नैनीताल, एसएनबी (High Court Stayed Ban on Kllegal mining in Kanda)। उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने सोमवार को बागेश्वर जिले की कांडा तहसील सहित अन्य क्षेत्रों में अवैध खड़िया खनन से उत्पन्न पर्यावरणीय संकट मामले की सुनवाई करते हुए खनन पर लगी रोक को जारी रखने का फैसला सुनाया। मुख्य न्यायाधीश जी नरेंदर व न्यायमूर्ति आलोक महरा की खंडपीठ ने आदेश दिया कि टूटी पहाड़ियों के गड्ढों को भरने एवं खनन सामग्री की नीलामी हेतु केंद्रीय भू-जल बोर्ड व भू-वैज्ञानिक विभाग की निगरानी में कार्य किया जाए। मामले की अगली सुनवाई छह सप्ताह बाद निर्धारित की गई है।
खनन पर रोक व गड्ढों की निगरानी
प्राप्त जानकारी के अनुसार उच्च न्यायालय ने स्पष्ट किया है कि अवैध खड़िया खनन से बने गड्ढों को भरने की अनुमति केवल भू-वैज्ञानिक विभाग की जीओ टैगिंग के अधीन दी गई है। यह टैगिंग भविष्य में किसी भी पुनः खोलने की स्थिति में गड्ढा पहली अवस्था में मिल सके इसके लिये आवश्यक होगी। गड्ढों को भरने में होने वाले खर्च की वसूली खनन पट्टाधारकों से की जाएगी।
खनन सामग्री की नीलामी व टेंडर प्रक्रिया
अदालत ने यह भी निर्देशित किया है कि खनन सामग्री की नीलामी पर्यावरणविद शेखर पाठक की अध्यक्षता में कराई जाए तथा इसके लिए सार्वजनिक निकली निकाली जाए। इससे खनन सामग्री का पारदर्शी और जिम्मेदार उपयोग सुनिश्चित होगा।
पूर्व आदेशों की समीक्षा व विस्तृत जांच की आवश्यकता
उल्लेखनीय है कि उच्च न्यायालय ने हाल‑ही में बागेश्वर में खड़िया खनन से पहाड़ियों व गांवों में दरारें पड़ने की ख़बरों पर खुद संज्ञान लिया था। अदालत ने भू‑वैज्ञानिक एवं भू‑जल बोर्ड को जांच रिपोर्ट 13 जून तक प्रस्तुत करने को कहा था, जिसमें स्पष्ट किया गया कि गड्ढों में पानी भर जाने से ढलान कमजोर हो गई है और मानसून के दौरान भू‑क्षरण व भूस्खलन का जोखिम उत्पन्न हो सकता है ।
अवैध खनन के आर्थिक व सामाजिक आयाम
खनन पट्टाधारकों ने अदालत में कहा कि उनके पट्टों की अवधि समाप्त हो रही है और बैंक लोन बोझ उन्हें प्रभावित कर रहा है, इसीलिए रोक हटाकर संचालन की सहुलियत दी जाए। वहीं, अदालत ने कहा कि पट्टाधारकों को आर्थिक राहत की बजाय पर्यावरण सुरक्षा प्राथमिकता दी जाएगी।
सर्वोच्च न्यायालय के आदेश व राज्य सरकार की भूमिका (High Court Stayed Ban on Kllegal mining in Kanda)
इससे पहले सर्वोच्च न्यायालय ने भी उच्च न्यायालय के इस रोक को बरकरार रखा था । राष्ट्रीय हरित प्राधिकरण और एनजीटी ने भूकंपीय अध्ययन के अभाव में खड़िया खनन पर पूरी तरह से रोक लगाई है ।
उच्च न्यायालय ने स्पष्ट किया कि अल्मोड़ा क्षेत्र के मैग्नेसाइट खनन में नियमों का पालन हो रहा है, लेकिन देरी होने पर संबंधित पक्ष प्रार्थना पत्र जमा करें। राज्य सरकार व संबंधित विभागों को भी निर्देश दिए कि आगामी सुनवाई तक सभी आदेश अनुपालन की स्थिति की रिपोर्ट प्रस्तुत करें।
उच्च न्यायालय का यह फैसला निष्कर्ष निकाले बिना चार सप्ताह तक संरक्षणात्मक रोक को बढ़ाता है और यह सुनिश्चित करता है कि पर्यावरण एवं समुदाय की सुरक्षा प्राथमिकता होगी। अगली सुनवाई छह हफ्ते बाद निर्धारित की गई है। (High Court Stayed Ban on Kllegal mining in Kanda)
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डॉ.नवीन जोशी, पिछले 20 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय, ‘कुमाऊँ विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में पीएचडी की डिग्री प्राप्त पहले और वर्ष 2015 से उत्तराखंड सरकार से मान्यता प्राप्त पत्रकार हैं। 15 लाख से अधिक नए उपयोक्ताओं के द्वारा 150 मिलियन यानी 1.5 करोड़ से अधिक बार पढी गई आपकी अपनी पसंदीदा व भरोसेमंद समाचार वेबसाइट ‘नवीन समाचार’ के संपादक हैं, साथ ही राष्ट्रीय सहारा, हिन्दुस्थान समाचार आदि समाचार पत्र एवं समाचार एजेंसियों से भी जुड़े हैं। देश के पत्रकारों के सबसे बड़े संगठन ‘नेशनल यूनियन ऑफ जर्नलिस्ट्स (इंडिया) उत्तराखंड’ के उत्तराखंड प्रदेश के प्रदेश महामंत्री भी हैं और उत्तराखंड के मान्यता प्राप्त राज्य आंदोलनकारी भी हैं। डॉ. जोशी के बारे में विस्तार से पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करें।
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