उत्तराखंड में घर बनाने वालों के लिए खुशखबरी : नक्शा पास कराने का झंझट खत्म, अब सिर्फ एक काम करना होगा…

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👉🏠नवीन समाचार, देहरादून, 26 दिसंबर 2025 (Building Plan Approval Process) । उत्तराखंड में अपना घर बनाने का सपना देख रहे लोगों के लिए राज्य सरकार ने बड़ी राहत की घोषणा की है। अब छोटे और कम जोखिम वाले भवनों के लिए नक्शा पास कराने के लिए विकास प्राधिकरण के कार्यालयों के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे। लंबी कतारों, फाइलों की देरी और अतिरिक्त प्रक्रियाओं से मुक्ति दिलाने के उद्देश्य से राज्य मंत्रिमंडल ने नक्शा स्वीकृति की नई और सरल व्यवस्था को मंजूरी दे दी है। इस निर्णय से न केवल आम नागरिकों को सुविधा मिलेगी, बल्कि भवन निर्माण प्रक्रिया भी पारदर्शी और समयबद्ध होगी।

नई व्यवस्था का उद्देश्य और पृष्ठभूमि

Building Plan Approval Process (DM Cancelled Arms Licence)ह फैसला केंद्र सरकार की ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ पहल के अनुरूप लिया गया है। राज्य सरकार का मानना है कि छोटे आवासीय और सीमित व्यावसायिक भवनों के लिए जटिल अनुमति प्रक्रिया अनावश्यक रूप से लोगों का समय और धन दोनों खर्च कराती थी। इसी को ध्यान में रखते हुए मंत्रिमंडल ने भवन नक्शा स्वीकृति की प्रक्रिया को सरल बनाने पर सहमति जताई। इस निर्णय को पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व वाली सरकार की महत्वपूर्ण प्रशासनिक पहल माना जा रहा है।

अब क्या बदलेगा, आम आदमी को क्या लाभ

नई व्यवस्था के तहत अब सिंगल रेजिडेंशियल हाउस और छोटे, कम जोखिम वाले व्यावसायिक भवनों के नक्शे सीधे एम्पैनल्ड आर्किटेक्ट के माध्यम से स्वप्रमाणित किए जा सकेंगे। इसका अर्थ यह है कि भवन स्वामी को अब हर स्थिति में विकास प्राधिकरण की पूर्व अनुमति लेना अनिवार्य नहीं होगा। वह चाहे तो प्राधिकरण के माध्यम से नक्शा पास करा सकता है या फिर थर्ड पार्टी यानी पंजीकृत आर्किटेक्ट का विकल्प चुन सकता है।

आवेदन की प्रक्रिया और आवश्यक औपचारिकताएं

नए नियमों के अनुसार भवन निर्माण के इच्छुक व्यक्ति को आवेदन के साथ एससी-1 और एससी-2 प्रपत्र भरने होंगे। इन प्रपत्रों के माध्यम से यह प्रमाणित किया जाएगा कि भवन का नक्शा एम्पैनल्ड आर्किटेक्ट द्वारा सत्यापित है और सभी नियमों का पालन किया गया है। इसके साथ ही निर्धारित शुल्क जमा करने का विवरण भी देना होगा। सभी दस्तावेज सक्षम अधिकारी के समक्ष प्रस्तुत किए जाएंगे, जिससे रिकॉर्ड में पारदर्शिता बनी रहे।

प्रशासन का पक्ष और अधिकारियों की राय

आवास विभाग के प्रमुख सचिव आर मीनाक्षी सुंदरम के अनुसार यह व्यवस्था आम लोगों को अतिरिक्त सुविधा देने के उद्देश्य से लागू की गई है। उनका कहना है कि अब भवन स्वामी अपनी आवश्यकता और सुविधा के अनुसार प्रक्रिया चुन सकते हैं। इससे न केवल समय की बचत होगी, बल्कि विकास प्राधिकरणों पर अनावश्यक कार्यभार भी कम होगा। पहले छोटे-छोटे नक्शों के लिए भी अनुमति प्रक्रिया में लंबा समय लगता था, जो अब वैकल्पिक कर दी गई है।

औद्योगिक क्षेत्र को भी मिली बड़ी राहत

केवल आवासीय भवन ही नहीं, बल्कि औद्योगिक क्षेत्र को भी इस मंत्रिमंडलीय बैठक में बड़ी सौगात दी गई है। मंत्रिमंडल ने उत्तराखंड सामान्य औद्योगिक विकास नियंत्रण संशोधन विनियमावली, 2025 को मंजूरी दे दी है। इस संशोधन से औद्योगिक इकाइयों, विशेषकर सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों को सीधा लाभ मिलेगा। नए प्रावधानों के तहत कंप्लायंस का बोझ कम होगा और औद्योगिक इकाइयों के लिए ग्राउंड कवरेज क्षेत्र बढ़ाया जाएगा, जिससे उत्पादन क्षमता में वृद्धि संभव होगी।

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विकास और निवेश को मिलेगा बढ़ावा

विशेषज्ञों का मानना है कि इन फैसलों से उत्तराखंड में भवन निर्माण और औद्योगिक निवेश दोनों को गति मिलेगी। सरल प्रक्रिया से जहां आम नागरिकों का भरोसा बढ़ेगा, वहीं उद्योगों को भी राज्य में निवेश के लिए अनुकूल वातावरण मिलेगा। यह निर्णय राज्य की आर्थिक गतिविधियों को तेज करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

भविष्य की दिशा और अपेक्षाएं

राज्य सरकार का यह कदम स्पष्ट संकेत देता है कि प्रशासन अब जनसुविधा और पारदर्शिता को प्राथमिकता दे रहा है। आने वाले समय में यदि इस व्यवस्था का प्रभावी क्रियान्वयन होता है, तो उत्तराखंड में घर बनाना और उद्योग स्थापित करना पहले की तुलना में कहीं अधिक आसान और तेज हो जाएगा। इससे राज्य के समग्र विकास को नई दिशा मिलने की उम्मीद की जा रही है।

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