सरकारी पेंशन के बावजूद ले रहे वृद्धावस्था और विधवा पेंशन, 1363 अपात्र सेवानिवृत्त कर्मियों पर जांच की आंच

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-30-35 हजार से अधिक सरकारी पेंशन के बावजूद 1500 की वृद्धावस्था और विधवा पेंशन पर भी डोली नीयत

नवीन समाचार, देहरादून, 5 फरवरी 2026 (UK-Pension Fraud)। उत्तराखंड (Uttarakhand) की राजधानी देहरादून (Dehradun) से एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने सामाजिक सुरक्षा योजनाओं की पारदर्शिता और प्रशासनिक निगरानी के साथ सरकारी अधिकारियों-कर्मचारियों की नीयत पर गंभीर प्रश्न खड़े कर दिए हैं। राज्य में सरकारी सेवा से सेवानिवृत्त होकर नियमित पेंशन प्राप्त करने वाले 1363 से अधिक पेंशनरों के नाम समाज कल्याण विभाग की वृद्धावस्था और विधवा पेंशन सूची में भी दर्ज पाए गए हैं।

Caught in apathy and red tape, Delhi's aged have been waiting for their Rs  2,000-pension since 2013प्राप्त जानकारी के अनुसार यह खुलासा महालेखाकार उत्तराखंड कार्यालय द्वारा किए गए सत्यापन के दौरान हुआ है, जिससे सरकारी खजाने और जरूरतमंद लाभार्थियों के अधिकारों पर सीधा प्रभाव पड़ता है। महालेखाकार उत्तराखंड कार्यालय द्वारा हाल ही में समाज कल्याण विभाग की विभिन्न पेंशन योजनाओं का विस्तृत परीक्षण किया गया। इस प्रक्रिया में विधवा पेंशन और वृद्धावस्था पेंशन के आंकड़ों का मिलान राज्य के सरकारी कर्मचारियों की पेंशन सूची से किया गया।

जांच में सामने आया कि कुल 1363 ऐसे सरकारी पेंशनर हैं, जिनका आधार कार्ड विवरण सरकारी पेंशन के साथ-साथ समाज कल्याण विभाग की पेंशन योजनाओं में भी दर्ज है। यह स्थिति नियमों के प्रतिकूल मानी जा रही है।

दोहरी पेंशन का कैसे हुआ खुलासा

राज्य में वर्तमान में समाज कल्याण विभाग के अंतर्गत 7.80 लाख से अधिक लोग वृद्धावस्था और विधवा पेंशन का लाभ ले रहे हैं। इनमें लगभग 5 लाख 61 हजार 306 लाभार्थी वृद्धावस्था पेंशन तथा 2 लाख 19 हजार 651 महिलाएं विधवा पेंशन प्राप्त कर रही हैं। इन सभी को सरकार की ओर से 1500 रुपये प्रतिमाह की सहायता दी जाती है। महालेखाकार कार्यालय के अधिकारियों के अनुसार, डाटा मिलान से यह स्पष्ट हुआ है कि कुछ सरकारी पेंशनर नियमित मासिक पेंशन के साथ-साथ इन योजनाओं का भी लाभ उठा रहे हैं, जो सामाजिक न्याय की भावना के विपरीत है।

सरकार से 15 दिन में मांगी गई रिपोर्ट

महालेखाकार उत्तराखंड ने इस संबंध में मुख्य सचिव और वित्त सचिव को औपचारिक पत्र भेजकर पूरे प्रकरण की जानकारी दी है। पत्र के साथ ऐसे सभी पेंशनरों की सूची प्रमाण स्वरूप संलग्न की गई है। महालेखाकार ने स्पष्ट किया है कि समाज कल्याण विभाग की पेंशन योजनाएं आर्थिक रूप से कमजोर और आजीविका के स्थायी साधन से वंचित लोगों के लिए हैं। इसलिए पात्रता शर्तों और योजना प्रावधानों के अनुरूप प्रत्येक मामले की जांच आवश्यक है। सरकार से 15 दिन के भीतर वस्तुस्थिति स्पष्ट करते हुए रिपोर्ट देने को कहा गया है।

आय प्रमाणपत्र पर उठे सवाल

इस पूरे मामले में सबसे अहम प्रश्न आय प्रमाणपत्र को लेकर सामने आया है। समाज कल्याण विभाग के मानकों के अनुसार वृद्धावस्था और विधवा पेंशन के लिए आवेदक की मासिक आय चार हजार रुपये से अधिक नहीं होनी चाहिए। आवेदन के समय राजस्व विभाग द्वारा जारी आय प्रमाण पत्र अनिवार्य होता है। जबकि सरकारी पेंशन पाने वाले सेवानिवृत्त कर्मचारियों को औसतन 30 से 35 हजार रुपये या उससे अधिक मासिक पेंशन मिलती है। ऐसे में यह सवाल उठ रहा है कि इतनी अधिक आय होने के बावजूद चार हजार रुपये मासिक आय का प्रमाणपत्र किस आधार पर जारी किया गया।

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सरकार की प्रतिक्रिया और आगे की कार्रवाई

वित्त सचिव दिलीप जावलकर ने कहा है कि यह मामला संज्ञान में लिया गया है और इसकी गहन जांच कराई जाएगी। जांच में जो भी व्यक्ति दोषी पाए जाएंगे, उनसे नियमों के अनुसार धन की वसूली की जाएगी और कड़ी कार्रवाई भी की जाएगी। यह प्रकरण न केवल सरकारी खजाने की सुरक्षा से जुड़ा है, बल्कि उन वास्तविक जरूरतमंद बुजुर्गों और विधवाओं के अधिकारों से भी संबंधित है, जिनके लिए ये योजनाएं बनाई गई हैं।

यह मामला प्रशासनिक पारदर्शिता, डेटा सत्यापन और सामाजिक योजनाओं की निगरानी को और सुदृढ़ करने की आवश्यकता को रेखांकित करता है। पाठकों से आग्रह है कि इस समाचार से संबंधित अपनी राय और विचार नीचे दिए गए कमेन्ट बॉक्स में अवश्य साझा करें।

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डॉ.नवीन जोशी
डॉ.नवीन जोशी

डॉ.नवीन जोशी, पिछले 20 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय, 'कुमाऊँ विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में पीएचडी की डिग्री प्राप्त पहले और वर्ष 2015 से उत्तराखंड सरकार से मान्यता प्राप्त पत्रकार हैं। 15 लाख से अधिक नए उपयोक्ताओं के द्वारा 150 मिलियन यानी 1.5 करोड़ से अधिक बार पढी गई आपकी अपनी पसंदीदा व भरोसेमंद समाचार वेबसाइट ‘नवीन समाचार’ के संपादक हैं, साथ ही राष्ट्रीय सहारा, हिन्दुस्थान समाचार आदि समाचार पत्र एवं समाचार एजेंसियों से भी जुड़े हैं। देश के पत्रकारों के सबसे बड़े संगठन 'नेशनल यूनियन ऑफ जर्नलिस्ट्स (इंडिया) उत्तराखंड' के उत्तराखंड प्रदेश के प्रदेश महामंत्री भी हैं और उत्तराखंड के मान्यता प्राप्त राज्य आंदोलनकारी भी हैं। डॉ. जोशी के बारे में विस्तार से पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करें।
नवीन समाचार’ विश्व प्रसिद्ध पर्यटन नगरी नैनीताल से जून 2009 से इंटरननेट-वेब मीडिया पर सक्रिय, उत्तराखंड का सबसे पुराना ऑनलाइन पत्रकारिता में सक्रिय समूह है। यह उत्तराखंड शासन से मान्यता प्राप्त रहा, अलेक्सा रैंकिंग के अनुसार उत्तराखंड के समाचार पोर्टलों में अग्रणी, गूगल सर्च पर उत्तराखंड के सर्वश्रेष्ठ, भरोसेमंद समाचार पोर्टल के रूप में अग्रणी, समाचारों को नवीन दृष्टिकोण से प्रस्तुत करने वाला ऑनलाइन समाचार पोर्टल भी है।

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