटर तक केवल 1 प्रतिशत तथा 200 वर्ग मीटर से अधिक के भूखण्डों पर 2 प्रतिशत सबडिवीजन शुल्क देकर बेखौफ होकर घर बना सकेंगे। वहीं जिला विकास प्राधिकरणों का दायरा राष्ट्रीय व राज्य मार्गों के केवल 200 मीटर के दायर में सीमित होगा। इसके बाहर के क्षेत्र में निर्माण पूर्व की तरह हो सकेंगे। 200 मीटर के अंतर्गत क्षेत्र में भी एकल आवासीय भवन बनाने के लिए नक्शा स्वीकृत कराने की जरूरत नहीं होगी। केवल भवन निर्माणकर्ता को प्राधिकरण से अधिकृत आर्किटेक्टों से भूकंपरोधी नक्शे बनाने होंगे एवं उन्हें अधिकृत आर्किटेक्टों से भूकंपरोधी होने का प्रमाणपत्र प्राधिकरण में जमा कराना होगा। इसके अलावा सरकार की घोषणा के अनुरूप विकास शुल्क में 70 फीसद तक की कटौती करने का निर्णय भी प्राधिकरण बोर्ड ने ले लिया है। सभी जिलों में प्राधिकरण संबंधी समस्याओं-शिकायतों के निस्तारण के लिए माह में एक दिन ‘प्राधिकरण दिवस’ आयोजित होंगे, जिसमें टाउन प्लानर एवं अन्य अधिकारी पहुंचकर समस्याओं का समाधान करेंगे। अधिकारियों को नक्शे निर्धारित समय सीमा में पास करने होंगे।
मंगलवार को जिला विकास प्राधिकरण सभागार में नैनीताल अल्मोड़ा एवं ऊधमसिंह नगर जिलों के प्राधिकरणों की प्राधिकरण बोर्डों की अध्यक्ष कुमाऊं मंडलायुक्त राजीव रौतेला की अध्यक्षता में हुई दूसरी बैठक में यह निर्णय लिये गये। निर्णयों की जानकारी देते हुए आयुक्त श्री रौतेला ने बताया कि पहले पर्वतीय क्षेत्र के नगरों के लिए शुल्क 2 एवं ग्रामीण क्षेत्रों के लिए 5 फीसद था, जिसे 1 फीसद कर दिया गया है, ताकि लोग स्वेच्छा से संबंधित प्राधिकरणों में आयें। सिटीजन चार्टर के अनुसार प्राधिकरण द्वारा आवासीय भवन का मानचित्र आवेदन प्राप्त होने के 15 दिन के भीतर तथा व्यवसायिक भूखण्डों के मानचित्र 30 दिनों के भीतर स्वीकृत कर दिये जायेंगे। आयुक्त ने कहा कि प्राधिकरणों का उद्देश्य प्राप्त शुल्क से संबंधित क्षेत्रों में मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराना है, न कि लोगों को परेशान करना। प्राधिकरणों के कार्यों को सुचारू तरीके से चलाने के लिए शासन के प्राविधानों के अनुसार शासन से आउटसोर्सिंग के जरिये नियुक्तियां करने के लिए आवेदन करने का निर्णय भी लिया गया। आगे बुधवार को पिथौरागढ़, बागेश्वर एवं चंपावत जिलों के प्राधिकरण बोर्डों की बैठक होगी, और उनमें भी यही निर्णय होने की संभावना जतायी जा रही है। इस मौके पर नैनीताल डीएम विनोद कुमार सुमन, एडीएम हरबीर सिंह, आरडी पालीवाल, उप निदेशक सूचना योगेश मिश्रा सहित अन्य अधिकारी मौजूद रहे।

नैनीताल आने वाले तीनों मार्गों पर निर्माण पूरी तरह से प्रतिबंधित

नैनीताल। कुमाऊं मंडलायुक्त राजीव रौतेला ने बताया कि पर्यटन नगरी नैनीताल को काठगोदाम, कालाढुंगी व भवाली से आने वाले तीनों मार्गों पर हर तरह के निर्माणों को प्रतिबंधित कर दिया गया है। साथ ही पूर्व में हुए निर्माणों की जांच करने तथा नियमविरुद्ध बने आवासों के खिलाफ कार्रवाई करने आदेश भी दे दिये गये हैं। केवल किसी क्षेत्र को बहुत बेहतर तरीके से विकसित करने वाले प्रस्तावों पर ही आगे विचार किया जा सकेगा। बताया कि काठगोदाम-नैनीताल मार्ग पर वर्ष 2019 के उत्तरार्ध से टू-लेन किये जाने के कार्य शुरू होने जा रहे हैं। इसलिए हर तरह के निर्माण सड़क चौड़ीकरण में बाधक बन सकते हैं।

एकमुस्त पांच वर्ष के लिए मिलेगी जिला विकास प्राधिकरणों से भवन निर्माण की स्वीकृति

नैनीताल, 7 मार्च, 2018। जिला विकास प्राधिकरणों के द्वारा भवन निर्माण हेतु मानचित्रों की स्वीकृति पांच वर्ष के लिये एक साथ ही दे दी जायेगी, परन्तु भवन निर्माण प्राधिकरण नियमावली व मानकों के अनुसार ही बनाये जायेंगे। जिला प्राधिकरणों के तहत सभी क्षेत्रीय कार्यालय की स्थापना यथाशीघ्र की जाएगी। वहीं नैनीताल जिला प्राधिकरण के संयुक्त सचिव हल्द्वानी क्षेत्रीय कार्यालय के साथ ही सप्ताह में एक दिन क्षेत्रीय कार्यालय रामनगर में भी बैठेंगे। नैनीताल नगर क्षेत्र में व्यवसायिक भवनों के निर्माण पूर्णतया प्रतिबंधित होने के मद्देजर गृह-आवास यानी होम स्टे आदि के अनुमन्यता प्रकरण शासन को संदर्भित किये जाएंगे।

बुधवार को जिला विकास प्राधिकरण बोर्ड की द्वितीय बैठक लेते हुये मंडलायुक्त एवं प्राधिकरणों के अध्यक्ष प्राधिकरण चन्द्र शेखर भट्ट ने गत बैठक मे लिये गये निर्णयों की समीक्षा करते हुये प्राधिकरण के नियमों एवं मानकों के अनुसार कार्य करने के निर्देश अधिकारियों को दिये। बोर्ड बैठक में निर्णय लिया गया कि सभी क्षेत्रीय कार्यालय की स्थापना कर कार्य प्रारम्भ किया जाय। क्षेत्रीय कार्यालय हल्द्वानी हेतु भूमि तलाशने के साथ ही बोर्ड के समक्ष प्रस्ताव प्रस्तुत करने को कहा। तहसील रामनगर के ग्राम शिवलालपुर पान्डे में प्रस्तावित जलपान गृह निर्माण, नैनीताल नगर पालिका क्षेत्र में गृह आवास, होम स्टे की अनुमन्यता के संबंध में भी चर्चा की गयी। बैठक में प्राधिकरण उपाध्यक्ष डीएम दीपेन्द्र कुमार चौधरी, सचिव श्रीश कुमार, सदस्य एसके पंत, मुख्य नगर एवं ग्राम नियोजक एसके पंत, कोषाधिकारी मामूर जहां, सहायक नगर आयुक्त विजेन्द्र सिंह चौहान, धीरेन्द्र रावत, राजेन्द्र कुमार अग्रवाल, टाउन प्लानर एसएम श्रीवास्तव, अभियंता सीएम साह आदि मौजूद रहे।

पूर्व आलेख : कुमाऊं के सभी परगनों में खुलेंगे जिला विकास प्राधिकरण के कार्यालय

    • 350 वर्ग मीटर के प्लॉटों पर निर्माण की स्वीकृति प्राधिकरण सचिव एवं इससे ऊपर डीएम देंगे
    • राष्ट्रीय एवं राज्य मार्गों के मध्य से 200 मीटर की परिधि के राजस्व गांवों में 200 वर्ग मीटर के आवासीय भवन एवं 30 वर्ग मीटर की स्वयं की व्यवसायिक दुकानों को मानचित्र स्वीकृत कराने से मिली छूट
  • नैनीताल शहर के जोन-1 व 2 के साथ ग्रीन बेल्ट क्षेत्र में निर्माण पूर्व की तरह प्रतिबंधित

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p style=”text-align: justify;”>नैनीताल। जनता को सही समय पर प्राधिकरण के नियमों आदि की जानकारियां प्राप्त हों व अनावश्यक परेशानियों का सामना ना करना पड़े इसके लिये कुमाऊं मंडल के सभी परगनों में संबंधित जिले के जिला विकास प्राधिकरणों के क्षेत्रीय कार्यालय खोले जाएंगे। बुधवार को कुमाऊं मंडल के जिला प्राधिकरणों के अध्यक्ष, कुमाऊं आयुक्त चंद्रशेखर भट्ट की अध्यक्षता में हुई बोर्ड बैठक में इसकी स्वीकृति दे दी गयी। साथ ही बोर्ड बैठक में निर्माण कार्यों को नियमों के तहत स्वीकृति देते हुये व्यवसायिक भवनों में वर्षा जल संग्रहण के प्रबंध करने और उन्हें भूकम्परोधी बनाने का प्राविधान रखा गया। अवस्थापना, पद सृजन एवं सम्बद्धता तथा वित्तीय अधिकारों के साथ ही जिला प्राधिकरण के त्रैमासिक बजट को भी स्वीकृति दी गयी।
इसके अलावा प्राधिकरण बनने से पूर्व बने ग्रुप हाउसिंग व बहुमंजिला भवनों, वाणिज्यिक भवनों के निरीक्षण हेतु सचिव की अध्यक्षता में कमेटी कठित की गयी, जो अपनी निरीक्षण रिपोर्ट एक माह में प्राधिकरण के उपाध्यक्षा यानी डीएम को देंगे। बैठक में निर्णय लिया गया कि 350 वर्गमीटर प्लाट तक की स्वीकृति सचिव व संयुक्त स्तर पर दी जायेगी तथा इससे ऊपर के प्लाटों की स्वीकृति उपाध्यक्ष यानी डीएम के स्तर पर दी जायेगी। जनपद के सभी राष्ट्रीय राज्यमार्गों एवं राज्य मार्गों के मध्य से 200 मीटर की परिधि में आने वाले राजस्व गांवों में 200 वर्ग मीटर आकार तक के आवासीय एवं 30 वर्ग मीटर तक की स्वयं की व्यवसायिक दुकानों के निर्माण में मानचित्र स्वीकृत कराने की छूट बैठक में दी गयी। ऑनलाइन सिस्टम से भी प्राधिकरण एवं मानचित्र की स्वीकृति की जानकारियां दी जायेंगी। प्राधिकरणों के द्वारा समय-समय पर अपने विकास क्षेत्र के अन्तर्गत आने वाले शहरों एवं गांवों में अवस्थापना विकास कार्य तथा आवासीय सुविधाएं उपलब्ध कराने की योजनाएं भी चलाई जाएंगी। वहीं प्राधिकरण की बिना अनुमति प्राप्त किये अवैध निर्माण किये जाने पर निर्माण को यथावत रोकने हेतु सील बंद करने के प्राविधानों को भी मंजूरी दी गयी। बैठक में प्राधिकरण के उपाध्यक्ष, नैनीताल डीएम दीपेन्द्र कुमार चौधरी ने नैनीताल शहर में जनता की सुरक्षा को देखते हुये शहर के पुराने जीर्णक्षीर्ण भवनों की मरम्मत की स्वीकृति का प्रस्ताव रखा जिस बोर्ड द्वारा शासन को भेजा गया। आयुक्त ने कहा कि नैनीताल शहर के चिन्हित जोन-1 व 2 के साथ ही ग्रीन बेल्ट क्षेत्र में निर्माण कार्य पूर्णतः प्रतिबंधित रहेंगे। बैठक में ऊधमसिंह नगर के डीएम डा. नीरज खैरवाल, आवास विकास परिषद के संयुक्त सचिव राजेंद्र सिंह, उत्तराखण्ड पेयजल निगम के मुख्य अभियंता राजेन्द्र प्रसाद, मुख्य ग्राम व नगर नियोजक एसके पंत, सचिव श्रीश कुमार, प्रताप साह, वित्त सचिव अनीता आर्य, एसडीएम प्रमोद कुमार, पारितोष वर्मा, एपी वाजपेयी, विजेद्र चौहान, केके गुप्ता, सीएम साह, जेपी डबराल सहित अनेक अधिकारी मौजूद रहे।

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राष्ट्रीय सहारा, 16 नवम्बर 2017
राष्ट्रीय सहारा, 16 नवम्बर 2017

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p style=”text-align: justify;”>-1984 में यूपी के तत्कालीन मुख्यमंत्री एनडी तिवारी की पहल पर वृहत्तर नैनीताल विकास प्राधिकरण से हुई थी शुरुआत, 1989 में तिवारी ने ही दिया एनएलआएसएडीए का स्वरूप
नवीन जोशी, नैनीताल। 1984 में पूर्ववर्ती उत्तर प्रदेश के तत्कालीन मुख्यमंत्री पं. नारायण दत्त तिवाड़ी की पहल पर ‘वृहत्तर नैनीताल विकास प्राधिकरण’ (जीएनडीए) के प्रारंभिक स्वरूप में स्थापित हुए और 1989 में तिवाड़ी द्वारा ही एक तरह से प्रोन्नत कर ‘नैनीताल झील परिक्षेत्र विशेष क्षेत्र विकास प्राधिकरण (एनएलआएसएडीए) अपना वजूद खोकर एक बार पुनः ‘नैनीताल जिला विकास प्राधिकरण’ के रूप में प्रोन्नत होने जा रहा है। इस पर नगर वासियों की आम प्रतिक्रिया यह है कि अपने मौजूदा स्वरूप में काम से अधिक नाकामियों के लिए पहचाना जाने वाला यह प्राधिकरण अपने प्रोन्नत स्वरूप में जनपद का कितना भला कर पाएगा।

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नैनीताल। कैबिनेट निर्णय के अनुपालन में 12 जिला विकास प्राधिकरणों के गठन के आदेश जारी हो गए हैं। नैनीताल झील विकास प्राधिकरण के गठन से जुड़ी अधिसूचना को खारिज कर दिया गया है। इसके बाद, झील विकास प्राधिकरण का वजूद खत्म हो गया है। इसकी जगह नैनीताल जिला विकास प्राधिकरण अब काम करेगा। शासन ने देहरादून के मामले में अभी कोई फैसला नहीं किया है। माना जा रहा है कि यहां पर एमडीडीए और साडा के विलय के बाद इस संबंध में आदेश जारी हो पाएंगे। जिला विकास प्राधिकरणों के गठन के संबंध में सरकार पूर्व में उलझी रही। पहले सिर्फ चार मैदानी जिलों में जिला विकास प्राधिकरण गठन का कैबिनेट निर्णय हुआ। बाद में पर्वतीय जिलों में भी जिला विकास प्राधिकरण के गठन को मंजूरी दे दी गई। तय किया गया कि राष्ट्रीय और राज्य मार्ग से दो सौ मीटर के अंतर्गत इलाके विकास प्राधिकरण का हिस्सा होंगे। कैबिनेट के निर्णय के अनुपालन में मंगलवार को आवास विभाग ने 12 जिलों से संबंधित 12 शासनादेश जारी कर दिए। आयुक्त को प्राधिकरण में पदेन अध्यक्ष और एडीएम को सचिव बनाया गया है। हरिद्वार को छोड़कर बाकी सभी जगहों में डीएम प्राधिकरण के उपाध्यक्ष होंगे। हरिद्वार में किसी भी आईएएस अफसर को उपाध्यक्ष बनाए जाने की व्यवस्था दी गई है।

जिले भर में विकास और निर्माण गतिविधियों को योजनाबद्ध करने के उद्देश्य से सरकार ने यह निर्णय लिया है। अब प्राधिकरण के दायरे में केवल पर्वतीय क्षेत्र ही नहीं बल्कि हल्द्वानी, कालाढूंगी, रामनगर सहित पूरे जिले का मैदानी क्षेत्र और अब तक छूटा हुआ पर्वतीय क्षेत्र भी इसमें शामिल कर दिया गया है। – श्रीष कुमार, नैनीताल झील प्राधिकरण

इस प्राधिकरण को यूं अपनी स्थापना से ही लगातार प्रोन्नतियां, कार्य विस्तार मिलता रहा है। 29 अक्टूबर 1984 को उत्तर प्रदेश के नगर नियोजन एवं विकास अधिनियम 1973 के तहत अस्तित्व में आया ‘वृहत्तर नैनीताल विकास प्राधिकरण’ केवल नैनीताल की झीलों के परिक्षेत्र में विकास को नियोजित करने के उद्देश्य से अस्तित्व में आया था। लेकिन पांच वर्ष के भीतर ही इसके खिलाफ आवाजें उठनी शुरू हो गयीं। अनेक स्थानीय लोग इसके विरुद्ध सीएम तिवाड़ी के पास लखनऊ मिलने गए। लोगों की मंशा थी कि यह प्राधिकरण नैनीताल नगर की जनसंख्या को बाहरी क्षेत्रों में नियोजित तरीके से विस्तारित करे। नैनीताल नगर में ही निर्माण न बढ़ें। जिसके फलस्वरूप 21 अक्टूबर 1989 को इसके निर्माण की अधिसूचना को निरस्त कर इसी दिन इसे विशेष क्षेत्र विकास प्राधिकरण अधिनियम 1986 के तहत ‘नैनीताल झील परिक्षेत्र विशेष क्षेत्र विकास प्राधिकरण (एनएलआएसएडीए) का स्वरूप प्रदान कर दिया गया। अब इसके अंतर्गत जनपद की भीमताल, सातताल, नौकुचियाताल व खुर्पाताल झीलें और इन्हें आपस में जोड़ने वाली सड़कों के दोनों ओर से 220 गज का क्षेत्र भी आ गया, अलबत्ता इस क्षेत्र में आने वाले गांवों को अलग रखा गया। 1994 में पुनः संशोधन कर 220 गज की जगह 220 मीटर के भीतर आने वाले गांवों को भी इसके अधीन कर दिया गया। वहीं 1999 में जनपद के रामगढ़ व मुक्तेश्वर क्षेत्र भी इसके अधीन कर दिए गए। किंतु इतनी शक्तियां मिलने के बावजूद प्राधिकरण न तो इन क्षेत्रों में किसी तरह का नियोजित विकास ही करवा पाया, न अपनी ओर से लोगों को कोई बेहतर आवासीय सुविधा ही दे पाया, और इस तरह लगातार शक्तिहीन भी होता चला गया। मौजूदा स्थिति यह है कि नैनीताल नगर में नियोजित विकास के लिए नाम भर को 1995 में बनी महायोजना छह वर्ष पूर्व 2011 में कालातीत हो चुकी है, और तब से नयी महायोजना नहीं बन पायी है। प्राधिकरण की नगर में आम छवि रही कि नगर के लोग अपने परिवारों के बढ़ने के साथ एक-दो कमरे भी नहीं बना सकते, किंतु बिल्डर महायोजना के अंतर्गत ‘ग्रीन बेल्ट’ यानी हरित क्षेत्रों में भी दशकों से निर्माण जारी रखे यहे। यह भी कहा जाता है कि प्राधिकरण के आने के बाद ही नगर में बिल्डरों का आगमन हुआ। वहीं मार्च 2002 में केंद्र में एनडीए सरकार के दौर में प्रधानमंत्री अटल बिहारी बाजपेई के नैनीताल आगमन पर प्राधिकरण को 300 करोड़ की घोषणा के सापेक्ष अवमुक्त 67 करोड़ रुपए की झील संरक्षण परियोजना मिली, लेकिन इसका लाभ भी केवल नैनी झील में हो रहे एयरेशन व तल्लीताल में ‘न्यू ब्रिज कम बाइपास निर्माण’ जैसे गिने-चुने कार्यों में ही दिखाई देता है। भीमताल टापू में स्थापित एक्वेरियम जैसे अन्य कार्य भी अपना अस्तित्व खोते जा रहे हैं। प्राधिकरण में नगर नियोजक और अभियंताओं के साथ ही अन्य कार्मिकों की कमी भी हमेशा से समस्या रही। अपनी नयी आवासीय योजनाएं न लाने, पूर्व निर्मित आवासों की कंपाउंडिंग न करने आदि कारणों से आर्थिक रूप से दिन-प्रति-दिन निशक्त होती चली गयी है। प्राधिकरण की स्थापना के दौर से नजर रखे सुदर्शन साह ने कहा कि प्राधिकरण जब नैनीताल नगर को नहीं बचा पाया है तो वह जनपद को कैसे बचाएगा, यह बड़ा सवाल है। बेहतर होता कि इसमें स्थानीय जिम्मेदार लोगों-जनप्रतिनिधियों की भूमिका बढ़ाई जाती।

भूकंपरोधी बनाने होंगे सभी व्यवसायिक निर्माण, वर्षा जल संग्रहण के भी करने होंगे प्रबंध

-नैनीताल जनपद के पहाड़ों पर निर्माण होंगे प्रतिबंधित, नैनीताल के साथ ही पूरे पर्वतीय क्षेत्र की बन रही है एकीकृत महायोजना

-जून माह तक हो जाएगी तैयार, पुरानी 1995 में बनी महायोजना 2011 में हो चुकी है कालातीत-जून माह तक हो जाएगी तैयार, पुरानी 1995 में बनी महायोजना 2011 में हो चुकी है कालातीत

नवीन जोशी, नैनीताल। सरोवरनगरी नैनीताल के साथ ही जनपद के पूरे पर्वतीय क्षेत्र, जहां व्यवसायिक निर्माण बड़े स्तर पर चल रहे हैं, व्यवस्थित निर्माणों के लिये एकीकृत महायोजना बनाने का कार्य इन दिनों चल रहा है। नैनीताल विशेष क्षेत्र झील विकास प्राधिकरण के सचिव श्रीश कुमार ने बताया कि पुरानी 1995 में बनी महायोजना 2011 में कालातीत हो गयी है। इधर छह वर्ष से लंबित नयी महायोजना बनाने का कार्य आरईपीएल नाम की कंपनी को दिया गया है। इस कंपनी को पूरे क्षेत्र का उपग्रह आधारित सर्वे के माध्यम से बाउंड्री युक्त डिजिटल नक्शे बनाकर नगर नियोजक को आगामी 15 दिसंबर तक सोंपना है। इस संबंध में काफी कार्य हो चुका है। उम्मीद है कि इसके बाद नगर नियोजक अगले छह माह में यानी जून 2018 तक महायोजना को तैयार कर लेगा। महायोजना में प्राधिकरण के क्षेत्रांतर्गत आने वाले नैनीताल के साथ ही मुक्तेश्वर, धानाचूली, श्यामखेत, नथुवाखान, धारी, हरतोला, मौना, ल्वेशाल आदि का मुख्य सड़क से 500 मीटर की दूरी तक का क्षेत्र शामिल है। बताया कि नैनीताल की तरह ही पूरे प्राधिकरण क्षेत्र का जीएसआई के माध्यम से डिजिटलाइज्ड सर्वे कराने की भी योजना है, ताकि भूवैज्ञानिकों की रिपोर्ट पर निर्भर न रहना पड़े, बल्कि नक्शे ही पारदर्शी तरीके से बता दें कि कौन सा क्षेत्र निर्माणों के लिये किस हद तक सुरक्षित अथवा असुरक्षित है। साथ ही महायोजना से पता चलेगा कि किस तरह से पूरे क्षेत्र में सड़क, खुले स्थान व आवासीय व वाणिज्यिक भवन बनाए जाएंगे।

नगर में निर्माणों पर जल्द न्यायालय से राहत की उम्मीद

नैनीताल। प्राधिकरण सचिव श्रीश कुमार ने बताया कि उत्तराखंड उच्च न्यायालय के आदेशों पर नीरी यानी राष्ट्रीय पर्यावरण अभियांत्रिकी संस्थान के द्वारा नगर के विभिन्न क्षेत्रों की ‘बियरिंग कैपेसिटी’ यानी भार धारण क्षमता और नैनी झील सहित जनपद की सात प्रमुख झीलों में पानी के आने व खर्च होने, खासकर नैनीताल झील में पानी के जल्द खत्म होने व पानी की गुणवत्ता तथा स्रोतों के सूखने व रिसाव आदि का आंकलन किया जा रहा है। इस संबंध में नीरी के निदेशक भी जल्द अक्टूबर माह की शुरुआत में नैनीताल आने जा रहे हैं। झीलों के सर्वेक्षण में तो अधिक समय लगना है। किंतु नैनी झील व मुख्यालय की भार धारण क्षमता के मानक कमोबेश वे ही हैं, जिनके आधार पर नगर में जोन एक, दो, तीन व चार का निर्धारण किया गया है। इस संबंध में जल्द नीरी द्वारा उच्च न्यायालय में तथ्यात्मक पक्ष रखे जाने के बाद उम्मीद है कि नगर में नये निर्माणों पर लगी रोक हटा ली जाएगी। बताया कि प्राधिकरण अभी भी नगर के जीर्ण-शीर्ण भवनों की मरम्मत और ध्वस्त भवनों के पुर्ननिर्माण की नियमानुसार स्वीकृतियां दे रहा है।

अब तक नगर में 445 भवन स्वामी विस्थापन के लिये चिन्हित

नैनीताल। प्राधिकरण सचिव श्रीश कुमार ने बताया कि नगर में केवल जोन 2 में वर्ष 2001 से 2016 तक 74 निर्माणों की स्वीकृति दी गयी है। इनमें से 40 पूरी तरह एवं शेष आंशिक तौर पर जोन-2 में हैं। इस तरह पूर्व के सात नंबर क्षेत्र के 361 एवं सूखाताल क्षेत्र के 44 तथा जोन-2 के इन 40 भवनों में रहने वाले कुल 445 परिवारों को विस्थापन हेतु चिन्हित किया गया है। इनकी सूची डीएम एव ंकेएमवीएन के एमडी की अध्यक्षता वाली दोनों विस्थापन समितियों को दे दी गयी है। इन परिवारों को विस्थापित किये जाने के लिये बेलुवाखान ग्राम पंचायत के अंतर्गत नैनीताल बाइपास के पास का स्थान चिन्हित किया गया था, किंतु इस स्थान पर घना जंगल होने सहित कई समस्याएं आने के कारण अन्य स्थान की तलाश भी की जा रही है। बताया कि नगर में घरेलू आवास की निर्माण की अनुमति लेकर बनाए भवनों का होटल, पेइंग गेस्ट हाउस और मल्टी हाउसिंग कॉम्प्लेक्स के रूप में वाणिज्यिक उपयोग किया जा रहा है। धामपुर बैंड स्थित स्थित ऐसे दो होटल रियो ग्रांड और काफल को सीज कर दिया गया है। आगे भी ऐसे वाणिज्यिक भवनों को चिन्हित कर कार्रवाई की जाएगी।

नैनीताल को कमजोर नगर बताना सच्चाई है या कोई साजिश !

(श्री नंदा स्मारिका 2015 में प्रकाशित पूर्व आलेख) भूगर्भीय दृष्टिकोण से जोन-चार में रखे गए नैनीताल नगर की भूगर्भीय व भूसतहीय कमजोरी के बात खूब बढ़-चढ़ कर कही जाती है, लेकिन इसके उलट इस बड़े तथ्य को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता है कि नगर के बचाव के लिए अंग्रेजी दौर से किए गए मजबूत प्रबंधों की वजह से नगर के भीतरी, नैनी झील के जलागम क्षेत्र में 1880 के बाद से और पूरे नगर के समग्र पर भी बीती पूरी और मौजूदा सदी के करीब सवा सौ वर्षों में एक भी व्यक्ति की मौत नहीं हुई है। इस तथ्य से क्या नगर की मजबूती का भरोसा नहीं मिलता है ? निस्संदेह इस भरोसे को नजर अंदाज नहीं किया जा सकता है। मृत्यु शैया पर पड़े लाइलाज बीमारी से ग्रस्त रोगी को कोई कम बुद्धि और कम संसाधनों वाला चिकित्सक भी कभी नहीं कहता कि उसका बेहतर इलाज उसका जीवन समाप्त कर देेना है। लेकिन प्रकृति द्वारा दोनों हाथों से अपनी नेमतें लुटाए प्रकृति के स्वर्ग कही जाने वाली सरोवरनगरी के लिए मानो उसका उपचार करने की जिम्मेदारी वाले चिकित्सक, शासन-प्रशासन, बिना उसके उपचार के प्राथमिक प्रयास किए ही मानो निर्लज्जता के साथ कह रहे हैं, उसे बचाने का एक ही और आखिरी उपाय है-उसके कमजोर हिस्सों को काट दिया जाए। वह अपने दर्द से मरें ना मरें, पहले ही उसकी जान ले ली जाए। नगर भले ‘श्मशान’ में बदल जाए, पर यदि वह इसमें सफल रहे तो उन पर पूर्व में किए गए उनके, अतीत से लेकर वर्तमान तक अपनी जेबें भरकर नगर को कुरूप कर देने के ‘पापों’ से मुक्ति मिल जाएगी। उनके कुकृत्यों को लोग भूल जाएंगे और उन पर लगातार उठने वाली अंगुलियां आगे नहीं उठ पाएंगी।

इस तथ्य से कोई इंकार नहीं कर सकता कि ‘अपना’ शासन-प्रशासन नैनीताल नगर का उपचार करना दूर, ‘पराए’ अंग्रेज नियंताओं द्वारा किए गए मजबूत प्रबंधों की देखभाल-मरम्मत करने में ही पूरी तरह से विफल रहा है।  उल्टे वह महज नगर के दो दशक पुराने हल्के-गहरे रंगों में रंगे नक्शे के जरिए नगर को कमजोर और अधिक व अत्यधिक कमजोर बताकर यह साबित करने की कोशिष करने में अधिक गंभीर नजर आ रहा है कि नगर बेहद जर्जर है, और मानो नगर में अधिसंख्य इलाके का ध्वस्तीकरण ही सारी समस्याओं का इलाज है।

नगर की कमजोरी की बातों में अनेकों स्तरों पर अजब और परले दर्जे का विरोधाभाष नजर आता है।

1- नैनीताल कथित तौर पर बेहद कमजोर नगर है। इसका सबसे कमजोर हिस्सा रोप-वे स्टेशन के बिलकुल करीब से लेकर ऊपर की ओर सात नंबर तक का स्थान बताया जाता है, और यहीं 1985 में करीब 12 व्यक्तियों को एक साथ लेकर चलने वाले 825 किग्रा भार वहन क्षमता के भारी-भरकम ढांचे युक्त रोप वे का निर्माण किया गया, जो कि इतने वर्षों से बिना किसी समस्या के सीजन के कई दिनों में हजार सैलानियों को भी नीचे से ऊपर और ऊपर से नीचे की सैर कराता है।

2- नैनीताल की दूसरी सबसे कमजोर नब्ज है नगर का आधार-बलियानाला, जिसके ऊपर प्रशासन ने तल्लीताल में ‘न्यू ब्रिज कम बाईपास’ का निर्माण करा डाला है, और पुराने बस अड्डे को खाली कराकर इस पर ही रोडवेज की भारी-भरकम बसों को खड़ा करने की ‘जिद’ भी पूरी कर डाली है।

3- नगर की तीसरी कमजोर दुःखती रग प्रदेश के नैनीताल राजभवन को निहाल नाले की ओर से खोखला कर रही है।

4- चौथा और सबसे ताजा भूस्खलन के स्थान पर प्रदेश का उच्च न्यायालय स्थित है।

इसी तरह मल्लीताल रिक्शा स्टेंड हजारों रुपए से बने ढांचे को तोड़कर ठीक नाला नंबर 21 के ऊपर फिर लाखों रुपए खर्च कर बनाया जा रहा है। यानी नगर की कमजोरी का उपयोग अपनी पसंद के साथ हो रहा है। जहां काम बनाना हो, जनहित की बात कह दी जाए, अन्यथा जनता की जान का डर दिखा दिया जाए।

बावजूद हम पूरी गंभीरता के साथ दोहरा रहे हैं-नैनीताल कमजोर नहीं मजबूत स्थान है। हमारे इस बात को कहने का आधार फिर वही है, और हमारे विश्वास को मजबूत करने वाला तथ्य यह है कि नगर में पिछले करीब सवा सौ वर्षों में एक भी व्यक्ति की मौत नगर की कमजोरी या भूस्खलनों की वजह से नहीं हुई है।अब पड़ताल करते हैं उन कारणों की जिनकी वजह से नगर की ऊपर बताई गई इतनी कमजोरी के बावजूद नगर सवा सौ वर्षों से पूरी तरह सुरक्षित है। यह आधार 18 सितंबर 1880 को आए नगर के महाविनाशकारी, उस दौर के केवल करीब ढाई हजार की जनसंख्या वाले नगर में 108 भारतीयों व 43 ब्रितानी नागरिकों सहित कुल 151 लोगों की जान लीलने वाले भयानक भूस्खलन के बाद नगर के अंग्रेज नियंताओं द्वारा बनाए गए कैचपिट युक्त 100 शाखाओं युक्त 50 नाले हैं, जिन्हें नगर की आराध्य देवी माता नयना और प्रदेश की कुल देवी नंदा-सुनंदा का स्वरूप और नगर का हृदय कही जाने वाली नैनी झील की धमनियां कहा जाता है। निर्विवाद तौर पर माता नयना तथा नंदा-सुनंदा तथा यह नाले ही नैनीताल को इतने वर्षों में हुई हजारों सेंटीमीटर-मीटर वर्षा की अकल्पनीय विभिषिका से बचाए हुए हैं। इनकी ताकत और कृपा को शब्दों में व्यक्त करना मुश्किल है। लेकिन इनकी ताकत-क्षमता के बारे में इतना दावे के साथ कहा जा सकता है कि नैनीताल नगर में इन नालों का सफल व सही प्रयोग ‘नैनीताल मॉडल’ के रूप आगे भी न केवल नैनीताल को हमेशा के लिए ही नहीं, वरन देश-दुनिया के किसी भी अन्य पर्वतीय शहर को बारिश की वजह से होने वाले भूस्खलन के खतरों से बचा सकता है। पिछले वर्षों में भूस्खलन की जद में आए अल्मोड़ा व वरुणावत पर्वत के खतरे से घिरे उत्तरकाशी और केदारनाथ में ‘नैनीताल मॉडल’ को लागू कर बचाया जा सकता है।

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वर्ष 1880 के भूस्खलन ने बदल दिया था सरोवरनगरी का नक्शा, तभी बने नालों की वजह से बचा है कमजोर भूगर्भीय संरचना का यह शहर 
इसी तरह से अन्यत्र भी हों प्रबंध तो बच सकते हैं दैवीय आपदाओं से 
पहाड़ का परंपरागत मॉडल भी उपयोगी 
नवीन जोशी, नैनीताल। कहते हैं कि आपदा और कष्ट मनुष्य की परीक्षा लेते हैं और समझदार मनुष्य उनसे सबक लेकर भावी और बड़े कष्टों से स्वयं को बचाने की तैयारी कर लेते हैं। ऐसी ही एक बड़ी आपदा नैनीताल में 18 सितंबर 1880 को आई थी, जिसने तब केवल ढाई हजार की जनसंख्या वाले इस शहर के 151 लोगों और नगर के प्राचीन नयना देवी मंदिर को लीलने के साथ नगर का नक्शा ही बदल दिया था, लेकिन उस समय उठाए गए कदमों का ही असर है कि यह बेहद कमजोर भौगोलिक संरचना का नगर आज तक सुरक्षित है। इसी तरह पहाड़ के ऊंचाई के अन्य गांव भी बारिश की आपदा से सुरक्षित रहते हैं। वैज्ञानिकों का मानना है कि नैनीताल और पहाड़ के परंपरागत मॉडल केदारघाटी व चारधाम यात्रा क्षेत्र से भी भविष्य की आपदाओं की आशंका को कम कर सकते हैं।
1841 में स्थापित नैनीताल में वर्ष 1867 में बड़ा भूस्खलन हुआ था, और भी कई भूस्खलन आते रहते थे, इसी कारण यहाँ राजभवन को कई जगह स्थानांतरित करना पढ़ा था। लेकिन 18 सितम्बर 1880 की तिथि नगर के लिए कभी न भुलाने वाली तिथि है। तब 16 से 18 सितम्बर तक 40 घंटों में 20 से 25 इंच तक बारिश हुई थी। इसके कारण आई आपदा को लिखते हुए अंग्रेज लेखक एटकिंसन भी सिहर उठे थे। लेकिन उसी आपदा के बाद लिये गये सबक से सरोवर नगरी आज तक बची है और तब से नगर में कोई बड़ा भूस्खलन भी नहीं हुआ है। उस दुर्घटना से सबक लेते हुए तत्कालीन अंग्रेज नियंताओं ने पहले चरण में नगर के सबसे खतरनाक शेर-का-डंडा, चीना (वर्तमान नैना), अयारपाटा, लेक बेसिन व बड़ा नाला (बलिया नाला) में नालों का निर्माण कराया। बाद में 1890 में नगर पालिका ने रुपये से अन्य नाले बनवाए। 23 सितम्बर 1898 को इंजीनियर वाइल्ड ब्लड्स द्वारा बनाए नक्शों के आधार पर 35 से अधिक नाले बनाए गए। वर्ष 1901 तक कैचपिट युक्त 50 नालों (लम्बाई 77,292 फीट) और 100 शाखाओं का निर्माण (लंबाई 1,06,499 फीट) कर लिया गया। बारिश में कैच पिटों में भरा मलबा हटा लिया जाता था। अंग्रेजों ने ही नगर के आधार बलिया नाले में भी सुरक्षा कार्य करवाए जो आज भी बिना एक इंच हिले नगर को थामे हुए हैं। यह अलग बात है कि इधर कुछ वर्ष पूर्व ही हमारे इंजीनियरों द्वारा बलिया नाला में कराये गए कार्य कमोबेश पूरी तरह दरक गये हैं। बहरहाल, बाद के वर्षो में और खासकर इधर 1984 में अल्मोड़ा से लेकर हल्द्वानी और 2010 में पूरा अल्मोड़ा एनएच कोसी की बाढ़ में बहने के साथ ही बेतालघाट और ओखलकांडा क्षेत्रों में जल-प्रलय जैसे ही नजारे रहे, लेकिन नैनीताल कमोबेश पूरी तरह सुरक्षित रहा। ऐसे में भूवैज्ञानिकों का मानना है ऐसी भौगोलिक संरचना में बसे प्रदेश के शहरों को “नैनीताल मॉडल” का उपयोग कर आपदा से बचाया जा सकता है। कुमाऊं विवि के विज्ञान संकायाध्यक्ष एवं भू-वैज्ञानिक प्रो. सीसी पंत एवं यूजीसी वैज्ञानिक प्रो. बीएस कोटलिया का कहना है कि नैनीताल मॉडल के सुरक्षित ‘ड्रेनेज सिस्टम’ के साथ ही पहाड़ के परंपरागत सिस्टम का उपयोग कर प्रदेश को आपदा से काफी हद तक बचाया जा सकता है। इसके लिए पहाड़ के परंपरागत गांवों की तरह नदियों के किनारे की भूमि पर खेतों (सेरों) और उसके ऊपर ही मकान बनाने का मॉडल कड़ाई से पालन करना जरूरी है। प्रो. कोटलिया का कहना है कि मानसून में नदियों के अधिकतम स्तर से 60 फीट की ऊंचाई तक किसी भी प्रकार के निर्माण की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए।
इधर आपदा प्रबंधन एवं न्यूनीकरण केंद्र (डीएमएमसी) के अध्ययन “स्लोप इनस्टेबिलिटी एंड जियो-एन्वायरमेंटल इश्यूज ऑफ द एरिया अराउंड नैनीताल” के मुताबिक नैनीताल को 1880 से लेकर 1893, 1898, 1924, 1989, 1998 में भूस्खलन का दंश झेलना पड़ा। 18 सितम्बर 1880 में हुए भूस्खलन में 151 व 17 अगस्त 1898 में 28 लोगों की जान गई थी। इन भयावह प्राकृतिक आपदाओं से सबक लेते हुए अंग्रेजों ने शहर के आसपास की पहाड़ियों के ढलानों पर होने वाले भूधंसाव, बारिश और झील से होने वाले जल रिसाव और उसके जल स्तर के साथ ही कई धारों (प्राकृतिक जलस्रेत) के जलस्रव की दर आदि की नियमित मॉनीटरिंग करने व आंकड़े जमा करने की व्यवस्था की थी। यही नहीं प्राकृतिक रूप से संवेदनशील स्थानों को मानवीय हस्तक्षेप से मुक्त रखने के लिए कई कड़े नियम कानून बनाए थे। मगर आजादी के बाद यह सब ठंडे बस्ते में चला गया। शहर कंक्रीट का जंगल होने लगा। पिछले पांच वर्षो में ही झील व आस-पास के वन क्षेत्रों में खूब भू-उपयोग परिवर्तन हुआ है और इंसानी दखल बढ़ा है। नैनीझील के आसपास की संवेदनशील पहाड़ियों के ढालों से आपदा के मानकों की धज्जियां उड़ाते हुए गंभीर छेड़छाड़ की जा रही है। पहाड़ के मलबों को पहाड़ी ढालों से निकलने वाले पानी की निकासी करने वाले प्राकृतिक नालों को मलबे से पाटा जा रहा है। नैनी झील के जल संग्रहण क्षेत्रों तक में अवैध कब्जे हो रहे हैं। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बावजूद सरोवरनगरी में अवैध निर्माण कार्य अबाध गति से जारी है। रिपोर्ट में कहा गया है कि इन क्षेत्रों में हुए सूक्ष्म बदलाव भी नैनी झील के वजूद के लिए खतरा बन सकते हैं।

इस दावे को सच मानने पर जरूर सवाल उठेगा कि नैनीताल नगर के लिए जीवन-मरण जितने महत्वपूर्ण इन नालों में इतनी ही ताकत है तो फिर नगर में पिछले वर्षों में नैनीताल नगर में कई भूस्खलन क्यों हुए। विश्लेषण करने पर इन सवालों का जवाब भी आसानी से मिल जाता है। चलिए, इस बात की पड़ताल करते हैं कि 1880 से पहले और बाद में नैनीताल में कितने भूस्खलन आए और उनसे क्या नुकसान हुआ। पहले बात नैनीताल नगर की स्थापना के बाद आए भूस्खलनों की। नगर के अंग्रेज नियंता नगर की कमजोर प्रकृति से सर्वप्रथम 1866 और फिर 1869 व 1879 में रूबरू हुए। नगर की आल्मा पहाड़ी पर हुए इन भूस्खलनों की वजह से तत्कालीन गवर्नर हाउसों में भी दरारें आ गई थी। अंग्रेजों ने इससे बचाव के तरीके खोजने ही प्रारंभ किए थे कि 18 सितंबर 1880 को वर्तमान रोप-वे के पास पुनः आल्मा पहाड़ी पर आए भूस्खलन ने 151 लोगों को जिंदा दफन करने के साथ नगर का नक्शा भी बदल दिया। नगर की आराध्य देवी माता नयना को भी नहीं बक्शा। नयना देवी का वर्तमान बोट स्टेंड के पास स्थित मंदिर भी झील में समा गया, जिसके बाद मंदिर को वर्तमान स्थान पर बनाया गया।

नैनीताल से हाईकोर्ट हटाओ : कोश्यारी (राष्ट्रीय सहारा, देहरादून संस्करण, 3 अगस्त 2015 , पेज-2)

बीती आधी सदी में नैनीताल में आए भूस्खलनों की बात करें तो सब से बड़ा भूस्खलन 1988 में नैना पीक की तलहटी के क्षेत्रों में हुआ था, जिसमें भूस्खलन का मलबा हंस निवास, मेलरोज कंपाउंड और सैनिक स्कूल से होते हुए तत्कालीन ब्रुक हिल छात्रावास (वर्तमान उत्तराखंड उच्च न्यायालय के आउट हाउस) के कक्षों में भर गया था। लेकिन इस भूस्खलन का कारण जान लीजिए। अंग्रेजी दौर में बने नाला नंबर 26 पर इन प्रभावित क्षेत्रों के ऊपर किलवरी रोड के पास स्थित तीन नौ गुणा नौ वर्ग मीटर आकार के कैचपिटों की सफाई नहीं की गई थी। फलस्वरूप बारिश के दौरान गिरा एक सुरई का विशाल पेड़ नाले में फंस गया था, जिस कारण मलबा नाले में बहने की बजाय फंसे पेड़ की वजह से आवासीय क्षेत्रों की ओर आ गया था। कई लोगों को कुछ समय के लिए घर भी छोड़ने पड़े, पर कोई जनहानि नहीं हुई। गौरतलब है कि यह कैचपिट अभी भी भरे हुए हैं। उनकी सफाई नहीं की जा रही। अभी हाल में जून माह में नैनीताल क्लब में मुख्यमंत्री हरीश रावत के जनता दरबार में स्थानीय लोगों ने इस समस्या को रखते हुए बताया था कि उनके घरों में मलबा घुस गया है, और अफसोसजनक स्थिति थी कि संबंधित अधिकारी इस समस्या को समझ ही नहीं पाए, और कैचपिटों की सफाई इसके बाद भी नहीं हुई।

दूसरा बड़ा भूस्खलन 10 वर्ष बाद 1998 में ठंडी सड़क के ऊपर डीएसबी कॉलेज के गेट के पास के क्षेत्र में कई दिनों तक भूस्खलन होता रहा। इसकी चर्चा रेडियो के उस दौर में बीबीसी लंदन से भी हुई थी। इस क्षेत्र में पूर्व से नाले के प्रबंध ही नहीं किए गए थे। शायद इसलिए कि यहां अंग्रेजी दौर में घर ही नहीं थे। इस भूस्खलन के दौर में भी यहां गिने-चुने ही मकान थे। एक मकान हवा में लटक सा गया था, लेकिन इस बार भी कोई जनहानि नहीं हुई।

अब बात नैनीताल के सर्वाधिक संवेदनशील व नगर के आधार बलियानाला की। बलियानाला में 1898 से भूस्खलनों का लंबा इतिहास रहा है, जिसमें 28 लोगों ने जान गंवाई थी इस क्षेत्र में सबसे बड़ा भूस्खलन 17 अगस्त 1898 को हुआ था। इसे नगर के इतिहास की दूसरी सबसे बड़ी दुर्घटना भी कहा जाता है। इस दुर्घटना में 27 भारतीय व एक अंग्रेज सहित कुल 28 लोग मारे गए थे। लेकिन याद रखना होगा कि यह वह दौर था, जब नालों का निर्माण चल ही रहा था, और इस क्षेत्र में इसके बाद भी 1901 तक नालों तक नालों का निर्माण होता रहा था, और यह क्षेत्र नैनी झील के जलागम क्षेत्र के बाहर आता है। गौरतलब है कि इसके बाद भी इस क्षेत्र में 1935, 1972 और 2004 में भी बड़े भूस्खलन हुए, बड़ा क्षेत्र बलियानाले में समाया, लेकिन गनीमत रही कि कोई जनहानि नहीं हुई। 2004 के भूस्खलन के बाद 2005 में तत्कालीन मुख्यमंत्री नारायण दत्त तिवारी सरकार ने बलियानाले के सुधार कार्यों के लिए 15 करोड़ रुपए की भारी-भरकम धनराशि दी। बताया जाता है कि इससे बलियानाला में आठ ‘बेड-बार’ बनाए गए, परंतु कार्यों की गुणवत्ता कैसी थी, यह बताने के लिए इतना ही कहना काफी है कि इन ‘बेड-बार’ के भग्नावशेष भी आज देख पाने कठिन हैं। इधर पिछले वर्ष यानी 2014 में यहां 10 जुलाई को और इस वर्ष 11 जुलाई को भी यहां बड़े भूस्खलन हुए। इन भूस्खलनों में क्षेत्र का काफी हिस्सा बलियानाले में समा गया, और समाता जा रहा है। अनेक परिवारों को विस्थापित भी करना पड़ा है लेकिन यह भी सच्चाई है कि इन घटनाओं में भी कोई जनहानि नहीं हुई। इधर 2014 में बलियानाले को फिर से चैनलाइज करने के लिए 44.52 करोड़ रुपए के प्रस्ताव शासन को भेजे गए हैं, लेकिन इस प्रस्ताव पर भी शासन अब तक एक रुपया भी देने को तैयार नहीं दिख रहा।

नैनीताल राजभवन के नीचे हो रहा अवैध खनन : प्रत्यक्ष को प्रमाण की जरूरत नहीं 

वहीं बात नगर के दूसरे आधार निहाल नाले की करें तो इस क्षेत्र में पिछली सदी से ही लगातार भूस्खलन जारी हैं, फलस्वरूप 1960 से इस क्षेत्र में खनन प्रतिबंधित है। लेकिन सच्चाई यह है कि इस प्रतिबंध का कोई अर्थ नहीं है। निहाल नाले में भूस्खलन करीब 10 मीटर प्रति वर्ष की दर से जारी है, और दिन-दहाड़े धड़ल्ले से जारी अवैध खनन की गति भी इससे कुछ कम नहीं है।

‘बुद्धिमान’ नियंताओं ने क्षेत्र में दूसरों को खनन से रोकना दूर, स्वयं 1960 के प्रतिबंध को धता बताकर ‘अवैध खनन’ करते हुए इस क्षेत्र से ही नैनीताल बाई-पास का निर्माण करने का ‘दुस्साहस’ कर दिखाया है। बाई पास से नगर की यातायात व्यवस्था को कुछ लाभ हुआ है अथवा नहीं, पता नहीं, अलबत्ता इसने अवैध खनन कर्ताओं को जरूर आसान रास्ता उपलब्ध करा दिया है। गौरतलब है कि निहाल नाले के शीर्ष पर उत्तराखंड राज्य का नैनीताल राजभवन स्थित है। राजभवन के गोल्फ कोर्स का पूर्व राज्यपाल रोमेश भंडारी के नाम पर बना भंडारी स्टेडियम इस भूस्खलन की जद में आ चुका है। निहाल नाले का प्लम कंक्रीट, वायर क्रेट नाला निर्माण, साट क्रीटिंग व रॉक नेलिंग आदि आधुनिक तकनीकों से क्षरण रोकने के लिए वर्ष 2012 में 38.7 करोड़ रुपए सहित पूरे नैनीताल नगर की सुरक्षा के लिए 58.02 करोड़ रुपए की बड़ी योजनाओं का प्रस्ताव तैयार कर शासन को भेजा गया था। इन प्रस्तावों पर भी ‘धन की कमी आढ़े नहीं आने दी जाएगी’ की तोता रटंत करने वाला शासन अब तक एक रुपया भी स्वीकार नहीं कर पाया है।

अब बात हालिया बीती पांच जुलाई 2015 को आए बड़े भूस्खलन की, जिसकी वजह से नगर की कमजोरी पर बोलने के लिए प्रशासन को बड़ा मौका मिला। इस घटना का पहला मूल कारण तो बिड़ला रोड पर हुआ भूस्खलन रहा, जिसका मूल कारण इस बेहद संकरे, बीते दौर में घोड़ों के लिए बने बेहद तीक्ष्ण चढ़ाई वाले मार्ग में स्नो-व्यू, किलवरी जाने के लिए ‘शॉर्ट कट’ के रूप में प्रयोग करने वाले नए जमाने के अत्यधिक क्षमता वाले भारी-भरकम वाहनों का बेधड़क-बेरोकटोक गुजरना भी रहा, जिस कारण स्तुति गेस्ट हाउस के पास का पहले से ही वाहनों के बोझ से ढहता नाला तेज बारिश के दौरान दरक गया। लेकिन इस बात से भी इंकार नहीं किया जा सकता कि घटना की विभीषिका इस मलबे को लेकर आने वाले नाला नंबर-6 के जीर्ण-शीर्ण होने की वजह से बढ़ी। नाला जीर्ण-शीर्ण होने से मलबा नाले की कमजोर दीवारों को तोड़कर पास के मकानों को खोखला करते हुए निकला। इसी तरह मल्लीताल पालिका गार्डन में नुकसान नाला नंबर 20 के पाइप लाइनों से बुरी तरह पटे रहने, इस कारण मलबा फंसने और नाले की कमजोर दीवारों के टूटकर पास के घरों को खोखला करने के कारण काफी नुकसान हुआ। नालों के ऊपर डाली गई सीमेंट की पटालों व लोहे की जालियों ने भी पानी को रोकने का काम किया। फलस्वरूप मल्लीताल बाजार में रामलीला मैदान के पास दो जगह सड़क ही फट गई। जबकि नारायणनगर वार्ड के लोगों को खतरनाक पहाड़ की तलहटी में बसने और नाले न होने का खामियाजा भुगतना पड़ा।

मर्ज बढ़ता गया, ज्यों-ज्यों दवा की

नैनीताल नगर का जो हाल हुआ है, उसके लिए निर्विवाद तौर पर केवल यहां अवैध तरीके से घर बनाने वाले ही नहीं, वरन शासन-प्रशासन भी बराबर का जिम्मेदार हैं। 1841 में स्थापित हुए इस नगर पर ‘ज्यों-ज्यों दवा की-मर्ज बढ़ता ही गया’ की उक्ति साकार बैठती है। नगर वासियों के अनुसार नगर को व्यवस्थित करने के नाम पर 1984 में की गई झील विकास प्राधिकरण की व्यवस्था ने नगर को पहले के मुकाबले कहीं अधिक अव्यवस्थित करने का कार्य किया है। प्राधिकरण की ओर से नगर को बढ़ते जन दबाव से बाहर निकालने के लिए कोई प्रयास नहीं किये गए। प्राधिकरण तथा शासन-प्रशासन की उदासीनता और भविष्य की रणनीति बनाने में पूरी तरह अक्षमता परखने के लिए एक उदाहरण ही काफी होगा कि एक ओर पर्यटन नगरी में हर वर्ष पर्यटन बढ़ाने की बात कही गई, और दूसरी ओर 1984 से 21 वर्षों में एक भी नया होटल, यहां तक कि एक भी नया कक्ष बढ़ाने का औपचारिक और नियमों के अंतर्गत कोई प्रयास किया गया, जबकि अनाधिकृत तौर पर वह सब कुछ हुआ, जिसे करने की मनाही बताई गई। दूसरी ओर आवासीय घरों के नवनिर्माण क्या मरम्मत की भी बेहद कठिन की गई प्रक्रिया का परिणाम रहा कि लोग चोरी-छुपे, रात-रात में बेहद कच्चे घरों का निर्माण करने लगे। इस प्रकार इस कठोरता ने नगर को और अधिक कमजोर करने का ही कार्य किया।

मृतप्राय महायोजना से चल रही व्यवस्थाएं, 21 करोड़ के दो प्रस्तावों पर नहीं मिला ढेला भी

दूसरी ओर प्रशासनिक अक्षमता की ही बानगी है कि नगर को ‘बचाने’ के नाम पर नगर के कमजोर, असुरक्षित घरों को ध्वस्त करने का मंसूबा बना रहा नगर की व्यवस्थाओं के लिए जिम्मेदार प्रशासन 1995 में बनी और 2011 में पूरी हो चुकी मृतप्राय ‘नैनीताल महायोजना’ को अभी भी नगर पर थोपे हुए है, और पिछले चार वर्षों से नई महायोजना नहीं बना पाया है। सवाल उठता है कि क्या महायोजना के पूरा होने से पूर्व ही नई महायोजना बनाने के प्रयास नहीं शुरू हो जाने चाहिए थे। और जो व्यवस्था समय पर अपने प्रबंध और स्वयं को समयानुसार ‘अपडेट’ न कर पाए, क्या वह नगर की अन्य मायनों में बेहतर देखरेख के काबिल है। वहीं राज्य बनने से भी पूर्व 1998 से नगर की पर्यावरणीय व भूगर्भीय सुरक्षा में सबसे बड़ी भूमिका निभाने वाली नैनीताल झील विशेषज्ञ समिति एवं हिल साइड सेफ्टी कमेटी की केवल एक बैठक हुई है। 1990 के दशक में नगर की सुरक्षा पर विस्तृत अध्ययन करने वाली ब्रजेंद्र सहाय समिति की संस्तुतियां का कहीं अता-पता नहीं है। वहीं शासन स्तर पर अक्षमता देखनी हो तो यह उदाहरण पर्याप्त होगा कि वर्ष 2011 में लोनिवि प्रांतीय खंड के अधिकारियों ने नगर की धमनियां कहे जाने वाले नालों की मरम्मत के लिए जेएलएनयूआरएम को 20.80 करोड़ और राज्य योजना को 20.67 करोड़ के दो अलग-अलग प्रस्ताव भिजवाए, लेकिन यह दोनों प्रस्ताव शासन में धूल फांक रहे हैं। जबकि नगरवासियों के लिए जीवन-मरण का प्रश्न और नगर की धमनियां कहे जाने वाले नाले उत्तराखंड सरकार की प्राथमिकता में कहीं नहीं हैं। इसीलिए दशकों से नगर के नालों की मरम्मत के लिए एक रुपया नहीं मिला है, और मरम्मत की जगह सफाई के लिए मिलने वाली धनराशि से खानापूरी की जा रही है। पूर्व में लोनिवि ने भी इस हेतु 80 लाख रुपए शासन से मांगे थे, वह भी नहीं मिले। अब लोनिवि की जरूरत 3.6 करोड़ रुपए तक पहुंच गई है। इसका प्रस्ताव भी शासन में लंबित है, लेकिन नतीजा ढाक के वही तीन पात। नगर के नाले बुरी तरह से उखड़ गए हैं। उनकी दोनों ओर की दीवारें अनेक स्थानों पर टूट चुकी हैं। कैच पिट पूरी तरह मलबे से पट चुके हैं, और जालियों में पत्थर अटके हुए हैं। ऐसे में वह अपनी दिशा बदलकर किनारे चोट कर बड़ी तबाही का कारण बनने की मानो पूरी तैयारी कर चुके हैं, लेकिन सरकार की आंखें नहीं खुल रही हैं। नाले गंदगी-मलबे से भी बुरी तरह पटे हैं, और इनकी सफाई के लिए नगर पालिका और लोक निर्माण विभाग के कर्मियों की मलबे और गंदगी को लेकर होने वाला विवाद निपटाने तक में भी प्रशासन की ओर से आज तक कोई सफल प्रयास नहीं किया जा सका है।

इन्हीं कारणों से गत पांच जुलाई को नाला नंबर तीन, छह व 20 ने अपनी हिम्मत के टूट जाने का इशारा कर भयावह रूप दिखा दिया है। नाला नंबर तीन ने चांदनी चौक रेस्टोरेंट के भीतर से बहकर तथा नाला नंबर छह से इंडिया व एवरेस्ट होटलों के बीच बहते हुए करीब 15 हजार क्यूसेक मलबा माल रोड पर लाकर पहाड़ खड़ा कर दिया। वहीं नाला नंबर 20 मल्लीताल रिक्शा स्टेंड वाला नाला स्टाफ हाउस तक अनेक घरों के लिए खतरा बन गया। इसके अपने पत्थर और मलबे से नगर का खूबसूरत कंपनी गार्डन पट गया है। यही हाल मस्जिल तिराहे से डीएसबी की ओर जाने के मार्ग पर सबसे पहले पड़ने वाले नाला नंबर 24 के भी हैं। इस नाले ने भी किनारे मार करनी शुरू कर दी है। नाला नंबर 23 के भी यही हाल हैं, लेकिन सरकार के पास इन नालों की मरम्मत के लिए पैंसा नहीं है। मजबूर होकर डीएम के समक्ष झील विकास प्राधिकरण से नालों की तात्कालिक मरम्मत के लिए 10 लाख रुपए ‘मांगने’ जैसी नौबत आ गई है।

इस सबसे सबक लेने के बजाय अब प्रशासन अपनी गलतियों पर परदा जनता पर कार्रवाई के जरिए डालने की तैयारी कर रहा है। यानी 18 सितंबर 1880 को आई आपदा के बाद नगर के अंग्रेज निर्माताओं द्वारा दीर्घकालीन सोच के तहत बनाए गए नालों की स्थिति नगर को करीब सवा सौ वर्ष बिना मरम्मत सुरक्षित रखने के बाद अब दम तोड़ने की स्थिति में पहुंच गए है। बताने की जरूरत नहीं कि इन वर्षों में आई बारिश से नैनीताल को बचाने और अपनी उपस्थिति वाले स्थानों पर एक भी जनहानि न होने देने वाली नगर की इन धमनियों की दुर्दशा के लिए कौन बड़ा जिम्मेदार है। क्या नालों में गंदगी, मलबे के कट्टे डालने वालों को जिम्मेदार बताकर प्रशासन अपनी जिम्मेदारी से बच सकता है ? जबकि वह नालों में गंदगी-मलबा डालने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने की अपनी जिम्मेदारी भी पूरी नहीं कर पाया है। जबकि एक तथ्य यह भी है कि प्रशासन के पास नगर के कमजोर घरों का कोई सर्वेक्षण भी नहीं है, और वह हवा में कार्रवाई करने का मन बना रहा है। नगर के ‘कमजोर’ होने का भ्रम फैला कर कहा जा रहा है कि यह कार्रवाई नगर को ‘बचाने’ के लिए की जा रही है, लेकिन जिस तरह प्राधिकरण करीब 900 लोगों को पहले ही ध्वस्तीकरण नोटिस देने की बात कर रहा है, और दबी जुबान 10 हजार घरों को आदेश की जद में बता रहा है, उससे अंदाजा लगाना कठिन नहीं कि शहर बचेगा, या उजड़ जाएगा।

नालों को बचाना होगा तभी बचेगा नैनीताल

सरोवरनगरी नैनीताल में सितंबर 1880 में 18 सितंबर को आए महाविनाशकारी भूस्खलन के बाद वर्ष 1901 तक बने नालों की स्थिति बहुत ही दयनीय है। नगर की धमनियां कहे जाने वाले इन नालों को हर किसी ने अपनी ओर से मनमाना इस्तेमाल किया है। नगर वासियों ने इन्हें कूड़ा व मलवा निस्तारण का कूड़ा खड्ड तथा इनके ऊपर तक अतिक्रमण कर अपने घर बनाने का स्थान बनाया है तो जल संस्थान ने इन्हें पानी की पाइप लाइनें गुजारने का स्थान, जबकि इसकी सफाई का जिम्मा उठाने वाली नगर पालिका और लोक निर्माण विभाग ने इनमें आने वाले कूड़े व गंदगी को उठाने के नाम पर जिम्मेदारी एक-दूसरे पर डालने और सफाई के नाम पर पैंसे बनाने का माध्यम बनाया है। यदि ऐसा न होता तो आज नाले अपना मूल कार्य, नैनी झील में इसके जलागम क्षेत्र का पूरा पानी बिना किसी रोकटोक के ला रहे होते, और नगर को कैसी भी भयानक जल प्रलय या आपदा न डिगा पाती। गनीमत रही कि उत्तराखंड उच्च न्यायालय के आदेशों पर नगर के होटलों द्वारा अभी हाल ही में उसी स्थान से छह कमरे हटा दिए गए थे, जहां से रविवार की रात्रि दो हजार टन मलवा माल रोड पर आया है, यह कमरे न हटे होते तो रात्रि में इन कमरों में सोए लोगों के साथ हुई दुर्घटना का अंदाजा लगाना अधिक कठिन नहीं है।

इस तरह बने नाले

नगर के अंग्रेज नियंता नगर की कमजोर प्रकृति से सर्वप्रथम 1866 और फिर 1869 व 1879 में रूबरू हुए। इस दौरान जब तत्कालीन राजभवन की दीवारों में भी दरारें आने लगीं तो उन्होंने इस समस्या के स्थाई समाधान व नगर की सुरक्षा के लिए प्रयास शुरू कर दिए थे। लेकिन इससे पहले ही 18 सितंबर 1880 को महाविनाशकारी भूस्खलन हो गया। इस दुर्घटना से सबक लेते हुऐ पहले चरण में नगर के सबसे खतरनाक शेर-का-डंडा, चीना (वर्तमान नैना), अयारपाटा, लेक बेसिन व बड़ा नाला (बलिया नाला) में दो लाख रुपये से नालों का निर्माण कराया। बाद में 80 के अंतिम व 90 के शुरुआती दशक में नगर पालिका ने तीन लाख रुपये से अन्य नाले बनवाए। आगे 23 सितम्बर 1898 को इंजीनियर वाइल्ड ब्लड्स द्वारा बनाए नक्शों से 35 से अधिक नाले बनाए गए। 1901 तक कैचपिट युक्त 50 नालों (लम्बाई 77,292 फीट) व 100 शाखाओं का निर्माण (कुल लम्बाई 1,06,499 फीट यानी 324.45 किमी) किया। नालों में कैचपिटों यानी गहरे गड्ढों की व्यवस्था थी, जिन्हें बारिश में भरते ही कैच पिटों में भरा मलवा हटा लिया जाता था। अंग्रेजों ने नगर के आधार बलियानाले में भी सुरक्षा कार्य करवाऐ, जो आज भी बिना एक इंच हिले नगर को थामे हुऐ हैं। यह अलग बात है कि इधर कुछ वर्ष पूर्व ही हमारे इंजीनियरों द्वारा बलियानाला में कराये गए कार्य कमोबेश पूरी तरह दरक गये हैं। इधर भी नालों में जो-जो कार्य हाल के दौर में हुए हैं, वह इस वर्ष रविवार पांच जुलाई की बारिश में बह गए हैं।

यह किए जाने की है जरूरत:
    • नालों से सटाकर किए निर्माणों को संभव हो तो हटाया अथवा मजबूत किया जाए।
    • नालों से पानी की लाइनें पूरी तरह से हटाई जाएं, इनमें मलवा फंसने से होता है नुकसान।
    • मरम्मत के कार्यों में हो उच्च गुणवता मानकों का पालन।
    • नालों की सफाई सर्वोच्च प्राथमिकता में हो।
    • नालों में कूड़ा डालने पर कड़े व बड़े जुर्माने लगें।
    • नालों में कैचपिटों की व्यवस्था बहाल हो, सभी नालों में बनें कैचपिट और हर बारिश के बाद हो इनकी सफाई।
  • नालों की सफाई के लिए पूर्व में बने अमेरिकी मशीन ऑगर लगाने जैसे प्रस्ताव लागू हों।
नवीन समाचार
‘नवीन समाचार’ विश्व प्रसिद्ध पर्यटन नगरी नैनीताल से ‘मन कही’ के रूप में जनवरी 2010 से इंटरननेट-वेब मीडिया पर सक्रिय, उत्तराखंड का सबसे पुराना ऑनलाइन पत्रकारिता में सक्रिय समूह है। यह उत्तराखंड शासन से मान्यता प्राप्त, अलेक्सा रैंकिंग के अनुसार उत्तराखंड के समाचार पोर्टलों में अग्रणी, गूगल सर्च पर उत्तराखंड के सर्वश्रेष्ठ, भरोसेमंद समाचार पोर्टल के रूप में अग्रणी, समाचारों को नवीन दृष्टिकोण से प्रस्तुत करने वाला ऑनलाइन समाचार पोर्टल भी है।
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