नवीन समाचार, नैनीताल, 18 जनवरी 2026 (Baby Bhaiya-Paise Double)। ‘बाबू भैया… 25 दिन में पैसा डबल’ (Baby Bhaiya-Paise Double)) फिल्म हेराफेरी के इस डायलॉग के माध्यम से उत्तराखंड के हल्द्वानी में लोगों से करोड़ों रुपये ऐंठ लिए गए। उत्तराखंड के नैनीताल जनपद के हल्द्वानी में “25 महीने में पैसा दोगुना” करने का दावा कर हजारों लोगों से करोड़ों रुपये जमा कराने का मामला सामने आया है।
जनसुनवाई के दौरान निवेशकों की शिकायत पर कुमाऊं आयुक्त (Commissioner Kumaon) दीपक रावत ने GMFX ग्लोबल लिमिटेड (GMFX Global Limited) के कार्यालय पर छापा मारकर जांच की, जिसमें कंपनी दस्तावेज, लेनदेन विवरण और पोर्टल से जुड़ा सत्यापन योग्य डाटा नहीं दिखा सकी।
जांच में सामने आया कि करीब 8 हजार निवेशकों से लगभग 39 करोड़ रुपये जुटाए गए, जबकि कंपनी के बैंक खातों में नगण्य राशि मिली। इस प्रकरण का सामाजिक असर यह है कि कई लोगों ने लालच में कर्ज लेकर निवेश किया और अब वे बैंक नोटिस, आर्थिक दबाव और मानसिक तनाव झेल रहे हैं।
कुमाऊं आयुक्त की कार्रवाई से खुली कथित निवेश योजना की परतें
हल्द्वानी स्थित कैंप कार्यालय में आयोजित जनसुनवाई में कुसुमखेड़ा निवासी एक व्यक्ति ने शिकायत की कि GMFX ग्लोबल लिमिटेड ने निवेश के नाम पर धनराशि ली, लेकिन तय अवधि पर पैसा वापस नहीं किया। शिकायत को गंभीर मानते हुए आयुक्त दीपक रावत ने कंपनी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) विमल रावत को तलब किया, लेकिन वह कोई संतोषजनक जवाब नहीं दे सके। इसके बाद आयुक्त प्रशासनिक अधिकारियों की टीम के साथ डहरिया क्षेत्र की सत्यलोक कॉलोनी में कंपनी के कार्यालय पहुंचे और मौके पर छापा मारकर जांच शुरू की।
दस्तावेज और ऑनलाइन डाटा नहीं दिखा सकी कंपनी
छापेमारी के दौरान कंपनी से पंजीकरण (Registration) से संबंधित अभिलेख, लेनदेन विवरण (Transaction Details) और बैलेंस शीट (Balance Sheet) मांगी गई, लेकिन सीईओ कोई भी प्रपत्र प्रस्तुत नहीं कर सके। कंपनी के पोर्टल पर उपलब्ध ऑनलाइन डाटा भी सत्यापित रूप में नहीं दिखाया जा सका। इसी दौरान 10–11 निवेशक कार्यालय पहुंच गए और आयुक्त के सामने अपनी जमा धनराशि वापस दिलाने की गुहार लगाने लगे।
सीईओ ने 3900 लोगों की देनदारी की बात स्वीकारी
जांच के दौरान सीईओ विमल रावत ने करीब 3900 लोगों की देनदारी स्वीकार की। उन्होंने यह भी माना कि निवेश के नाम पर प्राप्त धन से व्यक्तिगत रूप से दो स्थानों पर भूमि खरीदी गई। यह तथ्य सामने आने के बाद प्रशासन का संदेह और गहरा हो गया कि कंपनी के नाम पर धन जुटाकर निजी संपत्ति बनाई गई है।
बैंक खातों में केवल कुछ हजार रुपये, जबकि दावा करोड़ों का
- प्रशासनिक जांच में कंपनी के एक बैंक खाते में मात्र 42,455 रुपये और दूसरे खाते में करीब 50,000 रुपये जमा पाए गए। जबकि जांच में सामने आया कि कंपनी ने “25 महीने में पैसा दोगुना” करने का दावा कर करीब 8 हजार लोगों से करीब 39 करोड़ रुपये जुटाए। निवेश बढ़ाने के लिए बिचौलियों को प्रोत्साहन राशि (Incentive) भी दी जा रही थी।
लोगों ने कर्ज लेकर निवेश किया, अब बैंक नोटिस से बढ़ा तनाव
जांच में यह भी सामने आया कि कई निवेशकों ने धन दोगुना होने के लालच में ऋण लेकर निवेश कर दिया।
- एक व्यक्ति ने बैंक से नौ लाख रुपये का ऋण लेकर निवेश किया और अब ऋण चुकाने के लिए बैंक की ओर से नोटिस मिल रहे हैं। इससे वह मानसिक तनाव में है।
- एक अन्य व्यक्ति ने छह लाख रुपये निवेश किए।
- एक फौजी ने पांच लाख रुपये निवेश किया।
- इन निवेशकों को दोगुनी राशि मिलना तो दूर, मूल जमा राशि वापस पाने के लिए भी कार्यालयों के चक्कर काटने पड़ रहे हैं। यह सवाल अब आम लोगों के बीच तेजी से उठ रहा है कि ऐसी योजनाओं का संचालन आखिर किस निगरानी में चल रहा था?
ट्रेडिंग पंजीकरण मिला, लेकिन संचालन में अनियमितता
अधिकारियों के अनुसार कंपनी ट्रेडिंग (Trading) के लिए पंजीकृत पाई गई, लेकिन संचालन में अनियमितताएं सामने आईं। यह भी बताया गया कि कंपनी में सीईओ के साथ बरेली (Bareilly) और आसपास के कुछ लोग शामिल हैं। प्रशासन को आशंका है कि यह मल्टी लेवल मार्केटिंग (Multi Level Marketing) या पिरामिड स्कीम (Pyramid Scheme) की तरह संचालित हो रही थी।
अभियोग दर्ज करने और कानूनी कार्रवाई के निर्देश
आयुक्त दीपक रावत ने प्रारंभिक जांच के बाद मल्टी लेवल मार्केटिंग/पिरामिड स्कीम के तहत ठगी, कंपनी अधिनियम (Company Act) के उल्लंघन, कंपनी के नाम पर धन लेकर व्यक्तिगत संपत्ति बनाने और पीड़ितों की शिकायतों के आधार पर अभियोग दर्ज करने के निर्देश दिए हैं। अधिकारियों का कहना है कि यह प्रकरण बड़े स्तर की वित्तीय धोखाधड़ी की ओर संकेत करता है और आगे विस्तृत जांच के बाद कार्रवाई का दायरा बढ़ सकता है।
जनसुनवाई में खेल विवाद भी उठा, जूडो प्रतियोगिता के परिणाम निरस्त
इसी जनसुनवाई के दौरान गौलापार स्थित अन्तरराष्ट्रीय स्टेडियम में शुक्रवार को हुई जूडो अंडर-19 और अंडर-14 प्रतियोगिता के परिणाम को लेकर खिलाड़ियों ने शिकायत दर्ज कराई। खिलाड़ियों ने कहा कि रेफरी (Referee) योग्य नहीं थे और निर्णय से वे असंतुष्ट हैं। इस पर आयुक्त ने जिला क्रीड़ा अधिकारी को प्रतियोगिता का परिणाम निरस्त करने के निर्देश दिए और कहा कि मैच रविवार सुबह फिर से कराए जाएं। साथ ही निर्देश दिए गए कि प्रतियोगिता में योग्य खिलाड़ियों का चयन हो और नियुक्त रेफरी को खेल नियमों की सही समझ होना सुनिश्चित किया जाए।
क्यों यह मामला आम लोगों के लिए चेतावनी है?
यह घटना केवल एक कंपनी तक सीमित नहीं है। यह बताती है कि—
- लालच में लोग ऋण लेकर भी निवेश कर रहे हैं।
- अवैध या संदिग्ध निवेश योजनाएं रोजगार, बचत और परिवार की आर्थिक सुरक्षा को जोखिम में डाल रही हैं।
- प्रशासनिक निगरानी, वित्तीय साक्षरता और कानून के सख्त अनुपालन की जरूरत और बढ़ जाती है।
अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि अभियोग दर्ज होने के बाद निवेशकों की धनराशि की वसूली, संपत्तियों की पहचान और दोषियों पर कठोर कार्रवाई किस गति से होती है।
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