नवीन समाचार, देहरादून, 1 फरवरी 2026 (Inhumanity towards Elders)। उत्तराखंड (Uttarakhand) की राजधानी देहरादून (Dehradun) और हरियाणा (Haryana) के यमुनानगर (Yamunanagar) से सामने आए दो अलग-अलग लेकिन एक-सी प्रकृति के मामलों ने पारिवारिक मूल्यों, वरिष्ठ नागरिकों (Senior Citizens) की सुरक्षा और संपत्ति विवाद (Property Dispute) से उपजती सामाजिक विकृतियों पर गंभीर प्रश्न खड़े कर दिए हैं।
एक ओर देहरादून में सेवानिवृत्त वायुसेना अधिकारी द्वारा बुजुर्ग माता-पिता को घर से बाहर निकाले जाने की घटना सामने आई है, वहीं दूसरी ओर यमुनानगर में एक कलयुगी पुत्र के द्वारा संपत्ति के लालच में जीवित पिता का क्रियाकर्म और पिंडदान कर दिए जाने का आरोप लगा है। दोनों घटनाएं यह दर्शाती हैं कि संपत्ति विवाद किस तरह मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक संबंधों को तोड़ रहा है।
देहरादून में बुजुर्ग माता-पिता को घर से बाहर निकाले जाने का मामला
देहरादून के डिफेंस कालोनी (Defence Colony) क्षेत्र में एक सेवानिवृत्त विंग कमांडर (Retired Wing Commander) द्वारा अपने वृद्ध माता-पिता को घर से बाहर निकालने की घटना सामने आई है। जानकारी के अनुसार, बुजुर्ग दंपति ने जीवन भर की कमाई से जिस मकान का निर्माण कराया, वह उनके पुत्र के नाम पर पंजीकृत है। इसी को लेकर लंबे समय से पारिवारिक विवाद चल रहा था। शनिवार शाम को सेवानिवृत्त अधिकारी कुछ श्रमिकों को साथ लेकर घर पहुंचे और अपने माता-पिता को बाहर निकाल दिया। आरोप है कि उनका सामान भी घर से बाहर फिंकवा दिया गया।
घटना के बाद कॉलोनी में हंगामा हो गया। आसपास के लोगों ने पुलिस और जिला प्रशासन को सूचना दी। मौके पर पुलिस और नायब तहसीलदार पहुंचे। मानवीय दृष्टिकोण अपनाते हुए बुजुर्ग माता-पिता को पुनः घर में प्रवेश कराया गया और सेवानिवृत्त अधिकारी के विरुद्ध शांति भंग की कार्रवाई की गई। पुलिस अधिकारियों के अनुसार, वरिष्ठ नागरिकों की सुरक्षा और सम्मान सर्वोपरि है तथा ऐसे मामलों में कानून के अनुसार कठोर कदम उठाए जाएंगे।
यमुनानगर में जीवित पिता का क्रियाकर्म कराने का आरोप
हरियाणा के यमुनानगर जिले में इससे भी अधिक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। भगवानपुर क्षेत्र निवासी एक बुजुर्ग व्यक्ति ने पुलिस अधीक्षक (Superintendent of Police) को शिकायत देकर आरोप लगाया कि उनके पुत्र ने उन्हें मृत घोषित कर गांव में उनका क्रियाकर्म करा दिया और हरिद्वार (Haridwar) में पिंडदान तक करवा दिया। शिकायत के अनुसार, संपत्ति हड़पने के उद्देश्य से यह सब किया गया। बुजुर्ग ने बताया कि उनकी पत्नी का दो वर्ष पूर्व निधन हो चुका है और उनके दो बेटे तथा एक बेटी हैं, जिनकी शादी हो चुकी है। उन्होंने दोनों बेटों को अलग-अलग मकान बनाकर दिए थे।
शिकायतकर्ता के अनुसार, बड़े बेटे का आचरण ठीक नहीं था और लगातार विवाद के चलते उसे बेदखल कर दिया गया था। इसके बाद वह उत्तराखंड के विकासनगर (Vikasnagar) में काम करने चला गया। इसी दौरान यह जानकारी मिली कि बेटे ने उनकी मृत्यु की झूठी सूचना फैलाई और धार्मिक क्रियाएं कर दीं। दूसरी ओर, आरोपित पुत्र ने इन आरोपों से इंकार करते हुए कहा कि पिता शराब के आदी हैं और उनके आचरण से परिवार की सामाजिक छवि प्रभावित हो रही थी। उसने यह भी कहा कि संपत्ति विवाद का कोई प्रश्न नहीं है, बल्कि उसने पिता से सामाजिक संबंध तोड़ने का निर्णय लिया है।
मानवीय और सामाजिक प्रभाव
इन दोनों घटनाओं ने समाज में बुजुर्गों की स्थिति और पारिवारिक संबंधों की बदलती प्रकृति पर गंभीर चिंता पैदा की है। वरिष्ठ नागरिकों की देखभाल और संपत्ति से जुड़े अधिकारों की सुरक्षा के लिए बने कानून (Senior Citizens Protection Law) की आवश्यकता और प्रभावशीलता पर भी सवाल उठ रहे हैं। क्या संपत्ति के कारण माता-पिता को अपमान और असुरक्षा का सामना करना पड़ेगा। क्या सामाजिक मूल्यों का क्षरण इसी तरह जारी रहेगा। ऐसे प्रश्न अब सार्वजनिक विमर्श का हिस्सा बन रहे हैं।
प्रशासनिक और कानूनी संदर्भ
पुलिस और प्रशासन दोनों ही मामलों में जांच और विधिक प्रक्रिया के अनुसार कार्रवाई कर रहे हैं। अधिकारियों का कहना है कि वरिष्ठ नागरिकों के अधिकारों की रक्षा के लिए कानून मौजूद हैं और आवश्यकता पड़ने पर सख्त कदम उठाए जाएंगे। इन घटनाओं से यह स्पष्ट होता है कि पारिवारिक विवाद केवल निजी मामला नहीं रह गया है, बल्कि यह सामाजिक और कानूनी चुनौती बनता जा रहा है।
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डॉ.नवीन जोशी, पिछले 20 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय, ‘कुमाऊँ विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में पीएचडी की डिग्री प्राप्त पहले और वर्ष 2015 से उत्तराखंड सरकार से मान्यता प्राप्त पत्रकार हैं। 15 लाख से अधिक नए उपयोक्ताओं के द्वारा 150 मिलियन यानी 1.5 करोड़ से अधिक बार पढी गई आपकी अपनी पसंदीदा व भरोसेमंद समाचार वेबसाइट ‘नवीन समाचार’ के संपादक हैं, साथ ही राष्ट्रीय सहारा, हिन्दुस्थान समाचार आदि समाचार पत्र एवं समाचार एजेंसियों से भी जुड़े हैं। देश के पत्रकारों के सबसे बड़े संगठन ‘नेशनल यूनियन ऑफ जर्नलिस्ट्स (इंडिया) उत्तराखंड’ के उत्तराखंड प्रदेश के प्रदेश महामंत्री भी हैं और उत्तराखंड के मान्यता प्राप्त राज्य आंदोलनकारी भी हैं। डॉ. जोशी के बारे में विस्तार से पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करें।
नवीन समाचार’ विश्व प्रसिद्ध पर्यटन नगरी नैनीताल से जून 2009 से इंटरननेट-वेब मीडिया पर सक्रिय, उत्तराखंड का सबसे पुराना ऑनलाइन पत्रकारिता में सक्रिय समूह है। यह उत्तराखंड शासन से मान्यता प्राप्त रहा, अलेक्सा रैंकिंग के अनुसार उत्तराखंड के समाचार पोर्टलों में अग्रणी, गूगल सर्च पर उत्तराखंड के सर्वश्रेष्ठ, भरोसेमंद समाचार पोर्टल के रूप में अग्रणी, समाचारों को नवीन दृष्टिकोण से प्रस्तुत करने वाला ऑनलाइन समाचार पोर्टल भी है।













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