16 जनवरी 2026 के नए शासनदेश से बदली वर्कचार्ज कर्मचारियों की पेंशन पात्रता, कर्मचारियों में नाराजगी, नैनीताल में विरोध प्रदर्शन का ऐलान

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नवीन समाचार, नैनीताल, 19 जनवरी 2026 (Anger on GO of Pension)। उत्तराखंड के नैनीताल जनपद में लोक निर्माण विभाग और सिंचाई विभाग के नियमित व वर्कचार्ज कर्मचारियों (Work Charge Employees) के बीच पेंशन (Pension) को लेकर जारी नए शासनादेश (Government Order) के बाद असंतोष तेज हो गया है। उत्तराखंड शासन के वित्त (पेंशन) अनुभाग ने 16 जनवरी 2026 को एक शासनादेश जारी कर वर्कचार्ज कर्मचारियों की पेंशन पात्रता (Pension Eligibality) के लिए नए प्रावधान लागू किए हैं, जिसे तत्काल प्रभाव से लागू किया गया।

Anger On GO Of Pensionकर्मचारी संगठनों का कहना है कि इससे 1980 से 2025 के बीच कार्यरत व सेवानिवृत्त हुए हजारों कर्मियों पर प्रतिकूल असर पड़ेगा, जबकि शासन का पक्ष है कि व्यवस्था के अनुरूप पात्रता तय की गई है और पूर्व में अतिरिक्त भुगतान की गई पेंशन धनराशि की वसूली नहीं होगी।

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शासनादेश के बाद पेंशन व्यवस्था पर विवाद और नैनीताल में आंदोलन की तैयारी

16 जनवरी 2026 के शासनादेश में क्या बदला

वित्त (पेंशन) अनुभाग (Finance – Pension Section) के 16 जनवरी 2026 के शासनादेश के अनुसार, 1 अक्टूबर 2005 से पूर्व विनियमित वर्कचार्ज कार्मिकों को ही पुरानी पेंशन योजना (Old Pension Scheme) का लाभ मिलेगा। इसके बाद विनियमित या कार्यरत कर्मचारियों को नई पेंशन प्रणाली (New Pension System) अथवा एकीकृत पेंशन योजना (Unified Pension Scheme) के अंतर्गत लाए जाने का प्रावधान किया गया है।

शासनादेश में यह भी कहा गया है कि कई मामलों में पूर्व में जोड़ी गई वर्कचार्ज सेवा को निरस्त करते हुए पेंशन का पुनरीक्षण किया जाएगा और आगे से केवल न्यूनतम आवश्यक सेवा अवधि को ही जोड़ने का निर्णय लिया गया है। हालांकि शासन ने यह स्पष्ट किया है कि पूर्व में अतिरिक्त रूप से भुगतान की गई पेंशन धनराशि की वसूली नहीं की जाएगी।

शासनादेश में समग्र रूप से क्या कहा गया है

1) आदेश किस विषय पर है

यह शासनादेश वर्कचार्ज कर्मचारियों की पेंशन पात्रता (कौन पेंशन का हकदार होगा) और वर्कचार्ज सेवा को पेंशन में जोड़ने/न जोड़ने (qualifying service) की व्यवस्था को लेकर जारी किया गया है।

2) आदेश कब से लागू होगा

शासनादेश में स्पष्ट कहा गया है कि इसे तत्काल प्रभाव से लागू किया जा रहा है।
मतलब—16 जनवरी 2026 के बाद होने वाले निर्णय/कार्रवाई इसी नए प्रावधान के अनुसार होगी।


3) पुरानी पेंशन किसे मिलेगी, किसे नहीं

(क) 1 अक्टूबर 2005 “कट-ऑफ” तिथि बनाई गई

शासनादेश के अनुसार—

  • 01 अक्टूबर 2005 से पहले जिन वर्कचार्ज कार्मिकों का विनियमन (Regularization/Regulation) हो चुका है, उन्हें पुरानी पेंशन योजना का लाभ मिलेगा।

  • 01 अक्टूबर 2005 के बाद जिनका विनियमन हुआ है या जो इसके बाद की अवधि में कार्यरत रहे, उन्हें पुरानी पेंशन योजना के स्थान पर:

    • नई पेंशन प्रणाली (NPS / New Pension System) या

    • एकीकृत पेंशन योजना (UPS / Unified Pension Scheme)
      के अंतर्गत लाया जाएगा।

यानी शासनादेश का मुख्य आधार यह है कि 01 अक्टूबर 2005 से पहले विनियमित वर्कचार्ज ही पुरानी पेंशन के पात्र होंगे।


4) वर्कचार्ज सेवा जोड़ने (count) पर सबसे बड़ा बदलाव

शासनादेश में कहा गया है कि—

(क) कई मामलों में पहले जो वर्कचार्ज सेवा जोड़ी गई थी, उसे निरस्त किया जाएगा

अर्थात, जिन प्रकरणों में पहले वर्कचार्ज अवधि को पेंशन हेतु जोड़कर लाभ दिया गया था, अब उस सेवा-गणना को हटाकर प्रकरणों का पुनरीक्षण (Reassessment/Revision) किया जाएगा।

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(ख) भविष्य में केवल “न्यूनतम आवश्यक सेवा अवधि” ही जोड़ी जाएगी

शासनादेश के अनुसार आगे से पेंशन गणना में सिर्फ वही सेवा अवधि जोड़ी जाएगी जो न्यूनतम आवश्यक/अनिवार्य रूप से नियमों में मान्य होगी।
मतलब—पहले की तरह अतिरिक्त/पूर्ण वर्कचार्ज अवधि जोड़ने की छूट सीमित की जा रही है।


5) पेंशन का पुनरीक्षण क्या होगा

शासनादेश के अनुसार जहां पहले पेंशन तय हो चुकी है और—

  • वर्कचार्ज सेवा जोड़कर पेंशन तय की गई थी,

  • या पुरानी पेंशन के अंतर्गत लाभ दिया गया था,

ऐसे मामलों में नियमों के अनुसार पेंशन का पुनरीक्षण किया जाएगा।
यानी पेंशन को दोबारा गणना कर संशोधित किया जाएगा।


6) सबसे बड़ी राहत: वसूली नहीं होगी

शासनादेश में यह भी साफ किया गया है कि—

  • यदि पहले किसी कर्मचारी को अतिरिक्त पेंशन धनराशि का भुगतान हो चुका है,

  • और अब पुनरीक्षण के बाद वह अतिरिक्त/अनुचित माना जाता है,

तो भी उस अतिरिक्त भुगतान की वसूली नहीं की जाएगी।

यह बिंदु कर्मचारियों के लिए महत्वपूर्ण है क्योंकि इससे पिछली पेंशन धनराशि लौटाने का दबाव नहीं बनेगा।

यह बदलाव क्यों महत्वपूर्ण है? क्योंकि पेंशन केवल आर्थिक सुविधा नहीं, बल्कि सेवा के बाद जीवन-यापन की सुरक्षा है। ऐसे में पात्रता की परिभाषा बदलने से हजारों परिवारों की मासिक आय और सामाजिक सुरक्षा सीधे प्रभावित हो सकती है।

कर्मचारियों का विरोध: “हजारों लोग पेंशन दायरे से बाहर हो गये”

उत्तराखंड नियमित वर्कचार्ज कर्मचारी संघ लोक निर्माण विभाग नैनीताल (Uttarakhand Regular Workcharge Employees Association – PWD Nainital) ने शासनादेश पर कड़ा विरोध दर्ज किया है। संघ का कहना है कि इस आदेश के बाद वर्ष 1980 से 2025 के बीच कार्यरत और सेवानिवृत्त हुए हजारों कर्मचारी पेंशन के दायरे से बाहर हो गये हैं।
संघ के अनुसार, कई सेवानिवृत्त कर्मचारियों और मृतक आश्रितों (Deceased Dependents) को आज तक न तो नियमित किया गया और न ही पेंशन व अन्य देयकों का भुगतान हुआ। इससे वे गंभीर आर्थिक संकट का सामना कर रहे हैं।

यह प्रश्न भी उठ रहा है कि जिन कर्मचारियों ने लंबे समय तक सेवा दी, यदि उनकी वर्कचार्ज सेवा जोड़ने के नियम में बदलाव किया गया, तो क्या उनके जीवन-यापन के अधिकार पर असर नहीं पड़ेगा?

न्यायालयों के आदेशों की अवहेलना का आरोप

संघ से जुड़े पदाधिकारियों का आरोप है कि सरकार कर्मचारी विरोधी रवैया अपना रही है और माननीय उच्च न्यायालय उत्तराखंड (Uttarakhand High Court) तथा सर्वोच्च न्यायालय (Supreme Court of India) द्वारा दिए गए आदेशों की अवहेलना की गई है। उनका कहना है कि कर्मचारियों को जो अधिकार और लाभ मिले, वे न्यायालयों के हस्तक्षेप से मिले, सरकार की पहल से नहीं।
संघ ने यह भी कहा कि लोक निर्माण विभाग में सैकड़ों रिक्त पद होने के बावजूद वर्कचार्ज और दैनिक कर्मचारियों को नियमित नहीं किया गया।

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विभागीय व्यवस्था पर भी सवाल: रिक्त पद, नियमितीकरण और अतिक्रमण का उल्लेख

संघ पदाधिकारियों ने लोक निर्माण विभाग में रिक्त पद होने के बावजूद नियमितीकरण न होने पर आपत्ति जताई। इसके साथ ही उनका आरोप है कि सरकारी भूमि और आवासों पर अतिक्रमण (Encroachment) के मामलों में भी कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई।
कर्मचारियों का तर्क है कि यदि विभागीय संसाधन और पद उपलब्ध हैं, तो लंबे समय से कार्यरत कर्मचारियों को सेवा सुरक्षा और पेंशन सुरक्षा क्यों नहीं दी जा रही?

नैनीताल में 19 जनवरी को गांधी चौक पर विरोध का निर्णय

नियमित वर्कचार्ज कर्मचारी संघ नैनीताल ने शासनादेश को कर्मचारी विरोधी बताते हुए 19 जनवरी 2026 को नैनीताल के गांधी चौक (Gandhi Chowk, Nainital) में विरोध प्रदर्शन करने और शासनादेश की होली जलाने का निर्णय लिया है। संघ ने प्रदेश भर के कर्मचारियों से एकजुट होकर चरणबद्ध आंदोलन शुरू करने का आह्वान किया है।
संघ नेताओं ने चेतावनी दी है कि यदि शासनादेश वापस नहीं लिया गया, तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा, जिसकी जिम्मेदारी राज्य सरकार पर होगी।

आगे क्या हो सकता है: प्रशासनिक स्तर पर संवाद या आंदोलन का विस्तार

अब सबसे अहम सवाल यह है कि शासन और कर्मचारी संगठनों के बीच संवाद की पहल होती है या नहीं। पेंशन नीति में बदलाव सीधे प्रशासन, वित्तीय व्यवस्था और सामाजिक सुरक्षा से जुड़ा विषय है। यदि समाधान नहीं निकला, तो यह आंदोलन केवल नैनीताल तक सीमित नहीं रहेगा और प्रदेश स्तर पर लोक निर्माण विभाग तथा सिंचाई विभाग के कर्मचारी संगठनों की गतिविधियां बढ़ सकती हैं।

सरकारी नीति में बदलाव के साथ कर्मचारियों के हितों का संतुलन बनना क्यों जरूरी है? क्योंकि पेंशन जैसी व्यवस्था विश्वास पर टिकती है—और विश्वास टूटने पर असंतोष स्वाभाविक रूप से आंदोलन में बदलता है।

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