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उद्योगों की तर्ज पर पर्यटन प्रदेश की अवधारणा को साकार करने में मदद करे सरकार

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-उत्तराखंड होटल्स एंड रेस्टारेंट एसोसिएशन की अधिशासी समिति की बैठक में सरकार को मांगपत्र सोंपने का निर्णय
-निजी भूमि पर पार्किंग व होटल निर्माण को प्रोत्साहन तथा ग्रीष्मकालीन पर्यटन सीजन के साथ ही चार अन्य सीजनों का भी सदुपयोग करने सहित अन्य मांगें उठाएंगे

उद्योगों की तर्ज पर पर्यटन प्रदेश की अवधारणा को साकार करने में मदद करे सरकार

नैनीताल। उत्तराखंड होटल्स एंड रेस्टारेंट एसोसिएशन ने प्रदेश सरकार से पर्यटन प्रदेश की अवधारणा को साकार करने में मदद करने का अनुरोध किया है। इस हेतु शीघ्र की एसोसिएशन के पदाधिकारी प्रदेश के पर्यटन मंत्री एवं पर्यटन सचिव से मिलेंगे, तथा उन्हें इस हेतु अपना मांग व सुझाव पत्र सौपेंगे। इस पत्र में खास तौर पर प्रदेश के सभी पर्यटन स्थलों की बड़ी पार्किंग की समस्या के समाधान के लिए सरकार के स्तर के साथ ही निजी भूमि पर पार्किंग निर्माण को बढ़ावा देने तथा नये होटलों के निर्माण के लिए सरकार की ओर से नक्शे पास करने सहित अन्य मदद तथा पुराने होटलों में सुविधा विस्तार के लिए मदद करने के अलावा राज्य में ग्रीष्मकालीन पर्यटन सीजन के साथ ही चार अन्य सीजनों में पर्यटन की अपार संभावनाओं का जिक्र करते हुए इन मौसमों में भी सैलानियों को आकर्षित करने के लिए सरकार को सुझाव देंगे व मांग करेंगे। साथ ही सरकार से शहरों के सुनियोजित विकास के लिए मास्टर प्लान लागू करने की मांग भी की जाएगी।
मुख्यालय में आयोजित हुई अधिशासी समिति की बैठक के बाद बृहस्पतिवार को एसोसिएशन के अध्यक्ष संदीप साहनी, सईद मुस्तफा शेरवानी सहित अन्य पदाधिकारी प्रेस से मुखातिब हुए। एक ओर जहां सरकार उद्योगों को प्रोत्साहन देती है, और वे यहां केवल पैकेजिंग तक सीमित रहते हैं, और अनुदान का लाभ उठाकर लौट जाते हैं, वहीं उत्तराखंड की लगभग आधी आबादी पर्यटन से परोक्ष व अपरोक्ष तौर पर जुड़ी है, और यह क्षेत्र राज्य की जीडीपी यानी सकल घरेलू उत्पाद में 28 फीसद की भागेदारी करता है। इस उद्योग से जुड़े 90 फीसद लोग उत्तराखंड से हैं, तथा यह 90 फीसद रोजगार भी उत्तराखंड वासियों को उपलब्ध कराकर राज्य के युवाओं को पलायन करने से भी रोकता है। राज्य में पांच मौसमों में सैलानियों को आकर्षित करने की अपार क्षमता है, बावजूद यह क्षेत्र केवल ग्रीष्मकाल या चारधाम यात्रा पर ही सीमित है, और इस प्रकार राज्य के होटल वर्ष भर में अपनी क्षमता के केवल 30 फीसद ही भरते हैं। लिहाजा सरकार उद्योगों की तर्ज पर पर्यटन क्षेत्र को मदद व प्रोत्साहित करे। बैठक में लिये गये निर्णय के बाद वे स्वयं भी इस हेतु निजी भूमि स्वामियों को पार्किंग बनाने हेतु प्रेरित करेंगे। ठीक सीजन से पहले, जबकि इस वर्ष के पर्यटन में सुधार के लिए समय भी नहीं बचा है, तब बैठक करने सरकार को सुझाव देने से लाभ मिलने की संभावनाओं एवं पर्यटन क्षेत्र में स्वयं सुधार के प्रति गंभीर न होने के सवालों पर पर पूछे गए प्रश्न पर पदाधिकारी समुचित जवाब नहीं दे पाये। बैठक में नैनीताल होटल एसोसिएशन के अध्यक्ष दिनेश साह, मसूरी एसोसिएशन के अध्यक्ष आरएन माथुर, कॉर्बेट एसोसिएशन के अध्यक्ष हरी सिंह मान सहित बृज साह, वेद साह, आलोक साह सहित अनेक कार्यकारिणी सदस्य मौजूद रहे।

ऑनलाइन बुकिंग से जुड़ें, अन्यथा बंद हो जाएंगे होटल
नैनीताल। एसोसिएशन के अध्यक्ष संदीप साहनी ने कहा कि आज और भविष्य का दौर होटलों में ऑनलाइन बुकिंग का है। जो होटल यह सुविधा नहीं देंगे, वे भविष्य में टिक नहीं पाएंगे और बंद हो जाएंगे। दावा किया कि एसोसिएशन से राज्य भर में जुड़े 200 से अधिक होटलों में ऑनलाइन बुकिंग की जाती है। वहीं जिम कॉर्बेट होटल एसोसिएशन के अध्यक्ष हरी मान ने कहा कि पिछले दो-तीन महीनों से वन विभाग द्वारा जिम कॉर्बेट पार्क की ऑनलाइन बुकिंग न हो पाने से क्षेत्र का पर्यटन उद्योग बुरी तरह से प्रभावित हो गया है।

यह भी पढ़ें : एलआईसी ने सैलानियों की ‘जीवन के साथ भी सुरक्षा’ के लिए दीं लाइफ जैकेटें

मंगलवार को नाविकों को लाइफ जैकेटें समर्पित करते एलआईसी के डीजीएम पीएस नेगी व अन्य।

-2007 में नैनी झील में लाइफ जैकेटों की शुरुआत भी एलआईसी ने ही की थी
नैनीताल, 8 मई 2018। ‘जिंदगी के साथ भी-जिंदगी के बाद भी’ के अपने सूत्र वाक्य को सही साबित करते हुए एलआईसी यानी भारतीय जीवन बीमा निगम ने विश्व प्रसिद्ध नैनी सरोवर में नौकायन का आनंद उठाने वाले सैलानियों की सुरक्षा का प्रबंध किया है। मंगलवार को एलआईसी के हल्द्वानी मंडल के वरिष्ठ मंडलीय प्रबंधक पान सिंह नेगी ने बैंड स्टेंड पर आयोजित एक संक्षिप्त कार्यक्रम में नगर पालिका की कर अधीक्षक लता आर्या के साथ करीब साढ़े चार लाख मूल्य की 450 लाइफ जैकेटें नाविकों को समर्पित कीं, ताकि वे इन्हें सैलानियों को नौकायन के समक्ष पहना कर उनकी जीवन रक्षा कर सकें। बताया गया कि 2007 में नैनी झील में लाइफ जैकेटों की शुरुआत भी एलआईसी ने ही की थी, और इसके बाद भी कई बार लाइफ जैकेटें दी गयीं। इस अवसर पर शाखा प्रबंधक डीएस गुंज्याल, विपणन प्रबंधक टीएस ठाकुर, देशराज ठाकुर, ललित आर्या, हरीश तिवाड़ी, डीएस ह्यांकी, हरीश राणा, बालम मेहरा, प्रकाश, मोहित, जीएस ढैला, नगर पालिका के शिवराज नेगी व विनोद पंत सहित कई लोग मौजूद रहे।

नैनीताल-कुमाऊं में पर्यटन सुविधाएं : नैनीताल में पर्यटन से सम्बंधित फोटो-चित्रों के लिए यहां क्लिक करें।

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Tour Operaters : 

  • YTDO Tours, The Mall, Nainital
  • Hina Tour & Travels, The Mall, Nainital, Email: hinapackage@gmail.com

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मेरा जन्म 26 नवंबर 1972 को हुआ था। मैं नैनीताल, भारत में मूलतः एक पत्रकार हूँ। वर्तमान में मार्च 2010 से राष्ट्रीय हिन्दी दैनिक समाचार पत्र-राष्ट्रीय सहारा में ब्यूरो चीफ के रूप में कार्य कर रहा हूँ। इससे पहले मैं पांच साल के लिए दैनिक जागरण के लिए काम कर चुका हूँ। कुमाऊँ विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग से ‘नए मीडिया’ विषय पर शोधरत हूँ। फोटोग्राफ़ी मेरा शौक है। मैं NIKON COOLPIX P530 और अडोब फोटोशॉप 7.0 के साथ फोटोग्राफी कर रहा हूँ। फोटोग्राफी मेरे लिए दुनियां की खूबसूरती को अपनी ओर से चिरस्थाई बनाने का बहुत छोटा सा प्रयास है। एक फोटो पत्रकार के रूप में मेरी तस्वीरों को नैनीताल राजभवन सहित विभिन्न प्रदर्शनियों में प्रस्तुत किया गया, तथा उत्तराखंड की राज्यपाल श्रीमती मार्गरेट अलवा द्वारा सम्मानित किया गया है। कुछ चित्रों को राष्ट्रीय-अंतर्राष्ट्रीय पुरस्कार भी प्राप्त हो चुके हैं। गूगल अर्थ पर चित्र उपलब्ध कराने वाली पैनोरामियो साइट पर मेरी प्रोफाइल को 18.85 Lacs से भी अधिक हिट्स प्राप्त हैं।पत्रकारिता और फोटोग्राफी के अलावा मुझे कवितायेँ लिखना पसंद है। काव्य क्षेत्र में मैंने नवीन जोशी “नवेन्दु” के रूप में अपनी पहचान बनाई है। मैंने बहुत सी कुमाउनी कवितायेँ लिखी हैं, कुमाउनी भाषा में मेरा काव्य संकलन उघड़ी आंखोंक स्वींड़ प्रकाशित हो चुका है, जो कि पुस्तक के के साथ ही डिजिटल (PDF) फार्मेट पर भी उपलब्ध होने वाली कुमाउनी की पहली पुस्तक है। मेरी यह पुस्तक गूगल एप्स पर भी उपलब्ध है। ’ यहां है एक पत्रकार, लेखक, कवि एवं छाया चित्रकार के रूप में मेरी रचनात्मकता, लेख, आलेख, छायाचित्र, कविताएं, हिंदी-कुमाउनी के ब्लॉग आदि कार्यों का पूरा समग्र। मेरी कोशिश है कि यहां नैनीताल, कुमाऊं, उत्तराखंड और वृहद संदर्भ में देश की विरासत, संस्कृति, इतिहास और वर्तमान को समग्र रूप में संग्रहीत करने की….। मेरे दिल में बसता है, मेरा नैनीताल, मेरा कुमाऊं और मेरा उत्तराखंड

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