नवीन समाचार, देहरादून, 2 दिसंबर 2025 (Cyber Fraudsters Digital Arrest in Dehradun)। उत्तराखण्ड की राजधानी देहरादून के कैंट क्षेत्र से सामने आए एक सनसनीखेज मामले में 87 वर्षीय सेवानिवृत्त शिक्षिका और उनके पति को साइबर ठगों ने पूरे 11 दिन तक तथाकथित डिजिटल अरेस्ट में रखकर 30 लाख से अधिक की भारी धनराशि ठग ली। ठगों ने विदेश में रहने वाले उनके बेटे को गंभीर अपराध में फंसाने का भय दिखाया और दंपति से लगातार वीडियो कॉल पर नजर रखते हुए विभिन्न खातों में लाखों रुपये जमा करवाए। ठगी का खुलासा तब हुआ जब दंपती ने आशंका के बीच एक रिश्तेदार से संपर्क किया और उसके हस्तक्षेप पर पुलिस को जानकारी दी, जिसके बाद मामला खुला।
मुंबई पुलिस के अधिकारी बनकर किया धोखा
पुलिस व संबंधितों से प्राप्त जानकारी के अनुसार 19 नवंबर 2025 को शिक्षिका के मोबाइल पर एक अज्ञात नंबर से फोन आया। कुछ देर बाद वीडियो कॉल हुई, जिसमें पुलिस की वर्दी पहने एक व्यक्ति ने खुद को मुंबई के कोलाबा थाने का अधिकारी बताया। उसने दावा किया कि उनका बेटा विदेश में एक गंभीर अपराध में फंसा है तथा उसके मोबाइल से कुछ संवेदनशील दस्तावेज मिले हैं। ठग ने धमकाते हुए कहा कि अब दंपति को डिजिटल अरेस्ट में रखा जाएगा और वे घर से बाहर कदम भी नहीं रख सकते।
भय दिखाकर दंपती को किया पूरी तरह अलग
ठगों ने दंपति को निर्देश दिया कि किसी से बात न करें, कहीं न जाएँ और लगातार वीडियो कॉल पर बने रहें, अन्यथा उनके बेटे को आजीवन कारावास हो सकता है। इस धमकी के कारण दंपति मनोवैज्ञानिक दबाव में आ गए और ठगों के हर निर्देश का पालन करने लगे।
11 दिन तक लगातार नजर, फर्जी पत्रों से बनाया दबाव-फिर बैंक खातों में करवाई बड़ी धनराशि की निकासी
ठगों ने 19 नवंबर को ही अलग-अलग खातों में 27 लाख 12 हजार रुपये ट्रांसफर करवाए। अगले दिन 20 नवंबर को सर्वोच्च न्यायालय के ट्रांजेक्शन विभाग के नाम से फर्जी पत्र दिखाकर 2 लाख 5 हजार रुपये और जमा करवाए गए। ठग स्वयं को कभी मुंबई पुलिस, कभी केंद्रीय जांच एजेंसी एवं कभी सर्वोच्च न्यायालय का अधिकारी बताकर दबाव बनाते रहे।
घर को बना दिया कैदखाना
दंपति का कहना है कि इन 11 दिनों में वे घर के किसी कमरे में अकेले भी नहीं जा सकते थे। हर समय वीडियो कॉल पर ठग की निगरानी रहती थी। ठग कभी फर्जी नोटिस भेजते, कभी डराते और कभी बेटे को बचाने का झांसा देकर धनराशि की मांग बढ़ाते।
रिश्तेदार से संपर्क के बाद सामने आया सच
जब ठगों ने और धन की मांग की परंतु दंपति के पास धन नहीं बचा, तब उन्होंने जोखिम उठाकर अपने एक रिश्तेदार से संपर्क किया। रिश्तेदार ने तुरंत पुलिस से संपर्क किया। कैंट थाना पुलिस और साइबर सेल ने दंपति की बात सुनकर तत्काल जांच प्रारंभ की।
खातों का पता चला कई राज्यों से जुड़ा
जांच में सामने आया कि धनराशि गुजरात, राजस्थान और बिहार के कई जिलों के खातों में भेजी गई थी। पुलिस ने इन खातों को फ्रीज करने तथा धन की वापसी की संभावना तलाशने के साथ ही कॉल और डिजिटल माध्यमों के जरिए ठगों का नेटवर्क पहचानने की प्रक्रिया शुरू कर दी है।
अज्ञात आरोपियों के खिलाफ अभियोग दर्ज, जांच तेज
पीड़िता की तहरीर पर साइबर थाना देहरादून में अज्ञात आरोपितों के विरुद्ध अभियोग दर्ज कर लिया गया है। पुलिस ने कहा कि डिजिटल ठगी के इस प्रकार के मामले गंभीर मनोवैज्ञानिक दबाव के जरिए किए जाते हैं और वरिष्ठ नागरिक इनका सबसे अधिक शिकार बनते हैं। मामले में विस्तृत जांच जारी है।
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डॉ.नवीन जोशी, पिछले 20 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय, ‘कुमाऊँ विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में पीएचडी की डिग्री प्राप्त पहले और वर्ष 2015 से उत्तराखंड सरकार से मान्यता प्राप्त पत्रकार हैं। 15 लाख से अधिक नए उपयोक्ताओं के द्वारा 150 मिलियन यानी 1.5 करोड़ से अधिक बार पढी गई आपकी अपनी पसंदीदा व भरोसेमंद समाचार वेबसाइट ‘नवीन समाचार’ के संपादक हैं, साथ ही राष्ट्रीय सहारा, हिन्दुस्थान समाचार आदि समाचार पत्र एवं समाचार एजेंसियों से भी जुड़े हैं। देश के पत्रकारों के सबसे बड़े संगठन ‘नेशनल यूनियन ऑफ जर्नलिस्ट्स (इंडिया) उत्तराखंड’ के उत्तराखंड प्रदेश के प्रदेश महामंत्री भी हैं और उत्तराखंड के मान्यता प्राप्त राज्य आंदोलनकारी भी हैं। डॉ. जोशी के बारे में विस्तार से पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करें।
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