नवीन समाचार, नैनीताल, 13 जुलाई 2025 (Panchayat Elections Not-Double Voter list Banned)। उत्तराखंड जनपदों में प्रस्तावित पंचायत चुनावों को लेकर नैनीताल हाईकोर्ट ने सोमवार को एक महत्वपूर्ण निर्णय सुनाया। अदालत ने स्पष्ट किया है कि राज्य में पंचायत चुनाव नियत समय पर संपन्न हो सकते हैं, लेकिन एक व्यक्ति का नाम शहरी एवं ग्रामीण—दोनों प्रकार की मतदाता सूचियों में होना विधिक व चुनावी आचार संहिता के विरुद्ध है।
दोहरी मतदाता सूची को लेकर हाईकोर्ट का सख्त रुख
प्राप्त जानकारी के अनुसार, नैनीताल हाईकोर्ट ने उत्तराखंड में दोहरी मतदाता सूची यानी नगर निकाय एवं ग्राम पंचायत—दोनों में एक ही व्यक्ति के नाम दर्ज होने को गैरकानूनी करार दिया है। न्यायालय ने इसे चुनावी नैतिकता और पारदर्शिता के विरुद्ध बताते हुए यह स्पष्ट किया कि ऐसी स्थिति में नामांकन अमान्य माना जा सकता है।
राज्य निर्वाचन आयोग की पुनर्विचार याचिका खारिज
उल्लेखनीय है कि राज्य निर्वाचन आयोग ने न्यायालय के 11 जुलाई को दिये गये आदेश को चुनौती देते हुए पुनर्विचार याचिका (रिव्यू पिटिशन) दाखिल की थी। आयोग ने तर्क दिया था कि मतदाता सूची का निर्धारण संविधान के अनुच्छेद 243K एवं उत्तराखंड पंचायतराज अधिनियम के तहत उसके क्षेत्राधिकार में आता है।
हालांकि, उच्च न्यायालय ने यह दलील अस्वीकार करते हुए दोहराया कि दोहरी मतदाता सूची नैतिक एवं विधिक दृष्टि से स्वीकार्य नहीं है। न्यायालय ने यह भी कहा कि चुनावों की पारदर्शिता बनाए रखना सर्वोच्च प्राथमिकता है, और दोहरे नामांकन जैसी स्थिति इसकी विश्वसनीयता को प्रभावित करती है।
चुनाव नहीं टले, आपत्ति चुनाव के बाद याचिका से करें
न्यायालय ने अपने आदेश में यह भी कहा कि राज्य में पंचायत चुनावों की प्रक्रिया तय कार्यक्रम के अनुसार जारी रह सकती है, उस पर कोई रोक नहीं लगाई गई है। यदि किसी व्यक्ति को चुनाव प्रक्रिया से आपत्ति हो तो वह संबंधित न्यायालय में चुनाव याचिका (Election Petition) के रूप में आपत्ति दर्ज करा सकता है।
अब चुनाव प्रक्रिया व 2 मतदाता सूची में नाम दर्ज वालों का क्या होगा – आयोग ने बताया (Panchayat Elections Not-Double Voter list Banned)
राज्य निर्वाचन आयोग ने स्पष्ट किया है कि आगामी पंचायत चुनाव पूर्व में जारी अधिसूचना के आधार पर ही संपन्न कराए जाएंगे। आयोग के सचिव राहुल गोयल ने बताया कि नैनीताल उच्च न्यायालय में हुई सुनवाई के पश्चात आयोग ने यह निर्णय लिया है। इसके तहत चुनाव चिह्न आवंटन की प्रक्रिया प्रारंभ कर दी गई है, जो 15 जुलाई तक चलेगी। इसके बाद भी समस्त चुनावी प्रक्रिया उसी अधिसूचना के अनुसार आगे बढ़ाई जाएगी।
आयोग के अनुसार, नामांकन से लेकर 2 मतदाता सूची में नाम दर्ज होने तक की समस्त प्रक्रिया पूर्ववत मान्य रहेगी। यानी जिन अभ्यर्थियों ने नामांकन किया है अथवा जिनके नाम दो अलग-अलग मतदाता सूची में हैं, उनकी स्थिति में कोई परिवर्तन नहीं किया जाएगा।
उच्च न्यायालय में अगली सुनवाई 11 अगस्त को निर्धारित है। तब तक चुनाव प्रक्रिया पूरी हो चुकी होगी। न्यायालय की ओर से चुनाव प्रक्रिया को न रोके जाने के निर्देशों के पश्चात राज्य निर्वाचन आयोग ने तय कार्यक्रम के अनुसार कार्यवाही जारी रखी है।
ऐसे में यदि किसी भी अभ्यर्थी या पक्ष को निर्वाचन प्रक्रिया से कोई आपत्ति है, तो वह चुनाव संपन्न होने के उपरांत चुनाव याचिका दायर कर सकता है। हालांकि, चुनाव याचिका पर सुनवाई के बाद उच्च न्यायालय द्वारा दिए जाने वाले निर्णय के आधार पर ही कोई कार्रवाई संभव होगी
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