नवीन समाचार, देहरादून, 24 मई 2025 (Dehradun-Administrative Action on EducationMafia)। मुख्यमंत्री के निर्देशों पर उत्तराखंड की राजधानी देहरादून एवं देहरादून जिले में शिक्षा के क्षेत्र में चल रही मनमानी पर जिला प्रशासन की कड़ी कार्यवाही सामने आई है। राजधानी के एक बड़े निजी विद्यालय पर प्रशासन ने 5.2 लाख रुपये का जुर्माना लगा दिया है। माना जा रहा है कि ऐसे कड़े प्रशासनिक कदमों के जारी रहने से राज्य के निजी विद्यालयों ने मनमानी फीस वसूलने पर कुछ हद तक रोक लगेगी।
बिना मान्यता चल रहा था विद्यालय, प्रशासन ने ठोका ₹5.20 लाख का जुर्माना
पुलिस व संबंधितों से प्राप्त जानकारी के अनुसार, भानियावाला क्षेत्र स्थित द प्रसिडेंसी इंटरनेशनल स्कूल पर 100 से अधिक अभिभावकों ने विद्यालय द्वारा की गई मनमानी फीस वृद्धि की शिकायत जिला प्रशासन से की थी। शिकायतों की पुष्टि पर जब जिला अधिकारी सविन बंसल के निर्देश पर स्कूल प्रबंधन को जवाबदेही के लिए बुलाया गया, तो उन्होंने प्रशासन के समक्ष उपस्थित होने से परहेज़ किया। ऐसे में अभिलेखों की जांच की गई तो एक चौंकाने वाला तथ्य सामने आया—विद्यालय की मान्यता मार्च 2025 में समाप्त हो चुकी थी और अब तक नवीनीकरण के लिए कोई आवेदन नहीं किया गया था।
शिक्षा का अधिकार अधिनियम, 2009 की धारा 18 की उपधारा 5 के अंतर्गत, प्री-प्राइमरी से कक्षा-8 तक की कक्षाएं बिना मान्यता संचालित किए जाने के कारण प्रशासन ने दैनिक ₹10,000 की दर से 52 दिनों की कुल ₹5,20,000 की शास्ति आरोपित कर दी है। साथ ही यह स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि यह धनराशि पत्र प्राप्त होने के तीन दिन के भीतर जमा की जाए, अन्यथा वसूली भू-राजस्व की भाँति की जाएगी।
फीस बढ़ोतरी का खेल आया सामने, नामी स्कूलों पर दबाव में आए पीछे (Dehradun-Administrative Action on EducationMafia)
प्रशासनिक सख्ती के बाद स्कूल प्रबंधन में हलचल है। यह मामला केवल एक स्कूल तक सीमित नहीं है। प्रशासन की ‘जीरो टॉलरेंस नीति’ के तहत फीस वसूली और मान्यता नवीनीकरण की जांच लगातार जारी है। इससे पूर्व कई अन्य स्कूलों के विरुद्ध भी कार्यवाही की जा चुकी है। मुख्यमंत्री के स्पष्ट निर्देश हैं कि शिक्षा क्षेत्र में पारदर्शिता लाई जाए और आमजन, विशेषकर अभिभावकों के हितों की रक्षा की जाए।
सूत्रों के अनुसार, शिक्षा माफियाओं द्वारा फर्जी मान्यता पत्रों, मनमाने शुल्क निर्धारण, किताबों व यूनिफॉर्म की बाध्य बिक्री और प्रबंधन में पारदर्शिता की कमी के कारण अभिभावकों को वर्षों से आर्थिक और मानसिक रूप से परेशान होना पड़ रहा था। पहली बार प्रशासन ने गंभीरता से संज्ञान लेते हुए इस व्यवस्था पर कठोर प्रहार किया है।
जिला प्रशासन ने अभिभावकों से अपील की है कि वे किसी भी प्रकार की अनियमितता, शुल्क वृद्धि या अवैध संचालन की जानकारी प्रशासन को दें। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया है कि शिक्षा को व्यवसाय नहीं बनने दिया जाएगा, और ऐसे किसी भी प्रयास को तत्काल दंडात्मक कार्यवाही के अंतर्गत लाया जाएगा। (Dehradun-Administrative Action on EducationMafia)
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डॉ.नवीन जोशी, पिछले 20 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय, ‘कुमाऊँ विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में पीएचडी की डिग्री प्राप्त पहले और वर्ष 2015 से उत्तराखंड सरकार से मान्यता प्राप्त पत्रकार हैं। 15 लाख से अधिक नए उपयोक्ताओं के द्वारा 150 मिलियन यानी 1.5 करोड़ से अधिक बार पढी गई आपकी अपनी पसंदीदा व भरोसेमंद समाचार वेबसाइट ‘नवीन समाचार’ के संपादक हैं, साथ ही राष्ट्रीय सहारा, हिन्दुस्थान समाचार आदि समाचार पत्र एवं समाचार एजेंसियों से भी जुड़े हैं। देश के पत्रकारों के सबसे बड़े संगठन ‘नेशनल यूनियन ऑफ जर्नलिस्ट्स (इंडिया) उत्तराखंड’ के उत्तराखंड प्रदेश के प्रदेश महामंत्री भी हैं और उत्तराखंड के मान्यता प्राप्त राज्य आंदोलनकारी भी हैं। डॉ. जोशी के बारे में विस्तार से पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करें।
नवीन समाचार’ विश्व प्रसिद्ध पर्यटन नगरी नैनीताल से जून 2009 से इंटरननेट-वेब मीडिया पर सक्रिय, उत्तराखंड का सबसे पुराना ऑनलाइन पत्रकारिता में सक्रिय समूह है। यह उत्तराखंड शासन से मान्यता प्राप्त रहा, अलेक्सा रैंकिंग के अनुसार उत्तराखंड के समाचार पोर्टलों में अग्रणी, गूगल सर्च पर उत्तराखंड के सर्वश्रेष्ठ, भरोसेमंद समाचार पोर्टल के रूप में अग्रणी, समाचारों को नवीन दृष्टिकोण से प्रस्तुत करने वाला ऑनलाइन समाचार पोर्टल भी है।














