नवीन समाचार, देहरादून, 23 फरवरी 2026 (Pakistani-Afghanistani)। उत्तराखंड (Uttarakhand) में नागरिकता संशोधन अधिनियम (Citizenship Amendment Act-CAA) के तहत पाकिस्तान (Pakistan) और अफगानिस्तान (Afghanistan) से आये 153 शरणार्थियों को भारतीय नागरिकता प्रदान की गयी है। इनमें 147 लोग पाकिस्तान और 6 लोग अफगानिस्तान से हैं। नागरिकता मिलने के बाद अब ये परिवार मतदान, संपत्ति क्रय, शिक्षा, रोजगार और सरकारी योजनाओं का लाभ लेने के पात्र हो गये हैं, जिससे इनके सामाजिक और आर्थिक जीवन में महत्वपूर्ण बदलाव की संभावना बनी है।
क्या है पूरा मामला और क्यों महत्वपूर्ण
राज्य के गृह विभाग (Home Department) की विस्तृत जांच के बाद इन आवेदनों को स्वीकृति दी गयी। पात्रता के अनुसार ये सभी लोग धार्मिक उत्पीड़न से बचने के लिए 31 दिसंबर 2014 से पहले भारत आये थे और लंबे समय से उत्तराखंड के विभिन्न जनपदों में निवास कर रहे थे।
प्रमुख रूप से ये परिवार सिंध (Sindh) और बलूचिस्तान (Balochistan) क्षेत्र के हिंदू परिवार बताए जा रहे हैं। अधिकतर शरणार्थी देहरादून (Dehradun), हरिद्वार (Haridwar), ऊधम सिंह नगर (Udham Singh Nagar), नैनीताल (Nainital) और कुछ उत्तरकाशी (Uttarkashi) में बसे हैं।
मुख्यमंत्री की प्रतिक्रिया
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी (Pushkar Singh Dhami) ने इसे शरणार्थियों के लिए बड़ा मानवीय कदम बताया। उनके अनुसार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) के नेतृत्व में लागू इस कानून से पड़ोसी देशों में उत्पीड़न झेल चुके हिंदू, सिख, बौद्ध, जैन, पारसी और ईसाई समुदाय के लोगों को सम्मानजनक जीवन का अवसर मिल रहा है।
नागरिकता मिलने के बाद क्या बदल जाएगा
नागरिकता प्राप्त करने वाले लोगों को अब—
मतदाता सूची में नाम दर्ज कराने का अधिकार
आधार कार्ड (Aadhaar) और वोटर आईडी (Voter ID) बनवाने की सुविधा
पासपोर्ट (Passport) के लिए आवेदन का अधिकार
सरकारी योजनाओं, शिक्षा और नौकरियों में पात्रता
संपत्ति खरीदने का वैधानिक अधिकार
विशेषज्ञों के अनुसार यह कदम इन परिवारों के सामाजिक मुख्यधारा में समावेशन की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
आवेदन और जांच की स्थिति
सूत्रों के अनुसार पाकिस्तान से आये कुल 189 लोगों ने नागरिकता के लिए आवेदन किया था, जिनमें से 51 आवेदनों पर अभी भी विचार चल रहा है। वहीं देहरादून में रह रहे लगभग 40–50 शरणार्थियों के प्रकरण भी जांच प्रक्रिया में हैं।
सरकार ने स्पष्ट किया है कि नागरिकता राज्य और केंद्र सरकार के समन्वय तथा बहुस्तरीय सत्यापन के बाद ही दी जाती है, जिससे प्रक्रिया की पारदर्शिता बनी रहे।
सम्मान समारोह की तैयारी
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह (Amit Shah) आगामी 7 मार्च को हरिद्वार में नागरिकता प्राप्त करने वाले लोगों के सम्मान कार्यक्रम में शामिल होंगे। इसे राज्य स्तर पर महत्वपूर्ण कार्यक्रम माना जा रहा है।
कानून की पृष्ठभूमि
नागरिकता संशोधन अधिनियम 2019, नागरिकता अधिनियम 1955 में संशोधन है। यह अफगानिस्तान, पाकिस्तान और बांग्लादेश से आये गैर-मुस्लिम समुदायों के उन प्रवासियों को नागरिकता का त्वरित मार्ग प्रदान करता है, जो 31 दिसंबर 2014 से पहले भारत आ चुके हैं। यह कानून संसद से दिसंबर 2019 में पारित हुआ और मार्च 2024 में इसकी अधिसूचना जारी होने के बाद देशभर में लागू किया गया।
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डॉ.नवीन जोशी, पिछले 20 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय, ‘कुमाऊँ विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में पीएचडी की डिग्री प्राप्त पहले और वर्ष 2015 से उत्तराखंड सरकार से मान्यता प्राप्त पत्रकार हैं। 15 लाख से अधिक नए उपयोक्ताओं के द्वारा 150 मिलियन यानी 1.5 करोड़ से अधिक बार पढी गई आपकी अपनी पसंदीदा व भरोसेमंद समाचार वेबसाइट ‘नवीन समाचार’ के संपादक हैं, साथ ही राष्ट्रीय सहारा, हिन्दुस्थान समाचार आदि समाचार पत्र एवं समाचार एजेंसियों से भी जुड़े हैं। देश के पत्रकारों के सबसे बड़े संगठन ‘नेशनल यूनियन ऑफ जर्नलिस्ट्स (इंडिया) उत्तराखंड’ के उत्तराखंड प्रदेश के प्रदेश महामंत्री भी हैं और उत्तराखंड के मान्यता प्राप्त राज्य आंदोलनकारी भी हैं। डॉ. जोशी के बारे में विस्तार से पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करें।
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