उत्तराखंड में आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर भाजपा का बड़ा रणनीतिक बदलाव, जनाधार कमजोर होने पर कटेगा टिकट, नहीं लड़ पाएंगे दूसरी सीट से…

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नवीन समाचार, देहरादून, 1 फरवरी 2026 (BJP Ticket Policy for 2027)। उत्तराखंड (Uttarakhand) की राजधानी देहरादून (Dehradun) से आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर भारतीय जनता पार्टी (Bharatiya Janata Party–BJP) की रणनीति में बड़ा और स्पष्ट बदलाव सामने आया है। पार्टी नेतृत्व ने यह संकेत दिए हैं कि इस बार न तो मंत्रियों को सुरक्षित सीटों का सहारा मिलेगा और न ही कमजोर प्रदर्शन करने वालों को किसी प्रकार की रियायत दी जाएगी। जनाधार कमजोर होने पर टिकट कट जाएगा। 

साफ संदेश है कि जो जनप्रतिनिधि जिस विधानसभा से निर्वाचित हुआ है, उसे वहीं से दोबारा चुनाव लड़ना होगा और अपने कार्यों का हिसाब देना होगा। यह निर्णय राज्य की राजनीति में जवाबदेही और प्रदर्शन आधारित राजनीति की दिशा में अहम माना जा रहा है।

चुनावी रणनीति में बदलाव का पृष्ठभूमि

(BJP Ticket Policy For 2027) यूपी में मिशन 2027 को लेकर घमासान तेज, पीएम मोदी से लेकर दिग्गज नेताओं के  दौरों से बढ़ी हलचल | UP Assembly election 2027 prepration by BJP and PM  narendra modi amitपार्टी सूत्रों के अनुसार, भाजपा अब उस पुराने चलन से दूरी बना रही है, जिसमें विधायक या मंत्री चुनाव से पहले अपनी सीट छोड़कर दूसरी विधानसभा से चुनाव लड़ने का प्रयास करते थे। संगठन का आकलन है कि ऐसी रणनीति से पुरानी सीट के मतदाताओं में नकारात्मक संदेश जाता है और नई सीट पर पहले से सक्रिय दावेदारों में असंतोष उत्पन्न होता है। इससे पार्टी को संगठनात्मक और चुनावी दोनों स्तरों पर नुकसान उठाना पड़ता है। इसी अनुभव के आधार पर इस बार सीट बदलने पर लगभग पूर्ण रोक लगाने का मन बनाया गया है।

मंत्री बनने के बाद मूल क्षेत्र से दूरी पर सख्ती

जानकारी के अनुसार, प्रदेश में पूर्व में कई ऐसे उदाहरण सामने आए हैं, जब मंत्री बनने के बाद जनप्रतिनिधियों ने अपनी मूल विधानसभा से दूरी बना ली और अगले चुनाव में किसी अन्य क्षेत्र से चुनाव लड़ने की तैयारी की। पार्टी संगठन ने इस प्रवृत्ति को गंभीरता से लेते हुए स्पष्ट कर दिया है कि अब ऐसा नहीं चलेगा। जो मंत्री या विधायक जिस क्षेत्र से चुना गया है, उसे उसी क्षेत्र में रहकर विकास कार्यों और जनसमस्याओं के समाधान का प्रत्यक्ष प्रमाण देना होगा।

प्रदर्शन आधारित मूल्यांकन होगा निर्णायक

भाजपा का फोकस अब पूरी तरह प्रदर्शन आधारित राजनीति पर केंद्रित किया गया है। मंत्रियों का मूल्यांकन केवल उनके विभागीय कार्यों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इस बात की भी गहन समीक्षा होगी कि उनके मंत्री बनने के बाद उनकी विधानसभा को क्या ठोस लाभ मिला। सड़क, बिजली, पेयजल, स्वास्थ्य, शिक्षा और रोजगार जैसे मूलभूत विषयों पर क्षेत्र में हुए कार्यों को आंतरिक सर्वे के माध्यम से परखा जाएगा। यही सर्वे यह तय करेगा कि कौन जनप्रतिनिधि जनता के भरोसे पर खरा उतर रहा है और कौन नहीं।

आंतरिक सर्वे और टिकट वितरण की प्रक्रिया

सूत्रों के अनुसार, भाजपा केंद्रीय नेतृत्व शीघ्र ही उत्तराखंड में एक व्यापक आंतरिक सर्वे आरंभ कराने जा रहा है। इस सर्वे में मंत्रियों और विधायकों की लोकप्रियता, जनसंपर्क, संगठन के साथ समन्वय और जनता के बीच उनकी स्वीकार्यता का आकलन किया जाएगा। इसी सर्वे रिपोर्ट के आधार पर टिकट वितरण पर अंतिम निर्णय लिया जाएगा। संगठन का मानना है कि सीट बदलने से जहां पुरानी विधानसभा में पार्टी कमजोर पड़ती है, वहीं नई सीट पर स्थानीय नेताओं का विरोध चुनावी गणित को बिगाड़ सकता है।

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विधायकों के लिए भी आसान नहीं होगा रास्ता

यह सख्ती केवल मंत्रियों तक सीमित नहीं रहेगी। विधायकों के लिए भी आगामी चुनाव आसान नहीं होने वाले हैं। पार्टी संगठन ने स्पष्ट संदेश दिया है कि किसी भी स्तर पर निष्क्रियता और सुस्ती स्वीकार नहीं की जाएगी। विधायकों को अगले एक वर्ष में अपने क्षेत्र में सक्रियता बढ़ाने और ठोस कार्य दिखाने होंगे। संगठन का रुख साफ है कि चाहे मंत्री हो या विधायक, यदि जनाधार कमजोर है और जनता में स्वीकार्यता नहीं है, तो टिकट कटना तय माना जाएगा।

राजनीतिक और सामाजिक प्रभाव

यह रणनीति न केवल पार्टी के भीतर अनुशासन को मजबूत करेगी, बल्कि मतदाताओं के बीच यह संदेश भी देगी कि अब सत्ता नहीं, बल्कि सेवा और प्रदर्शन ही राजनीति की कसौटी है। इससे प्रशासनिक जवाबदेही, विकास कार्यों की गति और जनहित से जुड़े मुद्दों पर फोकस बढ़ने की संभावना है। आगामी चुनाव से पहले भाजपा का यह कदम राज्य की राजनीति की दिशा और दशा दोनों को प्रभावित कर सकता है।

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